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मुस्लिमों के खून से सना हुआ है ईसाई राष्ट्रवाद… लेकिन विदेशी मीडिया साध लेता है चुप्पी

आजकल विदेशी मीडिया को भारत के आंतरिक मामलों में बहुत दिलचस्पी रहती है। साल 2014 के बाद तो इसमें इजाफा हो गया है। हिन्दू राष्ट्रवाद को आधार बनाकर भारत को मुस्लिम अथवा अल्पसंख्यक विरोधी बताने का झूठा प्रचार किया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी या वर्तमान सरकार संबंधी किसी भी खबर में हिन्दू नेशनलिस्ट (राष्ट्रवादी) शब्द लगाना एक शौक बन गया है। हालाँकि, राष्ट्रवादी होना कोई गुनाह नहीं है, यह एक गर्व की बात है। किसी भी भारतीय को हिन्दू होने में भी कोई शर्म नहीं है। समस्या हिन्दू राष्ट्रवाद की व्याख्या को लेकर है, जो इस तरह से होती है, जैसे भारत में मुस्लिमों पर अत्याचार किया जाता है और इसके जिम्मेदार हिन्दू राष्ट्रवादी हैं।

वॉशिंगटन पोस्ट ने अभी कुछ दिनों पहले लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनैतिक करियर में यह (दिल्ली हिंसा) दूसरा मौक़ा है, जब किसी सांप्रदायिक हिंसा के दौरान वे शासन संभाल रहे हैं। गार्डियन तो एक कदम आगे निकल गया। अख़बार ने प्रधानमंत्री मोदी को विभाजनकारी बता दिया। जबकि, तथ्य कुछ अलग ही हालात बयान करते हैं। लगभग हर अमेरिकी राष्ट्रपति का हाथ विश्व भर के मुस्लिमों के नरसंहार में शामिल रहा है। पाकिस्तान, ईराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना लगभग 5 लाख निर्दोष मुस्लिम नागरिकों की हत्या कर चुकी है। इसमें घायलों की संख्या शामिल नहीं है। इस दौरान कितने ही निर्दोष मुस्लिमों को अनाथ और बेघर कर दिया, इसके कोई आँकड़ें तक नहीं हैं।

अमेरिकी सेना 1980 से कई इस्लामी देशों पर हमला कर चुकी है। इसमें ईरान, लीबिया, लेबनान, कुवैत, इराक, सोमालिया, बोस्निया, सऊदी अरेबिया, अफगानिस्तान, सूडान, कोसोवो, यमन, पाकिस्तान और सीरिया शामिल है। कई देशों में तो आज भी इस देश की सेना डेरा जमाए हुए है, जोकि किसी देश की संप्रभुता के खिलाफ है। आतंकवाद को जड़ से मिटाने को लेकर कोई एतराज नहीं है। मगर साल 2018 में एक खबर प्रकाशित हुई जोकि शर्मनाक ही नहीं बल्कि मानवता को झकझोर देने वाली थी। अमेरिकी सेना ने 2010 से 2016 के बीच 6,000 से अधिक मुस्लिम अफगान लड़कों के साथ शारीरिक उत्पीड़न किया था। ताज्जुब की बात है कि किसी भी अमेरिकी अखबार और न्यूज चैनल ने इस अमानवीय कृत्य पर कोई प्रतिक्रिया तक नहीं की।

इतना कुछ हो गया और हो रहा है, फिर भी क्या कभी विदेशी अखबार अथवा न्यूज चैनल ने कहा कि अमेरिका की ‘क्रिस्चियन नैशलिस्ट रिपब्लिकन पार्टी’ ने निर्दोष मुस्लिम नागरिकों की हत्या कर दी। अब एक नजर न्यूयॉर्क टाइम्स की दिसंबर 2019 खबर पर डालते हैं। जिसके अनुसार 25 साल की एक अफगान मुस्लिम महिला अपने नवजात बच्चे को अस्पताल दिखाने ले जा रही थी। वह महिला न तो कोई आतंकवादी थी, और न ही किसी अपराध के लिए दोषी करार दी गई थी। उसकी बदकिस्मती थी कि अचानक से एक ड्रोन हमले में उसकी कार को बम से उड़ा दिया गया। अखबार ने इसे एक मामूली घटना से जोड़कर देखा। अमेरिकी राष्ट्रपति और सरकार के प्रतिनिधियों को इस जघन्य अपराध के लिए माफ कर दिया गया। जबकि भारत में कोई लॉ-एंड-आर्डर संबंधी मामूली घटना के लिए भी अमेरिकी पत्रकारों का नजरिया धार्मिक अथवा साम्प्रदायिक हो जाता है।

इस प्रकार के एक नहीं बल्कि हज़ारों उदाहरण हैं। अमेरिका में 2011 के आतंकी हमले के बाद सरकार और बहुसंख्यक ईसाई जनता दोनों इस्लाम विरोधी हो गए थे। अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों द्वारा मुस्लिमों को अमेरिकी हवाई अड्डों पर पूछताछ के लिए रोका जाता था। ऐसी ही एक दास्तां अमेरिकी मुस्लिम मोहम्मद फ़िरोज़ की है। उसे लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे से न्यूयॉर्क की यात्रा करनी थी। जॉन एफ केनेडी हवाई अड्डे पर पहुँचते ही उसे सुरक्षा अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया। उसका सामान जब्त कर लिया और चार घंटों की पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया। यह खबर ब्रिटेन के इंडिपेंडेंट अखबार ने प्रकाशित की थी, जिसके अनुसार यह एक सामान्य प्रक्रिया थी। दरअसल, अमेरिकी अखबारों को कभी नजर नहीं आता कि उनके देश में मुस्लिमों के साथ कैसा दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है।

पश्चिमी मीडिया को भारत में धार्मिक स्वतंत्रता पर बोलना आसान रहता है। भारत में दो समुदायों के व्यक्तियों का आपसी झगड़ा भी उनके संपादकीय पृष्ठ का हिस्सा बन जाता है। जबकि उनके अपने देश के ईसाई बहुसंख्यक मस्जिदों पर हमले और मुस्लिमों को धमकियाँ देने में कोई कसर नहीं छोड़ते। साल 2016 में लॉस एंजलिस के रहने वाले मार्क फएगीं ने ट्वीट किया कि ‘गंदे इस्लामी जानवरों की अमेरिका में कोई जगह नहीं है’। ऐसे ही साल 2019 में कैलिफोर्निया की एक मस्जिद में आगजनी की गई। वॉशिंगटन पोस्ट ने हमलावर के लिए बताया कि वह न्यूजीलैंड के आतंकी हमले से नाराज़ था। यानी वह एक ईसाई था।

हिंसा का कोई भी प्रारूप जायज़ नहीं कहा जा सकता। आतंकवाद से भारत अमेरिका से भी ज्यादा पीड़ित है। हमने भी वैश्विक स्तर पर आतंकवाद को समाप्त करने का अभियान चलाया हुआ है। मगर, हमारी नीतियों में आम नागरिकों के प्रति हिंसा शामिल नहीं है। अगर बात आंतरिक क़ानूनी व्यवस्था की है तो भारत सरकार उसे ठीक करने के लिए सक्षम है। दूसरी बात, भारत में विश्व के सभी धर्मों के अनुयायी रहते हैं। यह हमारी संस्कृति की विशेषता है कि हमने सभी धर्मों का स्वागत किया है। भारतीय संविधान में धार्मिक अधिकारों को लिखित रूप से स्वीकार्यता दी गई है। मैं भारत का नागरिक हूँ और हिन्दू धर्म में मेरी आस्था है, यही हिन्दू-राष्ट्रवाद है। किसी व्यक्तिगत झगड़े को हिन्दू-राष्ट्रवाद के नाम पर भारत और हिन्दू दोनों को बदनाम नहीं किया जा सकता। इसलिए अंत में, पश्चिमी मीडिया खासकर अमेरिका को ईसाई राष्ट्रवाद का हिंसात्मक चेहरा दुनिया को आगे रखने का साहस करना चाहिए।

‘रवीश को आज अपना मुँह काला करवा लेना चाहिए, क्योंकि जो गिरफ्तार हुआ वो शाहरुख ही है’

दिल्ली में हुई हिंदू विरोधी हिंसा के दौरान भीड़ के बीच से निकलकर दिल्ली पुलिस के एक सिपाही पर बंदूक तानने वाला मोहम्मद शाहरूख खान आज यूपी के शामली से गिरफ्तार कर लिया गया। उसकी गिरफ्तरी के साथ ही सोशल मीडिया पर दो हैशटैग ट्रेंड करने लगे। एक- शाहरुख और दूसरा अनुराग मिश्रा। शाहरुख के हैशटैग पर उसकी गिरफ्तारी की खबरें आई। लेकिन अनुराग मिश्रा पर क्लिक करते ही सामने आया NDTV का नाम और रवीश कुमार का चेहरा। अब जिन्हें कुछ दिन पुराना किस्सा याद नहीं, उन्हें लगेगा शाहरूख की गिरफ्तारी और अनुराग मिश्रा के नाम पर रवीश का चेहरा दिखाने का क्या मतलब? तो आइए समझाएँ इस सबके पीछे क्या संबंध है…

सोशल मीडिया पर जिस समय शाहरूख द्वारा दिल्ली पुलिस के सिपाही पर गोली तानने की वीडियो वायरल हुई। उस समय खुद वामपंथी मीडिया पोर्टल ने सबसे पहले उसके नाम की पुष्टि की थी। जिसके बाद तरह-तरह के कयास लगाए गए, लेकिन सच वही था, जिसे वामपंथी मीडिया ने अपने रिपोर्ट में छापा। यानी गोली चलाने वाले का नाम शाहरूख ही था।

मगर, एनडीटीवी की हद पत्रकारिता देखिए… घटना के कुछ दिन बाद यानी 26 फरवरी को अपने प्राइम टाइम में रवीश कुमार ने अपने दर्शकों को बरगलाने के लिए अपनी लच्छेदार बातों से उनके मन में सवाल छोड़ा कि जिसने दिल्ली हिंसा में गोली चलाई वो शाहरूख है तो फिर सोशल मीडिया पर उसे अनुराग मिश्रा क्यों कहा जा रहा है? इस सवालिया निशान के साथ रवीश ने अपने दर्शकों के मन में हिंदू नाम के पीछे जो संदेह जताया, उससे साफ हो गया कि वो शाहरूख के अपराधों को दुनिया के सामने तभी लाना चाहते हैं, अगर वो ‘अनुराग मिश्रा’ साबित हो जाए। रवीश जी ने अपने इस प्राइम टाइम में दिल्ली पुलिस से भी कहा कि उन्हें इस नाम पर दोबारा बोलना चाहिए।

हालाँकि, रवीश कुमार और उनकी टीम ने जिस अनुराग मिश्रा की प्रोफाइल को लेकर ये प्रोपेगेंडा तैयार किया, उसने खुद वीडियो के जरिए ऐसा करने वालों के झूठ का पर्दाफाश किया। साथ ही कहा कि वह उस हर शख्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेंगे जिन्होंने उनकी तस्वीर का इस्तेमाल किया।

अब, आज जब उसी शाहरूख की गिरफ्तारी गिरफ्तारी हुई और मालूम हुआ कि शाहरुख के पिता साबिर का भी क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है और ड्रग माफियाओं से संबंध के चलते वह एक बार जेल भी जा चुका है। तो शायद रवीश कुमार के पास जस्टिफाई करने को कुछ नही बचा। लेकिन उनकी करतूतों और अजेंडे से वाकिफ यूजर्स ने फिर भी उन्हें बता दिला कि अब उनके झूठ से दर्शक अपना मत तैयार नहीं करते।

शाहरुख की गिरफ्तारी की तस्वीर आते ही सोशल मीडिया पर लोग रवीश कुमार को, उनकी टीम को, उनके गिरोह को याद दिलाने लगे कि ये जो आज जिसकी आज गिरफ्तारी हुई है, वो अनुराग मिश्रा नहीं बल्कि मोहम्मद शाहरूख है और इस बात को वो अपने जहन में डाल लें।

गौरतलब है कि इस हैशटेग को ट्रेंड कराकर इस समय आम आदमी पार्टी को घेरा जा रहा है। वामपंथी मीडिया को निशाना बनाया जा रहा है। अनुराग मिश्रा की असली वीडियो को शेयर किया जा रहा है। साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि रवीश कुमार को तो अब अपना मुँह काला करवा लेना चाहिए। क्योंकि शाहरुख ने अपने शाहरुख होने के कागज भी पेश कर दिए हैं।

सोशल मीडिया पर यूजर्स का कहना है कि शाहरुख की गिरफ्तारी के बाद एनडीटीवी पर मातम छा गया है। रवीश ने बहुत मेहनत की थी उसे अनुराग मिश्रा बताने में। लेकिन अब हकीकत का खुलासा होने के बाद हो सकता है कि रवीश कुमार स्क्रीन काली कर दे।

कुछ लोग रवीश की छीछालेदर उनकी भाषा में ही कर रहे हैं। जैसे एक यूजर व्यंग के तौर पर रवीश की शैली में लिखती हैं, “ये आज की सबसे बड़ी विडंबना है। दोगली पत्रकारिता तो मैं बहुत पहले से कर रहा हूँ, लेकिन क्या कारण है कि मोदी के शासन में ही पकड़ा जा रहा हूँ? क्या ऐसी दोगली पत्रकारिता के दिन लद गए हैं जिसमें मोहम्मद शाहरुख को अनुराग मिश्रा साबित कर हम जैसे लोग अपना एजेंडा चला सकें? डर का माहौल है।”

‘हमें ज़िंदा रहना है, ‘उन पर’ FIR कराने के बाद यह परिवार ज़िंदा बचेगा?’ – हिंदुओं के डर के 5 खौफनाक सबूत

हिन्दू के स्कूल को बताया मुस्लिम का: ‘The Wire’ और NDTV ने मुस्लिम दंगाइयों को बचाने के लिए फैलाया झूठ

UP में छिपने के लिए भागा था शाहरुख, पकड़ा गया: दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों में 8 राउंड फायरिंग कर आया था चर्चा में

‘उनके’ डर से बच्चों के साथ घर में दुबके रहते हैं, रात भर नींद नहीं आती: महिलाओं ने सुनाया अपना दर्द – ग्राउंड रिपोर्ट

कॉन्ग्रेस सांसदों ने BJP की संगीता सिंह की बाँह मरोड़ी, छाती पर कोहनी से किया वार: स्मृति ईरानी ने बचाया

कॉन्ग्रेस पार्टी के सांसद अब संसद में भी मारपीट पर उतारू हो गए हैं। भाजपा सांसद संगीता सिंह ने आरोप लगाया है कि दो कॉन्ग्रेस सांसदों ने मिल कर उनकी पिटाई की। उन्होंने कॉन्ग्रेस सांसदों राम्या और ज्योति मणि पर मारपीट के आरोप लगाए हैं। राम्या जहाँ केरल की अलाथुर से सांसद हैं वहीं ज्योति तमिलनडु के करूर से सांसद हैं।

दोनों सांसदों पर आरोप लगा है कि उन्होंने भाजपा की महिला सांसद संगीता सिंह के साथ मारपीट की। संगीता कुमारी सिंह देव ने दोनों पर मारपीट का आरोप लगाया। संगीता ओडिशा के बोलांगीर से सांसद हैं और वहाँ के महाराजा कनक वर्धन सिंह देव की पत्नी हैं। कनक सिंह ओडिशा सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और वो ओडिशा भाजपा के अध्यक्ष भी रहे हैं। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप सांसद संगीता सिंह का बयान सुन सकते हैं:

संगीता सिंह ने बताया कि ज्योति और राम्या उनकी तरफ़ बढ़ीं और उन्होंने उनका हाथ पकड़ लिया। इसके बाद दोनों सांसदों ने संगीता सिंह का बाँह पकड़ कर मरोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने संगीता की छाती पर कोहनी से प्रहार किया। संगीता सिंह ने बताया कि ये एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, जो लोकतंत्र के लिए सही नहीं है। मारपीट के दौरान केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अपनी पार्टी की सांसद को किसी तरह से बचाया।

एक दिन पहले कॉन्ग्रेस सांसद राम्या ने भी आरोप लगाया था कि उनके साथ राजस्थान के दौसा की सांसद जसकौर मीणा ने मार-पीट की है। राम्या ने आरोप लगाया था कि वो एक दलित हैं और महिला हैं, इसीलिए उनके साथ हमेशा मारपीट की जाती है।

मध्यप्रदेश: परीक्षा जाँच के लिए सिख छात्र की जबरदस्ती उतरवाई पगड़ी, सिख समुदाय नाराज

मध्य प्रदेश के धार जिले में कक्षा 12वीं के पेपर देने गए सिख छात्र की पगड़ी उतरवाए जाने का मामला सामने आया है। यहाँ पर 12वीं का परीक्षा देने गए सिख छात्र की चेकिंग के दौरान जबरन पगड़ी उतरवाई गई। इस बाबत एक अधिकारी ने मंगलवार (मार्च 3, 2020) को बताया कि राज्य सरकार ने मामले की जाँच शुरू कर दी है और जिस महिला शिक्षक ने छात्र को अपनी पगड़ी हटाने के लिए कहा था, उन्हें परीक्षा ड्यूटी से हटा दिया गया है।

दरअसल यह घटना सोमवार (मार्च 2, 2020) की है। पीड़ित सिख ने बताया कि वह सोमवार को जिला मुख्यालय से लगभग 55 किलोमीटर दूर धामनोद में गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल में परीक्षा दे रहा था, इसी दौरान यह घटना घटी। छात्र ने घटना के बाद पत्रकारों से बात करते हुए आरोप लगाया कि चेकिंग के दौरान एक शिक्षक ने उनसे अपनी पगड़ी उतारने को कहा।

मगर छात्र ने ऐसा करने से इनकार कर दिया और फिर परीक्षा केंद्र प्रभारी से संपर्क किया। हालाँकि यहाँ भी पीड़ित छात्र को निराशा ही हाथ लगी। उन्होंने भी छात्र को नियमों का हवाला देते हुए इसका पालन करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि पगड़ी खोलकर ही जाँच की जाएगी। इसके बाद छात्र ने पगड़ी खोलकर दे दी। टीचर ने पगड़ी की जाँच की और फिर छात्र को परीक्षा हॉल में जाने दिया।

छात्र ने बताया कि इसके बाद उनकी पगड़ी को उतार दिया गया और फिर जाँच की गई और फिर उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई। वहीं जब इस बारे में राज्य आदिवासी कल्याण विकास के डिप्टी कमिश्नर बृजेश पांडे से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मामले की जाँच की जा रही है। पांडे ने कहा, “इसकी जानकारी मिलने के बाद शिक्षक को परीक्षा ड्यूटी से हटा दिया गया है। हम मामले की आगे की जाँच कर रहे हैं।” मामले में सिख समाज ने आपत्ति दर्ज करवाते हुए दोषियों पर कार्रवाई की माँग की है।

NCP नेता पर बहू को प्रताड़ित करने का आरोप, परिवार के चार अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज

राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) की विधान परिषद सदस्य विद्या चव्हाण के खिलाफ विले पार्ले पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है। विद्या और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ बहू को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है। चव्हाण के अलावा उनके पति अभिजीत, उनके बेटे अजित (पीड़िता के पति), आनंद (पीड़िता के देवर) और शीतल (आनंद की पत्नी) के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

पुलिस के मुताबिक, पीड़िता की शिकायत पर एनसीपी नेता विद्या चव्हाण और उनके परिवार पर बहू के उत्पीड़न के लिए धारा 498A, 354, 323, 504, 506 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है। उनकी बहू ने 16 जनवरी को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में विद्या ने अपनी बहू के खिलाफ कई अफेयर का आरोप लगाया है।

इस मामले में विद्या चव्हाण ने कहा, “मेरी बहू का किसी के साथ अफेयर चल रहा था। हमें जब मामले की जानकारी हुई तो बेटे ने ईमेल से उसे तलाक का नोटिस भेजा। जिसके बाद बहू ने तलाक देने से इनकार करते हुए उससे 3 करोड़ रुपए की माँग की। पैसे न देने पर उसने मुझे बदनाम करने का प्रयास किया है।”

वहीं एक अधिकारी ने पीड़िता के हवाले से बताया कि उसका देवर उसे गलत इशारे किया करता था। पीड़िता ने देवरानी पर भी मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही पीड़ित बहू का कहना है, “जब मुझे दूसरी बार लड़की हुई तो मेरे परिवार वालों ने मुझे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। मेरे परिवार वाले मुझसे लड़के की चाह रखते हैं।” साथ ही बहू ने विद्या के घर पर रखे गए अपने कीमती सामानों को लौटाए जाने की माँग रखी है। उनका दावा है कि कई बार कहने के बावजूद एनसीपी नेता के घरवालों ने उनके कीमती सामान नहीं लौटाए।

विद्या चव्हाण ने दावा किया कि उनकी बहू उनके बेटे को धोखा दे रही थी, उसके कई अफेयर थे। विद्या ने कहा, “मेरा बेटा, जो पेशे से इंजीनियर है, ने करीब 10 साल पहले शादी की थी। अभी उसकी सात साल की बेटी है और हम उसकी देखभाल कर रहे हैं। पिछले साल वह मेरे बेटे के साथ डेनमार्क जाने वाली थी। एक दिन, उसके व्हाट्सएप ने काम करना बंद कर दिया और मेरे बेटे ने मरम्मत के लिए उसका मोबाइल फोन ले लिया। फोन ठीक होने पर जब उसने मैसेज चेक किया तो पाया कि उसके 4 पुरुषों के साथ अफेयर थे। 7 दिसंबर को मेरे बेटे ने मुझे सब कुछ बताया और कहा कि उसने उसके साथ धोखा किया है। इसके बाद उसने अपनी पत्नी और बेटी के साथ डेनमार्क जाने की अपनी योजना को कैंसिल कर दिया।”

मुस्लिम अब हिन्दुओं का अत्याचार नहीं सहेगा, काफिरों से मुक्त होगा बाबरी: दिल्ली दंगों से अलकायदा ख़ुश

दिल्ली दंगों को लेकर खूँखार आतंकी संगठन अलकायदा का बयान आया है। हाल ही में तालिबान और अमेरिका के बीच शांति समझौता हुआ, जिस बैठक में भारत के प्रतिनिधि भी शामिल थे। अलकायदा ने कहा है कि शांति समझौता होना अमेरिका की हार है और दिल्ली दंगों से जिहाद को नई ऊर्जा मिली है। अलकायदा के जम्मू कश्मीर यूनिट ने कहा कि ये एक सुखद समय है जब खोरासन में ‘अत्याचारी सेना’ को अपनी हार स्वीकार करनी पड़ी है और शांति समझौते पर हस्ताक्षर करना पड़ा है।

अलकायदा ने दिल्ली दंगों को लेकर मुस्लिम समुदाय की प्रशंसा की है। अपने बयान में अलकायदा जम्मू कश्मीर ने अपने बयान में आगे कहा:

“ये आशा का मौसम है। भारतीय मुस्लिमों ने तय कर लिया है कि अब वो बहुत से देवताओं की पूजा करने वाले हिन्दुओं के अत्याचार और उत्पीड़न का शिकार नहीं बनेंगे। “

ये बयान ‘अंसार गजवातुल हिन्द’ की तरफ से आया है, जो आतंकी सरगना ओसामा बिन लादेन द्वारा स्थापित आतंकी संगठन अलकायदा के जम्मू कश्मीर यूनिट का नाम ही ‘अंसार गजवातुल हिन्द’ है। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 की धाराओं को निरस्त किए जाने के बाद से ये पहली बार है जब इस आतंकी संगठन का बयान आया है। पिछले महीने दक्षिणी कश्मीर के त्राल में जहाँगीर रफीक वानी रजा उमर मकबूल और सआदत थोकर को मार गिराया गया था। अलकायदा ने इन दोनों की मौत को ‘शहीदी’ करार देते हुए कहा कि ‘इस्लाम के दोनों वफादार बेटों’ ने उम्माह (इस्लामिक मुल्क) की दिशा में एक बड़ा ‘बलिदान’ दिया है।

अलकायदा ने जम्मू कश्मीर को ‘हिन्दुओं से आज़ाद’ करा के यहाँ शरिया क़ानून लागू करने की बात कही है। संगठन ने कहा कि जब तक जेरुसलम का मस्जिद-ए-अक़्सा और अयोध्या का बाबरी मस्जिद ‘काफिरों’ से मुक्त नहीं हो जाता, तब तक जंग जारी रहेगी। अंदेशा लगाया जा रहा है कि शांति समझौते के बाद कहीं तालिबान अब कश्मीरी जिहादी और आतंकी संगठनों को पनाह देना न शुरू कर दे।

अलकायदा का सरगना ज़ाकिर मूसा को भारतीय सुरक्षा बलों ने मार गिराया था। हाल ही में त्राल में एक इस्लामी त्यौहार के मौके पर उसके समर्थन में नारे लगाए गए थे। दक्षिण एशिया के अलकायदा संगठन के मुखिया उसामा महमूद का कहना है कि जम्मू कश्मीर में उसकी विजय तभी होगी जब भारत के शहरों को निशाना बनाया जाए।

पुलवामा: जैश-ए-मोहम्मद के कमांडरों को पनाह देने वाले तारिक अहमद, इंशा जहाँ गिरफ्तार, NIA को मिली बड़ी सफलता

पिछले साल 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमला मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने दो और लोगों को गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक पुलवामा हमले में शामिल होने के आरोप में तारिक अहमद शाह और उनकी बेटी इंशा तारिक को गिरफ्तार किया गया है। दोनों को दक्षिणी कश्मीर के लेथपोरा से गिरफ्तार किया गया। इन पर आरोप है कि इन्होंने जैश-ए-मोहम्मद के कमांडरों को पनाह दी थी।

बता दें कि पुलवामा हमले में 40 जवानों की जान चली गई थी। अब तक इस मामले में तीन गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। इससे पहले जाँच एजेंसी ने 28 फरवरी को इस मामले में पहली गिरफ्तारी की थी। NIA ने आतंकी और जैश-ए-मोहम्मद के ओवर ग्राउंड वर्कर शाकिर बशीर मागरे को कश्मीर से गिरफ्तार किया था। शाकिर ने आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार को शरण और हमले के लिए अन्य सहायता उपलब्ध कराई थी। शाकिर पुलवामा का ही रहने वाला है और उसकी फर्नीचर की दुकान है।

आदिल अहमद डार ही वो आतंकी था जो कार में सवार होकर सुरक्षाबल के काफिले में जा घुसा था। शाकिर ने खुलासा किया कि उसने आदिल अहमद डार और एक और अन्य सहयोगी मोहम्मद उमर फारूक को साल 2018 के आखिरी से फरवरी में किए हमले तक अपने घर में शरण दी थी। शाकिर ने कार में रखे विस्फोटक को तैयार किया। लेथपोरा स्थित दुकान से वह सीआरपीएफ काफिले की मूवमेंट पर नजर रखता था।

शाकिर ने यह भी बताया था कि विस्फोटकों से भरी मारुति ईको कार जिसका इस्तेमाल सीआरपीएफ के काफिले पर हमला करने के लिए किया गया था, उसे वह ही चलाकर घटनास्थल से लगभग 500 मीटर पहले तक लेकर गया था। हमले की जगह से 500 मीटर दूर वह गाड़ी से उतर गया और इसके बाद आदिल अहमद डार उस गाड़ी को चलाकर गया और हमले को अंजाम दिया।

हिन्दू के स्कूल को बताया दूसरे मजहब वालों का: ‘The Wire’ और NDTV ने मजहबी दंगाइयों को बचाने के लिए फैलाया झूठ

दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में मजहबी भीड़ का कहर बरपा और कई लोगों को इसमें अपनी जान गँवानी पड़ी।इसी बीच मीडिया पोर्टल्स लगातार दंगाइयों के महिमामंडन में लगे रहे और पीड़ित हिन्दुओं की कहानियों को नज़रअंदाज़ किया गया। इसी क्रम में ‘एनडीटीवी’ और ‘द वायर’ ने मीडिया के इस गुट का बढ़-चढ़ कर नेतृत्व किया। शिव विहार में दो स्कूल हैं, जो अगल-बगल में स्थित हैं। एक फैसल फ़ारूक़ का राजधानी स्कूल और एक एक पंकज शर्मा का डीआरपी स्कूल। राजधानी स्कूल दंगाइयों का मुख्य अड्डा बना और सारी गोलीबारी, पत्थरबाजी और बमबारी यहीं से हुई।

दूसरी तरफ़ डीआरपी स्कूल को जला कर ख़ाक कर दिया गया। राजधानी स्कूल के ऊपर से रस्सी के सहारे उतरे दंगाइयों ने डीआरपी स्कूल को फूँक दिया। लोगों ने बताया कि राजधानी स्कूल का मालिक समुदाय विशेष से है, इसीलिए वहाँ मामूली तोड़फोड़ हुई ताकि वीमा और सरकारी सहायता का लाभ उठाया जा सके, वहीं डीआरपी स्कूल में तबाही का भयानक मंजर पेश किया गया क्योंकि वो हिन्दू की स्कूल थी। ऑपइंडिया ने अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग में तहकीकात की तो पाया कि राजधानी स्कूल में दिखावटी तोड़फोड़ हुई थी और कुछ बेंच-डेस्क को पलट दिया गया था।

‘द वायर’ ने इन दोनों स्कूलों को लेकर अपनी ‘ग्राउंड रिपोर्टिंग’ में झूठ फैलाया है। प्रोपेगंडा पोर्टल ने दावा किया है कि दोनों स्कूलों के मालिक समुदाय विशेष से ही हैं। बता दें कि डीआरपी स्कूल के ओनर पंकज शर्मा हिन्दू हैं। ‘द वायर’ अपनी रिपोर्ट में लिखता है कि समुदाय विशेष के दो स्कूलों में तबाही मचाई गई। कुछ नहीं बचा और सब कुछ जला दिया गया। प्रोपेगंडा पोर्टल ने ये सब झूठ लिखा है और ‘ग्राउंड रिपोर्टिंग’ के नाम पर अफवाह फैलाई है। राजधानी स्कूल में गुलेल, पेट्रोल बम, पत्थर और बम बनाने की समाग्रियाँ पड़ी हुई थीं लेकिन वहाँ जानबूझ कर थोड़ी तोड़फोड़ की गई थी।

अगर दोनों स्कूलों में वैसी ही तबाही मचाई गई होती तो राजधानी स्कूल का हाल भी डीआरपी स्कूल की तरह ही होता। आप यहाँ देख सकते हैं कैसे ‘द वायर’ खुलेमाम मजहबी दंगाइयों को बचाने के लिए झूठ परोसने में लगा हुआ है:

‘द वायर’ की रिपोर्ट में फैलाया गया झूठ

अव्वल तो ‘द वायर’ ने जिस फोटो का प्रयोग किया है, वो समुदाय विशेष के ओनर का स्कूल है ही नहीं। वो फोटो डीआरपी स्कूल का है, जिसके मालिक पंकज शर्मा ने बताया कि उनके स्कूल में 2014 से हुई शत प्रतिशत पासिंग रेट है और दोनों ही समुदाय के बच्चे वहाँ पर पढ़ाई करते थे। उन्होंने बताया कि वो स्कूल के सभी शिक्षक अपने सभी बच्चों से बराबर प्यार करते हैं, ऐसे में इस तरह से स्कूल को आग के हवाले कर दिया जाना उनकी समझ से परे काफ़ी दुःखदाई है।

‘द वायर’ ने समुदाय विशेष के स्कूल की फोटो बता कर हिन्दू के स्कूल की तस्वीर लगाईं

इसी तरह एनडीटीवी ने भी झूठ फैलाया। उसने लिखा कि राजधानी स्कूल और डीआरपी स्कूल, दोनों को ही हिन्दुओं ने आग के हवाले किया। वो ये भी मानता है कि राजधानी स्कूल की छत से दंगाई नीचे उतरे और डीआरपी को जलाया, फिर ऐसा कैसे कहा जा सकता है कि वो सब हिन्दू थे? हमारी ग्राउंड रिपोर्टिंग में कई प्रत्यक्षदर्शियों ने भी इस ओर इशारा किया है।

(ऑपइंडिया की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट आप यहाँ पढ़ सकते हैं, जिसमें राजधानी स्कूल और डीआरपी स्कूल को लेकर विस्तृत वर्णन दिया गया है)

कॉन्ग्रेस विधायकों की खरीद फरोख्त पर, नेताओं से बोले कमलनाथ, कहा- फोकट का पैसा मिल रहा है, ले लेना

मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ पार्टी कॉन्ग्रेस बीजेपी पर विधायकों की खरीद फरोख्त का आरोप लगा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सोमवार (मार्च 2, 2020) को दावा भी किया कि भाजपा कॉन्ग्रेस विधायकों को अपने तरफ लाने के लिए लुभा रही है। हालाँकि, इसपर भाजपा ने अपनी ओर से बयान जारी किया और इन इल्जामों का खंडन किया। लेकिन सीएम कमलनाथ ने आज फिर इस मामले को उठाया और अपने नेताओं से ही कह दिया कि फोकट का पैसा मिल रहा है, ले लेना।

सीएम कमलनाथ ने मंगलवार को कहा, “विधायक ही कह रहे है मुझे, हमें इतना दिया जा रहा है, मैं तो विधायकों को कह रहा हूँ कि फोकट का पैसा मिल रहा है, तो ले लेना।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले दिग्विजय सिंह ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा था कि बीजेपी ने मध्य प्रदेश के कॉन्ग्रेस, बसपा, समाजवादी पार्टी के विधायकों को दिल्ली लाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। उन्होंने कहा, बसपा की विधायक श्रीमती राम बाई को क्या भाजपा पूर्व भूपेंद्र सिंह जी कल चार्टर फ्लाइट में भोपाल से दिल्ली नहीं लाए? शिवराज जी कुछ कहना चाहेंगे? लेकिन हमें श्रीमती राम बाई पर पूरा भरोसा है, वे कमलनाथ जी की प्रशंसक हैं और उनका समर्थन करती रहेंगी।

गौरतलब है कि इससे पहले राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने सोमवार को संसद परिसर के अंदर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा था, “मैं बीजेपी को चेतावनी देना चाहता हूँ कि यह कर्नाटक नहीं है। मध्य प्रदेश का एक भी कॉन्ग्रेस विधायक बिकने के लिए नहीं है।”

उन्होंने कहा था, “मैं कहना चाहता हूँ कि एक तरफ बीजेपी सरकार कॉन्ग्रेस सरकारों के खिलाफ छापेमारी करने के लिए आयकर, ईडी और सीबीआई को खुली छूट दे रही है और दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस के विधायकों को खरीदने के लिए पैसे बाँट रही है।”

दिग्विजय सिंह ने भाजपा नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि मैंने कभी कोई आरोप नहीं लगाया। शिवराज सिंह चौहान और नरोत्तम मिश्रा दोनों में इस बात पर विवाद था कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा। लेकिन अब यह तय हो गया है कि एक मुख्यमंत्री होगा और दूसरा उप मुख्यमंत्री। अपने सपनों को पूरा करने के लिए दोनों ने मिलकर विधायकों से संपर्क किया। यह बर्दाशत नहीं किया जाएगा।

बता दें कॉन्ग्रेस नेता का आरोप है कि दोनों नेताओं ने 15 साल तक राज्य को लूटा वे अब विपक्ष में बैठने के लिए तैयार नहीं है और खुलेआम पार्टी के विधायकों को 25-35 करोड़ का लालच दे रहे हैं।

उद्धव की अयोध्या यात्रा से साधु-संत नाराज, स्वामी परमहंस बोले- वोट बैंक की राजनीति के लिए मक्का जाओ

7 मार्च को महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी की सरकार को 100 दिन पूरे होने वाले हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे अयोध्या का दौरा करने वाले हैं। इस दौरान शिवसेना की तरफ से अयोध्या में शक्तिप्रदर्शन किया जाना है। शिवसेना के सांसद संजय राउत ने बताया कि उद्धव ठाकरे दोपहर को अयोध्या में श्री राम के दर्शन करेंगे। उसके बाद शाम को सरयु नदी के किनारे आरती करेंगे। ठाकरे के साथ शिवसेना के सभी मंत्री, सांसद, विधायक, नेता और कार्यकर्त्ता अयोध्या में जाने वाले हैं।

मगर उनकी यात्रा से पहले ही इसका विरोध होने लगा है। उनके विरोध में अयोध्या के साधु संत खुलकर सामने आ गए हैं। संतों का कहना है शिवसेना पार्टी हिंदुत्व के मार्ग से हट गई है। ऐसे में उनका अयोध्या आने का कोई औचित्य नहीं बनता है। हम उनको अयोध्या नहीं आने देंगे। तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने मंगलवार (मार्च 3, 2020) को इसका विरोध करते हुए कहा, “शिवसेना ने कॉन्ग्रेस से हाथ मिलाकर हिंदुत्व को धोखा दिया है। अब उन्हें अयोध्या नहीं मक्का मदीना जाना चाहिए। अगर वो अयोध्या आते हैं तो उनके काफिले को अयोध्या के प्रवेश मार्ग पर ही काले झंडे के साथ रोकेंगे।”

स्वामी परमहंस ने कहा, “शिवसेना हिंदू हृदय सम्राट बाला साहेब ठाकरे की बनाई हुई है। उनका उद्देश्य था कि हिंदुस्तान को हिंदू राष्ट्र बनाना है और हमेशा शिवसेना इसी एजेंडे में काम करती रही है। बाला साहेब ठाकरे ने कहा था कि शिवसेना को हम कॉन्ग्रेस नहीं बनने देंगे। अगर कदाचित ऐसा हुआ तो शिवसेना चुनाव नहीं लड़ेगी, लेकिन उद्धव ठाकरे ने सत्ता के लालच में कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन किया।”

आगे उन्होंने कहा, “जिस दिन शिवसेना ने ऐसा किया उसी दिन बाला साहेब के सारे सिद्धांत खत्म कर दिए। अब जो वो अयोध्या आ रहे हैं ये रामभक्ति महज उनका दिखावा है। अब उनको वोट की राजनीति करनी है तो उनको मक्का का रुख करना चाहिए। वहाँ जाकर उनको रिझा लें, राम भक्तों के साथ उन्होंने धोखा किया है। जिस पार्टी ने भगवान राम को काल्पनिक बताया उस पार्टी का साथ देकर शिवेसना ने रामभक्तों के साथ छलावा किया है, जिन्होंने उन्हें वोट दिया। इसलिए अब उनको अयोध्या आकर रामभक्त होने का दिखावा करने की आवश्यकता नहीं है।”

संत ने जिला प्रशासन से माँग की है कि उद्धव ठाकरे को अयोध्या आने की अनुमति न दी जाए लेकिन अगर यदि वह अयोध्या आते हैं तो वो स्वयं काला झंडा लेकर उनके काफिले को रोकेंगे। उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के नाम पर लोगों को ठगा है इसलिए अब अयोध्या में इनके लिए कोई स्थान नहीं है।

स्वामी परमहंस के विरोध के बाद हनुमानगढ़ी के पुजारी महंत राजू दास ने भी शिवसेना को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, “मुस्लिमों को 5% आरक्षण देने वाली शिवसेना पार्टी लगातार हिंदुत्व के मार्ग से हट गई है, उद्धव को अयोध्या आने नहीं दूँगा।” इससे पहले भी उद्धव ठाकरे के दौरे के दौरान महंत राजू दास ने आलोचना की थी। उन्होंने कहा था, “अयोध्या को राजनीती से दूर रखे। आओ दर्शन करो, आरती करो लेकिन अयोध्या में राजनीति मत करो।”