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नक्सली गतिविधियों और माओवादी विचारधारा के प्रचारक DU प्रोफेसर हनी बाबू के घर पर NIA की छापेमारी, मिले अहम दस्तावेज

चर्चित भीमा-कोरेगाँव हिंसा मामले की जाँच के संबंध में रविवार (2 अगस्त, 2020) को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हनी बाबू के नोएडा स्थित आवास पर छापेमारी की। एनआईए की टीम सेक्टर 78 स्थित हाइड पार्क सोसायटी में सुबह करीब 7 बजे ही पहुँच गई । टीम की यह छापेमारी तकरीबन एक घंटे तक चली है।

बता दें कि, 54 वर्षीय हनी बाबू यलगार परिषद हिंसा मामले में 4 अगस्त तक की एनआईए हिरासत में हैं। हनी बाबू को एनआईए ने 28 जुलाई को गिरफ्तार किया था।

बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने हनी बाबू के घर से कई अहम दस्तावेज को कब्जे में लिया है। एनआईए के मुताबिक, जाँच के दौरान पता चला कि है हनी बाबू नक्सली गतिविधियों और माओवादी विचारधारा का प्रचार कर रहे थे। हनी बाबू पर दूसरे आरोपितों के साथ भीमा-कोरेगाँव हिंसा में भी शामिल होने का आरोप है।

गौरतलब है कि भीमा कोरेगाँव यलगार परिषद मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मंगलवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर हनी बाबू एमटी पुत्र कुन्हु मोहम्मद को गिरफ्तार किया था।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हनी बाबू को बुधवार को मुंबई में NIA की विशेष अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। NIA के प्रवक्ता ने बताया कि प्रोफेसर हनी बाबू उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के रहने वाले हैं। वह डीयू के इंग्लिश डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।

हनी बाबू को मुंबई में एनआईए की विशेष कोर्ट में पेश किया गया था। एनआईए ने इस साल जनवरी में इस मामले की जाँच शुरू की थी और इसके बाद 14 अप्रैल को आनंद तेलतुंबड़े और गौतम नौलखा को गिरफ्तार किया था।

इससे पहले पिछले वर्ष भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले में पुणे पुलिस और नोएडा पुलिस की संयुक्त टीम ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हनी बाबू के नोएडा स्थित आवास पर छापेमारी भी की थी। यह छापेमारी भी प्रोफेसर सिंह के नक्सलियों से सम्बन्ध को लेकर की गई थी।

हनी बाबू डीयू के प्रोफ़ेसर हैं और ‘द कमिटी ऑफ सिविल राइट्स एक्टिविस्ट्स’ के सदस्य हैं। इस कमिटी का गठन जीएन साईबाबा द्वारा किया गया था। डीयू प्रोफ़ेसर साईबाबा को 2017 में महाराष्ट्र की एक अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी। साईबाबा के प्रतिबंधित माओवादी संगठन सीपीआई से सम्बन्ध सामने आए थे।

क्या है मामला

31 दिसंबर 2017 को यलगार परिषद सम्मेलन का आयोजन किया गया था। यहाँ कुछ बुद्धिजिवियों द्वारा भड़काऊ भाषणों देने के बाद अगले दिन 1 जनवरी 2018 को पुणे जिले के भीमा कोरेगाँव युद्ध स्मारक के निकट हिंसा भड़क गई थी। इसमें एक युवक की जान चली गई थी। साथ ही करोड़ों की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान हुआ था। इस मामले में अरुण थॉमस फेरेरिया, रोना जैकब विल्सन, सुधीर प्रल्हाद धवले समेत 19 लोगों को आरोपित बनाया गया था।

जाने किस तरह से किया गया था अस्थाई राम मंदिर का निर्माण, 1992 में बाबरी मस्जिद ढहाने के बाद का वो पल

राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही, वैसे-वैसे बाबरी मस्जिद के विवादित ढाँचे को ढहाए जाने के आसपास के संस्मरण सामने आ रहे हैं। ऐसी ही एक कहानी रामलला के अस्थायी मंदिर की है जिसे 1992 में विध्वंस के बाद बनाया गया था।

भूमिपूजन की तैयारियों के बीच इस समय लोग उन कारसेवकों को याद कर रहें हैं जिन्होंने रामलला को विराजमान करने के लिए अपने प्राणों को भी दाँव पर लगा दिया था। उन्हीं कारसेवकों में से एक है बाबा सत्यनारायण मौर्य। जो उस वक्त मौजूद थे जब श्री राम का अस्थाई मंदिर बनाया गया था। हाल ही में प्रकाशित एक वीडियो में, उन्होंने संक्षेप में कहानी सुनाई कि हमारे पास मंदिर बनाने के लिए सोचने तक का समय नहीं था। हमने किसी तरह जल्दी-जल्दी अस्थाई मंदिर का निर्माण किया क्योंकि पुलिस मंदिर परिसर में उन्हें पकड़ने के लिए प्रवेश कर चुकी थी।

बाबा सत्यनारायण मौर्य को लोग बाबा के नाम से जानते है। उन्होंने कहा, “7 दिसंबर को, जैसे ही उन्हें पता चला कि पुलिस कुछ ही घंटों में विध्वंस स्थल पर पहुँच रही है, हमारे पास सोचने का बिल्कुल भी समय नहीं था। यदि हम उस समय स्थल पर एक अस्थाई मंदिर का निर्माण नहीं करते, तो अभी भी वह विवादित भूमि होती, न कि राम मंदिर का स्थान। भगवान राम ने हमें रास्ता दिखाया, और हमने बैनर बनाने के लिए अपने साथ लाए कपड़ों का ही उपयोग करके एक छोटा सा अस्थाई मंदिर बनाया।” राम मंदिर के निर्माण से पहले रामलला को हाल ही में योगी आदित्यनाथ द्वारा स्थानांतरित किए जाने तक अस्थाई मंदिर उसी संरचना में रहा।

मस्जिद के विध्वंस से पहले, रामलला की मूर्ति को मस्जिद के भीतर बीच गुंबद के नीचे रखा गया था। रामलला की मूर्ति को 1949 में दिसंबर की रात को कुछ भक्तों द्वारा रखा गया था। जिसके बाद सरकार द्वारा सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए मस्जिद को बंद कर दिया गया था। इससे पहले, स्थल पर हिंदू और दूसरे मजहब वाले, दोनों पूजा करते थे। क्योंकि ब्रिटिश सरकार ने 1859 में बाड़ लगाकर साइट को दो भागों में विभाजित कर दिया था।

मस्जिद सहित भीतरी जमीन दूसरे समुदाय को दी गई थी, जबकि हिंदुओं को बाहरी जमीन का उपयोग करने की अनुमति दी गई थी। 1992 में मस्जिद को ध्वस्त करने के बाद, अस्थाई मंदिर (जो मूल रूप से एक तम्बू था) को रामलला की मूर्ति रखने के लिए बनाया गया था।

रामलला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे

राम मंदिर आंदोलन के दौरान बाबा ने एक आवश्यक भूमिका निभाई। आपको जानकर कर खुशी होगी कि बाबा ने ही “रामलला हम आएँगे, मंदिर वही बनाएँगे” वाला प्रसिद्ध नारा दिया था, जो आज भी राम भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय है।

पिछले 28 सालों में जब भी राम मंदिर को लेकर चर्चा हुई उस समय इस नारे का जरूर इस्तेमाल किया गया। बाबा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स और यूट्यूब चैनल पर राम मंदिर आंदोलन के कई दुर्लभ वीडियो और तस्वीरें साझा की है। जिन्हें लोग आज भी देख कर आंदोलन के दिनों को याद करते है।

राममंदिर भूमिपूजन

उल्लेखनीय है कि, 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन होगा। इस समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी, मुरली मनोहर जोशी, कोठारी ब्रदर्स की बहन और कई अन्य प्रमुख नेता और संत अयोध्या में मौजूद रहेंगे।

पीएम मोदी 22.6 किलोग्राम के चाँदी की ईंट से मंदिर निर्माण के लिए शिलान्यास करेंगे। 9 नवंबर 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद राम मंदिर का निर्माण हो रहा है। अदालत ने रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके साथ ही भारत सरकार को मंदिर निर्माण के लिए समर्थन देने का आदेश भी दिया था। अदालत के दिशानिर्देशों के अनुसार फरवरी 2020 में एक ट्रस्ट का गठन किया गया था।

सुब्रमण्यम स्वामी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी की शैक्षणिक योग्यता को बताया फर्जी: लोकसभा स्पीकर से की इसकी शिकायत

भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को घेरते हुए उनकी शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाया है। उन्होंने ट्वीट कर सोनिया गाँधी पर आरोप लगाया है कि, सोनिया गाँधी ने 17वीं लोकसभा ‘Who’s Who’ प्रकाशन के लिए अपनी शैक्षणिक योग्यता को गलत बताया है। स्वामी ने यह भी कहा कि इस मामले की शिकायत उन्होंने लोकसभा स्पीकर से भी की है।

गौरतलब है कि आज (2 अगस्त, 2020) भाजपा सांसद ने सोनिया गाँधी के शैक्षणिक योग्यता को गलत बताते हुए एक ट्वीट किया है। इसके अलावा उन्होंने इस संदर्भ में लोकसभा स्पीकर को भी एक पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा है कि सोनिया गाँधी ने गलत कहा है कि 1965 में उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अंग्रेजी भाषा में प्रमाण पत्र प्राप्त किया है। सोनिया के इस फर्जी दावे का जिक्र मैंने 20 साल से पहले भी किया था। मैंने उस वक्त कोर्ट के दरवाजे भी खटखटाए थे।

उन्होंने लिखा, “तब जस्टिस बालकृष्णन के नेतृत्व वाली चीफ जस्टिस की बेंच ने इस मसले पर सुनवाई की थी। यह आग्रह किया गया था कि सोनिया गाँधी इस झूठी जानकारी को फिर से प्रस्तुत नहीं करेगी। मैंने भी इस मामले में बड़ा दिल रखते हुए सजा की माँग नहीं की। इस आधार पर मैं सहमत था कि इस मामले का निपटारा हो जाए।

स्वामी ने स्पीकर से इस मामले को लोकसभा की आचार समिति को भेजे जाने का अनुरोध किया और कहा कि उन्हें सबूत पेश करने में खुशी होगी ताकि उन्हें (सोनिया) उनकी शैक्षणिक योग्यता के बारे में इस जानबूझकर और बार-बार बोल जाने वाले झूठे के लिए दंडित किया जा सके।

राज्यसभा सांसद ने स्पीकर से 15वीं और 16वीं लोकसभा के लिए ‘Who’s Who’ के अंतर को खोजने के लिए सोनिया गाँधी की पिछली फाइलिंग की तुलना करने का आग्रह भी किया।

इसके अलावा, स्वामी ने ट्विटर पर अपने द्वारा किए गए दावे को सही ठहराने के लिए कुछ डॉक्युमेंट्स की तस्वीरें भी सबूत के तौर पर साझा किए।

‘अयोध्या में भूमि पूजन के दिन बंगाल में पूर्ण लॉकडाउन तृणमूल कॉन्ग्रेस की हिंदू विरोधी मानसिकता दर्शाती है’

अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए पाँच अगस्त को भूमि पूजन समारोह आयोजित किया गया है। भाजपा ने इसी तारीख को पूर्ण लॉकडाउन लागू करने के पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले की तीखी आलोचना करते हुए रविवार (अगस्त 2, 2020) को कहा कि इससे सत्तारूढ़ पार्टी की ‘हिंदू विरोधी मानसिकता’ प्रदर्शित होती है।

हालाँकि, तृणमूल कॉन्ग्रेस नेतृत्व ने भाजपा के दावे को ‘निराधार’ करार दिया और भगवा पार्टी से ‘कोविड-19 महामारी के दौरान सांप्रदायिक राजनीति से बचने’ का आग्रह किया।

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा ने सरकार से आदेश को तत्काल वापस लेने की माँग करते हुए दावा किया कि ‘सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस तुष्टीकरण की राजनीति करती है।’ 

सिन्हा ने कहा, ‘‘राज्य सरकार ने दो अगस्त को लॉकडाउन वापस ले लिया क्योंकि इससे एक दिन पहले ईद का त्योहार था। जब बात स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े अवसरों में से एक – पाँच अगस्त को राम मंदिर के लिए भूमि पूजन की आई तो तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार ने लॉकडाउन लागू करने का फैसला किया।”

उन्होंने कहा, ‘‘यह सच है कि कोविड-19 के कारण कोई बड़ा उत्सव नहीं होगा, लेकिन बुधवार को पूर्ण लॉकडाउन लागू करने का निर्णय तृणमूल सरकार की सांप्रदायिक मानसिकता को दर्शाता है।”

सिन्हा की बातों का समर्थन करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि अगर राज्य सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती है तो उन्हें इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा।

दिलीप घोष ने कहा, “पाँच अगस्त स्वतंत्र भारत के ऐतिहासिक दिनों में से एक है और उस दिन पूर्ण लॉकडाउन लागू करना बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं को आहत करने के समान है। अगर राज्य सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती है तो इसका परिणाम भुगतना होगा।”

तृणमूल कॉन्ग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य सरकार के फैसले का तुष्टीकरण से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘पूरा देश महामारी से लड़ रहा है और भाजपा सांप्रदायिक राजनीति में लिप्त है। उन्हें ऐसा करने से परहेज करना चाहिए।”

बता दें कि अयोध्या में भूमि पूजन से पहले अखंड श्रीरामचरितमानस पाठ का आयोजन होने जा रहा है। इसका आयोजन 4 अगस्त की शाम 7 बजे से शुरू होकर अगले दिन यानी 5 अगस्त तक लगभग 24 घंटे तक लगातार चलता रहेगा।

इसका आयोजन ‘रामोत्सव’ नामक ऑनलाइन वेबसाइट कर रहा है। भारत समेत कई देशों के रामभक्त इससे जूम ऐप से जुड़ेंगे और एक-एक घंटे का रामचरितमानस पाठ का वाचन करेंगे। इस कार्यक्रम में अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, मॉरीशस, हालैंड, हंगरी, इंग्लैंड आदि देशों के लोग भी पाठ करेंगे।

अमित शाह… अल्लाह को जल्दी प्यारे हो जाओ: कोरोना+ खबर के बाद कट्टरपंथियों ने कहा – ‘ईदी मिल गई’

गृह मंत्री अमित शाह कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। जिसके बाद उन्हें डॉक्टर्स की सलाह पर मेदांता अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। अमित शाह ने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

अमित शाह ने ट्वीट किया, “कोरोना के शुरुआती लक्षण दिखने पर मैंने टेस्ट करवाया और रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। मेरी तबीयत ठीक है परन्तु डॉक्टर्स की सलाह पर अस्पताल में भर्ती हो रहा हूँ। मेरा अनुरोध है कि आप में से जो भी लोग पिछले कुछ दिनों में मेरे संपर्क में आए हैं, कृपया स्वयं को आइसोलेट कर अपनी जाँच करवाएँ।”

अमित शाह के कोरोना पॉजिटिव आने से लिबरलों और कट्टरपंथी इस्लामी लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर किसी ने इसे अमित शाह की अंतिम रात बताते हुए उनके मौत की दुआ माँगी तो कई ने इसे सबसे अच्छा ‘ईदी’ बताया।

एक यूजर ने लिखा, “सहायक पुजारी कोरोना पॉजिटिव पाए गए। राम मंदिर के पास तैनात 16 पुलिसकर्मी भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए और अब अमित शाह कोरोना संक्रमित हो गए हैं। वो प्लान करते हैं, मगर अल्लाह बेस्ट प्लानर है।” वहीं एक अन्य ने लिखा, “अल्लाह को जल्दी प्यारे हो जाओ।”

एक सोशल मीडिया यूजर लिखती है, “ईदी मिल गई दोस्तों, ईदी मिल गई। इससे अच्छी ईदी और क्या होगी?” इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर लिखता है कि यार पहले मरने तो दे।

एक यूजर ने लिखा कि अमित शाह ने दुनिया के पतंजलि के द्वारा बनाया गया बेहतरीन वैक्सीन कोरोनील का इस्तेमाल किया होगा।

मोहम्मद आसिफ खान लिखता है, “अमित शाह ने कौन सी जमात में शिरकत की थी?”

वहीं मोहम्मद जीशान फारूकी लिखता है, “आपको जमात में जाने की क्या जरूरत थी सर।”

सैय्यद जाबिर ने भी इसी को लेकर लिखा, “जमात में गए थे या जमात वाले आए थे मिलने।” इतना ही नहीं, एक ने तो उन्हें ‘तबलीगी शाह’ तक कह दिया।

हालाँकि लोगों ने लिबरलों को भी कई सलाह दे डाली। एक यूजर ने लिखा, “बरनॉल नहीं मिल रही है तो, उस की जगह सैनिटाइजर लगा कर पास में माचिस की तीली जलाने से भी ठंडक मिलती है। बहुत गुप्त जानकारी है। किसी को मत बताना।”

एक ने लिखा कि चाहे कोई भी बात हो पर कोरोना की देन तो तुम जमातियों की ही है।

एक यूजर ने उनकी परवरिश पर बात करते हुए कहा, “आप के माँ-बाप ने आपकी अच्छी ही परवरिश की होगी। अब आपको देखना होगा कि आप ने इस तरह की गंदी बातें सीखी कहाँ, अगर आपको कुछ सही करना है तो… वरना इस दुनिया में जानवर की भी ज़िन्दगी गुजर जाती है।। तुम्हारी और मेरी भी गुजर जाएगी।”

ब्यूटी कॉन्टेस्ट के नाम पर यौन उत्पीड़न: कंपनी प्रमोटर के साथ महेश भट्ट, रणविजय सिंह सहित बॉलीवुड की कई हस्तियों को नोटिस

मॉडलिंग में करियर बनाने की कोशिश में लगी लड़कियों को ब्यूटी कॉन्टेस्ट में हिस्सा दिलाने के नाम पर उनके यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग का मामला सामने आया है। इस संबंध में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) को दी गई शिकायत के अनुसार, चंडीगढ़ में स्थित आईएमजी वेंचर्स (IMG Ventures) नाम की एक कंपनी के प्रमोटर सनी वर्मा के खिलाफ आरोप लगाया गया है कि उसने मॉडलिंग में करियर बनाने का मौका देने के बहाने कई लड़कियों को ब्लैकमेल और उनका यौन शोषण किया है। 

NCW ने कंपनी के प्रमोटर के खिलाफ ‘यौन उत्पीड़न’ की शिकायत के मामले में बॉलीवुड की कई हस्तियों को नोटिस जारी किया है। कई लड़कियों ने मॉडलिंग में उनका करियर बनाने के बहाने कंपनी प्रमोटर पर ब्लैकमेल करने और यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है।

NCW ने पीपुल अगेंस्ट रेप इन इंडिया (PARI) की संस्थापक सोशल एक्टिविस्ट योगिता भयाना द्वारा दायर शिकायत का संज्ञान लेते हुए 6 अगस्त को अपनी चेयरपर्सन रेखा शर्मा की अध्यक्षता में एक वर्चुअल सुनवाई निर्धारित की है।

आयोग ने शिकायतकर्ता योगिता भयाना को संबोधित एक पत्र में कहा, “NCW ने आपके मामले का संज्ञान लिया है और तदनुसार इस मामले में एक वर्चुअल सुनवाई करने का निर्णय लिया है। आयोग ने आपके द्वारा नामित हस्तियों को नोटिस भी जारी किए हैं।”

सोशल एक्टिविस्ट योगिता भयाना ने अपनी शिकायत में कई बॉलीवुड हस्तियों का नाम लिया है, जिनमें महेश भट्ट, उर्वशी रौतेला, मौनी रॉय, रणविजय सिंह, प्रिंस नरूला और ईशा गुप्ता के नाम शामिल हैं।

योगिता भयाना द्वारा राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा को लिखे गए एक शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि सनी वर्मा अपनी कंपनी के माध्यम से मिस एशिया प्रतियोगिता के आयोजन के बहाने लड़कियों को इस दावे के साथ बुलाता है कि इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के बाद वह मॉडल बन जाएँगी।

इस प्रतियोगिता को वास्तविक दिखाने के लिए उसकी कंपनी लड़कियों से 2,950 रुपए एंट्री फीस भी लेती है। 31 जुलाई को दिए गए शिकायती पत्र में कहा गया है कि एक बार जब लड़कियाँ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के आवेदन करती हैं तो प्रतियोगिता में बेहतर रैंकिंग हासिल करने के लिए सनी वर्मा की महिला साथियों द्वारा उन्हें नग्न तस्वीरें देंने के लिए मजबूर किया जाता है।

यह भी आरोप लगाया गया है कि सनी, फोटो प्राप्त करने के बाद और कभी-कभी पहले भी लड़कियों के संपर्क में आता था और उनसे पूरी तरह न्यूड तस्वीरें और वीडियो माँगता था। शिकायती पत्र में यह कहा गया है कि सनी वर्मा मॉडलिंग करने या प्रतियोगिता जीतने की इच्छा रखने वाली लड़कियों को धमकी देकर अपनी यौन इच्छाओं को पूरा करने के लिए इस्तेमाल करता था।

एक बार लड़कियों के साथ शारीरिक संबंध बनाने के बाद वह उन लड़कियों को आगे भी संबंध बनाने के लिए लगातार ब्लैकमेल करता था। देश भर की कई लड़कियों को सनी वर्मा और उसके साथियों द्वारा यौन और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। शिकायत में सबूत के रूप में कई लड़कियों के कई पत्रों, मैसेज और ऑडियो क्लिप के माध्यम से सनी वर्मा और उसकी कंपनी के इस काले कारनामे का खुलासा किया गया है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि यौन उत्पीड़न के आरोप में सनी वर्मा को पहले भी गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने माँग की है कि NCW मामले की गहराई से जाँच करे और दोषियों को सजा दिलवाए ताकि कोई भी अन्य व्यक्ति किसी भी बहाने इस तरह लड़कियों का यौन शोषण करने की हिम्मत न करे। जो कि सनी वर्मा और इससे जुड़े सभी लोगों को एक कड़ा संदेश होगा।

BREAKING: अमित शाह को हुआ कोरोना, रिपोर्ट आई पॉजिटिव – अस्पताल में भर्ती

देश के गृहमंत्री अमित शाह को कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। कोरोना के शुरुआती लक्ष्ण दिखने पर उन्होंने टेस्ट करवाया और यह रिजल्ट पॉजिटिव आया है। अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर उन्होंने इसकी जानकारी दी है।

अमित शाह ने कोरोना के बारे में जानकारी देते हुए बताया, “मेरी तबीयत ठीक है परन्तु डॉक्टर्स की सलाह पर अस्पताल में भर्ती हो रहा हूँ। मेरा अनुरोध है कि आप में से जो भी लोग गत कुछ दिनों में मेरे संपर्क में आए हैं, कृपया स्वयं को आइसोलेट कर अपनी जाँच करवाएँ।”

बहन के निवेदन पर 8 लाख के इनामी भाई ने छोड़ दी नक्सलियों की दुनिया: पहले भी नक्सलवाद पर भारी पड़ा है भाई-बहन का प्यार

शनिवार के दिन छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में एक नक्सली ने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके पीछे की वजह बेहद दिलचस्प थी। उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उसकी बहन की इच्छा थी कि वह आत्मसमर्पण कर दे। ख़बरों के मुताबिक़ उसकी बहन अक्सर इस बात के लिए निवेदन करती थी। 

नक्सली युवक की बहन ने पुलिस अधीक्षक को खुद इस बात की जानकारी दी। उसने पुलिस को दी गई जानकारी में कहा कि “मेरा भाई वापस घर आ चुका है। अब वह कुछ भी गलत नहीं करेगा और वह मेरे साथ रहेगा।”

मल्ला तामो नाम के इस युवक (नक्सली) पर 8 लाख रूपए का इनाम था। वह आज से लगभग 14 साल पहले अपने चाचा के साथ बीजापुर के डोडी तुमनार गया। वहाँ जाकर वह नक्सलियों के गिरोह (प्लाटून नंबर 13) में शामिल हो गया। इसके बाद वह प्लाटून का डिप्टी कमांडर बन गया। उसे कई तरह के हथियार चलाना भी बहुत अच्छे से मालूम था। 

शनिवार के दिन मल्ला की बहन लिंगे अपने पति के साथ कराली स्थित पुलिस लाइन पहुँची। उसने पुलिस अधीक्षक को पहले ही इस बात की जानकारी दे दी थी। उसका भाई वापस घर लौट चुका है। अब वह किसी भी तरह के गलत काम नहीं करेगा और आम जिंदगी जीना शुरू करेगा। 

मल्ला के वापस आने की जानकारी मिलते ही पुलिसकर्मी कराली पहुँचे। जहाँ उसने पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव और डीआईजी (सीआरपीएफ) विनय कुमार सिंह की मौजूदगी में आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके अलावा लिंगे ने यह भी बताया कि उसका भाई 14 साल बाद उससे मिलने आया। लिंगे ने अपने भाई से निवेदन किया था कि रक्षा बंधन आने वाला है। इस बात को ध्यान में रखते हुए आत्मसमर्पण कर देना चाहिए। 

यह पहली ऐसी घटना नहीं है जिसमें भाई बहन का प्यार नक्सलवाद पर भारी पड़ा हो। इसके पहले भी ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं जिनमें ऐसा हो चुका है। लगभग एक हफ्ते पहले दशमी कुहरामी ने जिस पर 5 लाख रूपए का इनाम था। उसने आत्मसमर्पण कर दिया अब इस रक्षाबंधन पर उन्होंने अपने भाई से अनुरोध किया कि वह आत्मसमर्पण कर दे। दशमी ने यह भी कहा कि वह रक्षा बंधन के मौके पर अपने भाई का इंतज़ार भी करेगी। 

साल 2018 में वेट्टी रामाजो खुद एक नक्सल था और बाद में अधिकारी बना। उसकी बहन नक्सल थी। एक दिन वह अपनी बहन के सामने गया और उससे आत्मसमर्पण के लिए कहा। उसने कहा कि भले रक्षा बंधन के उपहार की तरह ही पर आत्मसमर्पण कर देना चाहिए। रामा आज भी अपनी बहन का इंतज़ार कर रहा है और आशा करता है कि उसकी बहन एक न एक दिन ज़रूर वापस लौटेगी।   

करगिल की लड़ाई में मरने-मारने के लिए छोड़ दिया था 1 करोड़ 20 लाख रुपए का ऑफर: शोएब अख्तर

अक्सर सुर्ख़ियों में रहने वाले पाकिस्तान के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ शोएब अख्तर ने एक हैरान कर देने वाला दावा किया है। उनका कहना है कि करगिल युद्ध में वो अपनी तरफ से मदद करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने Nottinghamshire के साथ 175,000 पाउंड (लगभग 1,20,75,000 रुपए, एक पाउंड 1999 के करेंसी रेट के हिसाब से लगभग 69 रुपए के बराबर था।) का समझौता करने से मना कर दिया था।

साल 1999 के दौरान मई महीने में भारत और पाकिस्तान की सेना के बीच करगिल की लड़ाई हुई थी। जिसमें दोनों देशों के सैनिक मारे गए थे। इस युद्ध के दो दशक बाद शोएब अख्तर ने इतना बड़ा बड़ा खुलासा किया है। उनका कहना है कि वह सब कुछ छोड़ कर देश के लिए मरने को तैयार थे। 

ARY News नाम के समाचार समूह को साक्षात्कार देते हुए उन्होंने इस बारे में जानकारी दी। साक्षात्कार के दौरान शोएब ने कहा “लोग इस कहानी के बारे में बहुत कम ही जानते हैं। मैंने नॉटिंघम के साथ 175,000 पाउंड का समझौता किया था। इसके बाद साल 2002 में एक और बड़ा समझौता किया था। मैंने करगिल के दौरान दोनों ही समझौतों से इनकार कर दिया था।”

इसके बाद शोएब ने कहा “मैं लाहौर के बाहरी इलाके में खड़ा था। मुझे वहाँ देख कर एक जनरल ने पूछा कि मैं वहाँ क्या कर रहा हूँ? मैंने कहा लड़ाई शुरू होने वाली है, हम साथ मरेंगे। मैंने इस तरह दो बार क्रिकेट छोड़ा था, जिस पर सब के सब हैरान हुए थे। मुझे इस बात की बिलकुल चिंता नहीं थी। मैंने कश्मीर में मौजूद अपने दोस्तों को फोन किया और उनसे कहा कि मैं लड़ने के लिए तैयार हूँ।” 

अंत में शोएब ने कहा,

“जब लड़ाकू विमानों (भारत के) हमारी ज़मीन पर आए। इसके बाद उन्होंने यहाँ पर मौजूद पेड़ गिराए, यह हमारे किए बहुत बड़ा नुकसान था। उन्होंने उस वक्त लगभग 6 से 7 पेड़ गिराए और मैं इस बात से बहुत ज़्यादा दुखी हुआ था। मैं जब सुबह सो कर उठा, तब मुझे चक्कर आ रहा था। तब मेरी पत्नी ने मुझसे आराम करने के लिए कहा। लेकिन जब तक यह सब चलता रहा, मैं तब तक ख़बरें सुनता रहा। मैं जानता हूँ कि घटना के पीछे की असल कहानी क्या थी। मैं रावलपिंडी से हूँ और GHQ को बहुत अच्छे से जानता हूँ।” 

अपने लगभग दस के साल के गेंदबाज़ी के करियर में शोएब अख्तर ने 400 से अधिक अंतरराष्ट्रीय विकेट लिए। उन्हें दुनिया के सबसे तेज़ गेंदबाज़ों में एक माना जाता है।

राजस्थान: होटलों में आराम फरमा रहे कॉन्ग्रेस विधायकों के खिलाफ दायर PIL, वेतन-भत्ते और अन्य लाभों को रोकने की माँग

राजस्थान में सियासी घमासान के बीच लगभग तीन सप्ताह से विभिन्न होटलों में आराम फरमा रहे कॉन्ग्रेस के विधायकों के वेतन-भत्ते और अन्य लाभ रोकने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। राजस्थान में यह उठा पटक सरकार में उप मुख्यमंत्री रहे सचिन पायलट के विद्रोह के बाद हुआ है।

यह याचिका राजस्थान उच्च न्यायालय की डबल बेंच के समक्ष विवेक सिंह जादौन की ओर से दायर की गई है। जिसपर मंगलवार (4 अगस्त,2020) को सुनवाई होगी।

जादौन ने राजस्थान उच्च न्यायालय में दाखिल अपनी याचिका में कहा है कि पिछले कुछ हफ़्तो से होटलों में लुफ्त उठा रहे विधायक न ही जनता के बीच जा रहे है। न ही ये अपने विधानसभा क्षेत्र में कोई काम कर रहे है। ऐसे में इन्हें वेतन-भत्ते क्यों दिए जाएँ। उन्होंने कोर्ट से विधायकों को मिल रहे वेतन, मासिक भत्ते, और अन्य लाभों को वापस लेने की माँग की है।

इंडिया टुडे टीवी के साथ बात करते हुए, याचिका दायर करने वाले विवेक सिंह जादौन के वकील, गजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा, “याचिका इसलिए दायर की गई है क्योंकि, विधायक राज्य के लोगों की सेवा के लिए चुने गए, होटलों में ठहरने के लिए नहीं। इसमें कहा गया है कि जनता के साथ कोई संबंध नहीं रखने वाले होटलों में रहने वाले विधायक अपनी शपथ के अनुसार अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं।”

याचिका में यह भी उल्लेख है कि, विधायकों की अनुपस्थिति में कोई अन्य जिम्मेदार व्यक्ति भी उनके कर्तव्य निर्वहन के लिए मौजूद नहीं है। इसलिए उन्हें कोई वेतन, भत्ता नहीं दिया जाना चाहिए।

दायर याचिका में फेयरमोंट होटल का भी उल्लेख किया गया है, जहाँ कॉन्ग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के वफादार विधायक लगभग दो सप्ताह तक रहे। हालाँकि, अशोक गहलोत खेमे से जुड़े कॉन्ग्रेस विधायकों को राजस्थान के जैसलमेर के एक अन्य होटल में शिफ्ट कर दिया गया है।

वहीं इंडिया टुडे से बात करते हुए विवेक सिंह जादौन ने बताया, “वे अपनी याचिका को किसी कीमत पर भी नहीं बदलेंगे। याचिका के जरिए लोगों के सामने यह बात आएगी कि जिन विधायकों को लोगों के लिए काम करना चाहिए, वे कोरोना संकट जैसी कठिन परिस्थितियों के समय होटलों में ठहरे हुए हैं।”