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मोहम्मद सलीम ने लगाया लड़कियों से अभद्रता का आरोप, बाबुल सुप्रियो दायर करेंगे मानहानि का केस

कोलकाता के जादवपुर यूनिवर्सिटी में बवाल का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो और सीपीआई (मार्क्सवादी) पोलित ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद सलीम ट्विटर पर भिड़ गए। सलीम ने बाबुल सुप्रियो पर लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया। सलीम के इस आरोप से गुस्साए बाबुल सुप्रियो ने उन पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने की बात कही है।

सीपीएम नेता मोहम्मद सलीम ने एक न्यूज रिपोर्ट का हवाला देकर ट्वीट किया, “केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो लड़कियों से पूछ रहे हैं कि वे बदन पर चिपकने वाले कपड़े क्यों पहन रही हैं। मोहम्मद सलीम ने कहा कि बाबुल सुप्रियो ने एक लड़की से यहाँ तक कहा कि वो उसके रुम में आए फिर वो बताएँगे कि बाबुल सुप्रियो कौन है। आगे मोहम्मद सलीम ने लिखा, “ऐसे सारे लोग बीजेपी में ही क्यों पाए जाते हैं?”

मोहम्मद सलीम के आरोपों का जवाब देते हुए बाबुल सुप्रियो ने कहा, “मैं मोहम्मद सलीम के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करूँगा, जिसे उसके संसदीय क्षेत्र के लोगों ने बाहर कर दिया है, उन्हें अपने आरोप साबित करने पड़ेंगे या फिर उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। मुझे ऐसे लोगों के खिलाफ सफाई देने की जरूरत नहीं है। ऐसा करना भी मेरी गरिमा के खिलाफ है। मेरे वकील इससे निपटेंगे।”

गौरतलब है कि, बाबुल सुप्रियो गुरुवार (सितंबर 19, 2019) रात अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यक्रम में हिस्सा लेने गए थे। जहाँ उन्हें वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े छात्रों के एक समूह ने घेर लिया और उन पर हमला कर दिया। बाबुल सुप्रियो के साथ हुए बदसलूकी के खिलाफ बीजेपी ने रैली निकाली और ममता बनर्जी के राज में कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। 

कैंसर पीड़ित माँ ने कहा- मेरे बेटे को माफ कर दो, बाबुल सुप्रियो ने दिया आश्वासन- नहीं कराउँगा FIR चाची

पश्चिम बंगाल की जाधवपुर यूनिवर्सिटी में भाजपा नेता व केन्द्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो पर गुरुवार (सितंबर 19, 2019) को हमला हुआ था। लेफ्ट समर्थित छात्रों ने उनके साथ धक्का-मुक्की और बदसलूकी की। छात्रों ने करीब 6 घंटे तक मंत्री को घेरे रखा। बाबुल सुप्रियो ने शुक्रवार (सितंबर 20, 2019) को ट्वीट कर कहा था कि जिस लड़के ने जादवपुर विश्वविद्यालय में उनके साथ मारपीट की है वो उसे खोजकर निकालेंगे, फिर देखते हैं कि सीएम ममता बनर्जी इस पर क्या कार्रवाई करती है।

मगर, इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है। दरअसल, अब बाबुल सुप्रियो ने कहा है कि वो अपने ऊपर हमला करने वाले एक छात्र पर मामला दर्ज नहीं कराएँगे। बता दें कि, सुप्रियो ने ये फैसला हमला करने वाले छात्र की माँ की भावुक अपील के बाद लिया है। बताया जा रहा है कि छात्र की माँ कैंसर से पीड़ित है और उन्होंने एक वीडियो के माध्यम से सोशल मीडिया में भावुक अपील की है। जिसमें उन्होंने कहा कि वो खुद कैंसर की बीमारी से पीड़ित हैं। ऐसे में उनके बेटे के खिलाफ बाबुल मामला दर्ज न कराएँ।

छात्र की माँ के वीडियो को ट्वीट करते हुए बाबुल सुप्रियो ने जवाब दिया, “चिंता मत करो चाची, मैं आपके बेटे को कोई नुकसान नहीं पहुँचाऊँगा। मैं उसकी गलतियों से सीखना चाहता हूँ। मैंने किसी के खिलाफ कोई एफआईआर नहीं की है। मैं किसी को कुछ भी नहीं होने दूँगा। आप चिंता मत करो। जल्द ही ठीक हो जाओ चाची।”

दरअसल, बाबुल सुप्रियो ने देबंजन बल्लव चटर्जी नाम के छात्र की फोटो ट्विटर पर पोस्ट करते हुए उसे खोज निकालने की बात कही थी। बाबुल के पोस्ट के वायरल होने के बाद देबंजन की माँ रुपाली बल्लव, जो कि 3 साल से कैंसर पीड़ित है, ने बीजेपी नेता से बेटे को माफ कर देने की गुहार लगाई। और उनकी गुहार पर बाबुल सुप्रियो ने छात्र के खिलाफ एफआईआर न कराने की बात कही। देबंजन उत्तरी कोलकाता में संस्कृत कॉलेज के द्वितीय वर्ष का छात्र है। उसके पिता कोलकाता से लगभग 100 किलोमीटर दूर बंगाल के पूर्वी बर्दवान जिले के एक स्कूल के शिक्षक हैं।

गौरतलब है कि, बाबुल सुप्रियो गुरुवार रात अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यक्रम में हिस्सा लेने गए थे। जहाँ उन्हें वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े छात्रों के एक समूह ने घेर लिया और उन पर हमला कर दिया। बाबुल सुप्रियो के साथ हुए बदसलूकी के खिलाफ बीजेपी ने रैली निकाली और ममता बनर्जी के राज में कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। 

बीजेपी कार्यकर्ता बड़ी संख्या में हाथों में पोस्टर बैनर लेकर सड़कों पर उतरे। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और लेफ्ट छात्र संगठनों के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने ममता बनर्जी की सरकार को गैर जवाबदेह सरकार करार दिया। उन्होंने कहा कि ये खराब गवर्नेंस का सबसे बड़ा उदाहरण है।

अशोक से प्रेरित होकर सिंहासन त्यागना चाहते थे युधिष्ठिर: रोमिला थापर का ‘अद्भुत’ इतिहास ज्ञान

कथित इतिहासकार रोमिला थापर ने इतिहास पर बड़ी-बड़ी पुस्तकें लिखी हैं, कई कॉलेजों में उनका लिखा पढ़ाया जाता है। हाल ही में उन्होंने ख़ुद को जेएनयू के नियम-क़ानूनों से ऊपर समझते हुए अपना सीवी भेजने से मना कर दिया था। अब सोशल मीडिया पर थापर का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उनके इतिहास ज्ञान की पोल खुल रही है। रोमिला थापर का यह वीडियो 2010 में इंटरनेशनल डेवलपमेंट रिसर्च सेंटर (आईडीआरसी) के अध्यक्ष डेविड एम मैलोन से बातचीत के दौरान का है। इस कार्यक्रम को इसी संगठन द्वारा आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम के दौरान रोमिला थापर से सम्राट अशोक को लेकर सवाल पूछे जा रहे थे। जब उनसे पूछा गया कि इतिहास में अशोक के बारे में ज्यादा कुछ दर्ज क्यों नहीं है, तो उन्होंने इसका सारा दोष ब्राह्मणों पर मढ़ दिया। उन्होंने कहा कि पुराणों सहित अन्य साहित्यों में ब्राह्मणों ने अशोक का मज़ाक उड़ाया और केवल बौद्धिक साहित्य में ही उनके बारे में लिखा गया। इस दौरान महाभारत की एक घटना का जिक्र भी किया, जब भीषण युद्ध के बाद युधिष्ठिर को कुरु साम्राज्य का सम्राट बनाया जाना था और उन्होंने इनकार कर दिया।

रोमिला थापर के अनुसार, जब युधिष्ठिर को राजा बनने के लिए कहा गया तब उन्होंने कहा कि वह राजसुख का त्याग कर के कहीं और जा रहे हैं। उन्होंने सिंहासन पर बैठने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें काफ़ी मनाया गया, तब जाकर वह तैयार हुए। रोमिला थापर का कहना है कि ‘राजसत्ता के त्याग’ का यह पूरा प्रकरण बौद्ध धर्मों का एक अहम हिस्सा रहा है और बौद्ध सिद्धांतों से प्रेरित है। रोमिला थापर के अनुसार, कुछ इतिहासकार मानते हैं कि राजकाज के त्याग की युधिष्ठिर की भावना के पीछे अशोक की छवि थी।

अर्थात, रोमिला थापर कहती हैं कि युधिष्ठिर ने सम्राट अशोक के सिद्धांतों से प्रेरित होकर राजकाज के त्याग की इच्छा जताई थी। सम्राट अशोक ने 268 ईसा-पूर्व से लेकर 232 ईसा-पूर्व तक राज किया था। इसका मतलब यह कि रोमिला थापर मानती हैं कि महाभारत का युद्ध अशोक के शासनकाल के बाद हुआ था। महाभारत युद्ध अशोक के जन्म के हज़ारों वर्ष पूर्व हुआ था। तमाम इतिहासकारों से लेकर कई विशेषज्ञों ने महाभारत युद्ध की तारीख़ का अनुमान लगाया है और सभी के अनुसार यह मौर्य साम्राज्य से हज़ारों वर्ष पूर्व हुआ था।

अब आते हैं रोमिला थापर की डेटिंग पर। ख़ुद रोमिला थापर अपने एक लेख में मानती हैं कि महाभारत का युद्ध 3102 ईसा-पूर्व में हुआ था। यही रोमिला थापर कहती हैं कि 232 ईसा-पूर्व तक राज कर करने वाले अशोक से 3102 ईसा-पूर्व के बाद राज करने वाले युधिष्ठिर ने प्रेरणा ली। यह इसी तरह हो गया जैसे कोई कहे कि संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के स्वतंत्रता संग्राम ने भारत के स्वतंत्रता सेनानियों से प्रेरणा ली थी। या फिर यूँ कह लें कि महात्मा गाँधी कैलाश सत्यार्थी से प्रेरित थे।

2010 में डाला गया कार्यक्रम का ओरिजिनल वीडियो, देखें 44:30 से 50:50 तक

अब तक ख़ुद को बड़ा इतिहासकार बता कर अपने ज्ञान की शेखी बघारने वाले इन कथित इतिहासकारों की सच्चाई यह है कि ये तथ्यों को अपने तरीके से पेश कर के एक ख़ास नैरेटिव बनाना चाहते हैं, भले ही वह झूठ हो, भ्रामक हो और सच्चाई से कोसों दूर हो। सम्राट अशोक को ब्राह्मणों द्वारा इतिहास से निकाले जाने से लेकर युधिष्ठिर को अशोक से प्रेरित बताने तक, रोमिला थापर के ‘ऐतिहासिक ब्लंडर्स’ के सामने आने के बाद सवाल तो पूछा जाएगा कि भारतीय इतिहास और हिंदुत्व से उन्हें इतनी भी क्या दुश्मनी है?

GO मोदी-शाह, GO बाबुल सुप्रियो GO: शेहला रशीद ने किया जाधवपुर यूनिवर्सिटी के छात्रों का समर्थन

जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला रशीद ने जाधवपुर विश्वविद्यालय के छात्रों का समर्थन किया है। केंद्रीय पर्यावरण राज्यमंत्री बाबूल सुप्रियों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले छात्रों का समर्थन करने पर लोगों ने शेहला रशीद को फटकार लगाई। ट्विटर पर लोगों ने कहा कि शेहला द्वारा ऐसे छात्रों का समर्थन दिखता है कि वह एक केंद्रीय मंत्री के साथ छात्रों की गुंडागर्दी का समर्थन करती हैं। शेहला रशीद ने एक ट्वीट पर कमेंट करते हुए इन छात्रों का समर्थन किया।

शेहला ने जिस ट्वीट का समर्थन किया, उसमें छात्र ‘गो मोदी’, ‘गो अमित शाह’ और ‘बाबुल जाओ’ जैसे नारे लगाते हुए दिख रहे हैं। इस वीडियो में गाने की शक्ल में जाधवपुर यूनिवर्सिटी के छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री बाबूल सुप्रियों को जाने को कह रहे हैं। ट्वीट में लिखा गया है कि मोदी, शाह और सुप्रियों की बंगाल में कोई ज़रूरत नहीं है और उन्हें वापस जाना चाहिए। साथ ही भाजपा को फासिस्ट पार्टी बताया गया है।

शेहला रशीद ने मोदी सरकार के मंत्रियों को अशिक्षित बताते हुए लिखा कि वे आरएसएस के साथ मिल कर भारत के शैक्षिक संस्थानों और आलोचना करने वाले संस्थानों का दमन कर रही है। शेहला ने भाजपा और आरएसएस को बौद्धिकता और विज्ञान विरोधी करार दिया। शेहला ने लिखा कि विज्ञान से घृणा करने वाली मोदी सरकार की विचारधारा नाज़ी जर्मनी से मिलती-जुलती है।

शेहला रशीद ने पाक पीएम इमरान ख़ान की उसी बात को एक तरह से दुहराई है, जिसमें वो पीएम मोदी की तुलना हिटलर से करते रहे हैं। इमरान ख़ान आरएसएस की विचारधारा को हिटलर की नाजी आइडियोलॉजी से प्रेरित बताते रहे हैं। शेहला रशीद का ताज़ा बयान भी उसी लाइन पर है। शेहला ने याद दिलाया कि कैसे नाजी क़िताबें जला दिया करते थे?

बता दें कि कोलकाता स्थित जाधवपुर यूनिवर्सिटी में बाबुल सुप्रियो एबीवीपी के एक सेमिनार में हिस्सा लेने पहुँचे थे। छात्रों ने उनके ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया, काले झंडे दिखाए और नारे लगाए। छात्रों ने केंद्रीय मंत्री के साथ हाथापाई भी की। स्थिति की गंभीरता को भाँपते हुए राज्यपाल और जाधवपुर यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति जगदीप धनखड़ को भारी पुलिस बल के साथ यूनिवर्सिटी कैम्पस पहुँचना पड़ा, जिसके बाद बाबुल सुप्रियो को वहाँ से निकला जा सका।

माँ दुर्गा के गाने पर नुसरत और मिमी ने किया डांस: वीडियो Viral लेकिन कुछ कट्टरपंथी यूजर्स ने दी गालियाँ

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। दुर्गा पूजा के इस महापर्व के शुरू होने से पहले एक्ट्रेस से सांसद बनने का सफर तय करने वालीं नुसरत जहां और मिमी चक्रवर्ती ने माँ दुर्गा के एक गाने पर साथ में डांस किया। इन दोनों सासंदों के डांस का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। अभी तक इस वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं।

इस वीडियो में दोनों अभिनेत्रियां माँ दुर्गा को समर्पित पारंपरिक नृत्‍य कर रही हैं। बता दें कि यह फिल्म ‘असुर’ का गाना है। इस गाने को टॉलीवुड कंपोजर इंद्रदीप दास गुप्ता ने कंपोज किया है। ‘अशे माँ दुर्गा शे’ टाइटल के इस वीडियो में बंगाली सिनेमा की दिग्‍गज अभिनेत्री सुभाश्री गांगुली भी नुसरत और मिमी चक्रवर्ती के साथ परफॉर्म करते दिख रही हैं।

गाने में तीनों अभिनेत्रियाँ बिल्कुल ट्रेडिशनल लुक में दिखाई दे रही हैं। फेसबुक पर जारी किए गए इस वीडियो को अब तक 1.7 मिलियन व्‍यूज मिल चुके हैं। ‘अशे मां दुर्गा शे’ वीडियो गाने को बाबा यादव ने कोरियोग्राफ किया है। 

कैप्‍टन टीएमटी ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि बंगाल में काफी धूमधाम से मनाया जाने वाला दुर्गा पूजा का त्योहार 4 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक चलेगा। दुर्गा पूजा को नजदीक देखते हुए इस वीडियो को जारी किया गया है। कैप्‍टन टीएमटी (Captain TMT) की ओर से जारी किए गए वीडियो को माँ दुर्गा के लिए समर्पित किया गया है।

बता दें कि नुसरत जहां बशीरहाट निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं, तो वहीं मिमी चक्रवर्ती जाधवपुर से सांसद हैं। दोनों ही सांसद बंगाली फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर हीरोइनें भी हैं।

ये उन कॉमेंट्स का स्क्रीनशॉट है, जिसे प्रकाशित किया जा सकता है। कुछ कॉमेंट्स हद से ज्यादा गंदे थे, उन्हें यहाँ नहीं डाला गया है।

एक ओर जहाँ दुर्गा पूजा से संबंधित यह वीडियो बहुत वायरल हो रहा है, वहीं नुसरत के प्रति कुछ फेसबुक यूजर्स ने जहर उगला है। उनको लेकर गंदे-गंदे कॉमेंट किए गए हैं।

कभी पाक खुशहाल जगह, अब केवल पुलवामा जैसा हमला ही BJP को महाराष्ट्र में बचा सकता है: शरद पवार

राष्ट्रीय राजनीति से लगभग नदारद होते राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) सुप्रीमों शरद पवार ख़बरों में बने रहने और अपनी पार्टी को बचाए रखने के लिए आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में पर्याप्त सीटें सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। इस बीच पवार ने प्रधानमंत्री मोदी को घेरते हुए विवादित बयान दिया है।

दरअसल, शरद पवार ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा,

“लोकसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी के ख़िलाफ़ गुस्से और तनातनी का माहौल था। लेकिन, सीआरपीएफ जवानों के ख़िलाफ़ पुलवामा हमले ने पूरे परिदृश्य को बदल दिया। अब, लोगों के दिमाग को केवल पुलवामा हमले जैसी स्थिति के साथ बदला जा सकता है।”

ANI की ख़बर के अनुसार, आगे बढ़ते हुए पवार ने कहा कि इस साल के फ़रवरी में हुआ पुलवामा हमला कहीं गुप्त रूप से योजनाबद्ध तो नहीं था। उन्होंने कहा, “मैंने रक्षा में काम किया है। मैंने उस समय कुछ अधिकारियों से बात की और संदेह जताया कि हमला जानबूझकर किया गया था या इसके पीछे पाकिस्तान का हाथ था।”

उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान स्थित आतंकी शिविरों के ख़िलाफ़ बालाकोट हवाई हमले ने मोदी सरकार की लोकप्रियता को बढ़ाया है। लेकिन मोदी की लोकप्रियता महाराष्ट्र में काम नहीं करेगी क्योंकि लोग फड़नवीस सरकार से संतुष्ट नहीं हैं।

पवार ने आगे कहा कि कॉन्ग्रेस और NCP एक साथ आए हैं और वे बहुजन विकास अगाड़ी और समाजवादी पार्टी को भी गठबंधन में शामिल करने की कोशिश करेंगे। लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि अगर उन्हें लगता है कि लोग फडणवीस सरकार के ख़िलाफ़ हैं, तो उन्हें इसके ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने के लिए इन सभी दलों को एक साथ लाने की ज़रूरत क्यों महसूस हो रही है? 

शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP और कॉन्ग्रेस दोनों ही अपने शक्तिशाली और प्रभावशाली नेताओं को खोते जा रहे हैं। कई मजबूत नेता जैसे कॉन्ग्रेस के सचिन अहीर, हर्षवर्धन पाटिल और कई NCP के दिग्गज नेता ख़ासतौर पर छत्रपति उदयनराजे भोंसले और नवी मुंबई के नेता संदीप नाइक हाल ही में बीजेपी में शामिल हो गए।

शरद पवार के हालिया बयान बेहद विवादास्पद, असंगत और अपमानजनक होने के अलावा एक अजीब से पैटर्न का अनुसरण करते हैं। जून में, उन्होंने दावा किया था कि हवाई हमले कश्मीर में हुए थे, न कि पाकिस्तान में।

मार्च में उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने ही पाकिस्तान के ख़िलाफ़ हवाई हमले करने का सुझाव दिया था। उन्होंने यहाँ तक दावा किया था कि पीएम मोदी का इस फ़ैसले से कोई लेना-देना नहीं है। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि 1993 में मुंबई बम विस्फोटों के दौरान गृह मंत्री के रूप में शरद पवार ने 13वें विस्फोट की बात कही थी, केवल यह दिखाने के लिए कि समुदाय विशेष वाले भी पीड़ित थे। जबकि असलियत में केवल 12 विस्फोट हुए थे।

हाल ही में, NCP मुख्यालय में अल्पसंख्यकों के लिए एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, उन्होंने दावा किया था कि पाकिस्तान एक खुशहाल, मेहमाननवाज़ जगह है और यह बीजेपी सरकार है जो राजनीतिक लाभ के लिए इसके बारे में झूठ फैला रही है। 2019 चुनाव से पहले, उन्होंने दावा किया था कि मतदान केंद्रों के अंदर ईवीएम को आसपास के क्षेत्रों में टावर्स के माध्यम से ‘नियंत्रित‘ किया जा सकता है।

पाकिस्तान: बिना यात्री के उड़ा दिए 82 विमान, 18 करोड़ की चपत, 1000 कर्मचारियों को किया फायर

पाकिस्तान अपनी मूर्खतापूर्ण हरकत से दुनिया भर में फिर से मजाक का विषय बन गया है। पाकिस्तान इन दिनों भारी मंदी के दौर से गुजर रहा है। देश की अर्थव्यवस्था इस कदर खस्ताहाल है कि उनके पास टमाटर, अनाज और रोजमर्रा की चीजें खरीदने के लिए भी पैसे नहीं है। बता दें कि, ऐसी हालत होने के बावजूद भी पाकिस्तान ने बिना यात्रियों के 82 विमान उड़ा दिए, जिससे 18 करोड़ की चपत लग गई। यहाँ पर गरीबी में आटा गीला होने वाली कहावत कहना शायद अतिशयोक्ति नहीं होगी।

जियो न्यूज़ में छपी खबर के मुताबिक, साल 2016-2017 के बीच पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन्स (PIA) ने 46 ऐसी उड़ानें भरीं, जिसमें एक भी यात्री सवार नहीं थे। जिससे एयरलाइंस को भारी नुकसान हुआ है।

इतना ही नहीं, रिपोर्ट में एक और खुलासा हुआ है कि इन 46 खाली विमानों के अलावा हज जाने वाली करीब 36 उड़ानें ऐसी थीं, जिसमें एक भी यात्री सवार नहीं थे। इस तरह पाकिस्तान में कुल 82 उड़ानें बिना किसी यात्री के भरी गई। इससे एयरलाइंस को 18 करोड़ रूपए का भारी नुकसान हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशासन द्वारा मामले की सूचना दिए जाने के बावजूद कोई जाँच शुरू नहीं की गई थी।

ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मुद्दे को आधिकारिक दस्तावेजों में एक लापरवाह अधिनियम घोषित किया गया है। बता दें कि, परिचालन लागत को कम करने के लिए, पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन्स द्वारा पिछले महीने तकरीबन 1,000 अतिरिक्त कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया था।

21 अक्टूबर को होगा महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव, 24 को आएँगे नतीजे: चुनाव आयोग

महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव 21 अक्टूबर को होंगे, जबकि मतों की गणना 24 अक्टूबर को होगी। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने शनिवार (21 सितंबर, 2019) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंन्स में यह जानकारी दी। चुनाव आयोग ने बताया कि चुनाव को लेकर सभी तरह की तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। इसके साथ ही देश के अलग-अलग राज्यों में 64 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव का भी ऐलान किया गया है। चुनाव की तारीखों के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई।

ग़ौरतलब है कि महाराष्ट्र की 288 सदस्यों वाली विधानसभा सभा का कार्यकाल नौ नवंबर को समाप्त हो रहा है, जबकि हरियाणा की 90 सदस्यों वाली विधानसभा का कार्यकाल दो नवंबर को समाप्त हो रहा है। पिछले चुनाव में महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना गठबंधन की सरकार है, वहीं हरियाणा में बीजेपी ने बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। इन दोनों राज्यों में बीजेपी को उम्मीद है कि वह एक बार फिर सत्ता में आएगी। वहीं, कॉन्ग्रेस भी अपनी ज़मीन दोबारा तलाशने की कोशिश करेगी।

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने हरियाणा और महाराष्ट्र में बीजेपी के लिए प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। उन्होंने राज्य की जनता से अपील की कि वह देश और समाज हित में एक बार फिर सत्ता में बीजेपी को ही लेकर आएँ।

फ़िलहाल चुनाव आयोग ने झारखंड में चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की है।

हमें रिहा कर दो, अब कभी नहीं लगाऊँगा आजादी का नारा: अलगाववादी नेता मीरवाइज़, 6 अन्य ने भी भरा बॉन्ड

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 और 35-A को निष्क्रिय किए जाने के बाद से हिरासत में लिए गए बड़े नेताओं में से हुर्रियत कॉन्फ्रेन्स के नेता मीरवाइज़ उमर फारूक ने अपनी रिहाई के लिए बॉन्ड पर साइन कर दिया है। इस बॉन्ड के अनुसार अब मीरवाइज़ जम्मू-कश्मीर की किसी भी पॉलिटिकल एक्टिविटी में भाग नहीं ले पाएँगे।

ख़बर के अनुसार, मीरवाइज़ उमर फारूक के अलावा नेशनल कॉन्फ्रेन्स के दो अन्य नेताओं (दोनों पूर्व विधायकों), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और पीपुल्स कॉन्फ्रेन्स के एक-एक नेता और दो अन्य ने बॉन्ड पर साइन कर दिए हैं। वे हिरासत में लिए गए उन 36 लोगों में शामिल हैं, जिन्हें हिरासत में लिए जाने के बाद सेंटूर होटल में रखा गया है।

दैनिक जागरण के दिल्ली संस्करण में प्रकाशित खबर

दरअसल, जम्मू-कश्मीर सरकार ने सभी नेताओं को इस सरकारी बॉन्ड पर साइन करने के लिए कहा था, लेकिन कुछ नेताओं ने इस पेशकश को स्वीकार कर लिया तो कुछ ने इस पर साइन करने से साफ इनकार कर दिया। इनकार करने वाले नेताओं में पीपुल्स कॉन्फ्रेन्स के अध्यक्ष सज्जाद लोन, पीडीपी युवा विंग के नेता वाहीद पारा और नौकरशाह से नेता बने शाह फैसल शामिल हैं। हालॉंकि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के उदारवादी गुट ने बयान जारी कर कहा है कि मीरवाइज ने रिहाई के लिए कोई बॉन्ड नहीं भरा है।

जानकारी के अनुसार, नेताओं, अलगाववादियों, कार्यकर्ताओं और वकीलों समेत एक हज़ार से अधिक लोगों को केंद्र सरकार ने पाँच अगस्त के फ़ैसले के बाद से हिरासत में रखा हुआ है। हिरासत में रखे गए लोगों में तीन पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती भी शामिल हैं। इसके अलावा क़रीब 100 लोगों को जम्मू-कश्मीर के बाहर जेलों में भेजा गया है।

नज़रबंद किए गए इन नेताओं में, अधिकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को जन सुरक्षा अधिनियम के तहत नज़रबंद किया, जो राज्य को बिना न्यायिक हस्तक्षेप के किसी भी व्यक्ति को दो वर्षों तक हिरासत में लेने का प्रावधान मुहैया कराता है। मौजूदा समय में अब्दुल्ला पर तीन महीनों तक सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) लगाया गया है।

जम्मू-कश्मीर प्रशासन के अधिकारी ने बताया कि बॉन्ड पर साइन करने के बाद रिहा हुए लोग अब ऐसी किसी भी गतिविधि का हिस्सा नहीं हो सकते जिन्हें बॉन्ड के दस्तावेज़ों में निषिद्ध बताया गया है। अगर प्रावधानों का उल्लंघन किया गया तो उस शख़्स को फिर से गिरफ़्तार कर लिया जाएगा।

रेप पीड़ित छात्रा और चिन्मयानंद के बीच 200 कॉल, संजय के साथ 4200: फिरौती के आरोप पर SIT का खुलासा

लॉ की छात्रा के साथ रेप के आरोपित पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता चिन्मयानंद को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुँचाने के बाद एसआईटी ने इस मामले में बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि जनवरी 2019 से अगस्त महीने तक चिन्मयानंद और पीड़ित छात्रा के बीच 200 बार फोन पर बातचीत हुई थी। वहीं, पीड़ित छात्रा की उसके साथी संजय से इसी अवधि में 4200 बार कॉल पर बातचीत हुई। एसआइटी ने आउटगोइंग व इनकमिंग कॉल का ब्योरा निकालकर इसे जाँच में शामिल किया है। इसके साथ ही एसआईटी ने पीड़िता छात्रा पर भी फिरौती माँगने का आरोप लगाया है।

मामले को सुलझाने के लिए एसआईटी हर तरह से जाँच कर रही है। एआईटी प्रमुख नवीन अरोड़ा ने बताया कि एसआईटी ने हर जरूरी डिजिटल साक्ष्य, दोनों पक्षों के फोन कॉल डीटेल जुटाए। घटनास्थल, संस्थान, पीड़िता के घर और हॉस्टल से भी साक्ष्य एकत्र किए। गाड़ियों के मूवमेंट, टॉल टैक्स बैरियर, दिल्ली और राजस्थान के होटलों से सीसीटीवी फुटेज, बैंक और एटीएम से रकम निकालने से जुड़े डिजिटल साक्ष्य भी जुटाए गए हैं।

एसआईटी द्वारा किए गए खुलासे से पीड़ित छात्रा की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। नवीन अरोरा ने कहा कि एसआईटी ने चिन्मयानंद के अश्लील वीडियो के एवज में 5 करोड़ रुपए माँगने के आरोप में पीड़ित छात्रा के साथी संजय सिंह, उसके चचेरे भाई विक्रम और मौसेरे भाई सचिन सेंगर को भी गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा, पुलिस ने कहा कि चिन्मयानंद पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली छात्रा भी फिरौती माँगने की आरोपित है। नवीन अरोड़ा ने कहा कि अभी तक पीड़ित महिला और संजय का फोन बरामद नहीं किया गया है। फोन के बरामद होते ही उसे फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा जाएगा।

अरोरा ने कहा कि फिरौती की माँग करने की आरोपित छात्रा को इसलिए गिरफ्तार नहीं किया गया है, क्योंकि उसके खिलाफ ‘जाँच लंबित’ है। उन्‍होंने कहा, “हमने निर्णायक साक्ष्‍य होने की वजह से छात्रा का नाम इसमें शामिल किया है। अन्‍य आरोपितों के बयान भी यह दर्शाते हैं कि छात्रा इसमें शामिल थी। हमारी जाँच जारी है। हम इलाहाबाद हाई कोर्ट में 23 सितंबर को स्‍टेटस रिपोर्ट दाखिल करेंगे और उसके बाद अदालत के निर्देशों का इंतजार करेंगे।”

गौरतलब है कि स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम (एसआइटी) ने चिन्मयानंद को उनके शाहजहाँपुर स्थित मुमुक्षु आश्रम से गिरफ्तार किया। इसके बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। जहाँ कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। चिन्मयानंद के खिलाफ आईपीसी की धारा 376-सी, 354-डी, 342, 506, 342 और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने गिरफ्तारी के बाद एसआईटी की पूछताछ में अपना सारा जुर्म कबूल करते हुए कहा था कि वो अपने कृत्य के लिए शर्मिंदा हैं।