सोशल मीडिया पर झूठी अफवाहें फैलाने के आरोप में पूर्वी त्रिपुरा निर्वाचन क्षेत्र के पूर्व CPIM सांसद जितेंद्र चौधरी और CPIM सोशल मीडिया पेजों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
पूर्व सांसद ने त्रिपुरा के एडीसी मुख्यालय में होजागिरी की एक त्रिपुरा लड़की की टूटी हुई मूर्ति की तस्वीर पोस्ट की थी और दावा किया था कि मूर्ति को कुछ बदमाशों ने तोड़ दिया था।
त्रिपुरा पुलिस ने सीपीआईएम नेता के दावे का खंडन करते हुए अपने फेसबुक पेज में कहा कि सोशल मीडिया पर टूटी हुई मूर्ति के बारे में अफवाहें फैलाई जा रही हैं। इस अफवाह के जरिए दो समुदायों के बीच विवाद पैदा करने का प्रयास किया गया।
उन्होंने बताया कि यह मूर्ति भारी बारिश और तूफान के कारण नीचे गिर गई। उस समय एक पुलिस पार्टी भी वहाँ मौजूद थी जब वह नीचे गिर गई थी। राधापुर पुलिस स्टेशन की डायरी में इस संबंध में रिकॉर्ड भी दर्ज किया गया है।
पुलिस ने नागरिकों से अनुरोध किया कि वे इस तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें और न ही फैलाएँ। इस तरह की अफवाहें फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस तरह समुदायों के बीच मतभेद पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।
FIR दर्ज होने के बाद जितेंद्र चौधरी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार त्रिपुरा की संस्कृति को बर्बाद कर रही है और विरोध करने वालों पर केस दर्ज कर रही है।
चौधरी ने कहा, “यह अफसोस की बात है कि कोई भी लेनिन, कार्ल मार्क्स, यहाँ तक कि रवींद्रनाथ टैगोर, महाराजा बीर बिक्रम भी इस शासन के तहत सुरक्षित नहीं है और जो कोई भी आवाज़ उठाना चाहते हैं, उन्हें या तो मौखिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है या फिर उनके खिलाफ केस दर्ज किया जाता है।”
सीपीआईएम नेता जितेंद्र चौधरी ने कहा, “1 अगस्त को होजागिरी की एक महिला की मूर्ति को तोड़ दिया गया। इसके बाद मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट के एक वर्ग का कहना था कि यह रात में कुछ बदमाशों द्वारा किया गया था। मैंने पूछा था कि इस तरह की घटनाएँ क्यों हो रही हैं। ”
उन्होंने आगे कहा, “होजागिरी हमारे राज्य का प्रतीक है, इस तरह के कृत्य हमारी संस्कृति पर हमले हैं। त्रिपुरा ने इस तरह के असहिष्णु व्यवहार को कभी नहीं अपनाया लेकिन जब से भाजपा सत्ता में आई है, स्थिति बदल गई है।”
पूर्व सांसद ने त्रिपुरा को राजनीतिक प्रयोगों की एक प्रयोगशाला बनाने के लिए सत्ताधारी सरकार पर निशाना साधा, जिसे बाद में “हिंदू राष्ट्र” में लागू किया जाएगा।
आगे जितेंद्र चौधरी ने कहा, “लोगों को चुप कराने, समृद्ध संस्कृति पर हमले शुरू करने, हमारे अधिकारों का उल्लंघन करने, पुलिस को अपनी इच्छा के अनुसार इस्तेमाल करने और हिंदू राष्ट्र के लक्ष्य पर नजर रखने के लिए झूठे मामलों में FIR दर्ज कराने जैसे प्रयोगों के लिए त्रिपुरा को प्रयोगशाला के तौर पर चुना है। हालाँकि, मैं अपना केस लड़ूँगा क्योंकि संविधान सभी के लिए समान है।”
अयोध्या में राम मंदिर के भूमिपूजन की तस्वीरें अब न्यूयॉर्क की टाइम्स स्क्वायर इमारत पर नजर नहीं आएँगी। खबर है कि जिस विज्ञापन कंपनी ‘ब्रांडेड सिटीज’ के पास बिल्डिंग पर मुख्य बिल बोर्ड मैनेज करने का अधिकार था उन्होंने यूएस के मुस्लिम गुटों की आपत्ति के बाद इमारत पर श्रीराम की तस्वीर डिस्प्ले पर दिखाने से मना कर दिया।
संयुक्त राज्य अमेरिका में मुस्लिम समूहों के गठबंधन में से एक समूह ने कहा कि विज्ञापन कंपनी ‘ब्रांडेड सिटीज’, जो टाइम्स स्क्वायर में नैस्डैक के लिए डिजिटल विज्ञापन बोर्ड का प्रबंधन करती है और प्रमुख डिजिटल बोर्ड चलाती है, उसने अपने बिलबोर्ड पर भगवान राम की तस्वीरें दिखाने की योजना बनाने वाले हिंदू समूहों के लिए विज्ञापन चलाने से इनकार कर दिया।
क्लेरियन इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार मुस्लिम समूह इमामनेट ने दावा किया कि वह लोग न्यूयॉर्क के मेयर पर, न्यूयॉर्क के सिटी काउंसिल पर, गवर्नर पर, सीनेटर और सभासदों पर दबाव बना रहे थे कि वह हिंदू समुदाय के लोगों को टाइम्स स्कॉयर के बिलबोर्ड्स पर राम मंदिर के भूमिपूजन की तस्वीर न दिखाने दें।
इमामनेट के अध्यक्ष डॉ शईक उबैद ने बताया कि ऐड कंपनी ने भूमिपूजन समारोह के विज्ञापन को बिल्डिंग पर दिखाने से मना कर दिया है- ये बहुलवाद, मानवाधिकार, और कानून नियमों की जीत है।
इसके बाद डॉ उबैद ने अमेरिका में दक्षिणपंथी हिंदू विचारधारा के उदय के परिणामों के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि विज्ञापन विवाद ने उन्हें प्रभावशाली अमेरिकियों को विहिप और बजरंग दल के साथ मोर्चे पर तैनात भारत के आरएसएस के बारे में शिक्षित करने का अवसर दिया है।
मुस्लिम समूह की ओर से आए बयान के अनुसार ब्रांडेड सिटीज के डेनिस लेवाइन ने इस फैसले की पुष्टि की है। साथ ही बताया कि कंपनी ने उन्हें आश्वस्त किया है कि ब्रांडेड सिटीज व नैस्डैक बाबरी मस्जिद के विध्वंस का विरोध करते हैं और कभी भी किसी भी वर्चस्ववादी समूहों को अपने विज्ञापन चलाने की अनुमति नहीं देंगे।
गौरतलब है कि इससे पहले खबर आई थी कि 5 अगस्त के ऐतिहासिक मौके पर यादगार बनाने के लिए न्यूयॉर्क में कोशिशें की जा रही हैं जिसके चलते 5 अगस्त को वहाँ की प्रतिष्ठित इमारत टाइम्स स्क्वायर पर भगवान राम की भव्य तस्वीर प्रदर्शित होगी।
अमेरिका-भारत सार्वजनिक मामलों की समिति के अध्यक्ष जगदीश सेव्हानी ने इस मामले में बताया था कि 5 अगस्त को न्यूयॉर्क में ऐतिहासिक क्षण मनाने की व्यवस्था की जा रही है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखेंगे।
बता दें, मुस्लिम समूहों के विरोध के बाद एक ओर जहाँ ब्रांडेड सिटीज की ओर से यह फैसला आया है। वहीं ट्विटर पर कट्टरपंथी इसे अपनी जीत मान रहे हैं। आतिश तासिर जैसे लोग इस खबर की पुष्टि पूछते हुए लिख रहे हैं, “क्या यह सच है? कोई बता सकता है क्या? अगर हाँ, तो यह बहुत बड़ी जीत है। हिंदुत्व के दुष्ट नाजी प्रेरित पंथ का न्यूयॉर्क में कोई स्थान नहीं है। “
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भगवान राम के मंदिर बनाने की औपचारिक शुरुआत बुधवार (अगस्त 5, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमिपूजन में मंदिर की नींव रखने के साथ ही हो जाएगी। इसी क्रम में अब कॉन्ग्रेस नेता भी एक-एक कर के रामभक्त बनते जा रहे हैं। इसमें नया नाम प्रियंका गाँधी का जुड़ा है, जिन्हें राज्य में पार्टी के पुनरुद्धार की कमान सौंपी गई है। प्रियंका गाँधी ने अयोध्या में राम मंदिर बनने के स्वागत किया है।
प्रियंका गाँधी ने कहा कि सरलता, साहस, संयम, त्याग, वचनवद्धता, दीनबंधु राम नाम का सार है। राम सबमें हैं, राम सबके साथ हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भगवान राम और माता सीता के संदेश और उनकी कृपा के साथ रामलला के मंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बनें। बता दें कि कॉन्ग्रेस पर अक्सर आरोप लगते हैं कि उसने सत्ता में रहते राम के अस्तित्व को नकार दिया था।
इतना ही नहीं, प्रियंका गाँधी ने तो यहाँ तक कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति में रामायण की गहरी और अमिट छाप है। उन्होंने कहा कि भगवान राम और सीता की गाथा हज़ारों वर्षों से भारत की संस्कृति और इतिहास का हिस्सा रही हैं। उन्होंने नीति, कर्तव्यपरायणता, धर्म, प्रेम, पराक्रम, सेवा और उदात्तता का प्रेरणास्रोत रामायण को ही करार दिया। उन्होंने राम ही नहीं बल्कि श्रीहरि के अन्य रूपों का भी गुणगान किया।
उन्होंने यहाँ तक कहा कि भगवान राम का चरित्र युगों-युगो से लोगों को जोड़ने का माध्यम रहा है। उन्होंने शबरी, सुग्रीव, वाल्मीकि, भास, कम्बन, कबीर, तुलसीदास, रैदास और वारिस अली शाह का जिक्र करते हुए कहा कि राम सबके हैं, सबके दाता हैं। मैथिलीशरण गुप्त और महाप्राण निराला जैसे कवियों का जिक्र करते हुए प्रियंका गाँधी ने राम के लिए उनके द्वारा दिए गए वक्तव्यों को याद किया।
सरलता, साहस, संयम, त्याग, वचनवद्धता, दीनबंधु राम नाम का सार है। राम सबमें हैं, राम सबके साथ हैं।
भगवान राम और माता सीता के संदेश और उनकी कृपा के साथ रामलला के मंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बने।
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) August 4, 2020
जहाँ एक तरफ दिग्विजय सिंह और प्रमोद कृष्णन सरीखे कॉन्ग्रेस नेता बुधवार को होने वाले अयोध्या भूमिपूजन का विरोध करते हुए मुहूर्त पर सवाल उठा रहे हैं, प्रियंका ने इसका स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि रामलला का ये कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व, सांस्कृतिक समागम का कार्यक्रम बनेगा। प्रियंका गाँधी ने कहा कि चारों दिशाओं में रामकथा अनगिनत रूपों में लोकप्रिय होती आ रही है।
बता दें कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ आज 4 अगस्त के दिन एक बड़ा आयोजन कर रहे हैं। 5 अगस्त के दिन होने वाले राम मंदिर के भूमि पूजन से एक दिन पहले वह भोपाल स्थित अपने आवास पर हनुमान चालीसा का पाठ कराएँगे। इतना ही नहीं, इस दिन मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के तमाम नेता अपने घरों या स्थानीय मंदिरों में हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं।
सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के मामले में अब तक कई एंगल हमारे सामने आ चुके है। ताजा खुलासा रिपब्लिक टीवी की डिबेट में हुआ है। इस डिबेट में बिहार डीजीपी के अलावा सुशांत सिंह राजपूत को इंसाफ दिलाने के लिए चलाए जा रहे कैंपेन के प्रशांत भी शामिल रहे।
प्रशांत ने बताया कि उन्हें सुशांत की मैनेजर दिशा के एक मित्र का फोन आया था। फोन पर उन्होंने कहा, “मैं दिशा का मित्र बात कर रहा हूँ। मैं बहुत दुखी हूँ कि मैं कोई एक्शन नहीं ले पा रहा हूँ। आप लोग इस पर बहुत काम कर रहे हैं और शायद मैं आपकी कुछ सहायता कर सकूँ। लेकिन मैं चाहता हूँ मेरा नाम इसमें न आए। क्यूँकि मैं मुंबई में रहता हूँ और इन सब चीजों से डरता हूँ।”
प्रशांत दिशा के मित्र के हवाले से बताते हैं कि दिशा 8 जून को एक पार्टी में गई थी। वहाँ बॉलीवुड के कई कलाकार और कुछ नेता-मंत्री भी शामिल थे। उस पार्टी में दिशा के साथ दुर्व्यवहार किया गया। इसके बाद दिशा ने समय निकालकर सुशांत को फोन किया। जहाँ सुशांत ने सब बातें सुनकर उन्हें जल्द से जल्द वहाँ से निकलने को बोला और कहा कि तुम निकलो फिर कुछ एक्शन लेते हैं।
इसके 1 घंटे बाद संदीप का कॉल सुशांत को गया। सुशांत को उन्होंने बताया कि उनकी एक्स मैनेजर ने सुसाइड कर ली है। इस पर हैरानी जताते हुए सुशांत कहते हैं कि ऐसा तो हो ही नहीं सकता, क्योंकि दिशा ने सोचा ही नहीं था कि उसे सुसाइड करना है। जिसे सुनकर संदीप को यह मालूम चल गया कि सुशांत को सारी बातें मालूम हैं। फिर संदीप ने अपने सभी लोगों से डिस्कस किया।
प्रशांत कहते हैं कि दिशा के दोस्त ने उनसे कहा कि रिया का अगले दिन सुशांत से झगड़ा भी हुआ। सुशांत अपनी बातें रिया को समझाना चाहते थे। लेकिन रिया उनकी बातों को सुनना नहीं चाह रही थी, चूँकि शायद रिया का भाई भी उस 8 जून की पार्टी में शामिल था। इस नोंक झोंक के बाद ही दोनों अलग हुए।
गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत के इस पूरे मामले में जहाँ रिया चक्रवर्ती पर लगातार शिकंजा कसता जा रहा है, वहीं बिहार पुलिस की सक्रियता ने मुंबई पुलिस को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है।
इसी बीच बिहार सरकार भी सुशांत के पिता के कहने पर उनको इंसाफ दिलाने के लिए आगे आई है। जेडीयू प्रवक्ता संजय सिंह ने बताया है कि बिहार सरकार सुशांत मामले में सीबीआई जाँच के लिए सिफारिश करेगी। उनके अलावा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी कहा है कि वह सुशांत मामले में सीबीआई जाँच की सिफारिश करेंगे।
उधर, महाराष्ट्र सरकार ने सुशांत मामले में किसी भी प्रकार के कागज बिहार पुलिस को देने से साफ इंकार किया है। उनका कहना है कि बिहार पुलिस के अधिकार क्षेत्र में ये केस नहीं आता। मुंबई पुलिस अपनी जाँच कर रही है। हम इस केस को किसी और जाँच एजेंसी को नहीं सौंपेंगे।
Bihar Government recommends CBI investigation in Sushant Singh Rajput death case: JDU Spokesperson Sanjay Singh pic.twitter.com/MZd6YW37Jw
अगर मंदिर बन नहीं रहा होता और हम मंदिरों की स्थापत्य शैली के बारे में लिखने बैठ जाते, तो उसे पढ़ता कौन? राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण शुरू होने के बहाने, हमें अपने मंदिरों की स्थापत्य शैली के बारे में बात करने का मौका भी मिल जाता है। ऐसा नहीं है कि इनके बारे में पढ़ा नहीं जाता या बताया नहीं जाता। हाँ ये जरूर है कि आम आदमी की पहुँच से इस जानकारी को दूर रखा गया है।
भारत में मंदिरों का निर्माण 2300 साल से अधिक पुराना है। इतना समय मिलेगा तो जाहिर कि ये काफी विकसित शास्त्र के रूप में बनकर तैयार हो गया होगा। शुरुआती दौर में मंदिर के लिए देवगृह, देवस्थान, देवालय जैसे शब्द प्रयुक्त होते थे। मंदिर निर्माण की जो तीन विशिष्ट शैलियाँ हैं- नागर, द्रविड़ और बेसर, उनका विकास अलग अलग क्षेत्रों में हुआ।
भारत की विविधता का ये धोती या साड़ी जैसा ही उदाहरण है। धोती अलग अलग तरीके से पहनी जाती है, महाराष्ट्र के साड़ी पहनने के तरीके और बंगाल वाले में काफी अंतर है। इस विविधता को स्वीकार करते हुए भी मूल में एक होना सनातन का लक्षण है। हम “वन साइज फिट्स ऑल” की जबरदस्ती के समर्थक तो कभी रहे नहीं ना?
उत्तरी से लेकर मध्य भारत तक के नगरों में जिस प्रकार के मंदिर बनते थे, उन्हें नगर शब्द के आधार पर ही नागर शैली का नाम दिया गया। द्रविड़ शैली नर्मदा के निचले हिस्से से दक्षिणी भारत तक अधिक प्रसिद्ध है और बेसर इन दोनों शैलियों का मिला जुला रूप है।
अगर भारत में तीर्थों पर या मंदिरों के आस-पास विदेशों (और अब भारत) में प्रचलित “हेरिटेज वॉक” जैसा कुछ ज्यादा चलता तो इन मंदिर निर्माण शैलियों के बारे में जानकारी आम होती। अफ़सोस कि कक्षा के बाहर, वैकल्पिक पद्धतियों से शिक्षा देने की नीति भारत में कभी शुरू नहीं हुई और ऐसी सभी जानकारी आईएएस/यूपीएससी की तैयारी करने वालों तक सिमटी रही।
सोशल मीडिया के दौर और इंटरनेट से फैलती सूचनाओं के दौर ने इसे थोड़ा बदला है, वरना मंदिर निर्माण की किताबें भी बहुत महंगी होती हैं और अधिकतर आम लोगों की पहुँच से बाहर ही होंगी। मंदिर निर्माण पर चर्चा एक तो करीब 70 साल पहले हुई होगी, जब सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू हुआ था। अब भी यदा-कदा उस पर बात होती रहती है।
90 के दशक में जब राम-जन्मभूमि मंदिर का निर्माण फिर से करवाने का आंदोलन जोर पर था, करीब-करीब तभी से एक मंदिर का प्रारूप सा सबने देख रखा है। ये तीन शिखरों वाला मंदिर था और जैसा ये दिखता था, करीब-करीब वही “नागर” शैली है। इसके वास्तुकार चंद्रकांत भाई सोमपुरा एक ऐसे परिवार से आते हैं, जो करीब 15 पीढ़ियों से मंदिर निर्माण से जुड़ा है।
अपने पिता के साथ मिलकर इन्होंने ही सोमनाथ मंदिर का नक्शा भी बनाया था। अगर आपने दिल्ली का अक्षरधाम मंदिर देखा है, तो वो भी इनका ही बनाया हुआ है। पिछले वाले नक़्शे से अब का नक्शा थोड़ा अलग है, लेकिन है ये भी नागर शैली ही। ये मंदिर उँचाई में 8 भागों में बाँटे गए हैं – मूल (आधार), गर्भगृह मसरक (नींव और दीवारों के बीच का भाग), जंघा (दीवार), कपोत, शिखर, गल, आमलक और कुंभ (शूल सहित कलश)।
मंदिर निर्माण में मुख्यत: पत्थर का प्रयोग होता रहा है, किंतु ईंटों के भी प्रचुर प्रयोग मिल जाते हैं। मौर्य काल में काष्ठ मंदिरों के भी साक्ष्य हैं। पहाड़ी क्षेत्र में लकड़ी के मंडपों का प्रयोग अधिक देखने को मिलता है।
नेपाल के काठमांडू का नामकरण ही काष्ठ मंडप शब्द से हुआ है। समतल क्षेत्र के मंदिरों में पत्थरों का प्रयोग अधिक है। नागर शैली के मंदिरों के 8 प्रमुख अंगों में से अधिष्ठान वो मूल आधार होता है, जिस पर सम्पूर्ण भवन खड़ा किया जाता है। शिखर मंदिर का शीर्ष भाग अथवा गर्भगृह का ऊपरी भाग, कलश शिखर का शीर्षभाग होता है, जो कलश ही या कलश जैसा होता है।
ताजमहल का ऊपरी भाग देख लें, तो वहाँ भी कलश की संरचना नजर आ जाएगी। आमलक शिखर के ऊपरी हिस्से पर कलश के ठीक नीचे का वर्तुलाकार (थाली-चकरी जैसा) भाग होता है। इसके नीचे ग्रीवा होती है जो शिखर से ढलान के जैसी दिखती है।
कपोत किसी द्वार, खिड़की, दीवार या स्तंभ का ऊपरी छत से जुड़े भाग को कहते हैं। फिर आता है मसूरक जो कि नींव और दीवारों के बीच का भाग होता है, जंघा विशेषकर गर्भगृह की दीवारों को कहते हैं। इनके अलावा भी कई अलग-अलग भागों के नाम होते हैं, जैसे अधिष्ठान का ऊपरी प्लेटफॉर्म जगती कहलाता है।
मूल मंदिर के शिखर के बाद थोड़ी सी जगह छोड़कर मंडप भी बनते हैं। ये भी क्रमश: घटती ऊँचाई व विस्तार के साथ महामंडप, मंडप, अर्धमंडप कहलाते हैं। द्वार व स्तंभ भी स्वरूप के हिसाब से अलग-अलग नाम वाले होते हैं, जैसे तोरण द्वार।
शिखर में जुड़ने वाले उपशिखर उरुशृंग कहे जाते हैं। शिखर को विमान भी कहा जाता है। मंदिर के विभिन्न स्थानों पर गवाक्ष भी दिख सकते हैं। अगर बहुत गौर से देखा जाए तो नागर शैली में वर्गाकार (स्क्वायर) क्षेत्र पर निर्माण होता है और द्रविड़ शैली में आयताकार (रेक्टेंगल)।
इस आधार पर जन्मभूमि मंदिर को नागर कहें या द्रविड़, या बेसर, ये सोचना पड़ेगा। नागर शैली में गर्भगृह के सामने मंडप होता है, द्रविड़ में मंडप का वहीं होना आवश्यक नहीं और मंडप पर शिखर भी नहीं होता। इस आधार पर जन्मस्थान मंदिर नागर होगा। द्वार के लिए नागर शैली के मंदिरों में तोरण द्वार होते हैं और द्रविड़ में गोपुरम होता है। द्रविड़ शैली में मंदिर परिसर में ही जलाशय (जिसे कल्याणी या पुष्करणी कहते हैं) आवश्यक होता है, नागर शैली में ये आवश्यक नहीं है।
जैसी बहसें हाल में मंदिर निर्माण के शुरू होने के मुहूर्त को लेकर छिड़ी हुई दिखी, वैसी बहसें कभी स्थापत्य या वास्तु पर नहीं दिखीं। संभवतः इसका एक कारण ये होगा कि शिक्षा नीति बनाने वालों ने 70 साल तक स्थापत्य से जुड़ी भारतीय जानकारी को छुपाकर रखा होगा। इसके बाहर आने पर वैज्ञानिक गणना जैसी चीज़ों में भारतीय कितने सक्षम थे, इस पर भी बात करनी पड़ती, जो कि उनके बनाए नैरेटिव पर फिट नहीं आती थी।
अपर गंगा कनाल (हरिद्वार से कानपुर) का निर्माण 1842 में आरम्भ हुआ व 1854 में पूरा हो गया। 1858 तक भारत पर राज ईस्ट इंडिया कम्पनी का था, ब्रिटेन का नहीं। एक ट्रेडिंग कम्पनी क्यूँ इतना इन्वेस्ट करेगी?
जाहिर है लोग आपसी सूझ-बूझ से इतने बड़े निर्माण आराम से कर सकते थे। इनके बारे में चर्चा, शिक्षा के सबके लिए नहीं होने, सिर्फ ब्राह्मणों तक सीमित होने, के दावे की भी पोल खोल देता। भारत का सबसे पहला इंजीनियरिंग कॉलेज भी नहर की देखभाल और मरम्मत करने वालों के लिए बनाए जाने के नाम पर ही बनवाया गया था।
कहने का मतलब ये है कि आँखें खोलकर आपको देखना होगा। अपने आस पास देखना और सवाल पूछना भी हमें ही शुरू करना होगा। जन्मभूमि मंदिर का निर्माण केवल एक धार्मिक घटना ही नहीं है। ये संस्कृति का पुनः जागरण है।
इसके बनने से इतनी दिक्कत इसलिए भी है क्योंकि विदेशियों की फेंकी हुई बोटियों पर पलने वाले कुत्तों की दशकों की मेहनत पर ये एक झटके में पानी फेर देता है। बाकी अपनी आँखों से शेखुलरिज्म का टिन का चश्मा उतारिए तो शायद नजर आए। निर्माण में ढाई साल तो कम से कम लगेंगे ही, इतने वक्त में भी काफी कुछ बदल सकता है।
(इंटरनेट से साभार ली गई तस्वीर में एक, इस्लामिक आक्रमण में तोड़ दिए गए हिस्सा हम्पी के हजार राम मंदिर के अवशेषों का है, जिसे 1970 में लिया गया था और दूसरा हिस्सा उसके पुनः निर्माण के बाद का है। नागर थी, द्रविड़ या बेसर, ये आप खुद तय कर लें।)
आज जब मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ रामभक्त और हनुमान भक्त बन गए हैं और छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल रामायण से जुड़े पर्यटन स्थलों को विकसित करने की बातें कर रहे हैं, हमें विनायक दामोदर सावरकर का एक बयान याद करने की ज़रूरत है। सावरकर ने तब कहा था कि उन्होंने कॉन्ग्रेसवादी हिंदुओं को न सिर्फ शरीर पर बल्कि कोट पर जनेऊ पहन कर संघटनी सिद्धांतों का प्रचार करने के लिए बाध्य कर दिया।
सावरकर ने यह बात तत्कालीन राजनीति के संदर्भ में कही थी लेकिन ये आज भी प्रभावी है। महाराष्ट्र के सावरकर स्मारक के अध्यक्ष और वीर सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने ‘विश्वास न्यूज़’ से बात करते हुए उनके इस बयान की पुष्टि की। उन्होंने जुलाई 10, 1943 को अविभाजित भारत के सिंध प्रान्त में मुस्लिम लीग के साथ हिन्दू महासभा के गठबंधन को लेकर कॉन्ग्रेसी दुष्प्रचार को जवाब देते हुए ये बातें कहीं थीं।
उनके इस बयान का जिक्र 10 वॉल्यूम वाले ‘समग्र सावरकर’ के वॉल्यूम-8 (ऐतिहासिक निवेदन) में पृष्ठ संख्या 485-89 पर भी है। यहाँ सावरकर लिखते हैं:
“परंतु यह टिप्पणी मन:पूर्वक की जाती तो मुझे प्रसन्नता होती। क्योंकि हिंदुओं पर यदि अत्यंत घिनौना, हीन आरोप करना हो तो वह ‘पाकिस्तानानुकूल’ और लीग को अथवा ‘मुस्लिमों’ को संतुष्ट करने के लिए हिंदू हित का घात करनेवाला यह है, यह बात सीखने के लिए मैंने कॉन्ग्रेसवादी हिंदुओं को अंत में बाध्य किया। जैसा मैं बार-बार कहता था, उनके अनुसार कॉन्ग्रेसवादी हिंदुओं को केवल शरीर पर नहीं, कोट पर जनेऊ पहनकर हिंदू संघटनी सिद्धांतों का प्रचार करना पड़ा!”
“परंतु इन नेताओं के नेता बंदीशाला से मुक्त होने पर हिंदुस्थान के बँटवारे के करारनामे पर हस्ताक्षर करने के लिए और कॉन्ग्रेस की आधी-अधूरी राष्ट्रीयता की वेदी पर हिंदू हित की बलि चढ़ाने जब लीग के शिविर में जाऍंगे तब ये लोग उनका आदर-सत्कार कैसे करेंगे-यह विचार मेरे मन में आने पर उन लोगों पर दया आती है। (चार वर्षों के पश्चात जून 1947 में ऐसा ही घटा।)”
कुछ ही दिनों पहले कमलनाथ ने राम मंदिर के भव्य निर्माण का स्वागत किया था। उन्होंने शुक्रवार (जुलाई 31, 2020) के दिन एक वीडियो संदेश जारी किया था। उसमें उन्होंने कहा कि देशवासियों को लम्बे समय से इसकी अपेक्षा और आकांक्षा थी। मंदिर निर्माण हर भारतीय की सहमति से हो रहा है और यह केवल भारत में ही संभव है। इस वीडियो में कमलनाथ के पीछे भगवान हनुमान की तस्वीर भी नजर आ रही थी।
सरलता, साहस, संयम, त्याग, वचनवद्धता, दीनबंधु राम नाम का सार है। राम सबमें हैं, राम सबके साथ हैं।
भगवान राम और माता सीता के संदेश और उनकी कृपा के साथ रामलला के मंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बने।
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) August 4, 2020
कमलनाथ के पीछे-पीछे आज यानी 4 अगस्त को मनीष तिवारी और फिर प्रियंका गाँधी ने भी राम मंदिर को लेकर ट्वीट किया। बताना जरूरी इसलिए है क्योंकि यही वो पार्टी है, जो अब तक भगवान राम के अस्तित्व को ही नकार रही थी। इसी पार्टी के वकील सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के खिलाफ दलील दे रहे थे।
भगवान रामचन्द्र जी महाराज के भूमी पूजन के शुभ अफसर पर सब वैष्णव जनो और महनुभवों को कोटी कोटी बधाई pic.twitter.com/R00cfIWwu0
हाल ही में कमलनाथ ने भोपाल में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ कराने का आह्वान किया। वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने कॉन्ग्रेस के इस कदम को दिखावा बताया। भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल का कहना था कि “कॉन्ग्रेस ने हमेशा राम के अस्तित्व को खारिज है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले एक युवक को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने यह जानकारी सोमवार (अगस्त 3, 2020) को दी।
पुलिस ने बताया कि आरोपित व्यक्ति को रविवार (अगस्त 2, 2020) रात उसके घर से गिरफ्तार किया गया। उसकी पहचान बेंगलुरू के राममूर्ति नगर निवासी आनंद प्रसाद के रूप में हुई। वह कर्नाटक प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के आईटी सेल का सचिव है।
सोशल मीडिया पर भी हम देख सकते हैं कि आनंद प्रसाद की तस्वीर राहुल गाँधी के साथ है। साथ ही उन्होंने अपने नाम के साथ KPCC और सोशल मीडिया भी लिखा हुआ है। इसके अलावा फेसबुक प्रोफाइल से भी आनंद के KPCC से जुड़े होने के प्रमाण मिलते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री की कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद कुछ लोगों ने उन्हें लेकर सोशल मीडिया पर जो आपत्तिजनक व अपमानजनक ट्वीट किए थे, उसी के जवाब में KPCC के अधिकारी का रिप्लाई आया था।
साभार: NA Haris का ट्विटर
इतना ही नहीं, इस रिप्लाई में आनंद ने भी आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था। जिसके बाद उनके खिलाफ़ आईपीसी की 505/C, 505/1/B और 153-A समेत कई धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ।
Anand Prasad was arrested last night because of his tweet against Amit Shah. On the directive of Sri @DKShivkumar I went & spoke to him regarding the issue. We dont accept this type of hate messaging. pic.twitter.com/bW51bFZQtU
इस बीच, प्रदेश कॉन्ग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार ने पार्टी कार्यकर्ताओं से किसी भी नेता के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी नहीं करने की अपील की और कहा कि यह पार्टी की संस्कृति नहीं है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कॉन्ग्रेस एक ऐसी पार्टी है, जो भाईचारे और मानवता का उदाहरण प्रस्तुत करती है।
I appeal to Congress workers not to make defamatory statements against any political leader, on matters of health and other issues on social media platforms.
It is not in our culture to wish bad for others. Congress is a party that exemplifies brotherhood and humanity.
गौरतलब है कि रविवार को अमित शाह की कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव पाए जाने के बाद उन्हें डॉक्टर्स की सलाह पर मेदांता अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। इसकी जानकारी भी उन्होंने खुद ट्वीट करके दी थी।
उन्होंने ट्वीट में लिखा था, “कोरोना के शुरुआती लक्षण दिखने पर मैंने टेस्ट करवाया और रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। मेरी तबीयत ठीक है परन्तु डॉक्टर्स की सलाह पर अस्पताल में भर्ती हो रहा हूँ। मेरा अनुरोध है कि आप में से जो भी लोग पिछले कुछ दिनों में मेरे संपर्क में आए हैं, कृपया स्वयं को आइसोलेट कर अपनी जाँच करवाएँ।”
अमित शाह के कोरोना पॉजिटिव आने से लिबरलों और कट्टरपंथी इस्लामी लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। सोशल मीडिया पर किसी ने इसे अमित शाह की अंतिम रात बताते हुए उनके मौत की दुआ माँगी तो कई ने इसे सबसे अच्छा ‘ईदी’ बताया था।
एक यूजर ने लिखा, “सहायक पुजारी कोरोना पॉजिटिव पाए गए। राम मंदिर के पास तैनात 16 पुलिसकर्मी भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए और अब अमित शाह कोरोना संक्रमित हो गए हैं। वो प्लान करते हैं, मगर अल्लाह बेस्ट प्लानर है।” वहीं एक अन्य ने लिखा, “अल्लाह को जल्दी प्यारे हो जाओ।”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चीन को लेकर और सख्त हो गए हैं। इसी कड़ी में उन्होंने चाइनीज सोशल मीडिया एप TikTok को प्रतिबंधित करने की घोषणा की है। इसके लिए उन्होंने 15 सितंबर की तारीख मुकर्रर की है।
ट्रम्प ने कहा कि अगर दिए गए डेडलाइन तक किसी अमेरिकी कंपनी ने TikTok को नहीं खरीदा तो उसका प्रतिबंधित होना तय है। उन्होंने जोर दिया कि एक अच्छे करार के तहत TikTok को किसी अमेरिकी कंपनी द्वारा खरीद लिया जाना चाहिए।
इधर माइक्रोसॉफ्ट भी TikTok के साथ बातचीत में लगा हुआ है। वो इसकी पैरेंट कम्पनी ByteDance से TikTok को खरीदना चाहता है। हालाँकि, इस डील में TikTok का 30% शेयर खरीदने की बात चल रही है लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प का मानना है कि इसका पूरा 100% स्टेक अमेरिका में होना चाहिए। इसीलिए वो इस वार्ता से खुश नहीं हैं।
डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मामले में माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्या नडेला के साथ बात भी की है। ट्रम्प ने कहा कि ये बातचीत अच्छी रही और उन्होंने नडेला को अपनी सोच से अवगत करा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा कारणों से TikTok को किसी चाइनीज कम्पनी द्वारा चलाए जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। उन्होंने इसे एक बड़ी आक्रमणकारी समस्या बताया।
व्हाइट हाउस की कैबिनेट रूम में पत्रकारों को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि 30% स्टेक खरीदने से ज्यादा आसान है कि इसे पूरा का पूरा खरीद लिया जाए। उन्होंने पूछा कि जब इसका स्वामित्व दो कम्पनियों के पास होगा, तो चीजें कैसे ठीक होंगी? उन्होंने कहा कि इससे अमेरिकी खजाने को भी फायदा होगा।
डोनाल्ड ट्रम्प ने TikTok को एक बड़ा एसेट करार दिया लेकिन साथ ही कहा कि इसकी महत्ता तब तक नहीं हो सकती जब तक इसे अमेरिकी सरकार अप्रूव न करे। माइक्रोसॉफ्ट ने भी कहा है कि उसने अमेरिकी राष्ट्रपति की चिंताओं को समझते हुए बातचीत को आगे बढ़ाने का फैसला लिया है ताकि देश की सुरक्षा और अमेरिका को होने वाले वित्तीय फायदे को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश कर रहा है। उसने बातचीत को तेज़ी से आगे बढ़ा कर कुछ ही हफ्तों में इसे अंजाम तक पहुँचाने की बात भी कही है।
President Trump said he is open to Microsoft or another U.S. company buying TikTok, but wants the government to receive a portion of the sale price https://t.co/KDU0JaC1Bo
इस डील में ‘माइनॉरिटी बेसिस’ पर अन्य अमेरिकी कम्पनियों को भी निवेश करने का मौका दिया जाएगा। साथ ही डील पूरी होते ही अमेरिका में TikTok का सारा डेटा अमेरिका के नियंत्रण में आ जाएगा।
अमेरिका का कहना है कि 100 मिलियन अमेरिकी लोगों का डेटा चीन को भेजे जाने का खतरा है। हालाँकि, TikTok कहता रहा है कि उसने यूजर्स का सारा डेटा अमेरिका में आधारित सर्वर पर ही रखा है और सिंगापुर में इसे बैकअप किया जाता है। साथ ही ये भी बताया कि ये चाइनीज सरकार के नियंत्रण में नहीं आता है।
इधर भारत के बाद अब पाकिस्तान में भी TikTok को प्रतिबंधित करने की माँग उठ रही है। पाकिस्तान टेलीकॉम अथॉरिटी (PTA)’ ने लाइव स्ट्रीमिंग ऐप Bigo को प्रतिबंधित करने का फरमान सुनाया है। साथ ही TikTok को भी ‘अंतिम चेतावनी’ दी है।
TikTok पर अश्लील और अनैतिक कंटेंट्स होने के कारण उसे प्रतिबंधित करने की धमकी दी गई है। इससे चीन के सोशल नेटवर्किंग ऐप्स के लिए पाकिस्तान में मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से सम्बद्ध संस्था स्वदेशी जागरण मंच ने IPL प्रबंधन से कहा है कि वो चाइनीज स्पॉन्सर के साथ अगला सीजन आयोजित कराने को लेकर पुनर्विचार करे। इसके लिए संस्था ने BCCI से अनुरोध किया है।
लद्दाख में भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव के बीच चाइनीज कम्पनी Vivo द्वारा IPL आयोजित कराने को लेकर लोग विरोध जता रहे हैं। IPL-13 को यूएई में आयोजित किया जाना है। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण इसे भारत में आयोजित नहीं किया जा रहा है।
ज्ञात हो कि Vivo ने 2017 में BCCI के साथ 2199 करोड़ रुपए का करार किया था, जो 5 साल के लिए हुआ था। चाइनीज प्रोडक्ट्स का बहिष्कार किए जाने के लिए लगातार अभियान चला रहे स्वदेशी जागरण मंच ने तो यहाँ तक कहा कि अगर BCCI इस निर्णय को वापस नहीं लेता है तो लोगों को IPL का ही बॉयकॉट करना चाहिए।
संस्था ने इसे देश की वर्तमान भावनाओं के विपरीत बताया। संस्था के सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा कि ये सिर्फ उनकी माँग नहीं है बल्कि पूरा देश लद्दाख में हुई घटना के बाद ऐसा ही चाहता है। महाजन ने BCCI को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया चीन का बॉयकॉट कर रही है, IPL उसे शरण दे रहा है।
उन्होंने कहा कि BCCI को समझना चाहिए कि राष्ट्र से ऊपर कुछ भी नहीं है। वहीं कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी इस फैसले का विरोध जताते हुए कहा कि ये ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दोहरे रवैये को दिखाता है।
हालाँकि, BCCI ने इस संबंध में कुछ जवाब नहीं दिया है। बता दें कि IPL-13 कब आयोजन 19 सितंबर से लेकर 10 नवंबर तक किया जाना है। शाम में होने वाले मैच 7:30 PM से शुरू होगा।
10 नवंबर को फाइनल मैच होगा। सोशल डिस्टेंसिंग को देखते हुए दो मैचों के बीच पर्याप्त गैप भी दिया गया है। मैच में दर्शकों की उपस्थिति के विषय में UAE से बातचीत के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सभी फ्रेंचाइजियों को वीजा की प्रक्रिया शुरू करने की सलाह दे दी गई है।
The Governing Council’s #IPL2020 confirmations (subject to clearances from Govt. of India) —
Host: UAE [Dubai, Sharjah, Abu Dhabi] Dates: September 19 – November 10 Squad Limit: 24 players per team Title Sponsor: VIVO
इधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चीन को लेकर और सख्त हो गए हैं। इसी कड़ी में उन्होंने चाइनीज सोशल मीडिया ऐप TikTok को प्रतिबंधित करने की घोषणा की है। इसके लिए उन्होंने 15 सितंबर की तारीख मुकर्रर की है। ट्रम्प ने कहा कि अगर दिए गए डेडलाइन तक किसी अमेरिकी कंपनी ने TikTok को नहीं खरीदा तो उसका प्रतिबंधित होना तय है।
अमित शाह के कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद एक निश्चित तबका खुलकर उन्हें बद्दुआएँ दे रहा है। इसी क्रम में ऐमन रिजवी नाम की महिला ने भी अपनी हालिया वीडियो में देश के गृह मंत्री के लिए जमकर जहर उगला है।
ऐमन रिजवी (Aiman Rizvi) की यह पूरी वीडियो भारत न्यूज 91 नाम के यूट्यूब चैनल पर अपलोड है। इस वीडियो में हम सुन सकते हैं कि मोदी सरकार के प्रति अपनी घृणा व्यक्त करते हुए वह अमित शाह की मृत्यु के लिए दुआ कर रही है और अन्य लोगों से भी ऐसा करने को कह रही है।
वीडियो में ऐमन रिजवी गृह मंत्री के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग भी कर रही है। वीडियो में हम देख सकते हैं कि वह अमित शाह को ‘टकलू शाह’ कहती है और उनके कोरोना पॉजिटिव होने के तार मरकज से जोड़कर पूछती है कि क्या इसके तार मरकज से हैं या ये मरकज में घुसपैठ करता था?
ऐमन कहती है, “पूरा देश बर्बाद हो रहा है। लेकिन अमित शाह 5 महीने से पता नहीं कौन सी गुफा में घुसा हुआ है। अब मालूम चला है कि उसे कोरोना हो गया।” अपनी बात को आगे रखते हुए वह कहती है कि कोरोना महामारी जैसा कुछ भारत में तो क्या पूरी दुनिया में नहीं है। उसका मानना है कि किसी भी मुद्दे से बरगलाने के लिए भाजपा सरकार कोई नया ‘स्कैंडल’ लेकर आ जाती है और जनता से सहानुभूति इकट्ठा कर लेती है।
इसके बाद वीडियो में लुकमान की मॉब लिंचिंग पर झूठ फैलाते हुए ऐमन कहती है कि समुदाय के
एक नौजवान का बर्बरता से कत्ल कर दिया गया। जबकि हकीकत ये है कि लुकमान जिंदा है और उसकी स्थिति भी फिलहाल स्थिर है। इसके अलावा उसके साथ जो बर्बरता हुई, उस पर पुलिस कार्रवाई कर रही है।
लुकमान मामले में एफआईआर दर्ज हो गई है। लेकिन बिन इन तथ्यों को जाने ऐमन अपनी वीडियो में खुलकर नफरत फैला रही है। रिजवी की शिकायत है कि जो पुलिस मजहबी कॉलोनी में कोई मास्क न लगाए तो उसे मारने के लिए आ जाती है, वही पुलिस लुकमान के मामले में कुछ करने को तैयार नहीं है।
मुंबई मिरर की खबर से स्क्रीनशॉट
महिला की मानें तो वैसे तो पूरे विश्व में कोरोना महामारी जैसा कुछ है ही नहीं। लेकिन अगर, वाकई में कोरोना जैसा कुछ है तो इस बार अमित शाह को मरना चाहिए। उसे कहते सुना जा सकता है, “मैं 6 महीने से बोल रही हूँ। कोरोना का सिर्फ़ ड्रामा चल रहा है। कोई कोरोना नही है और अगर कोरोना है तो इस बार अमित शाह को मरना चाहिए। आप दुआ करें कि अगर वाकई इसे (अमित शाह) कोरोना हुआ है तो आप सब दुआ करें कि या खुदा ये मर जाए। हम कोरोना पर 1% तभी यकीन करेंगे जब अमित शाह मर जाएगा।”
ऐमन के अनुसार, कोरोना अगर भाजपा समर्थक या फिर उसके आईटी सेल में से किसी को भी होता है, तो वो बच जाता है। जबकि समुदाय विशेष से या दलित अगर आम बीमारी से भी पीड़ित हो रहा है तो वह मर रहा है। इसलिए ये समझना चाहिए कि यह सारा ड्रामा केवल लोगों का दिमाग डायवर्ट करने के लिए चल रहा है।
अपनी वीडियो में यह महिला संबित पात्रा के लिए ‘गोबर पात्रा’ और अमिताभ बच्चन को भाजपा के आईटी सेल व आरएसएस का एम्बेसडर बताते हुए कहती है:
“इन दोनों को कोरोना किया, लेकिन ये मरे नहीं। फिर जी न्यूज वालों को भी किया गया लेकिन वहाँ भी कुछ नहीं हुआ। इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया को किया, उसे भी कुछ नहीं हुआ। दिल्ली के इनके चाटुकार सीएम केजरीवाल को भी कुछ नहीं हुआ, वो भी हनीमून मनाकर वापस आ गया। अब इन्होंने सोचा कि किसको कोरोना करें? अगर यह नरेंद्र मोदी को करते तो वो 5 अगस्त को शिलान्यास में कैसे जा पाता। इसलिए इन्होंने बड़ी स्ट्रैटेजी प्लॉन की और कहा- टकलू हम तुझे कर देते हैं। तू तो वैसे भी गुफा में पड़ा हुआ है। ताकि लोग लुकमान को भूल जाएँ, गुजरात को भूल जाएँ, महाराष्ट्र को भूल जाएँ।”
वीडियो में आगे यह महिला यूपी सीएम के लिए भी घृणा व्यक्त करती है। ऐमन उनके लिए न केवल टकलू नंबर-2 जैसे शब्द का इस्तेमाल करती है, बल्कि उन्हें आतंकवादी भी कहती है। महिला बोलती है कि यह सब मिलकर आपको बावला बना रहे हैं।
ऐमन रिजवी के अनुसार इन लोगों ने आरएसएस के दफ्तर में बैठकर मीटिंग की है, तब जाकर निर्णय हुआ कि इस बार नंबर किसका आएगा। भाजपा नेताओं को अय्याश करार देते हुए ऐमन कहती है कि कोरोना के बहाने उन्हें लग्जरी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। उन्हें हनीमून पर भेजा जा रहा है और कहा जा रहा है कि तुम पहले ही अय्याश हो और अय्याशी करो।
भारतीय मीडिया को रखैल मीडिया कहते हुए ऐमन रिजवी ने वीडियो में राफेल के आने पर मनाई जा रही खुशी पर भी आपत्ति जताई। वह कहती है कि जहाँ से राफेल आया है, उसकी दुनिया में कोई औकात नहीं है। लेकिन ‘चिंदी चोर’ मोदी 5 खरीद कर ले आता है तो पूरी दुनिया भारत से काँपने लगती है?
महिला चीन नेपाल और भूटान का जिक्र करते हुए कहती है कि अभी इन देशों के साथ विवाद खत्म नहीं हुए हैं। लेकिन भाजपा हर रोज कोरोना वायरस का चूर्ण लेकर आ जाती है और बताती रहती है कि आज इसको हुआ, आज उसको हुआ। वह पूछती है कि अगर कोरोना हो रहा है तो आखिर इनके नेता मरते क्यों नहीं हैं।
वे दर्शकों से कहती है,
“दुआ करो ये मर जाए। हम भी दुआ कर रहे हैं कि ये पाप हमारे सिरों से हट जाए। क्योंकि ये आतंकवादी तड़ीपार है। ये वही तड़ीपार है, जिसने गोधरा ट्रेन करवाया और कारसेवकों को मरवाया। फिर उसी के नाम पर पूरा गुजरात जलवाया। सोहराब का एनकाउंटर करवाया। इशरत जहाँ का एनकाउंटर करवाया। ये वही तड़ीपार है, जिसके कारण आईपीएस संजीव भट्ट जेल में हैं। खुदा से दुआ करो। अल्लाह पाक इस पर बद्दुआएँ लग जाए। ये तड़ीपार मर जाए। चाहे इसे कोरोना न हो। लेकिन कोई ऐसी मौलिक बीमारी हो जाए कि ये उठे न।”
गौरतलब है कि ऐमन के अलावा गृहमंत्री के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद कुछ लोग सोशल मीडिया पर उनकी मौत की कामना कर रहे हैं। इनमें से एक कॉन्ग्रेस आईटी सेल के सचिव आनंद प्रसाद भी हैं, जिन्हें हाल ही में पुलिस ने उनके आवास से गिरफ्तार किया और कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया।