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J&K में परिसीमन फिर से: अभी तक घाटी को मिलता था विशेष लाभ, अब होगा प्रतिनिधि लोकतंत्र

गृह मंत्री अमित शाह के अनुच्छेद 370 हटाने और लद्दाख को अलग केंद्र-शासित प्रदेश बनाने की घोषणा के साथ घाटी और जम्मू के राजनीतिक भविष्य पर अटकलें शुरू हो गईं हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जहाँ लद्दाख केंद्र-शासित प्रदेश के तौर पर चंडीगढ़-मॉडल के अनुरूप ढलेगा, वहीं दिल्ली और पुडुचेरी जैसी व्यवस्था जम्मू-कश्मीर में चलेगी, जहाँ सीमित शक्तियों वाली विधानसभाएँ अस्तित्व में हैं

इस विधानसभा के लिए अलग से परिसीमन निर्वाचन आयोग द्वारा किए जाने की भी बात मीडिया में चल रही है। 21 नवंबर, 2018 को भंग की गई अंतिम विधानसभा में 111 सदस्य थे, जबकि आगामी विधानसभा, जिसमें लद्दाख शामिल नहीं होगा, में 107 सदस्यों के होने की संभावना है। पिछली विधानसभाओं में इनमें से 24 सीटें POK (पाकिस्तान के कब्ज़े का कश्मीर) की होतीं थीं, जिन्हें फ़िलहाल खाली छोड़ दिया जाता है, और बहुमत के गणित में नहीं गिना जाता।

अभी तक की विधानसभाओं में कम जनसंख्या के बावजूद कश्मीर घाटी के अधिक विधायक होते थे। परिसीमन में इसी विसंगति को दूर कर जनसांख्यिकीय संतुलन बैठाया जाएगा, ताकि हर विधायक कमोबेश एक ही संख्या के लोगों का प्रतिनिधित्व करे और प्रतिनिधि लोकतंत्र (representative democracy) की आत्मा के अनुरूप जनसंख्या विधानसभा में प्रतिबिम्बित हो।

‘कश्मीरी लड़की शादी कर अन्य राज्यों में जाएगी, देखते-देखते J&K सही मायने में पूरे भारत में घुल-मिल जाएगा’

राज्यसभा में फ़िलहाल (5 अगस्त, शाम को) गृह मंत्री अमित शाह का भाषण चल रहा है, और वह अनुच्छेद 370 के विषय में सदन को सम्बोधित कर रहे हैं। इस दौरान गृह मंत्री ने कई महत्वपूर्ण बातें कीं, जिनमें 370/35A के विकास में बाधक होने की बात कहने से लेकर उनके खात्मे को एक रक्तपात भरे युग का अंत बताया। गृह मंत्री बड़ी सूक्ष्मता से 370/35A के कारण खुद कश्मीरियों को हो रहे एक-एक नुकसान को गिना रहे हैं।

अमित शाह ने गुलाम नबी आज़ाद के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, “गुलाम नबी आज़ाद जी आपने पूछा था इंटरस्टेट शादियाँ शुरू हो गई हैं। यदि कश्मीर की लड़की ओडिशा में शादी करती है तो क्या उसके बच्चे को जम्मू-कश्मीर में अधिकार मिलेगा? ऐसा कोई कानून नहीं है। अब समाधान हो गया है। आप खुश हैं इन शादियों से, होने दीजिए इंटरस्टेट मैरिज, कश्मीर की लड़की ओडिशा या अन्य राज्यों में जाएगी, देखते-देखते जम्मू-कश्मीर सही मायने में पूरे भारत में घुल-मिल जाएगा।”

कश्मीर की अर्थव्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा पर्यटन है, लेकिन 370/35A के चलते पर्यटन भी नहीं पनप पाया।

बिल लाने के तरीके पर कॉन्ग्रेस के सवाल उठाने को लेकर शाह ने उन्हें भी आड़े हाथों लिया, और इंदिरा गाँधी के आपातकाल लगाने के तरीके की याद दिलाई।

370 हटाने के बाद हर राज्य को अलर्ट: सांप्रदायिक दंगों के खिलाफ रहें सतर्क, पुलिस से कराएँ मॉक ड्रिल

जम्मू कश्मीर पर नरेंद्र मोदी सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने सोमवार (अगस्त 5, 2019) को सभी राज्य सरकारों को एडवाइजरी जारी की है। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इसमें सांप्रदायिक दंगों के खिलाफ सतर्क रहने की सलाह दी गई है। साथ ही हिंसा को रोकने के लिए पुलिस से मॉक ड्रिल चलाने का निर्देश भी जारी किया गया है।

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। अर्धसैनिक बलों की करीब एक हजार कंपनियाँ घाटी में तैनात हैं। यानी राज्य में अर्धसैनिक बलों के करीब एक लाख जवान सुरक्षा का जिम्मा संभाले हुए हैं। घाटी में इससे पहले इतने सुरक्षाबलों की तैनाती पुलवामा हमले के बाद और बालाकोट एयरस्ट्राइक से पहले की गई थी। सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों में धारा 144 लगा दी है। इंटरनेट और मोबाइल सेवाएँ स्थगित कर दी गई हैं।

जम्मू-कश्मीर को हाई अलर्ट पर रखने के मद्देनजर राज्य के सभी राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं को नजरबंद कर दिया गया है। जिसमें PDP अध्यक्ष और पूर्व सीएम मेहबूबा मुफ्ती और NCP के अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला का नाम भी शामिल है। सरकार का कहना है कि ऐसा माना जा रहा है कि आतंकी किसी घटना को अंजाम दे सकते हैं, इसलिए सरकार सुरक्षा की दृष्टि से ये सब कदम उठा रही है।

सावन के आखिरी सोमवार को शिवभक्त मंदिर जाते हैं, न दें बकरीद पर कुर्बानी: कलीम हैदर नकवी

सावन का अंतिम सोमवार 12 अगस्त को है और उसी दिन बकरीद भी है। इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश के शिया नेता और यूनाइटेड शिया मूवमेंट के महासचिव कलीम हैदर नकवी ने समुदाय वालों से 12 अगस्त को ईद-अल-अजहा के मौके पर कुर्बानी न देने की अपील की है। संगठन के इस पहल को शिया जामा मस्जिद के इमाम जुमा मौलाना शम्सुल हसन खाँ ने भी अपना पूरा समर्थन दिया है।

कलीम हैदर नकवी ने तमाम शिया समुदाय से अपील करते हुए कहा है कि सावन के सोमवार के आखिरी दिन बड़ी संख्या में शिवभक्त मंदिर जाते हैं। ऐसे में लोग 12 अगस्त को जानवरों की कुर्बानी न दें और इस दिन केवल नमाज पढ़ें।

इस पर संगठन शिया धर्मगुरू मौलाना कल्बे जब्बाद और मौलाना यासूब अब्बास से भी बातचीत कर अपील जारी करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। प्रवक्ता समर अब्बास जैदी ने बताया कि शिया मूवमेंट की ओर से अपील में कहा गया कि ईद-उल-अजहा की नमाज सोमवार को ही सभी मस्जिदों में अपने निर्धारित समय पर होगी। शिया समुदाय से मंगलवार को कुर्बानी करने की अपील की गई है।

गौरतलब है कि, इससे पहले बकरीद पर कुर्बानी को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना केआर फिरंगी महली ने सभी से अपील करते हुए कहा था कि सड़कों पर जानवरों की कुर्बानी न दी जाए। उनका कहना था कि कुर्बानी घर या मदरसे को अंदर दी जा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कुर्बानी केवल उन्हीं पशुओं की दी जानी चाहिए, जो कि सरकार द्वारा प्रतिबंधित न हो।

जम्मू-कश्मीर में 87 साल बाद लागू होगी IPC, रणबीर दण्ड संहिता Article 370 के साथ खत्म

भारत के क़ानूनी मामलों में अदालतें भारतीय दण्ड संहिता (IPC) के तहत कार्रवाई करती हैं। लेकिन जम्मू-कश्मीर में IPC की जगह रणबीर दण्ड संहिता (RPC) के तहत कार्रवाई की जाती थी। अब अनुच्छेद-370 को हटा देने से जम्मू-कश्मीर में भी भारतीय दण्ड संहिता लागू होगी।

जम्मू-कश्मीर में रणबीर दण्ड संहिता लागू थी, जिसे रणबीर आचार संहिता के नाम से भी जाना जाता था। इस राज्य में ब्रिटिश राज से ही रणबीर दण्ड संहिता लागू थी। दरअसल, महाराजा रणबीर सिंह वहाँ के शासक थे। इस वजह से राज्य में 1932 में महाराजा के नाम पर रणबीर दण्ड संहिता लागू की गई थी। यह संहिता थॉमस बैबिंटन मैकाले की भारतीय दण्ड संहिता के ही समान थी, लेकिन कुछ धाराओं में भिन्नता थी।

आख़िर क्या अंतर है IPC और RPC में…

  • IPC की धारा-4 कम्प्यूटर के ज़रिए किए गए अपराधों को व्याख्यित और संबोधित करती है, लेकिन RPC में इस संदर्भ में कोई ज़िक्र नहीं है। 
  • IPC की धारा-153 CAA के तहत सार्वजनिक सभाओं में हथियार ले जाना दण्डनीय अपराध है, वहीं RPC में इसका कोई उल्लेख नहीं है।
  • IPC की धारा-195 के तहत झूठी गवाही या बयान के लिए दण्ड का प्रावधान है, लेकिन RPC में इसका कोई उल्लेख नहीं है।
  • IPC की धारा- 304B का संबंध दहेज के कारण होने वाली मौतों से है। लेकिन, RPC में ऐसा ऐसा कोई उल्लेख नहीं है।
  • RPC की धारा- 190 के तहत सरकार ऐसे व्यक्ति को सज़ा दे सकती है, जो सरकार द्वारा अमान्य या ज़ब्त की गई सामग्री का प्रकाशन या वितरण करता हो। इसका संबंध ख़ासतौर पर पत्रकारिता, सोच, विचार और अभिव्यक्ति से है।
  • RPC की धारा- 167A के अनुसार जो भी सरकारी कर्मचारी किसी ठेकेदार को उसके ठीक ढंग से न किए गए काम के एवज में भुगतान करता है, तो उनके लिए सज़ा का प्रावधान है। वहीं, IPC में इसका कोई उल्लेख नहीं है।
  • RPC की धारा-420 A के तहत सरकार, सक्षम अधिकारी या प्राधिकरण के लिए किसी भी समझौते में होने वाले छल या धोखाधड़ी की सज़ा का प्रावधान है, लेकिन IPC में इसका कोई ज़िक्र नहीं है।
  • RPC की धारा- 204 A साक्ष्य मिटाने या उससे छेड़छाड़ से संबंधित है, जिसमें सज़ा का प्रावधान है, लेकिन IPC में इसका कोई ज़िक्र नहीं है।
  • RPC की धारा-21 सार्वजनिक नौकरी के दायरे की व्याख्या करता है, वहीं IPC में इसका दायरा सीमित है।

दरअसल, भारत के बहुत से ऐसे क़ानून थे, जो जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होते थे। इसके लिए केंद्र की पूर्ववर्ती सरकारें ज़िम्मेदार थीं। अनुच्छेद-370 की आड़ में कुछ ऐसे भी संवैधानिक आदेश लागू किए गए, जिनके कारण अनुच्छेद 35-A जैसे असंवैधानिक प्रावधान जोड़े गए।

नेहरू और इंदिरा ने 370 की आड़ में शेख अब्दुल्ला से विभिन्न करार किए जिनकी न कोई वैधानिकता थी न ज़रूरत। उन्हीं करारों के चलते जम्मू कश्मीर राज्य को अलग झंडा और न जाने क्या-क्या दे दिया गया जिसके कारण बाद के वर्षों में अलगाववाद को हवा मिली। भारत के विभाजन के समय जनता की राय लेने जैसी कोई शर्त नहीं रखी गई थी। केवल राजा को ही यह तय करना था कि वह अपने राज्य सहित किस डोमिनियन में जाएगा।

‘सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों को गूँगा समझ रही है, मैं सुप्रीम कोर्ट में दूँगी चुनौती’

मोदी सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया है। इस फैसले से जहाँ देश भर में जश्न का माहौल है, वहीं तथाकथित लिबरलों को तगड़ा झटका लगा है। ट्विटर पर उनकी तरफ से तरह तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही है और साथ ही इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है। शाह फैसल की पार्टी से जुड़ीं शेहला रशीद ने कहा कि वो इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगी। सरकार को गवर्नर मान लेने और संविधान सभा की जगह विधानसभा को रखने का फैसला संविधान के साथ धोखा है। सभी प्रगतिशील ताकतें एकजुट होकर लड़ाई लड़ेंगी। उन्होंने कहा कि वो दिल्ली और बेंगलुरु में विरोध प्रदर्शन करेंगी।

शेहला रशीद ने कहा कि इसके लिए वो वकीलों और कुछ कार्यकर्ताओं की एक टीम के साथ संपर्क में है। उन्होंने कहा कि इसे लड़ने के लिए वो सबसे अच्छा कानूनी तरीका खोज लेंगी। शेहला ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट में उन्हें न्याय मिलेगा। शेहला ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार का ये कदम पूरी तरह से अलोकतांत्रिक और अस्वीकार्य है। उनका कहना है कि देश के संघीय ढाँचे और धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को मजबूत करने के बजाय, वो उन्हें कमजोर कर रहे हैं। यह देश के संघीय व्यवस्था का अपमान है।

इसके साथ ही वो केंद्र सरकार पर भड़कती हुईं बोली कि सरकार जम्मू कश्मीर के लोगों को गूँगा समझ रही है और उनके साथ वैसा ही व्यवहार किया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार ने जम्मू कश्मीर के राजनेताओं को नजरबंद और संचार व्यवस्था को स्थगित इसलिए किया, ताकि कोई आवाज़ ना उठे। शेहला का कहना है कि चूँकि, वो कश्मीर से बाहर हैं, इसलिए उनके पास खुद को अभिव्यक्त करने की आवाज है। उन्होंने कहा कि वो सभी से अनुरोध करती हैं कि इस आंदोलन में कश्मीरियों के साथ खड़े हों और उनके साथ सहानुभूति रखें।

वहीं, संसद में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के सांसदों- नजीर अहमद लवे और मीर मोहम्मद फैयाज ने संविधान की प्रतियाँ और कपड़े फाड़कर अपना विरोध जाहिर किया। जिसके बाद सभापति ने उन्हें सदन से जाने का आदेश दे दिया। पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती ने संविधान की धारा 370 को खत्म करने के मोदी सरकार के फैसले को ‘भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला दिन’ बताया।

370 का ‘पावर’ खत्म होने के बाद घाटी और आसपास के महत्वपूर्ण स्थानों पर 8000 अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तैनाती

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने की सिफ़ारिश की। अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का संकल्प राज्यसभा में पेश किया। शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 का सिर्फ़ एक खंड लागू होगा और राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी दे दी है। जिसके बाद से ही संसद से लेकर देश के कई जगहों पर हंगामा जारी है। हालाँकि, स्थिति सामान्य है फिर भी सावधानी बरतते हुए श्रीनगर में घाटी और आसपास के महत्वपूर्ण स्थानों जैसे, नागरिक सचिवालय, पुलिस मुख्यालय, हवाई अड्डे और विभिन्न केंद्र सरकार के प्रतिष्ठानों में 8000 अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है।

पुलिस और अर्धसैनिक बलों को घाटी में पहले से ही हाई अलर्ट पर रखा गया है। रविवार को ही, पुलिस स्टेशन में पारंपरिक टेलीकॉम नेटवर्क को बायपास करने के लिए सैटेलाइट फोन उपलब्ध कराए गए थे।

जानकारी के अनुसार, आज होने वाले वाले बड़े फैसले के मद्देनज़र केंद्र ने विभिन्न एयरलाइन्स के टिकट बढ़ते दाम पर रोक लगाते हुए उसकी क़ीमत 7,000 रुपए कर दी थी जिससे अमरनाथ यात्री और पर्यटक घाटी से निकलने में काफ़ी मदद मिली। क्रिकेट टीमों के मेंटर पूर्व भारतीय ऑलराउंडर इरफान पठान अपने घर सुरक्षित लौट गए थे। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के मद्देनज़र श्रीनगर में चल रहे अंडर-16 और अंडर-19 ट्रायल्स स्थगित कर दिए गए थे। ग़ौरतलब है कि इरफान पठान अंडर-16 (विजय मर्चेंट ट्रॉफी) और अंडर-19 (कूच बेहार ट्रॉफी) के ट्रायल्स को देखने और संभावित खिलाड़ियों की सूची तैयार करने के लिए श्रीनगर में थे।

इरफान पठान ने रविवार को पीटीआई से कहा, ”हमने फ़िलहाल जूनियर टीम ट्रायल्स का दूसरा चरण स्थगित कर दिया है। हमारा पहला चरण जून और जुलाई में चला था। यह दूसरा चरण था। सरकार की तरफ से परामर्श जारी हुआ है और इसलिए जम्मू कश्मीर क्रिकेट संघ (जेकेसीए) सीईओ बुखारी और प्रशासक न्यायमूर्ति प्रसाद से मैंने मुलाकात की। इसके बाद लड़कों को वापस घर भेजने का फैसला किया गया।”

370 का ‘पावर’ खत्म होने के बाद कश्मीर दौरे पर अजित डोभाल, स्थितियाँ सामान्य होने तक नजर रखेंगे

जम्मू कश्मीर पर सरकार के ऐतिहासिक फैसले के बाद देश भर में जश्न का माहौल है। इसी बीच खबर आ रही है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल आज (5 अगस्त, 2019) जम्मू-कश्मीर के दौरे पर जाएँगे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेंगे। साथ ही वे अन्य वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के साथ मिलकर जमीनी हालात की समीक्षा करेंगे। इधर, केंद्र ने जम्मू-कश्मीर से संबंधित फैसलों के बाद राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में सुरक्षाबलों को अधिकतम सतर्कता बरतने के लिए कहा है।

केंद्र ने राज्यों को निर्देश दिया है कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने या शांति भंग की आशंका के मद्देनजर जम्मू कश्मीर के निवासियों और वहाँ के छात्रों का विशेष ध्यान रखा जाए। किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए सेना को तैयार कर रखा गया है। बताया जा रहा है कि अजित डोभाल जम्मू कश्मीर की स्थितियों को देखते हुए वहाँ रुक भी सकते हैं और स्थितियाँ सामान्य होने तक सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखेंगे।

गौरतलब है कि अजीत डोभाल जुलाई के अंतिम सप्ताह में भी कश्मीर पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के आला अफसरों के साथ अलग-अलग बैठकें की थीं। इनमें राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार, मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यन, डीजीपी दिलबाग सिंह, आईजी एसपी पाणि जैसे लोग शामिल थे। कश्मीर दौरे पर दिल्ली से आईबी के आला अधिकारियों की टीम भी एनएसए के साथ थी।

अजित डोभाल के कश्मीर दौरे से लौटते ही वहाँ 10,000 अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजने का फैसला हुआ था। तब केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया था कि अतिरिक्त केंद्रीय बलों की तैनाती से कश्मीर में आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने का अभियान मजबूत होगा। साथ ही, राज्य में कानून-व्यवस्था को चाक-चौबंद बनाए रखने में मदद मिलेगी।

कोई अलग देश बना रहा था, कोई पाकिस्तान से घड़ी मिला रहा था: 370 पर मोदी को ऐसे दिया था चैलेंज

जम्मू-कश्मीर के राज्य से केंद्र-शासित प्रदेश बनने और लद्दाख के घाटी से ‘आज़ाद’ होने के साथ एक ‘Recap’ भी लाज़मी है उन बयानवीरों के वीरता भरे बयान का, जो कश्मीर से 370 जाने पर कभी “मार दूँगा-चीर दूँगा”, तो कभी “ऐ जानेवफ़ा, ये ज़ुल्म न कर” का ऑड-ईवेन खेलते थे। इनमें पूर्व मुख्यमंत्रियों महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला से लेकर पार्ट-टाइम क्रांतिकारी शेहला रशीद और ‘कश्मीर के केजरीवाल’ शाह फ़ैसल शामिल हैं।

‘पापा’ पापा होते हैं

प्रधानमंत्री मोदी को मोदी-समर्थकों के ‘पापा’ बताने वालीं शेहला रशीद शायद भूल गई थीं कि पापा होते क्या हैं, और देश के प्रधानमंत्री हर इंसान के बराबर ‘माई-बाप’ होते हैं। आज ‘पापा की मार’ खाकर शेहला रशीद अपने इस ट्वीट को याद कर रही होंगी।

370 भी खत्म, कश्मीर हिंदुस्तान में भी… लेकिन अब्दुल्ला घर में ‘कैद’

‘छोटू अब्दुल्ला’ ने दावा किया था, मोदी सरकार 1.0 के शपथ-ग्रहण के बमुश्किल 24 घंटे के भीतर, कि या तो कश्मीर हिंदुस्तान का हिस्सा नहीं बचेगा, या अनुच्छेद 370 बदस्तूर जारी रहेगा। उनका व्यंग्य उन उम्मीदों पर था, जो भाजपा के समर्थकों में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद आ गई थी कि अब 370 के दिन गिनती के बचे हैं। गिनती शायद कुछ लम्बी हो गई (5 साल+), लेकिन आशा गलत नहीं निकली। गलत साबित ‘छोटू’ हुए, जो आज अपने घर में नज़रबंद हैं।

घड़ी किसी से भी मिलाइए, शाह फ़ैसल, हाज़िरी IST से ही होगी

इसी साल जब देश में लोक सभा चुनाव चल रहे थे, और लिबरलों के मुताबिक देश ‘साम्प्रदायिक तनाव और ध्रुवीकरण’ से गुज़र रहा था, तो कश्मीर के केजरीवाल माने जाने वाले शाह फ़ैसल ने आग में घी डालते हुए भाजपा को चुनौती दी कि 370/35A हटा कर दिखाए। साथ ही धमकी भी दी कि अगर ऐसा किया तो वे अपनी घड़ी भारतीय समय (IST) से 15 मिनट पीछे कर लेंगे। बहुत लोग शायद समझ न पाएँ, इसलिए यह जानना जरूरी है कि पाकिस्तान और भारत (कश्मीर) के स्थानीय समय में 15 मिनट का फ़र्क है। यानी 15 मिनट कम का अर्थ हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच कश्मीर का अलग देश बनाने की धमकी।

आज शाह फ़ैसल के पास आराम से समय होगा कि वे बैठें और तय करें कि वे अपनी कलाई पर बँधी घड़ी किस देश के समय से चलाना चाहते हैं। लेकिन खुदा-न-खास्ता अगर कश्मीर में किसी कचहरी या सरकारी दफ़्तर के चक्कर काटने पड़ ही गए, तो IST से ही करना पड़ेगा।

‘जंगली मोदी’ से घबरा गए?

वही शाह फ़ैसल, जो अप्रैल में भाजपा को 370/35A हटाने की चुनौती दे रहे थे, तीन महीने के भीतर अमित शाह-डोवाल के कश्मीर दौरे और उसके बाद सुरक्षा बलों की आवक से इतना बैकफ़ुट पर आ गए कि मोदी को ‘डील’ देने लगे। मोदी के ‘Man Vs Wild’ एपिसोड के प्रचार की पेशकश की, अगर मोदी सरकार 370/35A को बख्श दे तो।

तेल किसका निकला?

महबूबा मुफ़्ती ने कहा था लोकसभा चुनावों के अंतिम दौर में कि न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी; न भाजपा आएगी पलट कर, न अनुच्छेद 370 हटेगा। शायद इसीलिए जब जनता ने 90 मन तेल (भाजपा को भारी बहुमत) के साथ इन्हें लोकसभा भेज दिया तो महबूबा, जो खुद अंनतनाग में चुनाव हार गईं, की ज़बान फ़िसलने लगी। कभी 370/35A हटाने को बारूद से खेलना बतातीं, तो कभी हाथ जोड़ कर चिरौरी करतीं कि इस्लाम में हाथ जोड़ना मना है, फिर भी कर रही हूँ; मेरे 370/35A को बख़्श दो। राधा का ‘राग कश्मीर’ पर नृत्य तो अभी शुरू हुआ है!

चलती बस के फ्यूल टैंक में आग लगने से हुआ बड़ा हादसा: 20 की मौत, दर्जनों घायल

बिहार के पूर्णिया में मुजफ्फरपुर से सिलीगुड़ी जाती यात्रियों से भरी बस सोमवार ( अगस्त 5, 2019) की सुबह एक हादसे का शिकार हो गई। बताया जा रहा है कि रास्ते में डिवाईडर से टकराने के बाद बस के फ्यूल टैंक में आग लग गई, जिसने देखते ही देखते अपनी लपटो में पूरी बस को घेर लिया। इस आग में 20 लोगों की झुलसकर मौत हो गई, जबकि बाकी लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। हादसा खंजासी थाना स्थित बस स्टैंड के पास हुआ।

जानकारी के मुताबिक डिवाईडर से टकराने के कारण दुर्घटनाग्रस्त होने वाली ये बस ‘न्याय ट्रैवल्स’ की थी। जिसमें हादसे के समय 50 लोग सवार थे। इनमें दो दर्जन से ज्यादा झुलसने के कारण घायल हैं जबकि 20 की मौत हो गई।

खबरों की मानें तो स्लीपर बस होने के कारण घटना के समय कई यात्री ऊपर के बर्थ पर सो रहे थे। जिस कारण वे आग लगी बस से नहीं निकल पाए और उनकी मौत हो गई। कई यात्री किसी तरह शीशा तोड़कर बस से निकल पाने में कामयाब रहे।

बस में आग लगने की सूचना पाकर कई लोग घटनास्थल पर पहुँचे और बस में लगी आग को बुझाने की कोशिश भी की, लेकिन 20 लोगों को आग की चपेट से नहीं बचाया जा सका।

घटनास्थल पर पहुँचे बचावकर्मियों ने घायलों को सदर अस्पताल पहुँचाया। सूचना मिलते ही एसपी भी मौक़े पर पहुँच गए और डीएम के साथ मिलकर उन्होंने घटना स्थल का मुआएना किया। हादसे के कारणों की जाँच फिलहाल जारी है। अधिकारी घटना के विस्तृत ब्यौरे की प्रतीक्षा में हैं।