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क्या चुनावी ख़र्च उठाने के लिए BJP नेताओं की पत्नियाँ गहने बेच रही हैं: CM कमलनाथ के बिगड़े बोल

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विवादित बयान देते हुए भाजपा नेताओं की पत्नियों पर टिप्पणी की है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पूछा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास रोज़ विमान यात्राएँ करने के लिए रुपए कहाँ से आ रहे हैं? साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि क्या भाजपा नेताओं की बीवियाँ चुनावी ख़र्च वहन करने के लिए अपने गहने बेच रही हैं? उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर लोगों ने पूछा कि क्या उनकी पार्टी के अध्यक्ष राहुल गाँधी साइकिल और बाइक से देश भर में घूम कर रैलियाँ कर रहे हैं? इससे पहले कमलनाथ ने भाजपा दफ़्तर बनाने के लिए प्रयोग किए गए रुपयों का भी हिसाब-किताब माँगा था। मध्य प्रदेश की 6 लोकसभा सीटों के लिए आज सोमवार (अप्रैल 29, 2019) को मतदान संपन्न हुआ।

इस चुनाव में छिंदवाड़ा से कमलनाथ के पुत्र नकुल नाथ कॉन्ग्रेस प्रत्याशी हैं। आज जब कमलनाथ शिकारपुर में अपने परिवार सहित वोट देने पहुँचे तो अजीब घटना हुई। कमलनाथ के वहाँ पहुँचते ही बिजली कट गई। काफ़ी देर तक बिजली कटी रहने के कारण कमलनाथ को मोबाइल कैमरे की फ़्लैश लाइट में वोट देना पड़ा। आधे घंटे से भी अधिक समय तक बिजली कटी रही। सोशल मीडिया पर कई दिनों से ऐसी बातें चल रही हैं कि कमलनाथ के सत्ता सँभालने के बाद से ही प्रदेश में इन्वर्टर की बिक्री बढ़ गई है। ऐसा इसीलिए, क्योंकि राज्य में पावर कट आम बात हो गई है।

कमलनाथ छिदंवाड़ा से 9 बार सांसद रह चुके हैं और 1 बार उनकी पत्नी अलका नाथ भी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इस बार कमलनाथ के बेटे मैदान में हैं और उनका मुक़ाबला भाजपा नेता नत्थन शाह से हो रहा है। नत्थन शाह जुन्नारदेव सीट से भाजपा के विधायक रह चुके हैं। 2013 के चुनाव में नत्थन शाह ने कॉन्ग्रेस के सुनील उईके को 20 हजार मतों से मात दी थी। छिड़वाड़ा को कमलनथ का पारम्परिक सीट और गढ़ माना जाता है। चूँकि कमलनथ अब मुख्यमंत्री बन गए हैं, इसीलिए वो छिंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं और लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपने पुत्र को उतारा है।

ऐतिहासिक: कश्मीरी पंडितों ने बनाई पार्टी, पहली बार विधानसभा उम्मीदवार होंगे प्रवासी कश्मीरी पंडित

तकरीबन 3 दशकों तक प्रवासी रहने के बाद अब प्रवासी कश्मीरी पंडित समुदाय जम्मू कश्मीर में आगामी विधानसभा चुनावों में न्याय और सम्मान की लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। अगली विधानसभा में चुनावी आगाज करने के लिए इस समुदाय ने एक राजनीतिक पार्टी बनाई है। प्रवासी कश्मीरी पंडितों ने न्याय के लिए लड़ने और निर्वासित कश्मीरी पंडित समुदाय के पुनर्वास के लिए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अशोक भान की अध्यक्षता में ‘कश्मीरी पंडित राजनीतिक कार्रवाई समिति’ (KPPAC) नामक एक राजनीतिक पार्टी बनाई है। संगठन ने अपनी पार्टी के लिए समर्थन जुटाने के लिए देश भर में सदस्यता अभियान भी शुरू किया है।

खबर के अनुसार, KPPAC जम्मू और कश्मीर में आगामी विधानसभा चुनावों में कई निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों को मैदान में उतारने के लिए तैयार है। हालँकि, यह पहली बार होगा जब जम्मू कश्मीर के विधानसभा चुनाव में प्रवासी कश्मीरी पंडित समुदाय को उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतारा जाएगा।

KPPAC के उपाध्यक्ष सतीश महालदार ने कहा कि वो चुनाव में उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की योजना बना रहे हैं और साथ ही अन्य राजनीतिक दलों से भी गठबंधन की माँग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के अधिकांश राजनीतिक पार्टियाँ लोगों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं कर रहे हैं। सतीश महालदार का कहना है कि चुनाव में जीत हासिल करने के लिए पार्टियों के द्वारा प्रलोभन देना उन्हें अस्वीकार्य है। वो कहते हैं कि हम इंसान हैं और हमारे साथ इज्जत से पेश आना चाहिए।

पार्टी के द्वारा चलाए जा रहे सदस्यता अभियान के बारे में महालदार ने कहा कि इसके लिए नामांकन प्रक्रिया पहले से ही चालू है और वो कश्मीर के अंदर गठबंधन करने वाले साझेदारों की तलाश में हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी में सिर्फ कश्मीरी पंडितों को ही नहीं बल्कि लद्दाख, कश्मीरी कट्टरपंथियों, सिखों और अन्य लोगों को भी शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाता है। वो कहते हैं कि वो न्याय के लिए लड़ रहे हैं और यह राजनीतिक विचारधारा है। वो कश्मीर में सभी समुदायों के लिए लड़ेंगे।

गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर राज्य राष्ट्रपति शासन के अधीन है। जम्मू कश्मीर में भाजपा और पीडीपी के गठबंधन की सरकार थी, मगर पिछले साल जून में पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के साथ हुए मतभेद के बाद भाजपा सरकार ने अपना समर्थन वापस ले लिया था, जिसकी वजह से जम्मू कश्मीर में सरकार गिर गई और फिर 6 महीने के राज्यपाल शासन के बाद पिछले साल दिसंबर में यह राज्य राष्ट्रपति शासन के अधीन हो गया।

मुग़ल, ब्रिटिश और इटली का ग़ुलाम रहा है भारत, अब मिली असली आज़ादी: कंगना

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत देश से जुड़े मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखने के लिए जानी जाती हैं। मणिकर्णिका फ़िल्म से धमाल मचाने वाली कंगना राजनीतिक मुद्दों पर भी काफ़ी मुखर रही हैं। इसके लिए न जाने कितने ही फ़िल्मी सितारों के निशाने पर आ चुकी कंगना ने बॉलीवुड में वंशवाद के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाकर अपनी ही इंडस्ट्री के लोगों को नाराज़ कर दिया था। अब कंगना रनौत ने ताज़ा बयान दिया है, जिसके कारण सोशल मीडिया पर लोगों ने अलग-अलग रिएक्शन दिए। कंगना ने कहा कि भारत न सिर्फ़ मुग़लों और अंग्रेजों बल्कि इटली का भी ग़ुलाम रहा है। उन्होंने पिछली सरकारों पर देश को ग़रीब बनाए रखने का आरोप लगाते हुए ‘भारत के लिए’ मतदान करने का निवेदन किया।

कंगना ने साफ़-साफ़ कॉन्ग्रेस पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब तक वो लोग सत्ता में थे तब तक देश में ग़रीबी, भूखमरी और प्रदूषण का माहौल तो था ही, साथ-साथ बलात्कार की घटनाएँ भी बढ़ गई थीं। कंगना ने लोगों से बड़ी संख्या में देश के लिए वोट करने की अपील की। कंगना ने हाल ही में फ़िल्म इंडस्ट्री के लोगों पर राजनीतिक रूप से निष्क्रिय होने और सही चीज़ों के लिए आवाज़ न उठाने का आरोप लगाया था। कंगना इससे पहले भी कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन कर चुकी हैं और भरोसा जता चुकी हैं कि उनके नेतृत्व में देश के प्रशासन में सुधार आया है, देश विकास के रास्ते पर जा रहा है।

कंगना के ताज़ा बयान पर विवादित फ़िल्म समीक्षक और अभिनेता कमाल आर खान (KRK) बिफ़र गए और पूछा कंगना नशे में थी क्या? केआरके ने गिनाते हुए कहा कि मनमोहन, मोदी और वाजपेयी में से कोई भी इटली के नागरिक नहीं थे। बता दें कि कंगना का इशारा यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी की तरफ था। अगर फ़िल्मों की बात करें तो कंगना रनौत की ‘मेन्टल है क्या’ इसी वर्ष रिलीज के लिए तैयार है और इसके बाद वो ‘पंगा’ में नज़र आने वाली हैं। इसके अलावा कंगना अपने करियर की सबसे बड़े फ़िल्मों में से एक में तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के किरदार में दिखेंगी। कंगना ने कहा था कि वो जयललिता की और अपनी ज़िदगी के बीच कई समानताएँ देखती हैं। जयललिता की बायोपिक तमिल और हिंदी में बनेगी।

वसीमुल हक़ के क्षेत्र में TMC गुंडों ने की BJP कार्यकर्ता की पिटाई, सांसद ने बताया हिटलरशाही

तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों द्वारा एक भाजपा कार्यकर्ता की बुरी तरह पिटाई कर उसे लहूलुहान कर देने की ख़बर आई है। ट्विटर अंकुर सिंह ने लहूलुहान भाजपा कार्यकर्ता का फोटो शेयर कर दावा किया कि तृणमूल के गुंडों ने उन्हें बुरी तरह पीटा है। पीड़ित भाजपा कार्यकर्ता के बेटे ने भी अपने पिता का फोटो शेयर कर अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई। प्रतीक ने ट्विटर के माध्यम से पूरे देश का सहयोग माँगा और कहा कि अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो उनके पूरे परिवार को इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा।

पश्चिमी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से सांसद व भाजपा नेता प्रवेश साहिब सिंह ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि जनता इस हिटलरशाही को बर्दाश्त नहीं करेगी और ममता बनर्जी को इस चुनाव में कड़ा सबक सिखाएगी। पीड़ित भाजपा कार्यकर्ता ऑटो और रिक्शा में भाजपा के लिए प्रचार किया करते हैं। अंकुर के अनुसार, उन्हें आसनसोल के बूथ संख्या 79 में तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों द्वारा पीटा गया।

ट्वीट में दी गई जानकारी के अनुसार तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता वसीमुल हक़ उस क्षेत्र के पार्षद हैं। बंगाल से लगातार आ रही हिंसा की घटनाओं के कारण वहाँ माहौल दूषित हो चुका है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसके लिए सीधा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ज़िम्मेदार ठहराया है। तृणमूल के गुंडों द्वारा कभी ईवीएम में टीएमसी के बटन पर इत्र छिड़क कर वोट देकर बाहर आते मतदाताओं की उँगलियाँ सूँघने की ख़बर आ रही है तो कभी वे पोलिंग बूथ पर ही बम फेंककर भाग जा रहे हैं।

‘कॉन्ग्रेस में पढ़ने-लिखने वालों का अभाव’ – क्या दिग्विजय का इशारा राहुल गाँधी की ओर है?

मध्य प्रदेश के कद्दावर पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के भोपाल प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने अप्रत्याशित रूप से एक सच की स्वीकारोक्ति की है। उन्होंने यह माना कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बाद से उनकी पार्टी में लिखने-पढ़ने की, मतलब विचारों के आदान-प्रदान की परिपाटी ख़त्म हो गई है। और अब उनकी पार्टी विचारधारा के लिए कम्युनिस्टों पर निर्भर है। उन्होंने यह बात सीपीआई के कार्यालय में दिए गए अपने भाषण के दौरान कही।

‘नेहरू जी के बाद कॉन्ग्रेस ने लिखने-पढ़ने पर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया’

26/11 को संघ की साजिश बताने वाली किताब का विमोचन करने वाले दिग्विजय सिंह ने अपनी ही पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पंडित नेहरू के बाद से किसी कॉन्ग्रेसी ने बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया है। आज भी सोच-विचार में उनकी पार्टी, भाकपा, माकपा, और यहाँ तक कि मार्क्सवादी-लेनिनवादी भाकपा (माले) से प्रेरणा लेती है।

प्रज्ञा से पार पाने को है कन्हैया कुमार का सहारा

दिग्विजय सिंह के खिलाफ़ भाजपा ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को प्रत्याशी बनाया है। प्रज्ञा को कॉन्ग्रेस ने उसी काल्पनिक ‘हिन्दू आतंकवाद’ का चेहरा बनाने की पुरजोर कोशिश की थी जिसे दिग्विजय सिंह ने प्रचारित करने में कोई कसार नहीं छोड़ी थी। और भोपाल से सैकड़ों किलोमीटर दूर से बेगूसराय के सीपीआई प्रत्याशी कन्हैया कुमार वामपंथी वोटरों को इकट्ठा कर दिग्विजय सिंह की सहायता करने 8-9 मई को भोपाल आएँगे। दिग्विजय ने भी बदले में अहसान उतारते हुए अपनी पार्टी के गठबंधन कैंडिडेट के खिलाफ जाकर कन्हैया कुमार का समर्थन किया, और कन्हैया को गठबंधन का टिकट न दिए जाने को अपने गठबंधन की भूल बताया।

कुत्ता कर रहा था BJP का प्रचार, पुलिस ने किया अरेस्ट: मालिक के खिलाफ FIR दर्ज

महाराष्ट्र में पुलिस द्वारा चुनाव के दिन (29 अप्रैल) अपने शरीर से चिपके भाजपा समर्थित स्टिकर के साथ घूमने वाले एक कुत्ते को हिरासत में लिए जाने की ख़बर सामने आई है। ख़बर के अनुसार, नवनाथनगर इलाक़े के निवासी एकनाथ मोतीराम चौधरी (65) को सोमवार दोपहर अंधारे अस्पताल के पास अपने कुत्ते के साथ देखा गया।

स्थानीय पुलिस अधिकारी के अनुसार कुत्ते का शरीर भाजपा के प्रतीक और “मोदी लाओ, देश बचाओ” के नारे के साथ कवर किया गया था (मोदी के लिए वोट, देश बचाओ)।

पुलिस ने जानकारी दी कि देश में मतदान प्रक्रिया अभी जारी है, इसलिए शहर में घूम रहे कुत्ते और उसके मालिक के बारे में उन्हें शिक़ायत मिली थी।

चुनाव नियमों के उल्लंघन के लिए चौधरी के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 171(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया है, जो चुनाव के दिन प्रचार करने को प्रतिबंध से संबंधित है। एक स्थानीय पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने नगर निगम से कुत्ते को हिरासत में लेने के लिए कहा था, जिसके बाद निगम ने कुत्ते को हिरासत में ले लिया।

नहीं है जो मुहम्मद का, हमारा हो नहीं सकता: कॉन्ग्रेसी ‘आचार्य’ प्रमोद कृष्णन की घटिया और जहरीली कविता

भारतीय जनता पार्टी के प्रादुर्भाव के बाद से ही कॉन्ग्रेस ने भी सॉफ्ट हिंदुत्व का दिखावा शुरू कर दिया है। यही कारण था कि गुजरात चुनाव के दौरान राहुल गाँधी ने मंदिर-मंदिर घूम कर ‘टेम्पल रन’ किया। कॉन्ग्रेस को भरोसा है कि कथित अल्पसंख्यक वर्ग तो उनके मुख्य वोटर हैं ही और हिंदुत्व का दिखावा कर हिन्दुओं को भी लुभाया जा सकता है। हाल ही में राहुल गाँधी चुनाव लड़ने के लिए वायनाड गए और कई कॉन्ग्रेस नेताओं ने साफ़-साफ़ कहा है कि अल्पसंख्यकों की अच्छी संख्या होने के कारण उन्हें वहाँ से जीतने में परेशानी नहीं होगी। इसी तरह नक्सलियों के भी समर्थन में कॉन्ग्रेस नेता बोलते रहे हैं। लेकिन कॉन्ग्रेस अब वापस मुस्लिमों को लुभाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है। सपा-बसपा महागठबंधन के दौर में मुस्लिम वोटरों के छिटकने की आशंका से घिरी कॉन्ग्रेस ने मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति अपनाने में तेज़ी लाई है।

लखनऊ लोकसभा क्षेत्र से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार और ख़ुद को आचार्य बताने वाले प्रमोद कृष्णन कॉन्ग्रेस के हर उस रवैये के साक्षात प्रतिमूर्ति हैं, जिस पर चलकर पार्टी अपनी खोई सत्ता हासिल करने की चेष्टा कर रही है। कॉन्ग्रेस नेता प्रमोद कृष्णन वैसे तो हिन्दू साधु-संत की वेशभूषा में रहते हैं लेकिन उनमें या उनकी विचारधारा में न हिन्दुओं के कोई लक्षण दिखते हैं और न ही साधु-संतों की मर्यादा का तनिक भी समावेश है। हिन्दू संत की चोली में प्रमोद कृष्णन को कॉन्ग्रेस ने झूठ, प्रोपेगेंडा और तुष्टिकरण की नीति पर अमल करने के लिए रखा हुआ है। लेकिन ऐसे में प्रमोद कृष्णन को अपने नाम से ‘आचार्य’ हटा देना चाहिए। नीचे दी गई वीडियो में आप इन्हें ‘मस्त-मस्त’ गाने पर थिरकते और गाते देख सकते हैं।

भारतीय अखाड़ा परिषद द्वारा पाखंडी बाबा के रूप में प्रसिद्ध प्रमोद कृष्णन संभल कल्कि पीठ के पीठाधीश्वर भी हैं लेकिन इन्होंने इस चोली में हिन्दू धर्म को बदनाम करने की हरसंभव कोशिश की है। प्रमोद कृष्णन के एक अन्य साथी चक्रपाणि महाराज को भी पाखंडी बाबा के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। ऐसा नहीं है कि प्रमोद कृष्णन इस बार चुनाव लड़ने के लिए कॉन्ग्रेस में आए हैं, उन्होंने 2014 में भी संभल लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। कॉन्ग्रेस के टिकट पर उस समय उसकी ज़मानत ज़ब्त हो गई थी। प्रमोद कृष्णन को उस चुनाव में डेढ़ प्रतिशत मतों से संतोष करना पड़ा था।

2017 में एक कार्यक्रम में प्रमोद कृष्णन ने सांप्रदायिक बयान देते हुए साफ़-साफ़ कहा था कि जो मुहम्मद का नहीं हो सकता वो हमारा भी कभी नहीं होगा। मुस्लिमों को लुभाने के लिए प्रमोद कृष्णन ने कह डाला था कि जो मुहम्मद का नहीं हुआ, वह किसी और का कभी नहीं हो सकता है। नीचे संलग्न की गई वीडियो में आप उन्हें ऐसा बोलते हुए सुन सकते हैं।

अपने आप को पैगम्बर मुहम्मद के दामाद हज़रत अली का अनुयायी बताने वाले प्रमोद कृष्णन चुनाव के दौरान ध्रुवीकरण की कोशिश करते रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक़ पर निर्णय देने के बावजूद वह टीवी न्यूज़ चैनलों पर आकर केंद्र सरकार से पूछते रहते हैं कि जैसे तीन तलाक़ पर कार्य किया गया, वैसे ही राम मंदिर पर क्यों नहीं आगे बढ़ा जा रहा है? लखनऊ में प्रमोद कृष्णन का मुक़ाबला वर्तमान सांसद और केंद्र गृह मंत्री राजनाथ सिंह से है। सपा-बसपा महागठबंधन ने यहाँ से कॉन्ग्रेस नेता शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा को टिकट दिया है। शत्रुघ्न अपनी पार्टी को नज़रअंदाज़ कर अपनी पत्नी का प्रचार करने लखनऊ आए भी थे।

TMC ने की नए लेवल की गुंडई: EVM बटन पर छिड़का इत्र, हर वोटर की सूँघी ऊँगली और…

तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बौखलाहट में अज़ीबोग़रीब तरीके आज़माने शुरू कर दिए हैं। तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों ने ईवीएम में किसी भी प्रकार की कथित छेड़छाड़ का पता लगाने के लिए एक नया तरीका खोजा है। आनंद बाजार पत्रिका में छपी एक ख़बर के अनुसार, बीरभूम लोकसभा क्षेत्र स्थित मंगलकोट क्षेत्र के माँझीग्राम गाँव में तृणमूल कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के नाम और चुनाव चिह्न के सामने वाले बटन पर तृणमूल कार्यकर्ताओं द्वारा इत्र छिड़क दिया गया। इसके बाद जो भी मतदाता अंदर वोट देने के बाद बाहर निकल रहा था, ये गुंडे उसकी ऊँगली सूँघ रहे थे ताकि पता लगा सके कि मतदाताओं ने तृणमूल को वोट दिया है या नहीं। पहले से ही पूरे बंगाल में हिंसा फैला रहे तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों की इस हरक़त को लेकर ममता बनर्जी भी चुप हैं।

तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों ने उन मतदाताओं को परेशान किया, जिनकी ऊँगली से इत्र की महक नहीं आ रही थी। जिनकी ऊँगली से इत्र की महक आ रही थी, उन्हें यह समझकर छोड़ दिया गया कि उन्होंने तृणमूल को ही वोट दिया है। पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि ऐसा कुछ भी नहीं किया गया। पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ रहे हैं, चुनाव आयोग को तृणमूल कार्यकर्ताओं द्वारा फैलाई जा रही हिंसा को रोकने में काफ़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

चुनाव आयोग ने 30 अप्रैल की सुबह तक विवादास्पद TMC नेता अनुब्रत मंडल पर कड़ी निगरानी रखने का फैसला किया है। मतदानकर्मियों ने TMC नेता के प्रति अपना डर व्यक्त किया था जिसके बाद चुनाव आयोग ने रविवार (28 अप्रैल) को यह फैसला लिया। मतदानकर्मियों ने यह भी कहा था कि यदि TMC बीरभूम जिला अध्यक्ष मतदान के दिन एक बूथ से दूसरे बूथ तक चहलकदमी करेंगे यानी वहाँ आएँगे-जाएँगे तो इससे उन्हें ख़तरा है। बीरभूम में भाजपा कार्यालय के बाहर पुलिस तैनात थी, जहाँ यह आरोप लगाया गया था कि TMC के गुंडों ने कार्यालय में तोड़फोड़ की थी। मंडल ने इस आरोप का खंडन किया और कहा कि बीजेपी इन हमलों का ज़िक्र केवल ‘ध्यान आकर्षित’ करने के लिए कर रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस तरह की हिंसक वारदातों के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि तृणमूल के गुंडे विपक्षी प्रत्याशियों को प्रचार तक नहीं करने दे रहे। प्रधानमंत्री ने सीधा ममता पर हमला बोलते हुए उन्हें हिंसा के लिए ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि तृणमूल सरकार दमनकारी नीतियों पर चल रही है।

रिपब्लिक टीवी, इंडिया टुडे के पत्रकारों पर TMC के गुंडों ने बरसाई लाठियाँ, महिला पत्रकार को भी नहीं बख़्शा

चौथे चरण के चुनाव के दौरान जहाँ सारा देश लगभग शांति से मतदान कर रहा था, वहीं पश्चिम बंगाल से हिंसा और धांधली की खबरें आईं। इन खबरों को कवर करने गई रिपब्लिक टीवी ने बताया है कि इस दौरान TMC के गुंडों ने उन पर हमला किया

रिपब्लिक टीवी के अनुसार, उनकी पत्रकार शांताश्री, अपने साथी पत्रकार के साथ आसनसोल से रिपोर्टिंग कर रही थीं। वहाँ TMC के गुंडों ने लाठियों से उनकी कार पर हमला किया और खिड़की तोड़ दी। शांताश्री ने बताया कि वे भाजपा सांसद बाबुल सुप्रियो की कार के पीछे-पीछे चल रहे थे। अचानक से TMC के गुंडे भड़क गए और उन्होंने उन पर हमला कर दिया। ख़बर के अनुसार, जिन-जिन मीडिया वाहनों ने भाजपा नेता की कार का पीछा किया, उन्हें ही निशाना बनाया गया।

गुंडों ने कथित तौर पर मीडियाकर्मियों को गालियाँ दीं और जब उन्हें रिपोर्ट करने की कोशिश की गई तो उनका पीछा किया गया। इससे पहले, TMC कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर आसनसोल में सुप्रियो की कार पर हमला किया था।

रिपब्लिक टीवी के चालक दल के अलावा, इंडिया टुडे के चालक दल और पत्रकार मनोग्य लोईवाल पर भी कथित तौर पर TMC के गुंडों द्वारा ही हमला किया गया।

जब चुनावी हिंसा की ख़बरें सामने आती हैं तो ममता बनर्जी की अगुवाई वाली TMC सरकार की छवि उभरकर सामने आती है। बता दें कि चुनावों के दौरान पश्चिम बंगाल सबसे हिंसक राज्यों में से एक बना हुआ है। 2019 के लोकसभा चुनावों की शुरुआत से ही राज्य में राजनीतिक हिंसा और धमकियों का सिलसिला लगातार जारी रहा। पश्चिम बंगाल में कृष्णानगर मतदान केंद्र पर क्रूड बम पाए गए, और नादिया ज़िले के शांतिपुर मतदान केंद्र से भी बम बरामद किए गए।

चाय देर से मिली, लेट उठी, आसनसोल हिंसा की नहीं कोई जानकारी- TMC नेता मुनमुन सेन

लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में 9 राज्यों की 72 सीटों पर आज वोट डाले जा रहे हैं। जिसमें पश्चिम बंगाल की 8 सीटें भी शामिल हैं। पिछले चरणों की तरह इस बार भी पश्चिम बंगाल हिंसा से अछूता नहीं रहा। पहले तीन चरणों में भी बंगाल में मतदान के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा के साथ-साथ धांधली की खबरें सामने आईं थी। चौथे चरण के मतदान के दौरान आसनसोल के भाजपा सांसद बाबुल सुप्रियो पर हमला किया गया। साथ ही भाजपा कार्यकर्ताओं पर भी हमला किया गया।

वोटिंग के दौरान हुई हिंसा के बारे में जब तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की नेता और आसनसोल की उम्मीदवार मुनमुन सेन से पूछा गया तो उन्होंने कहा उन्हें इसके बारे में कुछ भी नहीं पता है, क्योंकि आज सुबह वो सोकर देर से जगी हैं। उन्होंने कहा कि बेड टी देर से मिलने की वजह से उनकी नींद देर से खुली और इस हिंसा के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

वहीं जब पत्रकारों ने पश्चिम बंगाल में होने वाली हिंसा के बारे में पूछा कि इस तरह की हिंसा बार-बार क्यों हो रही है? तो मुनमुन ने इस पर आपत्ति जताते हुए पत्रकारों से कहा कि वो (पत्रकार) उस वक्त बहुत छोटे रहे होंगे, जब बंगाल में कम्युनिस्ट सरकार के शासन काल में हिंसा हुआ करती थीं, वो भी सिर्फ बंगाल में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में। कुल मिलाकर इस दौरान वो इस हिंसा पर कुछ भी बोलने से बचती नज़र आईं।

इसके साथ ही जब उनसे पिछले साल आसनसोल में रामनवमी के दौरान हुई हिंसा के बारे में पूछा गया कि क्या उन्होंने दंगे के शिकार हुए पीड़ितों से मुलाकात की थी, तो उन्होंने कहा कि उस दौरान वो काफी व्यस्त थीं। उस समय काफी रैलियाँ और बैठकें थीं, जिसकी वजह से वो उनसे नहीं मिल पाईं। वो सिर्फ अपना और तृणमूल का प्रचार कर रही हैं।