सोमवार (अगस्त 5, 2019) को जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 के खत्म होने के साथ ही राज्य को मिला विशेष राज्य का दर्जा भी खत्म हो गया है। यानी कि अब एक देश एक कानून होगा। पूरा भारत इस समय अनुच्छेद 370 खत्म होने की घोषणा पर जश्न मना रहा है। इस फैसले के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पुरानी तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। जिसमें वो अनुच्छेद 370 का विरोध करते नज़र आ रहे हैं।
हालाँकि, यह तस्वीर कब की है, इस बात का पता नहीं चल सका है। लेकिन पीएम मोदी जिस स्टेज पर मौजूद हैं, वहाँ पर पीछे एक बैनर लगा है जिस पर लिखा है, ‘370 हटाओ, आतंकवाद मिटाओ, देश बचाओ।’ ट्विटर पर यूजर इस फोटो को तेजी से शेयर कर रहे हैं और कमेंट कर रहे हैं कि पीएम मोदी ने जो वर्षों पहले एक वादा किया था आज वह अपना वादा पूरा करने में सफल रहे हैं।
एक्टर और अहमदाबाद ईस्ट से पूर्व बीजेपी सांसद परेश रावल ने भी प्रधानमंत्री की इस पुरानी फोटो को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखते हैं- ‘सौ सौ सलाम आपको।’ इसके साथ ही उन्होंने इस बदलाव पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि कश्मीर की घटनाओं को सबका साथ सबका विकास के साथ ना जोड़ें। ये सबका इलाज योजना भी हो सकती है।
बता दें कि, जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद अब जम्मू-कश्मीर में अलग संविधान नहीं होगा। उसका अलग झंडा नहीं होगा। अब जम्मू-कश्मीर में देश के अन्य राज्यों के लोग भी जमीन खरीद सकेंगे। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 साल का न हो कर 5 साल का होगा।
जम्मू-कश्मीर में बढ़ रही हलचल के बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी किया है। इसमें 5 से 7 अगस्त तक सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए कहा गया है। भाजपा का कहना है कि 5 से 7 तारीख के बीच कई महत्त्वपूर्ण विधायी कार्यों पर चर्चा की जा सकती है। इसलिए उनका सदन में मौजूद रहना अनिवार्य है। पार्टी ने सांसदों से 5, 6 और 7 तारीख को सदन में उपस्थित रहकर सरकार के कार्य में मदद करने का अनुरोध किया है।
सदन में सांसदों की उपस्थिति में अनुच्छेद 370 ख़त्म किया जा चुका है। विपक्ष लगातार हंगामा कर रहा है। वहीं गृहमंत्री अमित शाह ने सभी प्रश्नों पर चर्चा और जवाब का आश्वासन दिया है।
BJP issues three line whip to its Lok Sabha MPs:
All BJP Members in Lok Sabha are hereby informed that some very important legislative Business will be taken up for discussion and passed from Monday, 5th August to Wednesday, 7th August, 2019. (contd.)
इसके साथ ही राज्यसभा सचिवालय ने स्पष्ट कर दिया है कि विधायी कार्य पूरे होने के बाद आज शून्यकाल (Zero Hour) होगा। आज (अगस्त 5, 2019) विधायी कार्यो को निपटाने के बाद ही शून्यकाल हो पाएगा। राज्यसभा के सभापति ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि कुछ आवश्यक विधायी कार्यों के कारण शून्यकाल बाद में होगा।
As decided by the Rajya Sabha Chairman, due to some urgent legislative business today, Zero Hour submissions will be taken up in the House today after the completions of Legislative Business listed for the day. (file pic) pic.twitter.com/3nqjqy3O0o
एक तरफ भाजपा ने अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने को कहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष भी पूरी तरह से मुस्तैद है। आज विपक्ष संसद में कश्मीर के मसले पर बहुत ज़्यादा हंगामा कर सकता है।
आज के सदन में कश्मीर में जारी हलचल को लेकर बहस और सवाल-जवाब किए जा सकते हैं। इस बीच, कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर के ट्वीट के बाद आज सुबह कॉन्ग्रेस के नेताओं ने लोकसभा और राज्यसभा में कार्य स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। राज्यसभा में गुलाम नबी आजाद कार्य स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दे चुके हैं, वहीं लोकसभा में अधीर रंजन चौधरी ने नोटिस दिया है।
दरअसल, अब्दुल्ला को घर में नजरबंद किए जाने के बाद शशि थरूर ने ट्वीट किया, “आप अकेले नहीं हैं उमर अब्दुल्ला। लोकतंत्र को मानने वाला हर भारतीय कश्मीर की मुख्यधारा से जुड़े नेताओं के साथ खड़ा होगा। संसद का सत्र अभी भी चल रहा है और हमारी आवाज खामोश नहीं रहेगी।”
बीते कुछ दिनों से जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 को हटाने को लेकर जारी अटकलें आज प्रधानमंत्री मोदी के ऐतिहासिक फैसले के साथ खत्म हो गई। इस पर सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। इस सिलसिले में गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में बड़ा ऐलान करते हुए जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने का संकल्प पेश किया और राष्ट्रपति ने इसकी मंजूरी दे दी। इसी के साथ आर्टिकल 35A का भी अब कोई औचित्य नहीं रह गया।
इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया है- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख। गृहमंत्री अमित शाह के नाम से जो पत्र जारी किया गया है, उसके अनुसार जम्मू कश्मीर में विधायिका होगी, जबकि लद्दाख में विधायिका नहीं होगी।
आर्टिकल 370 के हटाने का विपक्ष ने आज जमकर विरोध किया। इनका यह विरोध आज कोई नया नहीं है। बता दें कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 2014 में आर्टिकल 370 को लेकर 3 ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने ना सिर्फ इसे हटाने की बात कही था, बल्कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को चैलेंज भी किया था कि वो इसे हटा ही नहीं सकते।
So the new MOS PMO says process/discussions to revoke Art 370 have started. Wow, that was a quick beginning. Not sure who is talking 1/n
उमर अब्दुल्ला ने अपने पहले ट्वीट में कहा था कि प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से कहा गया है कि आर्टिकल 370 को खत्म करने पर चर्चा की जा रही है। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने इस तंज कसते हुए कहा था कि इसकी शुरुआत बहुत जल्द हो गई। उमर अब्दुल्ला ने तो इसे तंज में कहा था मगर मोदी सरकार ने आज इसे करके दिखा दिया।
Mark my words & save this tweet – long after Modi Govt is a distant memory either J&K won’t be part of India or Art 370 will still exist 2/n
अपने दूसरे ट्वीट में उमर अब्दुल्ला ने चेतावनी भरे लहजे में लिखा था, “मेरे शब्दों को याद रखना। या तो आर्टिकल 370 रहेगा या फिर जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं रहेगा।”
Art 370 is the ONLY constitutional link between J&K & rest of India. Talk of revocation of not just ill informed it’s irresponsible. 3/3
उन्होंने अपने तीसरे ट्वीट में आर्टिकल 370 को जम्मू कश्मीर और भारत के बीच का एकमात्र संवैधानिक कड़ी बताया था।
आर्टिकल 370 हटने के साथ ही 2014 में उमर अब्दुल्ला द्वारा पीएम मोदी को किया गया बचकानी चैलेंज मात्र एक मजाक बनकर रह गया है, क्योंकि आर्टिकल 370 तो हट गया है, और जम्मू कश्मीर अभी भी भारत का हिस्सा है। ये हमेशा ही भारत का हिस्सा रहेगा। 370 हटने के बाद अब जम्मू-कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश है जो अलगाववादियों की सहायता करने वालों को सबक सिखाने के लिए काफी है।
राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा कश्मीर में लागू अनुच्छेद-370 और 35-A को खत्म करने के प्रस्ताव को पेश करते ही विपक्षी पार्टियों और लिबरल गैंग को झटके लगने शुरू हो गए हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 के सभी खंड लागू नहीं होंगे। इसके साथ ही आर्टिकल 35-A को भी हटा दिया गया है।
इस फ़ैसले से नाराज़ समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सेठ ने पार्टी के साथ-साथ संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि संजय सेठ, मुलायम सिंह के बेहद क़रीबी रहे हैं। कॉग्रेस के सांसद भुवनेश्वर कालिता ने भी राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है। ऐसी संभावना है कि वो जल्द ही बीजेपी में शामिल होंगे।
दूसरी तरफ, लिबरल गैंंग भी इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर जमकर प्रतिक्रिया दे रहा है। बरखा दत्त ने ट्वीट किया, “एक डेस्क में दो विधानसभा, दो प्रधान, दो निशान नहीं हो सकते।” जैसे ही जम्मू-कश्मीर में सरकार आएगी तब क्या?
The @AmitShah move to scrap #Article370#Article35A completes Syama Prasad Mukherjee call: “Ek Desk mein do vidhan, do Pradhan, do nishan nahin ho sakte”. But to be legally valid it needs the consent of Jammu and Kashmir. Sooner or later state will have a new government. Then?
The big picture: @AmitShah moves bill to revoke #Article370#Art35A. Scraps J&K special status. Cites Governor’s consent as consent of the state. J&K to be a Union Territory, have less powers than even Delhi govt. Security thus to be in centres hands.
सोशल मीडिया पर सागरिका घोष का भी दर्द छलका जम्मू-कश्मीर राज्य के एक केंद्र शासित प्रदेश बनने की स्थिति पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए लिखा कि बिना किसी परामर्श और चर्चा के कैसे यह बिल आगे बढ़ गया।
J&K ceases to be a state, becomes a Union Territory. Astounding, bizarre, outlandish to push this bill without even a single round of consultation and discussion with all stakeholders. https://t.co/rhzKExEfWT
Modi government has now forced “integration” of Kashmir with India, through diktat & show of force. Hope BJP government can now deliver development, jobs, industry and welfare to Kashmiris as well as to the rest of India and not let the region slide into another Palestine
जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवा बाधित होने के बावजूद पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती का ग़ुस्सा सोशल सोशल मीडिया पर फूटा। उन्होंने ट्वीट किया हमारे जैसे लोग जिन्होंने संसद पर भरोसा रखा, उन्हें लोकतंत्र के मंदिर में धोखा दिया गया है।
People like us who placed faith in Parliament, the temple of democracy have been deceived. Those elements in J&K who rejected the ?? constitution & sought resolution under the UN have been vindicated. This will exacerbate the alienation Kashmiris feel.
राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने पीडीपी के मीर फ़ैयाज़ और नज़ीर अहमद लावे को संविधान को फाड़ने के बाद सदन से बाहर जाने के लिए कहा, इस पर प्रतिक्रिया स्वरूप आदित्य मेनन ने ट्वीट किया कि ये बीजेपी सरकार है जिसने आज संविधान की हत्या की है।
जम्मू-कश्मीर में लागू अनुच्छेद-370 में बदलाव और राज्य पुनर्गठन के निर्णय का कॉन्ग्रेस, पीडीपी समेत कई पार्टियों ने कड़ा विरोध किया। महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के दो सांसदोंं ने नज़ीर अहमद लवे और एमएम फ़ैयाज़ ने अपना विरोध जताते हुए संसद परिसर में संविधान फाड़ दिया। उनकी इस हरक़त से नाराज़ सभापति एम वेंकैया नायडू ने दोनों को संसद से बाहर जाने को कहा। इसके बाद भी दोनों सांसदो ने अपना हंगामा जारी रखा और अपने कपड़े फाड़ दिए।
PDP’s RS MPs Nazir Ahmad Laway&MM Fayaz protest in Parliament premises after resolution revoking Article 370 from J&K moved by HM in Rajya Sabha; The 2 PDP MPs were asked to go out of the House after they attempted to tear the constitution. MM Fayaz also tore his kurta in protest pic.twitter.com/BtalUZMNCo
दरअसल, जम्मू-कश्मीर में मोदी सरकार ने बड़ा फ़ैसला लेते हुए अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-A हटा दिया, जिसपर राष्ट्रपति की मंज़ूरी भी मिल गई है। इसके अलावा लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर दिया गया है। साथ ही जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित राज्य घोषित कर दिया गया। अब जम्मू-कश्मीर अलग राज्य नहीं रहा।
इस परिवर्तन से विपक्ष ने काफ़ी हंगामा मचाया। जहाँ एक तरफ़ पीडीपी नेताओं ने अपने कपड़े तक फाड़ दिए वहीं दूसरी तरफ क़ॉन्ग्रेस के गुलाम नबी अज़ाद विरोध प्रकट करने के लिए धरने पर बैठ गए।
राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 और 35-A खत्म करने के प्रस्ताव को पेश करने के बाद ही विपक्ष में हलचल तेज हो गई। एक ओर जहाँ गुलाम नबी आजाद सरकार के इस फैसले को संविधान की हत्या बता रहे हैं तो वहीं कुछ विपक्षी नेता ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी-अपनी पार्टी से ही इस्तीफ़ा दे दिया है।
Sanjay Seth, Rajya Sabha MP of Samajwadi Party who played key role in SP-BSP alliance, also resigns from the house
खबरों के मुताबिक मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाने वाले सपा नेता संजय सेठ ने पार्टी की सदस्यता के साथ-साथ संसद की सदस्यता से भी इस्तीफ़ा दे दिया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि वह अब जल्द भाजपा का दामन थाम सकते हैं। गौरतलब है कि इससे पहले समाजवादी पार्टी के नीरज शेखर और सुरेंद्र नागर भी पार्टी से इस्तीफ़ा दे चुके हैं। इससे सपा की परेशानियाँ बढ़ती नजर आ रही है।
संजय सेठ के अलावा राज्यसभा में कश्मीर पर फैसला आने के बाद कॉन्ग्रेस के सांसद भुवनेश्वर कालिता ने भी पार्टी के साथ-साथ अपनी सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है। संजय सेठ की तरह इनके लिए भी कहा जा रहा है कि ये जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने की सिफ़ारिश की है। अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का संकल्प राज्यसभा में पेश किया। शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 का सिर्फ़ एक खंड लागू होगा और राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी दे दी है।
इसके बाद एक और महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए केंद्र सरकार ने वर्तमान जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग कर दिया है। इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। इस तरह मोदी सरकार ने राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने का निर्णय लिया है: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख।
HM Amit Shah: Jammu and Kashmir to be a union territory with legislature and Ladakh to be union territory without legislature pic.twitter.com/nsEL5Lr15h
गृहमंत्री अमित शाह के नाम से जो पत्र जारी किया गया है, उसके अनुसार जम्मू कश्मीर में विधायिका होगी, जबकि लद्दाख में विधायिका नहीं होगी। यहाँ पर उदाहरण के लिए हम आपको बता दें कि दिल्ली भी केंद्र शासित प्रदेश है, लेकिन यहाँ विधायिका है। जबकि अंडमान निकोबार द्वीप समूह या चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश तो हैं, लेकिन वहाँ पर विधायिका नहीं है।
अमित शाह के धारा 370 हटाने की सिफारिश करने के तुरंत बाद ही विपक्षों ने उच्च सदन में बड़े पैमाने पर हंगामा किया गया। इस विधेयक पर विरोध दर्शाते हुए पीडीपी सांसदों ने अपने कपड़े फाड़ दिए। वहीं विरोधी दल के सांसद राज्यसभा में जमीन पर बैठ गए हैं। राज्यसभा अध्यक्ष ने सदन में मार्शल बुलाने के आदेश दिए हैं।
सोमवार (अगस्त 5, 2019) को प्रधानमंत्री आवास पर हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और सभी मंत्री मौजदू रहे। इस बात को लेकर पहले से ही अटकलें तेज थीं कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटा सकती है और अनुच्छेद 35ए को खत्म कर सकती है और आज सदन में आखिरकार मोदी सरकार ने यह कर दिखाया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा को संबोधित किया। असमंजस की स्थिति को स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370(1) के अलावा अनुच्छेद 370 के सभी खंड हटाने का निर्णय लिया गया है। अमित शाह ने कहा कि सरकार की ओर से जो चारों बिल आए हैं, वह कश्मीर मुद्दे पर ही है।
अनुच्छेद 370 (1) के अलावा सभी खंड राष्ट्रपति के अनुमोदन से खत्म होंगे। अमित शाह ने कहा कि राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद अनुच्छेद 370 के सभी खंड लागू नहीं होंगे। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का प्रस्ताव पेश करते ही विपक्षी दलों ने हंगामा शुरू कर दिया।
जम्मू-कश्मीर में गृह मंत्री द्वारा अनुच्छेद 370 हटाने के प्रस्ताव के बाद राज्यसभा में विपक्ष ने हंगामा किया। विपक्षी पार्टियों के हंगामे के बीच सदन का कार्रवाई स्थगित कर दी गई।
आपको बता दें कि कश्मीर मुद्दे पर चल रही अटकलों के बीच आज (अगस्त 5, 2019) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर कैबिनेट की बैठक की गई। यह बैठक सुबह 9:30 बजे शुरू हुई थी। इसमें गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाकार अजित डोभाल, विदेश मंत्री जयशंकर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद शामिल थे। खबरों के मुताबिक इस बैठक से पहले पीएम आवास पर मोदी-शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल के बीच अलग से भी बैठक हुई थी। बैठक के बाद से मीडिया में कयास लगाए जाने लगे थे कि जम्मू-कश्मीर पर केंद्र सरकार ने कोई बड़ा फैसला ले लिया है।
जम्मू-कश्मीर पर चल रही हलचल के बीच केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों में अलर्ट जारी किया गया है, साथ ही कुछ को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इस बीच उत्तर प्रदेश और अन्य कुछ राज्यों में एंटी राइट ड्रिल (दंगा रोधी ड्रिल) करवाने को लेकर भी सुझाव दिया गया है।
गौरतलब है कश्मीर मुद्दे पर केंद्र सरकार का इशारा हमेशा से साफ़ रहा है। उन्होंने कश्मीर समस्या के मसले पर हमेशा से अपना मत एक पक्ष में रखा है। जो स्थिति फिलहाल देश में कश्मीर राज्य को लेकर चल रही हैं, उसका इशारा कहीं न कहीं मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में तात्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा कर दिया गया था। उस दौरान पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 35-A जैसे अनुच्छेद पर अपने विचारों को रखते हुए बताया था कि किस तरह 35-ए, जिसे आज अलगाववादी नेता कश्मीर का हक बता रहे हैं, उसने कश्मीर के साथ पूरे देश को प्रभावित किया हुआ है और इसका हल मोदी सरकार में होकर रहेगा।
हमारे लिए जानना जरूरी है कि अरुण जेटली ने उस दौरान सवाल किया था कि देश के बाकी हिस्सों पर लागू होने वाला क़ानून का शासन इस राज्य में लागू क्यों नहीं होना चाहिए? क्या हिंसा, अलगाववाद, व्यापक पैमाने पर पत्थरबाजी (Stone Pelting), ख़तरनाक विचारधारा इत्यादि को इस दलील पर अनुमति दी जानी चाहिए कि अगर हम इसकी जाँच करते हैं, तो इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने इसे गलत नीति बताते हुए कहा था “35-ए विकास-विरोधी साबित हुई है। इसलिए आज वर्तमान सरकार ने निर्णय लिया है कि कश्मीर घाटी के लोगों के हित में और भारत के हित में, क़ानून का शासन सबके लिए समान रूप से लागू होना चाहिए।”
जेटली द्वारा कहे गए ये शब्द और वर्तमान परिस्थितियाँ आज बताती हैं कि मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल से ही इस विषय पर अपना काम कर रही थी। वो इस गंभीर विषय को लेकर पहले से ही कार्यवाई करने का विचार बना रहे थे, लेकिन चुनावों के कारण ये टल गया। उस दौरान तात्कालीन वित्त मंत्री ने 35 ए का हवाला देकर संकेत दे दिए थे कि विकास-विरोधी 35-ए का आगे क्या होने वाला है। उन्होंने कहा था – , “यह समृद्धि, संसाधन निर्माण और रोज़गार सृजन को रोकता है। कॉलेज की पढ़ाई के लिए छात्रों को नेपाल और बांग्लादेश सहित सभी जगहों पर जाना पड़ता है। जम्मू में केंद्र सरकार द्वारा स्थापित सुपर-स्पेशियलिटी सुविधा सहित इंजीनियरिंग कॉलेज और अस्पताल या तो अंडर-यूज़ किए गए या प्रयोग करने लायक ही नहीं हैं क्योंकि बाहर से प्रोफेसर और डॉक्टर वहाँ जाने के लिए तैयार ही नहीं हैं। अनुच्छेद 35A ने निवेश को रोक दिया है और राज्य की अर्थव्यवस्था को नष्ट कर दिया है। इस आर्टिकल को कई लोग राजनीतिक हथियार रूप में भी प्रयोग कर रहे हैं।”
उन्होंने साफ़ किया था, आज की तारीख़ में राज्य (जम्मू कश्मीर) के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं हैं। अधिक वित्तीय लाभ उठाने की इसकी क्षमता को अनुच्छेद 35A द्वारा अपंग कर दिया गया है। कोई भी निवेशक यहाँ पर उद्योग, होटल, निजी शिक्षण संस्थान या निजी अस्पताल स्थापित करने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि वह राज्य में न तो ज़मीन या संपत्ति ख़रीद सकता है और न ही उसके अधिकारी ऐसा कर सकते हैं। उनके बच्चों को सरकारी नौकरियों या कॉलेजों में प्रवेश नहीं मिल सकता है। आज, ऐसी कोई बड़ी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय होटल चेन नहीं है, जिसने पर्यटन केंद्रित राज्य में एक भी होटल स्थापित किया हो।
जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार द्वारा की जा रही कार्रवाई को देखकर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सोमवार (अगस्त 5, 2019) को राज्य के प्रति सहानुभूति रखने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें आज (कश्मीर की स्थिति को देख) सबसे ज्यादा अटल बिहारी वाजपेयी की कमी महसूस हो रही है।
श्रीनगर में धारा 144 लगने के करीब एक घंटे बाद पीडीपी नेता का ट्वीट आया। जिसमें उन्होंने लिखा, “भाजपा नेता होने के बावजूद अटल जी में कश्मीरियों के लिए सहानुभूति थी और उन्होंने कश्मीर की जनता का प्यार हासिल किया। आज उनकी कमी हम सबसे ज्यादा महसूस कर रहे हैं।“
Vajpayee ji despite being a BJP leader empathised with Kashmiris & earned their love. Today we feel his absence the most.
उन्होंने कहा, “आशा है कि जिन लोगों ने हम पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाया, उन्हें एहसास होगा कि हमारा डर गलत नहीं था। नेता नजरबंद हैं, इंटरनेट सेवा बंद है और धारा 144 लागू होना किसी भी मानक से सामान्य नहीं है।”
Hope those who accused us of rumour mongering realise that our fears weren’t misplaced. Leaders under house arrest, broadband services suspended & section 144 enforced isn’t normal by any standard.
गौरतलब है कि इससे पहले महबूबा मुफ्ती खुद को नजरबंद किए जाने को लेकर भी एक ट्वीट कर चुकी थीं। जिसमें उन्होंने लिखा था, “कैसी विडंबना है कि हमारे जैसे शांति के लिए लड़ने वाले जनप्रतिनिधियों को हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। दुनिया देख रही है कि जम्मू-कश्मीर में कैसे लोगों की आवाज को दबाया जा रहा है।”
बता दें कि इस समय कश्मीर घाटी में केंद्र सरकार द्वारा की जा रही कार्रवाई से हलचल बनी हुई है। वहाँ इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गई हैं और देर रात धारा 144 लगाई गई है। इस आदेश के तहत इलाके में लोगों की किसी तरह की आवाजाही नहीं हो सकेगी और सभी शैक्षणिक संस्थान भी बंद रहेंगे। आदेश जारी रहने के दौरान शहर में किसी भी तरह की रैली और जनसभा करने की मनाही होगी। सभी सरकारी अधिकारियों से कहा गया है कि वे अपना पहचान-पत्र साथ रखें।
जम्मू-कश्मीर में कड़ी सुरक्षा को लेकर चल रही हलचल के बीच कई बड़े नेताओं को उनके घरों में ‘नजरबंद’ कर दिया गया है ताकि उनकी सुरक्षा कॉम्प्रोमाइज न हो। इस सूची में मुख्यत: पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्लाह का भी नाम है। इनके अलावा पीपल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन को लेकर भी यही खबर है। जानकारी के मुताबिक इन नेताओं के अलावा राज्य में पूर्व विधायकों सहित कई अन्य मुख्यधारा के नेताओं को भी अपने निवास स्थान से बाहर निकलने के लिए मना किया गया है।
धारा 144 लागू
राज्य प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से श्रीनगर में अनिश्चितकाल तक धारा 144 लगा दी है। इस आदेश के तहत इलाके में लोगों की किसी तरह की आवाजाही नहीं हो सकेगी और सभी शैक्षणिक संस्थान भी बंद रहेंगे। खबरों के मुताबिक कई शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों को होस्टल खाली करने के लिए भी कहा गया है।
इंटरनेट बंद, अधिकारियों को सैटेलाइट फोन
इसके अलावा कश्मीर घाटी में मोबाइल इंटरनेट कनेक्शन अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। पुलिस अधिकारियों और जिला मैजिस्ट्रटों को सैटेलाइट फोन दिए गए हैं। अधिकारियों ने आतंकवादी खतरे और पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा पर शत्रुता बढ़ने के बीच अहम प्रतिष्ठानों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है।
इन्हीं परिस्थितियों के मद्देनजर पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को उनके घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई है। दोनों नेताओं ने इस बात की जानकारी अपने ट्वीटर अकॉउंट के जरिए दी है।
महबूबा ने ट्वीट किया, “कैसी विडंबना है कि हमारे जैसे शांति के लिए लड़ने वाले जनप्रतिनिधियों को हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। दुनिया देख रही है कि जम्मू-कश्मीर में कैसे लोगों की आवाज को दबाया जा रहा है।”
How ironic that elected representatives like us who fought for peace are under house arrest. The world watches as people & their voices are being muzzled in J&K. The same Kashmir that chose a secular democratic India is facing oppression of unimaginable magnitude. Wake up India
वहीं, उमर अब्दुल्ला कल अपने पहले ट्वीट में लिखते हैं, “मुझे लगता है कि मुझे आज आधी रात से घर में नजरबंद किया जा रहा है और मुख्यधारा के अन्य नेताओं के लिए भी यह प्रक्रिया पहले ही शुरू हो गई है।” उन्होंने परिस्थितियों को लेकर कहा कि इनकी सच्चाई जानने का कोई तरीका नहीं है लेकिन अगर यह सच है तो फिर आगे देखा जाएगा।
I believe I’m being placed under house arrest from midnight tonight & the process has already started for other mainstream leaders. No way of knowing if this is true but if it is then I’ll see all of you on the other side of whatever is in store. Allah save us ??
इसके बाद अपने एक अन्य ट्वीट में वे लिखते हैं, “कश्मीर के लोगों के लिए हमें नहीं मालूम कि क्या चल रहा है लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि अल्लाह ने जो भी सोचा है वह हमेशा बेहतर होगा। हमें यह शायद अभी नजर न आए लेकिन हमें कभी उनके तरीकों पर शक नहीं करना चाहिए।” अपने ट्वीट में उमर ने हर किसी को गुड लक कहते हुए कहा है कि वे सभी सुरक्षित रहें और सबसे महत्तवपूर्ण है कि शांति बनाए रखें।
To the people of Kashmir, we don’t know what is in store for us but I am a firm believer that what ever Almighty Allah has planned it is always for the better, we may not see it now but we must never doubt his ways. Good luck to everyone, stay safe & above all PLEASE STAY CALM.
बता दें कि कश्मीर की स्थिति को लेकर अनिश्चितता की स्थिति शुक्रवार (अगस्त 2, 2019) को शुरू हुई थी, जब राज्य प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा को 14 दिन पहले ही रद्द करते हुए यात्रियों और पर्यटकों को जल्द-से-जल्द घाटी को ख़ाली करने के लिए कह दिया था।
अब ऐसे में सबकी निगाहें दिल्ली में होने वाली बैठक पर लगी हुई है, जो आज सुबह 9:30 बजे प्रधानमंत्री मोदी अपने निवास स्थान पर करने वाले हैं। वहीं, पाकिस्तान के इस्लामबाद में भी आज दोपहर 2 बजे कश्मीर मामलों की संसदीय समिति की बैठक बुलाई गई है।