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मुस्लिम होने के कारण गर्भवती को अस्पताल से निकाला? कॉन्ग्रेसी मंत्री के झूठ को खुद महिला ने दिखाया आइना

शनिवार को राजस्थान के पर्यटन मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता विश्वेन्द्र सिंह ने ट्विटर पर दावा किया कि एक गर्भवती मुस्लिम स्त्री को भरतपुर के डॉक्टर मुनीत वालिया ने अस्पताल में भर्ती करने से मना कर दिया क्योंकि औरत मुस्लिम थी। मंत्री ने यह भी दावा किया कि मुस्लिम होने के कारण उस औरत को जयपुर जाकर सारे टेस्ट्स करवाने को कहा गया।

मंत्री के इस दावे पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने आश्चर्य जताया कि बिना किसी जाँच कमिटी से जाँच करवाए कैसे मंत्री जी डॉक्टर पर आरोप लगाने बैठ गए। हालाँकि डॉक्टर द्वारा मरीज को दी गई ट्रांसफर स्लिप जल्दी ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जो अलग ही कहानी कहती है।

जर्नलिस्ट सौम्यदीप्त ने मुस्लिम औरत को दी गई रेफरल स्लिप साझा की, जिससे पता चलता है कि 7वीं बार गर्भवती इस मरीज में खून की बेहद कमी थी, जिसके कारण यह केस बेहद जटिल हो गया था।

रेफरल स्लिप के अनुसार रोगी Antepartum Haemorrhage (APH) एन्टिपार्टम हैमरेज नामक रोग से ग्रस्त है, जिसमें प्रसव के पहले रक्तस्राव होता है। वह एनेमिक थी और 7वीं बार गर्भ से थी। मरीज के केस की जटिलताओं को देखते हुए उसे जयपुर के बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया गया क्योंकि मरीज की स्थितियों को देखते हुए उसके लिए जरूरी इलाज क्लीनिक में उपलब्ध नहीं था।

एक दूसरे सोशल मीडिया यूजर और खुद एक डॉक्टर, डॉ अमित थडानी ने भी इस रेफरल स्लिप पर लिखे वाक्य “कोई जाँच मौजूद नहीं” को समझाते हुए लिखा कि इस वाक्य का मतलब हुआ कि इस महिला की ये 7वीं गर्भावस्था है और अब तक के प्रसवों का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।

OpIndia से बात करते हुए एक डॉक्टर ने कहा कि ये औरत 26-28 हफ्ते की प्रेग्नेंट थी और सामान्यतः प्रेग्नेंसी 38-40 हफ्तों की रहती है। वह एक जटिल प्रेग्नेंसी थी जिसमें माँ और बच्चे दोनों का जीवन खतरे में पड़ सकता था। हिंदुस्तान टाइम्स के ब्यूरो चीफ राकेश अवस्थी ने भी इस मरीज के साथ मौजूद रही स्त्री की बाईट ट्विटर पर शेयर की, जिसने स्पष्ट किया कि उन्हें मुस्लिम होने के कारण जयपुर अस्पताल रेफर नहीं किया गया।

यह औरत साफ़-साफ़ कहती दिखती है कि डॉक्टर ने उन्हें तुरंत वहाँ से चले जाने को कहा क्योंकि मरीज की स्थिति गंभीर थी और देरी होने पर मरीज को नुकसान हो सकता था। इस घटना के बाद लोग हतप्रभ हैं कि क्या राज्य सरकार ने लिबरल धड़े की नजर में कुछ क्रेडिट पॉइंट्स कमाने के चक्कर में डॉक्टर को बदनाम कर उनके करियर को रिस्क में डाल दिया। सत्य क्या है, यह केवल एक निष्पक्ष पारदर्शी जाँच से ही पता चल सकेगा।

लेटरहेड पर राष्ट्रीय प्रतीक का इस्तेमाल: पूर्व त्रिपुरा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पर FIR

त्रिपुरा कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गोपाल चंद्र रॉय के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। नॉर्थ त्रिपुरा के बनमालीपुर सीट से विधायक रहे रॉय पर यह कार्रवाई अपने लेटरहेड पर राष्ट्रीय प्रतीक का इस्तेमाल करने को लेकर की गई है। वे पेशे से वकील हैं और फिलवक्त प्रदेश कॉन्ग्रेस समिति के सलाहकार हैं। वह अगरतला से छपने वाले समाचार पत्र गणेशंबद पत्रिका के मालिक और संपादक भी हैं।

रॉय के लेटरहेड में देखा जा सकता है कि फिलहाल वो किसी आधिकारिक पद पर नहीं हैं। बावजूद वह अपने लेटरहेड पर राष्ट्रीय प्रतीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेटरहेड पर उल्लेख है कि वे त्रिपुरा कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे हैं। त्रिपुरा ओलंपिक संघ के अध्यक्ष हैं। कॉन्ग्रेस विधायक दल के पूर्व नेता, त्रिपुरा उच्च न्यायालय में अधिवक्ता और गणेशंबद पत्रिका के मालिक एवं संपादक हैं। बता दें कि इनमें से कोई भी पद उन्हें कानून के अनुसार राष्ट्रीय प्रतीक का उपयोग करने के लिए अधिकृत नहीं करता है।

दरअसल राष्ट्रीय प्रतीक भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करता है। भारत के राज्य प्रतीक (अनुचित प्रयोग का निषेध) अधिनियम, 2005 के अंतर्गत किसी व्यक्ति और निजी संगठन के लिए इसका उपयोग प्रतिबंधित किया गया है। आधिकारिक पत्राचार के लिए किसी व्यक्ति या निजी संगठन को प्रतीक का उपयोग करने की अनुमति नहीं है।

यह प्रतीक भारत सरकार के आधिकारिक लेटरहेड का एक हिस्सा है। सभी भारतीय मुद्रा पर भी यह होता है। यह कई स्थानों पर भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में भी कार्य करता है और भारतीय पासपोर्ट पर प्रमुख रूप से होता है। कोई निजी व्यक्ति, संस्था या राजनीतिक दल राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकता। भारत के राज्य प्रतीक (अनुचित प्रयोग का निषेध) अधिनियम, 2005 की धारा- 3 के तहत इस पर रोक लगाई गई है। अगर कोई प्रतीक चिह्न का गलत इस्तेमाल करता है तो इस अधिनियम की धारा- 7 में दो साल तक की सजा और पाँच हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।

जनवरी 2017 में बीजेपी नेता और विराट हिंदुस्तान संगम (VHS) के संस्थापक सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्विटर पर खुलासा किया था कि उन्होंने सूचना और प्रसारण मंत्रालय को एक पत्र लिखकर अर्णब गोस्वामी द्वारा कानून के उल्लंघन को लेकर आगाह किया था। टाइम्स नाउ के पूर्व एडिटर अर्णब ‘रिपब्लिक’ नाम से अपना वेंचर शुरू करने वाले थे। इसी शब्द के इस्तेमाल को लेकर स्वामी ने आगाह किया था। बाद में कानूनी पचड़े से बचने के लिए अर्णब ने ‘रिपब्लिक टीवी’ के नाम से चैनल शुरू किया।

कश्मीर में पिता को दिल का दौरा, मुंबई से साइकिल पर निकल पड़े आरिफ: CRPF और गुजरात पुलिस बनी फरिश्ता

मुंबई में रहने वाले एक वॉचमैन को जब पिता की बीमारी सूचना मिली तो वो सीधा जम्मू-कश्मीर के राजौरी स्थित अपने घर के लिए निकल गया। ये 4 दिन पहले की बात है। सबसे बड़ी बात कि मोहम्मद आरिफ ने साइकिल से ही राजौरी तक की यात्रा करने का निश्चय किया। 36 वर्षीय आरिफ मुंबई वेस्ट स्थित लिब्रा टावर में काम करता है।अब उन्हें गुजरात पुलिस से मदद मिली है। गुजरात पुलिस ने उनके दुःख को समझा और उन्हें कश्मीर भेजने के लिए एक ट्रक में बिठाया।

आरिफ ने बताया कि वो रात भर साइकिल चला कर गुजरात-राजस्थान सीमा तक पहुँचे थे। उन्हें लगातार कई अधिकारियों के फोन कॉल्स आ रहे थे, जिन्होंने उन्हें साइकिल से जम्मू-कश्मीर न जाने की सलाह दी क्योंकि कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रकोप से बचने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लागू है। लेकिन, आरिफ अपने घर जाने के लिए बेचैन थे और उन्होंने अपनी यात्रा जारी रखी। अगली सुबह गुजरात पुलिस के कुछ जवान उन्हें मिले। उन्होंने उनके लिए न सिर्फ़ जम्मू-कश्मीर जाने का प्रबंध किया, बल्कि भोजन की भी व्यवस्था की।

उधर उनके घर पर भी सीआरपीएफ के जवानों ने जाकर उनके पिता के इलाज की व्यवस्था की। सीआरपीएफ ने ‘मददगार योजना’ के तहत आरिफ के पिता को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। उन्हें हाल ही में दिल का दौरा पड़ा था। उनकी स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। रविवार (अप्रैल 5, 2020) को कई मेडिकल जाँच व प्रक्रिया पूरी हुई है। सीआरपीएफ ने बताया कि अगर ज़रूरत पड़ी तो उन्हें कटरा स्थित नारायणा हॉस्पिटल में शिफ्ट किया जा सकता है। आरिफ ने बताया कि उनके पास साइकिल भी नहीं थी। साथी गार्ड से उन्होंने 500 रुपए में साइकिल ख़रीदी और अपने घर के लिए निकल पड़े।

अगर सीआरपीएफ से उनके पिता को मदद नहीं मिलती तो शायद उन्हें 2100 किलोमीटर तक साइकिल चलाना पड़ता। वो रास्ते भर बिस्किट खाते और पानी पीते हुए आ रहे थे क्योंकि अधिकतर दुकानें बंद थीं। सीआरपीएफ ने उन्हें बता दिया था कि उनके पिता का ख्याल रखा जा रहा है और सारी जिम्मेदारी निभाई जा रही है। लेकिन आरिफ फिर भी वहाँ जाने को बेचैन थे। पंजाब-जम्मू सीमा पर स्थित लखनपुर तक तो आरिफ पहुँच सकते हैं लेकिन वहाँ से आगे जाने पर उन्हें 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन में रहने के बाद ही राजौरी जाने की अनुमति मिलेगी क्योंकि प्रशासन ने ऐसा अनिवार्य कर रखा है।

आरिफ को आशंका है कि हो सकता है कि उनके पिता की मृत्यु निकट हो और वो एक बार उनसे मिलना चाहते हों। हालाँकि, सीआरपीएफ ने वहाँ इलाज की पूरी व्यवस्था कर रखी है। आईआरपीएफ के डॉक्टर्स लगातार जिला अस्पताल से संपर्क में हैं और उनके स्वास्थ्य के अपडेट्स ले रहे हैं।

तबलीगियों पर युवक ने की टिप्पणी, मो. सोना ने गोली मार हत्या की: CM योगी ने दिया रासुका लगाने का निर्देश

तबलीगी जमातियों ने एक ओर जहाँ देशव्यापी लॉकडाउन के बावजूद कोरोना वायरस के संक्रमण के आँकड़ों को अचानक से तेजी से बढ़ाया, वहीं इस पर बात करने के कारण प्रयागराज के युवक को अपनी जान गँवानी पड़ी।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में रविवार (अप्रैल 05, 2020) सुबह करेली थाना क्षेत्र के बक्शी मोड़ा में गोली मारकर एक युवक की हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद घटनास्थल से भाग रहे हमलावर को भीड़ ने पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने गिरफ्तारी करने के बाद जाँच शुरू कर दी है।

जमातियों पर टिप्पणी के कारण हुई हत्या

पुलिस की शुरुआती जाँच में पता चला है कि कोरोना संक्रमण के मामलों में बढ़ोत्तरी के लिए जिम्मेदार जमातियों पर इस युवक ने टिप्पणी कर दी थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए आरोपितों पर रासुका (NSA) लगाने का निर्देश दिया है। साथ ही पीड़ित परिवार को ₹5 लाख मुआवजा देने की भी घोषणा  की है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर प्रदेश के करेली थाना क्षेत्र के बक्सी मोड़ा गाँव निवासी लोटन निषाद रविवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे किसी काम से घर से बाहर निकले थे। वह एक चाय की दुकान पर थे, तभी उनका जमातियों पर टिप्पणी करने को लेकर गाँव के ही निवासी मोहम्मद सोना से विवाद हो गया।

विवाद बढ़ने पर दोनों के बीच मारपीट शुरू हो गई। इसी बीच मोहम्मद सोना ने तमंचे से उन पर फायर कर दिया। गोली लगने से लोटन निषाद की मौत हो गई। फायरिंग की आवाज सुनकर आस-पास के लोग दौड़े और मोहम्मद सोना को पकड़ लिया और उसकी पिटाई की। सूचना पाकर पहुँची पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। इलाके में तनाव की आशंका के चलते पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है।

UP के सीएम योगी आदित्यनाथ ने लॉकडाउन के दौरान चाय की दुकान के खुले होने पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह नियमों का उल्लंघन है और नियमों के पालन में लापरवाही बरती गई है।

पुलिस ने युवक के शव को कब्जे में ले लिया। इसके बाद आइजी रेंज समेत पुलिस के उच्‍च अधिकारी भी मौके पर पहुँचे। मामले की तहकीकात की जा रही है।

‘हम कोरोना वायरस में विश्वास नहीं करते, हमें अल्लाह पर विश्वास है’ – 37 मौतों के बाद भी खुली हैं मस्जिदें

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश भर में लॉकडाउन की घोषणा तो की है लेकिन मस्जिदों को आधिकारिक रूप से बंद नहीं किया गया है। इमरान खान लोगों से अपील कर रहे हैं कि सोशल डिस्टैन्सिंग का ख्याल रखें और मस्जिदों में बड़ी संख्या में जमा ना हों। समुदाय विशेष बहुल मध्य पूर्व में भी मस्जिदें बंद कर दी गई हैं, लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने मौलवियों के सामने घुटने टेक दिए। अब तक वहाँ कोरोना संक्रमण के ढाई हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं और 37 लोगों की जानें जा चुकी हैं।

इन मौलवियों ने सरकार के लॉकडाउन और सोशल डिस्‍टेसिंग के नियमों को ताक पर रख दिया है। मौलवियों ने कोरोना महामारी को गंभीरता से नहीं लिया और मजहबी के नाम पर इंसान का इंसान से अलगाव को रोकने से इनकार कर दिया है। AFP की रिपोर्ट के अनुसार इस्लामाबाद के निवासी अल्ताफ खान का कहना है, “हम कोरोना वायरस में विश्वास नहीं करते हैं, हम अल्लाह पर विश्वास करते हैं। जो कुछ भी होता है, वह अल्लाह की मर्जी से होता है।”

वहीं कुछ मौलवियों ने लोगों को मस्जिदों में नमाज अता करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस्लामाबाद के एक अन्य आदमी ने लोगों के मस्जिद जाकर नमाज अता करने पर बात करते हुए कहा कि लोग अल्लाह से मदद माँगने के लिए मस्जिद में जाते हैं क्योंकि वे डर गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि लोगों को मस्जिदों में जाने से रोकना आसान नहीं था, जब तक कि वे स्वेच्छा से सहयोग नहीं करते। दरअसल पिछले हफ्ते मार्च के अंत तक, देश के मजहबी विद्वानों ने केवल बीमार और बुजुर्ग लोगों को मस्जिद में जाकर नमाज अता करने से परहेज करने के लिए कहा था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिंध सरकार ने लोगों को मस्जिदों में जाने से रोकने के लिए दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक कर्फ्यू जैसी पाबंदी की घोषणा की थी, जो कि नमाज पढ़ने का समय होता है। वहीं पंजाब सरकार ने लोगों को अपने घरों में नमाज अता करने का फतवा जारी किया था। अन्य प्रांतों और संघीय सरकार द्वारा इसी तरह के निर्देश जारी किए गए थे। मस्जिदों ने भी लोगों से घर पर नमाज पढ़ने की घोषणा की है। हालाँकि, पाकिस्तानियों ने दिशा-निर्देशों की अवहेलना कर भारी संख्या में मस्जिदों में नमाज अता की, खासकर शुक्रवार को।

जामिया मस्जिद कुबा में नमाज पढ़वाने वाले ने कहा, “सरकार और पुलिस डर की भावना पैदा करने के लिए ऐसे बयान दे रही है। कुछ नहीं होगा। कराची 20 मिलियन का शहर है, सरकार हर नुक्कड़ या हर सभा में अपना फैसला लागू नहीं कर सकती है।”

कराची में न्यू मेमन मस्जिद और कुछ अन्य इलाकों में पुलिस और रेंजर्स के जवानों की भारी टुकड़ी की तैनाती भी की गई थी। कराची में, अधिकांश मस्जिदों ने सरकारी आदेशों का पालन किया है, हालाँकि कुछ मस्जिदों में नियमित रुप से नमाज अता की गई। प्रांत के अन्य कुछ शहरों में मस्जिदों को बंद का निर्देश दिया गया है, साथ ही कहा गया है कि तीन से पाँच लोग जुमे की नमाज अदा कर सकेंगे। 

हालाँकि, ग्रामीण क्षेत्रों में, विशेषकर गाँवों में, लॉकडाउन को सख्ती से लागू नहीं किया गया है। कम्बर शाहदकोट जिले के एक गाँव में रहने वाले अब्दुल हनन ने कहा, “हमने शुक्रवार को अपनी नमाज जामिया मस्जिद में उसी भीड़ के साथ अदा की।”

बलूचिस्तान में भी स्थिति बहुत अलग नहीं थी। एक पुलिस स्टेशन के पास स्थित प्रांतीय राजधानी क्वेटा की कंधारी मस्जिद में शुक्रवार की नमाज में भाग लेने के लिए एक बड़ी भीड़ आई थी। प्रांत के अन्य क्षेत्रों में अधिकांश मस्जिदें खुली थीं, लेकिन उपस्थिति कम थी।

इससे इतर पंजाब में, मस्जिदों ने लोगों से घरों पर नमाज अदा करने का अनुरोध किया है। शहरों में इन आदेशों का अधिकतर पालन किया गया लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति अलग थी क्योंकि लोग बड़ी संख्या में नमाज अदा करने के लिए बाहर आए थे।

लाहौर के एक इस्लामिक विश्वविद्यालय, दार उल इफ्ता जामिया नईमिया ने एक फतवा जारी करते हुए कहा कि जिन लोगों को सरकार द्वारा मस्जिदों में आने से रोका जाता है, वे समूह में नमाज़ अदा करने के लिए बाध्य नहीं थे।

मस्जिदों में जाने के मुद्दे पर पुलिस और समुदाय विशेष के बीच टकराव के मामले सामने आए हैं। कराची के लियाकताबाद इलाके में घौसिया मस्जिद के पास लोग इकट्ठा हुए और मस्जिद में घुसने से रोकने पर पुलिस पर पथराव किया। पुलिस ने कहा कि हमले में स्थानीय स्टेशन हाउस अधिकारी का आधिकारिक वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया था।

पहले चाकू पर थूक लगाया, फिर तरबूज काटा… और उसके बाद लोगों को बेचा: अब्दुल, अहमद सहित 3 पर FIR

मध्य प्रदेश के रायसेन का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक व्यक्ति थूक लगा कर फल बेचता हुआ दिखा था उसका नाम शेरू मियाँ है, जिसे पुलिस ने धर-दबोचा है। उसे जेल भेज दिया गया है। वीडियो वायरल होने के बाद उक्त फल विक्रेता के ख़िलाफ़ लोगों ने आवाज़ उठाई थी। वहीं उसकी बेटी का कहना था कि उसके अब्बा को ऐसे ही नोट गिनने की आदत है, जिसके कारण ऐसा हुआ। पुलिस के अनुसार, शेरू के परिवार के लोग कह रहे हैं कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है।

उधर ये मामला अभी शांत हुआ भी नहीं था कि दक्षिणी मध्य प्रदेश के बैतूल बाजार में एक नया मामला सामने आया है। आरोपित अब्दुल रफीक, सादी अहमद, रितेश मधाना ऑटो रिक्शा से तरबूज बेच रहे थे। ये घटना शुक्रवार (अप्रैल 3, 2020) शाम की है। ये लोग चाकू पर थूक लगा कर तरबूज काट रहे थे। इस दौरान पुरुषोत्तम यादव ने देखा कि पहले चाकू पर थूक लगाया जा रहा था और फिर तरबूज काटा जा रहा था।

इसकी सूचना पुरुषोत्तम यादव ने तत्काल बजरंग दल के विभाग संयोजक कृष्णकांत गावंडे को दी। उन्होंने कुछ युवाओं एवं प्रत्यक्षदर्शी के साथ थाने पहुँच कर मामले की रिपोर्ट दी। चाकू पर थूक लगाकर तरबूज काटकर बेचने की शिकायत पर बैतूल बाजार पुलिस ने 3 लोगों के खिलाफ FIR कर लिया है। पुलिस ने उनका तरबूज से भरा ऑटो भी जब्त कर लिया गया। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने इस घटना को देखा, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

फलों पर थूकने वाले शेरू मियाँ पर FIR पर बेटी ने कहा- अब्बू नोट गिनने की आदत के कारण ऐसा करते हैं

डॉक्टरों के साथ जमातियों की बदसलूकी अब कानपुर मेडिकल कॉलेज में: थूक-थूक कर फैलाई गंदगी, बैठते हैं साथ

मौलाना के बेटे ने दलित के चेहरे पर थूका, हाथ में काटा: लॉकडाउन में गुटखा-बीड़ी देने से कर दिया था इनकार

उधर फलों पर थूक वाले मामले में कोतवाली थाना प्रभारी जगदीश सिंह सिद्धू ने शेरू की गिरफ़्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पुलिस अब शेरू के मानसिक संतुलन की जाँच कराएगी, ताकि ये पता लग सके कि परिवार के दावों में कितनी सच्चाई है। उसके ख़िलाफ़ शुक्रवार (अप्रैल 3, 2020) को शिकायत मिली थी, जिसके बाद वीडियो की जाँच की गई। जाँच में वीडियो को सही पाया गया। ये वीडियो 16 फ़रवरी का है। जब ये वीडियो सामने आया तो ‘ऑल्ट न्यूज़’ ने उसे बचाने और पाक-साफ़ साबित करने के लिए एक कथित फैक्ट-चेक भी किया था। इसमें उसे ‘बुजुर्ग ठेले वाला’ बता कर उसे बचाने की कोशिश की गई थी और वीडियो को पुराना कहा गया था।

कई लोगों ने इस वीडियो को कोरोना वायरस के खतरों से भी जोड़ा था। टिक-टॉक पर इस वीडियो को दीपक नामदेव ने शेयर किया था और पुलिस में शिकायत भी उन्होंने ही की थी। इससे कुछ दिनों पहले एक अन्य वीडियो सामने आया था, जिसमें एक सब्जी विक्रेता सब्जियों को नाली में डाल कर भिगोते हुए दिख रहा था। कई लोगों ने ऐसे फल व सब्जी विक्रेताओं के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की थी।

जम्मू-कश्मीर में सेना को बड़ी कामयाबी, 24 घंटे में 9 आतंकी ढेर

लॉकडाउन में भी जम्मू-कश्मीर में सेना का आतंकियों के खिलाफ सफाई अभियान जारी है। पिछले 24 घंटों में सेना ने कश्मीर घाटी में 9 आतंकियों को मार गिराया है। 4 आतंकियों को शनिवार (अप्रैल 4, 2020) को सेना ने दक्षिणी कश्मीर के बतपुरा में मार गिराया। वहीं 5 आतंकियों को रविवार (अप्रैल 5, 2020) को एलओसी के पास केरन सेक्टर में ढेर किया। 

आतंकियों के खिलाफ चले इस ऑपरेशन में भारतीय सेना के एक जवान वीरगति को प्राप्त हो गए जबकि दो जवान जख्मी हैं। भारी बर्फबारी और खराब मौसम की वजह से घायलों को अस्पताल लाने में मुश्किलें हो रही हैं। फिलहाल सेना का ऑपरेशन जारी है।

शनिवार को मारे गए आतंकियों ने पिछले 12 दिनों में चार निर्दोष नागरिकों की हत्या की थी। ये आतंकी हिजबुल मुजाहिद्दीन से जुड़े थे। पुलिस ने हिजबुल मुजाहिदीन के चारों आतंकियों को ट्रैक किया और शनिवार की सुबह एक ऑपरेशन चलाकर उन्हें मार गिराया।

विक्टर फोर्स के जीओसी मेजर जनरल ए सेनगुप्ता ने बताया कि मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों की शिनाख्त अनंतनाग के आरवनी के मोहम्मद अशरफ मलिक, दमहाल हाजीपुरा के शाहिद सिद्दीक और चवालगाम के वकार यत्तू के तौर पर हुई। चौथा टंकी एजाज अहमद नायकू उर्फ मुसा इनका सरगना था और चिमर का रहने वाला था। आतंकियों के पास से एक एसएलआर, एक एके-47, एक इंसास और चीन निर्मित पिस्टल के अलावा मैगजीन भी मिली है।

वहीं, सेना ने केरन सेक्टर में सीमा पार से भारत में घुसने की आतंकियों की कोशिशों को नाकाम कर दिया। खराब मौसम का फायदा उठाते हुए रविवार को पाँच आतंकी भारत में दाखिल होने की फिराक में थे। सेना ने मोर्चा सँभाला और खराब मौसम की परवाह न करते हुए सभी आतंकियों को ढेर कर दिया।

इससे पहले शुक्रवार को सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर के सोपोर और हंदवारा इलाके से आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के चार सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया था। उन्होंने बताया कि आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर गुरुवार रात को कुपवाड़ा जिला अंतर्गत हंदवारा इलाके के शालपोरा गाँव में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस दौरान लश्कर के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने कहा कि इनकी पहचान आजाद अहमद भट और अल्ताफ अहमद बाबा के रूप में हुई है। इनके कब्जे से दो पिस्तौल और दो हथगोले बरामद किए गए हैं।

सबा नकवी बेपर्दा: जमात की हरकत ढकने के लिए शेयर किया मंदिर में श्रद्धालुओं का पुराना Video

जब से तबलीगी जमात की करतूत सामने आई है लिबरल गैंग खार खाए बैठा है। वह जमातियों के गुनाहों पर पर्दा डालने के लिए हिंदुओं को कसूरवार ठहराने का हर जतन कर रहा है। इस क्रम में फेक न्यूज, पुराने वीडियो तक सोशल मीडिया में पोस्ट किए जा रहे। इस गिरोह में कथित पत्रकार सबा नकवी भी है जो हिंदुओं के खिलाफ जहर फैलाने का कोई मौका नहीं छोड़ती। अब उसने एक पुराना विडियो शेयर कर यह जताने की कोशिश की है कि हिंदू भी लॉकडाउन का उल्लंघन कर रहे हैं।

नकवी ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें मंदिर में कई श्रद्धालु दर्शन हेतु जाते दिख रहे हैं। नकवी ने दावा किया कि यह घटना तबलीगी जमात के आयोजनों जैसा ही है और हिन्दुओं ने भी बड़े पैमाने पर लॉकडाउन का उल्लंघन किया है। उसने दावा किया कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किए बिना और सरकारी निर्देशों की अवहेलना करते हुए भक्तगण मंदिरों में टूट पड़े हैं। लेकिन, सच्चाई कुछ और ही है। चोरी पकड़े जाने के बाद नकवी ने अपना ये ट्वीट डिलीट कर दिया है।

18 मार्च को यूट्यब पर पोस्ट किया गया था ये वीडियो

सबा नकवी ने जो विडियो शेयर किया, वो 18 मार्च का है। तब न तो पीएम मोदी ने ‘जनता कर्फ्यू’ का ऐलान किया था और न ही देश में लॉकडाउन लगाया गया था। ये विडियो अयोध्या का है। सबा नकवी ने 18 मार्च के विडियो को 15 दिनों के बाद शेयर किया और लिखा कि ये लॉकडाउन का उल्लंघन है। उस समय तक कई मंदिरों में दर्शन चालू थे और लोग बाहर भी निकल रहे थे। फिर सबा नकवी के अनुसार, लोगों ने तब लॉकडाउन का उल्लंघन किया जब लॉकडाउन लगाया ही नहीं गया था। पीएम मोदी ने 19 मार्च को ‘जनता कर्फ्यू’ का ऐलान किया, जिसका पालन 22 मार्च को किया जाना था।

ये वीडियो 18 मार्च का है, जिसे नकवी ने अप्रैल में शेयर किया

बाद में यूपी सरकार और केंद्र सरकार ने मिल कर अयोध्या में मास गैदरिंग रोकने की पहल की, जिसके बाद श्रद्धालुओं की संख्या कम हुई। लेकिन, सबा नकवी ने इस घटना की तुलना उस घटना से कर दी, जिसमें कई दिनों तक लगातार पुलिस-प्रशासन की बातों की अवहेलना करते हुए लॉकडाउन का उल्लंघन किया जाता रहा। लॉकडाउन के बावजूद दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ में मजहबी कार्यक्रम आयोजित होते रहे। उल्लेखनीय है कि दिल्ली में लॉकडाउन के ऐलान से काफी पहले ही 200 लोगों के जुटान पर रोक लगा दी गई थी। बावजूद इसके मरकज में ह​जारों लोग थे। इनमें विदेश भी थे। आज मरकज कोरोना वायरस संक्रमण का देश में मुख्य केंद्र बनकर उभरा है।

कानपुर के हॉस्पिटल में जमाती इकट्ठे होकर पढ़ रहे नमाज, सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ रही धज्जियाँ: देखें Video

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज से निकले कोरोना संदिग्ध पूरे देश के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। दिल्ली और यूपी के कई अस्पतालों के डॉक्टरों ने शिकायत की है कि जमात के लोग जाँच और इलाज कराने में मनमानी कर रहे हैं। कानपुर में जमातियों से परेशान डॉक्टरों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पूरे मामले की रिपोर्ट भेजी। इसमें कहा गया कि ये लोग सोशल डिस्टेंसिंग का मजाक उड़ा रहे हैं। अब टाइम्स नाउ का एक वीडियो सामने आया है, जो इस बात की पुष्टि करता है।

टाइम्स नाउ के मुताबिक जमात के लोग सोशल डिस्टेंसिंग को ताक पर रखकर एक साथ जमा होते हैं और फिर समूह में नमाज अदा करते हैं। इससे पहले कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या आरती लाल चंद्दानी ने जमातियों की शिकायत करते हुए कहा था, “निजामुद्दीन के मरकज में हुए आयोजनों में शामिल 22 लोग हमारे यहाँ आए थे। डॉक्टरों की टीम के साथ वार्ड ब्वाय, नर्स, टेक्निशियन सभी पूरे सुरक्षा किट के साथ मरीजों की सेवा कर रहे थे। लेकिन जमात के लोग डॉक्टरों से बदसलूकी कर रहे हैं। इतना ही नहीं उनके साथ बात-बात पर बहस कर माहौल खराब करने का काम कर रहे है। इसके साथ ही क्वारंटाइन वार्ड में थूक-थूक कर गंदगी फैला रहे हैं।”

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन एक मजबूत कदम के रूप में सामने आया था। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग एकमात्र उपाय है। पिछले दिनों रिपोर्ट भी आईं थीं कि भारत जैसे देश में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ने का औसत गंभीर रूप से प्रभावित और विकसित देशों से काफी कम है। 

ऐसे में ये 21 दिनों का लॉकडाउन देश को सुरक्षित रास्ते पर ले जा रहा था। लेकिन तबलीगी जमात के आयोजनों ने एक बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। मरकज में विदेशियों सहित दो हजार से ज्यादा लोग इकट्ठा थे। इनमें से सैकड़ों संक्रमित पाए गए हैं।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के एमएमजी हॉस्पिटल और सुंदरदीप आयुर्वेदिक कॉलेज में जमातियों के महिला स्टाफ के साथ बदतमीजी की घटनाएँ सामने आई थी। एमएमजी हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में रखे गए तबलीगी जमाती नंगे घूम रहे थे। अश्लील वीडियो चलाने के साथ ही ये जमाती नर्सों को गंदे-गंदे इशारे कर रहे थे और नर्सों से बीड़ी-सिगरेट की माँग भी कर रहे थे। इनके खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। वहीं सुंदरदीप आयुर्वेदिक कॉलेज में भी इन जमातियों ने महिला स्टाफ के साथ अभद्रता की थी।

जमातियों को कार में बिठा कॉन्स्टेबल इमरान ने पार कराया बॉर्डर, रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद सस्पेंड

दिल्ली पुलिस ने अपने उस कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया है, जिसने तबलीगी जमात के सदस्यों की मदद की थी। उक्त कॉन्स्टेबल ने जमातियों को दिल्ली-यूपी बॉर्डर पार कराने में मदद की थी। उसका नाम इमरान है। वह दिल्ली पुलिस की सिक्योरिटी यूनिट में पदस्थापित था। गुरुवार (अप्रैल 2, 2020) को उसने अपनी कार में जमातियों को बिठा कर उन्हें यूपी पहुँचाया था। गाजियाबाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया था। रंगे हाथों पकडे जाने के बाद इमरान से यूपी पुलिस ने पूछताछ की थी।

गाजियाबाद पुलिस ने इमरान के सम्बन्ध में दिल्ली पुलिस को सूचना दी। अब दिल्ली पुलिस यह पता करने में जुटी है कि उन जमातियों ने इमरान से कैसे संपर्क साधा या फिर इमरान उन्हें कैसे जानता था। दिल्ली पुलिस को आशंका है कि इमरान ने पहले भी जमातियों को बॉर्डर पार कराया होगा। लिहाजा यह पता लगाना आवश्यक है कि उसने कितने लोगों की अवैध रूप से मदद की है। पुलिस उन सभी के बारे में पता कर उन्हें ट्रेस करने में जुटी हुई है। इमरान जिन्हें लेकर जा रहा था, वे अमरोहा के रहने वाले थे।

इमरान के साथ-साथ वे सभी लोग भी दबोचे जा चुके हैं, जिसे उसने बॉर्डर पार कराने का प्रयास किया था। उन सभी को आइसोलेशन में रखा गया है। इमरान उत्तर प्रदेश के लोनी का रहने वाला है। बता दें कि तबलीगी जमात के 2500 लोग दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ में छिपे हुए थे। यहाँ से निकल कर करीब 1500 देश के विभिन्न राज्यों में गए हैं। इनमें से अधिकतर को पुलिस ट्रेस कर चुकी है जबकि बाकियों की तलाश जारी है। कई जिलों में इनलोगों के मजहबी कार्यक्रम हुए थे और लॉकडाउन के बाद जो जहाँ थे, वहीं छिप गए। कई क्षेत्रों में पुलिस जब समुदाय विशेष बहुल इलाक़ों में इन जमातियों का पता लगाने गई तो पुलिस पर ही हमले किए गए।

इमरान मामले में अभी तक यूपी पुलिस ने कोई केस फाइल नहीं किया है। उसे गाजियाबाद के टीला मोड़ से दबोचा गया था। तबलीगी जमात वालों के कारण भारत में कोरोना वायरस के नए मामलों में काफ़ी वृद्धि आई है। जितने भी नए मरीज सामने आ रहे हैं, उनमें अधिकतर जमाती ही हैं।