कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के द्वारा अदालत में शपथ-पत्र दायर कर गलत बयान स्वीकार करने के बावजूद एक पत्रकार ट्विटर पर इस मसले के बारे में झूठ फैलाता पकड़ा गया। अपने ट्वीट में पत्रकार ने यह दावा किया कि 22 पन्नों के राहुल गाँधी के शपथ-पत्र में उसे एक भी बार क्षमा (apology) या खेद (regret) नहीं मिले। जवाब में लोगों ने राहुल गाँधी के शपथ-पत्र के प्रासंगिक अंशों के सीएनएन-न्यूज़ 18 के वॉटरमार्क वाले स्क्रीनशॉट पोस्ट करने शुरू कर दिए जिनमें खेद का उपयोग रेखांकित किया हुआ था।
In the 22 pages counter affidavit filed by Rahul Gandhi in SC, he has “denied” the allegations and has said statement against PM does not amount to ‘contempt of court’. Couldn’t find any “regret or apology” in it ?
पत्रकार अरविन्द गुणशेखर ने यह ट्वीट द वायर से जुड़ीं पत्रकार रोहिणी सिंह के ट्वीट के उत्तर में किया था। सिंह ने ट्वीट कर अदालत कवर करने वाले पत्रकारों से पूछा था कि क्या राहुल गाँधी ने अपने उस दावे के लिए माफ़ी माँगी है या नहीं, जिसमें उन्होंने कहा था कि उच्चतम न्यायलय ने उनके ‘चौकीदार चोर है’ नारे का समर्थन किया था।
उनके दावे से क्षुब्ध भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने न्यायालय की आपराधिक अवमानना का मुकदमा उन पर कर दिया था। राहुल गाँधी का उपरोक्त हलफ़नामा उसी सन्दर्भ में मीनाक्षी लेखी के आरोपों का जवाब देने के लिए था।
सिंह के ट्वीट के जवाब में गुणशेखर ने लिखा कि उन्हें कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के हलफ़नामे में खेद का कोई उल्लेख नहीं मिला। उनके इस ट्वीट के जवाब में लोगों ने स्क्रीनशॉट दे-देकर उन्हें खेद का उल्लेख दिखाना शुरू कर दिया।
अरविन्द गुणशेखर के इस ट्वीट पर दक्षिणपंथी स्तंभकार और रक्षा मामलों के जानकार अभिजित अय्यर-मित्रा ने भी चुटकी लेते हुए ट्वीट किया:
The perils of a JNU education. … sigh!!! They can’t even teach English, how’re they going to teach international relations, or anything else pic.twitter.com/IwZAAyHOBN
लोकसभा चुनावों में नेताओं के बिगड़ते बोलों में समाजवादी पार्टी सबको पछाड़ कर आगे भाग रही है। पहले उसके कद्दावर नेता आजम खान ने जयाप्रदा पर अभद्र टिप्पणी की, अब उनके बेटे अब्दुल्ला आजम ने जयाप्रदा को ‘अनारकली’ कहा है। अनारकली मुगल बादशाह अकबर के दरबार में तवायफ थी।
‘अली हमारे, बजरंगबली भी चाहिए, पर अनारकली नहीं’
रामपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अब्दुल्ला ने कहा, ‘अली भी हमारे, बजरंगबली भी हमारे। हमें अली भी चाहिए, बजरंगबली भी चाहिए लेकिन अनारकली नहीं चाहिए।’ माना जा रहा है कि यह तंज जयाप्रदा के अभिनेत्री के तौर पर कैरियर को लेकर था, जिसकी अब्दुल्ला ने तवायफ होने के साथ तुलना कर दी है।
SP leader Abdullah Azam Khan (son of SP leader Azam Khan) in Rampur: Ali bhi humare, bajrangbali bhi humare. Humein Ali bhi chahiye, bajrangbali bhi chahiye lekin Anarkali nahi chahiye. (21.4.19) pic.twitter.com/geozRjwAej
रामपुर से ही भाजपा के टिकट पर आजम खान को चुनौती दे रहीं जयाप्रदा ने इस टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा, “तय नहीं कर पा रही हूँ कि रोऊँ या हँसूँ, जैसा पिता वैसा पुत्र। अब्दुल्ला से यह उम्मीद नहीं थी। वह पढ़े-लिखे हैं। आपके पिता मुझे आम्रपाली कहते हैं, आप मुझे अनारकली कहते हैं; क्या यही समाज की औरतों को देखने का आपका नजरिया है?”
Jaya Prada on remarks by Abdullah (SP leader Azam Khan’s son): Can’t decide whether to laugh or cry, like father like son. Hadn’t expected this from Abdullah. He’s an educated man. Your father says ‘I’m Amrapali’ & you say ‘I’m Anarkali,’ Is that how you see women of society? pic.twitter.com/SgFEVlpuq9
गौरतलब है कि लगभग तीन साल पहले अमर सिंह ने जब शिकायत की थी कि उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उन्हें मिलने का समय नहीं देते, तो अखिलेश के बचाव में आए आजम खान ने अमर सिंह को ‘आम्रपाली का नाच देखने’ की सलाह दी थी। उस समय भी उनका इशारा जयाप्रदा की ओर ही माना गया था।
श्रीलंका में ईस्टर के अवसर पर हुए सिलसिलेवार धमाकों के बाद सोमवार (अप्रैल 22, 2019) रात से इमरजेंसी लग जाएगी। राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने देशव्यापी आपातकाल की घोषणा कर दी है। इस बीच, श्री लंका सरकार ने ईस्टर संडे के दिन लगातार 8 बम विस्फोटों के पीछे नेशनल तौहीत जमात (NTJ) नामक आतंकी संगठन को सीरियल ब्लास्ट का जिम्मेदार बताया है। श्री लंका सरकार ने बताया कि 7 फिदायिन हमलावरों ने इस सीरियल ब्लास्ट को अंजाम दिया।
JUST IN: Sri Lankan president to declare nationwide emergency from midnight on Monday following Easter Day blasts pic.twitter.com/WCjrzjt9sQ
इस बीच आई मीडिया खबरों के अनुसार NTJ (नेशनल तौहीद जमात) अहम गिरजाघरों पर फिदायीन हमले करने की साजिश रचने की जानकारी मिली थी। NTJ श्री लंका का कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन है।
सीरियल बम धमाकों में अब तक 5 भारतीय समेत 290 से अधिक लोगों की जान चली गई है और 500 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। श्री लंका की पुलिस ने इस मामले में अब तक 24 संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया है। श्री लंका के पुलिस प्रमुख ने रविवार को बताया था कि 10 दिन पहले ही से ही यहाँ पर किसी बड़े फिदायीन हमले की तैयारी चल रही है। ये आतंकी संगठन देश के प्रमुख चर्चों, भारतीय उच्चायुक्त को निशाना बना सकता है। श्री लंका के पुलिस प्रमुख पुजुथ जयसुंदर ने 11 अप्रैल को देश के आला पुलिस अधिकारियों को इनपुट भेजा था जिसमें हमले के प्रति आगाह करने की बात कही गई थी।
मोतिहारी लोकसभा सीट से इस बार मुक़ाबला काफ़ी दिलचस्प होने वाला है। यहाँ से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर भाजपा एवं आरएसएस संगठन में लम्बे समय से सक्रिय अनुभवी राधामोहन के सामने इस बार युवा आकाश सिंह चुनौती पेश कर रहे हैं। आकाश पूर्व केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री अखिलेश प्रसाद सिंह के पुत्र हैं। एक तरह से देखा जाए तो यह मुक़ाबला दो ऐसे दिग्गजों के बीच है जिनमें से एक वर्तमान में केंद्रीय मंत्री हैं तो एक केंद्रीय राज्यमंत्री रह चुके हैं। इसे संयोग कहें या कुछ और लेकिन दोनों ही नेताओं के पास कृषि मंत्रालय की ही ज़िम्मेदारी थी या है। दोनों ही नेता अपनी-अपनी पार्टी के संगठन में अहम पद संभाल चुके हैं। जहाँ राधामोहन बिहार भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं तो वहीं अखिलेश राज्य में कॉन्ग्रेस प्रचार समिति के अध्यक्ष हैं।
मोदी के गीत ‘सौगंध मुझे…’ को राधामोहन क्षेत्र में भुना रहे हैं
राधामोहन सिंह ने हाल ही में 9वीं बार मोतिहारी लोकसभा सीट से नामांकन दाखिल किया। पुराने परिसीमन में इस सीट को पूर्वी चम्पारण के नाम से जाना जाता था। 9 बार में से उन्हें 5 बार जीत मिली है। वे 1989, 1996, 1999, 2009 और 2014 के चुनावों में जीत चुके हैं। जब राधामोहन सिंह नामांकन दाखिल करने निकले थे, तब उनके साथ गाड़ी में शिवहर सांसद रमा देवी भी थीं। दोनों ने साथ में ही नामांकन दाखिल किया। मज़े की बात तो यह कि 1998 में इन्हीं रमा देवी ने राजद के टिकट पर लड़ते हुए राधामोहन सिंह को मात दी थी। चम्पारण की राजनीति ऐसी है कि 2015 में पूरे बिहार में जदयू-राजद का कब्ज़ा हुआ तब भी यहाँ से भगवा ही लहराया। फलस्वरूप वर्तमान भाजपा-जदयू गठबंधन सरकार में ज़िले को 2 मंत्री मिले।
अशोक गहलोत, कमलनाथ और अहमद पटेल जैसे दिग्गज कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ आकाश सिंह
ताज़ा समीकरण से पहले जरा इतिहास की बात कर लेते हैं। अनुभवी राधामोहन सिंह के सामने आकाश सिंह हैं जो इस क्षेत्र के लिए तो नए नहीं हैं लेकिन उनके लिए ये क्षेत्र नया ज़रूर है। आकाश सिंह पहले यहाँ सक्रिय नहीं रहे हैं। कहा जाता है कि राधामोहन और आकाश के पिता अखिलेश में ईगो का टकराव चलता है। लालू यादव के विश्वस्त सिपाहसलारों में से एक माने जाने वाले अखिलेश ने जब राजद छोड़ी थी, तब उन्हें भाजपा में शामिल होने का ऑफर दिया गया था लेकिन राधामोहन के साथ ईगो क्लैश के कारण उन्होंने कॉन्ग्रेस की डूबती नैया को पार लगाने की ज़िम्मेदारी ली। मज़े की बात तो यह कि अखिलेश ख़ुद कॉन्ग्रेस में अहम पद संभाल रहे हैं और राज्यसभा सांसद भी हैं लेकिन उनके बेटे रालोसपा से चुनाव लड़ रहे हैं।
इसके पीछे भी गणित है। जदयू नेता नागमणि की माने तो पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की छवि अब एक ‘टिकट बेचवा’ की हो गई है। उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा हाल तक केंद्र में सत्ता की भागीदार थी लेकिन चुनाव से पहले कुशवाहा ने राजग छोड़कर बिहार महागठगबंधन का दामन थाम लिया। नागमणि कहते हैं कि प्रदीप मिश्रा से पार्टी मद में 15 करोड़ रुपए ख़र्च कराने के बावजूद उन्हें टिकट नहीं दिया गया। इसके बाद माधव आनंद ने पार्टी मद में 9 करोड़ रुपए दिए लेकिन उन्हें भी टिकट से नदारद रखा गया। प्रदीप मिश्रा ने ख़ुद इस बात को स्वीकार किया कि उनसे रुपए ले लिए गए लेकिन टिकट नहीं दिया गया। पार्टी के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष नागमणि और पूर्व महासचिव प्रदीप, दोनों ही रालोसपा छोड़ चुके हैं। सीतामढ़ी से रालोसपा के टिकट पर सांसद बने रामकुमार शर्मा ने भी उपेंद्र कुशवाहा पर मोतिहारी की टिकट बेचने का आरोप मढ़ा है।
चीनी मिल के मुद्दे पर झेंप गए राधामोहन, नहीं दिया कोई जवाब
जहाँ बिहार में जात-पात की राजनीति सर चढ़कर बोलती है। मोतिहारी में अखिलेश सिंह का भूमिहार जाति के बीच अच्छा प्रभाव माना जाता है लेकिन 2014 मोदी फैक्टर के कारण जातीय समीकरण के बहुत हद तक टूट जाने से इस बार सवर्ण मत विभाजित नज़र आ रहा है। क्षेत्र के एक और स्थानीय युवा अनिकेत पांडेय भी निर्दलीय ताल ठोक रहे हैं और मेहनती छवि व कृषक परिवार से होने के कारण उनके पक्ष में भी युवाओं की एक विशेष लामबंदी दिख रही है। जहाँ अनिकेत अपनी स्थानीय किसान वाली छवि के साथ चुनाव लड़ रहे हैं वहीं आकाश 2004-09 के बीच अपने पिता द्वारा किए गए कार्यों को लेकर मैदान में उतरे हैं। लेकिन, मोतिहारी चुनाव का मुख्य मुद्दा कुछ और ही है।
चीनी मिल है मोतिहारी का प्रमुख मुद्दा
मोतिहारी में प्रमुख चुनावी मुद्दा है- चीनी मिल। कभी गन्ना उत्पादन का हब रहा क्षेत्र आज एक अदद चीनी मिल को तरस रहा है। 2 साल हुए जब अप्रैल 2017 में दो किसानों ने ख़ुद को जलाकर आत्महत्या कर ली थी। चीनी मिल चालू कराने व बकाए के भुगतान को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री के क्षेत्र में इस तरह की घटना से क्षेत्र में रोष पैदा हुआ। 2014 चुनाव के दौरान हुई एक रैली में नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जब वो अगली बार यहाँ आएँगे तो चीनी मिल में बनी चीनी की चाय पिएँगे लेकिन अभी तक इस मामले में कोई प्रोग्रेस नहीं हुआ है। जब पत्रकारों ने कृषि मंत्री से इस बाबत सवाल किया तो वह झेंप गए। अब भाजपा के लिए ये मुद्दा उसकी किरकिरी कारण बनता जा रहा है लेकिन अनुभवी राधामोहन ने बड़ी चालाकी से राष्ट्रीय मुद्दों को उछाल दिया है।
जून 2017 में मृत किसानों की विधवाओं सहित कई अन्य कृषकों ने भी जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था। लेकिन, मोतिहारी में लम्बे समय से सक्रिय राधामोहन सिंह को क्षेत्र की ख़ूबी-ख़ामियों का बख़ूबी पता है क्योंकि वो छात्र जीवन से ही संघ और बाद में जनसंघ का झंडा उठाकर चलते रहे हैं। भाजपा की तरफ़ से 1989 में पहली बार जीतने वाले राधामोहन सिंह ने नरेंद्र मोदी के गीत ‘मैं देश नहीं झुकने दूँगा’ को अपने प्रचार अभियान का थीम बना दिया है क्योंकि उन्हें भरोसा है कि जनता मोदी के चेहरे के कारण उन्हें वोट करेगी। राधामोहन सिंह साइलेंट प्रचार अभियान के लिए जाने जाते हैं लेकिन उनके केंद्रीय मंत्री होने के कारण क्षेत्र को ज़्यादा की अपेक्षा थी। ऊपर से 19 वर्षों का कार्यकाल होने के कारण Anti-Incumbency तो है लेकिन अभी भी अनुभव भारी पड़ रहा है।
क्या है स्थानीय युवाओं की राय
शहर के पुराने राजनीतिक खानदान से आने वाले युवा रॉय राघव शर्मा कहते हैं कि इस चुनाव में प्रत्येक दलों व उनके समर्थकों द्वारा खुलेआम ख़र्च किया जा रहा है, ऐसा प्रतीत होता है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि पुराना अनुभव और विपक्ष में मज़बूत प्रत्याशी न होने के कारण राधामोहन सिंह की जीत मतगणना के दिन 12 बजे तक ही सुनिश्चित हो जाएगी। राघव का परिवार पुराने समय से ही जनसंघ से जुड़ा रहा है लेकिन मेडिकल की पढ़ाई कर रहे जागरूक राघव अभी ख़ासकर वोट करने के लिए महाराष्ट्र से बिहार आए हैं। वहीं ख़ुद को निष्पक्ष बताते हुए एक अन्य युवा प्रणय राज कहते हैं कि चूँकि राधामोहन सिंह ने कुछ ख़ास कार्य नहीं किया है, इसीलिए उन्हें वोट नहीं करेंगे। विकल्प क्या है, पूछने पर राजनीतिक विश्लेषक प्रणय कहते हैं कि वे निर्दलीय अनिकेत को ही वोट कर देंगे।
2015 विधानसभा चुनावों में कोलकाता से बिहार पहुँचकर वोट करने वाले स्थानीय युवा आनंद कुमार कहते हैं कि पार्टी और प्रधानमंत्री के नाम पर क्षेत्र में राधामोहन ही एक विकल्प है। हालाँकि वामपंथियों के ख़िलाफ़ क्षेत्र और सोशल मीडिया में मुखर रहे आनंद मेहनती अनिकेत के प्रति भी सहानुभूति जताते हैं लेकिन उन्हें जिताऊ नहीं मानते। वहीं एक अन्य युवा शुभम ठाकुर अखिलेश के प्रशंसक हैं और आकाश को जिताऊ उम्मीदवार मानते हैं लेकिन राधामोहन सिंह के बारे में पूछने पर कहते हैं की टक्कर बराबरी का है। स्थानीय युवाओं की राय देखें तो कुछ जाति के कारण आकाश के पक्ष में लामबंद हैं, कुछ स्थानीय उम्मीदवार होने के कारण अनिकेत की तरफ़ हैं लेकिन युवाओं की भारी तादाद अभी भी भाजपा और मोदी को लेकर आश्वस्त है।
क्या कहता है पिछ्ला समीकरण?
अगर पिछले समीकरणों की बात करें तो राधामोहन सिंह को 4 लाख के क़रीब मत प्राप्त हुए थे। उनके प्रतिद्वंदी विनोद कुमार श्रीवास्तव को 2 लाख के क़रीब मत मिले थे और तीसरे नंबर पर रहे स्थानीय दिग्गज अवनीश कुमार सिंह को सवा 1 लाख मत प्राप्त हुए थे। अगर दूसरे और तीसरे नंबर पर रहे प्रत्याशियों के मत मिला भी दें तो राधामोहन सिंह 75,000 के लगभग वोटों से भारी पड़ते हैं। हाल ही में राजद से टिकट न मिलने पर विनोद श्रीवास्तव रो पड़े थे। 2009 में उन्होंने अखिलेश सिंह को हराया था। अब राधामोहन ज़ोर-शोर से हैट्रिक की तैयारी में लगे हैं लेकिन उनके सामने चुनौती पेश कर रहे युवा उम्मीदवार भी दमदार हैं। नामांकन के दिन राधामोहन जब युवा आकाश से टकरा गए तो उन्होंने आकाश को आशीर्वाद भी दिया था। आकाश ने फेसबुक के माध्यम से बताया कि उन्हें ‘राधामोहन चाचा’ की तरफ से विजयी भव का आशीर्वाद मिला है।
कहा जा रहा है कि विनोद कुमार श्रीवास्तव का टिकट कटने और उनका रोते हुए वीडियो वायरल होने से कायस्थ समाज भी राजद ने नाराज़ चल रहा है और उनका वोट श्याद ही महागठबंधन को जाए। लालू यादव के जेल में होने से यादव मतदाता राजद के लिए कितना लामबंद है, इस पर भी बहुत कुछ निर्भर करता है। भाजपा ने भूमिहारों को विधान परिषद व अन्य पद देने का वादा कर इस जाति को साधने की कोशिश की है। सीपी ठाकुर को आनन-फानन में दिल्ली बुलाकर मनाया गया है। महाचंद्र प्रसाद सिंह को बीच चुनाव में भाजपा में शामिल किया गया। सवाल यह है कि मोतिहारी में अगर मोदी या नीतीश की रैली होती है, उसके बाद क्या माहौल बनता है? हाल ही में वहाँ पहुँचे मनोज तिवारी भी राधामोहन के लिए प्रचार में दिखे थे।
चुनाव प्रचार में विवादित बयानों का सिलसिला लगातार जारी है। इस कड़ी में अब एक और नाम जुड़ गया है। दरअसल, राजद के वरिष्ठ नेता और दरभंगा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे अब्दुल बारी सिद्दीकी ने रविवार (अप्रैल 21, 2019) को एक विवादित बयान देते हुए वंदे मातरम बोलने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें भारत माता की जय बोलने से कोई परहेज नहीं है, मगर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम गाना उनकी आस्था के खिलाफ है। सिद्दीकी ने कहा, ‘‘जो एकेश्वर में विश्वास रखता है वह कभी भी वंदे मातरम नहीं गाएगा।”
इसके साथ ही सिद्दीकी ने महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को पहला आतंकवादी करार दे दिया। सिद्दीकी यहीं नहीं रुके, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देते हुए कहा कि भाजपा में हिम्मत है तो वो गोडसे मुर्दाबाद का नारा लगाकर दिखाएँ। उन्होंने कहा कि क्या मोदी सार्वजनिक रूप से गोडसे की निंदा करेंगे?
सिद्दीकी के इस बयान से बिहार की राजनीति गरमा गई है। भाजपा ने इस बयान की निंदा करते हुए उन्हें बिहार का आजम खान बता दिया। सिद्दीकी के इस बयान पर बिहार के उप मुख्यमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राजद के लोग भारत के टुकड़े-टुकड़े करने की मंशा रखने वालों के साथ हैं, इसलिए उन्हें वंदे मातरम बोलने में परेशानी है।
वहीं, भाजपा के प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा कि सिद्दीकी को पहले ‘कठमुल्लावाद मुर्दाबाद‘ का नारा लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के विरोधी सिद्दीकी को दरभंगा की जनता सबक सिखाएगी। इसके साथ ही जनता दल यूनाइटेड ने भी इस बयान की निंदा करते हुए कहा कि उन पर ओवैसी या तेजस्वी का असर हुआ है।
कॉन्ग्रेस ने सिद्दीकी के बयान से किनारा कर लिया है। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता प्रेमचंद मिश्रा ने कहा कि महागठबंधन के नेताओं को ऐसे विवादित बयानों से बचना चाहिए, क्योंकि इसका असर चुनावों पर पड़ता है। गौरतलब है कि दरभंगा में मुख्य मुकाबला राजद के उम्मीदवार अब्दुल बारी सिद्दीकी और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार गोपाल जी ठाकुर के बीच है।
लंबे समय से कॉन्ग्रेस इस ताक में है कि कब और कैसे पीएम मोदी पर निशाना साधा जाए और उनकी छवि को धूमिल किया जाए। ऐसी ही कोशिश में कॉन्ग्रेस आईटी-सेल के सदस्य गौरव पांधी ने ट्विटर पर प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के कुछ हिस्सों के साथ एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो को संपादित कर लूप के ज़रिए एक ‘अपमानजनक’ शब्द को बार-बार सुनाया गया। इस वीडियो पर यूजर्स ने अपनी आपत्ति दर्ज कर यह दावा किया कि पीएम मोदी के शब्दों को ग़लत रूप से प्रचारित किया जा रहा है। साथ ही उनके (पीएम) गुजराती भाषा में बोले गए शब्दों को सही रूप में भी अवगत कराया।
What kind of language is this Mr. PM? Does it beholds the Prime Minister of the country to use profanity and that too publicly? Shocking beyond belief !! Have some respect for the chair, if nothing else. ? pic.twitter.com/tVrHVbSlek
— Gaurav Pandhi गौरव पांधी (@GauravPandhi) April 21, 2019
इस वीडियो क्लिप में, पीएम मोदी ने गुजराती में कहा, “लोको इम के छे भाव्या मा लदाईयो पानि थावैं छे। आल्हा भाई बुरा कहो पानि न लाडई थावैं छे से पाछि अइयार अउ पनि पेहला पेल केम ना बँधइये?” (लोग कह रहे हैं कि आने वाले समय में दुनिया पानी के लिए लड़ेगी। अगर लोग भविष्य में पानी को लेकर लड़ने वाले हैं, तो इस तरह का संकट आने से पहले हम एक बाँध का निर्माण क्यों नहीं कर लें?”
भाग “थवैन छे” जिसका अर्थ है “होगा (या जगह लेंगे)” यदि लूप पर रखा जाता है तो एक वो एक अपमानजनक शब्द (गाली) की तरह लगेगा। गौरव पांधी को शब्दों के लूप से खेलना बहुत पसंद है, इससे उनकी जो छवि उभर कर सामने आ रही है वो ‘पिद्दी’ की है।
पांधी को कई लोगों ने लताड़ लगाते हुए उसके द्वारा भ्रम फैलाने वाले शब्दों के सही अर्थ से अवगत कराया, इसमें ‘द क्विंट’ भी शामिल था, जिसके द्वारा पीएम मोदी के भाषण को लाइव-स्ट्रीम किया गया था, जिसका कुछ हिस्सा पांधी ने संपादित कर देश के प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व को मैला करने की कुटिल चाल चली।
This has been photoshopped and re- edited to misrepresent. We have reported it. Here’s the link to our original video:https://t.co/t09XnooFhj
सोशल मीडिया पर यूज़र्स ने पीएम मोदी के शब्दों के सही रूप को बताया, जिससे देश की जनता अपने मन में उनकी ग़लत छवि न बना ले।
Hi @GauravPandhi, that word has not been used by the PM. @TheQuint has live-streamed the PM’s speech. The comment on it has been photoshopped. @narendramodi was speaking in Gujarati. @free_thinker did explain it to you in detail. Better not to spread fake news, right?
Altnews के संस्थापक ने भी पांधी के दुष्प्रचार को ग़लत करार देते हुए लिखा कि पीएम मोदी ने ऐसे किसी ग़लत शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है। साथ ही प्रतीक सिन्हा ने पांधी को कहा कि इसकी पुष्टि के लिए वो किसी गुजराती से पूछ सकते हैं।
He didn’t say anything like that. This is pathetic. Ask anybody who understands Gujarati. https://t.co/HoDrCKbaI2
चूँकि इनमें कुछ ग़ैर-गुजराती शामिल थे और शायद वो बोलचाल की भाषा की बारीकियों से नहीं समझ सके इसलिए ऐसे लोगों को तो दोषी नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन गुजरात कॉन्ग्रेस के नेता अर्जुन मोढवाडिया, जो ख़ुद एक गुजराती हैं, उन्हें इस झूठ का हिस्सा नहीं बनना चाहिए था।
गुजरात में 23 अप्रैल को आम चुनाव के लिए मतदान होना है। यह दुर्भाग्यपूर्ण और दु:खद है कि गुजरात कॉन्ग्रेस ने ऐसी सस्ती और घटिया रणनीति का सहारा लिया, जिस पर शर्मिंगदगी होनी चाहिए।
भाजपा नेता और सिकंदराबाद से सांसद बंडारू दत्तात्रेय ने रविवार (अप्रैल 21, 2019) को राज्य सरकार से अपील करते हुए कहा कि राज्य में आतंकी गतिविधियों संबंधित संदिग्धों पर कड़ी निगरानी रखने के लिए एक पुलिस महानिदेशक (आईजी) स्तर के अधिकारी की नियुक्ति की जाए। दरअसल, बंडारू ने यह आरोप लगाया है कि हैदराबाद इस्लामी आतंकवादी गतिविधियों के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल है। उनका कहना है कि पुलिस इसके खिलाफ ठोस कदम उठाते हुए कोई कार्रवाई इसलिए नहीं कर रही है, क्योंकि चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली टीआरएस (तेलंगाना राष्ट्र समिति) सरकार असदुद्दीन ओवैसी के एआईएमआईएम के साथ गठबंधन कर रही है।
Bandaru Dattatreya, BJP MP: Recent investigations of NIA in Hyderabad reveal that Hyderabad is a safe haven for Islamic terrorist activities, that the very activity of Islamic terrorist are increasing in Hyderabad. Large no.of people are recruited only in Hyderabad. (21.04.2019) pic.twitter.com/6Lt2gxsELU
बंडारू ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी एनआईए (NIA) की हालिया जाँच से पता चलता है कि हैदराबाद इस्लामिक आतंकवादी गतिविधियों का एक सुरक्षित ठिकाना बन गया है और शनिवार (अप्रैल 20, 2019) को एनआईए द्वारा तीन लोगों की गिरफ्तारी चौंकाने वाली थी। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश भर में कई लोग आईएसआईएस की ओर आकर्षित हो रहे हैं। बंडारू का कहना है कि हैदराबाद से अधिकतर लोग आतंकी संगठनों में भर्ती हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को करीमनगर, निजामाबाद, नलगोंडा और अन्य पड़ोसी संदिग्धों स्थानों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि टीआरएस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ‘कार के चालक’ हो सकते हैं, लेकिन स्टीयरिंग वास्तव में एआईएमआईएम द्वारा नियंत्रित है। यानी कि टीआरएस सरकार जो भी फैसला लेती है, उसमें अप्रत्यक्ष रूप से एआईएमआईएम का भी हाथ होता है।
गौरतलब है कि साल 2016 में, एनआईए ने इस मामले में चार्जशीट दायर की थी और चार आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इस दौरान एनआईए ने आरोपियों के पास से 13 मोबाइल फोन, 11 सिम कार्ड, एक आईपैड, दो लैपटॉप, एक बाहरी हार्ड डिस्क, 6 पेन ड्राइव आदि बरामद किए थे।
राफेल मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 23 अप्रैल को सुनवाई है। सुनवाई से एक दिन पहले राहुल गाँधी ने स्वीकार करते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने माना कि चौकीदार चोर है वाली बात उनके मुँह से समर्थकों में जोश भरने के लिए ‘चुनावों की गर्मी’ के कारण निकल गई थी।
#Breaking | Congress president @RahulGandhi files response to a contempt petition filed by BJP MP Meenakshi Lekhi in Supreme Court and regrets his remark – ‘SC has agreed that PM Modi has indulged in corruption in Rafale deal – was made in the heat of political campaign’ pic.twitter.com/svBfFuRdUc
राहुल गाँधी ने राफेल मामले पर हमेशा की तरह ही समर्थकों में जोश भरने के लिए झूठा बयान देते हुए कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि चौकीदार चोर है। राफेल मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राहुल गाँधी ने कोर्ट का नाम लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए टिप्पणी की थी, “सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि चौकीदार चोर है।” इसी बयान को लेकर मीनाक्षी लेखी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के ख़िलाफ़ आपराधिक अवमानना याचिका दाखिल की थी।
भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने राहुल गाँधी पर कई आरोप लगाते हुए कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। राहुल के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सोमवार को राहुल की ओर से सफाई देने की उम्मीद के चलते कॉन्ग्रेस अध्यक्ष की ओर से ये बयान आया है। राहुल गाँधी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की अवमानना संबंधी याचिका पर कोर्ट ने राहुल गांधी को 15 अप्रैल को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने राहुल गाँधी को 22 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने का कहा था।
In his reply in Supreme Court, Rahul Gandhi said "my statements were used and misused by the political opponents." and that he "gave the statements in the heat of the political campaigning." https://t.co/99p7e2N2O8
बता दें कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल ने 10 अप्रैल को नामांकन के बाद मीडिया के समक्ष राफेल सौदे को लेकर ‘चौकीदार चोर है’ का बयान दिया था। राहुल का यह बयान जब मीडिया में आया तो भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने सुप्रीमकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। चुनावी रैलियों में राहुल गाँधी राफेल से जुड़े झूठे बयान देते रहते हैं। हाल ही में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने एक चुनावी रैली में कहा था, “अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया है कि चौकीदार चोर है।”
पश्चिम बंगाल में प्रमुख मौलवियों ने अपने समुदाय को सावधानीपूर्वक वोट देने की सलाह देते हुए एक संदेश जारी किया है। ख़बर के अनुसार, मुस्लिमों के वोट न बँटे इसलिए मौलवियों ने यह संदेश मुस्लिम समुदाय को जारी किया है।
मौलवियों की इस अपील में न तो यह स्पष्ट किया गया कि किस उम्मीदवार को वोट देना चाहिए और न ही किसी राजनीतिक पार्टी के ख़िलाफ़ चेतावनी ही दी गई। लेकिन मुस्लिम वोटर्स से सावधानीपूर्वक मतदान करने के आग्रह से यह स्पष्ट है कि अगर गलत मतदान किया तो गलती सुधारने के लिए अगले पाँच साल तक प्रतीक्षा करनी होगी।
मुस्लिम वोटर्स के नाम जारी किए इस संदेश पर ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल के अध्यक्ष क़ारी फ़ज़लुर रहमान, जो कोलकाता के रेड रोड पर ईद की नमाज़ का नेतृत्व करते हैं, काउंसिल के उपाध्यक्ष क़ारी मोहम्मद शफीक और प्रतिष्ठित नखोदा मस्जिद के इमाम ने हस्ताक्षर किए हैं।
अपील के अनुसार, “लोकतंत्र में चुनाव के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। यह हमें हर पाँच साल में एक सरकार का चयन करने का मौका देता है। लेकिन अगर हम ग़लती करेंगे, तो इसे सुधारने के लिए हमें पाँच साल तक इंतज़ार करना होगा। इसलिए जिसे वोट देना है उसे लेकर पहले सावधानीपूर्वक सोचे।”
क़ासमी ने कहा, “यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपने धर्म और राष्ट्र दोनों की सेवा करें। इसलिए धार्मिक ज्ञान के अलावा, हमें सही उम्मीदवार और एक पार्टी का चयन करने के लिए राजनीतिक परिपक्वता की भी आवश्यकता है, जो इस देश के प्रत्येक नागरिक की प्रगति और सुरक्षा के लिए काम करेगी।”
मौलवियों का यह संदेश काफी हद तक मायने रखता है क्योंकि बंगाल में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या एक तिहाई से थोड़ी कम है, और यदि इस समुदाय के वोट किसी एक उम्मीदवार या पार्टी के पक्ष में वोट पड़ जाएँ तो इसका प्रभाव बड़े स्तर पर पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी वरुण गाँधी ने रविवार (अप्रैल 21, 2019) को मुस्लिम वोटरों से वोट करने की अपील की। उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “बस मैं एक चीज मुस्लिम भाई को बोलना चाहता हूँ कि अगर आपने मुझे वोट दिया तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा, अगर आपने मुझे वोट नहीं दिया, कोई बात नहीं, तब भी मुझसे काम ले लेना, कोई दिक्कत की बात नहीं।”
#WATCH BJP’s Varun Gandhi in Pilibhit, earlier today: Bas mein ek cheez Muslim bhai ko bolna chahta hun ki agar aapne mujhe vote diya toh mujhe bahut accha lagega, agar aapne mujhe vote nahi diya, koi baat nahi, tab bhi mujh se kaam le le na, koi dikat ki baat nahi. pic.twitter.com/xMLzreAJ1k
उन्होंने आगे कहा कि अगर उनकी चाय में थोड़ी चीनी मुस्लिम भाईयों की भी पड़ जाए तो उनकी चाय और भी मीठी हो जाएगी। इसके बाद उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए पूछा, “क्या कुछ मुस्लिम चीनी पड़ने वाली है मेरी चाय में?” वरुण ने कहा कि वो दुनिया को हिंदू-मुस्लिम के रूप में नहीं देखते, वो दुनिया को दो ही तरह से देखते हैं और वो है अपने और पराए। बीजेपी सांसद ने कहा कि जो लोग देश के साथ हो, वो किसी के खिलाफ नहीं हो सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि जो देश की सरहदों के लिए लड़ रहा है, जो देश के लिए जी रहा हो और देश के लिए मर रहा हो, उसका ना कोई धर्म होता है और न जात होती है।
गौरतलब है कि हाल ही मुस्लिम इलाके में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सुल्तानपुर से भाजपा प्रत्याशी और वरुण गाँधी की माँ मेनका गाँधी ने इसके विपरीत बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि वो चुनाव जीत रही हैं, इसलिए मुस्लिम उनको वोट दें, उनका साथ दें। अगर मुस्लिमों ने ऐसा नहीं किया तो कल जब वो उनसे काम माँगने आएँगे, तो उनका (मेनका का) रवैया भी वैसा ही होगा। आगे उन्होंने कहा कि वो कोई महात्मा गाँधी की छठी औलाद नहीं हैं कि सिर्फ देती रहेंगी और चुनाव में मात खाएँगी। इस विवादित बयान पर चुनाव आयोग ने सख्ती दिखाते हुए मेनका गांधी को चुनाव प्रचार करने से 48 घंटे के लिए प्रतिबंधित कर दिया था।
हालाँकि बैन खत्म होने के बाद मेनका गाँधी ने अपने विवादित बयान पर सफाई दिया और कहा, “मेरे जो दिल में था वो बोला, मैं अल्पसंख्यकों का बहुत सम्मान करती हूँ। मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। मैं भड़काऊ भाषण कभी नहीं देती हूँ, जो मैंने बयान दिया था वो भड़काऊ नहीं था।”