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भाजपा में शामिल होंगे TMC विधायक सब्यसाची दत्ता, अमित शाह रहेंगे मौजूद

पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के एक और विधायक भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं। बिधाननगर के मेयर रह चुके विधायक सब्यसाची दत्ता मंगलवार (अक्टूबर 1, 2019) को भाजपा की सदस्यता लेंगे। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी मौजूद रहेंगे।

एएनआई ने सब्यसाची के हवाले से यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि सदस्यता ग्रहण समारोह नेताजी इंडोर स्टेडियम में होगा। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य मुकुल रॉय समेत कई शीर्ष नेता मौजूद रहेंगे।

बताया जा रहा है कि सब्यसाची के साथ ही उनके हजारों समर्थक भी भाजपा में शामिल होंगे। फरवरी में सब्यसाची दत्ता के घर मुकुल रॉय के जाने के बाद से ही उनके बीजेपी में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थी। अब टीएमसी नेता ने खुद इस बात की पुष्टि कर दी है।

सब्यसाची का काफी समय से पार्टी नेताओं से मतभेद भी चल रहा था। उन्होंने भी पार्टी के शीर्ष नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। उन्हें मेयर के पद से हटाने के लिए टीएमसी के सदस्य ही अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए थे।

प्रदेश भाजपा के महासचिव संजय सिंह ने बताया कि अमित शाह 1 अक्टूबर को दोपहर कोलकाता पहुँचेंगे। वे नेताजी इंडोर स्टेडियम में सभा को संबोधित करेंगे।

रोहिंग्या प्रेमी केजरीवाल को यूपी-बिहार के लोगों से नफरत क्यों: BJP नेता कपिल मिश्रा का लेख

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के मन में बसी पूर्वांचलियों से नफरत के पीछे असली कारण क्या है? असली कारण हैं बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों से मोहब्बत। NRC की जो तलवार घुसपैठियों पर लटक रही हैं, उससे डर कर केजरीवाल रोज पूर्वांचल के लोगों के बारे में अनाप-शनाप बयान दे रहे हैं। अगर ध्यान से देखा जाए तो जिस दिन से NRC पर चर्चा शुरू हुई, उसी दिन से केजरीवाल ने यूपी-बिहार के लोगों के बारे में बदतमीजी भरे बयान देने शुरू कर दिए।

भारत की राजधानी अपने आप में मिनी इंडिया है। यहाँ की कला, संस्कृति, पहचान, त्यौहार- सब जैसे पूरे देश की एक छोटी सी झलक हैं। यूपी, बिहार, पंजाब, राजस्थान, उड़ीसा, बंगाल, तमिलनाडु, केरल, आंध्र, कर्नाटक, हिमाचल, हरियाणा, असम, मिज़ोरम, सिक्किम, उत्तरांचल- भारत का ऐसा कोई कोना नहीं जहाँ के लोग दिल्ली में ना रहते हों। दिल्ली में रहने वाले लोग पढ़ाई के लिए, बीमारियों के ईलाज के लिए, छुट्टियों के लिए, अपने नाते-रिश्तेदारों को दिल्ली बुलाएँगे, ये स्वाभाविक हैं। राजधानी होने के नाते दिल्ली में स्वभावतः हमेशा से बाकी देश से बेहतर सुविधाएँ रही हैं।

ख़ुद हरियाणा में जन्में और फिर यूपी के ग़ाज़ियाबाद में रहे केजरीवाल के मन में यूपी-बिहार के लिए जो नफरत पैदा हुई है, उसके अन्य अन्य कारण भी हैं। पहले पंजाब में हार, फिर दिल्ली नगर निगम में हुई भयानक हार, उसके बाद यूपी में प्रचंड बहुमत से भाजपा की जीत, फिर एक-एक कर के हर राज्य में जमानत जब्त होना और फिर आखिर में जिस हरियाणा में केजरीवाल ने व्यक्तिगत प्रचार किया और जहाँ के चुनाव के नाम पर राज्यसभा के सीटों तक का सौदा किया गया, वहाँ उनके उम्मीदवारों की न केवल जमानत जब्त हुई बल्कि नोटा से भी हार कर शर्मिंदा होना पड़ा।

इन सब हारों को केजरीवाल ने व्यक्तिगत अपमान के तौर पर लिया। केजरीवाल और उनके आसपास के लोग जनता को ही जिम्मेदार बताने लगे। कभी ईवीएम को गाली और कभी जनता को ही ग़लत ठहराना, केजरीवाल गैंग को ऐसे बयान देने की जैसे आदत बन गयी। इसी नफरत के कारण पहले दिल्ली सरकार के सभी अस्पतालों में बिना दिल्ली के वोटर कार्ड और आधार के मुफ्त ईलाज पर बैन लगाया गया। केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना को भी दिल्ली में लागू होने से रोक दिया गया।

हजारों लोग अपने माता-पिता तक को दिल्ली में लाकर ईलाज करवाने में तरस गए। केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना दिल्ली में बने केंद्र सरकार के अस्पतालों में लागू थी और एम्स, राम मनोहर लोहिया जैसे अस्पतालों में मुफ्त ईलाज जारी रहा। आयुष्मान योजना की सफलता और दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य सुविधाओं का ठप्प होना भी एक कारण रहा कि केजरीवाल नफरत से भरते चले गए।

एक छोटा सा उदाहरण देखिए। रेबीज का इंजेक्शन पूरी दिल्ली में केवल केंद्र सरकार के अस्पतालों में ही उपलब्ध है। दिल्ली सरकार के अस्पतालों में रोजाना लगभग 15,000 केस आते हैं, जो बिना दवाई के सीधा केंद्र सरकार कब अस्पतालों में भेजे जाते हैं। नफरत और हार से बौखलाए केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जिस प्रकार का शारीरिक हमला अमानुतुल्ला खान द्वारा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी जी पर करवाया, वो पूरे देश ने देखा।

इस सबके बाद जब NRC की चर्चा शुरू हुई तो केजरीवाल जैसे बौखला ही गए। उन्हें अपने बचे-खुचे वोट बैंक को खोने का डर हैं। बांग्लादेशी और रोहिंग्या न सिर्फ दिल्ली के स्लम में राशनकार्ड और आधार बना कर केजरीवाल के वोटबैंक बन रहे हैं, बल्कि कई बार वो अपराधों में संलिप्त पाए गए हैं। चैन खींचने से लेकर, चोरी, लूट, हत्या और ड्रग माफिया का पूरा धंधा बांग्लादेशी घुसपैठियों द्वारा चलाया जा रहा है। यही केजरीवाल का वोट बैंक है और फंडिंग का सोर्स भी।

केजरीवाल कुछ भी करके इन घुसपैठियों को बचाना चाहते हैं। आज केजरीवाल को यूपी-बिहार, बंगाल और राजस्थान से आए लोगो से नफरत है। इसके उलट उन्हें बांग्लादेश और म्यांमार से आए घुसपैठियों से मोहब्बत है। देशद्रोही, नक्सली और टुकड़े-टुकड़े गैंग की राजनीति करने वाले केजरीवाल अपने वोट बैंक को एक साफ सन्देश दे रहे हैं- “दिल्ली में NRC लागू नहीं होने दूँगा और टुकड़े-टुकड़े गैंग को बचाऊँगा।“

वो आदमी जो खुद जेब मे 500 रुपए लेकर दिल्ली आया और दिल्ली का मुख्यमंत्री बन गया, उसे आज यूपी-बिहार के उन लोगों से घृणा हो रही है, जो 500 रुपए का किराया लगाकर आयुष्मान योजना से दिल्ली में ईलाज करवाते हैं। वो आदमी जो चंदा लेने और कार्यकर्ता ढूँढने के लिए पूरे देश से अपील करता है, वो दिल्ली में उनके आने पर बैन लगाना चाहता है।

भाजपा अध्यक्ष का पूर्वांचली होना भी केजरीवाल की नफरत का एक बड़ा कारण है। दिल्ली में निगम और लोकसभा चुनावों में मनोज तिवारी की अध्यक्षता में भाजपा के हाथों केजरीवाल की बड़ी हार अब व्यक्तिगत दुश्मनी से हटकर पूरे समाज से नफरत में बदल चुकी है। केजरीवाल का अहंकार अब बदतमीजी में बदल चुका है। जिस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल वो यूपी-बिहार के लोगों के खिलाफ कर रहे हैं, वो समाज मे एक बड़े गुस्से को जन्म दे रही है।

यूपी बिहार के स्वाभिमानी समाज में, खासतौर पर युवाओं में भयानक गुस्सा पनप रहा है और इस अपमान की बहुत भारी कीमत केजरीवाल को चुकानी पड़ेगी।

चुनाव लड़ने से पहले आजम खान की बीवी ने भरा हर्जाना, बिजली चोरी के दिए ₹29.77 लाख

उत्तर प्रदेश की रामपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए नामांकन करने से पहले सपा सांसद आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा ने बिजली विभाग का जुर्माना भर दिया है।

जानकारी के अनुसार बिजली विभाग ने बिजली चोरी के आरोप में तंजीन फातिमा ₹29.77 लाख जुर्माना लगाया था। जुर्माने में समन शुक्ल ₹3,40,000 और राजस्व निर्धारण ₹26,37,269 था। ये चोरी हमसफर रिजॉर्ट में पकड़ी गई थी, जिसे आजम खान का परिवार संचालित करता है।

बिजली विभाग के अधिकारी संजय गर्ग ने बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद हमसफर रिजॉर्ट में लगभग 34 किलो वाट बिजली चोरी के लिए समन भेजा गया था, जिसकी मूल्यांकन राशि 29.77 लाख रुपए थी। इसका भुगतान कर दिया गया है।

अधिकारी के मुताबिक हमसफर रिजॉर्ट में बिजली कनेक्शन समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान की पत्नी तंजीम फातिमा के नाम पर है।

यहाँ बता दें कि हमसफर रिजॉर्ट में 5 किलोवाट के कनेक्शन के अतिरिक्त 33, 870 वाट बिजली का उपयोग मिला था। यहाँ 5 विंडो एसी, 10 पंखे, 9 स्प्लिट एसी सहित कनेक्शन से ज्यादा लोड की चोरी पाई गई थी। प्रशासन की छापेमारी के बाद पूरा मामला प्रकाश में आया था और विद्युत अधिनियम (2003) की धारा 135 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया था।

गौरतलब है कि रविवार (सितंबर 29, 2019) को सपा ने विधानसभा उपचुनाव के लिए तंजीन फातिमा को उम्मीदवार घोषित किया था। आजम खान के लोकसभा के लिए चुने जाने के कारण यहॉं उपचुनाव हो रहा है। उपचुनाव के लिए 21 अक्टूबर को वोट डाले जाएँगे और मतगणना 24 अक्टूबर को होगी।

राफेल के कारण चीन और पाक पर भारी पड़ेगा भारत: नए वायु सेना प्रमुख ने इमरान की धमकी का दिया जवाब

भारतीय वायु सेना प्रमुख का पदभार संभालते ही एयर मार्शल राकेश कुमार भदौरिया ने पाकिस्‍तान और चीन के लिए चेतावनी भरे लहज़े का इस्‍तेमाल किया। उन्होंने कहा कि राफ़ेल के कारण चीन और पाकिस्तान पर भारत भारी पड़ेगा। पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की ओर से न्‍यूक्‍लियर वार की चेतावनी पर उन्‍होंने कहा, “न्‍यूक्‍लियर संबंधित मामलों की उनकी यही समझ है। हमारी अपनी समझ, अपना विश्‍लेषण है। किसी भी चुनौती का सामना करने को हम तैयार हैं।”

भविष्य में बालाकोट स्ट्राइक जैसे हमले की संभावना पर सवाल पूछे जाने पर वायु सेना प्रमुख ने कहा, “हम तब भी तैयार थे, हम आगे भी तैयार रहेंगे। हर तरह की चुनौती और ख़तरे से निपटने के लिए हम तैयार हैं।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान फिर से बालाकोट आतंकी शिविरों को तैयार कर रहा है। यह बात हमें मालूम है और ज़रूरत पड़ने पर ज़रूरी कार्रवाई की जाएगी।

ख़बर के अनुसार, एयर मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया ने 12 जुलाई को फ्रांस में ट्रायल के तौर पर राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी और विमान की जाँच भी की थी। इसके बाद उन्होंने कहा था कि राफेल देश की सेना के लिए बेहद अहम लड़ाकू विमान है।

भदौरिया ने सोमवार (सितंबर 30, 2019) को भारतीय वायु सेना प्रमुख की कमान सँभाली। उन्होंने जून 1980 में आईएएफ के फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया था, जिसके बाद वो वायु सेना में विभिन्न प्रमुख पदों की ज़िम्मेदारी सँभाल चुके हैं।

एयर मार्शल भदौरिया को जनवरी 2013 में अति विशिष्ट सेवा पदक से नवाज़ा गया था। इससे पहले जनवरी 2002 में उन्हें वायु सेना पदक से सम्मानित किया गया था। जनवरी 2018 में उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक से भी सम्मानित किया गया था।

CJI रंजन गोगोई ने कहा- अभी अयोध्या केस की सुनवाई ज़रूरी, कश्मीर के लिए समय नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में संविधान के अनुच्छेद-370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने के फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सोमवार (30 सितंबर) को अपनी संविधान पीठ को भेज दिया और यह पीठ मंगलवार (1अक्टूबर) को सुनवाई करेगी। CJI रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने याचिकाओं को पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के पास भेजा है।

दरअसल, कश्मीर से जुड़े मामले संविधान पीठ को भेजने के संदर्भ में CJI ने कहा कि अभी हमारे पास बाकी मामले सुनने का समय नहीं है क्योंकि अभी अयोध्या मामले पर सुनवाई चल रही है, जोकि अंतिम चरण में है। इन याचिकाओं में कश्मीर में पत्रकारों के आवागमन पर लगाए गए कथित प्रतिबंधों का मामला उठाने वाली याचिकाएँ भी शामिल हैं। अब न्यायमूर्ति एनवी रमण की अगुवाई वाली संविधान पीठ कश्मीर मुद्दों से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राज्यसभा सांसद वाइको की उस याचिका को भी ख़ारिज कर दिया, जिसमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला को अदालत के समक्ष पेश होने के लिए माँग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि एमडीएमके नेता सार्वजनिक सुरक्षा क़ानून (PSA) के तहत हिरासक को चुनौती दे सकते हैं।

अयोध्या मामले में सुनवाई के दौरान सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा है कि अयोध्या केस पर 18 अक्टूबर तक सुनवाई ख़त्म होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर चार हफ्ते में हमने फ़ैसला दे दिया, तो ये एक करिश्मा ही होगा। लेकिन, अगर सुनवाई 18 अक्टूबर तक ख़त्म नहीं हुई, तो फ़ैसला संभव नहीं हो पाएगा। साथ ही CJI ने कहा कि 18 अक्टूबर के बाद एक भी दिन अतिरिक्त नहीं है, इसलिए पक्षकार इसी समय सीमा में सुनवाई पूरी करें।

सुप्रीम कोर्ट में आज रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की रोजाना सुनवाई हो रही है। सोमवार (30 सितंबर) को सुनवाई का 34वाँ दिन है। शुक्रवार (27 सितंबर) को मुस्लिम पक्ष की दलीलें जारी रही थीं, आज भी मुस्लिम पक्ष अपनी दलील रख रहा है। इसके बाद हिंदू पक्ष की ओर से उनका जवाब दिया जाएगा।

चिदंबरम को हाई कोर्ट ने नहीं दी जमानत, CBI ने कहा- देश छोड़ कर भाग सकते हैं

दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की जमानत याचिका ख़ारिज कर दी है। आईएनएक्स मीडिया केस में तिहाड़ जेल में बंद चिदंबरम को लगभग डेढ़ महीने पहले सीबीआई ने गिरफ़्तार किया था। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें सीबीआई की कस्टडी में भेज दिया गया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि पी चिदंबरम को लेकर ‘फ्लाइट रिस्क’ है। अर्थात, वह देश छोड़ कर भाग सकते हैं। उन्होंने कहा कि चिदंबरम वित्तीय रूप से विदेश भाग कर वहाँ रहने में सक्षम हैं।

आईएनएक्स मीडिया केस में चिदंबरम को सीबीआई ने 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था। फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद हैं। अपनी जमानत याचिका में चिदंबरम ने आरोप लगाया था कि सीबीआई केंद्र सरकार के इशारों पर काम कर रही है और एजेंसी उनकी साफ़-सुथरी छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए ऐसा कर रही है। उन्होंने सीबीआई द्वारा अपनी गिरफ़्तारी को अवैध करार देते हुए इसे क़ानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन बताया था। चिदंबरम ने अपनी जमानत याचिका में कहा था कि सीबीआई द्वारा यह कहना कि वह अपने पद और हैसियत का इस्तेमाल कर जाँच को प्रभावित कर सकते हैं- ग़लत है।

वहीं सीबीआई ने चिदंबरम की जमानत याचिका का विरोध करते हुए हाईकोर्ट से कहा कि उन्हें जमानत देना भ्रष्टाचार को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली नीति में बाधक सिद्ध होगा और एक ग़लत उदाहरण पेश करेगा। सीबीआई ने अपनी दलील में कहा था कि चिदंबरम बेहद प्रभावशाली व्यक्ति हैं, जो अपने रसूख का इस्तेमाल गवाहों को प्रभावित करने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने के लिए कर सकते हैं। चिदंबरम की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए, वहीं सीबीआई की तरफ से तुषार मेहता ने दलीलें रखीं।

गौरतलब है कि आईएनएक्स मीडिया की प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर मुखर्जी के बयानों के आधार पर सीबीआई और ईडी ने इस मामले में चिदंबरम पर शिकंजा कसा है। आरोप है कि आईएनएक्स मीडिया ग्रुप को 2007 में 305 करोड़ रुपये का विदेशी धन हासिल करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड की मंजूरी में अनियमितता बरती गई थी। उस दौरान चिदंबरम वित्त मंत्री थे।

आयशा ने अम्मी-अब्बू पर लगाया तीन तलाक का आरोप, कहा- ससुराल वालों से 21 लाख हड़पकर मुझे….

तीन तलाक से जुड़े अधिकांश मामलों में अभी तक पीड़िता के पति या फिर ससुराल वालों को गुनहगार पाया जाता रहा है। लेकिन, उत्तरप्रदेश के मेरठ से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहाँ लड़की ने अपने पति या ससुराल वालों के ख़िलाफ़ नहीं बल्कि अपने खुद के माँ-बाप पर केस दर्ज करवाया है। लड़की की शिकायत में तीन तलाक कराने वाली पंचायत में शामिल लोगों के नाम भी हैं।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक ढबाईनगर निवासी आयशा ने नौचंदी थाने में अपने माता-पिता के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी व जानलेवा हमले सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। उसका कहना है कि उसका निकाह 9 मार्च 2014 को सरफराज पुत्र हाजी असगर से हुआ था। उसके 2 बच्चे भी हैं। उसके मुताबिक वह ससुराल में थोड़ी कहासुनी के कारण अपने माँ-बाप के घर रहने आई थी, लेकिन मायके में उसके माँ-बाप ने धोखे से उन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवा लिया, जिनमें तीन अलग-अलग तरीकों से तलाक देने का जिक्र हुआ था।

महिला की मानें तो जब उसे एहसास हुआ कि उसका धोखे से तीन तलाक करवा दिया गया है तो उसने इसका विरोध करना शुरू किया। इस दौरान महिला अपने ससुराल लौटने की बात कहती रही, लेकिन उसके पिता ने उसे धमकी दी कि अगर वह ससुराल गई तो वह उसकी माँ को तलाक दे देगा और घर से भी निकाल देगा।

अपनी शिकायत में महिला ने कहा कि उसका तलाक कराए जाने में उसकी माँ नाजिमा भी शामिल हैं। उसका कहना है कि उसके माँ-बाप ने ससुराल वालों से तीन तलाक के बाद 21 लाख रुपए हड़प लिए हैं और अब रुपए हाथ में आते ही उसे घर से भी निकाल दिया। महिला ने इस मामले की रिपोर्ट थाने में दर्ज करवाई हैं।

आयशा का कहना है कि उसके अम्मी-अब्बू ने फर्जी कागजात तैयार करवाए और उसमें दिखाया कि तीन अलग-अलग तारीखों में उसने अपने पति को तलाक दिया, जबकि यह बात गलत है। उसकी मानें तो 17 जून को पिता आफताब अंसारी और माँ नाजिमा ने मोहल्ले के कुछ लोगों के साथ मिलकर साजिश रची और उसका तलाक करवाया।

जानकारी के मुताबिक पुलिस तक मामला पहुँचते ही 8 सितंबर को माता-पिता उसे नौचंदी थाने से घर ले गए। 10 सितम्बर को जब दोबारा कुछ विवाद हुआ तो उसने अपने पति सरफराज के घर जाने की बात कही, जिसपर आफताब अंसारी (पिता) और नाजिमा (माँ) ने उसे पीटा और जान से खत्म करने की नीयत से हमला भी किया।

महिला का कहना है कि अब वह अपने बच्चों से मिलने के लिए दर-दर भटक रही है। इस मामले में इंस्पेक्टर नौचंदी तपेश्वर सागर ने बताया कि आयशा की शिकायत पर उसके माँ-बाप के ख़िलाफ़ नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और उन अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ है जिन्होंने पंचायत की आड़ में तीन तलाक का फरमान सुनाया।

महाराष्ट्र: NCP उम्मीदवार नमिता मुंदड़ा BJP में शामिल, पवार ने खुद किया था नाम का ऐलान

अक्टूबर में महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने हैं। लेकिन, कॉन्ग्रेस और उसकी सहयोगी राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) से नेताओं के जाने का सिलसिला ​थम नहीं रहा है। अब तो वे लोग भी पार्टी छोड़ने लगे हैं जिन्हें चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया गया था।

इस कड़ी में पहला नाम नमिता मुंदड़ा का है। उन्हें एनसीपी ने बीड के कैज विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया था। नमिता सोमवार (सितंबर 30, 2019) को बीजेपी में शामिल हो गईं। उन्होंने पंकजा मुंडे की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली।

नमिता का जाना एनसीपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। उनकी उम्मीदवारी की घोषणा खुद पार्टी सुप्रीमो शरद पवार ने की थी। राकांपा से इस्तीफा देने के बाद मुंदडा ने लोकसभा सांसद प्रीतम मुंडे और राज्य मंत्री पंकजा मुंडे की उपस्थिति में बीड जिले में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

नमिता एनसीपी की अहम नेताओं में शामिल रही हैं। उनकी सास विमल मुंदडा पूर्ववर्ती कॉन्ग्रेस एनसीपी सरकार में मंत्री थीं। 2014 के विधानसभा चुनाव में नमिता को कैज सीट से बीजेपी की संगीता थॉम्ब्रे से हार का सामना करना पड़ा था। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए 21 अक्टूबर को वोट डाले जाएँगे और मतगणना 24 तारीख को होगी।

हम बिहार के लोग चू@& हैं जो ऐसे नेता चुनते हैं: आखिर ये बिहारी युवक ऐसा क्यों कह रहा है

“3 दिन के लिए मुंबई डूब जाता है और एक हफ्ते के लिए केरल या चेन्नई डूब जाता है तो देश के बुद्धिजीवी लोग सोशल मीडिया पर आँसुओं का सैलाब ला देते हैं। केरल और चेन्नई के बाढ़ का और मुंबई की बारिश एक फोटो देख कर उनका दिल पसीज जाता है। मदद के नाम पर कई एकाउंट्स खाली हो जाते हैं। लेकिन, बिहार के लोगों का क्या?”

ये पंक्तियाँ कोई डायलॉगबाजी नहीं है बल्कि दहकता सवाल है एक ऐसे बिहारी का, जो छाती तक पानी में डूब कर चलने को मजबूर है। एक तरह से ये सवाल है शासन की अकर्मण्यता से जूझ रहे हर उस बिहारी का, जिसके घर में भीतर तक पानी घुस चुका है और वह मदद की उम्मीद भी खो चुका है। यह सवाल है सुशासन बाबू के नाम से जाने जाने वाले नीतीश कुमार के राज्य के वासियों का, जो भीषण बाढ़ की त्रासदी झेल रहे हैं और सोशल मीडिया के अलावा उन्हें अपनी बात पहुँचाने के कोई और जरिया नहीं मिल रहा।

इस आदमी के सवाल जायज हैं। ऐसा इसीलिए, क्योंकि जिन पर बाढ़ से निपटने के लिए उचित इंफ़्रास्ट्रक्चर बनाने और पीड़ितों को राहत देने का काम है, वो ख़ुद राहत की उम्मीद में बैठे हैं। किसी सरकार के लिए इससे ज्यादा बड़ी बेइज्जती की बात क्या हो सकती है? उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ख़ुद अपने घर में फँस गए, जहाँ से उन्हें रेस्क्यू किया गया। एनडीआरएफ की टीम ने नाव की मदद से उन्हें और उनके परिवार को निकाला। इस दौरान वह मीडिया के सवालों से भी बचते नज़र आए। आख़िर बोले भी तो क्या, अपनी नाकामी का सबसे बड़ा उदाहरण उनकी ख़ुद की ही स्थिति बन गई। देखें वीडियो:

अब वापस आते हैं उस वीडियो पर, जिसमें बाढ़ के बीच एक बिहारी से शासन-प्रशासन से कई सवाल दागे। उसने सवाल पूछा कि जब सबसे ज्यादा आईएएस-आईपीएस बिहार से होते हैं, बिहार को ग़रीबी और बीमारी के रूप में क्यों देखा जाता है? उसने आगे सच्चाई ज़ाहिर करते हुए कहा कि बिहार बीमार नहीं है बल्कि बीमार बिहार के नेतागण हैं, जिन्हें वो चुनते हैं। उसका दर्द इस बात को लेकर है कि जो बिहार की जनता त्रासदी झेलती है, वही जनता चुनाव के समय ऐसे नेताओं को जातिवाद के कारण जीता देती है, जो कुछ भी काम नहीं करते।

आपको बता दें कि जिस वीडियो की हम बात कर रहे हैं, उसमें गालियाँ हैं। एक बाढ़ पीड़ित के मुँह से अगर ऐसी कुछ बातें निकल भी गई तो वह उसके दर्द की पहचान है। परिस्थिति ही ऐसी है कि अब हमें उसके भावों को समझने की ज़रूरत है, फ़ैसला सुनाने की नहीं। आप भी इस वीडियो को देख कर सुनिए और समझिए कि बिहार में ऐसी त्रासद स्थिति भला आती ही क्यों है?

विकट आपदा झेल रहे बिहारियों के दर्द से आप भी रूबरू हो जाइए

उस व्यक्ति ने यही पूछा कि इसी पटना में 200 वर्ष पहले पानी नहीं लगता था लेकिन अब ऐसी स्थिति कहाँ से आ गई है? उसने मीडिया से लेकर सेलेब्रिटीज तक पर आरोप लगाए हैं कि वे सभी बिहार के लिए पक्षपात कर रहे हैं क्योंकि बाकी राज्यों में बाढ़ आने पर उनकी आँखों में आँसू आते हैं लेकिन बिहार के लिए किसी के मन में कोई संवेदना नहीं।

वापस उस वीडियो की बात करें तो उसमें उस व्यक्ति ने दोष बिहारियों का ही बताया है क्योंकि वे वोट ऐसे ही नेताओं को देते हैं, जो काम ही नहीं करते। उसका कहना है कि ट्वीटर खँगालने पर उसे किसी भी बुद्धिजीवी का सेलेब्रिटी के एक ट्वीट तक नहीं दिखा, जिसमें बिहारियों के लिए संवेदना या मदद से जुड़ा कोई भी पोस्ट नहीं दिखा। बाढ़ आती है और होता क्या है? राहत सामग्री के नाम पर करोड़ों का घोटाला। अब देखना यह है कि भीषण आपदा झेल रहे बिहार में उम्मीद की किरण कब लौटती है?

14 अक्टूबर तक तिहाड़ में ही रहेंगे डीके शिवकुमार, भाई और कॉन्ग्रेस सांसद डीके सुरेश से ED करेगी पूछताछ

मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में आरोपित कर्नाटक कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार 14 अक्टूबर तक तिहाड़ जेल में ही रहेंगे। दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार (सितंबर 30, 2019) को उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई 14 अक्टूबर तक टाल दी है।

सोमवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत ने ईडी से याचिका पर अपना जवाब और स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है।

इस बीच ईडी ने डीके शिवकुमार के भाई डीके सुरेश को नोटिस जारी किया है। डीके सुरेश कॉन्ग्रेस के सांसद भी हैं। बता दें कि शिवकुमार को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 3 सितंबर को गिरफ्तार किया था। ईडी ने गिरफ्तार करने के बाद उनसे 14 दिन तक लगातार पूछताछ की थी।

इस दौरान शिवकुमार ने अपने बयानों में डीके सुरेश का नाम लिया था। बयान के आधार पर डीके सुरेश को नोटिस जारी किया गया है। उन्हें इसी सप्ताह पूछताछ के लिए बुलाया गया है। ईडी डीके सुरेश के जरिए ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी तक पहुँचना चाहता है। ईडी का आरोप है कि डीके शिवकुमार के जरिए कथित कालाधन एआईसीसी तक पहुँचाया गया।

इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने शिवकुमार की जमानत याचिका खारिज दी थी। उन्होंने ट्रायल कोर्ट में खराब सेहत की दलील दी थी, जो काम नहीं आई। सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने कहा था कि शिवकुमार ने भले ही आयकर दिया है, लेकिन इससे उनकी संपत्ति बेदाग नहीं हुई है। इस अपराध की जड़ें गहरी हैं और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाया गया है। इस मामले से सख्ती से निपटना चाहिए।