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14 और 17 साल की बहनों का गन्ने के खेत में गैंगरेप: वसीम, सावेज अखलाक, आरिफ, आमिर ने किया Video Viral

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के एक गाँव में दो नाबालिग बहनों के साथ सामूहिक दुष्कर्म कर वीडियो वायरल करने का एक घिनौना मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक लड़कियों की उम्र 14 और 17 साल है। दोनों बहनें 17 नवंबर को अपने घर से दवा लेने के लिए निकली थीं। लेकिन जब घर आने लगीं तो एक लड़के ने उन्हें तमंचा दिखाकर रास्ते में रोक लिया और फिर गन्ने के खेत में मौजूद अपने साथियों के पास उन्हें खींचकर ले गया। जहाँ 5 लोगों ने मिलकर उन दोनों बहनों का बारी-बारी से बलात्कार किया। दोनों बहनें गिड़गिड़ाती रहीं, लेकिन उनमें से किसी ने एक नहीं सुनी। इतना ही नहीं लड़कियों के विरोध करने पर उनसे मारपीट भी की गई और इस दौरान इनका वीडियो भी बनाया गया।

हालाँकि, ये वीडियो पहले दोनों बहनों को ब्लैकमेल करने के लिए बनाया गया था और उनसे कहा गया था कि वे पाँचों जब भी उन्हें बुलाएँ तो उन्हें आना होगा। लेकिन, जब लड़कियों ने घटना के दो दिन उनकी ये बात नहीं मानी तो गुरुवार को उनका वीडियो वायरल कर दिया गया। धीरे-धीरे पूरे इलाके में इस वीडियो को देख हड़कंप मच गया और लड़कियों के घरवालों के पास भी ये वीडियो पहुँच गया। वीडियों में लड़कियों को देखकर घरवाले सन्न रह गए। उन्होंने बच्चियों से सारा मामला पता किया। घटना की जानकारी मिलते ही घरवालों ने ये मामला पुलिस में दर्ज करवाया और पुलिस ने आरोपितों की तलाश की।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार इन आरोपितों की पहचान वसीम पुत्र यासीन, सावेज पुत्र हामिद रजा खां, अखलाक पुत्र इकरार खां, आरिफ पुत्र भदय्या खां, आमिर पुत्र घसीटे खां के रूप में हुई है। जिसके बाद पुलिस ने इन पर सामूहिक दुष्कर्म (376डी), आपराधिक घटना के लिए धमकी देना (506), पॉक्सो एक्ट (3/4), 67ए आइटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

इलाके के एसएसपी शैलेश पांडेय ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया है कि सामूहिक दुष्कर्म (376डी), आपराधिक घटना के लिए धमकी देना (506), पॉक्सो एक्ट (3/4), 67ए आइटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

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मैं बनूँगा ये मंत्री, वो बनेगा वो मंत्री… सरकार गठन से पहले ही कॉन्ग्रेसी नेताओं ने शुरू कर दी लॉबिंग

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद वहाँ की राजनीति में चल रही उठा-पटक अब थमने के कगार पर है। खबर है कि कल देर रात एनसीपी प्रमुख शरद पवार के घर पर शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और उनके विधायक बेटे आदित्य ठाकरे के साथ बैठक के बाद समीकरण की सारी तस्वीर साफ हो गई। कॉन्ग्रेस और एनसीपी ने 2 दिनों तक मंथन के बाद साफ कर दिया कि वे शिवसेना के साथ आपसी सहमति पर सरकार बनाने के लिए राजी हैं।

अब कहा जा रहा है कि आज यानी शुक्रवार को इन तीनों दलों की इस मामले पर अंतिम बैठक के बाद 48 घंटे के भीतर प्रदेश में सरकार का गठन का ऐलान हो सकता है। क्योंकि इससे पहले कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी ने एनसीपी और शिवसेना के साथ मिलकर प्रदेश में सरकार गठन को लेकर अपनी हरी झंडी दे दी है।

वहीं, प्राप्त जानकारी के अनुसार कॉन्ग्रेस की तरफ से आज होने वाली बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल का मुंबई जाना तय हुआ है। जहाँ ये तीनों नेता शिवसेना नेतृत्व और एनसीपी नेताओं के साथ मीटिंग करेंगे। और फिर सरकार गठन का औपचारिक ऐलान हो सकता है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस-एनसीपी के खिलाफ़ भाजपा के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरने वाली शिवसेना अब जब अपने प्रतिद्वंदियों के साथ ही गठबंधन कर सरकार बनाने को तैयार है, और लंबे समय तक सोच विचार करने के बाद सोनिया गाँधी भी इसके लिए मान गई हैं। लेकिन इस बीच कॉन्ग्रेस के छोटे नेता (राज्य स्तरीय नेता) प्रदेश में अपनी पार्टी की सरकार बनते देख कर खुद को मंत्री बनाने के लिए लॉबिंग में जुट गए हैं। विधायक से मंत्री बनने तक की चाहत में इन नेताओं की तरह-तरह बयानबाजी इन दिनों सामने आ रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स (सूत्रों के अनुसार ही सही) की बात करें तो में बताया जा रहा है कि इस गठबंधन में मुख्यमंत्री शिवसेना का बनेगा। जबकि एनसीपी और कॉन्ग्रेस के खाते में उपमुख्यमंत्री पद आएगा, जिसके लिए अजीत पवार और बालासाहेब थोराट का नाम फिलहाल सबसे आगे चल रहा है। जानकारी के अनुसार विधानसभा स्पीकर पद कॉन्ग्रेस को मिलने के आसार हैं, जबकि मंत्रालयों का बँटवारा पार्टी की संख्या के आधार पर होगा।

जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार एक वरिष्ठ नेता ने दलों के बँटवारे के बारे में बात करते हुए बताया कि शिवसेना और एनसीपी को लगभग बराबर की हिस्सेदारी सत्ता में मिलेगी, लेकिन कॉन्ग्रेस को कुछ कम में संतोष करना पड़ेगा। वहीं, ये भी कहा जा रहा है कि एनसीपी अभी भी रोटेशन के आधार पर मुख्यमंत्री पद की माँग कर रही हैं। जबकि दूसरे नेता ने कहा है कि ये मामला अब पूरी तरह साफ है।

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‘राम-कृष्ण पूर्वज हैं तो इतिहास में क्यों नहीं पढ़ाया जाता’ – AAP नेता की विवादित टिप्पणी

आम आदमी पार्टी के नेता राजेंद्र पाल गौतम ने भगवान राम और कृष्ण को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि राम और कृष्ण अगर पूर्वज हैं तो इतिहास में पढ़ाया क्यों नहीं जाता। पूर्वजों का कोई इतिहास होता है, जबकि इनका कोई प्रमाणिक इतिहास नहीं है। केजरीवाल सरकार में मंत्री राजेंद्र पाल इतने पर ही नहीं रुके। इसके आगे उन्होंने कहा कि यह पौराणिक कथाएँ हैं, ऐतिहासिक नहीं। जबकि पेरियार का दृष्टिकोण प्रमाणिकता और तार्किकता के आधार पर था। बता दें कि उन्होंने यह सवाल योगगुरु बाबा रामदेव के एक ट्वीट के जवाब में पूछा।

हालाँकि, आम आदमी पार्टी नेता राजेंद्र पाल गौतम ने अपना यह ट्वीट डिलीट कर दिया है, और एक अन्य ट्वीट करते हुए बताया कि किसी ने उनके ट्विटर हैंडल का दुरुपयोग या हैक किया और चुनाव के समय पार्टी (आप) को नुक़सान पहुँचाने के लिए धार्मिक प्रतीकों पर कुछ ट्वीट किया है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए सभी धर्म बराबर हैं, हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं।

इससे पहले एक ट्वीट में, योग गुरु रामदेव बाबा ने कहा था कि जो कोई भी अपने पूर्वजों भगवान राम और भगवान कृष्ण का सम्मान करेगा, वे उनका बचाव करेंगे। डॉ भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले और अन्य नेताओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा था कि वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। लेकिन, प्रसिद्ध समाजवादी और ‘फादर ऑफ़ द द्रविड़ियन आंदोलन’ पेरियार की विचारधारा पौराणिक कथाओं के ख़िलाफ़ थी, जिससे कोई सहमत नहीं हो सकता।

जानकारी के अनुसार, पेरियार पर रामदेव बाबा के बयानों पर डीएमके प्रमुख एम के स्टालिन ने तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि वह ऐसी ताक़तों के ख़िलाफ़ द्रविड़ विचारधारा का बचाव करेंगे। तब रामदेव बाबा ने यह स्पष्ट किया कि उन्होंने प्रमुख दलित नेता बी आर अंबेडकर का अपमान नहीं किया बल्कि वो उनका सम्मान करते हैं।

वहीं, आप नेता राजेन्द्र पाल के बारे में बता दें कि वो केजरीवाल सरकार में समाज कल्याण, एससी/ एसटी, सहकारी गुरुद्वारा चुनाव मंत्रालय की ज़िम्मेदारी उठा चुके हैं। फ़िलहाल, वो दिल्ली की सीमापुरी विधानसभा से विधायक हैं। उनकी इस तरह की टिप्पणियाँ मुख्यमंत्री केजरीवाल के लिए एक नहीं बल्कि कई मुसीबतें खड़ी कर सकती हैं। 

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प्रियंका के नाम पर रार, UP कॉन्ग्रेस हुई दो फाड़: 11 वरिष्ठ नेताओं को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी

उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस पार्टी को मजबूत बनाने के लिए प्रियंका गाँधी वाड्रा हर मुमकिन प्रयास करती नजर आ रही हैं। अभी हाल ही में उन्होंने संघर्षशील युवा नेताओं की एक टीम का गठन किया है और यूपी की जनता का विश्वास जीतने के लिए प्रयास भी कर रही हैं। लेकिन इसी बीच पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने अपने ऊपर युवा नेतृत्व थोपे जाने का आरोप मढ़ते हुए उनकी नीति और निर्णयों के ख़िलाफ़ बगावत की है। इसके बाद प्रदेश कॉन्ग्रेस ने अपने पार्टी के 11 वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ़ गुरुवार को सख्त कदम उठाया है। जिसके तहत इन नेताओं को न केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, बल्कि 24 घंटे के भीतर जवाब तलब कर अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त न किए जाने का संदेश दिया है।

ये ‘कारण बताओ’ नोटिस जिन 11 नेताओं को भेजे गए हैं, उनमें पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी, राम कृष्ण द्विवेदी, पूर्व सांसद संतोष सिंह, पूर्व एमएलसी सिराज मेहंदी, पूर्व विधायक विनोद चौधरी, भूधर नारायण मिश्रा, हाफिज मो उमर, नेक चंद्र पांडेय और अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के सदस्य राजेन्द्र सिंह सोलंकी, पूर्व अध्यक्ष यूथ कॉन्ग्रेस स्वयं प्रकाश गोस्वामी और गोरखपुर के पूर्व जिलाध्यक्ष संजीव सिंह के नाम शामिल हैं। और इसे कॉन्ग्रेस अनुशासन समिति के सदस्य पूर्व विधायक अजय राय की ओर से भेजा गया है।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार इस नोटिस में लिखा है, “आप लोगों द्वारा विगत कुछ समय से प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी से संबंधित अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी के निर्णयों पर लगातार अनावश्यक रूप से सार्वजनिक तौर पर बैठक कर विरोध किया जा रहा है। इन बैठकों और मीडिया वक्तव्यों से कॉन्ग्रेस पार्टी की छवि धूमिल हुई है। आप जैसे वरिष्ठ नेताओं से ऐसी अपेक्षा नही थी। आपका यह आचरण पार्टी की नीतियों और आदर्शों के विपरीत है। आप लोगों का ये कृत्य अनुशासनहीनता की परिधि में आता है। आप 24 घंटे में अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें कि उक्त आचरण के विरुद्ध क्यों न अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।”

गौरतलब है कि इससे पहले कॉन्ग्रेस पार्टी को मजबूत बनाने की दिशा में प्रियंका गाँधी ने 350 पूर्व सांसद, विधायक, एमएलसी, 2019 के लोकसभा उम्मीदवार और 2017 के विधानसभा उम्मीदवारों को बैठक के लिए बुलावा भेजा था। लेकिन उसमें शामिल सिर्फ़ 40 नेता ही हुए थे। बताया गया थ कि अन्य नेता प्रियंका गाँधी से नाराज हैं क्योंकि उन्होंने वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर दिया है और नए नेतृत्व को उन पर थोप रही हैं। जिसके कारण ये पुराने नेता पिछले 15 दिनों में बैठकें भी कर चुके हैं और जल्द ही तीसरी बैठक भी इस संबंध में होने वाली है।

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JNU टीचर्स असोसिएशन ने बिगाड़ा माहौल, बनाया ‘आजादी ब्रिगेड’ का केंद्र: पत्र लिख 113 टीचर्स हुए अलग

जेएनयू में स्टूडेंट्स-प्रशासन के बाद अब शिक्षकों के मध्य भी मतभेद सामने आ गए हैं। दरअसल, गुरुवार (नवंबर 22, 2019) को विश्वविद्यालय के कुछ टीचर्स ने सार्वजनिक तौर पर ऐलान किया है कि वे 20 नवंबर 2019 से खुद को जेएनयू टीचर्स असोसिएशन (जेएनयूटीए) से अलग कर रहे हैं। इसके अलावा वे खुद को उस हर रेज्यूलेशन/बयान से भी अलग करते हैं जो JNUTA ने 1 नवंबर 2019 तक दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इन टीचर्स का कहना है कि जेएनयूटीए प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं को तो अपना समर्थन दे रहा है, मगर जिन शिक्षकों को स्टूडेंट्स ने कुछ दिनों पहले बंधक बनाया हुआ था या उनके और उनके परिवारजनों के साथ बदसलूकी की थी, उनके खिलाफ असोसिएशन कोई कार्यवाही तो दूर, निंदा तक नहीं कर रहा।

असोसिएशन से खुद को अलग करने वाले इन टीचर्स ने इस संबंध में पत्र भी जारी किया है। इस पत्र में वार्डन और उनके घर, परिवार, बच्चों पर देर रात हुए हमले का हवाला दिया गया है। साथ ही महिला प्रोफेसर और डीन पर हुए अटैक का भी इस पत्र में जिक्र है। इस पत्र में स्पष्ट बताया गया है कि छात्रों ने हमले के दौरान केवल टीचरों से बदसलूकी नहीं की बल्कि उस एंम्बुलेंस को भी स्वास्थ्य केंद्र की ओर जबरन मुड़वा दिया, जिसमें डीन को अस्पताल ले जाया जा रहा था।

JNUTA से अलग होने का ऐलान पत्र

इसके अलावा इन टीचर्स का ये भी कहना है कि प्रदर्शन की वजह से पूरी जेएनयू से जुड़े लोग परेशान हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जेएनयू प्रोफेसर डॉ अश्विनी मोहपात्रा ने बताया कि जेएनयूटीए से अलग होने के ऐलान पत्र में अब तक 113 टीचर्स ने हस्ताक्षर किए हैं और उन्हें लगता है कि जल्द ही इस ऐलान पत्र पर 150 से 200 के बीच शिक्षक अपने साइन करेंगे। बता दें जेएनयूटीए में करीब 584 मेंबर यानी शिक्षक हैं।

प्रोफेसर डॉ अश्विनी मोहपात्रा ने ट्वीट करके जेएनयू की हालिया स्थिति की मुख्य जड़ जेएनयूटीए को बताया है। उनके मुताबिक वामपंथियों की मंडली ने जेएनयू को आजादी ब्रिगेड का बड़ा केंद्र बना दिया है।

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‘राम मंदिर निर्णय स्वतंत्र भारत के इतिहास में काला धब्बा, हम जजों से बेहतर फैसले की उम्मीद नहीं कर सकते’

अयोध्या विवाद पर मुस्लिम पक्षकार जमीयत उलेमा ए हिंद ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिका दाखिल ना करने का फैसला लिया है। मुस्लिम पक्षकार ने गुरुवार (नवंबर 21, 2019) को कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने एक प्रस्ताव पारित किया है कि वह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और वक्फ संपत्तियों द्वारा प्रबंधित बाबरी मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिका दाखिल नहीं करेगा।

गुरुवार को हुई कार्य समिति की बैठक में जमीयत उलेमा-ए-हिंद अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वतंत्र भारत के इतिहास में काला धब्बा बताया और साथ ही समीक्षा याचिका दायर नहीं करने की बात भी कही। तथाकथित इस्लामी विद्वानों की संस्था जमीयत का मानना है कि समीक्षा याचिका दायर करने से और अधिक नुकसान हो सकता है। लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि जो लोग याचिका दायर करना चाहते हैं वे अपने ‘कानूनी हक’ का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए इसका विरोध नहीं किया जाएगा।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट इस विवाद पर अपना फैसला सुना चुका है। जिसके मुताबिक विवादित जमीन पर रामलला का मालिकाना हक है। वहीं मुस्लिम पक्ष को किसी दूसरे स्थान पर 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन दी जाएगी।

कोर्ट का फैसला आने के कुछ दिनों बाद मुस्लिम पक्षकारों की हुई बैठक में जमीयत उलेमा-ए-हिंद (मौलाना अरशद मदनी वाला) और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने समीक्षा याचिका दायर करने की बात कही थी। मदनी ने कहा था कि उन्हें पता है कि उनकी समीक्षा याचिका 100% खारिज हो जाएगी, लेकिन वो फिर भी इसे दायर करेंगे, क्योंकि ये उनका अधिकार है।

वहीं गुरुवार को कहा गया कि जमीयत उलमा-ए-हिंद की कार्य समिति ने बाबरी मस्जिद के खिलाफ हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अनुचित और एकतरफा माना है। उनका कहना है कि कोर्ट ने पुष्टि की है कि किसी भी मंदिर को ध्वस्त करने के बाद मस्जिद का निर्माण नहीं किया गया था। वहाँ पर कई सौ वर्षों तक एक मस्जिद मौजूद थी, जिसे ध्वस्त कर दिया गया और अब अदालत ने उस साइट पर मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। 

बैठक में आगे कहा गया, “इस तरह का निर्णय स्वतंत्र भारत के इतिहास में काला धब्बा है। ऐसी स्थिति में हम संबंधित न्यायाधीशों से किसी भी बेहतर फैसले की उम्मीद नहीं कर सकते, बल्कि आगे और नुकसान होने की संभावना है। इसलिए कार्य समिति का मानना है कि समीक्षा याचिका दायर करना लाभदायक नहीं होगा।”

उल्लेखनीय है कि मदनी इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ऊँगली उठा चुके हैं। पिछले दिनों भी उन्होंने इस फैसले पर जहर उगलते हुए कहा था कि सुप्रीम कोर्ट को मुस्लिमों की बजाए हिंदुओं को मंदिर बनाने के लिए अलग से जगह देनी चाहिए थी।

मदनी ने कहा था, “सुप्रीम कोर्ट के फैसले में, सभी सबूत बाईं ओर इशारा करते हैं, जबकि फैसला दाईं ओर जाता है। कोर्ट यह स्वीकार करता है कि मुस्लिमों ने 1857 से 1949 तक वहाँ नमाज अदा की। इस बात को माना गया कि 1934 में मस्जिद को नुकसान पहुँचाया गया था और इसके लिए हिंदुओं पर जुर्माना भी लगाया गया था। यह भी स्वीकार किया गया कि 1949 में वहाँ मूर्तियों की स्थापना गलत थी। साथ ही 1992 में मस्जिद के विध्वंस को भी गैर कानूनी करार दिया।” हालाँकि उनके इस बयान में कई त्रुटियाँ थीं।

‘हम न इधर के, न उधर के… हमें ट्रांसजेंडर घोषित कर दें’ – कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री ने चली केजरीवाल की ‘चाल’

पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी और केंद्र सरकार के बीच खींचतान अभी भी जारी है। राज्य में कभी योजनाओं को लागू करने तो कभी किसी आदेश को लेकर मुख्यमंत्री वी नारायणसामी और उप-राज्यपाल किरण बेदी के बीच आपसी मतभेदों की ख़बर अक्सर सामने आती रहती है। ऐसे में दिल्ली के सीएम केजरीवाल से ड्रामा की ट्रेनिंग लेते हुए उन्होंने सारे आरोप केंद्र सरकार पर लादने की राजनीति चली। मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने कहा है कि इससे बेहतर तो केंद्र सरकार द्वारा हमें ‘ट्रांसजेंडर’ ही घोषित कर दिया जाए।

ख़बर के अनुसार, मुख्यमंत्री वी नारायण सामी ‘भारत के राजकोषीय संघवाद को चुनौती’ कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार को जब जैसा मन करता है उस हिसाब से हमारे साथ व्यवहार करती है। उन्होंने कहा कि इससे अच्छा है सरकार हमें ट्रांसजेडर घोषित कर दे। हम न इधर के रह गए हैं और न उधर के रह गए हैं। यही हमारी स्थिति बन गई है।

केंद्र पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा,

”जीएसटी समेत कई योजनाओं के लिए केंद्र सरकार अपनी सुविधानुसार पुडुचेरी को ट्रीट कर रही है जबकि अन्य कार्यक्रमों के लिए पुडुचेरी के साथ केंद्र शासित प्रदेश जैसा व्यवहार किया जा रहा है।” 

इसके आगे उन्होने कहा कि केंद्र शाषित प्रदेश को योजनाओं का 30 फ़ीसदी का शेयर मिलता है, जबकि बाक़ी हिस्सा केंद्र को ही चला जाता है। सीएम सामी ने यह दावा किया कि केंद्र सरकार अनुदान के बजट में 30 प्रतिशत से 26 प्रतिशत तक की कटौती करने के अलावा अनुदान के आवंटन में पुडुचेरी की अनदेखी कर रही है। उन्होंने मुफ़्त चावल योजना में आने वाली समस्याओं का भी ज़िक्र किया और कहा कि केंद्र का अपेक्षाकृत कम सहयोग और प्रशासनिक स्तर पर आने वाली दिक्कतें हमारी सरकार के लिए शर्मसार कर देती है।

बता दें कि इससे पहले नारायण सामी ने उप-राज्यपाल किरण बेदी को तानाशाह बताया था। किरण बेदी की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा था, ”वह एक तानाशाह की तरह काम कर रही हैं और जर्मन तानाशाह ऐडॉल्फ हिटलर की बहन लगती हैं। वह मंत्रिमंडल के हर फ़ैसले में बाधा बनकर खड़ी हो जाती हैं।”

पुडुचेरी के मुख्यमंत्री नारायण सामी किरण बेदी को तानाशाह कह देने तक पर ही नहीं  नहीं रुके बल्कि उन्होंने इससे एक क़दम आगे बढ़ते हुए कहा था, ”जब भी मुझे किरण बेदी की ओर से हमारे फैसलों को नामंज़ूर करने से जुड़ी फाइलें मिलती हैं तो मेरा ख़ून खौल उठता है और मैं झुँझला जाता हूँ।”

’15 मिनट में 100 करोड़ हिंदू को…’ ओवैसी ने उगला था जहर, कोर्ट का पुलिस को आदेश- दर्ज करो मामला

हैदराबाद की 16वीं अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने सैदाबाद पुलिस को जुलाई 2019 के दौरान करीमनगर में एक सार्वजनिक बैठक के दौरान घृणास्पद भाषण के लिए विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है।

शहर के एक वकील के करुणासागर ने 1 अगस्त को उक्त न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि चंद्रांगुट्टा के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने करीमनगर में एनएन गार्डन फंक्शन हॉल में 23 जुलाई को एक सार्वजनिक सभा ‘जलसा-ए-यादे फखर-ए-मिलात’ के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। इस याचिका में उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया था।

करुणासागर ने आरोप लगाया था कि उन्होंने इस सन्दर्भ में 26 जुलाई को सैदाबाद पुलिस में शिक़ायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस जाँच के लिए मामला दर्ज करने में विफल रही। इसके साथ ही उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि अकबरुद्दीन ओवैसी ने जानबूझकर धर्मों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के लिए भाषण दिया था।

इस याचिका की जाँच के बाद, कोर्ट ने सैदाबाद पुलिस को अकबरुद्दीन ओवैसी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने और 23 दिसंबर तक कोर्ट में रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। ख़बर के अनुसार, कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस आईपीसी 153(A), 153(B) और 506 के तहत मामला दर्ज करे। वहीं, मलकपेट एसीपी, एन वेंकट रमना ने कहा, “हमें अभी तक कोर्ट से आदेश नहीं मिले हैं। लेकिन हम इस मामले को देखेंगे और उसके अनुसार आगे बढ़ेंगे।”

दरअसल, AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ने एक जनसभा के दौरान विवादित बयान देते हुए कहा था, ”हम 25 करोड़ हैं और तुम (हिन्दू) 100 करोड़ हो, 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो, देख लेंगे किसमें कितना दम है।” इसके आगे उन्होंने कहा था, ”लोग उन्हीं को डराते हैं जो आसानी से डरते हैं। वह (RSS) क्यों हम से घृणा करते हैं। क्योंकि वह हमारा सामना 15 मिनट भी नहीं कर सकते हैं।” 

अपना बयान जारी रखते हुए उन्होंने कहा,

”मुस्लिमों को शेर बनना होगा ताकि कोई चायवाला उनके सामने खड़ा न हो। मैं अपने लोगों से कहता हूँ कि आप लोग इतने परेशान हैं, परेशान मत हो। नौजवानों मैं आपसे कहूँगा कि जो हम यहाँ करेंगे, उसके बदले में जन्‍नत या जहन्‍नूम मिलेगी। शहीद जन्‍नतों की जन्‍नत जाता है। तुम सिर्फ़ अल्‍लाह का नाम लो।”

चंद्रांगुट्टा के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी के इस विवादित बयान पर बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद (VHP) दोनों ने कड़ी आपत्ति दर्ज की थी। इसके बाद अकबरुद्दीन ओवैसी के ख़िलाफ़ पुलिस में मामला दर्ज करवाया गया था। 

BHU में विरोध जारी: मीडिया ने फैलाई झूठी खबर, प्रशासन ने नेतृत्व कर रहे छात्रों को हटने को कहा

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के संस्कृत विद्या धर्म-विज्ञान संकाय में फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर आज 16वें दिन भी छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। हालाँकि, लगातार प्रशासन छात्रों पर दबाव बना रहा है कि छात्र धरना ख़त्म कर दें लेकिन छात्र अपनी माँगों पर बने हुए हैं।

छात्रों ने कल प्रशासन को अपना माँग पत्र सौंपते हुए कई सवालों का विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब माँगा है। जिसे लेकर देर रात SVDV के संकाय प्रमुख, अन्य विभागाध्यक्षों और VC के बीच मीटिंग चली लेकिन किसी भी नतीजे पर नहीं पहुँचा गया। इस बीच खबर ये भी है SVDV के छात्रों पर दबाव बनाने के लिए विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शशिकांत मिश्रा, शुभम और कृष्णा को प्रशासन ने धरनास्थल से हटाने का प्रयास किया। इसके बावजूद छात्रों का प्रदर्शन जारी है।

आंदोलनरत SVDV के छात्रों का वाइसचांसलर से सवाल

  • इस नियुक्ति प्रक्रिया में विश्वविद्यालय ने यूजीसी के किस शार्ट लिस्टिंग प्रक्रिया को अपनाया है?
  • विश्वविद्यालय संविधान के अनुसार नियुक्ति प्रक्रिया सम्पन्न हुई है?
  • क्या बीएचयू एक्ट के 1904, 1096, 1915, 1955, 1966 व 1969 एक्ट को केंद्र में रखकर यह नियुक्ति की गई है?
  • संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के साहित्य विभाग में क्या संकाय के अन्य सभी विभागों के अनुरूप ही शार्ट लिस्टिंग हुई है?
  • क्या संकाय के सनातन धर्म के नियमों को ध्यान में रखकर शार्ट लिस्टिंग की गई है?

SVDV के छात्रों का माँग पत्र
SVDV के छात्रों का माँग पत्र

बीएचयू प्रशासन ने आंदोलनरत छात्रों की ओर से पूछे गए इन सवालों का दस दिन के अंदर लिखित जवाब देने का आश्‍वासन दिया है। लेकिन आज सुबह से ही मीडिया में धरना समाप्ति सहित कई फर्जी खबरें चलाई गई जिस पर छात्रों का आरोप है कि प्रशासन और मीडिया की मिलीभगत से ऐसी खबरें जानबूझकर उनका मनोबल गिराने के लिए चलाई जा रही हैं।

SVDV के छात्र विरोध करते हुए, जिसमे से टॉप लीडर गायब कर दिए गए हैं

बता दें कि पहली बार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय (SVDV) के साहित्य विभाग में एक मुस्लिम सहायक प्रोफेसर डॉ फिरोज खान की नियुक्ति 5 नवम्बर को हुई। संकाय के विद्यार्थियों को जैसे ही इसकी जानकारी हुई, इस नियुक्ति के खिलाफ विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था और तब से लगातार प्रदर्शन जारी है।

उल्लेखनीय है कि जब प्रोफेसर फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे थे तो देश भर में तमाम मीडिया समूहों ने इस न्यूज़ को ऐसे चलाया जैसे कि पूरे BHU में मुस्लिम टीचर की नियुक्ति का विरोध हो रहा है। जबकि ऐसा बिलकुल नहीं है। अलीगढ़ के तर्ज पर बेशक BHU के नाम में कुछ समानताएँ हो लेकिन वहाँ किसी का सिर्फ मुस्लिम होने की वजह से विरोध कभी नहीं हुआ। 

दरअसल यह विरोध एक गैर-हिन्दू का ‘धर्म-विज्ञान संकाय’ में नियुक्ति का विरोध था। बता दे कि संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के अंतर्गत दो विभाग आते हैं। पहला संस्कृत विद्या और दूसरा धर्म विज्ञान। इन दोनों में अलग-अलग तरीके की पढ़ाई होती है। संस्कृत विभाग में संस्कृत को भाषा की तरह पढ़ाया जाता है। वहीं, संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान विभाग में सनातन धर्म के रीति-रिवाजों, मंत्रों, श्लोकों, पूजा पाठ के तौर-तरीकों और पूजा पाठ के बारे में बताया जाता है।

छात्रों का कहना है कि कोई मुस्लिम व्यक्ति कैसे हिंदू धर्म के पूजा पाठ के बारे में बता सकता है, पढ़ा सकता है। छात्रों का विरोध इसी बात पर था। उनका कहना था कि संस्कृत को भाषा के तौर पर किसी भी जाति- धर्म के टीचर द्वारा पढ़ाए जाने पर उन्हें कोई ऐतराज नहीं है। छात्रों का कहना था कि अगर यह नियुक्ति विश्वविद्यालय के ही किसी अन्य संकाय में संस्कृत अध्यापक के रूप में होती तो यह विरोध नहीं होता। मगर अब छात्रों के विरोध के बाद विश्विद्यालय की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि फिरोज खान कर्मकांड नहीं, बल्कि संस्कृत पढ़ाएँगे। 

आपको बता दें कि अन्य मीडिया संस्थानों से परे ऑपइंडिया ने इस मामले पर शुरू से ही छात्रों के मूल पक्ष को रखा। इस पर ग्राउंड रिपोर्टिंग की गई। विरोध किस बात को लेकर है, इसको लेकर पाठकों को भ्रम में रखने के बजाय पूरे मामले की असलियत को समझाया गया।

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कॉन्ग्रेस ने टाँग अड़ाई हमने कर दिखाया, अयोध्या में बनेगा भव्य राम मंदिर: गृहमंत्री अमित शाह

झारखण्ड राज्य में अब विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अमित शाह ने आज लातेहर में की और अपनी इसी जनसभा के साथ राज्य में चुनाव प्रचार की शुरुआत कर दी है। झारखण्ड के लातेहर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह-मंत्री अमित शाह ने कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होने कहा कि अयोध्या में आसमान छूने वाला भव्य मंदिर बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम की कृपा से फैसला आ गया है, अब उसी स्थान पर भव्य राम मंदिर निर्माण का ताला खुल गया है।

शाह यहीं नहीं रुके, उन्होंने अपने भाषण में कॉन्ग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस पार्टी ने अपने स्वार्थ के लिए 70 साल तक अनुच्छेद 370 और 35A को लटकाए रखा। उन्होंने मोदी सरकार की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने कश्मीर समस्या का हल निकाला। अमित शाह ने अपनी जनसभा में झारखण्ड के आदिवासियों के लिए सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं का भी ज़िक्र किया। शाह बोले कि उनकी सरकार ने इन 5 सालों में आदिवासियों का गौरव बढ़ाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि केंद्र की मोदी सरकार आदिवासियों के विकास हेतु डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड में करीब 32 हज़ार करोड़ रूपए खर्च किए।

एक रिपोर्ट के मुताबिक अपने भाषण में उन्होंने नक्सलवाद पर भी निशाना साधा। शाह ने झारखण्ड की अपनी जनसभा में बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने आदिवासियों के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इसी कारण से कोने-कोने बिजली, सड़क, पीने का पानी और सिलेंडर पहुँच सका है।

अमित शाह ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री रहते हुए झारखण्ड को राज्य का रूप दिया था। पीएम मोदी इसे सँवारेंगे। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा की इस कर्मभूमि पर भाजपा ने 70 साल में पहली बार, 2018 में डिग्री कॉलेज की स्वीकृति दी।