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छात्रों को पीटती रही महाराष्ट्र पुलिस, गाड़ी में बैठकर ‘तमाशा’ देखते रहे शिवसेना नेता अब्दुल सत्तार: देखें वीडियो

महाराष्ट्र के धुले शहर से शिवसेना नेता अब्दुल सत्तार की एक छवि सामने आई है। यह छवि दर्शाती है कि महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पद पर बैठे होने के बावजूद अब्दुल सत्तार को अपने राज्य के युवाओं से कोई लेना-देना नहीं है। फिर चाहे वह उनके सामने लाठी, मुक्के, घूँसे ही क्यों न खाते रहें।

एबीपी न्यूज के एंकर विकास भदौरिया के ट्विटर से शेयर हुई एक वीडियो में हम देख सकते हैं कि एक ओर देश के युवा को महाराष्ट्र पुलिस बेहरमी से पीटे जा रही है। उन पर लाठी डंडे बरसा रही है। वहीं पास में ही अब्दुल अपनी महंगी गाड़ी में बैठे रहते हैं। वह न तो मामले की जानकारी लेते हैं और न ही पुलिस को छात्रों को पीटने से रोकते हैं।

विकास इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखते हैं, “सत्ता का नशा: मंत्री जी अपनी लग्ज़री, डेढ़ करोड़ की गाड़ी में बैठे रहे और पुलिस उनकी आँखों के सामने छात्रों पर लाठियाँ, मुक्के, घूँसे, लातें बरसाती रही। मंत्री का नाम अब्दुल सत्तार है और तस्वीर महाराष्ट्र के धुले की हैं। ‘वाह मंत्री जी वाह’।”

गौरतलब है कि ये घटना महाराष्ट्र के धुले शहर में उस समय घटी जब ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान कम फीस की माँग कर रहे एबीवीपी के कुछ छात्र आज सुबह पालक मंत्री अब्दुल सत्तार की गाड़ी के सामने आ गए।

इनकी माँग थी कि इस वर्ष का शैक्षणिक शुल्क कम से कम 30 फ़ीसदी कम लिया जाए। क्योंकि अब ज्यादातर पढ़ाई ऑनलाइन चल रही है और छात्र कॉलेज नहीं जाते, मगर फिर भी लाइब्रेरी की फीस जा रही है।

एबीवीपी के छात्रों ने इसी माँग के आधार पर मंत्री अब्दुल सत्तार की गाड़ी के सामने जमकर हंगामा किया। जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें हटाने की कोशिश की लेकिन छात्र हटने को तैयार नहीं हुए और पुलिस ने इसी कारण उन पर लाठी चार्ज कर दिया। इतने के बावजूद मंत्री अब्दुल सत्तार को कोई फर्क नहीं पड़ा। प्रदर्शनकारी छात्रों ने शिकायत की कि सरकार छात्रों की समस्या पर बिलकुल ध्यान नहीं दे रही।

चोरी छिपे बेच दी PAK के पूर्व राजदूत ने इंडोनेशिया में दूतावास की इमारत: 19 साल बाद मामला पहुँचा कोर्ट

पाकिस्तान की एंटी करप्शन बॉडी नेशनल अकॉउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) ने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के अपने पूर्व राजदूत को चोरी छिपे दूतावास की एक इमारत भेजने का मुल्जिम पाया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, द नेशनल अकॉउंटेबिलिटी ब्यूरो ने कोर्ट में इस संबंध में रेफरेंस दायर किया है। अपनी शिकायत में उन्होंने इंडोनेशिया के पूर्व राजदूत व मेजर जनरल सैयद मुस्तफा अनवर के ख़िलाफ़ कहा है कि उन्होंने साल 2001-2002 के दौरान जकार्ता में पाकिस्तान दूतावास की इमरात को बेच दिया।

द ट्रिब्यूनल की रिपोर्ट के अनुसार, अनवर पर अवैध रूप से इमारत बेचने और पाकिस्तान के राष्ट्रीय खजाने को 13.20 लाख डॉलर का नुकसान पहुँचाने का आरोप है। रजिस्ट्रार को प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, अनवर ने विदेश मंत्रालय की मंजूरी के बिना इमारत की बिक्री के लिए एक विज्ञापन जारी किया था। वो भी इंडोनेशिया में अपनी तैनाती के तत्काल बाद।

इसके लिए उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से इजाजत लिए बिना एक विज्ञापन भी जारी कर दिया था। बिक्री की प्रक्रिया चालू होने के बाद अनवर ने इससे जुड़ा प्रस्ताव विदेश मंत्रालय को भेजा था। लेकिन विदेश मंत्रालय ने बिल्डिंग की बिक्री पर रोक लगा दी थी और अनवर को कई लेटर भेज जानकारी भी दी थी।

यहाँ बता दें कि जकार्ता में पूर्व राजदूत की तैनाती जनरल परवेज मुशर्रफ के शासन में हुई थी। दिलचस्प बात ये है कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ ने अनियमितताओं के लिए पूर्व राजदूत के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाय, एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की थी जिसने इस धोखाधड़ी के संबंध में विदेश मंत्रालय को शिकायत की थी।

पाकिस्तानी मीडिया की मानें तो जनरल अनवर ने दूतावास की इमारत को प्रमुख स्थान से बेच दिया था और दूतावास के लिए कम कीमत वाले क्षेत्र में स्थित नई संपत्ति खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी। इन्हीं अनियमतताओं को एनएबी की धारा 9(ए) 6 के तहत बिक्री शक्तियों का दुरुपयोग कहा गया है। साथ ही दावा किया गया है कि उन्होंने 2001-2002 के दौरान जकार्ता स्थित पाकिस्तानी दूतावास की इमारत को ‘कौड़ियों के मोल’ बेचा

इसके अलावा यह भी पाक मीडिया की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि मुशर्रफ ने साल 2007-2008 में अपनी सेवानिवृत्ति तक अधिकारी को OSD के रूप में रखा हुआ था। केवल इसलिए ताकि वे विदेशी कार्यालय से दूर रहें और मुशर्रफ ने मेजर जनरल सैयद मुस्तफा अनवर को ये बड़ा पद भी इसलिए दिया था क्योंकि वह उनकी पत्नी के रिश्तेदार थे।

कन्नौज में आपत्तिजनक हालात में मिले प्रेमी युगल: गाँव वालों ने सिर मुंडवाया, कालिख पोत कर पहनाया जूते की माला, Video वायरल

कन्नौज के गुरसहायगंज के बनियानी गाँव से इंसानियत को शर्मसार करने वाली वीडियो सामने आई है। इस वीडियो में हम देख सकते हैं कि ग्रामीण एक महिला और एक दिव्यांग व्यक्ति का सिर मुंडवाकर उनके चेहरे पर कालिख पोत रहे हैं और जूते चप्पल की माला पहना कर उन्हें गाँव में घुमा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियो में नजर आ रहे दोनों पीड़ितों को ग्रामीणों ने आपत्तिजनक हालत में पकड़ा था। इसके बाद सभी ने मिल कर उनका ये हाल किया। बाद में जब सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुई तो हर जगह हड़कंप मच गया।

हालाँकि, पुलिस से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने ऐसे कोई जानकारी होने से इंकार किया। लेकिन लाइव हिंदुस्तान के पत्रकार सूरज शुक्ला ने जब इस वीडियो को शेयर किया तो कानपुर के आईजी रेंज ने उसी ट्वीट पर कन्नौज पुलिस को टैग करते हुए इस मामले में तत्काल कार्रवाई कर आगे की जानकारी मँगवाई।

एडीजी जोन ने भी प्रकरण में जाँच करके कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं, घटना की जानकारी प्रधान को होते ही उन्होंने तुरंत इस संबंध में ग्रामीणों को फटकार लगाई और दोनों पीड़ितों को उनके घर भिजवाकर पंचायत शुरू की।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ समय पहले 30 वर्षीय पीड़िता के पति की मौत हो गई थी। उसके बाद से ही दिव्यांग युवक उसके घर आने जाने लगा। दिव्यांग होने के चलते घर वालों और गाँव वालों ने पहले उनकी बातचीत पर ध्यान नहीं दिया। मगर, कुछ समय बाद दोनों के बीच बतचीत का सिलिसला प्यार में बदल गया।

गाँव वालों के अनुसार दोनों के बीच करीब एक साल से प्रेम प्रसंग चल रहा है। दोनों को अक्सर गाँव के बाहर भी मिलते देखा गया है, कई बार दोनों को अकेले खेतों में भी पकड़ा गया जहाँ गाँव के युवाओं ने इन्हें देखा तो डाँटकर भगाया भी।

ऐसे में मंगलवार की रात जब दिव्यांग व्यक्ति महिला के घर पहुँचा, तो अगली सुबह गाँव वालों ने उसे महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ लिया। देखते ही देखते पूरे गाँव में बात फैल गई। सब इकट्ठा हुए और इनका सिर मुंडवा दिया गया। इनके चेहरे पर कालिख पोत दी गई। फिर जूते की माला पहना कर इन्हें गाँव में घुमाना शुरू किया गया। वायरल वीडियो में हम देख सकते हैं कि मौके पर खड़े सभी लोग केवल यह तमाशा देखते रहे और छोटे-छोटे बच्चे उन पर फब्तियाँ कसते सुनाई दिए।

‘कुमकुम भाग्य’ की इस एक्ट्रेस को पिता ने दी जान से मारने की धमकी: वीडियो जारी करके माँगी मदद

जी टीवी के मशहूर शो कुमकुम भाग्य में नजर आने वाली एक्ट्रेस तृप्ति शंखधर ने अपने पिता पर संगीन आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी करके बताया है कि उनके पिता उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं और किसी 28 साल के लड़के से उनकी शादी करवाना चाहते हैं जबकि अभी वह खुद केवल 19 साल की हैं।

यूपी के बरेली में रहने वाली तृप्ति की इस वीडियो में उनकी माँ भी नजर आ रही हैं। वह भी इस वीडियो में अपने पति पर मारपीट के आरोप लगाती हैं। तृप्ति की मानें तो उनके पिता ने उनके हाथ काटने की कोशिश की है। साथ ही मारने की धमकी भी दी है। इसके अलावा पिता का विरोध करने पर उनसे वह सारे रुपए वापस माँगे गए हैं जो उन्हें बॉम्बे भेजने में खर्च हुए।

तृप्ति शंखधर के इन आरोपों के बाद यूपी पुलिस ने उनके पिता को कस्टडी में ले लिया है। एसपी सिटी ने एएनआई से कहा कि तृप्ति के पिता कस्टडी में हैं। तृप्ति भी स्टेशन में ही मौजूद हैं। पिता के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि छोटी सी उम्र में तृप्ति शंखधर कई बार छोटे पर्दे पर नजर आ चुकी हैं। उन्होंने एकता कपूर के सीरियल ‘कुमकुम भाग्य’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। इसके अलावा उन्होंने ‘देव-2’, ‘परमावतार श्री कृष्ण’, ‘जिंदगी यू टर्न’, ‘कसौटी जिंदगी के 2’ सीरियल में काम किया। बड़े पर्दे पर भी उन्हें राजकुमार राव और कंगना रनौत की फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ में देखा गया था।

शेयर की गई वीडियो में तृप्ति क्या कह रही हैं।

सोशल मीडिया पर शेयर वीडियो में तृप्ति कहती हैं, “मेरे पापा राम रतन शंकर ने एक बार मुझे जान से मारने की कोशिश की। मुझे बाल पकड़कर मारा। ये मेरे निशान देखिए। उन्होंने मुझे ऐक्ट्रेस बनने के लिए मुंबई भेजा था। अभी मेरी बस एक ही मूवी रिलीज हुई है और अब वह मुझे और बाकी सबको टॉर्चर कर रहे हैं। कह रहे हैं कि शादी कर लो नहीं तो मार डालूँगा। अभी मैं बस 19 साल की हूँ और कोई 28 साल का अजीब सा लड़का है जिसके साथ वह शादी करने के लिए कह रहे हैं। आज उन्होंने साफ कहा कि वो मुझे और पूरे परिवार को मार डालेंगे। मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा है। मैंने पुलिस से भी संपर्क करने की कोशिश की लेकिन नहीं हो पाया। वो हर दिन सबको प्रताड़ित करते हैं।”

वीडियो में तृप्ति अपनी माँ को दिखाती हैं और कहती हैं कि उनके पिता ने उनकी माँ को भी बहुत मारा है। साथ ही उन्होंने बताया कि पुलिस उनकी मदद नहीं कर रही है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि अब वो क्या करें। एक अन्य वीडियो में तृप्ति ने बताया, “हम लोग अपनी मर्जी से भागे हैं। मेरे पिता कुछ भी कह सकते हैं कि हमें किडनैप कर लिया गया है। वो हमें ढूँढ सकते हैं और हमारी हत्या कर सकते हैं। हम अपनी मर्जी से खुद अकेले भागे हैं।” तृप्ति ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर दो वीडियो पोस्ट किए थे हालाँकि बाद में उन्हें हटा लिया गया।

NEET-JEE के आयोजन के खिलाफ SC जाएँगे 7 राज्यों के CM , उद्धव ठाकरे ने कहा- हम केंद्र से लड़ें या डरें..

कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने बुधवार (अगस्त 26, 2020) को केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि छात्रों की समस्याओं और NEET-JEE परीक्षा के मुद्दे को नरेंद्र मोदी की सरकार ने बिना ध्यान दिए ही निपटा दिया है। यह वर्चुअल बैठक इंजीनियरिंग और मेडिकल के पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) और राष्ट्रीय योग्यता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) का कोरोना काल में आयोजन समेत कई मुद्दों पर केंद्र सरकार के खिलाफ पूरे विपक्ष को एकजुट करते हुए आयोजित की गई।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र की राष्ट्रीय शिक्षा नीति धर्मनिरपेक्ष और वैज्ञानिक मूल्यों के लिए बड़ा झटका है, इससे सरकार की संवेदनहीनता का पता चलता है।

वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कॉन्ग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, कॉन्ग्रेस समर्थित सरकारों के मुख्यमंत्रियों और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक बैठक को संबोधित करते हुए, सोनिया गाँधी ने कहा, “हमें केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करना होगा और साथ ही उनसे लड़ना होगा। छात्रों की समस्याओं, NEET और JEE परीक्षा के मुद्दों को केंद्र द्वारा अनजाने में निपटा दिया गया है।”

इस कॉन्फ्रेंसिंग में मौजूद सभी मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार से परीक्षा की तारीख को आगे बढ़ाने का आग्रह किया है। ममता बनर्जी के अलावा इस बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी शामिल थे। सोनिया गाँधी के साथ हुई इस मीटिंग में 7 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस वर्चुअल बैठक में NEET और JEE एग्जाम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला लिया है।

परीक्षा स्थगित कराने के लिए हों एकजुट – ममता

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वर्चुअल मीटिंग में मौजूद मुख्यमंत्रियों से JEE और NEET की परीक्षा स्थगित करवाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, “सभी राज्य सरकारों से मेरा आग्रह है कि जब तक हालात नहीं सुधरते तब तक हम एग्जाम कैंसल करवाने के लिए एक साथ सुप्रीम कोर्ट जाएँ, ताकि छात्र JEE और NEET की परीक्षा में बैठ सकें। सितंबर में परीक्षा है। छात्रों की जिंदगी खतरे में क्यों डाली जाए? हमने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी लेकिन अब तक जवाब नहीं आया है।”

हमें तय करना होगा कि हम केंद्र से डरें या मुकाबला करें – उद्धव ठाकरे

वर्चुअल मीटिंग में ममता बनर्जी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को बोलने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे जी आप अच्छा लड़ रहे हैं। इस पर उद्धव ने कहा कि मैं लड़ने वाले बाप का लड़ने वाला बेटा हूँ। इसके अलावा उन्होंने सोनिया गाँधी को अध्यक्ष पद जारी रहने के लिए बधाई देते हुए कहा कि पहले हमें तय करना चाहिए कि डरना है या लड़ना है

वहीं, इस बैठक में मौजूद पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कोरोना से पैदा हुई आर्थिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए केंद्र से जीएसटी की हिस्सेदारी न मिलने का मुद्दा उठाया।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि विपक्ष कमजोर होता दिखाई दे रहा है, जिस तरह से एकजुट होकर काम करना चाहिए, वो हो नहीं पा रहा है। सोरेन ने भी जीएसटी को लेकर केंद्र पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपनी पार्टी द्वारा शासित राज्य सरकारों की मदद कर रही है, लेकिन बाकी राज्यों को छोड़ दिया जा रहा है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कोरोना के खिलाफ राज्य सरकारें लड़ाई लड़ रही हैं, और केंद्र सरकार की तरफ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के अलावा कुछ नहीं हुआ है। बैठक में मौजूद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश सिंह बघेल ने कहा कि पिछले चार महीनों से केंद्र सरकार ने जीएसटी कंपनसेशन का भुगतान नहीं किया है।

उल्लेखनीय है कि NTA ने JEE और NEET परीक्षा के आयोजन का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इन दोनों परीक्षाओं को कराने के फैसले पर सहमती दी है। जबकि कॉन्ग्रेस समेत शिवसेना और TMC ने छात्रों की सुरक्षा का हवाला देते हुए एग्जाम स्थगित करने की माँग कर रहे हैं।

TMC नेता ने महिला के पेट में मारी लात, 3 महीने की बच्ची को भी पीटा: पति की हत्या करने आए थे गुंडे

पश्चिम बंगाल में अब तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेताओं ने महिलाओं और बच्चियों के साथ भी हिंसा शुरू कर दी है। ऐसी ही एक घटना सामने आई है, जहाँ बंगाल में TMC के नेता ने न सिर्फ अपने गुंडों के साथ मिल कर एक महिला को जम कर पीटा बल्कि उसकी 3 महीने पहले जन्मी बच्ची तक को भी नहीं बक्शा। ये घटना साउथ 24 परगना के जीबनताला स्थित रबिन्द्रनगर गाँव की है, जिसकी जम कर निंदा हो रही है।

26 वर्षीय पीड़िता का नाम मधुमिता हलदर है, जिसके साथ TMC नेता बापी मंडल ने बदतमीजी की। सोमवार (अगस्त 24, 2020) की रात अचानक से पहुँच गए और महिला के पति को खोजने लगे। जब पति घर पर नहीं मिला तो उन्होंने घर में ही तोड़फोड़ शुरू कर दी। फिर महिला की पिटाई शुरू कर दी गई। गुंडे खिड़की तोड़ कर घर में घुसे थे, ताकि पीड़िता के पति की हत्या कर सकें। बापी मंडल ने महिला के पेट पर भी लात मारी।

3 महीने पहले ही महिला की सर्जरी हुई है, ऐसे में उसे पेट में लात मारे जाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। मधुमिता किसी तरह अपने घर से निकल कर भागने में सफल रही। वो अपनी बच्ची को लेकर किसी तरह पुलिस थाने पहुँची। पश्चिम बंगाल के जीबनताला पुलिस स्टेशन स्थित घुटियरी शरीफ पुलिस आउटपोस्ट में TMC नेता के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। अभी तक हमले के पीछे की मंशा स्पष्ट नहीं है।

ये कोई राजनीतिक मामला भी हो सकता है क्योंकि पश्चिम बंगाल में TMC के गुंडों द्वारा भाजपा नेताओं की हत्या का सिलसिला अभी तक थमा नहीं है। अभी तक कई भाजपा नेताओं की हत्या हो चुकी है। महिला के घर में भी गुंडे हत्या की मंशा से भी घुसे थे, ऐसे में इस घटना में भी राजनीतिक बदले की भावना हो सकती है। पुलिस ने इस मामले की शिकायत दर्ज कर ली है। बापी मंडल स्थित सभी गुंडों की तलाश जारी है।

हाल ही में एक और घटना सामने आई थी, जब स्वतंत्रता दिवस के दिन दौलतचक में भाजपा और तृणमूल के कार्यकर्ता झण्डा फहरा रहे थे। अचानक सुबह 9 बजे दोनों के बीच संघर्ष शुरू हो गया। बाद में संघर्ष हिंसक हो गया। स्थानीय लोगों का तो यहाँ तक कहना है कि बमबारी भी शुरू हो गई थी। इसी दौरान भाजपा सुदर्शन प्रमाणिक पर हमला किया गया और वे जमीन पर गिर पड़े और उनकी मृत्यु हो गई।

धर्मांतरण का धंधा, भगवाधारी जीसस और पापिनी टेरेसा: अजीत भारती का वीडियो । Ajeet Bharti on Conversion game and Mother Teresa

आज आत्मा की डकैती करने वाली संस्था और उसकी सबसे बड़ी आदर्श मदर टेरेसा का जन्मदिन है। चर्च और ईसाई मिशनरीज ने भ्रांतियाँ फैलाई कि ये बहुत महान व्यक्तित्व थी। इन्हें नोबेल प्राइज तक दिलवा दिया गया। वेटिकन ने इन्हें ‘संत’ घोषित कर दिया। कैथोलिक चर्च बलात्कार, यौन शोषण, बच्चों के साथ जबरन समलैंगिक संबंध जैसे तमाम अपराधों का अड्डा बन चुका है। ये लोग बच्चे को बेचते भी हैं।

ये बीमारियों को पापों का फल बताती थी और उसे भोगने के लिए कहती थी। शायद यही वजह है कि मिशनरी और चैरिटी के क्लीनिक में उस समय भी और अभी भी पीड़ादायक बीमारियों से जूझ रहे लोगों को एक पेन किलर तक नहीं दिया जाता। उनसे कष्ट को सहने के लिए कहा जाता है। उनसे कहा जाता है कि जब ईसा मसीह क्रॉस पर चढ़े तो उन्हें भी तकलीफ हुई थी, तुम भी उसे महसूस करो।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

‘ईसा मसीह चीनी महिला के रूप में धरती पर लौट आए हैं’- ‘चर्च ऑफ ऑलमाइटी गॉड’ का दावा: प्रतिबंधित संप्रदाय भारत में जमा रहा जड़ें

नागालैंड में सबसे शक्तिशाली चर्च निकाय ने अपने अनुयायियों को ‘खतरनाक’ चीनी संप्रदाय और इसकी ऑनलाइन गतिविधियों के खिलाफ चेतावनी जारी की है। नगालैंड बैपटिस्ट चर्च काउंसिल (NBCC) ने पूर्वोत्तर भारत में चर्च के नेताओं को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि राज्य में चीनी संप्रदाय अपनी जड़ें फैला रहा है। इससे सावधान रहने की जरूरत है।

बता दें कि यह संप्रदाय अपने चर्च को ‘चर्च ऑफ ऑलमाइटी गॉड’ के नाम से प्रचारित करता है। इनका मानना है कि ईसा मसीह (जीसस) ने फिर से अवतार लिया है और इस बार वह एक महिला के रूप में धरती पर वापस आए हैं। ‘चर्च ऑफ ऑलमाइटी गॉड’ पर आरोप लगाया जाता है कि यह गलत शिक्षा देने के साथ ही ईसाई धर्म के सिद्धांत बारे में झूठ को फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाता है।

एनबीसीसी के महासचिव जेलो कीहो ने बैपटिस्ट संघों के सभी कार्यकारी सचिवों और निदेशकों को एक पत्र जारी किया। उन्होंने लिखा है कि वह चीन के ‘चर्च ऑफ ऑलमाइटी गॉड’ के बारे में चिंतित हैं क्योंकि वे उत्तर-पूर्व भारत में प्रवेश कर रहे हैं।

उन्होंने चेताया है कि यह संप्रदाय ईसाई धर्म के सिद्धांतों के बारे में गलत प्रचार कर रहा है और उन्होंने इस फर्जी धर्म के प्रति सभी को सभी तरह के सुरक्षात्मक उपाय करने और उसके प्रति सावधान रहने को कहा है। 

उन्होंने आगे कहा है, “चर्च ऑफ ऑलमाइटी गॉड या ईस्टर्न लाइटनिंग कल्ट पूरी तरह से एक संगठित समूह है, जिसका बहुत ही तेजी से फेसबुक पेज तैयार किए जा रहा है और उस पर रंगीन चित्रकारी की जा रही है जो बाइबिल से जुड़ी और मोहक प्रतीत होती हैं।” बता दें कि यह चेतावनी भरा पत्र 19 अगस्त को भेजा गया था।

समाचार एजेंसी आईएएनएस के अनुसार, पत्र में कहा गया है, “हमें इस खतरनाक संप्रदाय से सावधान रहना होगा, क्योंकि वे सक्रिय रूप से गलत सिद्धांत और झूठी शिक्षाओं का प्रसार कर रहे हैं। हमें उनके बारे में जानकारी इकट्ठा कर उनका पर्दाफाश करना होगा। हमें उनके झूठे धर्म से अपनी धार्मिक सभा को बचाने के लिए हर तरह का उपाय करना होगा।”

पत्रकारों से बात करते हुए, कीहो ने कहा, “हम अपने चर्चों में विभिन्न सम्मेलनों और मीडिया के माध्यम से जागरुकता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि मिजोरम, मेघालय, नागालैंड और मणिपुर में 5.5 मिलियन से अधिक ईसाई रह रहे हैं। अन्य पूर्वोत्तर राज्यों जैसे असम, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा में बड़ी संख्या में ईसाई रहते हैं। उनके अनुसार, ऐसे हिंसक संप्रदाय ईसाइयों के लिए खतरा हैं।

इसके साथ ही एनबीसीसी के युवा सचिव विकुओ री ने कहा है कि उन्हें पता है कि वे लोग नगालैंड और उत्तरपूर्व भारत में पहले ही दाखिल हो चुके हैं। लेकिन, अभी यह पता लगाना है कि यहाँ पर वे कितने हैं। वे लोग फेसबुक और व्हास्टऐप पर बहुत ही ज्यादा ऐक्टिव हैं। वे लोगों खासकर युवाओं को फुसलाना चाहते हैं।

गौरतलब है कि ईस्टर्न लाइटनिंग कल्ट ऑफ चाइना यह बताता है कि ईसा मसीह का धरती पर एक महिला के रूप में पुनर्वतार हुआ है, जिसका नाम यांग जियांगबिन है और उन्हें लाइटनिंग डेंग के नाम से भी प्रचार-प्रसार करते हैं। चीन में क्रिश्चियनों के इस नए संप्रदाय का 1991 में गठन किया गया। चीन में 1991 में एक नए संप्रदाय का उदय हुआ, जिसके संस्थापक को उनके अनुयायियों ने प्रभु ईसा मसीह या जीसस का नया अवतार बताना शुरू कर दिया।

उसकी संस्थापक यांग जियांगबिन नाम की एक महिला थी, इसलिए वह चाइनीज ‘फीमेल जीसस’ के नाम से जानी जाने लगीं। महिला के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह माना जाता है कि वह उत्तर पश्चिमी चीन में पैदा हुई थी।

इस संप्रदाय का इतिहास काफी हिंसक रहा है। 100 से अधिक हिंसा वाले मामले संप्रदाय से जुड़े हैं। चीनी सरकार को पंथ पर प्रतिबंध लगाना पड़ा क्योंकि उन्होंने आम जनता के लिए खतरा पैदा करना शुरू कर दिया। इस समूह का निर्माण 1990 में एक पूर्व फिजिक्स शिक्षक झाओ वीशान द्वारा किया गया था।

यह अमेरिका से संचालित होता है, लेकिन भारत सहित 35 से अधिक देशों में इसकी शाखाएँ हैं। संस्थापकों झाओ वीशान और यांग जियांगबिन ने अमेरिका में राजनीतिक शरण ली और अपना अभियान शुरू किया। उन्होंने चीन में चर्च की शिक्षाओं को फैलाने के साथ शुरुआत की और अन्य देशों के अनुयायियों को जोड़ा। जल्द ही उन्हें सोशल मीडिया के पावर का एहसास हुआ, और अब वे नियमित रूप से वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फिल्में, धार्मिक सामग्री और ऑडियो लेक्चर पोस्ट करते हैं।

चर्च ऑफ ऑलमाइटी गॉड के हिंसक इतिहास के उल्लेखनीय मामले

हालाँकि चर्च की वेबसाइट की सामग्री पहली नज़र में उनके हिंसक व्यवहार की तरफ इशारा नहीं करती है, लेकिन चर्च से जुड़े विवाद उनके इरादों पर सवाल उठाने के लिए पर्याप्त हैं।

  • 2002 में, ‘चर्च ऑफ ऑलमाइटी गॉड’ के सदस्यों ने कथित तौर पर चीन के 30 चर्च नेताओं को अगवा किया था। उन्होंने उन्हें दो महीने तक बंधक बनाकर रखा और उनका धर्मांतरण कराने की कोशिश की।
  • 2012 में लोगों को डराने के लिए फिल्म “2012” के दृश्यों का इस्तेमाल किया। इसके जरिए उन्होंने लोगों के मन में भय पैदा करने की कोशिश की कि कयामत आने वाला है। इतना ही नहीं, उन्होंने प्रोपेगेंडा वीडियो, पैम्पलेट और अन्य सामग्री का उपयोग लोगों को लुभाने के लिए किया ताकि वे उनके संप्रदाय में शामिल हों। उनके भय के कारण चीन में व्यापक दंगे हुए और हेनान प्रांत में एक महिला और 23 छात्रों की छुरा घोंपने सहित कई उल्लेखनीय घटनाएँ हुईं। संप्रदाय के 100 से अधिक सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था।
  • 2014 में, संप्रदाय के सदस्यों ने चीन में मैकडॉनल्ड्स में एक 37 वर्षीय महिला की हत्या कर दी, क्योंकि उसने अपना नंबर देने से इनकार कर दिया था। संप्रदाय के सदस्यों ने दावा किया कि एक दानव उसके पास था।
  • 2019 में, चर्च के सदस्यों ने इज़राइल में चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की जिसके कारण हिब्रू भाषा में राजनीतिक मैसेज पोस्ट करने वाले सैकड़ों अकाउंट सस्पेंड हो गए।

चीन सरकार ने चर्च पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालाँकि, चर्च के सदस्य अपने संप्रदाय को दुनिया के विभिन्न हिस्सों में फैलाने के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं।

लंदन से भारतीय महिला का अपहरण, बांग्लादेश ले जाकर कबूल करवाया इस्लाम: NIA ने ‘लव जिहाद’ एंगल से शुरू की जाँच

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी NIA ने बांग्लदेश के कुछ नागरिकों के खिलाफ मानव तस्करी का मामला दर्ज किया है। मामला चेन्नई की एक महिला का अपहरण कर के उसे बांग्लादेश ले जाए जाने का है, जिसमें अब ‘लव जिहाद’ का एंगल भी सामने आ रहा है। मई 21, 2020 को पीड़िता के पिता ने चेन्नई पुलिस के समक्ष इस सम्बन्ध में शिकायत दर्ज की थी। इसके बाद जुलाई में ये मामला NIA को सौंप दिया गया था।

पीड़िता लंदन में हायर स्टडीज के लिए गई हुई थी। उसी दौरान बांग्लादेशी नागरिक नफीस ने उसे लुभाना शुरू कर दिया। वो महिला को रिलेशनशिप में आने के लिए जाल बिछा रहा था। इस काम में आरोपित का पिता सरदार शेखावत हुसैन के साथ-साथ यासीर और नौमान अली खान नामक दो अन्य लोग भी शामिल थे। आरोप है कि नफीस इन सबकी मदद से पीड़िता का अपहरण कर बांग्लादेश ले गया।

बांग्लादेश ले जाकर महिला से जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया। साथ ही उसे घर में बंद कर के रखा जाता था, ताकि वो किसी को भी अपने साथ हुए अत्याचार के सम्बन्ध में कुछ भी बताने की स्थिति में न रहे। लेकिन, महिला किसी तरह फोन कॉल करने में सक्षम रही और अपने माता-पिता को बताया कि बांग्लादेश में उसका यौन शोषण किया जा रहा है और उसे लगातार प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।

पीड़िता के पिता चेन्नई ने रोयापुरम में एक कारोबारी हैं और कुछ ही सालों पहले उत्तर भारत से वहाँ जाकर बसे हैं। पिता ने बेटी के फोन कॉल के बाद नफीस से संपर्क किया और अपनी बेटी को रिहा करने को कहा। लेकिन, जब नफीस ने बदले में रुपए की माँग की तो पिता ने चेन्नई पुलिस कमिश्नर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद ये मामला सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) को सौंप दिया गया था।

शुरुआती जाँच के बाद सीसीबी ने डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस जेके त्रिपाठी के माध्यम से तमिलनाडु सरकार से निवेदन किया कि इस मामले को दिल्ली स्थित NIA को ट्रांसफर कर दिया जाए। इसके बाद केंद्र ने तमिलनाडु सरकार से नफीस के खिलाफ शिकायत रिसीव की। नफीस के खिलाफ भारतीय महिला को फँसा कर उसका अपहरण करने का मामला दर्ज किया गया।

इस मामले में NIA द्वारा आईपीसी की धाराओं 120B (साजिश), 294 (b) (प्रताड़ित करना), 363 (किसी भारतीय नागरिक का अपहरण), 364A (किसी व्यक्ति का अपहरण कर के उसे नजरबन्द रखना), 368 (जानबूझ कर किसी अपहृत किए गए व्यक्ति को गलत तरीके से कैद में रखना), 370 (मानव तस्करी – दास के रूप में किसी व्यक्ति को खरीदना या बेचना), धारा 384 (जबरन वसूली) और 506 (i) (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इस मामले में ज़ाकिर नाइक लिंक की भी जाँच की जा रही है। आशंका जताई गई है कि एक संगठित बांग्लादेशी समूह हो सकता है, जो इस तरह की हरकतों में लगा हो। इसीलिए ज़ाकिर नाइक को भी इस मामले में आरोपित बनाया गया है। नफीस के बारे में पता चला है कि वो बांग्लादेश के एक पूर्व सांसद का बेटा है, इसीलिए इस मामले में प्रभावशाली लोगों के शामिल होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

बता दें कि भारतीय हिन्दू महिलाओं के साथ देश में और बाहर ‘लव जिहाद’ के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। हाल ही में कानपुर से शालिनी यादव के गायब होने की खबर आई, जो मोहम्मद फैसल से शादी के बाद इस्लाम अपना कर दुनिया के सामने आई। वो जिस जूही कॉलनी में थी, वहाँ कई लड़कियों को संप्रदाय विशेष के युवकों द्वारा ‘लव जिहाद’ का शिकार बनाया जा चुका है। मोहम्मद फैसल भी शालिनी के बगल वाली कॉलनी में ही रहता है।

पिछले 2 महीने में कानपुर इलाके में घर से 5 लड़कियाँ भाग गईं। इन पाँचों लड़कियों के भागने और जिन आरोपितों के संग वो भागीं,उससे सम्बंधित एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि कैसे अब जूही कॉलनी ‘लव जिहाद’ का अड्डा बन गया है और यहाँ की लड़कियों को इसका शिकार बनाया जाता है। अंदेशा जताया गया है कि विभिन्न थानों में दर्ज भागने वाली लड़कियों की जाँच अगर अच्छे से की जाए तो यह संख्या एक दर्जन से अधिक होगी और सभी आरोपितों के तार जूही कॉलनी से जुड़े मिलेंगे।

जिस बच्ची ने बहादुरी भरी गवाही से कसाब को मौत के फंदे तक पहुँचाया, महाराष्ट्र सरकार से मुआवजे के लिए आज भी है मोहताज

मुंबई में हुए 26/11 आतंकवादी हमले (Mumbai Terror Attack) की सर्वाइवर और प्रत्यक्षदर्शी देविका रोतावन (Devika Rotawan) ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उसने महाराष्ट्र सरकार से माँग की है कि ईडब्ल्यूएस स्कीम के तहत मकान देने का जो वादा किया गया था, उसे पूरा किया जाए। रोतावन का पूरा परिवार फिलहाल भारी वित्तीय संकट से जूझ रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोतावन ने 21 अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है। जिसमें उन्होंने कहा है कि महाराष्ट्र सरकार की तरफ से उसके परिवार को मकान दिया जाए और कुछ ऐसा प्रबंध किया जाए जिससे कि वह अपनी आगे की पढ़ाई जारी रख सके।

देविका रोतावन अब 21 साल की है। बता दें रोतावन 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों में शामिल लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी अजमल कसाब के खिलाफ गवाही देने वाली सबसे कम उम्र की गवाह थी। मुंबई हमलों के दौरान रोतावन महज दस साल थी और वे पुणे जाने के लिए अपने पिता और भाई के साथ छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पहुँची थी।

गौरतलब है कि 26/11 की भयावह रात आतंकवादियों द्वारा चलाई गई गोली उसके पैर पर लगी थी। गोली लगने के बाद वह बेहोश हो गई और उसे सेंट जॉर्ज अस्पताल ले जाया गया। हमले के बाद देविका के दो महीने के भीतर 6 सर्जिकल ऑपरेशन हुए और उसे 6 महीने बेड पर रहना पड़ा। जिसके बाद उसने आतंकवादी अजमल कसाब के खिलाफ गवाही दी थी। वह मुंबई आतंकवादी हमले के मामले में सबसे कम उम्र की गवाह बनी थी।

अपनी याचिका में रोतावन ने कहा कि आर्थिक तंगी के चलते किराया नहीं देने की वजह से उसके परिवार को जल्द मुंबई के बांद्रा में स्थित अपने वर्तमान घर को खाली करना पड़ेगा। उसने कहा कि लॉकडाउन की वजह से उसके पिता और भाई को कहीं नौकरी नहीं मिली। जिसके चलते घर के मासिक किराए को देने में दिक्कत हुई है। रोतावन ने बांद्रा चेतना कॉलेज में स्नातक पाठ्यक्रम हयूमैनिटिज़ में दाखिला लिया है। आगे चल कर वे सिविल सर्विसेज की तैयारी करना चाहती है।

याचिका में कहा गया कि हमले के तुरंत बाद, उसे केंद्र और राज्य सरकार के कई प्रतिनिधियों द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) कोटे के तहत आवास देने का वादा किया गया था। हालाँकि राहत माँगने के लिए कई पत्र लिखने के बावजूद, उसे किसी प्रकार की सहायता प्रदान नहीं की गई।

देविका ने कहा, “लॉकडाउन के दौरान कई परेशानियाँ बढ़ गई हैं। मैं महाराष्ट्र सरकार की ओर से मदद चाहती हूँ। सरकार की ओर से मुझे कहा गया था कि मकान मिलेगा। अन्य मदद का भी वादा किया गया। लेकिन अभी तक यह पूरा नहीं हो पाया है। मुझे पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से 10 लाख की सहायता राशि मिली थी जो मेरे टीबी के इलाज में खर्च हो गया। मैं इसके लिए शुक्रगुजार हूँ लेकिन जो वादे मेरे से किए गए, वे अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं।”

देविका ने कहा कि पिछले महीने उसने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को पत्र लिख कर ईडब्ल्यूएस कोटा के तहत आवासीय आवास की माँग की थी। उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा प्राप्त सभी सहायता उनके इलाज और देखभाल पर खर्च की गई और यह उनकी शिक्षा के लिए अपर्याप्त थी।