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AIMIM के नहीं हैं 5 सांसद, इसके लिए मोदी जिम्मेदार: मीटिंग का बुलावा न मिलने पर ओवैसी ने बताया अपमान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अप्रैल को कोरोना महामारी के खिलाफ जारी लड़ाई में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं का सहयोग पाने और उन्हें इसमें सहभागी बनाने के लिए एक विडियो कॉन्फ्रेंसिंग का न्योता भेजा है। इस मीटिंग में खुद को आमंत्रित न किए जाने पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाते हुए इसे हैदराबाद और औरंगाबाद के लोगों का अपमान करार दिया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ओवैसी का तर्क है कि वे इन दो संसदीय क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, ऐसे में उन्हें मीटिंग में न बुलाया जाना इन क्षेत्रों के लोगों का अपमान है। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को टैग करके एक ट्वीट में सवाल दागते हुए पूछा कि क्या औरंगाबाद और हैदराबाद के लोग कमतर इंसान हैं क्योंकि उन्होंने एआईएमआईएम को चुना? ओवैसी ने अपने ट्ववीट में कहा, “कृपया इसके बारे में स्पष्ट करें कि वे आपके ध्यान पाने के योग्य क्यों नहीं हैं? सांसद के तौर पर हमारा काम है कि हम आपके सामने हमारे लोगों की आर्थिक और मानवीय समस्याओं को रखें।”

एक और ट्ववीट में ओवैसी ने कहा, “हैदराबाद और औरंगाबाद के लोगों ने मुझे और इम्तियाज जलील को चुना कि हम उनके मुद्दों को उठाएंगे। अब हमें इसी काम से रोका जा रहा है। हैदराबाद में कोरोना के कुल 93 ऐक्टिव केस हैं, मैं इस बारे में अपने विचार रखना चाहता हूँ कि हम इस महामारी से कैसे लड़ सकते हैं और किन क्षेत्रों में हम कमजोर पड़ रहे हैं।”

हालाँकि ओवैसी के ये सारे आरोप महज राजनीति से ही प्रेरित नजर आते हैं क्योंकि प्रधामंत्री कार्यालय की तरफ से इस संदर्भ में जो प्रेस रिलीज जारी की गई है, उसमें यह स्पष्ट तौर पर रेखांकित है कि प्रधामंत्री इस विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली मीटिंग में सिर्फ उन्हीं राजनीतिक दलों के फ्लोर लीडर्स से बात करेंगे, जिनके सदस्यों की संख्या दोनों सदनों में मिलाकर कम से कम 5 है।

ऐसे में ओवैसी का यह कहना कि उनकी उपेक्षा की गई, अनर्गल प्रलाप के सिवाय कुछ नहीं। याद रहे कि कुछ रोज पहले ही ओवैसी ने कोरोना के कारण मरने वालों को शहीद बताया था। इस पर बीजेपी ने कड़ा एतराज जताते हुए इसे उन लोगों को प्रोत्साहन देना बताया था, जो तबलीगी जमात में शामिल होने के बाद से फरार चल रहे हैं।

सरकार जान से मार देगी, नहीं लेंगे दवा-सूई: जमातियों का हॉस्पिटल में हँगामा, DM ने मुस्लिम डॉक्टर को बुलाकर समझाया

अहमदाबाद के सोला अस्पताल में तबलीगी जमात के सदस्यों ने हंगामा खड़ा करते हुए दवाएँ और इंजेक्शंस लेने से मना कर दिया। इनका आरोप था कि सरकार इन्हें जान से मारने की कोशिश कर रही है। दिव्य भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार जमातियों ने खुद की इच्छा के विरुद्ध अस्पताल में रखे जाने का आरोप लगाया और एक कोने में इकट्ठा हो गए।

रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को 26 तबलीगी जमात के सदस्यों को दरियापुर से लाकर सोला के सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करवाया गया था। जब मेडिकल टीम ने उनकी जाँच करने की कोशिश की, तो उन्होंने जाँच करवाने से मना करते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। जिसके बाद अस्पताल प्रशासन को एक मुस्लिम डॉक्टर को बुलाना पड़ा। 5 घंटे तक चले हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद मुस्लिम डॉक्टर की काउन्सिलिंग के बाद जाकर जमातियों ने हंगामा बंद किया।

नाम न छापने की शर्त पर सोला अस्पताल के एक अधिकारी ने दिव्य भास्कर को बताया कि जिन 26 जमातियों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, उनमें से 2 अहमदाबाद, 1 वलसाड, 9 मुजफ्फरनगर (यूपी) और 10 आजमगढ़ (UP) और शेष हैदराबाद से हैं। इनमें से एक डायबिटिक है और 6 नाबालिग। जब डॉक्टरों ने इनकी जाँच शुरू की, तब इन लोगों ने डॉक्टरों पर जान से मारने का शक जताते हुए जाँच करवाने से इंकार कर दिया।

घंटों के हंगामे के बाद अस्पताल प्रशासन को मुस्लिम डॉक्टर नियुक्त करने की प्रार्थना करनी पड़ी, जो आकर इन्हें समझा सकें। जिसके बाद शाम 5 बजे जिले के डीएम ने ढोलका से एक मुस्लिम डॉक्टर को इन उपद्रवियों को समझाने के लिए भेजा। जिसने लगभग 1 घंटे की कोशिश के बाद इन जाहिल जमातियों को यह समझाने में सफलता पाई कि सरकार उनको मारने के लिए नहीं बल्कि कोरोना संक्रमण रोकने के लिए और उनको स्वस्थ रखने का प्रयास कर रही है।

बाकी देश की ही भाँति गुजरात में भी निजामुद्दीन तबलीगी जमात के कारण COVID-19 पॉजिटिव केसेस में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। रविवार को कोरोना संक्रमण के 10 नए मामले गुजरात में दर्ज किए गए और सभी जमात से संबंधित हैं।

‘9 बजे 9 मिनट’ का बड़ा ख़तरा: कोरोना होगा और शक्तिशाली, घुस जाएगा पॉवर ग्रिड पर फँसे लिबरल गैंग के भीतर

इलेक्ट्रिसिटी अथवा विद्युत्, ये एक ऐसी चीज है, जिस पर पूरी दुनिया चल रही है। विद्युत् ऊर्जा न हो तो आज शायद पूरी दुनिया ठप्प हो जाए। ऐसे में दुनिया भर में मार्च में ‘अर्थ ऑवर’ मनाया जाता है। एक दिन के लिए रात 8 बजे से 9 बजे तक पूरी दुनिया में लोग अपने-अपने घरों की लाइट्स ऑफ कर के इसे मनाते हैं। पर्यावरण और धरती के प्रति कृतज्ञता अर्पित करने के लिए ऐसा किया जाता है। लेकिन, आज तक कभी ऐसे लोग नहीं मिले, जिन्होंने इसका विरोध किया हो, वो भी गैंग बना कर। लेकिन अब ये कॉन्सेप्ट विरोध लायक हो गया है।

जैसा कि आपको पता है, पीएम मोदी ने रविवार (अप्रैल 5, 2020) को रात 9 बजे 9 मिनट के लिए सारी बत्तियाँ बुझा कर दीये, मोमबत्ती और फ़्लैश-लाइट्स जलाने को कहा है। पीएम मोदी की इस इस अपील के बाद कुछ के ट्यूब-लाइट्स भी जलने शुरू हो गए हैं और उनके दिमाग में ऐसे-ऐसे विचार आने लगे हैं कि थॉमस एल्वा एडिसन की आत्मा भी इन्हें एकाध चाँटा मारने धरती पर उतर आए। इनका कहना है कि रात को अचानक से लाइट्स ऑफ होंगी और ऑन होंगी तो पॉवर ग्रिड फेल हो जाएगा। इसके पीछे किस्म-किस्म के लॉजिक दिए जा रहे हैं।

हालाँकि, ऊर्जा मंत्रालय ने ऐसी किसी भी अफवाह पर ध्यान देने से मना किया है लेकिन असली ‘विशेषज्ञ’ तो सोशल मीडिया पर बैठे हैं। बड़े-बड़े पत्रकार तुरंत पॉवर ग्रिड एक्सपर्ट बन बैठे और उन्होंने बिजली से लेकर सौरमंडल तक पर ज्ञान देना शुरू कर दिया। अब इन्हें कौन समझाए कि पीएम ने सिर्फ़ लाइट्स ऑफ करने को कहा है, एसी, टीवी, फ्रिज, फैन, कम्प्यूटर और अन्य उपकरण यथावत चलते रहेंगे। भारत में पॉवर ग्रिड की कितनी क्षमता है और कितने वाट का अतिरिक्त भार वो सहन कर सकता है, उन्हें ये समझाना भैंस के आगे गिटार बजाने जैसा होगा।

असल मुद्दा तो ये है कि ये इसे कोई सांप्रदायिक रंग भी नहीं दे पाया। पहले दिवाली मनाने की बात कही गई लेकिन फिर पता चला कि कैंडल तो चर्चों में भी जलता है। मुंबई में जस्टिन बीबर के प्रोग्राम में फ़्लैश-लाइट्स ऑन कर के नाचने वाले भी कह रहे हैं कि उनके पास टॉर्च नहीं है। कल तो मैं भी इस प्रोपेगेंडा को सच मान कर इतना डर गया था कि मैंने भी अपने कमरे के बल्ब को ऑन रख कर ही सोना उचित समझा, ताकि कहीं पॉवर ग्रिड न ख़राब हो जाए। अब तो गिरोह विशेष मना रहा है कि सारे पॉवर ग्रिड धुआँ-धुआँ हो जाएँ, ताकि ये अपनी रोटियाँ सेकने के लिए निकलें।

यहाँ हम उन बातों पर चर्चा करेंगे, जो आज ‘9 बजे 9 मिनट्स’ कार्यक्रम से हो सकते हैं। हमें आशंका है कि न सिर्फ़ पॉवर ग्रिड्स बल्कि कई ऐसी बहुत बड़ी चुनौतियाँ भी हैं, जिनसे हमें निपटने की ज़रूरत है। ये ब्रह्माण्ड बहुत बड़ा है और लिबरल गैंग सिर्फ़ पॉवर ग्रिड पर ही अटका है, इसीलिए ज़रूरी है कि हम आप तक असली बात पहुँचाएँ। आप जो भी आगे पढ़ेंगे-देखेंगे, वो ‘ऑपइंडिया सटायर विभाग’ के ‘माइकल फैराडे रिसर्च क्लब’ द्वारा प्रमाणित है। तो आइए, ऐसी 5 आशंकाओं और चुनौतियों पर नज़र डालते हैं।

1. धरती सौरमंडल के अपने मार्ग से भटक जाएगी

जैसा कि सर्वविदित है, ये पृथ्वी जो है, वो चपटी नहीं है और वो सूर्य के चारों और चक्कर काटती है। धरती पर जब लाइट्स जलते रहते हैं तो पृथ्वी सौरमंडल में अपनी धुरी पर परिक्रमा करती है। ऐसा वो लोगों के घरों में स्थित घड़ियों को देख कर करती है क्योंकि ऐसे ही निर्धारित होता है कि उसे क्लॉकवाइज घूमना है या काउंटर क्लॉकवाइज। जब धरती पर सारे लाइट्स बुझ जाएँगे, तो क्या पृथ्वी के अपने अक्ष से भटकने का ख़तरा नहीं है? क्योंकि जैसा कि थाली और ताली बजाने वाले मामले में हुआ, सभी देश भारत का अनुसरण कर रहे हैं। अगर धरती उलट-पलट गई तो क्या मोदी जिम्मेदारी लेंगे?

2. अँधेरे में कोरोना और शक्तिशाली हो जाएगा

अब आते हैं असली समस्या पर। कोरोना वायरस रात के अँधेरे में किसी के भी शरीर में घुस जाएगा और वो देख भी नहीं पाएगा। दिक्कत ये है कि कोरोना रात के अँधेरे में लाइट्स के बिना जब निकलेगा तो न तो किसी पुलिसकर्मी की नज़र इस पर पड़ेगी और न ही किसी डॉक्टर की। ऐसे में लोगों को कैसे पता चलेगा कि आसपास कोरोना है और वो उनके घर में घुसने की कोशिश कर रहा है?

3. मोदी को अन्धकार से प्रेम क्यों है?

जहाँ एक तरफ पूरी दुनिया प्रकाश की तरफ जाना चाहती है, पीएम मोदी आख़िर अन्धकार की वकालत क्यों कर रहे हैं? वो प्रकाश बुझाने की बात कर रहे हैं। ऐसे में क्या ये नहीं माना जाए कि वो अन्धकार के समर्थक हैं और देश को अँधेरे में करना चाहते हैं। कहीं ये किसी बड़े इमरजेंसी जैसे ऐलान की प्रैक्टिस तो नहीं? हो सकता है बाद में सदा के लिए सारे लाइट्स ऑफ करवा दिए जाएँ और विपक्षी नेताओं को पकड़-पकड़ कर जेल में डाल दिया जाए। मोदी है, तो मुमकिन है।

4. नेहरू को नीचा दिखाने की साज़िश!

भारत में अब तक जो भी हुआ है, सब नेहरू की देन है। आगे जो होगा, वो भले नेहरू की देन न हो, लेकिन आज के सैकड़ों और हज़ारों साल बाद तक जो भी हुआ होगा, वो सब नेहरू की ही देन होगी। कहीं पीएम मोदी इस बात से खफा तो नहीं हैं कि भारत में बिजली और प्रकाश नेहरू लेकर आए थे और इसी का बदला सधाने के लिए वो इन दोनों के प्रति अपना गुस्सा निकाल रहे हों? किसे नहीं पता कि देश में पहली ट्यूब-लाइट नेहरू ने ही जलाई थी। उसमें से कुछ आज भी जल रहे हैं।

5. भारत पर एलियन अटैक का बड़ा ख़तरा

जब रात में लोग लाखों फ़्लैश-लाइट्स जलाएँगे तो उनका प्रकाश दूर तक जाएगा। जैसा कि हमें पता है, प्रकाश की गति 30 करोड़ मीटर प्रति सेकंड है और इस रफ़्तार से फ़्लैश-लाइट्स का प्रकाश अंतरिक्ष में बैठे एलियनों तक पहुँच सकता है। अगर उनके आँखों तक ये प्रकाश गया और उन्हें परेशानी महसूस हुई तो क्या वो भारत पर हमला नहीं कर देंगे? पीएम मोदी प्रकाश की गति को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।

ऊपर हमने कुछ ऐसी बातें गिनाई हैं, जिन्हें लिबरल गैंग ने नज़रअंदाज़ कर दिया। हमें आशा है कि वो लोग सिर्फ़ पॉवर ग्रिड पर ही अटके नहीं रहेंगे और उन समस्याओं पर भी बात करेंगे, जिन्हें हमने यहाँ उठाया है। धरती के रास्ता भटकने से लेकर एलियन के हमले तक वाली चिंताओं को उठाया जाना चाहिए।

मरकज पर चलेगा बुलडोजर, अवैध है 7 मंजिला बिल्डिंग: जमात ने किया गैर-कानूनी निर्माण, टैक्स भी नहीं भरा

भारत में कोरोना संक्रमण के बड़े स्रोत बने राजधानी दिल्ली स्थित निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के मुख्यालय के ‘अच्छे दिन’ आखिरकार अब समाप्त होने जा रहे हैं। दरअसल इस कार्यक्रम के सामने आने के बाद से एक-दो नहीं बल्कि कई ऐसे मामलों से पर्दा उठा है, जिन्हें लेकर अब तक किसी का भी ध्यान इनकी ओर नहीं गया था।

गृह मंत्रालय ने ऐसे जमातियों, जिन्होंने हाल ही में भारत की यात्रा की है और वीजा नियमों व शर्तों की अवहेलना की है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उनके वीजा निरस्त करने के साथ ही उन्हें ब्लैकलिस्ट किया। इसके बाद सबसे बड़ी गाज अब इस मरकज के मूल, यानी इस बिल्डिंग पर गिरने वाली है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, शासन ने अपनी जाँच में पाया है कि दक्षिणी दिल्ली में निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज का निर्माण नियमों को ताक पर रखकर किया गया है। यही नहीं, जिस जमीन पर इस मरकज का निर्माण हुआ है, उसके मालिकाना हक से जुड़े कागजात भी दक्षिण दिल्ली नगर निगम (South Delhi Municipal Corporation) के पास नहीं हैं। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की स्टैंडिंग कमिटी के डिप्टी चेयरमैन राजपाल सिंह ने बताया कि बिल्डिंग को सील कर दिया गया है। अब इसे ढहाने की कार्रवाई के लिए फाइल तैयार की जा रही है। 

बताया जा रहा है कि स्थानीय लोगों ने इसके अवैध निर्माण की बार-बार शिकायत भी की, लेकिन न तो निगम ने कोई कार्रवाई की और न ही पुलिस या अन्य किसी विभाग ने इस पर ध्यान दिया। ज्ञात हो कि भाजपा नेता प्रवेश वर्मा ने भी अक्सर दिल्ली में मौजूद अवैध मस्जिद, कब्रिस्तान आदि के मामलों को उठाया है। उन्होंने बताया था कि 54 सरकारी जमीनों पर मस्जिदों का अवैध कब्जा है।

कागज और वैधता के सबूत माँगने पर मुशर्रफ (जो कि इंतजामिया कमिटी, मरकज के सदस्य हैं) का कहना है कि मरकज का निर्माण नियमानुसार किया गया है, और उनके पास इसके सभी कागज भी हैं। लेकिन 21 दिन के लॉकडाउन के कारण उन्हें कागज ढूँढने में परेशानी आ रही है। मुशर्रफ का कहना है कि हालात सामान्य होते ही वो दस्तावेज (कागज) पेश कर देंगे।

तबलीगी मस्जिद के इस मामले के प्रकाश में आने के बाद अब नया सवाल यह है कि ऐसे और भी कितनी मजहबी जगह हो सकती हैं, जिनके निर्माण से लेकर उनमें होने वाली गतिविधियाँ भी संदेह के घेरे में आती हैं।

जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली स्थित मरकज की इमारत को नियमों का उल्लंघन कर बनाया गया था। इस मामले में दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (SDMC) कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मरकज की इमारत दो प्लॉट जोड़कर बनाई गई है, जबकि यह कुल 7 मंजिला इमारत है। इस इमारत के निर्माण के लिए मात्र दो फ्लोर का नक्शा ही पारित है, इसके बावजूद इसे सात मंजिला बनाया गया है। यही नहीं, मरकज की इस इमारत का कभी हाउस टैक्स और प्रॉपर्टी टैक्स भी नहीं भरा गया। बताया जा रहा है कि इस हिसाब से मरकज की बिल्डिंग पर लाखों रुपए का हाउस टैक्स बकाया निकल सकता है।

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (SDMC) के अनुसार, मरकज से पहले इस जगह सिर्फ एक मस्जिद थी और वर्ष 1992 में मदरसे को तोड़कर इस जगह पर एक मदरसे का निर्माण किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि धीरे-धीरे इस जगह पर तकरीबन 70% हिस्से का अवैध निर्माण कर मरकज की इमारत तैयार की गई। घनी आबादी में बनी इस बिल्डिंग में आग से सुरक्षा के भी कोई इंतजाम नहीं है और न ही कभी अग्निशमन विभाग से एनओसी ली गई है।

इन विवादों के बीच जानकारी मिल रही है कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम इस इमारत से संबंधित दस्तावेजों को खंगाल रहा है और अब इस इमारत के अवैध निर्माण को तोड़ने की तमाम कागजी कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

मरकज की बिल्डिंग रिहायशी इलाके में करीब 2,000 गज में बनी है। जबकि नियमानुसार इसकी ऊँचाई 15 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए, वहीं इसकी ऊँचाई 25 मीटर पाई गई है। ख़ास बात यह है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) की बिल्डिंग इस मरकज के पास ही स्थित होने के बावजूद यहाँ पर अवैध रूप से सात मंजिला भवन का निर्माण कर लिया गया।

उल्लेखनीय है कि तबलीगी जमात के देशी-विदेशी ‘कार्यकर्ता’ साल भर देश के अलग-अलग इलाकों में मजहबी उपदेश देने या ‘चिल्ला’ के लिए दौरे पर रहते हैं। इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, नेपाल, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका और किर्गिस्तान समेत विभिन्न राष्ट्रों से लोग तबलीगी गतिविधियों के लिए आते हैं। भारत में ये लोग पर्यटक वीजा के नाम पर धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने के अपराधी पाए गए हैं।

अफवाह और जिहाद का अड्डा बन गया है टिकटॉक, उठी बैन करने की माँग

देश में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या आज तीन हजार के आँकड़े को पार कर गई है। इसमें तबलीगी जमात की घटना के बाद मुख्यधारा की मीडिया और सोशल मीडिया पर निरंतर सवाल भी उठने शुरू हुए। इस मामले ने नई करवट तब ली, जब ट्विटर पर रविवार (अप्रैल 05, 2020) को ‘जिहाद फैलाता टिकटॉक’ (#जिहाद_फैलाता_TikTok) ट्रेंड करने लगा।

दरअसल, लॉकडाउन के बावजूद देखा जा रहा है कि समुदाय विशेष के लोग निरंतर लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और कोरोना को लेकर हर तरह की अफवाहों को बढ़ावा दे रहे हैं। इन घटनाओं ने पुलिस और प्रशासन के काम को दोगुना कर दिया है। समुदाय विशेष में ऐसी भी अफवाहें निरंतर देखने को मिल रही हैं जिनमें कोरोना वायरस का इलाज सुन्नत और नमाज पढ़ना बताया जा रहा है। यही नहीं, कुछ मौलवी भी यह कहते देखे गए हैं कि ताबीज पहनकर कोरोना वायरस पर काबू पाया जा सकता है।

इस प्रकार की अफवाह और वीडियो का सबसे बड़ा स्रोत सोशल मीडिया पर टिकटॉक नामक मोबाइल एप्लिकेशन बनती जा रही है। खास बात यह है कि कोरोना वायरस की महामारी के बीच भी टिकटॉक पर इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा हिन्दू लड़कियों से शादी कर उन्हें इस्लाम अपनाने जैसे वीडियो भी जारी हैं।

ट्विटर पर टिकटॉक को बैन करवाने की माँग के पीछे एक अन्य कारण चीन भी है। कुछ लोगों के गुस्से का कारण चीन से शुरू हुआ कोरोना वायरस है, इसलिए उनकी माँग है कि भारत सरकार ‘टिक टॉक’ पर प्रतिबंध लगाए क्योंकि यह ऐप भी चायनीज कंपनी बाइटडांस की है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ट्विटर पर टिकटॉक को जिहादी बताया जा रहा है और इसे बैन करने की माँग की जा रही है। ट्विटर पर इस समय #जिहादी_TikTok टॉप ट्रेंड चल रहा है।

ट्विट्टर यूजर्स का कहना है कि टिकटॉक ऐप जिहाद और अफवाहों का मुख्य स्रोत बन चुका है, इसलिए इसे बंद करना जरूरी है। लोगों का मानना है कि टिकटॉक पर 70-80% समुदाय के लोग हैं। जिन्हें टिकटॉक एप्लीकेशन जिहाद करने के लिए कपड़े, जूते और पैसे देता है।

कुछ लोगों का कहना है कि ज्यादातर हिन्दू लड़कियाँ ‘जिहादी टिकटकियों’ की फैन बन जाती हैं और उनसे बातचीत करने लगती हैं। जिसके बाद मामला मुलाक़ात तक पहुँच जाता है। और फिर बाद में वो इस्लाम कबूल कर के जिहाद का शिकार हो जाती हैं।

टिकटॉक पर निरंतर ऐसे वीडियो वायरल होते रहते हैं, जो जिहाद को बढ़ावा देते हुए देखे जाते हैं और लोग इस बारे में पहले भी अपनी आपत्ति दर्ज करते देखे जा चुके हैं। लेकिन अब शायद यह मामला गंभीर होता नजर आ रहा है।

इसके अलावा, कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर भी टिकटॉक पर कई ऐसे वीडियो वॉयरल हो रहे हैं, जिन्हें देखकर आम जनता आसानी से भ्रमित भी हो जाती है और ऐसी अफवाहों का शिकार होने में उन्हें देर नहीं लगती।

उल्लेखनीय है कि कई देशों में टिकटॉक प्रतिबंधित है। मद्रास हाईकोर्ट ने भी टिकटॉक पर बैन लगाया था। हालाँकि मद्रास हाईकोर्ट ने इसके पीछे अश्लीलता को बढ़ावा देने जैसे तर्क दिए थे।

हाल ही में कुछ ऐसे युवकों की गिरफ्तारी भी हुई है, जो टिकटॉक वीडियो के जरिए यह बताते देखे गए कि कोरोना अल्लाह का अजाब (कहर) है। एक युवक को टिकटॉक पर एक ऐसा वीडियो बनाते हुए पकड़ा गया था, जो 500 रुपयों के नोटों की गड्डी पर अपनी नाक पोंछते हुए देखा गया था। ऐसा करने के पीछे युवक की मंशा इस वायरस के संक्रमण को बढ़ाने का सन्देश देना तो था ही, साथ में वह इस वायरस को अल्लाह का कहर भी कहते हुए देखा गया। हालाँकि, सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होते ही इस युवक को नासिक पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

लॉकडाउन के दौरान कट्टरपंथियों की हरकतों ने पहुँचाया नुकसान

देखा गया है कि भारत में कट्टरपंथी समूह सामाजिक दूरी और महामारी के प्रसार का मुकाबला करने के लिए सामान्य उपायों का पालन नहीं कर रहे हैं। कुछ विचलित कर देने वाले वीडियो सामने आ रहे हैं, जिसमें समुदाय के पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं पर पथराव करते हुए, उन पर थूकते हुए और व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश करने वाले पुलिसकर्मियों के साथ भी अभद्रता करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

5 विदेशी मुस्लिम महिलाओं को छिपा रखा था, जमात का है कनेक्शन: जिन-जिन ने दी थी पनाह, सब पर UP पुलिस द्वारा FIR

कल हिरासत में भेजे गए 10 इंडोनेशियाई नागरिकों के खिलाफ आज गाजियाबाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। इनके खिलाफ यह एफआईआर टूरिस्ट वीजा नियमों के उल्लंघन करने के आधार पर दर्ज हुई है। इन्हें क्वारंटाइन में पहले ही भेजा जा चुका है। गाजियाबाद के एसएसपी कलानिधि मारन ने बताया कि एक लोकल गाइड और उन चार लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज कर लिया गया है, जिन्होंने इन सभी को छुपाए रखने की कोशिश की थी।

गाजियाबाद पुलिस ने इस विषय में और जानकारी देते हुए कहा कि दिल्ली में तबलीगी जमात में शामिल हुए 10 इंडोनेशियाई नागरिक, जिनमें 5 औरतें भी शामिल थीं, को आईपीसी के सेक्शन 188, 269 तथा 270 के साथ-साथ महामारी अधिनियम और विदेशी नागरिक अधिनयम 1897 के उपयुक्त सेक्शंस के अंतर्गत भी बुक किया गया है।

याद रहे कि ये सभी लोग 10 लोग जनवरी को इंडोनेशिया से भारत आए थे। हालाँकि, इस दौरान ये लोग निज़ामुद्दीन स्थित जमात के मरकज़ में नहीं गए थे। लेकिन, देश के कई शहरों में इनका मूवमेंट रहा है। फ़िलहाल ये सभी 10 लोग साहिबाबाद इलाक़े में छिप कर रह रहे थे। जिन्हें पुलिस ने कल क्वारंटाइन के लिए भेजा था। आज इनके पनाहगारों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जा चुकी थी जिसकी संभावना पहले से ही थी।

बता दें कि दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज़ से दो हजार से ज्यादा निकाले गए थे। करीब 1500 लोग यहॉं से देश के अलग-अलग प्रदेशों में गए हैं। इनमें से कई की अभी भी तलाश की जा रही है। मरकज देश में कोरोना संक्रमण का केंद्र बनकर उभरा है। पिछले कुछ दिनों में जो मामले सामने आए हैं उनमें से ज्यादातर जमात से जुड़े हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने शनिवार को बताया कि तबलीगी जमात के सदस्य और उनके संपर्क में आए अब तक करीब 22 हजार लोग देश भर में क्वारंटाइन किए जा चुके हैं।

जाँच एजेंसियों ने देश को कोरोना संकट में डालने वाले रुढ़िवादी इस्लामी संगठन तबलीगी जमात के फंडिंग के स्त्रोत की जाँच शुरू कर दी है। जमात से फंडिंग के स्त्रोत और विदेशियों की डिटेल माँगी है। जमात ने पिछले तीन सालों में कितना टैक्स भरा है, उसके बैंक खातों में कहाँ-कहाँ से कितने पैसे आए हैं, इन सब डिटेल्स के साथ पैन नंबर का विवरण भी माँगा है। इसके अलावा मरकज प्रमुख मौलाना साद और 6 अन्य सदस्यों से उन विदेशियों और भारतीय जमातियों की लिस्ट भी माँगी गई है, जिन्होंने 12 मार्च के बाद मरकज में शिरकत की थी।

जमात के सदस्य अपनी करतूतों को लेकर भी चर्चा में है। गाजियाबाद के अस्पताल में नर्सों के सामने नंगा होकर इन्होंने हदें पार कर दी थी। इसके अलावा यूपी के अलग-अलग जिलों से जमातियों द्वारा हॉस्पिटल में बदतमीजी किए जाने की ख़बरें आ रही हैं। बिजनौर में 8 इंडोनेशियाई जमातियों ने अंडा-करी और बिरयानी की माँग की थी। साथ ही उन्होंने सफाई कर्मचारियों के साथ भी अभद्रता की थी। बस्ती और आगरा में भी बिरयानी माँग कर हॉस्पिटल कर्मचारियों को परेशान किया। मुरादाबाद में जमातियों ने दाल-रोटी खाने से इनकार कर दिया। दिल्ली के एलएनजेपी हॉस्पिटल और हैदराबाद के गॉंधी हॉस्पिटल में इनके उपद्रव के बाद पुलिस की तैनाती करनी पड़ी। इनलोगों ने सड़कों पर, अस्पतालों में, डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों पर थूक कर संक्रमण तक फैलाने की कोशिश की है।

वैष्णो देवी में 145 को कोरोना! अली सोहराब के फेक न्यूज़ को शेयर करने वाला अबरार हुसैन गिरफ्तार

सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर फेक न्यूज शेयर करने के आरोप में वडोदरा पुलिस ने 35 वर्षीय मुहम्मद अबरार हुसैन शेख को गिरफ्तार किया है। अबरार ने जो फर्जी न्यूज शेयर की थी, उसमें कहा गया था कि वैष्णो देवी के मंदिर में फँसे 400 लोगों में से 145 लोगों का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव पाया गया है। बाकियों का टेस्ट जारी है और नए मामले भी सामने आ सकते हैं।

अबरार का फेसबुक पोस्ट

ऑनलाइन पोर्टल DeshGujarat की रिपोर्ट के मुताबिक शहर के साइबर सेल पुलिस स्टेशन ने अबरार शेख के खिलाफ आईपीसी की धारा 502 (2) और आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 54 के तहत केस दर्ज किया गया है। जानकारी के मुताबिक शेख ने कथित पत्रकार अली सोहराब के एक फेसबुक पोस्ट को शेयर किया था। सोहराब का अफवाहें फैलाने और झूठे ट्वीट व पोस्ट करने का पुराना इतिहास है। वह आपत्तिनजक ट्वीट करने के आरोप में यूपी पुलिस की कार्रवाई का सामना भी कर चुका है।

बता दें कि माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने पहले ही ऐसी किसी भी खबर को नकार दिया है, जिसमें मंदिर में श्रद्धालुओं के फँसे होने की बात कही गई है। कटरा में भी कोई श्रद्धालु नहीं फँसा हुआ है। यात्रा पहले ही रोकी जा चुकी है। 18 मार्च को मंदिर बंद हो गई थी। कई लोग मीडिया पर आरोप लगा रहे थे कि जब किसी हिन्दू धार्मिक स्थल में श्रद्धालु होते हैं तो उन्हें ‘फँसा हुआ’ बताया जाता है जबकि मस्जिद के मामले में ‘छिपा हुआ’ कहा जाता है। इसके बाद फेक न्यूज़ का दौर शुरू हुआ, जिसे अली सोहराब जैसों ने हज़ारों तक फैलाया।

दरअसल अली सोहराब ने ये सब तबलीगी जमात की हरकतों को ढकने के लिए किया। वो झूठी खबर फैला कर ये साबित करना चाहता था कि जैसे दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ में हज़ारों जमाती इकट्ठे होकर पुलिस-प्रशासन के निर्देशों की अवहेलना कर रहे थे, उसी तरह वैष्णो देवी मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने ऐसी ही हरकत की है। जमातियों के कारण भारत में कोरोना वायरस के मामलों में अचानक से तेज वृद्धि हुई है और इसलिए लिबरल गिरोह के कई पत्रकार मजहब और कौम को जिम्मेदार न ठहराने की बात करते हुए घूम रहे हैं।

‘दिल्ली पुलिस फरिश्ता बनकर आई, यदि कोई कहता है कि वे मदद नहीं कर रहे तो यह गलत है’

लॉकडाउन के कारण सभी अपने घरों में कैद हैं लेकिन इन सब के बीच दिल्ली पुलिस अपने कर्तव्य को पूरा करने में दिन-रात लगी हुई है। कोरोना महामारी के इस संकट में दिल्ली पुलिस देवदूत बनकर आम जनता के सामने आ रही है। कोरोना से जंग के बीच दिल्ली पुलिस पूरी तरह सहायता करती हुई नजर आ रही है। कहीं गरीब लोगों को खाना बाँटा जा रहा है तो कही जरूरतमंदो को दवाइयॉं मुहैया करवाई जा रही है। ताजा मामला दिल्ली के बदरपुर का है।

जहाँ पुलिस ने समय पर एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुँचाया। नवजात बच्ची के पिता पंकज ने इसके लिए दिल्ली पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “1 अप्रैल को जब मेरी पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई तो मैंने 108,102,1031 आदि कई हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया। मगर संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद मैंने दिल्ली पुलिस को कॉल किया, जो 20 मिनट में हमारे पास पहुँची और हमें अस्पताल ले गई। हम उनके आभारी हैं।” 

वहीं नवजात बच्ची की माँ कहती हैं, “कोरोना वायरस फैला हुआ है और दिल्ली पुलिस हमारे लिए फरिश्ता बनकर आई है। हम तहे दिल से उनका शुक्रिया अदा करना चाहते हैं। दिल्ली पुलिस का काम बहुत अच्छा है। अगर कोई बोलता है कि वो मदद नहीं कर रहे हैं तो ये गलत है।” 

बता दें कि लॉकडाउन के दौरान 25 मार्च से अब तक एंबुलेंस नहीं मिलने पर पीसीआर पुलिस की यूनिट ने विभिन्न क्षेत्रों से 139 गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुँचाया। डीसीपी पीसीआर शरत कुमार सिन्हा के मुताबिक, सबसे ज्यादा 43 गर्भवती महिलाओं को सफदरजंग अस्पताल पहुँचाया गया, जबकि 17 को संजय गाँधी अस्पताल और 12 को दादा देव अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा अन्य 19 अस्पतालों में भी गर्भवती महिलाओं को पहुँचाया गया है। पीसीआर पुलिस के लगभग सभी जोन की पुलिस यूनिट ने अपने इलाके में प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला को सूचना मिलने पर अस्पताल भिजवाया है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसी कॉल मिलने पर तुरंत मदद देने के आदेश सभी यूनिट को दिए गए हैं। ऐसे में जैसे ही किसी यूनिट को उसके आसपास की कॉल मिलती है तो वो मौके पर पहुँच जाते हैं।

इटली से दान में मिला माल वापस उसे ही बेच डाला, दुनिया को कोरोना दे अब धंधा चमका रहा चीन

जहाँ एक तरफ दुनिया कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रकोप से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर इस वायरस का जन्मदाता चीन इसमें भी राजनीति खेल रहा है। जिस वुहान से ये वायरस पूरी दुनिया में फैला, वहाँ के अधिकतर मरीज अब ठीक होकर घर जा चुके हैं। ऐसे में चीन अब मास्क से लेकर सैनिटाइजर और टेस्टिंग किट तक दूसरे देशों को बेच रहा है। इनमें से कई ऐसे देश हैं, जिन्होंने चीन में आपात स्थिति को देखते हुए कुछ दिनों पहले ऐसे संसाधन डोनेट किए थे। अब चीन उसी माल को उसी देश को बेचने का प्रयास कर रहा है, जिसने डोनेट किया था।

इटली ने मानवता के नाते चीन को पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट्स की एक बड़ी खेप डोनेट की थी, लेकिन चीन अब उसी माल को वापस इटली को बेच दिया है। पहले कहा जा रहा था कि चीन ने डॉक्टरों और नर्सों सहित कोरोना से बचाव के लिए नागरिकों तक के लिए प्रयोग में आने वाले उन उपकरणों को इटली को डोनेट किया था। लेकिन, अब पता चला है कि इटली को उसने ये चीजें बेचीं हैं। बता दें कि 1.25 लाख मरीजों के साथ इटली में स्थिति काफ़ी बिगड़ी हुई है और साथ ही 15,300 से भी अधिक लोगों की वहाँ मौत हो चुकी है।

वैसे ये पहली बार नहीं है जब चीन ने इस तरह की हरकत की है। चीन इस मौके को भी सिर्फ अपना धंधा बढ़ाने, मुनाफे कमाने के तौर पर देख रहा है। वह भी घटिया क्वालिटी के उपकरण बेच कर, जिनमें से ज्यादातर किसी काम के नहीं है। कुछ ही दिनों पहले स्पेन ने चीन से 467 मिलियन यूरो के चिकित्सा उपकरण खरीदे थे, जिसमें 950 वेंटिलेटर्स, 5.5 मिलियन टेस्टिंग किट्स, 11 मिलियन ग्लव्स और 50 करोड़ से ज्यादा फेस मास्क शामिल थे। इन खरीदी गईं मेडिकल टेस्टिंग किट्स व उपकरणों में से ज्यादातर किसी काम के नहीं थे।

इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी कोरोना को चाइनीज वायरस कहते रहे हैं लेकिन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से एक फोन कॉल पर बातचीत के बाद उन्होंने बड़ी पलटी मारी थी। भारत में भी लिबरल जमात के वामपंथी इसे चाइनीज वायरस कहने वालों के ख़िलाफ़ ज़हर उगलने में लगे हुए हैं। चीन में 77,000 लोग इस वायरस के प्रकोप से कैसे ठीक हुए, इस बारे में भी कुछ स्पष्ट नहीं बताया गया है।

हॉस्पिटल से भड़काऊ वीडियो बना भेज रहे थे मुल्तानी परिवार के 4 कोरोना+, इंदौर में अब तक 128 मामले

मध्य प्रदेश के इंदौर में शनिवार (अप्रैल 4, 2020) को कोरोना वायरस के 16 नए मामले सामने आए। इसके साथ ही वहाँ कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 128 हो गई है। इनमें से सबसे ज्यादा 10 मरीज टाटपट्टी बाखल क्षेत्र से मिले हैं। ये वही इलाक़ा है जहाँ 1 अप्रैल को स्वास्थ्यकर्मियों पर पथराव हुआ था और उन्हें खदेड़ दिया गया था। मरने वालों में 42 वर्षीय व्यक्ति से लेकर 80 साल की बुजुर्ग महिला तक शामिल हैं। कहा जा रहा है कि महिला की मौत की जानकारी अधिकारियों ने देर से बताई।

इंदौर में डॉक्टर अभी भी डरे हुए हैं। एक युवती किसी से लिफ्ट लेकर सीधा अपने घर चली गई, जबकि वो कोरोना पॉजिटिव होने के कारण अस्पताल में भर्ती थी। इसके बाद बाद पुलिसकर्मियों को उसे लाने के लिए उसके घर भेजा गया। उसे लिफ्ट देने वाले की भी तलाश की जा रही है।

चार ऐसे लोगों पर भी केस किया गया है जो आइसोलेशन सेंटर से ही भड़काऊ विडियो बनाकर भेज रहे थे। सद्दाम मुल्तानी, अब्दुल गफ्फार मुल्तानी, मोहम्मद शाकिब और आफताब मुल्तानी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया। ये भी खजराना के निवासी हैं। इन सभी ने आइसोलेशन सेंटर में न सिर्फ़ सोशल डिस्टेंसिंग की अवहेलना की, बल्कि उसके बारे में भ्रामक जानकारियाँ देकर ऑनलाइन लोगों को भड़काया।

इन सभी कोरोना मरीजों को स्वस्थ होते ही गिरफ़्तार किया जाएगा। ये सभी एक ही परिवार के हैं। खजराना वही इलाक़ा है, जहाँ एक ही परिवार के 13 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इंदौर में कोरोना ने सबसे ज्यादा तबाही यहीं मचाई है। अब लगातार कई केस सामने आने के बाद लोग ख़ुद घरों में बंद रह रहे हैं। तंजीम नगर और अशफाक नगर जाने वाली गलियों को भी सील कर दिया गया है। इलाक़े के समुदाय विशेष के कुछ लोगों ने कहा कि वो लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं। हालाँकि, कुछ दिनों पहले तक पुलिस को इन्हें समझाने में काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी थी, तब भी बात नहीं बन पा रही थी।

‘दैनिक भास्कर’ के इंदौर संस्करण में प्रकाशित ख़बर

इससे पहले शुक्रवार की देर रात पुलिस की एक टीम ने टाटपट्‌टी बाखल में जाकर विडियो के आधार पर पथराव करने वाले आरोपितों को चिन्हित किया और उनका इलाके में जुलूस भी निकाला था। यहाँ पर 17 और 55 साल की दो महिलाएँ कोरोना पॉजिटिव भी मिली हैं। सीएसपी डीके तिवारी ने बताया कि गुरुवार को हुई गिरफ्तारी के अलावा 6 और आरोपितों को उनकी टीम ने पकड़ा था। इनमें मोहम्मद नावेद, मोहम्मद साजिद, मोहम्मद युसूफ, मोहम्मद सावेज, मोहम्मद अनस और नफीस का नाम शामिल है। ये भी टाटपट्‌टी बाखल के निवासी हैं। 

इंदौर में पुलिस और प्रशासन वो हर कुछ कर रहा है, जिससे लोग घरों से न निकलें। लोगों के दरवाजे तक राशन सामग्री पहुँचाई जा रही है। किराना व्यापारियों से नगर निगम बात कर रहा है, ताकि उन्हें होलसेल माल लेने में कोई परेशानी न हो। बैंकों में सुचारू रूप से काम होता रहे और सोशल डिस्टेंसिंग भी बना रहे, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। किराना व्यापारियों को कर्फ्यू पास प्रदान किए गए हैं।