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जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दफ़न की गई थी मंदिरों से लूटी गई हिन्दू प्रतिमाएँ, ये रहा सबूत

आज के ज़माने में जब औरंगजेब को लेकर ऐसी बातें कही जा रही हैं कि उसने मंदिर बनवाए और मंदिरों को ज़मीनें दीं, ऐसे में सच्चाई को छिपाने वाले इन करतूतों को ध्वस्त करना आवश्यक है। औरंगज़ेब को लेकर कोई अनपढ़ व्यक्ति ऐसे दावे करे तो चलता है लेकिन अगर कोई इतिहासकार ऐसा करे तो आप क्या कहेंगे? सर्वेश्वरी डिग्री कॉलेज के प्राध्यापक और कथित इतिहासकार प्रदीप केशरवानी ने कहा था कि उन्होंने (औरंगज़ेब ने) महादेव मंदिर को दान दिया और संरक्षण दिया। आजकल टीपू सुल्तान और औरंगजेब जैसे क्रूर राजाओं को उदार साबित करने की एक होड़ सी चल पड़ी है।

इस सम्बन्ध में औरंगज़ेब की जीवनी में ही कुछ घटनाओं का जिक्र है, जो इन तथाकथित इतिहासकारों की पोल खोलता है। औरंगज़ेब पर साक़ी मुस्तक़ ख़ान द्वारा लिखित पुस्तक ‘मसीर-ई-आलमगीरी’ में एक घटना का जिक्र है, जिसे आज के ज़माने के किसी व्यक्ति ने नहीं लिखा है। ये घटना रविवार (मई 24-25, 1689) की है। उस दिन ख़ान जहाँ बहादुर जोधपुर से मंदिरों को तबाह कर के लौटा। औरंगज़ेब की जीवनी में लिखा हुआ है कि ख़ान जहाँ बहादुर द्वारा मंदिरों को ध्वस्त किए जाने, उन्हें लूटने और प्रतिमाओं को विखंडित किए जाने पर बादशाह बहुत ख़ुश हुआ। बादशाह को बहादुर के इन कृत्यों पर गर्व महसूस हुआ।

‘मसीर-ई-आलमगीरी’ के अनुसार, खान जहाँ बहादुर जोधपुर से कई गाड़ियों में भर कर हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ लाया था। ये प्रतिमाएँ उन मंदिरों की थीं, जिन्हें मुगलों ने उसके नेतृत्व में लूटा और तबाह किया। इन लूटी गई प्रतिमाओं को बादशाह औरंगज़ेब के सामने पेश किया गया, जिस देख कर वह अत्यंत प्रसन्न हुआ। इनमें एक से बढ़ कर एक प्रतिमाएँ थीं। कुछ सोने-चाँदी के थे, कुछ पीतल की थीं तो कुछ ताँबे से गढ़े गए थे। इनमें कई ऐसी मूर्तियाँ भी थीं, जो पत्थरों की थीं और उन पर उत्तम नक्काशियाँ की गई थीं।

औरंगज़ेब ने आदेश दिया कि इन प्रतिमाओं को उसके दरबार के जिलाऊखाना में डाल दिया जाए। दीवारों से घिरे आँगन जैसी जगह को जिलाऊखना कहते हैं। इसके बाद औरंगज़ेब ने जो आदेश दिया, वो जानने लायक है। बादशाह ने कहा कि जोधपुर से लूट कर हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे गाड़ दिए जाएँ। और इस तरह से जामा मस्जिद के नीचे हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को दफ़न कर दिया गया। इसी औरंगज़ेब के बारे में आज के कुछ इतिहासकार कहते हैं कि वो उदार था। आज जब राम मंदिर पर फ़ैसला आता है और हिन्दुओं को 500 वर्षों बाद न्याय मिलता है तो ऐसे ही लोगों की सुलगती है, जो ग़लत इतिहास पढ़ा कर लोगों को बरगलाने में लगे हैं।

इस सम्बन्ध में उन्नाव के सांसद साक्षी महाराज का भी एक बयान है, जो उन्होंने नवम्बर 2018 में दिया था। साक्षी महाराज ने कहा था कि दिल्ली के जामा मस्जिद को ढाह देना चाहिए क्योंकि इसे हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त कर बनाया गया है। साक्षी महाराज का मानना था कि लोगों को मथुरा, काशी और अयोध्या को छोड़ कर जामा मस्जिद पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने चुनौती दी थी कि अगर जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ न मिलें तो उन्हें फाँसी पर लटका दिया जाए। साक्षी महाराज के आँकड़ों के अनुसार, अकेले मुगलों ने ही 3000 हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त कर उनकी जगह मस्जिदों का निर्माण करवाया।

औरंगज़ेब की जीवनी ‘मसीर-ई-आलमगीरी’ का अंश

जामा मस्जिद के बारे में बता दें कि इसे औरंगज़ेब के पिता शाहजहाँ द्वारा सन 1644-1656 में बनवाया गया था। औरंगज़ेब ने लाहौर में बादशाही मस्जिद का निर्माण करवाया था, जिसकी रूप-रेखा जामा मस्जिद से मिलती है। जामा मस्जिद के निर्माण में 5000 से भी अधिक मजदूरों को खटवाया गया था और मध्य सत्रहवीं सदी में इसके निर्माण में 10 लाख रुपए से भी ज्यादा ख़र्च आया था। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद जब अंग्रेजों ने दिल्ली जीती तो उन्होंने जामा मस्जिद को भी अपने कब्जे में ले लिया था। अंग्रेजों ने मस्जिद में अपनी आर्मी रखी हुई थी और वो दिल्ली को सज़ा देने के लिए इस मस्जिद को ध्वस्त करना चाहते थे। अंग्रेजों ने दिल्ली के अकबराबादी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था।

औरंगज़ेब पर लिखी गई इसी पुस्तक में इसका भी जिक्र किया गया है कि किस तरह रमजान के महीने में मथुरा के मंदिरों को ध्वस्त किया गया। राजस्थान के खंडेला में 300 लोगों की नृशंस हत्या कर के वहाँ के सबसे बड़े मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया। उदयपुर में राणा के महल के सामने स्थित मंदिर को तोड़ डाला गया। राजस्थान के एम्बर से लौटे मुग़ल कमांडर अबू तरब ने 66 मंदिरों को ध्वस्त किए जाने की सूचना बादशाह को दी थी। हामुउद्दीन ख़ान को कर्नाटक के बीजापुर में मंदिरों को ध्वस्त कर उनकी जगह मस्जिदों का निर्माण करवाने के लिए भेजा गया। उसने लौट कर सूचना दी कि मंदिरों को ढहाए जाने से बड़ी संख्या में हिन्दू बेरोजगार हो रहे हैं।

आजकल जब क्रूर बादशाहों को आक्रांता न मानते हुए उन्हें उदार दिखाने की कोशिश हो रही है, उन्हीं के ज़माने की पुस्तक ऐसे प्रयास करने वाले लोगों को लानतें भेज रहे हैं। वहीं वीर शिवाजी के बारे में बात नहीं की जाती, जिन्होंने अपनी सेना को आदेश दे रखा था कि अगर कहीं भी कुरानशरीफ मिलता है तो उसे बाइज्जत आसपास के मस्जिद में रखा जाए। उनका आदेश था कि अगर कोई महिला युद्धबंदी है तो उसे पूरी इज्जत के साथ उसके घर पहुँचाया जाए। उसे कोई नुकसान नहीं पहुँचना चाहिए। लेकिन, यहाँ छत्रपति शिवाजी जैसे वीर राजाओं, जिन्होंने कभी किसी अन्य मजहब के प्रतीकों को नुकसान नहीं पहुँचाया, के मुक़ाबले मंदिरों को तोड़ कर उनकी जगह मस्जिद बनाने वाले मुगलों को महान बनाने की कोशिशें हो रही हैं।

RSS नेता ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा हत्याकांड: NIA ने 11 आरोपितों के खिलाफ दायर किया चार्जशीट

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के पदाधिकारी रिटायर्ड ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा की हत्या के मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने शुक्रवार (नवंबर 15, 2019) को एक ब्रिटिश नागरिक समेत 11 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर किया। इसके साथ ही एजेंसी की तरफ से अदालत में एक एप्लीकेशन डाली गई है, जिसमें केस से चार आरोपितों के नाम हटाने के लिए कहा गया है। जाँच एजेंसी का कहना है कि चारों आरोपितों- अमित अरोड़ा, मनु कुमार, भारती संधु और समीर डिसूजा की इस केस में कोई भूमिका सामने नहीं आई है। अदालत मामले की अगली सुनवाई 21 नवंबर को करेगी।

बता दें कि जाँच के दौरान यह पाया गया कि गगनेजा को खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) के वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा रची गई ट्रांस-नेशनल साजिश के हिस्से के रूप में मार दिया गया था। ये सभी व्यक्ति विशिष्ट समुदायों और संगठनों से संबंधित थे। इस साजिश का उद्देश्य पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति को अस्थिर करना और राज्य में आतंकवाद को पुनर्जीवित करना था।

एनआईए ने जिन 11 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर किया है, उसमें हरदीप सिंह शेरा, पहाड़ सिंह, मलूक सिंह, रमनदीप सिंह, जगतार सिंह, गुरशरणबीर सिंह वहिवाल और हरमीत सिंह का नाम शामिल है। इसमें हरदीप सिंह मुख्य आरोपित है। इसके साथ ही हरमीत सिंह के पाकिस्तान से इस साजिश का संचालन करने का अंदेशा जताया जा रहा है। इन आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 120-B, 34 और 379 के साथ ही गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (UAPA) के सेक्शन 16, 17, 18, 18-A, 18-B और 20 के तहत चार्जशीट दायर किया गया है। इसके अलावा आर्म्स एक्ट के सेक्शन 25 और 27 के सहत भी चार्जशीट दाखिल किया गया है।

एनआइए ने दावा किया है कि गगनेजा की हत्या की साजिश पाकिस्तान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, इटली व यूएई सहित कई देशों में रची गई। साजिश के तहत अपराधियों को इटली, ऑस्ट्रेलिया व यूके से फंडिंग की गई थी। यह फंड हत्याकांड को अंजाम देने के लिए हथियार खरीदने व अन्य सामान खरीदने के लिए इस्तेमाल किया गया।

गौरतलब है कि गगनेजा की अगस्त 2016 में जालंधर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या खालिस्तान समर्थक समूहों द्वारा राज्य में आरएसएस के नेताओं को खत्म करने के लिए टारगेट किलिंग की साजिश का एक हिस्सा थी। यह मामला एनआईए को स्थानांतरित कर दिया गया था, जिसके बाद उसने इस मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की थी।

पुलिस कुत्ते लेकर आए तो प्रदर्शनकारियों ने निकाला शेर: इराक में सरकार के ख़िलाफ़ विरोध हुआ तेज़

इराक में सरकार के ख़िलाफ़ चल रहा विरोध प्रदर्शन तब अचानक से मजेदार हो उठा, जब एक व्यक्ति शेर लेकर आ गया। अपने शरीर पर झंडा लपेटे प्रदर्शनकारी ने शेर को चैन से बाँध रखा था। शेर सबसे पहले तो आसपास खड़े अन्य लोगों की तरफ़ गया और बाद में सड़क किनारे आराम करते दिखा। उसको लाने वाला प्रदर्शनकारी भी उसके साथ ही था। हालाँकि, अभी तक ये नहीं साफ़ हुआ है कि उक्त वीडियो फुटेज इराक के किस स्थान का है। राजधानी बगदाद से लेकर अन्य इलाक़ों तक इराक के पूरे दक्षिणी हिस्से से लगातार कई हिंसक प्रदर्शनों की ख़बरें आ रही हैं।

अब तक इराक में चल रहे विरोध प्रदर्शनों में 320 लोग मारे जा चुके हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बाद लगातार झड़प हो रही है। हज़ारों लोग इस विरोध प्रदर्शन में घायल भी हुए हैं। गुरुवार (नवंबर 14, 2019) को प्रदर्शनकारियों व सुरक्षा बलों के बीच झड़प में 65 लोग घायल हुए। उस दिन 4 लोग मारे भी गए। ये सभी प्रदर्शनकारी सुरक्षा बलों को पीछे ढकेलते हुए मध्य बग़दाद की तरफ ले जाना चाह रहे थे। जहाँ इराक की पुलिस कुत्ते लेकर आ रही है, प्रदर्शनकारियों ने शेर का जरिए उनकी काट निकाली है।

सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए फायरिंग भी की। उन्होंने आँसू गैस के गोले छोड़े, रबर बुलेट्स फायर किए और वाटर कैनन का इस्तेमाल कर के तहरीर स्क्वायर पर जुटे प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा। इराक में लगातार डूबती अर्थव्यवस्था और रोज़गार संकट के कारण लोग सड़कों पर उतरे हैं। वहाँ के प्रधानमंत्री अब्दुल मेहदी ने ग़रीबों और बेरोजगारों के लिए कई सारी घोषणाएँ कर के प्रदर्शनकारियों के रोष को ठंडा करना चाहा लेकिन सरकार अब तक इस मामले में विफल रही है।

अमेरिका द्वारा सद्दाम हुसैन को पकड़े जाने के बाद इराक में नई सत्ता स्थापित हुई थी। लेकिन अब लोग इससे निजात चाहते हैं। जनता का कहना है कि सत्ता में शामिल सभी लोगों को अपने-अपने पदों पर बने रहने का कोइ अधिकार नहीं है। 2017 में आतंकी संगठन आईएसआईएस पर शिकंजा कसने के बाद 2 साल काफ़ी शांतिपूर्ण रहे थे लेकिन इराक एक बार फिर से हिंसक झड़पों के लिए सुर्ख़ियों में लौट आया है। रोष इस बात को लेकर है कि तेल के मामले में इतने मजबूत होने के कारण भी देश में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बदतर है।

Pak में सिंधु नदी तक पहुँचने का लक्ष्य: 40000 भारतीय सैनिकों का रेगिस्तान में ‘सिंधु सुदर्शन’ शुरू

जैसलमेर के रेगिस्तान में भारतीय सेना का दम देखने को मिल रहा है। सेना ने अपनी तैयारियों को परखने और उसे और धारदार बनाने के लिए गुरूवार (14 नवंबर) से थार के रेगिस्तान में ऑपरेशन सिंधु सुदर्शन शुरू किया है। इसमें सेना भारी भरकम हथियारों से युद्धाभ्यास करने में जुटी हुई है। सेना टैंकों के ज़रिए अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन कर रही है। इस अभ्यास को सिंधु सुदर्शन का नाम दिया गया है, जो सिंधु नदी तक पहुँचने के लक्ष्य को दर्शाता है।

अभ्यास में थल सेना और वायु सेना के बीच उच्च स्तर का तालमेल भी शामिल है, जिसमें वायुसेना को हवाई हमले और आपातकालीन निकासी की महत्वपूर्ण भूमिका करनी है। 40,000 सैनिकों के साथ, 700 आर्मर्ड वाहन और दक्षिणी कमान के सुदर्शन चक्र कोर के 300 तोप भी इस अभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं। इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल पॉड्स, हेल्मेट-माउंटेड और नाइट विज़न गॉगल्स से लैस हेलीकॉप्टर रुद्र का उपयोग किया जा रहा है। हाल ही में शामिल 155 मिमी K9 वज्र भी एक्शन में है।

ख़बर के अनुसार, सिंधु सुदर्शन ऑपरेशन में लगातार 12 घंटे तक युद्ध लड़ने की क्षमता को मैदान में परखा जाएगा। युद्धाभ्यास के दौरान मैकेनाइज्ड फ़ोर्स पहली बार शूटर ग्रिड सेंसर का प्रयोग करने जा रही है। इसके तहत युद्ध क्षेत्र में इज़रायली यूएवी हेरोन, हेलीकॉप्टर व सैटेलाइट से टारगेट कर ग्रिड की तस्वीरें भेजी जाएँगी।

युद्धाभ्यास के हिस्से के रूप में, कई एकीकृत युद्ध समूह लगभग 100 किमी की सीमा के साथ विभिन्न स्थानों पर हमलों का अनुकरण कर रहे हैं। अभ्यास के दौरान, व्यक्तिगत युद्ध समूह पहले रॉकेट और आर्टिलरी गन का उपयोग कर हमले की शुरुआत करते हैं। बाद में, बख्तरबंद यूनिट सीमांकित अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार करते हैं और दुश्मन इकाइयों को घेर लिया जाता है। इसके बाद, इन्फैन्ट्री फॉर्मेशन प्रतिकूल बिंदुओं पर कब्जा कर लेती है। इस अभ्यास के दौरान, दुश्मन बलों की भूमिका निभाने वाली टुकड़ी पर आक्रामक प्रतिक्रिया का जवाब दिया जाता है। साथ ही हमलावर बलों की बाद की जवाबी कार्रवाई का भी मूल्यांकन किया जाता है और अभ्यास की आकलन किया जाता है।

ख़बर के अनुसार, निगरानी और आक्रामक प्रणालियों के साथ, इस अभ्यास में सेना के वायु रक्षा विंग और इंजीनियरिंग जैसे सहायक एलिमेंट्स भी शामिल हैं। इंजीनियरिंग एलिमेंट्स एंटी-टैंक माइंस को हटाकर और यांत्रिक पुलों को बिछाकर सैनिकों को आवाजाही की सुविधा प्रदान करता है।

मैं तो सबरीमाला जाऊँगी, सुरक्षा दो या न दो: केरल सरकार ने तृप्ति देसाई से कहा- SC से ऑर्डर ले कर आओ

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गुरुवार (नवंबर 12, 2019) को सबरीमाला मामले पर स्पष्ट फैसला न आने के दो दिन बाद केरल स्थित भगवान अयप्पा मंदिर के कपाट आज यानी शनिवार (नवंबर 16, 2019) को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएँगे। मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी। हालाँकि, महिलाओं को कोई सुरक्षा नहीं दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद केरल के कानून मंत्री एके बालन ने कहा, “सबरीमाला में घुसने का प्रयास करने वाली 10 से 50 वर्ष तक की उम्र की महिलाओं को राज्य सरकार कोई सहायता मुहैया नहीं कराएगी। हमें अभी इस बात पर विचार करना है कि आगे क्या किया जा सकता है अगर किसी ने मंदिर में घुसने की इच्छा व्यक्त की तो कोर्ट का आदेश बेहद उलझा हुआ है और उस पर अध्य्यन की आवश्यकता है।”

इस बीच महिला अधिकार कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने शुक्रवार (नवंबर 15, 2019) को कहा कि वह 20 नवंबर के बाद सबरीमाला मंदिर जाएँगी। चाहे उन्हें केरल सरकार द्वारा सुरक्षा प्रदान की जाए या नहीं। उन्होंने कहा, “मैं 20 नवंबर के बाद सबरीमाला जाऊँगी। हम केरल सरकार से सुरक्षा की माँग करेंगे। यह उन पर निर्भर करता है कि वो हमें सुरक्षा देंगे या नहीं। अगर हमें सुरक्षा प्रदान नहीं भी की जाती है, तो भी मैं दर्शन के लिए सबरीमाला मंदिर जाउँगी।”

केरल देवस्वोम बोर्ड के मंत्री के सुरेंद्रन ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार मंदिर जाने वाली किसी भी महिला को सुरक्षा प्रदान नहीं करेगी और जिन्हें सुरक्षा की आवश्यकता है, उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से एक आदेश लेकर आना होगा। के सुरेंद्रन ने तिरुवनंतपुरम में एक संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “राज्य सरकार सबरीमाला मंदिर जाने वाली किसी भी महिला को सुरक्षा प्रदान नहीं करेगी। तृप्ति देसाई जैसी कार्यकर्ताओं को सबरीमाला को अपनी शक्ति प्रदर्शन के स्थान के रूप में नहीं देखना चाहिए। अगर उन्हें पुलिस सुरक्षा की जरूरत है, तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट से आदेश लेकर आना होगा।”

गौरतलब है कि गुरुवार को सबरीमाला मामले पर सुप्रीम कोर्ट से निर्णायक फैसला नहीं आया है। क्योंकि 5 जजों की पीठ में से 3 जज इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेजे जाने के पक्ष में रहे जबकि 2 जजों ने इससे संबंधित याचिका पर ही सवाल उठा दिए। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस खानविलकर और जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने इस मामले को बड़ी बेंच के पास भेजने के पक्ष में अपना मत सुनाया। जबकि पीठ में मौजूद जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस नरीमन ने सबरीमाला समीक्षा याचिका पर असंतोष व्यक्त किया। अंततः पीठ ने सबरीमाला मामले में फैसला सुनाने के लिए बड़ी पीठ (7 जजों की बेंच) को प्रेषित कर दिया।

‘मुझे तो नहीं लगता सचिन को क्रिकेट बहुत पसंद है’ – तेंदुलकर की माँ ने क्यों और कब कहा था ऐसा

सचिन तेंदुलकर की माँ रजनीताई से मीनाताई नाइक का संवाद

एक लंबे अर्से के बाद रजनीताई से मिलकर बहुत ख़ुशी हुई। मुझे याद है कि पहली बार मैंने सचिन को देखा था, जब वह 8 दिन बाद अस्पताल से सीधे साहित्य सहवास में आया था। इससे पहले, तेंदुलकर दादर में रह रहे थे। इसलिए जब रजनीताई और सर (रमेश तेंदुलकर, सचिन के पिता) साहित्य सहवास में आए तो वे दादर में चाबी भूल गए और रजनीताई बच्चे को गोद में लेकर गलियारे में इंतज़ार कर रही थीं। हम लोग तेंदुलकर के बगल में रह रहे थे। मैंने गलियारे में कुछ शोर सुना और देखा कि रजनीताई गलियारे में दुबकी हुई है। मैंने उन्हें अपने घर बुलाया, सचिन को अपनी गोद में बिठाया। सर को कुछ समय बाद दादर से चाबी मिली। तब तक रजनीताई और बच्चा हमारे साथ थे। सर हमेशा इस घटना को याद करते थे। वास्तव में आज हमारी बातचीत की शुरुआत भी इसी मधुर स्मृति से हुई।

जब सचिन 4 या 5 साल का था, तब वह अपने से बड़े बच्चों को पकड़ लेता था। वह बहुत स्वस्थ, चुस्त और मज़बूत बच्चा था। रजनीताई ने उसके घुँघराले बालों को लंबे समय तक बढ़ने दिया था। एक बार जब मैंने सचिन से पूछा कि यह लंबे बालों में कौन है। तो उसने जवाब दिया, “मैं सरदारजी का बेटा हूँ” (मैं सरदारजीछा पोर ऐह)। सचिन लगभग 15 या 16 साल का था जब हम अपने कलानगर घर लौट आए थे। केवल कलानगर के बच्चों के लिए एक कलविहार क्लब था। लेकिन सचिन कैरम या शतरंज या कभी-कभी टेबल टेनिस खेलने के लिए कलविहार क्लब आता था। 1998 में, मैंने एक बच्चों के नाटक की रचना की थी, इसमें हमें एक क्रिकेट बैट की आवश्यकता थी। बच्चों का थिएटर हमेशा कम बजट पर चलता है। इसलिए मैंने सचिन को अपना पुराना बल्ला देने को कहा। अगले दिन सर तीन बल्लों के साथ आए और कहा कि सचिन ने इन बल्लों पर हस्ताक्षर किए हैं, इनमें से कोई भी चुन लीजिए। हमने अपने खेल के लिए उसमें से एक ले लिया और बाक़ी दोनों को वापस कर दिया। वह बल्ला आज भी हमारे पास है, जो कि भारत रत्न प्राप्त सचिन की मधुर स्मृति से जुड़ा हुआ है। अब याद करते हैं वो बातचीत जो हमारे बीच हुई।

प्रश्न: आप LIC में कब थीं? किस शाखा में?

जवाब: – मैं सांताक्रूज शाखा में विदेश विभाग में थी। मैंने अपनी सेवानिवृत्ति तक वहीं सेवा की। मुझे 1992, 1993 और 1994 के दौरान तीन साल तक चलने में कठिनाई हुई। मैं इस अवधि के दौरान छुट्टी पर थी। श्री वी डब्ल्यू पटकी ने मुझे योगक्षेम में स्थानांतरित करने की पेशकश की थी। मैंने कहा नहीं। रिक्शे के ज़रिए सांताक्रूज तक पहुँचना संभव था।

प्रश्न: क्या आपके सहकर्मी अभी भी आपके संपर्क में हैं?

जवाब: – बेशक, वे मुझसे मिलने आते हैं। मैं बाहर नहीं जा सकती ये बात वो जानते हैं इसलिए वो ख़ुद ही मिलने आ जाते हैं। जब मैं LIC के साथ काम कर रही थी, तो सचिन अक्सर कहता था: “आयी (माँ), अपनी नौकरी छोड़ दो।” मेरा काम करना उसे पसंद नहीं था। लेकिन हमारे डॉक्टर ने उसे मना लिया। उन्होंने कहा, “आप अपनी माँ को कैसा देखना पसंद करेंगे? क्या आप चाहेंगे कि वह घर पर बिस्तर पर पड़ी हो या लँगड़ाकर काम कर रही हों? क्या तुम्हारी माँ बाहर जाती है? नहीं। क्या यह बेहतर नहीं है कि वह कार्यालय जाती रहें? सचिन ने कहा, ”आयी को कम से कम खाना तो बनाना चाहिए।” डॉक्टर ने कहा कि क्या यह बेहतर है कि वह घर पर आटा गूँथे। इस पर सचिन आश्वस्त थे।

प्रश्न: क्या आप कभी सचिन को अपने LIC ऑफिस ले गईं थी?

जवाब: – कई बार। शनिवार को नैनी अपने बेटे से मिलने जाती थी। तो मैं सचिन को कहाँ छोड़ सकती थी। मैं फिर उसे अपने कार्यालय ले जाती। वो वहाँ खेलेगा। फिर उसने टेस्ट मैच खेलना शुरू किया। उसने रिकॉर्ड बनाना और तोड़ना शुरू कर दिया। मेरी सेवानिवृत्ति हो गई। फिर मेरे साथियों ने ज़ोर देकर कहा कि मैं उसे एक बार कार्यालय ले आऊँ। वे उनसे मिलना चाहते थे। उन्होंने उसे एक बच्चे के रूप में देखा था। मैंने सचिन से पूछा, क्या तुम एक दिन मेरे ऑफ़िस आओगे? इसके बाद सचिन और अंजलि मेरे ऑफ़िस आए। उन्होंने कहा कि इसे प्रचारित नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन, मुझे नहीं पता कि चपरासी ने सचिन की कार और आसपास के भवनों से LIC कर्मचारियों, आस-पास के टेलीफोन एक्सचेंज के कर्मचारियों, LIC क्वार्टरों के निवासियों को कैसे इकट्ठा किया। फोटो खींचे गए।

प्रश्न: आपको सचिन की प्रतिभा का एहसास पहली बार कब हुआ?

जवाब: – सचिन एक बहुत शरारती बच्चा था। वह जिस साहित्य सहवास में खेलता था, उस परिसर में एक आम का पेड़ था। सचिन सहित सभी बच्चे कच्चे आमों को खा जाते थे। सचिन पेड़ पर चढ़ जाता और दूसरे बच्चे आम पकड़ने के लिए नीचे खड़े हो जाते। एक दिन जब सचिन पेड़ पर चढ़ गया था तो चौकीदार आया और चिल्लाने लगा। सभी बच्चे भाग गए। सचिन पेड़ पर चढ़ा हुआ था। जैसे ही चौकीदार ने पीछे मुड़कर देखा, सचिन नीचे कूद गया। प्रियोलकर अज्जी विपरीत बालकनी से सारा नज़ारा देख रहीं थी और उन्होंने मुझसे कहा, “इस लड़के का ख़्याल रखो।” उस रात हम सभी चिंतित थे। हमने सोचा कि ऐसे बच्चे के साथ क्या किया जाए। परिवार के सभी सदस्यों ने इस पर चर्चा की और अजीत ने कहा, “सचिन अच्छा क्रिकेट खेलते हैं, उनकी क्रिकेटिंग प्रतिभा को परिसर की चार दीवारों में बेकार नहीं जाना चाहिए, आइए हम उन्हें क्रिकेट खेलने के लिए भेजें।” इस पर मैंने कहा, “सभी लड़के बल्ले और गेंद को सँभालते हैं। लड़कियाँ गुड़िया सँभालती हैं। मुझे नहीं लगता कि इस लड़के को क्रिकेट में कोई दिलचस्पी है।” अजीत ने कहा, “नहीं, वह वास्तव में बहुत अच्छा खेलता है।” तो मैंने कहा ठीक है। कम से कम गर्मियों के दो महीने शांतिपूर्ण रहेंगे। इसके बाद अजीत उसे क्रिकेट प्रशिक्षण और अभ्यास के लिए ले जाने लगे। तब सचिन के कोच और शिक्षक रमाकांत आचरेकर ने सचिन की प्रतिभा को पहचाना और सचिन का प्रशिक्षण एक बच्चे के रूप में शुरू हो गया।

प्रश्न: क्या उन दिनों में आपके कोई ख़ास सपने थे? क्या आप चाहती थीं कि सचिन अपने पिता की तरह प्रोफ़ेसर बनें?

जवाब: – हर माँ को लगता है कि उसके बच्चे को किसी भी क्षेत्र में शीर्ष पर पहुँचना चाहिए जिसे वो चुने। मुझे भी ऐसा ही लगा।

प्रश्न: सचिन को सर्वोच्च भारतीय पुरस्कार भारत रत्न का मिला है। क्या आपको कभी लगा कि उन्हें यह पुरस्कार मिलेगा?

जवाब: – पिछले साल, लता मंगेशकर ने कहा था कि सचिन को भारत रत्न मिलना चाहिए। उस समय मेरे दिल में भी यह ख़्याल आया। इस साल एक चैनल पर एक साक्षात्कार में उन्होंने (लता) फिर से वही बात दोहराई। बाद में, पुरस्कार की घोषणा की गई। सचिन को भारत रत्न दिए जाने से मैं बहुत ख़ुश थी।

प्रश्न: सचिन के मन में आपके लिए अपार सम्मान है। उन्होंने अपना पुरस्कार आपको समर्पित किया है। हमें ऐसी किसी घटना के बारे में बताएँ जो आपके प्रति उनके सम्मान को दर्शाती हो।

जवाब: – सचिन पहली या दूसरी कक्षा में था और स्कूल में पेरेंट्स मीटिंग थी। मैं भी गई। उसकी कक्षा की एक लड़की शैफ़ाली ने मुझ पर टिप्पणी करते हुए कहा, “सचिन की माँ कितनी अजीब दिखती है।” फिर अगले दिन मुझे स्कूल से एक संदेश मिला जिसमें मुझे शिक्षक से मिलने के लिए बुलाया गया था। मैं गई और शिक्षक ने शिक़ायत करते हुए कहा, “सचिन ने शैफ़ाली को सीने में मारा और शैफ़ाली रो रही थी।” शेफाली की माँ भी उसके साथ स्कूल आई थी। मैंने कहा मैं सचिन से पूछ कर पता लगाऊँगी। मैंने उससे पूछा, तब सचिन ने बताया कि शैफ़ाली ने आपके बारे में क्या कहा था। और उसने कहा कि इसीलिए उसने (सचिन) उसे (शैफ़ाली) मारा था। शैफ़ाली ने उस वक़्त एक शब्द भी नहीं कहा और वो चुप रही। मैंने शिक्षक से कहा कि मुझे कोई आपत्ति नहीं है कि शैफ़ाली ने मेरे बारे में क्या कहा था। लेकिन सचिन को बहुत गुस्सा आया। और इसलिए उसने उसे मारा। फिर हमने दोनों को मनाया। सचिन एक बच्चे की तरह थे। कई सालों के बाद जब दोनों बड़े हो गए, शैफ़ाली ने सचिन को एक बार सीढ़ियों पर रोक दिया और उससे पूछा कि क्या वह उसे पहचानते हैं, जिन्होंने उसके सीने में मारा था। सचिन ने कहा कि ‘नहीं’, और शैफ़ाली ने सचिन को पूरी कहानी सुनाई। दोनों हँस पड़े। वैसे, शैफ़ाली प्रसिद्ध पत्रकार और उपन्यासकार अरुण साधु की बेटी हैं। फ़िलहाल, अब शैफ़ाली एबीपी माज़ा के लिए काम कर रही हैं।

प्रश्न: सचिन बहुत विचारशील हैं, विचार में परिपक्व हैं। आपने उसे ऐसा करने के लिए कैसे प्रशिक्षित किया? उनके व्यवहार के लिए कभी कोई उनकी आलोचना नहीं करता। उनकी सफलता उसके सिर नहीं चढ़ी, ऐसा कैसे है?

जवाब: – कोई भी माँ यह नहीं जानती कि जब उसका बच्चा बड़ा होगा तो उसका व्यवहार कैसा होगा। वह अपने सभी बच्चों के साथ एक जैसा व्यवहार करती है। सचिन भी अपने भाई-बहनों की तरह ही बड़े हुए थे। और वह अपने पूरे परिवार से प्यार करते हैं। सचिन ने अपना स्कूल बदला और दादर के शरदश्रम विद्या मंदिर गए। वहाँ उसे बसें बदलनी पड़ती थी। लेकिन वह इसके लिए तैयार था। सचिन के चाचा दादर में रहते हैं। बसें बदलने की समस्या को जानकर उनके चाचा परेशान रहने लगे, इसके लिए उन्होंने सचिन को साथ रहने के लिए कहा, जिसे सचिन ने मान लिया। सचिन आज भी अपने चाचा और चाची से मिलने जाता है। वह अपनी चाची से अपने पसंदीदा व्यंजनों की फ़रमाइश भी करता है। सचिन अपने सभी भाई-बहनों से बहुत प्यार करता है। जब वो छोटा था तो नितिन और सविता के बीच में सोता था।

प्रश्न: सचिन की नैनी, लक्ष्मीबाई, 10-12 साल तक आपके साथ थीं। सचिन उनसे प्यार करते थे?

जवाब: – ओह! हाँ! जब सचिन बड़े हुए, तो उन्होंने कहीं और काम करना शुरू कर दिया। वह सचिन को देखने आती थीं। साहित्य सहवास की महिलाओं ने मुझसे बताया कि सचिन उन्हें हज़ार रुपए देता है, उसे समझाओ। इस पर मैंने कहा कि वह कमाता है, इसलिए वह उन्हें पैसा देना चाहता है, तो उसे देने दो। मैं उसे क्यों रोकूँ? उन्होंने सचिन के लिए बहुत कुछ किया है।”

प्रश्न: क्या सचिन बहुत बड़े भक्त हैं?

जवाब: – मैं आपको एक कहानी सुनाऊँगी। मेरे पेट का ऑपरेशन होना था। मैं अस्पताल में भर्ती हो रही था और लिफ़्ट से जा रही थी। लिफ़्ट में साईं बाबा की तस्वीर थी। मैंने लापरवाही से कहा, “अगर मैं उस ऑपरेशन से बच गई, तो मैं आपसे मिलने आउँगी।” इसके बाद, “मैं लिफ़्ट से जब बाहर आई तो वहाँ एक गणपति की तस्वीर थी। मैंने फिर वही बात कही। तब मेरा ऑपरेशन किया गया था। अगले दिन सुबह सचिन सिद्धि विनायक मंदिर गए। उन्होंने पास के एक साईं बाबा मंदिर का भी दौरा किया। वह एक बार मुझे हेलीकॉप्टर में शिरडी ले गया था।”

प्रश्न: आपने सचिन के पूरे करियर के दौरान एक भी मैच नहीं देखा। फिर आपने 200वाँ टेस्ट मैच देखा। भीड़ बहुत थी। तब आपने कैसा महसूस किया?

जवाब: – मैं कभी किसी मैच में नहीं गई थी। मैं बहुत तनाव में रहती थी। हम टेलीविज़न पर देखते थे। इस बार सचिन ने कहा, “आयी, आप इस बार ज़रूर चलें। मैंने उन्हें आपके लिए मुंबई में यह मैच करवाने के लिए कहा है। यदि आप नहीं चलोगी तो उन्हें कैसा महसूस होगा?” इस बार मुझे एक शारीरिक समस्या हुई। मैं एक क़दम भी नहीं चल सकती थी। तब सचिन ने मेरे लिए विशेष रूप से रैंप बनवाया। लेकिन, उम्मीद के मुताबिक़ काफ़ी भीड़ थी, सचिन को मेरे लिए व्हीलचेयर भी मिल गई। मुझे शुरुआती दिनों की एक और घटना याद है, तब सचिन का चौथा टेस्ट मैच था। वो मैच पाकिस्तान में था। उस दौरान उसकी नाक पर चोट लगी थी, जिससे वो नीचे गिर गया था। उस समय मैं बहुत डर गई थी। वह तब बहुत छोटा था। लेकिन उनके सहयोगियों ने हमें आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि सचिन दो मिनट में उठ गए और वो खेलना चाहते थे। उस मैच में उन्होंने काफ़ी अच्छा प्रदर्शन भी किया।

प्रश्न: माँ रिटायर हो गईं, पिता रिटायर हो गए। अब सचिन कम उम्र में रिटायर हो रहे हैं। आपको कैसा लग रहा है? क्या आप चिंतित हैं? अब वह अपना समय कैसे व्यतीत करेगा?

जवाब: – अब वह यात्रा के दौरे पर है। वह दिल्ली, फिर कोलकाता गया। मैंने उनसे हमारे परिवार के देवता के पास जाने के लिए कहा। इसलिए वह गोवा चला गया। अभी वह यात्रा कर रहा है।

प्रश्न: अंजलि, सचिन की पत्नी के साथ आपके क्या अनुभव हैं?

जवाब: – अंजलि एक शिक्षित, विख्यात परिवार से हैं। वो अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। वह विनम्र, नेकदिल और धर्मनिष्ठ हैं। वह हम सभी का बहुत अच्छे से ख़्याल रखती हैं। साथ ही बच्चों का भी पूरा ध्यान रखती हैं।

प्रश्न: अपने पोती सारा और पोते अर्जुन के बारे में कुछ बताइए?

जवाब: – सारा बहुत शांत और अच्छा व्यवहार करती है। अर्जुन हमेशा सक्रिय रहता है। जब वे छोटे थे और सचिन और अंजलि बाहर होते थे तो, सारा ही अर्जुन का ख़्याल रखती थी। जब वह 10वीं कक्षा में थी तो वह हमेशा पढ़ाई करती थी। मेरा चचेरा भाई जब उससे पूछता कि तुम इतना क्यों पढ़ती हो तो वो जवाब देती कि हर कोई मेरे पिता को जानता है। अगर मुझे ख़राब अंक मिलेंगे तो कोई क्या कहेगा? वो मम्मा से क्या कहेगी कि उसे अच्छे अंक क्यों नहीं मिले? वहीं, अर्जुन बहुत प्यारा बच्चा है। वह लोगों से प्यार करता है। जब वह छोटा था, तो उसके दोस्त खेलने के लिए घर आते थे। वह उन्हें मेरे कमरे के पास नहीं आने देता। वह कहता, कि यह आज्जी का कमरा है। यहाँ मत खेलो। तब उसके दोस्त कहते थे, तो क्या हुआ? ये तो हमारी दादी भी हैं। अर्जुन कहता, ‘लेकिन मेरी अज्जी अलग हैं। उनके पैरों में दर्द रहता है। अगर उन्हें धक्का लगा तो वो गिर जाएँगी। उनकी हड्डियाँ टूट जाएँगी। इसलिए हमें यहाँ नहीं खेलना चाहिए।

प्रश्न: क्या आपको लगता है कि अर्जुन भी बतौर क्रिकेटर अपना भविष्य बनाएँगे?

जवाब: – उसे अब खेल पसंद है। मुझे नहीं पता कि बाद में क्या होगा!

प्रश्न: ये विश्व विजेता क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के बच्चे हैं। जन्म से ही उनके आसपास एक प्रभामंडल रहा है। फिर भी वे सचिन की तरह संतुलित हैं। आपने उनका पालन पोषण करने के लिए क्या किया है?

जवाब: – युवा होने पर ऐसा करना चाहिए। मैं अर्जुन से कहती थी कि वह स्कूल में अपने दोस्तों के साथ भोजन करे। सबके साथ मिलकर रहे। उसके बाद दूसरे लोग भी उसके साथ ऐसा ही करेंगे। अंजलि की माँ भी गरीब बच्चों के लिए काम करती हैं। वह झुग्गियों में भी जाती हैं। हमारे बच्चे वह सब देखते हैं।

प्रश्न: मुझे याद है कि आपने साहित्य सहवास छोड़ दिया था और ले मेर में रहने चली गईं थी। लेकिन सारा और अर्जुन अभी भी यहाँ खेलने आए थे। मुझे लगता है कि इसके पीछे ऐसा सोचा गया कि उन्हें सामान्य बच्चों के साथ बढ़ना चाहिए?

जवाब: – हाँ, उन्हें साहित्य सहवास में खेलना अच्छा लगता है। इसलिए अंजलि उन्हें वहाँ भेज देती हैं।

प्रश्न: मैंने सुना है कि आप खाना बहुत अच्छा बनाती हैं। सचिन को क्या पसंद है?

जवाब: – सचिन को मांसाहारी खाना पसंद है। उसे मेरे व्यंजन पसंद हैं। अर्जुन और सारा को भी हमारा खाना पसंद है। सारा को मछली पसंद है। जब वे छोटे थे तब सारा और अर्जुन लंदन में अंजलि के चाचा से मिलने गए थे। अंजलि की चाची ब्रिटिश हैं। उन्होंने बहुत जल्दी खाना बनाया। सारा ने कहा कि अज्जी ऐसा नहीं करती हैं। वह नारियल, प्याज का उपयोग करती है। सचिन को अजीब लगा। लेकिन, अंजलि स्थिति को बचाने में कामयाब रही। बच्चे कितने मासूम होते हैं।

प्रश्न: सचिन के भारत रत्न के बारे में जानने के बाद LIC के शीर्ष गणमान्य व्यक्ति आपसे मिलने आए थे?

जवाब: – हाँ, सचिन उस दिन घर पर थे। उन्होंने उससे कहा, ‘सचिन, तुम्हारी माँ हमारे साथ LIC में थीं। LIC एक परिवार है। आप भी हमारे परिवार का हिस्सा हैं। फिर उन्होंने सचिन के साथ फोटो खिंचवाई। मैं बहुत ख़ुश थी। 

प्रश्न: कामकाजी महिलाओं के नाम आपका क्या संदेश है?

जवाब: – सचिन के पिता कहते थे कि महिलाओं को बाहर जाकर काम करना चाहिए। अपने घर तक अपने आप को सीमित नहीं करना चाहिए। अपने क्षितिज का विस्तार करें। मैंने अपनी सेवानिवृत्ति तक काम किया। इसलिए मुझे लगता है, अगर आपके पास नौकरी है, तो भी आपको अपने बच्चों के लिए कुछ समय अलग रखना चाहिए। 

(यह साक्षात्कार पहली बार मार्च 2014 में प्रकाशित हुआ था)।

यह मूल ख़बर OpIndia English की है, जिसका अनुवाद प्रीति कमल ने किया है।

कॉन्ग्रेस से शिवसेना में आए एकलौते मुस्लिम विधायक, जिन्होंने महाराष्ट्र का गणित बदल दिया

महाराष्ट्र का सियासी समीकरण हर दिन बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। किसी भी दल के सरकार बनाने में सफल होने की वजह से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है। विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही महाराष्ट्र अपनी नई राज्य सरकार के इंतजार में है। मगर अभी भी सरकार बनाने को लेकर सूरत साफ नहीं हो पा रही है। राजनीतिक हलचल बढ़ती जा रही है। सियासी घमासान के बीच राज्य में सरकार बनाने के लिए शिवेसना के कट्टर राजनीतिक और वैचारिक शत्रुओं के साथ आने की चर्चाएँ अपने चरम पर है। भाजपा का साथ छोड़ने वाली शिवसेना अब कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ जाती हुई दिख रही है।

बता दें कि एनसीपी ने जहाँ शिवसेना को समर्थन देने के लिए एनडीए का साथ छोड़ने के लिए कहा, वहीं कॉन्ग्रेस ने शिवसेना से अपनी हिंदुत्ववादी छवि को ही बदलने की शर्त रख दी। कॉन्ग्रेस ने कहा कि इस छवि के बदलने के बाद ही पार्टी महाराष्ट्र में शिवसेना का समर्थन करने के बारे में सोचेगी। शिवसेना राज्य में सरकार बनाने के लिए इतनी उतावली है कि उसने अपने वैचारिक सिद्धांत को भी ताक पर रख दिया और एनसीपी-कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन करने के लिए मुस्लिमों को महाराष्ट्र में 5% आरक्षण देने की बात पर हाँ कर दिया। साथ ही अपने कट्टर हिंदुत्व का त्याग करने को भी तैयार हो गई। इसे ही कहते हैं सत्ता की अति महत्वाकांक्षा। 

शिवसेना के अपने कट्टर हिंदुत्व छवि को त्यागने के बाद से ही लोगों के जेहन में ये सवाल उठने लगे कि आखिर वो कौन सी कड़ी रही होगी, जिसने शिवसेना और कॉन्ग्रेस के बीच के वैचारिक खाई को भरी होगी। ऐसे में संभवत: एक नाम उभरकर सामने आता है। वो नाम है- मराठवाड़ा क्षेत्र के सिलोद से पूर्व पशुपालन मंत्री और शिवसेना विधायक अब्‍दुल सत्‍तार का। बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में अब्दुल सत्तार के रूप में शिवसेना को पहली बार मुस्लिम विधायक मिला। हिंदुत्व की बुनियाद पर खड़ी शिवसेना के टिकट पर पहली बार कोई मुस्लिम चेहरा चुनाव जीत विधानसभा पहुँचा।  

उल्लेखनीय है कि चुनाव से ठीक पहले कॉन्ग्रेस और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी की गठबंधन सरकार में पशुपालन मंत्री रहे अब्दुल सत्तार ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर शिवसेना का दामन थामा था और चुनाव में जीत हासिल की थी। शिवसेना के हिंदुत्ववादी छवि को त्यागने और कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन करने के पीछे सत्तार की अहम भूमिका मानी जा रही है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अब्दुल सत्तार कॉन्ग्रेसी रह चुके हैं। यानी कि उनकी विचारधारा कॉन्ग्रेस से मेल खाती है। बता दें कि उन्होंने किसी तरह की वैचारिक मतभेद की वजह से पार्टी नहीं छोड़ी थी। उन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी इसलिए छोड़ी थी, क्योंकि पार्टी ने उन्हें औरंगाबाद से लड़ने के लिए टिकट नहीं दिया था।

ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि अब्दुल सत्तार ने ही शिवसेना और कॉन्ग्रेस के बीच के वैचारिक खाई को पाटने का काम किया होगा। सत्तार कॉन्ग्रेसी रह चुके हैं, तो जाहिर सी बात है कि उनके कॉन्ग्रेसी नेताओं के साथ रिश्ते भी होंगे। संभावना जताई जा रही है कि सत्तार ने कॉन्ग्रेसी नेताओं के साथ मिलकर सरकार बनाने में शिवसेना का समर्थन करने के लिए कहा होगा। जानकारी के मुताबिक कॉन्ग्रेस पार्टी के ऐसे नेता जो शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाने की चाह रखते हैं, उन्होंने सत्तार के मामले को सामने रखते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस पिछले कुछ साल में ऐसी ही सियासी गलतियाँ करती रही है, जिनका बाद में खामियाजा भुगतना पड़ा है। वहीं एक अन्य कॉन्गेस नेता का कहना है कि एक मुस्लिम और पूर्व कॉन्ग्रेसी नेता शिवसेना में शामिल होता है और अल्‍पसंख्‍यक बाहुल्‍य विधानसभा क्षेत्र में आसानी से जीत जाता है। इससे साफ पता चलता है कि राजनीति में किस तरह के बदलाव आ रहे हैं।

बहरहाल, महाराष्ट्र की स्थिति पर कुछ भी कहना संभव नहीं है। शिवसेना ने तो एनसीपी और कॉन्ग्रेस की सारी माँगे मान ली है। लेकिन फिर भी तीनों पार्टियों के बीच का मतभेद और संशय खत्म नहीं हो रहा है। ऐसे में अगर इनकी सरकार बन भी जाती है तो देखना दिलचस्प होगा कि जब इन तीनों के बीच अभी ही वस्तु-स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है, तो फिर सरकार कैसे चलेगी।

‘राम मंदिर तोड़ेंगे… बाबरी मस्जिद लेकर रहेंगे’ – नमाज के बाद मुस्लिम महिलाओं का उग्र प्रदर्शन, Video Viral

राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ एक मुस्लिम मण्डली द्वारा साम्प्रदायिक घृणा फैलाया जा रहा था। हिंसा और देशद्रोह की बातें की जा रही थी। इस संबंध में हैदराबाद में सईदाबाद पुलिस ने शुक्रवार (15 नवंबर) को मौलाना अब्दुल अलीम इस्लाही की बेटियों- शबीस्ता, ज़िले हुमा के अलावा मुस्लिम समूह की महिलाओं के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 124-ए के तहत राजद्रोह का मामला दर्ज किया है।

मौलाना अब्दुल अलीम की बेटियों को उनके कथित घृणास्पद बयानों और सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ नारेबाजी करने के लिए मामला दर्ज किया गया। सुप्रीम कोर्ट के ख़िलाफ़ पूरे समूह ने नारेबाजी की। इस घटना का वीडियो भी वायरल हो रहा है। मुस्लिम महिलाओं के समूह ने अयोध्या के फ़ैसले के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन करने के लिए सामूहिक रूप से कई नारे लगाए। सामने आए इस वीडियो में, मुस्लिम महिलाओं ने एकजुट होकर नारे लगाते हुए कहा, “तोड़ेंगे-तोड़ेगे, राम मंदिर तोड़ेंगे, लाठी-गोली खाएँगे, बाबरी मस्जिद बनाएँगे, हमारी आरज़ू शहादत-शहादत।”

इसके अलावा, नारा-ए-तक़बीर और अल्लाहु-अकबर के नारों के साथ, मुस्लिम महिलाओं ने अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर को तोड़ने और बाबरी मस्जिद को हर हाल में लेकर रहने की बात भी कही। 

दरअसल, गुरुवार (14 नवंबर) को, एक मुस्लिम संगठन से जुड़ी महिलाओं के एक समूह ने सईदाबाद के उजाले शाह ईदगाह मैदान में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें बड़ी तादाद में मुस्लिम महिलाओं ने हिस्सा लिया। पुलिस ने शुरू में उन्हें अनुमति देने से इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में उन्होंने सशर्त समझौते को मंजूरी देते हुए कहा कि वे शांति को बाधित नहीं करना चाहते थे और साम्प्रदायिक बयानों से बचना चाहते थे।

ख़बर के अनुसार, मुस्लिम समूह के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 153-ए एंड बी (दो समुदायों के बीच दुश्मनी और नफ़रत को बढ़ावा देना) और 295-ए (जानबूझकर और धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने के लिए दुर्भावनापूर्ण कार्य) के तहत मामला भी दर्ज किया गया है। सेक्टर सब-इंस्पेक्टर डीडी सिंह ने स्टेशन हाउस ऑफ़िसर के पास शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर पुलिस ने FIR दर्ज की।

सईदाबाद के इंस्पेक्टर के श्रीनिवास ने कहा, “हमने कार्यक्रम की विषय-वस्तु को अत्यधिक भड़काऊ पाया है और मण्डली (मुस्लिम महिलाओं के समूह) ने दो समुदायों (हिन्दू-मुस्लिम) के बीच साम्प्रदायिक दुश्मनी पैदा करने की कोशिश की है।” एक साज़िश के मामले में पुलिस द्वारा डीजेएस अध्यक्ष और चार अन्य लोगों की गिरफ़्तारी के लिए प्रार्थना के बाद संभावित विरोध प्रदर्शन को विफल करने के लिए शुक्रवार को पुलिस ने मक्का मस्जिद के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी। टास्क फ़ोर्स ने चार डीजेएस कार्यकर्ताओं को गोलकुंडा से गिरफ़्तार किया था। इसके अलावा, मक्का मस्जिद के पास रैपिड एक्शन फ़ोर्स की भी तैनाती की गई।

ख़बर के अनुसार, पुलिस ने यह भी बताया,

“एक महिला ज़िले हुमा के नेतृत्व में लगभग 110 मुस्लिम महिलाओं और लड़कियों ने ग़ैर-क़ानूनी रूप से इकट्ठा होकर उज्लेशाह ईदगाह मैदान में एकत्र होकर नमाज अता की। लगभग 20 मिनट की नमाज पूरी होने के बाद, हुमा ने माइक सँभाला और देश-विरोधी नारे लगाए।”

अमजद उल्लाह ख़ान, पूर्व निगम पार्षद, 35 आज़मपुरा मंडल और हैदराबाद में मजलिस बचाओ तहरीक के युवा नेता और अमानतुल्ला ख़ान के बेटे ने मुस्लिम महिलाओं के ख़िलाफ़ मामला दर्ज होने की निंदा करते हुए कहा कि ‘नमाज पढ़ना’ संविधान के तहत दिया गया अधिकार है।

वहीं, सियासत टीवी चैनल ने इस मामले पर ख़बर चलाई, जिसमें कहीं इस बात का उल्लेख नहीं किया गया कि मुस्लिम महिलाओं ने दो सम्प्रदायों के बीच धार्मिक भावनाओं को आहत करने का काम किया है। देश में अराजकता फैलाने के उद्देश्य से भरे इस कृत्य की रिपोर्टिंग बिलकुल सीधे और सपाट तरीक़े से की गई, जैसे उसे इस तरह की भड़काऊ विषय-वस्तु पर कोई आपत्ति ही न हो।

कुशीनगर मस्जिद विस्फोट में पूर्व आर्मी मेजर डॉ अशफाक गिरफ्तार, मास्टरमाइंड हाजी कुतुबुद्दीन का है पोता

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के बैरागीपट्टी गाँव की मस्जिद में हुए बम ब्लास्ट केस में यूपी पुलिस ने अब तक 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। यूपी एटीएस ने इस मामले में छठे आरोपित डॉ अशफाक आलम को हैदराबाद के ओल्ड सिटी से गिरफ्तार किया। बता दें कि डॉ अशफाक पूर्व आर्मी मेजर है। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के लिए आलम को लखनऊ ले जाया गया है। विस्फोटक को मस्जिद तक पहुँचाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले अशफाक को पूरी साजिश का प्रमुख सूत्रधार बताया जा रहा है।

मस्जिद में धमाके के समय डॉ आलम कुशीनगर में ही मौजूद था। अशफाक पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने और आपराधिक साजिश रचने का आरोप है। डॉ आलम इस मामले के एक मुख्य आरोपित हाजी कुतुबुद्दीन का पोता है, जो मस्जिद में अक्सर नमाज अदा करता था। कुतुबुद्दीन पर एक बैग में मस्जिद में विस्फोटक विस्फोट करने का आरोप है। हाजी कुतुबुद्दीन को गोरखपुर से गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि डॉ आलम 8 नवंबर को एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने के लिए कुशीनगर आया था। इससे पहले मस्जिद में ब्लास्ट मामले में 4 अन्य मौलानाओं को गिरफ्तार किया जा चुका है।

डॉ अशफाक आलम 2017 तक हैदराबाद के सेना अस्पताल में कैप्टन था और दो साल पहले ही उसने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए समयपूर्व स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। डॉ आलम को यूपी एटीएस और तेलंगाना पुलिस के संयुक्त अभियान के दौरान हैदराबाद से गुरुवार (नवंबर 14, 2019) को गिरफ्तार किया गया। अशफाक की पत्नी भी सेना अस्पताल में डॉक्टर है। फिलहाल वो हैदराबाद में तैनात है।

यूपी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एटीएस) ध्रुव कांत ठाकुर ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “डॉ आलम ने इनवर्टर की बैटरी में शॉर्ट-सर्किट का हवाला देते हुए एक मस्जिद में विस्फोट के बारे में पुलिस को फोन कर बताया। मगर पुलिस के वहाँ पहुँचने से पहले ही अशफाक, कुतुबुद्दीन के साथ भाग गया था।” दरअसल अभियुक्तों से पूछताछ के दौरान विस्फोट में डॉ आलम के शामिल होने की पुष्टि की गई थी। जिसके बाद उसे तुरंत गिरफ्तार करने के लिए एक टीम को हैदराबाद भेजा गया।

ध्रुव कांत ठाकुर ने बताया कि डॉ आलम इस बात का ठोस जवाब देने में असमर्थ रहा कि वो पुलिस को फोन करने के बाद विस्फोट स्थल से क्यों भाग गया। पूछताछ के दौरान वह अन्य आरोपितों से भिड़ गया था। उन्होंने बताया कि मौलाना अजीमुद्दीन लगातार अपना बयान बदलता रहा। बता दें कि अजीमुद्दीन पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। उसे बच्चों को नमाज पढ़ाने के लिए 6000 रुपए की तनख्वाह पर नियुक्त किया गया था। पहले तो अजीमुद्दीन ने अपने बयान में कहा कि विस्फोटक वाला बैग उसके इमाम बनने से पहले से ही मस्जिद में रखा गया था। और फिर उसने बयान बदलते हुए इस बैग को रखने के लिए कुतुबुद्दीन को जिम्मेदार ठहराया।

अजीमुद्दीन, डॉ आलम और कुतुबुद्दीन के अलावा पुलिस ने मामले में तीन अन्य आरोपितों- जावेद अंसारी, इज़हार और आशिक अंसारी को गिरफ्तार किया है। इन पर दंगा करने, धर्म का अपमान करने, आपराधिक साजिश रचने समेत कई मामले दर्ज किए गए। मस्जिद विस्फोट मामले में एक अन्य आरोपित सलाउद्दीन अंसारी उर्फ मुन्ना फिलहाल फरार चल रहा है।

‘मुझे मेरी मस्जिद वापस चाहिए, औरंगज़ेब का सबसे बड़ा साम्राज्य था, वो इस्लामी कट्टरपंथी नहीं था’

राम जन्मभूमि के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपना रुख़ जारी रखते हुए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि 9 नवंबर को सुनाया गया अयोध्या का फ़ैसला ‘क़ानून पर विश्वास की जीत’ है और वह ‘अपनी मस्जिद वापस चाहते हैं’। आउटलुक को दिए एक साक्षात्कार में, ओवैसी ने कहा कि राम जन्मभूमि मामला दो पक्षों के बीच एक दीवानी मुक़दमा (Civil Suit) था, जहाँ क़ानून पर विश्वास ने जीत पाई।

ओवैसी ने कहा,

“अगर मस्जिद को (1992 में) ध्वस्त नहीं किया जाता, तब भी क्या यही फ़ैसला आता? हमारी लड़ाई ज़मीन के टुकड़े के लिए नहीं थी। यह सुनिश्चित करना था कि मेरे क़ानूनी अधिकारों का ध्यान रखा जाए। SC ने यह भी स्पष्ट कहा कि मस्जिद बनाने के लिए किसी मंदिर को नहीं गिराया गया। मुझे अपनी मस्जिद वापस चाहिए।”

सदियों से चले आ रहे एक विवाद को समाप्त करने वाले ऐतिहासिक फ़ैसले में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 9 नवंबर को विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि हिन्दू पक्ष को सौंप दी। इससे हिन्दू भक्तों के लिए भगवान राम के जन्मस्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण प्रशस्त हो सका। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को 1992 में बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण के लिए अयोध्या में एक प्रमुख स्थान पर सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को एक वैकल्पिक स्थान पर 5 एकड़ भूमि प्रदान करने का भी आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ASI की रिपोर्ट में पर्याप्त सामग्री थी, जिसके तहत निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले जा सके- खाली ज़मीन पर बाबरी मस्जिद का निर्माण नहीं किया गया था। विवादित ढाँचे में अंतर्निहित एक संरचना थी। अंतर्निहित संरचना एक इस्लामी संरचना नहीं थी। यह विवाद ज़मीन के मालिक़ाना हक को लेकर था।

इसके अलावा, अपने साक्षात्कार में, मुगल सम्राट औरंगज़ेब का बचाव करते हुए, जो कि हिंदुओं पर अत्याचार के लिए जाना जाता है, ओवैसी ने कहा कि भारत के सम्राट के रूप में, औरंगज़ेब का सबसे बड़ा साम्राज्य था। “और ये दक्षिणपंथी उसे एक इस्लामी कट्टरपंथी कहते हैं। अब क्या इतनी बड़ी संख्या में नमाज़ मस्जिद में नहीं होगी?” ओवैसी ने कहा कि औरंगजेब की ‘धर्मनिरपेक्षता’ एक कारण है, जो वो इस फ़ैसले से असहमत हैं।

AIMIM प्रमुख ने इससे पहले राम जन्मभूमि के फ़ैसले पर प्रकाश डाला। फ़ैसले के ठीक बाद एक सार्वजनिक रैली में बोलते हुए, असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था,

“अगर बाबरी मस्जिद वैध थी तो इसे (भूमि) उन लोगों को क्यों सौंप दिया गया, जिन्होंने इसे ध्वस्त किया था। अगर यह ग़ैर-क़ानूनी थी तो केस क्यों चल रहा है और आडवाणी के ख़िलाफ़ केस वापस लिया जाए। और अगर यह क़ानूनी है तो मुझे दे दो।”

जनसभा को संबोधित करने के दौरान, ओवैसी ने भीड़ से कहा था, “हिम्मत मत हारो।” मजबूत रहो, हमें संघर्ष करना है, हमें एकजुट रहना है। दुनिया यहीं ख़त्म नहीं होने वाली है।”

बाद में, रविवार को, ओवैसी ने कहा था, “आज एक मुस्लिम क्या देखता है? इतने सालों तक वहाँ एक मस्जिद खड़ी रही, जिसे ध्वस्त कर दिया गया। अब अदालत एक इमारत को उस जगह पर आने की अनुमति दे रही है, जहाँ कथित तौर पर पाया गया था कि यह ज़मीन रामलला की है।”

दिलचस्प बात यह है कि ओवैसी के लिए, आक्रमणकारियों द्वारा निर्मित एक मस्जिद पवित्र थी, जबकि ASI के निष्कर्षों के बावजूद हिन्दू विश्वास का मज़ाक उड़ाने और इसे ‘कथित खोज’ कहने में उन्हें कोई समस्या नहीं हुई।