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‘मेरा ध्यान नहीं गया कि बाइक स्टैंड पर खड़ी थी’: CJI पर ट्वीट के लिए प्रशांत भूषण ने माँगी माफी

वकील प्रशांत भूषण ने सोमवार (3 अगस्त, 2020) को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के खिलाफ अपने ट्वीट को लेकर माफी माँग ली है। इसमें उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के हेलमेट नहीं पहनने को लेकर सवाल किए थे।

प्रशांत भूषण ने माफी मॉंगते हुए कहा है कि वे इस बात पर ध्यान नहीं दे पाए कि सीजेआई जब बाइक पर बैठे थे तो वह स्टैंड पर खड़ी थी। इसके अलावा अवमानना नोटिस के जवाब में उन्होंने किसी अन्य मसले पर खेद नहीं जताया है।

29 जून को प्रशांत भूषण ने बाइक पर बैठे मुख्य न्यायाधीश एसएस बोबडे की एक तस्वीर ट्वीटर पर शेयर की थी। इसमें उन्होंने उनके बिना मास्क और हेलमेट होने को लेकर सवाल किए थे। उन्होंने इसके लिए माफी माँगते हुए कहा है कि मैंने ध्यान नहीं दिया कि बाइक स्टैंड पर है और स्टैंड पर खड़ी बाइक पर हेलमेट लगाना जरूरी नहीं होता, ऐसे में वो इस बात के लिए माफी माँगते हैं कि उन्होंने हेलमेट को लेकर सीजेआई से सवाल किया।

सर्वोच्च न्यायालय ने 22 जुलाई को प्रशांत भूषण को नोटिस जारी कर पूछा था कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला क्यों नहीं चलाया जाना चाहिए।

अवमानना के नोटिस का जवाब देते हुए प्रशांत भूषण ने 134 पन्नों के इस जवाब में हेलमेट को लेकर जरूर माफी माँगी है, लेकिन इसके अलावा अपनी ओर से कही किसी बात के लिए खेद प्रकट नहीं किया है।

प्रशांत ने न्यायपालिका की विफलताओं पर दिए गए अपने बयानों को सही ठहराते हुए सहारा-बिड़ला डायरी मामले से लेकर लोया की मौत, कलिखो पुल आत्महत्या मामले से लेकर मेडिकल प्रवेश घोटाले तक, मास्टर ऑफ रोस्टर विवाद, अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से लेकर नागरिकता संशोधन अधिनियम तक के कई पुराने मामलों का हवाला दिया।

उल्लेखनीय है कि अवमानना कार्यवाही का कारण अधिवक्ता प्रशांत भूषण द्वारा किए गए 2 ट्वीट हैं। ये ट्वीट 27 जून और 29 जून को किए गए थे। एक ट्वीट में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट पर निशाना साधा था। साथ ही कहा था कि खासकर पिछले 4 मुख्य न्यायधीशों ने देश का लोकतंत्र ध्वस्त करने में अपनी भूमिका निभाई है। वहीं दूसरे ट्वीट में वर्तमान सीजेआई की बाइक के साथ तस्वीर पर सवाल उठाए थे।

अपने एक ट्वीट में प्रशांत भूषण ने कहा था, “जब भविष्य में इतिहासकार वापस मुड़कर देखेंगे कि किस तरह से पिछले 6 वर्षों में औपचारिक आपातकाल के बिना ही भारत में लोकतंत्र को नष्ट किया गया है, तो वे विशेष रूप से इस विनाश में सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका को चिह्नित करेंगे, और पिछले 4 CJI की भूमिका को और भी अधिक विशेष रूप से।”

जहरीली शराब कांड: CM अमरिंदर ने केजरीवाल से कहा- अपने काम से काम रखिए, त्रासदी का फायदा उठाने की कोशिश मत कीजिए

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने रविवार (2 अगस्त, 2020) को राज्य में जहरीली शराब त्रासदी के मामले में सीबीआई जाँच की माँग करने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपने काम से काम रखना चाहिए। जहरीली शराब कांड में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

अरविंद केजरीवाल को आड़े हाथों लेते हुए अमरिंदर सिंह ने एक बयान में आरोप लगाया कि, इतने सारे लोग मारे गए हैं और अरविंद केजरीवाल को इस घटना से राजनीतिक मुद्दा बनाने में दिलचस्पी है।

आम आदमी पार्टी पंजाब की प्रमुख विपक्षी पार्टी है। कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि इस मामले में बिना देरी किए वे जल्द से जल्द इसकी जाँच करवाएँगे। वह उन सभी व्यक्तियों के खिलाफ जल्द कड़ी कार्रवाई चाहते हैं, जिनके लालच के कारण राज्य में 100 के करीब जान गई हैं।

बता दें, केजरीवाल ने रविवार को ट्वीट कर इस हादसे पर सीबीआई जाँच की माँग की थी।

अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि पंजाब पुलिस द्वारा पिछले कुछ महीनों के दौरान अवैध शराब का कोई भी केस हल नहीं किया गया है।

अब तक 100 से ज्यादा लोगों की जहरीले शराब कांड में मौत हो चुकी है।

इस त्रासदी में तरन तारन सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र है। जहाँ 80 से ज्यादा लोग अपनी जान गँवा चुके हैं। पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बताया कि इस मामले में 30 लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और मामले में पाँच एफआईआर दर्ज किए गए हैं।

इसके अलावा, पुलिस, आबकारी और टैक्सेशन विभाग के 13 अधिकारियों को लापरवाही के लिए निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में आगे की जाँच की जा रही है।

जिस मजहब का इतिहास 1500 साल से ज्यादा नहीं है, उसके लोग रक्षाबंधन की शुरुआत मुगलों से बता रहे हैं

आज रक्षाबंधन है। इस त्योहार की अहमियत हमारे लिए शब्दों से परे है। भाई-बहन के रिश्ते का एक अहम दिन। लेकिन अफ़सोस कुछ लोगों को आज के दिन भी सुकून नहीं है। महत्वपूर्ण त्योहार भी उनके एजेंडे से अछूता नहीं है। एक इतिहासकार ने इस कड़ी में में रक्षाबंधन को मुग़लों का त्योहार बता दिया। 

राना साफ़वी कथित तौर पर इतिहासकार हैं, लेकिन आज के दिन अलग ही भूमिका निभा रही हैं। वह लिखती हैं, “बहुत से लोग नहीं जानते हैं पर रक्षाबंधन एक मुग़ल त्योहार है। यह कहीं और से नहीं बल्कि दिल्ली से शुरू हुआ था।” इसके अलावा साफ़वी ने अपनी इस दलील को साबित करने के लिए एक घटना भी जोड़ी है। 

साफ़वी अपनी किताब City of my heart में लिखती हैं, “साल 1759 में वज़ीर गाज़ी-उद-दीन खान फिरोज़ जंग 3 ने मुग़ल शासक आलमगीर 2 को फुसलाकर बुलाया। वह आलमगीर को फिरोज़ शाह कोटला की जामा मस्जिद से हटाना चाहता था। आलमगीर इसके लिए तैयार हो गया और वह अकेले ही मस्जिद के भीतर गया जहाँ वजीर घात लगा कर उसका इंतज़ार कर रहा था। उन्होंने आलमगीर को छूरा घोंपा और इसके बाद यमुना नदी में फेंक दिया।” 

अगले दिन एक हिंदू महिला ने आलमगीर को पहचाना। फिर महिला ने उसका सिर अपने गोद में रखा। फिर आलमगीर के वारिस शाह आलम 2 ने उस महिला को उसकी (आलमगीर) बहन घोषित कर दिया। तब से उस दिन का नाम ‘सलोना त्योहार’ (रक्षा बंधन) रख दिया गया। वहीं से राखी और मिठाइयों की शुरुआत हुई, यह रिवाज़ बहादुर शाह ज़फ़र के लाल किले से हटने तक चला था।

खैर यह तो मामले का एक पक्ष है। लेकिन राना साफ़वी सरीखे इतिहासकारों को हमेशा एक पक्ष ही पता होता है। या यूँ कहें वह एक पक्ष की समझते हैं और एजेंडे की सूरत देकर उसका ही प्रचार कहते हैं। सनातन पद्धति में सबसे अच्छी बात यही है कि हर मान्यता, परंपरा, त्योहार के पीछे एक नहीं बल्कि अनेक तथ्य और तर्क हैं। रक्षाबंधन की ही बात करें तो ऐसे अनेक दृष्टांत हैं जो साफ़वी की एजेंडा नुमा बातों को सिरे से खारिज करते हैं। 

रक्षाबंधन का उल्लेख महाभारत के समय से ही मिलना शुरू हो गया था। यह उल्लेख मिलता है द्रौपदी और कृष्ण के बीच। श्री कृष्ण की ऊँगली से खून निकल रहा था। तभी द्रौपदी ने अपनी साड़ी का छोटा सा हिस्सा निकाल कर कृष्ण की ऊँगली पे बाँध दिया। बदले में कृष्ण ने भी वादा किया कि वह हमेशा द्रौपदी की रक्षा करेंगे। यही कारण था कि जब कौरवों और पांडवों की भरी सभा में द्रौपदी का चीर हरण हो रहा था। तब श्री कृष्ण ने द्रौपदी की मदद की।

रक्षाबंधन का दूसरा बड़ा उल्लेख मिलता है भविष्य पुराण में। जिसके मुताबिक़ इंद्र देव को शुचि (इंद्राणी) ने राखी बाँधी थी। इसके अलावा विष्णु पुराण में उल्लेख मिलता है कि राजा बाली को लक्ष्मी ने राखी बाँधी थी। इस त्योहार से जुड़ी यमराज और यमुना की कहानी भी काफी प्रचलित है। इस तरह की न जाने कितनी और कहानियाँ हैं जो रक्षाबंधन का प्राचीन इतिहास साबित करती हैं।

True Indology नाम के ट्विटर एकाउंट ने साफ़वी के इस दावे को कारिज करते हुए ट्वीट किया है। कुछ इस तरह रक्षाबंधन मनाया जाता है, 

श्रावण/ सावन माह की पूर्णिमा के दिन “श्रावणी उपाक्रम” किया जाता है। इस दिन सनातन धर्म के लोग अपना यज्ञोपवीत (जनेऊ) बदलते हैं। श्रावणी, शरीर को शुद्ध करने की प्रक्रिया भी कही जाती है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को रक्षिका (रक्षा सूत्र) बांधती हैं। यहाँ तक कि आम लोग अपने प्रियजनों को भी सूत्र बाँधते हैं और उनकी लंबी आयु की कामना करते हैं।

इन बातों के अलावा रक्षा बंधन से संबंधित एक संस्कृत का श्लोक है 

येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वां मनुबध्नामि, रक्षंमाचल माचल।।

इसका अर्थ यह है कि रक्षासूत्र बांधते समय ब्राह्मण या पुरोहत अपने यजमान से कहता है, 

जिस रक्षासूत्र से दानवों के महापराक्रमी राजा बलि धर्म के बँधन में बाँधे गए थे अर्थात धर्म में प्रयुक्त किए गए थे, उसी सूत्र से मैं तुम्हें बाँधता हूँ, यानी धर्म के लिए प्रतिबद्ध करता हूँ। इसके बाद पुरोहित रक्षासूत्र से कहता है कि हे रक्षे तुम स्थिर रहना, स्थिर रहना। इस प्रकार रक्षा सूत्र का उद्देश्य ब्राह्मणों द्वारा अपने यजमानों को धर्म के लिए प्रेरित एवं प्रयुक्त करना है।

5 दिन में 14 सिम: सुशांत सिंह राजपूत केस में ट्विस्ट, बिहार के IPS ऑफिसर को मुंबई में जबरन किया क्वारंटाइन

सुशांत सिंह आत्महत्या की जाँच करने मुंबई पहुँचे पटना के एसपी विनय तिवारी को बीएमसी के अधिकारियों ने 14 दिनों के लिए क्वारंटीन कर दिया है। विनय तिवारी रविवार रात मुंबई पहुँचे थे। वहीं एसआईटी को इस मामले में यह पता चला कि 9 से 13 जून के बीच सुशांत सिंह के मोबाइल में 14 सिम बदले गए थे।

सुशांत सिंह राजपूत केस की जाँच करने गए बिहार पुलिस के अधिकारियों के लिए सुराग इकट्ठा करना काफी मुश्किल हो रहा है। इसकी वजह बताई जा रही है कि मुंबई पुलिस सही तरह से उनका सहयोग नहीं कर रही है।

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने देर रात ट्वीट कर इसकी जानकारी दी और एसपी विनय तिवारी के हाथ पर लगी क्वारंटीन की मोहर की तस्वीर शेयर की। विनय तिवारी को मुंबई में 15 अगस्त तक क्वारंटीन रहना होगा।

डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने ट्वीट में लिखा, “आज आईपीएस ऑफिसर विनय तिवारी पुलिस टीम को लीड करने के लिए आधिकारिक ड्यूटी पर पटना से मुंबई पहुँचे थे, लेकिन रविवार रात 11 बजे बीएमसी अधिकारियों ने उन्हें जबरन क्वारंटीन कर दिया। उन्हें आईपीएस मेस में रहने की सुविधा नहीं दी गई। वह गोरेगांव के एक गेस्ट हाउस में रुके हुए हैं।”

5 दिन के अंदर सुशांत ने बदले 14 सिम

सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह द्वारा दर्ज किए गए एफआईआर के बाद जाँच के लिए मुंबई पहुँची बिहार पुलिस को कई अहम सबूत मिले हैं। एसआईटी को जाँच के दौरान इस बात की जानकारी हुई है कि आत्महत्या से पहले 9 से 13 जून के बीच सुशांत सिंह के मोबाइल में 14 सिम बदले गए थे।

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम को इस बात की भी आशंका है कि सुशांत सिंह को अपनी पूर्व मैनेजर दिशा सलियन की आत्महत्या के पीछे का कारण पता चल गया था। जिसकी वजह से उन्होंने कुछ दिनों के भीतर इतने सिम बदले थे।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार दिशा ने आत्महत्या करने से पहले सुशांत को फ़ोन कर कई बातों का खुलासा किया था। इसी वजह से सुशांत को कुछ लोग फ़ोन पर धमकी देने लग गए थे। जिसके चलते सुशांत को इतने सिम बदलने पड़े।

वहीं पुलिस का मानना है कि सुशांत ने अपने रूम पार्टनर सिद्धार्थ पिठानी से भी दिशा की मौत को लेकर कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए थे। जाँच टीम ने यह भी कहा कि वे सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सलियन के परिवार से पूछताछ करेंगे, जिन्होंने सुशांत की मौत से कुछ दिन पहले आत्महत्या कर ली थी।

एसआईटी को यह भी शक है कि इस मामले में सोची समझी साजिश के तहत घटना के बाद बांद्रा सोसाइटी समेत सुशांत के फ्लैट में लगे सीसीटीवी कैमरे का फुटेज गायब किया गया। शायद यही वजह है कि पटना एसआईटी को अब तक फुटेज समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स सबूत नहीं मिल सके हैं।

सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून को मुंबई के बांद्रा में अपने घर पर फाँसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। इस मामले की जाँच पहले से ही मुंबई पुलिस कर रही है और अब तक कई लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। जिनमें सुशांत के फैमिली, करीबी और बॉलिवुड के कई बड़े नाम शामिल हैं।

अंग्रेजों की करेंसी पर भी अब दिखेंगे महात्मा गाँधी, वहाँ की मुद्रा में छपने वाले पहले (अश्वेत) व्यक्ति बने बापू

महात्मा गाँधी दुनिया के पहले ऐसे व्यक्ति (अश्वेत) बनने वाले हैं, जो ब्रिटिश मुद्रा में नज़र आएँगे। ब्रिटिश राज कोष विभाग ने इस ऐतिहासिक कदम का ऐलान शनिवार के दिन किया। वह भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को वहाँ की मुद्रा में प्रकाशित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ब्रिटिश सरकार ने यह फैसला वंचित वर्ग के लिए किए गए बापू के योगदान को देखते हुए लिया। 

महात्मा गाँधी भारतीय मुद्राओं (नोट और सिक्कों) में साल 1987 से लगातार नज़र आ रहे हैं, हालाँकि 1969 में पहली बार उन्हें 100 रुपए के संस्मरणीय नोट पर छापा गया था। अब वह ऐसे पहले (अश्वेत) व्यक्ति बनने वाले हैं जो ब्रिटिश मुद्रा में नज़र आएँगे।

ब्रिटेन की रॉयल मिंट एडवाईज़री कमिटी इस मामले में काम शुरू कर चुकी है। इस मामले में चांसलर ऋषि सूनक ने भी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने BAME अभियान (ब्लैक, एशियन एंड माइनॉरिटी एथिनिक) को समर्थन दिया। साथ ही माँग उठाई कि ऐसे लोगों ने ब्रिटेन के लिए बहुत योगदान दिया है। ऐसे योगदानों का सम्मान और उल्लेख किया जाना चाहिए। 

पूर्व कंज़रवेटिव दावेदार ज़ेहरा ज़ैदी “We Too Built Britain” नाम के अभियान की मुखिया हैं। इस अभियान से जुड़े लोगों ने भी माँग उठाई थी कि ब्रिटिश मुद्रा में महात्मा गाँधी और उन जैसे कई लोगों को जगह दी जानी चाहिए। ज़ेहरा ज़ैदी को लिखे पत्र में ऋषि सूनक ने कई अहम बातें लिखीं। उन्होंने लिखा:

“एशियाई, श्वेत और अन्य जातीय अल्पसंख्यक समुदायों ने यूनाइटेड किंगडम के साझा इतिहास में उल्लेखनीय किरदार निभाया है। जिसे किसी भी सूरत में भुलाया नहीं जा सकता है।”

इसके अलावा उन्होंने यह भी लिखा, “इस देश (यूके) के लिए तमाम जातीय अल्पसंख्यक समुदायों ने लंबी लड़ाई लड़ी है। इस देश की नींव तैयार करने में न जाने कितने लोगों की जानें गई हैं और उनका ज़िक्र बहुत कम मिलता है। हमने अपने बच्चों को हमेशा यही सिखाया है कि बीमारी की देखभाल करनी चाहिए और बड़ों का सम्मान करना चाहिए। नतीजतन हमारे लोगों ने अपनी मेहनत और इच्छाशक्ति से अच्छा व्यवसाय शुरू किया है। जिससे बहुत से नौकरियाँ पैदा हुई हैं और देश का विकास हुआ है।”

रॉयल मिंट एडवाईज़री कमिटी विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र संस्था है। जो चांसलर को सिक्कों के आकार और संरचना का सुझाव देती है। ऋषि सूनक ने इस संस्था के प्रमुख को लिखे पत्र में भी कुछ अहम बातें लिखी।

ऋषि सूनक ने लिखा, “मैं यह पत्र रॉयल एडवाईज़री कमिटी की पीठ के मुखिया लार्ड वॉलडेग्रेव को लिख रहा हूँ। इसे वह एशियाई, अश्वेत और जातीय अल्पसंख्यकों का देश के लिए किया गया योगदान समझें। उनका योगदान सिर्फ इतिहास तक सीमित नहीं है बल्कि उन्होंने ब्रिटेन के वर्तमान और भविष्य के लिए भी योगदान दिया है।”   

गहलोत की आरक्षण राजनीति: राजस्थान में अब न्यायिक सेवा में गुर्जर समेत 5 जातियों को 5% रिजर्वेशन

राजस्थान में जारी सियासी खींचतान के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़ा दाँव खेला है। सरकार ने राज्य की न्यायिक सेवा नियमावली में संशोधन किया है। जिसके बाद राज्य के गुर्जरों सहित अति पिछड़ा वर्ग को 5 फ़ीसदी तक आरक्षण मिलने वाला है। इस फैसले को लेकर मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। 

राजस्थान सरकार की तरफ से जारी किए गए आधिकारिक बयान में इसकी जानकारी दी गई। बयान के मुताबिक़ राजस्थान न्यायिक सेवा नियम, 2010 में संशोधन किया गया है। जिसके बाद 1 फ़ीसदी आरक्षण के स्थान पर 5 फ़ीसदी तक आरक्षण मिलेगा। अति पिछड़े वर्ग से आने वाले लोग काफी समय से न्यायिक सेवा नियमावली में संशोधन की माँग कर रहे थे। अब उन्हें इसका लाभ मिलना शुरू होगा। 

इस संशोधन के तहत कई जाति वर्ग के लोगों को लाभ मिलेगा। इसमें गुर्जर, रायका-रैबारी, गडिया-लुआर, बंजारा और गडरिया जैसी कई जातियाँ शामिल हैं। इस फैसले के बाद अति पिछड़ा वर्ग के लोगों को अधिक संख्या में न्यायिक सेवा का हिस्सा बनने का मौक़ा मिलेगा। राज्य की न्यायिक सेवा में महिलाओं की बात करें तो उन्हें 50 फ़ीसदी आरक्षण मिल रहा है। इस फैसले के बाद प्रदेश की न्यायिक सेवा में आरक्षण बढ़ कर कुल 55 फ़ीसदी तक हो चुका है। 

गहलोत सरकार के इस फैसले को राजनीतिक दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है। सचिन पायलट की बगावत के बाद गहलोत सरकार के प्रति राजस्थान के गुर्जर समाज की नाराज़गी बढ़ी थी। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि उनकी नाराज़गी कम करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यह कदम उठाया है। इसके राजस्थान में जारी राजनीतिक उठा पटक के बीच गुर्जर समाज के लोगों ने अशोक गहलोत के खिलाफ़ प्रदर्शन भी किया था । राज्य के कई क्षेत्रों में उनके पुतले भी जलाए थे। 

साल 2007 से साल 2009 के बीच हुए गुर्जर आरक्षण आन्दोलन में लगभग 68 से 70 लोगों की मृत्यु हुई थी। इस हिंसक विरोध प्रदर्शन में सरकार संपत्ति का भी काफी नुकसान हुआ था। जिसके बाद वसुंधरा राजे की सरकार ने गुर्जरों को आरक्षण दिलवाया था। सरकार के उस कदम पर उच्च न्यायालय ने साल 2011 में रोक लगा दी थी। जिसके चलते एक बार फिर राज्य में आन्दोलन शुरू हुआ। फिर अशोक गहलोत ने साल 2019 में विधानसभा के भीतर विधेयक पारित कराया। इसके पारित होने के बाद गुर्जर समाज सहित 5 अति पिछड़े वर्ग को आरक्षण दिया गया।   

इसके अलावा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने टिड्डियों के मामले में भी केंद्र सरकार से माँग उठाई है। उनके मुताबिक़, “सालों बाद इतने बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। टिड्डियों को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर देना चाहिए। कुछ ज़िलों को छोड़ कर बाकी हर जगह के हालात बदतर हैं। यह साल भयावह है और इसके सम्बन्ध में मैंने प्रधानमंत्री मोदी को भी पत्र लिखा है। मैंने उनसे यह माँग की है कि टिड्डियों को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया जाए।”

केरल सोना तस्करी मामले PFI वाला मो. अली गिरफ्तार, प्रोफेसर के हाथ काटने में भी रहा है वो आरोपित

केरल के सोना तस्करी मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने बड़ा कदम उठाया है। काफी दिनों से चल रहे इस मामले में कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा 6 अलग-अलग स्थानों पर खोजबीन जारी है।

गिरफ्तार किए गए 6 लोगों में एक मोहम्मद अली नाम का व्यक्ति भी है। नाम से आम आरोपितों की तरह यह भी एक आरोपित है। लेकिन थोड़ा सर्च करने पर आप पाएँगे कि यह वही मोहम्मद अली है, जो 2010 में केरल में हाथ काटने के प्रकरण का भी आरोपित रह चुका है।

तब अली पर आरोप लगा था कि उसने प्रोफेसर टीजे जोसेफ का दाहिना हाथ काट डाला था। क्यों? क्योंकि प्रोफेसर ने पैगंबर पर सवाल उठाए थे। हालाँकि साल 2015 में वह इस मामले से बरी हो गया था। इतना ही नहीं मोहम्मद अली पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया का सदस्य भी है।

सोना तस्करी मामले से संबंधित गिरफ्तारी में तिरुवनंतपुरम स्थित यूएई के वाणिज्य दूतावास में मौजूद राजनयिक भी मददगार साबित हुए। इस मामले में अभी तक एनआईए ने कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया है।

जानकारी के मुताबिक़ एनआईए ने 2 अगस्त के दिन कुल 6 अलग-अलग जगहों पर छापे मारी अभियान चलाया। इसमें एर्नाकुलम में जलाल एएम तथा राबिन्स हमीद के घर और मालापुरम में रमीज़ केटी, मोहम्मद शफी, सईद अलवी और अब्दु पीटी के घर शामिल हैं।

एनआईए के प्रवक्ता ने भी इस मामले पर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि 30 जुलाई के दिन रमीज़ केटी के अलावा दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें एर्नाकुलम का जलाल एएम और मालापुरम का सईद अल्वी शामिल है। 

इसके अलावा NIA ने बताया कि 31 जुलाई के दिन भी इस मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। जिसमें मालापुरम के मोहम्मद शफी पी और अब्दुल पीटी शामिल हैं। प्रवक्ता ने यह भी बताया कि इसके बाद 1 अगस्त के दिन दो और आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। यह दोनों भी एर्नाकुलम के ही रहने वाले मोहम्मद अली इब्राहिम और मोहम्मद अली शामिल हैं। 

अभी तक की जाँच के दौरान एनआईए को यह पता चला कि यह सभी षड्यंत्र में शामिल थे। यह तिरुवनंतपुरम में रमीज केटी से तस्करी किया गया सोना लेने गए थे। इसके बाद उनकी योजना इस सोने को जलाल एएम की मदद से बाँटने की थी।

एनआईए के प्रवक्ता ने यह भी बताया कि तलाशी के दौरान उन्हें दो हार्ड डिस्क, एक टैबलेट कंप्यूटर, 8 मोबाइल फोन, 6 सिम कार्ड, 1 डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर और कुल 5 डीवीडी बरामद हुई। इतनी चीज़ों के अतिरिक्त बैंक पासबुक, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, पहचान पत्र समेत कई अहम दस्तावेज़ भी बरामद किए गए। मामले में अभी तक मुख्य आरोपति सरिता पीएस, स्वप्ना सुरेश और संदीप नायर समेत कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।     

ख़बरों की मानें तो खाड़ी देशों से केरल में सोना की तस्करी किए जाने के मामले में भले सबकी नज़र आरोपित स्वप्ना सुरेश और संदीप नायर पर है। लेकिन NIA इस मामले में पाँचवे आरोपित रमीज़ को पूरे प्रकरण की अहम कड़ी मान कर चल रहा है। ये मामला डिप्लोमेटिक बैगेज में सोना तस्करी का है। 

इसके पहले एनआईए ने प्रमुख संदिग्ध स्वप्‍ना सुरेश सहित चार लोगों के खिलाफ एक FIR दर्ज की थी। जाँच एजेंसी की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया था कि केरल सोना तस्करी मामले में गैर कानूनी गतिविधि (निवारक) अधिनियम, 1967 की धारा 16, 17 और 18 के तहत चार आरोपितों– पीएस सरित, स्वप्‍ना प्रभा सुरेश, फाजिल फरीद और संदीप नायर के खिलाफ त्रिवेंद्रम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से पाँच जुलाई को कस्टम (प्रीवेंटिव) कमिशनरेट, कोचीन द्वारा 14।82 करोड़ रुपए मूल्य के 24 कैरेट के 30 किलोग्राम सोने की बरामदगी के सिलसिले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

‘राम का अस्तित्व रामायण की वजह से’: कॉन्ग्रेस MP ने ‘राम’ को बताया काल्पनिक, पात्रा ने कहा- यही दावा करके देखिए ‘अल्लाह’ के लिए

कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके नेताओं ने कई बार भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर के करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का काम किया है। इसी क्रम में, कॉन्ग्रेस नेता केतकर ने भी आज (2 अगस्त, 2020) ज़ी न्यूज़ पर अयोध्या और राम मंदिर भूमिपूजन को लेकर हो रही एक चर्चा के दौरान ऐसी ही एक अभद्र टिप्पणी की है।

कॉन्ग्रेस एमपी कुमार केतकर ने न केवल श्री राम के ऐतिहासिक अस्तित्व को नकारा बल्कि यह भी कहा कि हिंदू देवी-देवता साहित्य की रचना है।

कुमार केतकर ने भगवान श्री राम के अस्तित्व पर किया सवाल

लगभग 19 मिनट की चर्चा में, एंकर ने केतकर से पूछा कि क्या वह या कॉन्ग्रेस पार्टी अब भगवान राम के अस्तित्व में विश्वास करते हैं। अपनी अज्ञानता का प्रदर्शन करते हुए कॉन्ग्रेस नेता ने जवाब दिया, “रामायण की वजह से राम का अस्तित्व है। हालाँकि, इस निष्कर्ष पर पहुँचना अभी बाकी है कि राम इतिहास या साहित्य की रचना है या नहीं। वाल्मीकि ने एक महान महाकाव्य लिखा था और इसका प्रभाव भारत और विदेशों दोनों में महसूस किया गया था। लेकिन, मुझे नहीं पता कि वह इतिहास में मौजूद है या नहीं।”

भगवान राम के अस्तित्व पर केतकर के विचित्र रुख के बारे में सवाल किए जाने पर, उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली द्वारा भगवान राम के बारे में पिछले महीने किए गए निराधार दावों के बारे में बताते हुए अपनी टिप्पणियों को सही ठहराने की कोशिश की।

बता दें, भानुभक्त की जयंती के उपलक्ष्य में हुए एक कार्यक्रम के दौरान, नेपाल के प्रधानमंत्री ने दावा किया था कि भारत ने अपने यहाँ एक ‘नकली अयोध्या’ बनाई है। नेपाली पीएम के अनुसार, अयोध्या नेपाल में बीरगंज का एक गाँव है। इसी फर्जी दावे पर निष्कर्ष निकालते हुए केतकर ने चर्चा के दौरान कहा, “कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है (श्री राम के अस्तित्व का) और इसीलिए नेपाल के पीएम ने भी दावा किया कि अयोध्या नेपाल में स्थित है।”

संबित पात्रा ने केतकर को अल्लाह के खिलाफ बोलने के लिए ललकारा

वहीं हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने पर भाजपा नेता सांबित पात्रा ने कॉन्ग्रेसी नेता की जमकर आलोचना की। उन्होंने केतकर के विवादित बयान का मुँहतोड़ जवाब देते हुए कहा, “कुछ इसी अंदाज में क्या आप अल्लाह के अस्तित्व को नकारने का साहस कर सकते है। ये कॉन्ग्रेस का आदमी क्या कहना चाहता है? वह पूछ रहा है कि भगवान राम इतिहास या साहित्य की रचना हैं?”

संबित पात्रा ने कॉन्ग्रेस नेता कुमार केतकर को धर्मनिरपेक्षता और फ्री स्पीच का आईना दिखाते हुए कहा, “ये हमें राम के अस्तित्व के सबूत दिखाने को कह रहे है। अगर आपने अल्लाह के बारे में एक भी बात कही होती, तो अब तक आपका सर कट चुका होता। आभारी रहें कि आप एक हिंदू हैं, वरना आपके पास ऐसा कुछ कहने का दुस्साहस नहीं होता।”

कॉन्ग्रेस का हमेशा राम के अस्तित्व को नकारते हुए इसका विरोध करना

गौरतलब है कि 2007 में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने एक हलफनामा दायर किया, जिसमें कहा गया था, “वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस प्राचीन भारतीय साहित्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसमें दर्शाए गए पात्रों और घटनाओं के अस्तित्व को साबित करने के लिए इसे ऐतिहासिक सबूत नहीं माना जा सकता है।”

बता दें कि यह हलफनामा यूपीए सरकार द्वारा सेतुसमुद्रम परियोजना को रद्द करने की माँग को लेकर दायर किया गया था। इसका परियोजना का मकसद राम सेतु को नुकसान पहुँचाना था।

वहीं कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने अयोध्या में विवादित स्थल पर एक भव्य राम मंदिर के निर्माण का विरोध करते हुए सुन्नी वक्फ बोर्ड के लिए राम जन्मभूमि का मुकदमा लड़ा था।

उन्होंने इस मुकदमे में कई दावपेंच खेले और शीर्ष अदालत से 2019 के चुनावों तक राम जन्मभूमि मामले में निर्णय में देरी करने के लिए कहा। एक अन्य प्रख्यात कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने भी पहले दावा किया था कि कोई भी ‘अच्छा हिंदू’ बाबरी स्थल पर राम मंदिर नहीं चाहेगा। थरूर ने भी कहा था कि दिल में राम मंदिर होना चाहिए।

पाकिस्तानी न्यूज चैनल DAWN के स्क्रीन पर लहराया तिरंगा, चैनल ने किया हैक होने का दावा

पाकिस्तान के प्रमुख टीवी समाचार चैनल डॉन पर अचानक तिरंगा लहराने से लोग अचंभित हो गए। बताया जा रहा है कि इस न्यूज चैनल पर हैकर्स ने हमला किया था। इस घटना का फोटो और वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।

रविवार दोपहर चैनल पर फहराया तिरंगा

रविवार दोपहर 3.30 के आस-पास पाकिस्तान के डॉन न्यूज चैनल पर विज्ञापन का प्रसारण हो रहा था। उसी दौरान टेलिविजन की स्क्रीन पर अचानक तिरंगा लहराने लगा। जिस पर हैप्पी इंडिपेंडेंस डे का मैसेज भी लिखा हुआ था।

डॉन न्यूज ने यह कहा

डॉन न्यूज ने बयान जारी कर कहा कि रविवार (अगस्त 2, 2020) को डॉन न्यूज हमेशा की तरह प्रसारित हो रहा था। अचानक भारतीय ध्वज और हैप्पी इंडिपेंडेंस डे टेक्स्ट स्क्रीन पर चल रहे विज्ञापन पर दिखाई दिया जो कुछ समय के लिए रहा और फिर गायब हो गया। हम इसकी जाँच कर रहे हैं।

डॉन ने दिया जाँच का आदेश

हालाँकि, अभी तक यह नहीं बताया गया है कि पाकिस्तानी चैनल पर यह वीडियो कितने समय तक प्रसारित होता रहा। इस बीच डॉन न्यूज ने उर्दू में ट्वीट कर रहा है कि डॉन प्रशासन ने मामले की तत्काल जाँच के आदेश दिए हैं।

डॉन ने लिखा कि डॉन न्यूज अपनी स्क्रीन पर भारतीय झंडे और हैप्पी इंडिपेंडेंस डे टेक्स्ट के अचानक प्रसारण की जाँच कर रहा है। एजेंसी इस मामले की जाँच कर रही है और अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचते ही अपने दर्शकों को सूचित करेगी।

गौरतलब है कि भारतीय हैकर्स पहले भी ऐसे प्रयास कर चुके हैं, जिसमें उन्हें बहुत सफलता मिली है। 2016 में, भारत के एक हैकर ने बाल्टिस्तान के कृषि विभाग की वेबसाइट को हैक किया था और पाकिस्तानी हैकरों को चेतावनी दी थी, “अगर हम आप पर हमला शुरू करते हैं, तो यह सर्जिकल स्ट्राइक से ज्यादा खतरनाक होगा।” कुछ भारतीय हैकरों ने अतीत में पाकिस्तान से संवेदनशील जानकारी निकालने का भी दावा किया है।

Fact Check: डॉ. आयशा के नाम से खूब शेयर हुई यह फेक तस्वीर, औंधे मुँह गिरा वामपंथियों का मुस्लिम विक्टिम प्रपंच

कोरोना वायरस के बढ़ रहे मामलों और इससे हो रही मौतों की खबर के बीच रविवार (अगस्त 2, 2020) को एक ऐसी खबर और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई जिसे देखकर लोग भावुक हो गए। वायरल हुई खबर में बताया कि ये युवा डॉक्‍टर आयशा की आखिरी फोटो है। इतना ही नहीं उनके व्यवहार को लेकर बताया जाने लगा कि वह बेहद जिंदादिल थीं और हाल ही में डॉक्‍टर बनी थीं।

“Dr Aisha” getting hooked on to the ventilator. Image Source: Twitter

खबरों में बताया गया कि उनको कोरोना वायरस संक्रमण ने जकड़ लिया। वह अस्‍पताल में भर्ती हुईं। इलाज चला, लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के चलते ईद के दिन उनकी मौत हो गई। ये खबर ट्विटर पर खूब शेयर हुई, लोग ट्वीट के जरिए डॉ आयशा को श्रद्धांजलि देने लगे। ट्विटर पर डॉ आयशा ट्रेंड करने लगा।

लेकिन अब मालूम हुआ है कि वायरल हो रही ये खबर और तस्वीर झूठी है। एक ट्वीट में, ‘डॉ आयशा’ ने दावा किया कि वह वेंटिलेटर पर थी। हालाँकि, Google पर क्विक सर्च से पता चला कि उसने जो तस्वीर शेयर की थी, वह वास्तव में dental anaesthesia था।

यूजर्स ने यह भी खुलासा किया कि जिस व्यक्ति की तस्वीर शेयर की गई थी, वह संभवत: ‘आयशा’ नहीं थी। ‘आयशा’ ने अपने ट्विटर प्रोफाइल की जानकारी के अनुसार दक्षिण अफ्रीका में रहने का दावा किया था। अस्पताल के बेड-शीट पर लोगो ने संकेत दिया कि तस्वीर में लड़की तेलंगाना के एक अस्पताल में थी।

यह सब स्पष्ट रूप से इशारा करता है कि युवा डॉक्टर की मृत्यु की खबर लगभग निश्चित रूप से फर्जी थी। अकाउंट द्वारा साझा की गई एक और तस्वीर लगभग एक पुष्टि के रूप में कार्य करती है कि पूरी कहानी मनगढ़ंत थी।

तस्वीर, जहाँ दावा करता है कि परिवार डॉक्टर की मौत का दुःख मना रहा है, वहीं अस्पताल में डॉक्टर को उसके परिवार के सदस्यों के साथ बैठे और मुस्कुराते हुए दिखाता है।

कोरोना वायरस से पीड़ित रोगियों को मास्क, पीपीई, दस्ताने और अन्य पर्याप्त सावधानियों के बिना अपने परिवार के साथ घुलने-मिलने की अनुमति नहीं है।

साझा की गई तस्वीर में, न तो परिवार और न ही कथित डॉक्टर ने ऐसा कुछ भी पहना था, जिसे संक्रमण के खिलाफ सुरक्षा के रूप में समझा जा सकता है। किसी भी अस्पताल में ऐसे आचरण की अनुमति नहीं है जो कोरोना वायरस रोगियों का इलाज करता है। इसलिए, स्पष्ट रूप से, पूरी बात एक विस्तृत झूठ है।

अक्सर फर्जी खबर फैलाने वाले ‘पत्रकार’ भी इस मुहिम में शामिल थे। उन्होंने सच को जानने की तनिक भी कोशिश नहीं की। ट्विटर पर कई सत्यापित हैंडल थे जो ऐसी काल्पनिक कहानी को फैलाने में मदद करते हैं।

Nidhi Razdan upset over death of ‘Dr Aisha’

इनमें एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार निधि राजदान भी शामिल थीं। बाद में उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया और कहा कि यह अकाउंट फर्जी है।

Source: Twitter

पेशेवर फर्जी न्यूज पेडलर राणा अय्यूब ने डॉ आयशा की मौत पर भी शोक व्यक्त किया।

Source: News18

News18, वास्तव में, उस पर एक पूरी कहानी चलाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डॉ. आयशा हाल ही में डॉक्टर बनी थीं और बेहद खुश थीं। हालाँकि, वह वुहान कोरोनावायरस से संक्रमित हो गई और उसने ईद पर सुसाइड कर लिया। उन्होंने उसे ‘कोरोना योद्धा’ भी करार दिया।