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हाँ, भारत ने बरसाए थे बम, हमने अलकायदा को ट्रेनिंग दी: इमरान ख़ान ने एयर स्ट्राइक कबूली

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने स्वीकार किया है कि बालाकोट एयर स्ट्राइक के दौरान भारतीय वायुसेना ने आतंकी कैम्पों पर बमबारी की थी। इससे उन लोगों को तगड़ा धक्का लगना तय है, जो सरकार और सेना से सबूत की माँग करते हैं। इमरान ख़ान ने कहा कि पुलवामा हमले के दौरान ‘एक कश्मीरी लड़ाका’ ने खुद को बम से उड़ा लिया। बता दें कि इस आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। देखें वीडियो:

इमरान ख़ान ने कहा कि पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में बम गिराए। पाकिस्तानी पीएम ने इससे पहले अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान अल जज़ीरा को दिए गए इंटरव्यू में भी बातों ही बातों में स्वीकार किया था कि भारत ने पाकिस्तान में बम बरसाए थे। इससे पहले पाकिस्तान की एक रैली में इमरान ख़ान ने भारत को धमकी देते हुए कहा था कि अगर दोबारा ऐसा हमला हुआ तो पाक चुप नहीं बैठेगा। यहाँ भी इमरान ने अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकारा कि बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई थी।

इसके अलावा पाक पीएम ने पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई द्वारा अलकायदा के आतंकियों को प्रशिक्षण देने की बात भी कबूली है। उन्होंने कहा कि पाक फ़ौज और आईएसआई ने अलकायदा के आतंकियों को अफ़ग़ानिस्तान में लड़ने के लिए प्रशिक्षित किया। उन्होंने अलकायदा और पाकिस्तान के बीच सम्बन्ध होने की बात भी स्वीकार की। इमरान ख़ान की स्वीकारोक्ति भारत के उन आरोपों की नए सिरे से पुष्टि करती है कि पाकिस्तान आतंकवाद की जननी है और आतंकवादियों का पोषक है। देखें वीडियो:

इमरान ख़ान ने कहा कि पाकिस्तान और अलकायदा के सम्बन्ध इसलिए है, क्योंकि पाकिस्तान ने उसके आतंकियों को ट्रेनिंग दी। पाक फ़ौज के प्रवक्ता आसिफ गफूर लगातार इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं। अब इमरान ख़ान के बयान के बाद पाकिस्तान की लगातार हो रही बेइज्जती के क्रम में एक नया अध्याय जुड़ गया है।

इमरान, कहाँ से लाते हो ऐसे रिपोर्टर: ट्रम्प ने की बेइज्जती तो पाक मीडिया ने रोका लाइव प्रसारण

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान जब से अमेरिका पहुँचे हैं, तब से लगातार उनकी बेइज्जती हो रही है। जब वह सऊदी क्राउन प्रिंस की स्पेशल फ्लाइट से अमेरिका पहुँचे, तब उनके स्वागत के लिए कोई भी अमेरिकी अधिकारी नहीं पहुँचा। एयरपोर्ट पर केवल पाकिस्तानी अधिकारी ही उन्हें रिसीव करने पहुँचे। अव्वल तो यह कि पीएम मोदी को रेड कार्पेट वेलकम देने वाले अमेरिका ने इमरान के लिए बस एक चटाई बिछा कर इतिश्री कर ली। उनका ये फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और उनकी खिल्ली उड़ी।

पीएम मोदी की रैली ‘हाउडी मोदी’ में भाग लेने के 1 दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तानी पीएम से भी मुलाक़ात की। इस दौरान पाकिस्तान के एक अति-उत्साही पत्रकार ने अपने देश और प्रधानमंत्री की बेइज्जती करवा दी। उक्त पाकिस्तानी पत्रकार ने कश्मीर को लेकर ट्रम्प के सामने पाकिस्तानी प्रोपगेंडा चलाने की कोशिश की लेकिन इससे पाक पीएम का ही मज़ाक बन गया। मजबूरी में पाकिस्तानी चैनल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस का प्रसारण ही रोक दिया।

दरअसल, जब ट्रम्प और इमरान ख़ान मीडिया से बात कर रहे थे, तब एक पाकिस्तानी पत्रकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति से कहा कि कश्मीरी जनता पिछले 50 दिनों से कष्ट भुगत रही है। हवा-हवाई दावों की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए उक्त पत्रकार ने ट्रम्प के सामने दावा किया कि 50 दिनों से कश्मीर में न तो इंटरनेट चल रहा है और न ही कोई अन्य व्यवस्था काम कर रही है। साथ ही उसने जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघन की बातें भी की।

उस पत्रकार ने ट्रम्प से पूछा कि वह जम्मू-कश्मीर के लिए क्या करना चाहते हैं? बदले में अमेरिका के राष्ट्रपति ने पाक पीएम इमरान से ही सवाल पूछ डाला। ट्रम्प ने इमरान से पूछा कि आप ऐसे रिपोर्टर्स कहाँ से लेकर आते हो? ट्रम्प ने इमरान से पूछा कि क्या यह रिपोर्टर उनकी टीम का है? उक्त पत्रकार के दावों को नकारते हुए राष्ट्रपति ट्रम्प ने उससे कहा कि तुम बयान दे रहे हो, सवाल नहीं पूछ रहे। इसके बाद एआरवाई चैनल ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का प्रसारण ही रोक दिया। ‘लाइव 92’ सहित कई अन्य पाकिस्तानी न्यूज़ चैनलों ने भी अपने देश, पाक मीडिया और पाक पीएम का मज़ाक बनते देख प्रसारण रोक दिया।

सवाल यह है कि बिना किसी सबूत और तथ्य के भारत पर लगातार बड़े-बड़े आरोप लगाने वाले इमरान ख़ान के एजेंडे को आगे बढ़ा कर पाकिस्तानी मीडिया लगातार अपने देश का मज़ाक़ क्यों बना रहा है? राष्ट्रपति ट्रम्प ने इमरान के सामने कहा कि पीएम मोदी ने उनके सामने अनुच्छेद 370 को लेकर आक्रामक रूप से अपनी बात रखी और 59,000 लोगों की भीड़ ने इसपर तालियाँ बजा कर इस निर्णय का स्वागत किया। ट्रम्प ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम की बात कर रहे थे। इस दौरान इमरान का चेहरा देखने लायक था।

मौलवी ने किया नाबालिग लड़की का यौन उत्पीड़न, अवैध मदरसे से बचाई गईं 12 और लड़कियाँ

केरल पुलिस ने सोमवार (सितंबर 23, 2019) को राज्य के मलप्पुरम जिले के कोलाथुर इलाके में स्थित एक मदरसे से अरबी पढ़ाने वाले रफीक नामक (35) मौलवी को गिरफ्तार किया। मौलवी पर इल्जाम है कि उसने केयरटेकर की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर मदरसे में पढ़ने वाली 17 साल की बच्ची का यौन उत्पीड़न किया।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो शुरुआती जाँच में खुलासा हुआ है कि जिस मदरसे में ये पूरी घटना हुई, वो अवैध है और उसे अब तक बिना लाइसेंस के चलाया जा रहा था। जाँच में पुलिस को मदरसे से 12 और लड़कियाँ मिली हैं, जिन्हें फिलहाल आश्रय गृह भेज दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक कुछ लड़कियों ने राज्य की चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर को फोन कर मदरसा प्रशासन के ख़िलाफ़ शोषण की शिकायत की। मलप्पुरम चाइल्डलाइन चीफ कॉर्डिनेटर अनवर कराक्कड़ ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत के दौरान बताया कि जैसे ही उन्हें इसकी सूचना मिली, उन्हें पूछताछ की। 3 में से 1 लड़की ने इस बात को स्वीकारा कि मौलवी रफीक ने उसका यौन उत्पीड़न किया। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को इसके बारे में सूचना दी।

उन्होंने बताया कि मदरसे को बिना अनुमति के संचालित किया जा रहा था और वहाँ रहने वाली सभी लड़कियाँ गरीब परिवार से थी। फिलहाल, लड़कियों को बचा लिया गया है और उन्हें आश्रय गृह भेज दिया गया है।

पीड़ित बच्ची की मेडिकल जाँच में उसके साथ हुए यौन उत्पीड़न की पुष्टि हो चुकी है और आरोपित मौलवी को पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। कोलाथुर के एसएचओ ने भी बताया है कि मामले में जाँच जारी है। पता लगाया जा रहा है कि रफीक ने कितने बच्चों का उत्पीड़न किया है।

ऑपइंडिया एक्सक्लूसिव: पाकिस्तान से आए हिंदू बच्चों को स्कूल ने निकाला, केजरीवाल सरकार में अनसुनी फरियाद

पाकिस्तान के सुकुर से जान बचाकर गुलशेर अपने परिवार के साथ भारत तो आ गए, लेकिन उनकी परेशानियॉं खत्म होने का नाम नहीं ले रही। इसी साल 14 मई को दिल्ली आए गुलशेर के तीन बच्चों को स्कूल में एडमिशन नहीं मिल रहा। बकौल गुलशेर अपनी फरियाद लेकर वे अधिकारियों के पास कई बार दौड़ चुके हैं, लेकिन किसी को उनके बच्चों के भविष्य की परवाह नहीं है।

फ़िलहाल दिल्ली के छतरपुर इलाके के भाटी माइन्स में गुलशेर अपने बच्चों के साथ रहते हैं। यहाँ के एक सरकारी स्कूल ने उनके 3 बच्चों को यह कह कर निकाल दिया गया कि वह उम्र में बड़े हैं। बच्चों के नाम मूना कुमारी (18 वर्ष), संजिना बाई (16 वर्ष), और रवि कुमार (17 वर्ष) है। इन्हें कक्षा नौवीं और दसवीं में दाखिला लेने की दरकार है, लेकिन स्कूल के मुताबिक उम्र से अधिक होने के कारण इन्हें एडमिशन नहीं दिया जा सकता। बच्चों के पास पाकिस्तान से स्कूल छोड़ने के प्रमाण-पत्र और एनरोलमेंट कार्ड भी हैं।

अपनी बहनों मूना कुमारी और संजिना बाई के साथ रवि कुमार

बच्चे अपने माता-पिता के साथ इसी साल 14 मई पाकिस्तान से भारत आए हैं। इन्हें बिना किसी मशक्कत के 5 जुलाई को स्कूल में एडमिशन मिल गया और 8 जुलाई से क्लास अटेंड करने की भी अनुमति दे दी गई। लेकिन अचानक 14 सितंबर 2019 को बड़ी उम्र का हवाला देकर इन्हें स्कूल से निकाल दिया गया।

रवि कुमार का पाकिस्तान में निर्गत स्कूली दस्तावेज

बच्चों के पिता गुलशेर ने ऑपइंडिया को बताया कि शिक्षा विभाग के अधिकारीयों ने पहले कहा कि बच्चों का दाखिला होगा। लेकिन एक महीने बाद उम्र ज्यादा बताकर एडमिशन देने से मना कर दिया। बच्चों के पिता की मानें तो पाकिस्तान के स्कूल से मिले दस्तावेज भी वह स्कूल को दे चुके हैं।

मूना कुमारी का स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट

घर में बैठे-बैठे उनके बच्चों का कीमती वक़्त बर्बाद हो रहा है। वो इस संबंध में इलाके के विधायक से लेकर जिलाधिकारी तक से मिल चुके हैं, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली। अधिकारियों मदद करने की बजाए उन्हें दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से मिलने की सलाह दी। गुलशेर ने बताया कि कई बार प्रयास करने के बावजूद वे सिसोदिया से मिल नहीं पाए।

संजिना बाई का स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट

गुलशेर ने बताया कि उनका पूरा परिवार इससे परेशान हैं। स्कूल प्रशासन रोज मामले को टाल रहा है। उनके मुताबिक वह अपने बच्चों को किताब-कॉपियाँ और ड्रेस-जूते सब दिलवा चुके हैं, लेकिन स्कूल अब कह रहा है कि वह बच्चों को स्कूल में नहीं पढ़ा सकते। इस परिस्थिति में न केवल वो बल्कि उनके बच्चे भी मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं।

थक हार के गुलशेर की सारी उम्मीदें सुप्रीम कोर्ट के वकील अशोक अग्रवाल पर टिकी है। ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अग्रवाल ने इस संबंध में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को पत्र लिखा है।

पत्र में अग्रवाल ने पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति से अवगत करवाते हुए इस मामले पर मुख्यमंत्री से इस मामले पर गौर करने की अपील की है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि पाकिस्तान में हिंदुओं के लिए बनी असहज स्थिति के कारण बहुत से हिंदू भारत की ओर प्रवास कर रहे हैं। वे यहाँ शरणार्थियों की भाँति रह रहे हैं और उनकी नागरिकता की अर्जी केंद्र सरकार के विचार में है। इन हिंदू परिवारों में बहुत से स्कूल जाने वाले बच्चे हैं जिन्हें अपनी आगे की पढ़ाई चालू करने के लिए सरकारी स्कूल में दाखिला लेने की आवश्यकता है।

अपने पत्र में उन्होंने पाकिस्तानी बच्ची मधु का भी जिक्र किया है। जिसको कुछ समय पहले भारत आकर इन्हीं परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की मदद से उसे छतरपुर के भाटी माइन्स स्कूल में कक्षा नौंवीं में दाखिला मिल गया था, जबकि उस समय मधु के पास कोई दस्तावेज नहीं थे। आज मधु उसी स्कूल स्कूल में बाहरवीं की छात्रा है।

वकील अशोक अग्रवाल ने अपने पत्र में इस बात पर भी मुख्यमंत्री का ध्यान दिलवाया है कि भारत के संविधान के मुताबिक इन बच्चों का आर्टिकल 14 और 21 के तहत शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार हैं। जबकि स्कूल ने इन्हें दाखिला न देकर इनके अधिकारों का हनन किया है।

FACT CHECK: शशि थरूर ने नेहरू की फोटो को लेकर फैलाया झूठ, ‘इंदिरा’ को लिखा ‘इंडिया’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के ह्यूस्टन में ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में 50,000 से अभी अधिक लोगों को सम्बोधित किया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का हिस्सा बने। इस भव्य रैली की भारी सफलता के बाद कई कॉन्ग्रेस नेताओं की प्रतिक्रियाएँ आईं। जहाँ राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे आनंद शर्मा ने दावा किया कि पीएम मोदी ने अमेरिका के चुनाव प्रचार अभियान में दखल देकर भारत की विदेश नीति को नुकसान पहुँचाया है, वहीं केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि पीएम मोदी को अमेरिका में वहाँ के हाउस लीडर ने नेहरू की याद दिलाई गई।

जब कॉन्ग्रेस नेता किसी मुद्दे पर मुँह खोलते हैं तो नेहरू का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। नेहरू को महान साबित करने के चक्कर में पूर्व केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री और कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक फोटो ट्वीट किया। उन्होंने दावा किया कि ये फोटो 1954 का है और इसे अमेरिका में क्लिक किया गया था। थरूर ने लिखा कि बिना किसी प्रचार-प्रसार के नेहरू के स्वागत में स्वतः ही एक विशाल भीड़ जुट गई, जो पूरे उत्साह में थी। उन्होंने ‘क्राउड मैनेजमेंट’, ‘हाइप’ और ‘मीडिया पब्लिसिटी’ की चर्चा कर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा।

शशि थरूर द्वारा ट्वीट किए गए फोटो में तत्कालीन पीएम नेहरू और इंदिरा एक गाड़ी में दिख रहे हैं और चरों तरफ से भीड़ ने उन्हें घेर रखा है। इस फोटो में इंदिरा हाथ उठा कर लोगों का अभिवादन स्वीकार करती दिख रही हैं। अब आते हैं सच्चाई पर। फोटो में कोई गड़बड़ी नहीं थी लेकिन उस फोटो के बारे में थरूर ने जो जानकारी दी, उसमें झूठ ही झूठ था। सबसे पहले तो थरूर ने ‘इंदिरा’ की जगह ‘इंडिया’ लिख कर ‘इंडिया इज इंदिरा, इंडिया इज इंदिरा’ वाले नारे की याद दिला दी।

ट्विटर पर लोगों ने शशि थरूर से पूछा कि उन्होंने इंदिरा गाँधी का नाम तो सुना है लेकिन इंडिया गाँधी कौन है? सोशल मीडिया में थरूर से पूछा गया कि क्या वह परिवार विशेष की भक्ति में इतने मग्न हो गए हैं कि उनके लिए ‘इंदिरा’ ही अब ‘इंडिया’ है? अब आते हैं इस ट्वीट के सबसे बड़े झूठ पर। थरूर के दावे की तुरंत पोल खुल गई क्योंकि उन्होंने नेहरू-इंदिरा की जो फोटो शेयर की थी, वह अमेरिका की थी ही नहीं। वह फोटो 1954 की भी नहीं है। दरअसल, ये फोटो मॉस्को की है और इसे 1955 में क्लिक किया गया था।

नेहरू को महान साबित करने और मोदी को नीचा दिखाने का शशि थरूर का यह दाँव उलटा पड़ गया और उनसे लोगों के एक भी सवाल का जवाब देते नहीं बना। यहाँ तक कि इतनी बेइज्जती होने के बाद भी उन्होंने माफ़ी माँगना तो दूर, अपना ट्वीट डिलीट तक नहीं किया। थरूर से लोगों ने पूछा कि इंदिरा गाँधी किस हैसियत से नेहरू के साथ विदेश दौरा कर रही थीं? वह किस पद पर थीं? शशि थरूर के ट्वीट के बाद ग़लत इन्फॉर्मेशन वाले इस फोटो को कई कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा शेयर किया गया।

मालूम होना चाहिए कि उस दौरान रूस (तब सोवियत संघ) में बॉलीवुड फ़िल्में काफ़ी लोकप्रिय हुआ करती थीं और राज कपूर वहाँ एक जाना-पहचाना चेहरा थे। समय के साथ ये जगह हॉलीवुड फ़िल्मों ने ले ली और धीरे-धीरे रूस में भारतीय फ़िल्मों का चलना कम होता गया, लेकिन राज कपूर के गाने ‘मेरा जूता है जापानी’ और ‘आवारा हूँ’ अभी भी वहाँ लोकप्रिय है। थरूर का यह दावा भी ग़लत है कि नेहरू ने बिना किसी प्रचार-प्रसार के अपने लिए इतनी भीड़ जुटा ली।

अगर नेहरू के सोवियत दौरे वाली ख़बरों पर गौर करें तो पता चलता है कि उनके साथ भारतीय फ़िल्म स्टार्स भी उनके प्रतिनिधिमंडल में गए थे। उन्होंने इन फ़िल्म अभिनेताओं की लोकप्रियता को भुनाया। इतना ही नहीं, रूस में एक ‘इंडियन फ़िल्म फेस्टिवल’ का आयोजन भी किया गया था। भारतीय थीम पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए थे।

सेक्युलर सरकारों ने हिंदुओं को बनाया दोयम दर्जे का नागरिक, मंदिरों की संपत्ति पर किया कब्जा

बरसों तक वन में घूम-घूम,
बाधा विघ्नों को चूम-चूम,
सह धूप, घाम, पानी, पत्थर,
पांडव आये कुछ और निखर!

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने ये पंक्तियाँ पांडवों के अज्ञातवास और वनवास से लौटने पर लिखी थीं। इसके साथ ही उन्होंने जोड़ा था, ‘सौभाग्य न सब दिन सोता है, देखें आगे क्या होता है!’

लगातार चल रही राम मंदिर मामले की अदालती सुनवाई पर ये पंक्तियाँ अपने-आप ही याद आ जाती हैं। शुरुआती पंक्तियाँ इसलिए क्योंकि अयोध्या में राम मंदिर तक पहुँचने के लिए पाँच सुरक्षा जाँच की रुकावटें पार करनी पड़ती हैं। हिन्दुओं के बड़े तीर्थ देखें तो उनमें से अधिकतर दुर्गम स्थानों पर मिलेंगे। संभवतः ऐसे दुर्गम स्थानों पर ये तीर्थ इसलिए बने क्योंकि ये सबके मुँह उठाकर पहुँच जाने की जगहें नहीं थीं। जिसने इस दिशा में विशेष प्रयास किए हों, वही यहाँ तक पहुँचे, ऐसी सोच शायद रही हो।

यही वजह थी कि गाँधी भारतीय रेलवे के प्रखर विरोधी थे। वो कहते थे कि रेलवे और ट्रेन के होने से हिन्दुओं के लिए उनके तीर्थों तक पहुँचना सुगम हो गया है (और होता जा रहा है)। इससे अयोग्य और अनाधिकारी भी मंदिरों में पहुँचने लगेंगे, जिससे की तीर्थ की शुचिता भंग होती है। मेरे ख़याल से इसकी एक और वजह भी रही होगी। ऐसे एकांत और निर्जन स्थलों पर साधु-सन्यासियों ने बरसों साधना की होगी। लगातार योगियों, सिद्धों आदि के संसर्ग से उस क्षेत्र पर भी असर पड़ा होगा। ऐसे साधु आमतौर पर नगरों से दूर ही रहते हैं, इसलिए भी तीर्थ आम लोगों की भीड़-भाड़ से अलग, कहीं दूर ही स्थापित हुए।

अभी जब राम मंदिर मामले पर सुनवाई चल रही है, तब क्या आम भारतीय भी इस मामले पर पढ़ना-सुनना और जानना चाहता होगा? अगर ख़रीदी जा सकने वाले मीडिया चैनलों के हिसाब से सोचें तो इसका जवाब होगा नहीं। अख़बारों, टीवी की बहसों या रेडियो पर शायद ही कुछ देखने-सुनने को मिलता है। इसकी तुलना में सोशल मीडिया पर किसी आम आदमी का मैसेज वायरल होता नजर आता है। इसमें कहा गया है कि रावण पर राम की विजय के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले दशहरा की वजह से अदालत 7 से लेकर 12 अक्टूबर तक छुट्टी पर है और राम के अयोध्या लौटने की ख़ुशी में मनाई जाने वाली दीपावली पर वो 28 से 31 तक बंद रहेगी। इसके बाद अदालत इस बात पर सुनवाई करेगी कि राम जन्मभूमि थी भी या नहीं!

इसके आधार पर देखें तो ऐसा लगता है कि आम आदमी की भावना को ख़रीदी जाने वाली मीडिया समझ नहीं पा रही, या जान बूझकर नकार रही है। समझ नहीं पा रही का सवाल तो पैदा ही नहीं होता, क्योंकि वहाँ काम करने वाले लोग भी समाज से ही आते हैं और दिन भर में कई आम लोगों से मिलते भी रहते हैं। फिर क्या वजह हो सकती है कि इसके बारे में कुछ बोला-लिखा नहीं जा रहा? असल में इस पर बात करना कई स्थापित शहरी मिथकों की धज्जियाँ उड़ा देता है।

उदाहरण के तौर पर ये कहा जाता है कि मंदिरों की कमाई बहुत है और उससे आम आदमी का भला होना चाहिए। समस्या ये है कि मंदिर और उसकी आय की बात करते ही नजर आने लगेगा कि मंदिरों की संपत्ति तो पहले ही सरकारी कब्जे में है। फिर ये भी बताना पड़ेगा कि भारत की सेक्युलर-धर्मनिरपेक्ष सरकार बहादुर ने सबसे ज्यादा जमीनों वाले चर्च और वक्फ बोर्ड को तो सरकारी नियंत्रण से मुक्त रखा है लेकिन मंदिरों की जमीनें समय-समय पर, किसी न किसी बहाने से बेचती रही है।

अयोध्या राम जन्मभूमि के दर्शनों के लिए हर रोज पाँच सुरक्षा घेरे पार करके करीब चार सौ श्रद्धालु पहुँचते हैं। इस मंदिर के “रिसीवर” अयोध्या के डिवीज़नल कमिश्नर (नाम पर गौर कीजिए – मनोज मिश्रा) होते हैं जो मंदिर को मिलने वाले चढ़ावे को एक अलग बैंक अकाउंट में रखते हैं। प्रति माह ये आय करीब छह लाख होती है। सन 1992 से यहाँ के महंत (नाम पर ध्यान दीजिए– महंत सत्येन्द्र दास) मंदिर के रख-रखाव के लिए मिलने वाले पैसे को कुछ बढ़ाने की बात कर रहे थे। उन्हें 26,000 रुपये प्रति माह मिलते थे, जिसे अभी-अभी बढ़ाकर 30,000 (पहले से चार हजार ज्यादा) करने की महती कृपा “मनोज मिश्रा” जी ने की है। हर महीने मिलने वाले छह लाख में से सरकार बहादुर, तम्बू में रह रहे श्री राम के रख-रखाव के लिए तीस हजार ही क्यों देगी- ये हमें पता नहीं।

मंदिर से जुड़े खर्चे और भी हैं। महंत और उनके सहयोगियों की मासिक तनख्वाह भी बढ़ाने का फैसला सरकार बहादुर की तरफ से रिसीवर “श्री मनोज मिश्रा” कर चुके हैं। पहले मिलने वाले 12,000 की तुलना में अब महंत सत्येन्द्र दास को 13,000 मिलेंगे। उनके साथ काम करने वाले करीब आठ लोगों को 7,500 से 10,000 रुपए के बीच की तनख्वाह मिलती थी। इसमें भी सरकार बहादुर ने कृपा बरसाते हुए हरेक के लिए पूरे 500 रुपए की बढ़ोत्तरी करने की मेहरबानी की है।

मेरा विश्वास है कि बिकाऊ मीडिया चैनलों के जरिए ऐसी मोटी तनख्वाह और भत्तों की बात अगर फैलती तो जैसे-तैसे गुजारा कर रहे स्किल्ड लेबर या सेमी स्किल्ड लेबर (जो पता नहीं किस न्यूनतम दैनिक मजदूरी पर काम करते हैं) जरूर नाराज होकर हड़ताल करते। अच्छा ही है कि ज्यादा बिकने वाले समाचार-पत्रों या प्राइम टाइम पर ये चर्चा नहीं हुई।

बाकी जिन्हें लगता हो कि भारतवर्ष में हिन्दुओं को दोयम दर्जे के नागरिकों की तरह नहीं रहना पड़ता, वो ढूँढने के प्रयास करें। अगर तुलनात्मक रूप से हिन्दुओं को अपने धर्म और पूजा-पद्धतियों के पालन के संवैधानिक अधिकार दिए जाने का एक भी उदाहरण दिखता हो, तो हम भी उस एक उदाहरण को देखना चाहेंगे।

30 लोगों ने 2 साल तक नाबालिग लड़की का किया बलात्कार, अशरफ सहित 3 गिरफ़्तार

केरल में एक नाबालिग लड़की के साथ दरिंदगी का भयावह मामला सामने आया है। घटना मल्ल्पुरम जिले में स्थित चेलारी क्षेत्र की है। यहाँ एक 12 वर्षीय लड़की के साथ 30 लोगों ने बलात्कार किया। पीड़िता 7वीं की छात्रा है। पुलिस ने आरोपितों के ख़िलाफ़ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने इस मामले में 3 लोगों को गिरफ़्तार भी किया है। गिरफ़्तार आरोपितों में से एक की पहचान 36 वर्षीय अशरफ के रूप में हुई है और दूसरे का नाम शिजु है। केरल की स्थानीय मीडिया के अनुसार, लड़की के माँ-बाप की सहमति से उसके साथ बलात्कार किया गया

पुलिस ने इस मामले में पीड़िता के पिता को भी गिरफ़्तार कर लिया है। यह मामला तब सामने आया, जब स्थानीय लोगों ने स्कूल के ‘पेरेंट्स टीचर्स एसोसिएशन’ को बताया कि पीड़िता कुछ दिनों से पढ़ाई नहीं कर रही थी। शिक्षकों ने पाया कि वह कई दिनों तक क्लास में अनुपस्थित रहती थी और मानसिक रूप से काफ़ी परेशान लग रही थी। स्कूल ने इसकी सूचना चाइल्डलाइन अथॉरिटी को दी। अथॉरिटी के सदस्यों ने जब लड़की से पूछताछ की, तब उसके साथ बलात्कार और यौन शोषण का मामला सामने आया

इसके बाद पीड़िता को चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उसे चिल्ड्रन शेल्टर होम भेज दिया गया है। रविवार (सितम्बर 22, 2019) को पुलिस ने इस समबन्ध में मामला दर्ज किया और उसी दिन पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होकर अपना बयान दर्ज कराया। फिलहाल तीनों आरोपितों को जुडिशल कस्टडी में भेजा गया है। यह भी पता चला है कि यह सब पूरे 2 साल से चल रहा था और इस दौरान विभिन्न लोगों ने पीड़िता का बलात्कार किया।

चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के अध्यक्ष ने बताया कि इस पूरे मामले में पीड़िता का पिता ही सबसे ज्यादा दोषी है। उन्होंने बताया कि लड़की के माता-पिता ने अपनी बेटी के साथ बलात्कार करने के लिए सहमति दी। चूँकि, इस मामले में कई लोग आरोपित हैं, कमिटी ने पुलिस से बड़े स्तर पर जाँच करने की अपील की है।

7 साल में 4000 ईसाई लड़कियाँ ‘लव जिहाद’ की शिकार: अल्पसंख्यक आयोग ने अमित शाह से लगाई गुहार

हिंदू ही नहीं ईसाई लड़कियाँ भी ‘लव जिहाद’ का शिकार हो रही हैं। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NMC) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस सम्बन्ध में पत्र लिखा है। केरल के कोझीकोड में एक ईसाई व्यक्ति ने अपने बेटी के साथ ब्लैकमेलिंग का मामल दर्ज कराया था। अपनी शिकायत में उसने कहा था कि उसकी बेटी को ब्लैकमेल कर उसे इस्लाम कबूलने के लिए मजबूर किया जा रहा है। अल्पसंख्यक आयोग ने इस ख़बर को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का ध्यान इस तरफ आकृष्ट कराया है।

अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष जॉर्ज कुरियन ने पत्र में स्वीकार किया है कि धर्मान्तरण के मामले काफ़ी ज्यादा बढ़ गए हैं। उन्होंने बताया कि इस कार्य को एक सुनियोजित तरीके से और संगठनात्मक रूप से अंजाम दिया जा रहा है। कुरियन के अनुसार, पीड़ितों को ‘लव जिहाद’ के तहत फँसा कर आतंकी गतिविधियों में उनका इस्तेमाल किया जा रहा है। केरल से आने वाले जॉर्ज कुरियन ख़ुद ईसाई हैं और उन्हें मई 2017 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया था।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने गृह मंत्रालय को लिखा पत्र: ईसाई लड़कियाँ बन रही हैं लव जिहाद’ की शिकार

जॉर्ज कुरियन ने कहा कि ईसाई लड़कियाँ ‘लव जिहाद’ का सबसे आसान शिकार बन रही हैं। उन्होंने गृह मंत्रालय से इस ख़तरनाक चलन को रोकने और इस मामले में एनआईए से जाँच कराने की माँग की। बकौल अल्पसंख्यक आयोग, ईसाई लड़कियाँ इस्लामिक कट्टरवादियों के लिए एक ‘सॉफ्ट टारगेट’ बन गई हैं। आयोग ने कहा कि अब इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा चलाए जा रहे धर्मान्तरण अभियान को रोकने के लिए क़ानून बनाने का समय आ गया है। कुरियन ने कहा:

“कई अभिभावकों में ‘लव जिहाद’ को लेकर डर का माहौल है और उनका ये डर जायज भी है। पूर्व में कई मामले ऐसे आ चुके हैं, जहाँ ईसाई लड़कियों को ‘लव जिहाद’ का शिकार बनाया गया। केरल के 21 लोग खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन आईएसआईएस में शामिल हो गए। इनमें से 5 ऐसे थे, जो पहले ईसाई थे और बाद में उन्हें धर्मान्तरण के जरिये इस्लाम कबूलवाया गया था।”

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की यह चिंता 2 हालिया घटनाओं के कारण बढ़ गई है। पहली घटना केरल के कोझीकोड की है, जहाँ एक कॉलेज छात्रा के साथ बलात्कार किया गया और फिर उसका वीडियो बना लिया गया। पीड़िता ईसाई समुदाय से आती है। आरोपितों ने रेप का वीडियो बनाया और फिर उस वीडियो के जरिए पीड़िता को इस्लाम कबूलने के लिए ब्लैकमेल करते रहे। जब पीड़िता ने ऐसा करने से मना कर दिया, तब उसके हॉस्टल से ही उसका अपहरण कर लिया गया। एक अन्य घटना में ईसाई लड़की का रेप किया गया और उससे इस्लाम कबूल करवाया गया।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने लिखा कि अधिकतर मामलों में पीड़ितों का ब्रेनवाश किया गया। आयोग ने चिंता जताई है कि अगर यह सब चालू रहा तो केरल में सांप्रदायिक सौहार्द की स्थिति बिगड़ सकती है। कई मामलों में पीड़ितों के परिवार वालों ने डर के कारण चुप रहना ही उचित समझा, क्योंकि धर्मान्तरण लॉबी काफ़ी शक्तिशाली और संगठित है। कैथोलिक कॉन्फ्रेंस ने भी स्वीकारा है कि ‘लव जिहाद’ एक समाजिक बुराई बन गई है, जिसके तहत ईसाई लड़कियों का यौन शोषण किया जाता है और फिर उनकी पूरी जिंदगी नरक बन जाती है। अधिकतर जवान ईसाई लड़कियों को ही निशाना बनाया जा रहा है।

‘TOI’ के कोच्चि संस्करण में में छपी ख़बर

केरल बिशप कैथोलिक कॉन्फ्रेंस ने इस सम्बन्ध में एक रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, 2005 से लेकर 2012 तक, 7 वर्षों में 4000 ईसाई लड़कियों को ‘लव जिहाद’ का शिकार बनाया गया था। इन सबको प्यार के जाल में फँसाया गया और जबरन धर्मान्तरण कर के इस्लाम कबूल करवाया गया। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने भी ‘Kerala Catholic Bishops Conference’s Commission for Social Harmony and Vigilance’ की इस रिपोर्ट का जिक्र करते हुए चिंता जताई है।

सिख नरसंहार: CM कमलनाथ तक पहुँची आँच, चश्मदीद ने SIT के समक्ष दर्ज कराया बयान

1984 सिख नरसंहार मामले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ के ख़िलाफ़ गवाह मुख्तयार सिंह ने मामले की जाँच कर रही एसआईटी के समक्ष पेश होकर अपना बयान दर्ज कराया। गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब के पास 2 सिखों को भीड़ द्वारा मार डालने के मामले में कमलनाथ के ख़िलाफ़ बयान दर्ज किया गया। दिल्ली गुरुद्वारा कमिटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने इसे सिख समुदाय के लिए बड़ी जीत करार दिया है।

मुख्तयार सिंह जब अपना बयान दर्ज कराने के लिए एसआईटी के दफ्तर पहुँचे, तब उनके साथ सिरसा भी थे। अकाली दल के नेता सिरसा दिल्ली के राजौरी गार्डन से विधायक हैं। उन्होंने इससे पहले गवाह मुख्तयार की सुरक्षा के लिए उचित बंदोबस्त करने की माँग की थी, क्योंकि हाई प्रोफाइल केस होने के कारण उन्हें नुकसान पहुँचाया जा सकता है। मुख्तयार सिंह अगले सप्ताह कुछ डॉक्युमेंट्स के साथ फिर एसआईटी के समक्ष पेश होंगे। उनके साथ पत्रकार संजय सूरी की गवाही भी दर्ज की जाएगी।

दोनों ही गवाहों के बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दर्ज किए जाएँगे। गवाह मुख्तयार सिंह ने सार्वजनिक रूप से यह बताने से इनकार कर दिया कि उन्होंने एसआईटी से क्या कहा, क्योंकि मामले की अभी चल रही है। जाँच कमिटी में डिस्ट्रिक्ट पुलिस कमिश्नर और रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट जज शामिल हैं। 72 वर्षीय कमलनाथ को गाँधी परिवार का विश्वस्त माना जाता है। बता दें कि गृह मंत्रालय ने सिख दंगे से जुड़े कई मामलों की फाइलें फिर से खोलने का निर्णय लिया है, जिसके परिणामस्वरूप कमलनाथ व अन्य नेताओं के ख़िलाफ़ फिर से इन मामलों की जाँच चल रही है।

वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का ने अपनी पुस्तक में रकाबगंज गुरुद्वारा पर हमले का जिक्र किया है। फुल्का ने लिखा है कि भीड़ द्वारा गुरुद्वारा को नुक़सान पहुँचाया गया था और 2 सिखों को ज़िंदा जला डाला गया था। फुल्का लिखते हैं कि हत्यारों द्वारा 5 घंटे तक उत्पात मचाया गया और कहा जाता है कि कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ पूरे 2 घंटे तक भीड़ के साथ रहे। तत्कालीन कमिश्नर और एडिशनल कमिश्नर ने भी मौके पर कमलनाथ की मौजूदगी की पुष्टि की थी। अगले दिन इंडियन एक्सप्रेस में ख़बर छपी थी कि कमलनाथ ने ही भीड़ का नेतृत्व किया था।

कमलनाथ से जुड़ा ये केस FIR संख्या 601/84 पर आधारित है। 1 नवम्बर 1984 की यह घटना उन 7 मामलों में से एक है, जिन्हें फिर से खोला गया है। ये मामला उन बयानों और संजय सूरी (क्राइम पत्रकार) जैसे गवाहों पर आधारित है। हालाँकि उस समय इस मामले में हुई FIR में कमलनाथ का नाम नहीं था और ट्रॉयल रूम ने ये केस बंद कर दिया था, लेकिन अब जैसे ही ये मामला खुला है, लोगों की नजरे फिर से कमलनाथ पर अटक गई हैं।

गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब दिल्ली में संसद भवन के पास स्थित है। इसे सन 1783 में सिख योद्धा बघेल सिंह द्वारा बनवाया गया था। नौवें सिख गुरु तेग बहादुर ने कश्मीरी पंडितों पर इस्लामिक आक्रांताओं के अत्याचारों का विरोध किया तो उन्हें औरंगजेब ने उनका शीश काटने का हुक्म दे दिया। गुरु तेग बहादुर के बलिदान के बाद इसी ऐतिहासिक स्थल पर उनका अंतिम संस्कार किया गया था।

बाबा सिद्दीकी के बेटे को टिकट मत दो, वह दागदार है: कॉन्ग्रेस के 12 नेताओं ने खोला मोर्चा

महाराष्ट्र में अब कॉन्ग्रेस के नेता ही अपनी पार्टी में चल रहे वंशवाद के ख़िलाफ़ मुखर हो रहे हैं। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान हो चुका है और कॉन्ग्रेस-एनसीपी गठबंधन बना कर चुनाव लड़ रही है। दोनों ही दलों के कई बड़े नेता भाजपा में शामिल हो चुके हैं। एनसीपी की हालत तो यह है कि इसके संस्थापक सदस्यों में अब सिर्फ़ अकेले शरद पवार ही पार्टी में बचे रह गए हैं। वह एनसीपी के अध्यक्ष भी हैं। मुंबई में 12 कॉन्ग्रेस नेताओं ने पूर्व विधायक बाबा सिद्दीकी के बेटे को टिकट दिए जाने के ख़िलाफ़ प्रेस कॉन्फ्रेंस किया।

बता दें कि 1997 से 2014 तक लगातार 17 वर्षों तक विधायक रहे बाबा सिद्दीकी महारष्ट्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। अपनी इफ्तार पार्टी के लिए सुर्खियाँ बटोरने वाला बाबा जियाउद्दीन सिद्दीकी को मुंबई भाजपा के अध्यक्ष आशीष शेलार ने हरा दिया था। हर साल होने वाली उनकी इफ्तार पार्टी में बॉलीवुड की ख़ान त्रिमूर्ति से लेकर कई अभिनेता-अभिनेत्री शामिल होते हैं। उनके बेटे ज़ीशान सिद्दीकी को टिकट दिए जाने का विरोध करते हुए मुंबई कॉन्ग्रेस के कई नेताओं ने इसे वंशवाद करार दिया

हालाँकि, अभी तक कॉन्ग्रेस ने उम्मीदवारों की सूची नहीं ज़ाहिर की है लेकिन बांद्रा ईस्ट कॉन्ग्रेस के 12 नेताओं ने पार्टी आलाकमान से कहा है कि किसी बाहरी उम्मीदवार के बजाय स्थानीय नेता को टिकट दिया जाए। प्रेस कांफ्रेंस करने वालों में मुंबई कॉन्ग्रेस के जनरल सेक्रेटरी, सेक्रेटरी, मुंबई महिला कॉन्ग्रेस की उपाध्यक्ष सहित कई अधिकारी शामिल थे। कॉन्ग्रेस नेताओं ने कहा कि ख़राब समय से गुजर रही पार्टी अगर स्थानीय नेताओं को टिकट दिया तभी वे पार्टी को जीता पाएँगे। उन्होंने वंशवाद को बढ़ावा न देने की अपील की।

कॉन्ग्रेस नेताओं ने कहा कि अगर ज़ीशान सिद्दीकी को टिकट दिया गया तो वे सभी न सिर्फ़ कॉन्ग्रेस पदाधिकारी के पद से बल्कि पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे देंगे। कॉन्ग्रेस नेताओं का कहना है कि ज़ीशान का आपराधिक इतिहास भी है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं ने कहा कि स्थानीय नेताओं को प्रेस के पास जाने की बजाय आलकमान से बात करनी चाहिए थी। हालाँकि, उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की कि बाबा सिद्दीकी के बेटे ज़ीशान को टिकट दिया जाएगा या नहीं।

महाराष्ट्र में पहले से ही बुरी स्थिति में चल रही कॉन्ग्रेस के लिए यह अच्छी ख़बर नहीं है, क्योंकि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर तो विपक्षी दशकों से वंशवाद का आरोप लगाते रहे हैं लेकिन अब निचले स्तर पर कॉन्ग्रेस के ही नेता इसके ख़िलाफ़ मुखर हो रहे हैं।