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ममता जिंदाबाद न बोलने पर TMC कार्यकर्ताओं ने की कॉलेज के छात्रों और प्रोफेसर की पिटाई, Video वायरल

पश्चिम बंगाल से टीएमसी के कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी का एक नया कारनामा सामने आया है। जानकारी के मुताबिक हुगली के हीरालाल पाल कॉलेज में एक प्रोफेसर को टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा सिर्फ़ इसलिए मारा गया क्योंकि वे उन छात्रों को बचाने का प्रयास कर रहे थे जिनसे टीएमसी कार्यकर्ता ‘टीएमसी जिंदाबाद’ और ‘ममता बनर्जी जिंदाबाद’ बुलवाने के लिए मारपीट कर रहे थे।

खबरों के मुताबिक यहाँ टीएमसी छात्र संगठन से जुड़े छात्र अन्य छात्रों से ‘ममता बनर्जी जिंदाबाद’ का नारा लगाने को कह रहे थे, लेकिन जब दूसरे छात्रों ने ऐसा करने से मना कर दिया तो उन्होंने एक सीनियर छात्रा से मारपीट की। जब प्रोफेसर सुबरता चट्टोपाध्याय छात्रों को टीएमसी के छात्र संघ से बचाने के लिए बीच में आए तो टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उनपर भी हमला कर दिया। जिसके बाद प्रोफेसर पर हुए हमले की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगी।

प्रोफेसर के मुताबिक करीब एक बजे एक छात्रा एमए के एग्जाम के बाद अपने दोस्तों के साथ क्लासरूम में फोटो खींच रही थी कि तभी टीएमसी का छात्रसंघ वहाँ पहुँचा और उनसे बदसलूकी करने लगा। विवाद बढ़ने पर उन्होंने मामले को सुलझाना चाहा, लेकिन तृणमूल समर्थक छात्रों से ममता बनर्जी जिंदाबाद और तृणमूल जिंदाबाद के नारे लगाने को कहने लगे। जब छात्रों ने ऐसा करने से मना किया तो उन्होंने छात्रा को थप्पड़ मार दिया।

इसके बाद जो हुआ उसे हम सोशल मीडिया पर वायरल हुई वीडियो में देख सकते हैं। किस तरह प्रोफेसर के साथ टीएमसी कार्यकर्ताओं ने न केवल सिर्फ़ धक्का-मुक्की की बल्कि उनके साथ बेरहमी से मारपीट भी की। इस घटना के बाद प्रोफेसर सुब्रतो कॉलेज के एंट्रेंस गेट पर अपना सिर पकड़कर बैठे गए और कहने लगे कि उनके चेहरे और सिर पर चोट आई है। खबरों की मानें तो इस मामले के मद्देनजर प्रोफेसर सुब्रतो चट्टोपाध्याय की तरफ़ से उत्तरपाड़ा थाने में तहरीर दे दी गई है।

उनका कहना है कि छात्र संघ के सदस्य कैंपस में हमेशा उपद्रवी बर्ताव करते हैं लेकिन फिर भी वे उनके नाम नहीं ले सकते। क्योंकि अगर उन्होंने ऐसा किया तो उन्हें कैंपस के अंदर नहीं घुसने दिया जाएगा।

गौरतलब है टीएमसी छात्र संघ के सदस्यों द्वारा आदिवासी महिला स्टाफ का शोषण करने के विरोध में इससे पहले भी रविंद्र भारती यूनिवर्सिटी के कई एचओडी और डीन इस्तीफ़ा दे चुके हैं। लेकिन हालातों में कोई सुधार नहीं हुआ।

दूसरे मजहब के ख़ौफ़ से 150 हिन्दू धर्मांतरण और पलायन को मजबूर: रिपोर्ट्स

उत्तर प्रदेश के बरेली के एक गॉंव में मजहब विशेष से खौफजदा हिन्दू समुदाय के लोग पलायन और धर्मांतरण को मजबूर हैं। दिल्ली से क़रीब 300 किलोमीटर दूर बरेली के मिल्क पिछोड़ा गाँव में हिन्दू अल्पसंख्यक और समुदाय विशेष वाले बहुसंख्यक हैं। इस गॉंव के हिन्दुओं की माने तो दूसरे समुदाय वाले उन्हें पूजा-पाठ नहीं करने देते। विरोध करने पर उनके घर की लड़कियों को उठाने की धमकी देते हैं। हिन्दुओं के मुताबिक कई बार गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन उनकी नहीं सुन रहा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह गाँव बरेली ज़िला मुख्यालय से लगभग 70 किमी की दूरी पर है जो कि वरुण गाँधी के संसदीय क्षेत्र पीलीभीत की बहेड़ी विधानसभा के अंतर्गत आता है। गाँव में लगभग 150 हिन्दू और 1,000 समुदाय विशेष से हैं। गाँव के हिन्दुओं का कहना है कि ग्राम समाज की ज़मीन पर पिछले 70 वर्षों से एक छोटा-सा मंदिर है, जिसका निर्माण कार्य गाँव वाले मिलकर कराना चाहते हैं। लेकिन, दूसरे समुदाय के लोग उन्हें न तो पूजा करने देते हैं और न ही मंदिर का निर्माण करने दे रहे हैं। विरोध करने पर दूसरे समुदाय के लोग लाठी-डंडों और ईंट-पत्थरों से उन पर हमला कर देते हैं।

इस सम्बन्ध में ऑपइंडिया ने बरेली ज़िले के एसएसपी मुनीराज और एएसपी अर्पित विजयवर्गीय से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस ने ऐसी घटना से इनकार किया है।

दैनिक जागरण ने हिन्दू महिलाओं के हवाले से बताया है कि सम्प्रदाय विशेष के लोग मंदिर में घंटा बजाने और मूर्ति पर जल चढ़ाने भी नहीं देते। यदि कोई हिन्दू इसका विरोध करता है तो दूसरे समुदाय के लोग उनके घर की लड़कियों को उठा लेने की धमकी देते हैं। सरस्वती नामक महिला ने बताया कि रोज-रोज इस तरह के धमकी भरे माहौल में रहना दूभर हो गया है। सभी अधिकारियों से मदद की गुहार भी लगाई, लेकिन उसका कोई नतीजा अब तक नहीं निकला है। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय विधायक छत्रपाल सिंह से भी कोई मदद नहीं मिली। सरस्वती ने कहा कि जहाँ पूजा-पाठ की स्वतंत्रता न हो, वहाँ से चले जाना ही बेहतर है।

दैनिक जागरण की ख़बर

दैनिक जागरण की ख़बर

ग्रामीणों का कहना है कि केन्द्र में मोदी और राज्य में योगी सरकार है। बावजूद इसके हिन्दू न तो कांवड़ यात्रा निकाल सकते हैं और न ही पूजा-पाठ कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने पुलिस पर भी एकतरफ़ा कार्रवाई का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने हिन्दू समाज के सैकड़ों लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज किया और सभी को मुचलका पाबंद भी किया। इन सब से तंग आकर ग्रामीणों ने यह फ़ैसला लिया है कि इस मामले पर अगर उनकी सुनवाई नहीं की गई तो या तो वो धर्म परिवर्तन कर लेंगे और या फिर गाँव छोड़कर चले जाएँगे।

ख़बरों के अनुसार, बरेली के एसएसपी मुनीराज का कहना है कि ग्रामीण नया मंदिर बनाना चाहते हैं, जो नियम के विरुद्ध है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार किसी नए धर्मिक स्थल का निर्माण नहीं हो सकता।

अजमेर में चल रहा ‘धर्मांतरण का कारखाना’: बीजेपी MLA का दावा

राजस्थान के अजमेर में पिछले कुछ समय से “धर्मांतरण का कारखाना” चल रहा है। यह दावा राज्य के भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी ने किया है। उन्होंने कहा है,”कुछ समय से अजमेर में धर्मांतरण का कारखाना चल रहा है। पहले यह कोटा में था। अब अजमेर में भी पैर पसार चुका है।”

उन्होंने कहा कि हाल ही में किशनगढ़ की घटना सामने आई है। वहॉं एक गरीब परिवार रहता है। कुछ समय से वहॉं तीन ईसाई महिलाएँ प्रार्थना के बहाने जा रही हैं। 12-15 साल की उम्र के बच्चों और कुछ महिलाओं को इकट्ठा कर वे धर्म परिवर्तन की बात करती हैं।

देवनानी ने दावा किया कि लोगों से अपने घरों से हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरें हटा कर ईसा मसीह की पूजा करने को कहा गया। उन्होंने कहा, “कई परिवार गरीब हैं। पैसे का लालच देकर धर्मांतरण निंदनीय है। इस मुद्दे को लेकर किशनगढ़ में तनाव है।”

उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण के नाम पर यह सब हो रहा है। पैसे का लालच देकर धर्मांतरण की
ईसाई मिशनरियों की कोशिश को हिन्दू संगठन बर्दाश्त नहीं करेंगे।” राज्य सरकार से इनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की माँग करते हुए भाजपा विधायक ने कहा, “हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। सरकार उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई करे। उन्हें पैसा कहाँ से मिलता है? हम इसका स्रोत जानना चाहते हैं।”

उन्होंने कहा यदि पैसे देकर या दबाव डालकर धर्मांतरण का प्रयास होगा तो समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और किसी और को भी इसे बर्दाश्त नहीं करना चाहिए।

दिल का दौरा पड़ने से हुई तबरेज की मौत: विसरा रिपोर्ट में खुलासा

झारखंड में बाइक चोरी के इल्जाम में भीड़ द्वारा पीटे गए तबरेज अंसारी की मौत में एक नया खुलासा हुआ है। दरअसल, तबरेज की मौत जहर देने या फिर ब्रेन हैमरेज के कारण नहीं हुई बल्कि उसकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई। इसका बात का खुलासा हाल में आई विसरा रिपोर्ट में हुआ।

टाइम्स न्यूज नेटवर्क में प्रकाशित खबर का फोटो

दरअसल, तबरेज की मौत पर डॉक्टरों द्वारा दिए अलग-अलग बयानों ने प्रशासन को हैरानी में डाल दिया था। इसलिए पोस्टमार्टम के बाद तबरेज के विसरा को राँची जाँच के लिए भेजा गया। राँची में प्रयोगशाला में जाँच के बाद रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को दी गई और फिर उसे मंगलवार को डीसी.ए दोड्डे को सौंपा गया। रिपोर्ट में बताया गया कि तबरेज की मौत के पीछे का कारण उसका जहर खाना नहीं था, बल्कि तनाव के कारण दिल का दौरा आना था।

फिलहाल, प्रशासन इस मामले में जाँच के लिए कार्डियोलॉजिस्ट और एमजीएम व अन्य संस्थानों के एक्सपर्ट्स की एक नई उच्च-स्तरीय समिति का गठन करने पर विचार कर रहा है।

झारखंड के विपक्षी नेता हेमंत सोरेन ने इस पूरे मामले में विसरा रिपोर्ट का मजाक उड़ाया है। उन्होंने इस रिपोर्ट के बहाने सरकार को आड़े हाथों लेने का प्रयास किया। उन्होंने कहा जब भुखमरी के कारण कोई मौत होती है तो सरकार दावा करती है कि यह एक बीमारी के कारण हुआ और जब कोई व्यक्ति सरकारी उदासीनता के कारण स्वयं को फाँसी देता है तो वह व्यक्तिगत समस्या के कारण होता है। अब जब भीड़ ने पीटकर मौत के घाट उतार दिया तो सरकार कह रही है कि यह दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई।

बता दें तबरेज की हत्या के इल्जाम में 11 लोगो को गिरफ्तार किया गया था। जिनमें कमल महतो, सुमंत महतो, नामो प्रधान, भीमसेन मंडल, प्रकाश मंडल, कुशल महली, प्रेमचंद महली, महेश महली, सत्यनारायण नायक व चामू नायक समेत 11 आरोपितों का नाम शामिल था।

ये सभी आरोपित अभी जेल में हैं। इनपर आरोप है कि इन्ही लोगों की भीड़ ने चोरी के इल्जाम में पकड़े गए तबरेज की बेरहमी से पिटाई की थी और उससे जबरन जय श्री राम के नारे लगवाए। इस घटना की सूचना के बाद पुलिस ने इन सभी को गिरफ्तार किया ।

प्रभात खबर के मुताबिक आइओ सह आरआइटी थाना प्रभारी, आरएन सिंह ने बताया है कि इन 11 लोगों के ख़िलाफ़ मंगलवार (जुलाई 24, 2019) को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है और मामले की जाँच जारी है। और दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी।

किसानों की जमीन कब्जाने के मामले में आजम खान की बढ़ी मुश्किलें, 8 नई शिकायतें दर्ज

किसानों की जमीन कब्जाने के मामले में रामपुर से समाजावादी पार्टी के सांसद आजम खान की मुश्किलें दिन पर दिन बढ़ती जा रही हैं। जानकारी के मुताबिक उनके ऊपर पहले ही इस मामले से सम्बंधित 26 शिकायतें दर्ज हो चुकी थीं लेकिन अब खबर है कि सपा सांसद और उनके करीबियों पर फिर 8 नई शिकायतें दर्ज हुई है।

इस मामले के मद्देनजर रामपुर पुलिस ने बुधवार (जून 24, 2019) को जज के सामने उन किसानों के बयान भी दर्ज करवाए हैं जिनकी जमीनें जौहर यूनिवर्सिटी बनाने के लिए कब्जाई गई। इन पीड़ित किसानों के बयानों को आज (जुलाई 25, 2019) न्यायधीश के सामने दर्ज करवाया जाएगा।

वहीं, बता दें जमीन कब्जाने के इस मामले में पीड़ित किसानों में से कुछ किसानों के परिवारवालों ने बीते रविवार को राजभवन पहुँचकर राज्यपाल से न्याय की गुहार लगाई थी। जिसके बाद राज्यपाल राम नाईक ने भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर जौहर यूनिवर्सिटी का अधिग्रहण करने की बात कही।

उन्होंने अपने पत्र में उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अल्पसंख्यक विभाग के उपाध्यक्ष फैसल खान का जिक्र करते हुए कहा कि वे कई बार जौहर यूनिवर्सिटी में कई अनियमितताओं की शिकायत कर चुके हैं। इस मामले के मद्देनजर फैसल 8 जुलाई को राज्यपाल से भी मिले थे और उन्होंने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा था।

जिसमें उनका कहना था कि ‘यूनिवर्सिटी में 80 प्रतिशत जमीन सरकार और किसानों से कब्जाई गई है और 20 प्रतिशत जमीन चंदे के पैसे से खरीदी गई है। बावजूद इसके वहाँ बच्चों से मोटी फीस वसूली जाती है। जिसकी कमाई जौहर ट्रस्ट को जाती है और ये जौहर ट्रस्ट आजम खान के घर का निजी ट्रस्ट है।’

राज्यपाल राम नईक का पत्र

गौरतलब है कि फैसल लाला का ये भी कहना है कि जिस प्रकार एएमयू, जामिया और हैदराबाद यूनिवर्सिटी में मात्र 3 हजार में छात्र ग्रैजुएट और पचास हजार में इंजीनियर बन जाते हैं, ठीक उसकी प्रकार जौहर विश्वविद्यालय का अधिग्रहण कर लें तो अल्पसंख्यक समुदाय को इसका सीधा फायदा पहुँचेगा।

अर्बन नक्सल गौतम नवलखा के हिजबुल और कश्मीरी अलगाववादियों से सीधे संबंध: महाराष्ट्र सरकार

भीमा कोरेगाँव केस में आरोपित अर्बन नक्सल गौतम नवलखा के सम्बन्ध में एक और खुलासा हुआ है। पुणे पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के सामने यह दावा किया कि गौतम नवलखा हिज्बुल मुजाहिद्दीन और कई कश्मीरी अलगाववादियों के संपर्क में था। जस्टिस रंजीत मोरे और जस्टिस भारती डोंगरे की बेंच ने हालाँकि, नवलखा की गिरफ्तारी पर लगी रोक अगले आदेश तक बढ़ा दी है।

इस मामले में सुनवाई गुरुवार को को भी जारी रहेगी। राज्य सरकार की तरफ से वकील अरुणा पई ने कोर्ट में पुणे पुलिस की चार्जशीट के आधार बताया, “भीमा कोरेगाँव की जाँच में यह निकल कर आया है कि पाकिस्तान के आतंकी संगठन के जरिए माओवादियों को हथियार सप्लाई करवाए गए थे।”

बता दें कि 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में एलगार परिषद सम्मेलन आयोजित किया था। इसमें भड़काऊ भाषण दिए गए थे जिसके अगले दिन पुणे के भीमा कोरेगाँव में हिंसा हुई थी। इसके बाद FIR दर्ज की गई थी और 28 अगस्त, 2018 को पुलिस ने छापेमारी कर कई वामपंथी अर्बन नक्सलियों को गिरफ्तार किया था। हिरासत में जिनको लिया गया था उनमें से एक गौतम नवलखा भी थे।

गौरतलब है कि अर्बन नक्सल केस के आरोपी गौतम नवलखा ने हाईकोर्ट में याचिका डालकर उन पर दर्ज हुए मामले को खत्म करने की अपील की थी। मुम्बई हाईकोर्ट ने इस पर राज्य सरकार से अपना पक्ष रखने को कहा था।

राज्य सरकार की तरफ से वकील अरुणा पई ने कहा कि भीमा कोरेगाँव की जाँच के दौरान पुणे पुलिस को आरोपी रोना विल्सन और सुरेंद्र गण्डलिक के लैपटॉप से कुछ अहम दस्तावेज मिले हैं। इनसे पता चलता है कि गौतम नवलखा और कुछ नक्सल समूह साल 2011 से ही पाकिस्तानी आंतकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन से सपर्क में थे। इसके अलावा साल 2011 से 2014 के बीच मे गौतम नवलखा कश्मीर के अलगाववादी नेता सैय्यद अली शाह गिलानी और शकील बख्शी से भी सम्पर्क में थे।

बता दें कि माओवादियों के साथ संबंधों को लेकर पुणे पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने पर गौतम नवलखा ने सरकार पर आरोप लगाया था। नवलखा का कहना था कि उनके खिलाफ दर्ज मामला सत्ता खासतौर से मोदी के विरोधियों को निशाना बनाने के लिए सरकार की राजनीतिक चाल है।

हालाँकि, बाद में नवलखा को कोर्ट की तरफ अंतरिम जमानत दे दी गई थी। लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा गौतम नवलखा को गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम छूट का महाराष्ट्र सरकार लगातार विरोध करती रही है।

सोनभद्र खूनी संघर्ष को भुनाने की फ़िराक़ में नक्सली, IB अलर्ट

सोनभद्र के उम्भा गाँव में जमीनी विवाद को लेकर हुए खूनी संघर्ष के बाद सूबे में नक्सलियों के सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है। मीडिया खबरों की मानें तो केंद्रीय खुफिया एजेंसी को मिले इनपुट के अनुसार छत्तीसगढ़ के बस्तर से नक्सलियों की एक थिंक टीम सोनभद्र के आस-पास सक्रिय हुई है, जिसकी सूचना मिलते ही इंटेलिजेंस ब्यूरो की एक टीम सोनभद्र में अपना डेरा जमा लिया। साथ ही यूपी एटीएस भी इलाके में सक्रिय हो गई है।

दरअसल, खूफिया एजेंसी को मिले इनपुट के आधार पर मालूम चला है कि नक्सलियों की एक टीम घटनास्थल के आस-पास के कई गाँवों में ग्रामीणों से संपर्क कर रही है। इतना ही नहीं, उम्भा गाँव में हुए खूनी संघर्ष के बाद आईबी को कई युवाओं के अंडरग्राउंड होने की भी सूचना मिली है। ऐसे में खूफिया एजेंसी को डर है कि अगर संवेदनाओं का फायदा उठाकर बस्तर के नक्सली यहाँ पहुँचते हैं तो किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं।

बता दें आदिवासी बहुल उम्भा गाँव लंबे समय से नक्सल प्रभावित रहा है। 1996 से लेकर 2012 तक ये गाँव नक्सल आंदोलन का शिकार रहा। लेकिन 17 जुलाई जैसी घटना यहाँ उस समय में भी नहीं हुई थी। 17 जुलाई से पहले इस इलाके को शांत माना जाता था लेकिन अब खूफिया एजेंसी को डर है कि नक्सली गाँव वालों की संवेदना को हथियार बनाकर यहाँ अपने पैर पसारने की कोशिश कर सकते हैं।

इस पूरे मामले के मद्देनजर खुफिया एजेंसी उम्भा गाँव में होने वाली गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। इसके अलावा एजेंसी नक्सलियों को चिह्नित करने की कोशिशों में भी जुटी हुई है। साथ ही, आईबी की रडार पर इस समय संचार व्यवस्था से जुड़े वे लोग भी हैं जो नक्सल विचारधारा से जुड़े हैं।

बदले की भावना से ग्रस्त केजरीवाल काम नहीं करने दे रहे हैं जी: अलका लांबा

दिल्ली के चाँदनी चौक से आप विधायक अलका लांबा ने बुधवार (जुलाई 24, 2019) को अपनी पार्टी के संयोजक और दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर हैरान करने वाले आरोप लगाए हैं। अलका लांबा ने दावा किया है कि केजरीवाल उनसे बदला लेने के लिए उन्हें उनके निर्वाचन क्षेत्र में सीसीटीवी लगाने से रोक रहे हैं।

आप विधायक द्वारा यह जानकारी ट्वीट के जरिए दी गई। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अब बदले की भावना से काम कर रहे हैं, जिसका खमियाजा चाँदनी चौक विधानसभा क्षेत्र की जनता को उठाना पड़ रहा है, मेरे द्वारा इलाके में लगवाए जा रहे CCTVs के काम को रुकवाकर AAP* यह कैसी राजनीति करने का उदाहरण पेश करना चाहती है?”

इसके बाद अलका लांबा ने एक और ट्वीट किया और आम आदमी पार्टी को धमकी दी कि वे अपने लोगों की सुरक्षा के लिए सरकार से लड़ने से नहीं डरती हैं। वे लिखती हैं, “मैं अपनी जनता को आप* की द्वेष की राजनीति का शिकार नही होने दूँगी, अपनी जनता के हक़ और सुरक्षा के लिए सरकार के दरवाजे पर भी जाकर लड़ना पड़ेगा तो मैं लड़ूँगी, जनता को जवाब तो देना ही होगा कि क्यों आप के द्वारा CCTVs लगाने का काम रुकवाया गया है? आप में और दूसरों में कोई अंतर नही रहा।”

गौरतलब है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब अलका लांबा ने अरविंद केजरीवाल के प्रति अपनी नाराजगी जगजाहिर की हो। कुछ समय पहले भी लांबा ने कहा था कि दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने उन्हें ट्विटर पर अनफॉलो कर दिया है और ‘आप’ के ऑफिशियल वॉह्ट्स एप ग्रुप से भी रिमूव कर दिया है। इतना ही नहीं, उनका आरोप था कि केजरीवाल लगातार उन्हें लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं। उन्होंने चाँदनी चौक में एक परियोजना का शिलान्यास कार्यक्रम पर न बुलाए जाने पर भी नाराजगी जताई थी

मुखर्जी नगर मामला: सिख ड्राइवर से मारपीट में डेप्यूटी कमिश्नर ने किया 2 सिपाहियों को बर्खास्त

दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में सिख ड्राइवर और कॉन्सटेबल के बीच हुई हाथापाई में पुलिस प्रशासन द्वारा 2 सिपाही नौकरी से बर्खास्त कर दिए गए है। पुष्पेंन्द्र शेखावत और सत्य प्रकाश नाम के इन दो सिपाहियों को नौकरी से 6 महीने के लिए निकाला गया है।

मामले में दिल्ली प्रशासन द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि ऐसे कृत्यों से पुलिस खासकर दिल्ली पुलिस मेट्रोपॉलिटन फोर्स की छवि खराब होती है, जिससे लोगों को काफी उम्मीदें हैं। पूरे घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए डेप्युटी कमिश्नर राकेश कुमार (फर्स्ट बटालियन, डीएपी) ने कॉन्स्टेबल पुष्पेंदर शेखावत और कॉन्स्टेबल सत्य प्रकाश को तत्काल प्रभाव से नौकरी से हटा दिया है।

हालाँकि, बता दें कि इस मामले में घटना के बाद ही तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका था, लेकिन बाद की जाँच में पुष्पेंद्र शेखावत और कांस्टेबल सत्यप्रकाश को गलती के लिए जिम्मेदार माना गया। और फिर दोनों को बर्खास्त करने का फैसला लिया गया।

गौरतलब है पिछले महीने दिल्ली के मुखर्जीनगर इलाके में 16 जून को हुई इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने खूब तूल पकड़ा था। एक ओर जहाँ सिख ड्राइवर के आक्रामक रवैये को देखकर सोशल मीडिया पर लोगों ने ड्राइवर पर सवाल उठाए थे तो वहीं पुलिस द्वारा की गई प्रतिक्रिया पर भी सियासी घमासान हुआ था। जाँच में दिल्ली पुलिस ने दोनो पक्षों को दोषी पाया था।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस घटना की निंदा करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया था। कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इस घटना पर भाजपा पर जमकर निशाना साधा था। इस दौरान ड्राइवर सरबजीत सिंह ने आरोप लगाया था कि 10-12 पुलिस वालों ने उनकी और उनके बेटे की बहुत बुरी तरह पिटाई की और फिर थाने ले गए। जहाँ सरबजीत के मुताबिक फिर उनसे मारपीट की गई।

बता दें इस घटना में सरबजीत पर पुलिस वालों की गाड़ी पर धक्का मारने और उनपर तलवार से हमला करने का आरोप था। इसके अलावा उनके बेटे पर पुलिस पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश भी कैमरे में कैद है। इस घटना के बाद पुलिस ने दावा किया था कि ऑटो ड्राइवर का पहले भी आपराधिक बैकग्राउंड रह चुका है और उसने पहले भी कई बार मारपीट की है। 2006 से अब तक सरबजीत पर तीन बार मारपीट के केस दर्ज हुए हैं। इसके अलावा सरबजीत सिंह पर इसी साल अप्रैल में गुरुद्वारा बंगला साहिब के एक सेवादार ने मारपीट का मामला दर्ज कराया था।

40,000 हिन्दुओं के नरसंहार के लिए मंदिर के प्रसाद में जहर मिलाने की योजना, जाकिर नाइक से था प्रेरित

विवादित इस्लामिक धर्म उपदेशक जाकिर नाइक की बातें सुनकर कुछ आतंकियों ने मुंबई के एक मंदिर के प्रसाद में जहर मिलाने की योजना बनाई थी। आतंकियों का इरादा मंदिर में आने वाले भक्तों का नरसंहार करना था। मुंबई की एक अदालत में दाखिल चार्जशीट के मुताबिक मुंबई स्थित मुम्बेश्वर मंदिर में नरसंहार की कथित योजना बनाने को लेकर महाराष्ट्र से गिरफ्तार आतंकवादी जाकिर नाइक से प्रेरित थे। ये आतंकी ISIS से प्रेरित एक आतंकी समूह ‘उम्मत-ए- मोहम्मदिया’ के सदस्य थे।

जिस दिन इस साजिश को अंजाम देना था, उस दिन मंदिर के महाप्रसाद को 40 हजार से ज्यादा लोगों ने खाया था। दहशतगर्दों की साजिश थी कि महाप्रसाद में जहर मिलाकर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की जान ली जा सके। एटीएस ने इस मामले में चार्जशीट दायर करते हुए सभी संदिग्धों की पहचान बताई है, जिनमें से 9 बालिग और 1 संदिग्ध नाबालिग है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराष्ट्र एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आरोप पत्र के हवाले से बताया कि समूह की योजना मुम्ब्रा स्थित 400 साल पुराने श्री मुम्बरेश्वर मंदिर के श्रद्धालुओं के प्रसाद में जहर मिला कर उनका नरसंहार करने की थी। ATS ने आरोपितों की सोशल मीडिया प्रोफाइल पर जाकिर नाइक की मौजूदगी वाले कई वीडियो और तस्वीरें पाई हैं। समूह के कुछ सदस्य विदेश स्थित अपने आकाओं से भी संपर्क में थे।

गिरफ्तारी से पहले इस दल में शामिल जम्मान, सलमान, वारिस और फहाद ने हाइड्रोजन पराक्साइड की मदद से विस्फोटकों का निर्माण किया था। दल के मुखिया अबू हमजा और अन्य आरोपितों ने इन विस्फोटकों का ट्रायल किया था और मंदिर परिसर की रेकी भी की थी।

ठाणे की एक पहाड़ी पर लिया था विस्फोट बनाने का प्रशिक्षण

चार्जशीट में कहा गया है कि गिरफ्तार आतंकवादियों ने मंदिर के प्रसाद में जहर मिलाने की कोशिश की थी। इन लोगों ने विस्फोटक और जहर बनाने का भी प्रशिक्षण लिया था और ठाणे जिले में मुंब्रा बाईपास के नजदीक एक पहाड़ी पर विस्फोट का अभ्यास भी किया था। महाराष्ट्र ATS ने उम्मत-ए- मोहम्मदिया समूह के 10 सदस्यों को इस साल जनवरी में राज्य के मुंब्रा और औरंगाबाद से गिरफ्तार किया था। आतंकी संगठन आईएस से उनके कथित तौर पर तार जुड़े हैं। उन्हें गिरफ्तार कर नरसंहार को अंजाम देने की उनकी योजना नाकाम कर दी गई थी।

चार्जशीट के मुताबिक गिरफ्तार आरोपितों में शामिल ताल्हा पोट्रिक ने प्रसाद में जहर मिलाने की कोशिश की थी। एटीएस ने इस समूह के नेतृत्वकर्ता के तौर पर अबू हमजा की पहचान की है।