Home Blog Page 4512

बलिदानी तिब्बती सैनिक की अंतिम विदाई में शामिल हुए BJP नेता राम माधव, चीन के कब्जाए क्षेत्रों में ही उसे घेरने उतरा भारत

लेह में बलिदान हुए तिब्बती कमांडो नीमा तेंजिन का पूरे रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार हुआ, जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव भी शामिल हुए। तिब्बत के नीमा तेंजिन को अंतिम विदाई देने के लिए लोगों का बड़ा हुजूम उमड़ पड़ा, जिसमें ‘विकास रेजिमेंट जिंदाबाद’ के नारे भी लगाए गए। नीमा तेंजिन की अंतिम यात्रा में राम माधव जैसे बड़े नेता का शामिल होना चीन के लिए एक कड़ा सन्देश बताया जा रहा है।

भारत ने अब चीन को उसके घर में ही घेरने की तैयारी कर रखी है। साथ ही उसके कब्जाए इलाकों में ही उसे घेरा जा रहा है, जो विस्तारवादी चीन की दुखती रग है। नीमा तेंजिन ‘स्पेशल फ्रंटियर फ़ोर्स’ का हिस्सा थे। भारत-चीन तनाव के बीच लैंड माइंस की चपेट में आने के कारण उनकी मौत हो गई थी। बता दें कि 29-30 अगस्त की रात चीन के सैनिकों ने भारतीय क्षेत्रों में गड़बड़ी की कोशिश की थी, जिसे भारत ने नाकाम कर दिया।

नीमा तेंजिन की अंतिम विदाई में भारत और तिब्बत के झंडे साथ-साथ दिखे। इस मौके पर लेह में तिब्बत की आज़ादी का भी नारा गूँजा। भारत ने चीन को ये सन्देश दे दिया है कि तिब्बती भी उसके अपने ही हैं और उनके गौरव और पराक्रम पर भारत को गर्व है। ‘आजतक’ के अनुसार, लेह के स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि ये पहली बार है जब किसी तिब्बती के योगदान को इस तरह से भारत ने इतना सम्मान दिया है।

पत्रकार दावा डोलमा ने कहा कि ये हमारी जिम्मेदारी है कि हम सभी को ये समझाएँ कि सेना में शामिल होने के लिए उन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं है, ऐसा वे अपनी इच्छा से कर रहे हैं। इस दौरान लेह में तिब्बती नागरिकों ने वहाँ के स्थानीय गीत गाए। ‘भारत माता की जय’ के नारे भी लगे। चीन हमेशा से तिब्बत के प्रति संवेदनशील रहा है और दलाई लामा से भारत की नजदीकियों का भी विरोध करता रहा है।

ज्ञात हो कि सब-सेक्टर नॉर्थ से लेकर सब-सेक्टर साउथ तक 5000 ITBP के जवानों को लद्दाख और चीन सीमा से सटे उससे जुड़े इलाकों में तैनात किया गया है। बता दें कि हाल ही में जब चीन ने सीमा पर मौजूदा स्थिति को बिगाड़ने का प्रयास किया था तो उसे नाकाम करने में ITBP के जवान भी शामिल थे। पांगोंग त्सो के दक्षिण में ऊँचाई वाली जगहों पर भारतीय सेना मौजूद है, जिससे चीन के हर इरादे को नाकाम किया जा सकता है।

‘महात्मा गाँधी और सरदार पटेल का है गुजरात, उसे मिनी पाकिस्तान बोलने पर माफी माँगें संजय राउत’

शिवनेता सांसद संजय राउत से भाजपा ने माफी की माँग की है। राउत ने हाल ही में अहमदाबाद की तुलना मिनी पाकिस्तान से की थी। भाजपा का कहना है कि राउत ने ऐसा बयान सिर्फ गुजरात को बदनाम करने के लिए दिया। पार्टी की माँग है कि राउत इसके लिए गुजरात व अहमदाबाद के लोगों से माफी माँगें।

बता दें कि इससे पहले मुंबई में संजय राउत ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि क्या अभिनेत्री कंगना रनौत में इतना साहस है कि वह अहमदाबाद की तुलना ‘मिनी पाकिस्तान’ से उसी प्रकार कर सकें, जैसे उन्होंने मुंबई को पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) बताया था।

उनसे जब सवाल किया गया कि क्या वह अपनी ‘हरामखोर’ वाली टिप्पणी के लिए माफी माँगेंगे, तब उन्होंने पत्रकारों से कहा, “जो भी यहाँ रहता है और काम करता है, यदि वह मुंबई, महाराष्ट्र और मराठी लोगों के बारे में अशोभनीय बातें करता है तो मैं (उनसे) कहूँगा कि पहले वह माफी माँगें, उसके बाद ही मैं माफी माँगने पर विचार करूँगा।”

आगे राउत ने कहा, “यदि वह लड़की मुंबई को ‘मिनी पाकिस्तान’ कहने के लिए माफी माँगे, तब ही मैं इसके बारे में सोचूँगा। क्या उसमें अहमदाबाद के बारे में यही कहने का साहस है?”

राउत की इस जिद्द के बाद भाजपा प्रवक्ता भरत पंड्या ने कहा कि शिवसेना नेता ने अहमदाबाद को मिनी पाकिस्तान कहकर गुजरात का अपमान किया है। पंड्या का कहना है, “उन्हें गुजरात, अहमदाबाद और अहमदाबादियों से माफी माँगनी चाहिए। साथ ही शिवसेना को गुजरात, गुजरातियों और गुजरात के नेताओं को जलन, घृणा और द्वेष की भावना से निशाने पर लेना बंद करना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “गुजरात महात्मा गाँधी और सरदार पटेल का है। सरदार पटेल ने 562 रियासतों को एकजुट कर भारत की एकता और अखंडता को मजबूत किया। उन्होंने जूनागढ़ और हैदराबाद को पाकिस्तान में मिलने से रोका और हिम्मत व ताकत से भारत का हिस्सा बनाया।”

पंड्या ने नरेंद्र मोदी व अमित शाह का उदाहरण देते हुए कहा, “अनुच्छेद 370 को खत्म करके कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाने का सरदार पटेल का सपना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूरा किया है, जो गुजरात से हैं।” उन्होंने कहा कि अतीत और वर्तमान में भारत की एकता और अखंडता के लिए गुजरात योगदान याद रखा जाना चाहिए।

महाराष्ट्र से प्यार है, बड़े ऑफर ठुकरा मराठा इतिहास पर बनाई फिल्म: कंगना रनौत

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद कंगना रनौत ने बॉलीवुड माफिया से लेकर इंडस्ट्री में फैले ड्रग एडिक्शन तक अपनी बात खुल कर रखी। उन्होंने मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। इसके बाद महाराष्ट्र के सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं, खासकर शिवसेना सांसद संजय राउत ने उन पर लगातार हमले किए।

राउत ने मुंबई पर मराठियों का अधिकार बताते हुए कंगना पर महाराष्ट्र और शिवाजी महाराज का अपमान करने का आरोप लगाया। साथ ही उन्हें अपशब्द भी कहे।

कंगना भी लगातार शिवसेना नेता के बयानों पर करारा जवाब दे रही है। अपने हालिया ट्वीट में उन्होंने महाराष्ट्र के प्रति अपने प्रेम को जाहिर किया है। उन्होंने कहा है कि बॉलीवुड में सफल होने के बाद उन्हें कई बड़ी हस्तियों के साथ काम करने के ऑफर मिले। मगर, उन्होंने उन फिल्मों को करने से मना कर दिया और शिवाजी तथा रानी लक्ष्मीबाई पर फिल्में बनाईं।

उन्होंने लिखा,”सफलता मिलने के बाद मुझे बड़े हीरो के साथ काम करने का ऑफर हुआ और बड़े बैनर की फिल्म ऑफर हुई। लेकिन मैंने मना कर दिया तो मुझे सभी के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। मेरी पहली स्वतंत्र फिल्म में मैंने गौरवशाली मराठा इतिहास शिवाजी महाराज और रानी लक्ष्मीबाई पर फिल्म बनाई, क्योंकि मुझे महाराष्ट्र से प्यार है।”

उल्लेखनीय है कि कंगना रनौत ने पिछले साल फिल्म ‘मणिकर्णिकाः द क्वीन ऑफ झाँसी’ को डायरेक्ट किया था। इसमें उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई का किरदार निभाया था। इस फिल्म को लोगों ने न केवल पसंद किया था, बल्कि फिल्म की राष्ट्रपति भवन में स्पेशल स्क्रीनिंग भी हुई थी। फिल्म देखने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें बधाई भी दी थी।

बता दें कि कंगना रनौत को मिल रही धमकियों के मद्देनजर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कंगना रनौत को Y-कैटेगरी सुरक्षा प्रदान की है। उन्हें संजय राउत के अलावा शिवसेना के एक विधायक और मुंबई के मेयर ने भी धमकाया था।

सुरक्षा मिलने पर उन्होंने गृहमंत्री को आभार व्यक्त भी किया है। उन्होंने लिखा, “वो (अमित शाह) चाहते तो हालात के चलते मुझे कुछ दिन बाद मुंबई जाने की सलाह देते मगर उन्होंने भारत की एक बेटी के वचनों का मान रखा, हमारे स्वाभिमान और आत्मसम्मान की लाज रखी।” अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर ‘जय हिन्द’ भी लिखा।

नॉलेज इकॉनमी बनेगा भारत, खुलेंगे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के कैम्पस: गवर्नर्स कॉन्फ्रेंस में बोले PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘नेशनल एजुकेशन पालिसी (NEP 2020)’ को लेकर आयोजित गवर्नर्स कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि NEP 2020 में पढ़ने की बजाए सीखने पर ज्यादा जोर दिया गया है। केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ स्थानीय निकायों की भी जिम्मेदारी है कि वो शिक्षा नीति को अच्छे से लागू करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा, देश की आकांक्षा को पूरा करने का बड़ा माध्यम है।

पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षा नीति में सरकार का दखल और प्रभाव, कम से कम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति से जितना शिक्षक, अभिभावक, छात्र जुड़े होंगे, उतना ही उसकी प्रासंगिकता और व्यापकता, दोनों ही बढ़ती है। देश के लाखों लोगों ने, शहर में रहने वाले, गाँव में रहने वाले, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने, इसके लिए अपना फीडबैक दिया था, अपने सुझाव दिए थे। कार्यक्रम में सभी राज्यों के राज्यपाल उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गाँव में कोई शिक्षक हो या फिर बड़े-बड़े शिक्षाविद, सबको राष्ट्रीय शिक्षा नीति, अपनी शिक्षा शिक्षा नीति लग रही है। सभी के मन में एक भावना है कि पहले की शिक्षा नीति में यही सुधार तो मैं होते हुए देखना चाहता था। प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की स्वीकारता की बड़ी वजह करार दिया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भविष्य में तेजी से बदलते जॉब्स और काम करने का तरीके को लेकर चर्चा कर रही है। पीएम ने कहा:

“ये पॉलिसी (NEP 2020) देश के युवाओं को भविष्य की आवश्यकताओं के मुताबिक ज्ञान और स्किल्स, दोनों मोर्चों पर तैयार करेगी। लंबे समय से ये बातें उठती रही हैं कि हमारे बच्चे बैग और बोर्ड एग्ज़ाम के बोझ तले, परिवार और समाज के दबाव तले दबे जा रहे हैं। इस पॉलिसी में इस समस्या को प्रभावी तरीके से समाधान किया गया है। 21वीं सदी में भी भारत को हम एक नॉलेज इकॉनमी बनाने के लिए प्रयासरत हैं। नई शिक्षा नीति ने Brain Drain को दुरुस्त करने के लिए और सामान्य से सामान्य परिवारों के युवाओं के लिए भी सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के कैम्पस भारत में स्थापित करने का रास्ता खोला है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि ये शिक्षा नीति, सरकार की शिक्षा नीति नहीं है। ये देश की शिक्षा नीति है। जैसे विदेश नीति देश की नीति होती है, रक्षा नीति देश की नीति होती है, वैसे ही शिक्षा नीति भी देश की ही नीति है। उन्होंने कहा कि कोई भी System, उतना ही Effective और Inclusive हो सकता है, जितना बेहतर उसका गवर्नेंस मॉडल होता है। उन्होंने इसे लागू करने के लिए जनता का सहयोग भी माँगा।

ज्ञात हो कि बच्‍चों और महिलाओं में कुपोषण की समस्‍या से निपटने के लिए सितंबर 2020 में तीसरा राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत सोमवार (सितम्बर 7, 2020) से ही हो रही है। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने पिछले माह तीस तारीख को आकाशवाणी पर ‘मन की बात’ के 68वें एपिसोड में पोषण की महत्‍ता पर जोर देते हुए देशवासियों को पोषण माह को सफल बनाने के लिए सहयोग करने को कहा था।

‘राहुल सोलंकी पर गोली मैंने ही चलाई थी’ – सबूत और CCTV फुटेज देख मुस्तकीम ने कबूल किया जुर्म, दिल्ली दंगे में है आरोपित

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे के दौरान शिव विहार में राहुल सोलंकी की हत्या मामले में मुस्तकीम उर्फ समीर सैफी ने कथित तौर पर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के सामने अपना जुर्म को स्वीकर कर लिया है। इससे पहले क्राइम ब्रांच ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उसे 6 सितंबर को गिरफ्तार किया था।

दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त प्रवक्ता अनित मित्तल ने बताया, “हिंसा के समय की वीडियो फुटेज देखते हुए एक शख्स पर नजर गई, जो सोलंकी को गोली मार रहा था। 3 सितंबर को हमें सूचना मिली कि सैफी मिल गया है।” उन्होंने बताया कि खूफिया सूचना के आधार पर युवक भजनपुरा से पकड़ा गया है। सीसीटीवी में दिखे शख्स का पूरा विवरण हमलावर से मेल खाता था।

अनित मित्तल ने बताया कि शुरुआत में सैफी ने मर्डर में अपना हाथ होने से मना किया। लेकिन उसे जब सबूत दिखाए गए तो उसने इस बात को स्वीकार कर लिया कि उसने ही सोलंकी पर गोली चलाई थी।

दिल्ली पुलिस ने उसके पास से देशी पिस्टल भी बरामद की है। मौजूदा जानकारी के अनुसार, मुस्तकीम पेशे से कारपेंटर (बढ़ई) है। उसके ऊपर 1 लाख का इनाम भी था। उसके पास से पुलिस ने मोबाइल फोन, एक जोड़ी जींस, जूते और साथ में वो हेलमेट भी जब्त किया है, जिसे उसने सोलंकी को गोली मारने के समय पहना था।

दिल्ली पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि सैफी फरुखिया मस्जिद के पास हो रहे सीएए विरोध प्रदर्शनों में भी सक्रिय था। इसके अलावा शिक्षा की बात करें तो वह 10वीं ड्रॉप आउट है।

इससे पहले इस केस में आईपीसी की धारा 34, 120बी, 147, 148, 149, 302, 436 और 427 के तहत मामला दयालपुर थाने में दर्ज हुआ था। इसके बाद ही यह केस  दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर हुआ। मुस्तकीम से पहले एसआईटी ने आरिफ, अनस, सिराजुद्दीन, सलमान, इरशाद और सोनू सैफी को गिरफ्तार किया था।

बता दें कि राहुल सोलंकी की फरवरी में दिल्ली के शिव विहार में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान संप्रदाय विशेष की भीड़ ने हत्या कर दी थी। जून में, दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 27 वर्षीय राहुल सोलंकी की हत्या मामले में आरोप-पत्र दायर किया था।

आरोप-पत्र में कहा गया था कि 24 फरवरी को शाम 5 बजे के आसपास शिव विहार के पास हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान सोलंकी की दयालपुर इलाके में उनके घर के पास हत्या कर दी गई थी।

शिव विहार निवासी राहुल सोलंकी गाजियाबाद के एक निजी कॉलेज से एलएलबी कर रहे थे। वह दूध लेने के लिए अपने घर से निकले थे, तभी दंगाइयों ने उनके गले के पास दाहिने कंधे में गोली मार दी थी। जिस समय दंगाइयों ने सोलंकी की गोली मारकर हत्या कर दी, उस समय वह राजधानी स्कूल से सटे पाल डेयरी गली के पास खड़े थे।

इससे पहले, आरोपितों में से एक, सलमान ने पुलिस को बताया था कि वह राहुल को अच्छी तरह से जानता था क्योंकि राहुल का भाई रोहित उसके ग्रुप के साथ क्रिकेट खेलता था। सलमान ने पुलिस से कहा था कि वह हिंसक भीड़ में शामिल हो गया और दिल्ली की सड़कों पर ‘इस्लाम को बचाने के लिए’ आतंक फैलाया।

भारत की एक बेटी के आत्मसम्मान की लाज रखी है आपने: Y-कैटेगरी सुरक्षा मिलने पर अमित शाह से बोलीं कंगना

गृह मंत्रालय ने कंगना रनौत को Y-कैटेगरी सुरक्षा प्रदान की है। अभिनेत्री कंगना रनौत को शिवसेना के नेताओं से लगातार धमकियाँ मिल रही थीं। उन्हें संजय राउत के अलावा शिवसेना के एक विधायक और मुंबई के मेयर ने भी धमकाया था। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा कंगना रनौत को Y-कैटेगरी सुरक्षा मिलने की बात कही गई, जिसकी अभिनेत्री ने पुष्टि करते हुए केंद्र सरकार और अमित शाह का आभार जताया है।

कंगना रनौत ने इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये इस बात का प्रमाण है कि अब किसी देशभक्त आवाज़ को कोई फ़ासीवादी नहीं कुचल सकेगा। कंगना ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताते हुए कहा कि वो चाहते तो हालातों के चलते मुझे कुछ दिन बाद मुंबई जाने की सलाह देते मगर उन्होंने भारत की एक बेटी के वचनों का मान रखा, हमारे स्वाभिमान और आत्मसम्मान की लाज रखी। अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर ‘जय हिन्द’ भी लिखा।

कंगना ने बॉलीवुड के डार्क साइड का खुलासा करते हुए कहा था कि  बॉलीवुड में कानून-व्यवस्था के लिए जिम्मेदार एजेंसियों का कोई दखल नहीं है। इसे माफिया या अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोग चलाते हैं। यदि आपने कभी मदद के लिए पुलिस का दरवाजा खटखटाया तो वे आपको ‘पागल’ करार देंगे और आपका बहिष्कार या आपकी हत्या कर देंगे। कंगना ने दावा किया था कि कई सरकारों ने बॉलीवुड में ड्रग माफिया को मजबूत होने में मदद की है।

कंगना इससे पहले यह भी बता चुकी हैं कि किस तरह मूवी माफिया अपने इशारों पर नहीं नाचने वाले आउटसाइडर का करियर ख़त्म करते हैं। उन्होंने कहा था, “इन लोगों ने सुशांत सिंह को एक बलात्कारी में तब्दील कर दिया था। वह कैसे अपने घर बिहार वापस जाता? छोटे शहरों में पैसे नहीं देखे जाते, सम्मान देखा जाता है।”

AltNews वाला मोहम्मद जुबैर: जिसने फैलाई 25 फेक खबरें, नाबालिग लड़की की ऑनलाइन प्रताड़ना का है आरोपित

प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘ऑल्ट न्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर पर एक नाबालिग लड़की की ऑनलाइन प्रताड़ना का आरोप लगा, जिसके बाद बाल आयोग ने उनके खिलाफ एक्शन लेते हुए एफआईआर दर्ज किया। अब प्रतीक सिन्हा भी उसके समर्थन में उतर आए हैं और कहा है कि जुबैर ‘फेक नैरेटिव से लड़ाई’ लड़ते हैं, इसीलिए वो उनके साथ खड़े हैं। एक तो झूठा दावा, ऊपर से इसके बहाने नाबालिग की प्रताड़ना को जायज ठहराने की कोशिश। अंकुर सिंह ने इस फेक दावे की पोल खोली।

‘पोलिटिकल कीड़ा’ के संस्थापक अंकुर सिंह ने ट्विटर पर ‘ऑल्ट न्यूज़’ के मोहम्मद जुबैर की पोल खोलते हुए उसका कच्चा चिट्ठा पेश किया। उन्होंने दर्जनों ऐसे उदाहरण गिनाए, जब जुबैर ने झूठ फैलाया। अधिकतर बार उसे अपनी ट्वीट्स डिलीट करनी पड़ी। साथ ही अंकुर ने उसे ‘रसोड़े का फैक्ट-चेकर’ करार दिया। यहाँ हम उस थ्रेड से उन घटनाक्रमों को आपके समक्ष रख रहे हैं, जब जुबैर ने झूठ फैलाया और उसकी बेइज्जती हुई।

  1. ज़ुबैर ने दावा किया कि जहाँ मेक्सिको में टीवी के माध्यम से पढ़ाई कराई जा रही है, भारत में दूरदर्शन पीएम मोदी के ‘मन की बात’ के प्रसारण में लगा हुआ है। बाद में जब लोगों ने बताया कि भारत में 3 दर्जन से भी अधिक चैनल पठन-पाठन के काम में लगे हुए हैं, उसने अपनी ट्वीट्स डिलीट कर दी।
  2. उसने सोलापुर में आग लगने की खबर शेयर की। उसने अप्रैल में ये वीडियो शेयर किया जबकि ये फ़रवरी का निकला। बाद में उसने भी माना कि उसने जिस वीडियो को रीट्वीट किया था, वो 2 महीने पुराना है।
  3. इसके बाद उसने दावा किया कि पीएम मोदी के ‘मन की बात’ के वीडियो पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के डर से कमेंट्स ऑफ कर दिया गया है। हालाँकि, पीएमओ इंडिया के पेज पर सारे वीडियोज पर कमेंट्स वर्षों से ऑफ हैं। जबकि नरेंद्र मोदी और भाजपा के यूट्यूब चैनल पर इसी वीडियो पर कमेंट किया जा सकता है।
  4. जब महंत गोपालदास के कोरोना पॉजिटिव होने की खबर आई तो उसने एडिटेड फोटो शेयर कर के दावा किया कि सरसंघचालक मोहन भागवत उनके बगल में ही बैठे थे। जबकि ये तस्वीर फोटोशॉप्ड है।
  5. खबर आई थी कि अमेरिका के टाइम्स स्क्वायर पर राम मंदिर का बिलबोर्ड दिखाया जाएगा। जुबैर ने दावा किया कि इस कार्यक्रम को कैंसल कर दिया गया है। जबकि तय समय पर राम मंदिर के डिजिटल बिलबोर्ड का प्रदर्शन हुआ।
  6. उसने अपने पेज ‘अनऑफिसियल सुब्रमण्यन स्वामी’ से दावा किया कि भाजपा स्ट्रांग रूम से ईवीएम चुरा रही है। फैक्टहंट द्वारा फैक्ट चेक के बाद उसने पेज के एडमिन्स में से एक पर दोष डाल कर इतिश्री कर ली।
  7. उसने एक तस्वीर शेयर कर के दावा किया कि किसानों के साथ पुलिस आतंकियों की तरह व्यवहार कर रही है। बाद में खुलासा हुआ कि ये वीडियो 2013 है, जब केंद्र में यूपीए की सरकार थी। ये तस्वीर कविता कृष्णन ने ट्वीट की थी, जिसे जुबैर ने आगे बढ़ाया।
  8. श्रीलंका में हुए हमले के बाद वहाँ के एक मंत्री ने पत्र लिखा, जिसमें कहा गया था कि ख़ुफ़िया अधिकारियों को पहले से इसकी भनक थी। जब अभिजीत मजूमदार और आनंद रंगनाथन जैसे लोगों ने इस पत्र को आगे बढ़ाया तो जुबैर ने आतंकियों के बचाव के लिए उसे फेक करार दिया। जबकि मंत्री ने खुद अपने हैंडल से उसे डाल रखा था।
  9. उसने एक विरोध प्रदर्शन का वीडियो शेयर कर के लिखा कि दिल्ली में इतना बड़ा विरोध होने के बावजूद मीडिया इसे नहीं दिखा रहा। जबकि असलियत ये थी कि वो वीडियो मुंबई का था।
  10. जब देश भर में मॉब लिंचिंग को लेकर मुद्दा गरमाया हुआ था और इसे लेकर नैरेटिव बनाया जा रहा था, तब मोहम्मद जुबैर ने कॉन्ग्रेस शासनकाल का एक विरोध प्रदर्शन का वीडियो शेयर किया, ताकि लोग मोदी सरकार पर हमला बोल सकें।
  11. उसने दावा किया कि विश्व हिन्दू परिषद् के कार्यकर्ताओं ने ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ का नारा लगाया। गोंडा पुलिस ने इन ख़बरों का खंडन करते हुए कहा कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था।
  12. उसने अपने फेसबुक पेज से किया कि कश्मीरी छात्र रक्तदान कर रहे हैं। जबकि वो तस्वीर एक घायल व्यक्ति की थी, जो विरोध प्रदर्शन के दौरान जख्मी हो गया था। अस्पताल में उसका इलाज हो रहा था।
  13. मोहम्मद जुबैर ने अंजू घोष को बांग्लादेशी अभिनेत्री बताते हुए भाजपा की आलोचना की। लेकिन, दिलीप घोष ने उनका जन्म प्रमाण पत्र शेयर कर के उसके झूठ पर विराम लगाया।
  14. पीएम मोदी ने बताया था कि प्रधानमंत्री बनने से पहले वो अपने कपड़े खुद धोया करते थे। बाद में जुबैर ने एक खबर शेयर कर किया, जिसमें लिखा था कि वो पीएम मोदी का धोबी था। उसकी हार्ट अटैक से मृत्यु हुई। उसने ये साबित करने का प्रयास किया कि पीएम मोदी अपने कपड़े खुद नहीं धोते थे, वो झूठ बोल रहे। जबकि उसी खबर में लिखा था कि वो धोबी मोदी के कपड़े प्रेस करता था, धोता नहीं था।
  15. जम्मू कश्मीर के डिप्टी ग्रैंड मुफ़्ती ने दूसरे समुदाय के लिए अलग मुल्क की माँग की, जिस पर ऑपइंडिया ने खबर प्रकाशित की। जुबैर ने किसी अन्य क्लेम का फैक्ट-चेक शेयर कर के दावा कर दिया कि ये खबर गलत है।
  16. कठुआ मामले में विशाल जंगोत्रा निर्दोष है या नहीं, इस सम्बन्ध में ऑपइंडिया ने जब खबर प्रकाशित की तो जुबैर ने इसकी आलोचना की। जबकि बाद में वो कोर्ट से भी निर्दोष साबित हुआ, तब जुबैर की बोलती बंद हो गई।
  17. उसने उस ट्वीट को आगे बढ़ाया, जिसमें ग्रेटर नोएडा हत्याकांड के आरोपित सोनू पाठक का भाजपा से जुड़ाव बताया गया था। बाद में पता चला कि वो कोई और सोनू पाठक है, हत्या आरोपित नहीं।
  18. कन्हैया कुमार ने दावा किया कि बेगूसराय में एक फेरीवाले को पाकिस्तान जाने की बात कह के गोली मार दी गई। जबकि बाद में खुलासा हुआ कि ये घटना सांप्रदायिक थी ही नहीं, किसी चीज की खरीद-बेच को लेकर झगड़ा हुआ था, जिसके बाद ये घटना हुई।
  19. जब तबलीगी जमात वालों ने महामारी फैलाई और मौलाना साद के ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें वो समुदाय के लोगों को कोरोना से न डरते हुए सारी इस्लामी गतिविधियाँ जारी रखने की सलाह दी, तो मोहम्मद जुबैर ने इस ऑडियो को फेक बताया। दिल्ली पुलिस ने इन दावों को ही फेक बता दिया और ऑडियो सही निकला।
  20. उसने दावा किया कि एक दलित लड़के को मंदिर में घुसने पर मार डाला गया। सच्चाई ये थी कि 5000 रुपए के लोन को लेकर ये वारदात हुई थी। उस मंदिर का इतिहास रहा है कि उसमे दशकों से दलित जाकर पूजा-पाठ करते आ रहे हैं।
  21. उसने दावा किया कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा कभी टीपू जयंती समारोह में हिस्सा लेते थे और अब इसका विरोध करते हैं। साथ ही उसने समारोह की तस्वीर भी शेयर की। जबकि वो फोटो ”कर्नाटक जनता पक्ष अल्पसंखज्यक समारोह’ का था, टीपू जयंती का नहीं।
  22. मोहम्मद जुबैर ने दावा किया कि नीतेश कुमार ने 263 करोड़ रुपए की लागत से जिस सत्तर घाट पुल का उद्घाटन किया था, वो बाढ़ से ढह गया है। जबकि सच्चाई ये है कि सत्तर घाट पुल से 2 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटी पुलिया का पहुँच पथ टूटा था, पुल नहीं।
  23. अर्बन नक्सलियों के पास से आपत्तिजनक पुस्तक ‘वॉर एंड पीस’ जब्त हुआ, जिसकी चर्चा बॉम्बे हाईकोर्ट में हुई। बाद में पीएम मोदी का भी ‘वॉर एंड पीस’ पुस्तक पढ़ते हुए तस्वीर जुबैर ने वायरल की। उसे ये नहीं पता था कि किताब का नाम तो समान था लेकिन नक्सलियों वाली इसी नाम की पुस्तक विश्वजीत रॉय ने लिखी थी जबकि पीएम मोदी लिओ टॉलस्टॉय की किताब पढ़ रहे थे।
  24. उसने एक फेक न्यूज़ शेयर कर के दावा किया कि मेजर गोगोई को एक लड़की के साथ आपत्तिजनक अवस्था में गिरफ्तार किया गया है।
  25. उसने एक तस्वीर शेयर कर के दावा किया कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने विवेक तिवारी के परिवार से बातचीत के समय उन्हें अपने से दूर रखा जबकि एक अन्य तस्वीर में सीएम योगी परिवार के बच्चों को पास बुला कर उनकी पीठ थपथपाते हुए बात करते दिख रहे हैं। उसने इस तस्वीर को छिपा लिया।

इन ट्वीट्स के दौरान अंकुर सिंह ने उन अंतरराष्ट्रीय फैक्ट-चेकिंग एजेंसियों को भी घेरा, जिन्होंने ‘ऑल्ट न्यूज़’ को फैक्ट-चेक करने के लिए सम्बद्धता दे रखी है। अंकुर सिंह ने तस्वीरों और स्क्रीनशॉट्स के जरिए मोहम्मद जुबैर की धज्जियाँ उड़ाई। बावजूद इसके स्वरा भास्कर सहित लिबरल समूह के कई बड़े नामों ने जुबैर का समर्थन करते हुए ट्रेंड चलाया। लेकिन, उस बच्ची की बात किसी ने नहीं की, जिसकी प्रताड़ना हुई।

ज्ञात हो राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने जानकारी दी है कि ‘ऑल्टन्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। NCPCR के अध्यक्ष ने ट्विटर पर इसकी सूचना देते हुए बताया कि आयोग की ‘एक्शन टेकेन रिपोर्ट’ के अनुसार, नाबालिग लड़की की ऑनलाइन प्रताड़ना के आरोप में मोहम्मद जुबैर के खिलाफ पॉस्को एक्ट के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है।

पैंगबर मुहम्मद का कार्टून शेयर करने की सजा: इंस्टाग्राम ने दो पत्रकारों का कर दिया अकॉउंट ब्लॉक

इंस्टाग्राम ने ‘शार्ली एब्दो’ मैग्जीन के दो पत्रकारों का अकॉउंट कई घंटों के लिए सस्पेंड कर दिया। इन दोनों पत्रकारों ने साल 2015 में शार्ली एब्दो पर हुए अटैक के मद्देनजर अपनी मैग्जीन के फ्रंट पेज की तस्वीर को शेयर किया था।

इसके जरिए उन्होंने उन लोगों को याद किया, जिन्होंने उस हमले में अपनी जान गवाई। बता दें कि साल 2015 में शार्ली एब्दो के ऑफिस पर पैगंबर मुहम्मद का कार्टून छापने के बाद हमला हुआ था।

लॉरे डौसी (Laure Daussy) नामक पत्रकार ने अपने अकॉउंट ब्लॉक होने की सूचना दी। उन्होंने कहा, “मेरा इंस्टाग्राम अकॉउंट डिएक्टिवेट हो चुका है। मैंने जो आखिरी फोटो उस पर डाली, वह शार्ली एब्दो मैगजीन के फ्रंट पेज की थी।” उन्होंने बताया कि शायद मास रिपोर्टिंग के कारण ये सब हुआ। जो अब सेंसरशिप का नया पर्याय बन चुकी है। उन्होंने लिखा ये ‘mind blowing’ है।

इसी प्रकार कॉरिन रे (Corrine Rey) ने अपने ट्विटर पर लिखा कि ऐसा ही उनके अकॉउंट के साथ भी हुआ। उन्होंने लिखा, “शार्ली एब्दो में मेरी सहकर्मी लॉरे डौसी की तरह मेरा अकॉउंट भी पैंगंबर मुहम्मद के कार्टून वाला कवर पेज शेयर करने के कारण डिएक्टिवेट हो गया है।” कॉरिनर ने इस हरकत को बेहद निंदनीय करार दिया है।

यहाँ बता दें कि सोशल मीडिया पर जिस तस्वीर के कारण पत्रकारों के अकॉउंट ब्लॉक किए जा रहे हैं, उसे लेकर शार्ली एब्दो (satirical newspaper) का कहना है कि उन्होंने इसकी 2,00,000 कॉपी प्रिंट करवाई थी। जो सामान्य संख्या से तीन गुना ज्यादा थी। बावजूद इसके सारी कॉपी बिक गई और उन्हें दोबारा वो एडिशन पब्लिश करवाना पड़ा।

अखबार का कहना है कि उन्होंने यह प्रयोग पिछले हफ्ते से शुरू किया और पेपर में उन लोगों को याद करने के लिए उस कार्टून को दोबारा से प्रकाशित किया, जो 2015 हमले में मारे गए थे। इसके लिए फ्रांस के राष्ट्रपति इम्मैनुअल मैक्रोन भी अखबार के समर्थन में आए और दोबारा कार्टून को छापने से रोकने से मना कर दिया।

जिस युवा नेता को कॉन्ग्रेस ने आज पैनल से निकाल डाला, कभी उनके पिता ने कॉन्ग्रेस में रह कर सोनिया को दी थी चुनौती

साल 2022 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कॉन्ग्रेस ने रविवार (सितंबर 6, 2020) को 4 कोर कमिटियों की घोषणा की। इसमें पूर्व सांसद जितिन प्रसाद और यूपी कॉन्ग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष राज बब्बर को शामिल नहीं किया गया है। ये दोनों नेता उन 23 कॉन्ग्रेसियों में से हैं, जिन्होंने पार्टी नेतृत्व के मुद्दे पर पिछले दिनों सोनिया गाँधी को पत्र लिखा था। इसके अलावा पूर्व सांसद आरपीएन सिंह को भी इस समिति में जगह नहीं दी गई।

बता दें कि पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने रविवार को यूपी के लिए घोषणा पत्र समिति, आउटरीच समिति, सदस्यता समिति और कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के सदस्यों के नाम जारी किए। इन समितियों में कुल 27 वरिष्ठ कॉन्ग्रेस सदस्यों को शामिल किया गया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, आरपीएन सिंह को लेकर एक नेता ने कहा है कि मुमकिन है चीन मामले पर पार्टी से हट कर अपने विचार बताने की वजह से उन्हें दरकिनार किया गया हो।

वहीं, राज बब्बर के साथ इलेक्शन पोल से जिन जितिन प्रसाद को कॉन्ग्रेस ने अलग कर दिया है, उन्हीं जितिन प्रसाद के लिए कॉन्ग्रेस साल 2019 में परेशान थी, क्योंकि पार्टी को डर था कि उनके युवा नेता भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालाँकि, उस समय सिंधिया की अगुवाई में कॉन्ग्रेस अपने इस नुकसान से बच गई। मगर पिछले दिनों कॉन्ग्रेस नेतृत्व को लिखी गई चिट्ठी के कारण जितिन दोबारा चर्चा में आए और फिर यूपी कॉन्ग्रेस की लखीमपुर खीरी इकाई द्वारा जितिन प्रसाद को पार्टी से निष्कासित करने का प्रस्ताव दिल्ली भेज दिया गया। इसके बाद अब यह खबर।

कॉन्ग्रेस नेता जितिन प्रसाद के साथ शायद ये सब इसीलिए हुआ क्योंकि सोनिया गाँधी को भेजी गई चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वालों में यूपी से एकमात्र नेता जितिन प्रसाद ही थे। या मुमकिन है उनके इस कदम के बाद लगातार ऐसे हमले होने की वजह ‘उनके पिता भी हों’। जी हाँ, जितिन प्रसाद के पिता कुंवर जीतेंद्र प्रसाद। जिन्होंने पार्टी में रहते हुए न केवल सोनिया गाँधी की अध्यक्षता को चुनौती दे डाली थी बल्कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए मैदान में भी आ गए थे।

ये बात साल 2000 की है। जितेंद्र प्रसाद 2000 में सोनिया गाँधी के ख़िलाफ़ संगठनात्मक चुनाव लड़ने मैदान में उतर गए थे। बताया जाता है कि जितेंद्र प्रसाद का वह कदम वंशवाद के ख़िलाफ़ था। उन्होंने राजीव गाँधी की हत्या के बाद 1998 में सोनिया गाँधी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर तो कोई विरोध नहीं किया था। मगर, जैसे ही 2000 में राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चुनाव की घोषणा हुई, उन्होंने सोनिया गाँंधी के ख़िलाफ़ पार्टी में रहते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ा। जहाँ अधिकांश वोट सोनिया गाँधी को गए और वह उन चुनाव हार गए।

पार्टी में वंशवाद के ख़िलाफ़ आवाज उठाने वाले वरिष्ठ नेता जीतेंद्र प्रसाद को यह हार और पार्टी नेताओं की मानसिकता बिलकुल बर्दाश्त नहीं हुई। नतीजतन कुछ ही महीनों में उनकी मृत्यु ब्रेन हैमरेज के कारण हो गई।

कॉन्ग्रेस में चले आ रहे वंशवाद के ख़िलाफ़ ताल ठोकने की बात जब भी उठती है, तब-तब जितेंद्र प्रसाद को याद किया जाता है। हो सकता है हालिया मामले के बाद इसी वाकये को ध्यान में रखते हुए अब कॉन्ग्रेस जितिन प्रसाद को नजरअंदाज कर रही हो।

यह गौर करने वाली बात है कि रविवार को जिन कोर कमिटी के सदस्यों के नाम का ऐलान हुआ, उनमें अधिकांश प्रिंयका गाँधी के करीबी हैं। इन कमिटियों के नाम घोषणा पत्र समिति, विस्तार समिति, सदस्यता समिति, कार्यक्रम क्रियान्यवयन समिति, प्रशिक्षण और काडर डिवलपमेंट समिति, पंचायत इलेक्शन कमिटी, मीडिया और संचार सलाहकार समिति हैं।

किस कमिटी में कौन-कौन

  • घोषणापत्र समिति – सलमान खुर्शीद, पीएल पुनिया, आराधना मिश्रा, विवेक बंसल, सुप्रिया श्रीनेत, अमिताभ दुबे।
  • विस्तार समिति – प्रमोद तिवारी, प्रदीप जैन आदित्य, गजराज सिंह, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, इमरान मसूद, बाल कुमार पटेल। सभी प्रदेश उपाध्यक्ष भी इसके सदस्य होंगे।
  • सदस्यता समिति – अनुग्रह नारायण सिंह, अजय कपूर, बृजलाल खाबरी, मोहम्मद मुकीम, कमल किशोर कमांडो, अजय राय।
  • कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति – नूर बानो, हरेंदर मलिक, प्रवीन ऐरॅन, जितेंद्र सिंह, बालकृष्ण चौहान, नसीब पठान, बंसी पहाड़िया, राम जियावन, प्रीता हरित।
  • प्रशिक्षण और काडर डिवेलपमेंट समिति – डॉ. निर्मल खत्री, हरेंद्र अग्रवाल, हनुमान त्रिपाठी, सतीश राय, डॉली शर्मा, केशव चंद्र यादव।
  • पंचायत इलेक्शन कमिटी – राजेश मिश्र, जफर अली नकवी, राजाराम पाल, प्रदीप माथुर, विनोद चतुर्वेदी, मसूद अख्तर, अजय पाल सिंह। राजीव गांधी पंचायत राज संगठन के प्रदेश अध्यक्ष भी सदस्य होंगे।
  • मीडिया और संचार सलाहकार समिति – राशिद अल्वी, ललितेशपति त्रिपाठी, अखिलेश प्रताप सिंह, सुरेंद्र राजपूत, ओंकार सिंह, विरेंद्र मदान। कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट के चेयरमैन इसके पदेन सदस्य होंगे।

‘पेशावर हमारी राजधानी थी’ – Pak को बॉर्डर पर घेर रहा अफगानिस्तान, भारत को बताया दरियादिल

भात और चीन में चल रहे तनाव के बीच पाकिस्तान भी भारत के विरोध में माहौल बनाने का प्रयास कर रहा है लेकिन अब उसकी चाल सफल नहीं हो पा रही। इसी बीच अफगानिस्तान ने भारत के साथ अपने संबंधों की सराहना की है और पाकिस्तान को भी लताड़ लगाई है। अफगानिस्तान रणनीतिक रूप से भारत और पाकिस्तान, दोनों के लिए ही ज़रूरी है। भारत इस बात को बखूबी समझता है और इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।

लेकिन, बदलते कूटनीतिक घटनाक्रमों के बीच अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच दूरियाँ लगातार बढ़ती ही जा रही है। अफगानिस्तान के उप-राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने कहा है कि उनके मुल्क का कोई भी नेता डुरंड लाइन को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई ऐसा करता है तो जीवन भर उसकी निंदा होगी ही, मृत्यु के बाद भी लोग उसकी आलोचना करेंगे। उन्होंने कहा कि ये एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर चर्चा होनी चाहिए, जिसका समाधान निकलना चाहिए।

बकौल अमरुल्लाह सालेह, हम अगर ये उम्मीद करते हैं कि ये मुफ्त में ही मिल जाएगा तो ये वास्तविकता से परे है। उन्होंने याद दिलाया कि कभी पेशावर अफगानिस्तान की राजधानी हुआ करता था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लगातार नकारने के बाद अब ये स्वीकार कर रहा है कि वो तालिबान का पोषण करता है। उन्होंने कहा कि ये स्पष्टता रिश्तों में कड़वाहट होने के बावजूद शांति प्रक्रिया का रास्ता बना सकती है। उन्होंने पाकिस्तान की फौज के अध्यक्ष जनरल बाजवा से बातचीत भी की।

अमेरिका के सैनिक धीरे-धीरे अफगानिस्तान से निकल रहे हैं और ऐसे में वहाँ शांति-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के ईरान दौरे में भी ये मुद्दा छाया रहा, जहाँ अफगानिस्तान की स्थिरता के लिए ‘रीजनल एप्रोच मॉडल’ अपनाने का प्रस्ताव बना। 2019 में ही भारत-अफगानिस्तान-ईरान ट्रेड कॉरिडोर का उद्घाटन किया गया था, जिसमें चाहबार पोर्ट की अहम भूमिका थी। इससे अन्य एशियाई देशों को भी फायदा हुआ।

वहीं हाल ही में अफगानिस्तान से एम्बेसडर बना कर नई दिल्ली भेजे गए फरीद मामुन्ज़डे ने भारत को दरियादिल पड़ोसी बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रिश्ते हैं, जिन्हें आगे बढ़ाने के लिए वो काम करेंगे ताकि दोनों देशों में शांति और स्थिरता बनी रहे। उन्होंने हिंदी में लिखा, “मैं हमारी दोस्ती को हमेशा निभाने की कामना करता हूँ।” दोनों देशों में एयर इंडिया और एरियाना के बीच ‘एयर बबल करार’ हुआ है।

जनरल विपिन रावत भी पाकिस्तान को चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान ने फिर दुस्साहस किया तो उसे भारी पड़ेगा। उन्होंने आशंका जताई कि उत्तरी सीमा पर जारी तनाव का फायदा पाकिस्तान उठाने की कोशिश कर सकता है लेकिन जवाबी कार्रवाई के लिए भारत पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि POK और तिब्बत में चीन का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसका भारत अध्ययन कर रहा है।

हाल ही में पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल के विदेश मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक भी की थी। चीन ने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि सीखते हुए अफगानिस्तान और नेपाल को भी कोरोना, आर्थिक गतिविधियों और आपसी संवाद को लेकर चीन के साथ ऐसी ही पहल करनी चाहिए। चीन के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान व चीन की साझा पहल की मिसाल दी थी। वो लगातार छोटे देशों को लुभाने में लगा हुआ है।