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केजरीवाल के अपमान में ट्विंकल का लड़का मैदान में, ट्विटर पर उड़ा मजाक

जनाब केजरीवाल कॉन्ग्रेस से साँठगाँठ करने के जुगाड़ में लगे हैं, पर मामला जम नहीं रहा है। जिसे लेकर सोशल मीडिया पर पहले भी उनका मखौल उड़ाया जा चुका है। काफी दिनों तक मीडिया में छाया रहा कि ‘उन्होंने तो लगभग मना कर दिया है जी।’ माहौल थोड़ा शांत हुआ ही था कि अब फिर से ट्विटर पर माहौल खुशनुमा हो चुका है।

सुपरस्टार राजेश खन्ना और डिंपल कपाड़िया की बेटी और बॉलीवुड के ‘खिलाड़ी’ अक्षय कुमार की पत्नी एक्ट्रेस ट्विंकल खन्ना का एक ट्वीट सुर्खियों में है।

शुक्रवार को ट्विंकल खन्ना द्वारा किया गया एक ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दरअसल, ट्विंकल ने अपने इस ट्वीट के जरिए दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का मजाक उड़ाया है। उन्होंने एक तस्वीर शेयर की, जिसमें एक बच्चे ने अपने सिर पर अंडरवियर पहना हुआ है। इस फोटो को शेयर करते हुए ट्विंकल ने लिखा, ‘जब आप अरविंद केजरीवाल के सपोर्टर हैं, लेकिन आपके पास मंकी कैप नहीं है, मैं कसम खाती हूँ मैंने इसे ऐसा करने के लिए नहीं कहा।’

ट्विंकल के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर बच्चे की तस्वीर वायरल होने लगी है। वायरल होने की एक बड़ी वजह यह भी है कि जहाँ जनता अभी केजरीवाल के अपनी कही हर बात से पलटाउ नज़ारे देख रही है, वहीं केजरी और ट्विंकल खन्ना दोनों की फैंस फॉलोइंग सोशल मीडिया पर जबरदस्त है।

एक तरफ हाल ही में #MeToo अभियान में तनुश्री दत्ता के पक्ष में बोलने वालों में सबसे आगे रहने पर ट्विंकल ने तारीफें बटोरी थीं, तो वहीं अपनी तीन किताबों से वह एक एक्टेस के साथ अब राइटर के तौर पर भी पहचानी जाती हैं। उनका जिंदगी जीने का अंदाज ही कुछ ऐसा है जो लोगों को उनकी हर बात जानने के लिए उकसाता है। वहीं जनाब केजरीवाल के क्या कहने अगर कुमार विश्वास उनके मजे न ले रहे हो तो वे ऐसा कुछ ज़रूर करते हैं जिससे जनता उनके मजे लेने लगती है।

हिन्दुओं की सबसे बड़ी समस्या: वामपंथियों, कॉन्ग्रेसियों के गुनाहों की माफ़ी माँगते रहना

चाहे साध्वी प्रज्ञा का हालिया बयान और उनका पीछे हटना हो, या फिर भाजपा को कम्यूनल कहना, हिन्दुओं को असहिष्णु कह कर देश और दुनिया में छवि खराब हुई, और इन सबको डिफ़ेंड करने में ही भाजपा की सारी ऊर्जा चली गई।

भाजपा के सर पर सम्प्रदायवाद मढ़ दिया जाता है, लेकिन याद कीजिए कि कॉन्ग्रेस के दंगाई इतिहास और वामपंथियों के आतंक के शिकार लोगों के लिए, उनके और तृणमूल के पोलिटिकल किलिंग्स पर कितनी बार माफ़ी माँगी गई? किसी ने कह दिया कि भाजपा कम्यूनल है, तो वो हो गई क्या? सिद्धू ने अपने बयान के लिए माफ़ी माँगी? मणिशंकर अय्यर ने? आज़म खान ने? राहुल गाँधी ने?

रद्द हो सकता है राहुल गाँधी का अमेठी से नामांकन-पत्र, ग़लत दस्तावेज़ जमा करने का लगा आरोप

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी का विवादों से पुराना नाता है। फ़िलहाल, राजनीतिक गलियारे से एक ऐसी ख़बर सामने आई है, जिससे उनके अमेठी से नामांकन रद्द होने तक की नौबत आ सकती है। राहुल गाँधी के वकील राहुल कौशिक ने रिटर्निंग अधिकारी से समय माँगा है। इस मामले पर अब 22 अप्रैल को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का पक्ष रखेंगे।

दरअसल, अमेठी में राहुल गाँधी द्वारा दाखिल किए गए नामांकन पत्र को लेकर आपत्ति दर्ज की गई है। दस्तावेज़ों में राहुल की नागरिकता और डिग्री पर सवाल खड़े किए गए हैं। इन दस्तावेज़ों में राहुल गाँधी का नाम राउल विंची लिखा पाया गया है। इसके अलावा उनके पास ब्रिटिश नागरिकता है।

आपत्ति दर्ज कराने वाले में निर्दलीय प्रत्याशी ध्रुव कौशल ने राहुल के नामांकन को रद्द करने की माँग की थी। इसमें दावा किया गया था कि राहुल ने ग़लत दस्तावेज़ जमा करके निर्वाचन अधिकारी को गुमराह करने का काम किया है।

इसके अलावा राहुल गाँधी पर यह आरोप भी है कि दस्तावेज़ों में उन्होंने अपनी इंग्लैंड की कंपनी का उल्लेख नहीं किया। साथ ही उन्होंने एफिडेविट्स में जिन कॉलेजों से पढ़ाई करने का दावा किया, उसकी वास्तविकता यह है कि उन्होंने वहाँ से पढ़ाई की ही नहीं। इस सभी दस्तावेज़ों को ग़लत साबित करने वाले वकील ने निर्वाचन अधिकारी को सभी असली दस्तावेज़ उपलब्ध कराए।

इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर यूज़र्स ने राहुल गाँधी की जमकर खिल्ली उड़ाई। ग़लत दस्तावेज़ों पर चुटकी लेते हुए एक यूज़र ने लिखा कि फँस गया पप्पू…अब होगा असली दंगल।

एक अन्य यूज़र ने लिखा कि जानबूझकर ग़लत फ़ार्म भरा होगा जिससे हार टाल सके और Victim Play करने को मिल जाए।

ट्विटर पर एक यूज़र ने सलाह देते हुए लिखा कि राहुल गाँधीजी, आपके लिए अमेठी से हटना बेहतर है, आपकी हार सुनिश्चित है!


CRPF जवान ने बचाई पीठासीन अधिकारी की जान, किसी कश्मीरी नेता ने नहीं की प्रशंसा

श्रीनगर में गुरूवार (अप्रैल 18, 2019) को सीआरपीएफ के एक जवान ने मतदान करने आए कश्मीरी चुनाव अधिकारी की जान बचाई। चुनाव प्रक्रिया के दौरान चुनाव अधिकारी अहसान-उल-हक की तबियत बिगड़ गई, उन्हें हार्ट अटैक आ गया। बटालियन 28 के कॉन्सटेबल सुरिंदर कुमार उस समय बुचपोरा के गर्ल्स स्कूल में तैनात थे, उन्होंने चुनाव अधिकारी की ये हालत देखी, जिसके बाद उन्हें प्राथमिक इलाज दिया गया मगर उनकी हालत में कोई सुधार नहीं आया, वो बेहोश हो गए।

चुनाव अधिकारी की ये हालत देखकर सुरिंदर कुमार ने तुरंत अपनी मेडिकल टीम से संपर्क किया। सीआरपीएफ के सीनियर डॉक्टर सुनीम खान ने उन्हें फोन पर निर्देश दिया, उनके निर्देशानुसार सुरिंदर ने 50 मिनट तक चेस्ट कंप्रेशन और मुँह से श्वास दिया। इस बीच सीआरपीएफ ने मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए तुरंत एम्बुलेंस भी भेज दी। जिसके बाद हसन-उल-हक को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने बताया कि सीआरपीएफ जवान सुरिंदर कुमार और डॉक्टर सुनीम खान के समय पर उपचार करने की वजह से मरीज की जान बच गई।

इस तरह सीआरपीएफ के जवान ने पोल ड्यूटी पर तैनात एक चुनाव अधिकारी की जान बचाई, लेकिन किसी कश्मीरी नेता ने सेना का शुक्रिया अदा करने की जहमत नहीं उठाई। इस बारे में एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि अगर सेना राष्ट्र-विरोधी तत्वों से छुटकारा पाने की कोशिश करती है तो उन पर अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप लगाया जाता है, लेकिन जब एक जवान ने किसी का जीवन बचाया है तो पूरा कश्मीर चुप है।

बसपा विधायक ने धमकाया: ‘दुल्हन का पता नहीं लगा तो आरोपितों की बहन-बेटियों को घर से उठा लेंगे’

राजस्थान में बसपा विधायक राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने सीकर में 4 दिन पहले अगवा हुई एक दुल्हन के मामले पर बोलते हुए भड़काऊ बयान दिया। दरअसल, बयान में राजेंद्र ने प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा, “अगर पुलिस आरोपितों का पता नहीं लगाती है तो हम आरोपितों की बहन-बेटियों को उनके घर से उठाकर ले जाएँगे।”

राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने यह बयान कलेक्टर के बंगले के पास राजपूत छात्रावास में धरने पर बैठने के दौरान दिया। राजेंद्र ने कहा कि प्रशासन ने हमसे हमारी बहन को खोजने के लिए तीन दिन का समय माँगा था, लेकिन 3 दिन बीतने के बाद भी दुल्हन का पता नहीं लग पाया है और न ही किसी आरोपित की गिरफ्तारी हुई है। गुढ़ा की माने तो अगर प्रशासन उनकी ‘बहन-बेटी’ को ढूँढने में असफल रहता है तो वह आरोपितों की बहन-बेटियों को घर से उठा लेंगे। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले राजस्थान के सीकर में राजपूट समाज की लड़की का ससुराल पहुँचने से पहले अपहरण कर लिया गया था। इस मामले ने सीकर में खूब तूल पकड़ा। जगह-जगह प्रशासन से दुल्हन को ढूँढने की और आरोपितों के गिरफ्तारी की माँग की गई।

सीकर में हुई घटना के संबंध में एसपी अमनदीप सिंह कपूर का कहना है कि उदयपुरवाटी के विधायक (राजेंद्र सिंह गुढ़ा) और समाज के अन्य लोगों से अपील है कि वे इस तरह के बयान न दें। अमनदीप की मानें तो ऐसे बयानों से गलत संदेश जाता है। उनका कहना है कि पुलिस आरोपितों को गिरफ्तार करने के बहुत नज़दीक पहुँच चुकी है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 5 टीमें बनाई हैं। जिन्हें 3 राज्यों में भेजा गया है। साथ ही दुल्हन की तस्वीर 17 थानों में भेज दी गई है।

राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने अपने फेसबुक अकॉउंट पर इस धरने से संबधित पोस्ट भी लिखी है। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने संदेश देने की कोशिश की है कि अब प्रशासन से आर-पार की लड़ाई होगी।

इस पोस्ट में राजेंद्र ने अपने समर्थकों से 11 बजे सीकर पहुँचने की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि वह सभी को विश्वास दिलाना चाहते हैं कि वह अपने किसी भी भाई को कमज़ोर नहीं पड़ने देंगे। उन्होंने कहा कि आत्मसम्मान और इज्जत की इस लड़ाई के लिए वे मरने के लिए भी तैयार हैं।

इस पोस्ट में उन्होंने कहा कि अब सरकार और प्रशासन से दो-दो हाथ करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि आज 72 घण्टे होने के बाद भी प्रशासन के द्वारा कोई ठोस सकारात्मक परिणाम नहीं दिया जाना इस बात को साबित करता है कि कहीं न कहीं प्रशासन के अधिकारी अपराधियों को पकड़ने में कोताही बरत रहे हैं।

विधायक राजेंद्र ने अपनी फेसबुक पोस्ट में कहा, “मैं एक बार पुनः आप सभी को बता देना चाहता हूँ कि सीकर में नेट बन्द कर दिया गया है आप सभी मेरे इसी संदेश को मेरी स्वीकृति समझ अधिक से अधिक संख्या में आज 11 बजे सीकर पहुँचे।”

साध्वी प्रज्ञा की उम्मीदवारी पर बोले कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल, ‘पार्टी की मर्जी है, जिसे चाहे चुनाव लड़ाए’

कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल ने लोकसभा चुनाव 2019 में कॉन्ग्रेस की जीत का भरोसा जताया है। अहमद पटेल ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा है कि उन्हें पूरा भरोसा है कि लोकसभा के चुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने गुजरात में भी अच्छे परिणाम मिलने की भी आशंका व्यक्त की है। पटेल ने कहा कि 23 मई को जब चुनाव परिणाम आएँगे, तब भाजपा सरकार में नहीं होगी।

उम्मीदवार चुनना पार्टी का अधिकार है

कथित रूप से मालेगाँव बम विस्फोट की आरोपित और भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के विवादित बयान से सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ है। मामले को लेकर कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल ने कहा, “यह किसी पार्टी का अधिकार है कि वह किसे उम्मीदवार बनाती है। मैं उस पर टिप्पणी नहीं करूँगा, लेकिन आतंकवाद से लड़ते हुए शहीद हुए अधिकारी के बारे में ऐसी बातें नहीं कही जानी चाहिए। मुझे पूरी उम्मीद है कि भाजपा इस बार का लोकसभा चुनाव हारेगी। हम गुजरात में भी अच्छा प्रदर्शन करेंगे। हम यहाँ डबल डिजीट को पार करेंगे, 23 मई को जब रिजल्ट आएगा तो मोदी सरकार नजर नहीं आएगी।”

भोपाल में भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक में साध्वी प्रज्ञा ने मुंबई हमले (26/11) में शहीद हुए पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे पर यातना देने का आरोप लगाया था। हालाँकि, साध्वी ने शुक्रवार की शाम माफी माँगते हुए बयान वापस ले लिया है। साध्वी की सहयोगी उपमा ने कहा, “संभव है भावुक क्षणों में वह कुछ ऐसा कह गयी हों, जिससे किसी को  कष्ट पहुँचा हो। इसके लिए हम माफी माँगते हैं।”

साध्वी का दोष कि वो हिन्दू थी? कि पिता IAS नहीं थे? कि वो LSR की छात्रा नहीं थी?

आपने कितनी बार गाँव में, शहर में आम लोगों को कहते सुना है- हाय लगी है उसको। दैवीय न्याय असहाय के मन का झूठा सहारा है। यह कहने भर पर एक ऐसी महिला पर शिकारी झुण्ड का टूट पड़ना, जिसने लगभग एक दशक जेल में काटा हो, बौद्धिक आतंकवाद और वैचारिक अतिवाद नहीं है तो क्या है? वह कौन लोग हैं जो हमारे भगवान तय करते हैं नेहरू के समय से, और तालिबान की भाँति बँदूक और पत्थर लेकर हमारे घरों के बाहर खड़े हो जाते हैं, एक ज़िद और धमकी के साथ- बोल कि मेरा भगवान तेरा भी भगवान है! यह कैसी असहिष्णुता है जो पीड़ित को हाय भी न करने दे?


जो लोग यह कहते हैं कि एक शहीद के ऊपर कुछ कहा नहीं जाना चाहिए क्योंकि वह जीवित नहीं है, वही लोग राजनैतिक मंचों से सार्वजनिक रूप से सावरकर पर लगाए गए झूठे लांछन पर विद्रूप मुस्कुराहट परोसते हैं। क्यों नहीं राहुल गाँधी को राजनीति से त्यागपत्र देना चाहिए? मज़े की बात है कि जो उस कसाब को मुक्त कराने के लिए क्षमा पत्र लिख रहे थे, आज भी उस कसाब और उस अफ़ज़ल के लिए जुलूस निकालते हैं, जिनकी हिंसा के हेमन्त करकरे शिकार हुए, जो करकरे की शहीदी को साज़िश बता कर पुस्तक रिलीज़ करा रहे थे, आज शहीद के सम्मान को ले कर चिंतित हैं।

एक पीड़ित महिला के पीछे अभिजात्य समाज कलंक की स्याही लेकर पड़ जाता है, उसका तो अपना व्यक्तिगत दुख था। दिग्विजय सिंह का शहीद मोहन चंद शर्मा के मामले में कौन सा दुख था? बाटला का सत्य सामने आने पर भी उन्होंने प्रश्न वापस नहीं लिए। साध्वी घाघ नेता नहीं है, दिग्विजय हैं। एक घाघ नेता मोहनचंद शर्मा की शहीदी को झूठा बताता रहता है, एक महिला कुटिल कोलाहल से सहम उठती है, उस वक्तव्य को वापस लेती है। घाघ नेता से कोई प्रश्न नहीं पूछता, महिला को कोने मे खड़ा कर के दोहराने को कहा जाता है- बोलो, हमारे भगवान तुम्हारे भगवान हैं।

एम जे अकबर की भूमिका रही थी हज़ारों भारतीयों को यमन संघर्ष से बचाने में। किंतु हम यह नहीं कहते कि महिलाओं का उनपर आरोप लगाने का अधिकार नहीं है। हम उन महिलाओं के चेहरे पर कालिख नही फेंकते। साध्वी का दोष यही है कि उसके पिता प्रशासनिक अधिकारी नहीं थे, वह एलएसआर में नहीं पढ़ी?

मैं साध्वी की बात से सहमत नहीं हूँ। क्योंकि मुझे जेल में डाल कर प्रताड़ित नहीं किया गया, मैं पीड़ित नहीं हूँ और महिला भी नहीं हूँ। मैं सत्य नहीं जानता। मैं यह जानता हूँ जहाँ कान पकड़ने पर एक व्यक्ति पुलवामा में 45 लोगों की हत्या कर देता है, एक साधनहीन महिला सिर्फ़ एक श्राप दे कर ठहरती है। एक निरीह महिला बम बाँधकर सैनिकों को नहीं मारती क्योंकि उसके विचार इसका साथ नहीं देते। वह हाय करती है, श्राप देती है, और विधि के विधान को परमात्मा का न्याय मान कर संतोष धरती है। बौद्धिक समाज गोलबंद होकर कहता है- कुलटा, क्षमा माँग और सार्वजनिक जीवन से पीछे हो बौद्धिक कारागृह में बैठ!

ये लोग और कोई नहीं हैं, वही हैं जो मध्य युग में औरतों को डायन बता कर यूरोप में जला दिया करते थे। जो तय करते थे कि सार्वजनिक सोच की क्या दिशा होगी और अलग शब्द, अलग विचार की निर्ममता से हत्या करते थे। मैं साध्वी की बात से इसलिए भी सहमत नहीं हूँ क्योंकि मैं दैवीय न्याय के सिद्धांत पर विश्वास नहीं रखता। मैं मानता हूँ कि दैवीय न्याय असहाय को संतोष देने का साधन मात्र है। जो लोग श्राप देने को अपराध घोषित कर रहे हैं, मूर्खता कर रहे हैं और यूरोप के अँधकारयुग को भारत में लाना चाहते हैं।

सिद्धांततः हेमंत करकरे के साथ सबसे बड़ा अन्याय तो वह था जो उनके हत्यारों को बचाने के लिए 26/11 को भारतीय साज़िश बता कर एक राजनेता पुस्तक लॉन्च कर रहे थे। साध्वी की बात तो एक व्यक्तिगत प्रयास है एक दुःखद प्रसंग से स्वयं को बाहर लाने का, दैवीय न्याय मान कर एक अध्याय बंद करने का। नैतिकता और दर्शन की बातें उस महिला को बताना जो उस देश में दस साल क़ैद में, समाज और सोच से दूर गुमनामी और उपेक्षा में प्रताड़ित हुई जहाँ एक अभिजात्य पत्रकार को आया भद्दा ट्वीट राष्ट्रीय समस्या हो, अपने आपमें एक निर्मम कुटिलता है।

जो लोकतंत्र एक पीड़ित को स्वर का अधिकार न दे सके, वह निरर्थक है। लोकतंत्र में मेजर गोगोई नायक भी बनते हैं और उनका कोर्ट मार्शल भी होता है। अम्बेदकर अपने भाषण ‘ग्रामर ऑफ़ अनार्की’ में कहते हैं, “महान लोगों के प्रति आभारी होने में कोई समस्या नहीं है किंतु कृतज्ञता की सीमाएँ होनी चाहिए।” अम्बेदकर आयरिश क्रांतिकारी डैनियल ओ कोनेल का संदर्भ दे कर कहते हैं, “कोई पुरूष स्वाभिमान के मूल्य पर और कोई स्त्री सम्मान के मूल्य पर कृतज्ञ नहीं हो सकती है। साध्वी को हमें इसी मानक पर तौलना चाहिए और समाज के वैचारिक तालिबानीकरण से बचना चाहिए।

KL राहुल और हार्दिक पांड्या पर BCCI ने लगाया 20-20 लाख का जुर्माना

महिलाओं पर अभद्र टिप्‍पणी के मामले में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने एक नज़ीर पेश करते हुए हार्दिक पांड्या और केएल राहुल पर कार्रवाई की है। बीसीसीआई ने दोनों पर अर्थ दंड के रूप में 20-20 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके लिए दोनों क्रिकेटरों को 4 सप्ताह का समय दिया गया है।  

बता दें कि बीसीसीआई की ओर से दोनों खिलाड़ियों पर लगाए गए 20 लाख रुपए के जुर्माने में से 1-1 लाख रुपए की रकम ड्यूटी के दौरान शहीद हुए सुरक्षा बलों के 10 कांस्‍टेबलों के परिवारों को देने को कहा गया है। बची हुई 10 लाख रुपए की धनराशि को दृष्टिबाधितों के लिए बनाए गए क्रिकेट एसोसिएशन के फंड में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस रकम से दृष्टिबाधित लोगों के लिए खेल का प्रमोशन किया जाएगा।

बीसीसीआई ने कहा कि अर्थ-दंड की रकम चुकाने के लिए खिलाड़ियों को एक महीने का समय दिया गया है। बोर्ड का कहना है कि अगर तय समय में दोनों ने जुर्माना नहीं चुकाया तो यह रकम उनकी मैच फीस से काटी जाएगी।

पूरा मामला यह है कि दोनों ने बॉलीवुड डायरेक्टर करण जौहर के शो ‘कॉफी विद करण’ पर महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक बातें कहीं जिसके बाद इन दोनों के खिलाफ जाँच के आदेश दिए गए थे और इन दोनों खिलाड़ियों पर अस्थायी प्रतिबंध भी लगाया गया था।

हालाँकि, बाद में पांड्या और राहुल ने इस विवाद के बाद माफी भी माँगी थी। जिसे नाकाफी मानते हुए महिलाओं के खिलाफ दिए गए विवादास्पद बयान को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के लोकपाल डीके जैन ने हार्दिक पांड्या और बल्लेबाज लोकेश राहुल को नोटिस थमा दिया था।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर लगा यौन शोषण का आरोप: #MeTooAgain

शुक्रवार (अप्रैल 19, 2019) को उच्चतम न्यायालय के 22 न्यायाधीशों को भेजे गए हलफनामे में कोर्ट की एक पूर्व जूनियर असिस्टेंट ने भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। स्क्रॉल में छपी इस खबर के अनुसार पीड़िता 35 वर्षीय महिला है जिसके अनुसार रंजन गोगोई ने पिछले साल 2018 में 10 और 11 अक्टूबर को अपने निवास स्थान पर उस महिला का यौन शोषण करने का प्रयास किया।

कुछ मीडिया रिपोर्ट की मानें तो महिला द्वारा दिए हलफनामे के अनुसार पहले तो रंजन गोगोई ने महिला को कमर से पकड़ा, फिर अपने हाथ से उनके पूरे शरीर को छुआ, इसके बाद अपने शरीर से महिला के शरीर पर दबाव बनाया। इस दौरान चीफ जस्टिस की हरकत से महिला स्तब्ध हो गई थी। पीड़ित महिला का कहना है कि रंजन गोगोई की पकड़ उसपर इतनी कसी हुई थी कि वो वहाँ से हिल भी नहीं पा रही थी।

इस हलफनामे में महिला ने अपने साथ हुई कुछ बातों का जिक्र किया है। जैसे कि इस घटना के दो महीने बाद महिला को बर्खास्त कर दिया गया, महिला के पति और पति के भाई को दिल्ली पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल की नौकरी से निलंबित किया गया और कुछ महीने बाद ही पति के दूसरे भाई को भी सुप्रीम कोर्ट की नौकरी से निलंबित कर दिया गया। महिला के अनुसार 10-11 अक्टूबर को हुई घटना के बाद महिला का कई तरीकों से शोषण किया जाता रहा। महिला ने यह भी बताया कि उसके ऊपर शोषण की घटना से पहले मार्च 2018 में रिश्वत लेने का एक केस रजिस्टर किया गया था जिसमें उसे पद से बर्खास्त करने के बाद गिरफ्तार किया गया।

चीफ़ जस्टिस गोगोई पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली महिला फिलहाल जमानत पर बाहर है। महिला का दावा है कि रिश्वत का पूरा मामला मनगढ़ंत है। महिला पर लगे इस आरोप के केस को कुछ समय पहले क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया था जिसे अब पटियाला हाउस कोर्ट भेज दिया गया है। इस मामले में हैरान करने वाली बात ये है कि रिश्वत का आरोप उस महिला के पति के खिलाफ भी लगाया गया है, लेकिन रिश्वत देने वाले के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं।

इस मामले पर तीन जजों की पीठ ने आज सुबह 10:30 बजे एक विशेष बैठक की। इस दौरान अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल और सॉलिसिटर जनरल तुषार के साथ सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सदस्य भी कोर्ट में मौजूद रहे। मुख्य न्यायधीश ने सुनवाई शुरु होने के साथ ही कुछ बातों पर विचार विमर्श करने को कहा।

मुख्य न्यायधीश ने सुनवाई के दौरान कहा, “मैं बस इतना ही कहना चाहूँगा कि निस्संदेह हर कर्मचारी के साथ उचित और शालीनता से व्यवहार किया जाता है। वह कर्मचारी डेढ़ महीने से नियुक्त थी।” गोगोई ने कहा, “जब ये आरोप लगाए गए तो उन्होंने उनका जवाब देना उचित नहीं समझा।”

रंजन गोगोई का मामले पर कहना है कि न्यायपालिका खतरे में है। गोगोई के अनुसार अगले महीने कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई होनी है, इसलिए उनपर इस तरह के आरोप लगाए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश ने यौन शोषण के आरोप का जवाब देते हुए कहा कि जज रहते 20 सालों के कार्यकाल का उन्हें यह ईनाम मिला है? 20 सालों की सेवा के बाद उनके खाते में सिर्फ 6,80,000 रुपए हैं। कोई भी उनका खाता चेक कर सकता है। यहाँ तक कि उनके चपरासी के पास भी उनसे ज्यादा पैसे हैं।

महिला के आरोपों को खारिज करते हुए सीजीआई ने कहा कि लोग उनपर पैसों के मामले में उँगली नहीं उठा सकते हैं इसलिए इस तरह का आरोप लगाया गया है। रंजन गोगोई ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि जिस महिला ने उनपर आरोप लगाया है वो कुछ समय पहले तक जेल में थी और अब वे बाहर है, इसके पीछे कोई एक शख्स नहीं, बल्कि कई लोगों का हाथ है।

इस मामले पर फिलहाल कोई आदेश पारित नहीं किया है। जस्टिस अरुण मिश्रा ने इस मामले पर कहा है कि हम कोई ज्यूडियशियल ऑर्डर नहीं पास नहीं कर रहे हैं, ये उन मीडिया संस्थानों के विवेक पर निर्भर करता है कि वो इसे छापें या नहीं। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई समेत जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस संजीव खन्ना शामिल थे।

PM मोदी ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का खुलकर किया बचाव, कहा कॉन्ग्रेस को पड़ेगा महँगा

साध्वी प्रज्ञा के भाजपा से चुनाव लड़ने को लेकर हो रहे विरोध का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुँहतोड़ जवाब दिया है। प्रधानमंत्री ने भोपाल से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को प्रत्याशी बनाए जाने पर कहा कि साध्वी की उम्मीदवारी कॉन्ग्रेस को महँगी पड़ने वाली है। उन्होंने राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि अमेठी और रायबरेली से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार भी जमानत पर रिहा है। इस पर कोई सवाल नहीं करता, लेकिन भोपाल की उम्मीदवार (प्रज्ञा ठाकुर) जमानत पर है, तो ये बहुत बड़ा सवाल बन गया है। उन्होंने कहा कि उन सबको जवाब देने के लिए साध्वी प्रज्ञा एक प्रतीक है और यह कॉन्ग्रेस को महँगा पड़ने वाला है।

टाइम्स नाउ को दिए एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब 1984 में इंदिरा गाँधी की मृत्यु हुई, तब उनके बेटे ने कहा था कि जब एक बड़ा पेड़ गिरता है तो पृथ्वी हिलती है। इसके बाद, हजारों सिखों का नरसंहार हुआ। क्या यह कुछ लोगों द्वारा फैलाया गया आतंक नहीं था? इसके बावजूद राजीव गाँधी को देश का प्रधानमंत्री बनाया गया। उस समय मीडिया ने कभी ऐसा सवाल नहीं पूछा, जैसा वह अब सवाल पूछ रहे हैं। सिख दंगों के आरोपितों को कॉन्ग्रेस ने बड़ा मंत्री बनाया। उनमें से एक आज मप्र का मुख्यमंत्री है। पीएम मोदी ने कहा कि एक महिला वह भी साध्वी (प्रज्ञा) को जब प्रताड़ित किया गया, तब किसी ने उँगली नहीं उठाई।

उन्होंने कहा कि वो गुजरात में रहे हैं, और वहाँ कॉन्ग्रेस के तौर-तरीकों से अच्छी तरह परिचित हैं। मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस फिल्म की स्क्रिप्ट की तरह एक कहानी गढ़ने का काम करती है। पहले वो कुछ उठाते हैं, फिर उसमें कुछ जोड़ते हैं, उसके बाद अपनी कहानी के लिए एक खलनायक जोड़ते हैं, ताकि कहानी का झूठा प्रचार किया जा सके। यह कॉन्ग्रेस का ‘modus operandi’ अर्थात काम कारण एक तरीका है।

मोदी ने समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट के बारे में कहा कि उस केस में जाँच हुई लेकिन कुछ नहीं निकला। जज लोया जिनकी मृत्यु प्राकृतिक थी उसे भी कॉन्ग्रेस ने इतना लंबा खींचा और हत्या बताने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में 5,000 साल तक जिस महान संस्कृति और परंपरा ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का संदेश दिया, ‘सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे संतु निरामया’ का संदेश दिया, जिस संस्कृति ने ‘एकम् सत् विप्रा: बहुधा वदन्ति’ का संदेश दिया, ऐसी संस्कृति को कॉन्ग्रेस ने आतंकवादी कह दिया। उन सबको जवाब देने के लिए साध्वी प्रज्ञा एक प्रतीक है और ये कॉन्ग्रेस को बहुत महँगा पड़ने वाला है।