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मेरे नाम से फेक अकाउंट बना कर मुझे बदनाम करने की साज़िश: यूट्यूबर शाहरुख़ अदनान

कल सोशल मीडिया पर कुछ स्क्रीनशॉट्स दिखे जिसमें शाहरुख़ अदनान नाम के एक व्यक्ति के नाम से धमकियाँ देने की बात दिखीं। शाहरुख़ अदनान नाम के प्रोफाइल से लिखा गया कि भक्तों को अब अपना ‘गटर जैसा मुँह’ सोच-समझ कर खोलना चाहिए। अपनी इस धमकी भरी सलाह के साथ उसने प्रयागराज में एक युवक की हत्या वाली ख़बर शेयर की। 07 अप्रैल को ये स्क्रीनशॉट्स चर्चा में आए और शाम को शाहरुख अदनान ने वीडियो के माध्यम से बताया कि वह उसकी असली ID नहीं है, एवं उसने पुलिस को इसकी जाँच करने कहा है।

बता दें कि रविवार (अप्रैल 5, 2020) को बख्सी मोढ़ा गाँव के 28 वर्षीय लोटन निषाद की पड़ोसियों द्वारा इसीलिए हत्या कर दी गई क्योंकि उन्होंने कोरोना वायरस फैला रहे तबलीगी जमात के लोगों पर सवाल उठाए थे। पीड़ित के परिवार का कहना है कि सारे आरोपित मुस्लिम हैं।

हालाँकि, शाहरुख़ अदनान के यूट्यब पेज पर उसके फेसबुक पेज का एड्रेस ज़रूर है लेकिन जिस फेसबुक प्रोफाइल से उसने कमेंट किया था, उसका फेसबुक पर कहीं अता-पता नहीं है। इसका मतलब है कि वह फेसबुक प्रोफाइल डिलीट किया जा चुका है, या डीएक्टीवेटेड है। जब हमने उसके यूट्यब पेज पर दिए उसके ट्विटर आईडी से उसके ट्विटर हैंडल पर जाना चाहा तो पता चला कि उसे भी डिलीट कर लिया गया है। उसने सिर्फ़ अपने ‘अनऑफिसियल’ फेसबुक पेज और यूट्यब के पेजों को नहीं हटाया है। उसके ट्विटर हैंडल का स्क्रीनशॉट:

शाहरुख़ अदनान ने हटाया अपना ट्विटर हैंडल

नीचे आप उसके उस फेसबुक पोस्ट को देख सकते हैं, जो उस फेसबुक आईडी से थी और जिसे हटा लिया गया है:

उसने जिस ख़बर की चर्चा की है, उसके बारे में भी जान लीजिए। दलित लोटन परिचितों के साथ चर्चा कर रहे थे कि अगर विदेश से जमाती नहीं आते तो शायद भारत में कोरोना नहीं फैलता। इसके बाद वहाँ उपस्थित मुसलमानों ने गाली-गलौज शुरू कर दिया और कुछ देर बाद सोना, शादिक,अख्तार, हाकिम और तिखार सहित कई मुसलमान वहाँ पर लाठी-डंडा व असलहों के साथ आ धमके। लोटन के भाई ने एफआईआर में बताया है कि वो बार-बार कह रहे थे- “ये निषाद बचने न पाए।” लौटन के सिर में गोली मार दी गई, जिसके बाद उनका सिर फट गया और मृत्यु हो गई। परिजनों को भाग कर अपनी जान बचानी पड़ी। शाहरुख़ नाम के प्रोफाइल से फेसबुक पर इसी घटना के जश्न मनाने की बात हो रही थी।

शाहरुख़ अदनान का यह फेसबुक प्रोफाइल अब हटा लिया गया है

अगर इस प्रोफाइल के कारनामों की बात करें तो वह इतने पर ही नहीं रुका। जब उससे किसी ने सवाल किया कि क्या तुम लोग ख़ुद को ही आतंकवादी मान रहे हो, तो वो और भड़क गया। उसने धमकी दी कि हिन्दू उत्तर प्रदेश में बच जाएँगे लेकिन हैदराबाद, पश्चिम बंगाल, केरल और असम में ‘भक्तों’ का क्या होगा?

मुस्लिमों के प्रभाव वाले इलाक़ों में जान से मार डालने की धमकी

शाहरुख़ अदनान के इस प्रोफाइल के हिसाब से वो ‘अमेज़न डेवलपमेंट सेंटर’ में काम करता है। वो हैदराबाद का निवासी है। उसका दफ्तर जयभेरी में है। एक नए फेसबुक वीडियो में शाहरुख़ अदनान ने दावा किया है कि फेसबुक पर उसके नाम पर कई फेक एकाउंट्स चल रहे हैं। उसका कहना है कि उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया है, और कोई व्यक्ति उसका नाम खराब करना चाहता है ताकि उसके द्वारा सालों का काम बर्बाद हो जाए। हमें भी उसके नाम पर कुछ और अकाउंट मिले लेकिन उस पर कोई ताज़ा सक्रियता दिखाई नहीं देती है।

कोरोना संकट में रेलवे बना लाइफ़लाइन: 10 लाख टन खाद्यान्न आपूर्ति, 3.2 लाख आइसोलेशन बेड की तैयारी, 1.4 लाख को हर रोज़ भोजन

भारतीय रेलवे एक ऐसा तंत्र है जिसके बिना आप देश को चलाने की कल्पना भी नहीं कर सकते। रेलवे केवल यातायात के लिए ही नहीं, बल्कि देश में जब गंभीर परिस्थितियाँ पैदा होती है तो देश सेवा में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रेलवे की सेवा की तुलना किसी अन्य तंत्र से करना मुमकिन नहीं है। आज देश में कोरोना वायरस का प्रकोप फैला है जिससे देश पूरी तरह से बंद हो चुका है लेकिन इन गम्भीर व कठिन समय में भी रेलवे अपनी सेवाएँ देश को दे रहा है।

ज़रूरत के सामान की आपूर्ति: कोरोना वाइरस के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिन के लॉकडाउन का फ़ैसला लिया और आग्रह किया की लोग अपने घरों में रहे। अगर लोग घरों में रहेंगे तो सामान की ज़रूरत पड़ेगी, और ऐसे में जब देश की जनता अपने घरों में है तो उस समय भारतीय रेल अपने कार्य में लगी है।

रेलवे ने अपनी पैसेंजर ट्रेन तो बंद की लेकिन उसकी मालगाड़ी अभी भी चल रही है जो देश में ज़रूरी सामान की आपूर्ति को बनाए हुए है। लोगों की रोज़मर्रा का सामान जैसे सब्ज़ी, अनाज, दूध, चीनी, नमक आदि जैसी रोज़ उपयोग में आने वाली चीजों को देश के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुँचाने का काम भारतीय रेल कर रही है।

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने ट्वीट करके बताया, “कोरोना वायरस के खिलाफ जारी लॉकडाउन में भारतीय रेलवे ने अब तक रिकॉर्ड 352 रेक द्वारा @FCI_India के 10 लाख टन खाद्यान्न की आपूर्ति देश भर में की है।”

ज़रूरतमंदो को भोजन : जब लॉकडाउन किया गया तो उस समय हज़ारों ऐसे लोगों को खाना न मिलने की स्थिति उत्पन्न हुई जो अपने घरों से दूर थे या रोज़ कमाने वाले थे। इसके समाधान के लिए IRCTC ने अपने किचन में खाना बनाना शुरू किया और 28 मार्च तक क़रीब 1.4 लाख लोगों को वो हर रोज़ भोजन की व्यवस्था कर चुके है।

आइसोलेशन बेड : रेलवे भारत की लाइफ़लाइन है इसका सबसे मज़बूत उदाहरण यह है कि रेलवे ने अपने ख़ाली 5,000 कोचेज को मॉडिफाई करने का काम शुरु कर दिया है। जिससे अभी 80,000 आइसोलेशन बेड की व्यवस्था होगी। भारतीय रेल के इस बहुत बड़े एवं महत्वपूर्ण सहयोग से कोरोना वायरस से बचाव के लिए रेलवे 3.2 लाख आइसोलेशन बेड तैयार करने की तैयारी में जुट चुका है। जो कि देश के लिए एक बहुत बड़ी मदद साबित होगी।

PPE’s बनाने में सहयोग: एक अन्य कार्य में भारतीय रेल की प्रोडक्शन यूनिट ने कोरोना से बचाव के लिए जरूरी सामान जैसे मास्क और इन हाउस सैनिटाइजर बनाने का कार्य भी शुरू कर दिया है। जिससे जरूरी PPE’s की सप्लाई भी वह देश के लिए कर सकेंगे। रेलवे की प्रोडक्शन यूनिट ने अस्पतालों के बेड, वेंटिलेटर आदि बनाने का भी ज़िम्मा उठाया है।

हेल्पलाइन नम्बर 138 व 139 : यात्रियों की मदद के लिए रेलवे ने पहले ऑटमैटिक टिकट कैन्सिल करने का निर्णय लिया, जिससे खिड़की से ली गई टिकट को स्टेशन पर आए बिना ही रेलवे ऑटोमैटिक कैन्सिल कर देगा। इसके साथ ही रेलवे बोर्ड के कंट्रोल सेल ने हेल्पलाइन नंबर 138 भी जारी किया है, जिससे यात्री जानकारी के लिए सीधे अपने लोकल डिविज़न से कनेक्ट हो पाएँगे व यात्रा से जुड़ी कोई भी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा रेलवे ने एक ईमेल आईडी  [email protected] भी जारी किया है। यह नागरिकों को सूचना, सहायता, और जानकारी देने के लिये शुरू किया गया है। 139 नम्बर वैसे ही काम करेगा जैसे पहले करता था।

PM-Cares फंड में रेलवे का योगदान : ना केवल अपनी सेवाओं से बल्कि रेलवे आर्थिक स्तर पर भी देश की मदद कर रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोरोना वायरस जैसी आपदा से निपटने व भविष्य में ऐसी कोई स्थिति पैदा हो तो उसके लिए देश आर्थिक स्तर पर तैयार रहे इसके लिए डोनेशन कैंपेन चलाया। जिसके माध्यम से छोटी से छोटी रकम भी एक आम आदमी दान दे सकता है।

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट करके बताया कि उन्होंने व रेल राज्य मंत्री ने अपनी एक महीने की सैलरी व रेलवे के 13 लाख कर्मचारियों व PSU के सभी कर्मचारियों ने अपनी 1 दिन की सैलरी PM-CARES फंड में देने का निर्णय किया। इसका कुल योगदान 151 करोड़ हुआ।

इसके अलवा रेलवे अपने अन्य कई प्रकार के सहयोग से भी कोरोना वायरस से लड़ने में मदद कर रहा है। RPF द्वारा कई जगह पर सब्ज़ी मंडियाँ लगवाई जा रही है जो कि पूर्ण रूप से सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन करके लगाई गई है।

रेलवे दिल खोलकर कोरोना वायरस से लड़ने में सहयोग कर रहा है, जो कि तारीफ़ के काबिल है। UN ने भी रेलवे के आइसोलेशन बेड आइडिया की तारीफ़ की। एक बार फिर रेलवे ने साबित कर दिया की वह देश कि लाइफ़लाइन है। जिसके बिना देश में कई चीजों की व्यवस्था की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

डॉक्टरों ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए माँगे सुरक्षा उपकरण, पाकिस्तानी पुलिस ने सबको कर लिया गिरफ्तार

एक तरफ पूरा विश्व कोरोना से जंग लड़ने के लिए अपने डॉक्टरों को तरह-तरह की आधुनिक सुविधाओं के साथ सुरक्षा मुहैया करा रहा है, वहीं पाकिस्तान में कोरोना से जंग लड़ने के लिए सुरक्षा कवच की माँग कर रहे डॉक्टरों को पाकिस्तान पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दरअसल बलूचिस्तान के क्वेटा शहर में कोरोना वायरस से जंग लड़ने के लिए सरकार द्वारा डॉक्टरों को रक्षात्मक उपकरण नहीं मिलने से नाराज 50 से अधिक डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

जानकारी के मुताबिक युवा डॉक्टरों के एक समूह ने मास्क और काले चश्मे जैसे बुनियादी व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) की माँग करते हुए क्वेटा शहर के मुख्य अस्पताल के सामने से सरकार के खिलाफ में नारेबाजी करते हुए एक रैली निकाली। इसके बाद डॉकटरों की रैली ने उग्र रूप ले लिया और मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर विरोध प्रदर्शन करते हुए बढ़ गई।

इसी बीच कुछ प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने सीएम आवास में घुसने का प्रयास किया तो इसे देख पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। देखते ही देखते पुलिस और स्वास्थ्य कर्मचारियों के बीच तीखी झड़प के साथ हाथापाई शुरू हो गई। इस दौरान पुलिस ने 53 डॉक्टरों को कानून का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। वहीं डॉक्टरों के साथ पुलिस द्वारा की प्रताड़ना से नाराज डॉक्टरों ने सरकार को काम न करने की भी धमकी दी है।

दरअसल डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन देश में सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी को लेकर सरकार की नीतियों के खिलाफ था। डॉक्टरों के उग्र होने की वजह एक यह भी है कि अब तक 13 डॉक्टरों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। इतना ही नहीं, कथित तौर पर मार्च महीने में एक डॉक्टर और एक नर्स की कोरोना से मौत भी हो चुकी है। वहीं क्वेटा यंग डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष यासिर अचकजई ने खुलासा किया कि पाकिस्तान की सरकार डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों को कोरोना से जंग लड़ने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने का दावा कर रही है।

सरकार के प्रवक्ता लियाकत शहवानी ने कहा कि हमने डॉक्टरों को आश्वासन दिया था कि आपको जल्द ही पीपीई प्रदान किया जाएगा, लेकिन उन्होंने पहले ही इसका विरोध शुरू कर दिया। आपको बता दें कि स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कोरोना वायरस की चपेट में आने से पाकिस्तान में अब तक 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 3,277 से अधिक हो गई है।

गौरतलब है कि इससे पहले, ईरान के साथ सीमा पर स्थित तफ्तान शिविर में पाकिस्तानी नागरिकों द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था, जिसमें गंदे, भीड़ भरे शिविरों को दिखाया गया था। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में लोगों को फर्श पर और गलियारों में सोते हुए दिखाया गया था, जोकि गंदे आँगन में खड़े टेंट में बंद थे। इसके अलावा पाकिस्तान सरकार ने बीमार तीर्थ यात्रियों का इलाज कराने के लिए अलग से कोई प्रयास नहीं किया है।

ऑल्टन्यूज चाहे तो अब वहाँ के कमिश्नर से बात करके बता दे कि ऐसी कोई बात नहीं हुई है और ये कम्यूनल खबर फैला कर पाकिस्तान को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। भारत की वेबसाइट ऑल्टन्यूज ने यही किया है दो दिन पहले, जब कराची में हिन्दुओं को खाना नहीं देने वाली खबर आई थी तो उसके फैक्ट चेक के नाम पर उसने ऐसी ही गंदगी फैलाई थी।

AIIMS के डॉक्टर ने जानबूझ कर छिपाया संक्रमण, रोज जाता था मस्जिद: मरीजों के इलाज वाली फेक खबर मीडिया ने फैलाई

एम्स का एक डॉक्टर कुछ दिन पहले कोरोना संक्रमित पाया गया था। उसकी पत्नी की डिलिवरी होने वाली थी, जो 9 महीने की प्रेग्नेंट है। महिला डॉक्टर और उसका भाई भी संक्रमित पाया गया। कहा जा रहा है कि मुस्लिम होने के कारण उनकी पहचान छिपा ली गई है। इस मामले को लेकर एम्स के कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। वो पूछ रहे हैं कि उक्त डॉक्टर ने अपनी बीमारी क्यों छिपाई? डॉक्टर मालवीय नगर में रहता है। वहाँ की मस्जिद में जाता था, जहाँ संभवत: तबलीगी जमात वाले भी जाते थे। वहीं पर उसे संक्रमण हुआ।

लक्षणों के बावजूद वो मस्जिद जाता रहा और संस्थान की बस पर बैठकर रोज़ एम्स आता रहा। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि कोरोना मरीज़ों के इलाज के दौरान इनफ़ेक्शन हुआ जबकि ऐसा नहीं है, क्योंकि वो कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में शामिल ही नहीं था। हॉस्पिटल कर्मचारियों में ग़ुस्सा है कि जानबूझ कर उसने अस्पताल में संक्रमण फैलाया। जिस बस में वो जाता था, उसके सारे कर्मचारियों और ड्राइवर वग़ैरह को क्वारंटाइन कर दिया गया है। लोगों का कहना है कि एक डॉक्टर होते हुए वो मामले की गंभीरता को जान रहा था। लेकिन उसने इसे फैलने दिया।

एम्स के एक नर्स का कहना है कि उक्त डॉक्टर की ही ग़लती है लेकिन जानबूझ कर उसे हीरो बनाया जा रहा है। मीडिया में फैलाया जा रहा है कि वो मरीजों का इलाज करते हुए बीमार पड़ा, उसे मरीजों से संक्रमण हुआ, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। उक्त नर्स ने डॉक्टर का नाम नहीं बताया। वो फिजियोलॉजी डिपार्टमेंट में सीनियर रेज़िडेंट है। नाम न छापने की शर्त पर एक मेडिकल कर्मचारी ने जानकारी दी:

“कोरोना वायरस को देखते हुए बस में भी पूरी सावधानी बरती जा रही थी। लोगों को दूर-दूर बिठाया जा रहा था, इसलिए कम लोग ही जाते थे। डॉक्टर साहब को पता था कि उनको बीमारी है। लेकिन उन्होंने यह जानकारी छिपाई और बस से रोज हॉस्पिटल आते-जाते रहे। बस में आने-जाने वालों का एक व्हाट्सप्प ग्रुप भी था। जब नाम सामने आया तो लोगों ने डॉक्टर साहब से पूछा तो उन्होंने सॉरी-सॉरी बोलना शुरू कर दिया।”

स्टाफ डॉक्टर के इस व्यवहार से बेहद नाराज हैं क्योंकि उन्होंने जानबूझकर अपनी बीमारी छिपाई और अस्पताल के दूसरे स्टाफ को भी संक्रमित किया। एम्स के हमारे सूत्रों के मुताबिक़, यह मामला डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया तक भी पहुँचाया गया है। स्टाफ़ को उम्मीद है कि डायरेक्टर इस मामले में कोई कड़ा एक्शन लेंगे। ऐसा इसीलिए, क्योंकि संक्रामक रोगों के मामले में एम्स के बेहद कड़े नियम-कायदे हैं। सभी कर्मचारियों को उनका पालन करना होता है। अगर कोई लापरवाही बरतता है तो नियमानुसार कार्रवाई होती है।

जबकि मीडिया में चलाया जा रहा है कि उक्त डॉक्टर की कोई ट्रेवल हिस्ट्री नहीं है, इसीलिए वो कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करते हुए ही संक्रमित हो गया। कहा जा रहा है कि डॉक्टर पति के माध्यम से पत्नी भी संक्रमित हो गई है, जिसके बाद दोनों के संपर्क में आने वाले सभी लोगों को क्वारंटाइन कर दिया गया है। उक्त डॉक्टर इमरजेंसी में पोस्टेड थे। कई बार टेस्टिंग और मेडिकल जाँच होने के बाद डॉक्टर को प्राइवेट वार्ड में भर्ती कराया गया है।

हैंड टू हैंड फाइट कर 5 आतंकियों को मारा, सर्जिकल स्ट्राइक करने वाली टीम का जौहर अब बनेगी ट्रेनिंग का हिस्सा

कोरोना वायरस से पूरा विश्व इस समय जंग लड़ रहा है। हर देश के लिए इस समय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने से भी ज्यादा महामारी से निबटना प्राथमिकता है। लेकिन, इस बीच पाकिस्तान के आतंकी शांत नहीं हैं। जी हाँ, उन्होंने इस बीच बर्फबारी का फायदा उठाकर देश में घुसपैठ की कोशिश की। हालाँकि, सेना ने उनकी इस हलचल की सूचना पाते ही कार्रवाई की और 5 आतंकियों को मार गिराया। मगर, इस दौरान हमारे 5 वीर जवान भी वीरगति को प्राप्त हो गए। ये जवान सर्जिकल स्ट्राइक में शामिल रही 4 पैराशूट रेजिमेंट के थे।

प्राप्त सूचना के अनुसार, आतंकी इससे पहले सीमा में घुसकर कोई नुकसान कर पाते, पाँचों जवानों ने सभी घुसपैठियों की साजिश को नाकाम कर दिया। शनिवार को एक छोटे से संघर्ष में भारतीय जवानों ने सभी घुसपैठियों को मार गिराया गया। ये पाँचों सैनिक उस स्पेशल फोर्स का हिस्सा थे जिसने सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया।

बता दें, पूरे ऑपरेशन की सूचना देते एक जवान की वीडियो भी सामने आई है। जिसने पूरे ऑपरेशन के शुरू होने से लेकर उसे पूरा किया जाने तक के बारे में बताया। जानकारी के मुताबिक सेना ने ड्रोन के जरिए पिछले हफ्ते कश्मीर के केरन सेक्टर में कुछ आतंकियों को घुसपैठ करते देखा था। इसके बाद आतंकियों के खात्मे के लिए बुधवार 1 अप्रैल को एक ऑपरेशन लॉन्च किया।

दरअसल, इलाके में इतनी ज्यादा बर्फ थी कि जवानों का घुसपैठियों की लोकेशन तक पहुँच पाना बेहद मुश्किल था। इसके बाद शनिवार को यानी 4 अप्रैल को ऑपरेशन के चौथे दिन सेना के पैराट्रूपर को हेलिकॉप्टर के जरिए नियंत्रण रेखा के पास उतारा गया। शनिवार को पूरी रात और रविवार की सुबह तक भारी गोलीबारी होती रही।

बता दें, सूबेदार संजीव कुमार के नेतृत्व वाले स्क्वॉड ने आतंकियों के पदचिन्हों को पहचानकर उनका पीछा किया था। इसी बीच चलते-चलते स्क्वॉड के तीन जवान बर्फ में धंस गए। इत्तिफाक से आतंकी भी वहीं छिपे हुए थे। अब चूँकि आतंकियों को सेना के आने की आहट मिल गई थी, लिहाजा उन्होंने इसका फायदा उठाया। लेकिन स्क्वॉड के जवानों ने भी अपनी जान की बाजी लगाते हुए आतंकियों को चुनौती दे डाली। इस बीच अपने 3 जवानों को एकदम नजदीक की लड़ाई में फँसा देख बाकी दो जवान भी उसी जगह कूद गए। इसके बाद आतंकी और जवानों के बीच पॉइंट ब्लैंक रेंज पर मुठभेड़ होने लगी। अपनी खास ट्रेनिंग के बूते गिरने के बावजूद पैराट्रूपर ने पाँचों आतंकवादियों को मार गिराया।

यह लड़ाई इतनी नजदीक से हुई है कि एक जवान का शव ठीक उस आतंकी की बगल में मिला जिसे उसने मारा था। घायल जवानों में से 2 को हॉस्पिटल पहुँचाया गया था, लेकिन दोनों जवानों ने अस्पताल पहुँचकर दम तोड़ दिया। वहीं तीन भारतीय जवान युद्ध स्थल पर ही वीरगति को प्राप्त हुए। इस तरह भारत की सीमा में घुसपैठियों को रोकने के ऑपरेशन में कुल 5 भारतीय जवानों ने अपनी शूरता को अमर किया।

खबरों के अनुसार, 3 कमांडोज और पाँच आतंकवादियों के शव 5 मीटर के दायरे में मिले हैं। इससे साफ है कि इनके बीच आमने-सामने की लड़ाई हुई है। गौरतलब है कि इन आतंकियों के पास से पाकिस्तान में बने खाद्य सामग्री, कपड़े और मिलिट्री इक्विपमेंट बरामद हुए हैं।

माँ को कोरोना हो गया, माँ मर गईं… बेटे ने डर से अंतिम संस्कार भी नहीं किया: दुखद है लेकिन भारत की घटना है!

देश में हर दिन कोरोना वायरस के मामले बढ़ते जा रहे हैं। लोगों में इस वायरस का डर इस कदर है कि वो अपने परिवार के किसी संक्रमित का शव लेने से भी मना कर दे रहे हैं। अब इसे कोरोना का डर कहें या कलियुग का प्रभाव, जिस माँ ने जन्म दिया, उनकी लाश को लेने से बेटे ने इनकार कर दिया। 

पंजाब के लुधियाना में रविवार को कोरोना की वजह से हुई बुजुर्ग महिला की मौत के बाद उसके परिवार ने शव लेने से इनकार कर दिया, इसके बाद प्रशासन ने खुद ही महिला का अंतिम संस्कार करवाया। साथ ही अब अंतिम अरदास भी खुद ही करने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि महिला के परिवार ने 100 मीटर से भी ज्यादा दूर से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया देखी। उन्होंने कहा कि मृतक के बेटे सहित परिवार के सदस्यों का शव लेने से इनकार करना काफी आश्चर्यजनक था।

यह बात एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (एडीसी) जनरल इकबाल सिंह संधू ने एक वीडियो के जरिए लोगों से मार्मिक अपील करते हुए कही है। उन्होंने कहा कि वह इस कोरोना बीमारी की वजह से रिश्तों को ताक पर न रखें। जारी की गई वीडियो में एडीसी संधू ने कहा कि महिला के परिवार की तरफ से शव लेने से इंकार करने के बाद सारी औपचारिकताएँ ड्यूटी मजिस्ट्रेट (तहसीलदार) जगसीर सिंह ने पूरी की और शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुँचाया। परिजन अंतिम संस्कार को दूर अपनी कार में ही बैठकर देखते रहे। वे कार में से भी नहीं उतरे।

एडीसी ने दावा कि हमने उन मेंबर्स को कोरोना से बचाव के लिए मँगवाई गई विशेष ड्रेस के साथ 12 फीट दूर से ही शव अग्नि देने के लिए कहा, पर उन्होंने कार से बाहर आने से ही इनकार कर दिया। ये हमारे लिए बहुत दुख की बात थी। माँ का अंतिम संस्कार करना बेटे का अति महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में श्मशान घाट के सेवादार ने 12 फीट लंबे बाँस के साथ ही शव का अंतिम संस्कार किया। एडीसी ने बताया की दिवंगत की आत्मिक शांति के लिए एसडीएम पश्चिम अमरिंदर सिंह मल्ली, जिला लोक संपर्क अधिकारी प्रभदीप सिंह नत्थोवाल और वह खुद अपनी जेब से रकम खर्च करके गुरुद्वारा शहीद बाबा दीप सिंह में अखंड पाठ रखवाने जा रहे हैं। इसका भोग शनिवार को डाला जाएगा।

बता दें कि 69 साल की महिला कुछ दिन पहले ही कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाई गई थी, जिसके बाद उन्हें फॉर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रविवार दोपहर 2:30 बजे उनकी मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने जब परिवार से लाश लेने को कहा, तो परिवार ने मना कर दिया। महिला हाल ही में अपनी भतीजी से मिलने मोहाली गई थीं, जहाँ उन्हें बुखार आया और हालत खराब होने पर उन्हें 31 मार्च को लुधियाना के फॉर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रविवार को कार्डिएक अरेस्ट से उनकी मौत हो गई।

जमातियों को खोजने गई पुलिस टीम पर हमला, चौकी फूँकने की कोशिश: IPS अधिकारी समेत कई पुलिसकर्मी घायल

कोरोना वायरस के संक्रमण के बीच दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में आयोजित मजहबी कार्यक्रम में शामिल तबलीगी जमात के लोगों की उत्तर प्रदेश में तलाश तेजी से की जा रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर हो रही इनकी तलाशी के बीच सोमवार (अप्रैल 6, 2020) दोपहर में बरेली में पुलिस पर हमला बोला गया। जमातियों के एक जगह पर एकत्र होने की सूचना पर पहुँचे दो सिपाहियों को पीटने के बाद करीब 200 लोग एकत्र हो गए और पुलिस चौकी पर हमला कर दिया। भीड़ ने पुलिस चौकी को फूँकने का भी प्रयास किया। इस घटना के बाद से गाँव में पीएसी समेत भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है। गाँव में ड्रोन कैमरे से निगरानी की जा रही है। 

बता दें कि बरेली सिटी SP रविंद्र कुमार ने हमलावर भीड़ की अनुमानित संख्या 200 बताई, जबकि बरेली SSP शैलेश ने इसकी संख्या 70-80 बताई है। बरेली SSP शैलेश ने इस घटना के बारे में बताया कि पुलिस की टीम गाँव में जाकर लोगों को लॉकडाउन के बारे में समझाकर चली आई तो फिर पीछे से किसी के उकसाने पर 70-80 लोगों की भीड़ एक लड़के को लेकर आई। भीड़ का कहना था कि पुलिस ने उसे पीटा है। 

उन्होंने बताया कि उस लड़के को तुरंत SHO द्वारा परिजनों के साथ हॉस्पिटल ले जाया गया। जब डॉक्टर ने उस लड़को को चेक किया तो पता चला कि उसे किसी प्रकार की चोट नहीं थी। वह नाटक कर रहा था। मामले में 43 लोगों के खिलाफ नामजद, 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। हमला करने वालों में महिलाएँ भी शामिल थीं। जिन 43 लोगों को नामजद किया गया है, उसमें 40 पुरुष और 3 महिलाएँ शामिल हैं। कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया है। एसपी सिटी का कहना है कि पूरी घटना की वीडियो रिकार्डिंग पुलिस के पास है और इस घटना में जितने भी लोग शामिल हैं, उनको चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी।

जानकारी के मुताबिक पुलिस की टीम बरेली के इज्जत नगर क्षेत्र के गाँव करमपुर चौधरी में तबलीगी जमात से जुड़े लोगों की जानकारी कर रहे थे। इसी बीच कुछ ग्रामीणों ने कोई भी जानकारी देने से इनकार करने के बाद सिपाहियों से हाथापाई की। इसके बाद भी दोनों सिपाही वहाँ से दो लोगों को लेकर पुलिस बैरियर वन चौकी ले आए। दो लोगों को ले जाने की सूचना पर दोपहर करीब तीन बजे ग्राम प्रधान तसब्बुर खान के नेतृत्व में करीब 200 लोग चौकी पर पहुँच गए और चौकी जलाने का प्रयास किया। 

पुलिस को लाठीचार्ज कर स्थिति पर काबू पाना पड़ा। आईपीएस अधिकारी अभिषेक वर्मा मौके पर पहुँचे तो उनसे भी हाथापाई की गई। बरेली के एसपी रवींद्र कुमार ने बताया कि हमले में आईपीएस अधिकारी भी घायल हो गए। इसके अलावा अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया है। एसपी सिटी रविंद्र कुमार ने कहा कि आरोपितों के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई की जाएगी।

‘क्वारंटाइन नहीं, वो डिटेंशन सेंटर है… इंजेक्शन देकर मारा जाता है वहाँ’ – विवादित बयान पर MLA अमिनुल इस्लाम गिरफ्तार

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच असम से एक बड़ी खबर आई है। यहाँ ऑल इंडिया यूनाइटिड डेमोक्रेटिक फ्रंट के नेता अमिनुल इस्लाम को गिरफ्तार किया गया है। इस्लाम पर आरोप है कि उसने क्वारंटाइन सेंटर के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की और उसे डिटेंशन सेंटर बताया।

दरअसल, ढिंग से विपक्षी विधायक अमिनुल इस्लाम ने क्वारंटाइन सेंटर्स को लेकर गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया और उसे न केवल डिटेंशन सेंटर बताया बल्कि ये भी कहा कि वहाँ इंजेक्शन देकर लोगों को मारा जाता है।

पुलिस महानिदेशक भास्कर ज्योति महंत ने पीटीआई को बताया कि सोमवार को विधायक को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के बाद उसे आज सुबह गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने ये कार्रवाई AIUDF विधायक की विवादस्पद टिप्पणी पर की, जिसमें उसने क्वारंटाइन सेंटर्स को लेकर भ्रम फैलाया। महंत ने कहा कि अमीनुल इस्लाम पर भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत आपराधिक साजिश रचने और समुदायों के बीच अप्रभाव फैलाने का मामला दर्ज हुआ है। इसके अलावा उसकी गिरफ्तारी की सूचना असम स्पीकर को दे दी गई है।

कहा जा रहा है कि नगाँव पुलिस को टेलीफोन पर हुई बातचीत की एक ऑडियो क्लिप मिली थी। जिसमें इस्लाम अपने परिजनों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद इस पूरे मामले को साम्प्रदायिक रूप देने की कोशिश कर रहा था। उसने कोरोना वायरस के चलते असम सरकार पर मुसलमानों के ख़िलाफ़ साजिश रचने का भी आरोप लगाया था।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस के पास पहुँची ऑडियो क्लिप में विधायक दावा कर रहा है कि क्वारंटाइन सेंटर्स में लोग मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं, जबकि वास्तविकता में वे बिलकुल फिट और स्वस्थ हैं। इस्लाम का कहना है कि क्वारंटाइन सेंटर में निजामुद्दीन से लौटे लोगों का मेडिकल स्टाफ शोषण करता है। वे वहाँ स्वस्थ लोगों को इंजेक्शन देते हैं, ताकि वो बीमार हो जाएँ और कोरोना मरीज बन जाएँ।

यहाँ बता दें कि इससे पहले ढिंग विधायक ने निजामुद्दीन मरकज़ का भी बचाव किया था। इस दौरान इस्लाम का कहना था कि मरकज़ में कोई भी संक्रमित नहीं पाया गया है और इस बीमारी के फैलने के पीछे मरकज़ का हाथ नहीं है। विवादित टिप्पणी करने पर AIUDF विधायक ने मीडिया पर भी आरोप लगाया था कि निजामुद्दीन मरकज़ पर झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं। इससे पहले एक फेसबुक पोस्ट में उनका ये भी दावा था कि असम में आया पहला केस दिल्ली के मरकज़ भी नहीं गया था।

मुर्गा पार्टी कर रहे थे 6 जमाती… वो भी दरगाह में छिपकर, सभी आए थे मरकज़ से लौटकर, पुलिस ने सबको पकड़ा

कोरोना के कारण पूरे देश में इस समय लॉकडाउन है। कई राज्यों में और कई इलाकों में स्थिति को देखते हुए धारा 144 लगी है। इस बीच ग्वालियर से खबर आई है कि वहाँ मरकज़ से लौटे 17 लोगों की शिनाख्त हुई है। इनमें से 6 जमाती तो जंगल के अंदर एक दावलपीर नामक दरगाह में छिपकर मुर्गा पार्टी कर रहे थे। जिसकी सूचना मिलने के बाद पुलिस ने इन्हें 144 का उल्लंघन करने पर पकड़ लिया। बाद में इन्हें एंबुलेंस बुलाकर अस्पताल भेजा गया। वहाँ इन छह के साथ 11 अन्य जमातियों के भी सैंपल लिए गए। ये सभी 18 मार्च को ग्वालियर आए थे।

रविवार की दोपहर दरगाह में बैठकर मुर्गा खाने वाले आरोपितों की पहचान सैय्यद रियाजुद्दीन जाफरिन, नबाव, सकील, नईम, निखिल और इसाव के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, इनकी सूचना मिलते ही एसडीओपी गीता भारद्वाज, टीआई राजू रजक, नायब तहसीलदार मोहिनी साहू और डॉ. हेमंत मंडेलिया एंबुलेंस को लेकर मौक़ास्थल पर पहुँचे। वहाँ डॉ. मंडेलिया ने बारी-बारी से सभी छह लोगों के नाम लिखे फिर एंबुलेंस से सीधे अस्पताल ले जाकर कोरोना सैंपल लिए। फिर इन सभी को होम क्वारंटाइन कर दिया गया।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ देश के अलग-अलग राज्यों से जमातियों द्वारा की जा रही बदसलूकी की खबरों ने सबके मन में इनके प्रति सवाल खड़ा कर दिया है। वही ये लोग स्थिति बिगड़ने के बाद भी अपनी हरकतों से बाज आने का नाम नहीं ले रहे। मरकज़ मामला गर्माने के बावजूद दरगाह में बैठकर पार्टी करना इनकी लापरवाही पर सवाल उठाता है और पुलिस को पर्याप्त अधिकार देता है कि वे इनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करें।

बता दें कि इस बीच ग्वालियर से एक दूसरी खबर भी आई है। जहाँ कुछ लोग लॉकडाउन के बीच इकट्ठा होकर बर्थडे पार्टी कर रहे थे। मगर जब तहसीलदार कुलदीप दुबे को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने इस पर आपत्ति जताई और फिर उन्हें समझाने लगे। लेकिन जन्मदिन मना रहे एकत्रित लोगों ने इसका विरोध कर दिया और फिर दोनों पक्षों में विवाद हो गया।

घर में एकत्रित लोगों ने उनपर पत्थरों और लाठियों से हमला कर दिया। इस हमले में तहसीलदार कुलदीप दुबे सहित उनके साथ गए अन्य कर्मचारी घायल हो गए। घटना की खबर मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुँच गया और इस मामले में आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने इस घटना में 5 लोगों को नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया है।

जमातियों के कारण सभी मुस्लिम बदनाम क्यों: SC पहुँचा उलेमा-ए-हिंद, मीडिया पर सांप्रदायिक नफरत फैलाने का आरोप

दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल अधिकांश लोगों में कोरोना के लक्षण पाए जाने के बाद जमात के लोग पुलिस, प्रशासन और मीडिया के निशाने पर हैं। हर जगह सभी लोगों से इनकी सूचना देने की बात की जा रही है और इनसे दूर रहने की सलाह दी जा रही है। अब इसी बीच इन जमातियों की लापरवाही और उनका समर्थन करने वालों पर भी सवाल उठ रहे हैं। जिसके कारण जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। जमीयत ने मीडिया के एक वर्ग पर जमात के कार्यक्रम को लेकर सांप्रदायिक नफरत फैलाने का आरोप लगाया है।

जानकारी के अनुसार, इस याचिका को जमीयत उलेमा-ए-हिंद और उसके कानूनी प्रकोष्ठ के सचिव की ओर से दायर किया गया है। इस याचिका में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कोर्ट से केंद्र सरकार को दुष्प्रचार रोकने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश देने की अपील की है।

जमाती मो. फहद और अदनान जहीर ने कमरे के बाहर किया शौच, क्वारंटाइन सेंटर में सफाईकर्मी से बदसलूकी

डीजीपी की चेतावनी के बाद मची खलबली: सामने आए 64 छिपे हुए जमाती, बाकी की तलाश के लिए टीम गठित

याचिका में कहा गया है कि तबलीगी जमात की दुर्भाग्यपूर्ण घटना का इस्तेमाल पूरे मुस्लिम समुदाय को दोष देने में किया जा रहा है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक याचिका में कहा गया है कि मुस्लिम समाज के लोगों को गलत तरीके से पेश करने की वजह से मुस्लिमों की जिंदगी और उनकी आजादी को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इस वजह से संविधान की धारा-21 के तहत मिले जीवन के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है।

गौरतलब है कि इस कार्यक्रम में शामिल होने आए जमातियों ने बचाव की पर्याप्त कोशिश नहीं की थी, जिसके कारण देश में कोविड-19 का प्रकोप बढ़ा। वकील एजाज मकबूल के जरिए दायर अर्जी में कहा गया है कि मीडिया में आ रही खबरों की वजह से पूरे मुस्लिम समुदाय को लेकर घृणा का वातावरण बन रहा है। तमाम फर्जी वीडियो, फोटो और खबरें जनता के बीच लाई जा रही हैं। इन्हें तत्काल रोका जाए।

यहाँ बता दें कि एक ओर जहाँ पूरे देश में कोरोना वायरस के कुल 4 हजार से अधिक मामले आए हैं, उनमें से 1445 मामले केवल तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों से जुडे़ हैं। ऐसे में इन लोगों की मंशा पर और इस कार्यक्रम पर सवाल उठना वाजिब है। सोशल मीडिया की बात करें तो वहाँ अधिकतर समुदाय विशेष के लोग जमातियों के समर्थन में दिखाई देते हैं। इसलिए मीडिया समुदाय विशेष के लोगों को चिह्नित करके उनसे व्यक्तिगत रूप से सवाल नहीं करता, बल्कि वे केवल उस पूरे समूह से सवाल पूछता है कि आखिर जब जमातियों के कारण देश में कोरोना फैला है तो उनका समर्थन क्यों किया जा रहा है और आखिर क्यों उन्हें बचाने का प्रयास हो रहा है?

यहाँ याद दिला दें कि दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज़ पर तबलीगी जमात के कार्यक्रम पर इकट्ठा हुई भीड़ का नतीजा आज पूरा देश भुगत रहा है। प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सब जानते हैं कि भारत में समय से उपयुक्त कदम उठाए जाने के बाद भी स्थिति कैसे बिगड़ी। सबको मालूम है कि अगर मरकज़ से निकलकर जमाती थोड़ी भी सावधानी बरतते या समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते तो आज देश को व देश की राष्ट्रीय राजधानी को कोरोना से लड़ने की जगह सिर्फ उसे रोकने के इंतजाम करने पड़ते। मगर, आज सिर्फ़ इन्हीं जमातियों के कारण हर जगह स्थिति गंभीर है और स्वास्थ्यकर्मी से लेकर सुरक्षाकर्मी तक इससे जूझ रहे हैं क्योंकि पकड़े गए जमाती न केवल उनके क्वारंटाइन सेंटर्स और अस्पताल में अपनी मनमानी कर रहे हैं बल्कि बदसलूकी भी कर रहे हैं और जो अभी नहीं पकड़े गए वो खुद को छिपाने का प्रयास कर रहे हैं।