पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के अध्यक्ष एचडी देवेगौड़ा ने शनिवार को अपनी पार्टी का स्टैंड साफ करते हुए कॉन्ग्रेस के साथ कर्नाटक के आगामी विधानसभा उपचुनावों में गठबंधन की संभावना से साफ़ इंकार किया है। उन्होंने कहा कि 21 अक्टूबर को शुरू हो रहे उपचुनावों में जद(एस) अकेले मैदान में होगी। 15 विधायकों के कुमारास्वामी सरकार से समर्थन वापसी के लिए सदस्यता से इस्तीफे, और उसके बाद हुए सत्ता परिवर्तन के पश्चात यह उपचुनाव हो रहे हैं। हालाँकि देवेगौड़ा ने सभी 15 सीटों पर अपने प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने का दावा तो किया, लेकिन भाजपा के साथ के साथ गठबंधन की संभावना पर कोई टिप्पणी ही नहीं की।
HD Deve Gowda, JD(S) on Karnataka Assembly by-polls: HD Kumaraswamy, who was the Chief Minister heading the coalition government has already declared that we want to contest all 15 constituencies. The suffering he faced at the hands of Congress, he does not want it anymore. pic.twitter.com/VxMwAUhXaf
देवेगौड़ा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “गठबंधन सरकार के मुखिया रहे एचडी कुमारास्वामी ने साफ कर दिया है कि हम सभी 15 सीटों पर लड़ना चाहते हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस के साथ जो भुगता, वह फिर से वही नहीं बर्दाश्त करना चाहते।” देवेगौड़ा ने कहा कि रविवार (22 सितंबर) को पार्टी के नेता मिल रहे हैं। तभी आगे की रणनीति पूरी तरह तय होगी।
’14 महीनों से रो रहे हैं 30 जिलों के पार्टी कार्यकर्ता’
पार्टी काडर में कॉन्ग्रेस से गठबंधन को लेकर नाराज़गी का भी देवेगौड़ा ने ज़िक्र किया। दावा किया कि वे राज्य के 30 जिलों के कार्यकर्ताओं से मिले, और सभी ने भाजपा-कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन से मना किया। 14 महीने से उनका दुःख अकल्पनीय है। 21 अक्टूबर को होने वाले चुनावों की मतगणना कर 24 अक्टूबर को ही चुनाव परिणाम घोषित कर दिए जाएँगे।
मालूम हो कि जुलाई अंत में कर्नाटक विधानसभा में मुख्यमंत्री येदियुरप्पा सरकार को बहुमत प्राप्त हो गया था। 15 विधायकों के इस्तीफे के बाद 207 विधायकों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 104 का आँकड़ा चाहिए था और बीजेपी के पास 105 विधायक थे। इसीलिए विपक्ष ने मत विभाजन की माँग तक नहीं की थी। इसके पहले कॉन्ग्रेस-जद (एस) गठबंधन सरकार के मंगलवार को शक्ति-परीक्षण में असफल रहा था।
हरियाणा में विधानसभा चुनाव और मतगणना के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने 21 अक्टूबर को चुनाव और 24 अक्टूबर को मतगणना कराने का ऐलान किया है। हरियाणा के साथ-साथ महाराष्ट्र में भी विधानसभा चुनाव होंगे। इसके साथ-साथ कई अन्य राज्यों में 64 सीटों पर उपचुनाव भी होंगे। लोकसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव होगा और इसमें कॉन्ग्रेस की भी कड़ी परीक्षा होगी। इसी बीच एबीपी न्यूज़ का ओपिनियन पोल भी आ गया है।
एबीपी न्यूज़ के अनुसार, हरियाणा में भाजपा की आँधी चल रही है, जिसमें पूरा विपक्ष उड़ जाएगा। भाजपा को 90 सदस्यीय विधानसभा में 78 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। यह एक बहुत बड़ा आँकड़ा है। अर्थात भाजपा 86.6% सीटें जीत कर तीन चौथाई से भी बड़ी जीत दर्ज करने जा रही है। वहीं कॉन्ग्रेस को मात्र 8 सीटों से संतोष करना पड़ेगा। चौटाला परिवार की पार्टी जेजेपी को मात्र 1 सीट मिलने का अनुमान लगाया गया है।
एबीपी न्यूज़ के ओपिनियन पोल का मानना है कि हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर दोबारा मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। जहाँ भाजपा खट्टर के नेतृत्व में चुनाव में उतर रही है, कॉन्ग्रेस भूपिंदर सिंह हुड्डा द्वारा बगावत के सुर अपनाने के बाद उन्हें चेहरा बनाकर आगे बढ़ रही है। पार्टी ने कुमारी शैलजा को प्रदेश अध्यक्ष बना कर राज्य में नेतृत्व परिवर्तन भी किया। ऐसे में, कॉन्ग्रेस की बुरी हार का राष्ट्रीय स्तर पर असर पड़ने की उम्मीद है।
मनोहर लाल खट्टर को 48% लोगों ने मुख्यमंत्री के रूप में पहली पसंद माना है जबकि कॉन्ग्रेस के भूपिंदर सिंह हुड्डा 13% मतों के साथ दूसरे नंबर पर रहे। वहीं जेजेपी के संस्थापक और अजय सिंह चौटाला के पुत्र दुष्यंत चौटाला को 11% लोगों ने सीएम के लिए पहली पसंद माना है। ये सारे आँकड़े एबीपी न्यूज़ के ओपिनियन पोल पर आधारित हैं।
राजस्थान स्थित श्रीगंगानगर की पाकिस्तान सीमा पर निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। जिला कलक्टर शिव प्रसाद नकाते के आदेश से लागू धारा 144, 15 नवंबर, 2019 तक जारी रहेगी।
Rajasthan: Section 144 has been imposed in the area lying within the range of 2 km of Sriganganagar-Pakistan international border. The order has been issued by District Collector Shiv Prasad Nakate. This order will remain effective from 7 pm to 7 am, till 15 November 2019.
मीडिया खबरों के अनुसार यह निर्णय गुप्तचर एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद लिया गया है। सीमा के 2 किलोमीटर अंदर तक शाम 7 बजे से सुबह 7 बजे तक यह प्रतिबंध लागू किया गया है। आशंका जताई जा रही है सीमा पर घुसपैठ और तस्करी में बढ़ोतरी हो सकती है।
पहले भी पकड़े जा चुके हैं तस्कर
श्रीगंगानगर जिले में पहले भी कई बार घुसपैठिये और तस्कर पकड़े जा चुके हैं। इसीलिए यहाँ पुलिस और BSF कड़ी निगरानी रखते हैं।
मालूम हो कि भारत द्वारा अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव चरम सीमा पर है। इसी बीच पाकिस्तानी सेना और घुसपैठियों ने भी सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशें तेज़ कर दीं हैं। पिछले दिनों ही पाकिस्तानी सेना के दो सैनिक संघर्ष-विराम के उल्लंघन में मारे गए थे।
(यह डेवलपिंग स्टोरी है। और जानकारी प्राप्त होने पर इसे अपडेट किया जाएगा। )
सब को सब कुछ नहीं पता होता। ज़ाहिर है, आपसे अगर कोई पूछेगा कि अमेरिका में अरबपति जॉर्ज सोरोस को लेकर क्या कॉन्स्पिरेसी थ्योरी चल रही है, तो शायद ही आप इसका जवाब दे पाएँ। या फिर हो सकता है कि आपने ख़बरें देखी हों और आप इसका जवाब दे दें। जवाब देने वाले केस में आप जानकर कहे जा सकते हैं लेकिन जवाब न देने वाले केस में आपको कोई मूर्ख नहीं कह सकता, बशर्ते आप कोई इंटरनेशनल रिपोर्टर हों जो कि अमेरिका कवर कर रहा हो। इसी तरह सोनाक्षी सिन्हा के साथ भी कुछ ऐसा हुआ, जिसका स्पष्टीकरण देने में उन्होंने उससे भी बड़ी भूल कर दी।
दरअसल, हुआ यूँ कि अमिताभ बच्चन के शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में सोनाक्षी सिन्हा पहुँचीं और उनसे रामायण को लेकर सवाल पूछा गया क्योंकि सोनाक्षी के दोनों भाइयों का नाम लव और कुश है। भगवान श्रीराम के दोनों बेटों का नाम लव और कुश ही था, जिसके आधार पर शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने बेटों का नाम रखा। इसीलिए सोनाक्षी से यह अपेक्षा तो थी ही कि वो रामायण से जुड़े एक आसान सवाल का जवाब दे देंगी। हाँ, सबको सबकुछ नहीं पता होता और सबको रामायण के बारे में भी सबकुछ नहीं पता होगा लेकिन सोनाक्षी से जो सवाल किया गया, वह कठिन नहीं था।
सोनाक्षी सिन्हा से पूछा गया कि हनुमान किसके लिए संजीवनी बूटी लेने गए थे? अच्छा हुआ सोनाक्षी से यह नहीं पूछा गया कि हनुमान संजीवनी बूटी नामक आयुर्वेदिक दवा लेने कहाँ गए थे, नहीं तो वह बाबा रामदेव के पतंजलि स्टोर का नाम भी ले सकती थीं। जिसनें रामायण नहीं पढ़ी है, रामचरितमानस नहीं पढ़ा है और पूरी कहानी ठीक से नहीं पता है, फिर भी इतना तो पता होगा ही कि भगवान राम ने रावण का वध किया था और रावण ने सीता का अपहरण किया था, जिसके बाद यह युद्ध हुआ।
Ghar ka naam (Ramayan)rakhne se dr nahi lagta saheb….. (Ramayan) padne se dr lagta hai
रामचरितमानस ने रामकथा को इतना लोकप्रिय बना दिया कि सोनाक्षी बिहार से हैं, अर्थात उत्तर भारत से, उत्तर भारत के घर-घर में इसका प्रचार-प्रसार हुआ और दादी-नानी ने अपने बच्चों को सबसे पहले रामायण की कहानी सुनाई। रामायण हमारी संस्कृति है। रामायण हमारा इतिहास है। रामायण से पूरा भारत प्रेरित है। और रामायण का भी सबसे लोकप्रिय हिस्सा है- सुंदरकांड। यही वो हिस्सा है, जिसकी लोकप्रियता रामायण से भी ज्यादा है और यही वो कारण है, जिससे हनुमान बच्चों-बच्चों के बीच लोकप्रिय हैं। अगर नायक राम को छोड़ दें तो हनुमान रामायण के सबसे लोकप्रिय, चर्चित और प्रमुख किरदार हैं।
These are so called Indians who quickly run away to foreign countries if any trouble comes to india. Also they live more westernised than Indian but wanna live in india bcoz only here people will give them attention..
खैर, लंकाकाण्ड में युद्ध का वर्णन है। राम के भाई लक्ष्मण पर युद्ध के दौरान मेघनाद ने वीरघातिनी शक्ति बाण का प्रयोग किया और वे मूर्छित हो गए। इसका वर्णन तुलसीदास ने कुछ यूँ किया है;
बीरघातिनी छाड़िसि साँगी। तेजपुंज लछिमन उर लागी॥ मुरुछा भई सक्ति के लागें। तब चलि गयउ निकट भय त्यागें।।
बचपन से हमें सुनाया जाता रहा है कि हनुमान संजीवनी बूटी लाने के लिए हिमालय पर गए लेकिन वह माया के कारण बूटी को पहचान नहीं पाए। इसके बाद उन्होंने जो किया, वह एक ऐसी किवदंती बन गई, जो हज़ारों वर्षों से चर्चा का विषय बनती रही है। हनुमान पर्वत की पूरी चोटी उठा कर उड़ते हुए लंका पहुँच गए, जहाँ वैद्य ने बूटी की पहचान की और लक्ष्मण को मूर्छा से निकाला जा सका। यह कहानी सभी को पता है। अगर नहीं भी पता तो रामायण का इतना बेसिक ज्ञान तो होना ही चाहिए। इस प्रकरण का रामचरितमानस में यूँ वर्णन है:
देखा सैल न औषध चीन्हा। सहसा कपि उपारि गिरि लीन्हा॥ गहि गिरि निसि नभ धावक भयऊ। अवधपुरी ऊपर कपि गयऊ॥
अब यहाँ सवाल यह उठता है कि बॉलीवुड सेलेब्स को आख़िर आज के युवा रोल मॉडल क्यों मानते हैं? आलिया भट्ट और सोनाक्षी सिन्हा, जो सिनेमा इंडस्ट्री के स्थापित परिवारों की बेटियाँ हैं, उन्हें युवाओं का रोल मॉडल और प्रेरणा बताते हुए अवॉर्ड्स दिए जाते हैं। जब युवा उन्हें अनुसरण कर रहे होते हैं, ऐसे में उनके पास रामायण का बेसिक ज्ञान भी न होना चौंकाने वाला है। मैंने ख़ुद बचपन में बिहार बोर्ड की छठी की पुस्तक में रामायण (उस पर आधारित पुस्तक सिलेबस का हिस्सा थी) पढ़ी है और जिसनें न भी पढ़ी है, उसने दादी-नानी से तो सुन ही रखी है।
अब सोनाक्षी के स्पष्टीकरण की बात करते हैं। उन्होंने विरोध करने वालों को ट्रोल करार दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें पाइथागोरस थ्योरम, मर्चेंट ऑफ वेनिस, केमिस्ट्री का पीरिऑडिक टेबल और मुग़ल शासकों के नाम तक याद नहीं है। उन्होंने मज़ाक करते हुए लिखा कि उन्हें क्या-क्या याद नहीं है, ये भी उन्हें नहीं पता। साथ ही उन्होंने लिखा कि उन्हें मिम्स पसंद है। उन्होंने लोगों से और मिम्स बनाने की मज़ाकिया अपील की। ऐसा कर के वह ‘कूल’ तो बन गईं लेकिन उन्हें शायद नहीं पता कि भारत में रामायण ‘मर्चेंट ऑफ वेनिस’ नहीं है।
Dear jaage hue trolls.I don’t even remember the Pythagoras theorem,Merchant of Venice,Periodic Table,Chronology of the Mughal Dynasty,aur kya kya yaad nahi woh bhi yaad nahi. Agar aapke paas koi kaam nahi aur Itna time hai toh please yeh sab pe bhi memes banao na. I love memes ?
इंग्लैंड के किसी लेखक द्वारा 16वीं शताब्दी में लिखे गए नाटक की तुलना भारतीय संस्कृति में हज़ारों वर्षों से समाहित कथा से करना सचमुच एक मजाक है। सोनाक्षी सिन्हा के पिता का नाम भी शत्रुघ्न है। राम के सबसे छोटे भाई का नाम। शत्रुघ्न के बाकी भाइयों के नाम भी रामायण पर आधारित हैं। सोनाक्षी के घर का नाम ‘रामायण’ है। सोनाक्षी के परिवार में तीन लोगों के नाम रामायण से आए हैं लेकिन उन्हें रामायण का बेसिक ज्ञान भी नहीं। अब ट्विटर पर लोगों ने ‘Yo Sonakshi So Dumb’ क्यों ट्रेंड कराया, वे ही जानें। लेकिन अपना और बेटों का नाम रामायण के किरदारों के नाम पर रखने वाले शत्रुघ्न ने बेटी को रामायण की कहानी नहीं सुनाई, लोगों का सवाल भी यही है।
क्या सोनाक्षी प्रकरण इस दलील को और मजबूत कर रहा है कि आजकल के युवा रामायण और महाभारत के बारे में जानना ‘कूल’ नहीं समझते या फिर पता भी हो तो ऐसा दिखाते हैं कि उन्हें नहीं पता? क्या यह किसी नए तरीके का फैशन है? रामायण की कलाकृतियाँ हमारे संविधान में भी हैं। उड़ते हुए हनुमान की कलाकृतियाँ हैं, राम दरबार की कलाकृतियाँ हैं। उन्हीं हनुमान के सबसे बड़े ‘एडवेंचर’ के बारे में सोनाक्षी को कोई आईडिया नहीं है। भारत के गाँव-गाँव में रामलीला का मंचन करने और देखने वाले लोगों को इससे निराशा तो हाथ लगेगी ही।
भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना में रामायण इतना गहरा समाहित है कि सुंदरकांड, रामकथा आयोजन और रामलीला मंचन हमारे इतिहास का ऐसा हिस्सा रहे हैं, जो आज भी जारी हैं। शहरों में यह कम हो गया है लेकिन गाँवों ने इस परंपरा को अभी भी थाम रखा है। देश-विदेशों तक रमलीना का मंचन हो रहा है लेकिन भारत की एक लोकप्रिय अभिनेत्री को रामायण का ज्ञान नहीं। जब हमें ही अपनी संस्कृति का भान नहीं होगा तो हम किस मुँह से उसका विदेशों में प्रचार-प्रसार करने का दावा करते हैं?
भारतीय मुस्लिमों को लेकर वैश्विक मंच पर दुष्प्रचार में लगे पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम इमरान खान को फिर एक भारतीय मुस्लिम ने ही आईना दिखाया है। विदेशी सरजमीं से अजमेर शरीफ के चिश्ती फाउंडेशन के अध्यक्ष हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने पाकिस्तान को ‘औकात’ दिखाते हुए कहा कि वह ‘सही’ को ‘गलत’ साबित करने की कुचेष्टा बंद कर दे। उन्होंने कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताते हुए आम कश्मीरियों से आह्वान किया है कि बेहतर भविष्य के लिए वह मोदी सरकार के इस फैसले के साथ चलें और कश्मीर के विकास में अपना योगदान दें।
Kashmir is integral part of India, no ‘ifs’ and ‘buts’ about it: Spiritual leader Syed Salman Chishty
यूनिवर्सिटी ऑफ जेनेवा के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, इसे लेकर किसी तरह के कोई किंतु, परंतु का सवाल ही नहीं है। सैयद सलमान चिश्ती ने अनुच्छेद-370 और 35(ए) को हटाए जाने के बाद बौखलाए पाकिस्तान की ओर से लगाए जा रहे कश्मीरी मुस्लिमों के उत्पीड़न के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का अपना एक अलग राग और सुर है। कश्मीर के 8-9 करोड़ मुस्लिमों की बात करते हुए पाकिस्तान को भारत में शांतिपूर्वक और खुशहाल जीवन गुजार रहे 18 करोड़ मुस्लिम नहीं दिखाई देते हैं। वह लगातार झूठ बोलकर दुनिया को गुमराह कर रहा है। पाकिस्तान ने खुशहाल भारत की तस्वीर की ओर से आँखें बंद कर रखी हैं।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के पास सुनहरा भविष्य है। कश्मीर के लोगों को पता है कि उनके बच्चों का भविष्य भारत में ही सँवर सकता है। कश्मीर सूफी संतों की भूमि है। सैयद सलमान चिश्ती का उक्त बयान पाकिस्तान के मुँह पर करारा तमाचा है, जो इन दिनों कश्मीर के नाम पर लगातार युद्ध की धमकियाँ दे रहा है और दुनिया को डरा रहा है। हालाँकि, विश्व का कोई भी मुल्क उसके साथ जाने को तैयार नहीं है। यहाँ तक कि मुस्लिम देशों ने भी साफ कर दिया है कि पाकिस्तान संयम से काम ले और भारत के खिलाफ तनाव बढ़ाने वाले बयानों से परहेज करे। बता दें कि, हाजी सैयद सलमान चिश्ती, चिश्ती परिवार से 26वीं पीढ़ी के गद्दी-नशीं हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टेक्सास के ह्यूस्टन शहर में होने वाली ‘Howdy Modi’ रैली का समय जैसे-जैसे करीब आता जा रहा है, वैसे-वैसे दो बातें साफ़ होतीं जा रहीं हैं- पहली, कि यह कोई आम ‘राजनीतिक विरोध’ नहीं है, बल्कि राजनीति का चोगा ओढ़कर खड़ी कोई उससे कहीं ज़्यादा बदरंग ताकत है (जैसे कश्मीर के कट्टरपंथी इस्लाम और जिहादी उन्माद से उपजी हिन्दुओं के प्रति असहिष्णुता को एक ‘राजनीतिक समस्या ‘बताया गया), और दूसरी यह कि इसमें शामिल लोग भी कोई आम हिंदुस्तानी या भारतवंशी नहीं, बल्कि या तो पाकिस्तानी हैं, या खालिस्तानी और जिहादी ताकतें, जिनका हिंदुस्तान से खून या पासपोर्ट का तो रिश्ता हो सकता है, लेकिन वे हिंदुस्तानी किसी भी लिहाज से नहीं कहे जा सकते।
ऑपइंडिया ने पहले ही बताया था कि कैसे 22 सितंबर को होने वाले कार्यक्रम के ‘विरोध प्रदर्शन’ के लिए लोगों के इकट्ठे होने की जगहें अधिकतर (16) मस्जिदें, और एक खालिस्तानी गुरुद्वारा है। इनकी सूची इस प्रकार है:
विरोध-प्रदर्शन करने वाले सिख आयोजकों ने ह्यूस्टन क्रॉनिकल से बात की और उनकी टिप्पणियों से यह स्पष्ट है कि वे खालिस्तानी आंदोलन से जुड़े हुए हैं। विरोध करने वाले सिख आयोजकों में से एक जगदीप सिंह है, जो 2020 पंजाब जनमत संग्रह की दिशा में काम कर रहा है। सिख नेशनल सेंटर के अध्यक्ष हरदाम सिंह आज़ाद ने कहा, “यह स्वतंत्रता के लिए एक विरोध रैली है।” इससे यह बात स्पष्ट है कि यह विरोध रैली अलगाववादियों द्वारा आयोजित की जाएगी।
दूसरी ओर, जो समुदाय विशेष वाले ह्यूस्टन में मोदी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं, वे कश्मीरी अलगाववादी हैं। वे खुलेआम भारत से कश्मीर की आज़ादी की गुहार लगा रहे हैं।
I just spoke at @HoustonTX – Houston City Council – against #HowdyModi. Provided all 16 city council members with a 50+ page packet of three articles about #Modi, the #RSS (and its white supremacist connection and inspiration by the Nazis, and the RSS in America. pic.twitter.com/EYPCPhUyWF
इसकी जड़ कहाँ तक जाती है, यह देखने के लिए ऑपइंडिया के एक विश्वस्त सूत्र ने भी इस विरोध प्रदर्शन के लिए रजिस्टर किया। उसके बाद हमें एक ईमेल मिला।
आयोजकों से मिला ईमेल
जैसा कि आप देख सकते हैं, ईमेल की शुरुआत “अस्सलामवालेकुम” से होती है। इसके बाद इसमें बताया जाता है कि कुछ ‘उदारमना दानदाताओं’ ने प्रदर्शन स्थल NRG स्टेडियम के लिए लक्ज़री बसों का इंतज़ाम किया है। इसके अलावा 20 सितंबर, 2019 के इस ईमेल में आश्वासन भी है कि यह बीएस सेवा हर दस मिनट पर चलती रहेगी, और बसों के लिए किसी पंजीकरण की भी ज़रूरत नहीं है।
लेकिन महज़ तीन दिन पहले, 17 सितंबर तक, इनके पास यह सब नहीं था। सोशल मीडिया पर प्रदर्शन में हिस्सा लेने आने वालों को पीने का पानी तक अपने आप लेकर आने के लिए कहा जा रहा था। कुछ बसों का इंतज़ाम ज़रूर था, लेकिन न ही उनके लक्ज़री होने का ज़िक्र था, न ही इतनी बड़ी संख्या का कि हर दस मिनट पर लोगों को बसें ले आएँ-ले जाएँ। साथ ही, नए पैम्फलेट में दिख रहे किसी “Coalition partners” का भी ज़िक्र तीन दिन पहले तक नहीं था।
लेकिन उनका जो ताज़ा पैम्फलेट ईमेल के साथ हमें मिला, उसमें तो नए ही डिटेल्स थे।
नए लुक , नए डिटेल्स वाला नया पैम्फलेट
पुराने पैम्फलेट में कोई “Coalition partners” नहीं थे, तो नए वाले में इनकी भीड़ इकठ्ठा हो गई! ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है कि क्या यह लक्ज़री बसें इन्हीं “Coalition partners” की तो नहीं हैं? कहीं यही “Coalition partners” तो वे ‘उदारमना दानदाता’ नहीं हैं, जिनकी पहचान किन्हीं कारणों से प्रदर्शन में हिस्सा लेने आ रहे लोगों को नहीं बताई जा रही है?
पाकिस्तान कनेक्शन, वो भी खालिस इमरान खान वाला
इन “Coalition partners” की खोजबीन में सबसे पहला कनेक्शन जो निकल कर सामने आता है, वह है दुनिया के सबसे क्रूर, जिहादी, मानवाधिकार के भक्षक देशों में से एक पाकिस्तान का है। कुछ मामलों में तो यह कनेक्शन भी भी सेना की गोद में बैठे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी PTI से सीधा-सीधा निकलता है।
HKSCA
HKSCA का पूरा मतलब है ‘Houston-Karachi Sister City Association’. इस संस्था का घोषित लक्ष्य ह्यूस्टन में कराची की पैठ और प्रभाव बढ़ाना है।
PAGH
Pakistan Association of Greater Houston (PAGH) ने एक गैर-लाभकारी सामाजिक संगठन के रूप में रजिस्ट्रेशन करवाया हुआ है, और ह्यूस्टन और उसके आसपास के पाकिस्तानी कनेक्शन रखने वाले अमेरिकियों के लिए सामाजिक, मज़हबी आदि प्रकार के जलसे करने के लिए फंडिंग का इंतज़ाम करना इसका लक्ष्य है। यह किसी राजनीतिक पार्टी से तार जुड़े न होने का दावा करती है।
PTI भी है “Coalition partners”
इस पूरे कुचक्र के “Coalition partners” में सीधे-सीधे इमरान ‘तालिबान’ खान की पाकिस्तान में सत्तारूढ़ पार्टी PTI की अमेरिकी शाखा भी है।
‘Secular’ नाम, जिहादी काम
‘Sound Vision’, ‘Emgage’, ‘CAIR’ जैसे ‘सेक्युलर’ और ‘नॉर्मल’ नाम वाले भी कई संगठन इसके “Coalition partners” हैं। इनके नाम भले जितने भी ‘नॉर्मल’ हों, यह सभी संगठन ऊपर उल्लिखित HKSCA, PAGH, PTI USA LLC जैसे ही खतरनाक संगठन हैं।
कश्मीर प्रोपेगंडा है Sound Vision का विज़न
Sound Vision नाम रख कर इस्लामिस्ट और कश्मीरी प्रोपेगंडा फैलाने वाली इस वेबसाइट का एक प्रोजेक्ट है FreeKashmir.org.
बिना एक नए पैसे के सबूत के हिंदुस्तान के कश्मीर पर अत्याचारों की झूठी कहानी सुनाना ही इस वेबसाइट का कामधंधा लगता है। साथ ही Sound Vision की जड़ें खुले तौर पर इस्लामी हैं, और मकसद केवल समुदाय विशेष, और खासकर कि उनके युवाओं, के हितों को ही आगे बढ़ाने के लिए दूसरे धर्म वालों के साथ ‘आपसी समझदारी’ को बढ़ावा देना है। और अब चूँकि निष्ठा ही इस्लाम और इस्लामी उम्मत के प्रति है, इसलिए कश्मीर भी उनके लिए इस्लामीकरण करने के लिए ही ज़रूरी है। यह पाकिस्तान की ही लाइन है, जिसमें वह भी कश्मीर का मतलब केवल कश्मीर के इस्लाम समर्थकों को ही मानता है।
Emgage के लिए समुदाय विशेष से होने का मतलब हिंदुस्तान से नफ़रत
Emgage भी ‘नॉर्मल’ नाम की आड़ में केवल समुदाय विशेष के ही हितों की चिंता करने वाली संस्था है। यही नहीं, वह हिंदुस्तान के ख़िलाफ़ प्रोपेगंडा भी करती है- जिसका हिस्सा एक ओर हिंदुस्तानी कथित अल्पसंख्यकों (जिनके लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि देश के संसाधनों पर उनका पहला हक़ है) की तुलना चीन में उइगरों के साथ सच में हो रहे मानवाधिकारों के हनन के शमिल है, और दूसरी ओर Emgage साम्प्रदायिक तनाव को ‘Xenophobia’ (बाहरी नस्लों से मूलनिवासियों की नफ़रत) बताकर खुद ही यह नैरेटिव चलाने की कोशिश करती है कि मजहब विशेष की पहली निष्ठा हिंदुस्तान नहीं होना चाहिए, क्योंकि वे यहाँ ‘बाहरी नस्ल’ हैं।
With a combined population of over 221 million Muslims, India and China’s Muslims are being targeted and human rights violations are occuring.
Millions are under threat by the forces of bigotry and xenophobia. The world, still, remains quit. https://t.co/583ND7yyh8
We are seeing this trend from India to Europe and right here at home. Only through our unanimous rejection of these voices can we defeat them and protect our cherished freedoms and values.” – Emgage CEO @WaelAlzayat
यह Emgage कितनी कट्टरपंथी संस्था है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसका सीईओ वैल एन अल्ज़ायत लिंडा सारसोर जैसे नफ़रती इस्लामियों का समर्थक है। और लिंडा सारसोर का इतिहास यह है कि वे इस्लाम में सुधार लाने और उससे कट्टरपंथ निकालने की बात करने वाली अयान हिरसी अली को औरत होने लायक नहीं समझतीं।
9/11 की आरोपित रही है CAIR
मोदी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के अगले “Coalition partner” का नाम है CAIR (Council of American Islamic Relations)। इस पर एक समय न केवल 9/11 में सहायक होने का शक था, बल्कि उससे किसी तरह बच निकलने के बाद भी आज तक किसी-न-किसी इस्लामी कट्टरपंथी के साथ हर समय इसके तार निकल ही आते हैं। Investigativeproject.org नामक एक खोजी पत्रकारिता करने वाले संगठन में अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि CAIR के संस्थापकों के तार ऐसी संस्थाओं से जुड़े हैं जिन्हें अदालतों ने जिहादी संगठन हमास का समर्थक माना था। यही नहीं, CAIR को कट्टरपंथी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड ने अपने अमेरिकी ‘नेटवर्क’ में शामिल बताया था।
यह संस्था अमेरिका की जिहादियों के खिलाफ कार्रवाई पर पलीता लगाने की कोशिश करने के लिए जाना जाता है। अमेरिकी सांसद इल्हान उमर ने इसी के मंच से 9/11 के जिहादी हमले को “कुछ लोगों ने कुछ-कुछ किया” बताकर हल्का करने की कोशिश की थी।
खालिस्तानी भी नहीं हैं पीछे
जुलाई, 2019 में हिंदुस्तान की सरकार ने Sikhs for Justice (SFJ) को आतंकी संगठन घोषित कर दिया था, क्योंकि वह पंजाब को खालिस्तान बनाने के लिए अगले साल (2020) में जनमत संग्रह की माँग करती है।
यह संगठन फ़िलहाल ब्रिटेन में बैठकर अपनी आतंक्की गतिविधियों को अंजाम देता है, और इसपर ISI के इशारों पर चलने का आरोप है। इसके ‘कानूनी सलाहकार’ गुरपतवंत सिंह पन्नूँ को WhatsApp तक पर प्रतिबंधित कर दिया गया है। पिछले सितंबर में हुई इस घटना के बाद उसने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह को धमकी भरा एक वीडियो भी इंटरनेट पर अपलोड किया था। इसके अलावा खालिस्तानियों की पाकिस्तानी साठगाँठ इस बात से भी दिखती है कि एक कनाडाई खालिस्तानी संगठन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना प्रमुख जनरल बाजवा को सम्मानित किया था।
ऊपर दिए गए मोदी-विरोधी प्रदर्शन के पैम्फलेट में SFJ नहीं, बल्कि पन्नूँ को सीधे-सीधे नाम लेकर आयोजक के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है।
यही नहीं, मज़े की बात यह है कि अपने नागरिक अधिकारों का दुरुपयोग कर दो कश्मीरी अमेरिकियों ने ‘Kashmir Khalistan Referendum Front’ नामक संगठन की आड़ सिविल शिकायत दाखिल कर मोदी को ‘समन’ भिजवा दिया ह्यूस्टन के सिटी कोर्ट का। गुप्तचर एजेंसियों का मानना है कि इस हरकत के पीछे भी SFJ ही है।
झूठी हाइप की कोशिश
इसके अलावा अपने कार्यक्रम में ‘वजन’ डालने के लिए ऐसे लोगों और समूहों का नाम भी “Coalition partners” में शामिल किया गया है, जिनकी ज़मीनी तो छोड़िए, इंटरनेट पर भी इस कार्यक्रम के बाहर मौजूदगी नहीं है। जैसे यह ‘Stop Nazi Modi’. सारे सबूत इसी तरफ इशारा कर रहे हैं कि इस कार्यक्रम के “Coalition partners” की भीड़ बढ़ाने के लिए इसे ईजाद किया गया है, और इसके बाहर इस समूह का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है। इसके बारे में इंटरनेट पर सर्च करने पर मोदी की ह्यूस्टन रैली के विरोध का ही एक निमंत्रण मिलता है।
यानि इस सभी सबूतों की बिना पर इस निष्कर्ष पर पहुँचा जा सकता है कि जिहादियों और खालिस्तानियों की ‘कोटरी’ के बाहर इस विरोध प्रदर्शन को लेकर प्रतिक्रिया बेहद ठंडी है। ऐसे में ‘हवा’ बनाए रखने के लिए जिहादी और खालिस्तानी एक तरफ़ अपनी आतंकी मानसिकता के अधिक-से-अधिक लोगों को ही जुटा कर उसे आम हिन्दुस्तानियों और भारतवंशियों के मोदी-विरोध के रूप में दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, और दूसरी ओर अपने असली आयोजकों, असली ‘उदारमना दानदाताओं’ का नाम उजागर करने से बचने के लिए ‘Stop Nazi Modi’ जैसे फ़र्ज़ी समूह भी बना रहे हैं।
एक थे मोरोपंत त्र्यंबक पिंगले जिन्हें ‘मोरोपंत पेशवा’ भी कहते हैं। वे शिवाजी के अष्टप्रधानों में से एक थे। उनके निधन के करीब 236 साल बाद पैदा हुए थे मोरेश्वर नीलकंठ पिंगले। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक रहे मोरेश्वर भी मोरोपंत पिंगले के नाम से ही जाने गए।
30 दिसम्बर 1919 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में पैदा हुए मोरेश्वर नीलकण्ठ पिंगले का निधन 85 साल की उम्र में 21 सितम्बर 2003 को हुआ था। मराठी में उन्हें ‘हिन्दु जागरणाचा सरसेनानी (हिन्दू जनजागरण के सेनापति)’ कहा जाता है।
संघ के साथ उनका जुड़ाव छह दशक से भी ज्यादा समय तक रहा। इस दौरान उन्होंने कई दायित्वों का निवर्हन किया। मसलन, मध्य भारत के प्रांत प्रचारक, पश्चिम क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक, अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख, अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख, अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख, सह सरकार्यवाह। आपातकाल के समय छह अघोषित सरसंघचालकों में से वे भी एक थे। तीसरे सरसंघचालक बालासाहब देवरस के निधन के बाद वे उनके उत्तराधिकारी बनने के दावेदारों में भी शामिल रहे।
धर्मांतरण के खिलाफ आरएसएस के अभियान के पीछे भी मोरोपंत पिंगले ही थे। 12 जुलाई, 1981 को आरएसएस की नेशनल एग्जीक्यूटिव ने धर्मांतरण के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया। इसी साल विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) ने धर्मांतरण को रोकने के लिए पहला कार्यक्रम शुरू किया था। इसे संस्कृति रक्षा निधि योजना कहा गया। वीएचपी की 1983 की एकात्म यात्रा के पीछे उन्हीं का दिमाग था। इसका मकसद हिंदुओं को एकजुट करना था।
रामजन्मभूमि आन्दोलन के रणनीतिकार पिंगले ही थे। राम जानकी रथ यात्रा जो 1984 में निकाली गई, उसके वे संयोजक थे। वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा अपनी किताब ‘युद्ध में अयोध्या’ में लिखते हैं, “कुछ किरदार नेपथ्य में थे। लेकिन अयोध्या के राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन की डोर उनके ही हाथों में थी। मोरोपंत पिंगले एक ऐसे ही किरदार थे। दरअसल, अयोध्या आंदोलन के असली रणनीतिकार वही थे।” बकौल शर्मा, “उनकी बनाई योजना के तहत देशभर में करीब तीन लाख रामशिलाएँ पूजी गई। गॉंव से तहसील, तहसील से जिला और जिलों से राज्य मुख्यालय होते हुए लगभाग 25 हजार शिला यात्राएँ अयोध्या के लिए निकली थीं। 40 देशों से पूजित शिलाएँ अयोध्या आई थी। यानी, अयोध्या के शिलान्यास से छह करोड़ लोग सीधे जुड़े थे। इससे पहले देश में इतना सघन और घर-घर तक पहुॅंचने वाला कोई आंदोलन नहीं हुआ था।”
शर्मा की किताब बताती है कि 1992 में संघ के तीन प्रमुख नेताओं एचवी शेषाद्रि, केएस सुदर्शन और मोरोपंत पिंगले 3 दिसंबर से ही अयोध्या में डेरा डाले हुए थे। आंदोलन के सारे सूत्र इन्हीं के पास थे। पिंगले एक बात अक्सर कहा करते थे, “जैसे सौर ऊर्जा संयंत्र से बिजली पैदा होती है, वैसे ही संघ की शाखा और कार्यक्रमों से भी संगठन रूपी बिजली पैदा होती है।” संघ का फैलाव बता रहा है कि पिंगले सही ही कहा करते थे।
आजकल आपने आरे जंगल का नाम सुना होगा। ट्विटर पर भी कई सेलेब्रिटीज द्वारा इस सम्बन्ध में ट्वीट किया जा रहा है। उन्होंने ‘Save Aarey’ नामक ट्रेंड भी चलाया, जिसमें लोगों को इस मुद्दे पर सरकार का विरोध करने को कहा गया। यहाँ यह भी जानने लायक बात है कि आरे क्षेत्र को आधिकारिक रूप से जंगल का दर्जा नहीं प्राप्त है। महाराष्ट्र सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि आरे क्षेत्र को सिर्फ़ इसीलिए जंगल का आधिकारिक दर्जा नहीं दिया जा सकता क्योंकि वहाँ बहुत ज्यादा हरियाली है।
अगर आपने आरे जंगलों से जुड़े विरोध प्रदर्शन पर ध्यान दिया होगा तो आपको ऐसा लगेगा कि सरकार मेट्रो प्रोजेक्ट्स के लिए पूरे जंगल को ही काट रही है। माहौल ऐसा बनाया जा रहा है जैसे पूरे जंगल को औद्योगिक कारणों ने साफ़ किया जा रहा है। महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना की सरकार है। ऐसे में, विरोध प्रदर्शनों में कई ऐसे तत्व शामिल हैं, जो महाराष्ट्र सरकार के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार अभियान में लगे हैं। कहीं-कहीं तो ऐसा भी लग रहा कि इस विरोध प्रदर्शन का आधार ही किसी बड़ी साज़िश का हिस्सा है।
विरोध प्रदर्शन जायज है। ख़ुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति एक भी पेड़ काटे जाने के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरता है तो वह उस व्यक्ति का सम्मान करते हैं। उन्होंने बताया कि इस मसले को लेकर सरकार के पास 13,000 शिकायतें आई हैं, जिनमें से 10,000 शिकायतें बंगलौर की एक वेबसाइट से आई हैं। ऐसे में इस प्रश्न का उठना लाजिमी है कि क्या इस पूरे विरोध प्रदर्शन को कहीं से संचालित किया जा रहा है? पहले मामले को समझते हैं।
Aarey जंगल: क्या है मामला और क्यों हो रहा है विरोध
मुंबई मेट्रो को विश्व के सबसे उन्नत मेट्रो में से एक जाना जाता है। मुंबई के विकास में यातायात सुविधाओं को सुगम बनाना सरकार की प्राथमिकता है और होनी भी चाहिए। मुंबई जैसे महानगर में यातायात सुविधाएँ क्षेत्र की लाइफलाइन है। मेट्रो के शेड 3 लाइन के लिए आरे जंगल के 2700 पेड़ों को काटे जाने का निर्णय लिया गया है। आरे जंगल नार्थ मुंबई में 1000 एकड़ से भी अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। ध्यान दीजिए, पूरे जंगल को नहीं साफ़ किया जा रहा है। आज क्लाइमेट चेंज के ज़माने में एक पेड़ का भी कटना दुःखद है लेकिन जैसा कि कहा जा रहा है कि पूरे जंगल को कटा जा रहा है, ऐसी बात नहीं है।
आरे जंगल में पेड़ों को काटे जाने के विरोध में अधिकतर बॉलीवुड सेलेब्स शामिल हैं। कटरीना कैफ, अजुन कपूर, जॉन अब्राहम और मनोज वाजपेयी सहित तमाम बड़े चेहरों ने इसका विरोध किया। लेकिन, लोगों को शक तब हुआ जब मनोज वाजपेयी और दिया मिर्जा के ट्वीट्स में एकदम से समानता देखने को मिली। गुरुवार (सितम्बर 19, 2019) को सबसे पहले दिया मिर्जा का ट्वीट आया, जिसमें कहा गया कि मुंबई में आरे जंगलों के साथ-साथ गुरुग्राम में आरावली की पहाड़ियों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है। इसके अलावा बुलेट ट्रेन्स को लेकर भी नेगेटिव बात लिखी गई।
ट्वीट में दिया मिर्जा ने लिखा कि विकास कार्यों के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने के भयंकर परिणाम होंगे। इसके साथ ही कुछेक हैशटैग के साथ स्ट्राइक करने की बात कही गई। इसके ठीक 7 मिनट बाद मनोज वाजपेयी का ट्वीट आया, जिसमें इससे कुछ भी अलग नहीं है। दोनों ट्वीट्स की शब्दशः समानता देख कर लोगों को इस पर शक होना लाजिमी था कि क्या इस विरोध प्रदर्शन के पीछे कोई संस्था है जो ट्वीट्स का फॉर्मेट तैयार कर के सेलेब्स को भेज रही है? या फिर क्या ये पेड ट्वीट्स हैं? देखिए दोनों ट्वीट्स:
आपको यह जानना ज़रूरी है कि आरे एक बहुत बड़ा क्षेत्र है और इसका पूरा क्षेत्रफल 3000 एकड़ से भी ज्यादा हो जाता है। आरे मिल्क कॉलोनी के रूप में पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र का 950 एकड़ से भी ज्यादा हिस्सा राज्य व केंद्र सरकारों की संस्थाओं के स्वामित्व में है। इसमें से 1000 एकड़ कृषि कार्यों के लिए नहीं हैं। सोशल फॉरेस्ट्री लैंड एक्ट के तहत 183 एकड़ ज़मीनें आती हैं। अगर पूरे 3000 एकड़ की बात करें तो औसतन प्रति एकड़ एक पेड़ से भी कम काटा जा रहा है। लेकिन, इसे पूरे आरे जंगल को सरकार द्वारा बर्बाद करने वाले नैरेटिव के रूप में पेश किया जा रहा है।
पूरे आरे मिल्क कॉलोनी में 4.8 लाख पेड़ हैं, जिनमें से मात्र 2185पेड़ों को मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए काटा जाएगा। इसके अलावा 461 पेड़ों को ट्रांसप्लांट किया जाएगा। अर्थात, इन्हें काटा नहीं जाएगा बल्कि उठा कर यहाँ से कही और लगा दिया जाएगा। महाराष्ट्र सरकार कुल काटे गए पेड़ों का 6 गुना पेड़ लगाएगी। अर्थात, अगर 2500 पेड़ काटे जाते हैं तो उसके बदले 15,000 पेड़ लगाए जाएँगे? तो फिर बवाल क्यों? क्या विकास परियोजनाओं को यूँ ही रोक दिया जाए, वो भी तब जब महानगर को इसकी सख्त ज़रूरत है? आखिर वो कौन लोग हैं जो चाहते हैं कि मुम्बई में मेट्रो का विकास न हो?
समर्थन में हैं अमिताभ और अक्षय
वहीं अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार जैसे सेलेब्स ने मुंबई मेट्रो का समर्थन किया है। अमिताभ बच्चन ने इसके लिए अपने एक दोस्त की कहानी सुनाई। उनके एक दोस्त ने मेडिकल इमरजेंसी के समय अपनी कार का उपयोग न करते हुए मेट्रो का उपयोग करना बेहतर समझा। समय पर हॉस्पिटल पहुँचने के बाद वो मेट्रो सेवा से काफ़ी प्रभावित हुए। अमिताभ के दोस्त ने पाया कि मेट्रो काफ़ी प्रभावी, तेज़ और सुगम है। अमिताभ बच्चन ने अपने दोस्त के हवाले से लिखा कि मेट्रो पर्यावरण के लिए भी अच्छा है और प्रदूषण का निदान है क्योंकि लोग प्राइवेट गाड़ियों का उपयोग न कर के मेट्रो में चढ़ते हैं।
Thank you @SrBachchan, for shedding light on the usefulness of #Metro for #Mumbaikars. We at MMRDA are extremely glad that such a distinguished personality like you, took out the time to tweet about this!#MumbaiMetro network will always strive to be part of such heartening tales
साथ ही बच्चन ने यह सलाह भी दी कि लोग अपने बगीचे में ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएँ, जैसा कि उन्होंने किया है। मुंबई मेट्रो ने भी बॉलीवुड के महानायक के इस ट्वीट के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। लेकिन कुछ लोगों को अमिताभ का यह ट्वीट रास नहीं आया और उनके घर के बाहर भी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। ‘जलसा’ के बाहर जुटे प्रदर्शनकारियों ने अमिताभ को बगीचे और जंगल के बीच का अंतर समझाते हुए प्लाकार्ड्स दिखाए।
इसी तरह अक्षय कुमार ने भी मेट्रो में सफर करते हुए एक वीडियो बनाया और बताया कि यह महानगर के लिए कितना अच्छा है। उन्होंने ट्रैफिक के लिए मेट्रो को सलूशन बताया। और सबसे बड़ी बात यह कि मुंबई के गोरेगाँव फिल्म सिटी के निर्माण के लिए भी काफ़ी पेड़ काटे गए थे। क्या उस बारे में इन सेलेब्स ने कुछ भी कहा? क्या वे इस फिल्म सिटी का उपयोग करना बंद कर देंगे? नहीं। क्योंकि, मामला यहाँ उनके वित्तीय हित से जुड़ा है। इसी तरह मेट्रो प्रोजेक्ट भी करोड़ों मुंबई वासियों के हित से जुड़ा है।
आसनगाँव फास्ट ट्रेन में दरवाज़े के पास खड़े होने को लेकर हुए आपसी विवाद में आसिफ़ यूसुफ़ शेख ने दूसरे सह-यात्री की तर्जनी उंगली का एक हिस्सा दाँत से काट लिया। यह घटना मुंबई में गुरुवार (19 सितंबर) की शाम को घटी। फ़िलहाल, आरोपित को गिरफ़्तार कर लिया गया है।
पीड़ित की पहचान महेश पांडुरंग धुम्बरे के रूप में हुई है, जो एक बीमा कंपनी में काम करते हैं और घनसोली में रहते हैं। गुरुवार को अपना काम खत्म करने के बाद वह दादर में 5:40 PM लोकल ट्रेन के प्रथम श्रेणी के डिब्बे में चढ़े। आरोपित आसिफ़ यूसुफ़ शेख कुर्ला स्टेशन पर चढ़ा और दरवाज़े के पास खड़े धुम्बरे और अन्य यात्रियों के साथ धक्का-मुक्की करने लगा। महेश ने मुंबई मिरर को बताया कि वो ख़ुद के लिए जगह बनाने के लिए दूसरों को धक्का देने की कोशिश कर रहा था, लेकिन भीड़ की वजह से वो जगह बना पाने में असमर्थ था। इसके अलावा आसिफ़ ने दूसरे यात्रियों को भी ट्रेन में घुसने से रोका। इसलिए मैंने उसे अंदर खींच लिया। लेकिन, इससे उसे बहुत तक़लीफ हुई और उसने मुझे दूर धकेल दिया।
ट्रेन में सफर कर रहे अन्य यात्रियों ने बताया कि जल्द ही इस विवाद ने एक बड़ा रूप ले लिया। इसके बाद आसिफ़ ने धुम्बरे को धक्का दिया और उसके कॉलर को पकड़ कर उससे हाथापाई की। इसी हाथापाई के दौरान आसिफ़ ने धुम्बरे की उँगली अपने दाँतों से काट की।
धम्बरे ने इस घटना को याद करते हुए बताया कि दर्द इतना कष्टदायी था कि वह झुक गया और अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं। कुछ समय बाद जब उन्होंने अपनी आँखें खोलीं, तो उन्होंने शेख की शर्ट और मुँह पर खून के छींटे देखे। उसे लगा कि उसने शेख को घायल कर दिया है। लेकिन जल्द ही धुम्बरे पता चला कि आसिफ़ ने उसकी तर्जनी उँगली का एक सेंटीमीटर हिस्सा अपने दाँत से काट लिया है।
धुम्बरे को उस समय बेहद अश्चर्य हुआ जब आसिफ़ ने उसकी उँगुली के भाग को थूकने के बाद भी उसे गालियाँ देता रहा। जीआरपी कुर्ला में दर्ज FIR में उल्लेख किया गया है कि शेख ने धुम्बरे को ट्रेन से बाहर फेंकने की धमकी दी थी, लेकिन अन्य सह-यात्रियों ने उसे बचा लिया। एक यात्री ने रेलवे हेल्पलाइन को फोन किया और घटना की जानकारी दी। ट्रेन को ठाणे स्टेशन पर रोका गया और जीआरपी कर्मियों ने दोनों को गिरफ़्तार कर लिया। आसिफ़ के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा-325 (स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाना) और 504 (जानबूझकर अपमानजनक और सार्वजनिक शांति भंग करने के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया गया।
धुम्बरे के बड़े भाई योगेश के अनुसार, डॉक्टर ने इस बात पर अनिश्चितता जताई है कि धुम्बरे की उँगली को पूरी तरह से ठीक कर पाएँगे कि नहीं। हालाँकि, उन्होंने कहा है कि वे नाखून के पीछे के हिस्से को फिर से विकसित करने की कोशिश करेंगे।
बिहार के मुंगेर से एक हाई-प्रोफाइल डबल मर्डर की ख़बर सामने आई है। शुक्रवार (20 सितंबर) देर रात सदर प्रखंड कार्यालय परिसर में एक युवक और युवती के शव मिलने से हड़कंप मच गया। दोनों की हत्या गोली मारकर की गई है। हत्या की इस वारदात की सूचना स्थानीय लोगों ने पुलिस को दी जिसके बाद पुलिस ने दोनों शवों को क़ब्ज़े में लेकर उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।
ख़बर के अनुसार, मृतका की पहचान मुंगेर से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के विधायक विजय कुमार विजय की भतीजी रिया उर्फ़ ट्विंकल के रूप में हुई है। वहीं, युवक की पहचान मोहम्मद आसिफ़ के रूप में हुई है।
दोनों ली लाशें (साभार -प्रभात खबर )
रिया उर्फ़ ट्विंकल की माँ ने बताया कि उनकी बेटी दिल्ली में मेडिकल की तैयारी कर रही थी और कुछ महीने पहले ही वो मुंगेर आई थी। उन्होंने बताया कि आसिफ़ और रिया दोस्त थे। अपनी बेटी के बारे में उन्होंने बताया कि शुक्रवार की शाम को वो यह कहकर बाहर निकली थी कि वो आसिफ़ के घर कुछ किताबे लेने जा रही है। काफ़ी समय बाद जब वो घर वापस नहीं आई तो उन्होंने बेटी के मोबाइल पर कई कॉल्स की, लेकिन किसी एक कॉल का भी जवाब उन्हें नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी को खोजबीन शुरू कर दी। काफ़ी तलाशने के बाद भी रिया का कुछ पता नहीं चला।
रिया की माँ ने बताया की उसकी किसी से दुश्मनी नहीं थी। उसकी हत्या क्यों की गई ये उन्हें मालूम नहीं। दूसरी ओर, मोहम्मद आसिफ़ के मामा ने बताया कि जब उन्हें सूचना मिली कि उनके भाँजे की गोली मारकर हत्या कर दी गई है, तो वो घटना-स्थल पर पहुँचे। उन्होंने बताया कि आसिफ़ के पिता मोहम्मद इरशाद दुबई में काम करते हैं और मृतक अपनी माँ और छोटे भाई के साथ सुजावलपुर में रहता था।
मीडिया में आई ख़बरों अनुसार, मुंगेर पुलिस ने कहा है कि प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला लग रहा है। मुंगेर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) गौरव मंगला ने कहा कि सदर प्रखंड के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में शुक्रवार को एक युवा जोड़े ने आत्महत्या कर ली। उन्होंने कहा है कि 25 वर्षीय आसिफ़ ने पहले ट्विंकल यादव को सिर में गोली मारी और फिर उसी पिस्तौल से ख़ुद को मार डाला। एक अन्य रिपोर्ट में इसे अपराधियों द्वारा अंजाम दिया बताया जा रहा है।
पुलिस ने आसिफ़ के दोस्त दानिश को हिरासत में ले लिया है। कथित तौर पर उसने आसिफ़ को पिस्तौल दी थी। दानिश के पास से दो राउंड गोली और मृतक का मोबाइल (ट्विंकल और आसिफ) बरामद हुआ है। गौरव मंगला ने कहा कि आत्महत्या का संभावित कारण असफल प्रेम संबंध हो सकता है। फ़िलहाल, मामले की जाँच जारी है।