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साध्वी प्रज्ञा ने दिग्विजय सिंह को कहा ‘आतंकवादी’, चुनाव आयोग ने माँगी रिपोर्ट

लोकसभा चुनाव में बयानबाज़ी का सिलसिला लगातार जारी है। भोपाल से चुनाव लड़ रहीं भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के बयान इन दिनों सुर्खियाँ बटोर रहे हैं। उनके द्वारा दिए गए एक के बाद एक बयान विपक्ष को मौका दे रहे हैं। हेमंत करकरे के बाद उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर निशाना साधा जिससे एक नए विवाद ने जन्म ले लिया। अपने इस बयान में उन्होंने दिग्विजय सिंह को आतंकवादी कहा, जिसके लिए चुनाव आयोग ने ज़िला प्रशासन से रिपोर्ट माँगी है।

ख़बर के अनुसार, प्रज्ञा ठाकुर गुरुवार को सीहोर क्षेत्र में चुनाव प्रचार कार्यालय का उद्धाटन कर रही थीं, इसी दौरान उन्होंने कहा था कि दिग्विजय सिंह ने फैक्ट्रियाँ बंद कराईं, लोगों को बेरोजगार किया और अपने व्यक्तिगत व्यवसाय को बढ़ाया जिसके भुक्तभोगी मप्र के लोग हैं।

प्रज्ञा ठाकुर ने कहा, “दिग्विजय सिंह को राज्य में 16 साल पहले उमा दीदी ने हराया था और वह 16 साल तक मुँह नहीं उठा पाया, और राजनीति कर लेता, इसकी कोशिश नहीं कर पाया। अब फिर से सिर उठा है तो दूसरी संन्यासी सामने आ गई है जो उसके कर्मों का प्रत्यक्ष प्रमाण है।”

दिग्विजय सिंह पर हमलावर रुख़ बरक़रार रखते हुए साध्वी प्रज्ञा ने आगे कहा कि एक बार फिर से ऐसे आतंकी (दिग्विजय सिंह) को समाप्त करने के लिए संन्यासी को ही खड़ा होना पड़ रहा है। श्यामपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए प्रज्ञा ठाकुर ने कॉन्ग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि वो साधु-संतों पर भगवा आतंकवाद का आरोप लगाकर उन्हें जेल भेजती है।

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के इन बयानों को चुनाव आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट माँगी है। जानकारी के अनुसार, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांतावर ने बताया कि सीहोर ज़िला प्रशासन से इस बयान के संदर्भ में रिपोर्ट माँगी गई है।

वहीं, अगर दिग्विजय सिंह की बात करें तो उन्होंने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि कॉन्ग्रेस आतंकवाद से समझौता नहीं करती। साथ ही इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी, बेअंत सिंह जैसे नेताओं को देश के लिए बलिदानी होने की बात तक कह डाली थी। इसके अलावा भाजपा को कटघरे में रखते हुए कहा था कि उन्होंने कब आतंकवाद से समझौता किया है। सर्जिकल स्ट्राइक का ज़िक्र करते हुए दिग्विजय ने कहा कि कॉन्ग्रेस शासनकाल में भी ऐसी स्ट्राइक की गई थीं, लेकिन उसका कभी प्रचार-प्रसार नहीं किया गया।

‘कॉन्ग्रेस जो बोलेगी वो करूँगा’ कहने वाले नेता ने दिया इस्तीफ़ा, बेटा पहले ही हो चुका है BJP में शामिल

चुनावी हलचल के चलते कॉन्ग्रेस को महाराष्ट्र में एक बड़ा झटका लगा है। कॉन्ग्रेस नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने गुरुवार (अप्रैल 25, 2019) को विधानसभा के नेता विपक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक चव्हाण ने बताया कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया है।

उल्लेखनीय है कि पाटिल के पुत्र सुजय विखे इससे पहले भाजपा में शामिल हो चुके हैं जिसपर पाटिल ने कहा था कि उनके पुत्र सुजय ने भाजपा में शामिल होने से पहले उनकी सलाह नहीं ली थी। साथ ही पाटिल ने ये भी कहा था कि कॉन्ग्रेस उनसे जो भी करने को कहेगी, वो उसका पालन करेंगे। बता दें कि राधाकृष्ण का शिरडी और अहमदनगर क्षेत्रों पर अच्छा प्रभाव था।

राधाकृष्ण विखे के बेटे पिछले 2 वर्ष से अहमद नगर से चुनाव लड़ने की तैयारियों में जुटे हुए थे। वह कॉन्ग्रेस पार्टी से उम्मीदवारी चाहते थे, लेकिन बँटवारे के कारण यह सीट राकांपा (राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी) के पास चली गई। जिसके बाद राकांपा यह सीट कॉन्ग्रेस के साथ बदलने के लिए तैयार नहीं हुई और सुजय को अपनी पार्टी की ओर से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया, लेकिन सुजय ने राकांपा से चुनाव लड़ने की बजाए भाजपा में शामिल होना उचित समझा।

गौरतलब है कि सुजय ने अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध जाकर भाजपा में शामिल होने का कदम उठाया था जिसके बाद से ही चर्चा गर्म थी कि राधाकृष्ण खुद भी कॉन्ग्रेस में ज्यादा दिन नहीं टिकने वाले हैं।

बंगाल के इमामों ने 10,000 पत्र लिखकर अल्पसंख्यकों से सेक्युलर पार्टी को वोट देने को कहा

लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र पश्चिम बंगाल में प्रमुख इमामों ने एक संदेश जारी करते हुए समुदाय से सावधानीपूर्वक वोट करने की अपील की है। दरअसल, बंगाल के ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल के इमामों और मौलवियों ने कथित तौर पर पश्चिम बंगाल के समुदाय के मतदाताओं को 10,000 पत्र लिखकर कहा है कि वे एक कौम के रूप में एकजुट हों और सांप्रदायिक ताकतों को दरकिनार कर सेक्युलर सरकार को चुनें।

ये पत्र ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल की राज्य इकाई द्वारा भेजा गया है। इस पत्र पर ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल के अध्यक्ष करी फजलुर रहमान और उपाध्यक्ष मौलाना शफीक कासमी ने हस्ताक्षर किए हैं। करी फजलुर कोलकाता की रेड रोड पर ईद के मौके पर नमाज पढ़ाने वाले प्रमुख इमाम हैं, जबकि मौलाना शफीक कासमी कोलकाता की चर्चित नखोड़ा मस्जिद के इमाम हैं।

ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल की राज्य इकाई के प्रमुख कारी फजलुर रहमान ने डीएनए के साथ हुई बातचीत में कहा कि अल्पसंख्यकों को उनके मताधिकार की याद दिलाने के लिए यह पत्र लिखे गए हैं। रहमान ने बताया कि उन्होंने समुदाय के मतदाताओं से अपील की है कि 2019 में वो किसी तरह की गलती ना करें, वोट देने का अवसर बार-बार नहीं आता इसलिए उन्हें अपना वोट किसे देना है, इस पर सोच-विचार करना जरूरी है। उन्हें इस बात का ध्यान रखना होगा कि उनका वोट उसे ही मिले जो देश में सेक्युलर शासन लाए, न कि सांप्रदायिक तत्वों को सत्ता में जगह मिल जाए।

जब रहमान से पूछा गया कि राज्य में सेक्युलर पार्टी कौन सी है और समुदाय के वोटरों को किसे वोट देना चाहिए तो इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि जो दल सबसे ज्यादा मजबूत हो और जिसके जीतने की संभावना सबसे अधिक है। उनका कहना है कि बंगाल में सत्ताधारी दल तृणमूल के जीतने की उम्मीद सबसे ज्यादा है। इसलिए समुदाय को अन्य धर्मनिरपेक्ष दलों को वोट देकर अपना वोट नहीं बँटने देना चाहिए, क्योंकि ऐसा होने पर फासीवादी ताकतों को मदद मिल जाएगी।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए इमाम ने कहा, “पिछली बार हमने देखा कि कैसे समुदाय वोटों के विभाजन ने फासीवादी ताकतों को सत्ता में आने में मदद की। हम लोगों से अपना वोट बर्बाद न करने और इसे बहुमूल्य बनाने के लिए कह रहे हैं। फासीवादी ताकतें देश के धर्मनिरपेक्ष ढाँचे को नुकसान पहुँचा रही हैं जहाँ सभी धर्म एक साथ रहते हैं।”

हालाँकि इस पत्र में किसी भी कैंडिडेट या फिर राजनीतिक दल का ज़िक्र नहीं किया गया है। मगर डीएनए के साथ
कारी फजलुर रहमान द्वारा की गई बातचीत से यह स्पष्ट हो रहा है कि पश्चिम बंगाल में ऑल इंडिया मिली काउंसिल, भाजपा के खिलाफ और तृणमूल के लिए वोट देने की अपील कर रही है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के इमाम अक्सर बेतुका बयान देते रहते हैं। साल 2017 में भी पश्चिम बंगाल के शाही इमाम ने एक बयान देते हुए कहा था कि जो प्रधानमंत्री मोदी के सिर और दाढ़ी के बाल काट देगा, उसे ₹25 लाख का इनाम दिया जाएगा।

झारखंड: नक्‍सलियों ने बम से उड़ाया BJP कार्यालय, मिले चुनाव बहिष्कार के पर्चे

लोकसभा चुनावों के दौरान झारखंड में पलामू जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र हरिहरगंज से उग्रवादी घटना की खबर आई है। यहाँ गुरुवार (अप्रैल 25, 2019) की रात भाकपा माओवादी के 12 उग्रवादियों ने बस स्टैंड स्थित बीजेपी चुनावी कार्यालय को बम से उड़ा दिया।

ये घटना रात 12:25 की है। खबर के अनुसार घटनास्थल पर नक्सलियों ने एक चिट्ठी भी छोड़ी है जिसपर राफेल सौदा, नोटबंदी, भगौड़े विजय माल्या, नीरव मोदी का जिक्र है। पर्चे में राज्य और केंद्र सरकार पर पहाड़ों और मूलनिवासियों को विस्थापित करके प्राकृतिक संसाधनों व खनिज संपदा को कॉरपोरेट घरानों को सौंपने का भी आरोप लगाया गया है।

घटनास्थल से प्राप्त पर्चा। आभार: दैनिक जागरण

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक डीएसपी शंभू कुमार ने बताया है कि भाकपा माओवादियों ने बीजेपी के कार्यालय को उड़ा दिया, जिसके कारण भवन को काफ़ी नुकसान पहुँचा है। उनके अनुसार इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ है। हायरगंज थाना पुलिस दल-बल समेत घटनास्थल पर पहुँच कर मामले की जाँच कर रही है। डीएसपी ने घटनास्थल पर मिले पर्चे के बारे में बताते हुए कहा कि उस पर्चे में 17वें लोकसभा चुनाव बहिष्कार की घोषणा की गई है।

इस घटना ने स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल फैला दिया है। भाजपा के जिस कार्यालय को विस्फोट से उड़ाया गया है, उसे राष्ट्रीय राजमार्ग 98 के समीप कृष्णा गुप्ता के मकान से संचालित किया जाता था। ये इलाका बिहार सीमा से बिलकुल सटा हुआ है। भाजपा कार्यालय से पुलिस थाना 400 मीटर की दूरी पर है।

गौरतलब है कि यहाँ पर नक्सली पहले भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। गत वर्ष यहाँ सरकारी भवन को विस्फोटक से उड़ाने से लेकर थाने पर हमले की घटनाएँ हो चुकी हैं। कुछ दिनों पहले बिहार में भी माओवादियों ने डाइनामाइट से भाजपा नेता का घर उड़ा दिया था, वहाँ से भी चुनाव बहिष्कार के पर्चे मिले थे।

श्री लंका में पाकिस्तानी ‘अहमदिया’ शरणार्थियों पर हमला, घर छोड़ने को हुए मजबूर

श्री लंका में ईस्टर पर दिल दहला देने वाले आत्मघाती हमले से प्रभावित नेगोंबो में तनाव चरम पर है। श्री लंका की राजधानी कोलंबो के उत्तर में स्थित नेगोंबो में रह रहे पाकिस्तानी शरणार्थियों पर स्थानीय लोगों ने अपना गुस्सा निकाला। बुधवार (25 अप्रैल) को बड़ी संख्या में शरणार्थी यहाँ से पलायन करते देखे गए।

ख़बर के अनुसार, किराए के मकानों में रह रहे लगभग 800 पाकिस्तानी पुरुषों, महिलाओं और बच्‍चों को उनके सिंहली, ईसाई और मुस्लिम मकान मालिकों ने फौरन घर छोड़कर निकल जाने को कहा है। इन्‍हें डर है कि शरणार्थियों के तार आतंकवादियों से जुड़े हो सकते हैं।

इस बीच, श्री लंकाई अधिकारियों ने ईस्टर पर हुए बम विस्फोटों से मरने वालों की संख्या 359 से घटाकर 253 बताई है। उन्होंने कहा कि सभी शवों का पोस्टमार्टम हो चुका है और डीएनए रिपोर्ट का मिलान करने पर पता चला कि कुछ शवों की गिनती दो बार हो गई थी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, “पीड़ितों में से कई बुरी तरह से विकृत हो गए थे जिससे उनकी दोहरी गिनती हो गई थी।”

अपने देश में सुन्नी समुदाय से उत्पीड़न का सामना करते हुए, अहमदिया सम्प्रदाय के शरणार्थी पाँच साल पहले पाकिस्तान से भागकर यहाँ आए थे। पाकिस्‍तान के अलावा अफ़गानिस्‍तान के इन शरणार्थियों को यहाँ संयुक्‍त राष्‍ट्र मानवाधिकार परिषद की मदद से बसाया गया है। ये यहाँ तब तक रहेंगे जब तक ऑस्‍ट्रेलिया या न्‍यूजीलैंड में इनके पुनर्वास की व्‍यवस्‍था न हो जाए।

बुधवार को, एक तरफ़ जहाँ सेंट सेबेस्टियन चर्च में बम धमाके के दौरान मारे गए 100 से अधिक पीड़ितों के परिजन सामूहिक अंतिम संस्कार कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ़ लोहे की सलाखों से लैस भीड़ ने उन घरों पर हमला करना शुरू कर दिया, जहाँ पाकिस्तानी शरणार्थी शहर के किनारे रह रहे थे। भीड़ उनके घरों में जबरन घुस गई, दरवाज़ो व खिड़कियों को तोड़ते हुए पुरुषों को ज़बरदस्ती बाहर खींच लिया।

श्री लंका के उपराष्ट्रपति हिलमी अहमद ने TOI को बताया कि, “हमें पता चला कि बुधवार को स्‍थानीय जनता और पाकिस्‍तानी शरणार्थियों के बीच झड़प हुई थी।” चूँकि इनके मकान मालिक हिंसा भड़काने में शामिल हैं इसलिए 400 से अधिक शरणार्थी परिवारों को किसी और जगह बसाया जाएगा। यंग मुस्लिम मेन असोसिएशन के अध्‍यक्ष नवाज दीन का कहना है, “करीब 60 लोगों ने नेगोंबो पुलिस स्‍टेशन में शरण ली है। अब संयुक्‍त राष्‍ट्र मानवाधिकार परिषद को फैसला करना है कि इनका क्‍या किया जाए। हमारे संगठन ने मदद की पेशकश की है।”

इस सप्ताह हुए सीरियल ब्लास्ट के पहले तक, श्री लंका में ईसाई-मुस्लिम के बीच हिंसा का अधिक इतिहास नहीं है। श्री लंका में लगभग 7% ईसाई, 10% मुस्लिम, 13% हिंदू और 70% बौद्ध रहते हैं।

ABVP ने 6000 LGBT मतदाताओं को जागरूक करने के लिए लखनऊ में चलाया अभियान

चुनाव प्रक्रिया में भाग लेना व मतदान करना प्रत्येक नागरिक का न केवल अधिकार है बल्कि कर्तव्य भी है। जनता को अपने अधिकारों को लेकर जागरूक करने के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने 19 अप्रैल को ‘नेशन फर्स्ट वोटिंग मस्ट’ कार्यक्रम आयोजित किया। इसके तहत परिषद के सदस्यों ने लोगों को अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया। इस अभियान का मुख्य मकसद थर्ड जेंडर के लोगों को वोटिंग के लिए जागरूक करना था।

खबर के अनुसार, लखनऊ में लगभग 6,000 ट्रांसजेंडर रहते हैं, लेकिन उनमें से केवल 150 के पास ही उनके वोटर आईडी कार्ड हैं। लखनऊ किन्नर सोसाइटी की अध्यक्ष पायल का कहना है कि सिस्टम उनके खिलाफ धांधली करता है, जिससे उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन होता है। वो अपने अधिकार से वंचित रह जाते हैं। थर्ड जेंडर को वोट देने का अधिकार तो प्राप्त है, मगर उनके लिए खुद को इस प्रक्रिया में शामिल करना काफी मुश्किल होता है, जिसकी वजह से वो वोट नहीं डाल पाते हैं और अपने अधिकार का उपयोग नहीं कर पाते हैं। इसके लिए पायल ने सरकार से अपील की है कि वोटर आईडी कार्ड बनवाने के तरीकों में बदलाव किया जाए, ताकि ट्रांसजेंडर्स आसानी से, बिना किसी परेशानी के अपने अधिकारों का उपयोग कर सकें।

हालाँकि सरकार ने ट्रांसजेंडर्स के वोट करने के अधिकार को सुरक्षित करने के लिए साल 2014 में ही एक सकारात्मक कदम उठाते हुए उनके द्वारा किए जाने वाले मतदान के लिए एक नई श्रेणी जोड़ी थी, मगर इसका भी कुछ खास लाभ नहीं दिख रहा है, क्योंकि ट्रांसजेंडर जब भी कभी अपना वोटर कार्ड बनवाने की कोशिश करते हैं तो उन्हें नगरपालिका द्वारा पहचान पत्र दिखाने के लिए कहा जाता है और इनमें से अधिकांश ट्रांसजेंडर ऐसे हैं, जिन्हें ना तो अपने जन्मस्थान के बारे में पता है और ना ही अपनी जन्मतिथि के बारे में। ऐसे में उनका वोटर कार्ड बनना काफी मुश्किल हो जाता है और यही कारण है कि लखनऊ जैसे शहर में 6000 ट्रांसजेडर्स में से सिर्फ 150 ट्रांसजेंडर्स के पास ही अपने वोटर आईडी कार्ड हैं।

श्री लंका आतंकी हमला: पुलिस ने जारी की संदिग्ध हमलावरों की तस्वीर, महिलाएँ भी शामिल

श्री लंका में हुए बम धमाके ने पूरे विश्व को झकझोर के रख दिया। इस हमले में शुरू में खबर आई थी कि 350 लोगों ने अपनी जान गंवाईं लेकिन ताजा समाचार के अनुसार 253 मृतकों की पहचान हुई है। कुछ लोगों ने इसे न्यूजीलैंड में हुए हमले का बदला बताया। हमले के बाद से ही वहाँ की सुरक्षा एजेंसियाँ हमलावरों की तलाश करने में जुटी हैं। हालाँकि इसकी जिम्मेदारी आतंकी संगठन आईएस ने ली है, लेकिन एजेंसियों को शक हैं कि इसमें वहाँ के स्थानीय संगठन एनटीजे (नेशनल तौहीद जमात) का भी हाथ शामिल हो सकता है। अभी तक वहाँ की पुलिस हमले की जाँच के दौरान 16 लोगों को गिरफ्तार भी कर चुकी है। कल (अप्रैल 25, 2019) को इसी सिलसिले में वहाँ की सीआईडी ने 6 संदिग्धों की तस्वीरें जारी की। इन 6 तस्वीरों में 3 महिलाएँ भी शामिल हैं।

श्री लंका की पुलिस ने इन 6 संदिग्धों को पकड़ने के लिए वहाँ की मीडिया से अपील की है कि वे उन्हें गिरफ्तार करवाने में उनकी मदद करें। साथ ही जनता से भी कहा गया है कि यदि कोई भी जानकारी इन संदिग्धों से जुड़ी उन्हें प्राप्त होती है, तो वे इस बात की जानकारी अवश्य सीआईडी को दें।

पुलिस ने संदिग्धों की सूची में शामिल तीन पुरुषों के नाम की पहचान मोहम्मद इवुहीम सादिक अब्दुल हक, मोहम्मद इवाहिम शैद अब्दुल हक, मोहम्मद कासिम मोहम्मद रिलवान के रूप में की है। वहीं संलिप्तता के संदेह में तीन महिलाओं को फातिमा लतीफ, पुलस्तनी राजेंद्रन उर्फ सारा, अब्दुल कादेर फातिमा कादिर के रूप में पहचाना गया है।

सीआईडी हमले में जारी की गई संदिग्धों की तस्वीर (साभार: स्वराज)

गौरतलब है कि हिरू न्यूज़ ने एक वरिष्ठ CID अधिकारी के हवाले से बताया है कि अब्दुल कादर फातिमा क़ादिया, तौहीद जमात के नेता ज़हरान हाशिम की पत्नी थीं। यह ज़ाहरान हाशिम उन दो संदिग्धों में से एक है, जिसने शांगरी-ला होटल में आत्मघाती बम विस्फोट किया था। वहीं पुलस्थिनी राजेंद्रन उर्फ सारा को काटुवापियतिया सेंट सेबेस्टियन चर्च पर आत्मघाती हमला करने वाले की पत्नी माना जा रहा है।

‘डोम राजा’ भी होंगे प्रस्तावकों में सम्मिलित, PM नरेंद्र मोदी आज बनारस से भरेंगे नामांकन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (अप्रैल 26, 2019) को लोकसभा चुनाव के प्रत्याशी के रूप में वाराणसी से अपना नामांकन दाखिल करेंगे। यहाँ उनके प्रस्तावकों में एक अनोखा नाम भी है। मोदी के प्रस्तावकों में दाह संस्कार करने वालों के प्रमुख ‘डोमराजा’ जगदीश चौधरी भी शामिल होंगे। इससे पहले 2014 में महामना मालवीय जी के पोते गिरिधर मालवीय और प्रख्यात संगीतकार छन्नूलाल मिश्र मोदी के प्रस्तावक रह चुके हैं।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक जगदीश का मानना है कि मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने निर्धन और पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए कार्य किया है। जगदीश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावकों में से एक महत्वपूर्ण स्थानीय व्यक्ति होंगे।

मणिकर्णिका घाट पर स्थित अपने निवास स्थान पर ET को दिए साक्षात्कार में जगदीश कहते हैं कि जिस तरह नरेंद्र मोदी ने कार्य किया है उसे देखते हुए उनके आसपास कोई नहीं हैं। उदाहरण के लिए उन्होंने वाराणसी का जिक्र करते हुए कहा कि घाटों की दिन और रात में सफाई की जा रही है।

साल 2017 में ईटी को दिए एक साक्षात्कार में जगदीश ने मोदी और सपा अध्यक्ष अखिलेख यादव दोनों की जमकर तारीफ़ की थी, लेकिन चुनावों के वक्त वह मोदी का साथ देते नजर आ रहे हैं।

जगदीश का कहना है, “जो कार्य कर रहा है उसी का तो गुणगान करेंगे ना। मोदी के कार्यकाल में देश में बहुत सुधार हुआ है और निर्धन तबके को कई लाभ मिले हैं।”

बता दें जगदीश चौधरी का परिवार कई कई पीढ़ियों से मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार कर रहा है। उन्हें वहाँ का ‘डोम राजा’ भी कहा जाता है। इसके साथ ही उनका परिवार कई गायों को भी पालता है। 2019 के लोकसभा चुनावों को लेकर जगदीश का कहना है कि वाराणसी में मोदी का कोई मुकाबला नहीं है,और मोदी रिकॉर्ड मार्जिन से जीत हासिल करेंगे।

डोम राजा के अनुसार, “मोदी का जादू पूरे शहर में है और उनके खिलाफ किसी उम्मीदवार के लिए संभावना न के बराबर है।” उनका कहना है कि अगर मोदी के ख़िलाफ़ प्रियंका गाँधी चुनावों में उतरती तो प्रियंका के जीतने की संभावना बिलकुल भी नहीं थी। क्योंकि वह एक चेहरा हो सकती हैं लेकिन वाराणसी में मोदी के ख़िलाफ़ लड़ना उनके सामने एक बहुत मुश्किल कार्य होता।

तजिंदर बग्गा और नव-कॉन्ग्रेसी उदित राज में ट्विटर पर तीखी झड़प, याद दिलाए पुराने दिन

कहते हैं समुदाय विशेष में नए-नए पहुँचे लोग अपनी निष्ठा साबित करने के लिए प्याज का अत्यधिक ही सेवन करने लगते हैं। कुछ ऐसा ही मंजर आज ट्विटर पर देखने को मिला जब दलितों के स्वघोषित सर्वश्रेष्ठ नेता डॉ. उदित राज ने भाजपा को बुरा भला कहना शुरू कर दिया। उदित राज अभी-अभी भाजपा छोड़कर (घोषित रूप से, टिकट न मिलने की नाराजगी के कारण) कॉन्ग्रेस में शामिल हुए हैं, और इसलिए जाहिर तौर पर उनके लिए जरूरी था कि वे कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के प्रति ‘स्वामिभक्ति’ साबित करें- जो कि कॉन्ग्रेस के सुप्रीमो कल्चर का हिस्सा है।

मोदी और भाजपा को, जिनके साथ वह खाली एक हफ्ते पहले तक इस हद तक खड़े थे कि नाम में भी चौकीदार लगा लिया था, गरियाने में राहुल गाँधी के प्रति स्वामिभक्ति दिखाने के साथ-साथ उदित राज ने खुद को भी अवसरवादी नहीं बल्कि बलिदानी और कमजोरों का मसीहा दिखाने की कोशिश की। पर उद्यमी और दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने उनकी कोशिश पर तीखा तंज कस दिया।

तिलमिलाए उदित राज ने उन्हें छोटा मुँह बड़ी बात कहने वाला कहने के साथ यह जताने की भी कोशिश की कि जब भाजपा में बग्गा की कोई सुनवाई नहीं थी, तब उदित राज ने उन्हें ‘सहारा’ दिया था। यानि फिर से खुद को बग्गा की ‘गद्दारी’ का पीड़ित दिखाने की कोशिश। (जोकि अपने आप में हास्यास्पद है, यह देखते हुए कि खुद उदित राज ने एक टिकट कटते ही भाजपा को गच्चा दे दिया)

बग्गा भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने भी उदित राज को कुछ पुराने दिन याद दिला दिए…

सोशल मीडिया ने लेने शुरू किए मजे

इस बीच सोशल मीडिया यूजर्स ने भी डॉ. उदित राज के मजे लेने शुरू कर दिए।

एक ने लिखा:

इसी बीच किसी ने उनके ही पुराने tweet उठा कर स्क्रीनशॉट चिपकाने शुरू कर दिए, जिनमें उदित राज ने कॉन्ग्रेस की घनघोर आलोचना की थी।

वाराणसी से PM मोदी के ख़िलाफ़ प्रियंका गाँधी को मैदान में ना उतारने पर ‘न्यूट्रल’ मीडिया ने बदला पाला

28 मार्च को कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रियंका गाँधी से रायबरेली से चुनाव लड़ने के संबंध में सवाल पूछा था, जो कि उनकी माँ का गढ़ है। उस समय, प्रियंका गाँधी वाड्रा ने जवाब दिया था – ‘वाराणसी क्यों नहीं’? लगभग एक महीने के अंतराल के बाद, कॉन्ग्रेस ने वाराणसी से अजय राय को प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ मैदान में उतारने का फ़ैसला किया है और इस फ़ैसले पर ‘न्यूट्रल’ मीडिया अपनी नाराज़गी को नहीं रोक पा रहा है।

कॉन्ग्रेस द्वारा अजय राय की उम्मीदवारी घोषित होने से पता चलता है कि कॉन्ग्रेसी खेमे में उम्मीदवारों की कितनी किल्लत है। प्रियंका गाँधी, जिन्होंने कभी महिलाओं का उद्धार करने का बीड़ा उठाया था, असल में वो चुनावी मैदान से दूरी बनाती दिख रही हैं। क्षेत्र की महिलाओं के विकास करने का मुद्दा उठाने वाली प्रियंका का मोदी के ख़िलाफ़ न खड़ा होना इस बात का संकेत है कि कॉन्ग्रेस अपनी स्वांगरुपी राजनीति का प्रमाण देने में ख़ुद ही सक्षम है।   

बरखा दत्त जो अक्सर बुरहान वानी जैसे आतंकवादियों के साथ सहानुभूति रखती हैं और कश्मीरी पंडित नरसंहार के बहाने नाजी जैसी कहानी कहती हैं। उन्होंने ट्वीट किया कि अगर कॉन्ग्रेस उन्हें मैदान में उतारने के पक्ष में नहीं थी तो प्रियंका को वाराणसी से लड़ने की इच्छा नहीं जतानी चाहिए थी। हम प्रियंका के दर्द को समझते हैं, आख़िरकार, एक बार आशा बन जाने के बाद जब वो टूट जाती है तो वाकई दिल को चोट पहुँचती है।

अभिसार शर्मा, जो कॉन्ग्रेस के वफ़ादार पत्रकारों में से एक थे, उन्होंने भी अपना ग़ुस्सा कॉन्ग्रेस पार्टी पर उतारा। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “डरपोक.. क्या भस्मासुरी पार्टी है! कोई विज़न नहीं है। कोई साहस नहीं।
राहुल के पास न तो कोई अधिकार ही है और न ही क्षेत्रीय तानाशाह उनकी बात सुनते हैं।

हरिंदर बावेजा ने प्रियंका गाँधी पर तीखा प्रहार करते हुए लिखा कि यह उन लोगों की मूर्खता थी जो मानते थे कि @priyankagandhi वाराणसी में @narendramodi के ख़िलाफ़ लड़ेंगी।

बरखा दत्त ने जवाब दिया कि कॉन्ग्रेस ने जो वादा किया था, वो यही था।

पल्लवी घोष ने @priyankagandhi और @RahulGandhi के केट में सस्पेंस पर सवाल उठाए।

इस सब के बाद, निखिल वागले ने ट्वीट किया कि @RahulGandhi को महान सेनानियों के जीवन की कहानियों का अध्ययन करना चाहिए। खेल, कला, संगीत, राजनीति, उद्योग…. तब उन्हें एहसास होगा कि कैसे सभी ने एक सही समय पर जोख़िम उठाया और बहुत से सलाहकारों की बात नहीं मानी। इसके लिए वो मोदी से भी सीख सकते हैं!

कॉन्ग्रेस के इस फ़ैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बचाव करने के मूड में रिफ़त जावेद ने प्रियंका गाँधी को बहादुरी के तमगे से नवाज़ने का काम किया।

शिवम विज ने गाँधी से बेहतर केजरीवाल को बताया।

संकर्षण ठाकुर ने मूल रूप से कॉन्ग्रेस भी मोदी के ख़िलाफ़ एक प्रतीकात्मक लड़ाई नहीं करना चाहती है; वाराणसी में अजय राय की तुलना में उनसे अधिक थका हुआ और परखा हुआ कोई दूसरा नहीं है।

सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर राजदीप सरदेसाई भी अपनी राय रखने से नहीं चूके। उन्होंने ट्वीट किया कि आख़िरकार @priyankagandhi के वाराणसी से चुनाव न लड़ने की तस्वीर साफ़ हो ही गई।

अब यह तस्वीर साफ़ हो चली है कि कॉन्ग्रेस के हिमायती रही वफ़ादार मीडिया ने किस तरह से प्रियंका गाँधी वाड्रा को एक हमदर्द और रक्षक के रूप में प्रचारित-प्रसारित करने का काम किया था। उन्हें उम्मीद थी कि प्रियंका गाँधी वाड्रा उनकी रक्षक होंगी। और इसीलिए उन्होंने भाई-बहन (राहुल-प्रियंका) की जोड़ी को मसीहा के रूप में प्रचारित करने की पूरी कोशिश की, लेकिन उन्हें यह एहसास हो चला है कि वो अब तक किसी हारने वाले घोड़े पर ही दाँव लगाते रहे।

नुपुर शर्मा के मूल अंग्रेजी लेख का अनुवाद प्रीति कमल ने किया है।