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राम मंदिर पर फ़ैसले की उलटी गिनती शुरू: यूपी पुलिस ने दर्ज किए 150 FIR, 20 गिरफ़्तार

अयोध्या मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट कभी भी फ़ैसला सुना सकता है। अगस्त में शुरू हुई नियमित सुनवाई अक्टूबर में ख़त्म हुई और इसके साथ ही मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था। फ़ैसला सुनाए जाने के बाद सांप्रदायिक तनाव न फैले या फिर हिंसा न हो, इसके लिए यूपी पुलिस ने कमर कसनी शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश की पुलिस न सिर्फ़ ग्राउंड पर बल्कि अब सोशल मीडिया पर भी कड़ी नज़र रख रही है। कमलेश तिवारी की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर किए गए सांप्रदायिक टिप्पणियों के कारण यूपी पुलिस इस बार फूँक-फूँक कर क़दम रख रही है।

अमर उजाला में प्रकाशित ख़बर के अनुसार, आईजी क़ानून-व्यवस्था प्रवीण कुमार ने बताया कि सोशल मीडिया पर इसीलिए कड़ी नज़र रखी जा रही है ताकि राम मंदिर पर फ़ैसले को लेकर कसी भी प्रकार के अफवाह को फैलने से रोका जाए। इसके लिए न सिर्फ़ ऑनलाइन वालंटियर्स बाकि इलाक़े के संभ्रांत लोगों की भी मदद ली जा रही है। उन्होंने बताया कि अफवाह फैलाने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवई की जाएगी। वहीं उन्होंने आँकड़े गिनाते हुए कहा कि पिछले 15 दिनों में सोशल मीडिया से जुड़े मामलों में 150 से भी अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।

प्रवीण कुमार ने बताया कि अब तक 20 से भी अधिक लोगों को विभिन्न धाराओं में गिरफ़्तार किया जा चुका है, जो सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक तनाव भड़का रहे थे। यूपी पुलिस का कहना है कि अगर तनाव भड़काने की कोशिश की जाती है तो आरोपितों पर रासुका भी लगाया जाएगा। पुलिस ने मुरादाबाद में समाज के प्रबुद्धजनों के साथ बैठक की। आगरा में आईजी स्तर के अधिकारियों को लगातार भ्रमण पर रहने को कहा गया है। पुलिस अधिकारियों को ऐसे लोगों से सम्पर्क बना कर रखने को कहा गया है, जिनकी समाज में स्वीकार्यता ज्यादा हो। अयोध्या में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जा रहा है।

आगरा जोन के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस ए सतीश गणेश ने इंडिया टुडे से कहा कि पुलिस व्हाट्सएप्प ग्रुप्स पर भी कड़ी निगरानी रखेगी। यहाँ तक कि ऐसे ग्रुप्स में शामिल पुलिस कर्मचारियों पर भी निगरानी रखी जाएगी और कोई भी व्यक्ति भड़काऊ बयानबाजी करते धरा जाता है तो उसे तुरंत पूछताछ के लिए थाने लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया को कुछ लोग क़ानून-व्यवस्था बिगाड़ने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। 10 नवम्बर को ईद-मिलाद-उल-नबी मनाया जाएगा। ये पैगम्बर मुहम्मद का जन्मदिवस होने के कारण मुस्लिमों के लिए एक महत्वपूर्ण त्यौहार है।

इस दिन कई मजहबी जुलूस निकाले जाएँगे। ऐसे में पुलिस उन सभी लोगों की सूची मँगा रही है, जो जुलूस में शामिल होंगे और कार्यक्रम आयोजित करेंगे। अगर ऐसे जुलूसों में कोई भी तनावपूर्ण गतिविधि होती है तो तुरंत पुलिस को सूचित किए जाने की अपील की जा रही है।

ममता दीदी के ‘बढ़िया काम’ को दिखाने के लिए 24 घंटे में 2 ग्राफ… दोनों गलत, लोगों ने MP के लिए मजे

तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने बंगाल में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर ट्वीट किया मगर इसके बाद वे खुद ही ट्रोल हो गए। दरअसल ब्रायन अपने किए एक ट्वीट के ज़रिये यह दिखाने की कोशिश में थे कि स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करने में बंगाल में उनकी पार्टी की सरकार केंद्र की मोदी सरकार से आगे है। लेकिन बेचारे फँस गए। अपने ट्वीट में गलत आँकड़े देकर तृणमूल के सांसद बाबू फेक न्यूज़ फैलाने वालों में शुमार हो गए और उनकी अच्छी खासी किरकिरी हो गई।

अपने ट्वीट में ब्रायन ने लिखा कि जहाँ एक ओर भारत सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 2017-18 में 1.28 प्रतिशत खर्च किया है वहीं पश्चिम बंगाल ने साल 2018-19 में 4.01% किया। दो अलग-अलग वित्तीय वर्षों की तुलना करने वाले क्विज़ मास्टर कहे जाने वाले ब्रायन यहीं नहीं रुके बल्कि जिन आँकड़ों को ट्वीट कर वे अपनी पीठ थपथपाने में लगे थे दरअसल उनका एक साथ कम्पेयर किया जाना भी गलत है। ब्रायन ने राष्ट्रीय स्तर के इस आँकड़े के लिए जीडीपी का इस्तेमाल किया जबकि बंगाल के आँकड़े के लिए उन्होंने राज्य के बजट से खर्च होने वाला हिस्सा बताया जोकि 4.01% है।

दरअसल बजट और जीडीपी दोनों ही ऐसे विषय हैं, जो एक दूसरे से भिन्न हैं। अगर किसी को दो सरकारों के किए खर्च की तुलना करनी है तो उन्हें दोनों के बजट का हिस्सा देखेंगे न कि बजट के साथ जीडीपी की तुलना करेंगे। ब्रायन यहीं नहीं रुके बल्कि उन्होंने एक और ऐसा ग्राफ ट्वीट कर दिया जिसमें उन्होने कहा कि 2019-2020 के लिए जहाँ भारत अपने बजट का 2.31% खर्च करेगा वहीं बंगाल की सरकार अपने बजट से 4.01% खर्च करेगी।

हालाँकि दूसरे ग्राफ में ब्रायन ने दो अलग-अलग तरह के आँकड़ों की तुलना वाली गलती नहीं की मगर यह आँकड़ा सही नहीं है। यह कहना पूरी तरह से गलत है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत सरकार ने बंगाल सरकार से कम खर्च किया है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि केन्द्रीय बजट में कई प्रकार के खर्चे जुड़े होते हैं जिनके लिए केन्द्रीय बजट में प्रावधान किया जाता है मगर राज्य सरकारों द्वारा बनाए जाने वाले बजट में यह दायित्व नहीं होता जैसे डिफेन्स बजट, राज्यों को दी जाने वाली वित्तीय सहयता और सड़क से लेकर बड़े-बड़े संस्थानों तक के निर्माण की ज़िम्मेदारी होती है। यानी केंद्र के बजट में कई ऐसे प्रावधान हैं जहाँ कई संसाधनों और व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए के लिए बजट से धनराशि को बाँटा जाता है जो कि राज्यों में नहीं हैं।

भारत की संवैधानिक व्यवस्था में प्रदेश ऐसी कई बड़ी जिम्मेदारियों से मुक्त होते हैं, यही वजह है कि अपना बजट खर्च करने के लिए उनके पास केंद्र के मुकाबले बहुत कम जिम्मेदारियाँ हैं। इसके अलावा महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय संविधान के मुताबिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए स्टेट लिस्ट में प्रावधान किया गया है यानी स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करना केंद्र सरकार नहीं बल्कि प्रदेश सरकार का दायित्व है। हालाँकि प्रदेश और केंद्र की साझा ज़िम्मेदारी लिखित न होते हुए भी केंद्र सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अपनी ओर से खर्च करती है लिहाज़ा इस तरह की बेतुकी तुलना करना पूर्णत: गलत है।

‘इस्लाम क़बूलो नहीं तो बर्बाद हो जाओगे’ – पर्सिया के राजा ने फाड़ डाली थी पैगम्बर मुहम्मद की यह चिट्ठी

पैगम्बर मोहम्मद को इस्लामी मजहब का संस्थापक माना जाता है। पैगम्बर ने कई लड़ाइयों में भी हिस्सा लिया था, जिसके बारे में अलग-अलग इतिहासकारों ने कई पुस्तकों में जिक्र किया है। क़ुरान जैसे इस्लामिक साहित्य में भी जीसस का जिक्र है और माना जाता है कि अल्लाह द्वारा भेजे गए पैगम्बरों में मुहम्मद को इस्लाम की शिक्षा-दीक्षा देने के लिए धरती पर भेजा गया था। आजकल जब ‘जिहाद’ की बातें होती हैं, तब लोग इस्लाम के इतिहास में इसका मूल खोजने निकलते हैं। इस शब्द का प्रयोग आतंकियों द्वारा किया जाता रहा है। जम्मू कश्मीर में भारतीय नागरिकों का ख़ून बहाने वाले भी इसे जिहाद की ही संज्ञा देते हैं।

यहाँ हम पैगम्बर मुहम्मद से जुड़ा एक किस्सा बताने जा रहे हैं। इसका जिक्र कई ऐतिहासिक पुस्तकों में है। समय-समय पर कई इतिहासकारों ने इस घटना का जिक्र किया है और पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर की पुस्तक ‘The Shade of Swords: Jihad and the Conflict between Islam and Christianity‘ में भी इसका जिक्र है। कहानी शुरू होती है खुसरो-II से, जो सातवीं सदी के पहले दशक में पर्सिया (फारस) पर राज करता था और उसके नेतृत्व में वह साम्राज्य अजेय नज़र आता था। यहाँ बाइजेंटाइन (पूर्वी रोमन) साम्राज्य के अधिपति हेराक्लियस का भी जिक्र आता है।

हेराक्लियस (Heraclius) एक प्रसिद्ध योद्धा भी था, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह निहत्था शेर से भी लड़ जाया करता था। उस काल में भारत में महान सम्राट हर्षवर्धन का राज था। उसने फारसियों को चुनौती दी थी। फारसियों ने न सिर्फ़ येरुसलम पर कब्ज़ा कर लिया था बल्कि वहाँ के ‘True Cross’ को भी अपने शिकंजे में ले लिया था। वे ‘ट्रू क्रॉस’ को फारस ले गए थे। इसके साथ वे कई अन्य बहुमूल्य चीजें भी लूट कर ले गए थे। आगे बढ़ने से पहले बता दें कि ‘True Cross’ ईसाई समुदाय में काफ़ी महत्ता रखता है क्योंकि कहा जाता है कि यही वो क्रॉस है, जिस पर जीसस को लटकाया गया था।

फारसियों ने तब जेरुसलम के चर्च में भी काफ़ी तोड़-फोड़ मचाई थी। मक्का में स्थानीय रूढ़िवादियों ने जेरुसलम पर कब्जे का जश्न मनाया था। और वो पैगम्बर मुहम्मद के विरोधी भी थे। उन्होंने पैगम्बर पर तंज कसते हुए कहा था कि अल्लाह जेरुसलम को बचाने में नाकाम सिद्ध हुआ। यह भी जानना ज़रूरी है कि हेराक्लियस के बाइजेंटाइन साम्राज्य को ही पूर्वी रोमन साम्राज्य के रूप में जाना जाता है। क़ुरान में भविष्यवाणी की गई थी कि रोमन साम्राज्य वापसी करेगा (मतलब तब का इस्लाम फारसियों के बजाय रोमन के ज्यादा नजदीक थे) और बाद में ऐसा ही हुआ। हेराक्लियस ने समुद्री युद्ध का प्रयोग किया और फारसियों को खदेड़ डाला। क़ुरान में लिखा गया था कि भले ही रोमन आज हार गए हों लेकिन अल्लाह की मर्जी से वे कुछ ही सालों में विजेता होंगे।

सन 628 में हेराक्लियस ने ‘ट्रू क्रॉस’ को वापस लाकर जेरुसलम में जीत का पताका फहराया। भारत ने भी उसकी इस उपलब्धि पर उसे बधाई दी थी। अब यहाँ पैगम्बर मुहम्मद की एंट्री होती है। जब रोमन साम्राज्य का अधिपति हेराक्लियस जेरुसलम में था, तब उसके पास एक चिट्ठी आई। वह चिट्ठी मदीना से आई थी, पैगम्बर मुहम्मद की तरफ़ से। रोमन इस चिट्ठी को पाने वाले अकेले नहीं थे। इसी प्रकार के पत्र पर्सिया, अबसीनिया, बहरीन, ओमान और मिस्र भी भेजे गए थे। पर्सिया के बादशाह खुसरो (राजाओं का राजा, जिसे मध्य फ़ारसी साम्राज्य में शहंशाह कहा गया) ने मुहम्मद के इस पत्र पर आपत्ति जताई।

पर्सिया के राजा ने आदेश दिया कि जिसने भी इस पत्र को भेजा है, उसे तुरंत गिरफ़्तार किया जाए। इतना ही नहीं, पर्सिया के राजा ने पैगम्बर मुहम्मद के भेजे उस पत्र को फाड़ कर फेंक दिया था। उसे इस बात से नाराज़गी थी कि इस पत्र में पैगम्बर की बात न मानने पर साम्राज्य के तबाह हो जाने की बात कही गई थी। जब पैगम्बर मुहम्मद को इसकी सूचना मिली तो उन्होंने कहा कि इसी तरह साम्राज्य भी चिथड़े-चिथड़े हो जाएगा। मुहम्मद ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि उनका मजहब और सम्प्रभुता उन ऊँचाइयों को छुएगा, जहाँ तक फ़ारसी आज तक पहुँच भी नहीं पाए हैं। इसके बाद उन्होंने खुसरो को सीधी चुनौती दे डाली।

खुसरो इस बात से नाराज़ था कि किसी ने ख़ुद को उसके ‘बराबर समझने की हिमाकत’ की थी। उसने यमन के शासक को मुहम्मद को गिरफ़्तार करने के लिए भेजा। इसके बाद यमन का वह शासक ही मुस्लिम बन बैठा और उसने यमन को इस्लामी राज्य का हिस्सा बना लिया, जो पल-पल अपना विस्तार कर रहा था। अब आते हैं रोमन पर। पैगम्बर को ये बात पता थी कि रोमन साम्राज्य का राजा ऐसे किसी भी पत्र को भाव नहीं देता है, जो सीलबंद न हो। इसीलिए, उन्होंने एक चाँदी के अंगूठे को लिया और उसके माध्यम से ख़ुद की पहचान बताई। पैगम्बर मुहम्मद ने ख़ुद को अल्लाह का दूत बताया।

अब उस पत्र पर आते हैं। उस पत्र में चीजें संक्षेप और सीधी भाषा में लिखी हुई थीं। इस पत्र में लिखी बातों को पढ़ कर आज की दुनिया के हालात भी बयाँ हो जाते हैं। पैगम्बर मुहम्मद ने अपने इस पत्र में लिखा था:

“सर्वाधिक परोपकारी और परम दयालु अल्लाह का नाम लेते हुए मैं अल्लाह का दूत और अल्लाह का दास मुहम्मद ये पत्र बाइजेंटाइन साम्राज्य के शासक हेराक्लियस को भेज रहा हूँ। इस मार्गदर्शन का अनुसरण करने वालों के जीवन में शांति बनी रहे। अगर इस्लाम अपना लोगे तो तुम सुरक्षित रहोगे। अगर इस्लाम अपनाओगे तो अल्लाह तुमको उम्मीद से ज्यादा इनाम से नवाजेगा। लेकिन, अगर तुमने मेरे निमंत्रण को ठुकरा दिया तो इसका अर्थ है कि तुम अपने लोगों को गुमराह कर रहे हो।”

पैगम्बर मुहम्मद के पत्र के अंग्रेजी अनुवाद (साभार: IslamReligion.Com)

पैगम्बर मुहम्मद और ईसाईयों के बीच काफ़ी संघर्ष और युद्ध हुआ करते थे। ‘बुक ऑफ जिहाद’ में बुखारी लिखते हैं कि पैगम्बर मुहम्मद ने एक महिला से कहा था कि मुस्लिमों का जो भी पहला जत्था समुद्री अभियान पर निकलेगा, उसे अल्लाह जन्नत बख्शेगा। उन्होंने मुस्लिमों के इस जत्थे को ‘जिहादी’ कह कर सम्बोधित किया था। पैगम्बर मुहम्मद के समय से ही ‘जिहाद’ इस्लाम का एक जाना-पहचाना शब्द बन गया और इसका प्रयोग होने लगा। आज आलम ये है कि विश्व का सबसे खूँखार आतंकी संगठन भी ख़ुद को ‘जिहादी’ बताता है। सवाल तो अब भी बना हुआ है- ‘क्या जिहाद का मतलब इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिए युद्ध करना है?’

मुस्लिम मानते हैं कि एडम और जीसस की ही श्रृंखला में मुहम्मद भी आते हैं, जिन्हें अंतिम पैगम्बर भी कहा गया है। इस्लाम मानता है कि ईश्वर के हिस्से नहीं किए जा सकते और इसीलिए यह मजहब किसी को भी ईश्वर का पुत्र मानने से इनकार कर देता है। इसे तौहीद कहा गया है, जिसे आप एकेश्वरवाद की संज्ञा भी दे सकते हैं। ये पैगम्बर मुहम्मद और जिहाद को लेकर एक सच्ची कहानी थी, जिससे पता चलता है कि इस्लाम अपनाने और युद्ध के द्वारा इसका प्रचार-प्रसार करने की प्रक्रिया तभी शुरू हो गई थी, जब पैगम्बर मुहम्मद जीवित थे। उनके निधन के बाद ये प्रक्रिया और तेज़ हुई। ये आज भी चली आ रही है।

(यह लेख पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर की पुस्तक और इस्लाम के पवित्र पुस्तक ‘सहीह-अल-बुखारी’ पर आधारित है।)

मेरा फोन हैक नहीं हुआ: प्रफुल्ल पटेल ने कॉन्ग्रेसी दावों की खोली पोल, आरोपों को बताया आधारहीन

कॉन्ग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा, एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल और तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी का फोन हैक कर उनकी जासूसी कराई गई है। कॉन्ग्रेस ने कहा कि जिन नेताओं को व्हाट्सएप्प द्वारा मैसेज भेजा गया, उनमें प्रियंका गाँधी भी शामिल हैं। वहीं प्रियंका गाँधी की टीम ने कहा कि उन्होंने उन मैसेजों को गंभीरता से नहीं लिया और डिलीट कर दिया। ख़बरों के अनुसार, रणदीप सुरजेवाला ने प्रियंका गाँधी को एक सूची दी, जिसमें उन नेताओं के नाम थे जिनका व्हाट्सएप्प कथित रूप से हैक किया गया था। इसके बाद प्रियंका को याद आया कि उन्हें भी ऐसा मैसेज आया था।

कॉन्ग्रेस की तरफ़ से पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने मोदी सरकार पर नेताओं की जासूसी कराने के आरोप लगाए। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने कॉन्ग्रेस पार्टी के दावों की धज्जियाँ उड़ा दी। कॉन्ग्रेस की सहयोगी पार्टी एनसीपी के नेता ने कहा कि उनका व्हाट्सएप्प हैक किए जाने की सारी ख़बरें आधारहीन हैं। इस तरह उन्होंने कॉन्ग्रेस के आरोपों की पोल खोल दी। पटेल ने कहा कि उन्हें व्हाट्सएप्प की तरफ़ से ऐसा कोई मैसेज आया ही नहीं, जिसमें कहा गया हो कि उनका फोन हैक किया गया है।

हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, एक व्हाट्सएप्प अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि इजरायली कम्पनी द्वारा 41 नेताओं के फोन हैक किए गए और प्रफुल्ल पटेल उनमें से एक हैं। प्रफुल्ल पटेल ने व्हाट्सएप्प की तरफ़ से उन्हें अलर्ट किए जाने के मैसेज मिलने की बात से इनकार कर दिया। अब तक 17 नेताओं, पत्रकारों और समाजिक कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि उनका फोन हैक किया गया। भारत सरकार ने इस बाबत व्हाट्सएप्प से जवाब भी माँगा है।

व्हाट्सएप्प ने कहा है कि अप्रैल में 20 देशों के 1400 लोगों को इजरायली स्पाईवेयर ने निशाना बनाया, जिसमें 121 भारतीय भी शामिल थे। रणदीप सुरजेवाला ने भाजपा को ‘भारतीय जासूस पार्टी’ करार देते हुए प्रधानमंत्री पर सवाल खड़ा किया। कॉन्ग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने सब कुछ जानते-समझते भी जानबूझ कर कुछ नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय आईटी मंत्री ने फेसबुक के वाईस-प्रेसिडेंट के साथ बैठक के दौरान भी इस मामले को नहीं उठाया और रहस्यमयी ढंग से चुप्पी बरक़रार रखी।

वहीं कॉन्ग्रेस समर्थक पत्रकारों के गिरोह में भी इस बात को लेकर बेचैनी दिखी कि प्रफुल्ल पटेल ने हैकिंग की ख़बरों को आधारहीन बता दिया है। पल्लवी जोशी ने जब इस ख़बर को ट्वीट किया तो सुनेत्रा चौधरी ने दावा किया कि पटेल के पास कई नंबर हैं और उनके किसी एक नंबर को हैक किया गया था। जबकि ट्रोल पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने दावा किया कि अधिकतर लोगों को कॉल की जगह मैसेज किया गया था, इसीलिए पटेल को याद नहीं रहा होगा।

पाकिस्तान में आतंकियों की हो रही ऑनलाइन भर्ती, अमेरिकी रिपोर्ट में हुआ खुलासा

भारत में आतंकी हमलों का ज़िम्मेदार दहशतगर्द संगठन लश्कर-ए तयबा और जैश-ए-मोहम्मद को पाकिस्तान न सिर्फ शरण देता है बल्कि पूरी खिदमत कर पाल रहा है। इन आतंकवादी संगठनों में बकायदे आतंकी बनने के लिए भर्तियाँ हो रही हैं। इस बातों का खुलासा अमेरिका की एक सालाना रिपोर्ट में हुआ है।

इस रिपोर्ट में पाकिस्तान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा गया है कि पाकिस्तान में शरण पा रहे इन आतंकवादी संगठनों ने साल 2018 में चुनाव लड़कर सत्ता पर काबिज होने की भी कोशिश की थी। अमेरिका ने ‘कंट्री रिपोर्ट्‌स ऑन टेररिज्म 2018’ नामक एक वार्षिक रिपोर्ट में यह दावा किया है कि पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों पर रोक लगाने को लेकर पूरी तरह से नाकामयाब रहा है। पाकिस्तान के लिए इस रिपोर्ट का महत्व इसलिए भी है क्योंकि हाल ही में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान एफएटीएफ की बैठक में अपने देश के लिए जब क़र्ज़ माँगने पहुँचे थे तो पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को मदद न पहुँचाने की शर्त रखी गई थी।

बता दें कि पाकिस्तान में कई आतंकवादी संगठन प्रमुख हैं, इनमें अफगान-तालिबान, जैश-ए-मोहम्मद, हक्कानी नेटवर्क और लश्कर-ए-तएबा प्रमुख हैं। यह रिपोर्ट उस वक़्त आई है, जब पाकिस्तान तालिबान और अफगान सरकार के बीच ताल-मेल कायम कराने के प्रयास का दावा कर रहा है। इस रिपोर्ट में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की अपेक्षाओं के अनुरूप पाकिस्तान के कुछ कदम उठाने का जिक्र भी किया गया है।

अमेरिका की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि नई सरकार बनने के बाद आतंवादियों और उनके संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की जो घोषणाएँ की गई थीं, उन्हें ज़रा भी पूरा नहीं किया गया है। साथ ही पाकिस्तान में पल रहे ऐसे जिहादी संगठनों द्वारा पाकिस्तान के अन्दर अंजाम दिए गए हमलों का भी ज़िक्र है। बता दें कि पाकिस्तान ने हक्कानी नेटवर्क और तालिबान को अपनी गतिविधियाँ जारी रखने के लिए ज़मीन देकर खुली छूट दे रखी है।

एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से यह जानकारी मिली है कि अमेरिका की इस रिपोर्ट में भारत-पाक संबंधों पर भी टिप्पणी की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अधिकारी इस बात से चिंतित हैं कि सोशल मीडिया और व्हाट्सएप जैसे मैसेजिंग एप के ज़रिए लोगों को आतंकवादी बनाने को लेकर काम तेज़ी से चल रहा है। इस सम्बन्ध में भारतीय अधिकारियों ने इन वैश्विक सोशल मीडिया कम्पनियों के प्रतिनिधियों से भी मुलाक़ात की है।

इस अमेरिकी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत अपनी सीमा के इर्द-गिर्द सभी आतंकवादी ठिकानों को नष्ट कर देगा, वहीं भारतीय नेतृत्व ने अमेरिका और समान विचार वाले अन्य सभी देशों के साथ मिलकर आतंकवादी हमलों को रोकने और दोषियों को न्याय के कटघरे में खड़ा करने की इच्छा जताई है।

Pak की लड़कियाँ-लड़के शेयर कर रहे अपनी न्यूड तस्वीरें, रबी पीरजादा के सेक्स वीडियो के बाद नया तमाशा

जब से पाकिस्तानी गायिका रबी पीरजादा की न्यूड तस्वीरें वायरल हुई हैं, तब से इसे लेकर वहाँ चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोगों का कहना है कि पाकिस्तानी सेना ने ही पीरजादा की इन तस्वीरों को वायरल किया है क्योंकि उन्होंने पाक फ़ौज के ख़िलाफ़ बयान दिया था। अब लोग पीरजादा के समर्थन में अपनी अर्धनग्न तस्वीरें ख़ुद पोस्ट कर रहे हैं। नमूने के रूप में आप इस तस्वीर को देख सकते हैं, जहाँ फौज़िया इलियास नामक महिला ने ‘आई एम रबी पीरजादा के एक समर्थक का फोटो शेयर किया है:

रबी पीरजादा के समर्थन में पाकिस्तान के पुरुषों व महिलाओं ने शुरू किया अजीब ट्रेंड

अगर आप फौजिया इलियास की फेसबुक प्रोफाइल पर जाएँगे तो आपको और भी कई ऐसी तस्वीरें मिल जाएँगी, जहाँ महिलाएँ व पुरुष अपनी सेमी-न्यूड तस्वीरें पोस्ट कर के रबी पीरजादा का समर्थन कर रहे हैं। नीचे संलग्न किए गए ट्वीट में आप ऐसी कुछ तस्वीरों को देख सकते हैं। हालाँकि, हमनें सभी तस्वीरों को इस लेख में जगह नहीं दी है क्योंकि कई आपत्तिजनक भी हैं।

दरअसल, शुक्रवार (नवंबर 1, 2019) तड़के पीरज़ादा की नग्न तस्वीरें और वीडियो लीक हो गए थे। दिलचस्प बात यह है कि पीरज़ादा ने नीलम मुनीर पर फिल्माए गए, पाकिस्तानी सेना प्रायोजित फिल्म ‘Kaaf Kangana’ में आइटम गीत के बाद अपने बचाव के लिए पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता (डीजीआईएसपीआर) आसिफ गफूर की आलोचना की, जो ट्विटर पर गफूर के नाम से हैं।

रबी पीरजादा साँप-मगरमच्छ के साथ वीडियो बना कर कश्मीर पर हमला करने की धमकी दी थी। इसके बाद एक अन्य फोटो में उन्होने आत्मघाती हमलावरों की तरह अपने शरीर से विस्फोटक बॉंध रखा था। वैसे यह स्पष्ट नहीं हुआ कि यह सुसाइड बेल्ट असली था या नकली! 2017 में पीरज़ादा ने बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान ख़ान की आलोचना की थी। उन्होंने सलमान ख़ान पर युवाओं को अपराधी बनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि सलमान युवाओं के बीच अपराध को बढ़ावा दे रहे हैं।

उखाड़ कर हटाई गई टीपू सुल्तान की इमारत: जहाँ रखी जाती थीं मिसाइलें, वहाँ लोग फेंकते हैं कचरा

18वीं सदी के मैसूर पर राज करने वाले टीपू सुल्तान के बिना कर्नाटक की राजनीति अधूरी है। जहाँ एक तरफ कॉन्ग्रेस उसे मसीहा मान कर उसकी पूजा करती है, वहीं दूसरी तरफ़ भाजपा सरकार ने उसके जयंती वाले सरकारी कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है। कर्नाटक के शिक्षा मंत्री ने पाठ्यक्रम से भी टीपू सुल्तान को हटाने की बात कही है। इस बीच एक नया खुलासा हुआ है। श्रीरंगपत्तनम में टीपू सुल्तान की एक शस्त्रशाला थी, जो रेलवे ट्रैक के आड़े आ रही थी। इसके बाद इस शस्त्रागार को वहाँ से हटा कर उसे किसी और जगह पर ट्रांसलोकेट कर दिया गया।

मैसूर और बंगलौर के बीच रेलवे ट्रैक बनाने के लिए ऐसा किया गया। पत्थरों से बनी इस शस्त्रशाला में टीपू सुल्तान अपने और सेना के अस्त्र-शस्त्र व हथियारों को रखा करता था। इसमें गोला-बारूद भी रखे जाते थे। अपने 17 वर्षों के शासनकाल में वह शक्तिशाली मिसाइल और रॉकेट भी वहीं रखा करता था। मार्च 2017 में इसे उखाड़ कर इसके मूल जगह से 130 मीटर (390 फिट) दूर स्थापित कर दिया गया। साउथर्न रेलवे ने इस बाबत जानकारी देते हुए बताया कि शस्त्रागार को रेलवे के रास्ते से हटा दिया गया था।

श्रीरंगपत्तनम मैसूर से 20 किलोमीटर की दूरी पर है। यही वो जगह है जहाँ टीपू सुल्तान चौथे एंग्लो-मैसूर युद्ध में मारा गया था। टीपू मैसूर के सुल्तान हैदर अली का सबसे बड़ा बेटा था। अपनी मृत्यु से पहले वह कई बार अंग्रेजों पर विजय भी प्राप्त कर चुका था। उसने दक्कन में कई हिन्दू राजाओं से भी लड़ाइयाँ लड़ी, ताकि अपने राज्य की सीमाओं का विस्तार कर सके। इस शस्त्रगार का वजन 1000 टन है और ये 12 मीटर चौड़ा और 10 मीटर लम्बा है। ये लगभग एक वर्ग के आकार का है।

गर्मियों में टीपू सुल्तान श्रीरंगपट्टनम को अपनी राजधानी बना लेता था। वहाँ से ये शस्त्रगार 1.7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह 138 किलोमीटर के ‘रेलवे लाइन डबलिंग प्रोजेक्ट’ में बाधा बन रहा था, जिसके कारण इसे हटाया गया। इस शस्त्रागार को शिफ्ट न किए जाने के कारण रेलवे का ये डबलिंग प्रोजेक्ट क़रीब एक दशक तक अधर में लका रहा था। हालाँकि, कर्नाटक की सरकार ने इसकी अनुमति दे दी थी लेकिन इसके लिए रेलवे को ‘नेशनल मोनुमेंट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ की अनुमति की भी ज़रूरत थी क्योंकि इस ढाँचे को ‘रेयर हेरिटेज’ की केटेगरी में रखा गया है।

भारत में इस तरह के ऑपरेशन काम ही हुए हैं। इसीलिए, रेलवे ने इसके लिए भारतीय इंजीनियरों के अलावा अमेरिकी एजेंसियों की भी मदद ली। इसे कोई क्षति न पहुँचे, इसीलिए इसे धीरे-धीरे 9 दिनों में ट्रांसलोकेट किया गया। इसमें कुल 14 करोड़ रुपए का ख़र्च आया। हालाँकि, इसे एएसआई ने ‘प्रोटेक्टेड मोन्यूमेंट’ का दर्जा दिया हुआ है लेकिन यहाँ सिक्योरिटी गार्ड न होने के कारण लोग इसमें ही कचड़ा फेंकने लगे हैं।

7 तरह के प्रदूषण रोधी मास्क बाजार में, दिल्ली-NCR में आपके लिए होगा यह BEST, एक है बिल्कुल फ्री

दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर बढ़ता ही जा रहा है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) रिकॉर्ड स्तर को भी पार कर गया है। आसमान में छाए काले धुएँ के चलते सुबह से ही लोगों को आँखों में जलन, भयंकर सिर दर्द और साँस लेने में तकलीफ हो रही है। ऐसे में प्रदूषण रोधी मास्क ही गैस चेंबर बने दिल्ली-एनसीआर में लोगों की सुरक्षा के लिए सबसे उपयुक्त चीज है। 

मगर प्रदूषित हवा में साँस लेने से बचने के लिए अच्छे क्वालिटी का मास्क लेना बेहद जरूरी है, ताकि आप ‘विषपान’ की स्थिति वाले दिल्ली-एनसीआर में अपनी सेहत का ख्याल रख सकें। इसके बारे में क्लीनिकऐप की सीईओ सतकाम दिव्य ने इंडियन एक्सप्रेस पर विस्तार से बताया है।

उनका कहना है कि हवा में इतने जहरीले कण हैं कि वो सीधे साँस के जरिए आपके भीतर जाकर फेफड़ों को प्रभावित कर रहे हैं। धूल के कणों में मौजूद खतरनाक रसायन सीधे श्वास प्रणाली को नुकसान पहुँचा रहे हैं। जिसकी वजह से साँस लेने में समस्या होती है। वायु प्रदूषण के प्रभाव के सामान्य लक्षणों में उल्टी, मतली, चक्कर आना और खाँसी शामिल है।

उन्होंने कहा, “प्रदूषित हवा के संपर्क में लंबे समय तक रहने वाले लोग ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, घुटन और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्शन एयरवे के प्रति संवेदनशील होते हैं। इसके अलावा, ऐसे लोगों में हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम भी बढ़ जाते हैं। लोगों में त्वचा संक्रमण और बालों के झड़ने की समस्या भी बढ़ जाती है। इससे फेफड़े का कैंसर और किडनी खराब होने जैसे खतरे बढ़ जाते हैं।”

ऐसा देखा जा रहा है कि बहुत से लोग अनजाने में सर्जिकल मास्क पहनकर घर से निकल रहे हैं जो कि ठीक नहीं है क्योंकि ऐसे मास्क सिंगल यूज यानी एक ही बार इस्तेमाल के लिए होते हैं। N95 और N99 सबसे अधिक माँग वाले मास्क हैं। इसके अलावा भी कुछ अन्य मास्क हैं, जिनके बारे में आपको अवश्य पता होना चाहिए।

N95 मास्क

यह बेसिक प्रदूषण प्रतिरोधी मास्क है जो कि 95 फीसदी तक प्रदूषण को फिल्टर करता है। यह मास्क धूल के कणों में सूक्ष्म तौर पर मौजूद पीएम 2.5 तक के कणों को फिल्टर करता है। इस मास्क में तीन लेयर होते हैं जो धूल के कणों को फिल्टर करते हैं। पहला फिल्टर धूल के कणों को रोकता है। दूसरा फिल्टर धूल के सूक्ष्म कणों और रोगाणुओं को रोकता है। इसमें तीसरा सैन्य ग्रेड कार्बन फिल्टर होता है। यह मास्कर 0.3 से 2.5 तक के सूक्ष्म धूल कणों को फिल्टर करता है और वायरस और बैक्टीरिया से आपको बचाता है। इसे 2 से 3 दिन इस्तेमाल किया जा सकता है।

N99 और N100 मास्क

ये मास्क पीएम 2.5 तक प्रदूषण को फिल्टर करते हैं। यानी की अगर आप ये वाले प्रदूषण रोधी मास्क खरीदते हैं तो 99 से 99.97 फीसदी तक प्रदूषण फिल्टर हो सकता है। लेकिन ये मास्क तेल आधारित धूल के कणों को फिल्टर नहीं कर पाते हैं। इसका इस्तेमाल 5 से 6 महीने के लिए किया जा सकता है।

P95 and R95 मास्क

इन मास्क का उपयोग प्राय: औद्योगिक क्षेत्रों में उच्च स्तर के प्रदूषकों को फिल्टर करने के लिए किया जाता है। पी-रेटेड मास्क तेल-आधारित प्रदूषकों के लिए प्रतिरोधी है, जबकि आर-रेटेड मास्क तेल-आधारित दूषित पदार्थों को फिल्टर करने में असमर्थ हैं। पी मास्क, एन मास्क की तुलना में महँगा है और इसे अक्सर बदलने की आवश्यकता होती है। इसका इस्तेमाल 8 घंटे के लिए किया जा सकता है।

टोटोबोबो मास्क

वायु प्रदूषण के बढ़ते महामारी से निपटने के लिए बनाया गया यह एक उच्च तकनीक वाला प्रदूषण रोधी मास्क है। हालाँकि यह आमतौर पर उपलब्ध नहीं है। यह अनेक साइजों में उपलब्ध है और इसका इस्तेमाल बार-बार किया जा सकता है।

रेस्प्रो मास्क

रेस्प्रो मास्क PM 10 पर कुशलतापूर्वक प्रदूषित कणों को फिल्टर करता है। यह मास्क एथलीटों या खिलाड़ियों के लिए अनुकूल हैं। यह मुख्यतया तीन साइजों में उपलब्ध है और इसका इस्तेमाल 69 घंटों के लिए किया जा सकता है।

वहीं, यदि आपको साँस लेने में समस्या हो रही है या फिर घुटन महसूस कर रहे हैं तो आपको गीले कपड़े का मास्क का उपयोग करना चाहिए। ये प्रदूषित हवा को आपके साँस में जाने से रोकेगा।

‘अवैध प्रवासियों का पता लगाना है तत्काल आवश्यकता, NRC पर मीडिया कर रही गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग’

राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन चुके नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई ने बड़ा बयान दिया है। एनआरसी की आलोचना करने वालों पर निशाना साधते हुए जस्टिस गोगोई ने मीडिया घरानों की गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मीडिया के कुछ हिस्सों की गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग के चलते इस मुद्दे को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिसके चलते स्थिति खराब हो गई।

‘पोस्ट कोलोनियल असम’ नामक पुस्तक के विमोचन के दौरान एक कार्यक्रम में दिए अपने संबोधन में रंजन गोगोई ने एनआरसी पर कहा, “यह मुद्दा सिर्फ 19 लाख या 40 लाख के आँकड़े की बात नहीं है, आने वाले समय में लोग इसको भविष्य का आधार बना सकते हैं। यह भविष्य के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है।” जस्टिस गोगोई ने कहा कि यह चीज़ों को बेहतर ढंग से करने का एक मौका है।

गैरकानूनी रूप से रह रहे प्रवासियों के ऊपर कार्रवाई करने वाले इस प्रस्ताव के समर्थन में बोलते हुए जस्टिस गोगोई ने इस कदम को ज़रूरी बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में अवैध तरीके से रह रहे प्रवासियों की संख्या पता लगाने की तत्काल आवश्यकता है। यही एनआरसी का एक ज़रूरी हिस्सा भी है। उन्होंने इस पर भी जोर दिया कि एनआरसी के ज़रिए अब तक कितना काम हो पाया है, इस पर भी ध्यान दिया जाए।

बता दें कि एनआरसी एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर लम्बे समय से देश में एक व्यापक बहस छिड़ी हुई है। सितम्बर में गृहमंत्री अमित शाह ने एक बयान के ज़रिए कहा था कि देश भर में एनआरसी लागू करने के साथ ही अवैध तरीके से रह रहे लोगों को बाहर निकला जाएगा। इस दौरान उन्होंने कहा था कि असम में जिन लोगों के नाम NRC में नहीं आए, उन्हें विदेशी न्यायाधिकरणों के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। साथ ही असम की सरकार ने ऐसे लोगों के लिए वकील मुहैया कराने की भी व्यवस्था की, जिससे उन पर वकील के खर्चे का बोझ न पड़े।

आतंकी इंजेक्शन देकर फैला रहे एड्स, WhatsApp मैसेज हो रहा वायरल: UP पुलिस ने बताया सच

पिछले दिनों व्हाट्सएप पर एक मैसेज काफी तेजी से वायरल हुआ। जिसमें कहा गया कि आतंकवादी लोगों को इंजेक्शन देकर एड्स फैला रहे हैं। हालाँकि यूपी पुलिस के अनुसार यह मैसेज फर्जी है। यूपी पुलिस के फैक्ट चेक ट्विटर हैंडल ने कहा कि वे इस रिपोर्ट का पूरी तरह से खंडन करते हैं। साथ ही उन्होंने लोगों से इस भ्रामक पोस्ट को शेयर नहीं करने का भी अनुरोध किया।

दरअसल उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ एक्सप्रेस नाम के एक मीडिया आउटलेट ने यूपी पुलिस से वायरल हो रहे मैसेज की सत्यता की जाँच करने के लिए कहा था। बता दें कि वायरल मैसेज में लिखा था, “अगर आपके घर कुछ लड़के-लड़कियाँ आते हैं और कहते हैं कि वो मेडिकल के स्टूडेंट हैं और आपका शूगर या बीपी या कोई अन्य ब्लड टेस्ट फ्री में करने के लिए बोलते हैं तो आप तुरंत पुलिस को फोन करें क्योंकि वो आतंकवादी संगठन के लोग हैं और उनके इंजेक्शन में एड्स का वायरस है जो वो ब्लड लेने के बहाने आपके शरीर में डाल देंगे। किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने घर में न घुसने दें। जनहित में जारी।”

इस मैसेज को अधिक से अधिक शेयर करने के लिए भी कहा जा रहा था। जाँच के बाद यूपी पुलिस ने पुष्टि की है कि यह फर्जी खबर है। जो कुछ व्हाट्सएप ग्रुपों द्वारा फैलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि वे इस आरोप को पूरी तरह से नकारते हैं और लोगों से इस भ्रामक पोस्ट को शेयर न करने की अपील करते हैं।

वैसे यह पहली बार नहीं है जब यह संदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 2017 में भी इसी तरह का मैसेज वायरल हुआ था, जिसमें कहा गया था कि यह यूपी पुलिस द्वारा जारी किया गया है। लेकिन यूपी पुलिस ने ऐसी किसी भी एडवाइजरी को जारी करने की खबरों से इनकार कर दिया था।