Home Blog Page 5853

काले झंडे देख भगवंत मान ने किया ताबड़तोड़ भाँगड़ा, गीत के बोल थे-‘तेरे यार नूं दबन नूं फिरदे सी…’

पंजाब में रोड शो के दौरान आम आदमी पार्टी सांसद भगवंत मान के डांस करने का वीडियो सामने आया है। हालाँकि, रोड शो में दी गई पुलिस सुरक्षा से AAP प्रदेश प्रधान भगवंत मान काफी नाराज दिखे। भगवंत मान रोड शो के दौरान अचानक कार की छत पर चढ़े और डांस करने लगे।

दरअसल, लोकसभा चुनाव प्रचार के चलते मान सोमवार (13 मई, 2019) को अपने संसदीय क्षेत्र संगरूर में गोद लिए गाँव बेनड़ा पहुँचे, जहाँ उन्हें जनता के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। लोगों ने रोड शो का विरोध करते हुए AAP सांसद को काले झंडे दिखाए। खुद के खिलाफ प्रदर्शन देख मान कार की छत पर चढ़े और पंजाबी डांस करने लगे। वह करीब तीस सेकंड तक जमकर डांस करते रहे और पास में मौजूद प्रदर्शनकारी काले झंडे लहराते हुए उनके खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

‘विरोध करने वालों को कॉन्ग्रेस 150 दिहाड़ी पर लाई है’

खुद के गोद लिए गाँव बेनड़ा में सोमवार को विरोध होने पर मान का अलग ही अंदाज दिखा। लोगों ने काली झंडियां दिखाईं तो मान ने उन पर फूल फेंके और गाड़ी में चढ़कर ”तेरे यार नूं दबन नूं फिरदे सी पर दबदा किथे आ” गाने पर जमकर भाँगड़ा नृत्य किया। इसके बाद AAP सांसद मान ने कहा, “ये कॉन्ग्रेस के भाड़ेदार हैं, किराएदार हैं। इनको कॉन्ग्रेस ₹150 दिहाड़ी पर लाई है, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। हम लोग भाँगड़ा कर रहे हैं… पंजाब के दीदार में।”

गीत के बोल थे, “तेरे यार नूं दबन नूं फिरदे सी पर दबदा किथे आ”

‘सुरक्षा की जरूरत नहीं’

बरनाला में रात गुजारने के बाद केजरीवाल रोड शो के लिए दोबारा संगरूर की ओर निकले। धूरी के पास रोड शो के मान भड़क गए। गाड़ी से उतरे और सुरक्षा गाड़ी के कर्मियों को काफिले के आगे से हटाने को कहा। मान ने कहा कि पुलिस के कारण रोड शो प्रभावित हो रहा है। ऐसी सुरक्षा की जरूरत नहीं है। दूसरी ओर, एसएसपी डॉ. संदीप गर्ग ने कहा कि केजरीवाल सीएम हैं। उन्हें जेड सुरक्षा मुहैया करवाई गई है। पंजाब में भी जेड सुरक्षा दी जा रही है। फिर AAP ने पुलिस को सुरक्षा के लिए लिखकर दिया है।

‘केजरीवाल ने इंक़लाब के नाम पर किया है गुमराह’

दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने पंजाब को यह कहकर बदनाम किया कि यह मादक पदार्थों का स्वर्ग है और राज्य के युवा नशे के आदी हैं। केजरीवाल से नाराज प्रदर्शनकारियों ने कहा कि AAP ने इंकलाब के नाम पर गुमराह किया। केजरीवाल की नीतियों से कई विधायक छोड़ गए। भगवंत मान ने भी कोई वादा पूरा नहीं किया।

कॉन्ग्रेस-JDS नेताओं के ठिकानों पर चुनाव आयोग, IT विभाग और ED का छापा, मिले सोने के बर्तन

कर्नाटक में चुनाव आयोग, इनकम टैक्स और प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने कॉन्ग्रेस-जेडीएस नेताओं के ठिकानों पर छापा मारा है। चुनाव आयोग के सर्च स्क्वाड ने आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों की मदद से इस छापेमारी को अंजाम दिया। मंगलवार (मई 14, 2019) को हुबली के 2 होटलों में छापेमारी की गई। इन होटलों में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और सिंचाई मंत्री डीके शिवकुमार सहित कई बड़े नेता ठहरे हुए थे। इनमें से अधिकतर राज्य की गठबंधन के विधायक थे। छापेमारी के दौरान सोने के महंगे बर्तनों सहित कई अन्य सामग्रियाँ भी ज़ब्त की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, ये सामग्रियाँ कुंदगोल सीट पर होने वाले उपचुनाव में मतदाताओं को रिश्वत देने के लिए जुटाई गई थी।

यह सीट कुछ ही दिनों पहले तत्कालीन विधायक सीएस शिवली के निधन के बाद खाली हुई। कॉन्ग्रेस ने दिवंगत विधायक की पत्नी कुसुमवती को टिकट दिया है। कुंदगोल और एक अन्य विधानसभा सीट चिंचोली पर उपचुनाव में 19 मई को लोकसभा चुनाव के सातवें और आख़िरी चरण के साथ ही मतदान संपन्न कराया जाएगा। कहा जा रहा है कि इसी चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए रिश्वत का इंतजाम किया गया था। सूचना मिलने के बाद अधिकारियों ने छापेमारी की। अमर उजाला और मनीकण्ट्रोल की ख़बरों के मुताबिक़, कॉन्ग्रेस नेताओं के कमरों से सोने के बर्तनों के अलावा पार्टी की टोपियाँ व दिवंगत विधायक के फोटोग्राफ्स बरामद किए गए।

कॉन्ग्रेस नेता चंद्रशेखर गोकावी के ख़िलाफ़ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज कर लिया गया है। मंत्री डीके शिवकुमार ने इस छापेमारी की पुष्टि करते हुए बताया कि अधिकारियों द्वारा उनके कमरे की तलाशी ली गई है। 2 होटलों में हुई छापेमारी के दौरान एक होटल में इसे ज़ल्दी समाप्त कर दिया गया जबकि दूसरे होटल में यह प्रक्रिया काफ़ी लम्बी चली। डीके शिवकुमार ने बताया कि उनके अलावा कॉन्ग्रेस के अन्य कैडरों के कमरों की भी तलाशी ली गई है। चुनाव में कदाचार की सूचना मिलने के बाद यह छापेमारी की गई।

उधर कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने एक बार फिर कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा। कुमारस्वामी ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को उनकी योग्यता और कार्यों के हिसाब से उनकी पार्टी में उचित सम्मान नहीं दिया गया। कुमारस्वामी ने कहा कि उनकी नज़र में खड़गे के साथ अन्याय हुआ, वरना उन्हें बहुत समय पहले ही मुख्यमंत्री बन जाना चाहिए था। कुमारस्वामी अक़्सर किसी न किसी बहाने से अपने गठबंधन साथी कॉन्ग्रेस पार्टी को घेरते रहते हैं। उन्होंने चिंचोली में सभा के दौरान ये बातें कही।

‘द हिन्दू’ की ख़बर के अनुसार, भाजपा और कॉन्ग्रेस की तरफ़ से लगातार बढ़ रहे दबाव के बीच कुमारस्वामी 23 मई को मतगणना के बाद या तो विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर सकते हैं या भाजपा से हाथ मिला सकते हैं क्योंकि कॉन्ग्रेस अब मुख्यमंत्री का पद ख़ुद रख कर जेडीएस को उप-मुख्यमंत्री का पद देना चाहती है। पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा नेता येदिदुरप्पा यह साफ़ कर चुके हैं कि कॉन्ग्रेस के कई नाराज़ विधायक उनके संपर्क में हैं और वे सरकार बनाने का एक और प्रयास कर सकते हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री व कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्दारमैया गुट के विधायकों ने भी अपने नेता को मुख्यमंत्री के रूप में देखने की बात कही है।

5% हिन्दुओं को पीट कर वोट नहीं देने दिया गया: ‘मजहबी भीड़’ द्वारा हत्या से बाल-बाल बचे सांसद का लेख

ऑपइंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में बिहार स्थित पश्चिम चम्पारण के सांसद संजय जायसवाल के हवाले से बताया था कि कैसे एक बूथ पर एक भीड़ ने उन्हें घेर कर उनकी हत्या का प्रयास किया और सांसद की तरफ़ से बताया गया कि उस भीड़ में 90% मुस्लिम थे। उनके अनुसार मुस्लिम बहुल इलाक़े में हिन्दुओं को वोट नहीं देने दिया जा रहा था। सांसद पर हुए हमले, पत्थरबाज़ी पर ऑपइंडिया की रिपोर्ट यहाँ पढ़ें। इस संबंध में हिन्दुओं के मताधिकार पर हुए आक्रमण को लेकर पढ़िए पिछले 10 वर्षों से सांसद रहे संजय जायसवाल का लेख, ठीक हूबहू उन्हीं के शब्दों में:

मैं तन, मन और वचन से हिंदू हूँ। यही कारण है जिसके चलते 10 वर्ष के मेरे संसदीय जीवन में एक भी मुस्लिम या ईसाई यह नहीं कह सकता कि वह मेरे घर किसी प्रकार की मदद के लिए आया हो और मैंने उसकी मदद नहीं की। चाहे पारसी हो या यहूदी, वह अपने घर से उजड़ने के बावजूद हज़ारों वर्ष तक अपने धर्म और परंपरा का निर्वहन भारत में कर सके क्योंकि यहाँ के सारे राजा तब हिंदू थे। मैंने अपने जीवन में कभी इफ़्तार पार्टी का आयोजन नहीं किया क्योंकि वह मेरा धर्म नहीं है। लेकिन, मैं अपने मुस्लिम मित्रों की खुशी में शरीक होने हर साल इमामबाड़ा या कहीं भी इफ़्तार के आयोजन मे ज़रूर जाता हूँ, चाहे उसके लिए मेरा कितना भी मज़ाक क्यों नहीं उड़ाया जाए।

मैं सभी हिंदू बहुल गाँव सहित अन्य गाँवों के अपने सभी नागरिकों का भी आभारी हूँ क्योंकि जिन्हें जहाँ इच्छा थी, उन्होंने वहाँ वोट डाला। लेकिन, नरकटिया से खौना के बूथ संख्या 162 की बात ही कुछ और है। साल 2000 में तत्कालीन विधायक एवं मंत्री के सामने उस बूथ को लूटा गया था और उनकी काफी बेइज्जती की गई थी। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि फिर वहाँ पर हिंदू वोटर कभी वोट डालने नहीं गए। इस बार जबलपुर से एक बायोमेडिकल इंजीनियर ब्राह्मण बच्चा सिर्फ इसलिए गाँव आया क्योंकि उसे नरेंद्र मोदी को वोट देना था। कुशवाहा और बीन लोग भी यहाँ बहुत हैं, लेकिन इस टोले के लोग संत सिंह कुशवाहा के लिए भी वोट डालने 2015 में नहीं गए थेलेकिन, इस बार उस बच्चे के साथ नरेंद्र मोदी जी को वोट डालने सभी लोग बाहर निकले।

घटना के दिन 12:15 बजे उन सबों की पिटाई बूथ पर ही कर गई। इस पिटाई के पीछे आरोपितों की यह सोच थी कि आख़िर इन ग्रामीणों की वोट डालने की हिम्मत कैसे हुई? पीठासीन पदाधिकारी और होमगार्ड के जवान केवल मुँह देखते रह गए। दोपहर 3:30 बजे तक ये पीड़ित लोग प्रशासन से गुहार लगाते रहे कि उनकी मदद की जाए। लेकिन, कोई प्रशासन या अधिकारी इनके मताधिकार में मदद के लिए आगे नहीं आया। उलटा जिला प्रशासन को फोटो भेज दिया गया कि बूथ पर सब कुछ शांतिपूर्ण है। ज़ाहिर सी बात है, जब सारे हिंदू पिट कर भगा दिए गए थे तो माहौल तो शांतिपूर्ण हो ही जाना था।

3.30 बजे मैं बीन टोला गाँव में पहुँचा और मैंने सभी घायलों को देखा। मुझे इस बात पर बहुत आक्रोश है कि पीठासीन पदाधिकारी अथवा जिला के उच्च अधिकारियों ने इन सबो की मदद क्यों नहीं की? मैं 2 बार इस क्षेत्र का सांसद रहा हूँ। 40-50 मतों से मुझे कोई अंतर नहीं पड़ने वाला है लेकिन मैं वहाँ सभी हिंदुओं के साथ बूथ पर आया क्योंकि ये उनके मताधिकारों की बात थी। मैंने रास्ते में भी कहा कि अगर यहाँ पर 5% हिंदू हैं और उन्हें वोट नहीं देने दिया जाता है तो यह भयावह स्थिति है। सोचिए, अगर यही हालात सभी बूथों पर हो जाए तो भारत का लोकतंत्र कैसे चलेगा?

जब तक मैं सरकारी अफसरों से बहस कर रहा था, तब तक स्थिति बिल्कुल दूसरी हो गई। मुझे इस बात का भी अफसोस नहीं है कि मैं वहाँ 3:30 घंटे फँसा रहा और प्रशासन मेरी मदद के लिए नहीं पहुँचा। एक तरह से मुझे बंधक बना कर रखा गया था। अफसोस तो मुझे इस बात का है कि भारत के हर नागरिक को वोट देने का अधिकार है और उक्त घटना के दौरान पीड़ित लोग वोट देने के लिए गुहार लगाते रहे लेकिन डीएम तथा एसपी ने उनकी कोई मदद नहीं की। इस बात की लड़ाई मुझे 20 वर्षों तक लड़नी पड़े तो भी मैं लड़ूँगा और इन सबों को इंसाफ दिला कर ही रहूँगा। मैं जल्दी नाराज़ नहीं होता हूँ पर चाहे वह बैरिया में छठ घाट उजाड़ने की घटना हो या फिर किसी स्थान पर किसी वोटर को वोट नहीं देने की घटना, मेरा ख़ून अपने आप उबल ही जाता है।

क्या थी घटना?

रविवार (मई 12, 2019) को बिहार के चम्पारण में लोकसभा चुनाव के छठे चरण के तहत मतदान चल रहा था। इस दौरान सांसद भी सभी बूथ पर घूम-घूम कर (प्रत्याशी को मिलने वाले अनुमति के तहत) चुनाव प्रक्रिया को देख रहे थे। तभी उन्हें सूचना मिली कि नरकटिया के बूथ संख्या 162 पर भाजपा समर्थकों को पिटाई की जा रही है। सांसद जब वहाँ पर पहुँचे और उन्होंने पूछताछ शुरू की तो भीड़ उग्र हो गई। फिर क्या था, कश्मीर में पत्थरबाज़ी के तर्ज पर सांसद पर हमला किया गया। आजतक ने अपने वीडियो में भी इस बात की पुष्टि की है कि लोग दीवार के पास खड़े होकर बड़े-बड़े पत्थर फेंक रहे हैं। सांसद ने कहा कि ऐसी स्थिति आ गई थी, जिसमें उनकी व उनके साथ जो हिन्दू समाज के लोग थे, उनकी हत्या की जा सकती थी।

इस हमले में सांसद बाल-बाल बचे और कई समर्थकों को चोटें आईं। कई भाजपा समर्थक घायल भी हुए। संजय जायसवाल के आरोप गंभीर हैं। उनके अनुसार, माहौल ऐसा हो गया था कि अगर उनके गार्ड ने गोली नहीं चलाई होती तो शायद उनकी हत्या भी हो सकती थी। सांसद को वहाँ काफ़ी देर तक बंधक बना कर भी रखा गया। पुलिस के पहुँचने के बाद भी जायसवाल को पीटने के लिए भीड़ उतारू थी, लेकिन उन्हें किसी तरह सुरक्षित जगह पर पहुँचाया जा सका।

‘…वरना मैं एक सेकंड में दिल्ली BJP ऑफिस और तुम्हारे घरों पर कब्ज़ा कर सकती हूँ’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा को लेकर एक बार फिर से आग उगला है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई हिंसा के बाद बंगाल में सियासी पारा काफ़ी गर्म हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों की बैठक भी बुलाई। ममता बनर्जी ने भाजपा पर सख्त तेवर अपनाते हुए पार्टी को कड़ी चेतावनी दी है। ममता ने भाजपा पर प्रहार करते हुए कहा, “तुम लोगों का नसीब अच्छा है कि मैं यहाँ शांत बैठी हूँ वरना तो मैं एक सेकंड में दिल्ली में भाजपा दफ्तर और तुम्हारे घरों पर कब्ज़ा कर सकती हूँ। अमित शाह क्या भगवान हैं, जो उनके ख़िलाफ़ कोई प्रदर्शन नहीं कर सकता है?

ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब आधी रात को दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजिंदर बग्गा समेत कई भाजपा नेताओं को कोलकाता से गिरफ़्तार कर लिया गया है। रात के ढाई-तीन बजे हुई इस कार्रवाई में अमित शाह के रोड शो में भाग लेने व चुनाव प्रचार करने गए भाजपा नेताओं को उठा लिया गया। भाजपा आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने बताया कि ममता सरकार की इस बड़ी कार्रवाई में बिना किसी क़ानूनी प्रक्रिया का अनुसरण किए और बिना किसी चार्ज के कई भाजपा नेताओं को उठा लिया गया। बंगाल में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली के लिए देश के कई क्षेत्रों से भाजपा नेता कोलकाता में जाकर ठहरे हुए थे। मालवीय ने आरोप लगाया कि कई भाजपा नेता तृणमूल कॉन्ग्रेस की ग़ैर-क़ानूनी हिरासत में हैं।

अमित शाह की रैली में जम कर हंगामा हुआ। तृणमूल समर्थकों द्वारा वाहनों को आग लगा दी गई और रैली को बाधित किया गया। भाजपा का कहना है कि तृणमूल के कार्यकर्ता कलकत्ता विश्वविद्यालय के गेट पर काले झंडे लेकर पहले से ही जमा थे। अमित शाह का रोड शो जैसे ही वहाँ से गुजरा, उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी और काले झंडे दिखाए। तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने सीधा अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा, “अमित शाह इतने असभ्य हैं कि उन्होंने विद्यासागर की प्रतिमा तोड़ दी। वो सभी बाहरी लोग हैं। भाजपा मतदान वाले दिन के लिए उन्हें लाई है।

इधर ममता बनर्जी पर मीम बनाने वाली भाजपा नेता प्रियंका शर्मा के वकीलों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें काफ़ी समय तक रिहा नहीं किया गया। वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में बात रखी तो अदालत ने कहा कि उन्हें समय पर रिहा न किए जाने को लेकर वे अवमानना नोटिस जारी करेंगे। इसके बाद प्रियंका शर्मा को रिहा किया गया। रिहा होने के बाद उन्होंने तृणमूल सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मंगलवार (मई 14, 2019) को ज़मानत मिलने के बावजूद उन्हें 18 घंटे अतिरिक्त जेल में रखा गया। उन्हें उनके परिवार और वकीलों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। प्रियंका ने कहा कि इन सबके अलावा उनसे एक माफ़ीनामा भी हस्ताक्षरित कराया गया।

अमित शाह ने ममता पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी पार्टी पूरे देश में चुनाव लड़ रही है जबकि ममता सिर्फ़ बंगाल की 42 सीटों पर। अमित शाह ने पूछा कि 6 चरणों में कहीं और हिंसा क्यों नहीं हुई, बंगाल में ही क्यों हुई, जबकि भाजपा तो सभी राज्यों में चुनाव लड़ रही है।

ध्रुव त्यागी मर्डर: सिर्फ आलम व जहाँगीर नहीं, 11 लोगों ने घेर कर मारा – छिपने को भागा था मस्जिद

मोती नगर में बेटी से छेड़खानी का विरोध करने वाले ध्रुव त्यागी की शम्सेर आलम और जहाँगीर ख़ान ने अपने कई साथियों व परिवार वालों के साथ मिलकर हत्या की थी। अब इस मामले में नया ख़ुलासा हुआ है। पहले ख़बर आई थी कि आरोपितों में इन दोनों के अलावा 2 अन्य नाबालिग शामिल हैं। अब ताज़ा सूचना के अनुसार, त्यागी को 11 लोगों ने घेर कर मारा था। इस हत्याकांड में आरोपितों के परिवार की महिलाएँ भी शामिल थीं। असल में जिस चाकू से हत्या की गई, उसे आरोपितों की माँ ने घर में से निकाल कर दिया था। इस मामले में पुलिस ने जिन आरोपितों को गिरफ़्तार किया है, उसमें एक व्यक्ति और उसके तीन बेटे हैं। 2 आरोपित नाबालिग हैं। बाकी घर से भाग गए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।

ज्ञात हो कि ध्रुव राज त्यागी अपने परिवार समेत बसई दारापुर में रहा करते थे। रविवार की रात वह बेटी और बेटे के साथ अस्पताल से लौट रहे थे। घर पहुँचने से कुछ दूर पहले ही पाँच-छह लोगों से उनका रास्ता रोक लिया। इसके बाद विवाद शुरू हो गया। जहाँगीर और आलम समेत उसके कुछ अन्य गुर्गे साथियों ने रास्ता देने से मना कर दिया। ऐसे में मृतक त्यागी ने पहले अपनी बेटी को घर पहुँचाया और फिर लौट कर छेड़खानी कर रहे लड़कों के पिता से शिकायत करने पहुँचे। इसी बीच में उन पर धारदार हथियारों से हमला किया गया। बाप को बचाने आए पीड़िता का भाई भी बुरी तरह जख्मी हुआ, उस पर भी चाकुओं से वार किया गया।

दैनिक जागरण के दिल्ली संस्करण में छपी ख़बर

शमशेर आलम मुख्य आरोपित है। उसने त्यागी के पेट, कंधे व सीने में चाकुओं से ताबड़तोड़ 10 वार किया था। त्यागी को बचाने के लिए जब उनका बेटा आया, तब उस पर भी चाकुओं से वार किया गया। मृतक का बेटा अनमोल अभी आईसीयू में भर्ती है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। मृतक के परिवार के अनुसार, शनिवार (मई 11, 2019) देर रात क़रीब 1 बजे बिजनेसमैन ध्रुव त्यागी की 26 साल की बेटी को माइग्रेन का दर्द हो गया था। वह बेटी को दिखाने आचार्य भिक्षु हॉस्पिटल गए थे। वहीं से लौटते वक़्त ये घटना हुई। त्यागी का परिवार वर्षों से यहीं रहता है।

इस हत्याकांड में आरोपित के परिवार की 4 महिलाओं सहित कई लोग शामिल हैं। उन सभी ने त्यागी को पकड़ रखा था और आलम उन्हें चाकू मारे जा रहा था। वारदात में शमसेर का अब्बा, अम्मी, दोनों भाई, तीन-चार बहनें, एक दामाद और अन्य लोग शामिल हैं। अनमोल ने जब देखा कि उसके पिता को चाकू मारा जा रहा है तो वह अपने पिता के ऊपर लेट गया लेकिन आरोपित चाकू से लगातार वार करते रहे। दरिंदगी का आलम यह रहा कि त्यागी के हाथ-पैर पर पत्थरों से वार किया गया, उनका चेहरा कुचल दिया गया, उनके दाँत तोड़ दिए गए। उनके नाखून भी उखड़ गए थे।

इस घटना को अंजाम देने के बाद आरोपित ने मस्जिद में शरण लेनी चाही। लेकिन मस्जिद में उन लोगों से थाने में सरेंडर करने को कहा गया। गाँव में पंचायत बुलाई गई है। चर्चा है कि किसी भी मुस्लिम को घर किराए पर न देने का निर्णय लिया जा सकता है। शमशेर आलम की अम्मी व बहन को हिरासत में ले लिया गया है। मृतक की बेटी से बात कर पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी।

बंगाल में #Emergency: आधी रात में कई BJP नेता गिरफ़्तार, बिगड़े हालात पर EC ने बुलाई मीटिंग

पश्चिम बंगाल से भाजपा नेताओं पर बड़ी कार्रवाई की ख़बर आ रही है। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजिंदर बग्गा सहित कई भाजपा नेताओं को रात के 3 बजे गिरफ़्तार कर लिया गया है। भाजपा आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने बताया कि ममता सरकार की इस बड़ी कार्रवाई में बिना किसी क़ानूनी प्रक्रिया का अनुसरण किए और बिना किसी चार्ज के कई भाजपा नेताओं को उठा लिया गया। बंगाल में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली के लिए देश के कई क्षेत्रों से भाजपा नेता कोलकाता में जाकर ठहरे हुए थे। मालवीय ने आरोप लगाया कि कई भाजपा नेता तृणमूल कॉन्ग्रेस की ग़ैर-क़ानूनी हिरासत में हैं।

दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजिंदर बग्गा भी कोलकाता में चुनाव प्रचार के लिए गए हुए थे। उन्हें कई सोशल मीडिया इवेंट्स में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी थी। बग्गा के वहाँ पहुँचने के साथ ही भाजपा की सोशल मीडिया विंग में एक नए उत्साह का संचार हुआ था। कोलकाता के गलियारों में कार्यकर्ताओं के साथ बग्गा के कई फोटो भी ट्विटर पर देखे गए थे। लोगों का कहना है कि जब तेजिंदर बग्गा ने किसी क़ानून का उल्लंघन नहीं किया है, तब उन्हें क्यों गिरफ़्तार किया गया? ट्विटर पर आज (बुधवार) सुबह से ही ‘FreeTajinderBagga (फ्री तेजिंदर बग्गा)’ नामक हैशटैग टॉप ट्रेंड में बना हुआ है।

दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने तेजिंदर बग्गा का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी ग़लती सिर्फ़ यही है कि वह बंगाल में लोकतंत्र की रक्षा के लिए गए थे। पश्चिम बंगाल में लगातार तृणमूल के गुंडों द्वारा चुनावी प्रक्रिया में बाधा पहुँचाने की ख़बरें आ रही हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने हिंसा को देखते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया से बात करते हुए मीडिया को भी इस हिंसा के लिए ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि बंगाल में हिंसा की बात होनी तभी शुरू हुई जब मीडिया वाले ख़ुद इसकी चपेट में आ गए। पीएम का आरोप था कि इससे पहले ऐसी ख़बरों को नज़रअंदाज़ किया जाता था।

मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री और बंगाल में भाजपा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने भी बंगाल के अधिकारियों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने एक वीडियो शेयर कर बताया था कि कैसे बंगाल के अधिकारी बेवजह अमित शाह की रैली को लेकर उनसे बहस कर रहे थे और कागज़ी चीजों को लेकर भाजपा अध्यक्ष के रोड शो में अड़ंगा लगाया जा रहा था। पश्चिम बंगाल में अमित शाह के रोड शो के दौरान माहौल दूषित हो गया था और उन्हें रोड शो रोकना पड़ा था। इससे पहले चुनाव कवर करने के दौरान तृणमूल के गुंडों ने पत्रकारों को भी पीटा था।

पश्चिम बंगाल में अंतिम चरण का चुनाव आते-आते माहौल और भी गर्म हो रहा है। भाजपा बंगाल चुनाव आयोग को तृणमूल का दलाल बता चुकी है। पार्टी का आरोप है कि राज्य की सारी सरकारी मशीनरी सिर्फ़ और सिर्फ़ ममता बनर्जी के इशारे पर काम करती हैं और उनका दुरुपयोग किया जा रहा है। आधी रात को भाजपा नेताओ पर की गई इस कार्रवाई का मुद्दा अब राष्ट्रीय हो चुका है और विरोध के स्वर भी तेज़ हो गए हैं। भाजपा दिल्ली के जंतर-मंतर पर बंगाल में हो रही हिंसा को लेकर विरोध प्रदर्शन करेगी।

बंगाल में जो राजनीतिक हालात पैदा हुए हैं, उसको ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आज (बुधवार) सुबह 11.30 बजे बैठक बुलाई है। इस बैठक में राज्य में चुनाव के दौरान हिंसा पर पश्चिम बंगाल के पर्यवेक्षकों से जानकारी ली जाएगी।

ख़बर का असर: Exit Poll दिखाने वाले 3 मीडिया संस्थानों को EC से नोटिस, माँगा स्पष्टीकरण

चुनाव आयोग द्वारा तीन मीडिया हाउसेज को नोटिस भेजा गया है। इन तीनों मीडिया हाउस ने एग्जिट पोल प्रकाशित किया था। स्वराज एक्सप्रेस, न्यूज़क्लिक और आईएएनएस ने लोकसभा चुनाव परिणाम का अनुमान लगाते हुए एग्जिट पोल प्रसारित किया था। चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा, “चुनाव आयोग को तीन मीडिया हाउसेज के ख़िलाफ़ शिकायतें मिली थीं कि उन्होंने लोकसभा चुनावों के परिणाम का अनुमान लगाते हुए एग्जिट पोल्स जारी किए थे। आयोग ने तीनों मीडिया हाउस से स्पष्टीकरण माँगा है। उनसे पूछा गया है कि क्यों न उनके ख़िलाफ़ ‘Representation Of The People Act’ के सेक्शन 126A के तहत कार्रवाई की जाए।

सेक्शन 126A में लिखा हुआ है कि लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण का चुनाव शुरू होने से लेकर अंतिम चरण का चुनाव ख़त्म होने के आधे घंटे बाद तक, कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक रूप से इलेक्ट्रॉनिक या प्रिंट मीडिया के माध्यम से एग्जिट पोल नहीं दिखा सकता। इन तीनों मीडिया हाउसेज ने इसका खुला उल्लंघन किया था। स्वराज एक्सप्रेस के लिए यौन शोषण आरोपित विनोद दुआ ने एग्जिट पोल दिखाए थे, जिसे उन्होंने न्यूज़क्लिक नामक प्रोपेगेंडा वेबसाइट से उठाया था। वीडियो तो हटा दिया गया लेकिन रिपोर्ट अभी भी ऑनलाइन उपलब्ध है। समाचार एजेंसी आईएएनएस ने भी एग्जिट पोल खुलेआम ट्विटर पर जारी किया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस (आईएएनएस) ने आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए रविवार (मई 12, 2019) को एक एग्जिट पोल प्रकाशित किया था। आईएएनएस का कहना है कि ये सर्वेक्षण विभिन्न संस्थानों और निष्पक्ष चुनाव विश्लेषकों द्वारा किया गया है। न्यूज सर्विस ने ये सर्वेक्षण ट्विटर पर शेयर किया है। ऑपइंडिया ने मंगलवार (मई 14, 2019) को एक लेख के माध्यम से दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर एग्जिट पोल दिखाने वाले सभी मीडिया हाउसेज को बेनकाब करते हुए चुनाव आयोग से उन पर कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। हमने अपने लेख में पूछा था कि सारे के सारे एग्जिट पोल में पार्टी विशेष को भारी बढ़त और एक ख़ास पार्टी को भारी घाटा दिखाया जा रहा है, ऐसा क्यों?

ऑपइंडिया ने अपने लेख के माध्यम से पूछा था कि क्या ऐसे एग्जिट पोल से माहौल बिगाड़ने की कोशिश हो रही है और लाखों लोगों को यूट्यब पर एग्जिट पोल दिखा कर मतदाताओं को प्रभावित किया जा रहा है? हमने सवाल उठाए थे कि वीडियो हटाए जाने तक भी उसे पाँच लाख लोग देख चुके हैं, उसका क्या? फिलहाल सभी को आयोग की नोटिस के बाद अगले क़दम का इन्तजार है। आईएएनएस ने भी अब अपनी ट्वीट डिलीट कर दी है लेकिन उसे उससे पहले कई लोग शेयर कर चुके थे।

चुनाव आयोग ने साफ़-साफ़ कहा था कि पहले चरण का चुनाव शुरू होने से लेकर अंतिम चरण का चुनाव संपन्न होने तक किसी भी प्रकार का एग्जिट पोल प्रतिबंधित रहेगा। अर्थात, 11 अप्रैल से लेकर 19 मई को चुनाव ख़त्म होने तक किसी तरह के कोई भी एग्जिट पोल प्रिंट या डिजिटल माध्यम से प्रकाशित या प्रसारित नहीं किए जा सकेंगे। अगर कोई ऐसा करता है तो उसे चुनाव आयोग के निर्देशों का उल्लंघन माना जाएगा। इसके अलावा चुनाव आयोग द्वारा चुनाव से 48 घंटे पूर्व किसी भी प्रकार के ओपिनियन पोल पर भी प्रतिबन्ध चालू हो जाएगा, ऐसा नियम बनाया गया था। ये प्रतिबन्ध प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सिनेमा, टीवी- इन सभी माध्यमों पर लागू करने की बात कही गई थी।

गैर-मुस्लिम मर्द के साथ प्रेम: इरफ़ान और रिज़वान ने बहन पर फेंका एसिड, अम्मी भी अस्पताल से भाग गई

दिल्ली में एक युवर्ती के साथ उसके परिवार वालों द्वारा ही बेरहमी करने का मामला सामने आया है। दादरी कोतवाली क्षेत्र के कोट नहर के पास गुरुवार (मई 9, 2019) को तेज़ाब से झुलसी मिली युवती का नाम सलमा है, जिसे सफदरगंज अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। उसकी हालत कई दिनों तक गंभीर बनी रही। सलमा के भाइयों के नाम रिज़वान और इरफ़ान हैं। ख़बरों के अनुसार, 9 मई को गुलावठी की रामनगर निवासी सलमा को उसके भाई इरफ़ान और रिज़वान नोएडा घुमाने के बहाने लाए थे। इसके बाद कोट नहर के सामने भाइयों ने बहन का गला दबाया, चेहरे व शरीर पर एसिड डाला और फिर मृत समझ कर चले गए। अभी तक ये दोनों ही आरोपित पुलिस के शिकंजे से बाहर हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट

अस्पताल पहुँचाने के बाद पुलिस ने सलमा के बयान के आधार पर उसकी अम्मी (माँ) को खोज लाई। वो सलमा के साथ कुछ देर अस्पताल में रही। अपनी बेटी को सहारा देने के बजाय वो अचानक से उसे बेसहारा कर अस्पताल छोड़ भाग गई। पुलिस के अनुसार, सलमा के दोनों भाई उसके एक पड़ोसी के साथ प्रेम सम्बन्ध होने को लेकर गुस्सा थे। पुलिस ने यह भी बताया है कि पड़ोसी शादीशुदा है और वो मुस्लिम नहीं है। दोनों भाइयों के ख़िलाफ़ हत्या के प्रयास का मामला (आईपीसी सेक्शन 307) दर्ज किया गया है। फिलहाल सलमा का अस्पताल में इलाज चल रहा है और नर्सों की एक टीम उसका ख्याल रख रही है। वहाँ तैनात पुलिसकर्मी सलमा के लिए पानी, जूस और दवाओं का इंतजाम कर रहे हैं। पुलिस ने एक और सहायिका को रखा है, जो सलमा को बाथरूम तक ले जाने व लाने में मदद करती है।

सलमा की हालत पिछले 5 दिनों से गंभीर बनी हुई है और एसिड की वजह से उसके श्वसन प्रणाली (Respiratory System) का काफ़ी नुकसान हुआ है। इससे उसकी साँस लेने की क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ा है। उसे जल्द ही जीवन रक्षण पद्धति (Ventilator Support) पर रखा जा सकता है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, हॉस्पिटल में तैनात एक महिला कॉन्स्टेबल ने बताया कि पुलिस द्वारा सलमा की माँ को खोज कर उसे अस्पताल लाया गया था और सलमा से मिलवाया भी गया था। लेकिन, परेशान माँ कहती रही कि उसके पास सलमा के सामने जाने की हिम्मत नहीं है। वह पूरे दिन असपताल में रही लेकिन शाम के बाद उसका कोई अता-पता नहीं चला।

सलमा के साथ जो भी हुआ और अभी उसकी जो हालत है, उसने अस्पताल में तैनात पुलिसवालों और अस्पतालकर्मियों को झकझोर कर रख दिया है। फिलहाल वही सब सलमा का परिवार बन गए हैं। लेकिन सलमा है कि बार-बार अपनी माँ को कॉल करने की बात कहती है। वह अपनी माँ को पुकारती रहती है। पीड़िता अस्पताल में भर्ती किए जाने से पहले 12 घंटों तक दर्द और पीड़ा से बदहवास छटपटाती रही थी। कुछ लोगों ने उसे तड़पते देख कर पुलिस को सूचना दी थी।

22 वर्षाया सलमा का चेहरा बुरी तरह झुलस गया है और उसकी आँखें तेज़ाब की वजह से जल गई हैं। वह ठीक से कुछ देख भी नहीं पा रही है। पुलिस ने जब उसका बयान दर्ज किया, तब वह मुश्किल से ही बोल पा रही थी। उसके दोनों भाई घर से फरार हैं। कोर्ट द्वारा खुले में तेज़ाब बेचने पर प्रतिबन्ध लगाने के बावजूद यह आसानी से उपलब्ध है और इसका ग़लत उपयोग पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है।

फैक्ट चेक – मूर्खता, रडार और मोदी विरोध: आँखों में डालो कैक्टस, बिलबिलाओ कि मोदी सही क्यों है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान से मीडिया गिरोह और टुटपुँजिया चुटकुलेबाजों को लगा कि उन्हें खाद-पानी मिल गया है। हलचल तेज हो गई जैसे ही उन्होंने कहा कि बादल छाए रहने के बावजूद तय तिथि पर ही बालाकोट एयर स्ट्राइक के लिए उन्होंने आगे बढ़ने का सुझाव दिया, क्योंकि ‘बादलों के होने से हमारे विमानों को रडार से बचने में मदद मिलती।’

रडार मामलों के नवजात विशेषज्ञों ने इस विषय पर कुछ वेब पृष्ठों पर आधा-अधूरा पढ़ा और पूरा ज्ञान उड़ेल दिया कि पीएम कैसे गलत हैं। और तो और, इस विषय पर मरियम अख्तर मीर जैसे महान बुद्धिजीवी तक ने कमेंट कर के समाज को नई जानकारियाँ प्रदान कीं।

इसी कड़ी में एक ने अमेरिका के DARPA (Defense Advanced Research Projects Agency) नामक वेबसाइट को ‘एक्जॉटिक’ यानी अजीब कह कर ज्ञान दिया।

कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी प्रधानमंत्री पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने पूछा, “मोदी जी, जब भी भारत में बारिश होती है, क्या सभी एयरक्राफ्ट रडार से गायब हो जाते हैं?”

ED के सवालों से घिरे रॉबर्ट वाड्रा की पत्नी नौसिखिया प्रियंका गाँधी वाड्रा ने भी अपने भाई का साथ बखूबी दिया। उन्होंने कहा, “मोदी को लगता है कि बादलों के कारण वो भी लोगों के रडार पर नहीं आएँगे!”

इसके साथ ही, कॉन्ग्रेस पार्टी के सदस्य के साथ मीडिया संस्थान भी इस झुंड में शामिल हो गए और इस मुद्दे पर टिप्पणी करने के लिए विशेषज्ञों से राय लेने की जहमत नहीं उठाई। उन्होंने केवल चुटकुलों से ही काम चलाना उचित समझा क्योंकि यह उनके एक एकसूत्री मोदी-विरोधी राजनीतिक एजेंडे के अनुकूल था।

यह समझना कोई मुश्किल बात नहीं है कि प्रधानमंत्री के बयान पर अधिकांश कमेंट और आलोचना राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता या घृणा से उपजी है न कि इस विषय पर जानकारी या तथ्य जुटाने से कि रडार कैसे काम करते हैं। सबने बस यह कह कर मजाक उड़ाया है कि ‘देखो मोदी कहता है कि बादलों के होने से रडार की पकड़ में जेट नहीं आएँगे।’ किसी ने यह नहीं बताया कि मोदी कैसे गलत है। बस कह दिया गया कि वो गलत है जो कि उसी एलीट मानसिकता का परिचायक है जहाँ अपनी विचारधारा को महान और दूसरों के विचारों को झुठला दिया जाता है।

अक्सर यह कहा जाता है कि भौतिक विज्ञान हमें जो सिखाता है, उसके विपरीत, ब्रह्मांड के मूल भाग इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और मोरोन (बेवकूफ) हैं। इसी कारण से, रडार कैसे काम करते हैं, इस बारे में विस्तार से बात करना बहुत ज़रूरी है क्योंकि पिछले कई दिनों से लगातार कुछ बेवक़ूफ़ अपनी मूर्खता को ज्ञान समझ कर नाच रहे हैं।

बालाकोट एयर स्ट्राइक एक बड़ा सैन्य अभियान था और इस तरह के आतंकवादी शिविरों पर होने वाले हमलों में कई तरह के रडार शामिल होते हैं।

हमारे लड़ाकू विमानों पर रडार

दुश्मन इलाकों में उड़ान भरने वाले किसी भी लड़ाकू विमान में यह समझने की क्षमता होनी चाहिए कि क्या यह दुश्मनों द्वारा ट्रैक कर लिया गया है और क्या इस पर कोई मिसाइल दागी गई है। चूँकि, विमान बादलों के ऊपर उड़ रहा होगा, इसलिए इसका अपना रडार जमीनी स्तर पर बादल होने पर भी काफी अच्छा काम करेगा। बालाकोट एयर स्ट्राइक के मामले में, ऐसा प्रतीत होता है कि पाकिस्तानी वायु सेना को हमारे एयरक्राफ्ट का पता भी नहीं चला (नीचे इस पर विस्तार में बात होगी)।

एक और महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि हमारे विमान को लेजर बीम के माध्यम से लक्ष्य को ‘इलुमिनेट’ करना होगा ताकि विमान द्वारा गिराए गए बम सही लक्ष्य पर गिर सकें। वैसे ‘इलुमिनेट’ शब्द का प्रयोग थोड़ा अजीब है क्योंकि लेज़र ‘विजिबल स्पेक्ट्रम’ (जिसे हमारी आँखें देख सकें) में काम नहीं करेगा। कहने का मतलब यह है कि लेजर से चिह्नित टार्गेट बम पर लगे यंत्रों को दिखेगा, पर हमारी आँखों को नहीं।

अगर आकाश में बादल हों, तो इस स्थिति में, एयरक्राफ्ट को बादलों के बीच में कहीं थोड़ी जगह बनने का इंतजार करना पड़ेगा ताकि वो लक्ष्य को लेजर से इलुमिनेट कर सकें। इसके अलावा, यदि बादल ज़्यादा हैं, और लेजर द्वारा अभेद्य हैं, तो लक्ष्य के अक्षांश और देशांतर निर्देशांकों का उपयोग करके बमों को लक्ष्य भेदने के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है। हाँ, ये बात भी है कि बादलों के होने से उनकी सटीकता प्रभावित होती है।

बमों पर मार्गदर्शन प्रणाली

यूँ तो बालाकोट जैसे मामलों में बमों को किसी भी रडार की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उनके लक्ष्य एक ही जगह पर होते हैं, हिलते नहीं, लेकिन उन्हें अंतिम बिंदु तक जाने के लिए मार्गदर्शन क्षमता की आवश्यकता होती है ताकि वे सटीक निशाना लगा सकें। एक बार जब वे बादलों से नीचे हो जाते हैं (मान लेते हैं कि बादल हैं), तब पहले से ही लेजर द्वारा इलुमिनेट किए हुए लक्ष्य, और जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम), या और तरीक़ों की मदद से निशाना भेदने में सफल होते हैं।

पाकिस्तानी वायु रक्षा प्रणाली के लिए रडार

हमारे लड़ाकू विमानों के विपरीत, जो ठीक से जानते हैं कि वे कहाँ हैं, और उन्हें कहाँ पहुँचना है, पाकिस्तानी वायु सेना के रडार को लगातार आकाश को स्कैन करना होगा और अनजान चीज़ों की तलाश करनी होगी। भारत सहित सभी लड़ाकू विमानों पर रडार-एब्जॉर्बर सामग्री का लेप किया जाता है। इसलिए एक लड़ाकू विमान का रडार क्रॉस-सेक्शन काफी छोटा होता है। नतीजतन, यदि आकाश में बहुत सारे बादल हैं, तो ये रडार बीम के बहुत सारे प्रतिबिंबों को जन्म देंगे और घुसपैठिए का पता लगाना अधिक कठिन बना देंगे। अतिरिक्त सूचना, जैसे उड़ान का समय, निम्न-स्तरीय क्लाउड पैच और उच्च-ऊँचाई वाले विमान के बीच अंतर करने के लिए उपयोगी होंगे। लेकिन फिर भी, बहुत ज्यादा बादलों की उपस्थिति निश्चित रूप से दुश्मन के लिए हमारे विमानों का पता लगाना कठिन बना देंगे और उनकी सुरक्षित रूप से वापसी आसान हो जाएगी।

तो संक्षेप में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो कहा वह सही है, भले ही उनके आलोचकों के लिए यह पचाना थोड़ा मुश्किल हो। मीडिया गिरोह या अधिकांश विरोधियों की टिप्पणी ऐसे छद्म विशेषज्ञों की बेवकूफी का प्रमाण है। बादल विभिन्न तरीकों से रडार प्रणाली के कई पहलुओं को प्रभावित करते हैं और एक कुत्ते के साथ एक तस्वीर को ट्वीट करने से तथ्य बदलने वाला नहीं है।

यह आलेख अंग्रेज़ी के इस मूल लेख के एक हिस्से का अनुवाद है।

SC द्वारा प्रियंका को बरी करने के बाद ट्विटर पर ममता के मीम्स की बाढ़

ममता बनर्जी को अब एक मीम के लिए भाजयुमो नेत्री प्रियंका शर्मा को जेल भेजना भारी पड़ने लगा है। गेम ऑफ़ थ्रोन्स के खलनायक ‘नाइट किंग’ से लेकर हिटलर और ग्रीक राक्षसी मैड्यूसा तक मीमर्स हर वैराइटी और रंग-ढंग के मीम्स पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस की अध्यक्षा पर बनाने लगे हैं। यह ट्रेंड शुरू करने वाले भाजपा कार्यकर्ता और मशहूर TEDx स्पीकर विकास पांडे थे। उन्होंने लोगों से ममता बनर्जी के ऊपर अधिकाधिक मीम बनाकर उनके निम्न ट्वीट के जवाब में पोस्ट करने की अपील की:

जवाब में लोगों ने ममता बनर्जी पर मीम्स का सैलाब उँड़ेल दिया।

इन मीम्स में लोगों ने खुलकर अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग किया है।