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फख्र है: पाक की F-16 मार गिराने वाली अभिनंदन की यूनिट अब कहलाएगी ‘फाल्कन स्लेयर्स’

भारतीय वायुसेना की श्रीनगर स्थित 51वीं स्क्वॉड्रन की यूनिट, जिसमें पाकिस्तानी विमान एफ-16 को मार गिराने वाले विंग कमांडर अभिनंदन भी हैं उसे अब फाल्कन स्लेयर्स (Falcon Slayers – फाल्कन का वध करने वाली स्क्वॉड्रन) के नाम से जाना जाएगा। अभी तक इस यूनिट को सोर्ड आर्म्स (Sword Arms) के नाम से जाना जाता था। बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद इसी यूनिट के जाँबाज विंग कमांडर अभिनंदन ने भारतीय विमान मिग-16 बायसन जेट से पाकिस्तानी विमान एफ-16 को मार गिराया था।

एफ-16 मतलब फाल्कन

इस लड़ाई में अभिनंदन पाकिस्तानी क्षेत्र में चले गए थे। वायुसेना ने यह नाम एफ-16 के नाम पर रखा है। एफ-16 को फाल्कन के नाम से भी जाना जाता है। विगत 27 फरवरी को पाकिस्तानी वायुसेना के हमले को नाकाम करने के वक्त विंग कमांडर अभिनंदन इसी 51वीं स्क्वॉड्रन में तैनात थे और अभिनंदन ने इसे मार गिराया था। इसलिए इसे फाल्कन स्लेयर्स यानि फाल्कन का वध करने वाली स्क्वॉड्रन नाम दिया गया है। गौरतलब है कि वायुसेना ने इन खास बैज को बड़ी मात्रा में बनाने का ऑर्डर दे दिया है। इस बिल्ले पर ‘एमराम डॉजर्स’ (AMRAAM Dodgers) भी लिखा है। पाकिस्तान के एफ-16 विमान एमराम मिसाइल से लैस होते हैं।

‘एमराम डॉजर्स’

27 फरवरी को जब पाकिस्तान के एफ-16 विमानों की भारत के बायसन और सुखोई फाइटर जेट्स से डॉग-फाइट हुई थी तो पाकिस्तान ने (एफ-16 द्वारा) एमराम मिसाइल से वार किया था। लेकिन, बायसन और सुखोई विमानों ने एमराम मिसाइल को ‘डॉज’ यानी चकमा दे दिया था, जिससे अमेरिका में बनी एडवांस मिसाइल, एमराम का वार खाली चला गया था। यही वजह है कि 51वीं स्क्वॉड्रन के पायलटों के लिए जो नया बैज आया है‌, उस पर फाल्कन स्लेयर्स के साथ-साथ ‘एमराम डॉजर्स’ भी लिखा है।

भावुक रॉबर्ट वाड्रा ने जताई अच्छे दिनों पर चिंता, कहा PM मोदी ने मेरी और मम्मी की सुरक्षा आधी कर दी

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपित कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी के जीजा, प्रियंका गाँधी के पति, रॉबर्ट वाड्रा ने पीएम मोदी पर एक भावुक फेसबुक पोस्ट के जरिए बेहद शायराना तरीके से हमला किया है। रॉबर्ट वाड्रा ने कहा है कि जो लोग शीशे के घरों में रहते हैं, वह दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते। यही बात हमारे प्रधानमंत्री पर भी लागू होनी चाहिए जो आए दिन दूसरों पर महत्वपूर्ण होने का तंज कसते रहते हैं, क्या यही अच्छे दिन हैं जो उनके भाई स्वयं अपने आप को एस्कॉर्ट गाड़ी दिलाने के लिए धरने पर बैठे हैं?

सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा ने इसके आगे भावुक होकर लिखा है, “मेरी सुरक्षा आधी कर दी गई, जबकि मुझे हर तरफ से खतरा बताया जाता था। मुझे वह समय भी याद है जब मेरी माँ की सुरक्षा में दिए गए 2 सुरक्षाकर्मी भी बिल्कुल हटा लिए गए, जबकि उनके घर के बाहर लोगों का तांता लगा रहता है, जो किसी न किसी कारणवश मिलना चाहते हैं। इसमें किसी भी प्रकार के लोग हो सकते हैं, लेकिन हमने सम्मानपूर्वक सरकार के इस फैसले को माना।”

राहुल गाँधी की बहन प्रियंका वाड्रा गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि आज प्रधानमंत्री जी के भाई इस बात पर धरने पर बैठे हैं कि उन्हें एस्कॉर्ट गाड़ी चाहिए, यह कितना उचित है? क्या यह नामदार हैं या कामदार? प्रधानमंत्री जी इन्हीं अच्छे दिनों की चर्चा किया करते थे? क्या आज प्रधानमंत्री जी नहीं कहेंगे बहुत हुआ?

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा ने फेसबुक के जरिए यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई प्रहलाद मोदी के मंगलवार को पुलिस द्वारा एस्कार्ट मुहैया नहीं कराए जाने से नाराज होकर जयपुर के बगरू थाने के बाहर धरने पर बैठने की खबर आने के बाद की। हालाँकि, लगभग एक घंटे बाद समझाने पर वह अपनी यात्रा पर आगे रवाना हो गए।

‘मस्जिद बन्दर’ = बंदरों की मस्जिद: मोदी का मजाक उड़ाने वाली गालीबाज ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी की समझ

गालीबाज ट्रोल कहें या नौटंकीबाज पत्रकार, स्वाति चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री मोदी का एक एडिटेड वीडियो शेयर कर मजाक उड़ाने की कोशिश की। इस क्लिप में मोदी का गुजरात के द्वारका में बंदरगाहों के विकास पर दिया गया भाषण है।

हिंदी में दिए गए भाषण में, मोदी को कहते हुए सुना जा सकता है, “जब से भारत सरकार में हमें काम करने का अवसर मिला, हमने गुजरात के बंदरों के विकास पर भी इतना ही ध्यान दिया है… और जिसके कारण हम बंदरों का विकास करना चाहते हैं… लेकिन हम बन्दर आधारित विकास करना भी चाहते हैं… हम वो इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना चाहते हैं जो कि बंदरों को रोड से जोड़े, रेल से जोड़े, हवाई पट्टी से जोड़े।”

इस क्लिप में, इतना तो तय है कि मोदी ‘पोर्ट’ के विकास के बारे में बात कर रहे हैं। ‘पोर्ट’ जिसे हिंदी में ‘बंदरगाह’ और गुजराती में ‘बन्दर’ कहते हैं। वीडियो की सच्चाई यह है कि मोदी ने भले ही भाषण हिंदी में दिया पर पोर्ट के लिए उन्होंने स्थानीय गुजराती शब्द ‘बंदर’ का प्रयोग किया। वैसे बंदरगाह उर्दू शब्द है पर हिंदी में खूब प्रचलित है, यही स्थिति गुजरात में बन्दर की है। जानकारी के लिए बता दूँ, सबसे बड़े कोस्टलाइन एरिया वाले राज्य गुजरात में द्वारका को सबसे प्राचीन बंदरगाहों में से एक के रूप में जाना जाता है। चूँकि, मोदी गुजरात के द्वारका में बोल रहे हैं और यह शब्द वहाँ के लोगों अजूबा नहीं है। अपनी ट्रोलिंग क्षमता का परिचय देते हुए स्वाति चतुर्वेदी ने बिना समझे या यूँ कहिए दिमाग से पैदल होकर बिना सन्दर्भ जाने मोदी विरोध की पीड़ा में ‘बन्दर’ को ‘मंकी’ समझ ट्विटर पर ज्ञान देने लगी कि देखो कैसे मोदी ‘बंदरों’ (मंकी) के विकास की बात कर रहा है।

चतुर्वेदी के इस कारनामे के गुज़राती लोग मजे ले रहे हैं, क्योंकि हम गुजराती चुटकलों से आहत नहीं होते। लेकिन चतुर्वेदी का इंटेंशन यहाँ जोक शेयर करने का नहीं है। इरादा साफ़ है, तो कई ट्विटर यूजर ने चतुर्वेदी का ‘ज्ञान-रंजन’ किया कि यहाँ बन्दर का मतलब पोर्ट है न कि मंकी लेकिन स्वाति तो ठहरीं ट्रोल।

और ट्रोल स्वाति अगर एक बार बकवास कर ले ‘तो फिर वो अपने आप की भी नहीं सुनतीं’, सुन लें तो कहीं लोग समझदार न समझ बैठें! तो गलत साबित होने के बाद भी अपने बकवास कमेंट को सही साबित करने में लगी रहीं।

यहाँ तक कि लोगों को ही मोदी की ‘गलती’ को डिफेंड करने से रोकती रहीं। जबकि मामला यहाँ उल्टा है।

ऐसा जड़ दिमाग देखकर लगता है कि क्या ट्रोल स्वाति ने कभी भी महात्मा गाँधी के जन्म स्थान पोरबंदर के बारे में नहीं सुना। ‘बांद्रा’ मुंबई जो ‘बन्दर’ अर्थात पोर्ट से ही बना है। तब तो ट्रोल स्वाति के लिए मुंबई के ‘मस्जिद बन्दर’ का क्या मतलब हुआ? एक ऐसा मस्जिद जो बंदरों के लिए डेडिकेटेड है?

कुल मिलाकर, गालीबाज ट्रोल ने इस एडिटेड वीडियो से एक बार फिर अपनी बकलोली का परिचय दिया है। और यह भी कि अभी फेक न्यूज़ का धंधा थोड़ा मंदा चल रहा है तो ऐसे एडिटेड वीडियो पर अपनी बकलोली को डिफेंड करके अपनी काल्पनिक ‘निष्पक्ष’ पत्रकारिता का परिचय दिया है। वैसे आज भी कई खोजी पत्रकार लगे हैं कि ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी जैसी हाई लेवल की बकलोली की क्षमता आखिर आती कहाँ से है?

होटल के कमरे का दरवाज़ा तोड़ बंगाल पुलिस ने BJP नेता को किया गिरफ़्तार, TMC ने बताया ‘बाहरी’

बंगाल का बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। जैसा कि हमनें रिपोर्ट किया था, तेजिंदर बग्गा सहित कई भाजपा नेताओं को तृणमूल सरकार ने रातोंरात उठवा लिया। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजिंदर बग्गा चूँकि हिरासत में थे, गिरफ़्तारी कैसे की गई और किन मामलों के तहत ये कार्रवाई हुई? तेजिंदर बग्गा के लिए ट्विटर पर एक बड़ा अभियान चला, जिसमें ‘फ्री तेजिंदर बग्गा’ हैशटैग के माध्यम से ममता सरकार पर निशाना साधा गया। बग्गा ने रिहा होते ही कुछ सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि बंगाल पुलिस ने रात को होटल के कमरे का दरवाज़ा तोड़ कर उन्हें गिरफ़्तार किया। साथ ही बग्गा ने टूटे दरवाज़े की फोटो क्लिक कर ट्विटर पर शेयर किया। यह कार्रवाई रात के 2 बजे की गई।

तेजिंदर बग्गा ने पश्चिम बंगाल में ताज़ा हालात की तुलना आपातकाल से की है। वो चुनाव प्रचार करने और अमित शाह के रोड शो में हिस्सा लेने कोलकाता गए थे लेकिन उन्हें रात में उठा लिया गया। बग्गा ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज से लेकर हर जगह ऐसी तस्वीर ढूँढी गई, जहाँ उनके किसी प्रकार की हिंसा में शामिल होने के कोई सबूत मिले लेकिन बंगाल पुलिस को अंततः निराशा हाथ लगी। उधर तृणमूल सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने बग्गा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसी को भी जुलूस निकालने की इजाजत है लेकिन इसमें बाहरी लोग शामिल थे। तेजिंदर बग्गा को बाहरी बताते हुए उन्होंने पूछा कि आख़िर यह व्यक्ति है कौन?

राज्यसभा सांसद डेरेक ने पूछा कि क्या बग्गा वही व्यक्ति नहीं है, जिसनें दिल्ली में किसी को थप्पड़ मारा था? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ‘बाहरी गुंडे’ बुलाकर माहौल ख़राब कर रही है। डेरेक के बयानों का जवाब देते हुए बग्गा ने कहा कि उन्हें कोई भी गंभीरता से नहीं लेता। उन्होंने डेरेक को चुनौती दी कि वे साबित कर दें कि मैं हिंसा भड़कने वाली जगह के 500 मीटर के भी दायरे में था। उन्होंने अपनी बात ग़लत साबित होने पर राजनीति से संन्यास लेने की बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर डेरेक साबित नहीं कर पाते हैं तो क्या वह राजनीति छोड़ देंगे?

इस सभी प्रकरण के बीच आज बारासात में योगी आदित्यनाथ की भी रैली हुई, जिसमें उन्होंने कहा, “तृणमूल कॉन्ग्रेस जिन्हें समर्थन कर रही है, वही लोग मूर्ति पूजा को नहीं मानते हैं। तृणमूल के गुंडे ही मूर्ति को तोड़ रहे हैं, इन्होंने ही ईश्वरचंद विद्यासागर की मूर्ति को तोड़ा। ये लोग जय श्री राम के नारे पर भी रोक लगा रहे हैं, ये दुर्गा पूजा और सरस्वती पूजा करने से दिक्कत है। मैंने यूपी में पूजा का समय नहीं बदला लेकिन मोहर्रम-ताजिया के जुलूस का समय बदलवा दिया था।” उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कोलकाता में ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने पर बोल रहे थे। तृणमूल और भाजपा एक-दूसरे पर मूर्ति क्षतिग्रस्त करने का आरोप लगा रही है।

डेरेक ओ ब्रायन ने अपनी नेत्री ममता बनर्जी द्वारा कही गई बातों का समर्थन करते हुए दावा किया कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान भाजपा के समर्थन में कार्य कर रहे हैं।

स्क्रॉल डॉट इन: यहाँ मोदी-विरोध की खबरों का पंक्चर ठीक किया जाता है

स्क्रॉल डॉट इन एक प्रोपेगेंडा पोर्टल है लेकिन स्वयं को ‘फ्री प्रेस’ और ‘ऑल्टरनेट जर्नलिज़्म’ के नाम पर भुनाता है। मीडिया के गिरोह विशेष, या यूँ कहें कि गैंग का यह एक महत्वपूर्ण सदस्य है जिसकी खबरों पर वामपंथी ईकोसिस्टम के लिबटार्ड क़समें खाते हैं, और चरमसुख पाते हैं।

ऐसा नहीं है कि इनके संस्थान में जो एडिटर बैठे होंगे, उन्हें यह बात मालूम नहीं होगी कि कभी-कभी कुछ बातों को सवालिया निशान के साथ रिपोर्ट बना कर रख देना भी पक्ष लेने जैसा ही होता है। यह बात आम पाठकों को शायद पता नहीं हो, लेकिन पत्रकारों को बेहतर पता होता है। हालाँकि, नैतिकता जैसी चीज तो ऐसे पोर्टलों के लिए सेमिनारों में बोलने के लिए बनी है, इसलिए ये इनका प्रयोग नहीं करते।

जब ट्वॉयलेट पेपर खत्म हो जाता है तो आप ढूँढते हैं कि वो कहाँ रखा हुआ है। इसी क्रम में जब स्क्रॉल वेबसाइट पर यह देखने पहुँचा कि क्या इन्होंने ममता बनर्जी के बंगाल में हो रहे चुनावी हिंसा पर कुछ लिखा है? तो, कुछ नहीं मिला। कुछ नहीं से मतलब यह नहीं है कि चुनावी हिंसा की बात थी ही नहीं, बल्कि थी और वो तृणमूल के नेता के बयान पर आधारित थी कि भाजपा के गुंडे बंगाल में मार-पीट कर रहे हैं।

फिर मुझे याद आया आज से ठीक एक साल पहले का समय जब बंगाल चुनावों के दौरान इतनी ज्यादा हिंसा हुई कि रवीश कुमार के हर फेसबुक पोस्ट पर लोगों ने सवाल उठाना शुरू किया कि वो बिहार में हो रही झड़पों पर तो रोने-गाने लगते हैं, बंगाल पर क्यों नहीं लिख रहे। फिर एक दिन रवीश के ज़मीर ने ललकारा और उन्होंने देश को बताया कि बंगाल में हिंसा हो रही है। ये बात और है कि उन्हें ये बात पता नहीं थी कि वहाँ की मुख्यमंत्री कौन है, पुलिस संविधान के किस लिस्ट में आती है, कानून व्यवस्था का ज़िम्मा किसका है। उन्होंने खानापूर्ति की थी।

स्क्रॉल ने भी वही किया है। बंगाली भोजन पर आर्टिकल है, विद्यासागर पर आर्टिकल है कि बंगाली बच्चों की वर्णमाला का ज्ञान उन्हीं की किताब से आया है, ममता के मीम पर भी लेख है, लेकिन आप स्क्रॉल करते जाइए आपको पता चलेगा कि बंगाल की चुनावी हिंसा पर यहाँ न तो रिपोर्ट है, न ओपिनियन। और भी बहुत ज़्यादा ज़रूरी बातों पर लेख है कि मोदी ने डिजिटल कैमरा कब इस्तेमाल किया था, क्योंकि वो जानना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। फिर आप ‘यस्टरडे’ में पहुँच जाते हैं।

Scroll.in के पोर्टल का स्क्रीन ग्रैब जहाँ बंगाल में हर तरफ ख़ुशहाली है

लेकिन इन सब में एक बात जो उभर कर सामने आई वो यह है कि मोदी यहाँ छाए हुए हैं, भले ही नकारात्मक बातों को लिए। मुख्य ख़बर मीडिया की न्यूट्रेलिटी को लेकर है कि मोदी का विचार ख़तरनाक है। हालाँकि, यह बात स्क्रॉल की लीड बने, तो मज़ेदार हो जाती है। मतलब स्क्रॉल मीडिया की निष्पक्षता पर लेख लिख रहा है।

हम उस पर भी नहीं बात करने वाले क्योंकि स्क्रॉल और मीडिया न्यूट्रेलिटी की बातें करना वैसा ही जैसे आईसिस वाला शांति के बारे में बताने लगे अपने सामूहिक नरसंहार वाले विडियो के पहले कुछ सेकेंडों में।

मेरा ध्यान राहुल गाँधी से जुड़ी एक ख़बर पर गया जहाँ, आप ने सही गेस किया, मोदी की ही बात हो रही थी। एक तो राहुल गाँधी को लोग सीरियस लेने लगते हैं, और उसकी बातों को चुनाव के दौरान छापते हैं, फिर भी राहुल गाँधी, जिनके मुँह में रवीश कुमार सवाल के साथ जवाब भी ठूँस देते हैं कि क्या उनको लगता है कि विपक्ष को मीडिया में जगह नहीं मिल रही, कहते हैं कि उन्हें जगह नहीं मिलती। ये बोलते हुए उनके डिम्पल भी पड़ते हैं।

राहुल गाँधी ने कुछ भी सेंसिबल नहीं बोला होगा, या स्क्रॉल के लिए भी उनकी नीति या विजन को लेकर कही बातें ज़रूरी नहीं लगी होंगी, इसी कारण उन्होंने भी वो हिस्सा उठाया जिससे उन्हें ज़्यादा हिट्स आते। आज कल मोदी ही पक्ष में हैं, मोदी ही विपक्ष में। पक्ष वाले भी मोदी-मोदी कह रहे हैं, विपक्ष वाले भी मोदी-मोदी ही कह रहे हैं। तो स्क्रॉल भी, जो कि विपक्ष में ही खड़ा है, भले ही साइट का एक्सेन्ट भगवा हो, मोदी-मोदी से ही दुकान चला रहा है।

मोदी का इंटरव्यू

इससे पहले की आगे बढ़ूँ, एक संदर्भ बताना ज़रूरी है। हाल ही में दीपक चौरसिया ने प्रधानमंत्री मोदी का इंटरव्यू लिया था, जिसमें साक्षात्कार के अंत में दीपक चौरसिया ने मोदी से कहा कि वो कोई कविता सुना दें। मोदी ने अपने स्टाफ़ से कुछ पन्ने मँगवाए और कविता पढ़ी। पन्ने कैमरे में भी क़ैद हुए और वहाँ यह भी दिखा कि मोदी को पूछा गया वही सवाल पहले से प्रिंट किया हुआ था।

कुछ लोगों के कान खड़े हो गए, और वो दुनिया को यह बताने लगे कि इंटरव्यू तो स्क्रिप्टेड था। आम आदमी भी सोचने लगता है कि पहले से सवाल दे दिए गए थे, और रवीश जी जैसे विद्वान कहते हैं कि फ़िक्स था, तो फ़िक्स ही रहा होगा। लोगों को यह बात पता नहीं होती कि आपको अपने स्कूल की मैगजीन के लिए भी अगर किसी शिक्षक का इंटरव्यू लेना हो, तो भी प्रक्रिया यही है कि आपको अपने सवाल बताने होते हैं, ताकि सामने वाले तैयार रहे।

जिसका भी आप इंटरव्यू लेने वाले हैं, पहले तो उसकी सहमति होनी चाहिए। दूसरी बात आपको एक प्रीइंटरव्यू के तौर पर सारे सवाल अपने सामने वाले को बताने होते हैं। ये उसकी इच्छा है कि वो किस सवाल की आपको अनुमति दे, किसकी नहीं।

ख़ासकर ऐसे मौक़ों पर जिसमें प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, गृहमंत्री, रक्षामंत्री, वित्तमंत्री आदि हों, तो उनके सचिव और कार्यालय के ऊपर होता है कि सारे प्रश्नों को देखें, छाँटे, संपादित करें। फिर वो इंटरव्यू लेने वाले के पास भेजा जाता है। अगर वो इनके कार्यालय द्वारा भेजे गए लिस्ट से सहमत है तो इंटरव्यू का दिन और समय आदि तय करता है।

इतनी तैयारी दो बातों के लिए होती है। पहली ये कि हर पद की एक गरिमा होती है। रैली करते राजनेता और देश के प्रधानमंत्री में अंतर होता है। इसीलिए आप उसे पार्टी का नेता मानकर अपने हिसाब से कुछ भी पूछने को स्वतंत्र नहीं होते। दूसरी बात ये है कि अगर पहले बताया ना जाय तो एक घंटे चलने वाले इंटरव्यू में बोलने के लिए आँकड़े हर वक़्त आपके पास नहीं होते।

राहुल ने उड़ाया मजाक, स्क्रॉल ने हमें बताया

यही कारण है कि मोदी के पास जो पन्ने थे, उस पर सवाल पहले से लिखे हुए थे। इस पर राहुल गाँधी ने दीपक चौरसिया से एक बातचीत के दौरान उसी संदर्भ में पूछ लिया कि क्या मोदी ने जो जवाब दिए वो पहले से पन्ने पर लिखे हुए थे?

स्क्रॉल के मुताबिक़ ये जवाब इंटरनेट पर वायरल हो गया है। हो सकता है हो गया हो, जब हर दिन टिकटॉक पर ग्लास से मुँह पर पानी मार कर रोते हुए नवयुवकों का विडियो वायरल होता रहता है तो राजनीति के उभरते हुए नफरत-प्यार का टॉनिक बेचने वाले कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुटकुले क्यों वायरल नहीं होंगे।

हेडलाइन में इस बात को ऐसे जताया गया है मानो पूरी दुनिया के लोग इंटरव्यू की तैयारी नहीं करते और सारे सवालों के जवाब स्मृति के आधार पर देते हैं। और तो और, जिस विडियो की स्क्रॉल बात कर रहा है, वो सवाल मोदी द्वारा लिखी हुई एक कविता का था, जो स्क्रॉल के हिसाब से ‘डिड ही आन्सर फ़्रॉम हिज़ मेमरी’ होना चाहिए था। मतलब, कविता पूरी याद कर लेते, और तब सुनाते।

समस्या यहाँ यह है कि स्क्रॉल ने इसे इस हिसाब से रखा है जैसे मोदी के पास पन्ने पर लिखा हुआ जवाब का होना विश्व की ऐसी पहली घटना है। एडिटर जानते होंगे कि प्रधानमंत्री के इंटरव्यू के सारे सवाल पीएमओ या उनके स्टाफ़ के पास होते हैं, ताकि वो सही आँकड़े या रेफरेंस के हिसाब से तैयारी कर सकें। लेकिन जब पत्रकारिता की जगह मज़े लेना ही उद्देश्य हो तो राहुल गाँधी के क्यूट डिम्पल पर, उन्हें समोसा कैसा लगा, इन बातों पर भी पत्रकारिता होती रहनी चाहिए।

स्क्रॉल को मैं ज्ञान नहीं दे रहा क्योंकि वो ज्ञान लेने की स्थिति से बाहर जा चुके हैं। जिन्हें मोदी फासिस्ट और लोकतंत्र का हत्यारा दिखता है, लेकिन ममता के बंगाल में तृण और मूल सब हरे-हरे हैं, तो ऐसे लोग और क्या पत्रकारिता करेंगे। मैंने सोचा कि साइट पर खोजूँ जहाँ इन्होंने ममता से रवीश कुमार ब्रांड वाले कड़े सवाल किए होंगे कि मरने वाले चाहे भाजपा के हों, या तृणमूल के, पुलिस तो बंगाल सरकार की है, तो ममता ने क्या उपाय किए इस संदर्भ में?

‘लोगों की लटकती लाशों का सिलसिला कब थमेगा ममता जी?’, ‘पंचायत चुनावों से लेकर, विधानसभा चुनाव और अब लोकसभा चुनाव तक, बंगाल हिंसा का पर्याय क्यों बन गया है?’, ‘आपके राज्य में हर मुहर्रम और दुर्गा पूजा से लेकर अब सरस्वती पूजा और रामनवमी तक दंगे क्यों होते हैं?, ‘आपके राज्य में बर्धमान, धूलागढ़, पुरुलिया, मालदा, कालियाचक, इल्लमबाजार, हाजीनगर, रानीगंज, मुर्शीदाबाद, जलांगी, मिदनापुर, आसनसोल आदि जगहों पर लगातार दंगे क्यों हो रहे हैं?’

स्क्रॉल ने ऐसे सवाल नहीं उठाए हैं। स्क्रॉल वालों ने ममता को फासीवादी, तानाशाह, लोकतंत्र की हत्यारिन, आदि न तो कहा, न शायद कह पाएँगे क्योंकि इनके अजेंडा को यह सूट नहीं करता। अगर ये कहेंगे भी तो रवीश की ही तरह खानापूर्ति करेंगे और माइल्ड ट्रीटमेंट के साथ लिखेंगे कि ‘क्या ममता के बंगाल की हिंसा मोदी के उद्भव के कारण हिन्दुओं के भीतर छिपी घृणा की अभिव्यक्ति है?’

क्योंकि घूम-फिर कर, सारी हिंसाएँ, सारे दंगे, एक व्यक्ति के सत्ता में आने के कारण हो रहे हैं। ममता के पास पुलिस है, लेकिन हिन्दुओं के मन से कानून का ख़ौफ़ मोदी के आने से निकल गया है और वो बंगाल में दंगे कर रहे हैं। कितना क्यूट है ना स्क्रॉल? बिलकुल राहुल गाँधी के डिम्पल्स की तरह।

इसीलिए कहता हूँ, कि स्क्रॉल को तेज़ी से स्क्रॉल करते रहिए, जैसे आप ट्वॉयलेट पेपर के रोल के साथ करते हैं। ट्वॉयलेट पेपर कम से कम अपने ऊपर फ़्री प्रेस तो नहीं लिखता, और अपना नीयत कार्य भी करता है, स्क्रॉल तो खैर… जाने दीजिए!

रायबरेली में भाजपा कार्यकर्ता की लाठी डंडों से पीट-पीटकर हत्या

रायबरेली में मंगलवार को दो सगे भाइयों पर जानलेवा हमला किया गया। दलित गुटों द्वारा मारपीट में गंभीर रूप से घायल युवक की मौत हो गई जबकि उसके घायल भाई का इलाज चल रहा है। हमलावरों ने उस समय घटना को अंजाम दिया, जब दोनों भाई कार में बैठकर घर जा रहे थे। पुलिस हमलावरों की तलाश कर रही है।

भाजपा कार्यकर्ता था शिव सिंह

हरचंदपुर थाना क्षेत्र के मझिगवां हरदोई गाँव निवासी एवं पूर्व प्रधान के छोटे बेटे शिव प्रताप सिंह उर्फ शिव सिंह (32 वर्ष) ठेकेदारी करते थे। साथ ही वो भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता भी थे। मंगलवार (मई 14, 2019) लगभग चार बजे शिव सिंह अपने भाई गोपाल सिंह के साथ गाड़ी से घर लौट रहे थे। सलेमपुर तिराहे के पास गाँव के ही 15-20 लोगों ने उन्हें रोक लिया और कार में तोड़ फोड़ की। दोनों भाइयों को कार से घसीटकर लाठी-डंडों से जमकर पीटा। इसमें दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।

शोरगुल मचाने पर आसपास के लोग पहुँचे, तो हमलावर फरार हो गए। इस मामले पर एसपी सुनील कुमार सिंह का कहना है कि लाठी-डंडों से पीटकर हत्या की गई है। इस हमले में मृतक शिव सिंह भाजपा के लोकसभा प्रत्याशी दिनेश प्रताप सिंह के करीबी माने जाते हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, शिव सिंह पर यह हमला मंगलवार सुबह कॉन्ग्रेस MLA अदिति सिंह के काफिले पर हरचन्दपुर एरिया, लखनऊ-रायबरेली हाइवे पर हुए हमले के कुछ देर बाद हुआ। हालाँकि, पुलिस विभाग का कहना है कि शिव सिंह पर हुए इस हमले का कॉन्ग्रेस MLA पर हुए हमले से कोई सम्बन्ध नहीं है।

जब भीड़ ने दोनों भाइयों की कार पर हमला किया तो मृतक शिव का भाई गोपाल तो वहाँ से बचकर भागने में सफल रहा मगर शिव वहीं फँस गए। जब वह बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़े और आसपास के लोग जुटने लगे तो हमलावर वहाँ से भाग निकले। शिव सिंह के जानने वाले उन्हें लेकर आनन-फानन में नजदीकी सीएचसी पहुँचे। फिर उन्हें शहर के निजी अस्पताल भेजा गया, लेकिन वहाँ चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घायल गोपाल का इलाज अभी भी चल रहा है।

प्रधानी की रंजिश हो सकती है वजह

ग्रामीणों ने बताया कि शिव के पिता रंजीत सिंह पूर्व प्रधान हैं। प्रधानी की रंजिश को लेकर ही शिव सिंह का विवाद हमलावर पक्ष से चल रहा था, इसी को लेकर हमला हुआ। उनकी मौत की खबर सुनकर बड़ी संख्या में उसके जानने वाले अस्पताल पहुँचे।

शिव सिंह की हत्या की सूचना पर एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह भी निजी अस्पताल पहुँचे। वहाँ वह शिव के पिता रंजीत सिंह से मिले और सांत्वना दी। एमएलसी ने कहा कि जिला पंचायत से इस वारदात का कोई वास्ता नहीं है और गाँव में आपसी विवाद के चलते यह वारदात हुई है।

नजदीकी पुलिस स्टेशन हरचन्दपुर में इस मामले पर FIR दायर कर दी गई है और अपराधियों की पहचान करने की प्रक्रिया जारी है।

ममता बन रहीं सद्दाम हुसैन, यह दीदीगीरी नहीं चलेगी: विवेक ओबेरॉय

बंगाल की अराजक बदहाली पर ममता बनर्जी के खिलाफ स्वर मुखर होते जा रहे हैं। अब उनके आलोचकों में फिल्म अभिनेता विवेक ओबेरॉय भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने ट्विटर पर ममता बनर्जी को पहले सम्मानित महिला बताते हुए उनके व्यवहार को दिवंगत इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन जैसा बताया। उन्होंने ट्वीट के साथ ममता बनर्जी के ही डेढ़ साल पहले के बयान का स्क्रीशॉट लगाया, जिसमें ममता ने लोकतंत्र को खतरे में बताते हुए विपक्षी एकता की अपील की थी।

प्रियंका शर्मा और तजिंदर बग्गा की गिरफ़्तारी पर जताया क्षोभ

प्रधानमंत्री मोदी की बायोपिक में उनकी भूमिका निभा रहे विवेक गुजरात भाजपा के स्टार प्रचारक भी हैं। उन्होंने भाजयुमो की हावड़ा संयोजिका प्रियंका शर्मा और दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा की गिरफ़्तारी पर क्षोभ जताया।

मालूम हो कि कल कोलकाता में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान जमकर हिंसा हुई थी। कड़ी सुरक्षा के बावजूद हमलावर अमित शाह के वाहन पर लाठी-डंडे फेंकने में कामयाब हो गए। इसके बाद भाजपा और तृणमूल कॉन्ग्रेस के समर्थक सीधे-सीधे टकरा गए थे। यहाँ तक कि महान बंगाली लेखक और दार्शनिक ईश्वर चंद्र ‘विद्यासागर’ की प्रतिमा भी खंडित कर दी गई, जो विद्यासागर कॉलेज में लगी थी। इसके बाद कल रात को कई भाजपा नेताओं को बंगाल में गिरफ्तार कर लिया गया, जिनमें से एक बग्गा भी थे।

पूरे मामले को लेकर भाजपा और तृणमूल एक दूसरे पर हमलावर हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि वह सुरक्षित बचे हैं तो केवल केंद्रीय सुरक्षा बल सीआरपीएफ के कारण। तृणमूल नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने एक दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तजिंदर बग्गा के बंगाल में ‘बाहरी’ होने का हवाला देते हुए उनकी गिरफ़्तारी को जायज ठहराने की कोशिश की है।

कौन बनेगा प्रधानमंत्री? नतीजे जानने के लिए आपको 24 मई तक करना पड़ सकता है इंतजार

जैसा कि हम जानते हैं, 19 मई को सातवें और अंतिम 59 सीटों के लिए मतदान संपन्न होने के साथ ही लोकसभा चुनाव का समापन हो जाएगा और 23 मई को नतीजे आने की बात कही गई है। लेकिन परिस्थितियाँ कुछ अलग बनीं तो चुनाव परिणाम 24 मई को भी आ सकते हैं। अर्थात, नरेंद्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनेंगे या नहीं, यह जानने के 24 मई तक इन्तजार करना पड़ सकता है। कुल मिलकर बात यह है कि अगर चुनाव परिणाम के आँकड़े निर्णायक रहे तो 23 मई को सब कुछ साफ़ पता चल जाएगा लेकिन क़रीबी लड़ाई की स्थिति में आपको एक दिन और इन्तजार करना पड़ सकता है। ख़बरों के अनुसार, 23 मई की जगह अंतिम नतीजे 24 मई को प्राप्त हो सकते हैं।

पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग के अधिकारी संजय बासु ने इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए बताया, “सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा निर्णय के अनुसार, चुनाव नतीजे 1 दिन लेट आ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने प्रति विधानसभा क्षेत्र में पाँच रैंडम पोलिंग बूथ पर ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों का मिलान करने का निर्देश दिया है। इसके कारण मतगणना में 8 से 10 घंटे की संभावित देरी से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रक्रिया और लम्बी होने के पीछे ये तीन कारण हैं- वीवीपैट पर्चियों का मिलान, पोस्टल बैलेट्स की गणना और ‘Electronically Transmitted Postal Ballots System (ETPBS)’ की स्कैनिंग।

चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य मतगणना को सटीक तरीके और निर्बाध रूप से पूरा करना है। प्रत्येक मतगणना क्षेत्र के पाँच पोलिंग बूथों की गणना एक टेबल पर की जाएगी। इसीलिए परिणाम आने में 1 दिन की देरी भी लग सकती है। बता दें कि 21 विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट जाकर 50% ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों का मिलान करने की माँग की थी, जिसे कोर्ट द्वारा नकार दिया गया। लेकिन, अदालत ने प्रति विधानसभा एक से बढ़ाकर पाँच रैंडम पोलिंग बूथ की ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों के मिलान की बात कही।

अदालत का यह आदेश मतगणन में सटीकता और संतुष्टि हासिल करने के लिए था। हालाँकि, विपक्षी दलों ने अपनी माँगें कम करते हुए 25% पर्चियों के मिलान की बात कही, जिसे तवज़्ज़ोह नहीं दिया गया। इधर यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने मतगणना को लेकर अपनी सक्रियता तेज़ कर दी है। सोनिया ने सभी प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं को फोन कर 23 और 24 मई को दिल्ली में उपस्थित रहने का आग्रह किया है। उधर केसीआर ने भी तमिलनाडु में स्टालिन से मुलाक़ात कर तीसरे मोर्चे के लिए जुगत भिड़ानी तेज़ कर दी है।

आंध्र के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने चुनाव ख़त्म होने के बाद 21 मई को सभी विपक्षी दलों की बैठक बुलाने की पेशकश की है। इस सम्बन्ध में उन्होंने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी से मुलाक़ात भी की। सोनिया ने विपक्षी दलों को यह सन्देश देने की कोशिश की है कि भले ही वे सभी चुनाव पूर्व गठबंधन का हिस्सा न रहे हों लेकिन परिणाम आने के बाद मिली-जुली सरकार के लिए सभी को तैयार रहना चाहिए। कर्नाटक के सीएम कुमारस्वामी और हरियाणा के नेता अभय चौटाला पूर्व में मायावती को प्रधानमंत्री बनाने की बात कह चुके हैं। ऐसे में ऊँट किस करवट बैठेगा, ये मई की 23 या 24 तारीख़ को ही पता चलेगा।

Sp Ops डिवीजन के प्रमुख बने एके ढींगरा: आतंकवाद के खिलाफ भारत में पहली बार आर्मी-IAF-नेवी एक साथ

मेजर जनरल एके ढींगरा को आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल आपरेशंस डिवीजन का पहला मुखिया नियुक्त किया गया है। इस त्री-सेना के गठन में सेना की पैराशूट रेजिमेंट, नौसेना की मार्कोस और वायु सेना के गरुड़ कमांडो बल के विशेष कमांडो शामिल होंगे।

पहली बार तीनों सेनाएँ एक कमांड और नियंत्रण बोर्ड के अंतर्गत करेंगी काम

इन तीनों सेनाओं अपना कार्य करना शुरू कर दिया है। रक्षा मंत्रालय ने इसकी जिम्मेदारी मेजर जनरल ढींगरा को सौंपी है। इसमें सेना की स्पेशल फोर्स शामिल होंगी। हालाँकि, तीनों सेनाओं ने इससे पहले भी कई ऑपरेशन एक साथ किए है लेकिन, यह पहली बार है जब तीनों सेनाएं एक कमांड और नियंत्रण बोर्ड के अंतर्गत काम करेंगी। इसका लाभ ये होगा कि ऐसा करने से ट्रेनिंग के खर्चे में कमी आएगी। आर्मी सूत्रों के अनुसार, मेजर जनरल ढींगरा एक स्पेशल फोर्सेज के दिग्गज हैं और कुलीन 1 पैरा स्पेशल फोर्सेज रेजिमेंट से हैं। उन्होंने अमेरिका में स्पेशल ऑपरेशंस कोर्स भी किए हैं। मेजर ढींगरा श्रीलंका में इंडियन पीसकीपिंग फोर्स ऑपरेशन का भी हिस्सा थे।

नया डिवीजन त्री-सेवा एकीकृत रक्षा कर्मचारियों के तहत काम करेगा। रक्षा मंत्रालय में चल रही चर्चा के अनुसार, इसका मुख्यालय आगरा या बैंगलोर में बनाया जाएगा। इस डिवीजन को देश के भीतर और बाहर दोनों तरफ से किसी भी बड़े आतंकवाद-विरोधी अभियान को शुरू करने के लिए सरकार की पहली पसंद होने की उम्मीद भी जताई जा रही है। ये फैसला लेने में सबसे अहम भूमिका रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, रक्षा सचिव संजय मित्रा और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने प्रमुख की रही है। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोधपुर में संयुक्त कमांडरों सम्मेलन में आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल आपरेशंस डिवीजन को स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी।

आतंकवाद-विरोधी अभियान के लिए की जाएगी तैयारी

सरकार ने इस डिवीजन और डिफेंस सायबर एजेंसी (डीसीए) को पिछले साल मंजूरी दी थी। डीसीए की जिम्मेदारी नौसेना के अधिकारी रीयर एडमिरल मोहित गुप्ता को सौंपी गई है। इसके अलावा एक स्पेस एजेंसी भी बनाई जाएगी, जो स्पेस मिशन को अंजाम देगा। इसकी कमान वायुसेना के किसी अधिकारी को दी जाएगी। यह सभी त्री-सेना का हिस्सा होंगे।

आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल ऑपरेशंस डिवीजन कमाडोंज की एक छोटी सी टीम के जरिए काम करना शुरू करेगा। इसमें 3,000 प्रशिक्षित कमांडोज हैं, जो जंगलों, समुद्र में युद्ध करेंगे और हेलीकॉप्टर रेस्क्यू ऑपरेशंस का काम करेंगे। टीम ऐसे मिशनों के संचालन के लिए जिम्मेदार होगी, जिसमें रणनीतिक प्रतिष्ठानों, आतंकियों को लक्षित करना और दुश्मन की युद्ध लड़ने की शक्ति को कतरना शामिल होगा।

मजहबी सहिष्णुता और सहअस्तित्व के लिए गोडसे को कहा था हिन्दू आतंकवादी: कमल हासन की पार्टी

कमल हासन द्वारा भारत का पहला आतंकवादी एक हिन्दू को बताने पर छिड़े विवाद के बाद उनकी पार्टी उनके बचाव में उतर आई है। न्यूज़ एजेंसी ANI ने कमल हासन की पार्टी मक्कल नीधि मय्यम के हवाले से यह खबर दी है। इसके अनुसार पार्टी उपाध्यक्ष आर महेन्द्रन ने बयान जारी कर कहा, “कमल हासन (उक्त भाषण दे कर, जिसमें भारत का पहला आतंकवादी एक हिन्दू, नाथूराम गोडसे, को बताया गया था) सभी गुटों में मजहबी सहिष्णुता और सहअस्तित्व के लिए अपील करना चाहते थे और हर मजहब तथा हर रूप के चरमपंथ की निंदा करना चाहते थे।”

‘भाषण को एंटी-हिन्दू बताना साजिश, इससे कन्फ्यूजन हो रहा है’

पार्टी ने आगे कहा, “भाषण को संदर्भ से परे समझ लिया गया है और दुर्भावना से एंटी-हिन्दू बताया जा रहा है। इससे आम आदमी में कन्फ्यूजन और चिंता पैदा हो रहा है। आम आदमी इस साजिश को नहीं जानता।” इससे पहले मंगलवार को भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर निर्वाचन आयोग को कमल हासन के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिए जाने की माँग की थी। कमल हासन ने गाँधी जी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को आजाद भारत का पहला आतंकी, जो कि एक हिन्दू (था), बताया था।

हासन उस समय तमिलनाडु की अरवाकुरीचि विधानसभा में प्रचार कर रहे थे, जब रविवार (12 मई) को उन्होंने यह विवादित बयान दिया था। उन्होंने वहाँ कहा था, “मैं ऐसा इसलिए नहीं कह रहा क्योंकि यहाँ बहुत सारे मुस्लिम मौजूद हैं। मैं यह महात्मा गाँधी की प्रतिमा के सामने कह रहा हूँ। आजाद भारत में पहला आतंकवादी एक हिन्दू है। उसका नाम नाथूराम गोडसे है।”