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अनजान लोगों से करवाता था पत्नी का रेप, रिकॉर्ड किए 20000+ फोटो-वीडियो: बेटे ने कहा – मेरे बाप को मिले कठोर सजा, कोई माफी नहीं

यूरोपीय देश फ्रांस में डोमिनिक पेलिकॉट नाम के एक व्यक्ति द्वारा लगभग 72 अजनबी लोगों से अपनी पत्नी का रेप और सामूहिक बलात्कार कराने का मामला सामने आया है। आरोपित डोमिनिक के बेटों ने 18 नवंबर को अदालत से अपने पिता को कड़ी सजा देने का आग्रह किया। पीड़िता के बेटों ने कहा कि वे अपने पिता को कभी माफ नहीं कर पाएँगे।

डोमिनिक ने अदालत के समक्ष पहले अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने स्वीकार किया है कि 10 साल की अवधि में उसने दर्जनों अजनबियों को अपनी पत्नी के साथ बलात्कार करने के लिए अपने घर बुलाया था। इस दौरान वह अपनी पत्नी को नशीला पदार्थ पिलाता है। इस मामले में 50 अन्य लोगों को भी आरोपित बनाया गया है। डोमिनिक की पत्नी अब 71 साल की है।

आरोपित डोमिनिक के बेटों में से एक 50 वर्षीय डेविड पेलिकॉट ने अदालत के समक्ष कहा, “हमारा परिवार नष्ट हो गया है। मैं इस मुकदमे से उम्मीद करता हूँ कि इन लोगों को (आरोपितों) और कटघरे में मौजूद उस व्यक्ति (उसके पिता) को मेरी माँ पर किए गए अत्याचार के लिए कठोर रूप से दंडित किया जाएगा।” अपने आरोपित पिता डोमिनिक की माफी को भी डेविड ने पूरी तरह नकार दिया।

डेविड ने यह भी कहा कि उसने और उसके परिवार के अन्य सदस्यों ने अपने पिता की सारी तस्वीरें नष्ट कर दी है, ताकि घर में आरोपित का कोई नामो-निशान ना बचे। डेविड ने कहा कि यह मुकदमा अन्य महिलाओं को रेप के बारे में बोलने के लिए प्रोत्साहित करेगा। डेविड की माँ ने इस मुकदमे को सार्वजनिक रूप से आयोजित करने के लिए कहा था, ताकि दूसरी महिलाओं को हिम्मत मिले।

डेविड के 38 वर्षीय भाई फ्लोरियन ने अदालत को बताया कि चार साल पहले उनकी माँ के साथ हुई दरिंदगी की जानकारी से परेशान हो गए थे। फ्लोरियन ने कहा कि उसके पिता उसके लिए मर चुके हैं। उन्होंने कभी-कभी रोते हुए अदालत से कहा, “मुझे अपने पिता को खोए हुए चार साल हो गए हैं। हमारा परिवार अलग हो गया है।” फ्लोरियन ने कठोरतम सजा की माँग की है कि ताकि पीड़ित को डर ना लगे।

फ्रांसीसी कानून के तहत पीड़िता अपनी पहचान गुप्त रख सकती थी और मुकदमा बंद कमरे में चल सकता था। इस मामले के सामने आने के बाद पीड़िता गिसेले पेलिकॉट के समर्थन में पूरे फ्रांस में विरोध प्रदर्शन शुरू कर हो गए थे। वहीं, गिसेले की बेटी कैरोलिन डेरियन ने अदालत को बताया कि उसका मानना ​​​​है कि उसके पिता ने उसके साथ भी दुर्व्यवहार किया था।

कैरोलिन ने कहा, “मेरे और मेरी माँ के बीच एकमात्र अंतर यह है कि (उनकी माँ के साथ हुए दुर्व्यवहार के) सबूत हैं।” कैरोलिन इस केस में सबसे पहली गवाह बनी थीं। अब सभी पक्षों को सुनने के बाद बाद अदालत का फैसला और सजा का ऐलान 20 दिसंबर 2024 के आसपास आने की उम्मीद है।

पीड़िता गिसेले पेलिकॉट ने दक्षिणी शहर एविग्नन की अदालत को बताया था कि उसके 71 वर्षीय पति डोमिनिक पेलिकॉट उसे खाने और शराब में दवा मिलाकर बेहोश कर देता था। उसके बाद लोगों को बुलाकर उसी हालत में उनसे अपनी पत्नी का रेप करवाता था। जाँचकर्ताओं ने पाया कि पीड़िता के साथ लगभग एक दशक में 100 से अधिक बार रेप हुआ। रेप के दौरान आरोपित डोमिनिक रिकॉर्डिंग करता था।

उसके कब्जे से हजारों फोटो और वीडियो बरामद हुए थे। पीड़िता ने अदालत को बताया था कि एचआईवी से पीड़ित एक व्यक्ति ने उसके साथ कम-से-कम छह बार बलात्कार किया था। उन्होंने कहा था कि उनकी जान को खतरा था, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। गिसेले पेलिकॉट ने अपनी गवाही में कहा था, “पुलिस ने मिस्टर पेलिकॉट के कंप्यूटर की जाँच करके मेरी जान बचाई।”

बता दें कि आरोपित डोमिनिक पेलिकॉट को नवंबर 2020 में एक सुरक्षा गार्ड ने सुपरमार्केट में महिलाओं की स्कर्ट का वीडियो बनाते हुए पकड़ा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि मामले की जाँच के दौरान फ्रांसीसी पुलिस ने डोमिनिक के कंप्यूटर से जुड़े यूएसबी ड्राइव पर ‘दुर्व्यवहार’ लेबल वाली एक फ़ाइल बरामद की। जब पुलिस ने ड्राइव खोली तो उसमें से लगभग 20,000 तस्वीरें और फिल्में मिलीं थीं।

इनमें पाया गया कि एक महिला के साथ लगभग 100 बार से अधिक बलात्कार किया गया था। पुलिस ने जाँच की तो पता चला कि यह उसकी पत्नी है। इसके बाद पुलिस ने उसकी पत्नी का बयान दर्ज किया और डोमिनिक के बेटों और बेटी को इसकी जानकारी मिली। इसके बाद पीड़िता ने इस केस की सुनवाई सार्वजनिक रूप से करने की माँग की।

नाबालिग हिन्दू छात्रा को गणित पढ़ाने वाले शाहिद ने दिया ₹1 लाख का ऑफर, मुस्लिम बन निकाह करने का डाला दबाव: UP पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के अमरोहा में एक मुस्लिम शिक्षक ने इंटर कॉलेज के भीतर एक हिन्दू नाबालिग छात्रा पर निकाह करने का दबाव डाला। जाहिद ने उसका धर्मांतरण करवाने की बात कही। उसका हाथ पकड़ कर छेड़खानी की और नाबालिग को ₹1 लाख का ऑफर दिया। मुस्लिम शिक्षक ने निकाह की बात ना मानने पर फेल करने की धमकी भी दी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमरोहा के मंडी धनौरा इलाके में राष्ट्रीय इंटर कॉलेज में गणित पढ़ाने वाले मोहम्मद शाहिद ने नाबालिग हिन्दू छात्रा से छेड़छाड़ की। अश्लील हरकत करने के बाद शाहिद ने छात्रा से निकाह करने की बात कही। उसने अपने से कई साल छोटी छात्रा से प्रेम की बात कही। शाहिद संभल जिले का रहने वाला है और कक्षा 9 का क्लास टीचर भी है।

शाहिद की इस हरकत को लेकर हिन्दू छात्रा ने घर में शिकायत की। शाहिद के इस कृत्य की शिकायत हिन्दू छात्रा ने अपने घर पर की। परिजनों ने इसके बाद कॉलेज के प्रधानाध्यापक को इससे अवगत करवाया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टे शाहिद इसके बाद और भी बदतमीजी पर उतर आया।

शाहिद ने इसके कुछ दिनों के बाद कक्षा के भीतर ही हिन्दू छात्रा से दोबारा अश्लील हरकत की। इस बार उसने ₹1 लाख का ऑफर दिया और निकाह करने का दबाव बनाया। उसने हिन्दू छात्रा का धर्मांतरण करवाने की कोशिश की। शाहिद ने छात्रा को डराया भी। उसने धमकी दी कि अगर हिन्दू छात्रा उसकी बात नहीं मानती तो उसे वह फेल कर देगा।

डरी सहमी हिन्दू छात्रा ने यह पूरी घटना अपने घर जाकर बताई। इसके बाद हिन्दू छात्रा के परिजन साथ पुलिस के पास पहुँचे। उन्होंने कॉलेज में भी विरोध प्रदर्शन किया। शाहिद ने कॉलेज से भागने का प्रयास किया। हिन्दू छात्रा के धर्म परिवर्तन की बात सुनकर बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता भी कॉलेज पहुँचे और शाहिद के खिलाफ कार्रवाई की माँग की।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शाहिद को गिरफ्तार कर लिया है। शाहिद के खिलाफ POCSO समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उसे कॉलेज प्रबन्धन ने भी निलंबित कर दिया है।

हजूर पाक-ईशनिंदा-गुस्ताख पर मुल्लों जैसे चिल्लाना, तालिबानी मौलाना संग फोटो… शौहर और मुस्लिम वोट के लिए स्वरा बन गई ‘कट्टर’, ओढ़ रखा प्रोग्रेसिव का चोगा

सोशल मीडिया पर पिछले दिनों अपनी एक तस्वीर की वजह से चर्चा में रहीं स्वरा भास्कर ने आज एक ट्वीट किया है। उन्होंने ट्वीट में कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि लोग उन कपड़ों को राष्ट्रीय बहस क्यों बना रहे हैं जो वो अपनी शादी के बाद पहन रही हैं। इसके बाद उन्होंने अपनी कुछ वेस्टर्न कपड़ों में तस्वीरें दिखाते हुए कहा कि संघी शादी के बाद की इन फोटोज को भी देखें और समझ लें कि फहाद जिरार अहमद ऐसा शौहर नहीं है जैसा उनके मुताबिक एक पिछड़ा मुसलमान शौहर होता है।

स्वरा ने बिन कुछ सोचे अपने ट्वीट में ट्रोलर्स को ‘संघी’ करार दे दिया जबकि ये मालूम हो कि स्वरा की तस्वीर देखने के बाद तमाम यूट्यूब चैनल, तमाम मीम पेज और तमाम सोशल मीडिया यूजर्स ने प्रतिक्रिया दी। वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वो एक एक्ट्रेस रही हैं और फहाद से निकाह से पहले उनका पब्लिक प्लेस में रंग-ढंग अलग दिखता था जबकि वायरल तस्वीर में सब एकदम अलग था।

लोग जैसे अन्य मुद्दों पर चर्चा शुरू करते हैं वैसे ही इस पर भी हुई। पहले और अब की तस्वीरों में सामने आए फर्क पर गौर कराया गया। उसी में कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने इस तस्वीर को इस एंगल से देखा कि एक मुस्लिम से शादी से पहले स्वरा कैसी थीं और अब कैसी हो गई हैं।

स्वरा भास्कर को बस यही बात नहीं पसंद आई और उन्होंने एक तरफ आँख मूँदकर उन्हें ट्रोल करने वाले हर शख्स को ऐसे तंज भरे अंदाज में संघी लिखा जैसे संघी कोई अपशब्द हो और दूसरी तरफ अपने शौहर का बचाव किया कि वो कोई रूढ़िवादी मुसलमान नहीं है। अपनी मॉर्डन ड्रेस दिखाकर ये साबित करने की कोशिश की कि उनका शौहर तो एक प्रोग्रेसिव मुसलमान है जो उन्हें बैकलेस, नेकलेस, स्लीवलेस ड्रेस पहनने देता है।

अब फहाद क्या है, कैसे हैं… बहस का मुद्दा ये नहीं है। असल चर्चा ये हैं कि आखिर स्वरा भास्कर क्या हो गई हैं। स्वरा एक तरफ तो अपने शौहर के प्रोग्रेसिव होने के दावे अपनी वेस्टर्न ड्रेस में फोटो दिखाकर कर रही हैं और दूसरी तरफ वो अपने शौहर के लिए इस्लामी मौलानाओं से भेंट कर रही हैं और फिर मुस्लिम भीड़ के बीच जाकर मुस्लिमों से मजहब के नाम पर न सिर्फ वोट माँग रही हैं बल्कि उनको उकसाने का काम भी कर रही हैं।

स्वरा की एक वीडियो वायरल है। देख सकते हैं कि ये चुनावी रैली की है। इसमें वो उसी सुर और शब्दों में बात कर रही हैं जो इस्लामी कट्टरपंथियों की रैली में होता है। स्वरा अपने भाषण में मुस्लिमों को समझाती हैं कि वो गलती से भी उन ‘गुस्ताखों’ को समर्थन न दें जिन्होंने कभी ईशनिंदा की हो।

विकास के मुद्दों को साइड में रखकर अपने भाषण में वो दीन, ईमान की बातें करके भीड़ को इंप्रेस करती हैं और कहती हैं कि वो हिंदू घर में जन्मी, मुस्लिम लड़की से शादी की, लेकिन उन्हें बस कहना ये है कि ‘हजूर पाक’ केै प्रति मन में इज्जत होने के लिए जरूरी नहीं कि इंसान किस जाति में पैदा हुआ हो। उनका इस्लामी शब्दावलियों से भरा ये भाषण सुन सारे मुस्लिम इतने खुश हुए कि स्वरा का उत्साह तालियाँ बजाकर बढ़ाते रहे और स्वरा बोलती रहीं।

वीडियो देखने के बाद आपको कहीं से भी नहीं लगेगा कि स्वरा एक सेकुलर हैं या कभी एक हिंदू रहीं होगीं। उनका इस्लाम के प्रति गहरा झुकाव उनके लहजे से साफ दिखता है। इसके अलावा उनकी एक तस्वीर सामने आई है जिसमें वो मौलाना सज्जाद नोमानी के साथ दिख रही है। इस तस्वीर को देख भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक समय में देश के संविधान की बात करके मुस्लिमों के लिए अधिकार माँगने वाली स्वरा पूरी करह इस्लामी ताकतों के आगे सरेंडर कर चुकी हैं।उन्हें इस बात से भी कोई मतलब नहीं है कि जिस व्यक्ति से वो मिल रही हैं उसके विचार क्या हैं।

उन्होंने कोई लेना-देना नहीं है कि सज्जाद नोमानी तो वही मौलाना है जो खुलेआम तालिबानी शासन का समर्थन करते है, तालिबानियों को सलाम भेजते हैं, लड़कियों को स्कूल-कॉलेज न भेजने की वकालत करते हैं, मुस्लिमों को हिंदुओं के खिलाफ भड़काते हैं, भगवा लव ट्रैप जैसा प्रोपगेंडा बनाकर RSS को बदनाम करते हैं और भाजपा का हुक्का-पानी बंद करने की बात करते हैं।

स्वरा को मतलब है जो सिर्फ मुस्लिम वोटों से, शौहर के करियर को चमकाने से और इस्लाम को केंद्र में रखकर राजनीति करने से। वो न अब सोशल मीडिया पर खुद को फेमिनिस्ट दिखा पा रही हैं, न सेकुलर, और न हिंदू। वो खुलकर सिर्फ ये बता रही हैं उनके लिए अब इस्लाम ही सब कुछ है और उसका बचाव करना ही उनका उद्देश्य। उनकी इस जद्दोजहद में भले ही फहाद एक कट्टर-मुस्लिम न लग रहे हों, लेकिन वो कट्टर इस्लाम समर्थक होने की छवि जरूर बना रही है। सोशल मीडिया ट्रोलर्स भी उनका यही रूप देखकर उनके पहले के रूप में और अब में तुलना कर रहे हैं।

अमेरिका में अडानी पर लगे आरोप, विपक्ष ने दोहराए, भाजपा ने दिया जवाब: कहा- अभी दोष सिद्ध नहीं, विपक्षी राज्यों में ही रिश्वत लेने की है बात

भारतीय कारोबारी समूह अडानी ग्रुप पर अमेरिका के न्याय न्यायिक विभाग और सिक्युरिटीज एक्सचेंज बोर्ड ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। अमेरिकी एजेंसियों के अनुसार, अडानी समूह ने भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत दी और इसके जरिए पेश की गई झूठी तस्वीर से समूह ने अमेरिका में निवेशकों से पैसा लिया।

अमेरिकी एजेंसियों ने अडानी समूह के मुखिया गौतम अडानी समेत 7 लोगों को इस मामले में आरोपित बनाया है। इस मामले में कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने भारत सरकार को घेरा है। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने मुकदमे के कागजों के सहारे ही उनके तथ्यों की बखिया उधेड़ी है और कहा है कि इतनी जल्दी अंतिम निष्कर्ष पर ना पहुँचा जाए।

विपक्ष ने अडानी-भारत सरकार पर क्या कहा?

अडानी पर बुधवार (20 नवम्बर, 2024) को लगाए गए आरोपों के बाद कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद और मीडिया प्रमुख जयराम रमेश ने मोर्चा संभाला। जयराम रमेश ने गुरुवार (22 नवम्बर, 2024) को एक्स (पहले ट्विटर) के माध्यम से अडानी समूह और सरकार को घेरा।

जयराम रमेश ने लिखा, “गौतम अडानी, सागर अडानी और अन्य के खिलाफ अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय, ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ न्यूयॉर्क द्वारा चालू किए गए मुकदमे में अडानी की आपराधिक गतिविधियों के बारे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने 2020 से 2024 के बीच भारत के सरकारी अधिकारियों को 250 मिलियन डॉलर (₹2100 करोड़) से अधिक की रिश्वत दी गई।”

जयराम रमेश ने आगे लिखा, “मुकदमे में कहा गया है कि रिश्वत ‘भारत सरकार के साथ सोलर एनर्जी सप्लाई करने का टेंडर लेने के लिए दी गई थी। इस टेंडर के मिलने से 2 बिलियन डॉलर (₹16,800 करोड़) से अधिक का मुनाफ़ा होने होता। इसी मुकदमे में कहा गया है कि कई मौकों पर गौतम अडानी ने अपनी रिश्वत की योजना को और आगे बढ़ाने के लिए व्यक्तिगत रूप से एक सरकारी अधिकारी से मुलाकात की, जिसका इलेक्ट्रॉनिक और फोन सबूत होने का दावा किया गया है।”

अडानी पर हमला करते हुए जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि उन्हें मोदी सरकार संरक्षण दे रही है। उन्होंने माँग की कि भारत में भी अडानी समूह के ऑपरेशन की जाँच करने के लिए नए SEBI मुखिया की नियुक्ति की जाए और साथ ही एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन किया जाए।

भाजपा ने दिया जवाब, कॉन्ग्रेस को ही लपेटा

जयराम रमेश के इन आरोपों का जवाब भाजपा आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने दिया। अमित मालवीय ने अमेरिकी कोर्ट के कागजों के हवाले से लिखा, “इसलिए कहते हैं कि जवाबा देने से पहले पढ़ लेना चाहिए। आपने जिन कागजों हवाला दिया है। उन्हीं में लिखा है, “मुकदमे में लगाए गए आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं और जब तक आरोपित दोषी साबित न हो जाएँ, तब तक उन्हें निर्दोष करार माना जाता है।” इसके बाद मालवीय ने इस मुकदमे के कागजों के सहारे कॉन्ग्रेस को ही कठघरे में खड़ा कर दिया।

अमित मालवीय ने बताया, “लेकिन जैसा भी हो, पूरा मामला ये है कि अमेरिकी और भारतीय कंपनियों ने सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) को 12 GW बिजली सप्लाई करने पर सहमति जताई थी। यह समझौता तब होता जब SECI, राज्यों की बिजली कम्पनियों (SDC) के साथ बिजली खरीदने का समझौता (PPA) करने पर आधारित था। अडानी ग्रीन एनर्जी और अमेरिकी कम्पनी एज़्योर पावर के बीच समझौता था, इसके तहत सरकार को बेची जाने वाली बिजली में से एज़्योर 4 GW जबकि अडानी ग्रीन एनर्जी को 8 GW देना था।”

अमित मालवीय ने बताया कि इन कम्पनियों द्वारा बनाई गई बिजली महँगी थी, इसलिए राज्यों की बिजली कम्पनियाँ इन्हें खरीद नहीं रही थीं। ऐसे में यह आगे SECI के पास भी नहीं जाती। अमित मालवीय ने बताया कि मुकदमे के अनुसार, इस स्थिति से निपटने के लिए अडानी ने अमेरिकी फर्म एज़्योर पावर के साथ मिलकर जुलाई 2021 से फरवरी 2022 के बीच ओडिशा (तब BJD शासित), तमिलनाडु (DMK), छत्तीसगढ़ (तब कॉन्ग्रेस शासित) और आंध्र प्रदेश (तब YSRCP) में स्थित SDC को US $265 मिलियन पैसा दिया।

अमित मालवीय ने जयराम रमेश से पूछा कि अगर मुकदमे में बताए गए सभी राज्य तब विपक्ष की पार्टियों द्वारा शासित थे तो सबसे पहले तो उन्हें जवाब देना चाहिए कि क्या उन्होंने रिश्वत ली। मालवीय ने कहा कि जयराम रमेश केंद्र सरकार को लेकर धर्मोपदेश दे रहे हैं, बजाय अपनी सरकारों पर सवाल उठाने के। अमित मालवीय ने इस पूरे मुकदमे के पीछे जॉर्ज सोरोस का हाथ होने की तरफ इशारा किया और आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस उसकी कठपुतली बनी हुई है।

अमेरिकी एजेंसियों के क्या हैं आरोप?

अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस और SEC ने अडानी समूह पर आरोप लगाया कि 2020 से 2024 के बीच अडानी समूह के रंजीत गुप्ता, सिरिल कैबनेस, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा ​​और रूपेश अग्रवाल ने बिजली सप्लाई के टेंडर हासिल करने के लिए लिए भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने की साजिश रची। उन्होंने अपने हिसाब से फैसले करवाने के लिए पैसा दिया, इसके लिए शेल कम्पनियों का इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा अमेरिकी एजेंसियों ने कहा कि इन गलत सूचना के सहारे अमेरिका में अडानी समूह के लोगों ने बॉन्ड जारी किए और निवेश हासिल किए।

अडानी समूह के लोगों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने सबूत मिटाने की कोशिश की और न्याय के रास्ते में रोड़ा बने। यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने जाँचकर्ताओं को झूठे बयान दिए और रिश्वत की बातें छुपाई। अमेरिकी एजेंसियों ने कुल 5 आरोप अडानी पर तय किए हैं। अब इसको लेकर मुकदमा चलेगा। वहीं अडानी समूह ने एक बयान जारी करके अमेरिका में होने वाली अपनी अगली बॉन्ड की बिक्री रोक दी है। अडानी समूह ने कहा कि यह बॉन्ड इश्यु तीन गुना सबस्क्राइब हुआ था।

जिसे देखो वही पत्रकार मुस्लिम, UP मुरादाबाद (कुंदरकी) चुनाव की रिपोर्टिंग: भाजपा नेता शलभमणि त्रिपाठी ने बताया ‘मीडिया जिहाद’, जारी की नामों वाली सूची

उत्तर प्रदेश भाजपा के नेता और देवरिया से विधायक शलभमणि त्रिपाठी ने मुरादाबाद में सक्रिय पत्रकारों की एक सूची जारी की है। इस सूची में विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम कर रहे पत्रकारों के नाम लिखे गए हैं। खास बात ये है कि ये सभी पत्रकार मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। त्रिपाठी ने इस ‘मीडिया जिहाद’ के रूप में साझा किया है। इससे पहले उन्होंने बहराइच के पत्रकारों की सूची साझा की थी।

शलभमणि त्रिपाठी ने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर इस सूची को जारी करते हुए लिखा, “कंटे छंटे वीडियो व तस्वीरों के जरिए यूपी उपचुनाव में जिस मुरादाबाद से सर्वाधिक झूठ फैलाया गया, वहाँ कवरेज कर रहे पत्रकारों की सूची भर देख लीजिए !! #मीडियाजिहाद।”

इस सूची में न्यूज 18, रिपब्लिक भारत जैसे मेनस्ट्रीम मीडिया से लेकर लोकल न्यूज पेपर एवं चैनलों के नाम दिए गए हैं। इसके अलावा, PTI और IANS जैसे न्यूज एजेंसी में भी एक समुदाय के पत्रकार हैं। इस सूची में कुल 32 पत्रकारों के नाम दिए गए हैं, जो सभी मुस्लिम समुदाय से हैं। इसके अलावा, इसमें ये भी कहा गया है कि मुरादाबाद में 100 से अधिक मुस्लिम यूट्यूबर सक्रिय हैं।

इससे पहले त्रिपाठी ने बहराइच के मुस्लिम पत्रकारों की सूची जारी की थी। इस सूची में भी मेनस्ट्रीम मीडिया से लेकर छोटे स्तर के मीडिया संस्थान में सभी मुस्लिम पत्रकार ही थे। यह सूच उन्होंने तब जारी की थी, जब बहराइच में दुर्गा पूजा के उपरांत प्रतिमा के विसर्जन के दौरान हमला कर दिया गया था। इसके बाद दंगे भड़क उठे थे।

इस सूची को साझा करते हुए शलभ ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा था, “बहराइच से ख़बरें भेज रहे पत्रकारों के नाम भर पढ़ लीजिये, समझ आ जाएगा कि ख़बरें कितनी निष्पक्ष व सच्ची हैं, यूट्यूबरों की जमात अलग से जुटी है, पूरा सिस्टम ही भिड़ा है दंगाइयों को बचाने में, झूठ फैलाने में !!”

इस दंगे में गोपाल मिश्रा नाम के एक शख्स की हत्या होने के बाद शलभ ने आगे लिखा था, “गोपाल मिश्रा का हरा झंडा उतारने का वीडियो तो सामने आया, परंतु उससे ठीक पहले उसी घर से दुर्गा प्रतिमा पर हमले, फ़ायरिंग, पथराव और फिर गोपाल मिश्रा की नृशंस हत्या का वीडियो क्यों ग़ायब कर दिया गया, इसका जवाब बहराइच के पत्रकारों की इस लिस्ट में छुपा है !!”

बहराइच वाली सूची में इंडिया टीवी से लेकर पीटीआई और ANI तक के पत्रकार मुस्लिम समुदाय से हैं। इस सूची में उन्होंने 13 प्रमुख पत्रकारों के नाम जारी किए थे। शलभ ने यह भी दावा किया था कि सूची के वायरल होने के बाद बहराइच के सूचना अधिकारी वारिस अली को शंट कर दिया गया था।

पुलिस करे मस्जिद का नियंत्रण, कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश: मस्जिद में ही लड़ गए थे नमाजी, 1 की मौत + 8 घायल, डिमांड थी अलग-अलग नमाज टाइमिंग की

कलकत्ता हाई कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि वह पूर्वी मिदनापुर की एक मस्जिद पर नियंत्रण कर ले। पुलिस को आदेश दिया गया है कि वह मस्जिद में आने-जाने वाले नमाजियों पर नजर रखे और इसे नियमित करे। यह आदेश नमाजियों के दो गुटों के बीच में हुई लड़ाई के बाद दिया गया है। इस लड़ाई में एक की मौत हो गई थी।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार (20 नवम्बर, 2024) को यह आदेश दिया। हाई कोर्ट ने यह आदेश एक याचिका की सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में कहा गया था कि कि उसके पुराने आदेश की अवहेलना की गई है।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 7 नवम्बर, 2024 को आदेश दिया था कि पूर्वी मिदनापुर के एगरा में स्थित एक मस्जिद में दो अलग-अलग नमाजियों के गुटों को अलग-अलग समय पर नमाज पढ़वाई जाए। हालाँकि, कोर्ट के आदेश का पालन नहीं हुआ। इसके बाद 13 नवम्बर, 2024 को दोनों गुटों के बीच भारी हिंसा हुई।

इस हिंसा में एक नमाजी की मौत हो गई जबकि 8 गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हिंसा के बाद पुलिस ने 3 FIR दर्ज की हैं। मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हिंसा के बाद अदालत पहुँचे नमाजियों की सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा पुलिस को मस्जिद में नियंत्रण का आदेश दिया।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा, “मस्जिद को पुलिस नियंत्रण में ले और यहाँ किसी की भी एंट्री एगरा पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक की मंजूरी के बगैर नहीं होगी।” कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि उसने यह निर्णय बड़ा सोच समझ कर लिया है।

हाई कोर्ट ने नमाजियों को चेतावनी दी है कि अगर फिर से हिंसा हुई और कोई मरा तो वह मस्जिद में किसी के भी नमाज पढ़ने पर रोक लगा देंगे। कोर्ट ने कहा कि ‘मजहबी मामले’ के कारण किसी की भी मौत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन से एक मीटिंग करने को भी कहा है।

सपा और AIMIM के गुंडों की लड़ाई, फिर UP पुलिस पर जानलेवा हमला और पथराव: मीरापुर मतदान के दिन हिंसा मामले में 28 (सभी मुस्लिम) नामजद + 120 अज्ञात के खिलाफ FIR

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर स्थित मीरापुर विधानसभा उपचुनाव में मतदान के दौरान पथराव करने वाले आरोपितों पर FIR दर्ज की है। पुलिस ने 28 नामजद और 120 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोपितों में 3 महिलाएँ भी हैं और ये सभी मुस्लिम समुदाय की हैं। ये सभी समाजवादी पार्टी और AIMIM से जुड़े हैं। इसके अलावा AIMIM के प्रत्याशी के बेटे को हिरासत में लिया गया है।

जिन आरोपितों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है, उनके नाम हैं- शेर अली, शाह आलम, दानिश, मट्टू, गुड्डू, जब्बार, शाहनवाज, सावेज, अव्वलीन, सद्दाम, सादाब, औरंगजेब, अंजीम, दीनू, गुलशेर, शाहनजर, जावेद, परवेज, कय्यूम, इनाम, सलमान, सद्दाम-2, अनीस, मौसम, नजर, सुल्ताना बीबी, तोहिदा बीबी और तनजिला बीबी है।

इन आरोपितों के खिलाफ BNS की धारा 109, 115(2), 121(1), 121(2), 125, 131, 132, 190, 191(2), 191(3), 223, 351(2), 351(3) और 352 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके अलावा, इन पर आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम (CrPC) की धारा 7 पर लगाया गया है। इसके अलावा, FIR में अज्ञात लोगों को भी शामिल किया गया है।

ऑपइंडिया के पास मौजूद FIR में कहा गया है कि शेर अली, शाह आलम, दानिश सहित समाजवादी पार्टी से जुड़े 15 आरोपित और AIMIM से जुड़े दूसरे पक्ष के अजीम, दीनू, गुलशेर सहित 10 आरोपित वोट देने को लेकर आपस में लड़ रहे थे। समाजवादी पक्ष की ओर से 15 आरोपितों के साथ 60-70 अज्ञात लोग थे। वहीं, AIMIM पक्ष की ओर से 10 आरोपितों के साथ 40-50 अज्ञात लोग थे।

पुलिस को इसकी जानकारी मिली तो वो टीम के साथ घटनास्थल पर पहुँची और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया। इसके बाद दोनों पक्ष मिलकर पुलिस के साथ गाली-गलौच करने लगे। फिर उन लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया। FIR में कहा गया है कि इन लोगों ने पुलिस पर जान से मारने की नीयत से हमला किया। उनके द्वारा किए गए पथराव में थाना प्रभारी सहित कई लोग घायल हो गए।

पथराव के कारण सड़क पर दोनों तरफ का ट्रैफिक जाम हो गया और गाड़ियों में बैठे महिलाएँ एवं बच्चे चीखने-चिल्लाने लगे। इसके बाद पुलिस को मजबूर होकर बल करना पड़ा। पुलिस के बल प्रयोग करने के बाद दोनों पक्ष के लोग तितर-बितर हुए और ट्रैफिक जाम हटा। मीरापुर सीट पर समाजवादी पार्टी (SP) की प्रत्याशी सुम्बुल राणा हैं। वह पूर्व सांसद कादिर राणा की बहू हैं। वहीं, AIMIM से अरशद राणा हैं।

पुलिस ने अरशद राणा के बेटे को हिरासत में ले लिया है। आरोप है कि वो मोबाइल फोन लेकर बूथ के पास जा रहे थे। वहीं, दोनों पक्षों ने पुलिस पर इस तरह हमला किया कि पहले तो पुलिस को जान बचाकर भागनी पड़ी। इसके बाद एसएचओ ने पिस्टल निकाल कर भीड़ को खदेड़ा और कहा, “यहाँ से चली जाओ नहीं तो गोली मार दूँगा।” इसकी सूचना मिलते ही SSP भी फोर्स के साथ मौके पर पहुँचे।

इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने राजनीति करने की कोशिश की। उन्होंने इसे वोटरों को धमकाने की कोशिश बताते हुए इंस्पेक्टर राजीव शर्मा को सस्पेंड करने की माँग की। अखिलेश यादव ने बुधवार (20 नवम्बर, 2024) को X (पहले ट्विटर) पर एक वीडियो साझा किया है। 28 सेकेंड के इस वीडियो में पुलिसकर्मियों के आगे कई महिलाएँ खड़ी हैं।

अखिलेश यादव ने यह वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा, “मीरापुर के ककरौली थाना क्षेत्र के SHO को चुनाव आयोग द्वारा तुरंत निलंबित किया जाए, क्योंकि वो रिवॉल्वर से धमकाकर वोटर्स को वोट डालने से रोक रहे हैं।” अपने ट्वीट में अखिलेश ने चुनाव आयोग सहित कई अन्य हैंडलों को टैग किया है। इसके बाद नेटिजन्स उन पर भड़क गए और मामले के छिपाने का आरोप लगाया।

1995 के बाद 2024 में हुई महाराष्ट्र में ताबड़तोड़ वोटिंग, झारखंड के इरफान अंसारी वाले जामताड़ा में 76% मतदान: Exit-Polls में दोनों जगह खिल रहा कमल+

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के लिए मतदान 20 नवंबर 2024 को पूरा हुआ। इस चुनाव में कुल 288 विधानसभा सीटों पर वोटिंग हुई। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, मतदान के प्रतिशत ने राज्य में दूसरी बार सबसे ज्यादा वोटिंग का रिकॉर्ड बनाया है। 1995 में जहाँ मतदान का प्रतिशत 71.69% था, वहीं बुधवार को महाराष्ट्र में 65.11% वोटिंग हुई।

बता दें कि महाराष्ट्र में विभिन्न जिलों में मतदान के आंकड़े भिन्न थे, जैसे कि कोल्हापुर में सबसे अधिक 76.25% और मुंबई शहर में सबसे कम 52.07% वोट डाले गए। इसी तरह झारखंड में भी कल दूसरे चरण में वोटिंग हुई। इस दौरान कुल 38 सीटों पर मतदान हुआ। इस चरण में लगभग 67.70 प्रतिशत वोट पड़े, जो कि पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में 3.39 प्रतिशत अधिक है। सबसे अधिक वोटिंग जामताड़ा में हुई। यहाँ 76.16% वोट पड़े। अभी यहाँ पर इरफान अली विधायक हैं।

बता दें कि दोनों ही राज्यों के नतीजे 23 नवंबर 2024 को साफ होंगे, लेकिन उससे पहले अलग-अलग मीडिया चैनल अपने अनुमानों से नतीजों की तस्वीर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। जैसे महाराष्ट्र की 288 सीटों पर पिपुल्स पल्स ने महायुति सरकार को 175 से 195 सीट, MVA को 85-112 सीट मिलते दिखाया है। वहीं पोल डायरी ने महायुति को 122-186 सीट, वहीं MVA को 69-121 मिलते बताया है। इसी तरह बाकी पोल्स ने क्या दिखाया है इसे नीचे टेबल में देखा जा सकता है।

एग्जिट पोल एजेंसीNDAINDIअन्य
पिपुल्स पल्स175-19585-1127-12
पोल डायरी122-18669-12112-29
मैटराइज150-170110-1308-10
टाइम्स नाउ-जेवीसी150-167107-12513-14
चाणक्य स्ट्रैटजी152-160130-1386-8
पी-मार्क137-157126-1462-8
लोकशाही मराठी रूद्रा128-142125-14018-23
दैनिक भास्कर 125-140135-15020-25
इलेक्टोरल एज़11815020
एसएएस127-135147-15510-13

इसी प्रकार झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर सामने आए एग्जिट पोल्स की बात करें तो पिपुल्स पल्स ने 44 से 53 सीटें एनडीए को मिलते दिखाई हैं। वहीं इंडी को 25-27। इसके बाद मैटराइज ने 42-47 सीट एनडीए को मिलती दिखाई है और 25-30 इंडी गठबंधन को। टाइम्स नाऊ ने भी 40-44 सीट एनडीए को मिलती दिखाई है और 30-40 सीट इंडी गठबंधन को। चाणक्य स्ट्रैटेजी ने 45-50 सीट एनडीए के खाने में जाने का अनुमान लगाया है और 35 से 38 इंडी के। बाकी पोल्स में क्या आँकड़े दिखाए गए हैं इसे भी नीचे देखा जा सकता है।

एग्जिट पोल एजेंसीNDAINDIअन्य
पिपुल्स पल्स44-5325-275-9
मैटराइज42-4725-301-4
टाइम्स नाउ-जेवीसी40-4430-401-2
चाणक्य स्ट्रैटजी45-5035-383-5
पी-मार्क31-4037-471-6
दैनिक भास्कर 37-4036-390-2
एक्सिस माई इंडिया17-2749-591-6

गौरतलब है कि एक तरफ जहाँ लोगों की राय जानकर चुनावों के परिणामों पर एग्जिट पोल्स में कयास लगाए जा रहे हैं। वहीं उद्योग जगत से जुड़े लोग इस बार स्टॉक मार्केट को देखते हुए भी नतीजों पर खूब अंदाजे लगा रहे हैं कि आखिर सरकार किसकी बनेगी। इसके पीछे कारण यही है कि एक तो महाराष्ट्र का मुंबई जो देश की आर्थिक राजधानी है और दूसरा झारखंड जो उद्योग के हिसाब से बड़ा राज्य है।

मतदान के ठीक एक दिन बाद की बात करें तो अभी तो शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई है। फिलहाल सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 76,800 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।। वहीं निफ्टी इस समय 23,300 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। गौतम अडानी के स्टॉक्स तो लगातार नीचे गिर रहे हैं। उनके शेयरों में ये गिरावट अमेरिका में एक केस दर्ज होने के बाद देखने को मिल रहा, जिसमें कहा गया कि उनकी कंपनी ने भारत में रिन्यूएबल एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट हासिल कररने के लिए 25 करोड़ डॉलर दिए हैं।

ओडिशा में जनजातीय युवती को दी प्रताड़ना, खिलाया मल, फसल पर ट्रैक्टर चढ़ाने को लेकर हुआ था विवाद: FIR दर्ज

ओडिशा के बोलांगीर में एक जनजातीय युवती के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। उसको पीटा गया और फिर मानव मल उसके मुँह पर फेंक दिया गया। मल उसे खिला तक दिया गया। मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। आरोपित युवक फरार है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना बोलांगीर के बंगामुंडा थाने के जुराबाँधा गाँव में हुई। घटना 16 नवम्बर, 2023 को हुई। यहाँ एक अभय बाग़ नाम का गैर जनजातीय युवक ट्रैक्टर चला रहा था। उसने इसी दौरान एक जनजातीय युवती के खेतों में खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चला दिया।

जब युवती ने इसका विरोध किया तो अभय बाग़ हिंसक हो गया। उसने युवती के साथ मारपीट करना चालू कर दिया। उसने युवती को धक्का दे दिया। इसके बाद युवती को बचाने आई एक और महिला के साथ भी उसने मारपीट की। अभय बाग़ ने जनजातीय युवती को इसके बाद जमीन पर गिरा मानव मल उसके मुंह फेंक दिया।

यहाँ तक कि युवती के मुंह में भी मल डाल दिया गया। पीड़ित जनजातीय युवती अनाथ है और अपनी थोड़ी-बहुत जमीन पर उसने यह फसल उगाई थी। वह मेहनत मजदूरी करके अपना पेट पालती है। वह अपनी छोटी बहन के साथ रहती है। अभय बाग़ की इस हरकत के बाद जनजातीय समाज गुस्से में आ गया।

जनजातीय समाज ने पुलिस में इस मामले में FIR दर्ज करवाई है। अभय बाग़ पर SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ है। इसे जनजातीय समुदाय का अपमान करार दिया गया है। पुलिस ने अभय बाग़ की तलाश जारी कर दी है। बाग़ इस घटना को अंजाम देने के बाद से फरार है। दो पुलिस टीम उसकी तलाश के लिए भेजी गई है।

जनजातीय समाज इस मामले में अब बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दे रहा हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस मामले में 4 दिन हो जाने के बाद भी खाली हाथ है।

बांग्लादेश बॉर्डर से सटा जिला, भूमि माँ लक्ष्मी की, नाम रख दिया गया करीमगंज… CM हिमंत बिस्व सरमा ने बदल दिया नाम: अब जाना जाएगा श्रीभूमि

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य के करीमगंज जिले का नाम बदलने का एलान किया है। यह जिला अब श्रीभूमि नाम से जाना जाएगा। यह फैसला मंगलवार (19 नवंबर 2024) को हुई कैबिनेट की मीटिंग में लिया गया। CM हिमंत बिस्वा सरमा ने इस निर्णय की वजह सच्चे ऐतिहासिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने का अपना संकल्प बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंगलवार को असम राज्य की कैबिनेट मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में प्रदेश के करीमगंज जिले का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा गया। नए नाम के तौर पर श्रीभूमि सुझाया गया। श्रीभूमि का मतलब हुआ माँ लक्ष्मी की भूमि।

करीमगंज जिला जिसका अब नाम श्रीभूमि कर दिया गया है, वो बांग्लादेश के बॉर्डर पर है। यहाँ बांग्ला बोलने वालों की आबादी सबसे ज्यादा है। अंग्रेजों के समय यह सिलहट जिले का हिस्सा हुआ करता था। बँटवारे के बाद सिलहट का कुछ हिस्सा पाकिस्तान (अब का बांग्लादेश) में चला गया, कुछ भारत की ओर रहा। यही हिस्सा अब श्रीभूमि जिले के नाम से जाना जाएगा।

असम कैबिनेट ने सर्वसम्मति से इस बदलाव पर अपनी मुहर लगा दी। बैठक के बाद CM सरमा ने मीडिया से अपने इस निर्णय को साझा किया। उन्होंने कहा कि वो उन तमाम स्थानों ने नाम बदलेंगे, जिसका कहीं कोई ऐतिहासिक उल्लेख न हो।

असम सरकार ने कुछ समय पहले ही कालापहाड़ नाम भी बदला था। इस बदलाव के बारे में उन्होंने कहा था कि कालापहाड़ शब्द असमिया या बंगाली भाषाकोष में नहीं आता। इसी तरह उन्होंने करीमगंज को भी भाषाकोष से बाहर बताया। इसी आधार पर पूर्व में भी हुए बदलाव का जिक्र करते हुए हिमंत बिस्व सरमा ने बारपेटा के भासोनी चौक का उदहारण दिया। मुख्यमंत्री के अनुसार श्रीभूमि शब्द बंगाली और असमिया दोनों शब्दकोशों में मिलता है।

करीमगंज का नाम श्रीभूमि करने के पीछे CM सरमा ने साल 1919 में रवींद्र नाथ टैगोर की सिलहट यात्रा का जिक्र किया। इसी यात्रा के दौरान उन्होंने सिलहट के इस क्षेत्र को ‘सुंदरी श्रीभूमि’ कह कर सम्बोधित किया था। बँटवारे के बड़ा सिलहट पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) का हिस्सा हो गया है। बकौल हिमंत बिस्व सरमा करीमगंज का नाम श्रीभूमि रखना ही इस स्थान को उसके ऐतिहासिक मूल्यों से जोड़ेगा।