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…तो अमेरिका पर फिर होगा 9/11 जैसा आतंकी हमला: जानिए, लादेन की भतीजी नूर ने अमेरिकियों को क्यों चेताया

खूँखार आतंकी ओसामा बिन लादेन की भतीजी नूर बिन लादेन ने दावा किया है कि जो बिडेन अगर संयुक्त राष्ट्र अमेरिका का राष्ट्रपति बनने में कामयाब हो गए तो 9/11 जैसा हमला होने की आशंका होगी। उनके अनुसार ऐसी स्थिति को सिर्फ डोनाल्ड ट्रम्प ही रोक सकते हैं। नूर ने ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ से बातचीत के दौरान ये बातें कही। ट्रम्प समर्थक नूर वैसे तो स्विट्ज़रलैंड में रहती हैं लेकिन वो खुद को दिल से अमेरिकन ही मानती हैं।

नूर और उनका परिवार ओसामा के उलट अपने नाम को अंग्रेजी में ‘लादेन’ की जगह ”लादिन (Ladin) लिखता है। नूर की माँ कार्मेन डफौर स्विस लेखिका हैं और उनके पिता इस्लाम बिन लादेन 26/11 के मास्टरमाइंड ओसामा के सौतेले बड़े भाई हैं। नूर के माता-पिता का काफी पहले ही तलाक हो गया था। नूर और उनकी बहन का पालन-पोषण स्विट्जरलैंड में ही हुआ था। उनकी बहन भी कई फोटोशूट के कारण सुर्ख़ियों में रहती आई हैं।

नूर ने कहा कि जब बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति थे और जो बिडेन उप-राष्ट्रपति हुआ करते थे, उस दौर में आईएसआईएस को बढ़ाने का अच्छा-खासा मौक़ा मिला। नूर का मानना है कि इसी कारण खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन आईएसआईएस का यूरोप तक प्रसार हुआ। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रम्प ने ये दिखा दिया है कि वो विदेशी ताकतों से अमेरिका को और हमें बचा सकते हैं। 33 वर्षीय नूर ने अपने पहले इंटरव्यू में ये बातें कही।

नूर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे पहले कि आतंकी कुछ करें, वो उनकी जड़ों को ही काट डालते हैं। उन्होंने दावा किया कि वो 2015 के शुरूआती दिनों से ही डोनाल्ड ट्रम्प की बड़ी समर्थक हैं, जब उन्होंने बतौर राष्ट्रपति उम्मीदवार चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि वो ट्रम्प को देखती हैं और उनके संकल्पों की सराहना करती हैं। उन्होंने कहा कि ट्रम्प को दोबारा लौट कर आना ही चाहिए।

बकौर नूर, ट्रम्प का फिर से चुन कर आना न सिर्फ अमेरिका के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि पूरे पश्चिमी सभ्यता के लिए ये अच्छा है। इस दौरान नूर ने इस्लामी कट्टरपंथ और वामपंथ के बीच दिख रहे गठजोड़ की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि अगर हम पिछले दो दशकों में यूरोप में हुए सारे आतंकी हमलों पर नजर डालें तो हमें पता चलता है कि इस्लामी कट्टरपंथ ने हमें जड़ से हिला दिया है, हमारे समाज में घुसपैठ कर ली है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका में ये काफी भयावह है कि वामपंथियों ने इसी कट्टरवादी इस्लामी विचारधारा के साथ पूरी तरह गठजोड़ कर लिया है। उन्होंने कहा कि वो अपने आसपास के लोगों के विरोध के बावजूद ट्रम्प के स्लोगन ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA)’ वाला हैट पहनती हैं। उन्होंने बताया कि एक बार तो उन्हें ये हैट पहनने के लिए टोक भी दिया गया था। नूर अमेरिका को अपना दूसरा घर मानती हैं और वहाँ की राजनितिक खबरों से खुद को अपडेटेड रखती हैं।

नूर का कहना है कि फॉक्स न्यूज़ पर आने वाला ‘Tucker Carlson Tonight’ उनका पसंदीदा शो है। नूर का कहना है कि वो किसी भी मजहब के बिना ही बड़ी हुई हैं। साथ ही वो अमेरिका की राजनेता इल्हाना उमर की विरोधी हैं। उनका कहना है कि अगर उमर को लगता है कि अमेरिका में इतनी ज्यादा नफरत है तो उन्हें अमेरिका छोड़ कहीं और चले जाना चाहिए। उन्होंने इस्लामी कट्टरवाद की विरोधी नेता लॉरा लूमर की प्रशंसा की।

बता दें कि डोनाल्ड ट्रम्प अक्सर ‘रैडिकल इस्लामिक टेररिज्म’ के खिलाफ मुखर रहे हैं और हर छोटे-बड़े मंच से इसका विरोध करते रहे हैं। उन्होंने पीएम मोदी के अमेरिका में हुए ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में भी अपने इस संकल्प को दोहराया था, जिसके बाद ऑडियंस से उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन मिला था। अपने अहमदाबाद दौरे में भी उन्होंने ये बात कही थी। आईएसआईएस के खिलाफ उनके सख्त रवैये के कारण कई लोग उन्हें पसंद करते हैं।

आमिर और नसीरुद्दीन शाह को हरामखोर नहीं कहा, मैं 9 को आ रही हूँ: कंगना की संजय राउत को खरी-खरी

खुद को हरामखोर कहने वाले शिवसेना सांसद संजय राउत को अभिनेत्री कंगना रनौत ने वीडियो जारी कर जवाब दिया है। साथ ही स्पष्ट कर दिया है कि महाराष्ट्र के सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं की धमकी के बावजूद वह 9 सितंबर को मुंबई जाएँगी।

कंगना ने अपने आधिकारिक ट्विटर एकाउंट पर वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा, “संजय जी मुझे अभिव्यक्ति की पूरी आज़ादी है। मुझे अपने देश में कहीं भी जाने की आज़ादी है। मैं आज़ाद हूँ।”

वीडियो में कंगना ने कहा है, “संजय राउत जी आपने मुझे कहा कि मैं एक हरामखोर लड़की हूँ। आप एक सरकारी मुलाजिम हैं। आप तो जानते ही होंगे कि इस देश मे हर दिन नहीं, हर घंटे कितनी लड़कियों के साथ बलात्कार हो रहे हैं। कितनी लड़कियों का शोषण किया जा रहा है। उनकी बॉडी काट कर एसिड डाल फेंक दी जा रही है। उनके काम के जगहों पर उनको गालियाँ दी जा रही है, उनका अपमान किया जा रहा है। उनके खुद के पति उनका कान, नाक, मुँह और जबड़े तोड़ रहे हैं।”

एक्ट्रेस वीडियो में आगे कहती हैं कि संजय जी आपको पता है इन सबका जिम्मेदार कौन है? इन सबका जिम्मेदार है ये मानसिकता। आपने जिसका भौंडा प्रदर्शन पूरे समाज के सामने, पूरे देश के सामने किया है। वो मानसिकता इसकी जिम्मेदार है और इस देश की बेटियाँ आपको इसके लिए माफ नहीं करेंगी। आपने उन सब महिलाओं का शोषण करने वालों का सशक्तिकरण किया है। इस देश की बेटियाँ आपको माफ़ नहीं करेंगी।

कंगना ने अपने वीडियो में उस समय को भी याद किया जब आमिर खान और नसीरुद्दीन शाह ने कहा था कि उन्हें देश में रहने से डर लगता है। उन बयानों को याद करते हुए कंगना ने कहा है, “जब आमिर खान और नसीरुद्दीन शाह ने देश के खिलाफ कहा था, तब तो किसी ने हरामखोर नहीं कहा?”

कंगना रनौत ने आगे कहा, “जिस मुंबई पुलिस की मैं तारीफ करते नहीं थकती थी, आप देख लीजिए मेरे पुराने कोई भी इंटरव्यू। आज जब वो पालघर की लिंचिंग में साधुओं के सामने कुछ नहीं करते हैं। एक लाचार बाप सुशांत के पिता के एफआईआर नहीं लेते हैं और मेरे स्टेटमेंट नहीं लेते हैं तो इस प्रशासन के चलते हुए मैं उनकी निंदा करती हूँ। ये मेरी अभिव्यक्ति की आजादी है। मैं उनकी निंदा करती हूँ और संजय जी मैं आपकी निंदा करती हूँ। आप महाराष्ट्र नहीं हैं। आप ये नहीं कह सकते कि मैंने महाराष्ट्र की निंदा की है।”

उन्होंने मुंबई वापस आने के बारे में बोलते हुए कहा, “संजय जी मैं 9 सिंतबर को आ रही हूँ और आपके लोग कह रहे हैं कि मेरा जबड़ा तोड़ देंगे और मुझे मार डालेंगे। आप लोग मार डालिए क्योंकि इस देश की जो मिट्टी है वो ऐसे ही खून से सींचकर इस देश की गरिमा है और अस्मिता के लिए न जाने कितने लोगों ने अपनी जान दी है और हम भी देंगे क्योंकि हमको भी वो कर्ज निभाना है। मिलते हैं 9 सितंबर को। जय हिंद जय महाराष्ट्र।”

गौरतलब है कि इससे पहले संजय राउत ने सोशल मीडिया के जरिए कंगना पर निशाना साधा था। उन्होंने ट्वीट के जरिए कंगना को धमकाने की कोशिश की थी। राउत ने ट्वीट किया, “मेरी हिम्मत को परखने की गुस्ताखी न करना, पहले भी कई तूफानों का रुख मोड़ चुका हूँ।”

राउत ने कहा था, “अगर वह लड़की महाराष्ट्र से माफी माँगती है तो मैं माफी माँगने के बारे में सोचूँगा। वह मुंबई को मिनी पाकिस्तान कहती है। क्या उसमें हिम्मत है कि वह यही बात अहमदाबाद के लिए कह दे?”

सना खान का यार सैफ अंसारी गिरफ्तार: एक देवी-देवताओं को गाली देती, दूसरा यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करता

सोशल मीडिया पर हिंदू देवी-देवताओं के लिए अश्लील टिप्पणी करने वाली हीर खान उर्फ सना खान के सहयोगी सैफ अंसारी को भी पुलिस ने कानपुर स्थित उसके घर से अरेस्ट कर लिया है। हीर खान के वीडियो को सैफ ही यूट्यूब पर अपलोड करता था। कट्टरपंथी संगठनों के साथ सैफ के कनेक्शन की भी पुलिस पड़ताल कर रही है।

प्रयागराज पुलिस ने ट्वीट कर इस मामले की जानकारी साझा की है। पुलिस ने कहा, “सोशल मीडिया पर धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने सम्बन्धी भड़काऊ भाषण देने व अपलोड करने वाली महिला सना उर्फ हीर खान का मित्र अभियुक्त सैफ अंसारी को गिरफ्तार किया गया।” यह गिरफ्तारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक दीक्षित के नेतृत्व में खुल्दाबाद पुलिस द्वारा की गई है।

प्रयागराज पुलिस ने इस संबंध में एक प्रेस विज्ञप्ति भी जारी किया है। इसके मुताबिक, “प्रयागराज की रहने वाली सना उर्फ हीर खान के साथ मिलकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स यूट्यूब पर वीडियो के माध्यम से धर्म विशेष व सरकार को लेकर अशोभनीय टिप्पणी की गई है, इन वीडियोज को अपलोड किए जाने से भारत के विभिन्न धर्मों व समुदायों में वैमनस्यता फैलाने वाला घृणा पैदा करने वाला कृत्य किया गया है। आरोपी सैफ अंसारी, हीर खान के साथ मिलकर भड़काऊ टिप्पणी करने वाली वीडियो प्रेषित करता था।”

विज्ञप्ति के मुताबिक, अंसारी के खिलाफ प्रयागराज के खुल्दाबाद थाने में आईपीसी की विभिन्न धाराओं और आईटी कानून की धारा 66 के तहत मुकदमा दर्ज है। सना खान को इस मामले में 25 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। सना खान के फोन और कॉल रिकॉर्ड की भी पुलिस जाँच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन-कौन से लोग उससे जुड़े हुए थे। हीर खान फेसबुक, ट्विटर के अलावा यूट्यूब के जरिए भड़काऊ कंटेट जारी करती थी और हिंदू देवी-देवताओं को गाली भी देती थी।

हीर खान से पूछताछ के दौरान पुलिस को सैफ अंसारी का पता चला था। सैफ ने पुलिस रिमांड में बताया कि वह पहले गुजरात के सूरत में दर्जी का काम करता था। सोशल मीडिया के माध्यम से उसकी दोस्ती हीर खान से हुई। लॉकडाउन में वह कानपुर वापस आ गया था। इसी दौरान वह हीर के साथ मिल कर वीडियो बनाता और उसे यूट्यूब पर अपलोड कर उसके लिंक को व्हाट्सअप के जरिए लोगों को भेज वायरल करता था।

गौरतलब है कि हीर खान को प्रयागराज पुलिस ने 25 अगस्त को गिरफ्तार किया था। हीर खान को उसके यूट्यूब चैनल पर हिंदू विरोधी वीडियो पोस्ट करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। 28 वर्षीय यूट्यूबर (YouTuber) पर धारा 153A/505 IPC और 66 IT कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा हीर खान पर राष्ट्रदोह का मामला भी दर्ज किया गया था।

यूट्यूब चैनल ‘ब्लैक डे 5 अगस्त’ पर हीर खान ने ऐसा वीडियो साझा किया था, जिसमें हिन्दू देवी-देवताओं को जम कर गालियाँ बकी गई थी। यूट्यूबर हीर खान ने इस वीडियो में माँ सीता के लिए ‘₹#डी’ शब्द का प्रयोग किया था और अयोध्या को एक ‘₹#डीखाना’ करार दिया था। गिरफ्तारी के बाद हीर खान का पाकिस्तानी कनेक्शन भी सामने आया था।

नोमान ने रेप किया, रहबर ने Video बनाया: सहारनपुर की नाबालिग पीड़िता ने जहर खा कर दी जान

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। नोमान ने 17 साल की नाबालिग से रेप किया। उसके ड्राइवर रहबर ने इसका वीडियो बनाया। इसके बाद पीड़िता ने शुक्रवार (4 सितंबर 2020) को ज़हर खा कर जान दे दी। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना सहारनपुर जिले के गंगोह थाना क्षेत्र की है। नाबालिग से जब नोमान रेप कर रहा था तो उसका ड्राइवर रहबर इसका वीडियो बना रहा था। उन्होंने पीड़िता को धमकी दी कि अगर उसने घटना के बारे में किसी को भी बताया तो वह वीडियो सोशल मीडिया पर डाल देंगे। ख़बरों के मुताबिक़ परिवार वालों ने बताया कि पीड़िता वीडियो की बात से अवसाद में थी।  

शुक्रवार की दोपहर उसने ज़हर खा लिया। परिवार वाले उसे सामुदायिक अस्पताल लेकर गए। वहाँ से लड़की को सहारनपुर स्थित बड़े अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उसकी मृत्यु हो गई। लड़की के भाई द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़ नोमान ने उसकी बहन के साथ बलात्कार किया था और ड्राइवर रहबर ने घटना का वीडियो बनाया। उन्होंने पहले धमकी दी कि वह वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर देंगे और उसके बाद आरोपितों ने वीडियो साझा कर दिया। 

इसके बाद नोमान और रहबर पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 306 और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। घटना पर पुलिस अधीक्षक सहारनपुर ग्रामीण अशोक कुमार मीणा ने कहा, “हमें जानकारी मिली थी कि नाबालिग लड़की ने ज़हर खा लिया है। इसके बाद पीड़िता के परिवार वालों ने लिखित में शिकायत दी कि दो युवकों ने उसके साथ बलात्कार किया है। आरोपितों ने बलात्कार का वीडियो भी बनाया और उसे सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। इस बात से आहत होकर पीड़िता ने आत्महत्या कर ली। आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है और आगे की कार्रवाई जारी है।”   

‘सुशांत की आड़ में बॉलीवुड को कर रहे बदनाम’: जावेद अख्तर की बेटी से लेकर करीना कपूर तक ने किया समर्थन

प्रोड्यूसर गिल्ड ऑफ़ इंडिया ने बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में मीडिया कवरेज पर सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया है कि इसकी आड़ में फिल्म इंडस्ट्री को बदनाम किया जा रहा है। गिल्ड के इन आरोपों का बॉलीवुड के कई नामचीनों ने समर्थन किया है। इसमें जावेद अख्तर की फिल्मकार बेटी जोया अख्तर से लेकर करीना कपूर तक शामिल हैं।

गिल्ड के बयान को सोशल मीडिया पर जोया और उनके भाई फरहान अख्तर ने साझा किया है। करीना कपूर ने जोया की इंस्टाग्राम स्टोरी को शेयर कर अपना समर्थन देते हुए लिखा, “मैं अपनी इंडस्ट्री के साथ हूँ (With My Industry)।”

साभार: kareena kapoor instagram

प्रोड्यूसर गिल्ड ऑफ इंडिया को बॉलीवुड अभिनेत्री और अनिल कपूर की बेटी सोनम कपूर का भी साथ मिला। सोनम कपूर ने इस चिट्ठी को अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर करते हुए एकजुटता दिखाई।

इसके अलावा बॉलीवुड अभिनेत्री और शत्रुघ्न सिन्हा की बेटी सोनाक्षी सिन्हा ने भी इसका समर्थन किया है। इसमें स्वरा भास्कर का भी नाम शामिल है।

अपने स्टेटमेंट में गिल्ड ने कहा, “पिछले कुछ महीनों से सभी मीडिया द्वारा भारतीय फिल्म उद्योग की प्रतिष्ठा पर लगातार हमला किया जा रहा है। एक होनहार युवा कलाकार की दुखद मृत्यु को कुछ लोग फिल्म उद्योग और उसके सदस्यों का नाम बदनाम करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।”

बयान में कहा गया है कि एक युवा एक्टर के मौत को कुछ लोगों ने बॉलीवुड को किसी भयानक और अंधकार भरी जगह साबित करने का हथियार बना लिया है, जहाँ शोषण और अपराध ही होता है। ऐसा दिखाया जा रहा है कि बॉलीवुड में बाहर से आने वाले लोगों को समझौतों और शर्तों के बिना कहीं पहुँचने नहीं दिया जाता और उनसे भेदभाव किया जाता है। जाहिर है ऐसी धारणाओं को मीडिया संस्थाएँ अपनी रेटिंग्स बढ़ाने में इस्तेमाल करती हैं। लेकिन यह सब कुछ गलत है।

गिल्ड ने लिखा है, “इंडस्ट्री ने लाखों लोगों को रोजगार दिया है। टूरिज़्म को बढ़ावा दिया है। 100 सालों से ज्यादा से सबका मनोरंजन करती आ रही है और दुनिया भर की कलाओं का प्लेटफॉर्म देती आ रही है। जब भी जरूरत पड़ी है, इंडस्ट्री ने हमेशा मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं।”

गौरतलब है कि एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर बहस छिड़ी हुई है। पिछले दिनों सोशल मीडिया पर लोगों ने आरोप लगाया था कि ‘भाई-भतीजावाद’ की वजह से ही सोनम फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा हैं। इसके बाद सोनम कपूर ने फादर्स डे के मौके पर ट्विटर पर नेपोटिज्म का बचाव करते हुए कहा था कि अनिल कपूर की बेटी होने पर उन्हें गर्व है। उन्हें यह बात कहने में हिचक नहीं है कि अपने कर्म की वजह से वह उनके घर पैदा हुईं और इसका उन्हें फायदा हुआ।

हर मुद्दे पर अपनी राय काफी मुखर होकर रखने वाली अभिनत्री कंगना रनौत ने पिछले दिनों इंडस्ट्री के फिल्म-माफियाओं को लताड़ लगाते हुए कहा था कि इस काम में ऐसे गिरोह हैं जिनका लक्ष्य राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाना है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुशांत सिंह राजपूत के मामले को सीबीआई को हस्तांतरित करने के बाद रिपब्लिक टीवी के प्रमुख अर्नब गोस्वामी से बात करते हुए, बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने कहा कि जावेद अख्तर, नसीरुद्दीन शाह जैसे लोगों को फिल्म उद्योग में भाई-भतीजावाद और पक्षपात की मानसिकता को स्थापित करने के लिए काम किया है।

ड्रग्स माफिया को लेकर गौरी लंकेश के फिल्ममेकर भाई ने किए कई खुलासे, कन्नड़ इंडस्ट्री के टॉप एक्टर और मॉडल शामिल

फिल्म इंडस्ट्री में ड्रग्स के इस्तेमाल को लेकर देश में जारी बहस के बीच कर्नाटक में बड़े ड्रग्स रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। बीते हफ्ते कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की एक टॉप अभिनेत्री की इस सिलसिले में गिरफ्तारी के बाद पूरा मामला सामने आया है।

बेंगलुरु में क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने मादक पदार्थ के इस्तेमाल के मामले में कन्नड़ अभिनेत्री रागिनी द्विवेदी को गिरफ्तार किया था। इस मामले में कई और हीरोइन, संगीतकार भी पुलिस के शिकंजे में हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर ड्रग रैकेट से जुड़े हुए हैं।

ड्रग्स का यह रैकेट एम अनूप, अनिखा डी और आर रविंद्र की गिरफ्तारी के बाद सामने आया। नारकोटिक्स ब्यूरो ने बेंगलुरु शहर में चल रहे ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए इनको गिरफ्तार किया था। इनकी गिरफ्तारी से पता चला कि कुछ प्रमुख संगीतकार, टॉप अभिनेता और वीआईपी के बच्चे भी ड्रग रैकेट में शामिल हैं।

बेंगलुरु में एनसीबी अधिकारियों द्वारा ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ करने के तुरंत बाद, लोकप्रिय कन्नड़ निर्देशक इंद्रजीत लंकेश ने ड्रग और नशीली दवाओं की तस्करी में कुछ टॉप अभिनेताओं की भागीदारी के बारे में एक चौंकाने वाला खुलासा किया।

उन्होंने आरोप लगाया था कि जाँच के दौरान दो नई अभिनेत्रियों के नाम सामने आए थे, लेकिन कथित राजनीतिक संबंध के कारण उनसे कोई सवाल नहीं किया गया। इंद्रजीत, पत्रकार गौरी लंकेश के भाई हैं जिनकी तीन साल पहले उन्हीं के घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

लंकेश ने यहाँ तक ​​कहा कि यदि पुलिस उन्हें संरक्षण देने का वादा करती है, तो वह इस तरह के कई तथ्य सामने रखेंगे। फिल्म निर्माता ने आरोप लगाया था कि ड्रग्स इंडस्ट्री और सैंडलवुड के बीच एक संबंध है। कुछ अभिनेत्रियाँ पार्टियों में प्रतिबंधित पदार्थों का सेवन करती हैं और शूटिंग के दौरान उन्हें अपने वैनिटी वैन में भी ले जाती हैं।

वहीं सेलिब्रिटी मैनेजर प्रशांथ सांभरगी (Prashanth Sambaragi) ने यह आरोप लगाया था कि सैंडलवुड में ड्रग रैकेट का कर्नाटक राजनीतिक हलकों के साथ-साथ बॉलीवुड से भी संबंध है। दिलचस्प बात यह है कि सांभरगी ने सैंडलवुड ड्रग मामले में इम्तियाज खत्री नाम के एक ड्रग पेडलर के शामिल होने का भी जिक्र किया। खत्री वर्तमान में मृतक अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत को ड्रग्स की सप्लाई के लिए सीबीआई के जाँच के दायरे में है।

सांभरगी ने आरोप लगाया था कि इम्तियाज ने 2017 में अपने जन्मदिन की पार्टी होस्ट की थी। पार्टी में संजय दत्त और सलमान खान जैसे बॉलीवुड सितारे भी शामिल थे। सांभरगी के अनुसार, पार्टी में कर्नाटक के एक विधायक और उनके बेटे भी मौजूद थे। विधायक पहले जेडी (एस) के साथ थे और बाद में कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए थे। सांभरगी ने खुलासा किया कि पार्टी में कई सैंडलवुड अभिनेता भी पार्टी में शामिल हुए थे।

इंद्रजीत लंकेश ने भी शनिवार को सीसीबी को बयान दिया और ड्रग रैकेट में शामिल लोगों के वीडियो, एकाउंट नंबर और फोन नंबर जैसे सबूत पेश किए। CCB सैंडलवुड में ड्रग रैकेट की विस्तृत जाँच कर रही है। सीसीबी ने पिछले गुरुवार को इस मामले में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में सेकंड डिवीज़न क्लर्क (एसडीसी) के रविशंकर को गिरफ्तार किया। जैसे ही पुलिस ने ड्रग मामले में उसकी संलिप्तता के बारे में पूछताछ की, उसने कन्नड़ अभिनेत्री रागिनी द्विवेदी की संलिप्तता को लेकर खुलासा किया।

बेंगलुरु की केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) ने शुक्रवार को प्रारंभिक जाँच के बाद, अभिनेत्री रागिनी द्विवेदी को गिरफ्तार कर लिया। उनके आवास पर छापा भी मारा। महिला अधिकारियों सहित सीसीबी की एक टीम द्विवेदी के आवास पर पहुँची थी और उनके घर से महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की थी।

कथित तौर पर, रागिनी का नाम गोवा के एक ड्रग पेडलर अहमद द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद सामने आया कि उसने रविशंकर को ड्रग्स की सप्लाई की थी। कथिततौर पर रागिनी और रविशंकर रिश्ते में थे। वहीं पूछताछ के दौरान रविशंकर ने राहुल नाम के एक शख्स का नाम लिया था, जो श्रीलंका में कैसिनो चलाता है। इसके अलावा कार्तिक राज नाम के रिश्तेदार का भी नाम लिया था।

दिलचस्प बात यह है कि राहुल की प्रेमिका संजना गलरानी है, जिसका नाम ड्रग मामले में भी आया है। वहीं अन्य आरोपित कार्तिक राज के अभिनेत्री शर्मिला मंड्रे के साथ अच्छे संबंध है। बता दें इस साल अप्रैल में मंड्रे बेंगलुरु की सड़कों पर लापरवाह ड्राइविंग के चलते हुए एक कार दुर्घटना के कारण विवादों में घिर गई थी।

गौरतलब है कि मामले में टॉप प्रभावशाली अभिनेत्रियों के नाम सामने आने के बाद अब सीसीबी ने ड्रग तस्करी मामले में गहन जाँच शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में, CCB ड्रग रैकेट मामले के संबंध से जुड़े कई और अभिनेताओं, कलाकारों और मॉडल से पूछताछ कर सकती है।

इस दौरान सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) पुलिस ने सैंडलवुड ड्रग माफिया मामले में 12 लोगों पर मामला दर्ज किया है। इस मामले में पुलिस अभिनेत्री रागिनी द्विवेदी, उनके दोस्त रविशंकर, राहुल शेट्टी और एक इवेंट मैनेजर, वीर खन्ना को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। सभी आरोपितों के खिलाफ धारा 21, 21C, 27A, 27B, और 29B नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

रिया की ड्रग्स पार्टी में शामिल होते थे बॉलीवुड के बड़े नाम, NCB ने महिला हवालात की सफाई के बाद बुलाया

रिया चक्रवर्ती को समन भेजे जाने के बाद एनसीबी द्वारा उनसे पूछताछ की जा रही है। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद सामने आए ड्रग्स एंगल से जाँच के दौरान कई बड़े खुलासे हो रहे हैं। NCB के जोनल डायरेक्टर वानखेड़े और डिप्टी डायरेक्टर केपीएस मल्होत्रा ने रिया चक्रवर्ती से पूछताछ की कमान थाम रखी है। इस दौरान रिया से पूछा जाएगा कि क्या वो खुद ड्रग्स का सेवन करती हैं और अगर हाँ तो कौन-कौन सी?

साथ ही रिया चक्रवर्ती के चैट से सामने आई ड्रग्स देने और खरीदने-बेचने के बाबत भी उनसे सवाल किए जाएँगे। रुपयों का भुगतान कैसे किया जाता था और ड्रग्स की खरीद-फरोख्त में कौन-कौन से लोग शामिल थे, इस बारे में भी उनसे सवाल किए जाएँगे। शौविक और रिया में किसे पहले ड्रग्स की आदत लगी और पहले बार उन्होंने किन ड्रग्स का सेवन किया था, ये सवाल भी पूछे जाएँगे। साथ ही सुशांत के ड्रग्स सेवन से सम्बंधित सवाल भी होंगे।

कई मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि रिया ही सुशांत के लिए ड्रग्स मँगवाती थी। उन्होंने सुशांत को रोका क्यों नहीं, ये भी एनसीबी का सवाल होगा। शौविक चक्रवर्ती की तरह क्या रिया द्वारा भी ड्रग्स का इस्तेमाल मुनाफा कमाने के लिए किया जा रहा था, ये सवाल भी होंगे। रिया चक्रवर्ती ने बीमार सुशांत को ड्रग्स क्यों दिया और बॉलीवुड में इस ड्रग नेटवर्क में उनसे कौन-कौन लोग संपर्क में हैं, एनसीबी का ये भी सवाल होगा।

रिया चक्रवर्ती को शौविक और सैमुअल के साथ बिठा कर भी पूछताछ की जाएगी। दोनों को एनसीबी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। बयानों में भिन्नता आने पर उन्हें साथ बिठाया जाएगा। इस दौरान रिया चक्रवर्ती के समक्ष उनके व्हाट्सप्प चैट की सीडीआर डिटेल्स भी दिखाई जाएगी। एनसीबी दफ्तर के महिला हवालात में सफाई और सैनिटाइजेशन के बाद रिया को बुलाया गया। इस मामले में कई और राज खुलने कई सम्भावना है।

उधर सैमुअल मिरांडा और दीपेश सावंत ने एनसीबी की पूछताछ के दौरान बताया कि सुशांत के फ्लैट पर अक्सर ड्रग्स पार्टी हुआ करती थी, जिसमें कई बड़े बॉलीवुड सेलेब्स भी पहुँचते थे। सैमुअल ने ड्रग्स के खरीद-फरोख्त में शौविक चक्रवर्ती का अहम किरदार बताया। शौविक ने ही उसे एक दोस्त सूर्यदीप का नंबर दिया था, उसने करमजीत नाम के एक सप्लायर का नंबर भी दिया था जो 2500 रुपए में एक पैकेट उपलब्ध कराता था।

उधर मृत्यु के बाद सुशांत सिंह राजपूत की गर्दन पर दिखे निशान को लेकर हो रही चर्चा अब सीबीआई जाँच तक पहुँच गई है। AIIMS के डॉक्टरों की टीम ने इस सम्बन्ध में कूपर हॉस्पिटल के उन डॉक्टरों से जवाब माँगा है, जिन्होंने सुशांत सिंह राजपूत का पोस्टमॉर्टम किया था। एम्स के तीन डॉक्टरों की टीम ने कूपर हॉस्पिटल के डॉक्टरों से पूछताछ की। एम्स के डॉक्टरों ने इस दौरान सुशांत के गले में बने निशान को लेकर भी सवाल दागे।

परिवार के मोह से निकलिए, वरना इतिहास बन जाएगी पार्टी: कॉन्ग्रेस में फिर लेटर वॉर, सोनिया को यूपी से खुला खत

नेतृत्व में बदलाव को लेकर 23 वरिष्ठ नेताओं की ओर से लिखे पत्र पर कॉन्ग्रेस में विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ है। इसी बीच, यूपी कॉन्ग्रेस के नौ निष्कासित सदस्यों ने सोनिया गॉंधी को खुला पत्र लिखकर नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं।

पिछले साल पार्टी से निष्कासित नौ वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेताओं ने अंतरिम अध्यक्ष भेजे पत्र में कहा है कि वह पार्टी को महज ‘इतिहास’ का हिस्सा बनकर रह जाने से बचा लें। चार पन्नों के पत्र में यूपी की प्रभारी व पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी को परोक्ष रूप से निशाने पर लेते हुए सोनिया गाँधी से परिवार से ऊपर उठने का आग्रह किया गया है। पत्र में लिखा गया है, ‘परिवार के मोह से ऊपर उठें’ और पार्टी की लोकतांत्रिक परंपराओं को पुनर्स्थापित करें।

पूर्व सांसद संतोष सिंह, पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी, पूर्व विधायक विनोद चौधरी, भूधर नारायण मिश्रा, नेकचंद पांडे, स्वयं प्रकाश गोस्वामी और संजीव सिंह के दस्तखत वाले पत्र में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। 

‘मिलने के लिए एक साल से माँग रहे अपॉइंटमेंट’

पत्र में आगे कहा गया है, “इस बात की आशंका है कि आपको राज्य मामलों के प्रभारी द्वारा मौजूदा स्थिति से अवगत नहीं कराया जा रहा है। हम लगभग एक साल से आपसे मिलने के लिए अपॉइंटमेंट की माँग कर रहे हैं, लेकिन मना कर दिया जाता है। हमने अपने निष्कासन के खिलाफ अपील की थी जो अवैध था, लेकिन केंद्रीय अनुशासन समिति को भी हमारी अपील पर विचार करने का समय नहीं मिला।”

वेतनभोगियों का पार्टी पर कब्जा

पत्र में दावा किया गया है कि पार्टी के पदों पर उन लोगों का कब्जा है जो वेतन के आधार पर काम कर रहे हैं और पार्टी के प्राथमिक सदस्य भी नहीं हैं। पत्र में कहा गया है, “ये नेता पार्टी की विचारधारा से परिचित नहीं हैं, लेकिन उन्हें यूपी में पार्टी को दिशा देने का काम सौंपा गया है।”

‘लोकतांत्रिक मानदंडों की धज्जियाँ उड़ाई जा रहीं’

इसमें आगे कहा गया है कि ये लोग उन नेताओं के प्रदर्शन का आकलन कर रहे हैं जो 1977-80 के संकट के दौरान कॉन्ग्रेस के साथ चट्टान की तरह खड़े थे। लोकतांत्रिक मानदंडों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है, अपमानित किया जा रहा है, निकाला जा रहा है। उनका कहना है कि उन्हें उनके निष्कासन के बारे में भी मीडिया से ही पता चला था, जिससे राज्य इकाई में नई कार्य संस्कृति का पता चलता है।

नेताओं और कार्यकर्ताओं में संवाद की कमी

पत्र में आरोप लगाया गया है कि नेताओं और पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच संवाद की कमी है। इन नेताओं ने कहा है कि यूपी में एनएसयूआई और युवा कॉन्ग्रेस निष्क्रिय से हो गए हैं। कॉन्ग्रेस आलाकमान से वरिष्ठ नेताओं के साथ संवाद को बढ़ावा देने का आग्रह किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा मामलों की ओर आँख मूँद लिया गया तो कॉन्ग्रेस को यूपी में तगड़ा नुकसान होगा, जो कभी पार्टी का गढ़ हुआ करता था। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब पार्टी उत्तर प्रदेश में पहले से ही गुटबाजी, मतभेदों का सामना कर रही है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों कॉन्ग्रेस के 23 नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी को चिट्ठी लिखकर ऊपर से नीचे तक बदलाव की माँग की थी। चिट्ठी लिखने वालों में 5 पूर्व सीएम, कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य, सांसद और कई पूर्व केंद्रीय मंत्री शामिल थे। 

इस चिट्ठी के बाद सोनिया गाँधी के वफादार गुट की इन नेताओं के साथ जमकर विवाद हुआ था और सोनिया के वफादार नेताओं ने इनकी तीखी आलोचना की थी। कॉन्ग्रेस कार्य समिति की बैठक में भी यह छाया रहा।

केरल: कोरोना संक्रमित लड़की से एंबुलेस ड्राइवर नौफल ने किया रेप, फिर पहुँचाया अस्पताल

केरल के पतनमतिट्टा (Pathanamthitta) जिले में कोरोना संक्रमित लड़की के साथ बलात्कार की घटना सामने आई है। आरोपित एंबुलेस चालक है और उसका नाम नौफल बताया जा रहा है। घटना रविवार (6 सितंबर 2020) देर रात 1 बजे के करीब की है। आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।  

रिपोर्टों के अनुसार नौफल अलाप्पुझा (Alappuzha) जिले का रहने वाला है और राज्य सरकार के 108 एंबुलेंस सर्विस विभाग से जुड़ा हुआ था। 20 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार की घटना उस वक्त हुई जब एंबुलेस के जरिए पतनमतिट्टा से कोज़ेनचेरी स्थित कोविड स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जा रहा था।

ख़बरों के मुताबिक एंबुलेंस में दो मरीज थे। स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक को कोज़ेनचेरी जिला अस्पताल लेकर जाने के लिए कहा और दूसरी को कोविड स्वास्थ्य केंद्र। इसके बाद नौफ़ल ने एक मरीज को जिला अस्पताल पहुँचाया और दूसरी को कोविड स्वास्थ्य केंद्र की तरफ लेकर गया। 

कोविड स्वास्थ्य केंद्र जाने से पहले उसने एर्नामुला हवाई अड्डे के पास लड़की के साथ बलात्कार किया। पीड़िता ने स्वास्थ्य केंद्र पहुँचने के बाद वहाँ मौजूद कर्मचारियों को पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद कर्मचारियों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। उसी वक्त पीड़िता ने अपना बयान भी दर्ज कराया। इसके बाद पुलिस ने आरोपित एम्बुलेंस चालक नौफ़ल को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को जाँच में पता चला कि आरोपित पर एक हत्या का मामला भी दर्ज है। फ़िलहाल पुलिस मामले की जाँच में जुटी हुई है और आरोपित की आपराधिक पृष्ठभूमि खँगाल रही है।

पतनमतिट्टा के पुलिस अधीक्षक केजी सिमोन ने बताया कि आरोपित नौफ़ल अलाप्पुझा का रहने वाला है। वह राज्य के स्वास्थ्य विभाग की एम्बुलेंस सेवा (108) में कार्यरत था। इसके अलावा नौफ़ल पर 2019 के दौरान हत्या का मामला भी दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि नौफ़ल लड़की को एर्नामुला हवाई अड्डे के पास एक सुनसान जगह पर लेकर गया। वहीं पर उसने बलात्कार किया।  

6 से 8 महीने का काम 14 दिन में: कोरोना से लड़ाई में Caring Indians का कमाल, डेवलप किया देशी वेंटिलेटर और मास्क

कोरोना महामारी के प्रकोप के कारण देश में लॉकडाउन लगना निस्संदेह बेहद जरूरी कदम था। मगर उतना ही आवश्यक था कि इससे प्रभावित वर्ग का भरण-पोषण और उनकी जरूरतें पूरी करना। कई जगह सरकार की मदद पहुँच रही थी। लेकिन कई जगह निम्न वर्ग के लोग इससे अछूते भी थे। इस बीच कई संस्थाएँ जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए सामने आईं। 

उन्होंने लॉकडाउन के कारण प्रभावित वर्ग को हर संभव मदद पहुँचाने का काम किया। इनमें अधिकांश संस्थाएँ उस वंचित वर्ग की बुनियादी जरूरतों जैसे राशन आदि को पूरा कर रही थीं। इसी दौरान स्वयंसेवकों के समूह वाली एक संस्था ‘केयरिंग इंडियन्स-बेटर टुगेदर (Caring Indians-Better Together)’ नाम से अस्तित्व में आई। इसने न केवल कोरोना प्रभावित समय में लोगों की बुनियादी जरूरतों को समझा बल्कि जरा हटकर उनके बचाव के लिए काम भी किया।

इस संस्था का उद्देश्य समाज के वंचित वर्ग का न केवल पेट भरना था बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी था। इसके लिए इन्होंने मास्क से लेकर वेंटिलेटर और पीपीई किट तक डेवलप कर डाले और उसका वितरण भी किया।

Caring Indians की सबसे खास बात यह है कि ये बुद्धिजीवियों के प्रयासों का फलितार्थ है। IIT से कई शिक्षाविद इससे जुड़े हैं। इसके अलावा कई इंजीनियर, डॉक्टर, वैज्ञानिक, कृषक, व स्वयंसेवक भी इसका जरूरी हिस्सा हैं। इन्हीं सबके सहयोग से Caring Indians देश के कई कोनों में अपनी सुविधा पहुँचाने में सफल रहा।

ऑपइंडिया ने इन्हीं प्रयासों के मद्देनजर केयरिंग इंडियन्स से जुड़े प्रोफेसर हर्ष चतुर्वेदी से बात की। उन्होंने इस संस्था पर जानकारी देते हुए हमें बताया, “यह एक वॉलिंटियरी ग्रुप है। इसकी शुरुआत राहुल राज और अनुराग दीक्षित ने की थी। फिर अलग-अलग क्षेत्र के लोग इससे जुड़ते गए। कुछ इसमें विनिर्माण क्षेत्र से थे और कुछ डिजाइन एक्सपर्स्ट्स भी थे। हम सब मिल कर केयरिंग इंडियन्स से जुड़े। हमारा काम कोरोना स्थिति से निबटने के लिए उत्पाद तैयार करना था। हमने सबसे अहम काम मास्क पर किया।”

बतौर मास्क डिजाइन करने वाली टीम का हिस्सा होने के नाते प्रोफेसर हर्ष कहते हैं, “इस मास्क को बहुत यूनिकली डिजाइन किया गया है। इसकी खासियत है कि ये वाटरप्रूफ है। इसमें फिल्ट्रेशन की क्षमता है। साथ ही इसकी कीमत भी बहुत कम है। शायद सिर्फ़ 95 रुपए के आसपास। इन सबके अलावा इसके फिल्टर्स को आसानी से बदला भी जा सकता है।” 

Caring Indians के द्वारा डिजाइन किए मास्क पहने लोग

प्रोफेसर हर्ष के अनुसार, डिजाइन टीम में उनके अलावा मुख्य रूप से IIT गुवाहटी की चारू मोंगा, राहुल राज और अनुराग शामिल थे। वह बताते हैं कि इन मास्कों का दिल्ली से लेकर यूपी और बिहार तक में वितरण किया गया है।

गौरतलब है कि केयरिंग इंडियन्स द्वारा निर्मित इस मास्क की महत्ता और विश्वसनीयता को इस बात से परखा जा सकता है कि हाल ही में इसे बिहार विधान परिषद में भी देखा गया।

बिहार विधान परिषद में पहुँचा केयरिंग इंडियन्स का मास्क

इसकी जानकारी स्वयं राहुल राज ने अपने ट्विटर पर दी  थी। उन्होंने अपने ट्वीट में इस बात को मुख्य रूप से उल्लेखित किया था कि प्रोफेसर हर्ष चतुर्वेदी और चारू मोंगा द्वारा बनाया गया मास्क बिहार विधान परिषद में भी पहने देखा गया।

मई महीने में भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी केयरिंग इंडियन्स के प्रयास को ट्विटर पर साझा करते हुए सराहा था। तेजस्वी सूर्या के मई वाले ट्वीट में लिखा था, “केयरिंग इंडियन्स दिल्ली, मुंबई, पुणे, जयपुर जैसे जगहों पर वंचितों को खाना पहुँचा रही है। अब इन्होंने बेंगलुरु में भी अपना काम शुरू कर दिया है। टास्क फोर्स प्रतिदिन नयंदाहल्ली में 500 से ज्यादा लोगों को खाना देती है।”

आरजे श्रुति ने भी इस पहल के संबंध में ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा था कि देश में महामारी का प्रकोप परखते हुए कुछ लोगों का समूह आगे आया। वे केवल जरूरी उपकरणों के साथ नहीं तैयार हैं बल्कि एक जागरूक नागरिक होने के नाते जरूरतमंदों को बड़ी तादाद में मास्क, थर्मामीटर और सस्ते वेंटिलेटर बनाकर मुहैया करवा रहे हैं। श्रुति ने 7 अप्रैल को ट्वीट करते हुए यह लिखा था। अब केयरिंग इंडियन्स के नाम से पहचाने जाने वाले समूह के साथ लोग स्वयंसेवकों (वॉलिंटियर्स) के रूप में जुड़ रहे हैं।

केयरिग इंडियन्स की पहल करने वाले राहुल राज ने ट्विटर से की शुरुआत

राहुल राज C2C नाम के यूट्यूब चैनल को दिए एक इंटरव्यू में इस रचनात्मक पहल की शुरुआत पर बताते हैं। वे कहते हैं कि केयरिंग इंडियन्स की शुरुआत सोशल मीडिया से हआ प्रयास था। जहाँ कोरोना के समय में प्रभावित जनता को मदद पहुँचाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को सोशल मीडिया के जरिए जोड़ा गया। 

वह साक्षात्कार में बताते हैं कि उन्हें मालूम था कि वे सब मिलकर लोगों के लिए खाने का प्रबंध आदि करवा सकते थे। मगर उन्हें यह भी एहसास था कि यह आपदा कोई सामान्य आपदा नहीं। यह स्वास्थ्य आपदा (medical disaster) है। इसमें लोगों की जरूरतें भी भिन्न हैं। और, वह उन उपकरणों से लैस नहीं थे। तो, यहीं से एक समूह को तैयार करने का विचार आया।

वो कहते हैं, “हमने इसकी शुरुआत ट्विटर से की थी। इस बारे में मैं और मेरे वरिष्ठ अनुराग दीक्षित बात कर ही रहे थे कि हम इस पर कैसे काम कर सकते हैं। तभी उसी दौरान शिक्षाविदों के समूह से भी हमने इन्हीं सवालों को लेकर बात की। उसके बाद हमें एहसास हुआ कि अगर हम इकट्ठा होकर कुछ ऐसा टेक्निकल बनाएँ, जो वाकई मदद गार साबित हो।”

उनके अनुसार, “शुरुआत में तो हमारा विचार उत्पाद का डिजाइन तैयार करना था कि हम डिजाइन बनाएँगे। उसे रिलीज करेंगे। फिर ऐसे उत्पादक (manufacturers) को ढूँढेंगे, जिन्हें हम मास्क वेंटिलेटर और पीसीआर आदि का डिजाइन देकर कहें कि अगर वो बनाना चाहतें है तो डिजाइन इस्तेमाल करें और इसे बनाएँ।”

राहुल राज कहते हैं कि जब उन्होंने इसकी शुरुआत की थी, उन्हें नहीं पता था कि यह लोगों को इतना आकर्षित करेगा। वे बताते हैं कि प्रोजेक्ट में कई ऐसे लोग उनसे जु़ड़े, जिन्हें वे कभी जानते भी नहीं थे और न मिले थे।

इसके बाद सैंकड़ों लोगों ने हाथ बढ़ाया और उन्होंने भी टीम बनानी शुरू की। उन्हें तय करना था कि वह किन-किन प्रोजेक्ट्स पर कैसे काम करेंगे। जैसे कुछ प्रोजेक्ट डिस्ट्रिब्यूशन को लेकर थे और कुछ उन उत्पादों को बनाने के संबंध में भी थे। 

‘टेक्निकल’ प्रोजेक्ट पर पहली बार इतना अधिक सहयोग

राहुल राज की मानें तो केयरिंग इंडियन्स के प्रोजेक्ट से पहले कभी सैंकड़ों की तादाद में लोग टेक्निकल प्रोजेक्ट के लिए इकट्ठा नहीं हुए थे। लोग खाना पहुँचाने या डोनेशन देने के लिए आगे आते थे। मगर, हमने इससे पहले कभी भी ऐसे इंजिनियर्स, डॉक्टर्स को नहीं देखा था कि वह किसी प्रोडक्ट को बनाने में इस तरह बड़ी तादाद में आगे आए हों।

योर स्टोरी से बात करते हुए IIT-BHU के एलुमिनी राहुल राज कहते हैं, “भारत सॉफ्टवेयर और कोडिंग स्टार्टअप का एक केंद्र है, लेकिन इतने महान प्रतिभावान लोगों की भीड़ होने के बाद, जब भौतिक उत्पादों या हाई-एंड मशीनों की बात आती है, तो हम अवसरों, सहायता प्रणाली व इकोसिस्टम की कमी के कारण आगे बढ़ने में विफल रहते हैं।”

राहुल का कहना है कि केयरिंग इंडियन्स का आइडिया शिक्षा, उद्योग व प्रयोगशाला जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों की सहायता लेकर टेक्निकल प्रोडक्ट बनाने का था। मगर, जब ट्विटर पर इसे साझा किया गया तो IIT कानपुर के प्रोफेसर अमिताभ बंदोपाध्याय, IISc के प्रोफेसर आलोक कुमार, JNCASR प्रोफेसर संतोष कुमार का भारी समर्थन मिला। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अपने नेटवर्क्स को इकट्ठा किया। फिर सैंकड़ों लोग वॉलिंटियर के रूप में आगे आए। प्रोजेक्ट आगे बढ़ता गया। 

IIT Kanpur, IIT Guwahati, IIT Delhi, IISc, AIIMS, JNCASR जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के लोग भी साथ आए। इसके बाद केयरिंग इंडियन्स की मुख्य मैनेजिंग कॉर्डिनेशन टीम बनी। इसमें अनुराग दीक्षित, राहुल राज, नंजेश पटेल, अजेन्द्र रेड्डी, मनीष गोयल और समर्थ शामिल हैं।।

बता दें कि केयरिंग इंडियन्स ने शुरुआती समय में  इन्वेसिव वेंटिलेटर्स, कीटाणुनाशक, पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (पीसीआर) डायगनॉस्टिक पैनल, कॉन्टैक्टलेस थर्मामीटर, IoT डिवाइस और मास्क के डिजाइन आदि पर काम किया था।

केयरिंग इंडियन्स का क्या था उद्देश्य

लॉकडाउन से पहले अस्तित्व में आ चुकी ये संस्था कोरोना से जुड़ी चुनौतियों को परख चुकी थी। 21 मार्च को राहुल राज ने ट्वीट करके संस्था की ओर से बयान जारी किया था और उद्देश्य बताया था।

इसमें उन्होंने कोरोना के साथ जंग वाली स्थिति को आँकते हुए कहा था, “इसमें कोई दो राय नहीं है कि यह कोई आम जंग नहीं है। चीन, यूएस, फ्रांस, यूके और इटली में यह चरम पर है। हमारे पास अब भी कुछ समय है। भगवान न करे कि इसका प्रकोप कुछ हफ्तों में बढे़। हमारे पास सुविधाओं और संसाधनों की कमी चल रही है। इसलिए जरूरी है कि हम खुद अपना हथियार तैयार करें और इन दानव से लड़ने की तैयारी करें।”

इसमें लिखा था, “Better Together प्रोजेक्ट के साथ हम लोगों तक पहुँचने का प्रयास कर रहे हैं, जो मशीन और जरूरत के सामान बनाने में मदद करें ताकि आवश्यकता पड़ने पर हमें उनका सपोर्ट हो।” अपने इस बयान में केयरिंग इंडियन्स ने बताया कि वह नाम, संपर्क, स्किल सेट्स संग्रहित कर रहे हैं। वह लोग छोटी मशीनों, रोबोट्स, मास्क मेकर्स, वेंटिलेटर्स आदि पर काम करेंगे, और इसे मिलकर विचारों से आखिरी स्टेज तक पहुँचाया जाएगा। अपने बयान में उन्होंने लिखा कि कच्चे माल से लेकर प्रोटोटाइप तक वह निर्णय लेंगे।  

आगे संस्था का उद्देश्य बताते हुए इससे जुड़ने के लिए लोगों को उत्साहित किया गया। इसमें लिखा गया, “हमारे पास सैंकड़ो होनहार इंजीनियर्स, डॉक्टर्स, प्रोजेक्ट मैनेजर हैं। जिन्हें सही मौका मिले तो वह चमत्कार कर सकते हैं। यही वह सही समय है।”

ट्विटर पर केयरिंग इंडियन्स की सक्रियता का सफर

21 मार्च से केयरिंग इंडियन्स पर काम होना शुरू हुआ। राहुल राज ने तभी यह जानकारी दी कि उनके साथ 180 से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। इनमें डॉक्टर, इंजीनियर, आईटी प्रोफेशनल, सीए आदि हैं। अब आगे जिनकी इच्छा है, वह इससे जुड़ सकते हैं।

इसके बाद इस प्रोजेक्ट पर काम चलता रहा। अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों ने इसे शेयर किया। धीरे-धीरे समूह बढ़ता गया। कई लोग इससे जुड़े।

22 मार्च को इस प्रोजेक्ट के संबंध में एक मीटिंग हुई। इसकी जानकारी ट्विटर पर दी गई। बताया गया कि IIT कानपुर incubation team ने डॉक्टर, प्रोफेसर, वैज्ञानिकों के साथ वेंटिलेटर बनाने पर बहुत फलदायी बैठक की। IIT दिल्ली भी मास्क बनाने पर काम कर रही है। साथ ही आईआर थर्मोमीटर पर भी काम चल रहा है।

इसी दिन बताया गया कि उन्होंने 15 दिन में 5 लाख वेटिंलेटर की जरूरत का अंदाजा लगाया है। आपदा प्रबंधन की टीम भी महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए नक्शे चिह्नित करने के काम में लगी है। डिसइंफेक्टेंट डिजाइन ग्रुप सॉल्यूशन पर काम कर रही है। इसके अलावा 600 से अधिक मेंबरशिप हो चुकी है।

23 मार्च को केयरिंग इंडियन्स ने अपने ट्विटर पर पूरे प्रोजेक्ट का ब्लूट प्रिंट साझा किया। साथ ही बताया कि थर्मामीटर, वेटिंलेटर, फेस मास्क, थर्मल ड्रोन और हैंड सैनिटाइजर पर काम शुरू हुआ है। इसमें बताया गया कि आम तौर पर इन सबके लिए 6-8 महीने लगते हैं। लेकिन वह इस लक्ष्य को 14 दिन में पूरा करने का प्रयास करेंगे। इसलिए उन्हें स्मार्ट लोग चाहिए पूरे भारत से। 

इसमें बताया गया था कि वह अपने कार्य में एकदम पारदर्शिता रखेंगे। इसके लिए वह वेबसाइट बना रहे हैं (जो अब बन चुकी है) और उस पर प्रोजेक्ट और संसाधनों से जुड़े लाइव अपडेट देंगे। ब्लू प्रिंट में प्रोजेक्ट का उद्देश्य ऐसी चीजों को निर्मित करना बताया गया जो आसानी से उपलब्ध हों और इस्तेमाल हो सकें।

इस ब्लू प्रिंट में काम करने के तरीके को साझा किया गया और समझाया गया कि उनके पास दो ग्रुप्स हैं। एक ग्रुप में वह लोग जो कोरोना से संबंधित प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं। जबकि दूसरे में विभिन्न क्षेत्रों से आए वॉलिंटियर्स हैं। इनमें कुछ हार्डवेयर इंजिनियर हैं, कुछ उद्योगपति हैं, कुछ प्रोजेक्ट मैनेजर, कुछ वैज्ञानिक, कुछ डॉक्टर आदि हैं।

उद्देश्य निर्धारित व प्लान ऑफ एक्शन तैयार करने के बाद, केयरिंग इंडियन्स आगे बढ़ता गया।  कई प्रोजेक्ट्स शुरू हुए। कई लोग जुड़े। केयरिंग इंडियन्स के ट्विटर पर हर चीज का जिक्र है। वॉलिंटियर्स जुड़ने की जानकारी से लेकर कब किसने कैसे समूह को संपर्क किया, इसका भी अपडेट है।

इस पहल के बाद 25 मार्च को पुणे प्रशासन ने समूह को संपर्क किया था और कहा था कि सभी प्रकार की अनुमति और सुविधाएँ हो जाएँगी।

मात्र एक हफ्ते में यानी 29 मार्च को पता चला कि वेंटिलेटर प्रोजेक्ट के लिए डिजाइन और प्रोटोटाइप IIT कानपुर के सहयोग से तैयार हो गया है। अब इसके उत्पादन के लिए कोशिशें हो रही हैं, ताकि इसे भारी मात्रा में तैयार किया जा सके। इसके अलावा खबर आई रियल टाइम पीसीआर मशीन भी डॉ हरीश चतुर्वेदी और चारू मोंगा ने डेवलप और डिजाइन कर ली है। उसके लिए भी उत्पादक चाहिए।

धीरे धीरे केयरिंग इंडियन्स फाउंडेशन के प्रयास मीडिया तक पहुँचे। हिंदुस्तान टाइम्स, बीबीसी और इकोनॉमिक्स टाइम्स ने भी इसे कवर करना जरूरी समझा। फिर अन्य प्रोजेक्ट की जानकारी आई। 3 अप्रैल को केयरिंग इंडियन्स ने 100 से अधिक डॉक्टरों और अनुभवी मनोवैज्ञैनिकों की मदद से लोगों को फ्री काउंसलिंग देने का काम शुरू किया। 4 अप्रैल को IIT गुवाहटी टीम के सहयोग से रियूजेबल मास्क तैयार हो गया। जिसकी बैक्टेरिया फिल्टरेशन की क्षमता 99% है।

4 अप्रैल को ही इस संस्था ने 3000 लोगों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर खाने का प्रबंध किया। शुरुआत मुंबई-पुणे से हुई। आगे खाने से लेकर शहरों तक में वृद्धि होती रही। कई नए प्रोजेक्ट शुरू हुए। वॉलिंटियर बढ़े। धीरे-धीरे ये समूह डॉक्टरों के लिए भी पीपीई किट लेकर आ चुका था। इतना ही नहीं, इसके इस्तेमाल के लिए बाकायदा वीडियो जारी करके अपडेट दिया गया था। उसके बाद कुछ ही समय में सभी मशीनों के डेमो केयरिंग इंडियन्स के अंतर्गत काम कर रही अलग-अलग टीमों के पास तैयार थे।

21 अप्रैल को यह कारवाँ मुंबई पुणे से निकल कर दिल्ली आ चुका था। संस्था जरूरत मंदों को खाना दे रही थी और मनीष मुंद्रा जैसे लोग टीम को आर्थिक सहयोग करने के लिए जुड़ चुके थे।

वहीं, रॉबिनहुड आर्मी और स्विगी भी संस्था के सहयोगी हो गए थे। 25 अप्रैल की जानकारी के मुताबिक खाना वितरण का कार्य 50 हजार की संख्या तक पहुँच गया था। साथ ही खुशखबरी ये दी गई कि कुछ समय में इनमें कुछ शहर और जुड़ेगे।

5 मई को एएनआई ने बताया कि आईआईटी कानपुर के नोका रोबोटिक्स द्वारा निर्मित वेटिंलेटर की माँग भरत डायनामिक्स लिमेटिड द्वारा की गई है। इसके लिए उन्होंने ज्ञापन हस्ताक्षर भी किए हैं। ये केयरिंग इंडियन्स के लिए बड़ी सफलता थी।

गौरतलब है कि लॉकडाउन में शुरू हुआ ये सराहनीय प्रयास अपना असर अब तक दिखा रहा है। जगह जगह इनकी टीम द्वारा बने मास्क पहुँचाए जा रहे हैं। बिहार के विधानसभा में जो मास्क देखा गया, वह हाल में ट्विटर पर शेयर हुई थी।

वहीं राहुल राज ने पिछले महीने ट्विटर पर मनीष मुंद्रा, अंकित जैन को इस पूरे प्रोजेक्ट में फंड रेज करने के लिए धन्यवाद दिया था। उन्होंने सबका आभार व्यक्त करते हुए कहा था कि ऐसे अच्छे लोगों के बिना यह संभव नहीं हो पाता।

इसके अलावा उन्होंने अभिमन्यु सिंह राणा और सहयोग एनजीओ का भी धन्यवाद दिया था। साथ ही अगले ट्वीट में मास्क की खासियत पर जानकारी देते हुए कहा था कि वह करीब 2500 मास्क सफाईकर्मियों को बाँटेंगे।