Home Blog Page 5339

अशोक सिंघल को भारत रत्न दो, तुरंत करो घोषणा: स्वामी की माँग

भारतीय जनता पार्टी के नेता और राज्य सभा के सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंघल को भारत रत्न दिए जाने की माँग की है। साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री ने इसके लिए तुरंत घोषणा की भी माँग की है। उनकी यह माँग राम जन्मभूमि आंदोलन की दशकों की माँग पर आज सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृति की मुहर के आलोक में आई है।

https://platform.twitter.com/widgets.js

गौरतलब है कि हार्वर्ड से पीएचडी अर्थशास्त्री सुब्रमण्यम स्वामी खुद भी आज अंततः सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुलझाए गए राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद विवाद के पक्षकारों में से एक हैं। उन्होंने एक याचिका दायर कर अपने आस्था के आधार पर जन्मभूमि स्थल पर बनाने के मूलभूत संवैधानिक अधिकार को हिन्दू-मुस्लिम दोनों पक्षों के सम्पत्ति अधिकार से बड़ा बताया था। हालाँकि उनकी खुद की याचिका तो अदालत ने अंततः एक दूसरी बेंच के पास भेज दी, लेकिन इसके बाद इस मामले की प्रगति में अभूतपूर्व तेज़ी आई थी। 

इस बारे में स्वामी हमेशा दावा करते रहे हैं कि उन्हें यह मामला सुलझवाने की ज़िम्मेदारी जन्मभूमि आंदोलन के आर्किटेक्ट माने जाने वाले सिंघल ने ही अपने अंतिम दिनों में सौंपी थी। बकौल स्वामी, सिंघल ने अपनी मृत्यु आसन्न देख उनसे वादा लिया था कि वे इस मामले का हल निकलवा कर राम मंदिर बनवाने का प्रयास करेंगे, जिसके बाद स्वामी ने उक्त याचिका डाली। 

सिंघल के योगदान को आज फैसला आने के बाद स्वामी ही नहीं, कई अन्य भाजपा और हिंदूवादी संगठनों के नेताओं ने याद किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने सिंघल की रामशिला पूजन की फोटो अपने गुरु के गुरु योगी दिग्विजयनाथ के साथ ट्वीट की। संघ के विचारक केएन गोविंदाचार्य ने भी भाजपा के पितृ-पुरुष लाल कृष्ण आडवाणी के साथ सिंघल के योगदान को इस आंदोलन और इस क्षण के लिए सबसे अधिक श्रेय दिया। 

2015 में अपनी मृत्यु को प्राप्त होने वाले सिंघल 1942 में संघ प्रचारक से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने के बाद विभिन्न संघ परिवार के पदों से होते हुए 1981 में वीएचपी के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव बने थे। आडवाणी के साथ उन्होंने जन्मभूमि आंदोलन का नेतृत्व किया था। 

इसके अलावा उनके लिए भारत रत्न की माँग करने वाले सुब्रमण्यम स्वामी का भी मामले से पुराना संबंध रहा है ,एक ट्विटर हिअंडल ने आज सुबह स्वामी और तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के बीच 1992 में हुए पत्राचार को ट्विटर पर साझा किया था, जिसका स्वामी अकसर उल्लेख करते हैं। उसे रीट्वीट करते हुए स्वामी ने दस्तावेज़ों की वैधता पर मुहर भी लगा दी। 

अयोध्या पर फैसले के बाद योगी आदित्यनाथ ने गुरु को किया याद, शेयर की रामशिला की तस्वीर

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठ के महंत योगी आदित्यनाथ ने अपने गुरुओं महंत दिग्विजयनाथ, महंत अवैद्यनाथ और महंत रामचंद्र परमहंस को श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने तीनों महंत गुरुओं को याद करते हुए उन्होंने लिखा, “गोरक्षपीठाधीश्वर युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज, परम पूज्य गुरुदेव गोरक्षपीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ जी महाराज एवं परमहंस रामचंद्रदास जी महाराज को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।”

योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या आंदोलन के दौरान हुए एक शिलापूजन समारोह की तस्वीर शेयर करते हुए गोरक्षपीठ के पूर्व महंतों को श्रद्धांजलि अर्पित की। दरअसल, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर हैं, उसका राम मंदिर आंदोलन में अहम योगदान रहा है। उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ और महंत अवैद्यनाथ गुरु महंत दिग्विजय नाथ, राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान होने वाले अनेकों कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाते थे। जानकारी के अनुसार, महंत दिग्विजयनाथ ने 1950-60 के दशक में राम जन्मभूमि से जुड़े तमाम कार्यक्रमों में सक्रिय तौर पर काम किया था।

इससे पहले उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत करते हुए कई ट्वीट किए। इनमें उन्होंने लिखा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत है, देश की एकता व सद्भाव रखने में सभी सहयोग करें, उत्तर प्रदेश में शांति, सुरक्षा और सद्भाव का वातावरण बनाए रखने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।

बता दें कि RSS प्रमुख मोहन भागवत ने एक प्रेस कॉन्फेन्स को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया। अयोध्या फ़ैसले पर उन्होंने पूरे देश में आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि मामला दशकों से चल रहा था और यह सही निष्कर्ष पर पहुँच गया है।

RSS प्रमुख ने कहा कि इस फ़ैसले को जय-पराजय की दृष्टि से बिलकुल नहीं देखा जाना चाहिए। सत्य व न्याय के मंथन से प्राप्त निष्कर्ष को भारतवर्ष के सम्पूर्ण समाज की एकात्मकता व बंधुता के  परिपोषण करने वाले निर्णय के रूप में देखना व उपयोग में लाना चाहिए। सम्पूर्ण देशवासियों से अनुरोध है कि विधि और संविधान की मर्यादा में रहकर संयमित व सात्विक रीति से अपने आनंद को व्यक्त करें।

गद्दार है ओवैसी, इसकी औकात ही नहीं है कि हिन्दुस्तान का बँटवारा कर सके: बाबा रामदेव

योग गुरु बाबा रामदेव ने अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। बाबा रामदेव ने कहा कि राम का वनवास खत्म। अब अयोध्या में राम मंदिर बनेगा। उन्होंने सभी से फैसले को सहर्ष स्वीकार करने के साथ ही अराजक तत्वों से सावधान रहने की जरूरत की बात भी कही। बाबा रामदेव ने कहा कि इस फैसले को किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमिन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अदालत के फैसले को लेकर अपनी नाखुशी जाहिर करते हुए कहा कि वो इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि उन्हें खैरात में पाँच एकड़ जमीन नहीं चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम (सर्वोच्च) जरूर है, लेकिन वह अचूक नहीं है। उन्होंने कहा कि मुल्क हिन्दू राष्ट्र की ओर बढ़ रहा है। संघ अब काशी और मथुरा के मुद्दे को भी उठाएगा।

रिपब्लिक टीवी पर डिबेट के दौरान बाबा रामदेव ने ओवैसी की जमकर क्लास लगाई और उन्हें उनके ‘औकात’ के बारे में भी बताया। रामदेव ने ओवैसी को गद्दार बताया। उन्होंने कहा कि वो ओवैसी को गद्दार इसलिए कह रहे हैं क्योंकि उनका (ओवैसी) भारत और भारतीयता में आस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि ओवैसी का अपना एक अलग मजहबी एजेंडा है। उस मजहबी एजेंडे को चलाकर ये अपना राज कायम रखना चाहते हैं और लोगों को अलग-अलग तरीके से भड़काना चाहते हैं।

बाबा रामदेव ने आगे कहा कि ओवैसी चाहते ही नहीं है कि हिन्दुस्तान के अंदर हिन्दू और मुस्लिम मिलकर शांति से रहे। ये मजहबी तौर पर झगड़े कराकर देश को बाँटना चाहते हैं। कोई हिन्दू राष्ट्र और कोई इस्लाम राष्ट्र की बात नहीं होगी। यह भारत है, यह हिन्दुस्तान है। उन्होंने कहा, “अगर ओवैसी का वश चले तो ये हैदराबाद में निजामी के समय की तरह ही दूसरा फसाद खड़ा कर दे, लेकिन इसकी औकात ही नहीं है इतनी कि हिन्दुस्तान का बँटवारा कर सके।”

उल्लेखनीय है कि अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार (नवंबर 9, 2019) को अपने फैसले में विवादित जमीन रामलला को देने का फैसला किया। जबकि मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही दूसरी जगह 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन रामलला को इसलिए दी है, क्योंकि मुस्लिम पक्ष जमीन पर दावा साबित करने में नाकाम रहा। जिसके बाद कोर्ट ने राम मंदिर निर्माण की रूपरेखा तय करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार को दी है। कोर्ट ने केंद्र से तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाने के लिए कहा है।

‘कारसेवकों का बलिदान व्यर्थ नहीं गया, पूरे देश में हो राम राज्य’

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने अयोध्या के फैसले पर ख़ुशी का इज़हार किया है। पार्टी के मुखिया और शिव सेना संस्थापक बाला साहेब ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वे आज खुश हैं। उन्हें ख़ुशी है कि मंदिर के संघर्ष के लिए बलिदान देने वाले कार सेवकों के बलिदान व्यर्थ नहीं गए हैं

गौरतलब है कि राम जन्मभूमि मंदिर के आंदोलन में विश्व हिन्दू परिषद, लाल कृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के अलावा शिव सेना (2008 में मनसे के निर्माण से पहले राज ठाकरे की भी पार्टी) का भी बड़ा हाथ था। 1992 में बाबरी ध्वंस मामले में बाला साहेब ठाकरे को भी आरोपित के तौर पर नामजद किया गया था।

राज ठाकरे ने आज (9 नवंबर, 2019 को) राम मंदिर के जल्दी से जल्दी मंदिर निर्माण की माँग की है। उन्होंने साथ ही कहा कि राम मंदिर के अलावा उनकी इच्छा राष्ट्र में राम राज्य की भी है।

बाबरी मस्जिद निर्माण के 491 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुना राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ़ कर दिया कि मुस्लिम पक्ष अयोध्या की विवादित ज़मीन पर अपना दावा साबित करने में विफल रहा। राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट स्थापित कर 3 महीने के भीतर मंदिर निर्माण के लिए योजना शुरू की जाए, ऐसा सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है।

ट्रस्ट बनाने और मंदिर निर्माण की योजना के लिए तीन महीने का वक्त सरकार को दिया गया है। साथ ही शीर्ष अदालत ने कहीं और मस्जिद बनाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन देने का भी निर्देश दिया है। यानी, सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए अलग से ज़मीन दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि बाहरी हिस्से पर हिन्दुओं द्वारा पहले से ही पूजा की जा रही थी, इसमें कोई विवाद नहीं है। 1857 से पहले यहाँ हिन्दुओं द्वारा पूजा करने के सबूत हैं। मुस्लिम पक्ष को राम मंदिर बनाने के लिए अयोध्या में ही 5 एकड़ ज़मीन दी जाएगी।

‘ओवैसी मुस्लिमों के ठेकेदार नहीं, 20 करोड़ मुस्लिमों की तरफ से 5 एकड़ जमीन कैसे मना कर दिए?’

कॉन्ग्रेस नेता और कश्मीरी मुस्लिम सलमान निज़ामी ने अयोध्या फैसले में मुस्लिमों को बाबरी के एवज में मिली 5 एकड़ ज़मीन ख़ारिज कर कर देने के लिए अकबरुद्दीन ‘अच्छा वाला’ ओवैसी को आड़े हाथों लिया है। निज़ामी ने कहा कि 20 करोड़ मुलिमों के ओवैसी ठेकेदार नहीं हैं। उन्होंने मुस्लिमों से 5 एकड़ ज़मीन स्वीकार कर उस पर एक मस्जिद और एक दोनों मज़हबों के छात्रों के लिए शिक्षा केन्द्र बनाने की बात की है।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमिन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अदालत के फैसले को लेकर अपनी नाखुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि वो इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि उन्हें खैरात में पाँच एकड़ जमीन नहीं चाहिए।

ओवैसी ने कहा, “मैं फैसले से खुश नहीं हूँ। सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम (सर्वोच्च) जरूर है, लेकिन वह अचूक नहीं है। हमें संविधान पर पूरा भरोसा है। हम अपने अधिकार के लिए लड़ रहे थे। हमें दान के रूप में पाँच एकड़ की जमीन नहीं चाहिए। हमें इस 5 एकड़ भूमि के प्रस्ताव को अस्वीकार करना चाहिए, हमें संरक्षण नहीं चाहिए।”

असदुद्दीन ओवैसी ने कॉन्ग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी आज अपना असली रंग दिखा दिया। कॉन्ग्रेस पार्टी पाखंडी और धोखेबाजों की पार्टी है। उनका कहना है कि अगर 1949 में मूर्तियों को नहीं रखा गया होता और तत्‍कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने ताले नहीं खुलवाए होते तो मस्‍जिद अभी भी होती। वहीं नरसिम्‍हा राव ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया होता तो मस्‍जिद अभी भी होती।

बाबर के वंशज ने किया फैसले का स्वागत, कहा- मंदिर बनवाने के लिए सोने की ईंट भेंट करूँगा

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या विवाद पर सुनाए गए फैसले का बाबर के वंशज और मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फर के परपोते याकूब हबीबुद्दीन उर्फ़ प्रिंस तुसी ने भी स्वागत किया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि मंदिर निर्माण के लिए वे सोने की ईंट भी ट्रस्ट को देंगे।

प्रिंस तुसी ने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि जिस तरह से देश में 26 जनवरी और 15 अगस्त को खुशियाँ मनाई जाती है, उसी तरह से आज के दिन को भी राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस फैसले को सभी पक्षों को कबूल करना चाहिए।

उन्होंने ने सभी से शांति कायम रखने की अपील करते हुए कहा, “जिस तरह से हिन्दू भाई हमारे फंक्शन रमजान में, बकरीद में हमारा साथ देते हैं, उसी तरह से इस फैसले के बाद हम सभी मिलकर राम मंदिर बनाएँ और जहाँ तक हमारे सोने की ईंट की बात थी, वो हम देंगे।”

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जितने नेताओं की भड़काने की दुकानें हैं, वो आपको भड़काने की कोशिश करेंगे। मगर आप उनके बहकावे में न आएँ। रामलला की जहाँ जगह थी, उसे कायम रखा जाएगा और फिर दोनों मजहब के लोग मिलकर वहाँ मंदिर बनाएँगे। सारी दुनिया देखेगी कि हिन्दुस्तान एक सेक्युलर देश है।

उल्लेखनीय है कि अयोध्या विवाद पर हो रही सुनवाई के दौरान याकूब हबीबुद्दीन तुसी ने अयोध्या में राम मंदिर की पहली ईंट रखने की ख्वाहिश जताई थी। तुसी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की इच्छा जताते हुए कहा था, “हमारा परिवार उसकी पहली ईंट रखेगा और हम मंदिर की नींव के लिए सोने की शिला दान करेंगे।”

गजब की अनुभूति हो रही है, कारसेवा जैसी ख़ुशी हो रही है, आप सब को बधाई: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन के समय कई ऐसी बातें कहीं, जिनकी सोशल मीडिया में ख़ूब चर्चा हुई। इस दौरान उन्होंने कारसेवा की बातें भी की, जिसका सिख धर्म में काफ़ी महत्व है। सिख धर्म की परिभाषा के अनुसार, कारसेवा वो सेवा है, जो आप बिना किसी फल की प्राप्ति की इच्छा लिए दूसरों के लिए करते हैं। इसका अर्थ है कि प्रत्येक जीव के अंदर भगवान हैं और उनकी सेवा करना ही कारसेवा है। किसी धार्मिक निर्माण कार्य में सहयोग करने को भी कारसेवा कहा जाता है। पीएम मोदी ने कहा:

“ये मेरा सौभाग्य है कि मैं आज देश को करतारपुर साहिब कॉरिडोर समर्पित कर रहा हूँ। जैसी अनुभूति आप सभी को ‘कार सेवा’ के समय होती है, वही मुझे इस वक्त हो रही है। मैं आप सभी को, पूरे देश को, दुनिया भर में बसे सिख भाई-बहनों को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान के कारण लोगों को विश्व हिन्दू परिषद की कारसेवा भी याद आ गई। राम मंदिर आंदोलन के दौरान विहिप ने कारसेवा का प्रयोग किया था और इसने जनांदोलन का रूप ले लिया था। देश भर से लाखों श्रद्धालु कारसेवा करने के लिए अयोध्या पहुँचे थे। विहिप और बजरंग दल ने हजारों-लाखों कारसेवकों की भीड़ अयोध्या में जुटाई थी। ऐसे में पीएम मोदी द्वारा करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान कारसेवा का जिक्र करने से लोगों को अनायास ही 90 के दशक में राम जन्मभूमि के लिए हुई कारसेवा की याद आ गई।

गुरदासपुर स्थित डेरा बाबा नानक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करतारपुर कॉरिडोर के लिए इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट का उद्घाटन किया। इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह भी वहाँ उपस्थित रहे। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह के साथ लंगर में भोजन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने याद दिलाया कि कैसे गुरु गोबिंद सिंह सहित सभी सिख गुरुओं ने देश की रक्षा और एकता के लिए बलिदान दिए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव न सिर्फ़ सिख समुदाय बल्कि पूरी मानवता के धरोहर हैं।

करतारपुर साहिब के उद्घाटन से सिखों में ख़ुशी का माहौल है क्योंकि इससे उन्हें गुरु नानक देव के पवित्र स्थल का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होगा। देशभर के कई सिखों ने पीएम मोदी को इसके लिए धन्यवाद दिया।

PM मोदी ने राष्ट्र को सम्बोधित किया, कहा-सुप्रीम कोर्ट का फैसला नया सवेरा लेकर आया है

आज सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे महत्वपूर्ण मामले पर फैसला सुनाया है, जिसके पीछे सैकड़ों वर्षों का एक इतिहास है। पूरे देश की ये इच्छा थी कि इस मामले की अदालत में हर रोज सुनवाई हो, जो हुई, और आज निर्णय आ चुका है। दुनिया मानती है कि भारत का लोकतंत्र कितना जीवंत है। फैसला आने के बाद हर समुदाय और पंत के लोगों ने जिस प्रकार से इस स्‍वीकार किया है ये अदभुत है। भारत की पहचान विविधता में एकता की रही है।

फैसला आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने जो बातें कही वो इस प्रकार है:

  • आइए, इस अहम और पवित्र पड़ाव पर हम संकल्प लें कि गुरु नानक जी के वचनों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएंगे। हम समाज के भीतर सद्भाव पैदा करने के लिए हर कोशिश करेंगे।
  • आज सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे महत्वपूर्ण मामले पर फैसला सुनाया है, जिसके पीछे सैकड़ों वर्षों का एक इतिहास है।पूरे देश की ये इच्छा थी कि इस मामले की अदालत में हर रोज़ सुनवाई हो, जो हुई, और आज निर्णय आ चुका है।
  • फैसला आने के बाद जिस प्रकार हर वर्ग ने, हर समुदाय ने, हर पंथ के लोगों ने, पूरे देश ने खुले दिल से इसे स्वीकार किया है, वो भारत की पुरातन संस्कृति, परंपराओं और सद्भाव की भावना को प्रतिबिंबित करता है।
  • भारत की न्यायपालिका के इतिहास में भी आज का ये दिन एक स्वर्णिम अध्याय की तरह है। इस विषय पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सबको सुना, बहुत धैर्य से सुना और सर्वसम्मति से फैसला दिया।
  • सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के पीछे दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाई है। और इसलिए, देश के न्यायधीश, न्यायालय और हमारी न्यायिक प्रणाली अभिनंदन के अधिकारी हैं।
  • आज अयोध्या पर फैसले के साथ ही, 9 नवंबर की ये तारीख हमें साथ रहकर आगे बढ़ने की सीख भी दे ही है। आज के दिन का संदेश जोड़ने का है-जुड़ने का है और मिलकर जीने का है। नए भारत में भय, कटुता, नकारात्मकता का कोई स्थान नहीं है।
  • सर्वोच्च अदालत का ये फैसला हमारे लिए एक नया सवेरा लेकर आया है। इस विवाद का भले ही कई पीढ़ियों पर असर पड़ा हो, लेकिन इस फैसले के बाद हमें ये संकल्प करना होगा कि अब नई पीढ़ी, नए सिरे से न्यू इंडिया के निर्माण में जुटेगी।
  • अब समाज के नाते, हर भारतीय को अपने कर्तव्य, अपने दायित्व को प्राथमिकता देते हुए काम करना है। हमारे बीच का सौहार्द, हमारी एकता, हमारी शांति, देश के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

ग़ौरतलब है कि एक ऐतिहासिक फ़ैसले के तहत, CJI रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की 5-जजों की बेंच ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए 2.77 एकड़ की पूरी राम जन्मभूमि साइट को सौंप दी। साथ ही, अदालत ने सरकार से कहा कि वह अयोध्या में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के प्रतिनिधित्व वाले मुस्लिम पक्षकारों को मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ ज़मीन प्रदान करे। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से 3 महीने के भीतर इसके लिए एक योजना तैयार करने को कहा है। सरकार को मंदिर निर्माण के लिए न्यास बोर्ड का गठन करना होगा।

कटाक्ष: लिबरलों को रुदन कक्ष, रवीश-राठी-कामरा के लिए चिराँध योजना। Ajeet Bharti on Liberals meltdown

जहाँ रवीश कुमार को अनपढ़ रवीश भक्तों से जोड़ने के लिए सरकार द्वारा पेपर रोल देने का निर्देश है, वहीं कामरा-राठी जैसे लौंडों के लिए जज ने चिरकुट रोजगार एवं नल्लारोधी धमाका (ChiRAnDh) योजना बनाने के आदेश दिए हैं।

पूरा वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

‘पापा मोदी’, हिम्मत है तो राम मंदिर बनाओ और अनुच्छेद 370 हटाओ: कबूल हुई शेहला रशीद की दोनों दुआएँ

मोदी सरकार ने शेहला रशीद की दोनों इच्छाएँ पूरी कर दी हैं। अगर आपको लगता है कि हम मजाक कर रहे हैं तो आप ग़लत हैं। दरअसल, ट्विटर पर शेहला रशीद ने राम मंदिर को लेकर कई बार टिप्पणी की थी। जेएनयू की छात्र नेता रहीं शेहला ने जम्मू कश्मीर की राजनीति में भी क़दम रखा था लेकिन अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के निरस्त होने के कारण उन्हें राजनीति से सन्यास लेना पड़ा। इसके लिए उन्होंने लम्बा-चौड़ा फेसबुक पोस्ट लिख कर मोदी सरकार पर निशाना साधा। अगर अनुच्छेद 370 की बात करें तो इसके हटने के पहले भी वह कई बार इसके लिए सरकार पर निशाना साध चुकी थीं।

शेहला रशीद ने एक बार ट्वीट कर के कहा था:

“अयोध्या में कॉर्पोरेटर, विधायक और सांसद- सभी भाजपा के हैं। राज्य में भी भाजपा की सरकार है। केंद्र में तो भाजपा की सरकार है ही। तो फिर राम मंदिर क्यों नहीं बना? अगर ये चुनावी मुद्दा है तो जनता को भाजपा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए।”

शेहला रशीद का ट्वीट, जिसमें उन्होंने राम मंदिर को लेकर तंज कसा था

अब शेहला रशीद की इच्छा पूरी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाते हुए पूरी की पूरी विवादित ज़मीन रामलला विराजमान को देने का आदेश दिया है। मुस्लिम पक्ष का वहाँ किसी प्रकार का स्वामित्व नहीं है, ऐसा सुप्रीम कोर्ट ने कहा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मुस्लिमों को अयोध्या में ही कहीं और 5 एकड़ ज़मीन दी जाए। इस सम्बन्ध में केंद्र सरकार से एक ट्रस्ट बना कर मंदिर निर्माण के सम्बन्ध में योजना बनाने को कहा गया है। यानी, मंदिर निर्माण को लेकर मोदी सरकार द्वारा गठित ट्रस्ट योजना बनाएगा।

शेहला रशीद ने राम मंदिर को लेकर मोदी समर्थकों पर किया था कटाक्ष

इस तरह से राम मंदिर के निर्माण का कार्य भी मोदी सरकार करेगी और शेहला रशीद की ये इच्छा भी पूरी हो जाएगी। शेहला ने एक बार और किसी व्यक्ति को जवाब देते हुए कहा था कि ‘राम मंदिर ले लो।’ शेहला रशीद अक्सर राम मंदिर को लेकर मोदी सरकार और मोदी समर्थकों पर कटाक्ष करती रहती हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने शेहला रशीद की उन ट्वीट्स को जम कर शेयर किया और उन्हें याद दिलाया कि उनकी इच्छा पूरी हो गई है।

इतना ही नहीं, अनुच्छेद 370 को लेकर भी शेहला रशीद मोदी सरकार पर तंज कसती रहती थीं। शायद उन्हें ऐसा लगता था कि बाकि सरकारों की तरह इस बार भी सिर्फ़ बातें ही की जाएँगी और एक्शन नहीं लिया जाएगा। अनुच्छेद 370 के बारे में शेहला ने कहा था:

“अरे ट्रोल्स की ही तो हुकूमत चल रही है। बोलो ट्रोल्स के पापा से कि हिम्मत है तो हटा के दिखाए अनुच्छेद 370।”

शेहला के कटाक्ष के बाद अनुच्छेद 370 के प्रावधान भी निरस्त हो गए

भले ही शेहला रशीद जैसे लोग राम मंदिर और अनुच्छेद 370 हटाने के कट्टर विरोधी रहे हों लेकिन वो समझते थे कि भाजपा के कार्यकाल में यह सब नहीं हो पाएगा। उन्होंने इसे राजनीतिक जुमला समझने की भूल की। अब इस भूल का परिणाम सामने है। शेहला के पास शायद ही अब बोलने के लिए शब्द हों।