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तो क्या अब यह पूछूँ कि राजीव गाँधी माँ की मौत के वक्त कैमरामैन लिए घूम रहे थे?

आज कल राजीव गाँधी चर्चा में आ गए हैं। चर्चा में वो गलत कारणों से आए, जैसा कि वो अपनी असमय मृत्यु के बाद अक्सर आते रहे हैं। साल के दो दिनों को छोड़ दिया जाए, वो भी कॉन्ग्रेस के कार्यकाल के, तो राजीव गाँधी सिख हत्याकांड से लेकर, क्वात्रोची, एंडरसन, शाहबानो, रामजन्मभूमि, बोफ़ोर्स, भोपाल गैस कांड आदि के लिए हमेशा चर्चा में बने रहते हैं।

मोदी ने एक रैली में उन्हें ‘भ्रष्टाचारी’ कह दिया और कॉन्ग्रेस के कई लोगों के साथ, उनके समर्थकों को भी बुरा लग गया। उसके बाद मीडिया और सोशल मीडिया पर चर्चा छिड़ गई कि राजीव गाँधी कितने महान थे और देश के लिए उन्होंने क्या-क्या किया था। बताया जाने लगा कि राजीव गाँधी ये थे, और राजीव गाँधी वो थे।

हालाँकि, ये मोदी का वार नहीं, पलटवार था जो कि राहुल, प्रियंका और कॉन्ग्रेस के लगातार ‘चौकीदार चोर है’ के नारे के बाद आया था। कॉन्ग्रेस का दुर्भाग्य देखिए कि जो नारा इन्होंने इस लोकसभा चुनाव के लिए इस बार अपना मुख्य नारा बनाया है, वो भी चोरी का है। कल ही ट्विटर पर एक विडियो घूम रहा था जिसमें 1989 के चुनावों के विश्लेषण के दौरान पत्रकार वीर साँघवी दूरदर्शन पर बता रहे हैं कि बंगाल में ‘राजीव गाँधी चोर है’ का नारा वामपंथी लगा रहे हैं।

ये वही वामपंथी हैं जिनकी मदद से कॉन्ग्रेस ने सरकार चलाई है। और अब वही वामपंथी एक बार फिर कॉन्ग्रेस की मदद ‘चोर’ वाले नारे के माध्यम से मदद कर रहे हैं।

ख़ैर, इसी चर्चा के दौरान लोग बताने लगे कि राजीव गाँधी की मृत्यु के बाद इस तरह की बातें गलत हैं। फिर कॉन्ग्रेस ख़ानदान को एक शहीदों के परिवार की तरह दिखाया जाने लगा। उसके बाद कुछ तस्वीरें फैलाई जाने लगीं कि कैसे राहुल गाँधी अपने पिता की छाती से चिपक कर रो रहे थे जब उनकी दादी, यानी श्रीमती इंदिरा गाँधी की हत्या हो गई थी।

किसी बच्चे का अपने पिता से चिपक कर इस तरह से रोना एक सहज बात है। क्योंकि हर व्यक्ति कहीं न कहीं अपने परिवार के सदस्य के साथ भावुक तौर पर जुड़ा होता है, और ऐसे मौक़ों पर ऐसे भाव नैसर्गिक हैं। उसके बाद तस्वीरें आईं कि कैसे राहुल गाँधी अपने पिता की अर्थी का कंधा दे रहे थे। राजीव गाँधी की हत्या से जुड़ी तमाम बातें सोशल मीडिया पर दिखाई जाने लगीं।

लेकिन इससे साबित क्या होता है? ये तो सामान्य-सी बात है कि किसी की मृत्यु हुई है और वो प्रधानमंत्री है, तो ऐसी तस्वीरें तो होंगी ही। इसका राजीव गाँधी की नीतियों, उनके द्वारा किए घोटाले और अपराधियों को मदद पहुँचाने की बातों से कोई वास्ता नहीं। उनकी हत्या की गई, हत्यारों को सजा मिली। लेकिन हत्या हो जाने से वह इन अपराधों से मुक्त नहीं हो जाते।

इन तस्वीरों का दूसरा पहलू यह है कि वही सोशल मीडिया योद्धा इन तस्वीरों को दिखा रहे हैं जो मोदी द्वारा अपनी माताजी के पाँव छूने में दिखावा ढूँढ लाते हैं। वो हर ऐसे मौक़े पर कहते हैं कि आखिर कौन अपनी माँ के पैर छूता है तो कैमरामैन लेकर चलता है। वो हर बार मोदी का अपनी माताजी से मिलने को ऐसे दिखाते हैं जैसे मोदी अपनी माताजी को भुना रहा हो वोटों को लिए।

हम उस दौर में जी रहे हैं जब हर हाय प्रोफाइल व्यक्ति की एक्सक्लूसिव तस्वीर की एक क़ीमत होती है। मोदी जैसे व्यक्ति की हर मूवमेंट पर चुनावों के दौरान ख़बर बनती है। मोदी चाहे, या न चाहे, उनका इस बात में कुछ नहीं चलता। इसी में एक बात और है कि अगर मोदी मीडिया को अपने साथ आने से, या दूर से भी फोटो लेने से मना कर दे तो यही मोदी हिटलर हो जाएगा और लोग कहेंगे कि मोदी के हाथों में जो डब्बा था उसमें पंद्रह हजार करोड़ के दो नए नोट थे, जो उसने चुपके से अपनी माताजी को दे दिया।

मीडिया को आप फोटो लेने से नहीं रोक सकते। मीडिया को आप फोटो दिखाने से नहीं रोक सकते। मीडिया का काम है ऐसा करना। इसलिए, दक्षिणपंथियों ने यह सवाल नहीं उठाया कि क्या राजीव गाँधी अपनी माताजी की हत्या के बाद कैमरामैन लेकर चल रहे थे और उन्हें कह रखा था कि ज्योंहि राहुल रोए, तस्वीरें ले लेना। क्योंकि वामपंथियों, छद्म-लिबरलों और दक्षिणपंथियों में यही फर्क है।

ऐसा नहीं होता कि कोई ऐसे मौकों पर तस्वीर लेने का निर्देश देता हो। प्रधानमंत्री की हत्या हुई, पूरे देश की मीडिया उस समय भी, अपने सीमित संसाधनों के साथ वहाँ मौजूद थी और तस्वीरें ली जा रही थीं। आज तो साधन असीमित हैं। आज तो पाँच सौ मीटर दूर से आप तस्वीरें ले सकते हैं, न रील ख़र्च करने का झंझट, न उसे डिलीट करने का। फिर भी मोदी को लेकर एक घृणित कैम्पेन चलता है मानो एक पीएम का अपनी माँ के पैर छूना दिखावा हो जाता है।

चुनावों के इस दौर में हम सब अपनी मर्यादा भूल गए हैं। नेता भी, जनता भी, मीडिया भी। हमने खम्भे पकड़ रखे हैं और चोर को साधु बनाने के लिए जोर लगा रहे हैं, कोई साधु को चोर बनाने का जुगाड़ लगा रहा है। बहुत कम ऐसे हैं जो दोनों बातों को, उन समयों के संदर्भ में रखकर तार्किकता से देखते हैं।

राजीव गाँधी की हत्या हमारे देश पर एक हमला था, लेकिन राजीव गाँधी एक भ्रष्ट व्यक्ति भी थे। दोनों दो बातें हैं, और दोनों सही हैं। उसी तरह हर व्यक्ति को अपने परिवार के साथ समय बिताने का हक़ है, तस्वीरें लेने का हक़ है, शेयर करने का हक़ है। हम में से वो व्यक्ति भी मोदी का मजाक उड़ाता है जो दिन भर में अपने खाने की प्लेट से लेकर, अपने प्रेमी-प्रेमिका की तस्वीरों और पाउट वाले सेल्फी तक अपना दिन निकाल देता है।

इसलिए हम क्या करते हैं, क्यों करते हैं, जो करते हैं, उसका संदर्भ क्या है, ये सब जान कर ही किसी बात पर कमेंट या चर्चा करेंगे तो बेहतर होगा।

पति की खातिर दलित महिला गुंडों के सामने झुकी, 3 घंटे तक 5 युवकों ने किया रेप – बनाए 11 वीडियो क्लिप

राजस्थान के अलवर में एक बेहद ही शर्मनाक घटना में 5 युवकों ने पति के सामने ही पत्नी के साथ कथित तौर पर गैंगरेप को अंजाम दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपित युवकों ने गैंगरेप के बाद दलित जाति की पीड़ित युवती का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। यह घटना राजस्थान के अलवर जिले के थानागाजी इलाके की है।

विगत 26 अप्रैल को पीड़िता अपने पति के साथ बाइक पर सवार होकर दोपहर 3 बजे तालवृक्ष जा रही थी, तभी थानागाजी-अलवर बाइपास रोड पर उनकी बाइक के सामने 5 युवकों ने अपनी मोटरसाइकिलें लगा दीं। इसके बाद वे महिला एवं उसके पति को रेत के टीलों की तरफ ले गए। वहाँ उन्होंने पति के साथ मारपीट की और दंपति को बंधक बना लिया।

पाँचों युवकों ने इसके बाद दोनों पति-पत्नी के कपड़े उतरवाए। पति के साथ मारपीट की। पीड़िता के साथ भी मारपीट की और रेप की कोशिश की। शुरुआत में जब पीड़िता ने रेप की कोशिश का विरोध किया तो उसके पति को और मारा गया। अंततः पीड़िता ने अपने पति की रक्षा के लिए हार मान ली। इसके बाद उन दरिंदों ने 3 घंटे तक बारी-बारी से पीड़िता के साथ रेप किया। 11 वीडियो क्लिप भी बनाए।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट हैं ‘गायब’

चुनावों के बीच गैंगरेप के इस मामले ने पूरे इलाके में रोष का माहौल पैदा कर दिया है। आरोपितों की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई को लेकर जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। लेकिन अभी तक इस मामले में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत या उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का बयान नहीं आया है। उधर, इस मामले में 30 अप्रैल को ही केस दर्ज होने के बावजूद अभी तक आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। मीडिया और पुलिस के मुताबिक, सभी आरोपित शख्स गुर्जर समाज से हैं और क्षेत्र में उसका राजनीतिक प्रभाव भी है, इसलिए शुरुआत में डर की वजह से पीड़िता की ओर से रिपोर्ट दर्ज नही करवाई गई थी।

आरोपित युवकों ने न सिर्फ महिला के साथ दरिंदगी की थी, बल्कि वीडियो भी बनाया था। इसके साथ ही उन्होंने पति की हत्या की धमकी भी दे दी थी। धमकी के डर से दलित दंपति ने इस मामले की शिकायत दर्ज नहीं की, लेकिन बदमाश फिर भी बाज नहीं आए और पति को लगातार फोन पर हत्या और वीडियो वायरल करने की धमकियाँ देते रहे, और वीडियो को वायरल कर दिया। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ जबर्दस्त आरोप है। पुलिस ने छोटेलाल, जीतू और अशोक सहित 5-6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

26 अप्रैल की घटना को चार दिनों बाद 30 अप्रैल को पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। पुलिस ने IPC और SC/ST ऐक्ट की धाराओं 147, 149, 323, 341, 354B, 376(D) & 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

जाँच में पुलिस की भूमिका संदिग्ध

इस शर्मनाक घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि चुनाव के कारण घटना का खुलासा न कर के पुलिस क्या किसी को राजनीतिक फायदा पहुँचाना चाहती थी? अगर ऐसा नहीं था तो पुलिस कहीं आरोप‍ितों के पक्ष में ही तो नहीं थी? अगर ये दोनों कारण नहीं हैं, तो घटना का खुलासा 4 दिन बाद तब क्यों किया, जब वीडियो वायरल हो गया?

आपसी सहमति से भी तलाक लेना अब आसान नहीं, सुप्रीम कोर्ट के बाद अब HC का बड़ा फैसला

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने सोमवार (मई 7, 2019) को तलाक के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि शादी के एक साल के भीतर आपसी सहमति से तलाक का मुकदमा दाखिल नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने बताया है कि विवाह अधिनियम की धारा 13 बी के तहत शादी के 1 साल बाद ही आपसी सहमति से तलाक लिया जा सकता है।

प्रयागराज के अर्पित गर्ग और आयुषी की तलाक अर्जी को खारिज़ करते हुए जस्टिस एसके गुप्ता और जस्टिस पीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है। दंपत्ति की तलाक अर्जी परिवार न्यायाधीश द्वारा पहले ही खारिज़ की जा चुकी थी। इसके ख़िलाफ़ ही हाइकोर्ट में अपील दाख़िल हुई थी। लेकिन उच्च न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यह एक वैधानिक व्यवस्था है इसलिए तलाक के लिए एक साल की अवधि का बीतना बाध्यकारी है।

बता दें आयुषी और अर्पित नामक दंपत्ति की शादी 9 जुलाई 2018 को हुई थी। 12 अक्टूबर 2018 से वह दोनों अलग-अलग रहने लगे और 20 दिसंबर को आपसी सहमति से तलाक का मुकदमा दाखिल किया गया था। परिवार न्यायालय ने तलाक के मुकदमे के लिए एक साल की अवधि से पहले दाखिल मामले को समय से पहले मानते हुए वापस कर दिया था। परिवार न्यायालय के इसी फैसले को हाइकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

अपील करने वाले ने दलील देते हुए कहा था कि दोनों (आयुषी और अर्पित) का एक साथ रहना संभव नहीं है।दोनों अलग रहना चाहते हैं और तलाक के लिए भी राजी हैं। इसलिए उनकी अपील थी कि इस वैधानिक अड़चन को दूर किया जाए।

केजरीवाल को थप्पड़ किसने मारा: AAP के ही ‘कार्यकर्ता’ ने, वीडियो और पुलिस जाँच में हुआ खुलासा

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को शनिवार (मई 4, 2019) को चुनावी रोड शो के दौरान सुरेश चौहान नाम के एक शख्स ने थप्पड़ मारा था। उस घटना को केजरीवाल ने भाजपा की साजिश करार दिया था। केजरीवाल को थप्पड़ पड़ने के बाद इस तरह की काफी बातें हुईं कि कहीं ये केजरीवाल का ही पब्लिसिटी स्टंट तो नहींं… कहीं केजरीवाल ने खुद ही तो नहीं करवाया ये हमला??? हालाँकि साफ तौर पर ये तो ये नहीं कहा जा सकता कि ये केजरीवाल की ही साजिश थी, मगर अभी एक वीडियो सामने आया है, जिससे ये बात साफ हो रही है कि सुरेश आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता है और वो नियमित तौर पर पार्टी जनसभाओं में भाग लेता है। उसे पश्चिमी दिल्ली में आप की जनसभाओं को संबोधित करते हुए भी पाया गया।

द हिन्दू में एक वीडियो की बात की जा रही है, जो कि दिल्ली के मोतीनगर की है। इस वीडियो में सुरेश के गले में आम आदमी पार्टी का दुपट्टा दिखाई दे रहा है। साथ ही ये भी देखा जा सकता है वो केजरीवाल के गाड़ी के काफी करीब खड़ा है। सुरेश के आम आदमी पार्टी से जुड़े होने का एक और सबूत उस वीडियो में भी मिल जाता है, जिसमें केजरीवाल 26 मार्च को पश्चिमी दिल्ली के सुदर्शन पार्क में एक सार्वजनिक बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान सुरेश पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ मंच के काफी करीब खड़े दिखाई दे रहे हैं। वो ऐसी जगह खड़े हैं, जहाँ पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था होती है।

मोती नगर रैली में थप्पड़ कांड के ठीक पहले सुरेश (फोटो साभार: द हिन्दू)

आप नेता संजय सिंह ने इस बाबत सोमवार (मई 6, 2019) को दिल्ली के पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक से मुलाकात की और पुलिस के उस दावे को गलत बताया कि केजरीवाला को मारने वाला सुरेश चौहान आप का समर्थक है। संजय सिंह ने कहा कि ये भाजपा और कॉन्ग्रेस की साजिश थी। हमलावर मोदी भक्त था। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री की सुरक्षा बढ़ाने के लिए पुलिस से अनुरोध किया।

जानाकारी के मुताबिक, जब स्थानीय स्तर पर सुरेश के बारे में पूछताछ की गई, तो पता चला कि सुरेश ‘आप’ की रैलियों और सार्वजनिक बैठकों के लिए एक आयोजक के रूप में काम करता था। पुलिस ने पार्टी के रजिस्टर्ड कार्यकर्ता से भी इस बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि सुरेश पार्टी का रजिस्टर्ड कार्यकर्ता नहीं है, लेकिन साथ ही उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि वो आम आदमी पार्टी के कार्यकर्मों को आयोजित करने में मदद किया करता था।

सुरेश को रविवार (मई 5, 2019) को दो दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। उस पर आईपीसी की धारा 323 और 153 के तहत केस दर्ज है। जब सुरेश से केजरीवाल को थप्पड़ मारने के बारे में पूछा गया कि क्या उसने ये सब कुछ जानबूझकर किया है या फिर किसी को इसके बारे में कुछ बताया था तो उसने बताया कि उसने दो दिन पहले अपने एक दोस्त से कहा था कि वो केजरीवाल को मारेगा। मगर जब उसके दोस्त से इस बारे में पूछा गया तो उसने ये कहते हुए इस बात से इनकार कर दिया कि उसे इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है।

इसके साथ ही पूछताछ के दौरान सुरेश ने केजरीवाल का जिक्र करते हुए कहा कि वो गलत बात बोलता है। सुरेश का कहना है कि पार्टी के नेता घमंडी हो गए हैं, जिसकी वजह से केजरीवाल पार्टी से विमुख हो रहे हैं। वहीं एक अधिकारी का कहना है कि वो कानून व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए उसकी जमानत याचिका के अनुरोध का विरोध करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले में उसकी सजा सुनिश्चित करने के लिए जल्द से जल्द चार्जशीट दर्ज करेंगे।

पाकिस्तानी जेल में बंद है नोएडा से लापता हुआ कश्मीरी छात्र, पिता को आया कॉल

उत्तर प्रदेश के नोएडा से कुछ समय पहले गायब हुए एक कश्मीरी छात्र के पाकिस्तान में बंद होने की ख़बर आई है। छात्र के परिवार ने बताया कि उन्हें पाकिस्तान से कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने जानकारी दी कि उनका बेटा पाकिस्तान की जेल में बंद है।

गौरतलब है नोएडा के सेक्टर 125 स्थित एशियन बिजनेस स्कूल में पढ़ने वाला सैयद वाहिद नाम का छात्र 12 दिसंबर को गायब हो गया था।

पुलिस से बातचीच में सैयद के पिता ने बताया कि उन्हें पाकिस्तान से फोन आया था। ये कॉल उन्हें वहाँ की जेल से हाल ही में रिहा हुए एक कैदी ने किया था। उसने ही सैयद के वहाँ जेल में बंद होने की जानकारी दी। खबरों के मुताबिक रिहा हुए कैदी को सैयद ने अपने परिवार के नाम एक पत्र लिखकर दिया है। इसपर सैयद ने परिजनों का नाम और परिवार का पता भी लिखा है। फिलहाल, पुलिस मामले की सत्यता की जाँच कर रही है। उसके बाद ही विधिवत तरीके से आगे एक्शन लिया जाएगा।

सैयद का परिवार कश्मीर के बांदीपोरा इलाके में रहता है। उसकी गुमशुदगी एक्सप्रेसवे पुलिस और बांदीपोरा थाने में दर्ज है। इसलिए छात्र के पिता ने कॉल की जानकारी एक्सप्रेसवे पुलिस को दी है। सैयद के पिता नसीरुल हसन खुद भी कश्मीर पुलिस में दरोगा है। खबरों के मुताबिक सैयद को पाकिस्तान से वापस लाने के लिए परिजनों ने वहाँ जाने के लिए कागज़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।

कॉन्ग्रेस सहित 21 विपक्षी दलों को लताड़: EVM-VVPAT मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा – ‘बार-बार क्यों सुनें हम?’

ईवीएम-वीवीपैट को लेकर 21 विपक्षी दलों की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दी है। इससे बीच लोकसभा चुनाव में विपक्षी पार्टियों को तगड़ा झटका लगा है। इन दलों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। इसमें टीडीपी, कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस सहित कई अहम दल शामिल थे। इन सभी दलों ने अदालत से चुनाव आयोग को 50% वीवीपैट पर्चियों की ईवीएम से मिलान करने का आदेश देने की माँग की थी, जिसे नकार दिया गया। सुनवाई के दौरान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला मौजूद रहे। याचिका को ख़ारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने पूछा कि अदालत इस मामले को बार-बार क्यों सुने?

सीजेआई गोगोई ने कहा कि वो इस मामले में दखलअंदाज़ी नहीं करना चाहते हैं। विपक्षी दलों की तरफ से कॉन्ग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने ज़िरह की। जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने विपक्षी दलों द्वारा दायर की गई समीक्षा याचिका को ख़ारिज कर दिया। 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि हर विधानसभा क्षेत्र (असेंबली सेगमेंट) में 1 के बदले 5 ईवीएम-वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया जाएगा। विपक्षी दलों द्वारा 50% ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों के मिलान की माँग पर अदालत ने यह निर्णय लिया था।

वहीं अभिषेक मनु सिंघवी ने बाद में कहा कि मुख्य याचिका में 50% ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों के मिलान की बात कही गई है, लेकिन अदालत इसे 33% भी कर दे तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। जब अदालत ने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया तो सिंघवी ने 25% ईवीएम व वीवीपैट पर्चियों के मिलान की माँग रखी, जिसे नकार दिया गया। विपक्षी दलों का कहना था कि इस प्रक्रिया को वास्तविक, असरदार और अर्थपूर्ण बनाने के लिए ज़रूरी है कि आधे ईवीएम व वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया जाए। अदालत ने समीक्षा याचिका में दिए गए तर्कों को योग्य नहीं समझा।

अदालत के फ़ैसले के बाद नाराज़ टीडीपी सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि वह फिर से चुनाव आयोग जाएँगे। उन्होंने कहा कि तीसरा व चौथा फ्रंट, सब विपक्ष का ही हिस्सा है और वे सभी मिलकर चुनाव बाद प्रधानमंत्री का नाम तय करेंगे। बता दें कि 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग को 20625 ईवीएम की वीवीपैट पर्चियाँ गिननी हैं, अर्थात प्रति विधानसभा क्षेत्र में पाँच ईवीएम की जाँच होगी। लेकिन, 21 राजनीतिक दलों के नेताओं ने लगभग 6.75 लाख ईवीएम की वीवीपीएटी पेपर स्लिप के मिलान की माँग की थी, जो कि एक कठिन, उबाऊ और विवाद पैदा करने वाली प्रक्रिया हो सकती थी।

चंद्रबाबू नायडू का सवाल है कि ईवीएम को 190 से भी अधिक देशों में से मात्र 18 देशों ने ही क्यों अपनाया है? इनमें से शीर्ष के 3 देश 10 सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देश हैं। आंध्र के मुख्यमंत्री ने भाजपा पर ईवीएम को प्रोग्राम करने का आरोप मढ़ते हुए पूछा कि नए वीवीपैट में वोट स्लिप सिर्फ़ 3 सेकंड ही क्यों दिखाई देता है, जबकि इसे 7 सेकंड दिखाई देना चाहिए था? उन्होंने ईवीएम में छेड़छाड़ व गड़बड़ी किए जाने की बात कही। सुनवाई के समय वामपंथी नेता डी राजा भी अदालत में मौजूद थे।

एक नंबर की बकलोल हैं स्वरा भास्कर, बिना पढ़े-लिखे मोदी को किसानों का हत्यारा बता दिया

देश में चुनावी माहौल छाया हुआ है। इसमें आम जनता के साथ-साथ बॉलीवुड सेलेब्स की भी काफी सक्रियता देखने को मिल रही है। इन्हीं सेलेब्स में से एक हैं स्वरा भास्कर। ये आए दिन कोई न कोई उटपटांग बयान देती रहती हैं, जिसका कोई मतलब ही नहीं होता है। अभी स्वरा ने शुक्रवार (मई 3, 2019) को राजस्थान के सीकर शहर में एक रैली के दौरान केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने मध्य प्रदेश के मंदसौर में किसानों पर गोलियाँ चलवा दीं।

स्वरा का ये बयान बे सिर-पैर का लग रहा है। क्यों? क्योंकि राज्य में हुई घटना के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता – खासकर तब जब मसला कानून-व्यवस्था से जुड़ा हो। देश की सरकारी कार्यप्रणाली में सभी का कार्य क्षेत्र बँटा हुआ है और अगर किसी राज्य के अंदर किसी तरह की कोई घटना होती है, तो उसके लिए राज्य सरकार वहाँ का प्रशासन जिम्मेदार होता है, ना कि केंद्र सरकार। खैर, इतना भारी-भरकम शायद ही समझ में आए स्वरा भास्कर को! क्योंकि समझने के लिए पढ़ना पड़ता है पर अफसोस ‘लाल-सलाम’ वालों ने किताब से दोस्ती कभी की नहीं। गाहे-बगाहे कभी की भी तो मार्क्स, लेनिन के सपनों की सैर करते रह गए और चे-गुआरा की टी-शर्ट से आगे निकल नहीं पाए!

और वैसे भी स्वरा भास्कर मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की जिस घटना के बारे में बात करते हुए उसे किसानों की हत्या ठहरा रही हैं, वो असल में हत्या नहीं, अपितु आत्मरक्षा थी, जो कि न्यायसंगत था। न्यायसंगत पर अटक मत जाइए, क्योंकि मंदसौर में हुए गोली काँड की जाँच के लिए गठित की गई न्यायिक जाँच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस और सीआरपीएफ को क्लीन चिट दे दी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भीड़ को तितर-बितर करने और आत्मरक्षा के लिए गोली चलाना आवश्यक और न्यायसंगत था। तब कई रिपोर्ट ऐसी भी आई थीं, जिसमें स्थानीय कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा किसानों को बरगलाने और तत्कालीन शिवराज सरकार के खिलाफ भड़काने वाली बातें कही गई थीं।

न्यायिक रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि उस दौरान सीआरपीएफ और राज्य पुलिस का गोली चलाना न तो अन्यायपूर्ण था और न ही बदले की भावना से उठाया गया कदम। इसके साथ ही, जाँच आयोग ने निलंबन पर चल रहे तत्कालीन कलेक्टर स्वतंत्र कुमार और एसपी ओपी त्रिपाठी को भी सीधा दोषी नहीं ठहराया था। इस जाँच रिपोर्ट के सामने आने के बाद तो राज्य सरकार पर भी ऊँगली नहीं उठाया जा सकता। ये रिपोर्ट तो पिछले साल ही आ गई थी। अगर स्वरा ने ये रिपोर्ट देखी होती तो शायद इस तरह की अनर्गल बयानबाजी नहीं करतीं।

चुनाव जीता तो सीलिंग रुकवा दूँगा: सुप्रीम कोर्ट के आदेश को केजरीवाल ने दिखाया ठेंगा

हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी राजनैतिक दल का नाम लिए बिना जनता से कहा कि पार्टियाँ पैसे दें तो मना मत करना, लेकिन वोट आम आदमी पार्टी को ही देना। अरविंद केजरीवाल ने दक्षिण दिल्ली के उम्मीदवार राघव चड्ढा के समर्थन में आयोजित रोड शो में इस बात को कहा है। गौरतलब है कि इससे पहले भी चाँदनी चौक में वो इसी तरह की टिप्पणी कर चुके हैं, जिसके कारण निर्वाचन आयोग ने उन्हें कारण बताओ नोटिस भी भेजा था।

इतना ही नहीं ‘पैसे ले लेना, लेकिन वोट AAP को देना’ के अलावा, चुनाव जीतने के लिए अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के व्यापारियों की नब्ज को भी पकड़ा। अरविन्द केजरीवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नोटबंदी करने के बाद देश के व्यापारियों में अफरा-तफरी मच गई थी। जब नोटबंदी का प्रभाव कम हुआ तो बिना तैयारी के जीएसटी लागू कर दिया गया। दिल्ली के व्यापारियों पर सीलिंग की भी मार पड़ी, जिसके कारण बड़ी संख्या में रोजगार खत्म हुए।

अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक, पार्टी कार्यालय से हुई मीडिया में बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि बीते पाँच सालों में केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों ने अर्थव्यवस्था को बर्बाद किया है। इसके कारण व्यापारियों में खासी नाराज़गी है। केजरीवाल ने व्यापारियों से अपील की है कि इस बार अगर वह सातों सीट पर आम आदमी पार्टी को जितवा देंगे, तो केजरीवाल दिल्ली में सीलिंग नहीं होने देंगे। हालाँकि, केजरीवाल के इस दावे पर दिल्ली के कारोबारियों का कहना है कि अरविंद केजरीवाल का यह दावा गलत है क्योंकि यह मामला केंद्र सरकार का है और यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में है। ऐसे में जो मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में है, उस पर दिल्ली की सातों सीट जीतकर क्या किया जाएगा इसका पता नहीं है।

वैसे तो चुनाव प्रचार के लिए हर पार्टी और राजनेता अपने-अपने ढंग से मतदाताओं को रिझाने में जुटे हुए हैं। इसी दिशा में अरविंद केजरीवाल भी रैलियाँ करके दिल्ली की जनता से आप को वोट देने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनकी इन अपीलों को सुनकर लगता है कि शायद वो अपने पद की गरिमा और माननीय सर्वोच्च न्यायालय की ताकत को भूल रहे हैं। या फिर यह भी हो सकता है कि उन्हें चुनाव जीतने के लिए कोई और मुद्दा न दिख रहा हो।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया है दिल्ली में सीलिंग का आदेश

अरविन्द केजरीवाल दिल्ली की जनता को पहले ही पूर्ण राज्य का सपना दिखाकर पार्टी के लिए वोटों की माँग कर रहे हैं, और अब सीलिंग रुकवाने का झूठ बोलने लगे हैं। केजरीवाल को जानने-समझने की जरूरत है कि जिस प्रकार दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने का कार्य अकेले केजरीवाल और दिल्ली के 7 लोकसभा सीटों के विधायक नहीं कर सकते हैं, उसी प्रकार दिल्ली में सीलिंग रोकने काम भी वो, और उनके 7 विधायक नहीं कर सकते हैं क्योंकि दिल्ली में हो रही सीलिंग का आदेश  सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया है। केजरीवाल के इस बयान के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर जमकर घेरा जा रहा है। लोग उनसे सवाल कर रहे हैं कि अगर ऐसा हो सकता था, तो उन्होंने अब तक सीलिंग क्यों नहीं रुकवाई? इसके अलावा कुछ लोग केजरीवाल को उनके अधूरे वादों की याद दिला कर भी उनसे जवाब माँग रहे हैं।

जावेद ‘ट्रोल’ अख़्तर ने रावण से कर दी साध्वी प्रज्ञा की तुलना, अब झेलेंगे मानहानि का मुक़दमा

स्क्रिप्ट लेखक से गीतकार और फिर ट्विटर ट्रोल बने जावेद अख़्तर के ख़िलाफ़ आपराधिक मानहानि का मुक़दमा दर्ज कर उन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की माँग की गई है। भोपाल की एक अदालत में इससे जुड़ी याचिका दाखिल की गई। न्यायिक मजिस्ट्रेट विजय सूर्यवंशी की अदालत में अशोका गार्डन निवासी राजेश कुंसारिया ने परिवाद पेश करते हुए निवेदन किया कि जावेद अख़्तर को कठोर सजा दी जाए। अदालत 24 जून को शिकायतकर्ता के बयान दर्ज करेगी। शिकायत में कहा गया है कि जावेद अख्तर ने गुरुवार (मई 2, 2019) को भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को मानहानिकारक शब्द कहे थे।

जावेद अख्तर ने साध्वी प्रज्ञा को रावण बताते हुए कहा था, “उसकी वेशभूषा पर मत जाओ। सिर्फ़ इसलिए कि एक व्यक्ति संत की तरह दिखता है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह व्यक्ति संत ही है। यह मत भूलिए कि जब रावण सीता का अपहरण करने के लिए आया था, तो उसने भी एक संत की तरह कपड़े पहने हुए थे।” शिकायतकर्ता ने कहा कि चूँकि जावेद अख्तर के ये बयान सार्वजनिक मंच पर दिए गए और इसे टीवी न्यूज़ से लेकर अख़बारों तक में भी दिखाया गया, इससे उन्हें आघात पहुँचा है। जावेद अख़्तर ने भाजपा को सलाह दी थी कि साध्वी प्रज्ञा को उस क्षेत्र से लड़ाया जाए, जहाँ सबसे ज्यादा अशिक्षित और सांप्रदायिक लोग रहते हों।

जावेद अख्तर ने साध्वी प्रज्ञा और भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोलते हुए आगे कहा,

मुझे लगता है कि भाजपा ने प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल से उम्मीदवार बनाकर पहले ही अपनी हार मान ली है। भाजपा ने यह मान लिया है कि अब अपने को अच्छा दिखाने का ड्रामा नहीं करना चाहिए और असली मुद्दे पर आ जाना चाहिए क्योंकि चुनाव में वही काम आने वाला है। अभी तक जो पर्दा ओढ़ा गया था, उसे हटा दिया गया है। भाजपा को अगर जीत का थोड़ा सा भी विश्वास होता तो वह प्रज्ञा ठाकुर को टिकट नहीं देती। उन्हें भी प्रज्ञा को उम्मीदवार बनाने में तकलीफ हुई होगी, मगर मजबूरी के कारण उन्हें ऐसा करना पड़ा होगा।

जावेद अख़्तर इधर कई दिनों से अलूल-जलूल बयान दे रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने कहा था कि अगर बुर्क़ा पर प्रतिबन्ध लगता है तो घूँघट पर भी लगना चाहिए। उनके इस बयान के बाद बवाल मचा और करणी सेना ने उन्हें परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी है। जावेद अख्तर ने कहा था कि लोकतंत्र तभी आगे बढ़ता है और फलता-फूलता है जब राजनीति और धर्म को अलग-अलग रखा जाए।

‘मोदी खो चुके हैं मानसिक संतुलन, चाकूबाज साध्वी प्रज्ञा पहनती थीं जींस-टीशर्ट’

कॉन्ग्रेस पार्टी के राज्य मुख्यालय ‘राजीव भवन’ में सोमवार (मई 07, 2019) को एक संवाददाता सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि वह अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं और उन्हें इलाज की ज़रूरत है। बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को भ्रष्टाचारी नंबर एक बताया था, जिसके बाद बौखलाए कॉन्ग्रेस नेता लगातार उन पर हमले कर रहे हैं।

पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए CM बघेल ने कहा कि राजीव गाँधी के प्रति PM मोदी की टिप्पणी निंदनीय है और उन्हें देश से माफ़ी माँगनी चाहिए। राजीव गाँधी के योगदान को मील का पत्थर बताते हुए बघेल ने कहा कि सूचना एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उन्होंने एक से एक काम किए थे। इसके साथ ही, बघेल ने कहा कि राजीव जी ने देश की एकता एवं अखंडता के लिए अपना बलिदान दे दिया।

भूपेश बघेल ने राजीव गाँधी को मरणोपरांत भारत रत्न दिए जाने की चर्चा भी की। राजीव गाँधी को 1991 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। बघेल ने पंचायती राज के क्षेत्र में राजीव गाँधी के किरदार को अहम बताया। बघेल ने कहा कि कोई सोच भी नहीं सकता है कि प्रधानमंत्री के पद पर बैठे व्यक्ति एक ऐसे आदमी के बारे में टिप्पणी करेगा, जो जीवित ही नहीं है। इसके आगे CM बघेल ने कहा, क्योंकि वो 3-4 घंटे ही सोने का दावा करते हैं, इस कारण नींद की कमी की वजह से प्रधानमंत्री का मानसिक संतुलन ख़राब हो गया है। उन्होंने मोदी के प्रधानमंत्री बनने को देश के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि कुर्सी और सत्ता के भूखे मोदी देशभक्ति का झूठा दावा करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी पर टिप्पणी करते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा: “नरेंद्र मोदी सत्ता हथियाने के लिए किसी भी स्तर तक नीचे गिर सकते हैं। उनके इस तरह के बयान से यह साबित होता है कि उन्होंने इस आम चुनावों में अपनी हार स्वीकार कर ली है। भाजपा लोकसभा चुनाव में 150 से अधिक सीटें नहीं जीतने वाली है और यूपीए 300से अधिक सीटों पर जीत दर्ज करेगी।

उधर रविवार (मई 5, 2019) को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने साध्वी प्रज्ञा पर भी विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने जींस-टीशर्ट पहनने के बाद भगवा चोला ओढ़ा है। भोपाल से भाजपा की लोकसभा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को बघेल ने आदतन अपराधी बताते हुए कहा कि उन्होंने कई लोगों के साथ बदतमीजी की है। उन्होंने कहा, “प्रज्ञा ने न जाने कितने लोगों से चप्पल की भाषा में बात की है और एक शख़्स को उन्होंने चाकू भी मार दिया था। बिलाईगढ़ का हर शख्स जानता है कि वह शुरुआत से आदतन अपराधी रही हैं। बाद में उन्होंने भगवा पहनना शुरू किया, लेकिन उसे पहनने से कोई साध्वी नहीं बन जाता। उनका व्यवहार साध्वी की तरह नहीं लगता। साध्वी प्रज्ञा झगड़ालू प्रवृत्ति की रही हैं और छोटी-छोटी बात पर झगड़ा करती थीं।”

भूपेश बघेल द्वारा पीएम मोदी और साध्वी प्रज्ञा पर टिप्पणी किए जाने को लेकर भाजपा ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। राज्य में भाजपा के प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने कहा कि मोदी जब से प्रधानमंत्री बनें हैं, कॉन्ग्रेस नेता उन पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को अपने संवैधानिक पद का ख्याल रखते हुए इस अशोभनीय टिप्पणी के लिए माफ़ी माँगनी चाहिए। मध्य प्रदेश भाजपा प्रवक्ता हितेश वाजपेयी ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा पर CM बघेल का बयान शर्मनाक और झूठा है।