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वायरल एटीएम चोर के तीनों कातिल रिहा, हाफिज सईद ने पीड़ित परिवार को माफी देने के लिए किया मजबूर

इसी साल अगस्त के आखिर में सोशल मीडिया में एक एटीएम चोर का वीडियो वायरल हुआ था। सलाहुद्दीन अयूबी नामक यह चोर पाकिस्तान का था। वीडियो में वह सीसीटीवी कैमरे की ओर देख जीभ निकालकर कैमरे को चिढ़ाने जैसी हरकत करता नजर आया था। फिर सितंबर के शुरुआत में खबर आई कि पाकिस्तानी पुलिस ने हिरासत में उसे इतना प्रताड़ित किया कि उसकी मौत हो गई। अब खबर यह है कि उसके तीनों कातिल रिहा कर दिए गए हैं। रिहाई आतंकी सरगना हाफिज सईद के दखल के बाद हुई है।

इससे पता चलता है कि भले दुनिया को झॉंसा देने के लिए पाकिस्तान ने हाफिज को जेल में बंद कर रखा हो, लेकिन उसके दबदबे में कोई कमी नहीं आई है। बताया जाता है कि हाफिज ने अयूबी के परिजनों को कातिलों को माफ करने के लिए मजबूर कर दिया था। इसके बाद अदालत ने तीनों को छोड़ दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पाकिस्तान पुलिस के तीन अधिकारियों पर अयूबी को हिरासत में प्रताड़ित करने का आरोप था। हाफिज सईद की मध्यस्थता के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जाहिद हुसैन बख्तियार ने तीनों आरोपित महमूदुल हसन, शफात अली और मतलूब हुसैन को बरी कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये पूरी कार्रवाई सईद के निर्देशों पर हुई। वीडियो वायरल होने के बाद मानसिक रूप से कमजोर अयूबी को रहीम यार खान की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। थर्ड डिग्री के इस्तेमाल के लिए बेहद कुख्यात पाकिस्तानी पुलिस की हिरासत में उसकी मौत ने पूरे मुल्क में आक्रोश पैदा कर दिया था। आरोपित पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग हुई थी। इसके बाद उच्चाधिकारियों ने घटना की जॉंच के आदेश देते हुए कहा था कि घटना में संलिप्त बख्शे नहीं जाएँगे।

हालाँकि मामला जब कोर्ट में पहुँचा तो पीड़ित परिवार के सामने अदालत ने तीन विकल्प रखे कि या तो वे खून के बदले आरोपितों से धन ले लें, या अल्लाह के नाम पर उन्हें माफ कर दें या फिर कानूनी लड़ाई के लिए आगे बढ़ें। लेकिन यहाँ परिवार ने पुलिसकर्मियों को माफ करने का विकल्प चुना।

इस संबंध में आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आरोपितों को बरी करवाने के लिए सईद ने मृतक के परिजनों से जेल में मुलाकात की थी, जहाँ उसने उन्हें पुलिसकर्मियों को माफ करने के लिए मजबूर किया। परिवार को राजी करने के लिए आरोपित पुलिसकर्मियों, उनके अधिकारियों और मृतक के परिजनों ने जेल में सईद के साथ कई बैठकें की, जिसके बाद समझौता संभव हुआ। खबरों के अनुसार जब अयूबी के पिता से इस मामले में संपर्क किया गया तो उन्होंने पुष्टि की कि परिवार ने सईद की ‘इच्छा’ पर पुलिसकर्मियों को माफ कर दिया है।

दिल्ली पहुँचा महाराष्ट्र का सियासी घमासान, शिवसेना ने कहा- सबसे बड़े दल को मौका दें गवर्नर

महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन पर तस्वीर अब तक साफ नहीं हुई है। सोमवार को दिल्ली में होने वाली दो मुलाकातों पर सबकी नजर टिकी है। भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुलाकात की है। वहीं, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गॉंधी और एनसीपी के मुखिया शरद पवार के बीच भी बैठक होनी है। इस बीच, शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा है कि गवर्नर सबसे बड़े दल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें।

288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में 105 सीटें जीतकर भाजपा सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी है। उसकी सहयोगी शिवसेना को 56 सीटें मिली हैं। लेकिन, शिवसेना ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद की मॉंग कर रही है। यही कारण है कि अब तक राज्य में नई सरकार का गठन नहीं हो पाया है। चुनाव में कॉन्ग्रेस को 44 और उसकी सहयोगी एनसीपी को 54 सीटों पर सफलता मिली है।

चुनाव नतीजों के बाद फडणवीस पहली बार दिल्ली में हैं। बताया गया है कि महाराष्ट्र में बारिश से किसानों को हुए फसल नुकसान के मसले पर चर्चा के लिए वे दिल्ली आए हैं। सूत्रों के अनुसार शाह के साथ बैठक में राष्ट्रीय आपदा राहत कोष के तहत मिलने वाली सहायता पर चर्चा हुई।

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वहीं, शिवसेना सांसद संजय राउत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ सोमवार को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाक़ात करेंगे। राज्यपाल से इस मुलाक़ात के सन्दर्भ में राउत ने कहा, “मैं उनसे सबसे बड़ी पार्टी को आमंत्रित करने और फिर अन्य पार्टियों को मौक़ा देने के लिए कहूँगा।” साथ ही उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवसेना का होगा और शपथ ग्रहण समारोह मुंबई के शिवाजी पार्क में होगा।

इससे पहले राउत ने कहा था कि ‘महाराष्ट्र के हित में’ में कॉन्ग्रेस और एनसीपी का समर्थन शिवसेना को मिल सकता है। हालॉंकि एनसीपी ने अब तक विपक्ष में बैठने के अपने स्टैंड से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं। वहीं, शिवसेना को समर्थन पर कॉन्ग्रेस में भी मतभेद साफ दिख रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील शिंदे और संजय निरुपम जैसे नेता इसके विरोध में हैं।

रविवार को औरंगाबाद में मीडियाकर्मियों द्वारा पूछे जाने पर कि क्या शिवसेना अकेले सरकार बनाएगी या अन्य दल भी शामिल होंगे, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा था, “आपको आने वाले दिनों में पता चलेगा।”

वहीं, शिवसेना के मुखपत्र सामना में रविवार को प्रकाशित अपने कॉलम रोक ठोक में राउत ने सरकार गठन के कई परिदृश्य सामने रखे थे। इसमें उन्होंने लिखा,

“बीजेपी सदन में बहुमत साबित करने में नाकाम रहने के बाद शिवसेना सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है। NCP, कॉन्ग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों की मदद से बहुमत का आँकड़ा 170 तक जाएगा। शिवसेना का अपना मुख्यमंत्री हो सकता है। उसे सरकार चलाने के लिए साहस दिखाना होगा।” 

सासंद राउत ने पार्टी के पास 170 से ज्यादा विधायकों का समर्थन होने का दावा किया। उनके मुताबिक ‘महाराष्ट्र के हित में’ शिवसेना के साथ कॉन्ग्रेस और एनसीपी आ सकते हैं। बकौल राउत शिवसेना को समर्थन का आँकड़ा 175 तक पहुँच सकता है। मुखपत्र सामना में रविवार को एक फ्रंट पेज स्टोरी भी की गई, जिसमें ‘किसी भी कीमत पर, राज्य में भाजपा की सरकार नहीं होनी चाहिए’ शीर्षक से लिखा गया था कि कॉन्ग्रेस और NCP ने भाजपा को सत्ता से बाहर रखने का फ़ैसला लिया है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सोनिया और पवार की मुलाकात में क्या खिचड़ी पकती है।

प्राचीन शिव मंदिर में अराजक तत्वों ने की शनि देव की मूर्ति खंडित, ग्रामीणों में आक्रोश

उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर के वैरा फिरोजपुर गाँव में शनिवार (अक्टूबर 2, 2019) की देर रात प्राचीन शिव मंदिर में स्थापित शनि देव की मूर्ति खंडित कर दी गई। सूचना मिलने के बाद रविवार (नवबंर 3, 2019) की सुबह ग्रामीणों में आक्रोश पनप गया और उन्होंने जमकर हंगामा किया।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार वैरा फिरोजपुर गाँव स्थित प्राथमिक विद्यालय में एक प्राचीन शिव मंदिर है। रविवार की सुबह रमेश नामक एक ग्रामीण सफाई करने गया तो उसे पीपल के वृक्ष के नीचे लगी शनिदेव की मूर्ति खंडित मिली। खंडित मूर्ति के बारे में सूचना मिलते ही भारी तादाद में ग्रामीण मंदिर परिसर में पहुँचे और उन्होंने वहाँ पर हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद मौक़े पर पहुँचे एसडीएस सुभाष सिंह, सीओ मनीष यादव व कोतवाली प्रभारी नरेंद्र कुमार शर्मा से गाँव वालों ने कार्रवाई की माँग की।

ग्रामीणों का आक्रोश शांत करवाने के लिए अधिकारियों ने आरोपितों पर कठोर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। लेकिन अभी तक घटना को अंजाम देने वाले शख्स के बारे में कुछ पता नहीं चल पाया है। खंडित मूर्ति को एसडीएम, सीओ, कोतवाली प्रभारी व रमेश की उपस्थिति में गंगा में प्रवाहित करवा दिया गया और टीम गठित करके पुलिस द्वारा मामले की जाँच भी की जा रही है।

एसडीएम का इस मामले पर कहना है कि पीपल के वृक्ष के नीचे स्थापित एक-डेढ़ फीट ऊँची शनिदेव की प्रतिमा को किसी शराबी ने खंडित कर दिया। गाँव वालों ने उन्हें बताया कि परिसर में अक्सर लोग शराब पीने आते हैं और खुराफात करते हैं। इसलिए अब इनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मामले की जाँच चल रही है।

गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले भी उत्तरप्रदेश के बिजनौर जनपद के कूकड़ा इस्लामपुर में कुछ शरारती तत्वों द्वारा शिव मंदिर में घुसकर मूर्तियाँ तोड़ने की खबर सामने आई थी। उस समय भी मामले की सूचना मिलने पर ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त हो गया था। जाँच में पता चला था कि शरारती तत्वों ने पहले मंदिर में घुसकर शिवलिंग, माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय, नंदी, समेत समस्त शिव परिवार की मूर्तियों को खंडित किया। बाद में भगवान शिव का त्रिशूल भी उखाड़ कर फेंक दिया और फिर फरार हो गए।

कमलेश तिवारी मर्डर: यूसुफ की रेकी पर लखनऊ आए हत्यारे, उसकी ही बताई दुकान से खरीदी सिम

कमलेश तिवारी हत्याकांड में सूरत, लखनऊ, बरेली, दुबई से तार मिलने के बाद अब कानपुर का नाम भी इस मामले में जुड़ता नजर आ रहा है। खबर है कि हत्यारोपियों को पिस्टल मुहैया कराने वाले युसूफ की रेकी पर ही दोनों हत्यारे कानपुर से लखनऊ गए थे। यूसुफ की बताई दुकान से ही दोनों ने सिम कार्ड और मोबाइल खरीदे थे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार फतेहपुर से धरा गया युसूफ काफी शातिर दिमाग है। वह लखनऊ और कानपुर दोनों जिलों से अच्छी तरह से वाकिफ है। कमलेश के हत्यारों अशफाक और मोइनुद्दीन को उसने ही दोनों जगहों की जानकारी दी थी। कानपुर में अपने रिश्तेदार के घर रुकने के दौरान वह कई रेलबाजार जाता रहता था। यहॉं उसने कान्हा टेलीकॉम में दो लड़कियों से जान-पहचान बढ़ाई और बाद में दोनों हत्यारों से कहा कि वे उसी दुकान से जाकर सिम खरीदें।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एटीएस को यूसुफ के लंबे समय से कानपुर आने-जाने की जानकारी है। युसूफ की बुआ और ताऊ के अतीत को खॅंगाल रही है। उसके कई दोस्तों की भी पड़ताल की जा रही है। बताया जा रहा है कि हत्यारों को पिस्टल मुहैया कराने और पैसे को लेकर यूसुफ बार-बार बयान बदल रहा है। कभी कह रहा है कि उसने 20 हजार में पिस्टल खरीदी तो कभी 50 हजार में। उसने हत्यारों को पिस्टल कब दी यह भी साफ नहीं है।

यूसुफ फिलहाल हत्या की साजिश में शामिल होने की बात से लगातार मुकर रहा है, लेकिन एटीएस और एसआईटी को शक है कि वह इस हत्याकांड में शामिल था। पूरे मामले में उसकी भूमिका भी इसी ओर इशारा कर रही है।

अभी तक सूचना सामने आई है कि अशफाक और मोइनुद्दीन जिस अपार्टमेंट में रहते थे, उसी में यूसुफ भी रहता था। इसी के चलते तीनों में आपस में बात होती थी। इस बीच दोनों हत्यारों को यूसुफ के आपराधिक घटनाओं में शामिल होने की सूचना मिली और कमलेश की हत्या की साजिश रच रहे दोनों आरोपितों ने युसूफ से पिस्टल के लिए संपर्क कर लिया। इसके बाद दोनों कानपुर से परिचित न होने के बावजूद भी युसूफ की मदद से वहाँ पहुँचे और रेलबाजार स्थित दुकान से हत्या को अंजाम देने के लिए मोबाइल व सिम कार्ड खरीदा।

यूसुफ के बारे में मिली जानकारी के अनुसार युसूफ का जुर्म की दुनिया से पुराना संबंध है। उसका पिता इशरत खान एक हिस्ट्रीशीटर है। जिससे परेशान होकर उसकी माँ अपने मायके में रहती थी। कुछ समय पहले ही शौहर से विवाद के कारण उसकी माँ ने खुदकुशी कर ली थी। इसके बाद यूसुफ बेखौफ होकर अपराधों को अंजाम देने लगा। रिश्तेदारों के साथ मिलकर एक गैंग तैयार किया जो वसूली का काम करता था। दूसरे गैंग से विवाद के चलते एक बार युसूफ घायल भी हुआ था, जिसके बाद वो अपने ननिहाल लौट गया। पूरी तरह ठीक होने के बाद वह सूरत चला गया। हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की 18 अक्टूबर को निर्मम हत्या कर दी गई थी।

दिन में गोवंश को बेहोशी का इंजेक्शन, रात में काट ले जाते थे दिल्ली: शाहिद, महफूज सहित 6 गिरफ्तार, 5 फरार

उत्तर प्रदेश के बागपत में पुलिस ने गोवंश का कटान और तस्करी करने के आरोप में 6 लोगों को पकड़ा है। इनके पॉंच साथी फरार हैं। आरोपितों के पास से चार बेसहारा गोवंश, एक महिंद्रा पिकअप, एक सेंट्रो, दो तमंचे, नशे के इंजेक्शन, 2 चॉपर, दो छुरे बरामद किए गए हैं। गिरफ्तारी रविवार (नवंबर 3, 2019) शाम को हुई।

पकड़े गए आरोपितों की पहचान शाहिद, महफूज, हनीफ, शाहरुख, आरिफ और शानू के रूप में हुई है। वहीं, फरार हुए आरोपितों में वसीम, मोमिन, जुल्फिकार,नौशाद और शहजाद का नाम शमिल है। 

इंस्पेक्टर आरके सिंह ने रविवार (नवंबर 3, 2019) को बताया कि मुखबिर की सूचना पर केएचआर इंटर कॉलेज लुहारी के पास से 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। पाँच आरोपित फायरिंग करते हुए यमुना खादर में फरार हो गए। उनके पिकअप गाड़ी से चार गोवंश बरामद किए हैं, जो आरोपित इधर-उधर भटक रहे बेसहारा गोवंश को नशे के इंजेक्शन लगाकर लाए थे।

आरोपितों का यह गिरोह दिल्ली का रहने वाला है जिसका सरगना जुल्फिकार उर्फ मुल्ला है। वह दिल्ली के मुस्तफाबाद का रहने वाला है। यह गिरोह गाजियाबाद, मेरठ, बागपत आदि जनपदों से गोवंश का कटान कर दिल्ली में मीट सप्लाई करता है। गिरोह के सदस्य दिन में जंगलों में घूमने वाले बेसहारा गोवंश को नशे के इंजेक्शन लगाकर बेहोश कर देते थे। रात के समय उनका कटान कर मीट दिल्ली ले जाते थे। यदि किसी कारणवश कटान न हो सके तो गोवंश को गाड़ी में लादकर दिल्ली ले जाते थे।

इंस्पेक्टर ने बताया कि 23 अक्टूबर को भी आरोपित दिल्ली से गाड़ी में लुहारी गाँव आए थे और दिन में पाँच गोवंश को नशे का इंजेक्शन लगाकर बेहोश कर दिया था। उसके बाद रात को पाँचों का कटान कर मीट ले गए थे, जबकि अवशेष वहीं पर फेंक दिए थे। आरोपितों से पूछताछ की जा रही है।

बता दें कि इससे पहले भी पुलिस ने पीलीभीत में गोकशी कर रहे तीन गोतस्करों- नदीम, अजीज वसीम और सुहेल को गिरफ्तार किया था। जबकि गोतस्कर राजू और अजीज अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले थे। पुलिस ने मौके से अधकटी गाय व माँस काटने के उपकरण बरामद किए थे।

अयोध्या भूमि विवाद पर फैसले से पहले प्रशासन सतर्क: लाउडस्पीकर, विजयोत्सव पर पाबंदी

अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से पहले अयोध्या के ज़िलाधिकारी ने 30 बिंदुओं वाला आदेश जारी किया। इस आदेश में कई तरह की रोक लगाई गई है। इसके मुताबिक सार्वजनिक या निजी स्थान पर कार्यक्रम आयोजित कर कुछ ऐसा करना जिससे भावनाएँ भड़के, शस्त्र उपयोग पर प्रतिबंध, तेज़ाब या कोई और विस्फोटक की श्रेणी में आने वाली वस्तु और कंकड़ पत्थर इकट्ठा करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। बिना अनुमति किसी तरह का विजयोत्सव नहीं निकाला जा सकता। साथ ही लाउडस्पीकर के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया। सोशल मीडिया पर देवी-देवताओं के लिए कुछ भी अपमानजनक लिखने पर कड़ाई की जाएगी। मंदिर/मस्ज़िद के नाम पर कुछ भी भड़काऊ कार्यक्रम करने पर प्रतिबंध लगाया गया है।

यह आदेश 31 अक्टूबर को अयोध्या के ज़िला मजिस्ट्रेट अनुज कुमार झा द्वारा जारी किया गया, आदेशानुसार 28 दिसंबर तक सीआरपीसी की धारा-144 लागू रहेगी। आईपीसी की धारा-188 (लोक सेवक द्वारा एक आदेश की अवज्ञा) के तहत उल्लंघनकर्ताओं के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया जाएगा।

ख़बर के अनुसार, आदेश में कहा गया है कि इंस्टाग्राम, ट्विटर और व्हाट्सएप जैसे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर महान हस्तियों, देवी-देवताओं पर कोई भी अपमानजनक टिप्पणी करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा, ज़िला प्रशासन की अनुमति के बिना किसी भी देवता की किसी भी मूर्ति की स्थापना नहीं होगी।

आदेश में कहा गया है कि इस अवधि के दौरान त्योहारों और अन्य घटनाओं को देखते हुए प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिसमें छठ पूजा, कार्तिक पूर्णिमा, पंचकोसी परिक्रमा, चौधरी चरण सिंह की जयंती, गुरु नानक जयंती, गुरु तेग बहादुर शाहिद दिवस, ईद-उल-मिलाद और क्रिसमस शामिल हैं। ।

यह आदेश, जिसे पहली बार 10 अक्टूबर को सार्वजनिक किया गया था, उसे अब 30 विस्तृत निर्देशों के एक सेट के साथ संशोधित किया गया है जिन्हें नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ शेयर किया जा रहा है। इसमें रामजन्मभूमि पर किसी भी कार्यक्रम, सार्वजनिक कार्यक्रम, जुलूस, रैली और दीवार पेंटिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

कोई भी व्यक्ति एसिड या ऐसी कोई भी वस्तु को साथ में नहीं रख सकता जिसमें शक्तिशाली विस्फोटक पदार्थ या रासायनिक सूत्र शामिल हो। इसके अलावा, कोई भी व्यक्ति अपने साथ कंकड़, पत्थर टूटे हुए काँच के टुकड़े और यहाँ तक ​​कि खाली बोतलें भी साथ नहीं रख सकता। इस दौरान अयोध्या में किसी भी कार्यक्रम, रैली, सड़क के किनारे बैठक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर पूर्ण प्रतिबंध भी रहेगा।

आदेश में अयोध्या के निवासियों को दूध, दाल, चावल, तेल, आलू, प्याज और अंडे जैसी दैनिक वस्तुओं को जमा नहीं करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा, मांसाहारी पदार्थ को सार्वजनिक स्थान पर फेंकने पर प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा, इस अवधि के दौरान कार्तिक पूर्णिमा, चौदहकोसी और पंचकोसी परिक्रमा मेले में मांस, मछली और अंडे की कोई बिक्री या खपत नहीं होगी।

चुनाव चौखट पर फिर भी झारखंड में आपस में ही लड़ रहे विपक्षी दल, कॉन्ग्रेस गुटबाजी से त्रस्त

झारखंड में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। राज्य की 81 सीटों पर पाँच चरणों में चुनाव कराए जाएँगे। नतीजे 23 दिसंबर को आएँगे। बावजूद इसके न तो विपक्षी गठबंधन और न ही कॉन्ग्रेस का अंतर्कलह समाप्त होता दिख रहा है। झारखंड प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष रामेश्वर उरांव ने कहा है कि गुटबाजी अब भी पार्टी के लिए चुनौती बनी हुई है।

दूसरी ओर, विपक्षी गठबंधन भी अब तक आकार नहीं ले पाया है। लोकसभा चुनाव कॉन्ग्रेस, झामुमो, झाविमो और राजद ने मिलकर लड़ा था। लेकिन, फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं दिख रही। झाविमो राज्य की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। आठ नवंबर को वह पहली सूची जारी कर सकता है। कॉन्ग्रेस महागठबंधन में झाविमो को बनाए रखने के पक्ष में है। वहीं, राजद 14 सीटों की मॉंग कर रहा है, जबकि झामुमो उसे चार-पॉंच से ज्यादा सीटें देने को तैयार नहीं है।

रामेश्वर उरांव ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा कि कॉन्ग्रेस में गुटबाजी अभी भी एक चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य में नेताओं को निस्वार्थ और स्वेच्छा से काम करने की आवश्यकता है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले के पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार ने भी गुटबाजी का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दिया था और कहा था कि वो पार्टी को एकीकृत और जिम्मेदार तरीके से आगे ले जाना चाहते थे, लेकिन चंद लोगों के निहित स्वार्थों के कारण ऐसा नहीं कर सके। अजय कुमार ने सोनिया और राहुल गॉंधी सहित 10 कॉन्ग्रेस नेताओं को भेजे अपने इस्तीफे में पार्टी के अपने सहयोगियों को अपराधियों से भी बदतर बताया था।

अजय कुमार द्वारा पार्टी पर लगाए गए गुटबाजी के आरोप पर जब रामेश्वर उरांव से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हाँ, यह एक चुनौती है। बता दें कि अजय कुमार ने अपने इस्तीफा पत्र में अन्य कई नेताओं के साथ ही उरांव पर भी राजनीतिक पदों को हथियाने का आरोप लगाया था। लेकिन उरांव का कहना है कि वो किसी गुट के लिए नहीं, बल्कि सोनिया गाँधी के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए काम करते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी को उनकी सेवाओं की जरूरत है और यह निस्वार्थ और स्वैच्छिक होना चाहिए। तभी पार्टी आगे बढ़ेगी।

वहीं विपक्षी दलों के बीच गठबंधन और सीट बँटवारे को सार्वजनिक नहीं किए जाने के सवाल पर रामेश्वर उरांव ने इसे पार्टी की रणनीति का हिस्सा बताते हुए बात करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान विपक्ष कुछ बातों पर सहमत हो गया था और इसे जारी रखा गया है।

जब उनसे पूछा गया कि महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने अपनी पूरी ताकत के साथ लड़ाई नहीं लड़ी थी और उसकी मानसिकता हार मानने वाली थी। तो झारखंड में क्या स्थिति है? उरांव ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा, “यह सही है, लेकिन झारखंड की स्थिति अलग है। बीजेपी ने राज्य के संसाधनों का दुरुपयोग किया है और इसका असर चुनाव में दिखेगा। हम पूरी ताकत से लड़ेंगे।”

इसके साथ ही प्रदेश में महागठबंधन में भी प्रेशर पॉलिटिक्स (दबाव की राजनीति) चरम पर है। झारखंड मुक्ति मोर्चा अधिक सीटों की जिद पर अड़ा है, तो कॉन्ग्रेस झाविमो के बगैर एक कदम आगे बढ़ने को तैयार नहीं है। राजद और वामपंथी भी अपना-अपना राग अलाप रहे हैं। इस बीच राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की कमान थाम ली है।

वैसे देखा जाए तो झारखंड में विधानसभा चुनाव के परिणाम हमेशा से ही राजनीतिक दलों को अप्रत्याशित नतीजे देते रहे हैं, लेकिन जैसा उलटफेर 2014 के विधानसभा में हुआ है वैसा कभी नहीं हुआ। चार पूर्व मुख्यमंत्री और एक उप मुख्यमंत्री अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में जीत हासिल नहीं कर सके थे। अब देखना होगा कि आगामी चुनाव में राजनीतिक पार्टियों के बीच की सरगर्मियाँ कितनी बढ़ती है और इस बार किस तरह का राजनीतिक समीकरण निकल कर बाहर आता है।

जहाँ है करतारपुर गुरुद्वारा, वहीं आतंकी कैंप चला रहा है पाकिस्तान: खुफिया रिपोर्ट

करतारपुर कॉरिडोर का 9 नवंबर को उद्धाटन होना है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले में यह गुरुद्वारा है। खुफिया इनपुट के मुताबिक इस जिले में कई आतंकी कैंप चल रहे हैं। मीडिया रिपार्टों के अनुसार नारोवाल जिले में कई आतंकी कैंप चल रहे हैं। खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार ये कैंप पाकिस्तानी पंजाब के मुरीदके, शाकरगढ़ और नारोवाल में हैं। बताया जा रहा है कि कैंपों में काफी तादाद में पुरुष और महिला रहते हैं और ट्रेनिंग ले रहे हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में सीमा प्रबंधन को लेकर की गई आला अधिकारियों की ज्वाइंट मीटिंग के बाद ये जानकारी निकलकर सामने आई है। कहा जा रहा है इस कदम के पीछे पाक का उद्देश्य सिख भावना को ठेस पहुँचाकर खालिस्तानी एजेंडे को समर्थन देना हो सकता है।

यह भी आशंका है कि करतारपुर कॉरिडोर का इस्तेमाल ड्रग स्मगलर्स और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल लोग पाकिस्तानी सिम कार्ड्स के जरिए कर सकते हैं। पंजाब में सीमा की सुरक्षा में तैनात एक एजेंसी ने राजस्थान के जिलाधिकारी की तर्ज पर पंजाब पुलिस से पाकिस्तानी सिम कार्ड्स के इस्तेमाल और नेटवर्क को बैन करने का अनुरोध किया है।

इस खबर के अलावा पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी इस कॉरिडोर खोलने को खोलने के भी पीछे पाक के नापाक इरादों पर शक जताया है। अमरिंदर सिंह ने कहा कि बाकी सिखों की तरह वह भी करतारपुर साहिब गुरुद्वारा में नतमस्तक होने के बारे में सोचकर बहुत खुश हैं। यह हमेशा ही उनके अरदास का हिस्सा रहा है। हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनको अभी भी पाकिस्तान की मंशा पर शक है। उनका कहना है कि कॉरिडोर खोलने के पीछे आईएसआई का एजेंडा हो सकता है।

अमरिंदर ने कहा था कि इसका उद्देश्य जनमत-संग्रह 2020 के लिए सिख भाईचारे को प्रभावित करना हो सकता है, जिसे सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के अंतर्गत बढ़ावा दिया जा रहा है। कॉन्ग्रेस नेता का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा कॉरिडोर और गुरु नानक के नाम पर यूनिवर्सिटी शुरू करने जैसे फैसलों पर भारत को पूरी तरह से सतर्क और सक्रिय रहने की जरूरत है।

हरियाणा-पंजाब में पराली जलाने से उठा जानलेवा धुआँ बिहार में क्यों नहीं उठता

पिछले कुछ दिनों में राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण का स्तर काफ़ी बढ़ गया है। लगातार इस बढ़ते प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह पंजाब और आसपास के राज्यों में जलाई जाने वाली पराली है। दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के मद्देनज़र दिल्ली सरकार ने स्कूलों और मोहल्ला क्लिनिकों में मुफ़्त मास्क बाँटने की घोषणा भी की।

दिल्ली-NCR में इस दम घोंटू वातावरण में ख़तरनाक स्तर पर पहुँचे प्रदूषण की वजह से वजह से दिल्ली में लगभग स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति है। पराली का धुआँ और धूल के महीन कणों की वजह से दिल्ली-NCR की हवा इस क़दर ज़हरीली हो गई है कि साँस लेना तक दूभर हो गया है।

हैरान कर देने वाले हैं हवा में घुले ज़हर के मामले

पंजाब में इस साल 23 सितंबर से 27 अक्‍टूबर के बीच पराली जलाने के 12,027 मामले रिकॉर्ड किए गए हैं, जो पिछले साल इसी दौरान पराली जलाने की घटनाओं से 2,427 ज्‍यादा हैं। वहीं, हरियाणा की बात करें तो इस साल 3,705 पराली जलाने के मामले रिकॉर्ड किए गए, जो पिछले साल 3,705 थे। इतना ही नहीं, पिछले 24 घंटे में ही पराली जलाने के 2,577 मामले रिकॉर्ड किए जा चुके हैं। इससे एक दिन पहले पराली जलाने के 1,654 मामले सामने आए थे। हालाँकि, अधिकारियों का कहना है कि धान की रोपाई जल्‍दी होने के कारण वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। बता दें कि पराली जलाना भारतीय दंड संहिता और वायु प्रदूषण नियंत्रक क़ानून, 1981 के तहत एक अपराध है। बावजूद इसके पंजाब और हरियाणा में किसान पराली जलाने में पीछे नहीं हैं।

यह सारी दिक्कतें केवल इसलिए है क्योंकि हरियाणा और पंजाब जैसे समृद्ध राज्य फ़सलों की कटाई के बाद पराली जला देते हैं। बता दें कि इन समृद्ध राज्यों में फ़सलों की कटाई मशीनों से की जाती है। अब चूँकि फ़सलों की कटाई मशीन से की जाती है इसलिए फ़सल कटाई के दौरान मशीन बाली को ज़मीन से नहीं बल्कि ऊपर से काटती है। इससे होता यह है कि बाक़ी का हिस्सा खेत में ही बच जाता है, जिसे बाद में व्यर्थ हिस्से के रूप में जला दिया जाता है और फिर इसका परिणाम होता है यह दम घोंटू प्रदूषण।

बिहार में पराली जलाने की नौबत ही नहीं आती

इन सब बातों में ग़ौर करने वाली बात यह है कि एक ओर जहाँ यूपी, हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने से प्रदूषण की समस्या सामने आती है, वहीं बिहार, झारखंड, असम, ओडिशा जैसे राज्य में पराली नहीं जलाई जाती। वहाँ के किसान अभी भी पुरानी पद्धति से ही फ़सलों की कटाई करते हैं। मतलब यह है कि फ़सल को काटते समय किसान फ़सल की बाली को ज़मीन से काटते हैं और इसलिए व्यर्थ हिस्से के रूप में कुछ बचता ही नहीं है। दूसरी अहम बात यह है कि बिहार में किसान वर्ग पराली का उपयोग मवेशियों के लिए चारे के रूप में भी करते हैं, इसलिए वहाँ पराली जलाने की नौबत ही नहीं आती।

दरअसल, छोटे किसान हमेशा पौधे के हर हिस्से का उपयोग करते हैं क्योंकि यह उनके लिए किफ़ायती साबित होता है। बड़े खेतों के मालिकों के लिए किफ़ायती विकल्प कोई मायने नहीं रखते। लेकिन बिहार के किसान छोटी-छोटे विकल्पों का भी पूरा ध्यान रखते हैं। चारे के रूप में उपयोग किया जाने वाला भूसा उनके मवेशियों के लिए प्रमुख भोजन है।

मशीनीकरण इस जानलेवा धुएँ का कारण?

यह सच है कि मशीनों से फ़सलों की कटाई के दौरान ठूँठ से कहीं अधिक आकार का हिस्सा छूट जाता है, जिसे जलाना पड़ता है। वहीं, एक और बात ग़ौर करने वाली है कि अगर मशीनों से कटाई न भी हो तो हरियाणा और पंजाब में किसान गाय-भैंस कम पालते (ट्रैक्टर आधारित खेती) हैं, ऐसे में पराली के इस्तेमाल को कोई विकल्प नहीं रह जाता। इस वजह से वो व्यर्थ की वस्तु बनकर रह जाती है जिसे जलाना ही आर्थिक रूप से उनके हित में होता है।  

सोशल मीडिया पर भी पराली जलाने का मुद्दा काफ़ी ज़ोर पकड़े हुए है। यहाँ कई यूज़र्स ऐसे हैं जो इस बात से इत्तेफाक़ रखते हैं कि बिहार में फ़सलों की कटाई के लिए आज भी पुरानी पद्धति का ही इस्तेमाल होता है। ट्विटर यूज़र राजू दास ने लिखा कि धान सभी जगह उगाया जाता है, लेकिन हर जगह पराली को जलाया नहीं जाता है। उदाहरण के लिए असम में केवल धान उगाया जाता है, गेहूँ या अन्य अनाज नहीं उगाया जाता। लेकिन, असम में पराली नहीं जलाई जाती।

मशीनों के इस्तेमाल से परहेज नहीं, लेकिन हवा घुले ज़हर की रोकथाम पहले

कुल मिलाकर अगर कहा जाए कि दिल्ली-NCR में सफेद चादर के रूप में फैला दम घोंटू धुआँ मशीनी पद्धति की देन है, जिसके इस्तेमाल से आम जनजीवन दूभर बना हुआ है। हालाँकि, इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है कि हमें तकनीकों से परहेज कर लेना चाहिए।

लेकिन, जब मशीनों का इस्तेमाल जानलेवा बनने लगे तो उस पर गहनता से विचार ज़रूर कर लेना चाहिए। साथ ही यह भी निष्कर्ष निकालने का प्रयास करना चाहिए कि मशीनी युग अगर किसानों को खेती करने के सरलतम उपाय दे रहा है तो उसके उचित उपयोग पर भी ग़ौर कर लेना चाहिए, ताकि हवा में घुले इस ज़हर की रोकथाम की जा सके।

SRK ने ख़ुद को जन्मदिन विश करने के लिए खर्च कर दिए ₹2 करोड़? सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ ख़ान ने शनिवार (नवंबर 2, 2019) को अपना 54वाँ जन्मदिन मनाया। इस दौरान उनके घर ‘मन्नत’ के सामने उनके प्रशंसकों की भारी भीड़ जमा हो गई और उन्होंने शाहरुख़ को जन्मदिन की बधाई दी। सोशल मीडिया पर भी कई अभिनेता-अभिनेत्रियों ने उन्हें शुभकामनाएँ दी। उनकी जन्मदिन पार्टी में कई हस्तियाँ पहुँचीं। लेकिन, सबसे ज्यादा ध्यान बुर्ज खलीफा पर शाहरुख़ को जन्मदिन की शुभकामनाएँ दिए जाने की लाइटिंग ने खींचा। बुर्ज खलीफा को दुबई की पहचान माना जाता है और ये दुनिया की सबसे ऊँची बिल्डिंग है। अक्सर ख़ास मौक़ों पर इस बिल्डिंग में रंग-बिरंगी लाइटिंग की जाती है।

शाहरुख़ ख़ान के जन्मदिन के अवसर पर बुर्ज खलीफा पर लिखा था- ‘हैप्पी बर्थडे टू दी किंग ऑफ बॉलीवुड शाहरुख़ ख़ान’। दुनिया की सबसे ऊँची इमारत ने शाहरुख़ ख़ान को लेकर एक फाउंटेन शो भी दिखाया, जिसे कई फैंस ने अपने मोबाइल फोन में कैप्चर किया। ख़ुद शाहरुख़ इससे अभिभूत नज़र आए और उन्होंने इसके लिए दुबई की सरकार को धन्यवाद दिया। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि वो दुबई से काफ़ी प्यार करते हैं। वरिष्ठ अभिनेता ऋषि कपूर ने भी शाहरुख़ की पहली फ़िल्म ‘दीवाना’ को याद किया, जिसमें उन्होंने भी काम किया था।

इधर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने ये जानने की कोशिश की कि क्या दुबई के बुर्ज खलीफा पर कमर्शियल तरीके से एड कराया जाता है? ऐसा इसीलिए, क्योंकि ‘अरब बिजनेस’ के एक लेख में बताया गया है कि बुर्ज खलीफा पर कितने मिनट के शो के लिए कितने रुपए लगते हैं। बुर्ज खलीफा की दीवार पर 3 मिनट के प्रोमोशनल फ़्लैश शो के लिए 68,073 डॉलर देने पड़ते हैं। वहीं रात को 8 बजे से 10 बजे के बाच दो से तीन मिनट के एड के लिए 5 लाख यूएई दिरहम देने होते हैं। भारतीय रुपए में ये रक़म 96 लाख के क़रीब होती है।

वहीं वीकेंड्स पर बुर्ज खलीफा का रेट बढ़ जाता है। इस दौरान साढ़े 3 लाख यूएई दिरहम ख़र्च करने होते हैं। अगर किसी को पाँच मिनट के लिए दुनिया की सबसे ऊँची इमारत पर कुछ प्रचार करवाना है या फिर कुछ फ़्लैश कराना है तो इसके लिए 10 लाख यूएई दिरहम तक देना पड़ सकता है। ऐसे में ये सवाल उठना लाजिमी है कि क्या शाहरुख़ ख़ान ने शनिवार के दिन वीकेंड्स पर अपना नाम फ़्लैश कराने के लिए 1.92 करोड़ रुपए ख़र्च किए? यह हम नहीं सोशल मीडिया यूजर्स पूछ रहे हैं। सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा को देखें तो बहुतों का यहाँ तक कहना है कि शाहरुख़ ने ख़ुद को ही जन्मदिन विश करने के लिए 1.92 करोड़ रुपए ख़र्च कर दिए।

शाहरुख़ ख़ान को दुनिया के सबसे अमीर अभिनेताओं में से एक माना जाता है। वह कई सालों तक दुनिया के सबसे ज्यादा संपत्ति वाले अभिनेताओं की सूची में टॉप पर रहे हैं। ऐसे में लोगों का ये कयास लगाना लाजिमी है कि क्या उन्होंने इतनी भारी रक़म दुनिया की सबसे ऊँची इमारत पर ख़ुद को जन्मदिन की शुभकामनाएँ देने के लिए ख़र्च कर दी?