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अपने ही पिता की चिता को जलते देख रहे इन दो बच्चों का दर्द बताने के लिए हमारे पास शब्द नहीं हैं, खुद पढ़िए कैसे एक मुस्लिम परिवार ने इन्हें कर दिया अनाथ

दिल्ली के नारायणा इलाके में शनिवार (30 नवंबर 2024) को 36 वर्षीय मनोज की चाकू घोंप कर हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में अब तक कुल 7 आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 2 मुस्लिम महिलाएँ, 3 नाबालिग, मकसूद और मोहम्मद अख्तर नाम के दो आरोपित शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, छह महीने पहले आरोपितों के परिवार ने मनोज के बड़े भाई प्रदीप को भी हत्या कर दी थी। दोनों हत्याओं की वजह प्रदीप द्वारा एक हिंदू लड़की के परिजनों को यह बताने की थी कि उनकी बेटी का अफेयर एक मुस्लिम लड़के से चल रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार की रात मनोज अकेले कहीं जा रहे थे। इस दौरान मकसूद, मोहम्मद अख्तर, अंगूरी और जूही खातून ने अपने 3 नाबालिग परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर मनोज को घेर लिया और उसकी पिटाई शुरू कर दी। जब मनोज ने बचने की कोशिश की, तो आरोपितों ने उन पर चाकुओं के कई वार किए। गंभीर रूप से घायल मनोज को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया।

मनोज की हत्या के बाद उनके पिता ने अपनी बेबसी बयाँ की। उन्होंने बताया, “प्रदीप के तीन बच्चे हैं, छोटे वाले बेटे के 2 बच्चे हैं। मेरे छोटे बेटे का मर्डर इसलिए किया गया था, क्योंकि मुस्लिम लड़के का हिंदू लड़की से अफेयर था। उसने लड़की के पिता को समझाया था, लेकिन इसके बाद वो लोग रंजिश रखने लगे।” इस बीच, मनोज के दोनों बच्चों की एक तस्वीर सामने आई है, जहाँ दोनों मासूम अपने पिता की चिता को मुरझाई आँखों से जलता देख रहे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि वो अब अपने पिता को कभी नहीं देख पाएँगे।

यह मामला साल 2024 के मई महीने से जुड़ा हुआ है, जब मनोज के भाई प्रदीप की भी चाकुओं से हत्या कर दी गई थी। पुलिस के मुताबिक, प्रदीप के हत्यारों में से एक नाबालिग लड़के का इलाके की एक हिंदू लड़की से प्रेम संबंध था। यह बात जब प्रदीप को पता चली, तो उसने लड़की के परिवार को यह बात बता दी, जिसके बाद लड़की के परिजनों ने उस पर कड़ी पाबंदियाँ लगा दीं। इसके बाद लड़के ने गुस्से में आकर, अपने एक अन्य नाबालिग साथी के साथ मिलकर प्रदीप की हत्या कर दी।

इस हत्या के बाद पुलिस ने दोनों नाबालिगों को गिरफ्तार कर बाल सुधार गृह भेज दिया। इनमें से एक की जमानत जुलाई में और दूसरे की सितंबर में हो गई थी। इसके बाद आरोपितों का परिवार मनोज से भी रंजिश रखने लगा और उसे मारने की योजना बना रहा था।

शनिवार को पुलिस ने मकसूद, मोहम्मद अख्तर, अँगूरी, जूही खातून और 3 नाबालिगों को गिरफ्तार कर लिया। मामले की जाँच जारी है और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस घटना के बाद नाराज हिंदू समुदाय ने मनोज की शव यात्रा के दौरान विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया, और मृतक के परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उनके घर की महिलाओं तक को पीटा।

प्रेमी अब्दुल्ला के साथ मिलकर विजय को उसकी बीवी ने ही मार डाला, सुलभ शौचालय के पास मिली थी लाश: 9 साल की बेटी ने खोला हत्या का राज

हरियाणा के फरीदाबाद में 2 दिसंबर 2024 को विजय कुमार नाम के एक युवक की लाश सुलभ शौचालय के पास मिली थी। पुलिस जाँच से पता चला है कि उसकी हत्या उसकी ही बीवी रेखा ने अपने प्रेमी अब्दुल्ला के साथ मिलकर की थी। पुलिस दोनों की तलाश कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना फरीदाबाद के एनआईटी नंबर 2 पुलिस चौकी क्षेत्र की है। यहाँ के शिवाजी पार्क इलाके में विजय कुमार अपनी पत्नी रेखा और 3 बेटियों के साथ रहता था। उसके घर में अब्दुल्ला का आना-जाना था। इसी दौरान अब्दुल्ला और रेखा के बीच नजदीकी बढ़ गई। दोनों को विजय ने भी आपत्तिजनक हालत में देखा था।

विजय ने रेखा को कई बार समझाया। उसे अब्दुल्ला से दूर रहने को कहता था। रेखा हर बार अपनी गलती मान लेती थी। लेकिन विजय के पीठ पीछे अब्दुल्ला से मिलना बंद नहीं किया। कुछ ही दिन पहले अचानक घर पहुँचे विजय ने दोनों को आपत्तिजनक हालत में पकड़ लिया था। इसको ले कर विजय और रेखा के बीच झगड़ा भी हुआ था।

इसके बाद 2 नवंबर को अचानक से विजय की लाश एक सुलभ शौचालय के बाहर मिली। घर में विजय की तीनों बेटियाँ थी, लेकिन रेखा फरार थी। पुलिस ने विजय की 9 साल की बेटी सोनम से बात की तो मामले का खुलासा हो गया। सोनम ने बताया कि 1 नवंबर को उसकी मम्मी (रेखा) और अब्दुल्ला ने मिल कर विजय को खूब पीटा था। इसी दौरान रेखा और अब्दुल्ला ने विजय के मुँह पर तकिया रखकर उसका दम घोंट दिया।

सोनम को यह सब देखते हुए रेखा ने पकड़ लिया था। इसके बाद उसे दूसरे कमरे में भेज दिया था। हत्या के बाद रेखा और अब्दुल्ला ने विजय के शव को पास के ही एक सुलभ शौचालय के पास फेंक दिया और फरार हो गए। पुलिस ने मृतक के भाई बलवीर की तहरीर पर रेखा और अब्दुल्ला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है।

मृतक के भाई बलवीर ने बताया कि विजय ने अपनी 25 लाख रुपयों की बीमा करवा रखी थी। बकौल बलवीर उसकी भाभी लालची थी और बीमा के इसी पैसे को हड़पने के लिए विजय की हत्या कर दी। विजय की तीनों बेटियों की देखभाल में खुद को असमर्थ बताते हुए बलवीर ने उन्हें बाल कल्याण समिति को सौंपने की माँग की है। विजय के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रेखा और अब्दुल्ला की तलाश में पुलिस टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

मोहम्मद युनुस के इशारे पर बांग्लादेश में हो रहा है हिंदुओं का कत्लेआम: शेख हसीना, खूनखराबे की उस साजिश का भी किया खुलासा जिसके कारण छोड़ना पड़ा देश

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मौजूदा अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद युनुस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के पीछे मोहम्मद युनुस का हाथ है। शेख हसीना ने युनुस को इन हमलों का ‘मास्टरमाइंड’ बताते हुए कहा कि उनकी साजिश के तहत ही यह हिंसा हो रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शेख हसीना जो 5 अगस्त के तख्तापलट के बाद भारत में हैं, ने कहा कि सत्ता में बने रहकर वह नरसंहार का हिस्सा नहीं बनना चाहती थीं। उन्होंने कहा, “मुझे सत्ता का लालच नहीं। मैं खूनखराबा रोकना चाहती थी, इसलिए देश छोड़ने का फैसला लिया। हथियारबंद लोग मेरी हत्या की योजना बना रहे थे। अगर मैं रुकती, तो नरसंहार होता।”

न्यूयॉर्क में अवामी लीग के कार्यकर्ताओं के कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित करते हुए शेख हसीना ने यह भी कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ते जा रहे हैं। हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों को निशाना बनाया जा रहा है। 11 चर्च, कई मंदिर और यहाँ तक कि इस्कॉन पर भी हमले हुए हैं। उनके अनुसार, मोहम्मद युनुस एक तय योजना के तहत देश को अस्थिर कर रहे हैं।

इस्कॉन चटगांव के प्रमुख चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी ने हिंसा को और भड़काया है। इस गिरफ्तारी के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हिंदुओं पर जमात और बीएनपी के कार्यकर्ताओं ने हमले किए। इन हमलों में 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए। कई हिंदू संगठनों ने इन घटनाओं के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि इन हमलों का मकसद अल्पसंख्यक समुदाय को डराना और उन्हें देश से बाहर करना है। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएनपी) के नेता तारिक रहमान ने खुद कहा था कि अगर हत्याएं जारी रहीं तो सरकार नहीं टिकेगी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अंतरिम युनुस सरकार के पाकिस्तान की ओर झुकाव के चलते बांग्लादेश के ऐतिहासिक नेताओं और स्थलों को अपमानित किया जा रहा है। बंगबंधु शेख मजीबुर रहमान की प्रतिमा तोड़ी गई, और उनकी तस्वीरें सरकारी दफ्तरों से हटा दी गईं। यहाँ तक कि उनके योगदान से जुड़े राष्ट्रीय अवकाश भी रद्द कर दिए गए हैं।

हिन्दू और जैन मंदिर को बनाते थे निशाना, मूर्तियाँ-कीमती सामान करते थे चोरी:अमीन उर पठान और यासीन शेख को पुलिस ने पकड़ा, बंगाल से अहमदाबाद आकर बनाया था ठिकाना

गुजरात के अहमदाबाद में पुलिस ने हिन्दू और जैन मंदिर से मूर्तियाँ चोरी करने वाला एक गैंग पकड़ा है। पुलिस ने इस गैंग के 2 चोर को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक 32 साल का यासीन शेख जबकि दूसरा 30 वर्ष का अमीन उर पठान है। इसी गैंग के तीसरे चोर को भी बंगाल में पकड़ा गया है। इसका नाम अहसामुद्दीन है।

इन चोरों ने जैन और हिन्दू मंदिरों को निशाना बना कर कई जगह मूर्तियाँ चोरी की थीं। पुलिस ने बताया है कि इनके खिलाफ पहले से ही डेढ़ दर्जन मामले दर्ज हैं। यह पूरा खुलासा गुजरात के ही नवसारी के एक जैन मंदिर में हुई चोरी के बाद खुला। यहाँ बिलिमोरा इलाके में स्थित एक मंदिर में पुलिस को चोरी की शिकायत मिली थी।

चोरों ने यहाँ से मूर्तियों समेत कई अन्य कीमती सामान चुरा लिए थे। इसके अलावा गाँधीनगर के अदालज थानाक्षेत्र में भी एक मंदिर को निशाना बना कर मूर्तियों के साथ अन्य महँगी वस्तुएँ चोरी कर ली गईं थीं। इन चोरियों का खुलासा करने के लिए अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की टीम को लगाया गया था।

पुलिस ने मामले की जाँच के बाद अमीन उर पठान और यासीन शेख नाम को चिन्हित किया। ये दोनों मूल रूप से पश्चिम बंगाल के निवासी निकले। अभी यह अहमदाबाद की चंदोला झील के पास बंगाली कॉलोनी में रह रहे थे। इन दोनों से जब पूछताछ की गई तो इन्होनें अपने गिरोह के तीसरे साथी के तौर पर अहसामुद्दीन शेख का नाम बताया।

पूछताछ में पता चला कि अहसामुद्दीन शेख गुजरात से ट्रेन पकड़ कर कोलकाता भाग रहा है। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने पश्चिम बंगाल रेलवे पुलिस से सम्पर्क किया और अहसामुद्दीन को ट्रेन में ही गिरफ्तार कर लिया गया। अहसामुद्दीन भी मूलतः पश्चिम बंगाल का ही निवासी है।

गिरफ्तार किए गए अमीन उर पठान और यासीन शेख के पास से लगभग ₹7 लाख के सामान बरामद किए गए हैं। ये सामान मंदिरों से चोरी कर के जुटाए गए थे। दोनों चोरों से हुई पुलिस की पूछताछ में 5 ऐसे पुराने मामलों से भी पर्दा उठ गया जिसका अब तक खुलासा नहीं हो पाया था।

इसमें गुजरात के अलग-अलग जगहों में घरों व मंदिरों में की गई चोरी शामिल है। पुलिस को यह भी पता चला कि यासीन और अमीन उर के खिलाफ साल 2013 से 2018 के बीच लगभग 16 केस दर्ज किए गए हैं। इसमें से 10 मुकदमे अमीन उर पठान जबकि 6 केस यासीन शेख पर दर्ज हैं।

क्राइम ब्रांच की पूछताछ में यह भी सामने आया है कि अमीन उर पठान का गिरोह पहले घरों व मंदिरों की रेकी कर के अपने टारगेट सेट करता था। बाद में मौका देख कर यहाँ हाथ साफ कर दिया जाता था। यह भी सामने आया है कि इन्होने कई और जगहों को निशाने पर लिया था लेकिन उससे पहले ही इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

अजमेर दरगाह से 450 मीटर दूर एक और मस्जिद, इसका भी हो सर्वे… मंदिर और संस्कृत यूनिवर्सिटी तोड़ कर बनाया था: डिप्टी मेयर ने की माँग

राजस्थान के अजमेर में स्थित अढाई दिन का झोपड़ा मस्जिद के सर्वे की माँग उठी है। यह माँग अजमेर दरगाह के सर्वे की याचिका स्वीकार किए जाने के बाद उठाई गई है। यह दोनों पास में ही स्थित हैं। अजमेर के डिप्टी मेयर नीरज जैन ने कहा है कि पहले यह संस्कृत विश्वविद्यालय और मंदिर था। नीरज जैन ने ASI से इसका सर्वे और संरक्षण करने की माँग की है।

नीरज जैन ने कहा, “यह पाठशाला करीब 1000 साल पुरानी है और यहाँ स्वास्तिक के निशान, घंटियाँ और संस्कृत में लिखे शिलालेख पाए गए हैं। इसके बाद भी इस जगह पर अवैध कब्जा किया गया है। हम पहले माँग कर चुके हैं कि इस संस्कृत पाठशाला से अवैध कब्जा हटाया जाए और जो अनैतिक गतिविधियाँ हो रही हैं उन्हें रोका जाए। हम चाहते हैं कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इसे अपने कब्जे में लेकर संरक्षित और संवर्धित करें, जैसे नालंदा विश्वविद्यालय का पुनर्निर्माण किया गया है।”

नीरज जैन ने कहा, “हाल ही में जैन संतों ने भी इस जगह का दौरा किया था और महसूस किया कि यहाँ एक जैन मंदिर भी था, क्योंकि यहाँ जैन धर्म से सम्बन्धित मूर्तियाँ मिली हैं। उनका मानना ​​है कि यह स्थान ना केवल धार्मिक आस्था का केंद्र था, बल्कि यहाँ संस्कृत की शिक्षा भी दी जाती थी। इस जगह का जिक्र कई ऐतिहासिक किताबों में भी मिलता है। मैं केंद्र और राज्य सरकारों से अनुरोध करता हूँ कि वह इस स्थान को संरक्षित करने और इसके गौरव को वापस लाने के लिए कदम उठाएँ।”

अढाई दिन का झोपड़ा का इतिहास

आज जिसे ‘अढाई दिन का झोंपड़ा‘ कहा जाता है, वो मूल रूप से विशालकाय संस्कृत महाविद्यालय (सरस्वती कंठभरन महाविद्यालय) हुआ करता था, जहाँ संस्कृत में ही विषय पढ़ाए जाते थे। यह ज्ञान और बुद्धि की हिंदू देवी माता सरस्वती को समर्पित मंदिर था। इस भवन को महाराजा विग्रहराज चतुर्थ ने अधिकृत किया था। वह शाकंभरी चाहमना या चौहान वंश के राजा थे। कई दस्तावेजों के अनुसार, मूल इमारत चौकोर आकार की थी। इसके हर कोने पर एक मीनार थी।

भवन के पश्चिम दिशा में माता सरस्वती का मंदिर था। 19वीं शताब्दी में, उस स्थान पर एक शिलालेख (स्टोन स्लैब) मिली थी जो 1153 ई. पूर्व की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि शिलालेख के आधार पर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि मूल भवन का निर्माण 1153 के आसपास हुआ था। हालाँकि, कुछ स्थानीय जैन किंवदंतियों का कहना है कि इमारत सेठ वीरमदेव कला द्वारा 660 ई में अधिकृत किया गया था। यह एक जैन तीर्थ के रूप में बनाया गया था और पंच कल्याणक माना जाता था।

मस्जिद में परिवर्तन

कहानी के अनुसार, 1192 ई. में, मुहम्मद गोरी ने महाराजा पृथ्वीराज चौहान को हराकर अजमेर पर अधिकार कर लिया। उसने अपने गुलाम सेनापति कुतुब-उद-दीन-ऐबक को शहर में मंदिरों को नष्ट करने का आदेश दिया। ऐसा कहा जाता है कि उसने ऐबक को 60 घंटे के भीतर मंदिर स्थल पर मस्जिद के एक नमाज सेक्शन का निर्माण करने का आदेश दिया था ताकि वह नमाज अदा कर सके। चूँकि, इसका निर्माण ढाई दिन में हुआ था, इसीलिए इसे ‘अढाई दिन का झोंपड़ा’ नाम दिया गया।

हालाँकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक किंवदंती है। मस्जिद के निर्माण को पूरा करने में कई साल लग गए। उनके अनुसार, इसका नाम ढाई दिन के मेले से पड़ा है, जो हर साल मस्जिद में लगता है। मस्जिद के केंद्रीय मीनार में एक शिलालेख है जिसमें इसके पूरा होने की तारीख जुमादा II 595 AH के रूप में उल्लेखित है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह तारीख अप्रैल 1199 ई है। बाद में, कुतुब-उद-दीन-ऐबक के उत्तराधिकारी इल्तुतमिश ने 1213 ई में मस्जिद में और निर्माण करवाया था।

मस्जिद पर सीता राम गोयल की रिपोर्ट

प्रसिद्ध इतिहासकार सीता राम गोयल ने अपनी पुस्तक ‘हिंदू टेंपल: व्हाट हैपन्ड टू देम’ (‘Hindu Temples: What Happened To Them’) में मस्जिद का उल्लेख किया है। उन्होंने लेखक सैयद अहमद खान की पुस्तक ‘असर-उस-सनदीद’ का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने उल्लेख किया था कि अजमेर की मस्जिद, यानी अढाई दिन का झोंपड़ा, हिंदू मंदिरों की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी।

मस्जिद पर अलेक्जेंडर कनिंघम की रिपोर्ट

अलेक्जेंडर कनिंघम को 1871 में ASI के महानिदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने ‘चार रिपोर्ट्स मेड ड्यूरिंग द इयर्स, 1862-63-64-65’ में मस्जिद का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया है। कनिंघम ने उल्लेख किया कि स्थल का निरीक्षण करने पर, उन्होंने पाया कि यह कई हिंदू मंदिरों के खंडहरों से बनाया गया था। उन्होंने कहा, “इसका नाम ‘अढाई दिन का झोंपड़ा’ इसके निर्माण की तेज गति को दिखाता है और यह केवल हिंदू मंदिरों के तैयार मुफ्त सामग्री के इस्तेमाल से ही संभव था।”

कनिंघम ने आगे रिपोर्ट में मस्जिद का दौरा करने वाले ब्रिटिश साम्राज्य के लेफ्टिनेंट-कर्नल जेम्स टॉड का हवाला दिया। टॉड ने कहा था कि पूरी इमारत मूल रूप से एक जैन मंदिर हो सकती है। हालाँकि, उन्होंने उन पर चार-हाथ वाले कई स्तंभ भी पाए जो स्वभाविक रूप से जैन के नहीं हो सकते थे। उन मूर्तियों के अलावा, देवी काली की एक आकृति थी।

उन्होंने आगे कहा, “कुल मिलाकर, 344 स्तंभ थे, लेकिन इनमें से दो ही मूल स्तंभ थे। हिंदू स्तंभों की वास्तविक संख्या 700 से कम नहीं हो सकती थी, जो 20 से 30 मंदिरों के खंडहर के बराबर है। रिपोर्टों के अनुसार, 1990 के दशक तक, मस्जिद के अंदर कई प्राचीन हिंदू मूर्तियाँ बिखरी हुई थीं। 90 के दशक में, एएसआई ने उन्हें संरक्षित करने के लिए एक सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया था। अब यह पूरा मामला भी कोर्ट में ले जाए जाने की माँग हो रही है।

‘तिलक-भगवा, तुलसी माला छोड़ो, छुप-छुप कर करो पूजा’: इस्लामी कट्टरपंथियों से बचने को ISKCON की सलाह, चिन्मय कृष्ण दास के वकील पर हमला, ICU में हालत गंभीर

बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों के हिन्दुओं पर अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने बीते दिनों में विशेष कर ISKCON को निशाना बनाया है। अब ISKCON कोलकाता ने अपने अनुयायियों की सुरक्षा को देखते हुए कहा है कि वह बांग्लादेश में ना ही तिलक लगाएँ और ना ही भगवा वस्त्र पहनें। ISKCON ने साधुओं को सलाह दी है कि वह अपने इष्ट की पूजा छुप-छुप कर करें। इस बीच इस्लामी कट्टरपंथियों ने गिरफ्तार किए गए हिन्दू संत चिन्मय दास के वकील रामेन रॉय पर जानलेवा हमला किया। उनका अब ICU में इलाज चल रहा है।

ISKCON कोलकाता के प्रवक्ता और उपाध्यक्ष राधारमण दास ने बांग्लादेश में मौजूद ISKCON अनुयायियों और साधुओं को अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता बनाने को कहा है। उन्होंने कहा, “मैं सभी साधुओं और सदस्यों को सलाह दे रहा हूँ कि संकट की इस घड़ी में उन्हें खुद को बचाने और संघर्ष से बचने के लिए काफी सावधान रहना चाहिए। मैंने उन्हें भगवा कपड़े पहनने और माथे पर तिलक लगाने से बचने का सुझाव दिया है।”

राधारमण दास ने आगे कहा, “अगर उन्हें भगवा वस्त्र और तुलसी माला पहनने की ज़रूरत महसूस होती है, तो उन्हें इसे बाकी कपड़ों के अंदर छिपाकर रखना चाहिए और यह गर्दन के आसपास दिखाई नहीं देना चाहिए। अगर संभव हो तो उन्हें अपने सिर को भी ढकना चाहिए। कुल मिलाकर, उन्हें वह हर संभव उपाय करना चाहिए जिससे वे साधुओं की तरह न दिखें।”

राधारमण दास ने कहा कि बीते एक सप्ताह में बांग्लादेश के भीतर ISKCON के अनगिनत साधुओं और अनुयायियों को धमकियाँ मिल चुकी हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसे समय में जो भी उपाय सुरक्षा के लिए जरूरी हो, वह करना चाहिए। उन्होंने बांग्लादेश में गिरफ्तार किए गए साधु चिन्मय कृष्ण दास पर भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि कुछ दिन पहले तक उनके सचिव से बात हो जाती थी, लेकिन बीते कुछ दिनों से यह भी संभव नहीं हो पा रहा है।

बांग्लादेश में कथित देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार चिन्मय कृष्ण दास का मुकदमा लड़ना भी एक हिन्दू वकील के लिए भारी पड़ा है। इस्लामी कट्टरपंथियों ने चिन्मय कृष्ण दास के वकील रामेन रॉय पर जानलेवा हमला किया है। इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हैं। उनका बांग्लादेश में ICU में इलाज चल रहा है। उनके इस हमले की जानकारी राधारमण दास ने दी है। उन्होंने रामेन रॉय के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। रामेन रॉय पर हमले को लेकर लोगों ने गुस्सा जताया है।

गौरतलब है कि बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार के अंतर्गत लगातार हिन्दू निशाने पर हैं। कई जगह इस्लामी कट्टरपंथी हिन्दू मंदिरों पर हमला कर रहे हैं, वह ISKCON की कई शाखाओं को भी बंद करवा चुके हैं। इस्लामी कट्टरपंथी लगातार ISKCON के लोगों को निशाना बना रहे हैं। हाल ही में यूनुस सरकार ने सारे कागज होने के बावजूद 63 साधुओं को बांग्लादेश से भारत नहीं आने दिया था। इससे पहले चिन्मय कृष्ण दास को जमानत नहीं दी गई थी। इसका विरोध करने पर हिन्दुओं को भी निशाना बनाया गया था।

सुखबीर बादल को टॉयलेट से लेकर जूठे बर्तनों तक की करनी होगी सफाई, प्रकाश सिंह बादल से छीना ‘फख्र-ए-कौम’: अकाल तख्त ने 2015 की पूरी पंजाब कैबिनेट को सुनाई सजा

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने 2015 के गुरु ग्रंथ साहिब बेअदबी मामले में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को कथित समर्थन देने के लिए सजा सुनाई है। इस फैसले के तहत सुखबीर बादल और उनके सहयोगियों को गुरुद्वारे के किचन और बाथरूम साफ करने का दायित्व सौंपा गया है। यही नहीं, अकाल तख्त ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से फक्र-ए-कौन सम्मान भी वापस ले लिया है।

अकाल तख्त के फैसले के मुताबिक, सुखबीर बादल वर्तमान में व्हीलचेयर पर हैं। सुखबीर सिंह बादल और साल 2015 में उनके कैबिनेट के साथियों को 3 दिसंबर को दोपहर 12 से 1 बजे तक गुरुद्वारे के बाथरूम-टॉयलेट साफ करने होंगे। इसके बाद उन्हें स्नान करना होगा और फिर लंगर सेवा में हाथ बंटाना होगा।

यह सजा सुखबीर बादल द्वारा अकाल तख्त के सामने बिना शर्त माफी माँगने के बाद दी गई है। उन्होंने अपने पुराने फैसलों में हुई गलतियों को स्वीकार किया है। उनका एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें दिखता है कि ग्यानीजी उनकी गलतियाँ बताते हैं और सुखबीर बादल इसे स्वीकार करते हैं।

ग्यानी रघबीर सिंह जी उनसे पूछते हैं कि बेअदबी के विरोध में किए गए प्रदर्शन पर गोलियाँ चलाने वाले पुलिसवालों को तरक्की दी या नहीं, जिसका जवाब वह हाँ में देते हैं। इसके बाद वह कुछ केस वापस कराने सम्बन्धी प्रश्न पूछते हैं, इसका भी जवाब वह हाँ में देते हैं। इसके अलावा उनसे और भी कई प्रश्न पूछे गए। यह सभी गुनाह उन्होंने स्वीकार किए। जिसके बाद यह सजा सुनाई गई।

शिरोमणि अकाली दल में उथल-पुथल के बीच दिया था इस्तीफा

इससे पहले सुखबीर सिंह बादल ने 16 नवंबर 2024 को शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने यह कदम पार्टी में चल रही उथल-पुथल और अकाल तख्त द्वारा उन्हें ‘तनखैया’ घोषित किए जाने के बाद उठाया।

‘तनखैया’ का मतलब है वह व्यक्ति जो धार्मिक भावनाओं का अपमान करता है। पार्टी के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने उनके इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा था कि नए अध्यक्ष के चुनाव जल्द ही होंगे।

पार्टी की स्थिति और नया नेतृत्व

अकाली दल जो कभी पंजाब की राजनीति में मजबूत पकड़ रखता था, हालिया समय में मुश्किल दौर से गुजर रहा है। लोकसभा चुनावों में पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी। सुखबीर बादल के इस्तीफे के बाद, पार्टी के कामकाज को संभालने के लिए बलविंदर सिंह भुंदर को पहले ही कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। अब पार्टी का कामकाज वही देखेंगे, जब तक कि नया अध्यक्ष नहीं चुना जाता।

प्रकाश सिंह बादल से वापस लिया फख्र-ए-कौम सम्मान

अकाल तख्त ने सुखबीर बादल के दिवंगत पिता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से ‘फ़ख्र-ए-कौम’ का सम्मान भी वापस ले लिया है। यह फैसला भी 2015 के बेअदबी मामले को लेकर लिया गया है।

बता दें कि साल 2015 में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामले ने पंजाब की राजनीति और धार्मिक भावनाओं को झकझोर कर रख दिया था। अकाली दल, जो खुद को सिख समुदाय का प्रतिनिधि मानता है, पर इस घटना को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को लेकर सुखबीर बादल और उनकी सरकार की भूमिका ने पार्टी की छवि को भारी नुकसान पहुँचाया।

जब हो रही जनसंख्या नियंत्रण पर बहस, तब मोहन भागवत ने यूँ ही नहीं छेड़ी 3 बच्चों की बात: फर्टिलिटी रेट के आँकड़े बता रहे हैं खतरा कितना बड़ा, TFR से ही टेंशन में हैं कोरिया-जापान

भारत वर्तमान में विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन चुका है। बीते कई दशकों से यह बहस होती आई है कि देश में जनसंख्या नियंत्रण के लिए कोई कानून बनाया जाना चाहिए। कई जगह अधिक बच्चे वाले परिवारों को सरकारी योजनाओं से वंचित करने सम्बन्धी कदम उठाने की भी बात हुई है। इन सबके बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि देश में दम्पत्तियों को 3 बच्चे पैदा करने की जरूरत है। उन्होंने इसके लिए टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) के संबंध में बात की है।

RSS प्रमुख ने क्या कहा?

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने यह बयान रविवार (1 दिसम्बर, 2024) को नागपुर में एक सार्वजनिक कायर्क्रम में दिया। उन्होंने कहा, “जनसंख्या में गिरावट चिंता का विषय है। आधुनिक जनसंख्या शास्त्र कहता है कि जब किसी समाज की जनसंख्या का टोटल फर्टिलिटी रेट 2.1 से नीचे चला जाता है तो वह समाज पृथ्वी से खत्म हो जाता है, उसे कोई नहीं मारेगा। कोई संकट न होने पर भी वह समाज नष्ट हो जाता है। उस प्रकार अनेक भाषाएँ और समाज नष्ट हो गये।”

उन्होंने आगे कहा, “TFR 2.1 से नीचे नहीं जाना चाहिए, हमारे देश की जनसंख्या नीति 1998 या 2002 में तय की गई थी। लेकिन इसमें यह भी कहा गया है कि किसी समाज का TFR 2.1 से कम नहीं होनी चाहिए। अब पाॅइंट वन तो इन्सान जन्म नही ले सकता, इसलिये हमे दो से ज्यादा तीन की जरुरत है यही जनसंख्या विज्ञान कहता है।”

उनके इस बयान को लकर असदुद्दीन ओवैसी, कॉन्ग्रेस और सपा ने विरोध जताया। हालाँकि, उनका यह बयान किसी राजनीतिक मुद्दे को लेकर नहीं था। RSS मुखिया मोहन भागवत ने इस बयान में जो चिंता जताई है, वह जायज भी है और उसकी पुष्टि खुद भारत सरकार के आँकड़े करते हैं।

भारत की वर्तमान में जनसँख्या 140 करोड़ से अधिक है। ऐसे में यदि को अधिक बच्चे पैदा करने सम्बन्धी बात करे तो यह काफी अटपटा लगता है। लेकिन यह तर्क पर 100% खरा है और जिन देशों ने समय रहते इस पर एक्शन नहीं लिया, वह आज बड़ी समस्याओं में घिर चुके हैं। भारत में यह समस्या समझने के लिए पहला डाटा समझते हैं।

क्या कहते हैं आँकड़े?

दरअसल, जिस टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) की बात RSS प्रमुख ने की वह जनसंख्या वृद्धि का एक प्रमुख संकेतक है। 15 से 49 वर्ष की कोई महिला इन वर्षों में कितने बच्चों को जन्म देगी, वह TFR कहलाता है। देश भर की इस आयु की महिलाओं द्वारा जन्म दिए गए बच्चों की संख्या का औसत निकाला जाए तो राष्ट्रीय TFR मिलता है।

इससे यह भी पता चलता है कि भविष्य में सामाजिक और आर्थिक रूप से देश की क्या स्थिति होगी और उसकी जरूरतें क्या होगीं। भारत में टोटल फर्टिलिटी रेट जानने के लिए सरकार एक सर्वे करवाती है। यह सर्वे 1990 के दशक से हो रहे हैं। यह नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के नाम से जाना जाता है।

अब तक इसके 5 सर्वे हो चुके हैं। सबसे नया सर्वे 2019-20 के बीच किया गया था। इस सर्वे के अनुसार, वर्तमान में देश का TFR 1.99 है। यह आँकड़ा चिंता का विषय इसलिए है क्योंकि यह उस स्तर से कम है, जितना यह होना चाहिए। जनसंख्या विज्ञानियों के अनुसार, किसी भी समाज का औसत TFR 2.1 होना चाहिए।

यदि किसी समाज का TFR 2.1 होगा तभी वह अपनी वर्तमान जनसंख्या बरकरार रख पाएगा। इस रिप्लेसमेंट लेवल TFR कहते हैं। यदि यह आँकड़ा इससे नीचे जाता है तो जनसंख्या आगामी समय में घटती जाएगी। भारत में यह आँकड़ा 2.1 से नीचे आ चुका है। ऐसे में यह चिंता का विषय होना चाहिए।

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने भी यही चिंता जताई। भारत से संबंधित आँकड़ों के भीतर जाया जाए, तो और भी चिंताजनक तस्वीर सामने आती है। आँकड़े दिखाते हैं कि मुस्लिमों को छोड़ कर देश के किसी भी धर्म की महिलाओं का रिप्लेसमेंट लेवल TFR 2.1 नहीं है।

मोहन भागवत tfr

इस ग्राफ से यह समस्या समझी जा सकती है। 1990 के दशक में उदारीकरण और शिक्षा का प्रचार-प्रसार बढ़ने के कारण लगातार देश में सभी समाज में तेजी से TFR में गिरावट आई है। इसका असर यह है कि हिन्दू, सिख और जैन धर्म 2 से नीचे आ चुके हैं।

ग्राफ में दिखता है कि देश के TFR में 1992-93 से अब तक 41% की कमी आ चुकी है। वर्तमान में मुस्लिमों का ही देश में TFR 2.1 के स्तर से ऊपर है। उनका TFR वर्तमान में 2.36 है।

घटता TFR समस्या क्यों?

घटता TFR वर्तमान में जापान, कोरिया, चीन समेत तमाम पश्चिमी देशों की समस्या है। जापान और कोरिया में यह समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। कोरिया में वर्तमान में TFR 0.7 है। यानी औसतन एक महिला एक भी बच्चे को जन्म नहीं दे रही है। यह विश्व में सबसे कम है। कोरिया ने इस समस्या से लड़ने के लिए पुरुषों की पेड छुट्टियों में तक बढ़ोतरी की है।

इसके अलावा इस छुट्टी की अवधि 90 दिन से 120 दिन कर दी है। सरकार ने यह भी फैसला लिया है कि जिन भी घरों में 1 वर्ष के कम की आयु के बच्चे हैं, उन्हें ₹63,500/माह देगी। वहीं 2 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों के घरों को सरकार ने ₹42000 से अधिक देने की घोषणा भी की है।

कम TFR के चलते कोरिया की जनसंख्या भी घटने लगी है। उसकी जनसंख्या 2018 में 5.18 करोड़ थी जो कि अब घट कर लगभग 5.16 करोड़ हो गई है। कोरिया को चिंता है कि यदि उसकी इसी तरह जनसंख्या घटती रही तो उसे राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर काम करने वाले लोगों तक की समस्या झेलनी पड़ेगी। कोरिया के जैसे ही हाल जापान का है।

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के एक वरिष्ठ सलाहकार ने हाल ही में कहा था कि यदि जापान में जन्म दर नहीं सुधरी तो देश एक दिन गायब हो जाएगा। जापान का TFR 1.26 है। यह लगातार घटता जा रहा है। इस घटते TFR के चलते जापान की लगभग 33% जनसंख्या अब 65 वर्ष या उससे अधिक है। जापान को इसके चलते श्रमिक समस्या से भी जूझना पड़ रहा है।

जापान की सरकार ने भी इसको लेकर कई कदम उठाए हैं। चीन का भी यही हाल है। चीन ने समस्या को भांपते हुए 1979 में लगाया गया एक बच्चा नियम 2016 में हटा दिया था। हालाँकि, इसके बाद भी चीन की जनसंख्या पिछले 2 साल से घट रही है।

यदि इन सब देशों के उदारहण को देखा जाए तो RSS प्रमुख की बात समय से पहले दी गई चेतावनी लगती है। RSS प्रमुख के बयान को खारिज करने वालों को भी यह उदाहरण देखने चाहिए। भारत भी समस्या रहते अगर चेत जाता है तो उसे ना आगे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता करनी होगी और ना ही उसे बूढ़ी होती जनसंख्या का दंश झेलना पड़ेगा।

‘तुम किससे पंगा ले रहे हो, हम भाई के घर के पास रहते हैं’: चैंपियंस ट्रॉफी पर पाकिस्तान के पूर्व विकेटकीपर राशिद लतीफ ने दाऊद इब्राहिम की दिखाई धौंस, ‘मुस्लिम डॉन’ की भी दे चुका है धमकी

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर राशिद लतीफ ने एक यूट्यूब शो ‘Caught Behind’ में भारत के मोस्ट वांटेड अपराधी दाऊद इब्राहिम से अपनी नजदीकी का दावा किया। दाऊद इब्राहिम 1993 मुंबई बम धमाकों का मास्टरमाइंड है, जिनमें 257 लोग मारे गए थे और 1,400 से ज्यादा घायल हुए थे।

होस्ट डॉ. नौमान नियाज़ से बात करते हुए लतीफ ने कहा, “तुम्हें क्या लगता है, तुम किससे पंगा ले रहे हो? हम भाई के घर के पास रहते हैं।” लतीफ कराची में रहते हैं, वही शहर जहाँ दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की सुरक्षा में रह रहा है।

यह चर्चा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के बीच 2025 चैंपियंस ट्रॉफी को लेकर चल रहे विवाद पर हो रही थी। BCCI ने पाकिस्तान में खेलने से इनकार कर दिया था और माँग की थी कि भारत के मैच न्यूट्रल वेन्यू (जैसे दुबई) पर खेले जाएँ। दूसरी ओर, PCB पूरे टूर्नामेंट को पाकिस्तान में ही आयोजित करने पर अड़ा था।

जय शाह के ICC में प्रभावी भूमिका निभाने और PCB द्वारा हाइब्रिड मॉडल पर विचार करने की खबरों के बीच लतीफ ने अपनी कथित नजदीकी दिखाकर भारत को धमकी देने की कोशिश की।

यह पहली बार नहीं है जब राशिद लतीफ ने विवादित बयान दिया है। सोशल मीडिया पर उनके कई वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें उसका कट्टरपंथी इस्लामी पक्ष नजर आता है। एक वीडियो में लतीफ ने दावा किया था कि भारत के ज्यादातर ऐतिहासिक स्मारक उनके पूर्वजों ने बनाए हैं। उसने यह भी कहा था कि भारत में 14 डॉन हैं और वे सभी उनकी कौम से ताल्लुक रखते हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी थी कि उन्हें मजबूर न किया जाए वरना वे भी डॉन बन सकते हैं।

राशिद लतीफ का यह नया बयान BCCI और PCB के बीच 2025 चैंपियंस ट्रॉफी को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच आया है।

बता दें कि नवंबर के पहले हफ्ते में BCCI ने आधिकारिक रूप से PCB को सूचित किया था कि भारतीय क्रिकेट टीम सुरक्षा चिंताओं के कारण पाकिस्तान यात्रा नहीं करेगी। BCCI ने भारत के मैच न्यूट्रल वेन्यू (जैसे दुबई) में कराने की इच्छा जताई थी। ICC ने 2025 चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी के लिए पाकिस्तान को चुना था, लेकिन भारत-पाक के कूटनीतिक तनाव के चलते भारतीय टीम की भागीदारी पर सवाल उठने लगे। अब खबरें हैं कि PCB कुछ शर्तों के साथ हाइब्रिड मॉडल को मंजूरी देने के करीब है।

कुआँ पूजन, शादी-ब्याह, पूजा-पाठ… हरिहर मंदिर में सब होता था: संभल के बुजुर्गों ने जामा मस्जिद मानने से किया इनकार, बताया- दीवारें बनाकर हिंदुओं का प्रवेश किया बंद

उत्तर प्रदेश का संभल इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा के कारण लगातार चर्चा में है। ऐसे में हर मीडियाकर्मी ग्राउंड पर जाकर अपनी पड़ताल को साझा कर रहा है। हाल में स्वराज्य पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा भी स्थिति जानने वहाँ पहुँचीं और एक्स अकाउंट (पूर्व में ट्विटर) पर बताया कि इलाके के बुजुर्ग हिंदू और उनके पूर्वज विवादित स्थल को लेकर क्या बताते आए हैं।

स्वाति गोयल के ट्वीट के अनुसार, ये शाही जामा मस्जिद संभल के कोट इलाके में है। ये जगह दो भागों में बँटा हुआ है, एक कोट पूर्वी और दूसरा कोट गर्भी। मुख्य द्वार के सामने ज्यादातर हिंदू रहते हैं। पत्रकार ने इन्हीं कुछ हिंदुओं से मुलाकात की।

इनमें एक 66 साल के अनिल टंडन भी हैं। अनिल टंडन बताते हैं कि वो कोट पूर्वी इलाके में रहते हैं और उनके परिवार ने हमेशा उस इमारत को हरिहर मंदिर ही माना है।

टंडन ने बताया कि पहले यहाँ हरिहर मंदिर ही था। 8 साल की उम्र में वो अपने परिजनों के साथ मंदिर जाया करते थे जोकि मस्जिद के भीतर है। मगर, बाद में हिंदुओं की एंट्री परिसर में रोक दी गई। यहाँ दीवारें बना दी गई और कमरे को बंद करके ताला लटका दिया गया। अंदर एक कुंड भी है।

इसी प्रकार 75 साल के अरविंद अरोड़ा ने बताया कि उनका परिवार 1947 में लाहौर से आया था। परिवार को पता चला कि ये जगह हरिहर मंदिर है और यहाँ ज्यादातर विस्थापित पंजाबी रहते थे लेकिन बाद में माहौल बिगड़ने के बाद वो इलाके को छोड़ने लगे।

इसके बाद 90 साल की मुन्नी देवी ने बताया- “पहले अंदर कुआँ था जो खुला हुआ था, फिर आधा हिस्सा भीतर ले लिया गया और आधा बाहर रह गया। हम लोग वहाँ कुआँ पूजने जाते थे। उन्होंने कहा, “मेरे जितने बच्चे हुए सबका कुआँ वहीं पूजा गया। बाकी फिर इन्होंने कुआँ पूजना बंद करवा दिया।” मुन्नी देवी ने कहा- “हमें ये लगता नहीं है ये हरिहर मंदिर ही है। इन लोगों ने कभी अंदर जाने नहीं दिया। मगर हमारे घर में पानी उसी कुएँ से आता था।”

गौरतलब है कि स्थानीय बुजुर्गों की बातचीत से यही पता चलता है कि शाही जामा मस्जिद में पहले लोगों का आना-जान था, मगर बाद में हर चीज बंद करवा दी गई। इलाके के बुजुर्ग अब भी याद करते हैं कि कैसे अपने बचपन या युवावस्था में वो मंदिर जाते थे। उनके पुरखे उन्हें साफ कहते थे कि ये मस्जिद नहीं मंदिर है। बातचीत के दौरान कोई भीतर बने कुंड की बात बताता है तो कोई साफ कहता है कि यहाँ मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाया गया है।

इससे पहले बता दें कि इस स्थल को लेकर भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने भी टिप्पणी की थी। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा था कि संभल में जामा मस्जिद हरि मंदिर था। जिसे समाजवादी पार्टी की सरकार ने 2012 में जामा मस्जिद में तब्दील करा दिया था। इसके अलावा ये भी कहा जा रहा है कि साल 2012 से पहले इस जगह पर हिंदू माताएँ पूजा-पाठ करने जाती थीं। इसके अलावा यहाँ शादी ब्याह के कार्यक्रम भी कराए जाते थे। बच्चा बच्चा इसे हरि मंदिर के नाम से जानता था। बाद में सपा के शफीकुर्रहमान बर्क के दबाव में उनकी पार्टी की सरकार ने यहाँ पूजा बंद करवा दी और हिंदुओं को वहाँ जाने से रोक दिया गया।