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बकरीद पर 26 करोड़ का 5 मंजिला हज हाउस, मीडिया के सामने हनुमान चालीसा का पाठ: कॉन्ग्रेस का कारनामा

छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार ने हज हाउस बनाने का ऐलान किया है, जिसके लिए 26 करोड़ रुपए ख़र्च किए जाएँगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ईद-उल-अजहा के मौके पर अपने निवास स्थान से ही वीडियो कॉल के माध्यम से हज हाउस का शिलान्यास किया। तीन एकड़ की भूमि में हज हाउस का निर्माण किया जाएगा। ये भवन 5 मंजिला होगा और इसमें हज यात्रियों के लिए सारी सुख-सुविधाएँ मौजूद होंगी।

छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा हज हाउस का निर्णय लिए जाने की खबर कॉन्ग्रेस द्वारा खुद को रामभक्त घोषित करने की कोशिशों के बीच आई है। जहाँ मध्य प्रदेश में कमलनाथ राम मंदिर निर्माण का स्वागत करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ में भगवान राम के ननिहाल में माता कौशल्या का मंदिर बनाने के लिए 15 करोड़ की लगत से प्रोजेक्ट तैयार किया गया है।

जहाँ तक हज हाउस की बात है, इसका निर्माण मंदिरहसौद रोड एयरपोर्ट के पास नवा रायपुर अटल नगर में किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लोगों को बकरीद की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए ये दोहरी ख़ुशी का मौका है। उन्होंने ‘समाज के लोगों’ को हाजियों की परेशानी कम करने के लिए मेहनत करने का श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि लम्बे समय से इस हज हाउस की माँग चल रही थी, जो आज पूरी हुई।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस दौरान हज की जम कर तारीफ की और इसे समुदाय वालों के जीवन का अभूतपूर्व पल करार दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण इस साल की हज यात्रा पहले जैसी नहीं है, ऐसे में 2021 की हज यात्रा में केंद्र सरकार को पहले से चयनित छत्तीसगढ़ के हज यात्रियों को मौका देना चाहिए। ‘हज कमिटी ऑफ इंडिया’ से छत्तीसगढ़ को 5 करोड़ रुपए मिलने हैं, जिसके लिए उन्होंने पहल करने की बात कही।

कॉन्ग्रेस नेताओं ने कहा कि पहले लोगों को हज हाउस के लिए नागपुर जाना पड़ता था। साथ ही वहाँ की सरकार छत्तीसगढ़ से ही हज के लिए उड़ान की व्यवस्था भी करने वाली है। हज हाउस के निर्माण के बाद छत्तीसगढ़ में ही लोगों को सारी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। इसे कॉन्ग्रेस की तुष्टिकरण की नीति के रूप में भी देखा जा रहा है क्योंकि भूपेश बघेल इससे पहले भी मजहबी वोट्स के लिए ये जुगत करते रहे हैं।

कारसेवकों का नरसंहार कब, कितने मरे, किसने मरवाया? देश के मीडिया संस्थानों के लेख से सब कुछ गायब

देश की सबसे बड़ी अदालत का आदेश आने के बाद आगामी 5 अगस्त की तारीख को राम मंदिर का भूमि पूजन होना है। साल 2019 में 500 सालों तक चले इस संघर्ष का अंत हो गया। अब मंदिर बनने जा रहा है लेकिन मंदिर निर्माण के पीछे हज़ारों लोगों का बलिदान है। न जाने कितनी पीढ़ियाँ इस दिन के लिए ख़त्म हो गईं। लेकिन बात केवल इतनी नहीं है। इस मामले से जुड़ी ऐसी न जाने कितनी घटनाएँ हैं, जिनमें हिंदुओं पर हुए अत्याचार को छुपाया और दबाया गया। 

इस तरह की एक घटना साल 1990 में हुई थी, जब मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे। अयोध्या में कारसेवक इकट्ठा हुए थे, तभी समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मौके पर ओपन फ़ायर का आदेश दे दिया। रिपब्लिक टीवी द्वारा किए गए पड़ताल में यह बात सामने आई थी कि मुलायम सिंह की सरकार ने असल मौतों का आँकड़ा छिपाया था। सरकार के मुताबिक़ वहाँ पर 16 लोगों की मौत हुई थी जबकि असल में संख्या काफी ज़्यादा थी। 

सरकार ने मरने वालों की असल संख्या छिपाने के लिए हिंदुओं की लाशों का अंतिम संस्कार करने की जगह उन्हें दफ़न करवा दिया था। साल 2016 में मुलायम सिंह ने खुद इस बात को स्वीकार किया था कि उन्हें कारसेवकों पर गोली चलवाने का पछतावा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें मुस्लिम समुदाय के लोगों की भावनाओं का ध्यान रखना था। इस नरसंहार के दौरान ही कोठारी बंधुओं ने अपनी जान गँवाई थी।

मुख्य धारा मीडिया ने 2 नवंबर 1990 के दिन हिंदुओं पर हुए भयावह अत्याचार को सामने न लाने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ा। हैरानी की बात यह है कि वह अब तक इस तरह के षड्यंत्रों में शामिल हैं। तमाम मीडिया संस्थानों ने श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के बारे में ख़बरें प्रकाशित की हैं। लेकिन इस विवाद के दौरान तत्कालीन उत्तर प्रदेश द्वारा हिंदुओं पर किए गए अत्याचार का कोई ज़िक्र ही नहीं है।

वह मुग़ल शासन से लेकर अभी तक तमाम घटनाओं का उल्लेख सिलसिलेवार तरीके से करते हैं। लेकिन साल 1990 के दौरान अयोध्या में कारसेवकों पर चलाई गई गोली की घटना का कोई ज़िक्र ही नहीं करते हैं। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने अपनी रिपोर्ट में सितंबर 1990 में लाल कृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी का ज़िक्र किया है। इसके बाद सीधे 2 दिसंबर 1992 के दिन हुई विवादित ढाँचे की घटना का ज़िक्र किया है। 

साभार – बिज़नेस स्टैण्डर्ड

यानी देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान इतनी गंभीर घटना को सिरे से नज़रअंदाज़ कर रहे हैं। ठीक इसी तरह द हिंदू ने भी बिज़नेस स्टैंडर्ड जैसा रवैया ही अपनाया है। इन्होंने भी अपनी रिपोर्ट में सितंबर 1990 में हुई लाल कृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी के बारे में बताया। लेकिन कारसेवकों पर चली गोली की घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। 

साभार – द हिन्दू

ठीक इसी तरह शेखर गुप्ता के द प्रिंट ने भी किया है। उन्होंने भी मुलायम सरकार में कारसेवकों के नरसंहार की घटना का कोई उल्लेख ही नहीं किया है। इन्होंने 25 सितंबर 1990 के दौरान गुजरात के सोमनाथ में लाल कृष्ण आडवाणी की रथयात्रा के बारे में बताया। इसके बाद सीधे पर कल्याण सिंह की सरकार के उस फैसले का ज़िक्र किया, जिसमें उन्होंने राम जन्मभूमि के पास 2.77 एकड़ की ज़मीन पर अधिग्रहण किया था। 

साभार – द प्रिंट

वहीं एनडीटीवी ने इन सभी से एक कदम आगे बढ़ कर घटना के बारे में बताया। उन्होंने लिखा कि 1990 के दौरान के विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद का ढाँचा गिराया। लेकिन दूसरी तरफ कारसेवकों पर चलाई गई गोली की घटना के बारे में एक शब्द भी नहीं लिखा। बेशक यह घटना इतिहास की सबसे निर्दयी घटनाओं में एक है। लेकिन अफ़सोस मुख्य धारा मीडिया की निगाह में नहीं। 

साभार – एनडीटीवी

वहीं फर्स्टपोस्ट ने तो 1990 का पूरा घटनाक्रम ही छोड़ दिया। उन्होंने 1989 की घटनाओं पर संक्षेप में जानकारी दी। इसके बाद वह सीधे 1992 की घटना पर आ गए, कुल मिला कर उन्होंने यह दिखाने का प्रयास किया कि 1990 के दौरान कुछ हुआ ही नहीं था। 

साभार – फर्स्ट पोस्ट

जब भारतीय मीडिया संस्थानों ने कारसेवकों के साथ हुए अत्याचार के बारे में कुछ नहीं लिखा। ऐसे में विदेशी मीडिया संस्थाओं से इस बारे में आशा करना बेकार ही है कि वह इस घटना का ज़िक्र करेंगे। बीबीसी जो हमेशा से ही हिंदू विरोधी एजेंडे पर चलती रही है, उसने भी कुछ ऐसा ही किया है। 

साभार – बीबीसी

जब भी इतिहास से जुड़ी किसी घटना का ज़िक्र किया जाता है, तब इस बात का ख़ास ख़याल रखा जाता है कि उसमें छोटी से छोटी बात भी शामिल की जाए। भले घटनाक्रम निर्धारित किए गए प्रारूप से कितना ही बड़ा क्यों न हो जाए। राम जन्मभूमि आन्दोलन के बारे में भी ठीक ऐसा ही होना चाहिए था। पढ़ने वाला हर व्यक्ति यह उम्मीद करता होगा कि उसे पूरी घटना सिलसिलेवार तरीके से बताई जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

पाठकों के सामने हर घटना का उल्लेख नहीं किया गया। लगभग आधी जानकारी ही दबा दी गई। इसका एक मतलब यह भी है कि मुख्यधारा मीडिया के लिए हिंदुओं की जान का कोई मूल्य ही नहीं है। मुलायम सिंह की सरकार में हिंदुओं के साथ हुई वह घटना बेहद भयावह और निर्दयी थी। मुख्यधारा मीडिया ने इसे पूरी तरह दरकिनार कर दिया। इस मामले में मीडिया की कोशिश यही रही है कि आम लोगों के सामने कारसेवकों के साथ हुआ अत्याचार सामने न आ पाए। 

संदिग्ध महिला के खिलाफ FIR दायर करना नारीवाद के खिलाफ नहीं: सुशांत के जीजा ने थेरेपिस्ट के साथ इंटरव्यू पर लताड़ा

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के जीजा विशाल कीर्ति ने रविवार (अगस्ता 2, 2020) को YouTube पत्रकार बरखा दत्त को उनकी असंवेदनशीलता और रिपोर्टिंग में नैतिकता को दरकिनार करने को लेकर लताड़ लगाई।

कथित तौर पर सुशांत के थेरेपिस्ट सुसैन वॉकर मोफत ने विवादित पत्रकार बरखा दत्त को दिए इंटरव्यू में अभिनेता के मेडिकल रिकॉर्ड की गोपनीयता को नजरअंदाज करते हुए दावा किया कि उन्हें बाइपोलर डिसऑर्डर (bipolar disorder) था।

थेरेपिस्ट के साथ बरखा दत्त के साक्षात्कार के बाद विशाल कीर्ति ने एनडीटीवी के पूर्व न्यूज एंकर बरखा दत्त को लताड़ लगाते हुए कहा कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता फैलाने का अवसर नहीं है।

विशाल कीर्ति ने कहा कि उनका व्यक्तिगत रूप से मानना है कि शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर भी “विशेष” धब्बा नहीं होना चाहिए, मानसिक स्वास्थ्य भी जीव विज्ञान और पर्यावरण का एक परिणाम है।

कीर्ति ने यह भी कहा कि “विशेष” का स्पष्ट रूप से उल्लेख करने का उनका कारण यह है कि स्वास्थ्य के मुद्दों से धब्बा को पूरी तरह से समाप्त करना लगभग असंभव है।

विशाल कीर्ति ने कहा, “हालाँकि, आज धब्बा की एक बड़ी मात्रा है, मानसिक स्वास्थ्य की जानकारी कानून द्वारा संरक्षित है। एक मनोचिकित्सक / मनोवैज्ञानिक द्वारा मानसिक स्वास्थ्य की जानकारी का खुलासा करना न केवल अनैतिक है, बल्कि अवैध भी है (कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर जो यहाँ लागू नहीं होते हैं)।”

विशाल ने खुद को ‘नारीवादी’ बताते हुए कहा कि वो भी महिलाओं के मुद्दों की परवाह करते हैं, लेकिन रिया के खिलाफ FIR को ‘महिलाओं से घृणा करने वाला’ बताना गलत है।

कीर्ति ने लिखा, “मेरा पहला मुद्दा यह है कि महिलाओं के मुद्दों के बारे में परवाह करना एक संदिग्ध महिला के खिलाफ आपराधिक आरोप दायर करने के साथ असंगत नहीं है।”

विशाल ने सुसैन पर सवाल उठाया कि वह दो महीने से भी कम वक्त में मूल्यांकन कैसे करते हैं। उन्होंने कहा, “मानसिक बीमारी का इलाज करना एक कठिन काम है और किसी के लिए बायपोलर (I या II) बीमारी का ईलाज करना और भी कठिन है। न केवल आपको व्यक्ति को बहुत बारीकी से निरीक्षण करना है, बल्कि आपको उन्हें लंबे समय तक भी देखना होगा (लक्षणों की शुरुआत के बाद पूरी तरह ठीक करने में औसतन छह साल लगते हैं)। सुसैन बहुत आसानी से दो महीने से भी कम समय में (शायद कुछ मीटिंग में) सुशांत का इलाज का दावा करती है, जिसमें जीवन-परिवर्तन होता है।”

सुशांत सिंह राजपूत की मौत में रिया चक्रवर्ती की भूमिका पर संदेह जताते हुए, कीर्ति ने एफआईआर पर ध्यान दिलाया जिसमें कहा गया था कि कैसे सुशांत को रिया द्वारा ड्रग दिया गया था, जिसे अवैध बताया गया।

इसके अलावा, कीर्ति को संदेह है कि सुशांत सिंह राजपूत को देखभाल के बहाने मनोचिकित्सक के पास ले जाया गया। उन्होंने रिया द्वारा थेरिपिस्ट नियुक्त किए जाने के तरीके पर भी आश्चर्य व्यक्त किया, जो हर सेशन में उनके साथ होती थी। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि रिया उस मनोचिकित्सक के साथ सुशांत की बाचतीत पर नजर रखने का संकेत भी हो सकता है।

उन्होंने रिया पर यह भी आरोप लगाया कि वह उनके मानसिक स्वास्थ्य की जानकारी रखने के लिए ऐसा करती हों, ताकि बाद में इसका इस्तेमाल ब्लैकमेल करने के लिए किया जा सके या अपने संसाधनों से उन्हें आसानी से कंट्रोल किया जा सके।

गौरतलब है कि बरखा दत्त ने 1 अगस्त के दिन सुशांत सिंह राजपूत की तथाकथित थेरेपिस्ट सुसैन वॉकर मोफत के साक्षात्कार का एक वीडियो साझा किया था। जिस पर नेटिज़न्स ने गंभीर सवाल खड़े किए। वॉकर जो खुद एक मनोवैज्ञानिक, साइकोथेरेपिस्ट और हिपनोथेरेपिस्ट हैं। उन्होंने ऐसा दावा किया था कि सुशांत को बाईपोलर डिसऑर्डर था। जिसके बाद उन पर सुशांत सिंह से जुड़ी इस तरह की जानकारी साझा करने के लिए काफी सवाल उठाए गए थे। 

पैगंबर की निंदा करने पर बीच कोर्ट में मारी गोली, हत्यारे के समर्थन में सड़कों पर उतरे हजारों लोग: नया पाकिस्तान

पाकिस्तान के पेशावर शहर के एक स्थानीय अदालत में जज के सामने एक बुजुर्ग अहमदिया की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद हजारों कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने हत्यारे के साथ एकजुटता व्यक्त की और उसका समर्थन करने के लिए सड़कों पर उतर आए।

मृत ताहिर अहमद नसीम एक अमेरिकी नागरिक थे। उन पर 2018 से पैगंबर मुहम्मद के अपमान के आरोप में ईशनिंदा कानून के तहत मुकदमा चल रहा था। इस घटना के बाद, पुलिस ने हत्यारे खालिद खान को गिरफ्तार कर लिया।

कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच सोशल डिस्टेंसिंग के दिशा-निर्देशों की धज्जियाँ उड़ाते हुए हजारों पाकिस्तानी सड़क पर उतर आए। ये सभी ईशनिंदा करने वालों के लिए सिर्फ मौत की सजा में विश्वास रखते हैं।

सभी कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने अमेरिकी नागरिक अहमद के हत्यारे के सपोर्ट में हाथों में बैनर लेकर एक जुलूस निकाला। इसके साथ ही इन्होंने “अल्लाह हू अकबर” और “नारा-ए-तकबीर” के नारे लगाए और हत्यारे को सलाम किया।

इससे पहले सोशल मीडिया पर हत्यारे को हीरो बताते हुए खूब प्रशंसा की गई थी। लोगों ने ईशनिंदा करने वाले की हत्या करने पर उसे “लॉयन ऑफ इस्लाम” के रूप में सम्मानित भी किया था। सोशल मीडिया पर लोगों ने दावा किया उसने ऐसा करके इस्लाम को बचाया है।

पाकिस्तानी खालिद खान द्वारा किए गए इस जघन्य अपराध को बहादुरी बताते हुए उसे सही ठहरा रहे हैं। वहीं भरी अदालत के अंदर एक निहत्थे बुजुर्ग व्यक्ति को मारने पर उसे हीरो समझा जा रहा है। कट्टरपंथी मुस्लिम उसकी जयजयकार कर रहे हैं।

इस पूरी घटना के गवाह एक वकील ने बताया कि मृतक के खिलाफ ईशनिंदा कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था। उसी सिलसिले में आरोपित को पेशावर सेंट्रल जेल से कोर्ट लाया गया था।

वकील ने कहा, “मामले की सुनवाई के दौरान, शिकायतकर्ता ने कहा कि आरोपी एक अहमदी था और उसने उसे कलिमा-ए-तय्यबा सुनाने के लिए कहा।” ताहिर अहमद नसीम मुस्लिम “पैगंबर मुहम्मद” का अपमान करने के लिए जाँच के दायरे में थे। अहमद 2018 से जेल में था।

कथित तौर पर, अदालत प्रांतीय विधानसभा भवन, पेशावर उच्च न्यायालय, मुख्यमंत्री सचिवालय और गवर्नर हाउस के बगल में कैंटोनमन्‍ट क्षेत्र में एक उच्च सुरक्षा क्षेत्र में स्थित है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि सशस्त्र हमलावर इतनी सिक्योरिटी होने के बावजूद अदालत में कैसे प्रवेश कर गया।

‘राम-राम नहीं, जय भीम बोलो’: दरोगा रमेश राम ने माँ का श्राद्ध कर रहे परिजनों को जम कर पीटा, CM योगी ने लिया संज्ञान

गाजीपुर के नगसर हॉल्ट थानाध्यक्ष द्वारा किए गए कृत्य का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। नूरपुर की इस घटना के बाद थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर कर दिया गया है। बता दें कि थानाध्यक्ष रमेश कुमार राम ने एक भारतीय सेना के जवान सहित 8 लोगों की क्रूरतापूर्वक सिर्फ इसीलिए पिटाई कर दी क्योंकि क्योंकि उसने अपनी माँ का श्राद्ध किया था। मुख्यमंत्री ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

जिलाधिकारी ओमप्रकाश आर्य ने नूरपुर पहुँच कर पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने नगसर हॉल्ट थाने के पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ की। उन्होंने इस मामले में जाँच कर के तुरंत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय को इस घटना को लेकर अवगत कराया। जिले के प्रभारी मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल ने भी नूरपुर पहुँच कर स्थिति का जायजा लिया। पीड़ित का नाम झनकू पांडेय उर्फ़ राजन है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उक्त थाना प्रभारी रमेश कुमार राम ने पीड़ित को थाने में बंद कर के कई घंटों तक पीटा और जब दर्द के मारे उनके मुँह से राम-राम निकलने लगा तो दरोगा ने ‘जय भीम’ कहने को कहा। जातिवादी टिप्पणी करते हुए उसने कहा कि वो ब्राह्मणों और ठाकुरों को सबक सिखाने के लिए ही पुलिस में भर्ती हुआ है। पीड़ित की चमड़ी तक उधेड़ दी गई। दरोगा ने परिवार के 9 लोगों को जेल भी भेज दिया।

सोशल मीडिया पर पीड़ितों की पिटाई के बाद की तस्वीरें वायरल हो गईं, जिसके बाद लोगों ने इस घटना पर आक्रोश जताया। पीड़ितों के कपड़े उतार कर पिटाई की गई थी, जिससे उनके शरीर पर लाल-लाल धब्बे बन गए थे। पीड़ितों में सुशिल पांडेय भी शामिल हैं, जो सेना में हैं। ये मामला शुरू हुआ माया देवी नामक महिला की मृत्यु के बाद जो पीड़ितों की बड़ी माता थीं। श्राद्ध में कई परिजन भी पहुँचे थे।

परिजन जब खाने-पीने की व्यवस्था कर रहे थे, तभी दरोगा रमेश कुमार राम ने पुलिसकर्मियों के साथ सादी वर्दी में पहुँच कर माँ की गाली दी और आरोप लगाया कि उनलोगों ने झनकू पांडेय को घर में छिपा रखा है। जातिवादी टिप्पणी करते हुए थानाध्यक्ष ने अपने पुलिसकर्मियों को पीड़ितों की पिटाई करने का निर्देश दिया। थानाध्यक्ष ने कहा कि इनकी हड्डियाँ तोड़ दो। लाठी और बन्दूक के पिछले हिस्से से मार खाते हुए बचने के लिए लोग घरों में घुस गए।

इसके बाद रमेश कुमार राम और उसके मातहत पुलिसकर्मियों ने घर में घुस कर भी लोगों की पिटाई की और सामान को तोड़ना शुरू कर दिया। उनके बचाव में आए ग्रामीणों को भी गाड़ी में ठूँस कर थाने ले जाया गया। पीड़ितों के मुँह पर मुक्के भी मारे गए। एफआईआर में परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस की इस हरकत के कारण श्राद्ध तक नहीं हो पाया। वहीं पुलिस ने पीड़ित परिवार पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है।

थाना का कहना है कि पीड़ित परिजनों ने मुजरिम को घर में छिपा रखा था और तहकीकात करने गई पुलिस के साथ उन्होंने हाथापाई की। वहीं 3 पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात भी कही गई है। पुलिस के अनुसार, उसे सूचना मिली थी कि झनकू पांडेय हत्या की नीयत से रिवाल्वर लेकर गाँव में घूम रहा है। मौके से कारतूस बरामद होने की बात भी कही गई है। लेकिन, थाने में हुई बर्बरतापूर्वक पिटाई से जनाक्रोश अभी भी है।

अपहरण, हत्या और… 30 लाख का ‘खेल’: संजीत मर्डर केस की अब होगी CBI जाँच, योगी सरकार की सिफारिश

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने रविवार (2 अगस्त, 2020) को लैब टेक्निशियन संजीत यादव के अपहरण और हत्या के मामले की जाँच अब सीबीआई से करवाने का फैसला लिया है। संजीत कानपुर के बर्रा इलाके के रहने वाले थे। कुछ दिन पहले बदमाशों ने उनका अपहरण करने के बाद हत्या कर दी थी।

राज्य सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने बताया कि सरकार ने संजीत यादव के परिवार वालों के आग्रह पर मामले की जाँच सीबीआई से कराने की सिफारिश करने का फैसला किया है।

पुलिस के मुताबिक इस हत्याकांड में पाँच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जिनमें एक महिला (नीलू सिंह) और संजीत यादव के दो दोस्त ज्ञानेंद्र यादव, कुल्दीप गोस्वामी भी शामिल हैं। पुलिस इन आरोपितों का पूछताछ के लिए नार्को टेस्ट कराने की तैयारी कर रही है।

न्याय की माँग करते हुए संजीत यादव की बहन रुचि यादव ने अतिरिक्त महानिदेशक (ADG- पुलिस मुख्यालय) बीपी जोगदंड से मुलाकात की थी। यहाँ उन्होंने इस पूरे मामले की सीबीआई जाँच की माँग करते हुए संदेह जताया था कि हत्या के पीछे और भी लोग शामिल हो सकते हैं।

वहीं इस मामले को लेकर संजीत यादव के परिवार के सदस्य ने मीडिया के सामने यह दावा किया था कि उन्होंने पुलिस की मौजूदगी में एक फ्लाईओवर से रेलवे ट्रैक पर 30 लाख रुपए से भरा बैग फेंका था। इसके अलावा अपहरणकर्ताओं ने जो भी माँग रखी थी, वह भी पूरा किया था लेकिन अफसोस इतने के बाद भी संजीत को जिंदा नहीं छोड़ा गया।

मीडिया को दिए इस बयान को सर्कल ऑफिसर विकास पांडे ने गलत बताते हुए कहा था कि पुलिस की मौजूदगी में फिरौती की रकम नहीं दी गई थी। परिवार के सदस्य द्वारा लगाया गया यह आरोप गलत है।

वहीं इस मामले में पुलिस विभाग ने एसपी अपर्णा, एसओ रंजीत राय और दूसरे पुलिसकर्मियों को उनकी संदिग्ध भूमिका के लिए सस्पेंड कर दिया है।

गौरतलब है कि कानपुर के बर्रा में जून महीने में एक लैब टेक्नीशियन का काम करने वाले युवक संजीत का अपहरण हो गया था। यह मामला तब गरमाया, जब अपहृत के परिजनों ने पुलिस पर यह आरोप लगाया कि पुलिस के कहने पर उन्होंने 30 लाख रुपए की फिरौती अपराधियों को दे दी है। लेकिन फिर भी अपहृत युवक का कुछ पता नहीं चल सका है। ऐसे कई सवाल इस हत्याकांड के बाद उठ रहे हैं, जिनके जवाब पुलिस के पास भी नहीं हैं।

कुछ गलत नहीं किया तो चूहे-बिल्ली का खेल बंद करें रिया: बिहार पुलिस को मुंबई पुलिस ने बताया- अनजाने में फाइल डिलीट हो गई

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े मामले में बिहार पुलिस ने एक बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने बताया है कि सुशांत सिंह राजपूत जिन सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे उनमें से कोई भी सिम सुशांत के नाम से नहीं थी। इनमें से एक सिम उनके दोस्त सिद्धार्थ पिथानी के नाम पर थी।

बता दें कि सिद्धार्थ पिथानी और सुशांत एक साल फ्लैटमेट रहे थे। सिद्धार्थ ने रिपब्लिक टीवी से बातचीत के दौरान सुशांत को दवाई देने की बात कबूली थी। हालॉंकि, रिया चकवर्ती से जुड़े सवाल पूछे जाने पर सिद्धार्थ बीच में ही रिपब्लिक टीवी का इंटरव्यू छोड़कर चले गए थे।

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने बताया कि मुंबई पुलिस ने बिहार पुलिस के साथ सुशांत सिंह राजपूत की ऑटोप्सी रिपोर्ट शेयर करने से इनकार कर दिया है। मुम्बई पुलिस से अभी कई जरूरी कागजात और सीसीटीवी फुटेज की माँग की गई है लेकिन ये सब उपलब्ध नहीं कराया गया है।

सुशांत सिंह राजपूत केस की जाँच में मुंबई आई बिहार पुलिस ने अपना दायरा बढ़ा दिया है। बिहार पुलिस की टीम सुशांत की पूर्व-मैनेजर दिशा सालियान की मौत से जुड़े दस्तावेजों को एकत्रित करने के लिए शन‍िवार (अगस्त 1, 2020) शाम को मालवणी पुलिस थाने पहुँची।

शन‍िवार शाम बिहार पुलिस की टीम मालवणी पुलिस थाने में दिशा साल‍ियन की अप्राकृतिक मौत के बारे में पूछताछ करने गई। मुंबई पुलिस के जाँच अधिकारी ने सभी विवरण साझा करने की बात कही, लेकिन उसी समय एक कॉल मिलने के बाद चीजें बदल गईं। उन्होंने बिहार से आई टीम को बताया कि दिशा के विवरण वाला फोल्डर “अनजाने में डिलीट हो गया है।” और इसे ढूँढ नहीं सकते।

जब बिहार पुलिस ने कहा कि वे फाइल को दोबारा प्राप्त करने में उनकी मदद कर सकते हैं, तो उन्होंने अपना लैपटॉप उन्हें देने से इनकार कर दिया। बिहार के अधिकारियों को मुंबई पुलिस ने पेड लीव का आनंद लेने और मामले की जाँच नहीं करने के लिए कहा, क्योंकि राजनेता आपस में लड़ रहे हैं। आज बिहार पुलिस दिशा के परिवार के सदस्यों के बयान लेने गई थी लेकिन परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं मिला।

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने यह भी खुलासा किया कि रिया चक्रवर्ती का कोई अता-पता नहीं है। गुप्तेश्वर पांडेय शनिवार को सिलसिलेवार तरीके से मीडिया से मुखातिब हुए और इस मामले से जुड़ी कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। गुप्तेश्वर पांडेय ने एक चैनल से कहा कि अगर रिया खुद को दोषी नहीं मानती हैं तो फिर वह पुलिस के साथ चूहे-बिल्ली का खेल बंद करें और सामने आकर अपना बयान दर्ज कराएँ।

पांडेय ने कहा, “रिया भाग क्यों रही हैं? अगर वह दोषी नहीं हैं तो सामने आएँ और जाँच में पुलिस की मदद करें। हम किसी निर्दोष को सजा देने के हिमायती नहीं हैं। हम चाहेंगे कि वह सामने आकर अपना पक्ष रखें और अगर वह खुद को निर्दोष साबित करने में सफल रहीं तो हम उन्हें हाथ भी नहीं लगाएँगे। लेकिन अगर वह हमसे भागेंगी तो मैं इतना जरूर कहूँगा कि हम एक न एक दिन उन तक जरूर पहुचेंगे और तब दूध का दूध और पानी का पानी हो ही जाएगा।”

सुशांत सिंह राजपूत केस मामले में पटना के सिटी एसपी विनय तिवारी मुंबई के लिए रवाना हो गए हैं। सिटी एसपी वहाँ जाँच के लिए पहले से पहुँची चार सदस्यीय पटना एसआईटी का नेतृत्व कर मामले की मॉनिटरिंग करेंगे। मामले की पुष्टि एसएसपी रेंज ने की है। बता दें कि बिहार की टीम भले ही मुंबई में जाँच कर रही है, लेकिन इसकी पल-पल की मॉनीटरिंग पटना स्थित कंट्रोल रूम से हो रही है। बिहार के डीजीपी गुप्‍तेश्‍श्‍वर पांडेय ने कहा है कि पुलिस जिम्मेदारों के चेहरे से नकाब जरूर उतारेगी।

बकरीद पर कुर्बानी तो ठीक लेकिन उसके अवशेष फेंकने पर पाबंदी: सिंध हवाई अड्डे के लिए आया ऑर्डर

पाकिस्तान के सिंध में जानवरों से संबंधित एक अहम अधिसूचना जारी की गई है। राज्य के हवाई अड्डे के नज़दीक जानवरों के अवशेष फेंकने या डंप करने पर पाबंदी लगा दी गई है। उस इलाके में जानवरों के अवशेष पड़े रहने की वजह से कई तरह के पक्षी मंडराते रहते हैं। जिसके चलते हवाई जहाज़ों के दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना बनती है। 

इस बात को ध्यान में रखते हुए हवाई अड्डे के आस-पास के इलाकों में जानवरों के अवशेष डंप करने को प्रतिबंधित कर दिया गया है। राज्य सरकार ने उस पूरे इलाके में धारा 144 लगा दी है, जहाँ तक हवाई अड्डे की सीमा है। यह धारा पूरे एक महीने तक लागू रहने वाली है।

यह कदम ठीक उस घटना के बाद उठाया गया है, जिसमें पाकिस्तान का एक हवाई जहाज बुरी तरह दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। जिसके बाद पूरे देश में यह माँग उठाई गई थी कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ।

22 मई के दिन पाकिस्तान इंटरनेशनल एयर-लाइन का हवाई जहाज PK-8303 दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। यह घटना कराची स्थित जिन्नाह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नज़दीक भीड़ वाले इलाके में हुई थी। इस दुर्घटना में कुल 97 लोगों की जान गई थी।

इसके पहले सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। उनका कहना था कि सरकार को ऐसी कोई जगह तय कर देनी चाहिए, जहाँ जानवरों को काटा और मारा जाए। उन्होंने कहा था “अगर जानवर इस तरह सड़कों पर कहीं भी मारे जाएँगे तो इससे बीमारी भी फ़ैल सकती है।” 

कुल मिला कर उनका सरकार से यह कहना था कि जानवरों की डम्पिंग के लिए कोई जगह तय कर दी जाए। जिससे तमाम तरह की दिक्कतें एक बार में ही ख़त्म हो जाए। और आने वाले समय में कोई बड़ी दुर्घटना न हो या किसी तरह की बीमारी न फैले।

इसके पहले शाह ने प्रशासनिक अधिकारियों को एक और आदेश दिया था। जिसके मुताबिक़ बाज़ार लगाने की जगहें तय की जाएँ, ख़ासकर शहरी इलाकों से बाहर। जिससे कोरोना वायरस फैलने का ख़तरा न बढ़े। 

‘इससे अल्लाह खुश… तो शैतान किससे खुश होगा?’ – गाय को क्रेन से लटकाया, काफी ऊँचाई से जमीन पर गिरी… फिर काटा

एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। इसमें एक गाय की हत्या करने के लिए उसे क्रेन से गिराया (जानबूझकर या स्लिप होकर गिरा – यह स्पष्ट नहीं है लेकिन चाकू लाओ-चाकू लाओ से यह स्पष्ट है कि इसकी कुर्बानी दी जानी थी) जा रहा है। गाय को क्रेन से काफी ऊपर उठा कर नीचे गिराने के इस वीडियो को देख कर कई लोगों का दिल दहल गया। बता दें कि पाकिस्तान में गोहत्या आम बात है और वहाँ बकरीद के मौकों पर लाखों जानवरों को क्रूरतापूर्वक मार डाला जाता है। अब ये गाय का वीडियो सामने आया है और इसे वहीं का बताया जा रहा है।

प्रसिद्ध लेखक और इस्लाम पर कई पुस्तकें लिख चुके अंतरराष्ट्रीय लेखक तारिक फ़तेह ने इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा कि पाकिस्तान के लोग गोहत्या कर के बकरीद मना रहे हैं और इससे अल्लाह को ख़ुश करना चाह रहे हैं। डॉक्टर वेदिका नामक ट्विटर यूजर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि अगर अल्लाह को खुश करने के लिए ये किया जा रहा है तो फिर शैतान कैसे खुश होगा, ये सोचने वाली बात है।

पाकिस्तान का बताए जाने वाले इस वीडियो में देखा जा सकता है कि गाय को क्रेन से ऊपर उठाया गया है और कई लोग वहाँ मनोरंजन के लिए खड़े होकर तमाशा देख रहे हैं, जिनमें कई बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं। गाय ऊपर छटपटा रही है। जैसे ही गाय को नीचे गिराया (जानबूझकर या स्लिप होकर गिरा – यह स्पष्ट नहीं है) जाता है, वो अपनी रीढ़ की हड्डी के बल पर ज़मीन से टकराती है। इसके बाद उसे तड़पता हुआ देखने के लिए लोग जुट जाते हैं। और बैकग्राउंड से चाकू लाओ, चाकू लाओ की आवाज आती है। इस के बाद भीड़ उस असहाय गाय की गर्दन पर चाकू फिरते सीन को मोबाइल में कैद करती है।

पाकिस्तान में खासकर घनी आबादी वाले शहर कराची में बकरीद के मौक पर क्रेन से गायों को क्यों उतारा जाता है, इसको लेकर जब आप थोड़ा सर्च करेंगे तो पाएँगे कि यह समस्या जगह को लेकर है। घनी आबादी के कारण हर कोई के पास अपनी जमीन नहीं है। लेकिन धार्मिक मजबूरियों के कारण बकरीद पर उन्हें गाय-बैल की कुर्बानी देनी ही होती है। ऐसे में फ्लैट में रहने वाले लोग छोटे-छोटे बछड़े या बाछी लेकर उसे छत पर पालते हैं और जब वो बड़े हो जाते हैं तो फिर उसे नीचे उतारने के लिए क्रेन के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं होता।

भगवान राम के ननिहाल में बनेगा माता कौशल्या का भव्य मंदिर, छत्तीसगढ़ में रामायण से जुड़े 9 स्थलों के विकास के लिए ₹134 करोड़

भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण की शुरुआत बुधवार (अगस्त 5, 2020) को भूमिपूजन के साथ ही हो जाएगी। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में कभी राम के अस्तित्व को नकारने वाली कॉन्ग्रेस भी अब खुद को रामभक्त दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। जहाँ एक तरफ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ मंदिर निर्माण का स्वागत कर रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के चंदखुरी में माता कौशल्या का मंदिर बनाने की प्रक्रिया शुरू है।

छत्तीसगढ़ के चंदखुरी में ही राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या का मंदिर है, जो राम की माता भी हैं। इस हिसाब से इसे राम का ननिहाल भी माना जाता है। अगस्त के तीसरे हफ्ते के बाद से ही चंदखुरी में माता कौशल्या के मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ-साथ सौंदर्यीकरण का कार्य भी शुरू हो जाएगा। आसपास के क्षेत्रों में विकास योजनाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री भुवेश बघेल ने बुधवार को अपनी पत्नी के साथ जाकर वहाँ के तैयारियों का जायजा लिया।

प्राचीन मंदिर के मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए इसका पुनर्निर्माण करें और पूरे परिसर के सौंदर्यीकरण के लिए हो रही तैयारियों का जायजा खुद मुख्यमंत्री ने लिया। इसके लिए भूमिपूजन पहले ही किया जा चुका है और अब जब अयोध्या में भूमिपूजन के लिए सरगर्मियाँ तेज हैं, ऐसे समय में चंदखुरी प्रोजेक्ट को गतिशील बनाने का निर्णय लिया गया है। भगवान राम ने वनवास के दौरान भी इस इलाक़े में अच्छा-खासा समय व्यतीत किया था।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बघेल ने बताया कि ‘राम वन गमन मार्ग’ योजना के अंतर्गत पूरे राज्य में भगवान राम की वनवास यात्रा के मार्गों को चिह्नित कर उन्हें एक बड़े पर्यटन स्थल नेटवर्क में तब्दील किया जाएगा। इसी क्रम में 15 करोड़ रुपए की लागत से छत्तीसगढ़ स्थित चंदखुरी में माता कौशल्या मंदिर व आसपास के क्षेत्रों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को तालाब में पुल और गोलाकार मार्ग बनाने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा:

प्रभु श्री राम के ननिहाल चंदखुरी का सौंदर्य अब पौराणिक कथाओं के नगरों जैसा ही आकर्षक होगा। राजधानी रायपुर के निकट स्थित इस गाँव के प्राचीन कौशल्या मंदिर के मूल स्वरूप को यथावत रखते हुए, पूरे परिसर के सौंदर्यीकरण की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। हमारी महत्वाकांक्षी राम वन गमन पथ विकास परियोजना में शामिल चंदखुरी में यह पूरा कार्य 15 करोड़ 75 लाख रुपए की लागत से किया जाएगा। योजना के मुताबिक, चंदखुरी में मंदिर के सौंदर्यीकरण तथा परिसर विकास का कार्य दो चरणों में कार्य पूरा किया जाएगा। नागरिक सुविधाओं का विकास भी किया जाएगा। बीते 22 दिसंबर को चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए भूमि-पूजन किया गया था।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि चंदखुरी में शौचालयों और धर्मशालाओं की पर्याप्त संख्या में व्यवस्था की जाए। वहाँ ग्रामीणों ने एक राष्ट्रीय बैंक का ब्रांच खोलने की भी माँग की है। साथ ही मंदिर के पास ही एक बाईपास रोड के निर्माण की भी अनुमति दे दी गई है। बता दें कि रामायण काल में छत्तीसगढ़ को दक्षिण कौशल के रूप में जाना जाता था और ये दण्डकारण्य का एक भाग था।

त्रेता युग में भगवान राम ने छत्तीसगढ़ में 4 महीने बीता कर वहाँ से लंका के लिए प्रस्थान किया था। उन्होंने हरचौका सीतामढ़ी के माध्यम से छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया थे। वो गवाई नदी में कोरिया जिले फिर उन्होंने सुकमा स्थित रामराम पहुँचने से पहले 75 जगहों पर डेरा डाला था। इनमें से 9 जगहों को ‘राम वेब गमन पर्यटन परिपथ’ के रूप में चिह्नित कर पहले फेज में पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जाएगा।

इनमें हरचौकी सीतामढ़ी (कोरिया), रामगढ़ (अंबिकापुर), शिवरीनारायण (जांजगीर-चंपा), तुरतुरिया (बलोदा बाजार), चंदखुरी (रायपुर) राजिम (गरीबन्द), सिहावा-सप्तर्षि आश्रम (धमतारी), जगदलपुर (बस्तर) और रामराम (सुकमा) शामिल है। इन 9 जगहों को विकसित करने के लिए 134.45 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट कॉस्ट रखा गया है। इस वर्ष के बजट में इसके लिए 10 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। 5 करोड़ रुपए पिछले बजट में जारी किया गया था।

जहाँ तक चंदखुरी की बात है, वहाँ मंदिर के पास स्थित झील के चारों तरफ परिक्रमा के लिए रास्ता भी तैयार किया जाएगा। इस पर एक हाईटेक ब्रिज भी बनेगा। झील के सामने पार्किंग स्थल बनेगा और लाइट-साउंड शो की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही एक फ़ूड जॉइंट भी बनेगा। मंदिर परिसर में व उसके आसपास विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधे भी लगाए जाएँगे। भूपेश बघेल पहले भी इस स्थल का दौरा करते रहे हैं।

चंदखुरी में भगवान राम के प्रति लोगों में आस्था का आलम ये है कि हर वर्ष दीपावली के मौके पर लोग पहले कौशल्या माता के मंदिर में दीपक जलाते हैं, उसके बाद ही अपने-अपने घरों में रोशनी करते हैं। ऐसे में सीएम भूपेश बघेल द्वारा वहाँ मंदिर बनवा कर और उसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने को अयोध्या में मोदी सरकार द्वारा राम मंदिर के लिए किए जा रहे प्रयासों के प्रत्युत्तर के रूप में भी देखा जा रहा है।

इधर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ 5 अगस्त के दिन होने वाले राम मंदिर के भूमि पूजन से एक दिन पहले भोपाल स्थित अपने आवास पर हनुमान चालीसा का पाठ कराएँगे। इस दिन मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के तमाम नेता अपने घरों या स्थानीय मंदिरों में हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। कमलनाथ ने राम मंदिर के भव्य निर्माण का स्वागत किया था। कहा था कि मंदिर निर्माण हर भारतीय की सहमति से हो रहा है और यह केवल भारत में ही संभव है।