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IB कॉन्सटेबल अंकित शर्मा की जघन्य हत्‍या के मामले में सलमान गिरफ्तार, कई सनसनीखेज खुलासे की उम्मीद

दिल्ली दंगों के दौरान आइबी (IB) कॉन्सटेबल अंकित शर्मा की जघन्य हत्‍या के मामले में दिल्‍ली पुलिस ने सलमान नाम के शख्‍स को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी दिल्‍ली पुलिस की स्‍पेशल सेल ने की है। मीडिया रिपोर्ट अनुसार, इंटरसेप्शन के बाद पुलिस की स्पेशल सेल ने सलमान उर्फ नन्हे को गिरफ्तार किया है। फिलहाल, उससे दिल्ली पुलिस द्वारा पूछताछ की जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपित को पाँच नामों से जाना जाता है, जो मोमिन उर्फ सलमान उर्फ हसीन उर्फ मुल्ला उर्फ नन्हें है। अंकित शर्मा की जघन्य हत्या में आरोपित सलमान को सुंदर नगरी से गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पुलिस ने पार्षद ताहिर हुसैन को भी गिरफ्तार किया था। ताहिर हुसैन का नाम एफआईआर में दर्ज है।

गौरतलब है कि कल गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में खुलासा किया था कि आईबी के अफसर अंकित शर्मा की हत्या की जाँच में जुटी एसआईटी को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। एसआईटी को वह वीडियो भी हाथ लगा है, जिसमें अंकित शर्मा की हत्या के कई राज छिपे हैं। यह वीडियो एक आम नागरिक ने पुलिस के पास भेजा है।

बता दें कि अंकित शर्मा की नृशंस हत्या के बारे में पता पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आने के बाद लगा। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक अंकित शर्मा के शरीर का एक भी हिस्सा ऐसा नहीं था जिसमें चाकू के गहरे घाव न हों। डॉक्टर ने लिखा है कि 400 से ज़्यादा बार उन्हें चाकुओं से गोदा गया था। 

इस क्रूर अमानुषिक हत्याकांड और यातना को अंजाम देने में कम से कम 6 लोगों के शामिल होने की बात डॉक्टर बताते हैं। उन्होंने कहा है कि अंकित शर्मा को 6 लोगों ने लगातार 2 से 4 घंटे तक 400 बार चाकुओं से गोदा होगा। साथ ही, उनकी आँत को शरीर से बाहर निकाल दिया था। फोरेंसिक डॉक्टरों ने कहा कि इस तरह से यातना का शिकार और क्षत-विक्षत बॉडी उन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा। 

गौरतलब है कि अंकित शर्मा के पिता रविन्द्र शर्मा ने दिल्ली के दयालपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराते हुए AAP नेता और नगर पार्षद ताहिर हुसैन के अलावे कई अन्य लोगों को भी आरोपित बनाया था। रविन्द्र शर्मा ने दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया है कि अंकित शर्मा के शव को मस्जिद से नाले में फेंका गया था। FIR के बाद फॉरेंसिक टीम उस स्थान का निरीक्षण करने में लगी हुई थी, जहाँ 26 फरवरी को इंटेलिजेंस ब्यूरो के अंकित शर्मा का शव मिला था। दरअसल उनका शव नार्थ-ईस्ट दिल्ली के चाँद बाग इलाके में मिला था।

ताहिर मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र से आप का पार्षद है। हालाँकि, पार्टी ने उसे पहले ही निलंबित कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय जाँच एजेंसी ने हुसैन के खिलाफ इंटेलीजेंस ब्यूरो (आइबी) के अधिकारी की हत्या का आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया है। ताहिर हुसैन इस समय दिल्ली पुलिस की हिरासत में है।

अंकित के पिता रविन्द्र शर्मा की तहरीर पर दिल्ली पुलिस ने हिंसा को बढ़ावा देने, आगजनी और अंकित की हत्या सहित कई मामलों नगर पार्षद ताहिर हुसैन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद ताहिर हुसैन के खजूरी इलाके में स्थित घर को सील कर दिया गया था। वहीं आम आदमी पार्टी ने भी इसके बाद कार्रवाई करते हुए ताहिर हुसैन को पार्टी से निलंबित कर दिया था। दरअसल, हिंसा वाले दिन ताहिर हुसैन के घर से दंगाइयों ने नीचे खड़े लोगों पर और आस-पास में मौजूद हिंदुओं के मकानों पर पेट्रोल बम, ईंट-पत्थर बरसाए थे।

‘नीतीश कुमार, आपको समय क्षमा नहीं करेगा’: 11 माँगों के साथ बिहार के 4.5 लाख शिक्षक हड़ताल पर

बिहार में कुल मिला कर लगभग साढ़े चार लाख शिक्षक हैं जो नियोजित हैं। इनका वेतन वेतन लगभग 25-30 हजार रुपए के क़रीब है। इनके अलावा लगभग दस हजार पुराने शिक्षक हैं, जिनका वेतन 85-90 हजार रुपए है। फिलहाल नियोजित शिक्षक पूर्ण हड़ताल में हैं। स्कूल पूरी तरह बंद हैं। पिछली बार 2015 मे भी शिक्षकों ने सेवा शर्त नियमावली के लिए हड़ताल किया था तब सरकार ने दो महीने में ही सेवा शर्त नियमावली लागू करने का वादा किया था। ये अब तक पूरा नहीं हुआ। शिक्षक आक्रोश में हैं।

बिहार एकमात्र राज्य हैं जहाँ TET पास कर के आए अभ्यर्थियों का भी नियोजन शिक्षामित्रों की तरह पंचायत द्वारा अल्प वेतन पर कराया गया। आज वे शिक्षमित्रों से जूनियर हैं। बिहार में 2002, 2005, 2007, 2009, 2011, 2013-14 में शिक्षक नियोजन हुआ। सन 2002 और 2005 में 1500 के वेतन पर मात्र 11 महीने के लिए शिक्षकों का नियोजन हुआ था। 2006 में उन सब को परमानेंट कर दिया गया और उनका नियत वेतन 5000 रुपए हो गया। फिर धीरे धीरे बढ़ते बढ़ते वेतन 9000 तक हुआ। 2015 में सरकार ने उन्हें एक 5200-20200 का अधूरा वेतनमान दिया, जो अब तक दिया जा रहा है। जो लड़के TET पास कर के आए, उन्हें भी इसी वेतनमान के अधीन रखा गया।

अब आक्रोशित शिक्षक पुराने शिक्षकों वाला वेतनमान माँग रहे हैं। पटना हाईकोर्ट ने अक्टूबर 31, 2017 को शिक्षकों के पक्ष में निर्णय भी दिया था। लेकिन, सरकार सुप्रीम को र्टगई और वहाँ निर्णय बदल दिया गया। आम लोगों में एक मत यह भी है कि शिक्षक मन से काम नहीं करते, और अधिकांश अयोग्य हैं। जब ऑपइंडिया ने कुछ प्रदर्शनकारी शिक्षकों से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि यह कुछ हद तक सही भी है, पर इसके लिए पूरी व्यवस्था को ठप नहीं किया जा सकता। उनसे काम कराना सरकार की जिम्मेवारी है। उनका कहना है कि काम न करने के लिए केवल शिक्षक दोषी नहीं, सरकार भी दोषी है।

कहा जा रहा है कि शिक्षा विभाग को सबसे अधिक मध्याह्न भोजन ने प्रभावित किया है। शिक्षकों का कहना है कि हेडमास्टर उसी के संचालन में रह जाते हैं, निरीक्षण करने आए अधिकारी भी वही जाँच करते हैं क्योंकि वहीं से ‘माल’ निकलता है। इस चक्कर मे पठन-पाठन व्याधित हो रहा है। शिक्षकों बताते हैं कि जब तक मध्याह्न भोजन को हेडमास्टर से अलग नहीं किया जाता, कोई उपाय नहीं।

शिक्षकों की 11 माँगें

प्राइमरी स्कूल में कार्यरत सर्वेश तिवारी ने अपने फेसबुक पोस्ट में इस समस्या पर बात करते हुए लिखा:

“बिहार में पिछले 25 दिनों से लगभग साढ़े चार लाख शिक्षक हड़ताल पर हैं। राज्य के सारे प्राथमिक विद्यालयों के करोड़ों बच्चों की शिक्षा बाधित है। सरकार चुप है। कहीं कोई सुगबुगाहट नहीं। शिक्षकों की माँगें कितनी जायज या नाजायज हैं, इसका निर्णय तब होगा जब सरकार उनके प्रतिनिधियों से बात करे। पर अबतक कोई वार्ता नहीं हुई है।”

“कितना अजीब है न! सरकारें शिक्षा जैसे विषय पर इतनी उदासीन कैसे हो सकती हैं? शिक्षकों की माँगों से असहमति हो सकती है, पर छात्रों के भविष्य से नहीं होनी चाहिए। शिक्षकों की कुल 11 माँगें हैं। उनमें एक माँग देख लीजिए। सन 2005 में कुछ लड़कियों की शिक्षक के पद पर अपने गाँव में नियुक्ति हुई। बाद में चालीस किलोमीटर दूर किसी गाँव में उनका विवाह हो गया। विवाह हुए चौदह-पन्द्रह वर्ष हो गए, पर वह शिक्षिका कभी दस दिन ससुराल नहीं रही। कैसे रहे? नौकरी तो मायके के गाँव में है, और स्थानांतरण की व्यवस्था नहीं है। आप अंदाजा लगाइए कि उसका जीवन कितना नरक बन गया होगा।”

धरने पर बैठे आक्रोशित नियोजित शिक्षक

उन्होंने आगे लिखा:

“पाँच साल पहले सरकार ने कहा था कि दो महीने में ही हम सेवा शर्त नियमावली ला देंगे। शिक्षकों के पाँच वर्ष बीत गए पर सरकार के दो महीने पूरे नहीं हुए। यह है सरकार! शिक्षक कुछ और नहीं माँग रहे, यही सेवा शर्त नियमावली माँग रहे हैं। शिक्षक स्वाभिमान की लड़ाई लड़ रहे हैं। शिक्षक सरकार की उस मानसिकता के विरुद्ध लड़ रहे हैं जिसके कारण सरकार हमेशा यह कह देती है कि शिक्षक हमारे राज्यकर्मी नहीं है। तनिक सोचिए तो, यदि शिक्षक सचमुच राज्यकर्मी नहीं हैं, तो सरकार कितनी असंवैधानिक है जो शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य में भी अपने कर्मी नहीं रखी है।”

सर्वेश कुमार तिवारी का फेसबुक लेख

इसी पर बात करते हुए उन्होंने आगे बताया:

“शिक्षक सरकार की इसी नीचता के विरुद्ध लड़ रहे हैं। सरकार कह रही है कि हम वेतन बढ़ा देते हैं, पर शिक्षकों से बात नहीं करेंगे। सच पूछिए तो सरकार की इसी तानाशाही के विरुद्ध लड़ रहे हैं शिक्षक। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तानाशाही को केवल शिक्षक ही नहीं देख रहे, समय देख रहा है। अपने पन्द्रह वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को तो लगभग लगभग मार ही दिया है। उन्हें समय शायद ही क्षमा करे।”

उधार का सिंदूर लेकर सुहागन बने हैं, सुहाग कब तक चलेगा: उद्धव सरकार पर कॉन्ग्रेस के संजय निरुपम

जो हमारी सरकार है वो इस तरह की है कि उधार का सिंदूर लेकर सुहागन बने हैं हम। जब उधार का सिंदूर लेकर सुहागन बनेंगे तो वो सुहाग कब तक चलेगा।

यह कहना है कि कॉन्ग्रेस नेता संजय निरुपम का। टाइम्स नाउ से बातचीत में उन्होंने यह बात कही। उनसे महाराष्ट्र में चल रही शिवसेना-कॉन्ग्रेस-एनसीपी की महाविकास अघाड़ी सरकार के भविष्य को लेकर सवाल किया गया था। उन्होंने कहा कि यह सरकार बेहद कमजोर विकेट पर खेल रही है और किसी भी वक्त गिर सकती है।

उल्लेखनीय है कि जब से मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थामा है, तभी से राजस्थान और महाराष्ट्र की सरकार को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। बताया जाता है कि राजस्थान में उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट अपनी उपेक्षा से आहत हैं और देर-सबेर सिंधिया की राह चल सकते हैं। वहीं, महाराष्ट्र में साझेदार दलों के मतभेद हर मसले पर उभरकर सामने आ जाते हैं।

बकौल निरुपम महाविकास अघाड़ी की सरकार अस्थिर है और यह लंबे समय तक नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को इस सरकार में कभी शामिल नहीं होना चाहिए था। इस गठबंधन के बनने के समय से ही निरुपम इसका विरोध करते रहे हैं। हालॉंकि कॉन्ग्रेस आलाकमान से उनके संबंधों में तल्खी बीते साल महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले ही आ गई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि सोनिया गॉंधी के करीबी ही राहुल गॉंधी के खिलाफ साजिश रच रहे हैं और इससे पार्टी तबाह हो जाएगी।

सिंधिया के पार्टी छोड़ने के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए निरुपम ने कहा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जो 70 साल से ज्यादा के हैं, उन्हें जबरन रिटायर कर देना चाहिए। इन्हें मार्गदर्शक मंडल की तरह सलाहकार समिति में भेज दिया जाना चाहिए। पुरानी पीढ़ी को नई पीढ़ी का सहयोग करने का काम दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सिंधिया पार्टी का चेहरा थे। काफी लोकप्रिय थे। अच्छे वक्ता थे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उनकी उपेक्षा और मॉंग से अनजान था। शीर्ष नेतृत्व को मध्य प्रदेश में उनके और कमलनाथ के बीच के मतभेद को दूर करना चाहिए था। दिल्ली के नेतृत्व को सिंधिया की बात सुननी चाहिए थी। मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे निरुपम का कहना है कि सिंधिया का जाना पार्टी के लिए बड़ा नुकसान है।

कोरोना वायरस से अब तक 4,623 लोगों की मौत, विदेशों में फँसे हर भारतीय को सुरक्षित निकालेगी मोदी सरकार

कोरोना वायरस का कहर देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में जारी है। इसकी रोकथाम के लिए देश-विदेशों में आए दिन तरह-तरह की घोषणाएँ की जा रही हैं। कुछ ऐसा ही भारत में भी कोरोना वायरस को रोकने के लिए किया जा रहा है। बीते दिन भारत सरकार ने विदेशों से आने वाले लोगों को पूरी तरह से बैन कर दिया साथ ही भारतीयों को देश से बाहर न जाने की सलाह दी गई है। इसके बाद भी अब तक पूरे देश में कोरोना वायरस से जुड़े 73 मामले सामने आ चुके हैं। उधर लोकसभा में सरकार ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि वह कोरोना वायरस के कारण विदेशों में फँसे भारतीयों को किसी भी कीमत पर भारत लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

सांसद भगवंत मान ने लोकसभा में पंजाब के 30 छात्रों का मुद्दा उठाया जो इटली के हवाई अड्डे पर फँसे हुए हैं। इसके जवाब में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि “मैं आपको बता देना चाहता हूँ। विदेश में केवल 30 छात्र ही नहीं बल्कि अलग-अलग देशों के विभिन्न हिस्सों में बहुत से भारतीय फँसे हुए हैं। हमें उनकी मदद करने और उन्हें वापस लाने का एक तरीका खोजने की जरूरत है।” आगे विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान से 58 भारतीय नागरिकों को मंगलवार को ही वापस लाया गया है और दो सौ से अधिक अन्य लोगों को और लाया जाएगा।

डॉ. जयशंकर ने कहा कि ईरान के विभिन्न प्रांतों में 6000 से अधिक भारतीय फँसे हैं जिनमें मुख्य रूप से लद्दाख और जम्मू कश्मीर केन्द्र शासित प्रदेशों तथा महाराष्ट्र के 1100 तीर्थयात्री, जम्मू और कश्मीर के 300 छात्र, केरल, तमिलनाडु और गुजरात सहित देश के विभिन्न हिस्सों के लगभग 1000 मछुआरे और ऐसे लोग शामिल हैं जो अपनी जीविका और धार्मिक अध्ययन के लिए ईरान में रह रहे हैं।

वहीं इस वायरस से संक्रमित होने के कारण चीन में अब तक 3169 लोगों की मौत, जबकि 80,793 लोग संक्रमित हुए हैं। इटली में अब तक 827 लोगों की मौत, जबकि 12462 लोग इससे संक्रमित हुए हैं। खाड़ी देशों की बात करें तो ईरान में 354 लोगों की मौत, जबकि 9000 लोग इस वायरस से संक्रमित हैं। दक्षिण कोरिया में अब तक 60 लोगों की मौत, जबकि 7755 लोग इससे संक्रमित हैं। अमेरिका में अब तक 38 लोगों की मौत, जबकि 1302 लोग इससे संक्रमित हुए हैं। यही कारण है कि अमेरिका के न्यूयाॅर्क, वाशिंगटन, कैलिफोर्निया और फ्लोरिडा समेत आठ प्रांतों में कोरोना वायरस के संक्रमण के मद्देनजर स्वास्थ्य आपातकाल की घोषणा कर दी गयी है। एक रिपोर्ट के बाद संक्रमित लोगों की कुल संख्या आधिकारिक रिपोर्टों से काफी अधिक भी होने की संभावना है।


आपको बता दें कि चीन के हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान से पैर पसारने वाले जानलेवा कोरोना वायरस की चपेट में अब तक विश्व के 114 देश चपेट में आ चुके हैं, जबकि वायरस की चपेट में आने से मरने वालों की संख्या 4,623 हो चुकी है। वहीं 1,25,841 लोग इस वायरस से जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे के बीच बुधवार को इसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया। पूरे विश्व में कोरोना के संक्रमण से प्रभावित लोगों में से अब तक 50 हजार लोगों को इससे मुक्ति दिलायी गई है। वर्तमान में संक्रमित लोगों की कुल संख्या आधिकारिक रिपोर्टों से काफी अधिक होने की संभावना है। एक महामारी विज्ञानी ने भविष्यवाणी की है कि दुनिया की 60 प्रतिशत आबादी अंततः प्रभावित हो सकती है।

बोए पेड़ बबूल का तो आम कहॉं से होए: आज MLA छिपा रही कॉन्ग्रेस, कभी उसके ही डर से आया रिसॉर्ट पॉलिटिक्स

मध्य प्रदेश में सियासी संकट के बीच कॉन्ग्रेस ने अपने विधायकों को जयपुर के दो महँगे लग्जरी रिसॉर्ट में ठहराया है। ये रिसॉर्ट दिल्ली-जयपुर हाइवे से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। दोनों रिसॉर्ट के बीच 34 किलोमीटर की दूरी है। ख़ुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इन विधायकों से चर्चा कर रहे तो उनका मंत्रिमंडल इनकी आवभगत में लगा हुआ है। एक रिसॉर्ट में जहाँ 10 हज़ार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से कमरा मिलता है, वहीं दूसरे में 21 हज़ार रुपए प्रतिदिन लगते हैं। ऐसे में कॉन्ग्रेस अपनी रिसॉर्ट राजनीति में लाखों फूँक रही है। इन रिसॉर्ट में कुछ कमरे पेड़ों पर भी बनाए गए हैं

दोनों ही रिसॉर्ट को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है और लोगों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई है। महाराष्ट्र में जब सियासी संकट आया था तब भी ब्यूना विस्टा रिसॉर्ट में कॉन्ग्रेस ने अपने विधायकों को ठहराया था। वहाँ पार्टी शिवसेना और एनसीपी के साथ मिल कर सरकार बनाने में कामयाब रही थी। इसलिए पार्टी इसे लकी मान कर चल रही है। यहाँ गोल्फ से लेकर टेनिस खेलने तक की व्यवस्था है। पिछली बार की तरह इस बार भी सारी जिम्मेदारी मुख्य सचेतक महेश जोशी को सौंपी गई है।

भारतीय जनता पार्टी ने 16 मार्च को मध्य प्रदेश विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराने की माँग की है। ऐसा होने पर कॉन्ग्रेस को अभी 4 दिन और अपने विधायकों को रिसॉर्ट में रखना पड़ेगा। कमलनाथ की क्षमताओं पर पार्टी और पार्टी के प्रति आस्था रखने वाले मीडिया के एक समूह को अभी भी उम्मीद है। जहाँ तक ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ की बात है तो यह 14वॉं मौका है। अब तक नौ राज्यों की सियासी उठापठक की वजह से यह पॉलिटिक्स देखने को मिला है। इस सिलसिले की शुरुआत 1982 में कॉन्ग्रेस के ही भय से हुई थी।

एक नज़र उन सभी 14 मौकों पर जब ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ देखने को मिली;

  • मई 1982 (हरियाणा): देवी लाल ने भाजपा-आईएनएलडी के 48 विधायकों को कॉन्ग्रेस के डर से दिल्ली के एक होटल में भेज दिया था।
  • अक्टूबर 1983 (कर्नाटक): इंदिरा गाँधी के भय से तत्कालीन मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े ने अपने 80 विधायकों को बेंगलुरु के एक रिसॉर्ट में भेजा था।
  • अगस्त 1984 (आंध्र प्रदेश): तत्कालीन सीएम एनटीआर अमेरिका गए तो भास्कर राव को मुख्यमंत्री बनाया गया। उन्होंने लौटते ही विधायकों को होटल में भेजा।
  • सितम्बर 1995 (आंध्र प्रदेश): एक दशक बाद एनटीआर के ख़िलाफ़ उनके दामाद चंद्रबाबू नायडू ने ही बगावत कर डाला। नायडू ने अपने समर्थक विधायकों को होटल में भेजा।
  • अक्टूबर 1996 (गुजरात): भाजपा के बागी शंकर सिंह वाघेला ने 47 बागी विधायकों को होटल में भेजा।
  • मार्च 2000 (बिहार): नीतीश कुमार 7 दिन के लिए सीएम बने और विधायकों को होटल में ठहरवाने के बावजूद बहुमत साबित नहीं कर पाए।
  • जून 2002 (महाराष्ट्र): भाजपा-शिवसेना गठबंधन को रोकने के लिए कॉन्ग्रेस-एनसीपी ने विधायकों को होटल में भेजा, तब दिवंगत विलासराव देशमुख सीएम थे।
  • मई 2016 (उत्तराखंड): हरीश रावत सरकार को बर्खास्त करने की माँग की गई। भाजपा ने अपने विधायकों को होटल में भेजा।
  • फरवरी 2017 (तमिलनाडु): शशिकला समर्थित पलानीसामी गुट के 130 विधायकों को होटल में भेजा गया। पन्नीरसेल्वम विरोधी गुट में थे।
  • अगस्त 2017 (गुजरात): अहमद पटेल की राज्यसभा में जीत के लिए कॉन्ग्रेस ने अपने 44 विधायकों को रिसॉर्ट में भेजा।
  • मई 2018 (कर्नाटक): कॉन्ग्रेस-जेडीएस ने अपने विधायकों को होटल में भेजा। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन येदियुरप्पा को फ्लोर टेस्ट से पहले इस्तीफा देना पड़ा।
  • जुलाई 2019 (कर्नाटक): कॉन्ग्रेस-जेडीएस के 17 बागी विधायकों को रिसॉर्ट में ठहराया गया। कुमारस्वामी सरकार गिर गई।
  • नवम्बर 2019 (महाराष्ट्र): एनसीपी नेता अजीत पवार की बगावत के बाद एनसीपी-शिवसेना-कॉन्ग्रेस ने अपने विधायकों को होटल में भेजा।
  • मार्च 2020 (मध्य प्रदेश): ये सियासी ड्रामा अभी चालू है। कमलनाथ गुट के विधायक जयपुर में रुकवाए गए हैं।

इस तरह से देखा जाए तो पहले दोनों ही मौके पर कॉन्ग्रेस का ही भय था, जिसके कारण पहले हरियाणा में देवीलाल और फिर कर्नाटक रामकृष्ण हेगड़े को अपने विधायकों को रिसॉर्ट में भेजना पड़ा था। अब स्थिति ये है कि लगातार पिछले 5 मौकों से यही कॉन्ग्रेस अलग-अलग राज्यों में अपने विधायकों को लेकर भागदौड़ में लगी हुई है। गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और फिर मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस को ऐसा करना पड़ा है।

असम के ‘फॉरेस्ट मैन ऑफ इंडिया’ जादव पायेंग कॉमनवेल्थ के ‘पॉइंट्स ऑफ़ लाइट’ अवार्ड से सम्मानित

असम के पर्यावरण कार्यकर्ता और ‘फॉरेस्ट मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से लोकप्रिय जादव ‘मोलाई’ पायेंग को बुधवार (मार्च 11, 2020) को 128वें राष्ट्रमंडल पॉइंट्स ऑफ़ लाइट अवार्ड से सम्मानित किया गया। यूनाइटेड किंगडम की महारानी क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय द्वारा पायेंग को पर्यावरण संरक्षण के लिए उनके द्वारा की जा रही है असाधारण स्वैच्छिक सेवा के लिए इस सम्मान के लिए चुना गया था।

जादव पायेंग को कोलकाता में ब्रिटिश उप उच्चायुक्त निक लो (Nick Low) द्वारा 11 मार्च को सम्मानित किया गया। साथ ही, उन्हें नई दिल्ली में 2020 के कर्मयोगी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। वर्ष 2015 में उन्हें भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था। उनका जन्म असम के स्वदेशी ‘मिसिंग जनजाति’ (Mising Tribe) में हुआ था।

निक लो ने अपने ट्विटर अकाउंट से तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है कि वे जादव पायेंग को 128वें राष्ट्रमंडल पॉइंट्स ऑफ़ लाइट अवार्ड को देते हुए सम्मानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने लिखा है कि एक ऐसे आदमी को जिसने 1,360 एकड़ से ज्यादा ऐसी भूमि को जीवन दिया, जहाँ कुछ भी नहीं था। साथ ही उन्होंने लिखा है कि जादव ने इस हरी-नीली पृथ्वी को दोबारा ठीक करने की उम्मीद जगाई है और साबित किया है कि अकेला इंसान भी बहुत कुछ कर सकता है।

जादव मोलाई पायेंग एक पर्यावरणविद और जोरहाट के वानिकी कार्यकर्ता हैं, जिन्हें लोकप्रिय नाम ‘फ़ॉरेस्ट मैन ऑफ इंडिया’ से भी जाना जाता है। कई दशकों के दौरान, उन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी के एक सैंडबार पर पेड़ लगाए और उन्हें जंगल में बदल दिया। इन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से केवल मिट्टी और कीचड़ से भरी जमीन को फिर से हरा-भरा कर दिया। जादव पायेंग ऐसा कई वर्षों से कर रहे हैं। उन्होंने करीब 550 हेक्टेअर पर नदी किनारे के पास जंगल का निर्माण कर विभिन्न प्रजातियों के जानवरों और पक्षियों का घर बनाने का काम किया है, जिसका नाम उनके नाम पर ‘मोलाई वन’ रखा गया है। यह जंगल असम के प्रसिद्ध माजुली द्वीप पर स्थित है।

कॉमनवेल्थ पॉइंट्स ऑफ़ लाइट पुरस्कार की स्थापना अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश (George H. W. Bush) द्वारा 1990 में की गई थी, जिन्हें 1989 में चालीसवाँ राष्ट्रपति बनाया गया था। यह पुरस्कार 53 राष्ट्रमंडल देशों के प्रेरणादायक वालंटियर को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है।

नाबालिग लड़की को भारत लाकर बेंगलुरू में वेश्यावृत्ति में धकेला: मो. मदीसा, किसलुमुल्ला, इमरान सहित 5 बांग्लादेशी घुसपैठिए गिरफ्तार

बेंगलुरु के एक रिहायसी इलाके से एक 17 वर्षीय बांग्लादेशी लड़की को बचाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक एनजीओ के सदस्यों को एक लड़की फुटपात पर सोती हुई मिली, जिसके पूरे शरीर पर चोट के निशान थे। एनजीओं के सदस्यों ने पहले तो लड़की को इलाके से सुरक्षित बाहर निकाला और चिल्ड्रन होम में भेज दिया। इसके बाद इसकी जानकारी पुलिस प्रशासन को दी गई।

बेंगलुरु मिरर की एक रिपोर्ट के अनुसार, नाबालिग लड़की ने बाद में खुलासा किया कि वह बांग्लादेश से है और उसे रोजगार देने के बहाने कुछ लोगों द्वारा भारत लाया गया था। इसके बाद पहले तो उसे कथित रूप से प्रताड़ित किया गया और उसे वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर किया गया। नाबालिग लड़की द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर सिद्धपुरा पुलिस ने बेंगलुरु में रहने वाले 5 बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया है। उनके नाम मोहम्मद मदीसा, किसलुमुल्ला, इमरान मुल्ला, उनकी पत्नी सती और बाजिदा हैं।

दरअसल लड़की को बचाने वाले एनजीओ के सदस्यों ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि आरोपित पीड़ित नाबालिग लड़की को कुछ महीने पहले नौकरी दिलाने के बहाने बहला फुसला कर बेंगलुरू लाए थे। इसके बाद उसे कडुगोड़ी के एक घर में रखा गया, जहाँ पीड़िता को कथित रूप से प्रताड़ित किया गया और उसे वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर किया गया। एनजीओ के सदस्यों के मुताबिक पीड़िता ने बताया कि जब भी वह इसका विरोध करती थी तभी बांग्लादेशी नागरिकों द्वारा उसके साथ मारपीट की जाती थी।

इसके बाद नाबालिग लड़की किसी तरह से कडुगोड़ी स्थित घर से भागने में सफल रही और रिहायसी इलाके में पहुँच गई थी। एनजीओ द्वारा की गई शिकायत के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पाँच बांग्लादेशियों को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही पुलिस ने आरोपितों के ख़िलाफ पॉक्सो, अपहरण, तस्करी और बलात्कार की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इसके साथ ही पुलिस ने पाँचों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

दिल्ली दंगे: हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या के मामले में सलीम, जलालुद्दीन, आरिफ, युनूस समेत 7 गिरफ्तार

देश की राजधानी के पूर्वोत्‍तर जिले में फरवरी के अंत में भड़की हिंसा में दिल्‍ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की हत्‍या कर दी गई थी। दिल्‍ली हिंसा में भीड़ की पत्थरबाजी में बलिदानी दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्सटेबल रतनलाल की हत्‍या के मामले में अब दिल्‍ली पुलिस की एसआईटी (SIT) को बड़ी सफलता मिली है।

दिल्‍ली पुलिस की एसआईटी ने रतनलाल की हत्या के 7 आरोपितों को पकड़ लिया है। हत्या के आरोप में पकड़े गए आरोपितों के नाम सलीम मालिक (38), मोहम्मद जलालुद्दीन (33), मोहम्मद अय्यूब (35), आरिफ (27), युनूस (34), दानिश (23), और सलीम खान (46) हैं। गिरफ्तार आरोपितों में तीन गाजियाबाद के हैं।

गौरतलब है कि दिल्‍ली पुलिस में हेड कॉन्सटेबल रहे रतन लाल उत्‍तर-पूर्वी दिल्‍ली के गोकुलपुरी क्षेत्र के मौजपुर इलाके में तैनात थे। उन पर हिंसक भीड़ ने हमला कर दिया था। पत्‍थरबाजी में रतन लाल बुरी तरह से घायल हो गए थे और उनकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह खुलासा भी हुआ था कि उनकी मृत्यु गोली लगने से हुई थी।

घायल होने के बाद उन्हें गंभीर अवस्‍था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उनकी मौत हो गई थी। मूल रूप से सीकर, राजस्‍थान के रहने वाले रतन लाल को केंद्र सरकार द्वारा शहीद का दर्जा दिया गया। 42 वर्षीय रतन लाल वर्ष 1998 में दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल के तौर पर नियुक्त हुए थे। घटना के दौरान वो गोकुलपुरी एसीपी के ऑफिस में नियुक्त थे। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटियाँ और एक बेटा है।

दिल्ली में भड़की हिंसा में रतनलाल के साथ-साथ आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की भी मृत्यु हुई थी। उनकी पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर चाकू के दर्जनों हमले करने की बात सामने आई थी। इसके अलावा शाहदरा के डीसीपी अमित शर्मा भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। गोकुलपुरी में दो समूहों के बीच झड़प के दौरान वो घायल हो गए थे।

सड़क पर पिस्तौल लहराने वाले की कैसी प्राइवेसी, पोस्टर लगाना सही: SC में योगी सरकार

उत्तर प्रदेश में दंगाइयों के पोस्टर लगाने के मामले में आज गुरुवार (मार्च 12, 2020) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इलाहबाद हाईकोर्ट ने उन पोस्टर्स को ‘अन्यायपूर्ण’ बताते हुए ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन’ करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस यूयू ललित और अनिरुद्ध बोस ने इस मामले की सुनवाई की। सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने बताया कि प्रशासन ने जब पाया कि उक्त 57 व्यक्ति दंगों में शामिल थे, तभी होर्डिंग्स लगाए गए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इन दंगाइयों में विभिन्न समुदायों के लोग शामिल हैं। एसजी ने एक जजमेंट का हवाला देते हुए ‘राइट टू प्राइवेसी’ वाली दलील को नकार दिया।

जस्टिस ललित ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी वीडियो में दंगा करते हुए पाया जाता है तो वहाँ ‘राइट टू प्राइवेसी’ वाली दलील को बहुत हद तक किनारे किया जा सकता है, लेकिन सरकार के पास होर्डिंग्स लगाने की शक्ति कहाँ से आई, किस नियम के अनुसार मिली? उन्होंने कहा कि ऐसा कोई तो क़ानून होगा, जो इस फ़ैसले को सही ठहराए। इसके बाद एसजी मेहता ने जस्टिस पुत्तुस्वामी द्वारा दिए गए निर्णय और ऑटो शंकर केस फ़ैसले को पढ़कर सुनाया, जिसमें ऐसे मामलों में ‘प्राइवेसी के अधिकार’ को महत्ता नहीं दी गई है।

एसजी मेहता ने एक उदाहरण के जरिए अपनी बात साबित करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति सड़क पर पिस्तौल लहराते हुए घूम रहा है, तो उसे ‘राइट टू प्राइवेसी’ के तहत राहत नहीं दी जा सकती। उन्होंने इंग्लैंड के सुप्रीम कोर्ट का एक निर्णय भी पढ़ कर सुनाया। एसजी तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि दंगाइयों को हर्जाने की वसूली के लिए 13 फ़रवरी से 1 महीने तक का समय दिया गया था। एसजी ने एक पुराने जजमेंट्स का हवाला देकर यूपी सरकार के फ़ैसले को सही ठहराया। इसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को तीन सदस्यीय पीठ को रेफर कर दिया।

राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने वाले आइएएस अधिकारी की तरफ़ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए कॉन्ग्रेस नेता व वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने एसजी मेहता की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अगर कोई किसी को ‘शेम’ करने के लिए पोस्टर्स लगा रहा है तो कोई लिंच करने का भी इरादा तो रख सकता है? उन्होंने कहा कि यहाँ कोई अराजकता तो है नहीं कि सरकार ये सब मनमानी करने लगे। उन्होंने कहा कि ‘नेम एंड शेम’ के नाम पर लोगों को भड़काया जा रहा है कि वो पोस्टर में नामित लोगों की लिंचिंग कर दें।

वकील कॉलिन गोंजेल्व्स ने पूछा कि ऐसा कैसे साबित किया गया कि फलाँ व्यक्ति ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाई है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो इस डिटेल में नहीं जाना चाहते। उन्होंने पूछा कि होर्डिंग्स में नामित विडियो सबूत हैं क्या? मोहम्मद शोएब की तरफ से पेश कॉलिन ने कहा कि वो अल्पसंख्यकों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, उनका चित्र पोस्टर लगवा कर उनकी लिंचिंग कराई जा सकती है।

अफजल को मारा, शाहिस्ता को हराया और औरंगज़ेब को नाकों चने चबवाया: छत्रपति शिवाजी के प्रमुख युद्ध

छत्रपति शिवाजी युवावस्था से ही महायोद्धा थे। उन्होंने 1645 में 15 वर्ष की उम्र में ही तोरण किले के बीजापुरी कमांडर इनायत खान को किला सौंपने को मजबूर कर दिया था। मराठा फिरंगीजी नरसाला, जिन्होंने चाकन किले को धारण किया, ने शिवाजी के प्रति अपनी वफादारी का परिचय दिया और कोंडाना के किले को हासिल किया। 25 जुलाई 1648 को शिवाजी को नियंत्रित करने का आदेश उनके पिता शाहजी को बीजापुर के शासक मोहम्मद आदिलशाह ने दिया था। इसके बाद उन्हें बाजी घोरपडे द्वारा कैद किया गया था।

शाहजी को 1649 में छोड़ा गया था, जब शिवाजी ने दिल्ली में सहजान बादशाह से संपर्क किया था। इन घटनाक्रमों के अनुसार, 1649 से 1655 तक शिवाजी ने अपने विजय अभियान में भाग लिया और चुपचाप अपने लाभ को समेकित किया। छत्रपति शिवाजी की सेना में गजब का अनुशासन था। मजबूत ताकतों और प्रबंधन तकनीकों से वह हर स्थिति पर आसानी से काबू पा लेते थे।

रणनीति

  1. सेना: छत्रपति शिवाजी का सैन्य साम्राज्य सेना पर आधारित था। शिवाजी के पास 2 लाख मावला सैनिकों की सेना थी। शिवाजी ने हमेशा अपनी सेना का इस्तेमाल दुश्मनों के खिलाफ किया।
  2. किले: छत्रपति शिवाजी का किला पहाड़ी बिंदु पर था, जो कि उनके लिए बहुत सुरक्षित जगह थी। शिवाजी के दुश्मनों में किसी को भी पहाड़ी भूखण्ड में लड़ने की आदत नहीं थी। उदाहरण के लिए, आदिलशाह, निज़ामशाह, मुगल, ब्रिटिश आदि।
  3. नौसेना: शिवाजी उन चुनिंदा एशियाई राजाओं में थे जिन्होंने रक्षा में नौसेना बल बनाया। छत्रपति शिवाजी ने भारत के पश्चिम भाग में अपने मजबूत नौसेना बल के कारण अरब सागर पर एकाधिकार स्थापित किया। उन्होंने समुद्र की जड़ों से भारत के साथ विदेशी मामलों पर नियंत्रण रखने के लिए सिंधुदुर्गा जैसे समुद्री किले का निर्माण किया।

विजय

  1. अफ़ज़ल खान के साथ मुकाबला और प्रतापगढ़ की लड़ाई: 1659 में आदिलशाह ने शिवाजी के साम्राज्य को नष्ट करने के लिए 75,000 सैनिकों की सेना के साथ अफ़ज़ल खान को भेजा। छत्रपति शिवाजी ने पूरे कूटनीतिक तरीके से अफजल खान को मार डाला। फिर उन्होंने आदिलशाही सल्तनत पर बड़े हमले शुरू करने के लिए अपने सैनिकों को संकेत दिया।
  2. पान्हला की लड़ाई: अफजल खान और प्रतापगढ़ में बीजापुरी सेना की पराजय के बाद, शिवाजी ने बीजापुरी क्षेत्र में गहरी पकड़ जारी रखी। कुछ दिनों के भीतर, मराठों ने पन्हाला किले (कोल्हापुर शहर के पास) पर कब्जा कर लिया। इस बीच, नेताजी पालकर के नेतृत्व में एक और मराठा बल, बीजापुर की ओर सीधे बढ़ा। वहाँ भी भीषण युद्ध हुआ।

कुछ अन्य प्रमुख लड़ाइयाँ

  1. उबरखिंद की लड़ाई में कलतल्फ खान की हार: शिवाजी ने कुछ मवाले सैनिकों के साथ उबरखिंद की लड़ाई में शाहिस्ता खान के एक सरदार कलतल्फ खान को हराया।
  2. शाहिस्ता खान पर हमला: औरंगजेब ने अपने मामा शाहिस्ता खान को बादीबागम साहिबा, आदिशाही सल्तनत के अनुरोध पर 1,50,000 से अधिक शक्तिशाली सेना के साथ भेजा। अप्रैल 1663 में छत्रपति शिवाजी ने व्यक्तिगत रूप से लाल महल पुणे में शाहिस्ता खान पर आश्चर्यजनक हमला किया। छत्रपति शिवाजी ने आधी रात को 300 सैनिकों के साथ हमला किया, जबकि लालमहल में शाहिस्ता खान के लिए 1,00,000 सैनिकों की कड़ी सुरक्षा थी। इस घटना में छत्रपति शिवाजी ने शाहिस्ता खान के खिलाफ दुनिया को कमांडो ऑपरेशन के लिए महान प्रबंधन तकनीक दिखाई।
  3. सूरत पर रेड: छत्रपति शिवाजी ने 1664 में मुगल साम्राज्य के धनी शहर सूरत पर रेड डाला। सूरत मुगलों की वित्तीय राजधानी थी। ब्रिटिश ने शाहजहाँ बादशाह की अनुमति से सूरत में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की।
  4. पुरंदर की संधि: शिवाजी द्वारा सूरत की रेड के कारण औरंगजेब नाराज हो गया। उन्होंने शिवाजी को हराने के लिए मिर्जा जय सिंह और दलेर खान को भेजा। मुगल की सेना ने पुरंधर किले पर कब्जा कर लिया। छत्रपति शिवाजी 23 किले और 4,00,000 रुपए देने के लिए सहमत हुए। अपने बेटे संभाजी को मुगल सरदार बनने के लिए और मुगल की ओर से छत्रपति शिवाजी और मिर्जा राजा जय सिंह के बीच पुरंदर की संधि में औरंगजेब से मिलने के लिए तैयार हो गए।
  5. कर्नाटक अभियान: छत्रपति शिवाजी ने 1677-1678 की अवधि में राज्याभिषेक के बाद कर्नाटक में जिंजी तक का प्रांत प्राप्त किया।

मार्च 1680 के अंत में हनुमान जयंती की पूर्व संध्या पर शिवाजी 52 साल की उम्र में 3 अप्रैल 1680 को बुखार और पेचिश से बीमार पड़ गए। पुतलाबाई, शिवाजी की जीवित पत्नियों में से सबसे बड़ी, उनकी अंतिम संस्कार की चिता में कूदकर सती हो गईं। 21 अप्रैल 1680 को दस वर्षीय राजा राम को सिंहासन पर स्थापित किया गया। हालाँकि, संभाजी ने सेनापति को मारने के बाद रायगढ़ किले पर कब्जा कर लिया और उसी साल 18 जून को रायगढ़ का नियंत्रण हासिल किया। वो औपचारिक रूप से 20 जुलाई को सिंहासन पर बैठ गए।