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अल्लाह के नाम पर आतंक फैलाने के लिए कश्मीरियों को हथियार दे पाक फौज: हिज़बुल सरगना सलाहुद्दीन

आतंकी संगठन हिज़बुल मुजाहिद्दीन के सबसे बड़े सरगना सैयर सलाहुद्दीन ने भारत के ख़िलाफ़ ज़हर उगला है। सैयद सलाहुद्दीन ने जम्मू कश्मीर को लेकर भड़काऊ बयानबाजी की। हिज़बुल सरगना ने पाकिस्तान की फ़ौज से आग्रह किया कि जम्मू कश्मीर में लोगों को हथियार उपलब्ध कराए जाएँ ताकि वो भारत सरकार के ख़िलाफ़ लड़ाई कर सकें। पाकिस्तान अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद से ही बौखलाया हुआ है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक के बाद एक हुई बेइज्जती के कारण अब अपने मंसूबों को कामयाब बनाने के लिए आतंकियों का इस्तेमाल कर रहा है।

सैयद सलाहुद्दीन ने एक वीडियो रिलीज किया, जिसमें उसने उक्त बातें कही। उसने कहा कि भारत के ख़िलाफ़ उसकी जंग जारी रहेगी। सलाहुद्दीन ने कहा कि ये पाकिस्तानी फ़ौज का कर्तव्य है कि वो कश्मीरियों को हथियार उपलब्ध कराएँ, ताकि वे भारतीय सुरक्षा बलों के ख़िलाफ़ युद्ध कर सकें। उसने कहा कि अल्लाह के नाम पर आतंक फैलाने के लिए पाकिस्तान को कश्मीरियों की मदद करनी चाहिए। उसने दावा किया कि भारत सरकार कश्मीर में आम जनता को प्रताड़ित कर रही है।

बता दें कि पाकिस्तान भी सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऐसे ही बेढंगे दावे करता रहा है। जम्मू कश्मीर के कई विपक्षी नेता भी कमोबेश यही बात दोहराते रहे हैं कि राज्य में आम जनता के मूलभूत अधिकारों को छीन कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। सलाहुद्दीन ने जम्मू कश्मीर को अपनी मातृभूमि बताते हुए कहा कि भारत ने 72 साल से उस क्षेत्र पर कब्ज़ा कर रखा है। भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने सलाहुद्दीन के बयान को कोरी गप करार दिया। स्वामी ने कहा कि वो पब्लिसिटी और अटेंशन के लिए ऐसी बातें कर रहा है। उन्होंने सलाहुद्दीन को चुनौती दी कि वो एक बार लाल चौक पर खड़ा होकर देखे कि उसके साथ क्या होता है? स्वामी ने कहा कि सलाहुद्दीन के बयान को गंभीरता से लेने की ज़रूरत नहीं है।

सलाहुद्दीन ने कहा कि कश्मीरियों को ‘दासता’ से मुक्त कराने के लिए अब मजबूत क़दम उठाने का समय आ गया है। उसने कहा कि अगर इसमें कोई भी दिक्कत आती है तो जम्मू कश्मीर में 8 साल के बच्चों से लेकर 80 साल के बूढ़ों तक, सभी को हथियार थमाया जाना चाहिए ताकि वो भारत के ख़िलाफ़ जंग लड़ सकें। उसने कहा कि जब तक एक भी कश्मीरी जिन्दा है, उसकी जंग जारी रहेगी।

सैयद सलाहुद्दीन पहले एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखता था। वह अपने सभी भाई-बहनों में सातवें नंबर पर है। भारत-पाक विभाजन के समय वह मात्र 1 वर्ष का था। उसके अब्बा भारतीय डाक विभाग में कार्यरत थे। यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर से राजनीतिक विज्ञान की पढ़ाई करते समाय वह जमात-ए-इस्लामी से प्रेरित हुआ। इसके बाद प्रशासनिक सेवा में जाने के सपने देखने वला सलाहुद्दीन आतंक की राह पर चल निकला।

शिवसेना का हिंदुत्व ख़तरनाक नहीं, ठीक-ठाक है: कॉन्ग्रेस ने पुचकारा तो राउत ने कहा- 25 साल चलेगी सरकार

महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस के बेमेल गठबंधन की खिचड़ी पक रही है। बेमेल इसीलिए, क्योंकि शिवसेना की हिंदुत्ववादी विचारधारा का कॉन्ग्रेस और एनसीपी अब तक विरोध करती आई है। वहीं शिवसेना की भी अब तक की पूरी राजनीति कॉन्ग्रेस और फिर एनसीपी के विरोध पर भी केंद्रित रही है। ऐसे में गठबंधन से पहले एनसीपी यह पूरी तरह सुनिश्चित करना चाहती है कि शिवसेना अपनी हिंदुत्व वाले रुख में नरमी लाए और वीर सावरकर के समर्थन में कोई बयान न दे। इसीलिए एनसीपी ने ‘कॉमन मिनिमम प्रोग्राम’ का एजेंडा तय किया है। इसपर कॉन्ग्रेस की हामी आनी बाकी है।

उधर नए संसद सत्र में भी शिवसेना अब विपक्ष वाली पंक्ति में बैठेगी। अब तक राजग में सत्तापक्ष का हिस्स्सा रही शिवसेना के एकलौते केंद्रीय मंत्री रहे अरविन्द सावंत मोदी कैबिनेट से इस्तीफ़ा दे चुके हैं। वहीं कॉन्ग्रेस के सूत्रों ने ‘इंडिया टुडे’ को बताया है कि शिवसेना का हिंदुत्व उतना ख़तरनाक नहीं है और वो ठीक-ठाक हिंदुत्व है। साथ ही कॉन्ग्रेस ने यह भी कहा है कि शिवसेना की हिंदुत्व वाली विचारधारा संभावित गठबंधन सरकार की राह में रोड़े नहीं अटकाएगी। कॉन्ग्रेस ने साफ़ कर दिया है कि ये सरकार साझा एजेंडे पर चलेगी न कि विचारधारा पर।

कॉन्ग्रेस का मानना है कि जब से ‘युवा सेना’ के सुप्रीमो आदित्य ठाकरे की पार्टी में सक्रियता बढ़ी है, तभी से शिवसेना की विचारधारा में बदलाव आने शुरू हो गए थे। उधर राज्यपाल के साथ होने वाली कॉन्ग्रेस, शिवसेना और एनसीपी नेताओं की बैठक रद्द हो गई है। पहले कहा जा रहा था कि राज्यापाल ने मिलने के लिए अपॉइंटमेंट नहीं दिया था, इसीलिए ये मुलाक़ात नहीं हो सकी। अब कहा जा रहा है कई तीनों दलों के कई नेताओं की उपलब्धता न होने के कारण ये मुलाक़ात संभव नहीं हो सकी। नेताओं का कहना था कि ये मुलाक़ात सरकार गठन के लिए नहीं होने वाले थी। वो लोग किसानों के मुद्दे को लेकर राज्यापाल से मिलने वाले थे।

संजय राउत ने अति-आत्मविश्वास का प्रदर्शन करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार न सिर्फ़ अगले 5 साल, बल्कि 50 सालों तक चलेगी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अगर इन तीनों दलों की सरकार बन भी जाती है तो वो 6 महीने से ज्यादा नहीं चल पाएगी। उनके इस बयान की आलोचना करते हुए शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ ने लिखा कि इस गठबंधन से कई लोगों को पेट-दर्द की शिकायत हो रही है।

सबरीमाला मंदिर में घुस रही थीं 50 से कम उम्र की 10 महिलाएँ: केरल पुलिस ने भगाया

सबरीमाला मंदिर में 50 से कम उम्र की महिलाओं के प्रवेश को लेकर राजनीति जारी है। केरल के भाजपा व कॉन्ग्रेस यूनिट ने वामपंथी राज्य सरकार को चेताया है कि श्रद्धालुओं की भावनाओं का ख्याल रखा जाए। वहीं वामपंथी सरकार ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा और उसे लागू किया जाएगा। बाद में उसी केरल सरकार ने हाथ खड़े कर दिए। केरल की सरकार ने कहा कि वो सबरीमाला मंदिर का दर्शन करने आने वाले 50 से कम उम्र की महिलाओं को सुरक्षा मुहैया कराने में असमर्थ है। इसके बाद कथित महिला एक्टिविस्ट तृप्ति देसाई ने कहा कि सुरक्षा मिले या नहीं, वो सबरीमाला जाएँगी।

उधर केरल पुलिस ने 10 ऐसी महिलाओं को मंदिर से लौटा दिया, जिनकी उम्र 50 वर्ष से कम थी और वो मंदिर के नियमों का उल्लंघन करते हुए अंदर प्रवेश करना चाहती थीं। शनिवार (नवंबर 16, 2019) को वार्षिक मंडल पूजा पर्व के लिए सबरीमाला मंदिर को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोला गया। इसी क्रम में आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से 10 ऐसी महिलाएँ भी पहुँची थीं, जिनकी उम्र 50 वर्ष से कम थी। पुलिस ने उन महिलाओं को सबरीमाला मंदिर की परंपरा के बारे में बताया और उलटे पाँव वापस कर दिया।

नीलक्कल में एक कैम्प बनाया गया है, जहाँ श्रद्धालुओं की चेकिंग की जा रही है। वहाँ पहुँचने वाली सभी गाड़ियों की भी तलाशी ली जा रही है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला पर उनके निर्णय को लेकर आईं सभी समीक्षा याचिकाओं को 7 सदस्यीय खंडपीठ के पास भेज दिया। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में जाने की इजाजत दे दी थी। इसके बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर की परंपरा की रक्षा के लिए भारी विरोध प्रदर्शन किया था।

हालाँकि, पुलिस ने 50 से कम उम्र की महिलाओं को मंदिर की परंपरा का हवाला देकर वापस भेजने की बात से इनकार किया है। ‘द न्यूज़ मिनट’ से बात करते हुए पुलिस ने बताया कि उन महिलाओं को मंदिर की परंपरा के बारे में पता नहीं था और उन्हें जैसे ही इसका भान हुआ, वो ख़ुद वापस चली गईं। पुलिस ने बताया कि उन महिलाओं को समझाने की कोई ज़रूरत ही नहीं पड़ी।

रातों-रात अवैध मस्जिद बनाने का प्रयास: निर्माण रोकने पर मचा बवाल, पुलिस बल तैनात

उत्तर प्रदेश के संभल ज़िले में कथित तौर पर अवैध मस्जिद निर्माण को रोकने पर इलाक़े में भारी तनाव की स्थित पैदा हो गई है। किसी हिंसात्मक गतिविधि को अंजाम न दिया जा सके, इसके लिए पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। दरअसल, सरैतारीन इलाक़े में बुधवार (13 नवंबर) की रात को मस्जिद निर्माण का काम उस वक़्त रोकना पड़ा, जब कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति जताई। 

ख़बर के अनुसार, इमारत की छत का काम पहले ही पूरा कर लिया गया था। लेकिन, पुलिस ने इस इमारत में नमाज़ अता करने से लोगों को रोकने के लिए पूरे परिसर की घेराबंदी कर दी। 

इस मामले पर ज़िला मैजिस्ट्रेट अविनाश कृष्ण सिंह ने जानकारी देते हुए बताया इलाक़े में किसी भी तरह की तनावपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए पुलिस की टीम को तैनात कर दिया गया है। ख़बरों के मुताबिक़, सरैतारीन में कुछ महीने पहले एक मदरसे के अंदर कुछ लोगों ने नमाज़ अता करना शुरू कर दिया था। बाद में उसी मदरसे में मस्जिद के निर्माण का काम भी शुरू हो गया। इसके आसपास रहने वाले लोगों ने इस अवैध मस्जिद के निर्माण पर आपत्ति जताई।

पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मस्जिद के निर्माण का काम रोका गया। इसके लिए उप-विभागीय मजिस्ट्रेट ने आदेश जारी किया था कि आगे से कोई भी निर्माण कार्य नहीं हो सकता। मजिस्ट्रेट के आदेश के बावजूद वहाँ बुधवार को मस्जिद के निर्माण का काम फिर से शुरू हो गया। आसपास के लोगों ने इसकी सूचना जब पुलिस को दी तो हयात नगर पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस अफ़सर (SHO) रवीन्द्र कुमार मौक़े पर पहुँचे और परिसर में ताला लगा दिया।

इसके बाद आसपास को कुछ लोग (मुस्लिम) पास की मस्जिद में गए और वहाँ लाउडस्पीकर से ऐलान किया कि पुलिस ने उन्हें नमाज़ अता नहीं करने दी और नई मस्जिद से पवित्र पुस्तकों को बाहर फेंक दिया। तनावपूर्ण स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कुछ वरिष्ठ अधिकारी और ज़िला पुलिस के आला अधिकारी घटना-स्थल पर तुरंत पहुँचे। 

आपसी विवाद की स्थिति को भाँपते हुए घटना-स्थल पर रैपिड एक्शन फ़ोर्स को तैनात कर दिया गया। इसके अलावा, वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले पर अधिक जानकारी जुटाने के लिए वहाँ मौजूद लोगों से भी पूछताछ की। फ़िलहाल, स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और मस्जिद के निर्माण कार्य को पूरी तरह से रोक दिया गया है।

छगनलाल के बाथरूम में ही नहाने पर अड़ी नवयुवती, कहा, ‘पितृसत्ता का नाश हो, सबरीमाला में भी जाएँगे, और यहीं नहाएँगे’

छगनलाल नहाने ही घुसे थे कि पड़ोस की युवती ने दरवाजा भड़भड़ाया। छगनलाल गिड़गिड़ाए, “देविजी, हम स्नान कर रहे हैं, आप भीतर नहीं आ सकती।”
देवीजी नाराज़ हुई, “हमारे घर का गीज़र ख़राब है, हम यहाँ क्यों नही नहा सकते?”
छगनलाल बस यही कह पाए, “क्योंकि हम नहा रहे है, अप्रस्तुतीय अवस्था मे है?”

युवती चीख़ी, “द्वार खोलिए, अन्यथा तोड़ना पड़ेगा। डाऊन विद पेट्रियारकी। हम इस पितृसत्तात्मक मनुवादी व्यवस्था की निंदा करते हैं। हमें जल्दी है, आप अपना मग्गा ले कर कोने मे बैठ जाएँ। जब एक महिला अंतरिक्ष में जा सकती है, एवरेस्ट पर जा सकती है तो आपके स्नानागार में क्यों नहीं आ सकती है।”

छगनलाल बोले, “देखिये आप फेमनिष्ठ महिला है, आई मीन फेमिनिस्ट महिला हैं। आपको समझना चाहिए प्रश्न आपके लिंग का नहीं है, मेरे इस स्नानागार पर स्वामित्व का भी नहीं है, प्रश्न मेरी अवस्था का है। मैं उस अवस्था में नहीं हूँ कि महिला के सम्मुख प्रस्तुत हों।”

देवीजी और उत्तेजित हुईं, बोली, “देखो छगनलाल, तुम क्या स्वामी अयप्पा से भी बड़े हो। वे तो अवतरित हुए थे, तुम तो सिर्फ टपके हो। वे वन से शेर पर सवार हो कर लौटे थे, तुम्हारे तो किचन में बिल्ली घुस आये तो तुम उसके दूध पी के लौट जाने तक लौट जाने तक वहाँ तक नहीं घुसते। वहाँ भी हमें उनकी ब्रह्मचारी अवस्था का तर्क दे कर रोका जा रहा था। हमने उनको नहीं छोड़ा तो तुम क्या वस्तु हो, ब्लडी होमो सेपियन्स।”

छगनलाल गिड़गिड़ाए, “परन्तु महिला जज ने तो इसके विरोध में निर्णय दिया था।”

युवती का क्रोध चरम पर था, “महिलाओं को भला क्या पता इस सब महिला सम्बन्धी विषयों पर। वोक समझते हो, वोक? वही वो महान पुरुष हैं जो महिलाओं का दृष्टिकोण समझते हैं।”

छगनलाल ने यह शब्द पहली बार सुना था, बोले, “देवी, यह वोक क्या होता है।”

देवीजी ने हताश हृदय माथे पे हाथ मारा और बोलीं, “हे मूढ़ छगनलाल, वोक मानव वह होता है जो परिष्कृत भाषा में महिला मुक्ति सम्बन्धी नारे लगा सके, उनके साथ लम्बा कुरता धारण कर के प्रदर्शन में जा सके, सिगरेट के धुएँ में स्वयं को खो कर प्रदूषण पर चिंता कर सके, मानव संरचना के सम्बन्ध में चित्र भेज कर षोडशी कन्यायों को जीव-विज्ञान का ज्ञान दे सके और पकड़े जाने पर अपनी प्रखर पंडिता महिला मित्र के समक्ष बहुत क्षमा माँग कर उसका आशीर्वाद प्राप्त करें और पुनः वोकावस्था प्राप्त कर सके। तुम्हारे जैसे, सब कन्याओं को दीदी कहने वाले, जोंक इस वोक महात्मय को न जान सकेंगे। आप समय नष्ट न करें, धृष्ट पुरुष, और द्वार खोलें।” 

“आज सुना है कन्फ़ेशन के बहाने महिलाओं का शोषण करने वाले पादरियों के विरोध मे प्रदर्शन है। वहाँ तो नहीं जाना है?” छगनलाल ने डरते डरते पूछा।

देवीजी बोलीं -“वो सब मधु किश्वर जी जैसी बहन जी लोगों का शग़ल है। वो सब शेफाली वैद्य जैसी संघी महिलाओं का काम है। कोई भविष्य नहीं है उसमें। ऐसे बिना स्कोप के शगल पालने से बेहतर मैं इंजीनियरिंग न कर लेती।जहाँ कैमरा न हो, जिस विषय पर लेखन का सम्पादकीय बनने की कोई संभावना न हो, उस दिशा में हम नहीं जाते। चर्च के भीतर शारीरिक उत्पीड़न पर प्रश्न उठाना धर्मनिरपेक्षता के विरुद्ध है। आप चर्च के भीतर की महिलाओं की बात करते हैं, हम तो पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उन महिलाओं के चक्कर में नहीं पड़ते जो अपनी साइड की न हो, चाहे वो लतियाई जाएँ या धकियाई जाएँ, कि पत्रकारों के प्रति हमारे स्नेह सर्वविदित है। जब वोक व्यक्ति परिस्थितिवश ऐसे कार्य करता है तो उसे व्यक्तिगत दोष नहीं सामाजिक पतन माना जाता है जिसके सम्मुख मनुष्य असहाय है। बड़े लेखक इसे स्वीट डिकेडेन्स कहते हैं। हमारी संवेदना आप संघियों की भाँति दिशाहीन नहीं है, एवं हमारी कृपा का प्रसाद पात्रता के अनुसार पड़ता है।”

छगनलाल फिर गिड़गिड़ाए, “देवी जी, आप मेरे स्नानागार को चर्च मान कर कुछ समय छोड़ दें।  या इसे किसी प्राचीन बाबा की दरगाह मान लें। मेरा स्नान समाप्त होते ही आप इसे पुनः हिन्दू पूजनस्थल मान कर पददलित करने को स्वतंत्र होंगी। दस मिनट की बात है। “

युवती खीझ गई, “आप सवाल जवाब करते रहेंगे? धर्मनिरपेक्षता की आड़ में आप अपने आतंकवादी हिंदुत्व की रक्षा का प्रयास न करें। आप अधिक सबरीमाला बनने के प्रयास न करें, अन्यथा हमारे कम्युनिस्ट कोप से आपकी रक्षा कोई न कर सकेगा। कोई हमारे अतिक्रमण को पार्किंग विवाद बताएगा, कोई इस पर महिला सशक्तिकरण के गीत लिखेगा और आप अपनी नग्नावस्था पर लज्जित वस्त्रहीन खड़े रह जाएँगे। जब आप मेरे पड़ोसी हैं, आप मेरे साथ ड्राइंग रूम में चाय पी सकते हैं, तो मैं आपके बाथरूम में आपकी उपस्थिति में क्यों नहीं आ सकती। अवस्था भले ही भिन्न हो, आप हैं तो दोनों जगह ही छगनलाल। हम अंदर आ रहे है, आपकी अवस्था से आपका मतलब। हमें भारत के किसी भी कोने मे प्रवेश करने का संवैधानिक अधिकार है, आप का स्नानागार भी भारत का हिस्सा है। आप अपना शर्मनाक तौलिया पहन कर महिला सशक्तिकरण के मार्ग मे खड़े हैं। आपको लज्जा आनी चाहिए।”

छगनलाल जिज्ञासु बालक थे और यह भी सोच रहे थे कि संभवतः यह द्वार के आर-पार शास्त्रार्थ उनके सतीत्व की रक्षा कर सके। सो उन्होंने आगे, देवीजी को व्यस्त रखने के लिए एक और प्रश्न दागा – “परन्तु सबरीमाला में महिला के प्रवेश पर तो प्रतिबन्ध नहीं है, सो वह महिला मुद्दा कैसे हो गया। वैसे भी पांच वीरांगनाओं में से एक बची हैं जो अपनी प्रवेश की ज़िद पर बनी हुई है और वे भी दिल्ली की है। आप तो कल कह रही थी कि रजस्वला स्त्री राष्ट्रगान के लिए खड़े होने में असमर्थ होती है, तो ऐसा दुर्गम मार्ग यूँ भी कैसी चढ़ सकेगी? और जहाँ तक विज्ञान की बात है, आप खुले विचारों के तर्क पर तमाम बंद आस्थाओं का साथ देती है। विज्ञान तो वहाँ भी कहाँ होता है?”

देवीजी अब अपनी हताशा की अंतिम सीमा पर थी, “देखिये, अब हम आपकी अधिक शंकाओं का समाधान नहीं कर सकते। जहाँ तक दुर्गम मार्ग का प्रश्न है, तो हमारी अगली माँग सबरीमाला को समुद्रतट पर बियर बार के निकट लाना है। हम सब वोक पुरुषों के प्रति इस हिंदूवादी भेदभाव का विरोध करेंगे। क्यों एक शराबी व्यक्ति मदिरापान करते हुए भगवान् का दर्शन नहीं कर सकता? क्या एक पियक्कड़ व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है? आपको कैसे पता है कि भगवन पियक्कड़ों को दर्शन नहीं देना चाहते।  यह सब हमारे अगले वर्ष के प्रदर्शन केलिन्डर में है। अभी तो यह अंगड़ाई है, आगे बहुत लड़ाई है। अब बिना कुछ बोले बाहर आएँ, वरना आपकी शंका का समाधान तो नहीं होगा, हम धरना दे कर बैठ गए तो आपकी लघु-दीर्घ सब शंकाएँ भारतीय रेलवे के सौजन्य से ही होंगी।”

छगनलाल ने डरते डरते पूछा- “किंतु आपको जाना कहाँ है?” 

“हमारी पुरानी फ्रेंड की नई पप्पी का नेलपालिश सेरेमनी है। अब आप हमें रूढ़िवादी पुरूषों की भाँति जज मत करने लगिए।” 

यह सुनते ही छगनलाल एक आम भारतीय हिंदू की भाँति, कोने में तौलिया लपेटे अपनी बची-खुची लज्जा को लपेट कर, शर्मिंदा से खड़े हो गए।

शिवसेना, NCP और कॉन्ग्रेस नेताओं की राज्यपाल के साथ होने वाली बैठक टली: ‘सरकार बनाने में अभी वक़्त लगेगा’

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के साथ शनिवार (नवंबर 16, 2019) को शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के प्रतिनिधिमंडल की बैठक अगले नोटिस तक के लिए टल गई है। यह मीटिंग शाम 4.30 बजे होने वाली थी। हालाँकि, इसके टलने की वजह का फिलहाल पता नहीं चल पाया है।

इससे पहले मीटिंग को लेकर एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा था कि किसानों की समस्याएँ और प्रशासन संबंधित मुद्दे को लेकर राज्यपाल से मुलाकात करने वाले थे। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य को एक स्थाई और स्थिर प्रशासन प्रदान करना राज्यपाल की जिम्मेदारी है। राज्य में प्रशासन पूरी तरह से ठप हो गया है और सरकार के गठन को लेकर अनिश्चितता के कारण राज्य के लोग खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि राज्यपाल के साथ होने वाली बैठक में शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस नेताओं का तीन-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल राज्य को एक मजबूत प्रशासन प्रदान करने के तरीकों पर चर्चा करने वाला था, जिसे फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। इससे पहले एनसीपी ने दावा किया था कि शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी का गठबंधन महाराष्ट्र में सफलतापूर्वक 5 साल का कार्यकाल पूरा करेगा।

हालाँकि, भाजपा ने भी महाराष्ट्र में सरकार बनाने का दावा किया है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने कहा है कि बीजेपी के पास 119 विधायकों का समर्थन है और राज्य में बीजेपी ही अगली सरकार बनाएगी। वहीं बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस-शिवसेना-एनसीपी के बीच मसौदा भी तैयार हो गया है। सत्ता के समझौते के कथित मसौदे के मुताबिक शिव सेना को मुख्यमंत्री की कुर्सी और 16 मंत्री पद मिलेंगे, वहीं एनसीपी को 14 और कॉन्ग्रेस को 12 विधायकों को मंत्री बनवाने का मौका मिलेगा। 

डील पक्की होने के बावजूद इनके बीच पशोपेश जारी है। एक तरफ जहाँ बाला साहेब ठाकरे की पुण्यतिथि (17 नवंबर) को सरकार बनाने की बात सामने आ रही है वहीं एनसीपी प्रमुख शरद पवार का कहना है कि सरकार बनने में अभी वक्त लगेगा। इससे साफ झलक रहा है कि अभी भी इनके बीच विचारों की सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में राज्य की स्थिति पर कुछ भी कहना संभव नहीं होगा।

‘मेरे राज्य का मुख्यमंत्री 10वीं कक्षा के पेपर लीक मामले में पकड़ा गया था’

तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के महासचिव नारा लोकेश ने शुक्रवार (15 नवंबर) को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी को लेकर एक विवादास्पद टिप्पणी की। लोकेश ने दावा किया कि 10वीं कक्षा की परीक्षा के दौरान जगनमोहन पेपर लीक करने के मामले में पकड़े गए थे। यह बात उन्होंने सभी सरकारी स्कूलों को अंग्रेज़ी माध्यम में बदलने के जगन सरकार के फ़ैसले के सवाल पर कही।

ख़बर के अनुसार, TDP महासचिव ने कहा, “हम पहले भी कह चुके हैं कि अभिभावकों को यह विकल्प दिया जाना चाहिए कि वे अपने बच्चों को अंग्रेज़ी माध्यम में पढ़ाना चाहते हैं या नहीं।” इसके आगे उन्होंने कहा,

“क्या आप जानते हैं जगनमोहन ने क्या पढ़ाई की है? वे कहते हैं कि उन्होंने बीए या बीकॉम जैसी कुछ पढ़ाई की है। क्या आप जानते हैं कि वे पास हुए थे या नहीं? वे 10वीं कक्षा में पेपर लीक मामले में पकड़े गए थे।”

दरअसल, आंध्र प्रदेश की जगन सरकार ने अगले सत्र (2020-2021) से कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी सरकारी स्कूलों को अंग्रेज़ी माध्यम में बदलने का फ़ैसला किया है। इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने 13 नवंबर को IAS अधिकारी वेत्री सेल्वी को स्पेशल ऑफ़िसर नियुक्त किया है। फ़िलहाल, लगभग 34% सरकारी स्कूल अंग्रेज़ी माध्यम में ही चल रहे हैं।

इसका मतलब यह हुआ कि अगले शैक्षणिक सत्र से, सरकारी स्कूलों में कक्षा-6 तक के छात्रों को केवल अंग्रेज़ी में पढ़ाया जाएगा। इसके बाद, छठी कक्षा से ऊपर के ग्रेड भी अंग्रेज़ी संस्थानों में परिवर्तित हो जाएँगे। साथ ही इस परियोजना को अमल में लाने के लिए, राज्य सरकार ने सेल्वी को एक विशेष अधिकारी के रूप में नियुक्त करने का निर्णय लिया है।

वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि सभी स्कूलों में शिक्षा के वर्तमान माध्यम पर अनिवार्य रूप से इस मामले में सरकार के आदेशों के अनुसार स्कूली शिक्षा के कमिश्नर को तेलुगू या उर्दू को अनिवार्य विषय बनाने के लिए उचित प्रयास करने चाहिए।

हाल ही में, जगनमोहन रेड्डी के बंगले पर 73 लाख रुपए की खिड़कियाँ-दरवाज़े लगने की ख़बर चर्चा का विषय बनी हुई थी। बंगले में लगने जा रहे महँगे और हाईटेक सिक्योरिटी खिड़कियाँ-दरवाज़े के ख़र्च के लिए राज्य सरकार से मंज़ूरी भी मिल गई थी। इस मंज़ूरी पर पूर्व मुख्यमंत्री और तेलुगू देशम पार्टी (TDP) के एन चंद्रबाबू नायडू ने सवाल खड़े किए थे।

जानकारी के मुताबिक़, जगनमोहन के मई में चुनाव जीतने और फिर सत्ता में आने के बाद उनके गुंटूर के टाडेपल्ली गाँव में घर तक के लिए क़रीब 5 करोड़ रुपए की लागत से सड़क बनवाई गई थी। ये भी राज्य सरकार के आदेश से हुआ था। साथ ही आलीशान घर में बिजली के काम में करीब 3.6 करोड़ रुपए का ख़र्च आया था। इसके अलावा, घर के परिसर में एक हेलीपैड भी बनवाया गया। घर में हेलीपैड और दूसरे सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं में 1.89 करोड़ रुपए ख़र्च हुए।

‘मैं अली को जानती तो नहीं, लेकिन उसने कमलेश तिवारी की हत्या का जश्न मनाया… इसलिए उसे रिलीज करो’

ट्विटर पर ज़हर उगलने के लिए कुख्यात संजुक्ता बासु ने कथित पत्रकार अली सोहराब को रिलीज करने की माँग की है। संजुक्ता ने अली सोहराब को छोड़ने की माँग बिना ये जाने कर दी कि वो कौन है और क्या करता है? संयुक्ता ने ट्विटर पर ‘रिलीज अली सोहराब’ ट्रेंड को समर्थन देते हुए पूछा कि अली कौन है और उसके साथ क्या हुआ है? इसका मतलब ये है कि संजुक्ता ने बिना उसकी पहचान जाने और बिना मामले को समझे ही ट्वीट कर दिया क्योंकि उसके गैंग विशेष के लोग ऐसे ट्वीट्स कर रहे थे।

अली सोहराब ने कमलेश तिवारी की हत्या का मनाया था जश्न

वामपंथियों ने अंधविरोध में अब सही-ग़लत देखना छोड़ दिया है। अब वो मामले को समझना तो दूर, बिना उसे जाने ही उसपर अपनी राय व्यक्त करते हैं। संजुक्ता का ये ट्वीट उसका ही उदाहरण है। वो इस ट्वीट में न्यूज़ लिंक भी माँग रही हैं कि अली सोहराब कौन है और उसके साथ क्या हुआ है, कोई इस बात की जानकारी दे। लेकिन जानकारी के अभाव में ही उन्होंने अली सोहराब को छोड़ने की माँग कर दी। बता दें कि अली सोहराब ‘काकावाणी’ नाम से ट्विटर हैंडल चलाता है और ख़ुद को ‘डरा हुआ पत्रकार’ बताता है।

एक व्यक्ति ने संजुक्ता को अली सोहराब के बारे में बताते हुए कहा कि वो एक ‘जिहादी काका’ है, जो हिन्दुओं के ख़िलाफ़ ज़हर उगल कर यूपी का ओवैसी बनना चाहता है। अली सोहराब को दिल्ली पुलिस और यूपी पुलिस की संयुक्त ऑपरेशन के दौरान गिरफ़्तार किया गया है। उसपर आईपीसी की धारा 295 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए दुर्भावना से ग्रसित होकर और जानबूझ कर किया गया कृत्य) और 66, 67 आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

हिन्दुओं के प्रति घृणित रुख रखने वाले अली सोहराब ने कमलेश तिवारी की हत्या के बाद जश्न मनाया था। उसने उनकी हत्या के बाद ट्विटर पर दीवाली की बधाई दी थी। अपने इस कृत्य से उसने हिन्दुओं को चिढ़ाने का प्रयास किया था। वह रोहित सरदाना की नाबालिग बेटी को भी भला-बुरा बोल चुका है। अली सोहराब के ख़िलाफ़ यूपी पुलिस ने अक्टूबर 2019 में ही मामला दर्ज कर लिया था।

‘राम मंदिर बनने से पहले तुमको भी कमलेश तिवारी के पास पहुँचा देंगे, जितनी सुरक्षा बढ़ानी है, बढ़ा लो’

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व विधायक ब्रजेश मिश्र सौरभ को नाइजीरिया से फोन कर जान से मारने की धमकी दी गई है। गुरुवार (नवंबर 14, 2019) की शाम तकरीबन 6 बजे उनके फोन पर आई काल में उन्हें गालियाँ देने के साथ ही हत्या करने की धमकी दी गई। धमकी देने वालों ने कहा कि वो उन्हें भी हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी के पास पहुँचा देंगे। पूर्व विधायक ने लखनऊ महानगर थाने में अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। उन्होंने पुलिस को ऑडियो भी उपलब्ध कराए हैं।

बता दें कि ब्रजेश मिश्र के मोबाइल नंबर पर 23481023316 से कॉल आई थी। कॉल करने वाला व्यक्ति हिंदी और उर्दू में जान से मारने की धमकी दे रहा था। धमकी देने वाले ने बीजेपी नेता से कहा, “कमलेश तिवारी आपका बड़ी बेसब्री से आपका इंतजार कर रहे हैं। अगर आप अपनी गतिविधियों से बाज नहीं आते हैं तो राम मंदिर बनने से पहले तुमको भी कमलेश तिवारी के पास भेज देंगे। बढ़ा लो जितनी भी सुरक्षा बढ़ानी हो। साथ में जो सुरक्षा कर्मी है, वह भी कुछ नहीं कर पाएँगे।” 

नाइजीरिया के नंबर से कुछ दिन पहले भी किसी ने फोन किया था। उस समय कॉल करने वाले व्यक्ति ने भी जान से मारने की धमकी दी थी। ब्रजेश मिश्र प्रखर राष्ट्रवादी और कट्टर हिंदूवादी छवि वाले नेता माने जाते हैं। हाल ही में इन्होंने एक कार्यकर्ता की हत्या को लेकर भीड़ को संबोधित करते हुए समुदाय विशेष अल्पसंख्यकों पर हमला किया था। जिसके बाद से ही इनके पास धमकी भरे फोन आने शुरू हो गए थे। 

पूर्व विधायक ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर केंद्रीय सुरक्षा की माँग की है। उन्होंने बताया कि तीन माह पूर्व सुरक्षा हटने के बाद अपराधियों के निशाने पर आ गए हैं। पत्र में उन्होंने कहा है कि उन्हें पहले केंद्र से एक्स श्रेणी की सुरक्षा मिली थी, जिसे तीन महीने पहले हटा लिया गया है।

इसके मज़े लो: JNU में महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी, गूँजा ‘हिन्दी मीडिया मुर्दाबाद’ का नारा

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) लंबे समय से देश-विरोधी नारेबाजी आदि के लिए, नकारात्मक बातों के लिए ही चर्चा में रहती है। यहाँ छात्रों के ज़रिए ऐसे मुद्दों को हवा देने का काम किया जाता है जिनका उद्देश्य केवल अराजकता फैलाना भर रहता है। अपने एक और कृत्य के ज़रिए JNU ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आख़िर उसकी जो वामपंथी वाली विचारधारा वाली पहचान बनी है वो कितनी सही है।

दरअसल, ज़ी न्यूज़ चैनल की एक महिला पत्रकार किसी मुद्दे पर जानकारी जुटाने के लिए विश्वविद्यालय के परिसर में पहुँची। इस दौरान उनके द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देने की बजाय वहाँ मौजूद छात्र-छात्राओं ने उनके साथ न सिर्फ़ अभद्रतापूर्ण व्यवहार किया बल्कि मारपीट भी की। महिला पत्रकार बार-बार स्टूडेंट्स से उनके मसले के बारे में पूछती रही, लेकिन स्टूडेंट्स ने उनकी एक नहीं सुनी और उनके साथ बदतमीज़ी करते रहे।

जिस परिसर में महिला पत्रकार कुछ स्टूडेंट्स से सवाल करती नज़र आ रही है वहाँ मौजूद छात्रों के झुंड में से कुछ ने यह कहकर फ़ब्तियाँ कसी कि ‘इन्हें घेरो मत, मजा लो’। इतना सुनने के बाद जब महिला पत्रकार ने उन शब्दों पर आपत्ति जताते हुए सवाल किया तो उनमें से एक छात्र ने कहा, “यहाँ सब आपका मज़ा ले रहे हैं।”

महिला पत्रकार ने जब पूछा कि आप लोग यहाँ पढ़ाई करने आते हैं या मज़ा लेने आते हैं?

पत्रकार के इस सवाल पर स्टूडेंट्स के झुंड ने एक साथ ‘हिन्दी मीडिया मुर्दाबाद’ के नारे लगाए और मीडियाकर्मियों को कैमरे बंद करने के लिए कहा। वहीं, मीडियकर्मियों ने उनसे आग्रह किया कि वो उन्हें अपना काम करने दें। लेकिन, हमलावर स्टूडेंट्स ने उनकी एक नहीं सुनी और उन्हें वहाँ से चले जाने का दबाव बनाया। बता दें कि इस दौरान हमलावर हुए स्टूडेंट्स और मीडियाकर्मियों के बीच हाथापाई भी हो गई। 

इसके पहले, JNU के छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन पर फीस बढ़ाने का आरोप लगा कर विरोध प्रदर्शन भी किया था। इस दौरान छात्रों ने न सिर्फ़ पुलिस के साथ झड़प की, बल्कि महिला प्रोफेसर के साथ भी बदतमीजी की। महिला प्रोफेसर के कपड़े फाड़ने की कोशिश की गई। प्रदर्शनकारी छात्र जेएनयूएसयू के सदस्य और समर्थक हैं, जहाँ वामपंथी छात्र दलों का बोलबाला है। एबीवीपी ने पहले तो छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को समर्थन देने का ऐलान किया था, लेकिन आंदोलन उग्र होने के बाद आरोप लगाया कि इसे ग़लत दिशा में भटकाया जा रहा है और समर्थन वापस ले लिया।

हाल ही में, JNU में नई स्थापित हुई स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा को बदरंग करते हुए उसके पेडेस्टल पर माओवंशियों ने अपशब्द लिखे गए थे। “भगवा जलेगा”, “Fu&^ BJP” आदि को लाल रंग के पेंट से लिखकर पेडेस्टल को कुरूप बना दिया था। इसकी तस्वीर वैज्ञानिक, लेखक और JNU में मॉलिक्यूलर मेडिसिन के प्रोफ़ेसर आनंद रंगनाथन ने ट्विटर पर शेयर की गई।

रंगनाथन ने जो तस्वीर शेयर की है, उस प्रतिमा के बारे में उन्होंने बताया कि इसका तो अनावरण भी अभी तक नहीं हुआ था। उसके पहले ही अर्बन नक्सलियों ने इसे अपनी अंधी नफ़रत का शिकार बना दिया।