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भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जिन्ना का अहम योगदान: राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस नेता ने चला मुस्लिम कार्ड

राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी ने शत्रुघ्न सिन्हा के उस बयान का बचाव किया है जिसमें उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को कॉन्ग्रेस परिवार का हिस्सा बताया था। पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की प्रशंसा करने के कारण विवादों में आए शत्रुघ्न सिन्हा का बचाव करते हुए एनसीपी नेता मजीद मेमन ने कहा कि शत्रुघ्न सिन्हा कल तक भाजपा के साथ थे, इसीलिए उन्होंने अगर कुछ देश-विरोधी बात कही भी है तो ये भाजपा की शिक्षा है। मेमन ने कहा कि अमित शाह को याद रखना चाहिए कि सिन्हा कुछ दिनों पहले तक उनके ही साथ थे। जिन्ना का बचाव करते हुए मेमन ने भारत की स्वतंत्रता संग्राम में उनका ‘अहम योगदान’ बताया। उन्होंने कहा कि जिन्ना को लेकर सिन्हा द्वारा दिए गए बयान पर लोग आपत्ति इसीलिए जता रहे हैं क्योंकि जिन्ना एक मुस्लिम थे।

हाल ही में शत्रुघ्न सिन्हा ने मोहम्मद अली जिन्ना के बारे में कहा था,

“कॉन्ग्रेस परिवार महात्मा गाँधी से लेकर सरदार वल्लभ भाई पटेल तक, मोहम्मद अली जिन्ना से लेकर जवाहर लाल नेहरू तक, इंदिरा गाँधी से लेकर राजीव गाँधी और राहुल गाँधी तक की पार्टी है। भारत की आज़ादी और विकास में इन सभी का योगदान है। इसलिए मैं कॉन्ग्रेस पार्टी में आया हूँ। और, एक बार आ गया हूँ तो पहली और शायद आख़िरी बार कॉन्ग्रेस पार्टी में तो मुड़कर कहीं वापस नहीं जाऊँगा।”

बाद में इस बयान को लेकर चौतरफा आलोचना से घिरे शत्रुघ्न सिन्हा ने ‘ज़बान फिसलने’ का बहाना बनाया था। उन्होंने कहा कि वो मौलाना आज़ाद का नाम लेना चाह रहे थे लेकिन ग़लती से मुँह से जिन्ना का नाम निकल गया। उन्होंने माफ़ी माँगने से इनकार करते हुए कहा कि उनसे कोई ग़लती नहीं हुई है। अब मज़ीद मेमन ने सिन्हा के इसी बयान का बचाव किया है। बता दें कि शत्रुघ्न सिन्हा पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र से कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार हैं।उनका मुक़ाबला भाजपा के रविशंकर प्रसाद से होगा। दशकों से भाजपा में रहे सिन्हा हाल ही में पार्टी छोड़कर कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए थे।

कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम ने भी सिन्हा के इस बयान से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उनके जो भी विचार हैं, उसे उन्हें ही एक्सप्लेन करनी चाहिए। चिदंबरम ने उल्टा भाजपा से सवाल पूछ दिया कि सिन्हा अब तक भाजपा में क्यों थे? उन्होंने झल्लाते हुए कहा कि उन्हें पार्टी के हर सदस्य के बयानों पर सफाई नहीं देनी है। शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी लखनऊ से सपा उम्मीदवार हैं और उनके लिए लखनऊ में शत्रुघ्न चुनाव प्रचार भी कर चुके हैं।

PM मोदी की प्रस्तावक डॉ अन्नपूर्णा शुक्ला: वो महिला जिसने ब्रिटेन की एक इंडस्ट्री को झुका दिया था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (अप्रैल 26, 2019) को जब वाराणसी से नामांकन दाखिल किया, तो इस दौरान उनके चार प्रस्तावकों को लेकर खूब चर्चा रही। पीएम मोदी ने 2019 के नामांकन में चार अलग-अलग क्षेत्र के प्रस्तावकों को शामिल किया। ये प्रस्तावक थे- डोमराज परिवार के जगदीश चौधरी, सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष गुप्ता, बीएचयू महिला महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्या डॉक्टर अन्नपूर्णा शुक्ला और कृषि वैज्ञानिक राम शंकर पटेल।

इन चारों प्रस्तावकों में से सबसे अधिक चर्चा में रहीं डॉक्टर अन्नपूर्णा शुक्ला। इसके पीछे वजह यह रही कि जब पीएम नामांकन के लिए कलेक्ट्रेट परिसर पहुँचे, तो वहाँ उन्होंने डॉक्टर शुक्ला के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। ऐसे में लोग इस बात से चकित हो गए कि आखिर ये महिला कौन है और पीएम ने नामांकन से पहले इनके पैर क्यों छुए?

पंडित मदन मोहन मालवीय ने दिया था आशीर्वाद

ख़बर के अनुसार, डॉ अन्नपूर्णा शुक्ला को मदन मोहन मालवीय की मानस पुत्री माना जाता है। वो मदन मोहन मालवीय का आशीर्वाद पाने वाली एकमात्र जीवित पूर्व प्राचार्या हैं। यही वजह है कि उन्हें मालवीय की दत्तक पुत्री भी कहा जाता है। 91 वर्षीय अन्नपूर्णा शुक्ला पीएम की प्रस्तावक बनकर बेहद खुश दिखीं। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, “जब मोदीजी आए और मेरे पैर छुए तो मैंने एक माँ की तरह उन्हें आशीर्वाद दिया। मैंने उनसे यह भी कहा कि आप ऊँचे शिखर पर जाओगे।”

पीएम मोदी की प्रस्तावकों में शामिल होने पर चर्चा में आई डॉक्टर अन्नपूर्णा शुक्ला के नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य में उनके योगदान के बारे में काफी कम लोग ही जानते हैं। कुछ ही लोगों को पता होगा कि डॉ शुक्ला ने 1969-72 में रिसर्च करके इस बात का पता लगाया था कि माँ का दूध नवजात के लिए बेहद जरूरी है। नवजात शिशु को 6 महीने तक माँ का दूध ही देना चाहिए। इससे बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। डॉ शुक्ला के इस शोध के बाद ब्रिटेन की एक बेबी फूड कंपनी ने इस खास मैसेज को पैकेजिंग के साथ प्रकाशित करना शुरू किया। बहरहाल, अब इस संदेश को दुनियाभर की कंपनियों द्वारा प्रकाशित किया जाता है और इस बात के लिए दुनिया भर की माँओं को उनका शुक्रिया अदा करना चाहिए।

डॉ शुक्ला ने बच्चों के शरीर के कुल वजन, कैलोरी की मात्रा, दूध पिलाने के तरीके और मोटापे जैसे मापदंडों के बारे में अध्ययन किया। डॉ. शुक्ला की रिसर्च पूरी तरह से वैदिक परंपरा पर आधारित थी। जिस तरह बच्चों के 6 महीने का होने पर उसका अन्नप्राशन कराया जाता है और उसके बाद ही उसे दूध और चावल की खीर यानी ठोस आहार दिया जाता है। इस रिसर्च के दौरान डॉ. शुक्ला ने पाया कि जिन बच्चों को स्तनपान नहीं करवाया जाता था और ठोस आहार दिया जा रहा था, वे शिशु स्थूल थे और उनका वजन भी अधिक था।

जब डॉक्टर अन्नपूर्णा शुक्ला की यह रिसर्च प्रकाशित हुई, तो सरकार ने तुरंत बच्चों के लिए खाद्य सामग्री बनाने वाली कंपनियों के लिए निर्देश जारी किए कि वह इस चेतावनी को उत्पादों की पैकेजिंग में जरूर दर्शाएँ कि माँ के दूध का कोई विकल्प नहीं है। डॉ शुक्ला कहती हैं कि हालाँकि इससे उस समय कई कंपनियों को परेशानी हुई, मगर आज हम इस जानकारी के जरिए बच्चों को बचा पा रहे हैं।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय ने डॉ शुक्ला को काफी प्रभावित किया। वो बताती हैं कि जब वो सिर्फ पाँच साल की थी, तभी मदन मोहन मालवीय जी ने उनसे पूछा था कि वो क्या बनना चाहती है, तो उन्होंने कहा था कि वो डॉक्टर बनना चाहती है। महामनाजी (मदन मोहन मालवीय) ने उनसे कहा था, “एक दिन जब मैं डॉक्टर बनूँ तो वापस लौटकर बीएचयू आऊँ और वो मुझे जॉब देंगे।”

वो कहती हैं कि उन दिनों परिवार, महिलाओं को पढ़ाने के पक्षधर नहीं होते थे। डॉ शुक्ला की माँ डिप्टी कलेक्टर की बेटी थीं, लेकिन फिर भी वो अपने सिर पर कुएँ से पानी भर कर लाती थीं। हालाँकि आज बीएचयू जाने-माने मेडिकल कॉलेजों में गिना जाता है, लेकिन उन दिनों चिकित्सा संबंधी कोर्स यहाँ उपलब्ध नहीं थे। तब डॉ शुक्ला ने 1945 में पटना के प्रिंस ऑफ वेल्स मेडिकल कॉलेज (अब पटना मेडिकल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल) से एमबीबीएस की पढ़ाई की।

विनम्र स्वभाव के साथ-साथ ममता की मूरत हैं डॉक्टर अन्नपूर्णा शुक्ला

एमबीबीएस पूरा करने के बाद उनकी शादी हो गई और वह महिला महाविद्यालय में बतौर मेडिकल ऑफिसर काम करने लगीं। उन दिनों वह वाराणसी की चार महिला डॉक्टरों में से एक थीं। पंडित मदन मोहन मालवीय के बेटे गोविंद मालवीय के आग्रह पर वह उन दिनों गृह विज्ञान का लेक्चर भी बीएचयू में देती थीं। उस समय यूनिवर्सिटी में मेडिकल कॉलेज नहीं था। डॉ अन्नपूर्णा शुक्ला एक पढ़े-लिखे परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता बीएचयू के प्रवक्ता के रूप में कार्यरत थे और मदन मोहन मालवीय के करीबी थे। उनके पति बीएम शुक्ला गोरखपुर विश्वविद्यालय के वीसी पद से रिटायर हुए हैं। वहीं, चर्चित लेखक अमीश उनके भतीजे हैं। अमीश बताते हैं कि बुआजी (डॉ शुक्ला) अद्भुत महिला हैं। वो पारंपरिक, विनम्र और सशक्त महिला होने के साथ-साथ ममता की मूरत भी हैं।

नशे में धुत्त कन्हैया कुमार की गुंडई: कमल निशान देख कर BJP समर्थकों को पीटा, Video से हुआ खुलासा

बिहार आजकल बेगुसराय के नाम से ज्यादा चर्चा में बना हुआ है। इसी बेगुसराय के टेकनपुरा में वामपंथी उम्मीदवार कन्हैया कुमार और उसके गुंडों द्वारा बीजेपी समर्थकों को पीटने की ख़बर सामने आई है। यह घटना 25 अप्रैल रात 8:30 बजे से 9 बजे की है। दरअसल, 3-4 साथियों का एक ग्रुप खाली जगह पर बैठा हुआ था। कन्हैया कुमार का क़ाफ़िला उधर से गुज़र ही रहा था कि उनकी नज़र 3-4 साथियों में से एक यानी अंकित कुमार पर जा टिकी जिसकी शर्ट की जेब में कमल के फूल का बैच लगा हुआ था। इससे उन्हें पता चल गया कि वो बीजेपी समर्थक है। इतना जानने के बाद कन्हैया कुमार ख़ुद गाड़ी से उतर कर आया और गाली-गलौच के साथ उसके साथ मारपीट करने लगा।

इस मारपीट में कन्हैया कुमार का साथ उसके गुंडों ने भी दिया और अंकित कुमार को ज़ख़्मी कर दिया। बता दें कि अंकित ने अभी तक पुलिस में इस बाबत रिपोर्ट नहीं की है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि घटना के दौरान वहाँ मौजूद पुलिस (कन्हैया का गार्ड) भी तमाशा देख रही थी। इसी डर से अंकित ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।

टेकनपुरा के लोगों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को सिलसिलेवार ढंग से बताया और इसका जवाब मतदान के रूप में देने की बात कही। गाँव वालों ने ऑपइंडिया को जो बताया, ऊपर वीडियो में पूरा देख सकते हैं।   

इस मामले पर अंकित कुमार (पीड़ित) ने बताया, “सभी दोस्त एक साथ बैठे हुए थे कि तभी हम लोग की नज़र कन्हैया कुमार के क़ाफ़िले पर पड़ी। जब वो क़फ़िला मेरे नज़दीक आया तो गाड़ी देखने के लिए मैं उसके पास पहुँचा। वहाँ पहुँचने पर उन लोगों की नज़र मेरी पॉकेट पर लगे बीजेपी के बैच पर पड़ी। वो हमसे ठेठ भाषा में बोला ये क्या है। हम कुछ नहीं बोले, लेकिन इतने में ही उसके कार्यकर्ता लोग गाली-गलौच करते हुए गाड़ी से नीचे उतर आए और मेरे साथ मारपीट करने लगे। मेरी जान बचाने के लिए आए मेरे 2-3 दोस्तों को भी लाठी-डंडे से मारा।” अंकित ने बताया कि वहाँ मौजूद पुलिस ने कुछ नहीं किया केवल तमाशबीन बनी रही और गार्ड ने कन्हैया के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया। अंकित ने इस बात की भी जानकारी दी कि कन्हैया के साथियों के पास हथियार भी मौजूद थे।

अंकित कुमार के दोस्त आदर्श कुमार के अनुसार, कन्हैया कुमार और उसके साथियों ने इतनी शराब पी हुई थी कि उनसे बाइक तक नहीं संभल रही थी। बीजेपी का समर्थक होने की वजह से उसके दोस्त पर कन्हैया कुमार समेत उसका पूरा क़ाफ़िला मारपीट के लिए टूट पड़ा। भद्दी गालियाँ देने के अलावा उसे गंभीर रूप से घायल भी कर दिया।

टेकनपुरा क्षेत्र के निवासी राम विनोद ने बताया कि शर्ट की पॉकेट में केवल एक कमल का फूल लगा लेने से भड़के कन्हैया कुमार और उसके गुंडों ने अंकित को काफी बुरी तरह से मारा-पीटा। इस कारण उसकी कमर में चोट भी आई है।

एक अन्य निवासी चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि कन्हैया कुमार जो कम्यूनिस्ट उम्मीदवार हैं, उसका रोड शो चल रहा था। एक खाली स्थान पर 2-3 लड़के खड़े थे, उनमें से जिस लड़के (अंकित कुमार) के साथ मारपीट हुई उसकी शर्ट पर फूल का बैच लगा हुआ था। कन्हैया कुमार की गाड़ी जब मुड़ी तो अंकित कुमार उत्सुकतावश उस गाड़ी को देखने पहुँचे, जहाँ उनसे पूछा गया कि तुम्हारी शर्ट पर क्या लगा हुआ है, इसके बाद कन्हैया कुमार गाड़ी से उतरा और उसका कॉलर खींचकर उसको अपशब्द कहे और ख़ुद उसे मारने-पीटने लगे। साथ में कन्हैया कुमार के गुंडे भी अंकित कुमार पर टूट पड़े और पत्थरों से उसको पीटने लगे। उन्होंने बताया कि कन्हैया कुमार और उनके गुंडे अपनी गाड़ी में डंडा, ईंट के टुकड़े, पत्थर आदि सब रखते हैं। चंद्रशेखर सिंह ने स्पष्ट किया कि यहाँ ऐसा माहौल है कि अगर किसी के पास कमल का फूल भी देख लिया गया तो उसे अपना विरोधी मानकर उसके साथ जमकर मारपीट की जाती है।

इस घटना को पूरी तरह से सच बताने वाले कन्हैया प्रसाद ने बताया कि घटना के वक़्त भले ही वो वहाँ मौजूद नहीं थे लेकिन जिस लड़के को बेरहमी के साथ मारा-पीटा गया, उससे मिलने पर पता चला कि उसकी पॉकेट में कमल का फूल लगा हुआ था जिसकी वजह से कन्हैया कुमार और उसके समर्थक काफ़ी भड़क गए। उन्होंने यह भी बताया कि कमल का फूल या बीजेपी समर्थकों के साथ यह मारपीट का यह मामला पहला नहीं है, इससे पहले भी इस तरह की घटना को अंजाम दिया जा चुका है। कोरए गाँव में हुई घटना तो इससे भी अधिक भयावह थी, वहाँ जिसके साथ मारपीट की गई उसके सिर में गंभीर चोट (सिर फट गया) आई थी। इस तरह की घटनाओं का जवाब देने के लिए उन्होंने कहा, “हम लोग वोट के ज़रिए ही इसका बहिष्कार करेंगे।” कन्हैया कुमार को दबंग बताते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं के ज़रिए जनता पर दबाव बनाया जा रहा है कि किसी और को नहीं केवल उसे ही वोट दो।

कन्हैया कुमार की यह दबंगई सिद्ध करती है कि वो देश में किस तरह के लोकतंत्र को लाने के हितैषी हैं। बीजेपी समर्थकों पर खुलेआम हमलावर रुख़ इस बात को स्पष्ट करता है कि वो क्षेत्र में दबाव की राजनीति को हवा दे रहे हैं। अपने राजनीतिक करियर की लंबी उड़ान भरने की ख़्वाहिश में कन्हैया कुमार जानलेवा हरक़तों से भी बाज नहीं आते। अत: यह कहने में कोई गुरेज़ नहीं होनी चाहिए कि देश को ऐसे अराजकत तत्वों की आवश्यकता बिल्कुल नहीं है, जो लोकतंत्र के नाम पर गुंडागर्दी पर उतारू हैं।

फैक्ट चेक: आर्मी, PM मोदी और सर्जिकल स्ट्राइक पर काल्पनिक कहानीकार रामचंद्र गुहा ने बोला झूठ

ख़ुद को इतिहासकार मानने वाले रामचंद्र गुहा ने इस बार एक और झूठ फैलाया है। गुहा अक़्सर कभी बीफ तो कभी कुछ और के लिए विवादित चीजें लिखते रहते हैं, बोलते रहते हैं और ट्वीट करते रहते हैं। नेहरूवादी इतिहास लिखकर घटनाओं को तोड़-मरोड़ कर पेश करने में महारत हासिल कर चुके गुहा ने अब ताज़ा झूठ बोला है कि ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ शब्द भारतीय सेना ने नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईज़ाद किया था। उनके कहने का अर्थ था कि शुरुआत में इस शब्द का प्रयोग सेना ने नहीं किया था। लेफ्ट विंग मीडिया ‘द टेलीग्राफ’ में लिखे गए एक प्रोपेगंडा लेख में गुहा ने दावा किया कि नरेंद्र मोदी और उनके ख़ेमे ने एक अजेंडे के तहत पाकिस्तान के भीतर भारतीय सेना द्वारा किए गए आतंकरोधी ऑपरेशन को ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ नाम दिया, सेना ने ऐसा नहीं किया।

सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर रामचंद्र गुहा ने फैलाया झूठ

रामचंद्र गुहा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने के चक्कर में अक़्सर ऐसे फैक्ट्स का जिक्र किया है, जिसका सच्चाई से कोई वास्ता नहीं होता। अब हम आपको सच्चाई बताते हैं। जनता को सच्चाई जाननी ज़रूरी है कि पाकिस्तान में हुए आतंकरोधी ऑपरेशन को ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ किसने नाम दिया। असल में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का प्रयोग डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स (DGMO) द्वारा 29 सितंबर, 2016 को किए गए प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया गया था। ये प्रेस कॉन्फ्रेंस पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को तबाह करने के बाद किया गया था। इसीलिए इस सम्बन्ध में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का प्रयोग भारतीय सेना ने ही पहली बार किया गया था।

DGMOकी प्रेस कॉन्फ्रेंस

गुहा की विचारधारा से ही ताल्लुक रहने वाले विवादित पत्रकार रवीश कुमार ने भी भारतीय ऑपरेशन के तुरंत बाद ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ को लेकर एक प्राइम टाइम किया था। अगर इस हिसाब से देखें तो क्या रवीश कुमार भी आने वाले प्रोपेगंडाबाज़ हैं। रामचंद्र गुहा नेहरू परिवार के क़रीब माने जाते हैं और सोशल मीडिया पर नेहरू परिवार को सही दिखाने के लिए उनके द्वारा अक़्सर झूठ फैलाया जाता रहा है। लोग उनका झूठ पकड़ कर उन्हें सोशल मीडिया पर लताड़ते भी रहते हैं लेकिन गुहा झूठ फैलाना और ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ करना नहीं छोड़ते।

पिछले वर्ष नवंबर में एबीवीपी ने वाईस चांसलर को पत्र लिखकर गुहा का अपॉइंटमेंट कैंसल करने की गुज़ारिश की थी। इसके पीछे उनकी हिन्दू-विरोधी मानसिकता और भारत की हिन्दू संस्कृति के प्रति घृणा के भाव को कारण बताया गया था। इसके बाद गुहा ने ‘परिस्थितियाँ नियंत्रण से बाहर’ होने की बात कह ख़ुद को ही टीचिंग असाइनमेंट से बाहर कर लिया था।

राहुल गाँधी ने अज़ान के लिए रोका भाषण: वायनाड की ‘अल्पसंख्यक’ राजनीति अब अमेठी में

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने अपना चुनावी भाषण बीच में तब रोक दिया जब उन्हें पास की किसी मस्जिद से अज़ान की आवाज सुनाई दी। मामला उनके वर्तमान लोकसभा क्षेत्र अमेठी का है, जहाँ से वह एक बार फिर निर्वाचन के लिए उम्मीदवार हैं। गौरतलब है कि अज़ान दिन के पाँचों वक्त की अनिवार्य नमाज़ के लिए इस्लाम के समर्थकों को बुलाने के लिए लगाई जाती है।

वायनाड का रुख कर चुके हैं राहुल

हालाँकि, अमेठी राहुल गाँधी के परिवार का पारंपरिक लोकसभा क्षेत्र रहा है और वह खुद यहाँ से तीन बार संसद जा चुके हैं पर इस बार वह वायनाड से भी चुनाव लड़ रहे हैं। माना जा रहा है कि उन्हें ऐसा मोदी कैबिनेट की कद्दावर मंत्री और भाजपा से दूसरी बार अमेठी की प्रत्याशी स्मृति ईरानी के चलते करना पड़ रहा है। पिछली बार स्मृति ईरानी ने उन्हें कड़ी टक्कर दी थी, और उनका जीत का अंतर 2014 में 2009 के मुकाबले केवल एक-चौथाई बचा था- वो भी तब जब स्मृति ईरानी को भाजपा ने आखिरी समय में अमेठी भेजा था।

निर्वाचन में पराजित होने के उपरांत भी स्मृति ने अमेठी आना-जाना नहीं छोड़ा, और एक जनप्रतिनिधि की भाँति ही अमेठी के लिए कार्य किया है। शायद इसीलिए राहुल गाँधी को अमेठी से बाहर एक ‘सुरक्षित’ सीट भी देखनी पड़ी है।

हिन्दू अल्पसंख्यक हैं वायनाड में

राहुल गाँधी केरल के जिस वायनाड से ‘सुरक्षित’ लोकसभा निर्वाचन की आस लगाए हैं, वहाँ हिन्दू अल्पसंख्यक हैं, और इस्लामी-ईसाई मतावलंबी बहुतायत में हैं। ऐसे में राहुल गाँधी के इस सीट को चुनने के पीछे समुदाय विशेष के तुष्टिकरण से लेकर हिन्दुओं को ‘सन्देश’ तक बहुतेरे कयास लगाए जा रहे हैं। वायनाड में जहाँ 23 अप्रैल को मतदान संपन्न हो चुका है, वहीं अमेठी में 6 मई को होना है। निर्वाचन आयोग परिणामों की घोषणा 23 मई 2019 को करेगा।

‘माया, ममता या नायडू हैं PM पद के प्रमुख दावेदार, मैं खुद इस रेस में नहीं’

लोकसभा चुनावों में NDA को बहुमत आने की संभावना नहीं के बराबर है। ऐसे में मायावती या चंद्रबाबू नायडू या ममता बनर्जी देश के अगले प्रधानमंत्री बनने के लिए सबसे उपयुक्त कैंडिडेट हैं। प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी भी एक मुख्यमंत्री ही थे। ये तीनों भी मुख्यमंत्री हैं या रह चुके हैं। – चौथे चरण के मतदान से ठीक पहले राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्‍यक्ष शरद पवार ने यह कह कर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के लिए नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

शरद पवार ने टाइम्‍स ऑफ इंडिया से बातचीत में यह बात कही है। चुनाव-पूर्व गठबंधन की राजनीति में फेल रहे राहुल गाँधी के लिए यह एक स्पष्ट संकेत है। स्पष्ट संकेत इसलिए क्योंकि जो कयास शरद यादव ने NDA को लेकर लगाए हैं, अगर वो सही निकले तो चुनाव-बाद भी UPA का समीकरण कॉन्ग्रेस नहीं बल्कि क्षेत्रीय दलों द्वारा तय किया जाएगा।

राहुल गाँधी कमतर नहीं

पवार ने यह स्पष्ट किया कि उनका कहीं से भी यह मतलब नहीं है कि राहुल गाँधी मायावती या चंद्रबाबू नायडू या ममता बनर्जी से कमतर पीएम कैंडिडेट हैं। पवार को यह स्पष्टीकरण इसलिए देना पड़ा क्योंकि किसी न्यूज चैनल ने ठीक इसके उलट एक खबर चला दी थी। पवार ने सफाई देते हुए कहा कि खुद राहुल गाँधी कई बार बोल चुके हैं कि वो पीएम पद की रेस में नहीं हैं, इसलिए ऐसी बातों का कोई आधार नहीं है।

दिशाहीन ‘गठबंधन’

शरद पवार के अभी के और एक सप्ताह पहले की घटना को जोड़ कर देखेंगे तो हैरानी कम होगी, हँसी ज्यादा आएगी। हुआ यूँ कि एक सप्‍ताह पहले चंद्रबाबू नायडू और शरद पवार मुंबई में थे। तब नायडू ने कहा था कि वह पीएम पद की ओर नहीं देख रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनका लक्ष्‍य किसी भी तरह लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराना है। ऐसे में दिग्गज राजनेता पवार का यह बयान समझ से परे है। चौथे चरण के लिए जब चुनाव प्रचार थम चुका है, ऐसे महत्वपूर्ण और मझधार वाले समय में भी ‘गठबंधन’ सिर्फ कयासों के दम पर राजनीति कर रही है।

आपको बता दें कि कुछ दिन पहले चुनाव प्रचार के दौरान शरद पवार ने दावा किया था कि इस बार के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को कम से कम 100 सीटें कम मिलेंगी। इसलिए विपक्ष को प्रधानमंत्री पद के लिए नए चेहरों पर विचार-विमर्श करना होगा।

खुद भी पीएम की रेस से बाहर

उन्‍होंने खुद को भी देश के शीर्ष राजनीतिक पद की रेस से बाहर बताया था। पवार ने कहा था, ‘NCP केवल 22 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। हम 22 की 22 सीटें भी जीतते हैं, तो भी पीएम बनने के बारे में सोचना तर्कहीन होगा।’

फैक्ट-चेक: 60 सेकेंड से कम समय में प्रियंका गाँधी झूठी साबित, जनता को बना रही थीं मूर्ख

कॉन्ग्रेस की पूर्वांचल प्रभारी और महासचिव प्रियंका वाड्रा ने प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में पिछले 5 सालों में केवल 15 किलोमीटर की एक सड़क लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डे से वाराणसी शहर के लिए बनी है, उसके अलावा कोई सड़क ही नहीं बनी है। हमने इसका फैक्ट-चेक किया जिसमें कुल 60 सेकेंड के भीतर ही उनके इस दावे की कलई खुल गई।

एक ही रिपोर्ट काफी

हमने गूगल पर केवल “varanasi road construction” सर्च किया, जिसमें से केवल एक लिंक उठा कर खोलते ही प्रियंका वाड्रा का दावा फुस्स हो गया। आउटलुक की इस एक रिपोर्ट में प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा वाराणसी लोकसभा क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण सड़कों के लोकार्पण की खबर है, जिनकी कुल लंबाई 34 किलोमीटर है। यह सड़कें हैं राष्ट्रीय राजमार्ग 56 पर 17.25 किलोमीटर की वाराणसी-बाबतपुर सड़क, और 16.55 किलोमीटर की वाराणसी रिंग रोड (फेज़-1)।

यानी एक ही रिपोर्ट में प्रियंका के दावे से दोगुनी से ज्यादा की सड़कें निकल आईं। हमने अपना फैक्ट-चेक उसी जगह रोक दिया क्योंकि अगर किसी के दावे के विपरीत दुगना सबूत 1 मिनट के भीतर निकल आए तो उस पर अपना और अपने पाठकों का और समय व्यर्थ करना हमने उचित नहीं समझा।

क्या केवल झूठ पर ही टिकी है कॉन्ग्रेस की राजनीति?

प्रियंका वाड्रा का यह झूठ वर्तमान निर्वाचन प्रक्रिया में झूठों की बौछार की कॉन्ग्रेस की आखिरी रणनीति का ही हिस्सा है। इसी नीति के तहत कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी राफ़ेल-राफ़ेल करते देश में घूम रहे हैं, और कोई उनके झूठ को नहीं मान रहा। इधर उन्होंने न केवल अपने झूठ को सुप्रीम कोर्ट के हवाले से बोलने शुरू कर दिए हैं (जिसके लिए उन्हें न्यायालय की अवमानना का नोटिस भी जारी हो चुका है), बल्कि अब तो वे एक निजी उद्यमी अनिल अंबानी को सीधे-सीधे नाम लेकर बदनाम करने पर तुले हैं- वह भी बिना एक कतरे सबूत के। और अब प्रियंका का यह झूठ…

झूठ भी कैसा? जो एक मिनट में धराशायी हो गया! यानी या तो प्रियंका बिना कुछ सोचे-समझे रैलियों में जो मुँह में आया बोल दे रहीं हैं, और या फिर उन्होंने देश की जनता को इतना बेवकूफ़ समझा था कि वह जानबूझकर ऐसा झूठ बोल गईं, क्योंकि उन्हें लगा कि बेवकूफ़ जनता कभी गूगल पर जाँच ही नहीं करेगी उनके दावे की। यह इस देश की राजनीति के लिए बहुत दुखद है कि देश के सबसे पुराने राजनीतिक संगठन का शीर्ष नेतृत्व आज ऐसे लोगों के हाथ में है जो या तो बिना सोचे-समझे चुनावी रैलियों में कोई भी अनर्गल दावा कर रहे हैं, और नहीं तो देश की जनता को इतना निपट मूर्ख मानते हैं कि झूठ भी मरियल-सा बोलते हैं क्योंकि उन्हें लगता है जनता में उनके झूठ पकड़ने की काबिलियत ही नहीं है।

सोना से लेकर सोने वाली ‘दवाई’ तक, नकद से लेकर शराब तक: EC द्वारा ₹3205 करोड़ की ज़ब्ती

लोकसभा चुनाव 2019 के चौथे चरण का प्रचार थम चुका है। लेकिन धनबल का हंगामा जारी है। अच्छी बात यह है कि मतदाताओं को बरगलाने से पहले ही इस पर अंकुश लगा दिया गया। आँकड़े तो यही कहते हैं। 2014 के चुनावों के मुक़ाबले नकद बरामदगी में इस बार अब तक 156.3% का इज़ाफ़ा हुआ है।

सात चरणों में सम्पन्न होने वाले लोकसभा चुनाव 2019 की शुरुआत 11 अप्रैल से हो गई थी। आँकड़े के अनुसार अब तक देश भर से कुल ₹778.9 करोड़ की नकद राशि ज़ब्त की जा चुकी है। पिछले लोकसभा चुनाव की बात की जाए, तो 2014 के चुनावों के अंत तक ज़ब्त होने वाली राशि ₹303.86 करोड़ थी।

निर्वाचन आयोग द्वारा प्रतिदिन अपडेट किए जाने वाले आँकड़ों के मुताबिक अब तक ₹3205.72 करोड़ की बरामदगी को सूचीबद्ध किया गया है। इसमें नकदी, शराब, ड्रग्स मादक पदार्थ, सोना और अन्य कीमती वस्तुएँ शामिल हैं।

ख़बर के अनुसार, 2014 में अधिकारियों द्वारा ज़ब्त की गई सामग्रियों में सोना और अन्य क़ीमती धातुएँ सूची में शामिल नहीं थीं। जबकि इस बार न सिर्फ नगद बल्कि शराब से लेकर हर उस चीज पर आयोग की नजर है, जिससे मतदाता को प्रभावित किया जा सकता है।

ज़ब्त किए सोने के आधार पर तमिलनाडु, ₹708.71 करोड़ के 3,063 किलोग्राम सोने के साथ सबसे ऊपर है। इसके बाद मध्य प्रदेश का नंबर था, जहाँ 1,263 किलो सोना जब्त हुआ है। आख़िर में उत्तर प्रदेश है, जहाँ यह आंकड़ा 709 किलोग्राम सोने के साथ है।

ज़ब्त की गई नगद राशि की बात करें तो तमिलनाडु में ₹215.14 करोड़ की नकदी बरामद की गई। यह अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे अधिक है। आंध्र प्रदेश में ₹137.27 करोड़ और तेलंगाना में ₹68.82 करोड़ नकदी बरामद की गई।

इसके अलावा, इस वर्ष ₹1185.4 करोड़ के 62 मीट्रिक टन ड्रग्स और नशीले पदार्थ भी ज़ब्त किए गए। इनमें 19.4 टन के साथ उत्तर प्रदेश सबसे आगे है।

2019 लोकसभा चुनावों के दौरान अब तक 132.6 लाख लीटर शराब ज़ब्त की जा चुकी है। महाराष्ट्र में ₹25.24 करोड़ क़ीमत की 32.24 लाख लीटर, उत्तर प्रदेश 15.54 लाख लीटर और पश्चिम बंगाल में 14.06 लाख लीटर शराब ज़ब्त की गई। जबकि, 2014 में ज़ब्त की गई शराब की कुल मात्रा 65 लाख लीटर थी।

देश में सात चरणों में सम्पन्न होने वाली मतदान प्रक्रिया अभी जारी है, इसलिए यह मात्रा और अधिक बढ़ सकती है। 2014 में 7.64 टन ड्रग्स ज़ब्त किए गए थे।

बुरे फँसे राहुल गाँधी! 20 मई को व्यक्तिगत रूप से पटना कोर्ट में उपस्थित होने का आया आदेश

लोकसभा चुनावों के बीच कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ‘चौकीदार चोर है’ के नारे को लेकर बुरी तरह मुसीबतों में फँस गए हैं। बिहार के डेप्यूटी सीएम सुशील कुमार मोदी के द्वारा राहुल गाँधी के खिलाफ इस नारे को लेकर दायर मानहानि के केस में पटना के एक कोर्ट ने शनिवार (अप्रैल 27,2019) को समन जारी किया। समन में उन्हें 20 मई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया गया है। बिहार के आरा की सिविल कोर्ट ने भी राहुल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। यह मुकदमा भी पिछले दिनों समस्तीपुर में महागठबंधन की तरफ से आयोजित संयुक्त रैली में भी राहुल गाँधी के द्वारा ‘चौकीदार चोर है’ के नारे लगाने पर दर्ज किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शशिकांत राय ने सुशील मोदी के शपथ-पत्र पर दिए गए बयान और राहुल गाँधी के भाषण की सीडी देखने के बाद आइपीसी की धारा 500 के तहत समन जारी किया है। गौरतलब है कि कोलार जिले में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने पीएम नरेंद्र मोदी के ऊपर निशाना साधने के साथ ही नीरव मोदी, ललित मोदी का नाम लेते हुए कहा था कि सभी चोरों के नाम में मोदी है। जिसके बाद बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने राहुल गाँधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। सुशील मोदी की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि राहुल गाँधी वाले भाषण में मोदी सरनेम वाले व्यक्ति को चोर बताया था, जिससे समाज में उनकी छवि धूमिल हुई है। यह एक आपराधिक कृत्य है, जिसकी सजा न्यायालय द्वारा राहुल गाँधी को मिलनी चाहिए।

वहीं, आरा सिविल कोर्ट ने समस्तीपुर में एक चुनावी रैली के दौरान बार-बार ‘चौकीदार चोर है’ के नारे लगवाने के मामले में राहुल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। कोर्ट ने इस मामले में राहुल के साथ-साथ आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के खिलाफ भी केस दर्ज किया है, क्योंकि इस महागठबंधन की रैली में वो भी राहुल गाँधी के साथ मंच शेयर कर रहे थे और नारे लगवाने के दौरान वहाँ मौजूद थे। राहुल ने अपने भाषण के अंत में लोगों से बार-बार ‘चौकीदार चोर है’ के नारे लगवाए थे।

मैं खुश हूँ कि वो मारा गया, वह गलत रास्ते और गलत लोगों के साथ था: श्री लंका आतंकी की अपनी बहन

श्री लंका में पिछले रविवार हुए ईस्टर बम धमाकों के हमलावरों में से एक ज़ाहरान हाशिम की बहन को उसकी मौत का कोई अफ़सोस नहीं है। उनके मुताबिक उनका भाई गलत रास्ते पर था, और उसकी मौत की उन्हें ख़ुशी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनके पति ने और उन्होंने ज़ाहरान से रिश्ते 2017 में ही तोड़ लिए थे जब वह आतंकवादियों की भाषा बोलने लगा था।

‘वे आतंकी हैं’

मदानिया नामक ज़ाहरान हाशिम की बहन ने यह सब श्री लंका की गुप्तचर टीम से इन्डियन एक्सप्रेस संवाददाता की मौजूदगी में कहा है। कल (शनिवार, 28 अप्रैल, 2019) सादे कपड़ों में श्री लंकाई सैन्य गुप्तचर विभाग (मिलिट्री इंटेलिजेंस) के अफसर कालमुनाई में हुए बम धमाकों के बाद मदानिया के घर पहुँचे थे। वह चाहते थे कि मदानिया और उनके पति शरीफ़ नियास अम्पारा शहर के पास मौजूद अस्पताल में चलकर धमाकों के लिए जिम्मेदार लाशों की शिनाख्त करें। गौरतलब है कि कालमुनाई में हुए बम धमाकों में मारे गए 15 लोग हाशिम परिवार के ही बताए जा रहे हैं। धमाके जिस घर में हुए, वह भी उनका ‘अड्डा’ माना जा रहा है, जहाँ वह ज़ाहरान के ईस्टर बम धमाकों के तीन दिन पहले से जाकर छिप गए थे।

मदानिया ने उनकी लाशें देखने से मना कर दिया और कहा कि वे केवल तस्वीरों से ही शिनाख्त करना पसंद करेंगी (उनके पति शरीफ़ ने यह बात अफ़सरों को बताई)। इस पर अफ़सरों ने उन्हें बताया कि यह उनका उनके घर वालों के अवशेषों को देखने का आखिरी मौका है। अपसरों ने कहा, “अगर वह आपके घर वाले ही निकलते हैं तो वैसे भी आप उनको आखिरी बार देख रही होंगी। वे आतंकी हैं।” लेकिन इस स्पष्ट संकेत के बाद भी मदानिया अपने बात पर टिकी रहीं।

कालमुनाई: मरने वालों में बच्चे, औरतें, बूढ़े

कालमुनाई में मरने वालों में 26-वर्षीय ज़ाहरान का एक भाई, उसकी पत्नी और दो बच्चे, एक दूसरा भाई मोहम्मद ज़ैन हाशिम (जो या तो फ़रार है, या ईस्टर धमाकों में मारा गया) की पत्नी और दो बच्चे, ज़ाहरान की एक दूसरी बहन, उसका पति और उसका बच्चा, ज़ाहरान के कम-से-कम दो बच्चे और इन सभी भाई-बहनों के बूढ़े माँ-बाप शामिल हैं। वह सभी ईस्टर धमाकों के तीन दिन पहले लापता हो गए थे। मदानिया के पति नियास, जो सेकेंड-हैंड वाहनों के छोटे-मोटे डीलर हैं, ने दावा किया कि अफ़सरों ने धमाकों में ज़िन्दा बचे दो लोगों की तस्वीर भी उन्हें दिखाई, जिन्हें उन्होंने ज़ाहरान की पत्नी और उसके बच्चों में से एक के रूप में पहचाना। हालाँकि पूछे जाने पर श्री लंका सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर सुमित अटापट्टू ने इस पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।

मदानिया ने यह दावा किया कि उन्हें इस्लामिक स्टेट के बारे में कोई जानकारी नहीं है। “हमारी बात 2017 में ही तब बंद हो गई जब उसने अपने भाषणों में जहर उगलना शुरू कर दिया। वह उत्तेजक भाषण देता था और भीड़ खींचने में उसे महारत हासिल थी। पर जब उसने सरकार, मुल्क, झंडे, निर्वाचन, और दूसरे मजहबों के खिलाफ तकरीरें देना शुरू कर दिया, तो मुझसे और नहीं रहा गया। उसने हमारे परिवार पर कोहराम ला दिया है।”

इन्डियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि मदानिया और नियास का घर उस नेशनल तौहीद जमात की मस्जिद से महज़ 100 मीटर की दूरी पर है, जहाँ ज़ाहरान आतंकी बना था। स्थानीय लोगों का कहना है कि मस्जिद में पिछले दो सालों से मरम्मत का काम चालू है।

पहले ही था पुलिस की नजर में, लहराई थी तलवार

मदानिया बतातीं हैं कि उनके पति ज़ाहरान से दूर ही रहते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि वह ऐसे रास्ते की ओर मुड़ चुका है, जो खतरनाक है। वह दूसरे मज़हबों ही नहीं, उदारवादी मुसलामानों और सूफ़ियों को भी अपशब्द कहता था – उसके लिए सूफ़ी नशेड़ी थे। पुलिस की भी उस पर नजर थी। इस बात की तस्दीक फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट से भी होती है, जिसमें यह दावा किया गया है कि एक दूसरे मज़हबी गुट के साथ टकराव में तलवार निकाल लेने के बाद से ज़ाहरान हाशिम पुलिस की नजरों में था।

मदानिया के मुताबिक ज़ाहरान ने सामान्य स्कूल में छठी कक्षा से ही जाना छोड़ दिया था। पर इस्लामिक पढ़ाई में उसकी रुचि बनी रही- इतनी ज्यादा कि उसने केवल कुरान रटने के लिए अरबी का कोर्स किया और 2006 में एक इस्लामिक अध्ययन केंद्र खोल डाला। मदानिया ने कहा, “उसने अल्लाह को खो दिया क्योंकि उसने हदीथ गलत लोगों से सीखी, और लोगों को मारना सीख लिया। मुझे कहना चाहिए कि मैं खुश हूँ कि वह अब इस दुनिया में नहीं है।”