उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों में आप के निलंबित निगम पार्षद ताहिर हुसैन का नाम मुख्य रूप से सामने आया है। उसकी इमारत से हिंदुओं पर पेट्रोल बम और पत्थर फेंके गए। गोलियॉं चलाई गई। आईबी के अंकित शर्मा सहित कई लोगों की निर्मम हत्या उसके ही घर में लाकर की गई। एक विडियो में वह खुद लाठी लिए हुए दिखा था। एफआईआर दर्ज होने के बाद से फरार ताहिर की तलाश में पुलिस ने कई जगहों पर दबिश दी है। इस बीच उसने दिल्ली के एक कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दाखिल की है। इस पर आज यानी बुधवार को सुनवाई होगी।
Expelled AAP Councillor Tahir Hussain (absconding from police) has moved anticipatory bail in a Delhi court, his plea will be heard tomorrow. (file pic) pic.twitter.com/SB1GX2TYxe
दिल्ली पुलिस के अनुसार हिंसा मामले को लेकर 436 केस अब तक दर्ज हो चुके हैं। इसमें 45 आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज किए गए हैं। 1,427 लोग अब तक हिरासत में लिए गए हैं या गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पुलिस ने उन मीडिया रिपोर्टों को भी खारिज किया है जिनमें दावा किया गया था कि ताहिर के घर पर दंगाइयों ने कब्जा कर लिया था। उसे खुद पुलिस ने बचाया था। दिल्ली पुलिस प्रवक्ता एमएस रंधावा के अनुसार 24 फरवरी की रात एक पार्षद के फॅंसे होने की सूचना मिली थी। पुलिस मौके पर पहुॅंची तो वह अपने घर पर मिला। 26 फरवरी को अंकित शर्मा का शव मिला और ताहिर पर आरोप लगे। इसके बाद उसके घर की तलाशी ली गई और सबूत जुटाए गए। रंधावा ने बताया कि उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है और वह जल्द गिरफ्त में होगा।
Delhi Police: 436 cases have been registered so far, including 45 cases under the Arms Act. 1,427 people have also been either arrested or detained. #DelhiViolencepic.twitter.com/E5RwvToey1
कुछ मीडिया रिपोर्टों में ताहिर के जामिया और ओखला के आसपास के इलाकों में छिपे होने की संभावना है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को पुलिस ने चॉंदबाग और उसके आसपास के इलाकों में ताहिर की तलाश में छह संभावित ठिकानों पर दबिश दी। लेकिन सफलता नहीं मिली। हालॉंकि ताहिर भले पुलिस से आँखमिचौली खेल रहा हो लेकिन जो तथ्य सामने आ रहे हैं उससे उस पर शिकंजा और कसता ही जा रहा है।
दैनिक जागरण के दिल्ली संस्करण में 4 मार्च 2020 को प्रकाशित खबर
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस के हाथ सीसीटीवी फुटेज लगी है जिसमें 24 फरवरी को ताहिर 15 से ज्यादा लोगों के साथ अपने घर में घुसते दिख रहा है। इन सबके हाथ में पिस्टल है। उसके पीछे सैकड़ों दंगाइयों के चलने का फुटेज भी सामने आया है। इन दंगाइयों के हाथ लाठी-डंडे और तबाही के अन्य सामान हैं। रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पिस्टल के साथ दिखने वाले युवकों की पहचान कर ली गई है। ये युवक भी अपने परिवारों के साथ फरार बताए जा रहे हैं और 26 फरवरी से इनका मोबाइल भी बंद है।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पुलिस ने एक सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया है। शहर के बरखेड़ी इलाके के एक क्लीनिक में देह व्यापार का यह धंधा चल रहा था। 10 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। इनमें तृणमूल कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष सचिन चौहान भी है। वह इस रैकेट का सरगना बताया जा रहा है।
Madhya Pradesh: Crime Branch, Bhopal conducted a raid at the clinic of a doctor in Bhopal’s Barkhedi, where a sex racket was being operated, and arrested 10 people, including President of Madhya Pradesh unit of TMC, Sachin Chouhan (pic 1), on charges of running the racket.(03.03) pic.twitter.com/cgNN9rpzMi
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक क्लीनिक की आड़ में दो साल से सेक्स रैकेट चलाया जा रहा था। यह क्लीनिक भी बगैर रजिस्ट्रेशन के ही चल रहा था। क्लीनिक की संचालिका एक महिला डॉक्टर बताई जा रही है। महिला के पास बीयूएमएस यूनानी चिकित्सा की डिग्री मिली है। वह गुप्त रोग और बवासीर का इलाज करने के नाम पर क्लीनिक चला रही थी।
क्राइम ब्रांच की डीएसपी अदिति भवसार के अनुसार गिरफ्तार लोगों में एक सचिन सिंह चौहान है। वह खुद को तृणमूल कॉन्ग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बताता है। उसके पास से ‘सचिन सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष -तृणमूल कॉन्ग्रेस’ छपा हुआ विजिटिंग कार्ड भी मिला है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उसके घर के बाहर भी एक बोर्ड लगा हुआ है जिस पर सचिन सिंह चौहान के साथ प्रदेश अध्यक्ष-तृणमूल कॉन्ग्रेस लिखा हुआ है।
नई दुनिया की रिपोर्ट के अनुसार घनी आबादी वाले इलाके में चल रहे इस क्लीनिक को लेकर स्थानीय लोगों ने डीजीपी से शिकायत की थी। इसके बाद एक पुलिसकर्मी ग्राहक बनकर वहॉं पहुॅंचा और 4 महिलाओं सहित 10 लोग गिरफ्तार किए गए। इनमें एक पूर्व सरपंच भी है। पुलिस के अनुसार जो महिला डॉक्टर खुद भी इस धंधे में शामिल थी। उसकी तीन बेटियॉं है। उसके पति की बीस साल पहले मौत हो चुकी है।
कथित सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर का एक वीडियो वायरल हुआ है। इसमें वे नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे लोगों को सुप्रीम कोर्ट और संसदीय व्यवस्था के खिलाफ भड़काते नजर आ रहे हैं। वे कह रहे हैं कि ये लड़ाई (CAA विरोध) सुप्रीम कोर्ट में नहीं लड़ी जाएगी, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या और कश्मीर के मामले में सेक्युलरिज़्म की रक्षा नहीं की है।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए मंदर कहते हैं, “ये लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में नहीं जीती जाएगी, क्योंकि हमने सुप्रीम कोर्ट को देखा है- एनआरसी के मामले में, कश्मीर के मामले में, अयोध्या के मामले में। उन्होंने (सुप्रीम कोर्ट) इंसानियत, समानता और सेक्युलरिज्म की रक्षा नहीं की है।” वे आगे कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में हम कोशिश जरूर करेंगे। लेकिन इसका फैसला न संसद में होगा, न सुप्रीम कोर्ट में होगा, बल्कि ये फैसला सड़कों पर होगा।
#Exposed Here is Ultra-Left Activist Harsh Mandar instigating Anti-CAA Protesters and spewing venom against Supreme Court of India, clearly asking protesters not to believe in highest institution of judiciary. pic.twitter.com/nxRmkIxiav
— Jammu-Kashmir Now (@JammuKashmirNow) March 3, 2020
वायरल वीडियो में हर्ष मंदर को वहाँ मौजूद लोगों से कहते सुना जा सकता है कि आखिर वे अपने बच्चों को किस तरह का देश देना चाहते हैं। इसका फैसला कहाँ होगा? इसका फैसला सड़कों पर होगा।
गौरतलब है कि लोगों को उकसा रहे मंदर की मोदी से घृणा छिपी नहीं है। जब नागरिकता संशोधन बिल संसद में आया था तो उन्होंने ऐलान किया था कि यदि यह कानून बना तो वे आधिकारिक रूप से इस्लाम धर्म अपना लेंगे। सरकार उनसे उनके कागज माँगेगी, तो उन्हें कागज़ भी नहीं दिखाएँगे।
If CAB is passed, this is my civil disobedience: I will officially register Muslim. I will then refuse to submit any documents to NRC. I will finally demand the same punishment as any undocumented Muslim- detention centre & withdrawn citizenship. Join this civil disobedience
यूपीए कार्यकाल में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सलाह देने के लिहाज से गठित की गई नेशनल एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य रहे मंदर ने दिल्ली हाई कोर्ट में भाजपा नेता कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ याचिका दायर कर उन पर हेट स्पीच का आरोप लगाया था। अजमल कसाब और याकूब मेमन जैसे आतंकियों के लिए वे दया याचिका भी दायर कर चुके हैं। IAS रहे मंदर खुद को लेखक, स्तंभकार, शोधकर्ता, शिक्षक और मानवाधिकार कार्यकर्ता भी बताते हैं।
दिल्ली भाजपा के फायरब्रांड नेता कपिल मिश्रा ने ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान हर सवालों का, दंगों पर वामपंथी मीडिया द्वारा फैलाए जा रहे हर प्रोपेगंडा पर करारा वार करते हुए जवाब दिया। कपिल मिश्रा ने कहा कि ये सीएए विरोधी दंगा था जो पुलिस-विरोधी भी था क्योंकि पुलिस पर हमले किए गए और पुलिस विरोधी नारे लगाए गए। उन्होंने कहा कि अंकित शर्मा से लेकर रतन लाल तक, इनलोगों को किसने मारा, इस पर कोई बात नहीं हो रही है। कपिल मिश्रा ने पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि इनका सीएए से कोई मतलब नहीं है। वो हिंसा करते हैं और एक विलेन ढूँढ लेते हैं।
कपिल मिश्रा ने कहा कि उन्हें इसीलिए बदनाम किया जा रहा है ताकि भविष्य में कोई और कपिल मिश्रा न पैदा हो, कोई तथ्यों पर बात करते हुए उनके ख़िलाफ़ आवाज़ न उठा पाए। कपिल मिश्रा ने कहा कि जिस कॉन्ग्रेस की पूर्व निगम पार्षद इशरत जहाँ दंगा फैलाने के आरोप में जेल गई हैं, जिस आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद ताहिर हुसैन ने दंगा किया, वो पार्टियाँ अब उन पर हमले कर रही है। कपिल मिश्रा ने बताया कि वो उसी क्षेत्र में रहते हैं, जहाँ ये देंगे हुए। बकौल कपिल मिश्रा, ताहिर हुसैन के साथ उनकी फोटो वायरल की जा रही है जो 7 साल पुरानी है।
बकौल कपिल मिश्रा, आप नेता संजय सिंह और अमानतुल्लाह खान सहित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से दंगों के दौरान कई बार बात की, जिसकी जाँच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जामा मस्जिद दंगे में और सीलमपुर दंगे में जिनका नाम आया, उन्हें केजरीवाल ने विधानसभा का टिकट दिया। शोएब इकबाल और अब्दुर रहमान को टिकट दिया गया। इन दोनों के लिंक्स की कोई चर्चा क्यों नहीं करना चाहता है? कपिल मिश्रा ने मुस्तफाबाद के विधायक हाजी यूनुस पर भी दंगों में संलिप्तता के गंभीर आरोप लगाए।
कपिल मिश्रा का ऑपइंडिया के साथ पूरा इंटरव्यू का वीडियो
कपिल मिश्रा ने आशंका जताई कि हमले का स्तर बहुत बड़ा हो सकता था। उन्होंने पूछा कि इन दंगों की तैयारी कौन लोग और क्यों करते हैं, इसकी जाँच होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस पूरे दंगे में कहीं भी एंटी-सीएए नहीं है। बकौल कपिल मिश्रा, अगर भजनपुरा में पेट्रोल पम्प पर आग लगाने में वो पूरी तरह सफल हो जाते तो शायद आधा किलोमीटर के पूरे क्षेत्र में भयानक तबाही मचती। उन्होंने माँग की कि इसक बारे में टीवी मीडिया में डिबेट होने चाहिए। दिल्ली की बस्तियों में कुछ लोगों को कट्टरवादी बना दिया गया है। उन्होंने कहा:
“रवीश कुमार बेशर्मी का सबसे बड़ा उदाहरण हैं। उन्होंने मोहम्मद शाहरुख़ को अनुराग मिश्रा बताया और कहा कि वो कपिल मिश्रा का कोई सम्बन्धी हो सकता है। मोहम्मद शाहरुख़ ने उन दंगों में 8 राउंड फायरिंग की थी। फोटोशॉप कर के मेरे साथ उसकी तस्वीर वायरल की गई, जो झूठ निकली। गोधरा में पूरी की पूरी ट्रेन में रामभक्तों को जिन्दा जला दिया गया, तब भी ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया- जैसा मेरे लिए अब किया जा रहा है। इसमें बड़े-बड़े लोग शामिल हैं जिन्हें कई अवॉर्ड्स मिल चुके हैं। राजदीप सरदेसाई भी मेरा नाम लेकर अजेंडा चला रहे हैं, जनता खुल कर उनका विरोध कर रही है।”
भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने जनता को सलाह दी कि वो अलर्ट रहें, पुलिस-प्रशासन का सहयोग करें क्योंकि पुलिस को विलेन बनाया जा रहा है। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि वो अपने समाज में रह रहे ताहिर हुसैन को पहचानें क्योंकि जब अपने घर में आग लगेगी तो न तो 200 लिटर फ्री पानी काम आएगा और न ही डीटीसी की बस फ्री में ले जाएगी। बकौल कपिल मिश्रा, ये संवेदनशील दौर है और हिंसा नहीं करनी है लेकिन सड़कें बंद किए जाएँ तो प्रतिरोध करना है क्योंकि हमें दफ्तर जाने से या बच्चों को स्कूल जाने से कोई नहीं रोक सकता।
मोहम्मद शाहरुख़ को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के शामली से गिरफ़्तार कर लिया। उसने 24 फरवरी को पुलिस पर फायरिंग की थी। इसके बाद वह भाग गया था और कनॉट प्लेस की पार्किंग में एक कार में कई घंटों तक सोता रहा था। इसके बाद वह पंजाब भाग निकला था। पुलिस ने बताया है कि हिंसा के मामले में मंगलवार (मार्च 3,2020) तक 436 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 45 शस्त्र अधिनियम के तहत दर्ज हुए हैं। गिरफ्तार किए गए या हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या 1,427 बताई गई है।
Delhi: Shahrukh (in chequered shirt), the man who had opened fire at police during violence in North East Delhi on 24th February brought to old Police Headquarters, ITO. He was arrested by Delhi Police Crime Branch from Uttar Pradesh. pic.twitter.com/Ww3sRThNPo
शाहरुख़ का ननिहाल मीरगंज में है। इस बारे में पुलिस को काफी देर से पता चला। शाहरुख़ टिक-टॉक पर वीडियो बनाता और मॉडल बनना चाहता था। उसने दो साल पहले अपने एक दोस्त से पिस्टल ख़रीदी थी। पूछताछ के दौरान उसने बताया है कि वो बस रौब झारने के लिए पिस्टल का इस्तेमाल किया करता था और उसने इसीलिए इसे ख़रीदा था। शाहरुख ने पुलिस को बताया है कि जब प्रदर्शन चल रहे थे और पत्थरबाजी हो रही थी तभी वह तैश में आ गया और खुद को गोली चलाने से रोक नहीं पाया।
Ajit Kumar Singla, Additional Commissioner of Police: We're trying to recover the pistol he used. Shahrukh said he fired during protests in a fit of rage. He has no criminal background but his father has a narcotics & fake currency case against him. Further investigation underway https://t.co/ON2IxwPDCIpic.twitter.com/11lEUJTr0N
शाहरुख के पिता पर ड्रग और फेक करेंसी का केस दर्ज है। हालाँकि, इससे पहले शाहरुख पर कोई केस दर्ज नहीं था। गिरफ्तारी के समय शाहरुख़ बस स्टैंड से अपने किसी दोस्त के पास जा रहा था। पुलिस ने बताया है कि आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद ताहिर हुसैन से आरोपी शाहरुख के क्या संबंध हैं, इस सम्बन्ध में जाँच की जाएगी। एसीपी सिंगला ने अधिक जानकारी देते हुए बताया:
“उसकी तलाश में पुलिस क्या-क्या कर रही है? इसकी सही और सटीक जानकारी उसे अखबारों और टीवी से मिल रही थी। इसलिए जैसे ही दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की टीम बरेली पहुँची, वह पंजाब से भी भाग गया। वह पानीपत, कैराना, अमरोहा, बरेली में छिपते हुए शामली पहुँचा था। उसने जिस पिस्तौल से गोलीबारी की थी, उसके दो कारतूस जब्त हो चुके हैं। अभी एक कारतूस के बारे में उसने बताया है कि वो कहीं गिर गया। पिस्तौल बरामद नहीं हुई है। ये पिस्तौल बिहार के मुंगेर में बनी है।”
‘दैनिक भास्कर’ की ख़बर के अनुसार, शाहरुख का परिवार पंजाब का रहने वाला है। वह पिछले कई साल से दिल्ली के घोंडा में रह रहा है। उसका पिता साबिर ड्रग्स तस्करी से जुड़ा है। उस पर मादक पदार्थ अधिनियम के तहत कई मामले दर्ज हैं। वह अपाहिज है। कई बार पंजाब, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की जेलों में बंद रहा है। शाहरुख के दो भाई भी हैं।
दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में कई लोगों की जान चली गई। जहाँ एक तरफ किसी कथित अल्पसंख्यक को कोई थप्पड़ भी लग गया तो उसे मीडिया ने खूब चलाया लेकिन अंकित शर्मा को 400 बार चाकुओं से गोद कर मार डाला तो भी इसके लेकर आवाज़ नहीं उठाई गई। पूर्व मंत्री कपिल शर्मा और दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर सिंह बग्गा ने इन दंगों में मारे गए हिन्दुओं के पीड़ित परिवारों का दर्द लोगों के सामने लाने का बीड़ा उठाया। इतना ही नहीं, उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए धनराशि जुटाने का अभियान भी शुरू किया।
बता दें कि कपिल मिश्रा और तजिंदर बग्गा, दोनों ही हालिया दिल्ली विधानसभा चुनाव हार चुके हैं लेकिन फिर भी उनका जोश कायम है। जहाँ एक तरफ तजिंदर बग्गा हारने के बावजूद अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता से किए गए वादों को निभा रहे हैं, कपिल मिश्रा ने शाहीन बाग़ और जाफराबाद में रोड जाम कर रहे उपद्रवियों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई। चुनाव हारने के बावजूद ये दोनों नेता दिल्ली की जनता की सशक्त आवाज़ बन कर हिन्दुओं के लिए लड़ रहे हैं।
दोनों भाजपा नेताओं के प्रयासों के कारण अब तक जनता ने दिल्ली दंगों में मारे गए हिन्दुओं के परिवारों के लिए 72 लाख रुपए का सहयोग दिया है। हालाँकि, उन्होंने 71 लाख रुपए का ही लक्ष्य रखा था लेकिन उससे 1 लाख रुपए ज्यादा ही लोगों ने दिए हैं। ‘क्राउडकैश’ वेबसाइट पर दंगापीड़ितों के लिए प्रोफाइल बनाया गया है, जहाँ अभी भी लोग अपनी क्षमता व श्रद्धानुसार धनराशि दान कर रहे हैं। दोनों नेताओं का लक्ष्य है कि इन दंगों में मारे गए लोगों की पहचान की जाए और उनके परिवार को वित्तीय सहायता मुहैया कराई जाए।
As more cases of the victims of the riots surface, we are saddened to inform that there is a wide scale destruction of the Hindu lives and livelihood. Our resolve to help each Hindu family stands and hence we are increasing the target to Rs 71 lacshttps://t.co/ToBYzl6qns
इस क्राउडफंडिंग अभियान को शुक्रवार (फरवरी 28, 2020) को लॉन्च किया गया था। कुल 3972 लोगों ने रुपए दानस्वरूप दिए हैं। इनमें से 4 ऐसे लोग हैं, जिन्होंने 1 लाख रुपए या उससे अधिक की राशि सहायतार्थ प्रदान की है। हाल ही में तजिंदर बग्गा ने बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जहाँ दिल्ली दंगा में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में रह रहे बांग्लादेशियों को आश्वासन दिया है कि वो सभी भारतीय नागरिक हैं। उन्होंने मंगलवार (फरवरी 3, 2020) को कहा कि जो भी बांग्लादेशी पश्चिम बंगाल में रह रहे हैं और जिन्होंने भी चुनावों में मतदान किया है, वो सभी भारतीय नागरिक हैं और नागरिकता पाने के लिए उन्हें कागज़ दिखाने की कोई ज़रूरत नहीं है। मुख्यमंत्री ने केंद्र की मोदी सरकार पर भी निशाना साधा और कहा कि वो दिल्ली में हुए हिंसक दंगों को नियंत्रित करने में पूरी तरह विफल रही है।
सीएम ममता ने दावा किया कि वो अपने राज्य को दूसरी दिल्ली नहीं बनने देंगी। उन्होंने कहा कि जो भी बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल में आए हैं, उन्हें फिर से नागरिकता हेतु आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है, वो आटोमेटिक रूप से भारतीय नागरिक हैं। उन्होंने बांग्लादेश से आए लोगों से कहा कि आपलोग मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री चुनने के लिए मतदान करते हो, कोई कैसे कह सकता है कि आप भारतीय नागरिक नहीं हो? ममता बनर्जी ने उन लोगों को भाजपा पर विश्वास न करने की सलाह दी।
ममता बनर्जी ने कहा कि वो एक भी व्यक्ति को पश्चिम बंगाल से बाहर निकालने की कोशिश को सफल नहीं होने देंगी। उन्होंने कहा कि उनके राज्य में रह रहा किसी भी शरणार्थी को नागरिकता से वंचित नहीं किया जाएगा। टीएमसी की मुखिया ने कहा कि जो दिल्ली में हुए, उसे बंगाल में नहीं होने दिया जाएगा और वो बंगाल को दूसरी दिल्ली या उत्तर प्रदेश नहीं बनने देंगी।
“Those who have come from Bangladesh are citizens of India…they have got citizenship. You don’t need to apply for citizenship again,” said Mamata Banerjee. https://t.co/WnkAwZe156
ममता बनर्जी पर अक्सर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लगते रहते हैं। मुस्लिमों को रिझाने के लिए बंगाल की टीएमसी सरकार तरह-तरह की घोषणाएँ करती रहती है। ऐसे में, ममता बनर्जी का ये बयान केंद्र सरकार के सीएए और एनपीआर के ख़िलाफ़ विपक्षी विरोध के अनुरूप ही है। ममता बनर्जी अब खुल कर अपने राज्य में रह रहे बांग्लादेशियों के समर्थन में आ गई हैं।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया पोर्टल ‘अल जज़ीरा’ ने दिल्ली के हिन्दू-विरोधी दंगों को भड़काने के लिए न सिर्फ़ फेक न्यूज़ चलाया बल्कि देश के नक़्शे के साथ भी छेड़छाड़ किया। दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट में अब मीडिया संस्थान के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई गई है। ‘अल जज़ीरा’ के टीवी चैनल के ख़िलाफ़ दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों को भड़काने का भी मामला चलेगा, ऐसी उम्मीद है। इस शिकायत को दिल्ली पुलिस के साथ-साथ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और गृह मंत्रालय को भेजा गया है। अब देखना ये है कि ‘अल जज़ीरा’ पर इस मामले में क्या कार्रवाई होती है।
हालाँकि, अभी तक दिल्ली पुलिस ने इस शिकायत को एफआईआर में तब्दील नहीं किया है। इस शिकायत को जेपी नबजीबन ने दर्ज कराया है। वो ‘कलिंगा राइट्स फोरम’ के राष्ट्रीय संयोजक हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया है कि ‘अल जज़ीरा’ और उसके ‘AJ+’ ने लगातार कई ऐसे लेख, वीडियो और ख़बरें प्रकाशित किए हैं, जिससे दिल्ली हिंसा में उसका हाथ होने से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके माध्यम से भारत ही नहीं, बल्कि यूरोप में भी हिन्दू-घृणा फैलाई जा रही है। उसके कंटेंट्स हिन्दू-घृणा से सने होते हैं और अरब क्षेत्र में रह रहे हिन्दुओं को इस मीडिया पोर्टल से प्रभावित लोगों से ख़तरा है।
AJ+ छोटे-छोटे वीडियो बनाता है, जिनके माध्यम से भारत की नकारात्मक छवि बनाई जाती है और ऐसा दिखाया जाता है कि भारत अल्पसंख्यकों के लिए जरा भी सुरक्षित नहीं है। ‘अल जज़ीरा’ ने इसी क्रम में भारत का छेड़छाड़ किया हुआ नक्शा शेयर किया और इस तरह से उसने भारत की अखण्डता के ख़िलाफ़ क़दम उठाया है। नबजीबन ने इस बारे में बात करते हुए बताया:
“केवल पश्चिमी मीडिया ही नहीं, जो भी देश की अखंडता के ख़िलाफ़ ये सब करेगा, हम उन सभी के ख़िलाफ़ क़ानूनी विकल्प आजमाएँगे। मीडिया का कर्तव्य है कि वो सूचनाओं और फैक्ट्स को को जनता तक पहुँचाए, ये नहीं कि देश की छवि ख़राब करे। भारत का छेड़छाड़ किया हुआ नक्शा शेयर करना अपराध है और एक नागरिक के तौर हम हम ये बर्दाश्त नहीं कर सकते। इसीलिए, हमने शिकायत दर्ज कराई।“
इसके अलावा ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के ख़िलाफ़ भी शिकायत दर्ज कराई गई, जिसने दिल्ली दंगों को लेकर हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए ग़लत सूचनाएँ साझा की थी। अभी तक इस मामले में भी एफआईआर दर्ज होनी बाकी है।
दिल्ली में सीएए विरोध के नाम पर हुई हिंदू विरोधी हिंसा भले ही शांत हो गई हो, लेकिन हिंसा क्षेत्र में कूड़े-कचरे की तरह बिखरी एक-दो नहीं बल्कि हज़ारों तस्वीर हिंदुओं पर बरपे कहर को चीख-चीखकर बयाँ कर रही है। यही कारण है कि डर और भय के साथ बंद कमरे में अपनी पीड़ा से कराह रहा हिंदू न तो खुलकर बोलने को तैयार है और न ही आरोपित के ख़िलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने को। वहीं शेष हिंदुओं के डर का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि अब तक हजारों पीड़ित हिंदू परिवार अपने घरों को खाली करके हिंसा प्रभावित क्षेत्र से पलायन कर चुके हैं।
अब जरा आप भी समझिए कि हिंसा प्रभावित इलाकों में पीड़ित हिंदू के डर का आलम क्या है! पुलिस फोर्स के सख्त पहरे का असर खजूरी चौहारे से ही दिखाई देना शुरू हो जाता है। दिल्ली हिंसा की पहली तस्वीर चाँद बाग चौराहे पर दिखाई पड़ती है। इसके बाद तो आपके क़दम जैसे-जैसे खजूरी ख़ास, करावल नगर, जाफराबाद और फिर शिव विहार की ओर बढ़ते जाएँगे, वैसे-वैसे वह खौफनाक मंजर आपकी आँखों के सामने आ जाएगा, जिसे आपकी आँखों के पीछे बुना और रचा गया था। मेन रोड के सभी बाजार पूरी तरह से बंद हैं। बस दिखाई देती है तो जली हुई गाड़ियाँ और जले हुए मकान या फिर दुकान।
हिंदुओं के मन में व्याप्त हुए डर का अंदाजा आप इस बात से लगाइए कि हम जिस भी हिंदू पीड़ित से मिलने के लिए गए, उसने हमसे बात करना तक उचित नहीं समझा। किसी ने बात भी की तो उसने अपना नाम बताना जरूरी नहीं समझा और जिसने नाम भी बता दिया तो उसने साफ मना कर दिया कि न तो हम किसी के खिलाफ़ थाने में शिकायत करना चाहते हैं और न ही हम अपनी बात मीडिया के माध्यम से किसी से कहना चाहते हैं। इस बीच एक बात सभी ने एक स्वर में कही कि हम तभी तक सुरक्षित हैं, जब तक कि हमारे पास पुलिस फोर्स का पहरा लगा हुआ है। वरना नहीं पता ये जालिम कब और किस रूप में हमारे ऊपर हमला कर दें।
हिंदुओं के डर का पहला सबूत- हिंदू विरोधी हिंसा में मारे गए राहुल ठाकुर के परिजनों से हम बात कर ही रहे थे कि वहाँ मौजूद बृजपुरी क्षेत्र के लोगों का डर जुबाँ पर आ गया। एक चश्मदीद ने चारों ओर देखते हुए कहा, “सर आज हमें सात दिन हो गए हैं, न तो हम अपने घरों से निकले हैं और न ही हम किसी काम से अभी तक बाहर गए हैं और रही हिंसा के शुरुआती दिनों की बात तो, चार दिनों तक हम पूरी रात सोए नहीं। सभी ने अपनी-अपनी गलियों में पूरी रात पहरा भी दिया।” इतना ही नहीं, चश्मदीद ने आगे दावा करते हुए बताया कि अग़र बृजपुरी क्षेत्र की बात करें तो जिस दिन से इलाके में हिंसा हुई, उस दिन से अब तक सैकड़ों परिवार अपने घरों में ताला लगाकर जा चुके हैं।
हिंदुओं के डर का दूसरा सबूत- हम हिंदू विरोधी दंगे में ग़ायब हुए धर्मेन्द्र के घर की तलाश कर रहे थे। इसके लिए हमने एक राह चलते युवक से धर्मेन्द्र के घर का पता पूछ लिया। उन्होंने हमें पूरा पता तरीके से बताया। इस बीच दबी जुबान से वह यह भी बोल गए कि हम आपके साथ जा तो सकते थे, लेकिन बीच में मुस्लिमों का इलाका पड़ता है। दरअसल वो हमें जिस जगह से रास्ता बता रहे थे, वहाँ से धर्मेन्द्र के घर की दूरी मात्र 300 से 400 मीटर थी। फिर जब हम हिंसा में ग़ायब हुए धर्मेन्द्र के यहाँ पहुँचे तो गली में ऐसे कई घर मौजूद थे, जिनमें ताले लगे हुए थे। वहीं धर्मेन्द्र का परिवार इतना डरा हुआ था कि वह हमसे बात करने के लिए न तो ऊपर घर में बुलाना चाहता था और न ही छत से नीचे आना चाहता था।
दिल्ली के हिंसा प्रभावित इलाके में पीड़ित हिंदुओं के घर पर लटके ताले
हिंदुओं के डर का तीसरा सबूत- हम जब हिंसा में मारे गए आलोक तिवारी के यहाँ शिव विहार पहुँचे तो वहाँ हमारी मुलाक़ात उनकी पत्नी कविता से हुई। जब हमने पूछा कि क्या आपने अभी तक घटना के संबंध में कोई FIR थाने में दर्ज कराई है, तो उनकी पत्नी ने हमारी ओर देखा तो सही, लेकिन कुछ बोला नहीं। इसके बाद पास में खड़े एक पड़ोसी ने कहा कि जिस व्यक्ति का शव ही उन्हें बड़ी मश्क्कत के बाद तीन दिन में मिला हो, तो ऐसे में भला कोई FIR क्या ही करा सकता है! इसके बाद उन्होंने उल्टा हमसे एक सवाल कर दिया और कहा कि आपको क्या लगता है कि FIR कराने के बाद यह परिवार ज़िंदा रह पाएगा? इसलिए हमें ज़िंदा रहना है। वैसे उन्होंने बताया कि इस संबंध में पास के एक नेता जी ने थाने में अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज करा दिया है।
हिंदुओं के डर का चौथा सबूत– पीड़ितों से मुलाक़ात करते हुए हम जोहरीपुर इलाके में उस विवेक के यहाँ पहुँचे, जिसके सर में दंगाइयों ने ड्रिल घुसा दिया था। जब हम विवेक के घर के सामने खड़े थे, तो अंदर से विवेक की माता जी ने हमें देखा और हमसे हमारा परिचय पूछा। इसके बाद तो उन्होंने साफ मना कर दिया कि हमें किसी से कोई बात नहीं करनी। हमें बस हमारा बेटा ठीक चाहिए। भगवान से प्रार्थना है कि वह जल्दी से घर लौट आए। जब हमने उनसे पूछा कि आपने अभी तक पुलिस में कोई शिकायत की है तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया। “हमें किसी से कोई शिकायत नहीं करनी” – इतना कहकर वह अपने घर के अंदर चली गईं।
हिंदुओं के डर का पाँचवा सबूत- जब हम जाफराबाद की ओर जा रहे थे तो हमने एक दुकान से खाने-पीने का कुछ सामान लिया। दुकान पर बैठे दादा जी से ही हमने पूछ लिया कि क्या माहौल है अभी। इसके बाद उन्होंने पहले तो हमारा नाम पूछा, जब उनको यकीन हो गया कि उन्हें मुझसे कोई खतरा नहीं, तो वह खुलकर बोले और कहा, “इनका (मुस्लिमों का) कोई इलाज नहीं, हम पीड़ित हैं और पीड़ित ही रहेंगे।” उन्होंने दावा किया कि सौ- दो सौ नहीं हज़ारों लोग क्षेत्र से अपना सामान लेकर जा चुके हैं। हालाँकि उन्होंने यह भी बताया कि इनमें से ज्यादातर लोग वह हैं, जो किसी भी तरह से हिंसा की चपेट में आए या फिर किराए के मकान में रहते थे।
आख़िर में, एक बाईक पर जा रहे तीन युवाओं ने तो चलते-चलते एक नारा भी दे दिया। “अबकी बार हो गई भूल, फिर से खिलेगा कमल का फूल।” खैर, दिल्ली में हुई हिंदू विरोधी हिंसा से एक बात तो साफ है कि मुस्लिम दंगाइयों द्वारा हिंदुओं को दिए दर्द को न तो कोई हिंदू पीड़ित भूलने को तैयार है और न ही उसे कभी भुलाया जा सकता है।
ट्विटर में बड़ा उथल-पुथल होने की संभावना है। दिग्गज सोशल मीडिया प्लेटफार्म के सीईओ जैक डॉर्सी को उनके पद से हटाने के लिए विचार किया जा रहा है। कद्दावर अमेरिकन अरबपति कारोबारी पॉल सिंगर ने ट्विटर में बहुत बड़ा स्टेक ख़रीदा है और वो एक बड़े उलटफेर की तैयारी में लगे हुए हैं।
3.5 बिलियन डॉलर की सपत्ति के मालिक पॉल सिंगर डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के बड़े डोनरों में से एक हैं। वो ‘एलियट मैनेजमेंट’ नामक इन्वेस्टमेंट कम्पनी के संस्थापक हैं। अगर वो ट्विटर के सीईओ जैक डॉर्सी को निकाल बाहर करने में सफल रहते हैं तो ये रिपब्लिकन पार्टी के लिए भी राहत की बात होगी।
जैक डॉर्सी ने पहले भी माना है कि उनकी कम्पनी में काम करने वाले अधिकतर लोग वामपंथी झुकाव रखते हैं और पक्षपाती हैं। हालाँकि, जैक ये भी दावा करते रहे हैं कि इसका कम्पनी की पॉलिसी पर कोई असर नहीं पड़ता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आरोप लगाया था कि ट्विटर कंजर्वेटिव आवाज़ों को दबा रहा है और छद्म रूप से प्रतिबंधित कर रहा है, जिससे उसका पक्षपाती रवैया सामने आ रहा है। ट्रम्प ने इस बयान के बाद जैक डॉर्सी ने अपने वामपंथी झुकाव को स्वीकार किया था।
पॉल सिंगर ने ट्विटर में कितने शेयर ख़रीदे हैं, इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं है। 2016 में सिंगर ने ट्रम्प की राष्ट्रपति उम्मीदवारी का विरोध किया था लेकिन उसके बाद वो डोनाल्ड ट्रम्प के सबसे बड़े प्रशंसकों में से एक रहे हैं। 2017 में ट्रम्प ने सिंगर को वाइट हाउस में भी बकाया था और कहा था कि पहले वो उनके विरोधी गुट में सक्रिय थे लेकिन अब वो उनके पक्के समर्थक हैं। ट्रम्प ने तो ट्विटर व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चुनाव को ग़लत तरीके से प्रभावित करने का भी आरोप लगाया था।
Twitter has been a potential target for activist investors for years. The company only has one class of stock, which means co-founder Jack Dorsey doesn’t have voting control of the company https://t.co/XR55e99ze5pic.twitter.com/Mc9zrQXFnj
अभी कोरोना वायरस के कारण दुनिया भर के शेयर बाजारों की हालत ख़राब है लेकिन पॉल सिंगर के स्टेक ख़रीदने वाली ख़बर के बाद ट्विटर के शेयर के दाम में वृद्धि दर्ज की गई थी। कई अन्य शेयरधारकों ने भी जैक डॉर्सी से नाराजगी जताई थी। पॉल सिंगर की कम्पनी के बारे में कहा जाता है कि वो जिस भी कम्पनी में बड़ा शेयर ख़रीदती है, वहाँ के मैनेजमेंट को में कोई बहुत बड़ा बदलाव किया जाता है।