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‘ये मेरा भारत नहीं रहा’ कहने वालों के लिए विमान लेकर इन्तजार कर रहे सोनू सूद, कोपभवन से नहीं निकल रहे लिबरल्स

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण की शुरुआत हो चुकी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैसे ही भूमिपूजन के दौरान इसकी आधारशिला रखी, लिबरल प्रजाति के अगुआ लोगों को ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई भारी-भड़कम हाथी उनकी छाती पर पाँव रख कर गुजरा हो। वैसे भी इस ब्रीड का दाना-पानी राम मंदिर विवाद को लेकर ही चल रहा था और मोदी सरकार ने ये मौका भी उनसे छीन लिया।

जिन्होंने रामायण पढ़ी है वो जानते हैं कि जब भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक होना था, तब उनके पिता राजा दशरथ की तीसरी पत्नी कैकेयी कोपभवन में चली गई थी। राजा पर दो वरदान उधार था। कैकेयी ने भारत का राज्याभिषेक और राम का वनवास माँगा, जिसके लिए उन्हें स्वीकृति देनी ही पड़ी थी। लेकिन, लिबरलों के लिए दुःख की बात ये है कि अबकी वाला राजा कुछ ज्यादा ही कठोर प्रशासक है।

एक तो वो ऐरे-गैरों को वरदान नहीं देता, ऊपर से लिबरल ब्रीड के पत्रकार कैसे उसके पाँव तले बैठ कर गुजरात चुनावों में उसका इंटरव्यू लेते थे, ये उन्हें अब तक याद है। इसीलिए उन्हें पता है कि ये किसी कीमत पर नहीं पसीजने वाला। और राजा के मंत्री की तो बात ही क्या! राजा इनकी बात सुन कर थोड़ा-मोड़ा पसीज भी जाएँ तो मंत्री अपनी उँगली से सीधा उस ओर इशारा करते हैं, जिससे इस ब्रीड के पसीने छूट जाते हैं।

इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। एक तो ये जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने की पहली बरसी है, ऊपर से लिबरल-सेक्युलर जमात को राम मंदिर भूमिपूजन का भव्य कार्यक्रम देखना पड़ा, जो उन्हें लगता था कि कोरोना के कारण फीका-फीका सा रहेगा। लेकिन, देश की जनता ने भी उनके मजे लेने शुरू कर दिए। घर-घर दीपक जलने लगे और लोग पूजा पर बैठ गए। कार्यक्रम के समय सब टीवी से चिपके रहे।

अब कट्टर इस्लामी पत्रकार राणा अयूब को ही देख लीजिए। मैडम सीधा पहुँच गईं ‘वाशिंगटन पोस्ट’ में लेख लिखने और बताया कि किस तरह ये दिन भारत के समुदाय विशेष के लिए बहुत बुरा है। अब इस ब्रीड को कौन समझाए कि ये नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार तो है नहीं कि यहाँ की नीतियाँ अब चीन और अमेरिका जैसे देश डिसाइड करेंगे। शायद अथाह गमों के सागर में डूब कर लेख लिखने वाली अयूब को होश में आने के बाद पता होगा कि अरे, भारत तो अमेरिका की कॉलोनी है ही नहीं।

बेचारे शेखर गुप्ता तो अपने पुराने दिन ही याद कर-कर के काम चला रहे हैं। कभी वो गोधरा दंगों के बाद के ‘इंडिया टुडे’ का कवर याद करते हैं और कभी ‘द प्रिंट’ का वो लेख शेयर करते हैं जिसमें बताया जाता है कि कैसे बाबरी ध्वंस की सुनवाई सही से नहीं हो रही है। सब बूत उठवाने का नारा लगाने वाले राम मंदिर के गम में खुद के बूट के फीते भी नहीं बाँध पा रहे। सब ताज उछालने का नारा देने वाले आगरा वाले ताज की ओर देखने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे।

सब तख़्त उछालने का नारा देने वाले के तशरीफ़ खुद के घर में रखे तख़्त पर भी नहीं टिक पा रहे। ‘फक हिंदुत्व’ का नारा देने वालों को भी ‘Premature Ejaculation’ नामक रोग से गुजर रहे हैं। देश के ‘टुकड़े-टुकड़े’ का नारा देने वालों के आकाओं के पास अपने शार्गिदों को देने के लिए बिस्किट के टुकड़े भी नहीं हैं। अब स्वास्थ्य और तकनीक पर लेख लिख कर भारत को बदनाम करने वाली विद्या कृष्णन को ही देख लीजिए।

उनका कहना है कि जिन जेलों में ‘हमारे’ कवि, प्रोफेसर, एक्टिविस्ट और पत्रकार रखे जाते हैं, वो उनके लिए मंदिर से भी ज्यादा पवित्र है। एक हिन्दू के रूप में वो खुद को शर्मिन्दा पा रही हैं। वो कहती हैं कि एक आपदा के बीच टीवी के लिए ये सब ड्रामा रचा गया है। विद्या से पूछा जा सकता है कि कोरोना के बीच वो ट्विटर पर टट्टीनुमा ट्वीट क्यों कर रही हैं? कुछ लिबरलों से तो ये भी पूछा जा सकता है कि वो इस आपदा में साँस ही क्यों ले रहे हैं?

ऑपइंडिया के सटायर विभाग के सूत्रों से पता चला है कि इन सबके बीच सेक्युलर-लिबरल ब्रीड ने सोनू सूद से संपर्क किया है। दरअसल, उन्हें लगता है कि ये वो भारत नहीं है जिसमें वो बड़े हुए हैं, जिसका उन्होंने स्वप्न देखा था और जिसके बारे में किताबों में पढ़ा था। अब उनके लिए तो इस देश में कुछ काम रहा ही नहीं। अरे, ये देश उनके लिए अब अच्छा नहीं रहा न? तो अब वो जाएँगे किसी न किसी देश में।

उन्होंने सोनू सूद से संपर्क किया और समाजिक कामों के लिए जाने जाने वाले अभिनेता ने उनकी बात मान ली। लिबरलों ने गूगल सर्च कर के पाया कि दुनिया में मजहब विशेष के सबसे ज्यादा लोग इंडोनेशिया में हैं। लेकिन, उन्हें जैसे ही पता चला कि वहाँ की एक करेंसी पर भगवान गणेश का चित्र होता है, उन्होंने प्लान कैंसल कर दिया। हालाँकि, पाकिस्तान बगल में है। वहाँ वो क्यों नहीं जा रहे, इस बारे में अभी हमें कुछ पता नहीं चल पाया है।

फिलहाल, उनके पास तुर्की और मलेशिया जैसे विकल्प भी हैं जहाँ ज़ाकिर नाइक भी रह रहा है। लेकिन, गिरोह विशेष दयावान सोनू सूद द्वारा मुफ्त में दी जाने वाली इस सेवा का फायदा उठाने को लेकर विचार-विमर्श करने में ही जुटा हुआ है। जब हिन्दू मेजोरिटी वाले भारत में रह कर भारत और हिन्दुओं को गाली दी जा सकती है और उन्हें बदनाम किया जा सकता है तो फिर कहीं और जाने से क्या फायदा?

उधर सोनू सूद तो फ्लाइट की व्यवस्था किए ही बैठे हैं। वो इसी इन्तजार में हैं कि कोपभवन में से विचार कर के लिबरल गैंग आएगा तो उन्हें कहीं ले जाने के लिए विमान सेवा उपलब्ध कराएँगे। लिबरलों की चिंता ये है कि तुर्की और मलेशिया जैसे देशों में रह कर उन्हें गाली नहीं दी जा सकती। ‘ये हमारा भारत नहीं रहा’ कहने वाले भारत छोड़ने के लिए क्यों तैयार नहीं है, ये तो सबके लिए सोचने वाली बात है।

अयोध्या में भूमि पूजन के बाद राममय हुआ न्यूयॉर्क का Times Square: दिखी भगवान राम की झलक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (अगस्त 5, 2020) को अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखी। राम मंदिर निर्माण की गूँज देश ही नहीं विदेश में भी गूँजी। अमेरिका के प्रसिद्ध स्थल न्यूयॉर्क टाइम्स स्क्वायर पर रामभक्तों ने डिजिटल बिलबोर्ड के जरिए राम में अपनी आस्था प्रकट की।

अयोध्या में प्रभु राम के भव्य मंदिर के भूमि पूजन के मौके पर अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के टाइम्स स्क्वायर में ब्रॉडवे पर भगवान राम का सबसे बड़ा हाई-डेफिनिशन डिजिटल डिस्प्ले दिखाया गया। साथ ही इस मौके पर लोगों ने ‘जय श्रीराम’ के नारे भी लगाए।

टाइम्स स्क्वायर के बिलबोर्ड पर भगवान राम और मंदिर के मॉडल के अलावा भारत का झंडा भी डिस्प्ले हो रहा था। भगवान राम का डिजिटल प्रदर्शन टाइम्स स्क्वायर में हिंदू देवता के सबसे महँगे डिजिटल होर्डिंग में से एक है।

जानकारी के मुताबिक अमेरिकन इंडियन पब्लिक अफेयर कमेटी के अध्यक्ष जगदीश सेवहानी ने बताया था कि ये जीवन में एक बार या सदी में एक बार होने वाली घटना नही हैं। बल्कि, पूरी मानवजाति के जीवन में इस तरह के मौके एक ही बार आते हैं। इस मौके को खास बनाने के लिए उन्होंने टाइम्स स्क्वायर को चुना।

इससे पहले अयोध्या में ऐतिहासिक राम मंदिर की नींव रखी जाने का अमेरिका में भारतीय- अमेरिकियों ने दीप जलाकर जश्न मनाया। कैपिटल हिल में राम मंदिर की तस्वीरों की एक झाँकी भी निकाली गई।

गौरतलब है कि इससे पहले खबर थी कि अयोध्या में राम मंदिर के भूमिपूजन की तस्वीरें अब न्यूयॉर्क की टाइम्स स्क्वायर इमारत पर नजर नहीं आएँगी। बताया गया कि जिस विज्ञापन कंपनी ‘ब्रांडेड सिटीज’ के पास बिल्डिंग पर मुख्य बिल बोर्ड मैनेज करने का अधिकार था, उन्होंने यूएस के मुस्लिम गुटों की आपत्ति के बाद इमारत पर श्रीराम की तस्वीर डिस्प्ले पर दिखाने से मना कर दिया।

संयुक्त राज्य अमेरिका में मुस्लिम समूहों के गठबंधन में से एक समूह ने कहा था कि विज्ञापन कंपनी ‘ब्रांडेड सिटीज’, जो टाइम्स स्क्वायर में नैस्डैक के लिए डिजिटल विज्ञापन बोर्ड का प्रबंधन करती है और प्रमुख डिजिटल बोर्ड चलाती है, उसने अपने बिलबोर्ड पर भगवान राम की तस्वीरें दिखाने की योजना बनाने वाले हिंदू समूहों के लिए विज्ञापन चलाने से इनकार कर दिया।

भूमि पूजने से पहले अयोध्या को पूरी तरह से सजा दिया गया। जगमग रोशनी से शहर की तस्वीर देखते ही बन रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जब भूमि पूजन के लिए दिल्ली से अयोध्या के लिए निकले तो वह पारंपरिक धोती-कुर्ता धारण किए हुए थे। पूजा के दौरान उनके साथ संघ प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई धर्मगुरु भी मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में भूमि पूजन कर श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की आधारशिला रख रहे थे तो दूसरी तरफ उनकी मां हीराबेन अपने घर पर बैठ टीवी पर ऐतिहासिक पलों को देख रही थीं। पीएम मोदी की माँ की कुछ तस्वीरें सामने आईं हैं, जिसमें देखा जा सकता है कि प्रधानमंत्री अयोध्या में हनुमानगढ़ी में आरती कर रहे थे तो उनकी माँ अपने घर बैठकर टीवी के सामने बैठकर पूरे कार्यक्रम को देख रही थीं।

किसके पूर्वजों ने रामलला की मूर्तियाँ हटाने की कोशिश की थी: नई-नई ‘रामभक्त’ प्रियंका से CM योगी का सवाल

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई-नई ‘रामभक्त’ बनी कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी से पूछा है कि किसके पूर्वजों ने भगवान राम की मूर्ति हटाने की कोशिश की थी? प्रियंका गाँधी ने ‘राम सबके हैं’ कहते हुए राम और रामायण का जम कर गुणगान किया था और राम मंदिर के निर्माण का स्वागत किया था। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस बयान पर प्रतिक्तिया देते हुए पूछा कि वो कौन लोग थे जिन्होंने मूर्तियाँ हटाने की कोशिश की थी?

सीएम योगी आदित्यनाथ ने पूछा कि वो कौन लोग थे जो अयोध्या में राम मंदिर नहीं चाहते थे? उन्होंने कहा कि भाजपा काफी पहले से कहती आई है कि राम सबके हैं, कॉन्ग्रेस आज यही बात कर रही। उन्होंने ये भी पूछा कि वो कौन लोग थे जो कह रहे थे कि गर्भगृह से 200 मीटर की दूरी पर राम मंदिर का शिलान्यास होगा? उन्होंने कोरोना वायरस को लेकर हुई तैयारियों के बारे में भी जानकारी दी।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने बताया कि किस तरह भाजपा का कोई भी पदाधिकारी इस कार्यक्रम में नहीं आया। न तो पार्टी के राष्ट्रीय और न ही प्रदेश अध्यक्ष यहाँ पहुँचे थे। उन्होंने कहा कि सीमित संख्या में अतिथियों को बुलाए जाने के कारण ऐसा हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि राम के नाम पर किसी को बाँटने की कोशिश नहीं करनी चाहिए और राम काज में सहयोग भी करना चाहिए क्योंकि वो सभी के हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमने सबको जोड़ने का ही काम किया है। उन्होंने कहा कि राम के नाम पर भाजपा ने राजनीति नहीं की है बल्कि अयोध्या जन्मभूमि में मंदिर के लिए जिस निष्ठा से हम 1984 में जुड़े थे उसी निष्ठा से 2020 में भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 1949 में उनकी भावनाएँ क्या थीं, 1984 में क्या थीं और 1992 में क्या थीं? सीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस कहती कुछ है और करती कुछ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने वही किया, जो कहा। उन्होंने बताया कि ये कार्यक्रम बहुप्रतीक्षित था और इसे आगे बढ़ाना था, इसीलिए इस रूप में इसका आयोजन हुआ और टीवी पर लाइव प्रसारण भी किया गया। उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम शुभ था और इसके आयोजन के लिए पूरी व्यवस्था की गई थी। इस आयोजन में 200 के क़रीब मेहमान आए थे। कई साधु-संत इसमें आना चाहते थे।

इससे पहले सीएम ने उपस्थित अतिथियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि 5 सदी के बाद आज 135 करोड़ भारतवासियों का संकल्प पूरा हो रहा है। देश में लोकतांत्रिक तरीकों के साथ ही मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इस घड़ी की प्रतीक्षा में कई पीढ़ियाँ गुजर चुकी हैं। सीएम योगी ने कहा – “हमने तीन साल पहले अयोध्या में दीपोत्सव का कार्यक्रम शुरू किया था, आज उसकी सिद्धी हो रही है।”

हाल ही में प्रियंका गाँधी ने राम मंदिर पर बयान देते हुए कहा था कि सरलता, साहस, संयम, त्याग, वचनवद्धता, दीनबंधु राम नाम का सार है। राम सबमें हैं, राम सबके साथ हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भगवान राम और माता सीता के संदेश और उनकी कृपा के साथ रामलला के मंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बनें। भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति में रामायण की गहरी और अमिट छाप है।

रिया चक्रवर्ती को ED ने भेजा समन: 7 अगस्त को पेश होने का दिया आदेश, तीन चरणों में होगी पूछताछ

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती को समन जारी किया है। रिया चक्रवर्ती को शुक्रवार (अगस्त 7, 2020) को पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

ईडी ने रिया चक्रवर्ती को उसके मुम्बई में स्थिति पुराने पते और ईमेल के जरिए समन भेजा है। प्रवर्तन निदेशालय रिया चक्रवर्ती से तीन चरणों में लंबी पूछताछ होगी। इसके लिए ED ने सवालों की एक लंबी फेहरिस्त तैयार की है। इस पूछताछ में रिया के सुशांत सिंह राजपूत से व्यक्तिगत और व्यवसायिक संबंधों को लेकर गहरी पड़ताल की जाएगी।

प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों के मुताबिक रिया से तीन चरणों में पूछताछ होगी। पहले चरण में व्यक्तिगत जानकारियाँ माँगी जाएँगी। पिता का नाम, स्थाई और स्थानीय पता परिवार के सदस्यों के बारे में तमाम जानकारी। दूसरे चरण में व्यवसायिक जानकारियाँ माँगी जाएँगी, जैसे पैन कार्ड के डिटेल, कंपनी का DIN नंबर, सोर्स ऑफ इनकम क्या है, आयकर रिटर्न फाइल करने की जानकारी वगैरह।

इसके अलावा रिया से यह भी पूछा जाएगा कि वे कितनी कंपनियों में डायरेक्टर हैं। कंपनी में उनको क्या काम करना होता है और उसका कितना टर्नओवर है। रिया के कितने बैंकों में खाते हैं। किस-किस बैंक में हैं और उनमें कितनी रकम है। उसके नाम पर कुल कितनी जायदाद है और 3 साल पहले कितनी जायदाद थी?  

क्या कोई जायदाद या खाता विदेश में भी है? उसके भाई का क्या व्यापार है? उसकी कंपनी के बारे में वे क्या जानती हैं? उसके परिजनों की प्रॉपर्टी के बारे में जानकारी। निदेशालय रिया से उनके पासपोर्ट के डिटेल, विदेश यात्राओं के बारे में जानकारी लेगी। इसके साथ ही विदेश यात्राओं का खर्चा किसने वहन किया, यह भी पूछा जाएगा।

गौरतलब है कि केंद्र ने सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले की सीबीआई जाँच शुरू करने के बिहार सरकार के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। अब बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच सीबीआई करेगी।

‘राम मंदिर निर्माण नेहरूवादियों, मार्क्सवादियों, मीडिया, शिक्षाविदों की हार है, जिसने इतिहास, पुरातत्व, भक्ति को नकारने की कोशिश की’

पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित अमेरिकी वैदिक शिक्षक डेविड फ्रॉली ने बुधवार (अगस्त 5, 2020) को कहा कि राम मंदिर के निर्माण की शुरुआत एक अरब सपनों का साकार होना है। बता दें कि डेविड फ्रॉली वेद, हिंदुत्व, योग, आयुर्वेद और वैदिक एस्ट्रॉलजी पर कई किताबें लिख चुके हैं।

डेविड फ्रॉली ने टाइम्स नाउ के प्रधान संपादक राहुल शिवशंकर के साथ एक्सक्लुसिव इंटरव्यू में राम मंदिर पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भगवान राम की महिमा को पुन: स्थापित किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि अयोध्या विवाद संभवतः दुनिया के इतिहास में सबसे अधिक समय तक चलने वाला मुकदमा था।

डेविड फ्रॉली ने राम मंदिर के निर्माण को देश की आजादी के बाद आधुनिक भारत की सबसे महत्वपूर्ण घटना बताते हुए कहा कि रामायण एशिया की सबसे लोकप्रिय कहानियों में से एक है और अब राम मंदिर भारत को उसके वास्तविक भाग्य के प्रति जागृत करेगा। उन्होंने आगे कहा, “हमें ‘अयोध्या के विजय’ को श्री राम की विजय के रूप में स्वीकार करना चाहिए।”

फ्रॉली ने कहा कि अयोध्या भारत के सात पवित्र शहरों में सबसे महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही उन्होंने कहा, “हिंदू धर्म एक परंपरा है जो कई प्रकार के आध्यात्मिक मार्ग स्वीकार करता है। यह संकीर्ण विचारधारा वाली परंपरा नहीं है।”

फ्रॉली ने आगे कहा, “हिंदुओं ने अपने मंदिरों के पुन: प्राप्ति के लिए राजनीतिक रूप से कोई स्टैंड नहीं लिया। जब तक हिंदू राजनीतिक रूप से स्टैंड नहीं लेगें, उन्हें अल्पसंख्यक ही माना जाएगा, उन जगहों पर भी, जहाँ पर वो बहुसंख्यक हैं।”

फ्रॉली ने ट्वीट करते हुए लिखा था, “राम मंदिर का निर्माण नेहरूवादियों, मार्क्सवादियों, माओवादियों, चीन समर्थकों, मीडिया और शिक्षाविदों के लिए हार है, जिसने इतिहास, पुरातत्व और भक्ति को नकारने की कोशिश की थी।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में बुधवार को राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया और मंदिर की आधारशिला रखी। इसके बाद उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “यह मेरा सौभाग्य था कि श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुझे मंदिर निर्माण के भूमि पूजन में आमंत्रित किया। आज पूरा देश राममय और हर मन दीपमय है। सदियों का इंतजार समाप्त हुआ।”

पीएम मोदी ने कहा, ”राम हमारे मन में गढ़े हुए हैं, हमारे भीतर घुल-मिल गए हैं। कोई काम करना हो, तो प्रेरणा के लिए हम भगवान राम की ओर ही देखते हैं। भगवान राम की अद्भुत शक्ति देखिए। इमारतें नष्ट कर दी गईं, अस्तित्व मिटाने का प्रयास भी बहुत हुआ, लेकिन राम आज भी हमारे मन में बसे हैं, हमारी संस्कृति का आधार हैं। श्रीराम भारत की मर्यादा हैं, श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं।”

मुझे कोई बुलाएगा नहीं और मैं जाऊँगा भी नहीं: अयोध्या में मस्जिद के शिलान्यास पर CM योगी की दो टूक

मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्म स्थली पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश दुनिया के करोड़ों रामभक्तों के सपने को साकार कर दिया। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विधि विधान के साथ मंदिर की नींव रखी।

इस दौरान पीएम मोदी के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे। भूमि पूजन के कार्यक्रम के बाद सभी अथितियों को संबोधित करते सीएम योगी ने कहा कि पाँच सदी के बाद आज 135 करोड़ भारतवासियों का संकल्प पूरा हो रहा है।

राम मंदिर भूमि पूजन से इतर योगी आदित्यनाथ ने न्यूज चैनल आज तक के साथ खास बातचीत में मस्जिद के शिलान्यास पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कर दिया कि वो मस्जिद के शिलान्यास कार्यक्रम का हिस्सा नहीं होंगे।

बता दें कि मीडिया चैनल ने सीएम योगी से सवाल किया था, “विरोधी कह रहे हैं कि आपने सभी धर्मों के लोगों को राम मंदिर के भूमि पूजन में बुलाया और सब आए। लेकिन आने वालों दिनों में जब अयोध्या में मस्जिद का निर्माण शुरू होगा, तो कहा जा रहा है कि कि सीएम योगी वहाँ नहीं जाएँगे।”

सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसका जवाब देते हुए कहा, “मेरा जो काम है वो काम मैं करूँगा। मैं अपने कार्य को हमेशा कर्तव्य और धर्म मानकर चलता हूँ। मैं जानता हूँ कि मुझे कोई बुलाएगा नहीं इसलिए मैं जाऊँगा भी नहीं।”

उन्होंने भूमि पूजन कार्यक्रम में कई बड़े नेताओं के शामिल नहीं होने पर भी कहा कि हर समुदाय के लोग इस कार्यक्रम में आना चाहते थे, लेकिन कोरोना के कारण कार्यक्रम को सीमित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि सिर्फ कॉन्ग्रेस की बात नहीं है, भाजपा के भी कई बड़े नेता कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए।

इसके साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर को लेकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सूझबूझ और प्रयासों के कारण आज संकल्प पूरा हो रहा है। हमने तीन साल पहले अयोध्या में दीपोत्सव का कार्यक्रम शुरू किया था, आज उसकी सिद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पहले रामायण सर्किट का काम शुरू किया गया, साथ ही अयोध्या में विकास कार्य हो रहा है।

सीएम ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और उसकी न्यायपालिका की शक्ति ने दुनिया को दिखा दिया है कि शांति से लोकतांत्रिक और संवैधानिक रूप से सुलझाए जाने वाले मामले कैसे हो सकते हैं।

गौरतलब है कि 9 नवंबर 2019 को उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या में पूरी 2.77 एकड़ विवादित भूमि राम लला को दी। इसके साथ ही केन्द्र और उत्तर प्रदेश प्रदेश सरकार को मस्जिद के निर्माण के लिए किसी प्रमुख स्थान पर पाँच एकड़ जमीन दूसरे पक्ष को देने का भी निर्देश दिया।

यूपी सरकार ने 5 फरवरी को ही अयोध्या जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम धन्नीपुर तहसील सोहावल में थाना रौनाही से लगभग 200 मीटर पीछे 5 एकड़ जमीन मस्जिद के लिए आवंटित की थी। यहीं पर मस्जिद का निर्माण होना है। 

भूमि पूजन के बाद ओवैसी का फूटकर बह रहा है दर्द, कहा- ‘ये लोकतंत्र और सेकुलरिज्म की हार है’

भूमि पूजन की तारीख आने के बाद से लगातार देश के लोकतंत्र और सेकुलरिज्म पर सवाल उठाने वाले ओवैसी अब खुल कर जहर उगल रहे हैं। सुबह उन्होंने सबसे पहले यह ट्वीट किया, “बाबरी मस्जिद थी, है और रहेगी। इंशाल्लाह।” इसके बाद भूमि पूजन संपन्न होते ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शपथ का उल्लंघन करने वाला ही करार दे दिया।

उन्होंने कहा, “भारत एक सेकुलर देश है। प्रधानमंत्री ने आज मंदिर का शिलान्यास करके अपनी शपथ का उल्लंघन किया है। ये लोकतंत्र की और सेकुलिज्म की हार है और हिंदुत्व की जीत है।”

ओवैसी ने आगे कहा, “पीएम का इस कार्यक्रम में शामिल होना देश की धर्मनिरपेक्ष नीतियों का उल्लंघन है। आज हिंदुत्व और धर्मनिरपेक्षता के लिए एक सफल दिन है क्योंकि मोदी (एक पीएम के रूप में) इस कार्यक्रम में शामिल हुए। पीएम ने कहा कि आज का कार्यक्रम भारत का प्रतीक है, लेकिन, वह एक देश के पीएम हैं और उन्हें समझने की जरूरत है कि देश का प्रतीक मंदिर या मस्जिद नहीं हो सकता।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ओवैसी ने आगे कहा, “मैं कह रहा हूँ कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रमुख उपस्थिति के कारण हिंदुत्व की सफलता का दिन है। वह वहाँ क्यों है? भागवत ने कहा कि यह नया भारत बनाता है। क्या है नया भारत? नया भारत जहाँ मुस्लिमों के साथ भेदभाव किया जाएगा?”

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ”प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं भावुक हूँ। मैं कहना चाहता हूँ कि मैं भी उतना ही भावुक हूँ क्योंकि मैं सह-अस्तित्व और नागरिकता की समानता में विश्वास करता हूँ। प्रधानमंत्री, मैं भावुक हूँ क्योंकि एक मस्जिद 450 साल से वहाँ खड़ी थी।”

बता दें, ओवैसी इस समय सिर्फ़ प्रधानमंत्री पर अपना गुस्सा नहीं दिखा रहे बल्कि कॉन्ग्रेस से लेकर समाजवादी पार्टी उनके निशाने पर है। प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ बोलने से पहले उन्होंने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था, ”कॉन्ग्रेस हमेशा खामोशी से हिंदुत्व की राजनीति करती आई है। कॉन्ग्रेस को खुलकर कह देना चाहिए कि वह हिंदुत्व की विचारधारा को मानती है। कॉन्ग्रेस पहले भी मिली हुई थी। अब उनको यह तय करना है कि वो टीम हिंदुत्व का साथ देंगे या टीम इंडिया का जो धर्मनिरपेक्षता पर विश्वास रखती है।”

इसी प्रकार उन्होंने मुलायम सिंह यादव को भी आड़े हाथों लिया और कहा, “मुलायम सिंह यादव ने भी अपनी सियासी रोटी हमारे खून पर सेकी है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद जब दोबारा मुलायम सिंह यादव यूपी के मुख्यमंत्री बने तो वो इस मामले में सोते रहे। उन्होंने केस में कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया। जिन लोगों को हमने रक्षक समझा, उन्हीं लोगों ने हमें नुकसान पहुँचाया है।”

‘काशी विश्वनाथ और कृष्ण जन्मस्थान मंदिर में जब प्रार्थना करते हैं तो महसूस होता है कि हम आज भी गुलाम हैं’

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (अगस्त 5, 2020) को भूमि पूजन के बाद शिलान्यास किया। अब मंदिर निर्माण शुरू हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ, आरएसएस चीफ मोहन भागवत समेत करीब 175 लोग इस ऐतिहासिक लम्हे का गवाह बने। पीएम मोदी ने अभिजीत मुहूर्त में मंदिर का शिलान्यास किया।

लोगों ने इस ऐतिहासिक क्षण को अभूतपूर्ण बताते हुए भावुक नजर आए। लोग इस दिन को दिवाली मानकर एक दूसरे को बधाईयाँ दे रहे हैं। इस बीच कर्नाटक के ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री केएस ईश्वरप्पा ने काशी विश्वनाथ और मथुरा में कृष्ण जन्मस्थान को लेकर आवाज उठाई है।

केएस ईश्वरप्पा ने ट्वीट करते हुए लिखा, यह एक अच्छा दिन है। राम मंदिर के लिए आधारशिला रखी गई है। अब एक सुंदर मंदिर बनेगा, लेकिन काशी विश्वनाथ और कृष्ण जन्मस्थान मंदिर को मुक्त किया जाना बाकी है।

उन्होंने एक ट्वीट में आगे लिखा, “इन दोनों जगहों पर, जब हम प्रार्थना करते हैं, तो दोनों ओर मस्जिदें होती हैं, जो कहती हैं कि आप अब भी गुलाम हैं। इन मंदिरों को मुक्त करना आवश्यक है।”

गौरतलब है कि भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने बीते दिनों एक इंटरव्यू में कहा था, “हमें तीन मंदिर चाहिए। एक राम मंदिर, दूसरा कृष्ण जन्मस्थान मथुरा का कृष्ण मंदिर और तीसरा काशी विश्वनाथ। काशी विश्वनाथ और कृष्ण मंदिर के तो सबूत भरपूर हैं। ये (राम मंदिर) सबसे मुश्किल था।”

सुब्रह्मण्यम स्वामी ने दोनों जगहों पर जमीन अधिग्रहित करने की केंद्र सरकार से मॉंग की थी। इससे पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारी रहे केके मुहम्मद ने कहा था कि मथुरा-काशी हिंदुओं के लिए मक्का-मदीना जैसा है। साथ ही उन्होंने दूसरे समुदाय से ये दोनों जगह हिंदुओं को सौंप देने की अपील की थी।

पिछले दिनों काशी-मथुरा को लेकर जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने वकील एजाज मकबूल के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करके हिंदू पुजारियों की याचिका का विरोध किया था।

जमीयत-उलेमा-ए-हिंद की ओर से दाखिल की गई याचिका में कहा गया था कि हिंदू पुजारियों की याचिका पर नोटिस न जारी किया जाए। उनका कहना था कि मामले में नोटिस जारी करने से समुदाय के लोगों के मन में अपने इबादत स्थलों के संबंध में भय पैदा होगा।

राम मंदिर आंदोलन: हिंदू विरोधी कवरेज पर गुजरातियों ने 4 हफ्ते में बताई थी इंडिया टुडे को औकात, शेखर गुप्ता थे संपादक

साल 1992 में अयोध्या राम मंदिर आंदोलन को कई जगह सेकुलर मीडिया द्वारा शर्मसार करने वाला करार दिया गया। कई समाचार पत्रों ने इसी बिंदु पर बड़े-बड़े लेख छापे। इसी क्रम में इंडिया टुडे के गुजराती संस्करण पर भी इस घटना को प्रकाशित किया गया। इस घटना का जिक्र करते हुए इंडिया टुडे ने इसे राष्ट्र के नाम पर कलंक बताया। जिसके बाद इसकी ऐसी भद्द पिटी कि कुछ ही दिन में इसे बंद होना पड़ा।

इंडिया टुडे के गुजराती संस्करण के साथ जब यह सब हुआ तब उसके संपादक शेखर गुप्ता हुआ करते थे। शायद इसी कारण से आज राम मंदिर के भूमि पूजन के समय वह इस दिन को दोबारा याद कर रहें।

शेखर गुप्ता अपने ट्वीट में लिखते हैं, “हमने साल 1992 के अक्टूबर महीने में गुजराती संस्करण लॉन्च किया था। मात्र 6 हफ्तों के अंदर उस समय इसका प्रसार 75 हजार तक बढ़ गया। लेकिन अयोध्या पर ऐसी हेडलाइन और कवरेज के बाद लोगों ने इसके विरोध में बहुत पत्र भेजे। आने वाले 4 हफ्तों में इसका प्रसार मात्र 25 हजार रह गया। संस्करण समाप्त हो गया जैसा कि हमारे मार्केटिंग हेड को उम्मीद थी।”

शेखर गुप्ता ने यह ट्वीट पत्रकार शीला भट्ट के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए किया है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “दिसंबर 1992 में (जब मैं सीनियर एडिटर थी और शेखर गुप्ता एडिटर थे) हमने राष्ट्र नु कलंक नाम से स्टोरी कवर की। मगर, गुजरात का उस समय इतना भगवाकरण हो चुका था कि पाठकों ने इसके ख़िलाफ़ विरोध कर दिया। इसके बाद इसका गुजराती संस्करण बंद करना पड़ा।”

बता दें, शीला भट्ट और शेखर गुप्ता के इन ट्विट्स को देखकर एक यूजर का कहना है कि बिलकुल ऐसा ही हर उस संस्थान के साथ होगा, जो देश विरोधी बात करेगा। आज लोग ज्यादा जागरूक हैं। कॉन्ग्रेस की दुकान बंद हो गई है और बकवास करने वाले कलाकार घर पर बैठे हैं। हिंदू सहिष्णु है और सबको स्वीकारता है लेकिन अब कोई हमें अपने मुताबिक नहीं चला सकता।

इसके अलावा एक यूजर लिखता है कि इस बात से साबित होता है कि हिंदुओं को अब मूर्ख नहीं बनाया जा सकता। हम वहाँ चोट करेंगे जहाँ दर्द सबसे ज्यादा होगा यानी ऐसे प्रकाशनों के राजस्व पर। हम बिलकुल ऐसी पत्रिकाओं को नहीं स्वीकारेंगे जो राष्ट्र के ख़िलाफ़ नैरेटिव बनाएँ।

राम मंदिर भूमि पूजन पर रामभक्तों ने किया अद्भुत कला का प्रदर्शन: देखें सोशल मीडिया पर वायरल हुए पोस्ट

तकरीबन 500 साल के इंतजार के बाद आज (5 अगस्त, 2020) राम मंदिर भूमि पूजन का कार्यक्रम पीएम मोदी के हाथों संपन्न हुआ। कोविड -19 महामारी के कारण राम भक्त लाइव प्रसारण के जरिए इस पावन पल का हिस्सा बने। अयोध्या न पहुँच पाने के बाद इस अवसर पर कुछ कलाकारों ने अनोखे अंदाज में भगवान राम का स्वागत किया। भक्तों ने अद्भुत चित्र, मूर्तियों और बेहतरीन कलाकृतियों को बना कर भगवान श्री राम को समर्पित किया।

यहाँ कुछ कलाकृतियाँ हैं, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भक्तों द्वारा शेयर की गई है।

रेत से कलाकृति बनाने वाले प्रसिद्ध कलाकार सुदर्शन पट्टन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भगवान राम की रेत से बनाई गई मूर्ति की तस्वीरें पोस्ट की।

पीएम मोदी द्वारा भूमि पूजन करने का यह चित्र हार्दिक पंचोली द्वारा बनाया गया है। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर इस वक्त लोगों का काफी दिल जीत रहा है।

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जय श्री राम भारत माताकी जय 05-08-2020 ऐतिहासिक दिन बार-बार नहीं आएगा क्योंकि असत्य पर सत्य हमेशा विजय होती है। हमें 500 वर्षों के लंबे समय के बाद हमे यह अवसर मिला है। इस चित्र में प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी साहेब भूमिपूजन कर रहे हैं तब भगवान श्री राम भी अपना हाथ बढ़ाकर उनके कार्य का स्वीकार कर रहे हैं। ऐसा चित्रकार के द्वारा बनाया गया है। कई लोगों की आत्मा इस अवसर की प्रतीक्षा कर रही थीं लेकिन ऐसा सौभाग्य उन्हें नहीं मिला जैसा हमें प्राप्त हुआ है, इसलिए इस अवसर का घरसे हि आनंद लें। यह चित्र वोटरकलर के माध्यम से बनाया गया है। यह पेंटिंग गुजरात के एक चित्रकार हार्दिक पंचोली के द्वारा बनाई गई है। जय श्री राम भारत माताकी जय #narendermodi #pmo #india #Arti #yogiadityanath #bjpgovt #ramnam #bhartiyajantaparty #facebooklive #instagram #ram @narendramodi @myogi_adityanath #ganesh @dr.rutvijpatel #avadhpuri #ramlala #valmiki @ram__mandir__ayodhya_ #Krishna #mahadev #mahakal #kedarnath #somnath @ranchhodraiji.dakor @ram_krishan_hari #rammandir #ayodhya #ram #krishna #bharat #bhudev #bhoomipujan #illustrations #art #instagram #ramjanmbhumi

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बैंगलुरु के जाने-माने माइक्रो स्कल्पचर आर्टिस्ट सचिन सांघे ने पीएम मोदी की अद्भुत चाॉक मूर्ति बनाई। इस मूर्ति में भगवान राम पीएम मोदी को आशीर्वाद देते हुए दिखाई दे रहे हैं।

उन्होंने मूर्तियाँ बनाने की प्रक्रिया का एक छोटा वीडियो भी पोस्ट किया।

रूद्र हनुमान स्केच के लिए हर घर में प्रसिद्ध करण आचार्य इस भूमि पूजन के अवसर पर पिछले कुछ हफ्तों में कई चित्र बनाए हैं। जिसमें पहला रामलला का है।

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Jai Shri Ram

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राम मंदिर भूमि पूजन से एक दिन पहले उन्होंने जो दूसरा चित्र पोस्ट किया वह भगवान राम का है।

बैंगलुरु के रामेश्वरम ने भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान का सुंदर चित्रण किया।

वहीं मंगलुरु के पवन आचार्य ने भगवान राम की राम मंदिर की ओर जाते हुए एक चित्र को पोस्ट किया।

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✨#conceptart: Finally the glorious day after the centuries of struggle. ?Today is the day which was most awaited by most of us in India that is the Bhoomi Pooja in RAM MANDIR AYODHYA . ?Me being an artist would not like to miss a chance to create an artwork on Bhoomi Pooja according to my imagination✨ . . ?I hope you all like my artwork.? . . ✨Literally it will be a emotional moment of all of us when the Bhoomi Pooja of RAM MANDIR ?will be performed. It was a dream of our forefather which now has come true.✨ . . ✨Ram Janmabhoomi Temple is a Hindu temple that is being built at the sacred pilgrimage site of Ram Janmabhoomi? in Ayodhya of Uttar Pradesh, India.?Ram Janmabhoomi is the birthplace of Rama by Hindus. ?The temple construction will be undertaken by Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra.?The temple has been designed by the Sompura family of Gujarat.✨ . . ?️JAI SHRI RAM?️ . . All manipulation is done using #photoshop . . . Do like,comment,share &tag your friends. . . For more updates on digital manipulation follow @pawan_acharya_boloor . . . #lordram #ram #hanuman #shreeram #ramayana #hinduism #sitaram #rama #ayodhya #siyaram #lordrama #sita #hindu #bajrangbali #jairam #lordhanuman #bharat #jayshreeram #india #hinduism #jaishreeram #ramnavami #rambhaktahanuman #bhakti #jaishriram #ravan #om_connection #pa1_creations #pawanacharyaboloor

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राम मंदिर के प्रति अपनी खुशी और उत्साह को प्रदर्शित करने के लिए दुनिया भर के कलाकारों द्वारा सैकड़ों चित्र सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पोस्ट किए गए हैं। बता दें राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, निर्माण कार्य को पूरा करने में लगभग 3.5 साल लगेंगे।