Wednesday, May 19, 2021
Home बड़ी ख़बर जब प्रियंका स्वीकारती है कि कॉन्ग्रेस वोट-कटवा पार्टी है, तो पार्टी का भविष्य चमकता...

जब प्रियंका स्वीकारती है कि कॉन्ग्रेस वोट-कटवा पार्टी है, तो पार्टी का भविष्य चमकता है

प्रियंका ने महासचिव का दायित्व निभाते हुए कॉन्ग्रेस को ‘वोट कटवा’ पार्टी बना कर अपने दृष्टिकोण का परिचय दे दिया है। अब उनसे न पार्टी को कोई उम्मीद बची है न कार्यकर्ता को, राहुल पहले ही अपनी मेधा का परिचय दे चुके हैं।

पाँच साल पहले जब गुजरात के एक मुख्यमंत्री ने कॉन्ग्रेस के घोटालों से जर्जर देश के विकास की बात की तो ‘कॉन्ग्रेस मुक्त भारत’ का नारा दिया। वह व्यक्ति बीजेपी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और पिछले पाँच सालों में न सिर्फ देश मजबूत हुआ बल्कि पार्टी भी उतनी ही मजबूत हुई। जो कॉन्ग्रेस कभी खुद को ही लोकतंत्र समझती थी, जिसके नेताओं ने कभी ‘इंदिरा इज इंडिया’ कहा था, आज उसी कॉन्ग्रेस के कैसे दिन आ गए हैं कि देश की सबसे बड़ी पार्टी कॉन्ग्रेस का मनोबल इतना गिर चुका है कि वह अब चुनाव जीतने के लिए नहीं बल्कि ‘वोट काटने’ के लिए लड़ रही है।

यह बात कोई और नहीं बल्कि कॉन्ग्रेस की महासचिव प्रियंका गाँधी खुद कह रही हैं। तो क्या उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस और बसपा-सपा गठबंधन का चुनाव में उतरना मतदाताओं को बेवकूफ बनाने के लिए मात्र एक चाल है? क्या इनकी आपसी चुनावी बयानबाजी देश की जनता को बेवकूफ बनाने की हिस्सा है? कब तक ये लोग आम जनता को बेवकूफ समझ कर उसका बेजा फायदा उठाते रहेंगे? क्या जनता का बहुमूल्य वोट जो ऐसे वोटकटवा पार्टी को जा रही है वह लोकतंत्र के मूलभूत स्तम्भ के साथ मजाक नहीं है?

निराश-हताश कॉन्ग्रेस की महासचिव प्रियंका गाँधी ने भी जिन्हें पार्टी ने कॉन्ग्रेस की डूबती नैया बचाने के लिए आखिरी तारणहार के रूप में उतरा था, हथियार डाल दिए हैं। बुधवार (मई 1, 2019) को यूपी में एक बड़ा खुलासा करते हुए प्रियंका वाड्रा ने खुद कहा कि हर सीट जीतने के लिए नहीं होती है और हारने वाली सीटों पर हमनें वोट काटने वाले कैंडिडेट्स को उतारा है ताकि बीजेपी के वोट काटे जा सकें।

प्रियंका वाड्रा के इस खुलासे ने अब कॉन्ग्रेस पार्टी की उस मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें पार्टी फ्रंट फुट पर खेलते हुए हर राज्य में अपने बल पर बेहतर प्रदर्शन कर सत्ता में आने का दम भर रही थी। यहाँ तक कि लोकसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा था कि उनकी पार्टी देश के हर राज्य में फ्रंट फुट पर खेलने को तैयार है। उन्होंने कहा था कि हमारी पार्टी देश की सबसे बड़ी और पुरानी पार्टी है। लिहाजा हम प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आने के लिए इस चुनाव में उतरेंगे। इसके लिए अपने तरफ से राहुल ने कोई कसर नहीं छोड़ी तमाम झूठ बोले, कई झूठे आरोप लगाए, राफेल-राफेल चिल्लाए। यहाँ तक कि अपने पूरे गिरोह को भी फर्जी माहौल बनाने के लिए लगा दिया लेकिन झूठ का हवाई किला कितनी देर तक टिकता उसे ढहना ही था और अब इसकी पूर्व सूचना प्रियंका ने अपने आज के खुलासे से दे दिया। आज का प्रियंका का बयान कॉन्ग्रेस के बचे मनोबल को भी तोड़ने वाला है।

वैसे प्रियंका और राहुल कब क्या बोल जाएँ कुछ कहा नहीं जा सकता। प्रियंका गाँधी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को एक बड़ा झटका लगेगा और वे बुरी तरह हार जाएँगे। उन्होंने कहा कि उन सीटों पर जहाँ कॉन्ग्रेस मजबूत है, कॉन्ग्रेस जीत जाएगी और अन्य जहाँ कॉन्ग्रेस कमजोर है, वहाँ उम्मीदवारों का चयन यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि वे भाजपा के ‘वोट काट’ सकें।

2019 के लोकसभा चुनावों में, अनिवार्य रूप से शुरुआती कयास लगाए गए थे कि केवल दो राष्ट्रीय पार्टियाँ हैं जो चुनावी संग्राम में हैं- भाजपा और कॉन्ग्रेस। जहाँ भाजपा ने पीएम मोदी पर अपनी उम्मीदें बाँधी हैं और अपने दम पर बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रही है, वहीं कॉन्ग्रेस अब क्षेत्रीय दलों के लिए सहायक की भूमिका निभाते हुए केवल “वोट कटर” तक ही सीमित रह गई है। कॉन्ग्रेस की स्थिति ऐसी हो गई है कि वह ‘न घर की रही न घाट की।’ सोचिए कॉन्ग्रेस के इतने बुरे दिन आ गए हैं कि बीएसपी जैसी पार्टी ने भी जिसके संसद में जीरो सांसद हैं, कॉन्ग्रेस को नकार दिया।

हालाँकि, प्रियंका गाँधी वाड्रा के बयान का एक बड़ा निहितार्थ है। मीडिया को दिए अपने बयान में, उन्होंने स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश में जहाँ कॉन्ग्रेस की स्थिति कमजोर है, वहाँ पार्टी ने ‘वोट-कटर’ को उतारा है। वोट काटने वाले ऐसे उम्मीदवार होंगे जो जीत नहीं पाएँगे, लेकिन भाजपा के वोट शेयर में खाएँगे, जिससे उस निर्वाचन क्षेत्र से बसपा या सपा के उम्मीदवार को मदद मिलेगी।

प्रियंका गाँधी वाड्रा के बयान से, यहाँ यह भी स्पष्ट हो जाता है कि सार्वजनिक रूप से केवल दिखावा करने के लिए था कि ये तीनों पार्टियाँ एक-दूसरे के खिलाफ हैं। दरअसल, कॉन्ग्रेस, बसपा और सपा वास्तव में बीजेपी को हराने के लिए एक साथ हैं। इनके बीच की फाइट और बयानबाजी छद्म है। इन पार्टियों को पहले से पता है कि अब ये जनता को और बेवक़ूफ़ नहीं बना सकते, इनका बचा-खुचा जनाधार भी खिसक चुका है।

पहले बसपा के लिए, कोर वोट बैंक दलित गुट, सपा के लिए कोर वोट बैंक यादव और समुदाय विशेष वाले थे। कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन से इन दोनों पार्टियों का ये जनाधार भी और बँट जाता, क्योंकि इन्हे अच्छी तरह पता था कि कॉन्ग्रेस उत्तर प्रदेश से लगभग सफा है। कॉन्ग्रेस के इनका गठबंधन इनके लिए चुनावी आपदा के रूप में साबित हो सकता है। तो ऐसे में जब सभी का सामूहिक उद्देश्य विकास या आम जनता की सेवा न होकर केवल हर हाल में मोदी को हराना रह गया है तो ऐसे में मोदी के वोटों में किसी भी प्रकार से ध्रुवीकरण या कटाव उनके जीत की सम्भावना को कुछ कम कर सकता था।

ऐसे में शुरू हुआ इनका शैडो बॉक्सिंग का खेल जिसका मक़सद बस वोट काटना और जनता को बेवकूफ बनाना रह गया। यह वही है जो प्रियंका गाँधी वाड्रा के बयान की पुष्टि करता है। कॉन्ग्रेस और एसपी, बीएसपी के बीच चुनावी मैदान में शैडो बॉक्सिंग केवल बीजेपी के वोट काटने के लिए एक छद्म मोर्चा था, क्योंकि उनमें से कोई भी वास्तव में इतना आश्वस्त नहीं था कि वो लोकसभा चुनाव में अपने दम पर कुछ कर सकते हैं।

कुल मिला कर लोकसभा चुनाव में अपने हर झूठ को प्रोजेक्ट करने के बाद भी, जनता से कई झूठे वादे करने और उन्हें बीजेपी के खिलाफ भड़काने की पूरी कोशिश के बाद भी अपना हर झूठ बेअसर और बेनकाब होता देख अब कॉन्ग्रेस सहित बाकी सभी पार्टियों ने लगभग अपनी हार मान ली है। प्रियंका के आज के बयान ने बची-खुची उम्मीद का भी बेड़ा गर्क कर दिया। अब देखना ये है कि अब कॉन्ग्रेस किसे आगे करती है जो कॉन्ग्रेस के लिए संजीवनी साबित होती है। वैसे प्रियंका ने महासचिव का दायित्व निभाते हुए कॉन्ग्रेस को ‘वोट कटवा’ पार्टी बना कर अपने दृष्टिकोण का परिचय दे दिया है। अब उनसे न पार्टी को कोई उम्मीद बची है न कार्यकर्ता को, राहुल पहले ही अपनी मेधा का परिचय दे चुके हैं।

अब शायद ही कॉन्ग्रेस कभी वापसी कर पाए, जिसका नेतृत्व ही लगातार पार्टी को गर्त की तरफ ले जा रहा हो, उससे किसी भी तरह की उम्मीद करना भी बेमानी है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

रवि अग्रहरि
अपने बारे में का बताएँ गुरु, बस बनारसी हूँ, इसी में महादेव की कृपा है! बाकी राजनीति, कला, इतिहास, संस्कृति, फ़िल्म, मनोविज्ञान से लेकर ज्ञान-विज्ञान की किसी भी नामचीन परम्परा का विशेषज्ञ नहीं हूँ!

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘मोदी स्ट्रेन’: कैसे कॉन्ग्रेस टूलकिट ने की PM मोदी की छवि खराब करने की कोशिश? NDTV भी हैशटैग फैलाते आया नजर

हैशटैग और फ्रेज “#IndiaStrain” और “India Strain” सोशल मीडिया पर अधिक प्रमुखता से उपयोग किया गया। NDTV जैसे मीडिया हाउसों को शब्द और हैशटैग फैलाते हुए भी देखा जा सकता है।

कॉन्ग्रेस टूलकिट का प्रभाव? पैट कमिंस और दलाई लामा को PM CARES फंड में दान करने के लिए किया गया था ट्रोल

सोशल मीडिया पर पीएम मोदी को बदनाम करने के लिए एक नया टूलकिट सामने आने के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी एक बार फिर से सुर्खियों में है। चार-पृष्ठ के दस्तावेज में पीएम केयर्स फंड को बदनाम करने की योजना थी।

₹50 हजार मुआवजा, 2500 पेंशन, बिना राशन कार्ड भी फ्री राशन: कोरोना को लेकर केजरीवाल सरकार की ‘मुफ्त’ योजना

दिल्‍ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने कोरोना महामारी में माता पिता को खोने वाले बच्‍चों को 2500 रुपए प्रति माह और मुफ्त शिक्षा देने का ऐलान किया है।

ख़लीफ़ा मियाँ… किसाण तो वो हैं जिन्हें हमणे ट्रक की बत्ती के पीछे लगाया है

हमने सब ट्राई कर लिया। भाषण दिया, धमकी दी, ज़बरदस्ती कर ली, ट्रैक्टर रैली की, मसाज करवाया... पर ये गोरमिंट तो सुण ई नई रई।

कॉन्ग्रेस के इशारे पर भारत के खिलाफ विदेशी मीडिया की रिपोर्टिंग, ‘दोस्त पत्रकारों’ का मिला साथ: टूलकिट से खुलासा

भारत में विदेशी मीडिया संस्थानों के कॉरेस्पोंडेंट्स के माध्यम से पीएम मोदी को सभी समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।

‘केरल मॉडल’ वाली शैलजा को जगह नहीं, दामाद मुहम्मद रियास को बनाया मंत्री: विजयन कैबिनेट में CM को छोड़ सभी चेहरे नए

वामपंथी सरकार की कैबिनेट में सीएम विजयन ने अपने दामाद को भी जगह दी है, जो CPI(M) यूथ विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।

प्रचलित ख़बरें

जैश की साजिश, टारगेट महंत नरसिंहानंद: भगवा कपड़ा और पूजा सामग्री के साथ जहाँगीर गिरफ्तार, साधु बन मंदिर में घुसता

कश्मीर के रहने वाले जान मोहम्मद डार उर्फ़ जहाँगीर को साधु के वेश में मंदिर में घुस कर महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या करनी थी।

अल्लाह-हू-अकबर चिल्लाती भीड़ का हमला: यहूदी खून से लथपथ, बचाव में उतरी लड़की का यौन शोषण

कनाडा में फिलिस्तीन समर्थक भीड़ ने एक व्यक्ति पर हमला कर दिया जो एक अन्य यहूदी व्यक्ति को बचाने की कोशिश कर रहा था। हिंसक भीड़ अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए उसे लाठियों से पीटा।

विनोद दुआ की बेटी ने ‘भक्तों’ के मरने की माँगी थी दुआ, माँ के इलाज में एक ‘भक्त’ MP ने ही की मदद

मोदी समर्थकों को 'भक्त' बताते हुए मल्लिका उनके मरने की दुआ माँग चुकी हैं। लेकिन, जब वे मुश्किल में पड़ी तो एक 'भक्त' ने ही उनकी मदद की।

भारत में दूसरी लहर नहीं आने की भविष्यवाणी करने वाले वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील ने सरकारी पैनल से दिया इस्तीफा

वरिष्ठ वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील ने भारत में कोविड-19 के प्रकोप की गंभीरता की भविष्यवाणी करने में विफल रहने के बाद भारतीय SARS-CoV-2 जीनोम सीक्वेंसिंग कंसोर्टिया (INSACOG) के वैज्ञानिक सलाहकार समूह के अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया।

मेवात के आसिफ की हत्या में सांप्रदायिक एंगल नहीं, पुरानी राजनीतिक दुश्मनी: हरियाणा पुलिस

आसिफ की मृत्यु की रिपोर्ट आने के तुरंत बाद, कुछ मीडिया हाउसों ने दावा किया कि उसे मारे जाने से पहले 'जय श्री राम' बोलने के लिए मजबूर किया गया था, जिसकी वजह से घटना ने सांप्रदायिक मोड़ ले लिया।

ओडिशा के DM ने बिगाड़ा सोनू सूद का खेल: जिसके लिए बेड अरेंज करने का लूटा श्रेय, वो होम आइसोलेशन में

मदद के लिए अभिनेता सोनू सूद को किया गया ट्वीट तब से गायब है। सोनू सूद वास्तव में किसी की मदद किए बिना भी कोविड-19 रोगियों के लिए मदद की व्यवस्था करने के लिए क्रेडिट का झूठा दावा कर रहे थे।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,384FansLike
96,061FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe