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MP में ₹2.91 पेट्रोल और ₹2.86 महँगा हुआ डीजल: कमलनाथ ने बढ़ाया VAT, शराब भी महँगी

मध्य प्रदेश में राहत के नाम पर किसानों को ऋण माफी तो मिल नहीं रही, हाँ समय-समय पर झटका जरूर लग रहा है। राज्य की जनता को एक और झटका लगा है – प्रदेश सरकार ने पेट्रोल-डीजल और शराब पर वैट की दर पाँच फ़ीसदी तक बढ़ा दी है। इससे पेट्रोल-डीजल तो महँगा हुआ ही, साथ में शराब की क़ीमतों में भी इज़ाफ़ा हो गया।

शुक्रवार (20 सितंबर, 2019) की देर रात को जारी हुए आदेश के अनुसार, पेट्रोल पर वैट 28 से बढ़ाकर 33 फ़ीसदी कर दिया गया है। इस हिसाब से अब पेट्रोल की क़ीमत में 2 रुपए 91 पैसे की वृद्धि होगी। डीजल की बात करें तो अब इस पर 18 की जगह 23 फ़ीसदी वैट लगेगा। इस हिसाब से डीजल की क़ीमत में 2 रुपए 86 पैसे का इज़ाफ़ा हो जाएगा।  वहीं, शराब पर वैट पाँच से बढ़ाकर 10 फ़ीसदी कर दिया गया है।

ख़बर के अनुसार, प्रदेश सरकार को इस बढ़ोत्तरी के बाद हर महीने में 250 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आमदनी होने की संभावना है। बीजेपी ने इस बढ़ोत्तरी का यह कहकर विरोध किया है कि एक तरफ़ तो राज्य सरकार महँगाई और आर्थिक मंदी के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरती आई है और दूसरी तरफ़ जनता पर मनमाने टैक्स लगाए जा रहे हैं, इससे जनता पहले से अधिक परेशान हो जाएगी।

बता दें कि प्रदेश में भारी वर्षा और बाढ़ के चलते क़रीब 12,000 करोड़ रुपए का नुक़सान हुआ है। वहीं, बाढ़ के कारण 225 लोगों की मौत की भी ख़बर है। राज्य सरकार ने केंद्र से इसे गंभीर आपदा घोषित करने का अनुरोध किया था। साथ ही कमलनाथ सरकार इस नुक़सान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार से मुआवज़े राशि की माँग कर रही है।   

मध्य प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने गुरुवार (18 सितंबर) को केंद्रीय दल के साथ बैठक की, जिसमें उन्होंने बताया कि बाढ़ के क़हर से 52 में से 36 ज़िलो को भारी क्षति हुई है। बैठक में इस बात का उल्लेख किया गया कि मध्य प्रदेश में 17 सितंबर तक1203.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो कि सामान्य से 37 फ़ीसदी अधिक है।

भारी वर्षा के चलते 24 लाख हेक्टेयर भूमि पर 9,600 करोड़ रुपये की फसल नष्ट हो गई, जिससे राज्य के लगभग 22 लाख किसान प्रभावित हुए हैं। कई जगह की पुलिया बह गईं और सड़कों की हालत खस्ता हो गई। इससे आवागमन बुरी तरह से प्रभावित है, साथ ही फ़सलों को भी भारी नुक़सान पहुँचा है। एक अधिकारी ने केंद्रीय दल को जानकारी दी कि बारिश और बाढ़ से प्रदेश में 225 लोग एवं 1400 मवेशी मारे गए हैं। इसके अलावा 1566 करोड़ रुपए की सड़क भारी वर्षा की वजह नष्ट हो गई।

इकबाल अंसारी के खिलाफ FIR, इंटरनेशनल शूटर वर्तिका सिंह के सामने बोला था – पाकिस्तान जिंदाबाद

अयोध्या मामले के पक्षकार इकबाल अंसारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। दरअसल अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज वर्तिका सिंह की याचिका के बाद पुलिस ने इकबाल अंसारी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की (आईपीसी) धारा 147, 504, 505 (2) और 506 के तहत राम जन्मभूमि थाने में केस दर्ज किया है।

वर्तिका सिंह ने फैजाबाद न्यायालय में न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय देवेंद्र प्रताप सिंह के समक्ष धारा 156/3 के तहत यह याचिका दायर की थी। वर्तिका ने कोर्ट में दी याचिका में इकबाल अंसारी पर मारपीट का आरोप लगाया था। साथ ही इकबाल अंसारी समेत 5 के खिलाफ देशद्रोह और कई अन्य मामलों को लेकर ये याचिका दायर की थी। देवेंद्र प्रताप सिंह ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए इकबाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने थाना राम जन्मभूमि को आदेश देते हुए कहा था कि वो 3 दिन के भीतर इस केस को दर्ज करके न्यायालय को सूचना दें।

दरअसल, यह पूरा मामला 3 सितंबर की उस घटना को लेकर है, जिसमें वर्तिका सिंह मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी से राम मंदिर को लेकर बात करने उनके घर पहुँची थीं। इस दौरान दोनों में विवाद हो गया था। अंसारी ने वर्तिका पर हाथापाई के आरोप लगाए थे और उनके ख़िलाफ़ पुलिस में केस दर्ज करवाया था। इसके बाद पुलिस ने वर्तिका सिंह को कस्टडी में लेकर 4 घंटे तक पूछताछ की थी और फिर लखनऊ भेज दिया था।

इस केस में वर्तिका की ओर से सर्वोच्च न्यायालय की वकील संगीता सिंह ने उनकी पैरवी की। वकील संगीता सिंह ने कहा कि अंसारी ने वर्तिका पर फर्जी आरोप में केस दर्ज कर उन्हें उत्पीड़ित किया और साथ ही वर्तिका के साथ बातचीत में देश के खिलाफ (पाकिस्तान जिंदाबाद, PM मोदी को अपशब्द आदि) कई बातें कही थीं।

क्या जम्मू कश्मीर भारत के लिए सिर्फ एक कॉलनी है? महबूबा मुफ्ती की बेटी ने सरकार से पूछा सवाल

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने वाले अनुच्छेद 370 के पर करतने के केंद्र के फैसले और इसके बाद संचार सेवा पर प्रतिबंध लगाने को लेकर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती की बौखलाहट एक बार फिर से सामने आई है। उन्होंने सरकार से पूछा है कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था या फिर इसका उपनिवेश (एक कॉलनी मात्र)?

इल्तिजा मुफ्ती ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में हिस्सा लेते हुए सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा, “पिछले एक महीने से कश्मीरियों को बंदी बना लिया गया है। आप भविष्य के बारे में बात करते हैं, क्या हम पहले वर्तमान के बारे में बात कर सकते हैं? क्या हम मानवीय संकट, आर्थिक संकट, मनोवैज्ञानिक संकट, मानसिक आघात के बारे में बात कर सकते हैं?”

इतना ही नहीं, जब उनसे अनुच्छेद 370 के पर कतरने से जम्मू-कश्मीर के एकीकरण और महिलाओं के अधिकारों के बारे में पूछा गया, तो इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि अनुच्छेद 370 का विकास से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर की तुलना उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे अन्य राज्यों से करते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी बेहतर था।

इल्तिजा ने कश्मीर की महिलाओं की स्थिति पर बात करते हुए कहा कि कश्मीरी महिलाएँ, देश के बाकी हिस्सों की महिलाओं की तुलना में काफी आजाद हैं। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में शिशु और मातृ मृत्यु दर अधिकांश राज्यों की तुलना में बेहतर बताया।

उन्होंने पीएम मोदी के ‘अच्छे दिन आएँगे’ वाले स्लोगन का मजाक उड़ाते हुए कहा कि सरकार कहती है कि अनुच्छेद 370 एक बहुत बड़ी बाधा थी और इसके हटने से विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। इसके अलावा, कश्मीर में कम्युनिकेशन लॉकडाउन को हटाने के बारे में बात करते हुए इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि वो इसका बेसब्री से इंतजार कर रही हैं और ऐसा लग रहा है कि सभी कश्मीरी एक सदी से इसका इंतजार कर रहे हैं।

इल्तिजा यहीं नहीं रूकी। उन्होंने अनुच्छेद 370 के पर कतरने के सरकार के फैसले को बहाना करार देते हुए कहा कि चूँकि अर्थव्यवस्था मंदी की स्थिति में थी, इसलिए सरकार ने लोगों को इस मुद्दे से भटकाने के लिए ये कदम उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को यह दिखाना था कि उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल में 100 दिन के अंदर अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया। साथ ही इल्तिजा ने यह भी कहा, “अभी देश की जीडीपी 5 फीसदी है और बांग्लादेश जैसा देश भी हमसे आगे निकल चुका है।”

बता दें कि जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के पर कतर दिए जाने के बाद सरकार ने ऐहतियात बरतते हुए महबूबा मुफ्ती और नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख उमर अब्दुल्ला, उनके पिता फारुक अब्दुल्ला समेत कई अलगाववादी नेताओं को हिरासत में लिया है। फिलहाल, जम्मू कश्मीर में आम जनजीवन सामान्य हो रहा है और संचार व्यवस्था भी धीरे-धीरे चालू की जा रही है।

बाबरी मस्जिद में हिंदू मजदूरों ने लिख दिए होंगे संस्कृत के श्लोक: सुप्रीम कोर्ट से मुस्लिम पक्षकार

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को अयोध्या मामले की 28वें दिन की सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली संवैधानिक बेंच को मुस्लिम पक्षकार के वकील ने बताया कि माहौल बनाकर बाबरी मस्जिद गिराई गई थी। उन्होंने कहा कि यह मस्जिद बाबर ने बनाई थी। जब जस्टिस एसए बोबडे ने उनसे मस्जिद में संस्कृत में लिखे शिलालेख और अभिलेख मिलने की बात पूछी, तो धवन ने कहा कि हो सकता है कि हिंदू मजदूरों ने यह लिख दिया हो।

धवन ने कहा, “मस्जिद बनाने में हिंदू और मुस्लिम दोनों मजदूर शामिल थे। ऐसे में ऐसा हो सकता है काम खत्म होने के बाद वे संस्मरण के तौर पर संस्कृत में लिखकर जाते हों। वहॉं पारसी और अरबी में अल्लाह भी लिखा हुआ था। बाबरनामा के तमाम संस्करण में कहा गया है कि कि मस्जिद बाबर ने ही बनवाया था और ढॉंचा में कई जगहों पर अल्लाह लिखा था।”

बेंच के सामने बाबरनामा को उद्धृत करते हुए धवन ने कहा, “बाबरनामा के उद्धरण और अनुवाद से पता चलता है कि इस ढॉंचे का निर्माण बाबर ने कराया था।” उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष केवल चुनिंदा राजपत्रों पर विश्वास नहीं कर सकता है और उन अभिलेखों को नहीं छोड़ सकता है जिनमें यह बताया गया है कि बाबर ने यहॉं मस्जिद का निर्माण कराया था। उन्होंने कुछ ऐसी चीजें भी पेश की जिन पर बाबरी मस्जिद के संबंध में अरबी और फारसी भाषा में अभिलेख अंकित हैं।

धवन ने कहा कि 1985 में राम जन्मभूमि न्यास बनाया गया और 1989 में केस दाखिल किया गया। इसके बाद सोची समझी नीति के तहत कार सेवकों का आंदोलन चलाया गया। विश्व हिंदू परिषद ने माहौल बनाया जिसके कारण 1992 में बाबरी मस्जिद गिरा दी गई। इसको गिराने का मकसद था वास्तविकताओं को खत्म कर मंदिर बनाना।

गौरतलब है कि छह अगस्त से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की रोजाना सुनवाई चल रही है। यह पहला ऐसा मामला है जिसकी सप्ताह में पॉंच दिन सुनवाई हो रही। अमूमन जिन मामलों की रोजाना सुनवाई होती है उन्हें सप्ताह में केवल तीन दिन सुना जाता है। अब संवैधानिक बेंच ने कहा है कि सोमवार से मामले की सुनवाई एक घंटे ज्यादा यानी शाम पॉंच बजे तक होगी। बेंच में गोगोई के अलावा जस्टिस बोबडे, अशोक भूषण, डीवाई चंद्रचूड़ और एस अब्दुल नजीर शामिल हैं।

इंटरनेट कनेक्टिविटी से ज्यादा महत्वपूर्ण इंसानों की जिंदगी बचाना: J&K पर जितेंद्र सिंह

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने दावा किया है कि अनुच्छेद-370 के निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इंटरनेट कनेक्टिविटी की तुलना में मानव जीवन अधिक महत्वपूर्ण है।

शुक्रवार (20 सितंबर 2019) को इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2019 में जितेंद्र सिंह ने कई मुद्दों पर सवालों के जवाब दिए। उन्होंने दावा किया कि 6 महीने के भीतर अनुच्छेद-370 पर केंद्र सरकार के फैसले के समर्थन में जम्मू-कश्मीर के लोग आगे आएँगे। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) को वापस लेना अगला लक्ष्य है, जिसे सैन्य आक्रामकता के ज़रिए हासिल नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा,

  • जम्मू और कश्मीर में 200 में से केवल 12 पुलिस थानों ऐसे हैं जहाँ प्रतिबंध लगा हुआ है, बाक़ी कहीं भी कर्फ्यू नहीं है। हालाँकि, धारा-144 लगाई है, जो एक स्थान पर चार से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगाती है। लोग अपनी इच्छा से अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं।
  • कश्मीरियत एक समग्र संस्कृति है। जो लोग स्कूलों को जलाने का समर्थन कर रहे हैं, उन्हें स्वतंत्रता के बारे में बात करने का अधिकार नहीं है। जिनके बच्चे विदेशों में सुरक्षित आश्रय में रह रहे हैं, वे स्वतंत्रता और लोकतंत्र की बात कर रहे हैं।
  • संसद 130 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करती है। संसद के दोनों सदनों ने प्रस्ताव पारित किया। इसलिए कोई यह नहीं कह सकता कि अनुच्छेद-370 को निरस्त करते समय लोगों का ध्यान नहीं रखा गया।
  • कुछ राजनीतिक लोग नहीं चाहते थे कि जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव हों। वंशवादी पार्टियों ने चुनावों के बहिष्कार का आह्वान किया।
  • पीओके में भारत का दावा भाजपा द्वारा घोषित नहीं किया गया है। संसद ने 1994 में इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया था जब पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस सत्ता में थी। कॉन्ग्रेस में धर्मनिरपेक्षता के नाम पर संकल्प को कमज़ोर करने की प्रवृत्ति है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच कश्मीर में प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली दिवाली मनाई। उन्होंने 18,000 करोड़ रुपए की सहायता की घोषणा की थी। यह राशि अब 1 लाख करोड़ रुपए हो गई है।

जितेंद्र सिंह से सवाल किया गया कि आप किससे बोल रहे हैं? जब लोग संवाद नहीं कर सकते हैं तो वे कैसे सरकार के फ़ैसले से खुश हो सकते हैं? कोई इंटरनेट चल रहा है? इस पर उन्होंने कहा कि इंटरनेट से ज्यादा अहम मानव जीवन है। उन्होंने कहा, “मुझे पूरा यकीन है कि मानव जीवन की हिफाजत इंटरनेट बंद करने से अधिक महत्वपूर्ण है। आज के युग में कोई संदेह नहीं है कि इंटरनेट एक आवश्यकता बन गया है, लेकिन बहुत हद तक यह एक लक्जरी भी है। लेकिन मानव जीवन को बचाना परम आवश्यक न कि विलासिता को बहाल करना।”

BBC दिल्ली के पूर्व प्रमुख ने कॉन्ग्रेस की ‘धर्मनिरपेक्षता’ पर उठाए सवाल, हिंदुओं की उपेक्षा पर लताड़ा

पद्म भूषण से सम्मानित और दो दशकों तक बीबीसी दिल्ली के ब्यूरो प्रमुख रहे पत्रकार और लेखक मार्क टली ने कॉन्ग्रेस की ‘धर्मनिरपेक्षता’ पर सवाल उठाए हैं। हिन्दुओं की उपेक्षा के लिए उसकी आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि कॉन्ग्रेस की इसी मूर्खता से भाजपा को मुखर होने का मौका मिला।

गोवा में एक कार्यक्रम में मार्क टली ने कहा कि भारतीय संदर्भों में धर्मनिरपेक्षता उपयुक्त शब्द नहीं है। धर्मनिरपेक्षता में सभी धर्मों के प्रति शत्रुता का भाव है या फिर उदासीनता का। भारतीय न तो धर्म के प्रति शत्रुता रखते हैं और न ही उदासीन हैं।

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने धर्मनिरपेक्ष शब्द का गलत इस्तेमाल किया। उसकी इस गलती ने भाजपा को यह कहने का मौका दिया कि वह हिंदुओं की पार्टी है और यही हिंदुत्व है। कॉन्ग्रेस को अपनी राजनीति में हिन्दुओं के लिए भी जगह रखनी चाहिए, जैसा कि उसने कथित अल्पसंख्यक या फिर अन्य समुदायों के लिए किया है।

टली ने कहा, “मुझे लगता है कि आज कॉन्ग्रेस को समझना चाहिए कि भारत एक ऐसा देश है, जहाँ 80% आबादी खुद को हिंदू कहती है। हम मानते हैं कि हिंदू धर्म, जो भारत के लिए स्वाभाविक है, एक बहुलवादी धर्म है। यह धर्म सहिष्णु होने और अन्य धर्म का स्वागत करने पर गर्व करता है, जो कि भारत के इतिहास पर गर्व करने वाली बात है।”

इस बयान से लगता है कि ब्रिटिश होने के बावजूद टली भारत की वास्तविकताओं को उस राजनीतिक दल से कहीं अधिक समझते हैं जिसने दशकों तक देश पर शासन किया है। जिस हकीकत को टली जैसे विदेशी समझ लेते हैं वह कॉन्ग्रेस क्यों नहीं समझ पाती है, ये पूरी तरह से समझ से परे है।

जैसा कि सभी जानते हैं कि कॉन्ग्रेस पार्टी के धर्मनिरपेक्षता के ब्रांड में हिंदू समुदाय के लिए कोई जगह नहीं थी। जिस देश में हिन्दू बहुमत में है, उस देश में कॉन्ग्रेस की इस तरह की रणनीति पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से आत्मघाती था।

हालाँकि, राहुल गाँधी ने कई मंदिरों की यात्रा करके पार्टी की छवि को ठीक करने की कोशिश की, लेकिन उनके पास बेहतर चीजों के लिए सुधार करने की विश्वसनीयता नहीं थी। इससे भी अधिक दुख की बात यह है कि पार्टी के नेता हिंदू समुदाय के लिए भद्दी टिप्पणियाँ करते हैं।

कॉन्ग्रेस पार्टी ने दरबारियों की बजाय टली जैसे लोगों की बात सुनी होती तो शायद उसे वैसी पराजय का सामना नहीं करना पड़ता, जैसा बीते दो आम चुनावों में देखने को मिला है। ऐसा लगता है कि उसने अपनी भयंकर हार से कोई सबक नहीं लिया है। दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ पार्टी नेता अब भी हिंदुओं को नीचा दिखाने की कोशिश करते हुए बयानबाजी कर रहे हैं। पार्टी की वर्तमान स्थिति को देखकर लगता है कि उसके पतन का समय नजदीक आ गया है।

सपा में लौट सकते हैं शिवपाल यादव : भतीजे अखिलेश ने कहा- दरवाजा है खुला

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव के बीच दूरियाँ मिटती दिख रही है। अखिलेश ने पार्टी में चाचा की वापसी के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि शिवपाल यादव अगर पार्टी में आना चाहते हैं तो आँख बंद करके उन्हें शामिल कर लिया जाएगा।

इस संबंध में पूछे गए एक सवाल के जवाब में अखिलेश ने कहा, “मेरे परिवार में लोकतंत्र है। जो आना चाहे उसके लिए पार्टी के दरवाज़े खुले हैं। हर किसी का स्वागत है।

बता दें कि शुक्रवार को मैनपुरी में शिवपाल यादव से जब सपा में शामिल होने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा था कि परिवार में उनकी तरफ से पूरी गुंजाइश है, लेकिन कुछ लोग परिवार को एक नहीं होने दे रहे। उनका इशारा आज़म ख़ान को लेकर था।

लोकसभा चुनाव में मिली हार के और बसपा अध्यक्ष के गठबंधन तोड़ने के बाद से अखिलेश यादव के सामने अपनी पार्टी को बचाए रखने की बड़ी चुनौती है। हाल ही में कई राज्यसभा सदस्य सपा छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए हैं।

ग़ौरतलब है कि 2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान मुलायम सिंह के कुनबे में वर्चस्व की जंग छिड़ गई थी। अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी पर अपना एकछत्र राज क़ायम कर लिया था। इसके चलते चाचा-भतीजे के बीच गहरी खाई बन गई थी। हालाँकि, वर्चस्व की लड़ाई को ख़त्म करने की कोशिश पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने की थी, लेकिन वो क़ामयाब नहीं हो पाए थे।

बाद में शिवपाल यादव ने अपने समर्थकों के साथ समाजवादी मोर्चे का गठन किया और फिर इस मोर्चे को प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) का नाम दिया। सपा नेता रामगोविंद चौधरी ने शिवपाल यादव की विधानसभा की सदस्यता रद्द करने की याचिका डाल दी थी।

TMC सांसद के ठिकानों पर ED ने की छापेमारी: 10,000 अमेरिकी डॉलर, ₹32 लाख बरामद

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तृणमूल कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद केडी सिंह और उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की। नई दिल्ली और चंडीगढ़ में 7 जगहों पर छापेमारी हुई। साथ ही अल्केमिस्ट ग्रुप से जुड़ी 14 पंजीकृत कंपनियों के कार्यालय पर भी छापे डाले गए। इसका संचालन केडी सिंह ही करते थे।

छापेमारी के दौरान ईडी ने लेनदेन से संबंधित कई कागजात, डिजिटल सबूत के साथ ही संपत्ति से संबंधित दस्तावेज जब्त किए। इसके अलावा केडी सिंह के दिल्ली स्थित आवास से 10,000 अमेरिकी डॉलर के साथ ही 32 लाख रुपए की नकदी बरामद हुई।

एजेंसी ने कोलकाता पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर नई दिल्ली के तुगलक लेन स्थित केडी सिंह के आधिकारिक निवास, चंडीगढ़ में उनके निवास और दो अलग-अलग कंपनियों के निदेशकों के आवासों की तलाशी ली।

कोलकाता पुलिस द्वारा राज्यसभा सांसद केडी सिंह, उनके बेटे करनदीप सिंह, अल्केमिस्ट टाउनशिप इंडिया लिमिटेड, अल्केमिस्ट होल्डिंग्स लिमिटेड और अन्य कंपनियों के खिलाफ धोखाधड़ी और साजिश के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इन पर हजारों ग्राहकों को धोखा देने का आरोप है। कोलकाता पुलिस की एफआईआर के आधार पर ईडी ने 2018 में  PMLA के तहत जाँच शुरू की।

ईडी के अनुसार, टीएमसी सांसद ने अपनी कंपनियों के माध्यम से निवेश की आड़ में ग्राहकों को उच्च रिटर्न का लालच देकर भारी मात्रा में पैसे जुटाए। एजेंसी ने बताया कि अब तक की जाँच में पता चला है कि जनता से जुटाई गई इन धनराशि का उपयोग अभीष्ट उद्देश्य के लिए नहीं किया गया था और इन्हें अलग-अलग समूह की कंपनियों के पास भेज दिया गया और जनता से जुटाए पैसे को फर्जी तरीके से छिपाने के लिए सर्कुलर के जरिए स्थानांतरित किया गया।

चिटफंड और आवास घोटाले से जुड़े मामले में सबूतों जुटाने को लेकर छापेमारी की गई। यह घोटाला करीब 1,900 करोड़ रुपए का है। एजेंसी ने इस साल के शुरुआत में केडी सिंह से संबंधित अल्केमिस्ट इंफ्रा रियल्टी लिमिटेड कंपनी की 239 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त किया था।

पाकिस्तानी होने के कारण गॅंवाया मकान, हिन्दुस्तानी बन पाया घर: अदनान सामी

पाकिस्तानी से हिंदुस्तानी बने मशहूर गायक अदनान सामी से 2010 में ज़ब्त हुए 8 फ़्लैट और 5 पार्किंग स्पेस उन्हें लौटा दिए गए हैं। ED द्वारा ज़ब्त की गई इन सम्पत्तियों की खरीद में ED को विदेशी मुद्रा विनिमय प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघन का शक था, जिसे नई दिल्ली की एक अपीली ट्रिब्यूनल ने ख़ारिज कर दिया है।

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार ED ने 2003 में खरीदी गई इन सम्पत्तियों को ज़ब्त इसलिए कर लिया था, क्योंकि उसे शक था कि इसके लिए विदेशी मुद्रा का उपयोग बिना RBI की पूर्वानुमति लिए किया गया है। किसी विदेशी द्वारा अचल सम्पत्ति खरीदे जाने के मामले में यह इजाजत ज़रूरी है। जनवरी 2016 में हिंदुस्तानी बन जाने वाले अदनान सामी उस समय पाकिस्तान के ही नागरिक थे। इसके अलावा अदनान पर प्रवर्तन निदेशालय ने ₹20 लाख का जुर्माना भी लगाया था। इसमें से ₹10 लाख सामी ने सरकार को दे दिए हैं।

ED द्वारा सम्पत्ति अटैच किए जाने के महज़ कुछ दिनों पहले RBI से संपर्क कर सामी ने बैकडेट में उन्हें खरीद की अनुमति देने की गुज़ारिश की थी। अपीली ट्रिब्यूनल के चेयरमैन जस्टिस मनमोहन सिंह ने उनकी सम्पत्ति तो लौटा दी, लेकिन RBI से ज़रूरी अनुमति न लेने के लिए उन पर लगे जुर्माने को ₹50 लाख कर दिया।

इसमें से बकाया ₹40 लाख उन्हें तीन महीने के भीतर जमा करने हैं। ट्रिब्यूनल ने इसके अलावा बैंक अधिकारियों और रियल एस्टेट कम्पनी के प्रतिनिधियों द्वारा 2010 में दिए गए बयान के आधार पर ED की जाँच की आलोचना की है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि 2010 में उन्हें सामी के पाकिस्तानी होने के बारे में पता नहीं था। बैंक अधिकारियों ने क़र्ज़ पाने में सामी की सहायता की थी।

हिंदुस्तान टाइम्स ने अदनान सामी के भावुक हो जाने का दावा करते हुए कहा कि यह जीत उनकी पत्नी रोया फरयाबी के जन्मदिन के दिन मिली है। इससे यह और भी ‘स्पेशल’ हो जाती है। “यह नौ सालों का संघर्ष था। हिंदुस्तानी होने के नाते ख़ुशी है क़ि न्याय की जीत हुई है। खून-पसीने-आँसुओं से जो भी कमाया था, वापिस मिल गया है।”

इसके अलावा उन्होंने ट्विटर पर भी चुटकी लेते हुए कहा कि पाकिस्तानी नागरिक के तौर पर जो गलती हुई, उसका हर्जाना भरने का उन्हें अफ़सोस नहीं है। महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तानी के तौर पर जो मकान मैंने खोया था, वह एक हिंदुस्तानी होने पर मुझे ‘घर’ के रूप में मिल गया। यानी एक पाकिस्तानी का मकान गया, और एक हिंदुस्तानी को उसका ‘घर’ मिला”।

केरल: कब्र को लेकर चर्च के दो गुटों की बहस झड़प में बदली, पुलिसकर्मी भी जख्मी

केरल के कोच्चि में चर्च के दो गुटों में झड़प हो गई। इस दौरान 11 लोग घायल हो गए। इनमें 3 पुलिसकर्मी हैं। घटना कोथमंगलम के मरथोमा चेरियापल्ली चर्च की है, जहाँ गुरुवार को 2 गुटों के बीच छोटी सी बहस मारपीट में बदल गई।

पुलिस ने बताया कि एक पादरी की कब्र को एक गुट दूसरी जगह ले जाना चाहता था। चर्च के कुछ कट्टरपंथी तत्वों ने इसका विरोध किया। विरोध करने वालों का नेतृत्व थॉमस पॉल रामबन कर रहे थे। जो लोग कब्र दूसरी जगह ले जाना चाहते थे वे जैकोबाइट्स समूह के थे।

थॉमस पॉल रामबन जैसे ही अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुँचे बहस झड़प में बदल गई। सूचना मिलते ही पुलिस भी भारी संख्या में मौके पर पहुँच गई।

तस्वीर साभार: न्यूज इंडियन एक्सप्रेस

धार्मिक मामला होने की वजह से पुलिस ने तुरंत घटनास्थल पर फोर्स तैनात कर दिया। कोच्चि पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है और लोगों से शांति बरतने की अपील की है।

यहाँ बता दें कि रुढ़िवादी गुट ने जैकोबाइट्स पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनके पादरी और पुलिस पर हमला किया, जो वहाँ पर मौक़े पर मौजूद थे। इसके अलावा ये भी <a rel="noreferrer noopener" aria-label="बताया गया (opens in a new tab)" href="http://

Kochi. 7 persons, incl. Sub-Inspector injured in clashes between Jacobite & Orthodox sects. “I also suffered serious injuries & is presently at Govt Hospital, Kothamangalam,” said the SI. "The police hadnt registered a case till this report went to print"https://t.co/QRzPNuiS0g

— UniversalReligiousFreeDoom (@by2kaafi) September 20, 2019
https://platform.twitter.com/widgets.js” target=”_blank”>बताया गया कि आपसी झड़प के लगभग आधे घंटे बाद जैकोबाइट्स ने उस कार पर हमला किया जिसमें रामबन और अन्य पादरी आए थे। कार पर हुए इस हमले में गाड़ी के शीशे तोड़ दिए गए। जिससे रामबन और अन्य पादरी घायल हो गए। जब पुलिस ने इन्हें बचाना चाहा तो उनपर भी हमला हुआ।

एसआई दिलीश ने भी बताया है कि उन्हें भी इस दौरान गहरी चोटें आई। घायलों को कोथमंगलम के सरकारी अस्पताल में दाखिल करवाया गया।