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शिवसैनिकों की गुंडई के बाद BJP सांसद ने ट्वीट किया उद्धव का कार्टून, पूर्व नौसेना अधिकारी पर हमले में 6 गिरफ्तार

व्हाट्सएप पर एक कार्टून फॉरवर्ड करने के कारण शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने एक रिटायर्ड नौसेना अधिकारी की पिटाई की थी। अब इस कार्टून को भाजपा सांसद राजीव चंद्रशेखर ने शेयर किया है। कार्टून में शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को सोनिया गाँधी और शरद पवार के सामने नतमस्तक दिखाया गया है। सोशल मीडिया पर ये कार्टून खासा वायरल हो रहा है।

भाजपा के राज्यसभा सांसद राजीव चंद्रशेखर ने उद्धव ठाकरे को महिलाओं को बुली करने वाला, नौसेना अधिकारी की पिटाई करने वाला और बेशर्म मौकापरस्त करार देते हुए कहा कि उन्होंने इस कार्टून को एन्जॉय किया है और लोग इसे रीट्वीट करें, ताकि बाकी लोग भी इसके मजे ले सकें। साथ ही दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी इस कार्टून को शेयर किया।

ऐसे में जिस कार्टून को दबाने के लिए सेना के कार्यकर्ता गुंडई पर उतर आए थे, उसे अब करोड़ों लोग हर मिनट सोशल मीडिया पर देख रहे हैं। इस कार्टून में लिखा हुआ है कि आज की तारीख में इससे बेहतर कार्टून नहीं हो सकता है। साथ ही इसमें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे कमरे की दीवार पर लगी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार की तस्वीरों के के सामने नतमस्तक दिख रहे हैं। साथ ही सोनिया की तस्वीर के नीचे ‘मातोश्री’ और पवार की तस्वीर के नीचे ‘पितोश्री’ लिखा हुआ है। बता दें कि ठाकरे परिवार के आवास का नाम ‘मातोश्री’ ही है।

दूसरी ओर शिवसेना कार्यकर्ताओं द्वारा रिटायर्ड नौसेना अधिकारी की पिटाई किए जाने के मामले में मुंबई पुलिस ने अब तक 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पूर्व नौसेना अधिकारी मदन शर्मा का ‘गुनाह’ बस इतना था कि उन्होंने इस कार्टून को फॉरवर्ड किया था। मदन शर्मा ने बताया कि 8-10 लोग उन्हें पीटने के लिए आए थे। साथ ही इससे पहले उन्हें शिवसेना कार्यकर्ताओं ने धमकी भरे कॉल्स भी किए थे।

कांदिवली से भाजपा विधायक ने बताया था कि स्थानीय ‘शाखा प्रमुख’ ने पूर्व नौसेना अधिकारी को संपर्क किया और उन्हें उनकी बिल्डिंग से नीचे आने को बोला। जैसे ही वो अपनी बिल्डिंग से नीचे उतरे, करीब 8 लोगों ने उन्हें सिर्फ़ इसलिए मारना शुरू कर दिया क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर उद्धव ठाकरे का कार्टून फॉरवर्ड किया था। इस हमले में पूर्व नेवी अधिकारी की आँख बुरी तरह जख्मी हो गई थी। 

रिया चक्रवर्ती ने लिए सारा, रकुल और सिमोन के नाम, NCB की रडार पर बॉलीवुड का ड्रग्स नेटवर्क: रिपोर्ट्स

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद चल रही नारकोटिक्स कण्ट्रोल ब्यूरो (NCB) की जाँच में बड़ा खुलासा हुआ है। अब ड्रग्स नेटवर्क में बॉलीवुड अभिनेत्रियों सारा अली खान और रकुल प्रीत सिंह का नाम सामने आया है। साथ ही फैशन डिजाइनर सिमोन खंबाटा का नाम भी इसमें सामने आया है। सिमोन खंबाटा बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह की बचपन की दोस्त हैं। इसके साथ ही बॉलीवुड के कई सेलेब्स NCB के रडार पर आ गए हैं।

‘टाइम्स नाउ’ की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि रिया चक्रवर्ती ने इन तीनों सेलेब्स के नाम खास तौर पर लिए हैं। सारा अली खान का नाम सुशांत सिंह राजपूत के साथ भी जुड़ा था और दोनों ने ‘केदारनाथ’ फिल्म में साथ काम भी किया था। सारा कभी-कभार सुशांत के फ्लैट पर भी आती-जाती थीं। साथ ही दोनों छुट्टी मनाने विदेश भी गए थे। रिया चक्रवर्ती ने पहले ड्रग्स लेने की बात स्वीकार नहीं की थी, लेकिन बाद में उन्होंने इसे स्वीकार किया।

रिया ने NCB के समक्ष सारा, राकुल और सिमोन सहित बॉलीवुड के कई अन्य सेलेब्स के नाम भी लिए हैं, जो ड्रग्स नेटवर्क में जुड़े हुए हैं। बताया गया है कि बॉलीवुड के 25 A-लिस्टर हस्तियों के नाम इस नेटवर्क में सामने आए हैं, जिनसे पूछताछ हो सकती है। साथ ही केंद्रीय एजेंसियाँ बॉलीवुड में डी-कंपनी की फंडिंग के एंगल से भी जाँच कर रही है। एजेंसियों की नजर एक ऐसे फिल्म निर्देशक पर भी है, जो इन एजेंसियों और सरकार की खासी आलोचना करते रहे हैं।

यह बात भी सामने आई है कि बॉलीवुड में कुछ बड़े नाम नए आउटसाइडर्स को जम कर मौका तो देते हैं लेकिन साथ ही उन्हें ड्रग्स का एडिक्टेड भी बना देते हैं। बॉलीवुड में नए लोगों को मौका देकर उन्हें ड्रग्स का आदी बनाने और दाऊद की फंडिंग NCB सहित अन्य एजेंसियों की जाँच का मुख्य एंगल है। फ़िलहाल रिया द्वारा NCB के समक्ष ड्रग्स मामले में सारा का नाम लेने से चर्चा का बाजार गर्म है।

हाल ही में ‘सिंघम’ और ‘गोलमाल’ सीरीज के फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी ने कहा था कि अमृता सिंह और सैफ अली खान की बेटी का अकेले चल कर उनके दफ्तर में आना और डायरेक्टर के सामने बैठ कर हाथ जोड़ के कहना कि ‘मुझे काम दे दो प्लीज’, इससे उन्हें रोना आ गया। बकौल रोहित शेट्टी, इसके बाद उन्होंने सारा अली खान से कहा कि तू पिक्चर कर ले। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी खासी आलोचना हुई थी।

देखले दरभंगा, चिन्हले चपरासी: नाम वाले गुलाम किनारे, ‘नामदार’ के वफादारों को प्रमोशन से कॉन्ग्रेस का कितना भला?

अमेरिका के राष्ट्रपति रहे फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट ने कहा था

राजनीति में कुछ भी अचानक नहीं होता है। यदि ऐसा दिखता है तो शर्तिया उसकी योजना ही इस तरह बनाई गई होगी

ठीक इसी तरह 24 अगस्त 2020 को कॉन्ग्रेस कार्यसमिति की बैठक से पहले अप्रत्याशित तौर उभरा ‘लेटर विवाद‘ 11 सितंबर को एक नए पड़ाव पर पहुॅंचा। व्यापक फेरबदल के नाम पर जिस तरह ओल्ड गार्ड को किनारे कर कॉन्ग्रेस ने अपने युवराज के वफादारों को भाव दिया है, वह उस यो​जना का हिस्सा है जो अध्यक्ष पद पर राहुल गॉंधी की दोबारा ताजपोशी से पूरी होनी है।

माना जाता है कि नए साल की शुरुआत में पंजाब या छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमिटी का सत्र होगा। इसमें राहुल गॉंधी दोबारा अध्यक्ष चुने जाएँगे। उससे पहले सोनिया गॉंधी ने फेरबदल कर उन नेताओं के पर कतर दिए हैं, जिनसे राहुल अपने पहले कार्यकाल में भी सहज नहीं थे।

इससे यह भी जाहिर है कि कॉन्ग्रेस को गॉंधी परिवार से मुक्ति नहीं मिलने वाली है। लेकिन क्या इसके कुछ जमीनी असर भी होंगे, क्योंकि 2019 के आम चुनावों में करारी शिकस्त के बाद जब राहुल गॉंधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था और मान-मनौव्वल के बाद भी इसे कबूल नहीं किया था, तभी से माना जा रहा था कि वे देर-सबेर फिर इस पद पर लौटेंगे। सवाल था कि यह कब होगा? कैसे होगा? ओल्ड गार्ड कैसे किनारे किए होंगे?

कॉन्ग्रेस के 23 नेताओं ने हाल में सोनिया गॉंधी को चिट्ठी लिखी और फुलटाइम असरदार नेतृत्व की मॉंग की थी। 24 अगस्त को कॉन्ग्रेस कार्यसमिति की बैठक में इन नेताओं की मंशा पर सवाल उठाए गए। तेवर दिखाकर गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल ढीले पड़ गए। 6 महीने के लिए फिर से सोनिया गॉंधी कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष चुन ली गईं।

11 सितंबर को पार्टी संगठन में बड़ा फेरदबल करते हुए सोनिया ने जिन नामों को किनारे लगाया है, उनमें पत्र लिखने वाले 23 नेताओं में शामिल रहे गुलाम नबी आजाद प्रमुख हैं। आजाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे हैं। फिलहाल राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं। उनकी महासचिव पद से छुट्टी कर यह संकेत भी दे दिया गया है कि अगले साल उच्च सदन में कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें वापसी का मौका नहीं दिया जाएगा। उनसे हरियाणा का प्रभार भी ले लिया गया है, जहॉं के एक वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी पत्र लिखने वालों में थे। हालॉंकि कॉन्ग्रेस कार्यसमिति में उन्हें रखा गया। इसी तरह आनंद शर्मा को भी वर्किंग कमेटी में ही समेट दिया गया। कपिल सिब्बल का भी कद छॉंट दिया गया है।

आजाद के अलावा मोतीलाल वोरा, अंबिका सोनी, मल्लिकार्जुन खड़गे और लुइजिन्हो फैलेरियो को भी महासचिव पद से हटाया गया है। ये सभी परिवार के पुराने वफादार हैं। इनको उम्र की वजह से मुक्त किया गया है।

दूसरी तरफ पत्र लिखने वाले नेताओं में से जो राहुल की पसंद थे उन्हें प्रमोशन दिया गया है। मसलन, जितिन प्रसाद। उन्हें बीते साल लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी छोड़ने से रोका गया था। चिट्ठी प्रकरण के बाद यूपी के कॉन्ग्रेस नेताओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। बावजूद इसके उन्हें पश्चिम बंगाल जैसे राज्य का प्रभार दिया गया है, जहॉं अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।

प्रमोशन पाने वालों में मधुसूदन मिस्त्री भी हैं। केंद्रीय चुनाव समिति का अध्यक्ष बना उनका कद बढ़ा दिया गया है। मिस्त्री 2012 के उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और 2014 के लोकसभा चुनाव में भी अहम भूमिका में थे। लेकिन, ओल्ड गार्ड के दबावों की व​जह से राहुल को उन्हें किनारे करना पड़ा था। इसी तरह राहुल के वफादार माने जाने वाले मनकीम टैगोर को तेलंगाना का प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है। इसके अलावा उनके करीबियों दिनेश गुंडूराव, मणिकम और एच के पाटिल जैसे नेताओं का कद भी बढ़ा है। शक्तिकांत गोहिल और राजीव साटव जैसे उनके चहेते राज्‍यों के प्रभारी बने हुए हैं।

इन सबके बीच रणदीप सिंह सुरजेवाला का प्रमोशन हैरान करने वाला है। उन्हें उस 6 सदस्यीय विशेष समिति में रखा गया है जो पार्टी संगठन और कामकाज से जुड़े मामलों में सोनिया गॉंधी का सहयोग करेगी। पार्टी में बदलाव और आगे का रास्ता तय करने की जिम्मेदारी भी इसी कमेटी की होगी। इस कमिटी में सुरजेवाला के अलावा एके एंटनी, अहमद पटेल, अंबिका सोनी, केसी वेणुगोपाल, मुकुल वासनिक भी हैं। इन सभी की परिवार के प्रति वफादारी संदेह से परे मानी जाती है।

राहुल गॉंधी की निजी पसंद माने जाने वाले सुरजेवाला हरियाणा विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद पार्टी संगठन में सीढ़ियॉं चढ़ते जा रहे हैं। मुख्य प्रवक्ता के बाद, पार्टी महासचिव, वर्किंग कमेटी के सदस्य, अध्यक्ष को परामर्श देने वाली समिति के सदस्य और कर्नाटक का प्रभार भी। एक साथ कॉन्ग्रेस में इतना कुछ पाने वाले वे अकेले नेता हैं।

इस पूरी कवायद में दो चीजें और महत्वपूर्ण हैं। राजस्थान में पहले से ही सारे पद से बेदखल कर दिए गए सचिन पायलट को कोई भूमिका केंद्रीय संगठन में भी नहीं दी गई है। वहीं किसी जमाने में राहुल के राजनीतिक गुरु रहे दिग्विजय सिंह की कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी में दो साल बाद वापसी हुई है।

अमूमन किसी राजनीतिक दल में इतने व्यापक फेरबदल का असर उसकी कार्यसंस्कृति में बड़े बदलाव के तौर पर दिखता है। पर कॉन्ग्रेस के मामले में शायद ही यह हो। असल में जो भी नाम आगे बढ़ाए गए हैं, वे पहले भी राहुल के नेतृत्व में अलग-अलग वक्त पर बड़ी जिम्मेदारी सॅंभाल चुके हैं। पर राहुल गॉंधी के चुके हुए नेतृत्व की तरह ये भी नाकाम ही रहे हैं। इनमें से ज्यादातर नेताओं का जनाधार नहीं है। वे भी जमीन से उसी तरह कटे हैं, जैसे राहुल गॉंधी की स्टाइल आफ पॉलिटिक्स है। यह पहले से तय था कि राहुल के प्रत्यक्ष तौर पर मुख्य भूमिका में आने की पटकथा जब आगे बढ़ेगी तो इनका कद बढ़ेगा।

सोनिया ने उनकी ताजपोशी से पहले इसे अंजाम देकर पार्टी में ओल्ड गार्ड बनाम युवा नेतृत्व के बीच संघर्ष को खत्म कर दिया है। जिन नेताओं को किनारे किया गया है वे भी जनाधार विहीन ही हैं। यदि वे बागी रुख दिखाते भी हैं तो राहुल के दोबारा अध्यक्ष बनने से पहले उनके विरोध की हवा निकल चुकी होगी। यानी, यह सब कुछ पार्टी की जगह परिवार के भविष्य को ध्यान में रखकर गया है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था कि ‘राजनीति खेल नहीं, बल्कि एक गंभीर काम है’। इसका एहसास करने में कॉन्ग्रेस जितनी देर करेगी, उसके फिर से खड़ी होने की संभावनाएँ उतनी ही दम तोड़ती जाएगी। फिलहाल वह जिस तरह आगे बढ़ती दिख रही है, उससे तो यही लगता है कि उसके लिए सियासत पोगो के कार्यक्रमों जैसी है।

अमरनाथ को ‘बर्फ का टुकड़ा’ बताने वाले स्वामी अग्निवेश का निधन, अन्ना आंदोलन की ‘सेटिंग’ वाला वीडियो भी हुआ था वायरल

आर्य समाज के निलंबित नेता और हरियाणा के पूर्व विधायक स्वामी अग्निवेश ने शुक्रवार (11 सितंबर, 2020) को नई दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बायिलरी साइंसेज (ILBS) में अंतिम साँस ली। 80 वर्षीय अग्निवेश लिवर सिरोसिस से पीड़ित थे।

मल्टी ऑर्गन फेल्योर के कारण वे मंगलवार से अस्पताल में भर्ती थे और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। अस्पताल की ओर से बताया गया कि स्वामी अग्निवेश को शुक्रवार शाम करीब छह बजे दिल का दौरा पड़ा। अस्पताल ने अपने बयान में कहा, “11 सितंबर को उनकी हालत गंभीर हो गई और शाम 6 बजे कार्डियक अरेस्ट हुआ। उन्हें बचाने की भरपूर कोशिश की गई, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। उन्होंने शाम 6.30 बजे अंतिम साँस ली।”

80 वर्षीय राजनीतिक कार्यकर्ता हरियाणा में मंत्री भी रहे थे। उन्होंने 1970 में आर्य सभा नाम की राजनीतिक पार्टी बनाई थी। वह विभिन्न सामाजिक अभियानों से भी जुड़े थे। उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ रैली की और महिलाओं की आज़ादी के लिए संघर्ष किया। वह 2011 में अन्ना हजारे के इंडिया अगेंस्ट करप्शन अभियान से भी जुड़े थे, जो जन लोकपाल बिल के इम्पलीमेंटेशन की माँग पर केंद्रित था।

हालाँकि, एक वीडियो सामने आने के बाद अन्ना आंदोलन में अपनी भूमिका को लेकर वे विवादों में भी रहे थे। इस वीडियो में वे अन्ना हजारे के आंदोलन को समाप्त करने की योजना पर उस समय यूपीए सरकार में मंत्री रहे कपिल सिब्बल से चर्चा कर रहे थे।

स्वामी अग्निवेश ने एक बार हिंदुओं के तीर्थ स्थलों को अंधविश्वास और बेकार बताया था। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में हिंदुओं के देवताओं का जिक्र किया था। 2011 में अमरनाथ के शिवलिंग को उन्होंने बर्फ का टुकड़ा बता दिया था।

स्वामी अग्निवेश को नक्सल शांति वार्ता और कश्मीरियों अलगावादियों का प्रचारक भी कहा जाता था। उन्होंने न केवल मनमोहन सिंह को संबोधित करते हुए माओवादियों के साथ शांति वार्ता की माँग की थी, बल्कि वह यासीन मलिक के साथ जम्मू-कश्मीर में एक प्रदर्शन के दौरान भी दिखाई दिए थे।

इसके अलावा स्वामी अग्निवेश ने उस 30 घंटे की भूख हड़ताल का भी समर्थन किया था जिसमें उन कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के खिलाफ़ माँग थी, जिन्हें कश्मीर के कट्टरपंथी जिहादियों ने जबरन वहाँ से भागने पर मजबूर कर दिया था।

चीनी प्रोपेगेंडा को राहुल गाँधी ने बढ़ाया आगे, पूछा- जवानों और अधिकारियों को क्यों मिलता है अलग-अलग खाना

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी ने आज (सितंबर 11, 2020) डिफेंस पैनल मीट में भारतीय जवानों को पहुँचाए जा रहे राशन की सप्लाई पर सवाल पूछा। रक्षा मामले पर संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्षता कर रहे भाजपा नेता जुएल उरांव से कॉन्ग्रेस नेता ने पूछा कि आखिर सीमाओं पर तैनात जवानों और अधिकारियों के भोजन में अंतर क्यों है?

इस सवाल के बाद न्यूज 18 की पत्रकार पल्लवी घोष ने इस मामले को सोशल मीडिया पर उठाया। उन्होंने बताया कि राहुल गाँधी ने संसदीय समिति की बैठक में जवानों और अधिकारियों के खाने के बीच हो रहे फर्क का मुद्दा उठाया है। 

गौर करने वाली बात यह है कि भले राहुल गाँधी लोकसभा की संसदीय समिति के सदस्य हैं, लेकिन यह पहली बार है कि वह रक्षा मामले पर किसी बैठक में शामिल हुए हों। इससे पहले समिति की पिछली 11 बैठकों से वे दूर रहे हैं और फिर भी मोदी सरकार को रक्षा से संबंधित मामलों जैसे राफेल से लेकर LAC पर घेरते रहे। मगर, आज राहुल गाँधी ने बैठक में जवानों के खाने के बारे में पूछा। 

हैरानी की बात ये है कि जवानों के खाने की चिंता राहुल गाँधी को ठीक उसे समय सता रही है, जब चीन के सरकारी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के मुख्य संपादक ने ट्विटर पर भारत को इसी मुद्दे के ऊपर घेरना चाहा है। जी हाँ, हाल में ग्लोबल टाइम्स के एडिटर इन चीफ ने भारतीय सेना को मिल रहे खाने को ‘ठंडा डिब्बाबंद खाना (Cold canned)’ कहकर घेरा था। उसने कहा था कि वह लोग अपने सीमा पर तैनात जवानों को गर्म खाना देते हैं। लेकिन भारतीय सेना को Cold canned food मिलता है।

चीनी सेना को पहुँचाए जाने वाले खाने की वीडियो शेयर करते हुए ग्लोबल टाइम्स के मुख्य संपादक हू शिजिन ने कहा था, “इन ड्रोन के साथ, सीमा पर तैनात पीएलए सैनिक पठार पर पहुँचते ही गर्म भोजन का आनंद ले सकते हैं। आस-पास के भारतीय सैनिकों के प्रति कुछ सहानुभूति है जो केवल ठंडा डिब्बाबंद खाना खा सकते हैं और कड़ाके की ठंड में उन्हें कोविड-19 के संभावित प्रसार को झेलना पड़ता है।”

मोदी सरकार को घेरने के लिए चीन ने किया कॉन्ग्रेस के बयानों का इस्तेमाल

ग्लोबल टाइम्स की इस कोशिश के बाद अब राहुल गाँधी को चीन का प्रोपेगेंडा आगे बढ़ाते पाया गया। हालाँकि यह पहली बार नहीं है जब चीन के एजेंडे को चलाने के लिए कॉन्ग्रेस मुख्य भूमिका में आई हो। इससे पहले भी चीन ने मोदी सरकार के ख़िलाफ़ टिप्पणी करने के लिए कॉन्ग्रेस के आरोपों को ही आधार बनाया था।

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा था कि मोदी सरकार देश में अपनी विदेश नीति के चलते मुख्य विपक्षी पार्टी से भारी दबाव का सामना कर रही है और कॉन्ग्रेस बीजेपी को सत्ता से हटाने का इंतज़ार कर रही है

चीन और कॉन्ग्रेस के गुप्त समझौतों का खुलासा

यहाँ बता दें कि जून महीने में सीमा विवाद शुरू होने के बाद कॉन्ग्रेस और चीन के बीच हुए कई गुप्त समझौतों का खुलासा हुआ था। इनमें मालूम चला था कि 7 अगस्त 2008 को सोनिया गाँधी की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच एक समझौता हुआ था।

खास बात यह थी कि उस समझौता ज्ञापन को तत्कालीन कॉन्ग्रेस पार्टी के मुख्य सचिव राहुल गाँधी ने सोनिया गाँधी की उपस्थिति में साइन किया था। चीन की ओर से तब वहाँ शी जिनपिंग मौजूद थे। इस समझौता ज्ञापन ने दोनों पक्षों को महत्वपूर्ण द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर एक-दूसरे से परामर्श करने का अवसर प्रदान किया था। इसके बाद डोकलाम विवाद के बीच में भी राहुल गाँधी के चीनी अधिकारियों से मिलने की बात सामने आई थी।

बनारस में ‘चीरहरण’ के पोस्टर: कंगना द्रौपदी, मोदी कृष्ण, उद्धव-संजय कौरव

कंगना रनौत और महाराष्ट्र सरकार के बीच जारी विवाद के बीच बॉलीवुड अभिनेत्री के एक समर्थक ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में उनको ‘द्रौपदी’ दर्शाते हुए पोस्टर लगाए है। इन पोस्टरों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और शिवसेना के सांसद संजय राउत को दुशासन तथा अन्य कौरव चरित्रों में दिखाया गया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान कृष्ण के रूप में चित्रित किया गया है।

पोस्टर वाराणसी के एक स्थानीय वकील श्रीपति मिश्रा द्वारा लगाए गए हैं। पोस्टरों को जायज ठहराते हुए मिश्रा ने कहा कि शिवसेना के साथ कंगना के झगड़े के मामले में महाराष्ट्र सरकार ‘कौरव सेना’ की तरह काम कर रही है। मिश्रा ने कहा इस पूरे मामले में चुप्पी साधने के लिया कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गाँधी पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल पीएम मोदी ही इस देश में महिलाओं की गरिमा की रक्षा कर सकते हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले महाराष्ट्र सरकार के साथ तनातनी के बीच अभिनेत्री कंगना रनौत ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी की चुप्पी पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि सोनिया गाँधी को महाराष्ट्र सरकार की ओर से किए गए दुर्व्यवहार के मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए था। रनौत ने कहा कि सोनिया गाँधी की ‘‘चुप्पी और बेरुखी’’ पर इतिहास फैसला करेगा।

अभिनेत्री ने ट्वीट करते हुए कहा था, ‘‘प्रिय एवं सम्मानीय कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, क्या एक महिला होने के नाते आपको महाराष्ट्र में आपकी सरकार द्वारा मेरे साथ किए गए व्यवहार पर गुस्सा नहीं आता? क्या आप अपनी सरकार से अनुरोध नहीं कर सकतीं, कि वह डॉ. आम्बेडकर के दिए संविधान के सिद्धांतों को बरकरार रखे?’’

इसके अलावा दूसरे ट्वीट में कंगना ने सोनिया गाँधी को सम्बोधित करते हुए लिखा, “आप विदेश में पली-बढ़ी हैं और भारत में आपका जीवन बीता। क्या आप नहीं समझती हैं कि एक महिला के जीवन में किस तरह के संघर्ष होते हैं। इतिहास आपको आपके इस मौन और भेद करने वाली मानसिकता के आधार पर तौलेगा। जब एक पूरी सरकार ने क़ानून-व्यवस्था का मज़ाक बना कर एक महिला के साथ ज़्यादती और उत्पीड़न किया था। मैं इस बात की उम्मीद करती हैं कि आप इस मुद्दे पर अपना चुप्पी तोड़ेंगी, क्योंकि कॉन्ग्रेस भी महाराष्ट्र सरकार का हिस्सा है।”

अरुणाचल प्रदेश से लापता हुए 5 युवकों को कल भारत को सौंपेगा चीन: किरेन रिजिजू

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने ट्वीट करते हुए बताया है कि अरुणाचल प्रदेश के पाँच युवकों को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी 12 सितंबर यानी कल भारत को सौंप देगा। ये युवक इस महीने की शुरुआत में लापता हो गए थे। उन्होंने कहा कि चीन की सेना ने भारतीय सेना से इस बात की पुष्टि की है।

रिजिजू ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा, “चीन की पीएलए ने भारतीय सेना से इस बात की पुष्टि की है कि वह अरुणाचल प्रदेश के युवकों को हमें सौंप देंगे। उन्हें शनिवार 12 सितंबर को किसी भी समय एक निर्धारित स्थान पर सौंपा जा सकता है।”

बता दें कि इससे पहले रिजिजू ने ही इस बात की जानकारी दी थी चीनी सेना ने इस बात को स्वीकार किया है कि पाँचों युवक उनकी तरफ मिले हैं। 8 सितंबर को किए अपने एक अन्य ट्वीट में केंद्रीय मंत्री ने कहा था, “चीन के पीएलए ने भारतीय सेना द्वारा भेजे गए हॉटलाइन संदेश का जवाब दिया है। उन्होंने पुष्टि की है कि अरुणाचल प्रदेश से लापता हुए युवक उनकी तरफ मिल गए हैं। हमारी अथॉरिटी में उन्हें सौंपने के तरीके पर काम किया जा रहा है।”

दरअसल, यह घटना तब सामने आई थी जब एक समूह के दो सदस्य जंगल में शिकार के लिए गए थे और लौटने पर उन्होंने उक्त पाँच युवकों के परिवार वालों को जानकारी दी थी कि युवकों को सेना के गश्ती क्षेत्र सेरा-7 से चीनी सैनिक ले गए हैं। यह स्थान नाचो से 12 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। कथित तौर पर अपहृत किए गए लोगों की पहचान टोच सिंगकम, प्रसाद रिंगलिंग, डोंगटू इबिया, तनु बेकर और नारगु डिरी के रूप में की गई है।

तेलंगाना में शरिया के हिसाब से कंगारू कोर्ट के गठन की कवायद? वक्फ बोर्ड को ज्यूडिशियल पावर देने की तैयारी

ऐसा लगता है कि तेलंगाना की सरकार शरिया कानून के हिसाब से कंगारू अदालतों के गठन का मन बना रही है। इसके लिए वक़्फ़ बोर्ड को ज्यूडिशियल पावर देने की तैयारी चल रही है। यह खुलासा ‘तेलंगाना टुडे’ की रिपोर्ट से हुआ है।

राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री कोप्पुला ईश्वर ने कहा कि वक्फ बोर्ड को न्यायिक दर्जा देने के मुद्दे पर जल्द ही मुख्यमंत्री द्वारा विचार किया जाएगा। AIMIM के अकबरुद्दीन ओवैसी द्वारा उठाए गए एक सवाल के जवाब में मंत्री ने आश्वासन दिया कि तेलंगाना सरकार राज्य भर में वक़्फ़ बोर्ड की संपत्तियों की सुरक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही वक़्फ की जमीनों के हुए दूसरे सर्वे के लिए गैजेट नोटिफिकेशन आने में देरी को लेकर भी उन्होंने बैठक बुलाने का आश्वासन दिया।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) सहित कट्टरपंथी मुस्लिम लंबे समय से भारत में शरिया अदालतें स्थापित करने की माँग कर रहे हैं। AIMPLB यहाँ तक यह दावा कर चुका है कि वह देश के प्रत्येक जिले में शरिया अदालतें स्थापित करना चाहता है।

तेलंगाना सरकार द्वारा शरिया अदालतों को वैध बनाने पर विचार करने का निर्णय खतरनाक परिणामों से भरा हुआ है। यह देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए आफत पैदा कर सकता है। अगर इसे तेलंगाना सरकार द्वारा अधिकृत किया गया तो इसका अन्य राज्य सरकारों द्वारा अनुसरण किया जा सकता है, जो मुस्लिम कट्टरपंथियों का समर्थन हासिल करने के लिए अपने राज्यों में इसी तरह के आदेश पारित करने के लिए इसका इस्तेमाल करेंगे।

गौरतलब है कि शरिया अदालतें न्यायिक अदालतों के अधिकार को कमज़ोर कर देंगी और देश में एक समानांतर न्यायिक प्रणाली के समान होगी। इतना ही नहीं यह मुल्लों को इस्लाम और सख्ती से स्थापित करने का अवसर भी प्रदान करेगा। जो लोग इसका विरोध करेंगे उन्हें इस्लामी कानून के हिसाब से दंडित करने का अधिकार भी इन्हें मिल जाएगा। इसके जरिए मुल्ले इस्लाम के मध्ययुगीन कानून को फिर से लागू करने का दबाव भी बनाएँगे। जिसके परिणामस्वरूप राज्य में न्यायिक व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो जाएगी।

शिवसेना के ‘गुंडों’ ने पूर्व नेवी अधिकारी को पीटा: उद्धव का कार्टून किया था फॉरवर्ड, बाल ठाकरे खुद बनाते थे कार्टून

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का कार्टून सोशल मीडिया में फॉरवर्ड करने पर मुंबई में शिवसेना कार्यकर्ताओं ने सेवानिवृत्त नेवी ऑफिसर मदन शर्मा पर हमला बोला। इस बात की जानकारी भाजपा विधायक अतुल भटखल्कर ने शुक्रवार (सितंबर 11, 2020) को घटना का वीडियो साझा करते हुए दी। भाजपा नेता ने बताया कि शिवसेना के 6-7 ‘गुंडों’ ने पूर्व नेवी अधिकारी मदन शर्मा पर हमला किया।

कांदिवली से भाजपा विधायक ने टाइम्स नाऊ से बात करते हुए कहा कि स्थानीय ‘शाखा प्रमुख’ ने पूर्व नेवी अधिकारी को संपर्क किया और उन्हें उनकी बिल्डिंग से नीचे आने को बोला। जैसे ही वो अपनी बिल्डिंग से नीचे उतरे, करीब 8 लोगों ने उन्हें सिर्फ़ इसलिए मारना शुरू कर दिया क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर उद्धव ठाकरे का कार्टून व्हॉट्सएप पर फॉरवर्ड किया था।

इस हमले में पूर्व नेवी अधिकारी की आँख बुरी तरह जख्मी हो गई। उसमें पड़ा लाल निशान तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है। भाजपा विधायक ने कहा, “मैं महाराष्ट्र सीएम, जो शिवसेना के प्रमुख हैं, उनसे कहना चाहता हूँ कि महाराष्ट्र के नागरिक उनकी गुंडागर्दी से डरते नहीं हैं और किसी कीमत पर वह शांत नहीं रहेंगे।”

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व नेवी अधिकारी की बेटी ने उनसे बात करते हुए बताया कि उनके पिता को व्हॉट्सएप पर एक मैसेज मिला था जिसे उन्होंने आगे फॉरवर्ड कर दिया। इसके बाद से ही उन्हें कई फोन आने लगे और कॉल पर नीचे बुलाया जाने लगा। पूर्व अधिकारी की बेटी के मुताबिक, जब उनके पिता उतर कर नीचे गए तो उन पर हमला हुआ।

पीड़ित पूर्व नौसेना अधिकारी ने भी मीडिया को बताया कि उन्हें मैसेज फॉरवर्ड करने के बाद से ही कॉल आ रहे थे और बार-बार उनसे नीचे उतर कर आने को कहा जा रहा था। उनके मुताबिक, जैसे ही वो नीचे उतरे, लोगों ने उन्हें मारना शुरू कर दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि बाद में पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने आई थी। मगर वह अपने घर से बाहर ही नहीं निकले। उन्होंने कहा कि अब इस मामले में उनकी मदद भाजपा विधायक अतुल भटखल्कर और रानी द्विवेदी कर रहे हैं। वरना वो जेल में होते।

रिपब्लिक टीवी की खबर के अनुसार, पूर्व अधिकारी का इलाज इस समय शताब्दी अस्पातल में चल रहा है। महाअघाड़ी सरकार के रवैए से नाराज होकर और असंतुष्टि जताते हुए पूर्व नेवी अधिकारी कहते हैं कि राज्य में में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाना चाहिए।

बता दें कि इस मामले के संबंध में पूर्व अधिकारी की बेटी ने संत नगर पुलिस थाने में अपनी शिकायत दर्ज करवाई है (कुछ रिपोर्ट्स में कांदिवली थाना बताया जा रहा है)। उन्होंने उद्धव ठाकरे पर गुंडों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। इसके अलावा यह भी कहा है कि इतना सब के बावजूद पुलिस उनके पिता को गिरफ्तार करना चाहती है।

उल्लेखनीय है कि यह मामला सोशल मीडिया पर आने के बाद एक बार फिर से शिवसेना पर ऊँगलियाँ उठनी शुरू हो गई है। देवांग दवे ने लिखा, “सेवानिवृत्त नेवी अधिकारी मदन शर्मा को पीटना, जिन्होंने देश की रक्षा में सालों साल सीमा पर गुजारे, सिर्फ़ शिवसेना की मानसिकता का परिचायक है।”

वहीं, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस घटना को बेहद दुखद और हैरान करने वाला बताया है। उन्होंने लिखा, “बेहद दुखद और हैरान करने वाली घटना। सेवानिवृत्त नेवी अधिकारी को बस इसलिए गुंडों ने पीटा क्योंकि उन्हें व्हॉट्सएप पर मैसेज फॉरवर्ड किया था। उद्धव ठाकरे कृपया ये गुंडाराज रोक दो। हम इन गुंडों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की माँग करते हैं।”

गौरतलब है कि आज शिवसैनिकों ने उद्धव ठाकरे का कार्टून फॉरवर्ड करने के नाम पर पूर्व नेवी अधिकारी को पीटा है। लेकिन उद्धव के पिता और शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे खुद कार्टूनिस्ट थे।

अपने पत्रकारों की रिहाई के लिए NHRC पहुॅंची रिपब्लिक, महाराष्ट्र पुलिस ने रिपोर्टिंग करते वक्त हिरासत में लिया था

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने अपने दो पत्रकारों की तत्काल रिहाई की मॉंग राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से शुक्रवार (11 सितंबर, 2020) को की। इससे पहले नेटवर्क ने महाराष्ट्र सरकार से अपने दोनों पत्रकारों को रिहा करने को कहा था।

रिपोर्ट के अनुसार, इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग करने गए रिपोर्टर अनुज कुमार, कैमरामैन यशपालजीत सिंह और ओला कैब ड्राइवर प्रदीप दिलीप धनावड़े को अवैध रूप से महाराष्ट्र पुलिस ने हिरासत में लिया था। इनको महाराष्ट्र पुलिस ने गैरकानूनी तरीके से तीन दिन से हिरासत में रखा हुआ है।

कथित तौर पर रायगढ़ के कर्जत में बने उद्धव ठाकरे की बिल्डिंग के सुरक्षा गार्ड से कुछ पूछताछ करने पर रिपब्लिक टीवी के पत्रकारों को महाराष्ट्र पुलिस द्वारा बिना परमिशन के भवन में घुसने के आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया था।

चैनल ने कहा है कि वे बॉम्बे हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटाएँगे, क्योंकि महाराष्ट्र पुलिस द्वारा अनुज से जबरन पूछताछ की जा रही है और उन्हें सूत्र का खुलासा करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

गौरतलब है इससे पहले रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के प्रमुख अर्नब गोस्वामी ने अपने पत्रकारों को तत्काल रिहा करने की माँग की करते हुए केबल ऑपरेटर्स को शिवसेना की ओर से दी गई धमकी पर भी चेताया था।

अर्नब गोस्वामी ने कहा था, “उद्धव ठाकरे, मेरे पत्रकारों को रिहा करो। आपने कानून तोड़ा है और हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। आपने संविधान नहीं लिखा और आपको इसे अपने हिसाब से चलाने का कोई अधिकार नहीं है।” रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ ने कहा था कि अगर उद्धव ठाकरे पत्रकारों को रिहा नहीं करते हैं, तो वह जनता और देश की सर्वोच्च अदालत में उनसे लड़ेंगे।