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‘पेशावर हमारी राजधानी थी’ – Pak को बॉर्डर पर घेर रहा अफगानिस्तान, भारत को बताया दरियादिल

भात और चीन में चल रहे तनाव के बीच पाकिस्तान भी भारत के विरोध में माहौल बनाने का प्रयास कर रहा है लेकिन अब उसकी चाल सफल नहीं हो पा रही। इसी बीच अफगानिस्तान ने भारत के साथ अपने संबंधों की सराहना की है और पाकिस्तान को भी लताड़ लगाई है। अफगानिस्तान रणनीतिक रूप से भारत और पाकिस्तान, दोनों के लिए ही ज़रूरी है। भारत इस बात को बखूबी समझता है और इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।

लेकिन, बदलते कूटनीतिक घटनाक्रमों के बीच अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच दूरियाँ लगातार बढ़ती ही जा रही है। अफगानिस्तान के उप-राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने कहा है कि उनके मुल्क का कोई भी नेता डुरंड लाइन को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई ऐसा करता है तो जीवन भर उसकी निंदा होगी ही, मृत्यु के बाद भी लोग उसकी आलोचना करेंगे। उन्होंने कहा कि ये एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर चर्चा होनी चाहिए, जिसका समाधान निकलना चाहिए।

बकौल अमरुल्लाह सालेह, हम अगर ये उम्मीद करते हैं कि ये मुफ्त में ही मिल जाएगा तो ये वास्तविकता से परे है। उन्होंने याद दिलाया कि कभी पेशावर अफगानिस्तान की राजधानी हुआ करता था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लगातार नकारने के बाद अब ये स्वीकार कर रहा है कि वो तालिबान का पोषण करता है। उन्होंने कहा कि ये स्पष्टता रिश्तों में कड़वाहट होने के बावजूद शांति प्रक्रिया का रास्ता बना सकती है। उन्होंने पाकिस्तान की फौज के अध्यक्ष जनरल बाजवा से बातचीत भी की।

अमेरिका के सैनिक धीरे-धीरे अफगानिस्तान से निकल रहे हैं और ऐसे में वहाँ शांति-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के ईरान दौरे में भी ये मुद्दा छाया रहा, जहाँ अफगानिस्तान की स्थिरता के लिए ‘रीजनल एप्रोच मॉडल’ अपनाने का प्रस्ताव बना। 2019 में ही भारत-अफगानिस्तान-ईरान ट्रेड कॉरिडोर का उद्घाटन किया गया था, जिसमें चाहबार पोर्ट की अहम भूमिका थी। इससे अन्य एशियाई देशों को भी फायदा हुआ।

वहीं हाल ही में अफगानिस्तान से एम्बेसडर बना कर नई दिल्ली भेजे गए फरीद मामुन्ज़डे ने भारत को दरियादिल पड़ोसी बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रिश्ते हैं, जिन्हें आगे बढ़ाने के लिए वो काम करेंगे ताकि दोनों देशों में शांति और स्थिरता बनी रहे। उन्होंने हिंदी में लिखा, “मैं हमारी दोस्ती को हमेशा निभाने की कामना करता हूँ।” दोनों देशों में एयर इंडिया और एरियाना के बीच ‘एयर बबल करार’ हुआ है।

जनरल विपिन रावत भी पाकिस्तान को चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान ने फिर दुस्साहस किया तो उसे भारी पड़ेगा। उन्होंने आशंका जताई कि उत्तरी सीमा पर जारी तनाव का फायदा पाकिस्तान उठाने की कोशिश कर सकता है लेकिन जवाबी कार्रवाई के लिए भारत पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि POK और तिब्बत में चीन का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसका भारत अध्ययन कर रहा है।

हाल ही में पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल के विदेश मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक भी की थी। चीन ने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि सीखते हुए अफगानिस्तान और नेपाल को भी कोरोना, आर्थिक गतिविधियों और आपसी संवाद को लेकर चीन के साथ ऐसी ही पहल करनी चाहिए। चीन के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान व चीन की साझा पहल की मिसाल दी थी। वो लगातार छोटे देशों को लुभाने में लगा हुआ है। 

महिला नक्सली के हाथ में बंदूक, धमकी भरे पोस्टर और राजनीतिक प्रश्रय: बंगाल में माओवादियों की वापसी और 4 घटनाएँ

माओवादी पिछले कई सालों से पश्चिम बंगाल में दहशत की वजह बने हुए हैं खासकर जंगलमहल क्षेत्र में। इस पूरे इलाके में पश्चिम मिदनापुर, पुरुलिया, झारग्राम और बाँकुड़ा जैसे जिले कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (माओवादी) का गढ़ बने हुए हैं। साल 2009 से 2011 के बीच माओवादी जंगलमहल में एक अलग क्षेत्र बनाने में काफी हद तक कामयाब रहे थे।

वामपंथ के चरमपंथी समूह और सुरक्षाबलों के बीच तब गोलीबारी का लंबा दौर चला था। इस घटना में कुल 350 आम नागरिकों ने अपनी जान गँवाई थी और 80 माओवादी नेताओं पर कार्रवाई हुई थी। इसे पश्चिम बंगाल के जंगली कॉरिडोर का सबसे भयानक और कठिन अभियान माना जाता है। इसमें लगभग 50 सुरक्षाबल शहीद भी हुए थे। मल्लौला कोटेश्वर राव उर्फ़ किशन जी की हत्या के बाद इस घरेलू आतंकवादी समूह का प्रभाव लगभग ख़त्म हो गया था। इसके बाद पूरे इलाके में माओवादी गतिविधियाँ काफी कम हो गई थी। 

ख़बरों की मानें तो ऐसा माना जाता है कि माओवादी झारखंड के सिंहभूम जिले में अपना कैम्प लगाते हैं। पीछे कुछ महीनों से माओवादी झारग्राम में काफी सक्रिय रहे हैं। पिछले कुछ समय में झारग्राम में ऐसी 4 घटनाएँ हुई हैं, जिनके आधार पर माओवादियों की मौजूदगी और सक्रियता का डर फिर से बढ़ रहा है। ऐसी जानकारियों के आधार पर राज्य प्रशासन और खुफ़िया एजेंसियों ने हालात नियंत्रण में करने के लिए अभियान शुरू कर दिया है। 

हाल ही में माओवादियों ने पश्चिम बंगाल के बेलपहाड़ी स्थित सिमुलपल इलाके में टंगी कुसुमग्राम में पर्यटकों के एक समूह के साथ डकैती की। खड़गपुर से आए पर्यटकों को मोबाइल समेत अपने पास लगभग हर चीज़ देनी पड़ी। क्योंकि वह पूरा क्षेत्र पर्यटन के लिए मशहूर था, इसलिए वहाँ आने वाले लोगों के बीच भय का माहौल बन गया है। माओवादियों की संख्या 6 थी, जिसमें 3 महिलाएँ थीं और उन सभी के पास बंदूकें थीं। उन्होंने दिन में ही पर्यटकों को रोका और उनके मोबाइल फोन छीने। इसके बाद वह पड़ोसी राज्य झारखंड की तरफ आगे बढ़ गए। 

साभार – संगबाद प्रतिदिन

झारग्राम के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार भारत राठौड़ ने इस घटना के बारे में अन्य जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हाल ही में पश्चिम बंगाल, झारग्राम जिले में बेलापहाड़ी के पास भूलाबेधा क्षेत्र में माओवादियों के 3 पोस्टर पाए गए थे। साल 2009 के दौरान जंगलमहल के आस-पास ऐसे पोस्टर का मिलना आम बात थी। इनके वापस नज़र आने का यही मतलब है कि माओवादी समूह दोबारा संगठित हो रहे हैं और किसी नई योजना पर काम कर रहे हैं। 

साभार – टाइम्स ऑफ़ इंडिया

एक पोस्टर में लिखा था ‘ठेकेदार सौरव सड़क का काम बंद करो।’ पोस्टर में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया का ज़िक्र था और उसमें ठेकेदार सौरव रॉय को धमकी दी गई थी। धमकी में ऐसा कहा गया था कि वह धरसा से पराड़ी के बीच 40 किलोमीटर की सड़क का काम बंद करे। हालाँकि सौरव रॉय को इस बात की जानकारी नहीं थी और वह अपने काम में लगातार जुटे हुए थे।

इसके कुछ समय बाद माओवादियों ने गैस डीलर बिद्युत दास पर जानलेवा हमला किया था। माओवादियों ने उनसे 2 लाख रुपए की माँग की थी, जिसे देने से उन्होंने इनकार कर दिया था। इसके बाद 28 अगस्त को माओवादियों ने उन पर और उनकी पत्नी पर रात के 9:30 बजे अंधाधुंध गोलियाँ चलाई थीं।

घटना झारग्राम जिले के बेलापहाड़ी स्थित पोछा पानी गाँव में हुई थी। जब माओवादियों ने पति-पत्नी पर गोली चलाई, तब वह छत पर मौजूद थे। जैसे ही उन्होंने गोलीबारी की आवाज़ सुनी, वह जान बचाने के लिए छत से कूद कर भागे। अँधेरे का फायदा उठाते हुए माओवादी मौके से भाग निकले। घटना पर एक पुलिस अधिकारी ने कहा था, “लगता है माओवादी फिर से इकट्ठा हो रहे हैं और दास जी की जान लेना चाहते हैं।”

साभार – इंडियन एक्सप्रेस

15 अगस्त के दौरान भी माओवादियों ने झारग्राम के भूलाभेदा इलाके के 2-3 गाँवों में पोस्टर्स लगाए थे। पोस्टर्स में लिखा था कि स्थानीय लोग 15 अगस्त को ‘काले दिवस’ के तौर पर मनाएँ। इस पोस्टर पर कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का ज़िक्र था। इस तरह के लगभग 10-12 हाथ से लिखे गए पोस्टर झारग्राम पुलिस ने बरामद किए थे।

इस पर पुलिस अधिकारी ने कहा था, “माओवादियों के पास फिलहाल किसी भी तरह की सेना नहीं बची है। साल 2011 में मल्लौला कोटेश्वर राव उर्फ़ किशन जी की मौत के बाद बहुत से माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। ऐसे पोस्टर पश्चिमी मिदनापुर में पिछले साल पाए गए थे।”

साभार – हिंदुस्तान टाइम्स

फिलहाल इस मामले में जाँच शुरू कर दी गई है लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस तरह की कई घटनाएँ सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि एक बार फिर राज्य में माओवादियों की सक्रियता स्पष्ट रूप से नज़र आ रही है।

हैरानी की बात यह है कि माओवादियों को प्रदेश सरकार से पूरा सहयोग भी मिल रहा है। ममता बनर्जी ने छात्रधर महतो को टीएमसी की प्रदेश कार्यकारिणी समिति में शामिल किया था। महतो 10 साल तक जेल में रह चुका है और माओवादी संगठनों के लिए काम भी करता था।     

बिहार: 19 साल की लड़की को जैनुल और हकीमा खातून ने जिंदा जलाया, गाँव छोड़कर भागे

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में संपत्ति को लेकर हुए विवाद में 19 वर्षीय एक युवती को जिंदा जला दिया गया है। युवती के चाचा-चाची पर ही उसे जिंदा जलाने के आरोप लगे हैं। ये दिल दहला देने वाला मामला सकरा पुलिस थाने के रामपुर बखरी गाँव का है। 

घटना शुक्रवार (सितंबर 4, 2020) की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, जमीन विवाद में 19 वर्षीय सुफियाना परवीन को जिंदा जला दिया गया। युवती को जिंदा जलाने के मामले में सकरा थाने में FIR दर्ज की गई। इसमें मृत युवती के चाचा मोहम्मद जैनुल आवेद्दीन, चाची मोनी परवीन उर्फ हकीमा खातून, मोहम्मद अंजार और मोहम्मद इश्तेखार को आरोपित किया गया है। घटना के बाद से सभी फरार हैं।

मृतका सुफियाना के छोटे भाई कुदरत अली ने टाइम्स ऑफ इंडिया से फोन पर बात करते हुए बताया कि उसकी बहन पड़ोस में समसूद जोहा के घर हैंडपंप पर नहाने के लिए गई थी। इसी दौरान उसकी चाची हकीमा और अन्य लोगों ने सुफियाना पर केरोसिन डालकर आग लगा दी। वारदात को अंजाम देने के बाद वो मौके से फरार हो गए। सुफियाना के चिल्लाने की आवाज आई लगी तो स्थानीय लोग मदद के लिए पहुँचे, लेकिन तब तक काफी देर हो गई और उसकी मौत हो गई।

इसके अलावा, कुदरत ने बताया कि मरने से पहले उसके पिता ने ज़ैनुल के नाम पर 10 धुर ज़मीन लिखी थी। कुदरत का कहना है कि ज़ैनुल अब उस ज़मीन के मालिकाना हक के अलावा 10 धुर अतिरिक्त भूमि का दावा करता है। इसी को लेकर उसने वारदात को अंजाम दिया।

मृतका की माँ हुस्न बानो उर्फ बोरिया खातून ने बताया कि उसके पति की मौत हो चुकी है। उसके पिता मुजीबुलहक किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते हैं। मृतका के नाना व माँ ने पुलिस को बताया कि पट्टीदार मोहम्मद जैनुल आबेदीन से काफी दिनों से उनका विवाद चल रहा है। कई बार जमीन हड़पने की नीयत से मारपीट कर हत्या करने की कोशिश की गई।

इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए दारोगा एसके झा ने बताया कि निरीक्षण के दौरान केरोसिन के दो खाली डब्बे मिले। दारोगा ने बताया कि जमीन विवाद में युवती को जिंदा जलाकर मारने का आरोप लगाते हुए मृतका की माँ ने आवेदन दिया है जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज कर पुलिस आरोपितों की धर-पकड़ के लिए छापेमारी करने में जुटी है।

योगी राज में गाँव लौटा फौजी का परिवार, अखिलेश के CM रहते परिवार के 5 लोगों की कर दी गई थी हत्या

परिवार के 5 लोगों की हत्या के बाद एक फौजी का परिवार उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित अपना गॉंव छोड़कर चला गया था। लेकिन योगी आदित्यनाथ की सरकार में कानून-व्यवस्था में सुधार के बाद यह परिवार 7 साल बाद फिर अपने गॉंव लौट आया है। गॉंव पहुॅंचकर पुलिस की मदद से उन्होंने अपना घर, जमीन और संपत्ति भी वापस पा ली है।

प्रवेश राठी सेना में जवान और अभी जयपुर में तैनाती है। मीडिया वालों से बात करते हुए उन्होंने कहा जब से योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की कमान सँभाली है तब से प्रदेश का माहौल बहुत बेहतर हुआ है। जिस तरह सरकार ख़ूँख़ार अपराधियों पर कार्रवाई कर रही है और उन्हें सज़ा सुनाई जा रही है, वह सराहनीय है। 

प्रदेश के तमाम जिलों में लोगों के बीच अपराध को लेकर भय कम हुआ है। इस देखकर मुझे लगा कि हालात पहले से बेहतर हैं और मेरी वापसी संभव है। इस दौरान बागपत के पुलिस अधीक्षक, आईजी मेरठ समेत कई अधिकारियों ने प्रदेश की क़ानून-व्यवस्था को लेकर आश्वासन भी दिया था।

दरअसल एक पुराने विवाद के चलते प्रवेश राठी के परिवार के 5 लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। मरने वालों में उनकी माता सरोज, पिता रामवीर, उनके भाई प्रवीण और संजीव शामिल थे। इसके अलावा भी उनके घर पर कई बार गोलीबारी की गई थी। हत्या का आरोप गाँव के ही प्रमोद गंगनोली और उसके परिवार वालों पर लगा था। प्रमोद गंगनौली पर एक लाख रुपए का इनाम भी रखा गया था। उसे हाल ही में गिरफ्तार किया गया है। 

इस घटना से भयभीत और आहत होकर फौजी के परिवार ने गाँव छोड़ दिया था। यह घटना साल 2013 में हुई थी जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। यह हत्याएँ उस वक्त हुई जब पुलिस की तरफ से सुरक्षा मिली हुई थी। वर्तमान सरकार के सत्ता में आने के बाद प्रवेश राठी का मनोबल बढ़ा और उन्होंने गाँव वापस लौटने का फैसला लिया।  

रविवार (6 सितंबर 2020) को पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में प्रवेश राठी ने अपने खेत की जुताई की। इसके अलावा पुलिस ने उन्हें अपना पैतृक गाँव स्थित घर भी वापस दिलाया। राठी ने कहा कि अब वह अपना गाँव छोड़ कर कहीं नहीं जाएँगे, क्योंकि अब प्रदेश में क़ानून-व्यवस्था पहले की तुलना में काफी बेहतर है। हम अपने गाँव में शांति से रह सकते हैं अब हमें किसी का डर नहीं है।  

राम मंदिर के प्रस्तावित डिजाइन के अंतिम नक्शे को मँजूरी, 1 लाख भक्तों के ठहरने की व्यवस्था

अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) से भव्य राम मंदिर का नक्शा पास होने के बाद से कार्य में तेजी देखी जा रही है। सबसे पहले मंदिर निर्माण के लिए नींव की खुदाई होनी है। नींव की खुदाई में प्रयोग होने वाली बड़ी मशीनें कानपुर से अयोध्या पहुँच चुकी है। 

राम मंदिर की आधारशिला के लिए धरातल से करीब 200 फीट नीचे 1200 खंभे स्थापित किए जाएँगे। इन पिलरों का निर्माण पत्थरों से होगा और इसमें लोहे का प्रयोग नहीं किया जाएगा। इन पिलरों पर अन्य स्तर की आधारशिला रखी जाएगी। प्रस्तावित राम मंदिर 360 फीट लंबा, 235 फीट चौड़ा और 161 फीट ऊँचा होगा। ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर की आधारशिला आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर बनाई जाएगी, ताकि इसे 1500 वर्षो तक और इसकी संरचना को 1000 वर्ष तक संरक्षित किया जा सके।

ट्रस्ट ने अयोध्या विकास प्राधिकरण को विकास शुल्क, रखरखाव शुल्क और श्रम उपकर के रूप में 2.11 करोड़ रुपए जमा किए हैं। अयोध्या विकास प्राधिकरण ने साइट पर धार्मिक/मेला मैदान, बाग, आध्यात्मिक मैदान, और पर्यटक निवास के रूप में मँजूरी दी है।

5 अगस्त को राम मंदिर भूमि पूजन के बाद ट्रस्ट ने स्वामित्व, साइट मानचित्र, डिजाइन, आदि से संबंधित कागजी कार्रवाई को पूरा करना शुरू कर दिया। 29 अगस्त को ट्रस्ट ने मंदिर का प्रस्तावित नक्शा प्रस्तुत किया। उन्होंने मंदिर से संबंधित 4,000 पृष्ठों के दस्तावेज भी अयोध्या विकास प्राधिकरण को सौंपे। इसमें 67 एकड़ में फैले परिसर की विस्तृत योजना थी। ट्रस्ट को पहले ही आग और बिजली विभागों के साथ ही मंदिर के लिए भूकंप प्रतिरोधी उपायों की मँजूरी मिल चुकी है।

अयोध्या में राम मंदिर हवाई पट्टी से 6.5 किलोमीटर दूर स्थित है, इसलिए यह भारतीय एयरपोर्ट प्राधिकरण द्वारा प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आएगा। बता दें कि नियमों के अनुसार,  यदि किसी हवाई अड्डे के निकट परिसर में किसी इमारत का निर्माण करना होता है, तो इसके लिए एयरपोर्ट के अधिकारियों से अनुमति लेनी होती है। इसी तरह, चूँकि मंदिर मणि पर्वत, कुबेर पर्वत और सुग्रीव पर्वत के निकट नहीं है, इसलिए ट्रस्ट को पुरातत्व विभाग से NOC लेने की आवश्यकता नहीं है।

ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल के अनुसार, मंदिर में 1 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए जगह होगी। मंदिर में अधिक भीड़ से बचने के लिए, तीन दिशाओं में चार द्वार होंगे। महंत सत्येंद्र दास ने रविवार एक्सप्रेस को दिए एक बयान में कहा कि मंदिर के प्रवेश द्वार पर आवश्यक मंदिरों के नाम वाले कई पत्थर लगाए जाएँगे। 

महंत ने कहा, “अतीत में, सभी मुख्य मंदिरों के प्रवेश द्वार और धार्मिक महत्व के स्थानों पर पत्थर लगाए गए थे। हमने अब तक करीब 85 ऐसे पत्थर पाए हैं। उनमें से तीन सुमित्रा भवन, सीता रसोई और राम जन्मभूमि के रूप में चिह्नित हैं। राम जन्मभूमि का पत्थर 100 मीटर से कम गर्भगृह के सबसे करीब है, और हमने इसे नहीं छुआ है। इसे हटाने से गर्भगृह का संपूर्ण रूप और अर्थ बदल जाएगा।”

5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राम मंदिर आंदोलन के नेताओं और संतों के बीच राम मंदिर भूमि पूजन हुआ। नवंबर 2019 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या में विवादित भूमि पर दशकों से चली आ रही लड़ाई को समाप्त करते हुए राम मंदिर निर्माण की अनुमति दे दी। मंदिर निर्माण के प्रबंधन के लिए फरवरी 2020 में भारत सरकार द्वारा एक ट्रस्ट का गठन किया गया था।

ड्रग सिंडिकेट का मेंबर है सुशांत का स्टाफ दीपेश, रिया ने कबूली ड्रग्स खरीदने की बात

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले ड्रग्स ऐंगल की जॉंच कर रही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रविवार को करीब छह घंटे रिया चकवर्ती से पूछताछ की। उसे सोमवार को भी ब्यूरो ने हाजिर होने को कहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार रिया ने ड्रग्स खरीदने की बात कबूल ली है।

इस मामले में एनसीबी रिया के भाई शौविक और सुशांत के हाउस मैनेजर सैमुएल मिरांडा को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। इनकी गिरफ्तारी के बाद ही रिया को तलब किया गया था। यह बात भी सामने आई है कि सुशांत का स्टाफ दीपेश सावंत एक ड्रग्स सिंडिकेट का मेंबर है।

एनसीबी के अधिकारी संदीप वानखेड़े ने कहा, “हमने रिया चक्रवर्ती का बयान रिकॉर्ड कर लिया है। रिया चक्रवर्ती आज लेट आई थीं, इसलिए पूछताछ पूरी नहीं हो पाई। कल भी पूछताछ जारी रहेगी।”

बता दें कि एनसीबी की पूछताछ में रिया ने कई बातें कबूल की है। रविवार (सितंबर 6, 2020) को मामले की मुख्य आरोपित रिया चक्रवर्ती ने नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की पूछताछ के दौरान कबूल किया है कि वह अपने भाई शौविक के माध्यम से ड्रग्स खरीदती थी। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रिया चक्रवर्ती ने एनसीबी अधिकारियों को बताया कि वह सैमुएल मिरांडा के बारे में जानती है जो 17 मार्च को ज़ैद से ड्रग्स खरीदने गया था। उसके कबूलनामे के मुताबिक, रिया को न केवल इस सौदे के बारे में पता था, बल्कि वह अपने भाई शौविक चक्रवर्ती के साथ ड्रग रैडर जैद के साथ कॉर्डिनेशन भी कर रही थी।

साथ ही रिया ने 15 मार्च की चैट की बात कबूल की। रिया ने स्वीकार किया कि 15 मार्च की चैट सही थी, जिसमें वह और शौविक ड्रग्स के बारे में बात कर रही थीं। रिया ने बताया कि वह अपने भाई शौविक के जरिए सुशांत के लिए ड्रग्स मँगवा रही थी।

एनसीबी की पूछताछ में रिया ने कबूल करते हुए कहा कि उसे मालूम था कि उसका भाई बासित से ड्रग्स खरीदता था। बासित, रिया के घर भी आता जाता था। ड्रग्स एंगल के खुलासे के बाद कई ड्रग पैडलर्स का नाम सामने आया है। इसके लेकर एनसीबी ने गहन जाँच-पड़ताल शुरू कर दी है। कई इलाकों में छापेमारी भी की है।

NCB ने इस मामले में गिरफ्तार दीपेश सावंत को लेकर बयान जारी करते हुए कहा है, “दीपेश सावंत के बयान और NCB द्वारा एकत्र किए गए डिजिटल सबूतों से यह साफ होता है कि दीपेश हाइ सोसायटी हस्तियों और ड्रग सप्लायर्स से जुड़े ड्रग सिंडिकेट का एक एक्टिव सदस्य है।” एनसीबी ने सुशांत के स्टाफ दीपेश सावंत को शनिवार (सितंबर 5, 2020) को गिरफ्तार किया था।

बता दें कि एनसीबी को मोबाइल फोन चैट रिकॉर्ड तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक डेटा हासिल हुआ था जिसमें प्रतिबंधित मादक पदार्थ की खरीद में रिया, सैमुएल मिरांडा, शौविक चक्रवर्ती, दीपेश सावंत आदि की संलिप्तता सामने आई थी। एनसीबी ने दीपेश सावंत के अलावा रिया चक्रवर्ती के भाई शौविक चक्रवर्ती और सुशांत सिंह राजपूत के हाउस मैनेजर रहे सैमुएल मिरांडा को गिरफ्तार किया था।

BJP कार्यकर्ता को TMC के गुंडों ने पीट-पीटकर मार डाला, बेटी से कहा- तेरा भी यही हाल करेंगे: परिजनों ने बताया रॉबिन के साथ क्या हुआ था

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा चरम पर पहुँच चुकी है। इसे सत्ताधारी दल का पूरा संरक्षण मिला है। इस तरह की एक घटना पश्चिम बंगाल के कलना स्थित पथर घाटा में हुई। यहाँ रॉबिन पॉल नाम के भाजपा कार्यकर्त्ता की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। 

मृतक के परिवार वालों का कहना है कि उनके घर के सामने मनरेगा के तहत काम हो रहा था। मनरेगा कर्मचारी घर के सामने मौजूद पेड़ काटने लगे तो रॉबिन ने इस पर आपत्ति जताई। दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई और कुछ ही देर में यह हिंसक हो गया। मौके पर तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के लगभग 50 से अधिक कार्यकर्ता इकट्ठा हो गए और उन्होंने रॉबिन की लिंचिंग कर दी।

पहले उसे तृणमूल कॉन्ग्रेस के कई कार्यकर्ताओं ने मिल कर पीटा। फिर उसे नज़दीक के गाँव लेकर गए। वहाँ टीएमसी के डिप्टी चीफ ने उसके साथ जम कर मारपीट की। जैसे ही परिवार वालों को इसकी जानकारी मिली वह परेशान होकर घटनास्थल पर पहुँचे।

परिवार वालों ने आरोप लगाया कि जब रॉबिन को उसकी बेटी ने पानी देने का प्रयास किया तो तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उसे रोक दिया। उन्होंने रॉबिन की बेटी को मौके पर धमकाया कि अगर वह अपने पिता की मदद करती है तो उसका भी यही हाल कर दिया जाएगा।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके घटनास्थल पर पहुँची और रॉबिन को कलना स्थित जिला अस्पताल में भर्ती कराया। फ़िलहाल परिजनों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और जाँच शुरू हो चुकी है। 

मरने से पहले रॉबिन ने भी इस मामले में होना बयान दिया था। उसने कहा था, “भारी संख्या में लोग आए और उन्होंने मेरे साथ बेरहमी से मारपीट की। वह मनरेगा में काम करने वाले लोग थे।” इसके बाद रिपोर्टर ने घटना में शामिल लोगों का नाम पूछा। जवाब में उसने बतया, “वे एक राजनीतिक दल के लोग थे। तृणमूल कॉन्ग्रेस के लोग।” रविवार (6 सितंबर 2020) को भारतीय जनता पार्टी (बंगाल) ने इस घटना पर अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट भी किया। 

ट्वीट में लिखा था, “टीएमसी के गुंडों ने कलना के भाजपा कार्यकर्ता रॉबिन पॉल की पीट-पीट कर लिंचिंग कर दी। टीएमसी की खूनी राजनीति की वजह से आज एक और भाजपा कार्यकर्ता ने अपनी जान गँवा दी। टीएमसी इस तरह खून बहा कर नेताओं में दहशत फैलाना चाहती है। भारतीय जनता पार्टी, टीएमसी द्वारा की जाने वाली हिंसा का अंत तक सामना करेगी।” 

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट कर कहा था, “भाजपा कार्यकर्ता रॉबिन पॉल को पश्चिम बंगाल के कलना में टीएमसी के गुंडों ने पीट-पीटकर मार डाला। राज्य में हिंसा की राजनीति अपने चरम पर पहुँच चुकी है। ममता बनर्जी की सुरक्षा और संरक्षा में यह गुंडे भाजपा कार्यकर्ताओं के दिमाग में डर पैदा करना चाहते हैं। लेकिन हम डरने वालों में से नहीं हैं। आखिर कब तक अराजकता का यह माहौल बना रहेगा?”

एक भाजपा कार्यकर्ता ने एबीपी आनंदा से बात करते हुए इस बारे में कई अहम जानकारी दी। भाजपा कार्यकर्ता ने कहा, “हत्या बादल पात्रा ने कराई है जो टीएमसी का सक्रिय नेता है। 100 दिन के रोज़गार (मनरेगा योजना) की आड़ में उन्होंने रॉबिन पर हमला किया। उन्होंने पेड़ काटने जैसी मामूली बात पर विवाद किया और 50 से 60 लोगों ने उसकी लिंचिंग कर दी। यह एक जघन्य अपराध है और हम इस मामले में सीबीआई जाँच की माँग करते हैं।” 

अपने बचाव में कलना के टीएमसी अध्यक्ष ने कहा, “हम मौके पर मनरेगा योजना संबंधी काम कर रहे थे। मैं पेड़ काट कर सड़क जोड़ने का काम कर रहा था, तभी रॉबिन वहाँ आया और उसने मुझ पर हमला किया।” आरोपों के लेकर टीएमसी नेता ने कहा, “यह पूरी तरह झूठ है। बादल पात्रा मनरेगा के कामकाज की देख-रेख कर रहा था, तभी रॉबिन पॉल ने धारदार हथियार से उस पर हमला किया। उसने बिना कारण पात्रा पर हमला किया और हमला इतना घातक था कि उसे 20 से 25 टाँके तक लगाए गए। फ़िलहाल उसकी हालत दयनीय है। रॉबिन अक्सर हथियार लेकर चलता था. जिसकी वजह से टीएमसी के कार्यकर्ता डर के माहौल में रहते थे।”

पश्चिम बंगाल में हिंसा की ऐसी घटनाएँ नई नहीं है। बीते 28 अगस्त को रायगंज के घुघुदंगा स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग 34 पर कुछ शरारती तत्वों ने दो व्यापारियों से 1 लाख रुपए लूट लिए थे। पुलिस ने शुरुआत में कुल 4 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद रायगंज पुलिस ने अनूप कुमार रॉय नाम के भाजपा नेता को पूछताछ के लिए बुलाया था। पुलिस के मुताबिक़ अनूप कुमार रॉय पूछताछ के दौरान थाने में बीमार हो गए। इसके बाद पुलिस ने उन्हें रायगंज मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उनकी मौत हो गई। 

पुलिस के इस दावे पर सवाल उठाते हुए बंगाल बीजेपी के प्रमुख ने कहा था, “एक भाजपा कार्यकर्ता जिसने महज़ 8 महीने पहले सीपीआईएम से इस्तीफ़ा देकर पार्टी की सदस्यता ली थी, पुलिस ने उस व्यक्ति को उसके घर से उठा लिया। इसके बाद पुलिस ने उसके साथ इतना अत्याचार किया कि उसकी किडनी खराब हो गई। फिर पुलिस उसे किसी अन्य जगह पर लेकर गई और वहाँ उसे 5 गोलियाँ मारी। पुलिस ने उसके परिवार वालों को बताए बिना उसका पोस्टमार्टम तक कर दिया।”

उन्होंने कहा था, “पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने परिजनों को सूचित करके शव लेकर जाने के लिए कहा। यह पूरी प्रक्रिया गैर कानूनी है, पुलिस उसे थाने क्यों लेकर गई? फिर पुलिस ने उसके साथ इतनी बुरी तरह मारपीट क्यों की? सबसे अहम उस पर गोलियाँ क्यों चलाई गई?”        

‘हम जुबैर के साथ’: बच्ची की ऑनलाइन प्रताड़ना में FIR के बाद AltNews का प्रतीक सिन्हा

‘ऑल्टन्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर पर बच्ची की ऑनलाइन प्रताड़ना को लेकर मामला दर्ज होने के बाद प्रतीक सिन्हा सामने आया है। प्रतीक भी इस प्रोपेगेंडा साइट का सह संस्थापक है। उसने सोशल मीडिया में ऐलान किया है कि ऑल्टन्यूज़ जुबैर के साथ खड़ा है। उसे डराने धमकाने की कोशिश की जा रही है।

जुबैर का समर्थन करते हुए कहा गया है कि ग़ैरकानूनी तरीकों का इस्तेमाल करके ऑल्टन्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर पर हमला करने की कोशिश की जा रही है। इन बातों को मद्देनज़र रखते हुए ऑल्टन्यूज़ अपने सह-संस्थापक के साथ खड़ा है। ज़ुबैर ने फ़ेक न्यूज़ नैरेटिव का सामना करने में अहम भूमिका निभाई है। यह बात बहुत से ऐसे लोगों को पसंद नहीं आती है जो भ्रामक ख़बरों के सहारे भारतीय लोकतंत्र को दबाने का प्रयास करते हैं।

ऑल्ट न्यूज़ का बयान

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने जुबैर के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि इस मामले में ट्विटर के निवेदन के बाद NCPCR ने उसे मोहम्मद जुबैर के ट्वीट के सम्बन्ध में और अधिक जानकारी देने के लिए 10 दिनों का अतिरिक्त समय दिया है। जुबैर के ट्वीट के बाद उसे फॉलो करने वाले ट्विटर एकाउंट्स @de_real_mak और @syedsarwar ने भी बच्ची के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया था, इसीलिए एफआईआर में उनका नाम भी शामिल है।

फैक्ट चेकिंग के नाम पर लोगों की निजी और गोपनीय जानकारियाँ सार्वजानिक करने के लिए कुख्यात समूह ऑल्टन्यूज़ के संस्थापकों में से एक मोहम्मद जुबैर ने शुक्रवार (अगस्त 07, 2020) को एक ट्विटर यूजर को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने के लिए बच्ची की तस्वीर सार्वजानिक कर दी थी। बताया गया था कि यह बच्ची उस यूजर की पोती थी और उसे जुबैर के ट्वीट के बाद रेप की धमकियाँ मिली थी।

ट्रेन में भीख माँगने की अनुमति देने का कोई प्लान नहीं: मीडिया रिपोर्ट्स का रेलवे ने किया खंडन

शेखर गुप्ता की The Print ने शनिवार  (सितंबर 5, 2020) को एक लेख प्रकाशित किया। इस लेख में दावा किया गया कि ट्रेन के डिब्बों के अंदर और स्टेशनों पर भीख माँगना अपराध मुक्त हो सकता है, क्योंकि इस तरह की योजना प्रस्तावित है। 

अपनी रिपोर्ट में The Print ने अज्ञात सोर्स का हवाला देते हुए दावा किया कि रेलवे ने इंडियन रेलवे ऐक्ट 1989 में संशोधन के लिए केंद्रीय कैबिनेट को एक प्रस्ताव भेजा है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इस योजना पर रेलवे ने आम जनता से सुझाव माँगे हैं। रिपोर्ट में कहा गया था कि प्रस्तावित योजना में रेल गाड़ी, प्लेटफॉर्म या रेलवे के अन्य परिसरों में भीख माँगने को अपराध मुक्त किया जाने का सुझाव है।

ThePrint report on begging on trains

The Print ने उसी लेख में यह भी बताया कि रेलवे एक्ट 1989 के सेक्शन 144 के मुताबिक रेल गाड़ी, रेलवे प्लेटफॉर्म या अन्य रेल परिसर में भीख माँगना अपराध है और इसके लिए कैद या जुर्माना या दोनो हो सकते हैं।

4 सितंबर को The Hindu ने भी इस तरह की रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी। The Hindu ने भी दावा किया था कि रेलवे के नए प्रस्ताव के बाद अगर कोई व्यक्ति ट्रेनों या स्टेशनों पर भीख माँगते हुए पाया जाता है तो उन्हें कोई जुर्माना नहीं देना होगा, इससे प्रभावी रूप से भीख माँगने की ‘अनुमति’ मिल सकती है।

Network18 ने भी इसी तरह के दावे करने वाले एक लेख के लिए The Hindu की रिपोर्ट का हवाला दिया। इसमें यह भी दावा किया गया था कि ट्रेन के डिब्बों में स्मोकिंग करने के रोक को भी वापस लिया जाएगा। इसकी जगह मौके पर 100 रुपए का जुर्माना वसूला जाएगा। इन दावो में कहा गया था कि बिना टिकट चलने वाले यात्रियों को जेल नहीं भेजा जाएगा। इस तरह की कोई गलती करने वाले लोगों से केवल जुर्माना वसूला जाएगा।

हालाँकि रविवार (सितंबर 6, 2020) को इन मीडिया रिपोर्ट्स पर बयान जारी करते हुए भारतीय रेल के आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा कि ऐसा कोई भी प्रस्ताव रेलवे ने नहीं भेजा है। रेलवे के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि ट्रेनों, स्टेशनों या प्लेटफॉर्म पर भीख माँगने की इजाजत देने की भी कोई योजना या प्रस्ताव रेलवे के पास नहीं है।

गौरतलब है कि इससे पहले इसी तरह कुछ मीडिया हाउस ने खबर चलाई थी कि अब मोदी सरकार का गुणगान करने के लिए तीन हजार भिखारियों को भर्ती किया जाएगा। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय एक ऐसी योजना बना रही है जिसमें तीन हजार भिखारी चुने जाएँगे। इनका काम विभिन्न रेलगाड़ियों में यात्रियों के सामने मोदी सरकार की सफलताओं के गीत गाना होगा।

ऑल इंडिया रेडियो और पीआईबी ने इस दावे को खारिज करते हुए बताया था कि ये दावा झूठा है और सरकार द्वारा ऐसी कोई योजना नहीं बनाई जा रही है।

रोहिंग्या घुसपैठियों के लिए दिल्ली में कॉलोनी, मस्जिद: जकात फाउंडेशन का सामने आया नक्शा

जकात फाउंडेशन समुदाय विशेष के युवाओं को सिविल सेवा में भर्ती होने के लिए ट्रेनिंग ही नहीं देता है। यह बात सामने आई है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माने जाने वाले रोहिंग्या घुसपैठियों की भी वह मदद कर रहा है। इनके लिए जकात ने दिल्ली में दारुल हिजरात (Darul Hijrat) नामक ‘मेकशिफ्ट कैंप’ स्थापित किया है।

एक नक्शा सामने आया है। इससे पता चलता है कि मस्जिद के साथ रोहिंग्या लोगों के लिए स्थायी कॉलोनी बनाई जाएगी। यहॉं फाउंडेशन का स्थायी कार्यालय भी होगा।

ज़कात फाउंडेशन का दावा है कि पूरी परियोजना को गृह मंत्रालय की मँजूरी हासिल है। फाउंडेशन के उपाध्यक्ष एसएम शकील परियोजना के प्रभारी हैं।

ज़कात फाउंडेशन इस्लामिक सिद्धांतों पर रोहिंग्या लोगों को शिक्षित करता है। इस समय दिल्ली में कई रोहिंग्या बस्तियाँ हैं। इनमें से सबसे प्रमुख हैं शाहीन बाग, कालिंदी कुंज, विकास पुरी और खजूरी खास। इनमें से कुछ क्षेत्रों में फरवरी के महीने में राष्ट्रीय राजधानी में सांप्रदायिक दंगों के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा देखी गई थी।

हमने पहले ज़कात फ़ाउंडेशन की खतरनाक विचारधारा और विदेशों में इस्लामिक संगठनों और रेडिकल इस्लामिक उपदेशक ज़ाकिर नाइक से इसके कनेक्शन पर रिपोर्ट की थी। वे नागरिकता संशोधन अधिनियम और यूनिफॉर्म सिविल कोड के भी विरोधी हैं। 

गौरतलब है कि हाल ही में, ज़कात फाउंडेशन शरिया काउंसिल के सदस्य कलीम सिद्दीकी का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता था कि हिंदुओं को इस्लाम में परिवर्तित होने की आवश्यकता है, क्योंकि यदि वे इस्लाम नहीं कबूल करंगे तो नर्क में जलेंगे। 

वीडियो में कलीम हिंदू धर्म में होने वाले अंतिम संस्कार की क्रिया पर भी सवाल उठाते हैं और उदाहरण देकर समझाते हैं कि इसलिए हिंदू इस्लाम कबूल करना चाहते हैं, क्योंकि वे जहन्नुम की आग से खुद को बचाना चाहते हैं।