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आजम खान और उनके MLA बेटे अब्दुल्ला ने मुझ पर कराया जानलेवा हमला: कॉन्ग्रेस नेता

कॉन्ग्रेस के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष मतिउर्रहमान खां उर्फ बबलू ने सपा सांसद आजम खां और उनके बेटे विधायक अब्दुल्ला आजम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मतिउर्रहमान खां ने पुलिस अधीक्षक अजय पाल शर्मा को तहरीर देकर कहा है कि सांसद उनकी हत्या कराना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि पिछले दिनों लखनऊ से लौटते समय शाहजहांपुर में उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट भी सांसद आजम खान ने ही करवाया था, जिसमें वह बाल-बाल बच गए।

एसपी को दी तहरीर में पूर्व कॉन्ग्रेस नेता ने कहा है कि वह सांसद और उनके बेटे के विरुद्ध मुकदमों और भ्रष्टाचार के मामलों में प्रभावी कार्रवाई करने के लिए शिकायत करते रहे हैं। सांसद के सताए लोगों की पैरवी करते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सीबीआइ, ईडी, मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन को कई बार पत्र भी लिखे। जनता के साथ सांसद के खिलाफ धरने प्रदर्शन किए। इसकी वजह से आजम खान और उनके पुत्र उनसे रंजिश रखते हैं। उन्होंने कहा कि वो अपने लोगों से उन्हें धमकियाँ दिलवाते हैं।

बता दें कि 3 अक्टूबर को मतीउर्रहमान लखनऊ से कार में सवार होकर रामपुर जा रहे थे। जैसे ही उनकी कार शाहजहांपुर पहुँची तो एक ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में मतीउर्रहमान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस दौरान उनकी पसलियों और कंधे में फ्रैक्चर हो गया था। इसके साथ कार भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। हादसे के बाद मतीउर्रहमान उर्फ बबलू को शाहजहांपुर स्थित शीतल ट्रामा सेंटर में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। अब उनकी हालत में सुधार को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

कॉन्ग्रेस नेता मतीउर्रहमान ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर सांसद आजम खान व उनके विधायक बेटे को आरोपित बताया है। मतीउर्रहमान ने आरोप लगाया कि ट्रक चालक ने उनकी गाड़ी को जानबूझकर टक्कर मारी थी। उन्होंने एसपी डाॅ अजय पाल शर्मा को तहरीर देते हुए कहा है कि 6 अक्टूबर को उनके चचेरे भाई का निधन हो गया था। इसलिए परिवार के सभी लोग वहाँ गए हुए थे। जिला अस्पताल में वह अकेले थे। इसी बीच रात करीब 11 बजे एक व्यक्ति अस्पताल पहुँचा और वह उन्हें धमकी देने लगा। उस व्यक्ति ने कहा कि आजम खान के विरोध करने का अंजाम तो देख लिया होगा। अगर आगे से कुछ ऐसा किया तो जान से हाथ धो बैठोगे। उन्होंने जिलाधिकारी को भी पत्र दिया है। कॉन्ग्रेस नेता की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने जाँच के आदेश दिए हैं।

गोरखपुर: विसर्जन के रास्ते में माँस का टुकड़ा, गुस्साई भीड़ ने मचाया हड़कंप, 400 के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के बस्ती जिले में मूर्ति विसर्जन के रास्ते पर कथित तौर पर माँस का टुकड़ा मिलने पर इलाके में हिंसा भड़क गई। मामला इतना ज्यादा बिगड़ गया कि पुलिस को 400 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करना पड़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मूर्ति विसर्जन के लिए जाने वाले रास्ते में माँस का टुकड़ा देखकर श्रद्धालुओं का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने वहाँ नारेबाजी शुरू कर दी। घटना 8 तारीख यानी मंगलवार को दशहरे के अवसर पर घटी।

भड़की भीड़ ने इसके बाद इलाके के पास मौजूद माँस की कुछ दुकानों को भी निशाना बनाया और वहाँ खड़ी मोटरसाइकल में तोड़फोड़ की गई।

हालाँकि, अधिक नुकसान होने से पहले मौक़े पर पहुँची पुलिस ने स्थिति को संभाल लिया और भीड़ को शांत करवाकर मामले में जाँच शुरू की। घटना के बाद भारी बल की पुलिस की मौजूदगी में मूर्ति विसर्जन हुआ।

बस्ती क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक आशुतोष कुमार ने इस मामले के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि मूर्ति विसर्जन के रास्ते पर माँस का टुकड़ा देखकर लोग नाराज हो गए और एक मोटरसाइकिल एवं 3 माँस की दुकान को निशाना बनाया गया। इस घटना के बाद पुलिस ने 400 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया है।

डीआईजी ने बताया कि हिंसा ज्यादा भड़कती उससे पहले मौके पर भारी पुलिस फोर्स ने पहुँचकर हालात को काबू में किया। उपद्रवी आगजनी के बाद मौके से फरार हो गए। डीआईजी ने बताया कि स्थानीय लोगों द्वारा बनाई गई वीडियो क्लिप और लोगों के मोबाइल फोन की क्लिप के जरिए आरोपितों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल इलाके में शांति है। लेकिन अभी कोई गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

गौरतलब है कि विजयादशमी के अवसर पर उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में भी प्रतिमा विसर्जन जूलूस में हिंसा की खबर सामने आई। यहाँ पर 2 पक्षों के बीच जमकर बवाल हुआ और दोनों तरफ से पथराव भी किए गए। पूरी घटना में 8 लोगों के गिरफ्तार होने की खबर है, जबकि इस हिंसा में 16 घायल बताए जा रहे हैं।

कॉन्ग्रेस द्वारा राफेल की शस्त्र पूजा को नौटंकी बताने के बाद पंडित नेहरू सहित कॉन्ग्रेस नेताओं की VIDEO वायरल

वायुसेना दिवस पर देश को मिले पहले राफेल की रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा फ्रांस में शस्त्र पूजा किए जाने पर बवाल हो गया है। कॉन्ग्रेस ने राफेल पर शस्त्र पूजा के दौरान ‘ऊँ’ लिखे जाने को तमाशा बताया है और कहा है कि मोदी सरकार के साथ सबसे बड़ी समस्या है कि वे बिना ठोस काम किए हर चीज को नौटंकी बना देते हैं। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने कॉन्ग्रेस के इस बयान पर उसे भारतीय रीति रिवाजों व परंपराओं का विरोधी बताया है।

ऐसे जुबानी तकरार में इसी बीच सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें और पुरानी वीडियो वायरल होने लगी है, जो दर्शाती है कि कॉन्ग्रेस आज भले ही मोदी सरकार को राफेल की शस्त्र पूजा करने पर घेर रही है, लेकिन उनके खुद के नेता भी इन क्रियाकलापों को करते आए हैं।

दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल होती वीडियो पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की है। जिसमें वे एक जहाज के जलावतरण के मौक़े पर उसकी पूजा करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में होती कमेंट्री से साफ हो रहा रहा है कि पंडित नेहरू नारियल तोड़कर जहाज को पानी में उतारने की रस्म की विधि से पूरा कर रहे हैं।

पंडित नेहरू की ये वीडियो सैयद अतहर देहलवी द्वारा 14 मार्च 2018 को ट्विटर पर ट्वीट की गई थी। जिसमें उनका दावा था कि ये वीडिया 14 मार्च 1948 का है। जिस समय आजादी के बाद भारत ने अपने पहले जहाज ‘जल ऊषा’ को वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हिंद महासागर में उतारा था। वीडियो में साफ है कि कुछ पंडित मंत्र पढ़ते दिख रहे हैं और पीछे होती कमेंट्री बता रही है कि पूर्व प्रधानमंत्री नारियल तोड़कर जहाज को समुद्र में उतारने की रस्म पूरी कर रहे हैं।

अब ऐसे में जब राफेल की पूजा पर विवाद छिड़ा, तो सैयद अतहर देहलवी ने बुधवार को अपने पुराने ट्वीट को दोबारा रिट्वीट करते हुए लिखा कि राजनाथ सिंह ने फ्रांस में जो किया उसमें कुछ भी नया नहीं हैं।

उन्होंने लिखा कि आजाद और सेक्यूलर भारत में पंडित नेहरू के समय से ही सरकारी योजनाओं और समारोहों की शुरुआत मंत्रोच्चार, दीपक, नारियल और अन्य भारतीय व क्षेत्रीय परंपराओं के साथ होती रही है।

इसके बाद, इसी बीच पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी गुरुशरण कौर की भी एक तस्वीर वायरल हुई। जिसे खुद कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया सेल के राष्ट्रीय संयोजक सरल पटेल ने ट्वीट किया है। इसमें मनमोहन सिंह की पत्नी एक हाथ में नारियल पकड़े नजर आ रही हैं और उनके बगल में नेवी के कुछ अफसर खड़े हैं।

खास बात ये है राफेल की पूजा को तमाशा करार देने वाली कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया संयोजक ने ही यह तस्वीर ये दर्शानेे को शेयर की है कि कॉन्ग्रेस भी भारतीय परंपराओं का सम्मान करती रही है।

इस तस्वीर के बारे में पटेल ने दावा किया है कि यह 2009 की तस्वीर है जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी गुरुशरण सिंह नारियल तोड़कर आईएनएस अरिहंत को लॉन्च कर रही थीं।

राहुल गाँधी जैसे नेता विरले ही होते हैं: अधीर रंजन चौधरी ने सलमान खुर्शीद और सिंधिया को याद दिलाया ‘त्याग’

लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की हार के बाद पार्टी नेता राहुल गाँधी के अध्यक्ष पद छोड़ने पर उनकी आलोचना के बीच लोकसभा में पार्टी नेता अधीर रंजन चौधरी ने बुधवार (अक्टूबर 9, 2019) को कहा कि राहुल जैसे नेता मौजूदा राजनीति में विरले ही होते हैं जिन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपना पद त्याग दिया। लोकसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद राहुल गाँधी के पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने पर राज्य और केंद्रीय स्तर के कई नेताओं ने उनकी आलोचना की थी। 

पार्टी में सुधार को लेकर दिए बयानों पर सलमान खुर्शीद और आत्मचिंतन की बात पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को अधीर रंजन चौधरी ने नसीहत दी। अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि उन्होंने कुछ नेताओं के बयानों के बारे में सुना है। उन्होंने कहा, “इस बारे में वो सिर्फ इतना कहना चाहते हैं कि अच्छा होता अगर राहुल गाँधी पार्टी अध्यक्ष के रूप में वापस आते। लेकिन साथ ही, हमें नैतिक जवाबदेही के उदाहरण की भी सराहना करनी चाहिए जो उन्होंने सबके सामने पेश की है। यह राहुल गाँधी का निर्णय था और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।”

अधीर रंजन चौधरी ने पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी का बचाव किया और कहा कि राज्य विधानसभाओं के चुनाव के माहौल में पार्टी नेताओं को ऐसे बयानों से बचना चाहिए जिससे हमें नुकसान हो। अगर कोई मुद्दा है तो इन्हें पार्टी स्तर पर उठाया जाए न कि सार्वजनिक रूप से। उन्होंने कहा कि जब पार्टी चुनाव में उतरने वाली हो, तब इस तरह की टिप्पणियाँ कॉन्ग्रेस को फायदा पहुँचाने वाली नहीं हैं। बाहर बयानबाजी करने की बजाए खुर्शीद को अपनी राय पार्टी के भीतर ही जाहिर करनी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि सलमान खुर्शीद ने मंगलवार (अक्टूबर 8, 2019) को कहा था, “हम विश्लेषण के लिए भी एकजुट नहीं हो सके कि हम लोकसभा चुनाव में क्यों हारे। हमारी सबसे बड़ी समस्या यही है कि हमारे नेता ने हमें छोड़ दिया।” इस पर पार्टी नेता राशिद अल्वी ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि पार्टी में आग लगाने वाले नेता मौजूद हैं, बाहरी दुश्मन की जरूरत नहीं। मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कहा कि जब सत्ता नहीं होती, तो बोलने वालों की बाढ़ आ जाती है। वहीं सिंधिया के आत्मचिंतन वाले बयान पर अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “हम सभी आत्मनिरीक्षण कर रहे हैं। सभी विचारों और स्थितियों का आकलन करने के बाद ही ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमिटी ने सोनिया गाँधी से अध्यक्ष पद संभालने की अपील की थी।”

जामा मस्जिद के पास मूर्ति विसर्जन के दौरान हुई पत्थरबाज़ी, थानाध्यक्ष की अमर्यादित भाषा से बिगड़ा माहौल

बिहार के गया में मूर्ति विसर्जन के दौरान थानाध्यक्ष की अमर्यादित भाषा पर लोगों के भड़कने और क्षेत्रीय तनाव की ख़बर सामने आई है। विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार (8 अक्टूबर) की रात को प्रशासन द्वारा निर्गत पाँच लाइसेंसी माँ दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन दुखहरणी मंदिर के पास कराया जा रहा था। पहले तो हालात बिल्कुल सामान्य थे और मूर्ति को लेकर हर्षोल्लास के साथ आगे बढ़ रहे थे।

दैनिक जागरण की ख़बर के अनुसार, भक्तजनों की भीड़ एक स्थल पर पहुँची तो पाकिस्तान के ख़िलाफ़ नारेबाजी शुरू हो गई। यह नारेबाजी कुछ समुदाय विशेष के लोगों को इतनी नागवार गुज़री कि उन्होंने भक्तों की भीड़ से नारेबाजी के ख़िलाफ़ अपनी आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन, पड़ोसी देश के ख़िलाफ़ नारेबाजी जारी रही। स्थिति को संभालने के लिए कोतवाली थानाध्यक्ष संजय कुमार ने अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया, जिससे वहाँ मौजूद लोगों के बीच ग़ुस्सा भड़क गया। इस बीच दो पक्षों के बीच ईंट-पत्थर से हमले किए गए।

हालात इतने बिगड़ गए कि दुखहरणी द्वार से पाँच मूर्ति को गुज़ारने के लिए पाँच घंटे का समय लग गया। इसकी ज़िम्मेदारी सिटी एसपी के कंधे पर थी, जिनके सहयोग के लिए एएसपी अरूण कुमार सिंह को लगाया गया था। दो पक्षों के बीच हुए हंगामे और पत्थरबाज़ी के दौरान पुलिसकर्मियों ने सुरक्षा कवच धारण किया हुआ था। बिगड़े हालातों के बीच बुधवार (9 अक्टूबर) की सुबह तीन बजे मूर्ति पास कराया गया।

बता दें कि दुखहरणी चौक रोड प्रमुख मार्ग है, जो इस तनाव के चलते ईंट-पत्थरों से भर गया था। इस तरह के हालात को देखकर दशहरे का मेला देखने आए लोगों में काफ़ी दहशत का माहौल था। भगदड़ के माहौल में कई लोगों को चोटें भी आईं। चौक रोड पुलिस छावनी में तब्दील हो गई। इस दौरान ज़िला पुलिस बल, वरिष्ठ अधिकारी, दंगा नियंत्रण वाहन सहित अन्य सुरक्षा बल भी मौजूद थे।

हिंदुस्तान में प्रकाशित ख़बर

भारी तनाव की सूचना मिलते ही डीएम अभिषेक सिंह एवं एसएसपी राजीव मिश्रा मौक़े पर पहुँचे और हालात का मुआयना किया। दोनों अधिकारियों ने कमान संभाली और बुधवार की सुबह 3:30 बजे तक चौक रोड पर डटे रहे। ख़बर के अनुसार, एसएसपी राजीव मिश्रा ने बताया कि मूर्ति विसर्जन के दौरान जामा मस्जिद के पास पत्थरबाज़ी मामले में FIR की जाएगी। पुलिस पर पथराव के मामले में कई युवकों को गिरफ़्तार किया गया है। इनमें एक पुलिस जवान के सिर पर चोट लगी थी। इन युवकों ने मंगलवार की रात से सुबह तीन बजे तक लगातार पुलिस पर पथराव किया। जवाब में पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।

प्रभात ख़बर में प्रकाशित ख़बर

मीडिया में ख़बरों के अनुसार, कोतवाली थानाध्यक्ष ने बताया कि मूर्ति विसर्जन के दौरान कुछ शरारती तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। साथ ही थानाध्यक्ष ने 12 लोगों को गिरफ़्तार किए जाने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इन 12 में से पाँच लोग नशे में धुत्त पाए गए। सभी को कोर्ट में पेशी के बाद जेल भेज दिया गया।

MP में नई स्कीम: कमलनाथ सरकार से चाहिए ₹51000 तो दूल्हे को भेजना होगा शौचालय से सेल्फी

मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने एक नई स्कीम शुरू की है। अब दूल्हे के शौचालय में खड़े होकर सेल्फी भेजने पर मुख्यमंत्री कन्या विवाह / निकाह योजना के तहत 51,000 रुपए मिलेंगे। मगर इसके लिए आवेदन तभी स्वीकार किए जाएँगे जब दुल्हन यह साबित कर दे कि उसके पति के घर में शौचालय है।

खबर के अनुसार, चूँकि सरकारी अधिकारी हर जगह शिथिलता की वजह से जाँच नहीं कर सकते हैं, इसलिए वे दूल्हे से एक #सेल्फी-स्टैंडिंग-इन-टॉयलेट की माँग करते हैं। बता दें कि शौचालय में खड़े होकर सेल्फी लेने की यह माँग ग्रामीण क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है। प्रदेश की राजधानी भोपाल नगर निगम (BMC) के अधिकारी भी इसकी माँग करते हैं।

भोपाल में सेंट्रल लाइब्रेरी में सामूहिक विवाह में शामिल होने वाले 74 जोड़ों में से एक समीर (बदला हुआ नाम), जो कि जहांगीराबाद के रहने वाले हैं, का कहना है कि शादी के प्रमाण पत्र की कल्पना कीजिए, जिसमें शौचालय में खड़े दूल्हे की तस्वीर लगी होगी। उन्होंने कहा कि उनसे कहा गया कि जब तक वो तस्वीर नहीं देते, काजी निकाह नहीं पढ़ेंगे।  

2013 में स्कीम लॉन्च करने के बाद से ही टॉयलेट की शर्त शामिल थी, लेकिन हाल ही में इसमें तस्वीर देने की बात जोड़ी गई है। सीएम विवाह योजना के प्रभारी बीएमसी अधिकारी सी बी मिश्रा ने कहा कि पहले इस नीति में छूट दी गई थी। पहले दूल्हे को शादी के 30 दिन के भीतर शौचालय बनाने के लिए कहा जाता था। मिश्रा ने कहा कि शौचालय में दूल्हे की फोटो संलग्न करने में कुछ भी गलत नहीं है। यह शादी के कार्ड का हिस्सा नहीं है।

बीएमसी कॉर्पोरेटर और स्थानीय कॉन्ग्रेस नेता रफीक कुरैशी ने कहा कि यह तब और भी अजीब हो जाता है जब दुल्हन दूसरे शहर या जिले में रहती है। उन्होंने बताया कि भोपाल से करीब 90 किलोमीटर दूर सिलवानी में एक शादी हुई थी। स्थानीय सरकारी अधिकारी ने शादी को तब तक मंजूरी नहीं दी जब तक कि दूल्हे ने भोपाल में वापस आकर उसे शौचालय में खड़े होने का सबूत नहीं दिया। उनका कहना है कि शौचालय स्वच्छ भारत मिशन का आंतरिक हिस्सा है, लेकिन यह प्रक्रिया बेहतर हो सकती है। उन्होंने इस साल तीन सामूहिक विवाह आयोजित किए हैं और 2020 के लिए होने वाले नागरिक चुनावों के साथ अधिक सामूहिक विवाह होने की संभावना है। जिसके लिए सैकड़ों दूल्हे की शौचलाय में खड़ी तस्वीर आ सकती है।

दोनों पक्षों के राजनेता स्वीकार करते हैं कि दूल्हे इस सफाई मिशन के अंतिम प्रक्रिया में हैं और चाहते हैं कि यह दूल्हे को यह साबित करने का एक और सुंदर तरीका साबित हो कि उनके पास शौचालय है। बता दें कि मुख्‍यमंत्री कन्या विवाह / निकाह योजना आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए है। पिछले साल 18 दिसंबर को सत्ता में आने के एक दिन बाद ही कॉन्ग्रेस सरकार ने इसके तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता को 28,000 रुपए से बढ़ाकर 51,000 रुपए कर दी थी। इसके बाद आवेदन करने वालों की तादाद काफी बढ़ गई। जिससे अधिकारियों के लिए प्रत्येक घर के शौचालय का आकलन करना काफी मुश्किल हो गया।

49 सेलेब्स पर नहीं चलेगा देशद्रोह का केस, आरोप ‘शरारतपूर्ण’, अब वकील पर दर्ज होगा FIR

भीड़ हिंसा के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखने वाले 49 हस्तियों के ख़िलाफ़ दर्ज देशद्रोह के मामले को पुलिस ने बुधवार को बंद करने का फैसला किया है। इस मामले पर आदेश मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मनोज सिन्हा ने दिया है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि अब तक की जाँच में इस बात का खुलासा हुआ है कि आरोपितों के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोप “शरारतपूर्ण हैं” और उनमें कोई ठोस आधार नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि इस मामले के संबंध में स्थानीय अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा की एक याचिका पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेस के आदेश के बाद पिछले हफ्ते सदर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई थी, जिसपर काफी बवाल हुआ था। कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेताओं से लेकर अभिनेता से राजनेता बने कमल हासन ने भी इसका विरोध किया था। वहीं, वकील ओझा का कहना था कि उनके द्वारा 2 महीने पहले दाखिल की गई याचिका को सीजेएम ने 20 अगस्त को स्वीकार कर लिया था। इसके बाद मुजफ्फरपुर के सदर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज हुई।

मामला बंद होने पर एडीजी हेडक्वार्टर जीतेंद्र कुमार का कहना है कि शिकायतकर्ता, सबूत उपलब्ध करा पाने में नाकाम रहा। इतना ही नहीं, वह उस पत्र को दिखाने में अक्षम रहा जिसके आधार पर उसने इन हस्तियों पर केस करवाया था। इसके अलावा पुलिस ने जाँच में ये भी पाया कि याचिका दायर करने के पीछे के उद्देश्य उचित नहीं थे। इसलिए वकील के खिलाफ आईपीसी धारा 182 और 211 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

बिहार पुलिस के इस फैसले के बाद कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता के वेणुगोपाल ने ट्वीट करके अपनी खुशी जाहिर की है। उन्होंने ट्वीट करके बताया है कि उन्हें खुशी है कि बिहार पुलिस ने इन हस्तियों के ख़िलाफ़ दर्ज देशद्रोह के मामले को वापस लेने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा, “कोई भी ताकत उन लोगों की आवाज को चुप नहीं करवा सकती जो सच बोलते हैं। जितना वो तुम्हें दबाएँगे उतना तुम मजबूत होगे।”

वहीं बता दें कि इस एफआईआर के दर्ज होने के बाद से कई लोग अफवाह उड़ा रहे थे कि ये केस भाजपा के कारण इन सेलेब्स पर हुआ है, लेकिन केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और बिहार डिप्टी सीएम ने आधिकारिक रूप से बयान देकर स्पष्ट किया कि इससे भाजपा का कोई वास्ता नहीं हैं। केंद्रीय मंत्री जावडेकर ने जहाँ बुद्धिजीवियों और कलाकारों के ख़िलाफ देशद्रोह के मुकदमे के लिए विपक्ष द्वारा मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह से गलत बताया है और कहा है कि ये अफवाह निहित स्वार्थ वाले लोगों एवं टुकड़े-टुकड़े गिरोह द्वारा फैलाई जा रही है। वहीं सुशील मोदी ने इसपर बयान देते हुए कहा था कि भाजपा कभी भी भीड़ हिंसा का समर्थन नहीं करती हैं। प्रधानमंत्री को पत्र लिखने वालों के विरुद्ध दायर मामले से बीजेपी या संघ परिवार का कोई वास्ता नहीं है।

गौरतलब है कि इसी वर्ष जुलाई महीने में कुछ अभिनेता-अभिनेत्रियों-फिल्मकार-सामाजिक कार्यकर्ता-इतिहासकार समेत विभिन्न क्षेत्रों के 49 हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखा था। इस पत्र में दलित व अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ने का दावा करते हुए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की माँग की गई थी। इस पत्र में लिखा गया था, “अफसोस की बात है कि जय श्रीराम का इस्तेमाल आज उकसाने के लिए किया जा रहा है। यह युद्धोन्मादी और भड़काऊ नारा है। अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को राम के नाम पर डराया जा रहा है।”

बंगाल: संघ से जुड़े शिक्षक, गर्भवती पत्नी और 8 साल के बेटे की घर में घुसकर हत्या

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में घर में घुसकर अपराधियों ने एक शिक्षक की हत्या कर दी। हत्यारों ने शिक्षक की गर्भवती पत्नी और आठ साल के बेटे को भी नहीं छोड़ा। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किए गए धारदार हथियार को मौके से बरामद किया है।

दिल दहलाने वाली यह घटना विजयादशमी के दिन हुई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार हत्या की वजह अब तक सामने नहीं आई है। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है। संदेह के आधार पर पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ भी की है। स्थानीय लोगों ने इस मामले की सीबीआई जाँच की माँग की है।

सूत्रों के अनुसार मृतक बन्धु प्रकाश पाल मुर्शीदाबाद में सागरदीघी इलाके के रहने वाले थे जो कि 17 नम्बर सहपुर प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े थे। एक पड़ोसी ने बताया कि विजयादशमी वाले दिन प्रकाश सुबह करीब 10 बजे बाज़ार से लौटे थे। तकरीबन 11 उनके घर से चीखने चिल्लाने की आवाज़ सुनाई पड़ी। इसके बाद एक युवक को उनके घर से बाहर निकलकर भागते देखा गया था।

पड़ोस के लोग जब घर के अन्दर पहुँचे तो वहां का नज़ारा देखकर उनके होश फाख्ता हो गए। पुलिस इस मामले को संपत्ति विवाद से भी जोड़ कर देख रही है। बन्धु प्रकाश के फेसबुक प्रोफाइल पर दुर्गा पूजा पंडाल के वीडियो और परिवार के साथ ली गई तस्वीरों की भरमार है।

सोशल मीडिया में कुछ लोग इसे समुदाय विशेष की करतूत बता रहे हैं, हालाँकि अभी तक ऑपइंडिया इस खबर की पुष्टि नहीं कर पाया है जिसके लिए हमारी टीम प्रयासरत है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुर्शिदाबाद समुदाय विशेष के अपराध के लिए कुख्यात रहा है। साथ ही बंगाल में भाजपा और संघ से जुड़े लोगों को निशाना बनाने वाली राजनीतिक हिंसा की घटनाओं में भी हाल में काफी तेजी देखने को मिली है।

ऑपइंडिया Exclusive: बलरामपुर में दुर्गा पूजा जुलूस पर हमला करने वाले लगा रहे थे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा

जब सारे देश के हिन्दू दुर्गा पूजा मना रहे थे तो उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में एक दूसरे समुदाय के इलाके से गुजर रहे दुर्गा विसर्जन जुलूस पर पत्थरबाजी की घटना हुई। कथित तौर पर तलवार समेत अन्य हथियार भी चले और हिन्दू घायल हुए। ऑपइंडिया से बातचीत में पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने एक ओर हमले के पूर्व-निर्धारित होने की आशंका जताई, जिसकी तस्दीक सोशल मीडिया पर वायरल घटना के वीडियो देखकर की जा सकती है, वहीं दूसरी ओर पुलिस ने घटना के पीछे कारण हिन्दुओं द्वारा मस्जिद के सामने डीजे बजाए जाने के चलते समुदाय विशेष के भड़क जाने की बात भी कही है।

ऑपइंडिया ने वहाँ के एक स्थानीय निवासी और हमले में घायल हिन्दू पीड़ित से बात की। घायल प्रत्यक्षदर्शी सूरज पांडे के मुताबिक ही हिन्दू समाज ने जुलूस निकालने के पहले ही दूसरे मजहब वालों से इस बारे में बातचीत की थी। उस समय दूसरे मजहब ने शांतिपूर्वक जुलूस को निकलने देने के आश्वासन भी दिया था, लेकिन बाद में हिन्दुओं पर हमला कर दिया।

‘हर साल का’ नहीं है

सूरज ने दावा किया कि यह तनाव और हिंसा गाँव में कोई ‘आम बात’ नहीं है, जिसे बेवजह तूल दी जा रही है। गाँव में ऐसे किसी साम्प्रदायिक तनाव या हिंसा का कोई इतिहास नहीं रहा है। दुर्गा पूजा का जुलूस निकलता भी प्रति वर्ष उसी रास्ते से था। यही नहीं, हिंसा और पत्थरबाज़ी के पहले समुदाय विशेष के प्रतिनिधि हिन्दुओं से “भाईचारे वाली बात’ कर के गए थे और ऐसा कोई भाव प्रकट नहीं किया था कि उन्हें हर साल होने वाले इस जलसे से कोई दिक्कत या आपत्ति है।

सूरज ने हमें यह भी बताया कि हमले की शुरुआत हिन्दुओं पर, देवी के विग्रह पर कचरा फेंक कर अपवित्र करने से हुई। उसके बाद मस्जिद से हिन्दुओं पर ईंट-पत्थर से हमला होने लगा, जिसके बाद दूसरे मजहब के लोग लाठी-डंडों के इस्तेमाल पर उतर आए। चूँकि हिन्दू दूसरे मजहब वालों द्वारा शांति बनाए रखने के आश्वासन से निश्चिन्त थे और गाँव में किसी तरह के साम्प्रदायिक तनाव का इतिहास भी नहीं था, तो हिन्दुओं के पास आत्मरक्षा करने या हमले का जवाब देने के लिए कोई साधन मौजूद नहीं था।  

गलती की, जो जुल्फिकार को जाने दिया

सूरज आगे अपने जुल्फिकार नामक पड़ोसी के हिंसक बर्ताव का ज़िक्र करते हैं, जिसके बारे में उन्होंने माहौल न बिगड़ने देने के लिए किसी और को नहीं बताया था- और बाद में वह न बताना गलती साबित हुआ। हिंसा वाली गली में ही रहने वाले सूरज के अनुसार जब वे सुबह अपने घर से पूजा स्थल की तरफ़ देवी के जुलूस की शुरुआत करने जा रहे थे, तो उनके पड़ोसी जुल्फिकार ने उन पर ईंट फेंकी। उस समय उन्होंने उस चीज़ पर नाराज़गी जताई, लेकिन जब उसकी बूढ़ी माँ बेटे की तरफ़ से माफ़ी माँगने लगी तो उन्होंने माहौल न बिगाड़ने के लिए मामले को तूल नहीं दिया और इस घटना का ज़िक्र अन्य हिन्दुओं से नहीं किया। लेकिन उन्हें शक हो गया था और बाद में वह सही निकला।

पहले मूर्ति के साथ आए, फिर ‘पाकिस्तान ज़िन्दाबाद’

सूरज ने यह भी बताया कि हमले के समय भीड़ ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे भी लगा रहे थे। उन्होंने एक और चौंकाने वाला दावा यह भी किया कि दूसरे मजहब के कुछ लोग दुर्गा पूजा के जुलूस में सुबह शामिल भी हुए। वे जुलूस के साथ चलते हुए मस्जिद वाली गली तक भी आए और बाद में पथराव करने वाले अन्य मजहबी लोग भीड़ का हिस्सा बन गए। सूरज मुख्य दंगाई के तौर पर हाजी मकबूल, ‘लंगड़’, और नाजिम का नाम लेते हैं।

सूरज के अनुसार दंगा एवं पत्थरबाज़ी करने में “मोहम्मडन” मर्दों के अलावा औरतें और बच्चे भी शामिल थे। उनके पास केवल ईंटें ही नहीं, तलवार जैसे घातक हथियार भी पहले से ही जमा कर के रखे हुए थे। सूरज ने खुद के सर पर तलवार से ही घाव लगने की बात कही। उनके अनुसार उनके सर पर “कम से कम एक इंच” गहरा घाव लगा है।  

हम तो म्यूज़िक पहले ही बंद कर देते हैं

सूरज ने पुलिस के “म्यूज़िक बजाने की वजह से दूसरे मजहब के भड़क गए” के दावे को भी सिरे से ख़ारिज कर दिया। उनके मुताबिक़ पहली बात तो हिन्दू समुदाय ने डीजे और लाउडस्पीकर के लिए अनुमति प्रशासन से ले रखी थी- यानि उन्हें पूरे रास्ते डीजे बजाने का कानूनी हक़ था। यह हक़ होने के बावजूद हिन्दू समुदाय हमेशा से ही आपसी समझदारी के तकाज़े में मस्जिद के पास डीजे बंद कर देता है। इसके लिए बाकायदा गली में एक निशान (“चीना”, चिह्न) बना हुआ है कि इसके आगे नहीं बजाना है, जब तक कि मस्जिद के आगे नहीं बढ़ जाते। इस बार भी हिन्दुओं का डीजे बंद कर देने का पूरा इरादा था- लेकिन दूसरे समुदाय ने उस निशान के पहले ही हमला बोल दिया और डीजे वाले की गाड़ी, म्यूज़िक सिस्टम आदि को क्षतिग्रस्त कर दिया। डीजे गाड़ी का ड्राइवर भी घायल हो गया।

सूरज ने कहा कि वे पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट हैं। पुलिस ने सूरज की तहरीर में नामित 24 व्यक्तियों में से 8 को गिरफ्तार कर लिया है और बाकी की सरगर्मी से तलाश जारी है। पुलिस ने इस कार्य के लिए 4 यूनिटें विशेष तैनात की हैं।

सूरज पांडे द्वारा पुलिस को दी गई तहरीर

रफ़ीकुल अली ने माँ लक्ष्मी की मूर्ति जलाई, आभूषण चुराए, पुलिस के हत्थे चढ़ा

असम के बारपेटा में एक और हिन्दू मन्दिर पर हमले की खबर सामने आ रही है। खबर के अनुसार मंगलवार (8 अक्टूबर, 2019) को रफीकुल अली नामक मुस्लिम हमलावर ने लक्ष्मी मन्दिर में घुस कर मन्दिर में आग लगा दी। उस पर इसके अलावा देवी के सोने-चाँदी के आभूषण चुराने, मन्दिर की फ़र्श तोड़ने और मन्दिर में लगे आगामी लक्ष्मी पूजा की जानकारी देने वाले पोस्टर फाड़ने का भी आरोप हैस्थानीय मीडिया के अनुसार लोगों ने हमलावर को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया।

बताया जा रहा है कि आरोपित रफीकुल पर पहले भी स्कूल-कॉलेज के छात्रों के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप लग चुके हैं। न्यूज़ 18 असम के मुताबिक स्थानीय लोगों ने उस पर ‘बुलींग’ (bullying, गुंडागर्दी और दुर्व्यवहार) का आरोप लगाया है और बताया है कि उसके व्यवहार से क्षेत्र के काफ़ी लोग परेशान थे। उसके खिलाफ़ पुलिस ने तहरीर दर्ज कर ली है और जाँच शुरू हो गई है। लक्ष्मी मन्दिर बारपेटा के उत्कुची इलाके में स्थित है।

लगातार दूसरे साल नवरात्रि पर हिन्दू मन्दिरों पर हमला

यह पहली बार नहीं है कि शारदीय नवरात्रि/दुर्गा पूजा पर असम में मन्दिर और मूर्तियों पर हमला हुआ है। पिछले साल भी दुर्गा पूजा के दौरान दो-दो बार मूर्तियों पर हमले हुए थे। 17 अक्टूबर, 2018 को बारपेटा के ही हाउली में किसी ने दुर्गा पंडाल में घुसकर देवी दुर्गा की मूर्ति के चेहरे के साथ छेड़छाड़ की थी। इलाके में इतना तनाव हो गया कि CRPF तैनात कर धारा 144 लगाने की नौबत आ गई थी। इस घटना के तीन दिन पहले गुवाहाटी के पलटन बाज़ार में किसी ने गणेश और दुर्गा की प्रतिमाओं को खंडित करने की कोशिश की गई थी।