Home Blog Page 5469

आसिफ (नकली नाम- सुरेश) ने युवती को नशे की गोलियाँ खिला कर किया गैंग रेप, 66 वीडियो बना किया ब्लैकमेल

राजस्थान में ग़लत धर्म बता कर एक युवती से बलात्कार करने का मामला सामने आया है। पीड़िता बीकॉम फर्स्ट इयर की छात्रा है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपित उसे जबरदस्ती एक होटल में ले कर गया और वहाँ उसके साथ गैंग रेप किया गया। आरोपित आसिफ खिरोड़-झुंझनूं का निवासी है। उसने युवती को अपनी पहचान सुरेश के रूप में बताई थी। आरोप है कि उसने पीड़िता को नशे की गोलियाँ खिला कर अपने दोस्तों के साथ मिल कर उसका गैंगरेप किया। इसके बाद पीड़ित युवती को जान से मारने की धमकी भी दी गई

युवती के गैंग रेप के दौरान कुल 66 वीडियो क्लिप्स आरोपित युवक ने अपने दोस्तों के साथ बनाए। इन वीडियो क्लिप्स के जरिए पीड़िता को लगातार ब्लैकमेल किया जाता रहा। पीड़िता को वीडियो क्लिप्स सार्वजनिक करने की धमकी देकर उससे कई बार रुपए तक ऐंठे गए। बात नहीं मानने पर युवती को जान से मार डालने की धमकी भी दी गई। उद्योग नगर पुलिस ने इस मामले की शिकायत दर्ज कर के जाँच शुरू कर दिया है।

युवती ने बताया कि वह रोज़ पढ़ाई करने के लिए बस से आती-जाती थी। इसी दौरान बस में ही एक युवक से उसकी मुलाक़ात हुई। जब बातचीत की शुरुआत हुई तो उस युवक ने अपना नाम सुरेश कुमार बताया। वह पीड़िता को उसका दोस्त बनने के लिए कहता था। जब युवती ने इनकार कर दिया तो उसने किसी बहाने से स्थानीय पेट्रोल पंप के पास बुलाया, जहाँ पहले से ही एक सफ़ेद रंग की बोलेरो खड़ी थी। इसमें पहले से ही एक महिला व एक अन्य व्यक्ति बैठे थे। यहीं से पीड़िता को होटल ले जाया गया।

होटल पहुँचने के बाद युवती को जबरन नशे की गोलियाँ खिलाकर एक कमरे में ले गया, जहाँ आसिफ ने अपने दोस्तों के साथ मिल कर उसका सामूहिक बलात्कार किया। इस दौरान उन्होंने पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की। इन्हीं रिकॉर्डिंग के दम पर उन्होंने पीड़िता से ब्लैकमेलिंग के जरिए 25 हज़ार रुपए भी वसूल लिए। पुलिस ने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर आसिफ के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया गया है।

‘दैनिक भास्कर’ के झुंझनूं संस्करण में छपी ख़बर

आसिफ के साथ एक महिला भी इस ब्लैकमेलिंग और पूरे प्रकरण में शामिल रही। उस महिला ने बार-बार पीड़ित युवती को कॉल कर के धमकाया। एक बार जब पीड़िता बस स्टैंड पर बस का इंतजार कर रही थी, तब उक्त महिला ने आकर आसपास के लोगों से कहा कि ये लड़की कॉलेज नहीं जाती है, बल्कि होटलों में जाती है। आसिफ की साथी महिला पीड़िता को कॉल कर के धमकी देती थी कि अगर उसने रुपए नहीं दिए तो वह घर आकर वसूल लेगी। आसिफ पीड़िता को गर्व से बताता था कि उसने पहले भी इस तरह के कई काम किए हैं और उसे अब तक कोई फँसा नहीं सका है।

आसमान में मक्का के टाइमटेबल से पढ़ना नमाज: UAE के अंतरिक्षयात्री को मिलीं ‘इस्लामी गाइडलाइन’

दुबई के इस्लामिक मामलों के प्राधिकरण ने संयुक्त अरब अमीरात को इस्लामिक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह निर्देश देश के पहले अंतरिक्ष यात्री हज़्ज़ा अल मंसूरी के अंतरिक्ष में नमाज़ पढ़ने को लेकर जारी किए गए हैं

इस्लाम की प्रथाओं के अनुसार नमाज़ दिन के समय के हिसाब से पढ़नी होती है, जबकि अंतरिक्ष में हज़्ज़ा को 16-16 सूर्योदय और सूर्यास्त एक दिन में दिखने थे। ऐसे में प्राधिकरण ने हज़्ज़ा को इस्लाम के समर्थकों की पवित्रतम जगह मक्का के सूर्योदय-सूर्यास्त के समय नमाज़ पढ़ने की सलाह दी है। इसके अलावा नमाजियों को मक्का की तरफ़ मुँह करके नमाज़ पढ़ने के लिए कहा जाता है, जबकि अंतरिक्ष यात्री शून्य गुरुत्वाकर्षण में तेज़ी से धरती के चक्कर लगा रहे होते हैं। इसके समाधान में हज़्ज़ा को धरती की ओर चेहरा कर नमाज़ पढ़ने को कहा गया है।

‘रेत के दाने या पत्थर से करना पाक’

नमाज़ पढ़ने के पहले खुद को स्वच्छ करना होता है। गाइडलाइंस के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (ISS) में पानी की कमी होने पर इसके लिए रेत के दाने या पत्थर का इस्तेमाल किया जा सकता है। अल मंसूरी रूसी कॉस्मोनॉट ओलेग स्क्रिपोचका और अमेरिकी अंतरिक्षयात्री जेसिका मायर के साथ बुधवार (25 सितंबर) को ISS के लिए रवाना होंगे। NASA के अनुसार अल मंसूरी 3 अक्टूबर को लौट आएँगे, जबकि बाकी दोनों अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी अगले वर्ष होगी।

पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय पर हो रहा भयंकर अत्याचार, न्याय के लिए UNHRC में गुहार

पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे अत्याचारों से पीड़ित अल्पसंख्यक अहमदिया मुस्लिम समुदाय ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में मदद के लिए आवाज उठाई है। यहाँ UNHRC की 42वीं सालाना बैठक के दौरान अहमदिया समुदाय के प्रतिनिधियों ने पाक की हुकूमत पर अत्याचार का आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन में रहने वाली अहमदिया मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि फरीद अहमद ने इस बैठक में कहा, “हमारे समुदाय के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। पाकिस्तान में सैकड़ों अहमदियों की हत्या कर दी गई थी और अब भी हजारों सदस्यों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ा रहा है।”

उनके मुताबिक पाकिस्तान में उनके समुदाय के कई लोगों को फर्जी मामलों में फँसाया जा रहा है और समुचित शिक्षा व्यवस्था तक उनकी पहुँच नहीं हैंं। उनकी मानें तो आज भी उन्हें पाकिस्तान में मतदान का अधिकार नहीं है।

इस मामले में पाकिस्तान की दोहरे चेहरे की पोल खोलते हुए समुदाय से ताल्लुक रखने वाले सर इफ्तियार अहमद अयाज ने कहा, “पाकिस्तान के संविधान में हर नागरिक के लिए समान अधिकार का वादा किया गया है, लेकिन हमारे अहमदिया समुदाय के लोग अत्याचार का सामना कर रहे हैं। समुदाय के लोगों को हर चीज से वंचित किया जा रहा है।”

यहाँ उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में लंबे समय से अहमदिया समुदाय पर अत्याचार हो रहा है। उन्हें साल 1974 में संविधान में संशोधन के साथ गैर मुस्लिम घोषित कर दिया गया था। इसके बाद 1984 में जनरल मुहम्मद जिया-उल-हक के शासन में एक सख्त अध्यादेश जारी किया गया था। जिसमें कहा गया था कि अगर कोई अहमदिया खुद को मुस्लिम बताएगा, तो वो अपराध की श्रेणी में आएगा और ऐसा करने वाले को 3 साल की सजा और जुर्माने की सजा का प्रावधान किया गया है।

अयोध्या में बाबर ने राम मंदिर बनवाया था? – 3 ​सूरतों पर गौर कर रहा है सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले की नियमित सुनवाई चल रही है। शीर्ष अदालत पहले ही उम्मीद जता चुका है कि इस साल 18 अक्टूबर तक सुनवाई ख़त्म हो जाएगी। इससे कोर्ट को फ़ैसला लिखने के लिए पर्याप्त समय मिल पाएगा। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने आज (24 सितंबर 2019) एक बड़ा बयान दिया है। सुनवाई के दौरान जब मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन और ज़फ़रयाब जिलानी ने दलीलें पेश कीं, तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह तीन विकल्पों पर विचार कर रहा है। जस्टिस ए बोबडे ने निम्नलिखित 3 विकल्प बताए:

  1. बाबर ने मंदिर को ध्वस्त करने के बाद मस्जिद बनाई।
  2. बाबर ने उस स्थल पर मंदिर बनाई, जहाँ पहले से ही मंदिर स्थापित था।
  3. वह जगह खाली पड़ी हुई थी और वहाँ बाबर ने मस्जिद का निर्माण करवाया।

उपर्युक्त तीनों विकल्पों पर सुप्रीम कोर्ट विचार कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने सीता कुंड से जन्मस्थान की सटीक दूरी और जन्मस्थान के सटीक स्थल के बारे में सुनवाई करते समय इन तीनों विकल्पों के बारे में जानकारी दी। जिलानी ने कोर्ट के तीनों विकल्पों को सुनने के बाद कहा कि तीसरा विकल्प ही उनका पक्ष है। अर्थात, मुस्लिम पक्ष का मत है कि यह जगह खाली पड़ी हुई थी और मुग़ल शासक बाबर ने वहाँ मस्जिद का निर्माण करवाया।

जिलानी ने कहा कि यह एक सामान्य मस्जिद थी। मुस्लिम पक्षकार ने दावा किया कि ये मस्जिद तभी चर्चा में आया, जब ये स्थल विवादित हो गया। जिलानी के अनुसार, अगर विवादित स्थल पर इतिहास में कोई मंदिर था तो तो वह कब गायब हो गया होगा, किसी को नहीं पता। जिलानी ने कहा कि यह ढाँचा 19वीं सदी तक भारत के किसी अन्य सामान्य मस्जिद की तरह ही था।

जस्टिस बोबडे ने जिलानी से सवाल किया कि अगर यहाँ बाबरी मस्जिद थी भी तो आईन-ए-अकबरी में इसका जिक्र क्यों नहीं है जबकि इस पुस्तक में बाकी सभी मस्जिदों का छोटा से छोटा विवरण भी मौजूद है? उनके इस प्रश्न का जवाब देते हुए जिलानी ने कहा कि हो सकता है उस समय इतने ज्यादा मस्जिद हों कि सभी का विवरण देना संभव न रहा हो।

जस्टिस बोबडे ने पूछा कि क्या अन्य मस्जिद भी बाबर जैसे बड़े राजाओं ने बनवाए थे? जवाब देते हुए मुस्लिम पक्षकार जिलानी ने कहा कि कई अन्य मस्जिद नवाबों व छोटे शासकों द्वारा बनवाए गए थे। इससे पहले ज़फ़रयाब जिलानी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि रामायण या रामचरितमानस में कहीं भी जन्मस्थान मंदिर का जिक्र नहीं है

लिव इन लाए अवसाद, अध्यात्म से बरसे खुशियॉं: 43255 महिलाओं पर सर्वे

महिलाएँ कब खुश होती हैं? ये एक ऐसा सवाल है, जिसपर सोशल मीडिया पर आपको कई जोक बनते नजर आ जाएँगे, लेकिन वास्तविकता में शायद ही कहीं आपको इसका सही उत्तर मिले। ऐसी स्थिति में जब हर कोई अपने अनुभव के अनुसार महिलाओं के खुश होने के पैमाने बताता नजर आता है, उस समय राष्ट्रीय सेवक संघ से जुड़े एक संघठन ने ऐसा सर्वे पेश किया है, जिसमें 43,255 से ज्यादा महिलाओं ने खुद इस बड़े सवाल के जवाब का खुलासा किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो आज दिल्ली में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा एक सर्वेक्षण आधिकारिक रूप से रिलीज किया जाना है। जिसके निष्कर्ष बताते हैं कि 90 प्रतिशत महिलाएँ जो एकांतवासी हैं, जिनका न तो कोई परिवार है और न ही कोई आमदनी, वो सबसे ज्यादा खुशमिजाज हैं। इसके अलावा शादीशुदा महिलाएँ भी इस सर्वे के अनुसार प्रसन्न रहने वालों की सूची में आती हैं, जबकि लिव-इन रिलेशन में रहने वाली लड़कियाँ सबसे नाखुश रहती हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ये सर्वेक्षण 2017-18 में संघ द्वारा मान्यता प्राप्त पुणे आधारित रिसर्च सेंटर दृष्टि स्त्री अध्य्यन प्रबोधन केंद्र द्वारा करवाया गया था। यह सर्वेक्षण साक्षात्कार आधारित था और इसमें 18 वर्ष से ऊपर की महिलाओं से बात की गई थी। इसमें 29 राज्य, 5 केंद्र शासित प्रदेश और 465 जिले की लगभग सभी धर्म की महिलाओं को शामिल किया गया था।

इस सर्वेक्षण के जरिए मालूम चला कि सर्वे में शामिल लगभग 80 प्रतिशत महिलाएँ ‘खुश’ और ‘बहुत खुश’ वाले स्तर पर हैं, जबकि धार्मिक क्षेत्र से जुड़ी हुई महिलाएँ सबसे ज्यादा सुखी हैं।

जानकारी के मुताबिक ये सर्वेक्षण शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और पोषण के आधार पर था। जिसमें 2011 की जनगणना के समय महिला शिक्षा दर के 64.63% होने का हवाला देकर बताया गया कि इन आँकड़ों में 6 साल बाद काफी उछाल आया और ये प्रतिशत 79.63 तक पहुँच गए। जिसका मतलब है कि कुछ महिलाएँ अब स्नातक से ऊपर जाकर भी शिक्षा को ग्रहण कर रही हैं। इस सर्वेक्षण के मुताबिक आज भी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वाली महिलाओं में शिक्षा दर का अभाव है, लेकिन आरक्षण नीति के तहत उन्हें शिक्षा क्षेत्र में एक सहारा मिल रहा है, और इसके जरिए उच्च शिक्षा ग्रहण करने में भी उन्हें मदद मिल रही है।

इसके अलावा जानकारी के अनुसार इस सर्वेक्षण में शिक्षा संबंधी सूची में महिलाओं की खुशी और सलामती के मद्देनदर सबसे संतुष्ट पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी धारी महिलाओं को पाया गया, जबकि अशिक्षित महिलाओं में इस सूची का सबसे कम प्रतिशत मिला।

यहाँ बता दें कि इस सर्वे में उत्तर भारत की महिलाओं की खराब सामाजिक और आर्थिक स्थिति (Social Status) का भी खुलासा हुआ है। सर्वे के अनुसार अभी भी उत्तर भारत की महिलाएँ भारत के अन्य हिस्सों के मुकाबले आर्थिक रूप से कम आत्मनिर्भर हैं। उत्तर भारत में देश के बाकी हिस्सों के मुकाबले कम महिलाओं के पास अपने बैंक खाते हैं।

जबकि, स्वास्थ्य से जुड़ी बात करें तो देश की महिलाओं में आर्थराइटिस की समस्या सबसे ज़्यादा है जो उन्हें बढ़ती उम्र के साथ और परेशान करने लगती है। इस सर्वेक्षण में इस बात का भी खुलासा हुआ कि आज भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सबसे ज्यादा सामना आदिवासी महिलाओं को ही करना पड़ता है।

NRC के चलते एक भी हिन्दू को नहीं छोड़ना होगा देश: मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख (सरसंघचालक) मोहन भागवत ने कहा है कि एक भी हिन्दू को NRC के चलते देश नहीं छोड़ना पड़ेगा। उनके नाम असम की NRC/नागरिकता सूची में न होने का मतलब उन्हें देश से निकाला जाना नहीं है। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कोलकाता में भाजपा की मौजूदगी में संघ परिवार के आनुषंगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के सामने संघ की प्रतिबद्धता दोहराई।

मालूम हो कि RSS शुरू से भारत को दुनिया भर से सताए गए हिन्दुओं की प्राकृतिक शरणस्थली या ‘प्राकृतिक घर‘ मानता रहा है और प्रधानमंत्री (तत्कालीन भाजपा चुनाव प्रचार समिति के प्रमुख) नरेंद्र मोदी की सीधी निगरानी में बने 2014 के घोषणा-पत्र में भी इस बात का ज़िक्र है

बंगाल भाजपा प्रमुख दिलीप घोष की मौजूदगी में हुई इस बैठक में नागरिकता विधेयक संशोधन अधिनियम [Citizenship (Amendment) Bill (CAB)] संसद के आगामी सत्र में लाने पर भी बल दिया गया। कई नेताओं ने तो इस पर भी क्षोभ प्रकट किया कि हिन्दू शरणार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह बिल पहले लाकर उसके बाद NRC ही कवायद की जानी चाहिए थी।

गौरतलब है कि मोदी सरकार द्वारा प्रस्तावित नागरिकता विधेयक संशोधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत भारत के 6 पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों (हिन्दुओं, बौद्धों, ईसाइयों, जैनों आदि) को विशेष शरण और नागरिकता देने का प्रस्ताव लंबित है।

इसके पहले राजस्थान में भी संघ की बैठक में इस बात पर नाराज़गी व्यक्त की गई थी कि असम की NRC में नागरिकता से वंचित किए गए और घुसपैठिए चिह्नित किए गए करीब 19 लाख लोगों में से अधिकांश लोग हिन्दू ही हैं। सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने आश्वासन दिया है कि बंगाल में NRC जैसी कवायद नागरिकता विधेयक संशोधन अधिनियम को पास करने के पहले नहीं होगी

रामायण में कहीं भी जन्मस्थान का जिक्र नहीं, 1949 से शुरू हुई पूजा: सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्षकार

राम मंदिर मामले में जब से नियमित सुनवाई की शुरुआत हुई, तब से अब तक लगभग एक महीने की सुनवाई पूरी हो चुकी है। आज सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष ने अपनी दलीलें रखी। मुस्लिम पक्ष की तरफ से जिरह करते हुए वकील ज़फ़रयाब जिलानी ने महर्षि वाल्मीकि की रामायण और तुलसीदास रचित रामचरितमानस का जिक्र करते हुए कहा कि हिन्दुओं की आस्था इन्हीं दोनों पुस्तकों पर आधारित है लेकिन इन दोनों ही पुस्तकों में कहीं भी जन्मभूमि मंदिर के बारे में कुछ नहीं कहा गया है।

जिलानी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि 1949 से पहले मुख्य गुम्बद के नीचे पूजा होने का कोई साक्ष्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने जिलानी से पलट कर सवाल पुछा कि अगर इन दोनों पुस्तकों में जन्मस्थान मंदिर का जिक्र नहीं है तो इससे हिन्दुओं की आस्था पर क्या फ़र्क़ पड़ता है? जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि अगर रामायण और रामचरितमानस में जन्मस्थान मंदिर के सटीक लोकेशन के बारे में कुछ नहीं कहा है तो क्या हिन्दू आस्था नहीं रख सकते कि ये जगह जन्मस्थान है?

जिलानी ने जस्टिस चंद्रचूड़ के सवाल का जवाब देते हुए दावा किया कि जन्मस्थान अयोध्या में ही है लेकिन विवादित स्थल पर नहीं है, कहीं और है। इससे पहले मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पूरे अयोध्या को ही जन्मस्थान माना जाता है और इसके बारे में कोई सटीक स्थान का जिक्र नहीं है। राजीव धवन ने उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में मंदिर और पूजा को लेकर तरह-तरह की मान्यताएँ हैं; जैसे, कामाख्या देवी और सती के अंग जहाँ-जहाँ गिरे, वहाँ मंदिर बनाया गया।

जस्टिस बोबडे ने राजीव धवन को याद दिलाया कि ऐसा एक मंदिर पाकिस्तान में भी है। राजीव धवन ने कहा कि अयोध्या में रेलिंग के पास जाकर पूजा होती थी तो उसे मंदिर नहीं माना जाना चाहिए। धवन ने दावा किया कि भगवान राम की मूर्ति गर्भगृह में नहीं थी। उन्होंने कहा कि मूर्ति गर्भगृह में कैसे गई, इस बारे में उन्हें कुछ नहीं पता।

त्रिपुरा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा, कहा- अरसे बाद अपराधी या झूठों की नहीं सुनी

त्रिपुरा कॉन्ग्रेस के प्रमुख प्रद्योत देब बर्मन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी पर कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं। पार्टी की ‘हाई कमांड’ संस्कृति पर निशाना साधा है। साथ ही पार्टी में जारी गुटबाजी और आंतरिक कलह का भी जिक्र किया है।

ट्वीट कर उन्होंने अपने इस्तीफे की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “अरसे बाद मैं बेहद सुकून महसूस कर रहा हूॅं। आज काफी दिन बाद बिना किसी अपराधी या झूठे लोगों को सुने बिना दिन की शुरुआत हुई है। आज मुझे गुटबाजी या कहासुनी में पड़ने की जरूरत नहीं है। ना ही भ्रष्ट लोगों को ऊंचे पदों पर बैठाने का आलाकमान का हुक्म सुनना पड़ा है।”

प्रद्योत ने आगे लिखा, “आज जब मैं सोकर उठा तो अहसास हुआ कि समाज के गलत तत्वों को राज्य को बर्बाद करने वाले ओहदों तक पहुँचने से रोकने के कारण मेरे जीवन और स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा था। मैं लड़ा, और शायद हार गया, लेकिन मैं जीत ही कहाँ सकता था जब मैं लड़ाई में शुरू से ही अकेला था? मैंने तय कर लिया है कि मुझे सकारात्मक नजरिए की ज़रूरत है और मैंने अपने आस-पास से नकारात्मक लोगों को बदल दिया है।”

अपने बयान का अंत प्रद्योत कुछ इस प्रकार करते हैं, “आज मैं अपने राज्य में योगदान साफ और ईमानदार मन से कर सकता हूँ। मेरे अंदर का बुबागरा (त्रिपुरा के एक पवित्र देवता) किसी भी राजनीतिक ओहदे से अधिक शक्तिशाली है।”

पहले भी दी थी धमकी, NRC से जुड़ा मामला

प्रद्योत ने पहले भी इस्तीफे की चेतावनी दी थी। उनका आरोप था कि प्रदेश के वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता लुइज़िन्हो फलैरो उन पर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। प्रद्योत ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर असम की तरह NRC जैसी नागरिकता-सूची बनाए जाने की माँग की थी। प्रद्योत ने इसमें कॉन्ग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए एक विधायक की भी भूमिका का आरोप लगाया था। प्रद्योत ने किसी और पार्टी में शामिल होने की संभावना से भी इनकार किया है। इस बीच, राज्य कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता हरेकृष्ण भौमिक ने प्रद्योत के इस्तीफ़े की जानकारी होने से ही इनकार किया है।

J&K पर फर्जी तस्वीर से कारवां के पत्रकार ने फैलाया प्रोपेगेंडा, सच बताकर पुलिस अधिकारी ने लगाई लताड़

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर प्रोपेगेंडा फैलाने वाला समूह अब पहले से ज्यादा सक्रिय है। फर्जी तस्वीरों और निराधार तथ्यों के आधार पर कश्मीर को लेकर पूरे देश में असहजता का माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी सूची में कारवां के पत्रकार (फोटो पत्रकार) शाहिद तान्तरे ने भी फर्जी तस्वीर के सहारे प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाया। लेकिन झूठ ज्यादा देर तक चली नहीं और उन्हें सोशल मीडिया पर मिली जबरदस्त लताड़!

दरअसल, शाहिद ने कुछ दिन पहले अपने सोशल मीडिया अकॉउंट से एक पुरानी तस्वीर को प्रासंगिक बनाकर ट्वीट किया। इस पुरानी तस्वीर के साथ उन्होंने किसी कवि/शायर की आभासी फिक्शन पंक्तियों को लिखकर वहाँ के युवाओं की वर्तमान स्थिति को दयनीय दिखाने का प्रयास किया।

साझा तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि आला अधिकारी वहाँ के बच्चों से हँसते मुस्कुराते बात करते नजर आ रहे हैं। लेकिन लिखे गए कैप्शन से प्रतीत होता है कि जैसे अधिकारी कह रहे हों, “हम कश्मीरी युवकों पर तब तक अत्याचार करते हैं जब तक उनके पास कुछ कहने के लिए न बचे।”

ऐसे में जब हमने इस तस्वीर और तान्तरे द्वारा लिखे कैप्शन की हकीकत जानने का प्रयास किया तो हमें पता चला ये तस्वीर पुरानी है। जिसमें पुलिस अधिकारी पत्थरबाजी में शामिल बच्चों की कॉउंसलिंग कर रहे हैं।

इस संबंध में खुद जम्मू कश्मीर के पुलिस अधिकारी इम्तियाज़ हुसैन ने तान्तरे को जवाब देकर झूठे प्रोपगैंडा की पोल खोल दी है। उन्होंने तान्तरे के पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा है, “ये एक पुरानी तस्वीर है। और एक कवि की कुछ पंक्तियों का यहाँ इस्तेमाल प्रोपगैंडा फैलाने के लिहाज से हुआ है। तस्वीर में दिख रहे अधिकारी उन नाबालिग बच्चों की कॉउंसलिंग कर रहे हैं, जो साल 2010 में पत्थरबाजी में शामिल थे।”

जम्मू कश्मीर के पुलिस अधिकारी ने तान्तरे की इस हरकत को प्रोपगैंडा फैलाने का उदाहरण बताया। उनके अलावा सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस पत्रकार की लताड़ लगाई। लोगों ने पुलिस अधिकारी को ये तथ्य सामने लाने के लिए धन्यवाद कहा और ऐसे कई प्रोपगैंडों के उदाहरणों के बारे में बात करने लगे, जब फर्जी तस्वीरों के जरिए कश्मीर के नाम पर झूठी खबर फैलाई गई। हालाँकि, इस दौरान कुछ लोगों ने कारवां के पत्रकार के समर्थन में पुलिस अधिकारी को झूठा साबित करने की कोशिश की, लेकिन अधिकतर लोग सिर्फ इम्तियाज़ हुसैन की तारीफ करते नजर आए और कहा कि कश्मीर उनके हाथ में सुरक्षित है।

चिन्मयानन्द रेप मामला: पीड़िता के वकील ने कहा- हमें नहीं मिला कोई नोटिस, गिरफ़्तारी की बात गलत

पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मयानन्द वाले मामले में कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा था कि पीड़िता को भी मामले की जाँच कर रही एसआईटी ने हिरासत में ले लिया है। क्योंकि उस पर चिन्मयानन्द को ब्लैकमेल कर ₹5 करोड़ माँगने का आरोप है। लेकिन अब खबर है कि छात्रा को हिरासत में नहीं लिया गया है। पीड़िता के वकील ने कहा कि उन्हें अभी तक कोई नोटिस नहीं प्राप्त हुआ है और न ही उनके खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई की गई है। पीड़िता के गिरफ़्तारी की खबर गलत है। बता दें की कल सोमवार (सितम्बर 23, 2019) को इलाहबाद हाईकोर्ट ने पीड़िता के वकील ने अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। जिस पर 26 सितम्बर को सुनवाई होनी है।

हाईकोर्ट ने एसआईटी की जाँच प्रक्रिया पर भी संतुष्टि जताई है। एसआईटी के बारे में कोर्ट ने कहा था कि जाँच प्रक्रिया सही दिशा में जा रही है और सही तरीके से जाँच की जा रही है। बता दें कि पीड़िता और उसके दोस्तों का वीडियो सोशल मीडिया पर भी चल रहा है। अब कोर्ट इस बारे में निर्णय लेगा कि पीड़िता को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजना है या नहीं। हालाँकि, पीड़िता के गिरफ़्तार होने से स्वामी चिन्मयानन्द के ख़िलाफ़ चल रहे बलात्कार व यौन शोषण के मामलों पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा। फ़िलहाल इस पर सुनवाई 26 सितम्बर को तय हुई है।

गौरतलब है कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एसआईटी के आईजी नवीन अरोड़ा ने कोर्ट के सामने ब्लैकमेलिंग बात करते हुए आरोपित छात्रा और उसके दोस्त संजय की कॉल डिटेल पेश करते हुए बताया था कि दोनों के बीच 4200 बार बातचीत हुई थी। फिलहाल चिन्मयानंद 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में हैं।

शाहजहाँपुर स्थित स्वामी सुखदेवानंद विधि महाविद्यालय में एलएलएम की एक छात्रा ने 24 अगस्त को एक वीडियो वायरल करके पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर बलात्कार के गंभीर आरोप लगाए थे। बाद में मीडिया के सामने छात्रा ने चिन्‍मयानंद पर बलात्‍कार का आरोप लगाया था। चिन्‍मयानंद को इस मामले में हाल ही में गिरफ्तार किया गया था। उच्‍चतम न्‍यायालय के आदेश पर गठित एसआईटी इस प्रकरण की जाँच कर रही है।