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370 का बदला: पाकिस्तान ने नया ‘ऐतिहासिक नक्शा’ जारी कर सियाचिन, J&K के साथ गुजरात के हिस्सों पर भी जताया अपना दावा

भारत को उकसाने और दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए पाकिस्तान ने एकबार फिर भारत की सीमा को अपने नक़्शे में दिखाया है लेकिन इस बार पाकिस्तान ने सिर्फ जम्मू-कश्मीर ही नहीं बल्कि गुजरात के एक हिस्से पर भी अपना अधिकार जताया है। नेपाल द्वारा भारतीय क्षेत्र को अपने राजनीतिक मानचित्र में शामिल करने के कारनामे के कुछ ही हफ्तों बाद पाकिस्तान ने ये कारनामा किया है।

पाकिस्तान सरकार ने अपने राजनीतिक मानचित्र को अपडेट करते हुए केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू और कश्मीर और लद्दाख को अपनी सीमाओं में शामिल किया। इसके साथ ही, पाकिस्तान ने अपने नए नक्शे में गुजरात के जूनागढ़ और सर क्रीक को पाकिस्तानी इलाकों के रूप में दिखाया है।

पाकिस्तान का नया राजनीतिक नक्शा:

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कैबिनेट की बैठक के बाद अपने देश का नया पॉलिटिकल मैप जारी किया है। इस मैप में सियाचिन को पाकिस्तान का हिस्सा बताया गया है। पाकिस्तान का कहना है कि भारत ने इस जगह पर अवैध तरीके से निर्माण कर रखा है।

सर क्रीक को भी विवादित बताते हुए पाकिस्तान ने इस इलाके को भी अपने नक्शे में शामिल कर लिया है। इस नक़्शे को ऐतिहासिक बताते हुए इमरान खान ने कहा कि ऐसा इतिहास में पहली बार हुआ है कि कश्मीर सहित पूरे जम्मू कश्मीर क्षेत्र को ही पाकिस्तान की सीमा के भीतर बताया गया है। इमरान खान ने कहा कि यह नया आधिकारिक नक्शा देश भर में पाठ्यक्रम में इस्तेमाल किया जाएगा।

इमरान खान ने कहा, “आज एक ऐतिहासिक दिन है, हमने पाकिस्तान का एक नया राजनीतिक मानचित्र लॉन्च किया है, जो पूरे देश के साथ-साथ कश्मीर के लोगों की उम्मीदों के अनुसार है। यह नक्शा पिछले साल 5 अगस्त को भारत सरकार के अवैध कृत्य का भी विरोध करता है।”

गौरतलब है कि ठीक एक साल पहले 5 अगस्त के दिन भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में सदियों से चले आ रहे अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त कर इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँट दिया था।

इमरान खान ने कहा कि कश्मीर विवाद का समाधान केवल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों में निहित है और पाकिस्तान कश्मीर के लोगों के लिए प्रयास करना जारी रखेगा। इमरान खान ने कहा- “हमारा मानना ​​है कि कश्मीर विवाद केवल राजनीतिक माध्यम से हल किया जा सकता है, सैन्य माध्यम से नहीं। हम यूएन को याद दिलाते रहेंगे कि उन्होंने हमसे एक वादा किया था।”

अनु बन कर अनवर ने हिन्दू युवती को प्रेम के जाल में फँसाया: महीनों तक किया बलात्कार, ₹6.5 लाख भी हड़पे

दिल्ली में लव जिहाद का एक नया मामला सामने आया है। आउटर दिल्ली के किराड़ी इलाक़े में मुस्लिम युवक अनवर ने खुद के मजहब की पहचान छिपा कर छद्म हिन्दू नाम अनु रखा और युवती को अपने प्रेम के जाल में फँसा कर महीनों बलात्कार करता रहा। उसने पीड़िता के साथ शादी भी रचा ली लेकिन उसे अपने घर से लाने से साफ़ इनकार कर दिया। आरोपित ने पीड़िता से लाखों रुपए भी ऐंठ लिए।

प्रेम नगर थाने में पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद आरोपित अनवर पर बलात्कार, धोखाधड़ी, धमकी और अमान्य तरीके से शादी का मामला दर्ज किया गया है। 20 वर्षीय पीड़ित युवती एक कम्प्यूटर सेंटर में बतौर प्रशिक्षिका कार्यरत थीं। वहीं पर जनवरी 2019 में उसकी मुलाकात अनवर उर्फ़ अनु से हुई थी। तब अनवर ने खुद का परिचय हिन्दू के रूप में ही कराया था, क्योंकि पीड़िता भी हिन्दू ही थी।

‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, अगले कुछ हफ़्तों में दोनों के बीच दोस्ती प्रगाढ़ हो गई, जिसके बाद मौक़ा देख कर आरोपित ने पीड़िता को अपने कमरे पर बुलाया। उसने युवती को कोल्डड्रिंक पीने को दिया, जिसके बाद वो बेहोश हो गई। उसने कोल्डड्रिंक में ही कुछ मिला रखा था। युवती के बेहोश होते ही आरोपित अनवर ने उसके साथ बलात्कार किया। साथ ही उसने इस घटना का वीडियो भी शूट कर लिया। पीड़िता जब उठी और उसे इसका एहसास हुआ तो वो रोने लगी।

बाद में अनवर शादी के अपने वादे से मुकर गया और उसने शादी करने से इनकार कर दिया। फिर वह पीड़िता को उसका बलात्कार वाला वीडियो वायरल करने की धमकी देकर बार-बार दुष्कर्म करता रहा। जब पीड़िता ने पुलिस में शिकायत की धमकी दी तो उसने एक मंदिर मे उसके साथ शादी कर ली और खुद के धर्म बदलने की भी बात कही। इस कथित शादी के दिन ही खुलासा हुआ कि वो अनु नहीं, अनवर है।

किसी तरह मामला शांत तो हुआ लेकिन शादी के बाद जब आरोपित ने पीड़िता को अपने घर ले जाने से इनकार कर दिया, उसके बाद विवाद फिर से बढ़ गया। शादी के बाद भी पीड़िता अपने ही घर में रहने को मजबूर थी। बार-बार मान-मुनव्वल करने पर आरोपित ने कहा कि वो अपने माँ-बाप के सामने उसे स्वीकार नहीं कर सकता है। बाद में वो उसे प्रताप बाग स्थित अपने कमरे पर लेकर गया।

वहाँ वो दिन भर पीड़िता को अपने कमरे पर रखा करता और शाम को उसके घर पहुँचा देता था। आरोप है कि उसने पीड़िता और उसके परिजनों के खाते में रखे साढ़े 6 लाख रुपए भी हड़प लिए और लाखों के गहने भी ले लिए। इसमें से कुछ रकम उसने अपने पिता खालिद और भाई इकबाल को दिया। जब अंत में पीड़िता को अनवर के असली मकसद का पता चला तो उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

जामिया हिंसा: याचिकाकर्ताओं के बचाव में इंदिरा जयसिंह की दलील- पत्थर और बोतलें नहीं होतीं हथियार

दिल्ली हाई कोर्ट पिछले साल दिसंबर माह में दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया और उसके आसपास हुई हिंसा से संबंधित याचिकाओं के एक बैच पर सुनवाई कर रही है। इस दौरान कुछ याचिकाओं का प्रतिनिधित्व सलमान खुर्शीद और इंदिरा जयसिंह ने किया। एक छात्र के बचाव में दलील देते हुए इंदिरा जयसिंह ने तर्क दिया है कि पत्थर और बोतलें हथियार नहीं होती हैं।

सुनवाई के दौरान जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्र वैभव मिश्रा का पक्ष रखते हुए एक दलील में वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि जामिया के छात्रों के साथ पुलिस के बर्ताव की स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए।

इंदिरा जयसिंह ने पुलिस की भूमिका पर आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है, मानो पुलिस ने ‘कट-पेस्ट’ कर के आरोप लगाए हैं। उन्होंने याचिकाकर्ता छात्रों के बचाव में कहा कि उकसावे के बावजूद, पुलिस को केवल न्यूनतम संभव बल का ही उपयोग करना चाहिए था। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि फिर भी पुलिस ‘सिद्धांत का उल्लंघन’ करते हुए कैम्पस में घुस गई थी।

जयसिंह ने कहा कि पुलिस के इस व्यवहार के कारण ही माहौल तनावपूर्ण हुआ और बड़ा विषय अब यह है कि पुलिस भविष्य में भी इस प्रकार का आचारण ना करे।

इसके साथ ही इंदिरा जयसिंह ने अदालत में कहा कि यूनिवर्सिटी के छात्र संसद तक मार्च करने के लिए इकट्ठे हुए थे और उनके पास दंगे या उपद्रव करने के सामान मौजूद नहीं थे। अपनी एक दलील में इंदिरा जयसिंह ने कहा कि पत्थर और बोतलें आग बरसाने के हथियार नहीं होते हैं।

हालाँकि, यदि इंदिरा जयसिंह के इन तर्कों की दिल्ली दंगों की वास्तविकता से तुलना करें तो स्पष्ट पता चलता है कि गत फरवरी माह में पूर्वोत्तर दिल्ली में घटित हिन्दू-विरोधी दंगों में इन्हीं पत्थर और बोतलों से बने पेट्रोल बम का भारी मात्र में उपयोग किया गया।

उपद्रवियों ने हिन्दुओं और पुलिस पर जमकर पत्थरबाजी कीं और उन्हें पेट्रोल बम से भरी बोतलों से निशाना बनाया। दुर्भाग्य से उन बोतलों में पेट्रोल भी था, एसिड भी, और दोनों से ही आग लगाई जाती हैं। ऑपइंडिया ने दिल्ली दंगों की ग्राउंड रिपोर्टिंग में जो जले हुए घर, पार्किंग, स्कूल दुकानें और लोग देखे थे, वो इन्हीं बोतलों का कमाल था।

ऑपइंडिया ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट्स में छतों पर लगाईं हुई वो गुलेलें भी देखीं जिनसे सामने मौजूद हिन्दुओं के घरों पर पत्थर और आग बरसाई गईं थीं। यहाँ भी पेट्रोल बम का इस्तेमाल हुआ था।

वामपंथी मीडिया चाहे तमाम कोशिशें करे, फिर भी IED बम खिलौने और अलार्म क्लॉक नहीं साबित हो सकते हैं। जिस पत्थर और बोतलों के तर्क को अदालत में इन कथित छात्रों के बचाव में इस्तेमाल किया जा रहा है उसी तर्क से यदि देखें तो IED कोई बम नहीं होता लेकिन तकनीकी रूप से वह बम ही होता है।

ठीक इसी तरह से, पत्थर और बोतलें अपने आप में बम नहीं होतीं लेकिन इनका इस्तेमाल दंगों को भड़काने और लोगों को निशाना बनाने के लिए पेट्रोल बम के रूप में खूब हुआ है और इनके जरिए तबाही ही मचाई जाती है, शांतिपूर्ण मार्च नहीं निकाले जाते, यह पिछले कुछ माह में पूरे देश ने देखा है।

अपनी दलीलों में इंदिरा जयसिंह ने दिल्ली पुलिस पर ही गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस को कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए और उन्हें वर्दी छात्रों पर हमला करने का अधिकार नहीं देती। याचिकाकर्ता की वरिष्ठ वकील ने कहा कि नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान जो कुछ पुलिस ने छात्रों के साथ किया, वह दंगे नहीं बल्कि पुलिस की बर्बरता थी

गौरतलब है कि दिसंबर, 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (NRC) के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों के हिंसक होने पर पुलिस जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के कैंपस में दंगाइयों की तलाश में घुसी थी।

पुलिस ने दावा किया था कि कैंपस के अंदर से उन पर पत्थर फेंके गए थे और हिंसा में शामिल कई लोग कैंपस में घुस गए थे, जिनके पीछे पुलिस अंदर गई थी। पुलिस ने ये भी दावा किया था कि प्रदर्शनकारियों के छात्रों के साथ हिंसा करने के बाद उन्हें कैंपस में आने को कहा गया था।

25,000 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने वाले मो. शरीफ को भूमि पूजन पर निमंत्रण, कहा- सेहत ने साथ दिया तो जरूर जाऊँगा

अयोध्या में कल यानी 5 अगस्त को होने जा रहे राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन कार्यक्रम में बेहद चुनिंदा लोगों को ही निमंत्रण मिला है। इन चुनिंदा लोगों में से ही एक नाम मोहम्मद शरीफ का है। शरीफ का इस निमंत्रण को पाकर कहना है, “अगर मेरी तबीयत ने इजाजत दी तो मैं जरूर जाऊँगा।”

बता दें, शरीफ वही व्यक्ति हैं जिन्हें नरेंद्र मोदी सरकार ने पद्मश्री से नवाजा था। शरीफ अब तक 25 हजार से ज्यादा लावारिस शवों का सम्पूर्ण रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार कर चुके हैं।

शरीफ की उम्र 80 वर्ष है। उनके चार बेटे थे। लेकिन दो की अब मौत हो चुकी है। उनमे से एक नाम मो रईस का भी है। रईस किसी काम के चलते 28 साल पहले सुल्तानपुर गए थे। वहीं से लापता हो गए। इसके बाद अयोध्या में विवादित ढाँचा गिरा दिया गया। जब सांप्रदायिक दंगे भड़के तो वह भी उसका शिकार हो गए।

इसी घटना ने मो शरीफ की जिंदगी बदल दी। जब उन्हें पता चला कि उनके बेटे के शव का अंतिम संस्कार लावारिस समझकर हुआ को उन्होंने जिले में लावारिस शवों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठा ली। उन्होंने आर्थिक तंगी झेलते हुए भी यह काम जारी रखा। अब लोग उन्हें इस काम के लिए चंदा भी देते हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, मोहम्मद शरीफ कहते हैं, “मैंने कभी हिंदू-मुस्लिम या किसी भी धर्म में भेद नहीं किया। इसलिए राम मंदिर के भूमि पूजन में शामिल होने से कोई परहेज नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझ जैसे शख्स को पद्मश्री के लिए चयनित किया, यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। अब पीएम मोदी अयोध्या आ रहे हैं तो मेरी उनसे मिलने की तमन्ना है।”

मो शरीफ को लोग प्यार से शरीफ चचा भी कहते हैं। अपने काम को तवज्जो मिलता देख वह कहते हैं, “जब तक मुझमें जान है, मैं लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करता रहूँगा। इस सेवा से मुझे सुकून मिलता है। मैं 27 सालों से इस सेवा में जुटा हूँ। मीडिया ने बेहद लगाव रखा और इस सेवाभाव का प्रचार भी किया, लेकिन ऐसे काम को सबसे बड़ा सम्मान दिया मोदी सरकार ने। इसके पहले की सरकारों ने मेरे काम को कोई तवज्जो नहीं दी थी।”

ओवैसी ने ‘बाबरी विध्वंस’ के लिए प्रियंका पर साधा निशाना, कहा- खुशी है कि अब नाटक नहीं कर रहे

अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन पाँच अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होगा। इस भूमि पूजन से पहले लगातार राजनीतिक बयानबाजी भी हो रही है। लेकिन इस सभी के बीच कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने बयान जारी करते हुए कहा कि भूमि पूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बने।

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रियंका के इस ट्वीट को लेकर उनकी खिंचाई की। ओवैसी ने कॉन्ग्रेस पार्टी पर उस ‘आंदोलन में योगदान देने का आरोप लगाया जिसने बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया।’

ओवैसी ने प्रियंका गाँधी के ट्वीट पर टिप्पणी करते हुए लिखा, “खुशी है कि वे अब और नाटक नहीं कर रहे हैं। यह अच्छी बात है कि वो भी अतिवादी विचारधार को गले से लगा रही हैं। लेकिन भाईचारे के मुद्दे पर वो खोखली बातें क्यों करती हैं। शर्म मत कीजिए, आप इस बात पर गर्व महसूस करिए कि किस तरह से आपकी पार्टी ने उस आंदोलन में योगदान दिया, जिसकी वजह से हमारे बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया।”

प्रियंका गाँधी वाड्रा ने अपने ट्वीट में लिखा था, “सरलता, साहस, संयम, त्याग, वचनवद्धता, दीनबंधु राम नाम का सार है। राम सबमें हैं, राम सबके साथ हैं। भगवान राम और माता सीता के संदेश और उनकी कृपा के साथ रामलला के मंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बने।” इसके साथ प्रियंका गाँधी ने अपना वक्तव्य भी शेयर किया है, जिसके अंत में उन्होंने ‘जय सियाराम’ लिखा है।

प्रियंका गाँधी वाड्रा की ओर से ये बयान तब आया, जब कॉन्ग्रेस की ओर से राम मंदिर को लेकर अलग-अलग तरह के बयान सामने आ रहे थे। एक तरफ मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भूमि पूजन का समर्थन किया, साथ ही स्वागत भी किया। उन्होंने लोगों को भूमि पूजन की बधाई भी दी। इतना ही नहीं कमलनाथ ने अपने ट्विटर पर प्रोफाइल फोटो भी बदल ली है और भगवा वस्त्र में नज़र आ रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर दिग्विजय सिंह की ओर से भूमि पूजन के वक्त पर सवाल खड़े किए गए थे, उन्होंने कहा था कि अभी शुभ मुहूर्त नहीं है ऐसे में इसे कुछ वक्त के लिए टाल देना चाहिए।

इतना ही नहीं दिग्विजय सिंह ने शुभ मुहूर्त ना होने और भाजपा नेताओं को कोरोना होने के कनेक्शन को जोड़ दिया था जिस पर काफी विवाद हुआ था। इन बयानों के बाद ही भाजपा की ओर से आरोप लगाया जा रहा था कि कॉन्ग्रेस एक बार फिर मंदिर निर्माण में अड़ंगा लगा रही है।

बांग्लादेशी वामपंथी नेता मनीषा चक्रवर्ती ने बकरीद पर 5 गायों को काटकर बाँटा गोमांस, अगले साल 30 की ‘गौ-कुर्बानी’ का वादा

बांग्लादेशी कम्युनिस्ट राजनेता डॉ. मनीषा चक्रवर्ती और उनके कॉमरेड साथियों ने शनिवार (अगस्त 1, 2020) को बांग्लादेश के बारिसल में बकरीद के अवसर पर कथित तौर पर गोमांस वितरित किया। मनीषा चक्रवर्ती, बांग्लादेश समाजवादी दल (Bangladesh Socialist party) की बारिसल डिस्ट्रिक्ट कमेटी की सदस्य सचिव हैं।

मनीषा इस ’नेक’ इरादे के पीछे के अपने उद्देश्यों को बताने के लिए फेसबुक पर लाइव आई। इस दौरान उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से गरीब लोग ईद का त्योहार न मनाने के लिए मजबूर थे। इसलिए उन्होंने और उनकी टीम ने यह सुनिश्चित किया कि ‘दलितों’ को पीछे न छोड़ा जाए।

लाइव के दौरान मनीषा को यह कहते हुए सुना गया, “एखना पंचति गोरू कुर्बानी दोव होयचा ओ सेत के प्रोसेस कोरा होइछे। (हमने 5 गायों की बलि दी है और मांस को परिष्कृत किया है)।”

उन्होंने कहा कि इतने कम समय के भीतर 5 गायों को मारना मुश्किल था, लेकिन उनके साथियों और स्वयंसेवकों के समूह मुश्किल काम को पूरा करने में सक्षम थे।

मनीषा ने कहा कि उसने बारिसल जिले के 30 वार्डों में से 50 ऐसे गरीब परिवारों की सूची तैयार की थी, जिन्हें पुलाव बनाने के लिए 1 किलो गोमांस और 1 किलो चावल दिया गया।

इस कार्य का श्रेय लेते हुए, मनीषा ने अपनी टीम द्वारा कड़ी मेहनत पर जोर देने के लिए गाय के मांस से भरे पैकेट की ओर कैमरे को घुमाया।

उन्होंने कहा कि उनकी टीम ईद के दिन सुबह 7 बजे से अथक प्रयास कर रही थी। जिला स्तर पर पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले एक व्यक्ति ने कहा, “पिछले साल, हमने लगभग 5000 परिवारों को खिलाया था … हमने 5 गायों को खरीदने और उसकी बलि देने के लिए धन जुटाया। हम सभी का धन्यवाद करते हैं जिन्होंने ऐसा करने में हमारी मदद की।”

बांग्लादेशी राजनेता ने अपनी फ्यूचर प्लानिंग बताते हुए कहा, “अगामी कुर्बानी ते 30 टा वार्ड ई मिनिमम 30 टा गोरू कुर्बानी दिबो (अगले वर्ष, ईद पर, हम जिले के 30 वार्डों में लोगों को खिलाने के लिए कम से कम 30 गायों की बलि देंगे)।”

मीर जाफ़र का उदाहरण देते हुए, जो एक गद्दार था और पलासी की लड़ाई में बंगाल के राजा सिराजुद्दुल्ला को धोखा दिया था, उन्होंने कहा, “षड्यंत्रकारी विफल हो गए हैं। इतिहास इस बात का प्रमाण है कि जो लोग लोगों के लिए काम करते हैं वे ही सफल हो सकते हैं।”

मनीषा ने आगे कहा, “हम एक परिवार हैं। हम दुःख और खुशी एक साथ साझा करते हैं … हम शोक और उत्सव एक साथ मनाते हैं …चूँकि यहाँ हर किसी ने इसे संभव बनाने के लिए अपना समय समर्पित कर दिया, यह वास्तव में बलिदान के अर्थ को दर्शाता है।”

चीन छोटे देशों का रहनुमा है, किसी के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देता: नेपाल ने कहा- पहले हम गलत साइड में थे

नेपाल ने एक बार फिर से अपना भारत-विरोधी रवैया प्रदर्शित किया है। वहाँ के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने चीन की तरफ अपने देश के बढ़ते झुकाव और भारत से लगातार बढ़ रही दूरी का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि नेपाल पहले भारत की तरफ ज्यादा झुका हुआ था लेकिन अब वो सही रास्ते पर है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि नेपाल को ये ग़लती पहले ही सुधार लेनी चाहिए थी। बता दें कि नेपाल के प्रधानमंत्री ओली लगातार कुछ दिनों से विवादित बयान देकर भारत विरोधी रुख अपना रहे हैं।

नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा कि नेपाल और मौजूद कम्युनिस्ट सरकार पर चीन की तरफ झुकाव वाले आरोप परेशान करने वाले हैं। उन्होंने संतुलन और राष्ट्रीय हित की बात करते हुए इसका बचाव किया। हालाँकि, उन्होंने दोनों पड़ोसियों, नेपाल और चीन के साथ साझेदारी बढ़ाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि नेपाल के लिए दोनों देश आवश्यक हैं और किसी भी एक की कीमत पर दूसरे को बढ़ावा नहीं दे सकते या अनदेखा नहीं कर सकते।

‘आजतक’ की ख़बर के अनुसार, इस दौरान उन्होंने कहा कि नेपाल ने चीन को जो समझ दी है वो इतिहास में काफी पहले हो जाना चाहिए था। उन्होंने यहाँ तक दावा किया कि नेपाल पहले ग़लत जगह झुक गया था और एकतरफा ढलान की ओर बढ़ रहा था, जिसे सही करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि अब नेपाल कनेक्टिविटी को विविधता दे रहा है। नेपाल ने हाल ही में चीन के साथ एक परिवहन नेटवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किया है।

उन्होंने भारत के साथ भी समझौते करने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा:

हमें मालूम है कि भारत-चीन के बीच तनाव है लेकिन 21वीं सदी को एशिया की सदी कहा जाता है। चीन और भारत के बीच जितनी अच्छी समझ विकसित हो और मेलजोल हो, क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि बढ़ेगी। ये एशिया ही नहीं बल्कि विश्व शांति के लिए एक उपलब्धि होगी। इसलिए, उनके बीच की दूरी कम होने दें और सहयोग को बढ़ावा दें। नेपाल भी यही चाहता है। अगर भारत और चीन के बीच कोई झगड़ा है तो हम किसी का पक्ष नहीं लेंगे। हम योग्यता और मुद्दे के आधार पर अपने रिश्तों को विकसित करते हैं।

उन्होंने उत्पादन और परिवहन में होने वाले खर्च का भी रोना रोया और कहा कि लैंडलॉक्ड होने के कारण नेपाल को 20% ज्यादा खर्च देना पड़ता है। उन्होंने समझाया कि बांग्लादेश में किसी चीज की कीमत 100 रुपए है तो वह नेपाल में 120 रुपए हो जाती है। नेपाल के विदेश मंत्री ने चीन के साथ हुए समझौते की वजह इसी को बताया।

उन्होंने चीनी राजदूत पर टिप्पणी का विरोध करते हुए कहा कि चीन कभी किसी के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप नहीं करता है, ये उसकी अघोषित नीति है। उन्होंने दावा किया कि चीन छोटे देशों की तरफदारी करता है।

बता दें कि हाल ही में पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल के विदेश मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक भी की थी। इस बैठक में कोरोना महामारी, आर्थिक मदद और चीन की महत्वकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड को लेकर चर्चा हुई। जहाँ चीन ने पाकिस्तान की मिसाल देने से गुरेज नहीं किया। चीन ने पाकिस्तान को अपना अच्छा पड़ोसी देश बताते हुए कहा कि अच्छा पड़ोसी मिलना खुशनसीबी होती है। 

लव जिहाद: झूठी पहचान बताकर सुहेल ने रचा प्रेम प्रसंग, फिर दलित युवती को देने लगा निकाह और धर्म परिवर्तन की धमकी

उत्तरप्रदेश के मेरठ से एक बार फिर कथिततौर पर लव जिहाद का मामला सामने आया है। इस बार घटना भावनपुर के लाड़पुरा इलाके की है। यहाँ एक मुस्लिम लड़के ने एक दलित युवती को पहले झूठी पहचान बताकर प्रेमजाल में फँसाया और जब पोल खुली तो लड़की के घर से उसे जबरन उठाकर उससे निकाह करने की कोशिश की।

हालाँकि, मौके पर मौजूद परिवार ने उस वक्त विरोध करके लड़की को छुड़वा लिया और बाद में उन्होंने भावनपुर थाने में शिकायत दर्ज करवाई। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, 31 जुलाई को समुदाय विशेष का युवक अपने साथियों के साथ दलित युवती को घर से उठाने पहुँचा था। जहाँ परिवार के लोगों ने मामले का विरोध करके लड़की को बचा लिया और बाद में युवती के पिता की तरफ से भावनपुर थाने में तहरीर दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर युवक को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपित युवक का नाम रिपोर्ट में सुहेल बताया गया है। मामले में एफआईआर हो गई है। युवती के परिजनों ने बताया कि आरोपित सुहेल पिछले 6 माह से उनकी बेटी से नाम बदलकर मोबाइल पर इंटरनेट कॉल से बातचीत करता था।

उसने युवती को अपने प्रेमजाल में फँसा लिया था। लेकिन जब युवती को सुहेल की असलियत के बारे में पता चला तो उन्होंने थाने में तहरीर दी। इसके बाद उनसे समझौता करवा लिया गया। फिर 31 जुलाई को वह कुछ साथियों के साथ घर पहुँच गया और लड़की का धर्म परिवर्तन कराने की धमकी देने लगा।

रिपोर्ट के मुताबिक युवती के माता-पिता का कहना है कि वह पिछले तीन दिनों से इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन पुलिस ने इस मामले को मामूली धाराओं में दर्ज किया है।

ऑपइंडिया ने इस संबंध में भावनपुर थाने में बात करने की कोशिश की। मगर, कॉल रिसीव न होने के कारण कोई जवाब नहीं मिल पाया। आगे हमें जैसे ही इस मामले पर जानकारी मिलेगी हम अपनी रिपोर्ट अपडेट करेंगे।

गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले मेरठ के परतारपुर इलाके में एक लव जिहाद का वीभत्स चेहरा सामने आया था। जब एक माँ-बेटी का शव जमीन से बरामद हुआ। इस मामले में पुलिस ने शमशाद को गिरफ्तार किया था।

शमशाद पर आरोप था कि उसने पहले प्रिया नाम की महिला को फँसाया और फिर झूठ बोलकर शादी की। जब हकीकत खुली तो वह उस पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने लगा और एक दिन आपसी बहस में उसे और उसकी बेटी को मौत के घाट उतार दिया।

ऐसा होगा अयोध्या का भव्य राम मंदिर: इन 8 तस्वीरों में देखें अंदर से बाहर तक का अलौकिक दृश्य

अयोध्या का भव्य, दिव्य और अलौकिक राम मंदिर कैसा होगा, इसे आप 8 आधिकारिक तस्वीरों के माध्यम से समझ सकते हैं जिसे ट्रस्ट द्वारा जारी किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन तस्वीरों को आधिकारिक रूप से जारी करते हुए कहा है कि श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर विश्व में भारतीय स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण होगा। इसके आंतरिक और बाह्य स्वरूप के कुछ और चित्र यहाँ देखें:

अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट ने आश्वासन दिया है कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर भव्यता और दिव्यता की अद्वितीय कृति के रूप में विश्व पटल पर उभरेगा। बता दें कि ये भारत का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर होगा। 5 अगस्त को अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमिपूजन के साथ ही इसके निर्माण की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी। ऊपर की तस्वीरों में आप इस मॉडल को बारीकी से देख सकते हैं।

सीएम योगी ने कहा है कि इस पावन घड़ी की प्रतीक्षा करते हुए पीढ़ियाँ ख़त्म हो गईं। राम के नाम में आस्था रखने वालों ने 5 शताब्दी तक इस अवसर की प्रतीक्षा की। तमाम कठिनाइयों के बावजूद राम मंदिर निर्माण के लिए संघर्ष करने वालों ने हार नहीं मानी। उसका ही परिणाम है कि राम मंदिर बहुत जल्द आकार लेने वाला है। करोड़ों लोगों की आस्था का सबसे प्रबल प्रतीक उनके सामने होगा।

उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम का एक वनवास सदियों पहले ख़त्म हुआ था और दूसरा अब ख़त्म हुआ है। इसके बाद वह अपनी जन्मभूमि स्थित सिंहासन पर विराजमान होंगे। इस पूरे अभियान और संघर्ष में कुछ नाम ऐसे थे जिनके उल्लेख के बिना पूरा विषय अधूरा है। 1989 में जब राम मंदिर निर्माण के लिए प्रतीकात्मक तौर पर भूमि पूजन हुआ। तब पहला फावड़ा किसी और ने नहीं बल्कि खुद महंत श्री अवेद्यनाथ ने चलाया था। 

PM मोदी भूमि पूजन करेंगे, इससे स्वर्णिम अवसर कुछ नहीं हो सकता: शिवसेना

शिवसेना ने मंगलवार (अगस्त 04, 2020) को कहा कि अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन समारोह को लेकर पूरा देश उत्साहित है और इससे बड़ा स्वर्णिम अवसर कुछ नहीं हो सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन करेंगे।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा है कि देश में COVID-19 संकट व्याप्त है, लेकिन यह भगवान शिव के आशीर्वाद से गायब हो जाएगा। हालाँकि, बुधवार (अगस्त 05, 2020) को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में आयोजित होने वाले इस समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कमी खलेगी क्योंकि वो कोरोना संक्रमण के कारण इसमें शामिल नहीं हो पाएँगे।

गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार (अगस्त 02, 2020) को कहा कि कोरोना के प्रारंभिक लक्षण दिखने के बाद उनका कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए। उन्होंने कहा कि उनका स्वास्थ्य ठीक है और वह डॉक्टरों की सलाह पर अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं।

अपने मुखपत्र में शिवसेना ने कहा कि वह उनके शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। इसके अलावा, शिवसेना ने इशारा करते हुए कहा है कि हालाँकि, शाह आइसोलेशन में हैं, फिर भी राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार पर संकट मंडरा रहा है।

मराठी दैनिक सामना ने कहा कि गहलोत के पास खुश होने का कोई कारण नहीं है कि शाह आइसोलेशन में हैं क्योंकि भाजपा नेता जहाँ कहीं भी हों, वो ‘राजनीतिक सर्जरी’ करना जानते हैं।

इसमें कहा गया है कि भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी और राम मंदिर निर्माण अभियान से जुड़े प्रमुख नेता मुरली मनोहर जोशी दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए श्रीराम मंदिर निर्माण की लड़ाई के इस इस मधुर अंत के गवाह बनेंगे।

दरअसल, आडवाणी और जोशी को सलाह दी गई है कि वे अपनी उम्र और अयोध्या में COVID-19 के प्रकोप को देखते हुए समारोह में न जाएँ। शिवसेना ने कहा कि अभियान से जुड़ी एक अन्य नेता उमा भारती, COVID ​​-19 के डर से इस समारोह में शामिल नहीं होंगी, और सरयू के तट से समारोह देखेंगी। शिवसेना ने इस लेख में कहा है कि लेकिन भगवान श्रीराम के आशीर्वाद से प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को कुछ नहीं होगा।

गौरतलब है कि कल 05, अगस्त को होने जा रहे अयोध्या में श्रीराम मंदिर भूमि पूजन की भव्य तैयारियाँ चल रही हैं। राम मंदिर भूमि पूजन कार्यक्रम में 5 अगस्त को हिस्सा लेने जा रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन घंटे तक अयोध्या में रहेंगे। सुबह 9 बजकर 35 मिनट पर पीएम मोदी दिल्ली से वह विशेष विमान के जरिए अयोध्या के लिए रवाना होंगे।