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आप भगवान राम की शक्ति देखिए, इमारतें नष्ट हो गईं… क्या कुछ नहीं हुआ: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर भूमिपूजन के दौरान “सियावर रामचंद्र की जय” से शुरू किया सम्बोधन। पीएम मोदी ने कहा कि बरसों से टाट और टेंट के नीचे रह रहे हमारे रामलला के लिए अब एक भव्य मंदिर का निर्माण होगा। टूटना और फिर उठ खड़ा होना, सदियों से चल रहे इस व्यतिक्रम से रामजन्मभूमि आज मुक्त हो गई है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए चले आंदोलन में अर्पण भी था, तर्पण भी था, संघर्ष भी था, संकल्प भी था।

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जिनके त्याग, बलिदान और संघर्ष से आज ये स्वप्न साकार हो रहा है, जिनकी तपस्या राममंदिर में नींव की तरह जुड़ी हुई है, को उन सबको नमन करते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि राम हमारे मन में गढ़े हुए हैं, हमारे भीतर घुल-मिल गए हैं। कोई काम करना हो, तो प्रेरणा के लिए हम भगवान राम की ओर ही देखते हैं। उन्होंने कहा कि आप भगवान राम की अद्भुत शक्ति देखिए, इमारतें नष्ट कर दी गईं, अस्तित्व मिटाने का प्रयास भी बहुत हुआ, लेकिन राम आज भी हमारे मन में बसे हैं, हमारी संस्कृति का आधार हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में उपस्थित अतिथियों को संबोधित करते हुए कहा कि यहाँ आने से पहले उन्होंने हनुमानगढ़ी का दर्शन किया। उन्होंने कहा कि राम के सब काम हनुमान ही तो करते हैं, राम के आदर्शों की कलियुग में रक्षा करने की जिम्मेदारी भी हनुमान जी की ही हैं और हनुमान जी के आशीर्वाद से श्री राममंदिर भूमिपूजन का ये आयोजन शुरू हुआ है। उन्होंने आश्वासन दिया कि श्रीराम का मंदिर हमारी संस्कृति का आधुनिक प्रतीक बनेगा।

पीएम ने कहा कि अयोध्या का मंदिर हमारी शाश्वत आस्था और हमारी राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बनेगा, और ये मंदिर करोड़ों-करोड़ लोगों की सामूहिक संकल्प शक्ति का भी प्रतीक बनेगा। उन्होंने कहा कि इस मंदिर के बनने के बाद अयोध्या की सिर्फ भव्यता ही नहीं बढ़ेगी, इस क्षेत्र का पूरा अर्थतंत्र भी बदल जाएगा। यहाँ हर क्षेत्र में नए अवसर बनेंगे, हर क्षेत्र में अवसर बढ़ेंगे। पीएम ने कहा कि जब पूरी दुनिया से लोग यहाँ आएँगे, पूरी दुनिया प्रभु राम और माता जानकी का दर्शन करने आएगी।

बकौल पीएम मोदी, ये महोत्सव विश्वास को विद्यमान से, नर को नारायण से, लोक को आस्था से, वर्तमान को अतीत से और स्वं को संस्कार से जोड़ने का महोत्सव है। नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में कहा कि आज का ये दिन करोड़ों रामभक्तों के संकल्प की सत्यता का प्रमाण है। आज का ये दिन सत्य, अहिंसा, आस्था और बलिदान को न्यायप्रिय भारत की एक अनुपम भेंट है। उन्होंने कहा कि राममंदिर के निर्माण की ये प्रक्रिया, राष्ट्र को जोड़ने का उपक्रम है। पीएम ने कहा:

“कोरोना से बनी स्थितियों के कारण भूमिपूजन का ये कार्यक्रम अनेक मर्यादाओं के बीच हो रहा है। श्रीराम के काम में मर्यादा का जैसा उदाहरण प्रस्तुत किया जाना चाहिए, देश ने वैसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है। इसी मर्यादा का अनुभव हमने तब भी किया था, जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। हमने तब भी देखा था कि कैसे सभी देशवासियों ने शांति के साथ, सभी की भावनाओं का ध्यान रखते हुए व्यवहार किया था। आज भी हम हर तरफ वही मर्यादा देख रहे हैं। जिस तरह दलितों-पिछड़ों-आदिवासियों, समाज के हर वर्ग ने आजादी की लड़ाई में गाँधी जी को सहयोग दिया, उसी तरह आज देशभर के लोगों के सहयोग से राम मंदिर निर्माण का ये पुण्य-कार्य प्रारंभ हुआ है। जैसे पत्थरों पर श्रीराम लिखकर रामसेतु बनाया गया, वैसे ही घर-घर से, गाँव-गाँव से श्रद्धापूर्वक पूजी शिलाएँ, यहाँ ऊर्जा का स्रोत बन गई हैं। देश भर के धामों और मंदिरों से लाई गई मिट्टी और नदियों का जल, वहाँ के लोगों, वहाँ की संस्कृति और वहाँ की भावनाएँ, आज यहाँ की शक्ति बन गई हैं।”

पीएम मोदी ने अयोध्या राम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम में कहा कि श्री रामचंद्र को तेज में सूर्य के समान, क्षमा में पृथ्वी के तुल्य, बुद्धि में बृहस्पति के सदृश्य, और यश में इंद्र के समान माना गया है। श्रीराम का चरित्र सबसे अधिक जिस केंद्र बिंदु पर घूमता है, वो है सत्य पर अडिग रहना। इसीलिए श्रीराम संपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि उनका अद्भुत व्यक्तित्व, उनकी वीरता, उनकी उदारता उनकी सत्यनिष्ठा, उनकी निर्भीकता, उनका धैर्य, उनकी दृढ़ता, उनकी दार्शनिक दृष्टि युगों-युगों तक प्रेरित करते रहेंगे।

बकौल पीएम मोदी, राम प्रजा से एक समान प्रेम करते हैं लेकिन गरीबों और दीन-दुखियों पर उनकी विशेष कृपा रहती है। जीवन का ऐसा कोई पहलू नहीं है, जहाँ हमारे राम प्रेरणा न देते हों। भारत की ऐसी कोई भावना नहीं है, जिसमें प्रभु राम झलकते न हों। भारत की आस्था में राम हैं, भारत के आदर्शों में राम हैं! भारत की दिव्यता में राम हैं, भारत के दर्शन में राम हैं। उन्होंने कहा कि हजारों साल पहले वाल्मीकि की रामायण में जो राम प्राचीन भारत का पथ-प्रदर्शन कर रहे थे।

नरेंद्र मोदी ने आयोध्य में आगे कहा कि जो राम मध्ययुग में तुलसी, कबीर और नानक के जरिए भारत को बल दे रहे थे, वही राम आज़ादी की लड़ाई के समय बापू के भजनों में अहिंसा और सत्याग्रह की शक्ति बनकर मौजूद थे। आज भी भारत के बाहर दर्जनों ऐसे देश हैं, जहाँ की भाषा में रामकथा आज भी प्रचलित है। उन्होंने विश्वास जताया कि आज इन देशों में भी करोड़ों लोगों को राम मंदिर के निर्माण का काम शुरू होने से बहुत सुखद अनुभूति हो रही होगी।

पीएम मोदी ने सन्देश दिया कि हमें ये सुनिश्चित करना है कि भगवान श्रीराम का संदेश, हमारी हजारों सालों की परंपरा का संदेश, कैसे पूरे विश्व तक निरंतर पहुँचे। कैसे हमारे ज्ञान, हमारी जीवन-दृष्टि से विश्व परिचित हो, ये हम सबकी, हमारी वर्तमान और भावी पीढ़ियों की ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि श्रीराम के नाम की तरह ही अयोध्या में बनने वाला ये भव्य राममंदिर भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत का द्योतक होगा। यहाँ निर्मित होने वाला राममंदिर अनंतकाल तक पूरी मानवता को प्रेरणा देगा।

PM मोदी ने लोकतांत्रिक तरीके से समाधान निकाला, 5 शताब्दी के बाद संकल्प पूरा हुआ: योगी आदित्यनाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर की आधारशिला रख दी है। भूमि पूजन की सभी प्रक्रिया करने के बाद प्रधानमंत्री ने शुभ मुहूर्त के अनुसार पीएम मोदी ने ठीक 12 बजकर 44 मिनट पर शिला रखी।

इस दौरान उनके साथ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद रहे।

भूमिपूजन कार्यक्रम सम्पन्न होने के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता को संबोधित किया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 5 शताब्दी के बाद आखिरकार यह संकल्प पूरा हो गया है और प्रधानमंत्री मोदी जी ने लोकतांत्रिक तरीके से इसका समाधान निकाला।

योगी आदित्यनाथ ने अपने सम्बोधन में कहा कि 5 सदी के बाद आज 135 करोड़ भारतवासियों का संकल्प पूरा हो रहा है। देश में लोकतांत्रिक तरीकों के साथ ही मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इस घड़ी की प्रतीक्षा में कई पीढ़ियाँ गुजर चुकी हैं।

सीएम योगी ने कहा – “हमने तीन साल पहले अयोध्या में दीपोत्सव का कार्यक्रम शुरू किया था, आज उसकी सिद्धी हो रही है।”

सीएम आदित्यनाथ ने कहा, “हम सब गौरवान्वित हैं कि अवधपुरी को लेकर जो सपना हम सबने देखा है, उस बात का एहसास तीन वर्ष पहले उत्तर प्रदेश की इस अवधपुरी में दीपोत्सव कार्यक्रम के साथ आप सबने महसूस किया होगा।”

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस गोरक्षा पीठ के महंत हैं, उस पीठ का अयोध्या श्रीराम मंदिर निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। गोरखनाथ मठ के महंत दिग्विजयनाथ का श्रीराम मंदिर आंदोलन में बड़ी भूमिका रही है। उनकी मृत्यु के बाद उनके शिष्य और उत्तराधिकारी महंत अवैद्यनाथ ने मंदिर में सक्रिय भूमिका निभाई, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ इन्हीं महंत अवैद्यनाथ के ही शिष्य हैं।

‘फिर से अजान होगी, फिर से नमाज होगी – इंशाअल्लाह’: #BabriZindaHai ट्रेंड के साथ ऐसे फैलाया गया नफरत

अयोध्या में आज इतिहास रच गया है। वर्षों तक अदालत में मामला चलने के बाद आज (5 अगस्त, 2020) अयोध्या में प्रधानमंत्री ने राममंदिर की आधारशिला रख दी है। पूजा विधिवत सम्पन्न हो चुकी है। अयोध्या को दीया और फूलों से सजाया गया है। आज का दिन दीपावाली से कम नहीं है।आज जब पूरी दुनिया राम की भक्ति में डूबी हुई है और उत्साह के साथ जश्न मना रही है, ऐसे में समाज का एक विशेष वर्ग इस पावन पर मातम मना रहा है।

आज रामजन्म भूमि के शिलान्यास के शुभ मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोग सोशल मीडिया के जरिए #ReturnBabriLandToMuslims, #5AugustBlackDay और #BabriZindaHai जैसे ट्रेंड चला कर समाज में नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं।

जैसा कि अपेक्षित था, कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने भूमिपूजन के दौरान ट्विटर पर जहर उगलना शुरू कर दिया है। वे रामजन्म भूमि निर्माण स्थल पर हुए भूमिपूजन को सेक्युलरिज्म की हत्या करार दे रहे हैं।

इससे पहले राम जन्मभूमि के फैसले के बाद दुख मना रहे अली सोहराब ने ट्वीटर के जरिए लोगों को बरगलाया था। जिसके लिए उन्हें 48 घंटे के पुलिस रिमांड पर भी भेजा गया था। वहीं अब उसी अली सोहराब, ने फर्जी न्यूज पेडलर के माध्यम से तमाम नफरत भरे ट्वीट्स को हैशटैग के साथ पोस्ट किया है। जैसे कि-: 5AugustBlackDay #ReturnBabriLandToMuslims and #BabriZindaHai

अली सोहराब इतने भड़क गए कि उन्होंने राम मंदिर भूमि पूजन को “आतंकवाद का कार्य” तक कह दिया।

इसके अलावा तथाकथित पत्रकार ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि अपने आप को अल्पसंख्यकों का मसीहा कहने वाले कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो ने भी भूमिपूजन का विरोध नहीं किया। बल्कि ये लोग उल्टा राम मंदिर के समर्थन में लिख रहे हैं।

इसी तरह, अन्य मुस्लिम कट्टरपंथी भी यह मानने से इनकार कर रहे कि राम जन्मभूमि पर बने अवैध ढाँचे यानी बाबरी मस्जिद का कई समय पहले ही विध्वंस हो चुका है। कट्टरपंथी यह बात पसंद करे या नहीं, लेकिन अयोध्या में भव्य राम मंदिर अब एक वास्तविकता है, जिसे नकारा नहीं जा सकता।

भारतीय लोकतंत्र में 5 अगस्त को काला दिन मानने वाले यह इस्लामी इस बात विश्वास कर रहे हैं कि एक दिन ऐसा आएगा जब बाबरी मस्जिद को दोबारा से बनाया जाएगा।

खैर, अयोध्या में राममंदिर भूमिपूजन हो चुका है। इस्लामवादी कट्टरपंथी मानसिकता वाले लोग इससे खुश हो या दुखी राम मंदिर की निरपेक्षता निर्विवाद है। बता दें, राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की लड़ाई पाँच सौ शताब्दियों तक चली।

यह उस सपने की पूर्ति है जो हिंदू पीढ़ी द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी पोषित किया गया है। इस पवित्र भूमि पर बने राममंदिर को सदियों पहले मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था।

‘ये भारत का सौभाग्य है कि भारत माता ने अपने सपूत नरेंद्र दामोदर दास मोदी को इस कार्य के लिए चुना’

आखिरकार भारतीय इतिहास की वह महान घटना सफलतापूर्वक संपन्न हुई। आखिरकार अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर का भूमिपूजन कार्यक्रम हो चुका है, जिसके लिए हिन्दुओं ने सदियों तक सन्घर्ष और इन्तजार किया और इसके यजमान बने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी!

अनुष्ठान के दौरान जब संकल्प लिया गया तो पुरोहितों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘राष्ट्रप्रमुख, सम्पूर्ण राष्ट्र के प्रतिनिधि’ के तौर पर यजमान के रूप में आह्वान किया गया और कहा कि यह भारत का सौभाग्य ही है कि भारत माता ने इस कार्य के लिए अपने सपूत को चुना है।

संकल्प के दौरान पुरोहितों ने राष्ट्र प्रतिनिधि के रूप में नरेंद्र दामोदर दास मोदी को श्रीराम मंदिर के शिलान्यास के लिए आह्वान किया और जैसे ही भूमिपूजन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ, पांडाल जय श्रीराम और हर हर महादेव के नारों से गूँज उठा।

वास्तव में संकल्प पूजा-अनुष्ठान का वह हिस्सा होता है, जिसमें यजमान पूरी पूजा के फल के लिए ईश्वर (देवराज इंद्र) से प्रार्थना करता है। मान्यता है कि यदि यजमान संकल्प नहीं करता है तो उसे अनुष्ठान का फल नहीं मिलता।

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि में भूमिपूजन का यह भावुक अवसर देशवासियों ने दूरदर्शन चैनल पर देखा। पुरोहितों ने कहा कि हम सभी भगवन से प्रार्थना करते हैं कि हम स्वयं रामराज्य का दर्शन करें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीराम मंदिर की आधारशिला रख दी है और पूजा सम्पन्न हो गई है। राम मंदिर निर्माण के लिए पहले शिलाओं का पूजन किया गया। 12 बज कर 44 मिनट पर चाँदी की कन्नी से नींव डाली गई। पूजा स्थल पर मुख्यमंत्री योगी, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, संघ प्रमुख मोहन भागवत और नृत्य गोपाल दास मौजूद हैं।

CBI करेगी सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच, केंद्र ने मंजूर की बिहार सरकार की माँग

केंद्र ने सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले की सीबीआई जाँच शुरू करने के बिहार सरकार के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। अब बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच सीबीआई करेगी।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आदेश पर राजीव नगर थाना कांड संख्या 241/ 20 की सीबीआई जाँच की सिफारिश मंगलवार (अगस्त, 04, 2020) को केन्द्र सरकार को भेज दी गई थी। इससे पहले राज्य पुलिस मुख्यालय ने इसका प्रस्ताव तैयार किया। जल्द ही सीबीआई इस मामले में नई एफआईआर दर्ज कर पड़ताल शुरू कर सकती है।

गौरतलब है कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में हर दिन नए खुलासे सामने आए हैं। इसमें उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती के साथ उनके संबंधों से लेकर उनके मानसिक स्वास्थ्य, बैंक अकाउंट से लेकर उनकी मैनेजर रही दिशा सालियान की मौत से जुड़े कई सवाल सामने आए हैं।

सुशांत सिंह की कथित आत्महत्या को लेकर उनके पिता कृष्ण किशोर सिंह ने पटना के राजीवनगर थाने में FIR दर्ज कराई है। 25 जुलाई को यह प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसमें आईपीसी की धारा 341, 342, 380, 406, 306, 420, 506 और 120 (बी) की धाराओं के अंतर्गत मामले दर्ज किए गए हैं।

FIR में सुशांत की गर्लफ्रेंड एवं अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती, उसके माता-पिता और भाई समेत 6 लोगों को नामजद किया गया है। इसी केस की जाँच सीबीआई से कराने की अनुशंसा की गई थी।

इस मामले में जाँच को लेकर इसको लेकर महाराष्ट्र राज्य सरकार और बिहार पुलिस में खासी नाराजगी देखी गई। इस टकराव के बाद सुशांत सिंह के परिजनों ने मामले की जाँच सीबीआई से कराने की माँग की थी।

12:34 मिनट का दुर्लभ वीडियो: कारसेवकों पर बरस रही थीं गोलियाँ और जय श्रीराम के नारों से गूँज रहा था आसमान

बाबरी मस्जिद को दिसंबर 1992 में ध्वस्त कर दिया गया था। उससे 2 साल पहले नवंबर 1990 में मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उस महीने जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण की माँग लिए रामभक्त जुटे थे, तब मुलायम सिंह यादव ने उन पर गोलियाँ चलवाई थीं। यही वो घटना थी, जब कारसेवकों पर गोली चलवा कर सपा के संस्थापक ने “मुल्ला मुलायम’ की ‘उपाधि’ पाई थी। आधिकारिक आँकड़े कहते हैं कि इसमें 16 कारसेवकों की मौत हुई थी।

लेकिन, कहा जाता है कि असली आँकड़े इससे कहीं ज्यादा है। ‘रिपब्लिक टीवी’ के एक स्टिंग में पता चला था कि मृत श्रद्धालुओं को न सिर्फ मार डाला गया था बल्कि हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार तक नहीं होने दिया गया था। उन्हें दफना दिया गया था। नीचे हम वो वीडियो संलग्न कर रहे हैं, जिसमें आप कारसेवकों के साथ हुई क्रूरता को देख सकते हैं। इस वीडियो में यूपी पुलिस द्वारा कारसेवकों पर किए गए अत्याचार का एक नमूना दिख रहा है:

(चेतावनी: ये वीडियो डिस्टर्ब करने वाला है)

मुलायम ने कारसेवकों पर चलाई थी गोलियाँ

इस वीडियो में पुलिस को कारसेवकों पर हमला करते हुए और गोली चलाते हुए देखा जा सकता है। जिस तरह से पुलिस गोली चला रही है, उससे स्पष्ट है कि वो रामभक्तों की हत्या के इरादे से और उन्हें गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाने के लिए निशाना लगा रही है। इस वीडियो में मुलायम सिंह यादव की पुलिस ‘जय श्री राम’ बोलती भीड़ को खदेड़ कर गोली चलाते हुए दिख रही है। ये दुर्लभ वीडियो है।

इस वीडियो में कारसेवकों के मृत शरीर को सड़कों पर पड़े हुए देखा जा सकता है। सड़कों पर खून के धब्बे पड़े हुए हैं और माहौल काफ़ी भयावह दिख रहा है। हालाँकि, वीडियो की क्वालिटी ठीक नहीं है लेकिन तब भी इसमें नवंबर 1990 की उस क्रूरता को स्पष्ट देखा जा सकता है। एक साधु इस वीडियो में ये कहता दिख रहा है कि यूपी पुलिस की फायरिंग में अब तक 100 से भी अधिक लोग मर चुके हैं।

इस वीडियो में लोग कहते दिख रहे हैं कि पुलिस ने कारसेवकों के घरों में घुस-घुस कर उन्हें पकड़ा और उनके साथ क्रूरता की। श्रद्धालु बिलख-बिलख कर रो रहे थे और असहाय नजर आ रहे थे। एक रोते हुए श्रद्धालु को तो ये भी कहते देखा जा सकता है कि चाहे उनके साथ कितना भी अत्याचार हो, वो अयोध्या में भव्य राम मंदिर बना कर ही रहेगा। यही कारण था कि कल्याण सिंह ने दिसम्बर 1992 में कारसेवकों पर गोलियाँ नहीं चलने दी।

बाद में कल्याण सिंह ने कहा था कि अयोध्या करोड़ों भारतीयों की आस्था का केंद्रबिंदु है। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होता है तो इससे करोड़ों भारतीयों की इच्छा पूरी होगी। उन्होंने कहा कि वो राम मंदिर निर्माण का समर्थन करते हैं। तब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था। उन्होंने कहा था, “हम लोग कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। फैसला आने के बाद केंद्र सरकार को इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।’

अपने CM पिता से जाकर ये 7 सवाल पूछो: सुशांत की मौत के मामले में कंगना ने आदित्य ठाकरे की लगाई क्लास

सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या के मामले में बिहार पुलिस द्वारा सीबीआई जाँच की सिफारिश के बाद अभिनेत्री कंगना रनौत ने सवाल पूछे हैं। अब सीबीआई जाँच का आदेश भी दे दिया गया है। सुशांत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में उपजे विवादों के बाद आदित्य ठाकरे ने खुद को पाक-साफ बताया है। कंगना रनौत ने उनके बयान पर प्रक्रिया देते हुए 7 सवालों की झड़ी लगा दी।

उन्होंने कहा कि किस तरह की गंदी राजनीति कर के उद्धव ठाकरे ने सीएम पद पाया था, ये किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने आदित्य से कहा कि वो अपने पिता से ये 7 सवाल पूछें। नीचे हम कंगना के सातों सवालों को आपके समक्ष पेश कर रहे हैं, जो उन्होंने आदित्य ठाकरे से अपने पिता से पूछने को कहा था:

  1. सुशांत सिंह राजपूत की गर्लफ्रेंड रही रिया चक्रवर्ती फ़िलहाल कहाँ हैं?
  2. सुशांत सिंह राजपूत की अप्राकृतिक मौत के मामले की एफआईआर मुंबई पुलिस ने क्यों नहीं दर्ज की?
  3. जब फ़रवरी 2020 में सुशांत सिंह राजपूत की जान को खतरे के बारे में मुंबई पुलिस को आगाह किया गया था, बावजूद उसके उनकी लाश मिलने के बाद पहले ही दिन मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या क्यों कह दिया?
  4. उनकी हत्या से पहले उन्होंने किस-किस से बात की थी, इसका पता लगाने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से उनके फोन के पिछले एक सप्ताह के कॉल एवं मैसेज का डेटा क्यों नहीं चेक करवाया गया?
  5. पटना के आईपीएस अधिकारी विनय तिवारी को क्वारंटाइन कर के क्यों रखा गया है?
  6. आखिर महाराष्ट्र सरकार सीबीआई जाँच से डर क्यों रही है?
  7. आखिर सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया और उसके परिवार वालों ने उनके सारे रुपए क्यों लूट लिए?

कंगना रनौत ने स्पष्ट किया कि इन सवालों का राजनीति से कोई लेनादेना नहीं है। बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में केंद्र सरकार ने सीबीआई जाँच का आदेश दिया है, जिसके बाद अब इस मामले में न्याय मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। आदित्य ठाकरे ने खुद के ऊपर लग रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वो बालासाहब के पोते हैं और ऐसा कोई गलत कार्य नहीं कर सकते।

गोधरा पीड़ितों ने राम मंदिर के भूमि पूजन को बताया बलिदान का फल, कहा- सपना पूरा होता दिख रहा है

आज राम मंदिर के भूमि पूजन के शुभ अवसर पर पूरा अयोध्या रौशनी से जगमगा रहा है। ऐसे में उन लोगों को नहीं भुलाया जा सकता जिनके त्याग और श्रद्धा के कारण आज रामलला टेंट से निकलकर अपने भव्य मंदिर में प्रस्थान के लिए तैयार हैं।

18 साल पहले कारसेवा करके लौट रहे 59 कारसेवकों को गोधरा कांड में जिंदा जलाया गया था। तब से उनके परिवार वाले अपने बलिदान के बदले श्रीराम का भव्य मंदिर देखने के अभिलाषी थे। आज उनका वह सपना पूरा होने जा रहा है।

भगवती बेन ठाकौर राधाबेन की बेटी हैं। वही राधाबेन जिन्होंने 18 साल से अपने घर में एक दीपक जलाया हुआ है और आज भूमि पूजन के साथ ही वह उसकी लौ को तेज करने के लिए दोबारा तेल डालेंगी।

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार भगवती बताती है, “18 साल पहले, वह लोग मेरे भाई का शव घर पर लेकर आए थे, तभी 28 फरवरी 2002 से मेरी माँ ने दीपक जला रखा है।”

बता दें, राधाबेन ने गोधरा कांड में अपने बेटे राकेश वघेला को खो दिया था। उसके बाद जैसे परिवार तबाह हो गया। 80 वर्षीय सरदारजी वघेला (राकेश के पिता) पैरालाइज्ड हो गए और अब वह बिस्तर से उठ भी नहीं सकते। उनकी माँ को भी इधर से उधर चलने में दिक्कत होती है। उनके पास आजीविका का कोई स्त्रोत नहीं है।

राकेश की पत्नी को सरकार से मुआवजे के रूप में 5 लाख रुपए मिले भी थे। मगर उसने उस राशि का थोड़ा हिस्सा ससुराल के साथ शेयर नहीं किया। राकेश के भाई आज एक सिक्योरिटी गार्ड के रूप में कार्य करते हैं और घर पर आते-जाते रहते हैं।

परिवार के मुखिया का कहना है कि जब भूमि पूजन होगा, तब वह प्रार्थना कर रहे होंगे। उनके बलिदान का आखिरकार उन्हें फल मिल जाएगा। लेकिन ये सच है कि वह अपना सब खो चुके हैं।

राकेश की शादीशुदा बहन भगवती कहती हैं, “मेरे भाई की मृत्यु के बाद किसी ने हमारे बारे में नहीं पूछा। कोई हमसे मिलने नहीं आया। हम कभी पैसे वाले नहीं थे मेरी भाई की पत्नी को मुआवजा भी मिला था।” वह कहती हैं कि राम मंदिर के भूमि पूजन अवसर पर उनकी प्रार्थना यही है कि वह लोग कठिन परिश्रम वाले जीवन से मुक्त हो जाएँ।

इसी प्रकार जेसल सोनी जिन्होंने अपने बहनोई को गोधरा में खोया था। वह भूमि पूजन पर आमंत्रण न पाकर नाराज दिखते हैं और कहते है हाईकोर्ट ने 4 साल पहले 5 लाख रुपए मुआवजा देने के निर्देश दिए थे। लेकिन उन्हें वो पैसा नहीं मिला।

दुर्गा वाहिनी की सदस्य माला रवाल कहती है कि ये वो समय नहीं है जब नकारात्मक कुछ भी कहा जाए। लेकिन ये सच है कि कई ऐसे परिवार हैं जिन्होंने इस संघर्ष में अपने परिवार को खोया।

आज इस अवसर पर गोधरा कांड में घायल होने वाले लोग भी भावुक हैं। मौत के मुँह से निकले कारसेवकों को एक ओर जहाँ अपना सपना पूरा होता सामने दिख रहा है। वहीं दूसरी ओर वह वो मंजर भी नहीं भुला पा रहे जिसे उन्होंने खुद महसूस किया और अपनों को अपनी आँखों के आगे खो दिया।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जयंतीभाई पटेल की 56 वर्षीय माता चंपाबेन उस नरसंहार का शिकार होने वाले लोगों में से एक नाम हैं जो उस दिन उस ट्रेन में अपनी एक महिला रिश्तेदार के साथ थी।

वही, महिला रिश्तेदार आज 62 वर्षीय है और अपनी पहचान नहीं बताना चाहतीं। लेकिन उस भयावह मंजर के अनुभवों को साझा करते हुए कहती हैं कि जब आग की लपटें उस दिन उनके कोच तक पहुँची तो उन्होंने अपनी ननद को पकड़ा हुआ था। लेकिन पता नहीं कैसे उन दोनों की पकड़ ढीली पड़ गई और वह तो किसी तरह खिड़की से बच निकली मगर चंपाबेन नहीं बच पाईं।

जयंतीभाई की आंटी और चंपाबेन की वह रिश्तेदार कहती हैं, “पिछली बातों को लेकर किसी के मन में नफरत नहीं। हमारा मानना है कि यह भगवान के लिए किया गया एक बलिदान था। मैं मंदिर निर्माण से बहुत खुश हूँ। अगर आज यह महामारी न होती तो यह खुशी दोगुनी हो जाती।”

बता दें चंपाबेन के 58 वर्षीय बेटे जयंतीभाई एक किसान हैं। उन्हें इस बात कोई गम नहीं है कि वह आज अयोध्या में नहीं मौजूद हैं। वह कहते हैं कि अगर कोरोना नहीं भी फैला होता तो इतने लोगों को एक जगह कर पाना बहुत मुश्किल होता।

वहीं, गुजरात के वादनगर के नवीनचंद्र ब्रह्मदत्त जिनकी पत्नी भी आगजनी में मारी गई थीं वह कहते हैं कि एक बार कोरोना वायरस जैसे ही खत्म होगा वह अपने दोनों बच्चों को लेकर एक दिन अयोध्या लेकर जाएँगे और रामलला के दर्शन करवाँएगे।

ऑरिजनल संविधान के पेज पर भगवान राम-सीता का चित्र: केन्द्रीय कानून मंत्री के ट्वीट पर ‘सेक्युलर’ लोगों में दहशत

अयोध्या में आज भगवान श्रीराम मंदिर निर्माण का भूमिपूजन होने जा रहा है, जिसे लेकर पूरा देश उत्साहित है। इसी अवसर पर केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक ट्वीट में भारतीय संविधान के कुछ मूल पन्नों की याद दिलाई है, जिनमें भगवान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण की तस्वीरें अंकित हैं।

केन्द्रीय संचार और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने संविधान के मूल पन्नों की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है – “भारत के संविधान के मूल दस्तावेज में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण का एक सुंदर चित्र है, जो रावण को हराकर अयोध्या लौट रहे हैं। यह मौलिक अधिकारों से संबंधित अध्याय की शुरुआत में उपलब्ध है। आप सभी के साथ इसे शेयर करने का मन हुआ। #जय श्री राम।”

लेकिन, ऐसे भी लोग हैं जिन्हें शायद इस बात का ज्ञान नहीं है कि भगवानों की यह चित्र भारतीय संविधान की मूल प्रति का हिस्सा थे, या फिर वो लोग केन्द्रीय मंत्री के इस ट्वीट के पीछे कोई सन्देश तलाशने का प्रयास कर नाराज हो गए!

उन्होंने केन्द्रीय मंत्री के इस ट्वीट पर आपत्ति जताते हुए लिखा है कि देश के कानून मंत्री संविधान में भगवानों को ठूँसना चाह रहे हैं, जबकि इसका उद्देश्य धर्म और कानून के बीच दायरा तय करना था। इस ट्विटर यूजर ने कटाक्ष करते हुए लिखा है – ‘वाह!’

गौरतलब है कि जब संविधान तैयार हुआ तो उसमें ऊपर और नीचे के हिस्सों में बहुत जगह खाली छूट गई थी। ऐसे में इस खाली जगह पर भारत की 5000 साल पुरानी संस्कृति को प्रदर्शित करने पर विचार किया गया।

तब खुद जवाहरलाल नेहरू ने ही इस काम के लिए नंदलाल बोस को सत्यनिकेतन जाकर आमंत्रित किया था। बाद में समिति से जुड़े सभी लोगों ने इन चित्रों को संविधान के रिक्त स्थान पर शामिल करने पर सहमति देते हुए उस पर हस्ताक्षर किए। संविधान की मूल कॉपी यदि देखें तो आज भी वहाँ श्री राम भगवान और श्रीकृष्ण की तस्वीर चित्रित है। आखिरी पृष्ठ पर समिति के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मौके पर ट्वीट किया और मंदिर निर्माण शुरू होने पर खुशी जताई। योगी आदित्यनाथ ने अपने ट्वीट में लिखा, “जासु बिरहँ सोचहु दिन राती। रटहु निरंतर गुन गन पाँती॥ रघुकुल तिलक सुजन सुखदाता। आयउ कुसल देव मुनि त्राता।। प्रिय राम भक्तों, आपका अभिनंदन, आपको बधाई जय श्री राम!”

भूमि पूजन पर अमेरिका में भारतीयों ने लहरा दिया भगवा: निकाली झाँकी, जलाएँगे दीप

5 अगस्त के इस ऐतिहासिक दिन की गूँज आज अमेरिका तक में है। भले ही मुस्लिम समूहों के विरोध के बाद एक कंपनी ने श्रीराम की तस्वीर टाइम्स स्क्वायर इमारत पर प्रदर्शित करने से मना कर दी हो, लेकिन वहाँ रह रहे भारतीय हिंदुओं ने इस दिन को तब भी महोत्सव में तब्दील कर दिया है।

एएनआई समाचार एजेंसी के अनुसार अमेरिका में रहने वाले भारतीय, अयोध्या में ऐतिहासिक राम मंदिर के शिलान्यास समारोह का जश्न मनाने के लिए वॉशिंगटन डीसी के कैपिटल हिल पर भगवा झंडा हाथ में लेकर इकट्ठा हो गए हैं।

वहाँ कुछ देर में एक झाँकी ट्रक राम मंदिर की डिजिटल तस्वीरों को प्रदर्शित करते हुए कैपिटल हिल के चक्कर लगाएगा। इस बात की जानकारी स्वंय समुदाय नेताओं ने अपने बयान में दी है।

बयान में कहा गया, “विश्व भर के एक अरब हिंदुओं के लिए पवित्र स्थल पर ऐतिहासिक मंदिर निर्माण की शुरुआत के उपलक्ष्य में अयोध्या श्री राम मंदिर झाँकी ट्रक अमेरिकी कैपिटल हिल के चक्कर लगाएगा।”

इतना ही नहीं, आज के दिन अमेरिका में रहने वाले हिंदुओं ने भी वहाँ के मंदिरों में विशेष पूजा की व्यवस्थाएँ की हैं। वहाँ कई जगहों पर अयोध्या के भूमि पूजन को बड़ी स्क्रीन लगाकर अमेरिका में भी देखा जाएगा।

हिंदू मंदिर कार्यकारी सम्मेलन और हिंदू मंदिर पुजारी सम्मेलन ने इस समारोह का आनंद लेने के लिए पूरे अमेरिका में डिजिटल रूप से सामूहिक राष्ट्रीय प्रार्थना करने का भी आह्वान किया है। इसी तरह न्यूयॉर्क शहर में भी, हिंदू समुदाय के नेताओं ने ऐतिहासिक अवसर का जश्न मनाने का फैसला किया है।

बता दें कि यूएस में बड़ी संख्या में हिंदू रहते हैं, जिन्होंने अयोध्या में होने वाले पूजन को सेलिब्रेट करने के लिए तैयारियाँ की हैं। अयोध्या में भूमि पूजन के बाद वहाँ के लोग घरों में दीपक जलाएँगे।