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बुज़दिली को माचोमैन बनाने वाले रवीश वामपंथी वैचारिक दरिद्रता के आख़िरी ब्रांड एम्बेसडर हैं

और आज फाइनली अपने दीपक चौरसिया जी को भी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का इंटरव्यू मिल गया, वह भी उनके घर में घुसकर। मोदी जी तो ‘लव’ हैं, वह तो हमेशा बढ़िया लगते हैं, लेकिन चौरसिया जी को मैं सन 1999 से देख रहा हूँ, आज भी उनकी दाढ़ी और बाल उसी करीने से कटे हैं, जैसे विजय चौक की झाड़ियाँ, आज भी वे उतने ही गुटखा खोर लगते हैं, जितना वे प्रमोद महाजन के जमाने में थे। सवाल-जवाब तो खैर मैं नहीं सुनता, क्योंकि मोदी पर ट्रस्ट है कि बंदा अगर निपट झूठ भी बोलेगा तो तब भी वह ‘खानदान’ के सत्तर साल के सच पर भारी पड़ेगा।

वहीं आज रवीश कुमार को राहुल गाँधी के साथ, जेठ की दुपहरिया में खुले आसमान के नीचे इंटरव्यू करते हुए देखा तो ख्याल आ गया कि यह बंदा इश्क में फलाना-ढिमकाना हो जाना लिखता है, लेकिन असल जिन्दगी में बेइन्तिहाँ नफरत और कुंठा ढोता है। जो चेहरे से टपकती है।

शम्भूनाथ शुक्ला सरीखे और फेसबुक के टॉप फैनों ने इनमें इतनी हवा भर दी है, कि इनकी आत्मा इधर से उधर ठोकरें खाती फिर रही है, भरी जवानी में इनका चैन-वैन सब उजड़ गया है।

इनके साथ वाले पत्रकारों ने इस दौरान कई चैनल बदले, चैनल खोल लिए, राज्य सभा पहुँच गए, कई मंत्री बन गए और कई तो रिटायर भी हो गए। लेकिन रवीश 25 साल से प्रनॉय रॉय की ‘गोदी’ में ही बैठे हुए हैं। इतना कमजर्फ और बुजदिल इंसान बीते सौ सालों में शायद ही कोई हुआ हो। जिनकी सरकारी नौकरियाँ होती हैं, उनके भी ट्रान्सफर होते हैं, जिनकी मंत्रालय की नौकरियां होती हैं, उनके कमरे तो भी बदल जाते हैं, लेकिन आपकी जिन्दगी में कुछ नहीं बदला। आप में हिम्मत नहीं हुई NDTV नामक टापू से बाहर देखने की।

और अपनी इस बुजदिली को आपने ‘मैचो मैन’ का जामा पहना दिया, जो इतना ताकतवर है कि सीधे भारत के प्रधानमंत्री मोदी से सवाल-जवाब करता है। जो खुद अपने आप में एक संस्था बन गया है, जो एक पैरेलल लोकपाल है। जो रेलवे नौकरी की अभ्यर्थियों से लेकर सफाई कर्मियों तक का यूनियन लीडर और उनका खैरख्वाह है, जो ममता बनर्जी की तरह मोदी को देश का प्रधानमंत्री ही नहीं मानता।

खैर आपकी शान में क्या कहा जाए, शब्द बौने लगते हैं आपके चेहरे पर पसरी ‘मनहूसियत’ के आगे। बहरहाल आज जब आपको राहुल गांधी के आगे बड़ी बेतरतीब सी हालत में देखा तो लगा कि ऐसी क्रांतियाँ चूल्हें में चलीं जाएँ लेकिन इंसान को सलीके से, अच्छे कपडे पहनकर रहना चाहिए। अगर सुफेद बालों में डाई सूट नहीं करती है तो जेल लगाकर कंघी तो की जा सकती है न! या फिर आपने कसम खा ली है कि देश में वामपंथी दरिद्रता के आख़िरी ब्रांड एम्बेसडर आप ही बनेंगे!

खैर आज का इंटरव्यू, वह भी राहुल गांधी के साथ, क्या निकल कर आ सकता है! पानी को मथने से हो सकता है कुछ मिनरल निकल आएँ लेकिन राहुल में से तो शून्य के झाग ही निकलेंगे। और इसलिए इतनी कवायद के बाद रवीश के पास एक अदद हेडलाइन तक नहीं है। वहीं मोदी जी अब तक जिन दर्जनों पत्रकारों को इंटरव्यू दे चुके हैं, वे फूल के कुप्पा बने घूम रहे हैं, उनके चेहरे की लाली उनकी खुशी और उनकी उपलब्धि बयान कर रही है।

वहीं रवीश आज राहुल गाँधी का इंटरव्यू करने के बाद भी डल लगे, उन्होंने कई बार राहुल गाँधी से बीच-बीच में प्राइम टाइम वाली हँसी ठिठोली भी की, लेकिन यह सब राहुल के पल्ले नहीं पड़ता, वे उतना ही बोलते, हँसते, चिल्लाते और चीखते हैं, जितना उन्हें सुबह CWC के गिद्धराज जटायु के हमउम्र कांग्रेसी ब्रीफ करते हैं।

इससे ज्यादा सुर्खियाँ और दुआएँ तो रवीश ने महागठबंधन की रैली के मंच पर मायावाती के विशालकाय सफ़ेद सोफे के पीछे अनुशासित बसपाई कार्यकर्ता की तरह एक्ट करके हासिल कर ली थी। लगता है इन दिनों भाई का बैड लक ही खराब चल रहा है।

पूर्व महिला न्यूज एंकर की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या, मिल रहीं थीं धमकियाँ

अरियाना टीवी, निजी राष्ट्रीय स्तर के चैनल शमशाद टीवी, पश्तो भाषा के लामार टीवी समेत कई चैनलों में एक दशक से ज्यादा समय तक छाईं रहीं पूर्व महिला न्यूज़ एंकर मीना मंगल की अफगानिस्तान में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। काबुल में हुए इस हत्याकाण्ड को दो मोटरसाइकिल सवारों ने अंजाम दिया। मीना की हत्या तब हुई जब वह अपने लिए कार का इंतजार कर रहीं थीं।

हवा में गोली चला भीड़ को किया तितर-बितर

मीना कार का इंतजार काबुल स्थित अफ़गानी संसद के निचले सदन जिरगा की सांस्कृतिक सलाहकार की अपनी नौकरी पर जाने के लिए कर रहीं थीं। तभी कहीं से एक मोटरसाइकिल पर सवार दो लोग आ गए और हवा में चार फ़ायर किए। हवाई फायर से जब भीड़ इधर-उधर हो गई तो उन्होंने मीना को सीने पर दो गोलियाँ मारीं और फरार हो गए। अरियाना न्यूज़ द्वारा घटनास्थल की जारी तस्वीरों में मंगल की लाश अपने ही खून में लथपथ दिखाई पड़ रही है।

महिलाओं के अधिकारों पर सोशल मीडिया में लिखतीं थीं  

मीना मंगल अफगानिस्तान में अपनी न्यूज़ एंकरिंग के अलावा अपने सोशल मीडिया पेजों को लेकर भी काफी चर्चित थीं। इन पेजों पर वह अफगानी औरतों के पढ़ने और काम करने के अधिकारों पर बात करतीं थीं। इसके अलावा उन्होंने 2017 में जबरदस्ती हुई खुद की अरेंज्ड मैरिज के बारे में भी काफी कुछ लिखा है। उनका तलाक अभी मई में ही हुआ है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर हाल ही में लिखा था कि उन्हें जान से मारने की धमकियाँ मिल रहीं हैं। अफगानी गृह मंत्रालय के प्रवक्ता नुसरत रहीमी ने स्थानीय मीडिया को बताया है कि हालाँकि हत्यारे फरार हो गए हैं और अभी तक किसी ने इस हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली है, पर मंगल की हत्या की जाँच विशेष पुलिस यूनिट कर रही है।

TIME कवर स्टोरी: कट्टरपंथ, भारत से नफरत जिसे विरासत में मिली हो, मिलिए इल्मुद्दीन और दादा दीन तासीर से

राजनीति में ‘क्या कहा जा रहा है’ के साथ-साथ ‘कौन कह रहा है’ का भी अपना महत्व होता है। कई बार किसी बात में, किसी आरोप में कितना दम है इसकी पूरी तस्दीक के लिए बोलने वाले का इतिहास, उसकी पृष्ठभूमि* आदि को भी ध्यान में रखना जरूरी हो जाता है। इसी पैमाने पर अगर नरेंद्र मोदी को ‘मुख्य विभाजक’ कहने वाले आतिश तासीर को रखा जाए तो पहली नजर में भले ही वह ‘आइडियल लिबरल’ के रूप में निखरें, पर ज़रा गौर से देखने पर उनके पैतृक खानदान में वही हिन्दुओं के लिए नफ़रत, हिंदुस्तान से दुश्मनी और इस्लामिक कटटरपंथ को व्यक्त-अव्यक्त समर्थन दिखेगा जिसे वह अपनी माँ तवलीन सिंह के सिख होने के पीछे छिपने की कोशिश करते हैं। पिता कश्मीर पर हिंदुस्तान के खिलाफ आग उगलते रहे, भारतीय हॉकी टीम को ‘बबून’ (बंदर) कहते रहे, हमारी सेना का मखौल उड़ाते रहे। दादा ने एक हिन्दू की ‘FoE’ छीन उसे मौत के घाट उतारने वाले इस्लामी कट्टरपंथी के हक में अंग्रेजों से ‘सौदेबाजी’ की थी।

‘रंगीला रसूल’, इल्मुद्दीन, और मुहम्मद दीन तासीर

1927 में हिंदुस्तान में कुछ पर्चे (पैम्फलेट) बँटने लगे थे, जिनमें भगवान श्रीराम की पत्नी और भगवती लक्ष्मी का अवतार मानीं जाने वालीं माता सीता को ‘वेश्या’ बताया गया था। उन माता सीता को, जिनका व्यक्तित्व हिन्दुओं में चरित्र का मापदण्ड है। इससे बिफ़रे एक आर्यसमाजी पण्डित चमूपति ने ‘रंगीला रसूल’ नामक एक पुस्तक लिखी और लाहौर के महाशय राजपाल ने उसे प्रकाशित कर दिया। न केवल प्रकाशित किया बल्कि लेखक के नाम अलावा उसकी कोई भी पहचान उजागर करने से भी इंकार कर दिया।

नाराज हो इल्मुद्दीन नामक एक कट्टरपंथी ने महाशय राजपाल की चाकू घोंपकर हत्या कर दी, और खुद फाँसी पर चढ़ गया। अंग्रेज सरकार उसे एक मामूली कातिल की तरह दफ़ना देना चाहती थी पर कुछ मजहब के लोग अड़ गए कि उसे बाकायदा इस्लामी गाजे-बाजे के साथ ‘शहीदी’ विदाई दी जाए। अंग्रेजों के साथ उसे एक ‘शहीदी’ सुपुर्दे-खाक देने के लिए जमकर सौदेबाजी करने वालों में एक था मोहम्मद दीन तासीर। आतिश तासीर का दादा, जिसने लिबरलों की प्यारी ‘FoE’ का क़त्ल करने वाले कातिल के जनाज़े का इंतज़ाम किया। और इस जनाज़े का पाकिस्तान मूवमेंट में कितना बड़ा हाथ रहा, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस कातिल इल्मुद्दीन को दफ़नाने पाकिस्तान के ‘बौद्धिक बाप’ अल्लामा इक़बाल आए। आए और आँसू बहा कर कहा कि हम तो बैठे ही रह गए, और यह बढ़ई का लड़का ‘बाज़ी’ मार ले गया।

आए तो वैसे उसे फाँसी से बचाने जिन्ना भी थे, मगर पता है कि उसकी काट फट से यह कहकर कर दी जाएगी कि वकील का तो काम ही है कातिलों के लिए कानून से कबड्डी खेलना।

आज पाकिस्तान में जिन्ना की ही तरह ‘मजार’ है इल्मुद्दीन की, जहाँ उसकी ‘वीरता’ और उसके ‘बलिदान’ के किस्से सुनाए जाते हैं। और इसका श्रेय जाता है मुहम्मद दीन तासीर को- आतिश तासीर के दादा को।

एक और बात: जिस 295A को ‘लिबरल गैंग’ अपना सबसे बड़ा दुश्मन बताता है, अभिव्यक्ति की आजादी का अंत बताता है, उसे भी ‘रंगीला रसूल’ किताब के खिलाफ कानूनी तौर पर कुछ न कर पाने की नाराजगी को दूर करने के लिए ही बनाया गया था। जिस समय यह किताब छपी, उस समय मजहबी भावनाओं को आहत करने के खिलाफ कोई कानून नहीं था और इसलिए पूरे शहर के कट्टरपंथियों के गुस्से के बावजूद महाशय राजपाल का कोई कोर्ट-कचहरी बाल भी बाँका नहीं कर पाई थी। लेकिन कट्टरपंथियों के गुस्से को देखते हुए आगे के लिए यह कानून बना दिया गया।

हिंदुस्तान को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी सलमान तासीर ने भी  

सलमान तासीर बेशक पाकिस्तान के जाहिलाना कानून ‘ईश-निंदा के लिए मौत की सजा’ की मुख़ालफ़त करते हुए हलाक हुए, और इसके लिए उनकी जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है। पर मौत किसी के स्याह सच को नहीं बदल देती। और यह भी एक कड़वा सच ही है कि ‘लिबरल’ तासीर हिंदुस्तान से उतनी ही नफ़रत का प्रदर्शन करते थे अपने ट्विटर अकाउंट पर जितनी उनके मुल्क के ‘कठमुल्ले’।

मेरी बात पर अँधा यकीन मत करिए। सलमान तासीर का ट्विटर अकाउंट आज भी है- उस पर एडवांस्ड सर्च में जरा नाम सलमान तासीर के ट्विटर अकाउंट का डालिए, और कीवर्ड डालिए ‘India’। हिंदुस्तान के लिए जहर से भरे ट्वीट निकल-निकल कर दिखेंगे। खुद आतिश तासीर इस बात की तस्दीक कर चुके हैं कि उनके वालिद और पाकिस्तानियों की तरह वह भी हिंदुस्तान से नफरत की ग्रंथि से ग्रस्त हैं। और यह ट्वीट बताते हैं कि सलमान तासीर ने पाकिस्तान में फैले कठमुल्लावाद को मिटाने के लिए चाहे जो किया, जितना भी किया, लेकिन वह हिन्दू और हिंदुस्तान को निशाना बनाने की पाकिस्तानी संस्कृति से खुद की एक अलग तस्वीर नहीं पेश कर पाए।

अब भी कोई आश्चर्य है कि आतिश को हिन्दूफ़ोबिया फैंटेसी लगता है?

इन चीज़ों के परिप्रेक्ष्य में अगर आतिश तासीर को देखा जाए साफ़ पता चलता है कि कट्टरपंथी इस्लाम से सहानुभूति और हिंदुस्तान से नफ़रत विरासत में मिले हैं। उनकी माँ ने उन्हें किस तरह की (सेक्युलर, या हिन्दू -सिख, या मुस्लिम) परवरिश दी, इस पर तो मैं  टिप्पणी नहीं करना चाहता पर यह साफ़ है कि हिन्दू-सिख माहौल में पलने-बढ़ने के बावजूद इस्लामी कट्टरपंथ उनपर मोदी के आकलन के समय हावी हो ही गया। इसीलिए संविधान के अनुच्छेद 25-30 से लेकर मजहबी तौर पर भेदभावपूर्ण RTE, सदियों से लटके राम मंदिर और सदियों की मेहनत से स्थापित पवित्र क्षेत्र को अपवित्र करवा चुके सबरीमाला तक के बाद भी उन्हें हिन्दूफ़ोबिया ‘फैंटेंसी’ लगता है। आतिश पता नहीं ‘gone case’ हैं या नहीं इस्लामी कटटरपंथ के, पर वह सेक्युलर तो नहीं ही हैं…

*(हालाँकि ,जरूरी नहीं कि हर एक बार इंसान की बात को तौलने के लिए उसकी पृष्ठभूमि को देखा ही जाए पर अधिकांश विषयों पर यह महत्वपूर्ण हो ही जाता है।)

एक मुलाकात उस खास व्यक्ति से जो स्वरा से मिला, सेल्फी ली और कहा ‘आएगा तो मोदी ही’

8 मई 2019 को, एक छोटी सी वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें एक व्यक्ति अभिनेत्री से ट्रोल हो चुकी स्वरा भास्कर के साथ एक सेल्फी ले रहा था। क्लिप में, सेल्फी लेते हुए, मुस्करा कर स्वरा भास्कर से कहता है, “पर मैम, आएगा तो मोदी ही”।

वायरल वीडियो के अभी तक कई संस्करण आ चुके हैं, कई मिम्स बन चुके हैं, जिससे ट्वीटर पर घमासान छिड़ा हुआ है। एक तरफ जहाँ मोदी समर्थक इसके मजे ले रहे हैं, वहीं स्वरा भास्कर ने उनके आनंद पर पानी फेरना चाहा, कहा कि जब उस आदमी ने उनसे हवाई अड्डे पर सेल्फी के लिए कहा, तो उन्होंने कहा, “जो उनके के साथ सेल्फी लेना चाहते हैं, वह उनसे भी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर भेदभाव नहीं करती हैं।” लेकिन उसने ‘चुपके से यह वीडियो शूट किया है”। स्वरा ने आगे कहा कि अपनी घृणित शैली में, ऐसी अंडरहैंड और टैक्टिक रणनीति भक्तों का ट्रेडमार्क है।

वीडिओ वायरल है, ट्विटर पर बवाल काट रहा है, ऑपइंडिया ने उस व्यक्ति से संपर्क किया, जिसकी पहचान वी राँझा के रूप में की गई थी, वह एक पंजाबी गायक हैं, यह जानने के लिए कि पूरा मामला क्या था?

वी राँझा ने कहा कि उन्होंने स्वरा भास्कर से एक स्नैप स्टोरी के लिए पूछा था, जिसमें ऑडियो और वीडियो दोनों हैं। उन्होंने स्वरा को यह कहते हुए लताड़ा कि अगर यह उन्हें पसंद नहीं था, तो उन्हें वहीं उसे डिलीट करने के लिए कहना चाहिए था। उन्होंने कहा कि वह स्वरा को विवाद में नहीं घसीटना चाहते हैं और हो सकता है कि जब उन्होंने उनसे स्नैप स्टोरी के लिए पूछा तो उन्होंने हवाई अड्डे के शोर में ठीक से नहीं सुना हो।

उन्होंने कहा, “आएगा तो मोदी ही” कहने के बाद, स्वरा भास्कर ने बस इतना कहा कि ‘देखते हैं 23 मई को’ और चली गईं। यदि उसे स्नैप स्टोरी में कोई समस्या थी, तो उसे डिलीट करने के लिए कहना चाहिए था न कि वह इसे रीट्वीट कर और लोगों तक पहुँचाती।

वास्तव में, वी. राँझा ने कहा कि वह अभिनेत्री के रूप में स्वरा भास्कर के प्रशंसक थे, हालाँकि, एक राजनेता के रूप में, वह प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता में वापसी करते हुए देखना चाहते हैं क्योंकि अभी देश में उनके कैलिबर का कोई अन्य नेता नहीं है।

यह पूछे जाने पर कि उन्होंने स्वरा भास्कर के राजनीतिक विचारों को अपवाद के रूप में क्यों लिया, उन्होंने कहा कि उस मामले में उन्हें स्वरा की राजनीति से कोई प्रॉब्लम नहीं है लेकिन जब बात भारतीय सेना और पाकिस्तान की होती है तो वे ऐसे मुद्दों पर वे स्टैंड लेते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने मेजर गोगोई के बारे में स्वरा के ट्वीट को भी एक्सेपशन के तौर पर लिया, गोगोई एक पथराव करने वाली भीड़ के बीच से चुनाव अधिकारियों के लिए सुरक्षित मार्ग को सुनिश्चित करने के लिए अपनी जीप के बोनट पर एक पत्थरबाज को बाँध कर रास्ता बनाते हैं।

जब उनसे पूछा गया कि मेजर गोगोई के संबंध में उन्होंने कौन से बयान को एक्सेप्शन के रूप में लिया है, तो उन्होंने कहा कि वह स्वरा भास्कर द्वारा इस्तेमाल किए गए अपमानजनक शब्द को दोहराना नहीं चाहते हैं लेकिन यह ऑन रिकॉर्ड मौजूद है। हालाँकि, इस ट्वीट ने ट्विटर पर एक तगड़ी प्रतिक्रिया को जन्म दिया था।

आखिरकार, स्वरा ने दावा किया कि वह ऊना की घटना के बारे में बात कर रही थीं, लेकिन किसी ने भी स्वरा पर विश्वास नहीं किया क्योंकि उसने मेजर गोगोई के इस तरह से अधिकारियों को बचाने के अंतिम प्रयास की भी आलोचना की थी।

वैसे स्वरा भास्कर का पाकिस्तान के प्रति झुकाव भी काफी स्पष्ट है, जिसकी समय-समय पर चर्चा होती रही है। एक वीडियो में, उन्होंने पाकिस्तान की प्रशंसा करते हुए कहा था कि वह पाकिस्तान में रहने के बाद से पाक के लिए ‘डिसेंट वर्ड’ का ही उपयोग करना चाहती हैं ।

उन्होंने हाल ही में विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई के लिए भी ‘तालिबान’ इमरान खान को श्रेय दिया था, जबकि स्पष्ट रूप से, घटनाक्रमों ने मोदी सरकार द्वारा पाकिस्तान पर गंभीर वैश्विक दबाव की ओर इशारा किया था, जिसकी वजह से उनकी रिहाई हुई थी। वास्तव में, अभिनन्दन जब तक पाकिस्तान में थे तब तक पाक ने लगातार अभिनंदन को मानसिक और शारीरिक चोट ही पहुँचाया था।

जब उनसे पूछा गया कि स्वरा भास्कर ने कन्हैया कुमार के लिए चुनाव प्रचार किया था तो इस बारे में आपने क्या सोचा है, तो वी राँझा ने कहा कि अगर वह किसी ऐसे व्यक्ति के लिए प्रचार करना चाहती हैं जो देश के ‘टुकडे टुकडे’ चाहता है, तो यह उसकी अपनी पसंद है।

राँझा ने यह भी कहा कि उसने वही किया जो वह करना चाहते हैं क्योंकि वह इसे अपने कुछ दोस्तों के साथ साझा करना चाहता थे और उन्हें यह नहीं पता था कि यह वायरल हो जाएगा। वह इससे पब्लिसिटी नहीं चाहते थे। क्योंकि, वह पहले से ही टी-सीरीज़ के साथ काम कर चुके हैं और YouTube पर उनके गाने के 3 मिलियन से अधिक व्यूज हैं।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उनकी पर्याप्त फैन फॉलोइंग है और उन्हें प्रचार के लिए यह सब करने की आवश्यकता नहीं है।

स्वरा भास्कर के लिए परेशानी सिर्फ वी राँझा के साथ ही खत्म नहीं हुई। एक और घटना सामने आई है जहाँ स्वरा को ट्रोल किया गया है।

एक महिला पत्रकार द्वारा स्वरा भास्कर का इंटरव्यू लेने के बाद, उस पत्रकार द्वारा अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट करते हुए कहा गया कि उन्हें स्वरा का  इंटरव्यू लेते समय बहुत अच्छा लगा, लेकिन ‘आएगा तो मोदी ही’।

‘अलवर गैंग रेप पर कॉन्ग्रेस ने पर्दा डालने की कोशिश की, चुप क्यों है इस मुद्दे पर अवॉर्ड वापसी गैंग’

प्रधानमंत्री मोदी ने आज यूपी के गाज़ीपुर में भाजपा प्रत्याशी मनोज सिन्हा के समर्थन में आरटीआई मैदान में आयोजित एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अपनी सरकार के पिछले पाँच साल के विकास कार्यों का उल्लेख किया। गाजीपुर की भौगोलिक, सांस्कृतिक महत्व की जानकारी भी उनके संबोधन का हिस्सा रहे।

राजस्थान के अलवर में दलित महिला के साथ हुए गैंग रेप मामले पर पीएम मोदी ने कहा, “वहाँ एक दलित बेटी के साथ दो हफ़्ता पहले कुछ दरिंदों ने बलात्कार किया, लेकिन उन दरिंदों को पकड़ने की बजाए, वहाँ की पुलिस, वहाँ की कॉन्ग्रेस सरकार इस केस को ही छिपाने-दबाने में जुट गई।” उन्होंने कहा कि यही है कॉन्ग्रेस के ‘न्याय’ की सच्चाई।

इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “इनके रागदरबारी भी इतने भयंकर कांड को दबाते रहे और मोमबत्तियाँ लेकर निकलने वाले लोगों की मोमबत्तियों से धुआँ निकल रहा है।” अवॉर्ड वापसी गैंग पर तंज कसते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज वो अवॉर्ड वापसी गैंग इस मुद्दे पर चुप क्यों बैठी है? देश के एक बड़े हिस्से ने इन स्वार्थियों को पहचान लिया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध के लिए फाँसी की सज़ा का प्रावधान किया है। महिला हितों और महिलाओं की सुरक्षा के प्रति हम पूरी तरह संवेदनशील हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मंच से बसपा-सपा के कई हमलों का जवाब भी दिया। उन्होंने कहा “जब भी देश में महामिलावटी सरकार होती है तो वो राष्ट्रीय सुरक्षा को भी ख़तरे में डाल देती है। याद कीजिए जब तीसरे मोर्चे की महामिलावटी सरकार थी, समाजवादी पार्टी मंत्रिमंडल में थी, तब इन्होंने देश का क्या हाल कर दिया था?” उन्होंने कहा कि इन महामिलावटी सरकार ने हमारे पूरे खूफ़िया तंत्र को दीमक लगा दिया था, खोखला कर दिया था, बर्बाद कर दिया था। इसका ख़ामियाज़ा देश को लंबे समय तक भुगतना पड़ा था।

अपने संबोधन में उन्होंने जनता से कहा कि विकास और राष्ट्र को लेकर हमारी भावना मज़बूत रहे इसके लिए दिल्ली में मज़बूत सरकार फिर से बनानी है, इसलिए हर बूथ पर आपको कमल खिलाना है।


पर्चे ने लिया नया मोड़, केजरीवाल ने गंभीर को भेजा कानूनी नोटिस, 24 घंटे में माफी माँगने की दी धमकी

आम आदमी पार्टी की पूर्वी दिल्ली से उम्मीदवार आतिशी के खिलाफ पोस्टरों पर शुरू हुआ विवाद बढ़ता ही जा रहा है। इसी संबंध में अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भाजपा के पूर्वी दिल्ली के उम्मीदवार गौतम गंभीर को कानूनी नोटिस भेजा है। इस नोटिस में गौतम गंभीर को लिखित रूप में तत्काल माफी माँगने के लिए कहा गया है और उसे अखबारों और सोशल मीडिया में 24 घंटे के भीतर सच और सही तथ्यों के साथ प्रकाशित करने के लिए कहा है।

दरअसल, गौतम गंभीर ने कहा था, “मुझे शर्म आती है कि अरविंद केजरीवाल जैसा मेरा सीएम है। श्रीमान आप सीएम हैं और किसी को आपके गंदे दिमाग को साफ करने के लिए आपके अपने ही ‘झाड़ू’ की जरूरत है।” इससे पहले इस मसले पर गौतम गंभीर ने आतिशी, अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को मानहानि का नोटिस भेजा था। आतिशी ने गंभीर पर उनके निर्वाचन क्षेत्र में उनके खिलाफ ‘आपत्तिजनक और अपमानजक’ भाषा वाली पर्चियाँ बँटवाने का आरोप लगाया था।

गौतम गंभीर ने आतिशी और आम आदमी पार्टी के आरोपों को खारिज कर दिया था और कहा था कि अगर ये आरोप सही साबित हो गए, तो वो अपनी उम्मीदवारी वापस ले लेंगे। इसके साथ ही गंभीर ने एक ट्वीट करते हुए लिखा, “अगर वो ये साबित कर देते हैं कि उस पर्चे से मेरा कोई लेना-देना है, तो मैं जनता के बीच अपने आप को फाँसी लगा लूँगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो अरविंद केजरीवाल को राजनीति से संन्यास लेना होगा। क्या यह चुनौती स्वीकार है?”

चुनाव के चलते अलवर गैंगरेप मामला दबाने की कोशिश में कॉन्ग्रेस सरकार, SC से हस्तक्षेप की अपील

बसपा सुप्रीमो मायावती ने राजस्थान के अलवर में सामूहिक दुष्कर्म के मामले में राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि इस घटना को कॉन्ग्रेस सरकार ने अपने राजनीतिक स्वार्थ में पीडि़त परिवार को डरा धमकाकर तब तक इस घटना को उजागर नहीं होने दिया, जब तक कि वहाँ पर मतदान नहीं हो गया। मायावती का कहना है कि वहाँ पर उनके लोगों के द्वारा काफी प्रयास के बाद सरकार पर दबाव बनाया गया, जिसके बाद सरकार कार्रवाई करने के लिए मजबूर हो गई। मायावती ने इस मामले के दोषी के खिलाफ फाँसी की सजा की माँग की है।

गौरतलब है कि, राजस्थान के अलवर में 26 अप्रैल को कुछ लोगों महिला का उसके पति के सामने सामूहिक बलात्कार किया गया था। इस मामले में पुलिस द्वारा पीड़ित की शिकायत देर से लिखे जाने पर काफी बवाल मचा था। जानकारी के मुताबिक, महिला ने पुलिस अधिकारियों को इस मामले में 30 अप्रैल को ही जानकारी दी थी, लेकिन 7 मई तक पुलिस ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। पीड़ित महिला के पति का कहना है कि पुलिस ने चुनाव की वजह से रिपोर्ट दर्ज करने में देरी की। बता दें कि, पुलिस ने इस मामले में सभी 6 आरोपितों- इंद्र राज गुर्जर, महेश गुर्जर, अशोक गुर्जर, हंसराज गुर्जर, छोटे लाल गुर्जर और मुकेश गुर्जर को गिरफ्तार कर लिया है।

मायावती ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार एवं पुलिस प्रशासन के विरुद्ध भी सख्त कदम उठाना चाहिए, जिन्होंने वहाँ राजनीतिक स्वार्थ के लिए पुलिस और प्रशासन पर दबाव बनाकर इस मामले को दबाए रखा। मायावती का कहना है कि ये मामला सिर्फ एक दलित महिला से नहीं, बल्कि सभी महिलाओं से जुड़ा है।

इसके साथ ही मायावती ने चुनाव आयोग को भी निशाने पर लिया। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ किए जा रहे अपमानजनक टिप्पणी पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान कई नेता महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक बयान दे रहे हैं, मगर चुनाव आयोग की तरफ से उन पर किसी तरह की कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती दिख रही है। आयोग को इसका संज्ञान लेकर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

कॉन्ग्रेस की कर्जमाफी योजना की खुली पोल: सिंधिया ने सबके सामने किसान को चुप कराया

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस सरकार किसानों की कर्ज माफ़ी योजना को अब तक एक उपलब्धि के तौर पर दिखा रही थी लेकिन आज ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने एक किसान ने कर्जमाफ़ी की पोल खोल दी। आज (मई 11, 2019) सिंधिया के सामने एक किसान ने विरोध प्रदर्शन किया लेकिन नेताओं द्वारा उस किसान को चुप करवा दिया गया।

ज्योतिरादित्य सिंधिया आज चुनाव प्रचार के लिए करोद गाँव में पहुँचे थे। यहाँ वह सरकार की किसान योजना को उपलब्धि बताकर पेश कर रहे थे। इसी बीच वहाँ मौजूद एक किसान उठा और उसने इस योजना को झूठा करार दिया। किसान का विरोध देखकर पार्टी कार्यकर्ताओं ने उसे शांत कराने की कोशिश की। साथ ही जनसभा से हटाने का भी प्रयास किया लेकिन नाराज़ किसान ने एक नहीं सुनी।

किसान का विरोध देखकर उसे सिंधिया के पास ले जाया गया। सिंधिया ने उस किसान को शांत रहने की नसीहत दी और पीछे भेज दिया। सिंधिया ने उस किसान को कहा कि जब उसे बोलने का मौक़ा दिया जाएगा, तभी वह बोले, तब तक चुप रहे।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस सरकार किसानों की कर्जमाफ़ी के बड़े वादे के साथ सत्ता में आई थी। इस दौरान कॉन्ग्रेस पार्टी ने प्रदेश के 34 लाख किसानों के 2 लाख रुपए तक का कर्ज माफ़ करने का वादा किया था।

सिख दंगों के गुनहगारों को बचाने वाले को केजरीवाल ने बेच दिया लोकसभा टिकट

दिल्ली में लोकसभा चुनाव प्रचार थम चुका है लेकिन मतदान से ठीक एक दिन पहले वेस्ट दिल्‍ली से आम आदमी पार्टी के उम्‍मीदवार बलबीर सिंह जाखड़ के बेटे उदय जाखड़ ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर सनसनीखेज आरोप लगाया है। उदय जाखड़ ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा है कि उनके पिता ने टिकट पाने के लिए अरविन्द केजरीवाल को 6 करोड़ रुपए दिए थे। उदय के अनुसार यह एक प्रकार की घूस है जिसने उसकी अंतरात्मा हिला के रख दी।

बलबीर के बेटे उदय जाखड़ ने कहा, “ये बात मेरे पिता ने खुद मुझे बताई थी, जिसके लिए मैंने मना भी किया था। एक नागरिक होने के नाते यह मेरा कर्तव्य है कि सच्चाई दुनिया के सामने आए। मेरे पिता ने तीन महीने पहले ही राजनीति ज्वॉइन की थी। मेरे पिता कभी भी आम आदमी पार्टी के सदस्य नहीं रहे और ना ही अन्ना हजारे आंदोलन में उन्होंने हिस्सा लिया था। वह कभी भी आम आदमी पार्टी में भी नहीं रहे। जनवरी में ही वह आम आदमी पार्टी में शामिल हुए।”

उदय ने इसी प्रेस कांफ्रेंस में और भी कई खुलासे करते हुए बताया, “पिता ने मुझसे कहा कि उन्हें आप से टिकट मिल रहा है जिसके लिए उन्होंने 6 करोड़ रुपए सीधे अरविंद केजरीवाल और गोपाल राय को दिए हैं। किसी भी गैर राजनीतिक शख्स को टिकट देना अपने आप में आश्चर्यजनक है। मैंने पिता से पढ़ाई के लिए पैसे माँगे तो उन्होंने मना कर दिया था। मेरे पिता ने पूर्व कॉन्ग्रेस नेता और 1984 के सिख दंगों के आरोपी सज्जन कुमार और यशपाल सिंह को जमानत दिलवाने की भी कोशिश कर रहे हैं, जिसके लिए वह मोटी रकम देने को तैयार हैं।”

इतना ही नहीं उदय जाखड़ ने कहा कि दिल्ली में सिखों का नरसंहार करने वाले को कोई कैसे रिहा करा सकता है। उनके अनुसार केजरीवाल सज्जन कुमार की जमानत के समर्थन में हैं। उदय घूस संस्कृति के खिलाफ है। उदय का कहना है कि उसके पापा ने बहुत गलत किया। जो पार्टी ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ को समर्थन दे, जो देश में घूस की संस्कृति को बढ़ावा दे, कोई उस पार्टी का साथ कैसे दे सकता है। उदय ने कहा, “मेरी आत्मा ने मुझे अंदर से कचोटा जिससे मैं आज ये सारे खुलासे कर रहा हूँ। मेरा किसी भी पार्टी से संबंध नहीं है।”

‘स्वघोषित’ ईमानदार नेता अरविन्द केजरीवाल का चेहरा बेनकाब हो चुका है। ऐसे कई खुलासे हुए थे जिनसे राज्य सभा टिकट बेचने का भी आरोप लगा था और यह आरोप कोई और नहीं बल्कि उन्ही के पार्टी के नेता कुमार विश्वास और कपिल मिश्रा लगा चुके हैं। हालाँकि, दुसरो पर लगातार बेबुनियाद आरोप लगाने वाले केजरीवाल अभी तक इस खुलासे पर मौन हैं।

उदय ने आम आदमी पार्टी को यह चैलेंज भी दिया कि यदि उनके पास कोई सबूत है कि बलबीर जाखड़ का पहले से AAP से कोई संबंध है तो उसका प्रमाण दें। साथ ही इस पूरे खुलासे के बाद उदय जाखड़ ने दिल्ली की जनता से अपना वोट बर्बाद न करते हुए उसे समझदारी से देने की अपील भी की।

भारत बना रहा है विश्व का सबसे बड़ा टेलिस्कोप, NASA के हबल से 12 गुना अधिक शक्तिशाली

जहाँ एक ओर कॉन्ग्रेस और विपक्षी मीडिया मोदी सरकार पर ‘साइंटिफ़िक टेम्पर’ बर्बाद करने का आरोप लगा रही है वहीं दूसरी ओर भारत दुनिया की सबसे बड़ी अंतरिक्ष दूरबीनों में से एक के निर्माण में महती भूमिका निभा रहा है। 30-मीटर टेलिस्कोप (TMT) नामक यह दूरबीन अमेरिका के हवाई प्रान्त में मौना केआ नामक स्थान पर स्थापित होनी है। यह सहभागिता भारत की कुल सात महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजनाओं में भागीदारी की शृंखला में से एक है।

कई भारतीय संस्थान हैं शामिल

इस परियोजना में भारत की के कई संस्थान अपना योगदान दे रहे हैं। नवभारत टाइम्स ने TMT के सहायक परियोजना प्रबंधक रविंद्र भाटिया के हवाले से बताया है कि इन संस्थानों में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ एस्ट्रोफीजिक्स, आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंस, इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस दूरबीन की स्पष्टता नासा के हबल टेलिस्कोप से 12 गुना अधिक होगी।

विभिन्न स्थानों पर कार्य जारी, 492 हिस्से हैं दूरबीन के आईने में  

इस परियोजना के बारे में नेहरू साइंस सेंटर (वर्ली, मुंबई) में वैज्ञानिकों को विज्ञान संगम कार्यक्रम के दौरान सम्बोधित करते हुए TMT इंडिया के सहायक परियोजना निदेशक एएन रामप्रकाश ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि टेलिस्कोप का निर्माण इसी वर्ष प्रारंभ हो जाने की आशा है। साथ ही यह जानकारी भी दी कि भारत न केवल टेलिस्कोप के कंट्रोल सिस्टम और सॉफ्टवेयर बल्कि उपकरणों के विकास में भी महती भूमिका निभाएगा।

इस टेलिस्कोप का प्राइमरी आईना 30 मीटर का होगा जिसके 492 षट्कोणीय हिस्से होंगे। 66 मीटर चौड़े और 56 मीटर ऊँचे इस टेलिस्कोप का सेंसर पुडुचेरी में निर्माणाधीन होगा, जबकि ऐक्चुएटर बंगलुरु में तैयार किया जाएगा। जहाँ टेलिस्कोप कंट्रोल सिस्टम पुणे में तैयार हो रहा है, वहीं कुछ हिस्से मुंबई में भी तैयार किए जाएँगे।