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‘स्वागत है महाराज, साथ है शिवराज’: BJP के हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया को ट्विटर पर बधाई की बहार

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार (मार्च 11, 2020) को यानी आज भारतीय जनता पार्टी का हाथ थाम लिया। उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ली। इस अवसर पर उन्होंने नड्डा समेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का आभार जताया। उन्होंने इस फैसले को अपने जीवन के लिए नया रास्ता बताया। साथ ही ये भी कहा कि अब कॉन्ग्रेस वो पार्टी नहीं रही जो पहले थी।

सिंधिया के इस फैसले के बाद भाजपा में शामिल होने से पार्टी नेताओं में एक अलग ही खुशी देखने को मिल रही है। ट्विटर पर बधाई संदशों की बहार आ गई। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने सिंधिया का इस अवसर पर अलग ही अंदाज में स्वागत किया। सिंधिया के भाजपा में शामिल होते ही उन्होंने ट्वीट पर लिखा, “स्वागत है महाराज, साथ है शिवराज।” कुछ ही देर के भीतर में साढ़े तीन हजार लोगों ने इसे रीट्वीट कर दिया। साथ ही एक हजार लोगों ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया दे डाली।

ज्योतिरादित्य के भाजपा में शामिल होते ही उनकी बुआ यशोधरा राजे ने भी इस पर अपनी खुशी जाहिर की और भतीजे को ढेरों शुभकामनाएँ दी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “आज मैं बहुत खुश हूँ। अब सरकार शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में बनेगी। हम खुश हैं क्योंकि मैंने उनके अंतर्गत काम किया है और जानती हूँ कि हमारे पास जनता के लिए कितनी लाजवाब योजनाएँ थी। मगर, आज वो नहीं हैं। मैं अपने भतीजे को शुभकामनाएँ देती हूँ और उम्मीद करती हूँ बुआ-भतीजे की जोड़ी अच्छा करेगी।”

सिंधिया के पार्टी में शामिल होने के बाद इसकी खुशी राजस्थान में भी दिखाई दी। यशोधरा राजे की बड़ी बहन और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने लिखा, “आज यदि राजमाता साहब हमारे बीच होतीं तो आपके इस निर्णय पर जरूर गर्व करती। ज्योतिरादित्य ने राजमाता जी द्वारा विरासत में मिले उच्च आदर्शों का अनुसरण करते हुए देशहित में यह फैसला लिया है, जिसका मैं व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों ही तौर पर स्वागत करती हूँ।”

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी उनका पार्टी में स्वागत करते हुए लिखा, “भाजपा परिवार से जुड़ने पर आपका हार्दिक अभिनंदन है। मुबारक हो, ज्योतिरादित्य सिंधिया जी। भाजपा एक ऐसी पार्टी है जो जनता की सेवा के लिए समर्पित है और हमेशा राष्ट्र को पहले रखती है। ये पार्टी काम करने योग्य है। यहाँ आपको अपना सही उद्देश्य मिलेगा।”

अकाली दल के नेता मंजिंदर सिंह सिरसा ने भी सिंधिया को कॉन्ग्रेस छोड़ने पर ट्विटर पर बधाई दी। उन्होंने लिखा, “युवा और जीवंत लोग बुजुर्गों और भ्रष्टाचारियों की पार्टी-कॉन्ग्रेस को छोड़ रहे हैं। स्वागत ज्योतिरादित्य सिंधिया।”

गौरतलब है सिंधिया के भाजपा में शामिल होने पर जहाँ भाजपा के नेताओं और समर्थकों में खुशी की लहर है। वहीं कॉन्ग्रेसी नेता उन्हें अवसरवादी कहने से नहीं चूक रहे। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने इस पर बयान जारी करते हुए कहा है कि ऐसे अवसरवादियों को जल्द से जल्द पार्टी को छोड़ ही देना चाहिए। कॉन्ग्रेस पार्टी ने उन्हें 18 साल दिए। उन्होंने मौक़ा आने पर मौकापरस्ती दिखाई। लोग उन्हें सबक जरूर सिखाएँगे।

बीजेपी में ज्योतिरादित्य: कहा- अब नहीं रही वह कॉन्ग्रेस, कमलनाथ राज में रोजगार नहीं भ्रष्टाचार के अवसर हुए पैदा

राजनीतिक गलियारों में चल रहे तमाम चर्चाओं को विराम लगाते हुए बुधवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी में शामिल हो गए। उन्होंने मंगलवार को कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दिया था। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। सदस्यता लेने के बाद सिंधिया ने कॉन्ग्रेस को जमकर सुनाई। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस अब पहले जैसी नहीं रही। वह वास्तविकता से इनकार करती है। वहॉं जड़ता का माहौल है। नए लोगों को मौका नहीं मिल रहा।

सिंधिया ने पार्टी में शामिल करने के लिए नड्डा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का शुक्रिया अदा किया। मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में चल रही कमलनाथ सरकार को लेकर कहा, “मेरे गृह राज्य के लिए हमने एक सपना पिरोया था। 2018 में वहॉं सरकार बनी, लेकिन 18 महीनों में वे सपने बिखर गए। किसानों से 10 दिन में कर्ज माफी की बात कही गई थी। लेकिन 18 महीनों में नहीं हो पाया। बोनस नहीं मिल पाया, ओलावृष्टि की क्षतिपूर्ति नहीं हो पाई। किसान त्रस्त हैं। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर नहीं। रोजगार की जगह भ्रष्टाचार के अवसर पैदा हुए।”

इससे पहले नड्डा ने सिंधिया के बीजेपी में आने पर इसे पार्टी की बड़ी सफलता करार दिया। साथ ही सिंधिया परिवार के बीजेपी और देश के लिए योगदान को भी याद किया। नड्डा ने कहा कि राजमाता विजय राजे सिंधिया का भारतीय जनसंघ और भाजपा की स्थापना में बड़ा योगदान रहा है। राजमाता हमारी आदर्श और दृष्टि रही हैं। उनके पोते के पार्टी में शामिल होने की उन्हें खुशी है। उन्होंने कहा कि सिंधिया का पार्टी में शामिल होना परिवार में शामिल होने जैसा है। उन्हें पार्टी की मुख्यधारा में काम करने का मौका मिलेगा।

सिंधिया ने इस दौरान कहा कि मेरे जीवन में दो बार कठिन दौर आया। पहला 30 सितंबर 2001 जब पिता जी मृत्यु हुई। दूसरा 10 मार्च 2020 को कि जब जीवन में एक नया मोड़ आया। वहीं सिंधिया ने कहा कि मोदी, शाह और नड्डा ने उन्हें अपने परिवार में शामिल होने का आमंत्रण दिया। वे इन नेताओं के दिखाए रास्ते पर चल कर भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य राजनीति के माध्यम से जनसेवा करना है। कॉन्ग्रेस में रहकर उन्होंने 18 साल देश और प्रदेश की सेवा की। लेकिन अब वह पूरे विश्वास से कह सकते हैं कि कॉन्ग्रेस संगठन के माध्यम से वे ऐसा नहीं कर पा रहे थे।

पीएम मोदी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, “मैं अपना सौभाग्य मानता हूॅं कि मोदी और नड्डा जी ने मुझे वह मंच उपलब्ध कराया है कि हम जनसेवा के रास्ते पर आगे बढ़ पाएँ। देश में ऐसा जनादेश किसी को नहीं मिला है जैसा मोदी जी को मिला है। वह बेहद सक्रिय, क्षमतावान और पूर्णरूप से समर्पित होकर काम करते हैं, उन्होंने देश का नाम बढ़ाया है।

बीजेपी की सदस्यता ग्रहण करने के बाद सिंधिया ने करीब 15 मिनट मीडिया को संबोधित किया। इसे आप नीचे दिए गए लिंक पर जाकर सुन सकते हैं।

BJP उम्मीदवार व कार्यकर्ताओं को मार-मार कर किया लहूलुहान: आंध्र में जगन रेड्डी का ‘बंगाल मॉडल’

आंध्र प्रदेश में भी अब पश्चिम बंगाल की तरह ही भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले शुरू हो गए हैं। बंगाल की तरह यहाँ भी सत्ताधारी पार्टी के गुंडे ही ये सब कर रहे हैं। चुनाव में नॉमिनेशन करने जा रहे भाजपा उम्मीदवार पर हमला कर के लहूलुहान कर दिया गया। नॉमिनेशन में जा रहे भाजपा कार्यकर्ताओं पर सत्ताधारी वाईएसआर कॉन्ग्रेस पार्टी के गुंडों ने हमला किया। ताज़ा घटना चित्तूर जिले के पुलिचेलारा मंडलम क्षेत्र की है। मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के पार्टी के गुंडों ने भाजपा कार्यकर्ताओं की गाड़ी के शीशे भी फोड़ डाले।

भाजपा आंध्र प्रदेश ने सोशल मीडिया पर अपने आधिकारिक पेज से भाजपा उम्मीदवार व कार्यकर्ताओं पर हमले की जानकारी दी। संलग्न किए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले के बाद वो अपना दर्द बयाँ कर रहे हैं। भाजपा ने इस वीडियो के साथ कई पत्रकारों को भी टैग किया:

हाल ही में पश्चिम बंगाल में भी एक भाजपा कार्यकर्ता को मौत के घाट उतार दिया गया था। ममता बनर्जी की पार्टी के गुंडों द्वारा अब तक कई भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी हैं। केरल में ऐसे ही वामपंथियों द्वारा आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या के कई मामले सामने आ चुके हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी हैं, जिन्हें ईसाई मिशनरियों व क्रिस्चियन सम्बन्धी योजनाओं को लागू व प्रमोट करने के लिए जाना जाता है। यह भी कहा जा रहा है कि राज्य में मंदिरों के बोर्डों में भी जगन रेड्डी अपने लोगों को बिठा रहे हैं।

सियासी हलचल के बीच शिवराज से पूछा गया Mamaji Returns? जवाब मिला- मैं गया ही कहाँ था?

मध्यप्रदेश की राजनीति में चल रही उठा-पटक के बीच राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने एक ट्वीट से इशारा कर दिया है कि भले ही प्रदेश में आज कॉन्ग्रेस के विधायक जाने के कारण उनकी वापसी के कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन वास्तविकता तो ये है कि वे यहाँ से कहीं गए ही नहीं थे।

आज सुबह, ट्विटर पर हमेशा सक्रिय रहने वाले शिवराज सिंह चौहान ने सबको सुप्रभात कहा। उन्होंने लिखा, ” सुप्रभात, मेरे प्यारे भाइयों-बहनों, मेरे प्यारे भांजे-भांजियों:आप का दिन मंगलमय हो।”

अब हालाँकि ये ट्वीट बहुत साधारण था, लेकिन शायद ये मौक़ा साधारण नहीं था। इसीलिए, इस मौक़े का फायदा उठाकर द हिंदू की पत्रकार निस्तूला हेब्बर ने सवालिया निशान लगाकर उनसे पूछ डाला, “#मामाजी रिटर्न्स?” यानी क्या मामाजी वापसी कर रहे हैं? जिसपर ‘मामाजी’ कहे जाने वाले शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें फौरन जवाब में लिखा, “निस्तूला जी, मैं गया ही कहाँ था?”

अब सियासी हलचल के बीच उनका ये रिप्लाई जैसे ही आया, उसी वक्त उनके फॉलोवर्स ने इसपर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया। एक यूजर ने लिखा,“मामा, ये सब बंद करो और जल्दी से पद ग्रहण करो, कल ही दिन में 5 बार लाइट गई है। अभी तो गर्मी भी नहीं और ये हाल है। अब बर्दाश्त नहीं होता।”

इसके बाद एक यूजर्स ने लिखा, “आप ऐसे इंसान हो, जिनको दिल में आने के लिए और बसने के लिए इजाजत है पर निकलना तो मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।”

एक सोशल मीडिया यूजर ने इस जवाब को मामाजी के बल्ले का करारा प्रहार बताया और एक ने लिखा कि जो जनता के हृदय में निवास करता है। वो भला कहाँ जाएगा।

गौरतलब है कि सोमवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे के बाद पूरे प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई। उनके साथ 20 अन्य विधायकों ने भी कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दिया। जिससे कॉन्ग्रेस की सरकार खतरे में आ गई और भाजपा के सरकार बनाने पर लगाए जा रहे कयास तेज हो गए।

अब हालाँकि कमलनाथ प्रदेश में अपनी सरकार बनाए रखने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन देखना है कि उनकी ये कोशिशें उन्हें सदन में पर्याप्त संख्याबल दिलाए रखने में मदद कर पाती हैं या नहीं।

जीभ काटी, आँखें फोड़ी, नाखून उखाड़े, सर काट कर कुत्तों को खिलाया: छत्रपति संभाजी महाराज को मिली इस्लाम कबूल न करने की सज़ा

ये उस समय की बात है जब औरंगज़ेब की दक्षिण भारत जीतने की महत्वाकांक्षा हिलोरें मारने लगी थी। 3 लाख सैनिकों की भारी सेना लेकर वह बुरहानपुर में डेरा डाल कर बैठा हुआ था। उस समय मराठा शासक हुआ करते थे छत्रपति संभाजी महाराज, जिन्होंने काफ़ी मुश्किल से गद्दी पाई थी। अपने ही लोगों ने गद्दारी कर उन्हें मारना चाहा था और उनके छोटे भाई राजाराम को छत्रपति बना दिया था। राजाराम तब 10 साल के ही थे। हालाँकि, परिवार और राज्य में दुश्मनों से घिरे होने के बावजूद संभाजी महाराज ने गद्दी सँभाली।

औरंगज़ेब इतना क्रूर था कि उसके आतंक से तंग आकर उसका सबसे छोटा बेटा मुहम्मद अकबर ही भागा-भागा फिर रहा था। इसी क्रम में उसने छत्रपति संभाजी महाराज के दरबार में शरण ली थी। बौखलाए औरंगज़ेब ने जब दक्कन का अभियान शुरू किया तो उसे बीजापुर और गोलकोण्डा को जीतने में 3 वर्ष लगे। उसके बाद उसकी नज़र मराठा साम्राज्य की तरफ़ पड़ी, जिसकी नींव छत्रपति शिवाजी महाराज ने रखी थी। भले ही बाद में मराठा साम्राज्य इतना फैला कि दिल्ली तक उसके आगे नतमस्तक हुए, लेकिन सँभाली का समय काफ़ी संघर्ष भरा था। इन्हीं संघर्षों की नींव पर साहूजी महाराज और बाजीराव जैसे योद्धाओं ने एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया।

1687 ख़त्म होते-होते मराठा-मुग़ल युद्ध के घाव दिखने लगे थे। छत्रपति संभाजी महाराज के सेनापति हम्बीर राव मोहिते ऐसे ही एक युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। संभाजी महाराज चारों तरफ से मुगलों से घिरे हुए थे और उनकी गतिविधियों की सूचना गद्दारों के माध्यम से औरंगज़ेब को लगातार मिल रही थी। संघमेश्वर पर अचानक से मुग़ल लड़ाका मुक़र्रब ख़ान ने धावा बोला और उन्हें बंदी बना लिया। वो फ़रवरी 1, 1689 का दिन था। संभाजी महाराज और कवि कलश को जोकरों की वेशभूषा में ऊँट पर बिठा कर मुग़ल कैम्प में घुमाया गया। इस दौरान उनका अपमान करने के लिए ड्रम्स और नगाड़े बजते रहे।

औरंगज़ेब ने छत्रपति संभाजी महाराज के सामने कई माँगें रखीं और कहा कि अगर उन्होंने बात मान ली तो उनकी जान बख्श दी जाएगी। संभाजी महाराज से उनका सारे किलों को मुगलों को देने को कहा गया। उनसे कहा गया कि वे उन सभी मुगलों के नाम बताएँ, जो मराठा से मिले हुए हैं। साथ ही वे मराठा के छिपे हुए खजाने का पता बताएँ, ऐसी भी शर्त रखी गई। उन्हें इस्लाम कबूल करने को भी मजबूर किया गया। छत्रपति शिवाजी महाराज की तरह ही हौंसले अपनाते हुए संभाजी महाराज ने ये सब मानने से इनकार कर दिया। छत्रपति शिवाजी तो औरंगज़ेब की क़ैद से भाग कर मराठा साम्राज्य की स्थापना कर ‘छत्रपति’ के रूप में पदस्थापित होने में कामयाब रहे थे, लेकिन दुर्भाग्य से संभाजी महाराज को एक भयानक मौत मिली।

औरंगज़ेब ने आदेश दिया कि छत्रपति संभाजी महाराज को प्रताड़ित कर के मार डाला जाए। सबसे पहले तो संभाजी महाराज और कवि कलश की जिह्वाएँ काट ली गईं। उनकी जीभ काट कर उन्हें रात भर तड़पने के लिए छोड़ दिया गया। अगले दिन उनकी आँखें फोड़ डाली गईं और उन्हें अँधा कर दिया गया। इस दौरान लगातार उनसे कहा जाता रहा कि अगर उन्होंने इस्लाम अपना लिया तो उनकी जान बख्श दी जाएगी, लेकिन इस अथाह प्रताड़ना के बावजूद संभाजी महाराज ने मुगलों के सामने झुकने से इनकार कर दिया।

इसके बाद उनके सभी अंगों को एक-एक कर काटा जाने लगा। छत्रपति संभाजी महाराज से बार-बार कहा गया कि वे पैगम्बर मुहम्मद के द्वारा दिखाए गए रास्तों को अपनाएँ और इस्लाम कबूल कर लें लेकिन वो नहीं झुके। उन्हें लगातार तीन सप्ताह तक यूँ ही तड़पाया गया। सोचिए, किसी की जीभ काट दी गई हो और आँखें फोड़ डाली गई हों, फिर भी उसे ज़िंदा रख कर रोज़ प्रताड़ित किया जाए- तो उसे कैसा लगेगा? उनके नाखून तक उखाड़ लिए गए थे। कहा जाता है कि अपने शुरूआती दिनों में संभाजी महाराज उतने लोकप्रिय राजा नहीं थे, लेकिन हिंदुत्व और राज्य के लिए उन्होंने जो सहा, उससे उन्हें न चाहने वाले भी उन्हें पूजने लगे।

तीन सप्ताह तक ऐसे ही असीम प्रताड़ना देने के बाद छत्रपति संभाजी महाराज का गला काट दिया गया। उन्हें मार डाला गया। उनके मृत शरीर को कुत्तों के आमने फेंक दिया गया। भविष्य में पूरे भारत को अपने आगोश में लेने वाले मराठा साम्राज्य की नींव रखने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज के रक्त के साथ इस तरह के बर्ताव की ख़बर ने न सिर्फ़ मराठा, बल्कि पूरे देश के लोगों के भीतर ऐसी चिंगारी उत्पन्न की, जिससे बाद में मुगलों का पतन होना शुरू हो गया।

वो मार्च 11, 1689 का दिन था, जब उनकी मृत्यु हुई। उनके सिर को लेकर दक्खिन के कई प्रमुख शहरों में घुमाया गया। औरंगज़ेब ने अपना डर कायम रखने के लिए और हिन्दुओं की रूह कँपाने के लिए ऐसा किया। नर्मदा से लेकर तुंगभद्रा तक के हर राज्य को जीतने वाले औरंगज़ेब की पूरे दक्षिण भारत को पूर्णरूपेण जीतने की महत्वाकांक्षा तो कभी पूरी नहीं हुई और उसके जीवन के अंतिम 20 सालों में उसने अपनी इसी सनक में अपनी एक चौथाई सेना गँवा दी। संभाजी को प्रताड़ित कर के उसे आनंद मिलता था।

भीमा नदी के किनारे कोरेगाँव में वीर संभाजी महाराज ने अपना बलिदान दिया। उनके ही बलिदान से प्रेरणा लेकर उनके छोटे भाई राजाराम ने 20 वर्ष की उम्र में ही छत्रपति की गद्दी सँभाली और सारे योद्धाओं को इकट्ठा करना शुरू कर दिया। हालाँकि, कुछ ही दिनों बाद काफ़ी कम उम्र में ही बीमारी के कारण उनकी मृत्यु हो गई। फिर राजाराम की पत्नी ताराबाई ने अपने छोटे बेटे को ‘शिवाजी 2’ नाम से गद्दी पर बैठा कर शासन करना शुरू किया। ताराबाई ने सैन्य रणनीति के गुर शिवाजी को देख कर सीखे थे। उनके ही संरक्षण में मराठाओं ने अपना खोया गौरव वापस लेना शुरू कर दिया।

छत्रपति संभाजी महाराज राजे: भारत के इतिहास के अमर बलिदानी

औरंगज़ेब को भान हो गया था कि मराठा अब अजेय होते जा रहे हैं, क्योंकि उसने महारानी ताराबाई को हलके में लिया था। राजाराम की मृत्यु के बाद मुगलों ने एक-दूसरे को मिठाइयाँ खिलाई थीं। औरंगज़ेब को जब मराठा की बढ़ती ताक़त का एहसास हुआ, तब तक उसके दोनों पाँव कब्र में थे और वो लाचार हो गया था। संभाजी महाराज की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी और बेटे साहूजी को औरंगज़ेब ने क़ैद कर लिया। जब औरंगज़ेब की मौत हुई तो करीब 2 दशक बाद साहूजी महाराज रिहा हुए।

मुगलों ने उन्हें यूँ तो ये सोच कर रिहा किया था कि वो दिल्ली के कहे अनुसार काम करेंगे लेकिन साहूजी महाराज ने छत्रपति का पद सँभालते ही मुगलों को नाकों चने चबवाना शुरू कर दिया। वे अपने दादा छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे योद्धा साबित हुए और उन्होंने 40 साल से भी समय तक राज किया। बलिदानी संभाजी महाराज के पुत्र ने पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में भगवा मराठा ध्वज फहराया। आगे जाकर बाजीराव जैसे महान योद्धाओं ने इस साम्राज्य का सफल संचालन किया।

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(सोर्स 1: Advanced Study in the History of Modern India 1707-1813 By Jaswant Lal Mehta)
(सोर्स 2: Encyclopaedia of Indian Events & Dates By S. B. Bhattacherje
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ताहिर हुसैन पर ED ने भी कसा शिकंजा, साथी इरशाद, आबिद और शादाब भी दबोचे गए

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के मुख्य संदिग्ध ताहिर हुसैन पर शिकंजा कसता जा रहा है। चाँदबाग में हिंसा भड़काने एवं आईबी के अंकित शर्मा की हत्या के आरोपित आप के निलंबित पार्षद ताहिर पर अब ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में केस दर्ज किया है। कट्टरपंथी संगठन PFI से उसके संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।

ताहिर हुसैन से जुड़े मामले में जाँच के लिए क्राइम ब्रांच ने मुस्तफाबाद के तीन युवकों को भी पकड़ा है। इनकी पहचान इरशाद, आबिद और शादाब के रूप में हुई है। बताया जा रहा है ये तीनों 24 फरवरी को ताहिर हुसैन के साथ थे। तीनों उसके बेहद करीबी बताए जाते हैं।

यहाँ बता दें कि 24-25 फरवरी को हुई हिंसा में पुलिस ने ताहिर पर कुल चार मामले दर्ज किए हैं। इनमें एक मामला आईबी IB के कांस्टेबल अंकित शर्मा की हत्या का भी है। अंकित के पिता की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया है। वहीं, कुछ मामले सीसीटीवी फुटेज के आधार पर भी ताहिर हुसैन पर मामले दर्ज किए गए हैं।

ताहिर हुसैन के साथ-साथ उसके भाई शाह आलम को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। दरअसल, आलम पर भी अंकित शर्मा की हत्या में शामिल होने का आरोप है। कहा जा रहा है कि जिस समय उनकी हत्या हुई उस समय शाह आलम वहीं मौजूद था। रविवार को ताहिर हुसैन की सहायता करने वाले पिता-पुत्र रियासत अली और लियाकत को भी कड़कड़डूमा कोर्ट में पेश किया गया था। इसके बाद रियासत अली को 3 दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया था और उसके पिता लियाकत को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। 

उल्लेखनीय है कि दिल्ली में हुई हिंसा में अब तक 53 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 100 से अधिक घायलों को इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। हिंसा मामले में पुलिस अब तक 1000 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर चुकी है और बड़ी संख्या में लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। पुलिस पूरे मामले में दंगाइयों की पहचान सीसीटीवी फुटेज के जरिए कर रही है। 

3 कश्मीरी छात्रों को बेल देने से कोर्ट का इनकार, कहा- PAK के पक्ष में नारे अस्वीकार्य

कर्नाटक में हुबली की एक अदालत ने देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार तीन कश्मीरी छात्रों की जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी। आरोपित छात्रों के नाम बासित आशिक सोफी (22), तालिब मजीद (20) और अमीर मोहिउद्दीन वानी (20) हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने एक विडियो में पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए। इसके वायरल होने के बाद काफी हंगामा हुआ और इन पर देशद्रोह का केस दर्ज किया गया।

सोमवार को मामले पर सुनवाई करते न्यायाधीश गंगाधर केएन ने कहा, ”इस देश की रक्षा और सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। हमें जाँच एजेंसी को किसी भी निकाय के हस्तक्षेप के बिना अपना काम करने की अनुमति देनी चाहिए। आरोप की प्रकृति पर विचार करते हुए, जाँच पूरी होने तक, याचिकाकर्ता जमानत के लिए हकदार नहीं हैं। यहाँ तक कि उन आधारों पर भी नहीं, जो उन्होंने ज़मानत के लिए आधार नहीं बनाए हैं।”

बता दें कि तीनों केएलई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के छात्र हैं। विडियो सामने आने के बाद कई हिंदूवादी संगठनों और वकीलों ने केएलई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया था। लगातार विरोध-प्रदर्शन के बाद पुलिस ने तीनों कश्मीरी छात्रों को हिरासत में लिया था। हिरासत में लेने का बाद तीनों को कोर्ट में पेश किया गया था, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

उल्लेखनीय है कि ये तीनों छात्र इससे पहले भी एक बार गिरफ्तार हो चुके थे। उस दौरान इन्होंने पाकिस्तान के समर्थन में खूब नारेबाजी की थी। इसके मद्देनजर इनके ख़़िलाफ़ कार्रवाई भी हुई थी। मगर, बाद में सीआरपीसी की धारा 169 के तहत एक बॉन्ड भरने के बाद तीनों छात्रों को रिहा कर दिया गया था। लेकिन 17 फरवरी को इन्हें इनकी हरकत के लिए फिर गिरफ्तार कर लिया गया।

अब देशद्रोह मामले में आरोपितों को जमानत दिलवाने के लिए डाली गई याचिका में इस आधार पर जमानत माँगी गई थी कि वे निर्दोष हैं, उन्होंने कथित रूप से कोई अपराध नहीं किया है। वे केवल छात्र हैं और अपने छात्रावास में रह रहे हैं। वह अपनी कक्षाओं में जाते हैं और उनको अपने टर्म एग्जाम की तैयारी भी करनी है। ऐसी स्थिति में उन्हें अगर जमानत नहीं दी गई तो उन्हें गंभीर कठिनाई होगी और इससे उनकी शिक्षा पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

इसके अलावा इस बारे में उल्लेख किया गया था कि पुलिस पहले ही उन्हें धारा 169 के तहत जमानत दे चुकी है और उन्होंने पुलिस के समक्ष नियत उपस्थिति के लिए बांड भी भर दिए हैं। इतना ही नहीं उनका ऐसा कोई इरादा नहीं था कि वे सत्ता या इस देश के खिलाफ किसी भी अस्वीकृति या अप्रभाव को हवा देकर किसी भी तरह के सार्वजनिक विकार को पैदा करें। याचिकाकर्ता जाँच अधिकारी के सामने, जब भी वह बुलाएँगे, पेश होने के लिए तैयार हैं।

लेकिन, यहाँ अभियोजन पक्ष ने ये कहते हुए इन अर्जियों का विरोध किया कि इन अपराधों की गंभीरता काफी संगीन हैं। जो इतनी अधिक व्यापक है कि ये इस देश की अखंडता को प्रभावित कर सकती है। याचिकाकर्ताओं को ट्रायल अदालत द्वारा दोषी पाया जाता है, तो उन्हें उम्र कैद की सजा भी हो सकती है।

जानकारी के अनुसार, तीनों छात्रों ने देश विरोधी विडियो उस समय बनाया जब कॉलेज में पुलवामा हमले के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक समारोह आयोजित किया गया था। वे इस कार्यक्रम में शामिल होने के बजाय हॉस्टल में पाकिस्तान समर्थक नारे लगाते हुए विडियो बना रहे थे। प्राचार्य को भी इस घटना की जानकारी तब हुई जब सोशल मीडिया पर यह विडियो वायरल हो गया।

विडियो देखने के बाद प्राचार्य ने इन्हें कॉलेज से जाँच पूरी होने तक निलंबित कर दिया था। वहीं राज्य के उद्योग मंत्री जगदीश शेट्टार ने कहा था कि सरकार किसी के द्वारा इस तरह की राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगी। अब कोर्ट ने भी इस मामले पर कहा है, “

अगर शिकायत में दी जानकारी को देखा जाए तो प्रावधान को लागू करने के लिए उचित आरोप लगाए गए हैं। यदि देश के लोगों की भावनाओं को समझा जाए तो पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाना गंभीर और अस्वीकार्य है। याचिकाकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर किए गए कृत्य की प्रकृति अंतर्निहित भारतीय सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ सकती है। किसी को भी बच्चों के उस खेल पर जाने या खेलने की अनुमति नहीं देनी चाहिए, जो देश के निर्दोष लोगों के जीवन, स्वतंत्रता और विश्वास पर भारी पड़ सकता है। इस देश की अखंडता और सुरक्षा सभी के सामने लंबी या महत्वपूर्ण है।”

मजाक चल रहा है क्या? यहाँ हम इतनी मेहनत कर रहे हैं… सिंधिया के कॉन्ग्रेस छोड़ने से बौखलाई सबा नक़वी

ज्योतिरादित्य सिंधिया के कॉन्ग्रेस छोड़ने से पत्रकारों के गिरोह विशेष की होली ख़राब हो गई। सिंधिया ने न सिर्फ़ ख़ुद कॉन्ग्रेस को अलविदा कहा बल्कि अपने साथ 22 विधायकों को भी ले गए। उन्होंने मंगलवार (मार्च 10, 2020) को पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाक़ात की। अब भाजपा में शामिल होने की बस औपचारिकता शेष है। सिंधिया के पार्टी छोड़ते ही कॉन्ग्रेस नेताओं ने उन्हें ‘गद्दार’ बताना शुरू कर दिया और उनके पिता व दादी पर भी निशाना साधा।

इसी क्रम में एक टीवी बहस के दौरान कथित पत्रकार सबा नक़वी भड़क गईं। सिंधिया के फैसले से जितना दुख कॉन्ग्रेस नेताओं को नहीं हुआ, लगता है कि उससे ज्यादा कुछ स्वयंभू पत्रकारों को हुआ है। इसकी एक झलक तब मिली जब ‘सीएनएन न्यूज़ 18’ पर एक बहस के दौरान नकवी ने नाराज़गी जाहिर की। उनकी बातों से ऐसा लग रहा था, जैसे वो पत्रकार न हों और कॉन्ग्रेस की गिरती साख से उनका कोई व्यक्तिगत नुकसान हो रहा हो।

सबा नकवी ने नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा:

“अरे, हम सब लोग इतना काम करते हैं। हम सभी इतनी मेहनत करते हैं। क्या है ये? हम दिन-रात काम करते हैं, ख़बरों को कवर करते हैं। कोई आ रहा है, कोई जा रहा है। ये सब क्या है? मजाक चल रहा है क्या?”

सबा नकवी ने झल्लाते हुए ये बातें कहीं। उनसे पूछा गया था कि कॉन्ग्रेस पार्टी से ज्योतिरादित्य सिंधिया के जाने को वो किस रूप में देखती हैं। बता दें कि सोशल मीडिया पर नकवी लगातार भाजपा के ख़िलाफ़ ज़हर उगलती रहती हैं। बुधवार की सुबह तो उन्होंने लगातार ट्रोल होने के कारण ट्विटर को ‘बाय’ कह दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि कमलनाथ सब ठीक कर देंगे। सबा नकवी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के 26 फ़रवरी को किए गए ट्वीट को कोट करते हुए लिखा कि चीजें पिछले 2 हफ़्तों में बदली हैं। उस ट्वीट में सिंधिया ने भाजपा नेताओं पर घृणा फैलाने का आरोप लगाया था।

सबा नकवी हेमंत विश्व शर्मा को भी याद करना नहीं भूलीं और उन्होंने लिखा कि उनके कॉन्ग्रेस छोड़ने के कारण उत्तर-पूर्व में भाजपा के लिए रास्ते खुल गए। उन्होंने झल्लाते हुए ये भी लिखा कि अब भारतीय राजनीति में विचारधारा के लिए कोई जगह रह ही नहीं गई है।

अब तुम हॉट नहीं हो: संघी निकले मिलिंद सोमन तो लिबरल गिरोह की होली हुई ख़राब

सुपरमॉडल मिलिंद सोमन के बारे में जैसे ही खुलासा हुआ कि उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से पुराना सम्बन्ध रहा है, लिबरलों और सेकुलरों का एक बड़ा वर्ग उनके ख़िलाफ़ उतर आया। हाल ही में उनकी किताब ‘मेड इन इंडिया- ए मोमॉयर’ लॉन्च हुई है। इसे उन्होंने लेखिका रूपा पाई के साथ मिल कर लिखा है। उन्होंने इस किताब पर चर्चा के दौरान बताया कि जब वो 10 वर्ष के थे, तब वो आरएसएस की शाखा में नियमित रूप से जाया करते थे। मिलिंद मुंबई के जिस शिवाजी पार्क में पले-बढ़े, वहाँ कई बच्चे संघ की शाखा में जाया करते थे।

मिलिंद ने बताया कि न तो वो राजनीति में थे और न ही उनका परिवार लेकिन उनके पिता नियमित तौर पर संघ की शाखा का हिस्सा बनते थे। मिलिंद सोमन ने संघ की प्रशंसा करते हुए अपने अनुभव कुछ यूँ साझा किया:

“मैं उस समय लगभग 9 साल का था और वहीं हम खेल-कूद में हिस्सा लेते और अनुशासन में रहना सीखा करते थे। मैं संघ की शाखा सहित दो-तीन कैंपों में भी गया, जहाँ मेरी तरह हज़ारों बच्चे आते थे। वहीं पर हमें बताया जाता था कि अच्छे नागरिक कैसे बनें, आत्मनिर्भर कैसे बनें। उस समय मैंने जो सीखा, उस पर मैं अब तक अमल करता रहा हूँ।

मिलिंद सोमन ने ये भी बताया कि आरएसएस के नजदीक जाने पर उन्हें कहीं भी ऐसा नहीं लगा कि ये संगठन राजनीतिक है। उन्हें कहीं भी राजनीति नहीं दिखी। उन्होंने बताया कि वो संघ के जिन लोगों से मिलते थे, वो भी राजनीतिक नहीं लगे। हालाँकि, उन्होंने कहा कि हो सकता है बाद में राजनीति संघ से जुड़ गई हो। सोशल मीडिया पर लोगों ने लिखा कि मिलिंद सोमन ने तो ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ मिल कर लिबरल गिरोह की होली ही ख़राब कर दी।

लिबरल गिरोह के कुछ लोगों ने लिखा कि उनके लिए मिलिंद सोमन अब ‘हॉट’ नहीं हैं। नंदिनी डिसूजा नामक यूजर ने मजाक उड़ाते हुए लिखा कि संघ की शाखाओं में जाने का ही कमाल है कि मिलिंद सोमन अंडरवियर में अच्छे-अच्छे पोज देते रहे हैं। इसी तरह कई अन्य सेक्युलर गिरोह के लोगों ने सोमन से नाराज़गी जताई और कहा कि पहले वो उनके फैंस हुआ करते थे।

मिलिंद सोमन ने बताया कि उनके पिता का मानना था कि संघ के कैम्पों में जाने से और इससे जुड़ने से एक युवा लड़के में अनुशासन, जीने के तरीके, फिटनेस और सोचने के ढंग में बड़े सकारात्मक बदलाव आते हैं।

शाहीन ने की खालिद से मोहब्बत की खता! अब्बा और चाचा ने खेत में ले जाकर मारी गोली

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में 5 मार्च की रात शाहीन नाम की एक विवाहिता रहस्यमय तरीके से गायब हो गई। बाद में उसकी लाश मिली। उसके परिजनों ने गाँव के 5 लोगों पर हत्या का आरोप मढ़ा था। हालाँकि, पुलिस को उस समय परिजनों की बात पर यकीन नहीं था, क्योंकि शाहीन के अब्बा और शौहर का बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे थे। अब पुलिस ने इस मामले की गुत्थी सुलझा ली है।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, शाहीन को मारने वाला कोई और नहीं बल्कि उसका अब्बा और चाचा हैं। उन्होंने शाहीन के प्रेम संबंधों के बारे में जानकर उसकी हत्या कर दी।

पूरा मामला लखीमपुर खीरी जिले के धौरहरा कोतवाली क्षेत्र के गाँव शेखनपुरवा का है। यहाँ पुलिस ने मामले की तह को खोलने के बाद शाहीन के अब्बा और चाचा दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मामले में छानबीन करने के बाद बताया कि शाहीन एक दिन ससुराल में रहने के दौरान अपने प्रेमी के घर चली गई थी। तब ससुराल पक्ष ने उसे पीटकर मायके भेज दिया। अब्बा और चाचा ने इसे अपनी बेइज्जती समझी और दोनों ने उसे खेत में ले जाकर गोली मार दी।

खबर के अनुसार, शेखनपुरवा में रहने वाले मुबारक की बेटी खालिद से प्यार करती थी। लेकिन उसके घरवालों ने उसकी शादी गाँव में ही गुड्डू से करवा दी। ऐसे में गुड्डू का घर खालिद के घर के ठीक सामने था। इसलिए दोनों का मिलना निकाह के बाद भी कम नहीं हुआ। दोनों एक-दूसरे से मिलते रहे।

घटना से एक दिन पहले भी शाहीन अपने प्रेमी से मिली थी। इसी की भनक उसके ससुराल वालों को लगी और वह उसे पकड़कर अपने घर पर ले आए। यहाँ उसके साथ पहले मारपीट हुई। बाद में उसे मायके भेज दिया गया। मायके में जब जानकारी हुई तो पिता व चाचा शाहीन से नाराज हो गए और देर रात उसे खेत लेकर गए। जहाँ दोनों ने मिलकर उसे उसे गोली मारी।

सीने में गोली लगने के कारण शाहीन की वहीं मौत हो गई। बाद में पूरी घटना से पल्ला झाड़ने के लिए अब्बा और चाचा ने थाने में मामला दर्ज कराया। साथ ही पूरा इल्जाम उसके प्रेमी समेत 5 लोगों पर मढ़ दिया। मगर, जब पुलिस ने घटना की जाँच शुरू की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इससे जाँच की पूरी दिशा ही बदल गई।

पुलिस को शक हो गया कि शाहीन की हत्या पिता और चाचा ने ही की है। पुलिस ने इसी दिशा में अपनी जाँच शुरू कर दी और जल्द ही आरोपितों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। इसके बाद पुलिस ने सभी को जेल भेज दिया है।