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AAP सांसद संजय सिंह, कॉन्ग्रेस नेता उदित राज के संपर्क में था दिल्ली दंगे कराने वाला PFI सरगना: दिल्ली पुलिस सूत्र

आज गुरुवार (मार्च 12, 2020) को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने कट्टरपंथी संगठन पीएफआई के सरगना परवेज़ और सेक्रेटरी इलियास को धर-दबोचा। दोनों पर शाहीन बाग प्रदर्शन की फंडिंग और दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों को भड़काने का आरोप है। हाल ही में गिरफ्तार किए गए आईएसआईएस से जुड़े दंपति के लगातार संपर्क में भी दोनों थे। अब जाँच की आँच आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस तक पहुँच रही है। आप के सांसद संजय सिंह और ख़ुद को सबसे बड़ा दलित नेता बताने वाले कॉन्ग्रेस के उदित राज से भी परवेज़ लगातार संपर्क में था। पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि संजय सिंह के तार दंगाइयों से जुड़े हैं।

इसके अलावा पीएफआई और दंगाइयों की फंडिंग की भी जाँच की जा रही है। पीएफआई ने 73 बैंक एकाउंट्स खोल रखे थे, जिनमें 120.5 करोड़ रुपए जमा किए गए। रेहाब इंडिया फाउंडेशन से भी इसके लिंक जुड़े हुए हैं। 17 विभिन्न बैंकों में एकाउंट्स खोले गए थे। पीएफआई के बारे में ये बात भी पता चली है कि पिछले कुछ महीनों में उसे अधिकतर डोनेशन कैश के रूप में मिले हैं। इनमें से दो तिहाई धन बैंक में जमा किया गया था। चौंकाने वाली बात ये है कि एक तिहाई धन पीएफआई के शाहीन बाग़ स्थित मुख्यालय में रखा गया था।

पीएफआई के लोग देश भर में घूम कर अपने लोगों से डोनेशन के रूप में कैश पेमेंट लेते थे। इसके बाद इन रुपयों को वो हर क्षेत्र में अपने ख़ास हैंडलर्स के हवाले कर दिया करते थे। वो सभी एरिया हैंडलर्स दिल्ली के शाहीन बाग़ स्थित पीएफआई के मुख्यालय आकर उन रुपयों को जमा कर देते थे। मोहम्मद परवेज़ आलम पीएफआई दिल्ली का सरगना है और उसने सीएए विरोधी प्रदर्शनों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था। पीएफआई की फंडिंग का अधिकतर हिस्सा सीएए के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन, उपद्रव और दंगों पर खर्च करने की बात कही जा रही है।

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह और कॉन्ग्रेस नेता उदित राज से पीएफआई के सरगना की लगातार बातचीत होती थी। इसके लिए कॉल, मैसेज और व्हाट्सप्प का इस्तेमाल किया जाता था। कपिल मिश्रा कई बार कहते रहे हैं कि अगर दंगाई ताहिर हुसैन के कॉल डिटेल की जाँच हो तो ये साफ़ हो जाएगा कि दंगों के समय वो संजय सिंह से लगातार संपर्क में था। दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया है कि मोहम्मद परवेज़ कॉन्ग्रेस के कई नेताओं से संपर्क में था। मोहम्मद परवेज़ कई भड़काऊ व्हाट्सप्प ग्रुप्स से भी जुड़ा हुआ है, जो दंगा फैलाने का काम करते हैं।

परवेज़ एक ‘भीम आर्मी टॉप-100’ नामक व्हाट्सप्प ग्रुप से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा वो एक ‘यूनिफिकेशन ऑफ मुस्लिम लीडरशिप’ नाम के ग्रुप से भी जुड़ा हुआ था। अब देखना ये है कि ताबड़तोड़ हुई गिरफ़्तारियों के बाद और कितने राज़ खुलते हैं और कितने सफेदपोशों की पोल खुलती है। ये तो स्पष्ट हो गया है कि इन दंगो के पीछे एक बहुत बड़ा राजनीतिक संरक्षण था, जो सीएए विरोध से उपजा था।

लालू ने कॉन्ग्रेस को दिया धोखा, नहीं दी राज्यसभा सीट: चुनाव से पहले बड़ी टूट का दावा

बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले राज्य के सियासी घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। फिलहाल राज्य से राज्यसभा की पॉंच सीटों के लिए चुनाव होने हैं। इसे विधानसभा चुनाव से पहले अपने-अपने खेमे को मजबूती देने के अवसर के तौर पर देखा जा रहा था। लेकिन, विपक्षी गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं लग रहा है। बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस में बड़ी टूट का दावा कर सरगर्मियॉं और बढ़ा दी है। चौधरी पिछले विधानसभा चुनाव के वक्त कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हुआ करते थे।

उन्होंने कहा है कि कॉन्ग्रेस का शीर्ष नेतृत्व लालू यादव के सामने नतमस्तक है। उसे वादे के हिसाब से राजद ने राज्यसभा की सीट भी नहीं दी। इससे प्रदेश के नेता खुद को लाचार महसूस कर रहे हैं और महागठबंधन में पार्टी और अपने नेताओं को अहमियत नहीं दिए जाने से नाराज हैं। असल में राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों का ऐलान हो गया है। मौजूदा गणित के हिसाब से एनडीए के तीन और महागठबंधन के दो लोगों का उच्च सदन के लिए चुना जाना तय है। जदयू और राजद ने दो-दो और भाजपा ने एक उम्मीदवार का नाम घोषित किया है। इन सभी का राज्यसभा जाना तय है। इन सभी उम्मीदवारों को 13 मार्च तक अपना नॉमिनेशन दाखिल करना होगा। जदयू की तरफ से हरिवंश और रामनाथ ठाकुर फिर से राज्यसभा जाएँगे। वहीं भाजपा ने वरिष्ठ नेता सीपी ठाकुर के बेटे विवेक ठाकुर को टिकट दिया है। राजद ने प्रेमचंद गुप्ता और अमरेन्द्रधारी सिंह को उम्मीदवार बनाया है।

इस तरह राजद ने लोकसभा चुनाव के वक्त कॉन्ग्रेस से किया वादा पूरा नहीं किया है। उस समय महागठबंधन ने सार्वजनिक रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि कॉन्ग्रेस लोकसभा की नौ सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उसे राज्यसभा चुनाव के वक्त एक सीट राजद अपने कोटे से देगी। लेकिन, दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारकर राजद वादे से मुकर गई है। कहा जा रहा कि सब कुछ राजद सुप्रीमो लालू यादव ने तय किया है। चारा घोटाले में सजा भुगत रहे लालू फ़िलहाल राँची रिम्स में इलाजरत हैं।

ऐसा नहीं ​है कि कॉन्ग्रेस ने इस दौरान राजद को उसके वादे की याद नहीं दिलाई। पार्टी के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने बकायदा चिट्ठी लेखकर वादे की याद दिलाई थी और उम्मीद जताई थी कि राजद नेता अपने वचन का पालन करेंगे। जवाब में राजद ने कहा है कि वह वादा ‘विशेष परिस्थिति’ में किया गया था। राजद सांसद मनोज झा ने कहा:

“लोकसभा चुनावों के वक्त जब तेजस्वी यादव ने वादे किए थे, तब राजद लोकसभा की 40 में से 25 सीटों पर लड़ने की तैयारी कर रही थी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं और पार्टी के इतिहास में पहली बार हमें 20 से कम सीटों पर लड़ना पड़ा। यह याद रखा जाना चाहिए कि लालू प्रसाद यादव उस वक्त भी सोनिया गाँधी के साथ खड़े रहे हैं, जब उनकी ही पार्टी के नेता उनके साथ पूरी तरह से नहीं खड़े थे। पिछले साल वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी के निधन के बाद राजद के पास केवल चार राज्यसभा सदस्य ही बचे थे। उनके निधन के बाद खाली हुई सीट पर बीजेपी ने जदयू की मदद से कब्जा जमा लिया था। राज्यसभा में हमें 5 सीटों की आवश्यकता है। कॉन्ग्रेस हमारे संकट को समझे और साथ दे।

कॉन्ग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल ने राजद को लिखा पत्र

अब राजद नेता दावा कर रहे हैं कि उन्होंने कॉन्ग्रेस के साथ राय-विचार करने के बाद ही सीटों की घोषणा की है। जहाँ भाजपा-जदयू में राज्यसभा सीटों को लेकर कोई मतभेद नहीं है, कमज़ोर होती कॉन्ग्रेस और विधानसभा में संख्याबल ले बावजूद राज्य के सियासी पटल पर जूझती राजद के बीच विवाद से पता चलता है कि आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान सीट शेयरिंग का फार्मूला तय करना आसान नहीं होगा। वो भी तब, जब जीतन राम माँझी, मुकेश साहनी और उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेता शरद यादव को चेहरा बनाने की बात कर के राजद पर दबाव बनाने में लगे हुए हैं।

12-03-93 के 12 धमाके: पवार ने मस्जिद बंदर में धमाके की कहानी गढ़ी, समुदाय विशेष को पीड़ित बताया

उत्तर-पूर्वी दिल्ली हाल ही में हिंदू विरोधी दंगों की आग में जला है। इन दंगों पर राजनीतिक रोटी सेंकने और समुदाय विशेष को पीड़ित बताने के प्रपंच में शामिल नेताओं में एनसीपी के मुखिया शरद पवार का नाम भी शामिल है। उनका कहना है कि पीएम ‘कपड़ों से दंगाइयों को पहचाने जाने’ की बात कर मजहब विशेष पर हमला कर रहे हैं। वे मोदी-शाह पर समाज के विभाजन का आरोप मढ़ते हैं। दंगों के लिए भी वे बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर और कपिल मिश्रा जैसों को जिम्मेदार बताते हैं।

मुस्लिमो को पीड़ित दिखाने के लिए झूठ का सहारा लेना पवार की पुरानी आदत है। ऐसा उन्होंने 1993 के मुंबई धमाकों के वक्त भी किया था। 12 मार्च 1993 को मुंबई को दहलाने वाले 12 सीरियल बम धमाके हुए। लेकिन पवार ने 13वें धमाके की कहानी गढ़ी। बताया कि एक धमाका मस्जिद बंदर में भी हुआ था। चूँकि इन धमाकों में हिन्दू बहुल इलाकों को निशाना बनाया गया था, तो पवार ने कट्टरपंथियों को पीड़ित की तरह पेश करने के लिए मस्जिद में विस्फोट की कहानी गढ़ी। उन्होंने कट्टरपंथी आतंकियों को बचाने के लिए बम को ‘साउथ इंडियन आतंकियों’ वाला भी बताया।

इस हमले को अंजाम देने वाले याकूब मेमन, टाइगर मेमन, दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील जैसे लोग कौन थे, ये किसी से छिपा नहीं है। आज पवार आरोप लगाते हैं कि भाजपा साम्प्रदायिकता को हवा देकर देश की राजधानी को जला रही है। साथ ही वो दंगाइयों और पुलिस के बाच गठजोड़ की बात करते हैं। वही पुलिस, जिसके हेड कांस्टेबल रतन लाल दंगाइयों द्वारा मार डाले गए। डीसीपी अमित शर्मा किसी तरह लिंच होने से बचे।

शरद पवार का कहना है कि उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द्र को बरकरार रखने के लिए झूठ बोला था। उस समय महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे पवार ने मुस्लिमों को भी पीड़ित दिखाने के लिए बम ब्लास्ट्स की संख्या बढ़ा दी थी। दूसरे शब्दों में कहें तो उन्होंने एक अतिरिक्त बम ब्लास्ट की ‘खोज’ कर ली थी, जो असल में हुआ ही नहीं था। भले ही आपको यह अविश्वसनीय लगे लेकिन यही सच है।

ये ऐसा पहला आतंकी हमला था, जब भारत में आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया था। 26/11 तरह ये हमले भी पूर्व नियोजित थे और इन्हें काफी प्लानिंग के बाद अंजाम दिया गया था। उन ब्लास्ट्स में 300 के क़रीब लोग काल के गाल में समा गए थे, वहीं 1400 के क़रीब लोग घायल हुए थे। यह भारत की ज़मीन पर आतंकी हमलों में हुई अब तक की सबसे बड़ी क्षति है।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार ने हमलों के तुरंत बाद दूरदर्शन स्टूडियो में जाकर बोला था और घोषणा की थी कि कुल 13 धमाके हुए हैं। उन्होंने न जाने कहाँ से एक अतिरिक्त विस्फोट की ‘खोज’ कर ली थी।

पवार ने दावा किया था कि उनके इस झूठ के लिए उनकी प्रशंसा की गई थी। एनसीपी सुप्रीमो ने इस हमले में समुदाय विशेष को बराबर पीड़ित दिखाने व सच्चाई को दबाने के लिए झूठ का सहारा लिया था। ऐसा स्वयं पवार ने स्वीकार किया था। उन्होंने इसे ‘संतुलन’ के लिए किया गया प्रयास बताया था। हमले के 22 वर्षों बाद पवार ने पुणे में आयोजित 89वीं मराठी साहित्यिक बैठक को सम्बोधित करते हुए स्वीकार किया था कि उन्होंने जान-बूझकर एक अतिरिक्त बम ब्लास्ट की कहानी गढ़ी ताकि एक विशेष मजहब को पीड़ित दिखा कर सांप्रदायिक तनाव से बचा जाए क्योंकि ‘पाकिस्तान ऐसा ही चाहता था’। उन्होंने कहा कि उन्हें भी यह पता था कि ये सभी धमाके हिन्दू बहुल क्षेत्रों में हुए थे।

पवार ने कहा कि उन्होंने दूरदर्शन स्टूडियो जाकर ऐसा कहा क्योंकि यह सांप्रदायिक तनाव की स्थिति को बचाने के लिए सही था। वे लोगों को इस बात का एहसास दिलाना चाहते थे कि मजहब के लोग भी इस विस्फोट के शिकार हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण आयोग द्वारा उनके इस क़दम की सराहना की गई थी। यहाँ तक की पवार ने उस हमले का दोष लिट्टे पर भी मढ़ा था। उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम दंगे रोकने के लिए ऐसा करने का दावा किया। 78 वर्षीय पवार भारत सरकार में केंद्रीय रक्षा व कृषि मंत्री रह चुके हैं।

12 मार्च 1993 में इन स्थानों पर धमाके हुए थे- मुंबई स्टॉक एक्सचेंज, नरसी नाथ स्ट्रीट, शिव सेना भवन, एयर इंडिया बिल्डिंग, सेंचुरी बाज़ार, माहिम, झावेरी बाज़ार, सी रॉक होटल, प्लाजा सिनेमा, जुहू सेंटॉर होटल, सहार हवाई अड्डा और एयरपोर्ट सेंटॉर होटल। इस धमाके का साज़िशकर्ता दाऊद इब्राहिम और टाइगर मेमन था। इसकी पूरी साज़िश पाकिस्तान में रची गई थी। उस दिन को आज भी ब्लैक फ्राइडे के नाम से जाना जाता है।

PFI का सरगना परवेज और सचिव इलियास दबोचा गया: दिल्ली दंगों की साज़िश रची, ISIS से भी लिंक

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगा भड़काने के आरोप में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कट्टरपंथी इस्लामी संगठन संगठन पीएफआई के सरगना परवेज और संगठन के सचिव इलियास को गिरफ़्तार कर लिया है। दिल्ली पुलिस ने गुरुवार (मार्च 12, 2020) को ये कार्रवाई की। शाहीन बाग़ प्रदर्शन और दिल्ली दंगों में इनकी भूमिका बताई जाती है। दोनों पर नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगा भड़काने की साज़िश रचने का आरोप है। दोनों के आईएसआईएस के आतंकी दम्पति से संपर्कों की भी जाँच की जा रही है। इस दम्पति को हाल ही में दबोचा गया था।

इससे पहले दिल्ली हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने PFI के दानिश को गिरफ्तार किया था। जानकारी के मुताबिक अभी तक दिल्ली पुलिस को दानिश से की गई पूछताछ में कई खुलासे सामने आए हैं। दिल्ली पुलिस की पूछताछ में दानिश ने बताया है कि शाहीन बाग के लिए PFI ने लोगों से धन एकत्र किया था इसके बाद दिल्ली में हुई हिंसा के लिए पहले को धन जुटाया और फिर दंगाइयों को PFI ने हथियार भी उपलब्ध कराए थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने दिल्ली के दंगों में PFI की भूमिका की जाँच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक, दानिश की शिनाख्त के आधार पर शाहीन बाग़ प्रदर्शन की फंडिंग और हिंसा भड़काने में शामिल रहे अन्य लोगों की धरपकड़ के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। साथ ही इन दंगों में शामिल दंगाइयों के खिलाफ सबूत जुटाने का काम भी दिल्ली पुलिस द्वारा किया जा रहा है।

इससे पहले दिल्ली के जामिया नगर से दिल्ली पुलिस ने एक आतंकी दम्पति को गिरफ्तार किया था। कश्मीर के रहने वाले इस दम्पति पर आईएस के खुरासान मॉड्यूल से संबंध रखने का आरोप है। रविवार (8 मार्च, 2020) की सुबह इनकी गिरफ्तारी के बाद इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया था कि दम्पति आईएस-खुरासान प्रोविंस (आईएसकेपी) के आला आतंकियों से सम्पर्क में था और वर्तमान में नए नागरिकता कानून के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों का फायदा उठा, मुस्लिम युवाओं को भड़का कर आतंकी कार्यवाही करने के लिए उकसा रहा था।

वो शिवा जिसने शिवाजी की जान बचाने के लिए ख़ुद का बलिदान दिया: जब 300 मराठों ने 1 लाख की फ़ौज को हराया

1660 में अली आदिलशाह ने अपने जनरल सिद्धि जौहर को छत्रपति शिवाजी के साथ लड़ने के लिए भेजा था। 1660 के मध्य में सिद्धि जौहर ने पन्हाला किले को घेर लिया। छत्रपति शिवाजी उस वक्त किले में ही थे। आधी रात उन्होंने पन्हाला से हटने का फैसला किया। वीर मराठा सरदार बाजीप्रभु देशपांडे, शंभू सिंह जाधव, फुलजी, बंदल ने 300 सैनिकों के साथ छत्रपति शिवाजी को कवर दिया ताकि वे शेष सेना के साथ सुरक्षित निकल सके।

अफजल खान और प्रतापगढ़ में बीजापुरी सेना की पराजय के बाद से शिवाजी ने बीजापुरी क्षेत्र में मजबूत पकड़ बना रखी थी। कुछ दिनों के भीतर मराठों ने पन्हाला किले (कोल्हापुर शहर के पास) पर कब्जा कर लिया। इस बीच, नेताजी पालकर के नेतृत्व में एक और मराठा बल बीजापुर की ओर सीधे बढ़ा। बीजापुरी सेना हमले को दोहराया। शिवाजी, उनके कुछ कमांडरों और सैनिकों को पन्हाला किले से पीछे हटने के लिए मजबूर किया।

1660 में आदिल शाह ने बीजापुर सेना भेजी जिसका नेतृत्व अबीसिनियन जनरल सिद्धि जौहर ने किया था। शिवाजी के स्थान की खोज करते हुए, जौहर ने पन्हाला की घेराबंदी की। नेताजी पालकर ने बीजापुरी घेराबंदी को तोड़ने का बार-बार प्रयास किया, लेकिन वे विफल रहे।

अंत में, एक बहुत दुस्साहसी और उच्च जोखिम वाली योजना बनाई गई और कार्रवाई की गई। शिवाजी, बाजी प्रभु देशपांडे ने सैनिकों की एक चुनिंदा बैंड के साथ रात में घेराबंदी को तोड़ने और विशालगढ़ को बचाने का प्रयास किया। बीजापुरी सेना को धोखा देने के लिए शिवा काशिद ने स्वेच्छा से राजा की तरह कपड़े पहने और खुद को पकड़वा लिया।

तूफानी पूर्णिमा की रात (गुरु पूर्णिमा की रात, आषाढ़ पूर्णिमा) को 600 चुनिंदा पुरुषों का एक बैंड, जो बाजी प्रभु और शिवाजी के नेतृत्व में था, घेराबंदी से निकल गया। बीजापुरी बल द्वारा उनका पीछा किया गया। जैसा कि योजना बनाई गई थी, शिवा काशिद पकड़े गए और उन्हें बीजापुरी कैंप में ले जाया गया। वे चाहते ही थे कि शिवाजी की जान बचाने के लिए उन्हें पकड़ लिया जाए। इस बलिदान ने पीछे हटते मराठा बल को कुछ साँस लेने का मौका दिया। शिवा काशिद एक नाई थे। उनकी शक्ल शिवाजी से मिलती थी। उनके बलिदान से मराठा साम्राज्य व पूरा भारत कृतज्ञ हुआ और छत्रपति वहाँ से सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे।

जैसे ही बीजापुरी बल को अपनी गलती का एहसास हुआ उन्होंने फिर से पीछा करना शुरू कर दिया। उनका नेतृत्व सिद्धि जौहर का दामाद सिद्धि मसूद कर रहा था। घोड़खिंड (घोड़े का दर्रा) के पास मराठों ने एक अंतिम रुख अपनाया। शिवाजी और मराठा सेना के आधे लोगों को विशालगढ़ के लिए भेज दिया, जबकि बाजी प्रभु, उनके भाई फूलजी और लगभग 300 आदमियों ने मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। 18 घंटे से अधिक समय तक घोषदंड दर्रे में 10,000 बीजापुरी सैनिकों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।

कई गाथाएँ इस रियर-गार्ड कार्रवाई के दौरान मराठों द्वारा प्रदर्शित वीरता के करतबों का वर्णन करती हैं। बाजी प्रभु को “दंड पट्ट” नामक एक हथियार का उपयोग करने की कला में महारत हासिल थी। गंभीर रूप से घायल होने के वाले बाजी प्रभु ने लड़ाई जारी रखी। अपने लोगों को तब तक लड़ते रहने के लिए प्रेरित किया जब तक कि शिवाजी ने विशालागढ़ सुरक्षित रूप से पहुॅंचने का संकेत तीन तोपों से गोलाबारी कर नहीं दिया। यहॉं यह जानना जरूरी है कि जब शिवाजी ने 300 लोगों के साथ विशालगढ़ का रुख किया था तो किला पहले से ही सूर्यपुरा सुर्वे और जसवंतराव दलवी नाम के बीजापुरी सरदारों के घेरे में था। शिवाजी को अपने 300 आदमियों के साथ किले तक पहुँचने के लिए सुर्वे को हराना पड़ा।

शिवाजी ने कुछ मवाले सैनिकों के साथ उबरखिंद की लड़ाई में शाहिस्ता खान के एक सरदार कलतल्फ खान को हराया। औरंगजेब ने अपने मामा शाहिस्ता खान को बादीबागम साहिबा, आदिशाही सल्तनत के अनुरोध पर 1,50,000 से अधिक शक्तिशाली सेना के साथ भेजा। अप्रैल 1663 में छत्रपति शिवाजी ने व्यक्तिगत रूप से लाल महल पुणे में शाहिस्ता खान पर आश्चर्यजनक हमला किया। ख़ान के बेटे मारे गए और मुग़ल भाग खड़े हुए।

छत्रपति शिवाजी ने आधी रात को 300 सैनिकों के साथ हमला किया, जबकि लालमहल में शाहिस्ता खान के लिए 1,00,000 सैनिकों की कड़ी सुरक्षा थी। इस घटना में छत्रपति शिवाजी ने शाहिस्ता खान के खिलाफ दुनिया के उल्लेखनीय कमांडो ऑपरेशन करने के लिए महान प्रबंधन तकनीक दिखाई। छत्रपति शिवाजी ने 1664 में मुगल साम्राज्य के धनी शहर सूरत में दबिश दी। सूरत मुगलों की वित्तीय राजधानी थी। ब्रिटिश ने शाहजहाँ बादशाह की अनुमति से सूरत में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की थी।

शिवाजी द्वारा सूरत की घटना के कारण औरंगजेब नाराज हो गया। उन्होंने शिवाजी को हराने के लिए मिर्जा जय सिंह और दलेर खान को भेजा। मुगल की सेना ने पुरंधर किले पर कब्जा कर लिया। छत्रपति शिवाजी 23 किले और 4,00,000 रुपए देने के लिए सहमत हुए।

औरंगजेब ने अपनी 50 वीं जयंती के अवसर पर छत्रपति शिवाजी को आगरा आमंत्रित किया। हालांकि, 1666 में अदालत में औरंगजेब ने उन्हें अपने दरबार के सैन्य कमांडरों के पीछे खड़ा कर दिया। शिवाजी क्रोधित हो गए और उन्होंने उस उपहार को अस्वीकार कर दिया जो औरंगजेब द्वारा पेश किया गया था और दरबार से बाहर निकल गए। उन्हें औरंगजेब द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। छत्रपति शिवाजी ने शानदार योजना बनाई और आगरा से निकलने में में सफल रहे। उन्होंने औरंगज़ेब के घर की कस्टडी से निकलने के लिए मिठाई के डब्बों का इस्तेमाल किया। यह घटना छत्रपति शिवाजी की प्रबंधन कूटनीति को दर्शाती है।

15 अप्रैल तक भारत में एंट्री बैन: कोरोना भगाने के लिए शराब पीने से 44 मरे, 1.30 लाख मामले सामने आए

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। वायरस का प्रसार रोकने के लिए भारत ने खुद को अलग-थलग करने का फैसला किया है। मंत्रियों के एक समूह ने इस संबंध में कुछ अहम निर्णय लिए हैं। इस कड़ी में दुनिया के किसी भी देश से आने वाले यात्रियों का वीजा 15 अप्रैल तक सस्पेंड कर दिया गया है। केवल संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों, कूटनीतिक मामलों और सरकारी परियोजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। इनके अलावा कोई देश में प्रवेश नहीं कर पाएगा।

यानी पर्यटन या सामान्य कामकाज के लिए भारत आना फिलहाल मुमकिन नहीं हो पाएगा। आपातकालीन परिस्थितियों में भारतीय मिशन से विशेष अनुमति लेनी होगी। भारतीय प्रवासियों को दिए गए ओसीआई कार्ड (वीजा फ्री ट्रेवल फैसिलिटी) को भी 15 अप्रैल तक रोक कर रखा जाएगा। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि अगर कोई विदेशी व्यक्ति भारत की यात्रा करना चाहता है तो उसे नजदीकी इंडियन मिशन में संपर्क करना होगा। 15 फरवरी के बाद भारत पहुँचने वाले चीन, इटली, स्पेन, ईरान, कोरिया, फ्रांस और जर्मनी के आगुन्तकों को 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन में रखा जाएगा। यानी, इतने दिनों तक उनकी गतिविधियाँ सीमित रहेंगी ताकि ये वायरस न फैले।

भारतीय नागरिकों को सलाह दी गई है कि वो बिना किसी ज़रूरी कारण के भारत से बाहर जाने से परहेज करें। अगर वो विदेश जाकर वापस लौटते हैं तो उन्हें भी 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन में रखा जाएगा। सीमा पार से आने वाले लोगों को भी कड़ी स्क्रीनिंग प्रक्रिया से गुजरना होगा। उनके बारे में गृह मंत्रालय को सूचना दी जाएगी। कोरोना वायरस पर इस निर्णय के कारण भारतीय पर्यटन उद्योग को ख़ासा नुकसान होगा लेकिन उम्मीद है कि इससे वायरस के प्रसार को रोका जा सकेगा। इसके कारण कुछ ही दिनों में शुरू होने वाले आईपीएल पर भी संशय के बादल मँडराने लगे हैं।

अमेरिका ने भी यूरोप से आवाजाही पर 1 महीने के लिए रोक लगा दी है। वहाँ कोरोना वायरस से अब तक 37 मौतें हो चुकी हैं। ऑस्ट्रेलिया ने इस वायरस के कारण डूबती अर्थव्यवस्था को रफ़्तार देने के लिए नई योजनाएँ तैयार की हैं। इटली में सारी दुकानों पर ही ताले जड़ दिए गए हैं। ‘वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन’ ने इसे महामारी घोषित कर दिया है। कुल मिला कर अब तक दुनिया भर में लगभग 1.3 लाख मामले सामने आ चुके हैं।

ट्विटर सहित कई दिग्गज आईटी कंपनियों ने अपने दुनिया भर के कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा है। वरिष्ठ हॉलीवुड अभिनेता टॉम हैंक्स भी कोरोना वायरस के शिकार हो गए हैं। इजरायल ने कहा है कि वो इस मामले में दूसरे देशों से आने वाले ‘सप्लाई’ पर निर्भर है और इस सम्बन्ध में वहाँ के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की है। चीन में अब तक कोरोना वायरस के 37,400 मामले आ चुके हैं।

इधर ईरान में अफवाह फ़ैल गई कि शराब पीने से करना वायरस नहीं फैलता है और ‘इंडस्ट्रियल लेवल’ की शराब पीने से 44 लोगों की मौत हो गई। ईरान में कुछ नॉन-मुस्लिमों को छोड़ कर बाकियों के लिए शराब पीना या ख़रीदना-बेचना मना है। लोग मेथनॉल से बने अल्कोहल पी रहे थे, जो ख़ासा ख़तरनाक होता है।

गिरफ्तार दानिश ने किया बड़ा खुलासा: दिल्ली दंगों के लिए PFI ने जुटाया था धन, दंगाइयों को बाँटे हथियार

दिल्ली हिंदू विरोधी हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस की पूछताछ में एक आरोपित से बड़ा खुलासा हुआ है। PFI के सदस्य दानिश ने दिल्ली पुलिस की पूछताछ में खुलासा करते हुए कहा है कि PFI ने शाहीन बाग और दिल्ली हिंसा के लिए धन जुटाया था और साथ ही PFI ने दंगाइयों को हथियार भी सौंपे थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस हिंसा में PFI की संदिग्ध भूमिका की जाँच में जुट गई है।

दरअसल, दिल्ली हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने PFI के दानिश नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया था। जानकारी के मुताबिक अभी तक दिल्ली पुलिस को दानिश से की गई पूछताछ में कई खुलासे सामने आए हैं, दिल्ली पुलिस की पूछताछ में दानिश ने बताया है कि शाहीन बाग के लिए PFI ने लोगों से धन एकत्र किया था इसके बाद दिल्ली में हुई हिंसा के लिए पहले को धन जुटाया और फिर दंगाइयों को PFI ने हथियार भी उपलब्ध कराए थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने दिल्ली के दंगों में PFI की भूमिका की जाँच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक दानिश की शिनाख्त के आधार पर इस आंदोलन की फंडिंग और हिंसा भड़काने में शामिल रहे अन्य लोगों की धरपकड़ के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। साथ ही इन दंगों में शामिल दंगाइयों के खिलाफ सबूत जुटाने का काम भी दिल्ली पुलिस द्वारा किया जा रहा है।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष यूपी में कई स्थानों पर CAA विरोध के नाम पर की गई हिंसा के पीछे PFI का हाथ मिला था। इसके बाद सरकार ने इस संगठन के संचालन को प्रतिबंधित कर दिया। इसके बाद 100 से अधिक PFI के सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था। साथ ही सरकार ने कहा था कि यह संगठन देश को तोड़ने का काम कर रहा है, जिसे देश हिंत में बंद किया जाना बेहद जरूरी है।

वहीं लोकसभा में अमित शाह द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक अब तक दिल्ली हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा 700 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं और 2,647 लोगों को हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की ओर से जारी बयान के मुताबिक आर्म्स एक्ट के तहत 48 मामले दर्ज किए गए हैं। आपको बता दें कि दिल्ली में 23 से 25 फरवरी तक सीएए विरोध के नाम पर की गई हिंदू विरोधी हिंसा में अब तक 53 लोगों की मौत हो चुकी है। साथ ही इस हिंसा में 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

बीजेपी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को बनाया मध्य प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार, कमलनाथ सरकार का गिरना तय

ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर पिछले काफी समय से चली आ रहीं सभी अटकलों पर आज विराम लग गया। पहले तो बुधवार दोपहर को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सिंधिया को बीजेपी की सदस्यता दिलाकर उन्हें गुलदस्ता भेंट कर पार्टी में स्वागत किया। इसके बाद बीजेपी ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में सिंधिया के नाम का ऐलान कर दिया। इसी के साथ उस अटकलों पर भी विराम लग गया, जिसमें कहा जा रहा था कि क्या बीजेपी सिंधिया को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाएगी?

बीजेपी ने अध्यक्ष जेपी नड्डा के हवाले से अपने हेंडल एक पर ट्वीट कर सभी राज्यसभा के उम्मीदवारों की सूची को साझा कर दिया, जिसमें सबसे पहले असम से भुवनेश्वर कालीता, बिहार से विवेक ठाकुर, गुजरात से रबीलाबेन बारा, गुजरात से दूसरे अभय भारद्वाज, झारखंड से दीपक प्रकाश, मणिपुर से लिएसेंबा महाराज, मध्य प्रदेश से ज्योतिरादित्य सिंधिया, महाराष्ट्र से उदयना राजे भौंसले, राजस्थान से राजेन्द्र गहलोत का नाम राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में घोषित किए गए हैं।

साथ ही सहयोगी दलों में महाराष्ट्र से रामदास अठाबले और असम से बुस्वजीत डायमरी का नाम राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में सूची में शामिल है। ट्विटर पर साझा जानकारी में यह भी कहा गया है कि इन नामों को भारतीय जनता पार्टी की केन्द्रीय चुनाव समिति ने आगामी राज्य सभा चुनावों के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान की है। दरअसल, भारतीय जनता पार्टी की केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक 10 मार्च को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह और नितिन गड़करी सहित अन्य प्रमुख नेता शामिल हुए थे।

आपको बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद मध्य प्रदेश में कमलनाथ वाली सरकार के गिरने के आसार अब बढ़ गए हैं क्योंकि बेंगलुरू में ठहरे सिंधिया समर्थित 22 विधायकों में से 19 विधायकों ने अपने वीडियो बयान जारी कर सिंधिया के साथ जाने की बात कही है। वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने भी अपने पत्ते खोलने शुरू कर दिए हैं।

CAA समर्थकों के कारण नहीं हुए दिल्ली दंगे, इसके पीछे थी गहरी साजिश, अमित शाह ने वारिस पठान को भी लताड़ा

विपक्षी पार्टियों द्वारा लंबे समय से सदन में दिल्ली हिंसा पर चर्चा की माँग पर बुधवार शाम को गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्षी पार्टियों के सवालों के जवाब दिए। साथ ही चर्चा के दौरान एक लंबी रिपोर्ट लोकसभा सदस्यों के सामने में पेश की है। इस दौरान अमित शाह ने दिल्ली पुलिस की पीठ थपथपाते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस ने 36 घंटे के अंदर हिंसा को काबू में किया। साथ ही शाह ने आशंका जताई कि दिल्ली हिंसा के पीछे एक गहरी साजिश रची गई थी।

सदन में बोलते हुए सबसे पहले अमित शाह ने दंगों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि मैं उनके परिवारों के प्रति भी संवेदनाएं व्यक्त करता हूँ। वहीं शाह ने सदन में आँकड़े पेश करते हुए कहा कि दिल्ली की जनसंख्या 1.7 करोड़ है, जबकि हिंसा की चपेट में आए इलाके की आबादी 20 लाख है। दिल्ली पुलिस ने हिंसा को नियंत्रित किया और 36 घंटे के अंदर उस पर काबू पाया। उन्होंने गौर फरमाते हुए कहा कि हिंसा में यह सुनिश्चित किया कि दंगे 4% भौगोलिक क्षेत्र और दिल्ली के 13% क्षेत्र तक ही बने रहें। उन्होंने यह भी दावा किया कि 25 फरवरी में रात 11 बजे के बाद के बाद अभी तक हिंसा ग्रस्त क्षेत्र में एक भी घटना नहीं हुई।

लगातार अपने ऊपर विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि आप मुझ पर सवाल उठा सकते हैं और आपको ये अधिकार भी है, लेकिन तथ्यों के साथ तोड़-फोड़ करने का किसी को अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं श्रीमान ट्रम्प के कार्यक्रम में बैठा था, उनका कार्यक्रम पहले से तय था और मेरे संसदीय क्षेत्र में था। इसके बाद मैंने ही अजीत डोभाल जी से हिंसा वाले इलाके में जाने का अनुरोध किया और पुलिस का मनोबल बढ़ाने की बात कही।

शाह ने हेट स्पीच पर बोलते हुए कहा कि 14 दिसंबर को रामलीला मैदान में 1 पार्टी ने एंटी CAA रैली की, उसमें पार्टी की अध्यक्ष महोदया भाषण में कहती हैं कि घर से बाहर निकालों, आर-पार की लड़ाई करों, अस्तित्व का सवाल है। उसके बाद उनके एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अभी नहीं निकलोगे तो कायर कहलाओगे। ये हेट स्पीच नहीं है तो क्या है? शाह ने वारिश पठान पर भी निशाना साधा और कहा कि जो यह कहता हो 15 करोड़ 100 करोड़ पर भारी हैं तो ये क्या है? उन्होंने यह भी कहा कि शाहीन बाग का धरना कपिल मिश्रा के बयान के बाद से नहीं बल्कि उससे बहुत पहले यानि की 15 दिसंबर से जारी है।

शाह ने दिंल्ली हिंसा में उपयोग किए गए सोशल मीडिया का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो सोशल मीडिया पर घटना की सच्चाई दिखाई तो दूसरी ओर कुछ लोगों ने देश में ट्रंप के आने से पहले लोगों को हिंसा के लिए भड़काया। उन्होंने यह भी साफ किया कि हिंसा में शामिल लोगों को किसी भी कीमत पर एक इंच भी बख्शा नहीं जाएगा। दोषी को इसकी सजा भुगतनी ही होगी।

अमित शाह ने दिए जवाब में आगे बताया कि दिल्ली पुलिस ने 27 फरवरी से आज तक 700 से ज्यादा FIR दर्ज की हैं और 2,647 लोगों को हिरासत में लिया है। इस दौरान शाह ने ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा कि CCTV फुटेज में व्यक्ति का चेहरा दिखाई देता है यह न तो कोई धर्म देखता है और न ही किसी के कपड़े, क्योंकि ओवैसी ने आरोप लगाया था कि एक ही धर्म के लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। दिल्ली हिंसा पर दे रहे जवाबों के बीच शाह ने एक बार फिर CAA पर अपनी बात दोहराई और कहा कि CAA को मतदान करके पास किया था। फिर भी इसे लेकर देशभर में लोगों को गुमराह किया गया कि इससे अल्पसंख्यकों की नागरिकता चली जाएगी। मुझे बताइए कि आखिर इससे किसी की नागरिकता कैसे जा सकती है।

दिल्ली पुलिस मैदान में जूझ रही हो और उसे जाँच करके आगे भी इसके तथ्यों को कोर्ट के सामने रखना है तो ऐसे समय में हमें वास्तविकता को समझना चाहिए और पुलिस की जाँच में सहयोग करना चाहिए। इसके लिए हमने आम लोगों से मीडिया से भी अनुरोध किया है कि किसी के पास भी कोई ऐसा वीडियो फुटेज हो जिससे पुलिस को जाँच में सहायता मिल सके। उसे उपलब्ध कराएँ। इसके बाद हजारों वीडियो लोगों ने हमें दिए हैं। उम्मीद है कि इन वीडियो में से ही अंकित शर्मा के खून का भेद इसी से खुलेगा।

योगी सरकार ने ‘दंगाइयों के होर्डिंग्स’ हटाने के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लगाई याचिका, सुनवाई कल

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में लगे CAA विरोध के नाम पर दंगा भड़काने और हिंसा करने वालों के होर्डिंग्स लगाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। बुधवार (मार्च 11, 2020) को योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के होर्डिंग्स हटाने के फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। अब गुरुवार (मार्च 12, 2020) को सुबह 10:30 बजे उत्तर प्रदेश सरकार की इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा।

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ 19 दिसंबर 2020 को लखनऊ के कई इलाकों में जबरदस्त हिंसा हुई थी। इस दौरान हुई तोड़फोड़ और आगजनी से सरकारी संपत्ति का काफी नुकसान हुआ था। जिसके बाद योगी सरकार ने आरोपित दंगाइयों से नुकसान की भरपाई करने का आदेश दिया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इन दंगों में आरोपित 57 लोगों के नाम उनके पते साथ होर्डिंग्स बनवाकर शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर लगाए गए थे। यह सभी आरोपित लखनऊ के हसनगंज, हजरतगंज, कैसरबाग और ठाकुरगंज थाना क्षेत्र के हैं। बता दें कि पहले ही प्रशासन ने 1.55 करोड़ रुपए की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के लिए इनको वसूली के नोटिस जारी किए गए थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी में करीब 100 जगहों पर लगे आरोपितों के होर्डिंग के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। कोर्ट ने लखनऊ के डीएम और कमिश्नर को तलब किया था। इस मामले में सुनवाई करते हुए रविवार को इलाहबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को लखनऊ हिंसा के 57 आरोपितों का पोस्टर हटाने का आदेश दिया था। साथ ही कोर्ट ने 16 मार्च तक रजिस्ट्रार जनरल को एक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था। मगर हाईकोर्ट के इस फैसले से योगी सरकार असंतुष्ट थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले का अध्ययन किया और पीछे नहीं हटने का फैसला लिया। इसके बाद आज योगी सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अब देखने वाली बात यह है कि कल देश के सर्वोच्च न्यायाृलय इस मुद्दे पर क्या फैसला सुनाती है।