Wednesday, December 8, 2021
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370 का ‘पावर’ खत्म करने का प्रस्ताव पेश: J&K पर ऐतिहासिक निर्णय, मोदी सरकार ने लिया बड़ा व कड़ा फैसला

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370(1) के अलावा अनुच्छेद 370 के सभी खंड हटाने का निर्णय लिया गया है। अमित शाह ने कहा कि सरकार की ओर से...

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा को संबोधित किया। असमंजस की स्थिति को स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370(1) के अलावा अनुच्छेद 370 के सभी खंड हटाने का निर्णय लिया गया है। अमित शाह ने कहा कि सरकार की ओर से जो चारों बिल आए हैं, वह कश्मीर मुद्दे पर ही है।

अनुच्छेद 370 (1) के अलावा सभी खंड राष्ट्रपति के अनुमोदन से खत्म होंगे। अमित शाह ने कहा कि राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद अनुच्छेद 370 के सभी खंड लागू नहीं होंगे। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का प्रस्ताव पेश करते ही विपक्षी दलों ने हंगामा शुरू कर दिया।

जम्मू-कश्मीर में गृह मंत्री द्वारा अनुच्छेद 370 हटाने के प्रस्ताव के बाद राज्यसभा में विपक्ष ने हंगामा किया। विपक्षी पार्टियों के हंगामे के बीच सदन का कार्रवाई स्थगित कर दी गई।

आपको बता दें कि कश्मीर मुद्दे पर चल रही अटकलों के बीच आज (अगस्त 5, 2019) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर कैबिनेट की बैठक की गई। यह बैठक सुबह 9:30 बजे शुरू हुई थी। इसमें गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाकार अजित डोभाल, विदेश मंत्री जयशंकर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद शामिल थे। खबरों के मुताबिक इस बैठक से पहले पीएम आवास पर मोदी-शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल के बीच अलग से भी बैठक हुई थी। बैठक के बाद से मीडिया में कयास लगाए जाने लगे थे कि जम्मू-कश्मीर पर केंद्र सरकार ने कोई बड़ा फैसला ले लिया है।

जम्मू-कश्मीर पर चल रही हलचल के बीच केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों में अलर्ट जारी किया गया है, साथ ही कुछ को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इस बीच उत्तर प्रदेश और अन्य कुछ राज्यों में एंटी राइट ड्रिल (दंगा रोधी ड्रिल) करवाने को लेकर भी सुझाव दिया गया है।

गौरतलब है कश्मीर मुद्दे पर केंद्र सरकार का इशारा हमेशा से साफ़ रहा है। उन्होंने कश्मीर समस्या के मसले पर हमेशा से अपना मत एक पक्ष में रखा है। जो स्थिति फिलहाल देश में कश्मीर राज्य को लेकर चल रही हैं, उसका इशारा कहीं न कहीं मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में तात्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा कर दिया गया था। उस दौरान पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 35-A जैसे अनुच्छेद पर अपने विचारों को रखते हुए बताया था कि किस तरह 35-ए, जिसे आज अलगाववादी नेता कश्मीर का हक बता रहे हैं, उसने कश्मीर के साथ पूरे देश को प्रभावित किया हुआ है और इसका हल मोदी सरकार में होकर रहेगा।

हमारे लिए जानना जरूरी है कि अरुण जेटली ने उस दौरान सवाल किया था कि देश के बाकी हिस्सों पर लागू होने वाला क़ानून का शासन इस राज्य में लागू क्यों नहीं होना चाहिए? क्या हिंसा, अलगाववाद, व्यापक पैमाने पर पत्थरबाजी (Stone Pelting), ख़तरनाक विचारधारा इत्यादि को इस दलील पर अनुमति दी जानी चाहिए कि अगर हम इसकी जाँच करते हैं, तो इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने इसे गलत नीति बताते हुए कहा था “35-ए विकास-विरोधी साबित हुई है। इसलिए आज वर्तमान सरकार ने निर्णय लिया है कि कश्मीर घाटी के लोगों के हित में और भारत के हित में, क़ानून का शासन सबके लिए समान रूप से लागू होना चाहिए।”

जेटली द्वारा कहे गए ये शब्द और वर्तमान परिस्थितियाँ आज बताती हैं कि मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल से ही इस विषय पर अपना काम कर रही थी। वो इस गंभीर विषय को लेकर पहले से ही कार्यवाई करने का विचार बना रहे थे, लेकिन चुनावों के कारण ये टल गया। उस दौरान तात्कालीन वित्त मंत्री ने 35 ए का हवाला देकर संकेत दे दिए थे कि विकास-विरोधी 35-ए का आगे क्या होने वाला है। उन्होंने कहा था – , “यह समृद्धि, संसाधन निर्माण और रोज़गार सृजन को रोकता है। कॉलेज की पढ़ाई के लिए छात्रों को नेपाल और बांग्लादेश सहित सभी जगहों पर जाना पड़ता है। जम्मू में केंद्र सरकार द्वारा स्थापित सुपर-स्पेशियलिटी सुविधा सहित इंजीनियरिंग कॉलेज और अस्पताल या तो अंडर-यूज़ किए गए या प्रयोग करने लायक ही नहीं हैं क्योंकि बाहर से प्रोफेसर और डॉक्टर वहाँ जाने के लिए तैयार ही नहीं हैं। अनुच्छेद 35A ने निवेश को रोक दिया है और राज्य की अर्थव्यवस्था को नष्ट कर दिया है। इस आर्टिकल को कई लोग राजनीतिक हथियार रूप में भी प्रयोग कर रहे हैं।”

उन्होंने साफ़ किया था, आज की तारीख़ में राज्य (जम्मू कश्मीर) के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं हैं। अधिक वित्तीय लाभ उठाने की इसकी क्षमता को अनुच्छेद 35A द्वारा अपंग कर दिया गया है। कोई भी निवेशक यहाँ पर उद्योग, होटल, निजी शिक्षण संस्थान या निजी अस्पताल स्थापित करने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि वह राज्य में न तो ज़मीन या संपत्ति ख़रीद सकता है और न ही उसके अधिकारी ऐसा कर सकते हैं। उनके बच्चों को सरकारी नौकरियों या कॉलेजों में प्रवेश नहीं मिल सकता है। आज, ऐसी कोई बड़ी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय होटल चेन नहीं है, जिसने पर्यटन केंद्रित राज्य में एक भी होटल स्थापित किया हो।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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