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1 लाख रेहड़ी-पटरी वालों को MP में सिर्फ 2 महीने में मिला ‘स्वनिधि योजना’ का लाभ: PM मोदी ने किया डायरेक्ट सवाल-जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे मध्य प्रदेश के विभिन्न इलाक़ों के रेहड़ी-पटरी वालों (स्ट्रीट वेंडर्स) के साथ ‘स्वनिधि संवाद’ में हिस्सा लिया। इस वर्चुअल बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उपस्थित रहे। पीएम मोदी ने इंदौर में झाड़ू बेचने वाले चगन लाल से बातचीत करते हुए इस कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने उनसे उनके व्यवसाय के बारे में पूछा और ये भी जाना कि वो अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं या नहीं।

पीएम मोदी ने चगन लाल से पूछा कि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है या नहीं? इस पर जवाब देते हुए झाड़ू-विक्रेता ने बताया कि उन्हें गैस चूल्हा और सरकारी घर का लाभ मिला। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन में उनका व्यवसाय ठप्प हो गया था, जिसके बाद उन्हें ‘प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना’ का भी लाभ मिला। बता दें कि मध्य प्रदेश में इस योजना के तहत लाखों लोगों को लाभ पहुँचाया गया है। इनमें से अधिकतर गरीब हैं।

हालाँकि, इस दौरान पीएम मोदी पर्यावरण को लेकर भी सतर्क रहे और चगन की कुर्सी के नीचे प्लास्टिक की बोतल में रखे हुए पानी को देख कर उन्हें सलाह दी कि वो सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद करें और मिट्टी के घड़े में पानी रखा करें। वहीं ग्वालियर में टिक्की सेंटर चलाने वाली अर्चना शर्मा और उनके दोनों बच्चों से बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वो ग्वालियर आएँगे तो उनकी बनाई टिक्की खाएँगे।

इसके बाद उन्होंने रायसेन के सब्जी विक्रेता और फिर साँची में ऑर्गेनिक सब्जी बेचने वाले दालचन्द से संवाद किया। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के बीच हुए लॉकडाउन में व्यापार में भारी नुकसान हुआ है। हालाँकि, दालचन्द ने सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने की बात स्वीकार की। लोगों से बातचीत के बाद पीएम ने कहा कि उनकी बातों में एक विश्वास है, एक उम्मीद दिखी। ये भरोसा प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की बहुत बड़ी ताकत है।

उन्होंने मध्य प्रदेश के इन स्ट्रीट वेंडर्स के श्रम की ताकत, आत्मसम्मान और आत्मबल को नमन करते हुए कहा कि सीएम शिवराज सिंह चौहान और उनकी सरकार के प्रयासों से सिर्फ 2 महीने में मध्य प्रदेश में 1 लाख से ज्यादा स्ट्रीट वेंडर्स, रेहड़ी-पटरी वालों को स्वनिधि योजना का लाभ सुनिश्चित हुआ है। साथ ही कहा कि इस योजना का मकसद है कि वो लोग नई शुरुआत कर सकें, अपना काम फिर शुरू कर सकें, इसके लिए उन्हें आसानी से पूँजी मिले।

प्रधानमंत्री मोदी ने मध्य प्रदेश के स्ट्रीट वेंडर्स के साथ हुए ‘स्वनिधि संवाद’ में कहा कि हाल में सरकार ने शहरों में आप जैसे साथियों को उचित किराए में बेहतर आवास उपलब्ध कराने की भी एक बड़ी योजना शुरू की है। एक देश, एक राशन कार्ड की सुविधा से ये लोग देश में कहीं भी जाएँगे, तो अपने हिस्से का सस्ता राशन ले पाएँगे।

बकौल पीएम मोदी, ये भी पहली बार हुआ है कि रेहड़ी-पटरी वालों के लाखों लोगों के नेटवर्क को सही मायने में सिस्टम से जोड़ा गया है, उनको एक पहचान मिली है। उन्होंने बताया कि ये एक ऐसी योजना है, जिसमें आपको ब्याज़ से पूरी तरह से मुक्ति भी मिल सकती है। इस योजना के तहत वैसे भी ब्याज में 7 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। पीएम ने सलाह दी कि अगर कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए तो आपको ये भी नहीं देना पड़ेगा।

पीएम मोदी ने जानकारी दी कि हमारे रेहड़ी पटरी वाले साथी डिजिटल दुकानदारी में पीछे न रहें, इसके लिए बैंकों और डिजिटल पेमेंट की सुविधा देने वालों के साथ मिलकर एक नई शुरुआत की गई है। बताया कि अब बैंको और संस्थाओं के प्रतिनिधि उनकी रेहड़ी, ठेले पर आएँगे और QR कोड देंगे। उपयोग कैसे करना है, ये भी बताया जाएगा। पीएम ने कहा कि हमारे देश में गरीबों की बात बहुत हुई है लेकिन गरीबों के लिए जितना काम पिछले 6 साल में हुआ है, उतना पहले कभी नहीं हुआ।

प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि रेहड़ी-पटरी या ठेला लगाने वाले लोगों के पास उज्ज्वला का गैस कनेक्शन है या नहीं, उनके घर बिजली कनेक्शन है या नहीं, वो आयुष्मान भारत योजना से जुड़े हैं या नहीं, उन्हें बीमा योजना का लाभ मिल रहा है या नहीं, उनके पास अपनी पक्की छत है या नहीं – ये सारी बातें देखी जाएँगी। मध्य प्रदेश के स्ट्रीट वेंडर्स को ‘स्वनिधि योजना’ कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि हर वो क्षेत्र, हर वो सेक्टर जहाँ गरीब-पीड़ित-शोषित-वंचित, अभाव में था, सरकार की योजनाएँ उसका संबल बनकर आईं।

कंगना रनौत के ऑफिस को तोड़ने का काम चालू, ट्वीट कर दिखाया ‘महाराष्ट्र सरकार के गुंडों’ का काम

कंगना रनौत के आज (सितंबर 9, 2020) मुंबई पहुँचने से पहले और महाराष्ट्र सरकार से चल रही उनकी तनातनी के बीच एक बड़ी खबर आई है। कंगना ने ट्वीट करके जानकारी दी है कि उनके ऑफिस को तोड़ा जा रहा है। इससे पहले उन्होंने एक और ट्वीट करके बताया था कि महाराष्ट्र सरकार और उनके ‘गुंडे’ उनकी संपत्ति को तोड़ने के लिए पहुँच चुके हैं।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “मैं मुंबई दर्शन के लिए हवाई अड्डे पर जाने के लिए पूरी तरह तैयार हूँ। महा सराकर और उनके गुंडे मेरी संपत्ति को अवैध रूप से तोड़ने के लिए तैयार हैं। मैंने महाराष्ट्र के गौरव के लिए रक्त देने का वादा किया था। यह कुछ भी नहीं है। सब ले लो। लेकिन मेरी भावना केवल ऊँची होगी और सिर्फ़ ऊपर बढ़ेगी। “

उल्लेखनीय है कि बीएमसी ने कंगना रनौत के मुंबई स्थित ऑफिस पर नया नोटिस लगाया था। इस नोटिस में कंगना रनौत के ऑफिस में हुए अवैध निर्माण को गिराने की बात कही गई थी। जानकारी के मुताबिक, यह नया नोटिस आज सुबह लगभग 10:30 बजे लगाया गया। इस दौरान मुंबई पुलिस और बीएमसी की एक टीम भी मौजूद थी।

कंगना रनौत के ऑफिस पर लगे नए नोटिस में बताया गया था कि कंगना रनौत को पहले नोटिस के जरिए 24 घंटे का वक्त दिया गया था, जिसके जवाब में उन्होंने सात दिन का समय माँगा था। लेकिन बीएमसी ने इसपर तत्काल कार्रवाई की है और नया नोटिस लगाकर अवैध निर्माण गिराने की बात कही।

बीएमसी के नए नोटिस में लिखा गया है कि कंगना ने हमारे पिछले नोटिस का जवाब नहीं दिया और ऑफिस में काम करवाना जारी रखा। कंगना के वकील ने सात दिन का समय माँगा था, लेकिन बीएमसी इससे संतुष्ट नहीं है। बीएमसी के नोटिस में कहा गया कि कंगना ने अवैध निर्माण और काम करने को लेकर जवाब नहीं दिया था।

इससे पहले बीएमसी ने लंबी पड़ताल के बाद लीकेज का हवाला देकर कंगना के दफ्तर का काम रोकने को कहा था। जबकि कंगना पहले ही संदेह जता चुकी थीं कि बीएमसी उनकी संपत्ति ध्वस्त करने वाली है। हालाँकि, उस समय ये कार्रवाई नहीं हुई। मगर, आज यही ताजा खबर है।

बता दें कि सुशांत सिंह मामाले के बाद से चर्चा में आईं बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत और महाराष्ट्र सरकार के बीच विवाद अब बढ़ता ही जा रहा है। बीते दिनों उन्होंनें मुंबई पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए जिसके बाद शिवसेना नेता उन पर हमलवार हो गए। संजय राउत ने न उन्हें मुंबई वापस लौटने की धमकी दी। वहीं उन पर बात करते हुए उन्हें ‘हरामखोर’ तक कह डाला।

उसके पूर्व कंगना रनौत ने मुंबई पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह द्वारा एक सोशल मीडिया पोस्ट लाइक किए जाने में अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने मुंबई पुलिस की सुरक्षा पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा था, “जब मुंबई के पुलिस कमिश्नर ही खुले आम मुझे इस तरह डराएँगे, मेरे खिलाफ अपराधों और बदमाशी करने वालों को प्रोत्साहित करेंगे, तो क्या मैं मुंबई में सुरक्षित रहूँगी? मेरी सुरक्षा के लिए कौन जिम्मेदार होगा?”

कंगना ने ट्वीट में यह भी लिखा था कि उन्हें हिमाचल या केंद्र सरकार से सुरक्षा की आवश्यकता होगी और बॉलीवुड में कथित ‘ड्रग माफिया’ का पर्दाफाश करने के लिए वह मुंबई पुलिस से सुरक्षा स्वीकार नहीं करेंगी क्योंकि दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच अब रफ़्तार पकड़ रही है।

कंगना के इस ट्वीट के बाद, शिवसेना नेता संजय राउत ने अपने मुखपत्र सामना में कंगना के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि अभिनेत्री का ‘विश्वासघात’ शर्मनाक है और वह मुंबई में रहने के बावजूद शहर के पुलिस बल की आलोचना करती है। अपने एक ट्वीट में राउत ने लिखा था, “मुंबई मराठी मानुष के बाप की ही है, जिन्हें यह मँजूर नहीं वह अपना बाप दिखाएँ। शिवसेना महाराष्ट्र के दुश्मनों का श्राद्ध किए बगैर नहीं रहेगी, प्रॉमिस जय हिंद जय महाराष्ट्र।”

इसके बाद अभिनेत्री को खुलेआम हरामखोर बोला गया। जब उन्होंने इस पर आवाज उठाई तो राउत ने इसे बेहद हल्के अंदाज में लेते हुए कहा कि महाराष्ट्र में हरामखोर का मतलब नॉटी या बेईमान होता है।

2 दिन पहले पेशावर को अफगान की राजधानी बता Pak को घेरा था, आज उसी उप-राष्ट्रपति के काफिले पर बम से अटैक

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में बुधवार (सितम्बर 9, 2020) की सुबह 7:30 बजे बड़ा धमाका हुआ। ये धमाका काबुल के तैमानी क्षेत्र में हुआ। इस धमाके के बाद मौके पर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। धमाके के बाद आसमान में धुआँ फ़ैल गया, जिससे स्थानीय लोग दहशत में नज़र आए। पुलिस डिस्ट्रिक्ट 4 में अफगान उप-राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह को निशाना बना कर हुए धमाके के बाद पूरे क्षेत्र को सील कर के सुरक्षा बलों ने इलाक़े को खाली करा कर घेराबंदी की है।

अभी तक इस बम ब्लास्ट के बारे में बहुत जानकारी नहीं मिल पाई है। कहा जा रहा है कि ये आत्मघाती हमला हो सकता है या फिर कार के जरिए बम ब्लास्ट किया गया हो सकता है। जब ये धमाका हुआ, तब अफगानिस्तान के उप-राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह का काफिला उसी जगह से गुजर रहा था, जहाँ ये धमाका हुआ। उप-राष्ट्रपति के बेटे एबाद सालेह ने जानकारी दी है कि जब काफिले को निशाना बनाया गया, तब वो अपने पिता के ही साथ थे।

हालाँकि, बताया गया है कि अफगानिस्तान के उप-राष्ट्रपति इस घटना में सुरक्षित हैं। सालेह के मीडिया अधिकारी रिजवान मुराद ने कहा कि इस आतंकी हमले में अफगानिस्तान के उप-राष्ट्रपति को कोई नुकसान नहीं पहुँचा है। जब ये हमला हुआ, तब सालेह अपने घर से दफ्तर जा रहे थे। इस हमले में 2 लोग मारे गए और अभी तक 12 के घायल होने की सूचना है। काफिले के अंत में चल रही गाड़ियों को नुकसान पहुँचा।

2 दिन पहले ही अमरुल्लाह सालेह ने पाकिस्तान के साथ सीमा विवाद को उठाया था। अफगानिस्तान के उप-राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने कहा था कि उनके मुल्क का कोई भी नेता डुरंड लाइन को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई ऐसा करता है तो जीवन भर उसकी निंदा होगी ही, मृत्यु के बाद भी लोग उसकी आलोचना करेंगे। उन्होंने कहा था कि ये एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर चर्चा होनी चाहिए, जिसका समाधान निकलना चाहिए।

भीमा कोरेगाँव: कबीर कला मंच के 3 ‘एक्टिविस्ट्स’ गिरफ्तार, प्रतिबंधित माओवादी संगठन से हैं सम्बन्ध

‘नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (NIA)’ ने ‘कबीर कला मंच’ के तीन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। बताया गया है कि ‘कबीर कला मंच’ प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) का एक भाग है। ये संगठन माओवादी विचारधारा को फैलाता है और नक्सली गतिविधियों को बढ़ावा देता है। गिरफ्तार तीनों आरोपितों को भीमा-कोरेगाँव मामले में सह-आरोपित बनाया गया है। इन्हें NIA की मुंबई शाखा द्वारा गिरफ्तार किया गया।

तीनों आरोपित सागर तात्याराम गोरखे, रमेश मुरलीधर गायचोर, ज्योति राघोबा जगताप भगोड़े मिलिंद तेलतुंबड़े से लगातार सम्पर्क में थे और साथ ही सीपीआई (माओवादी) के अर्बन नेटवर्क का जिससे थे। ज्योति ‘कबीर कला मंच’ की ‘लेडी’ सदस्य हैं। गिरफ्तार आरोपितों ने जंगल में जाकर खतरनाक हथियारों का प्रयोग और बम विस्फोट करने का प्रशिक्षण लिया था। इन्हें माओवादी आंदोलन से जुड़े ‘जागरूकता अभियानों’ का भी हिस्सा बनाया गया था।

32 वर्षीय सागर पुणे के वकाड का रहने वाला है। 36 वर्षीय रमेश भी पुणे के ही यरवदा का निवासी है। जगदप पुणे के कोंडवा की रहने वाली है। इन सभी को यूएपीए और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया है। बता दें कि दिसंबर 2017 में ‘कबीर कला मंच’ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में एल्गार परिषद के एक्टिविस्ट्स ने शनिवारवाड़ा में भड़काऊ भाषण दिए थे, जिसके बाद भीमा-कोरेगाँव में हिंसा भड़क उठी थी।

जनवरी 24, 2020 से ही NIA इस मामले की जाँच कर रही है। इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से अधिकतर खुद को एक्टिविस्ट बताते रहे हैं। गौतम नवलखा, सुधा भारद्वाज और वरवरा राव सहित कई आरोपित पहले से ही जेल में बंद हैं। एनआईए की एक स्पेशल कोर्ट ने गिरफ्तार तीनों आरोपितों को 11 सितम्बर तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। पुणे पुलिस की चार्जशीट में भी इन तीनों के नाम दर्ज थे।

इससे पहले भीमा कोरेगाँव मामले में हिंदू कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी विभाग के एक प्रोफेसर, पीके विजयन को पूछताछ के सम्बन्ध में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी द्वारा नोटिस भेजा गया था। ये समन भारतीय दंड संहिता (IPC) और गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के कई सेक्शन के तहत जारी किए गए थे। NIA ने इसी तरह के एक मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हनी बाबू को गिरफ्तार किया था।

मुनव्वर राना की बेटियाँ महिलाओं की भीड़ जुटा CM योगी आवास को घेरने वाली थीं, UP पुलिस ने किया नजरबंद

उर्दू शायर मुनव्वर राना की बेटियों को घर में ही नज़रबंद कर दिया गया है, ऐसा परिवार ने आरोप लगाया है। उनकी दोनों बेटियों उजमा और सुमैया ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन की धमकी दी थी। वो दोनों घर से बाहर निकल कर कोई उपद्रव न करें, इसलिए उनके घर के बाहर पुलिस बल की तैनाती की गई है। हालाँकि, पुलिस ने अभी तक मुनव्वर राना की बेटियों को नज़रबंद किए जाने की पुष्टि नहीं की है।

मुनव्वर राना की बेटियों ने अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी को मुद्दा बनाते हुए सीएम आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। सुमैया ने कहा कि कोरोना महामारी की वजह से बेरोजगारी लगातार बढ़ते जा रही है और अर्थव्यवस्था में गिरावट आ रही है। उनका आरोप है कि सरकार इन मुद्दों की तरफ बिलकुल भी ध्यान नहीं दे रही है। इसीलिए, मंगलवार (सितम्बर 8, 2020) को उन्होंने दोपहर 2 बजे कालिदास मार्ग पर विरोध प्रदर्शन की साजिश रची थी।

हालाँकि, उन्होंने इस विरोध प्रदर्शन की सूचना पुलिस को पहले ही दे दी थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर मैसेज वायरल कर के बड़ी संख्या में महिलाओं को सीएम आवास के बाहर जुटने को कहा गया। बता दें कि सीएए के विरोध में जगह-जगह हुए उपद्रवों के लिए भी सोशल मीडिया का सहारा लिया गया था। सुमैया ने आरोप लगाया है कि सोमवार की रात अचानक से उनके घर के बाहर पुलिस बलों की गश्त बढ़ा दी गई।

इनमें से कई महिला सिपाही भी शामिल थीं। मुनव्वर राना की बेटियों ने आरोप लगाया है कि 40 की संख्या में पुलिसकर्मी उनके घर के बाहर पहरा देते रहे और उन्हें उसी रात से नज़रबंद कर के रखा गया है। सुमैया ने पुलिस की एक नोटिस मिलने की बात भी कही है। इस नोटिस में बताया गया है कि कोविड-19 के दिशा-निर्देशों और धारा-144 प्रभावी होने के कारण विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। बता दें कि सुमैया पर पहले ही लखनऊ घंटाघर पर उपद्रव के आरोप में एफआईआर दर्ज है।

सुमैया राना ने आरोप लगाते हुए कहा कि वह कोई हिस्ट्रीशीटर नहीं है या कोई अपराधी नहीं है, जो उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है। इन लोगों ने राज्य में ‘महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध’ को भी मुद्दा बना कर योगी सरकार को घेरने की योजना बनाई थी। खुद उजमा परवीन और समैया ने इसके लिए सोशल मीडिया पर महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा संख्या में जुटने के लिए मैसेज वायरल किया था।

मुनव्वर राना हाल ही में राम मंदिर मुद्दे पर पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई पर टिप्पणी कर के सुर्ख़ियों में आए थे। उन्होंने कहा था, “भारत के पूर्व CJI रंजन गोगोई जितने कम दाम में बिके, उतने में हिंदुस्तान की एक ₹#डी भी नहीं बिकती है।“ साथ ही कहा था उन्होंने कहा था कि इस मामले में 2 लोगों ने मिल कर फैसला कर दिया, सब गलत हुआ और सब कुछ अपनी मर्जी से कर दिया गया। उन्होंने कहा था कि राम मंदिर मामले में न्याय नहीं हुआ बल्कि धोखाधड़ी हुई।

मुझे छोड़ दो, मैं तेरी दादी की उम्र की: 90 साल की वृद्धा ने बलात्कारी से लगाई गुहार… लेकिन वो नहीं सुना

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। इस बार बलात्कार किसी बच्ची या युवती का नहीं बल्कि 90 साल की एक वृद्धा का हुआ है। दिल्ली के नजफगढ़ के छावला इलाके में यह घटना घटी है। बुजुर्ग महिला की शिकायत पर अब मामले की जाँच भी शुरू हो गई है। साथ ही आरोपित को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली के नजफगढ़ में एक 37 वर्षीय व्यक्ति (कुछ रिपोर्ट्स में उम्र 33 साल) ने रेवला खानपुर गाँव में 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला के साथ बलात्कार किया। आरोपित की पहचान सोनू के रूप में हुई है। वृद्धा के शरीर पर चोट के काफी गंभीर निशान भी मिले हैं। इनसे पता चलता है कि आरोपित ने दुष्कर्म की वारदात को अंजाम देने के लिए वृद्धा की पिटाई भी की।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि महिला रेवला खानपुर गाँव की रहने वाली है। यहाँ वह अपने परिवार के साथ रहती है। सोमवार शाम पीड़ित बुजुर्ग महिला अपने घर के बाहर बैठी हुई थी और दूध वाले का इंतजार कर रही थी। तभी, आरोपित सोनू वहाँ पहुँचा और उसने बुजुर्ग महिला से कहा कि आज दूध वाला घर नहीं आएगा, उसे दूध लेने के लिए जाना पड़ेगा।

आरोपित ने बुजुर्ग महिला से कहा कि वह उन्हें दूध वाले के पास लेकर चलता है। इसके बाद वह उनको रेवला खानपुर फार्म ले गया और वहाँ उनके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। इस दौरान बुजुर्ग महिला ने आरोपित का विरोध किया तो उसने उनकी जमकर पिटाई की। जिसके चलते वह गंभीर रूप से घायल हो गईं।

जब आसपास से गुजरते लोगों ने महिला की आवाजें सुनीं तो सब फार्म की ओर आए। उन्होंने देखा कि सोनू बुजुर्ग महिला की पिटाई कर रहा था। इसके बाद उन्होंने आरोपित को पकड़ा और पुलिस को सारी जानकारी दी। थोड़ी देर में पीड़िता के घरवालों को भी सूचित किया गया और पीड़ित महिला को अस्पताल में भर्ती करवाकर उनका इलाज शुरू हुआ। वहीं, बयान के आधार पर पुलिस ने इस केस को आईपीसी की धारा 376 और 363 के तहत दर्ज किया।

बता दें, दिल्ली में महिला आयोग अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने मामले पर संज्ञान लिया है। उनका कहना है कि जब उन्होंने महिला से मुलाकात की तो उनके आँखों में आँसू थे और वह सिर्फ़ आरोपित को फाँसी पर लटकाने की बातें कर रही थीं। मालीवाल ने बताया कि महिला ने यह भी कहा कि वह लगातार आरोपित से कह रही थीं कि वह उन्हें छोड़े दे। वो उसकी दादी की उम्र की हैं। मगर बलात्कार करने वाले को कोई दया नहीं आई।

स्वाति मालीवाल अपने ट्विटर पर लिखती हैं, “दिल्ली की 90 वर्षीय महिला को घर से दरिंदा जबरदस्ती उठाकर ले गया और बुरी तरह रेप किया। अम्मा को बहुत चोटें आई हैं। उनसे मिली तो रूह काँप गई। बहुत रो रही थीं और बोली इस दरिंदे को फाँसी दिलाओ! हैवानियत की हद है! 6 महीने की बच्ची हो या 90 वर्ष की महिला, कोई सुरक्षित नही!”

अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा, “अम्मा उस 33 साल के दरिंदे से भीख माँगती रही कि उनको छोड़ दे! वो उसके दादी की उमर की हैं। पर हवस के नशे में डूबे हुए उस जानवर ने रेप कर सब हद पार कर दी! कैसा समाज है हमारा? इंसानियत मर गई है, जिसके लिए 6 महीने की बेटी और 90 साल की महिला – दोनों ही सिर्फ़ एक वस्तु है। शर्मनाक!”

यहाँ बता दें कि दिल्ली महिला आयोग अध्यक्ष ने इस मामले में आश्वासन दिया है कि वह महिला को न्याय दिलवाएँगी। उन्होंने कहा, “यह केस फास्ट ट्रैक में चलना चाहिए और 6 महीने के अंदर उन्हें इंसाफ मिलना चाहिए।”

आदिवासियों का धर्मांतरण कर ईसाई बनाते थे… ऐसे 13 NGO का FCRA लाइसेंस मोदी सरकार ने किया रद्द

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 13 ईसाई संगठनों के विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA) लाइसेंस को सस्पेंड कर दिया है। मंत्रालय ने यह निर्णय पिछड़े इलाकों में आदिवासियों को प्रलोभन देकर उनके धर्मांतरण कराए जाने की रिपोर्ट के बाद ली है।

जिन 13 ईसाई संगठनों का FCRA लाइसेंस सस्पेंड किया गया है, उनके बैंक अकाउंट भी फ्रिज कर लिए गए हैं। कुछ राज्यों के पिछड़े इलाके खासकर झारखंड से आई इंटेलिजेंस रिपोर्ट की मानें तो ये संस्था आदिवासियों को लोभ-लालच देकर उनका धर्मांतरण कर उन्हें ईसाई बना रहे थे।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जिन 13 ईसाई संगठनों का FCRA लाइसेंस सस्पेंड किया है, उन्हें पहले ‘कारण-बताओ’ नोटिस भेजा था। लेकिन तय समय-सीमा के भीतर किसी ने भी जवाब नहीं दिया। अभी तक सिर्फ एक संगठन की ओर से जवाब आया है, वो भी तय समय-सीमा के बाद। मंत्रालय के अनुसार भेजा गया जवाब संतुष्टि के लायक नहीं है।

दो दिन पहले भी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 4 ईसाई संगठनों के विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA) लाइसेंस को सस्पेंड कर दिया था। जिन चार ईसाई समूहों का FCRA सस्पेंड किया गया है, उनमें झारखंड का Ecreosoculis North Western Gossner Evangelical, मणिपुर का Evangelical Churches Association (ECA), झारखंड का Northern Evangelical Lutheran Church और मुंबई स्थित New Life Fellowship Association (NLFA) शामिल हैं।

क्या है विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA)

किसी भी संगठन के लिए विदेश से चंदा प्राप्त करने के लिए गृह मंत्रालय से FCRA की मँजूरी होना अनिवार्य है। इस लाइसेंस के नहीं होने से संस्थान या संगठन विदेश से चंदा या वित्तीय योगदान मँगाने में कानूनी रूप से सक्षम नहीं होता है।

विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA) 2010 के प्रावधानों के अनुसार प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराना गैर-कानूनी है। इस अधिनियम के सेक्शन 12(4) के अनुसार सक्षम अधिकारी किसी NGO या संगठन को धार्मिक गतिविधियों से परे लोभ-लालच-प्रलोभन देकर धर्मांतरण करने की स्थिति में उसका लाइसेंस सस्पेंड कर सकते हैं।

पाक, ईरान सहित कई इस्लामी देशों ने की शार्ली एब्दो द्वारा पैगंबर मोहम्मद के कार्टून को पुनः छापने की निंदा, बताया- ‘अक्षम्य गुनाह’

फ्रेंच व्यंग्य साप्ताहिक मैगजिन शार्ली एब्दो के पैगम्बर मुहम्मद पर पुनः प्रकाशित किए जाने वाले कार्टून के फैसले को लेकर काफी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

फ्रांस, नाइजीरिया, इंडोनेशिया, ईरान, चेचन्या, यमन और पाकिस्तान जैसे कई इस्लामी या इस्लाम बहुल देशों ने पैगंबर मुहम्मद को चित्रित करने वाले कार्टून के खिलाफ आंदोलन करने के लिए सड़कों पर निकल आए। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने मंगलवार (सितंबर 8, 2020) को इसे “अक्षम्य गुनाह” कहा।

ट्विटर पर फ्रांसीसी पत्रिका के फैसले की निंदा करते हुए, खामेनेई ने कुछ फ्रांसीसी राजनेताओं की भी आलोचना की, जिन्होंने पैगंबर के अपमान करने के गंभीर अपराध की आलोचना नहीं करने के लिए “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” के बहाने का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

अपने गुस्से को व्यक्त करते हुए खामेनेई ने कहा कि इस्लामिक राष्ट्रों – विशेष रूप से पश्चिम एशियाई देशों में -इस्लाम और संप्रदाय विशेष के खिलाफ पश्चिमी राजनेताओं और नेताओं की शत्रुता को कभी नहीं भूलना चाहिए।

इस घोषणा ने पेरिस कार्यालय में 2015 के आतंकवादी हमले को भी प्रेरित किया, जिससे दुनिया भर में व्यापक विरोध हुआ, पाकिस्तान ने भी शुक्रवार (सितंबर 4, 2020) को कट्टरपंथी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान पार्टी के नेतृत्व में हजारों समुदाय विशेष के लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया।

प्रदर्शनकारियों ने फ्रांसीसी उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान के लिए “डेथ टू फ़्रांस” का आह्वान किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान पढ़े गए एक बिलबोर्ड पर लिखा गया था, ”ईशनिंदा करने वालों की सजा कत्ल है।” प्रदर्शनकारियों ने माँग की कि फ्रांसीसी राजदूत को निष्कासित कर दिया जाए।

गौरतलब है कि 2015 में इस्लामी आतंकवादियों के हमले का शिकार होने के बाद फ्रेंच व्यंग्य साप्ताहिक शार्ली एब्दो (Charlie Hebdo) ने मंगलवार (सितम्बर 01, 2020) को कहा था कि वह पैगंबर मोहम्मद के कथित विवादास्पद कार्टूनों पर हुए हमले पर इस सप्ताह के अंत में होने जा रहे मुकदमे की शुरुआत में ही एक बार फिर पैगम्बर मुहम्मद पर कार्टून प्रकाशित करेगा।

मैगजीन के डायरेक्टर लौरेंट रिस सौरीस्यू ने लेटेस्ट एडिशन में कार्टून को फिर से छापने को लेकर लिखा था, “हम कभी झुकेंगे नहीं, हम कभी हार नहीं मानेंगे।” इसकी संपादकीय टीम ने इसे आवश्यक बताते हुए लिखा था कि अब कार्टून को पुनः प्रकाशित करने का सही समय है, क्योंकि ट्रायल शुरू हो रहा है। पत्रिका का कहना था कि उन्हें 2015 से ही पैगम्बर मोहम्मद पर और भी कैरिकॉर्ड्स को प्रिंट करने का निवेदन आता रहा है।

NCB की माँग पर रिया 14 दिन की न्यायिक हिरासत में, जमानत की माँग करने वालों का करेंगे विरोध

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने मंगलवार (सितम्बर 08, 2020) को रिया चक्रवर्ती को मादक पदार्थों से जुड़े आरोपों के सिलसिले में तीन दिनों तक पूछताछ करने के बाद ड्रग सिंडिकेट का सक्रीय सदस्य बताते हुए गिरफ्तार कर लिया गया। जिसके बाद रिया को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहाँ उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा दिया गया है।

एजेंसी द्वारा रविवार (सितंबर 06, 2020) को सुशांत के कर्मचारियों – मिरांडा, सावंत और उसके भाई, शोविक को गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्होंने एनसीबी को बताया कि वे सुशांत सिंह राजपूत और रिया के कहने पर ड्रग्स की खरीद करते थे।

रिया चर्कवर्ती की गिरफ्तारी अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत, जो कि 14 जून को अपने मुंबई उपनगर स्थित आवास पर मृत पाए गए थे की मौत के 81 दिन बाद हुई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनसीबी के डिप्टी डायरेक्टर एमए जैन ने बताया कि वो सभी के लिए न्यायिक हिरासत माँगेंगे, लेकिन बेल की माँग किए जाने पर हम इसका विरोध करेंगे।

हालाँकि, फ़ेडरल एंटी-ड्रग ट्रैफ़िकिंग एजेंसी ने रिया चक्रवर्ती की हिरासत के लिए दबाव नहीं डाला और स्थानीय अदालत से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का अनुरोध किया है। एजेंसी ने यह भी कहा कि तलाशी लेते समय उन्हें रिया चक्रवर्ती की संपत्ति में कोई ड्रग नहीं मिली।

चक्रवर्ती को एनडीपीएस अधिनियम की कुछ धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया और वीडियो लिंक के माध्यम से स्थानीय अदालत के समक्ष शाम करीब 7.30 बजे पेश किया गया। जिसके बाद अदालत ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। चक्रवर्ती अब जमानत के लिए आवेदन कर सकती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, रिया की गिरफ्तारी विभिन्न व्हाट्सएप चैट से बरामद जानकारी पर आधारित थी, जिसमें वह ‘ड्रग्स की खरीद’ पर चर्चा कर रही थी। ये चैट प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा बरामद किए गए थे और बाद में फेडरल एंटी-ड्रग ट्रैफिकिंग एजेंसी एनसीबी के साथ साझा किए गए हैं।

कॉन्ग्रेसी चाटुकार, समर्थक निभा रहे अपने ‘चीनी संबंध’, फर्जी जानकारी दे कर सेना को बना रहे निशाना

एक ओर भारतीय सेना भारत-चीन सीमा पर निरंतर ही चीनी घुसपैठ का जवाब दे रही है तो वहीं भारत में मौजूद कुछ कॉन्ग्रेसी नेता और कॉन्ग्रेस समर्थक हर हाल में भारत-विरोध के नाम पर फर्जी खबरों के सहारे चीन के साथ खड़े नजर आना चाहते हैं। कॉन्ग्रेस की और से ताजा भ्रम पैंगोंग त्सो के स्वामित्व को लेकर फैलाया जा रहा है।

हालाँकि, ये कॉन्ग्रेसी नेता शायद ही यह बात जानते होंगे कि पैंगोंग त्सो झील और इसके स्वामित्व पर भारत का मजाक बनाने के चक्कर में वो अपने ही अल्प विकसित दिमाग का परिचय दे बैठे हैं। ट्विटर पर ‘बेफिटिंग फैक्ट्स’ नाम के ट्विटर अकाउंट ने कुछ ऐसे कॉन्ग्रेसी नेताओं के ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं, जिनमें वो यह ‘साबित’ करने का प्रयास कर रहे हैं कि पैंगोंग त्सो झील भारत नहीं बल्कि चीनी के अधिकार क्षेत्र में है।

इस ट्विटर अकाउंट ने लिखा है, “यहाँ कुछ कॉन्ग्रेसी चीन के साथ समझौते का पालन कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि पैंगोंग त्सो भारत तक ही सीमित है, लेकिन वास्तव में पैंगोंग झील का लगभग 60% हिस्सा चीनी कब्जे वाले तिब्बत में है। हर भारतीय को यह जानना चाहिए कि कैसे इन ‘पिद्दियों’ ने झूठे प्रचार से चीन की मदद की है।”

इन स्क्रीनशॉट्स में जो कॉन्ग्रेसी नेता पैंगोंग झील पर भारत के स्वामित्व का मजाक बनाने हैं उनमें कुछ प्रमुख नाम अशोक स्वाइन, गौरव पांधी, और सरल पटेल शामिल हैं।

पैंगोंग त्सो

वास्तव में, कॉन्ग्रेस के ये नेता शायद यह तथ्य नहीं जानते हैं कि पैंगोंग झील का 45 किलोमीटर लंबा पश्चिमी भाग भारतीय नियंत्रण में है, जबकि शेष चीन के नियंत्रण में है। दोनों सेनाओं के बीच अधिकांश झड़पें झील के विवादित हिस्से में ही होती हैं। हालाँकि, इसके अलावा इस झील का कोई विशेष सामरिक महत्त्व नहीं है।

लेकिन यह झील चुशूल घाटी के मार्ग में आती है। भारत के इस पर स्वामित्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चुशूल केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के लेह ज़िले में समुद्र तल से 4,300 मीटर या 15,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित एक गाँव है, जो कि चुशूल घाटी में बसा हुआ है।

13,000 फुट की ऊँचाई पर स्थित चुशूल घाटी LAC, वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास अपनी लोकेशन और बनावट के कारण सामान जमा करने और तैनाती के लिए बेहद अहम है। वर्ष 1962 के युद्ध के दौरान यही वह स्थान था जहाँ से चीन ने अपना मुख्य आक्रमण शुरू किया था।

गत 29-30 अगस्त की रात पैंगोंग त्सो के ब्लैक टॉप पर भी चीन ने कब्ज़ा जमाने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय सैनिकों ने चीन के दुस्साहस को नाकाम कर दिया था और ब्लैक टॉप पर तिरंगा लहरा दिया था। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि भारतीय सेना ने चुशूल के इलाकों में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है।

हालिया झड़पों में पैंगोंग त्सो के दक्षिणी किनारे पर चीनी सैनिकों की गतिविधि का भारतीय सेना ने विरोध किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेना ने चीन को आगे बढ़ने नहीं दिया और अब भारत ने इस इलाके में तैनाती और बढ़ा दी है।

इस झड़प के बावजूद, चुशूल में ब्रिगेड कमांडर लेवल की फ्लैग मीटिंग चल रही है। 15 जून की रात को गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद चीन बॉर्डर पर हुई यह दूसरी सबसे बड़ी घटना है।

वहीं, 7 सितंबर की रात चीनी सैनिकों ने पहले भारतीय चौकी के पास आकर फायरिंग की। इसके बाद चीनी मीडिया ने इस घटना के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया है। चीनी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने चीनी सेना के वेस्टर्न थियेटर कमांड के प्रवक्ता के हवाले से दावा किया है कि भारतीय सेना ने पैंगोंग त्सो के दक्षिण किनारे के पास शेनपाओं की पहाड़ी पर एलएसी पार की।