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मदरसा के हेडमास्टर ने 19 वर्षीय युवती का किया यौन शोषण, शिकायत करने पर लगा दी आग

सीमा पार से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। 19 वर्षीय बांग्लादेशी किशोरी नुसरत जहान रफ़ी को उसके मदरसा हेडमास्टर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने के बाद जला दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 27 मार्च को, उसने शिकायत की थी कि मदरसा के हेडमास्टर ने उसे बार-बार अपने कार्यालय में बुलाया और बार-बार उसे अनुचित तरीके से छुआ।

किसी तरह वो मदरसे से भागने में कामयाब रही और अपना बयान देने के लिए एक स्थानीय पुलिस स्टेशन गई। पुलिसकर्मियों से जब वह अपने दर्दनाक अनुभव साझा कर रही थी, उसे रिकॉर्ड कर लिया गया। इस रिकॉर्डिंग को बाद में स्थानीय मीडिया में लीक कर दिया गया। इसके बाद, उसे दुर्व्यवहार और धमकियों का सामना करना पड़ा। इस मामले में जबकि पुलिस ने 27 मार्च को ही हेडमास्टर को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन नुसरत के साथ और बुरा तो तब हुआ जब दो छात्र नेता और एक स्थानीय नेता के नेतृत्व में अच्छी-खासी भीड़ हेडमास्टर की रिहाई की माँग को लेकर सड़क पर इकट्ठा हो गई।

अपनी जान जाने के डर के बावजूद, नुसरत दर्दनाक घटना के 11 दिन बाद, 6 अप्रैल को परीक्षा देने के लिए स्कूल गई थी। स्कूल में एक साथी महिला छात्रा ने नुसरत को उसके साथ छत पर चलने के लिए कहा, जहाँ प्रिंसिपल के निर्देश पर चार-पाँच लोगों ने बुर्का पहनकर नुसरत के साथ न सिर्फ छेड़छाड़ की, बल्कि उसकी पिटाई भी शुरू कर दी और मदरसा हेडमास्टर के खिलाफ मामला वापस लेने का दबाव बनाने लगे। जब उसने इनकार किया, तो उन्होंने आग लगा दी। रिपोर्ट के अनुसार, वे इसे आत्महत्या का रूप देना चाहते थे, लेकिन जब नुसरत को बचा लिया गया, तो वे भाग निकले।

जाँच अधिकारी के अनुसार, हत्यारों में से एक ने उसके सिर को अपने हाथों में जकड़ रखा था और इसलिए वे वहाँ मिट्टी का तेल नहीं डाल पा रहे थे, जिसके कारण उसका सिर नहीं जला। नुसरत ने अपने भाई के फोन से अपना बयान दर्ज करवाया, वो भी तब जब उसे एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया जा रहा था। बयान में कहा, “शिक्षक ने मुझे छुआ। मैं अपनी आखिरी साँस तक इस अपराध का मुकाबला करुँगी।”

नुसरत के ऊपर मिट्टी का तेल डालने वाली एक महिला समेत पंद्रह लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से दो लोगों ने उसे मारने की बात कबूल कर ली है। दोनों एक ही मदरसे में पढ़ रहे थे जहाँ नुसरत ने पढ़ाई की और मदरसे में बांग्लादेश छात्र लीग यूनिट में नेता भी थे। जाँच में यह भी पता चला है कि वे नुसरत की हत्या के निर्देश के लिए जेल में निलंबित हेडमास्टर सिराजुद्दौला से मिले थे। आरोपितों में से एक, शहादत, जिसने अपना अपराध कबूल कर लिया है, ने कहा कि वह हत्या का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक था।  

राहुल गाँधी ने शेयर किया ‘फर्जी’ वीडियो, Exclusive Video सामने आया तो लोगों ने किया छीछालेदर

राहुल गाँधी ने 17 अप्रैल 2019 को एक वीडियो शेयर किया। यह वीडियो वामपंथियों की प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ द्वारा बनाई गई है। वीडियो में यह दिखाया गया है कि कुम्भ मेले के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन स्वच्छता कार्यकर्ताओं के पैर धोए थे, वो मोदी से असंतुष्ट हैं।

राहुल गाँधी ने ट्विटर पर लिखा कि पीएम मोदी द्वारा स्वच्छता कार्यकर्ताओं के पैर धोने की घटना ‘मीडिया के लिए बनाया गया’ एक कार्यक्रम मात्र और फोटो-ऑप्स था। पीएम को स्वच्छता कार्यकर्ताओं के ‘मन की बात’ जानने में न तो कोई दिलचस्पी थी, न ही समय।

वीडियो पर शक क्यों?

17 तारीख को लगभग साढ़े तीन बजे दोपहर में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को एक ऐसा वीडियो मिल जाता (दिया जाता है – सटीक शब्द) है, जो कहीं और पब्लिश ही नहीं हुआ। अगर यह किसी आम यूजर के द्वारा बनाई गई वीडियो होती तो शायद यह दिलचस्पी न जागती। लेकिन यह वीडियो शूट से लेकर एडिटिंग तक ‘द वायर’ के द्वारा की गई है। दिलचस्पी इसलिए जाग गई क्योंकि खबर 19 तारीख को लिखी जा रही है और अभी तक द वायर ने यह वीडियो पब्लिश नहीं की है। ऐसा क्यों? कोई मीडिया हाउस आखिर क्यों अपने ही एक्सक्लुसिव वीडियो को पब्लिश करने से पहले किसी नेता को देगा? जवाब न तो वायर देगा, न ही राहुल गाँधी – उम्मीद करना ही बेमानी है! लेकिन इस ‘फर्जी’ वीडियो शेयरिंग प्रकरण के बाद पब्लिक यह तो जान गई है कि वामपंथियों की प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ कॉन्ग्रेसियों के लिए भी भाईचारे का ही व्यवहार रखती है।

वीडियो ‘फर्जी’ क्यों?

कोई वीडियो कितनी सच्ची या कितनी झूठी है – यह उसके एडिटेड वर्जन के साथ-साथ रॉ वर्जन को देखने पर समझा जा सकता है। इस मामले में ‘द वायर’ ने न तो एडिटेड वर्जन ही पब्लिश किया है, न ही रॉ। ऐसे में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के द्वारा शेयर किए गए एडिटेड वीडियो पर शक और गहरा जाता है। क्योंकि इस वीडियो में कई लोगों के अलग-अलग शब्दों, छोटे-छोटे वाक्यों को बिना किसी संदर्भ के आपस में जोड़ा गया है। ‘द वायर’ का रिपोर्टर क्या सवाल पूछ रहा है, जिसका जवाब वीडियो में दिया जा रहा है, आप पूरी वीडियो में नहीं सुन पाएँगे। मतलब वीडियो की सत्यता के लिए आपको रॉ वीडियो से तुलना वाले रास्ते से कुछ अलग अपनाना होगा। OpIndia इसके लिए उन लोगों तक पहुँचा, जिनकी बातों को घुमा-फिराकर ‘द वायर’ ने वीडियो में पेश किया है।

प्यारेलाल (गोल घेरे में)

शक इसलिए भी जाता है क्योंकि यह वीडियो कुम्भ खत्म होने के बाद शूट किया गया है। कहीं-कहीं लोगों को यह पता भी नहीं है कि कैमरा ऑन (कैमरा के एंगल को गौर से देखिए) है। और सबसे बड़ी वजह – जिन पाँच लोगों के पैर प्रधानमंत्री ने धोए थे, उनकी बाइट शुरू में लगाई है। तब वो सारे सामान्य बात कर रहे हैं। वीडियो जब आगे बढ़ती है तो दूसरे लोगों के साथ कंटेंट को एडिट किया गया है। मतलब एक सवाल पर एक जवाब के बजाय, जवाब-प्रतिक्रिया-जवाब-प्रतिक्रिया का खेल खेला गया है। ऊपर राहुल गाँधी द्वारा शेयर किए वीडियो को देख चुके हैं तो अब देखिए वो एक्सक्लुसिव वीडियो, जहाँ प्यारेलाल पीएम मोदी को दोबारा-तिबारा प्रधानमंत्री बनने की शुभकामनाएँ दे रहे हैं। इसके साथ ही वो राहुल गाँधी और ‘द वायर’ के फर्जीवाड़े पर तमाचा भी जड़ रहे हैं।

दोनों वीडियो को सुनिए। तुलना कीजिए। प्रोपेगेंडा स्पष्ट हो जाएगा। OpIndia के एक्सक्लुसिव वीडियो में प्यारेलाल खुल कर बताते हैं कि वो सरकार की सभी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। वो न सिर्फ प्रधानमंत्री से बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी काफी संतुष्ट हैं। प्यारेलाल ने यह भी स्पष्ट किया कि जो वीडियो पहले से सोशल मीडिया पर (राहुल गाँधी वाली) शेयर की जा रही है, वो एकदम झूठ है और अफवाह फैलाने के लिए बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।

नरेश कुमार (गोल घेरे में)

जिन पाँच लोगों के पाँव पीएम नरेंद्र मोदी ने धोए थे, उनमें से एक नरेश कुमार भी थे। OpIndia ने उनसे भी बात की। प्यारेलाल की तरह नरेश भी अपने गाँव में मिल रही सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं और अगर कोई दिक्कत होती है तो ग्राम प्रधान उसका समाधान निकालते हैं। यह राज्य और केंद्र दोनों सरकारों से संतुष्ट हैं। राहुल गाँधी वाले वीडियो की बात पर इन्होंने स्पष्ट किया कि मीडिया अपने मन से अफवाह फैलाती है और उनका इससे कोई सरोकार नहीं है।

OpIndia द्वारा हासिल किए गए वीडियो से यह स्पष्ट होता है कि राहुल गाँधी ने पीएम मोदी की गलत तस्वीर पेश करने के लिए दुर्भावनापूर्ण तरीके से वीडियो शेयर की – ऐसा वीडियो, जो ‘फर्जी’ है और जिसकी कोई प्रामाणिकता नहीं है। उपरोक्त दो प्रमाणों से, यह स्पष्ट है कि जिन दो लोगों का साक्षात्कार ‘द वायर’ ने लिया था, उनके संदर्भ को वीडियो से निकाल दिया गया। उनके शब्दों के साथ दुर्भावनापूर्ण तरीके से खेला गया। इन दो लोगों के अलावा बाकी के वीडियो की सच्चाई का केवल तभी पता लगाया जा सकता है जब ‘द वायर’ पूरी रॉ वीडियो जारी करे। एडिटेड वीडियो से सिर्फ प्रोपेगेंडा फैलाया गया है – यह प्रमाणित हो चुका है।

चुनाव आयोग ने कहा साध्वी लड़ेंगी चुनाव, अभी कोई दोष साबित नहीं हुआ

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भोपाल सीट से भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है। इस ऐलान के बाद से ही साध्वी प्रज्ञा को चुनाव लड़ने से रोकने की कवायद शुरू हो गई है। बता दें कि साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ तहसीन पूनावाला ने चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए साध्वी प्रज्ञा की उम्मीदवारी पर रोक लगाने की सिफारिश की थी।

चुनाव आयोग ने साध्वी प्रज्ञा की उम्मीदवारी पर रोक लगाने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। चुनाव आयोग का कहना है कि अभी तक साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ कोई भी दोष साबित नहीं हुआ है और जब तक आरोप साबित नहीं हो जाता, चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगाई जा सकती। चुनाव आयोग ने कहा कि दोष साबित हो जाने पर चुनाव न लड़ने का प्रवाधान है। आरोपी होने पर चुनाव लड़ने से किसी की उम्मीदवारी पर रोक नहीं लगाई जा सकती।

तहसीन पूनावाला ने साध्वी प्रज्ञा की उम्मीदवारी पर रोक लगाने को लेकर चुनाव आयोग से कहा था कि किसी भी ऐसे प्रत्याशी को चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए, जिसके तार आतंक से जुड़े हों। पूनावाला ने कहा कि महाराष्ट्र आतंकवाद रोधी स्क्वाड ने साध्वी को 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में ‘मुख्य साजिशकर्ता’ के रूप में आरोपित किया था। इस विस्फोट में छह लोग मारे गए थे और 101 लोग घायल हुए थे।

तहसीन पूनावाला ने इसको लेकर एक ट्वीट भी किया था। इसमें पूनावाला ने कहा था कि उन्होंने चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को लोकसभा चुनाव 2019 लड़ने से रोका जाए, क्योंकि उन पर आतंकवाद से जुड़े होने के आरोप हैं। हार्दिक पटेल को भी दंगे फैलाने के आरोप में चुनाव आयोग ने चुनाव लड़ने से रोका है। साथ ही उन्होंने कहा कि वो किसी राजनीतिक पार्टी के सदस्य नहीं हैं।

उत्तराखंड के मंदिरों, रेलवे स्टेशनों पर 13 मई को आतंकी हमले की धमकी, अलर्ट जारी

रुड़की रेल अधीक्षक को एक लेटर मिला है, जिसमें हरिद्वार और रुड़की के रेलवे स्टेशन समेत दस रेलवे स्टेशनों पर धमाके करने की धमकी दी गई है। साथ ही, चिठ्ठी में यह भी लिखा है कि 13 मई को हरिद्वार समेत कई धार्मिक स्थलों में बम धमाके किए जाएँगे।

धमकी भरा लेटर मिलने के बाद से प्रशासन की नींद उड़ी हुई है। रेल अधीक्षक ने इस बारे में मुरादाबाद कंट्रोल रूम और जीआरपी को सूचित कर दिया है, गंगनहर कोतवाली में तहरीर दी गई है, जिसके बाद पुलिस ने पत्र की जाँच शुरू कर दी है। चिठ्ठी में लश्कर-ए-मोहम्मद के एरिया कमांडर मैसूर अहमद के नाम का जिक्र है।

रुड़की रेलवे स्टेशन के अधीक्षक को डाक के जरिए ये चिठ्ठी पहुँची है। इस चिठ्ठी में 16 मई को हरिद्वार समेत कई धार्मिक स्थलों और 13 मई को रुड़की रेलवे स्टेशन को उड़ाने की धमकी दी गई है। पत्र मिलने से रुड़की से मुरादाबाद तक प्रशासन में खलबली का माहौल है।

बृहस्पतिवार (अप्रैल 19, 2019) को रेलवे स्टेशन अधीक्षक एसके वर्मा के घर डाक से एक पत्र पहुँचा। उनकी पत्नी ने पत्र खोलकर पढ़ा तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने स्टेशन अधीक्षक को सूचना दी तो वे घर पहुँचे। जब उन्होंने पत्र पढ़ा तो उसमें लश्कर-ए-मोहम्मद के एरिया कमांडर मैसूर अहमद के नाम का जिक्र था।

पत्र में लिखा गया है कि 13 मई को रुड़की, हरिद्वार, देहरादून, लक्सर, रामपुर, शाहजहांपुर, बरेली, गोरखपुर, फैजाबाद, लखनऊ रेलवे स्टेशन पर धमाके किए जाएँगे। जबकि, 16 मई को हरिद्वार के हरकी पैड़ी, भारत माता मंदिर, चंडी देवी मंदिर, मंशा देवी मंदिर और इलाहाबाद के कई मंदिरों व अयोध्या समेत कई धार्मिक स्थलों पर भी धमाके होंगे। इसके बाद उन्होंने मुरादाबाद कंट्रोल रूम, रुड़की जीआरपी और आरपीएफ को पत्र की जानकारी दी।

चिठ्ठी मिलने के बाद अलर्ट जारी

इस धमकी के मिलने के बाद रुड़की रेलवे स्टेशन समेत आसपास के इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया। उधर, इंटेलीजेंस, जीआरपी, आरपीएफ समेत पुलिस भी अलर्ट हो गई है। एसपी जीआरपी रोशनलाल शर्मा ने बताया कि ऐसे पत्र पूर्व में भी मिल चुके हैं। इसकी जाँच शुरू कर दी गई है। अन्य स्टेशनों को भी पत्र मिलने की जानकारी दे दी गई है। आरपीएफ प्रभारी निरीक्षक सोनी शर्मा ने बताया कि मामले को गंभीरता के साथ दिखवाया जा रहा है।

पत्र में रुड़की सहित कई स्टेशनों को उड़ाने की धमकी के बाद पुलिस सतर्क हो गई है। पुलिस का कहना है कि एहतियातन सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जीआरपी और आरपीएफ की तरफ से रेलवे स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्रियों के सामान की तलाशी ली जा रही है। साथ ही रेलवे स्टेशन परिसर में घूमने वाले संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। ट्रेनों में भी चेकिंग अभियान शुरू कर दिया गया है।

विवेक ओबेरॉय ने कहा- नहीं है BJP से कोई संबंध, सांसद बनने का ऑफ़र ठुकरा चुका हूँ

बॉलीवुड अभिनेता विवेक ओबेरॉय अपनी फ़िल्म पीएम नरेंद्र मोदी की रिलीज को लेकर आए दिन चर्चा में घिरे रहते हैं। इन चर्चाओं का राजनीतिक रूप ले लेना कोई नई बात नहीं हैं। कभी उनके पार्टी में शामिल होने के कयास लगाए जाते हैं तो कभी चुनाव प्रचार करने की ख़बरें रफ़्तार पकड़ती दिखती हैं।

फ़िलहाल, नई बात ये है कि विवेक ने इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए यह स्पष्ट किया है कि वो बीजेपी पार्टी से संबंधित नहीं हैं, उनका कोई पॉलिटिकल कनेक्शन नहीं है और न ही कोई उनका कोई पॉलिटिकल एजेंडा है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें राजनीति में आना ही होता तो वो 5 बार मिले ऑफ़र को स्वीकार कर सांसद का टिकट ले लेते।  

विवेक ने राजनीति में आने के संदेहों को दूर करते हुए कहा कि वो एक फ़िल्ममेकर हैं, राजनीति से उनका कोई लेना-देना नहीं है। हालाँकि, वो पीएम मोदी फ़िल्म की रिलीज़ टलने से काफ़ी दुखी हैं जिसे लेकर वो काफी उत्साहित थे। डेढ़ साल में बनकर तैयार होने वाली इस फ़िल्म से विवेक को काफ़ी उम्मीदें थी, लेकिन रिलीज के एक दिन पहले रोक लगने से वो आहत हैं।

मतदाताओं को प्रभावित करने वाले तर्क को वे बेईमानी करार देते हुए कहते हैं कि यदि ऐसा होता तो फिर वोटर्स तो विज्ञापनों, राजनीतिक विचारों और संपादकीय आदि से भी प्रभावित हो सकते हैं। जानकारी के अनुसार, विवेक को अब यह उम्मीद है कि चुनाव आयोग जल्दी ही इस फ़िल्म को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने देगा। ऐसी उम्मीद उन्हें इसलिए है क्योंकि चुनाव आयोग द्वारा फ़िल्म देखने के बाद विवेक को आयोग की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। हालाँकि, विवेक ने चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया को शेयर करने से ख़ुद को रोक लिया, लेकिन वो इस प्रतिक्रिया से काफ़ी ख़ुश हैं।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आधारित फ़िल्म पर चुनाव आयोग की रोक लगने के बाद उसका ट्रेलर भी यूट्यूब से हटा दिया गया था। इस फ़िल्म को संदीप सिंह, सुरेश ओबेरॉय और आनंद पंडित ने प्रोड्यूस किया है वहीं फ़िल्म का निर्देशन ओमंग कुमार ने किया है।

‘सारे मोदी चोर’ बोलकर बुरे फँसे राहुल गाँधी, अब ललित मोदी करेंगे राहुल के खिलाफ केस

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी अपनी बदजुबानी की वजह से परेशानियों में घिरते नजर आ रहे हैं। दरअसल, राहुल गाँधी ‘सारे मोदी चोर हैं’ वाले नारे की वजह से बुरी तरह फँसते हुए दिखाई दे रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले ‘चौकीदार चोर है’ का नारा इजाद करने वाले राहुल अब इसी ‘चोर’ शब्द की जाल में फँस गए हैं। बता दें कि, राहुल गाँधी पिछले दिनों एक चुनावी जनसभा में पीएम मोदी को घेरने की कोशिश करते हुए एक बयान में कह दिया था कि ‘सारे मोदी चोर हैं।’ मगर अफसोस की बात तो ये है कि पीएम मोदी को घेरने निकले राहुल अपने बयान की वजह से खुद घिर चुके हैं।

राहुल के इस बयान पर अब आईपीएल के पूर्व अध्यक्ष ललित मोदी ने राहुल के खिलाफ मुकदमा दायर करने की धमकी दी है। ललित मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि राहुल गाँधी कह रहे हैं कि सारे मोदी चोर हैं, अब वह इस मामले को लेकर अदालत लेकर जाएँगे, वह यूके की अदालत में ही मामला दर्ज करवाएँगे। इस दौरान उन्होंने राहुल गाँधी पर जमकर निशाना भी साधा। ललित मोदी ने अपने ट्वीट के साथ एक वीडियो भी साझा किया है, जिसमें उन्होंने कॉन्ग्रेस के घोटालों की सूची सामने रख दी। ललित मोदी ने लिखा कि 5 दशक से गाँधी परिवार भारत में लूट मचा रहा है और आज ये लोग हम पर आरोप लगा रहे हैं।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने पीएम नरेंद्र मोदी के ऊपर निशाना साधने के साथ ही नीरव मोदी, ललित मोदी का नाम लेते हुए कहा था कि सभी चोरों के नाम में मोदी है। जिसके बाद बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील ने राहुल गाँधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। सुशील मोदी की तरफ से कोर्ट में कहा गया था कि राहुल गाँधी वाले भाषण में मोदी सरनेम वाले व्यक्ति को चोर बताया था, जिससे समाज में उनकी छवि धूमिल हुई है। यह एक आपराधिक कृत्य है, जिसकी सजा न्यायालय द्वारा राहुल गाँधी को मिलनी चाहिए।

राहुल गाँधी के इस बयान को लेकर पीएम मोदी ने भी माढ़ा में रैली के दौरान राहुल गाँधी समेत पूरे कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि कॉन्ग्रेस और उनके सहयोगियों ने उनके पिछड़े होने की वजह से कई बार गालियाँ और हैसियत बताने वाले शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि वह खुद पर हुए हमले तो सह लेंगे लेकिन पिछड़े समाज के लोगों पर राहुल के हमले को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

चुनावी जनसभा के दौरान हार्दिक पटेल को पड़ा झापड़, BJP को ठहराया दोषी

2019 लोकसभा चुनावों को देखकर ऐसा लगता है मानो भारतीय राजनीति में जो कभी नहीं हुआ, वो सब इन चुनावों में देखने को मिल जाएगा। फिर चाहे इस सूची में आजम खान के बयानों को शामिल कर लिया जाए या फिर हार्दिक पटेल को पड़े थप्पड़ को।

जी हाँ, हाल ही में हुई चुनावी जनसभा के दौरान हार्दिक पटेल को थप्पड़ मारा गया है। घटना गुजरात के सुरेंद्र नगर की है। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक हार्दिक पटेल जिस समय सभा को संबोधित कर रहे थे तभी एक व्यक्ति मंच पर पहुँचा और हार्दिक को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। इस घटना के बाद जनसभा में हड़कंप मच गया।

इस वीडियो में हार्दिक पटेल और थप्पड़ मारने वाले शख्स के बीच नोक-झोंक भी साफ़ नज़र आई। हार्दिक ने इस तमाचे के लिए बीजेपी को दोषी ठहराया है। पटेल का कहना है कि बीजेपी उन पर हमला करवा रहे हैं। उनकी मानें तो बीजेपी चाहती है कि उन्हें (हार्दिक) मार दिया जाए। वे कहते हैं कि वे ऐसे हमलों पर चुप नहीं रहेंगे।

चुनाव जनसभा के दौरान हुई ऐसी घटना का यह पहला किस्सा नहीं है। गुरुवार(अप्रैल 18, 2019) को भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव पर जूता फेंकते हुए हमला किया गया। इससे पहले दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी 2014 में रैली के दौरान थप्पड़ पड़ चुका है।

कर्नाटक: ‘निर्भया’ जैसी दर्दनाक घटना, पेड़ से टंगी मिली इंजीनियरिंग छात्रा की अधजली लाश

कर्नाटक के रायचूर में एक बर्बरतापूर्ण वारदात को अंजाम दिया गया। यहाँ सिविल इंजीनियरिंग की एक छात्रा का अधजला शरीर पेड़ से टंगा पाया गया। मृतका की पहचान अमृता (असली नाम नहीं, रेप की भी है संभावना) के तौर पर की गई है। इस घटना से पूरे क्षेत्र के लोग गुस्से में हैं। छात्रा की संदिग्ध मौत से संदेह की स्थिति पैदा हो गई है।

स्थानीय ख़बरों के अनुसार, अमृता नामक लड़की रायचूर में एक इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा थी। वह 15 अप्रैल को लापता हो गई थी। उक्त छात्रा जब तीन दिन बाद तक भी घर नहीं लौटी तो उसके माता-पिता ने उसे ढूँढ़ना शुरू कर दिया। बाद में, अमृता का जला हुआ शव शहर के बाहरी इलाक़े में एक पेड़ पर लटका मिला। मृतका के शरीर पर क्रूरता और बर्बरता स्पष्ट दिखाई दे रही थी और उसे देखकर लोगों की आत्मा तक सिहर गई।

प्रथम दृष्टया यह लग रहा था कि अमृता ने आत्महत्या की है। लेकिन, उसके माता-पिता और दोस्तों को उसकी मौत पर संदेह था। इसी कारण से उन्होंने हत्या की आशंका जताई। अमृता की नृशंस हत्या के विरोध में उसके दोस्तों और कॉलेज के अन्य छात्रों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। उन्होंने माँग की है कि राज्य सरकार मौत की प्रकृति और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए तत्काल जाँच शुरू करे।

रायचूर के लोग इस घटना की तुलना निर्भया घटना से कर रहे हैं, जिसने उस समय राष्ट्र को झकझोर दिया था। सोशल मीडिया पर एक ऑनलाइन याचिका के ज़रिए यह दावा किया जा रहा है कि पुलिस अधिकारी और कुछ प्रमुख लोग अपराधियों की मदद करके मामले को प्रभावित कर रहे हैं और मामले को आत्महत्या का रूप देकर बंद करने की कोशिश कर रहे हैं।

ऑनलाइन याचिका चलाने वालों को शक है कि अमृता का बलात्कार करने बाद उसे जलाया गया और फिर उसे अधजली हालत में पेड़ से टांग दिया गया। इस ऑनलाइन याचिका पर 50,000 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं।

फिलहाल स्थानीय पुलिस ने इस घटना की जाँच शुरू कर दी है और मामले के एक आरोपी को गिरफ़्तार कर लिया है।

कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका चतुर्वेदी का पार्टी से इस्तीफ़ा, उपेक्षित और दुखी महसूस कर रही थीं

कॉन्ग्रेस प्रवक्ता और पार्टी का जाना-माना चेहरा रहीं प्रियंका चतुर्वेदी ने, जो टीवी पर होने वाली डिबेट्स में कॉन्ग्रेस का पक्ष मज़बूती से रखा करती थीं, पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है। कल ही वो ट्विटर पर पार्टी द्वारा मेहनती लोगों की जगह गुंडों को तरजीह देने की बात कर रही थीं। ऐसा माना जा रहा है कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को इस्तीफ़ा सौंपने के बाद वो शिवसेना में शामिल हो सकती हैं।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को सौंपा इस्तीफ़ा
पार्टी कार्यकर्ताओं के दुर्व्यवहार से थीं आहत

चतुर्वेदी से दुर्व्यवहार पर बच निकले पार्टी सदस्य, सिंधिया की सिफारिश  

इससे पहले, राजनीति कवर करने वालीं पत्रकार विजय लक्ष्मी शर्मा ने परसों रात (अप्रैल 17, 2019) कॉन्ग्रेस के आन्तरिक संवाद के एक पत्र को ट्वीट किया। उस पत्र में उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के सदस्य श्री फजले मसूद पार्टी के कुछ सदस्यों को यह सूचित करते हैं कि श्रीमती चतुर्वेदी से दुर्व्यवहार समेत अनुशासन के उल्लंघन के मामले में उनपर की गई कार्रवाई को निरस्त किया जा रहा है।

मामला राफेल विवाद को लेकर मथुरा में कॉन्ग्रेस की पत्रकार वार्ता के दौरान का है।

कार्रवाई की संस्तुति और मामले की शिकायत प्रियंका चतुर्वदी ने की थी, और कार्रवाई निरस्त कॉन्ग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश के पार्टी प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया की सिफारिश पर की गई थी। आरोपियों में अधिकतर मथुरा के स्थानीय कॉन्ग्रेस नेता थे, पर दो बड़े नाम प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के सदस्य श्री अब्दुल जब्बार और महासचिव श्री उमेश पंडित के थे।

पत्र के ‘प्रतिलिपि’ खण्ड में देखा जा सकता है कि उक्त पत्र को कॉन्ग्रेस के उच्च स्तरीय सदस्यों ज्योतिरादित्य सिंधिया और एके एंटनी (कॉन्ग्रेस की अनुशासन समिति के अध्यक्ष) को भी प्रेषित किया गया था- यानि माफ़ी के इस निर्णय में केवल सिंधिया ही नहीं, कॉन्ग्रेस के पूरे ढाँचे की सहमति मानी जा सकती है।

चतुर्वेदी का क्षोभ

विजय लक्ष्मी शर्मा के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने लिखा कि उनकी पार्टी मेहनती कार्यकर्ताओं की बजाय गुंडों को तरजीह दिए जाने से वह दुखी हैं। उन्होंने पार्टी के लिए हर तरफ से गालियाँ झेलीं पर यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पार्टी के भीतर ही उन्हें धमकाने वाले मामूली कार्रवाई के भी बिना बच निकलते हैं।

एक क्लर्क की गलती और… दिल्ली को बसाने वाले पांडवों का नाम मिट गया दिल्ली के नक्शे से

बतौर राजधानी अगर हम दिल्ली की बात करें तो इसके इतिहास के सिरे द्वापरयुग तक जाते हैं। भारत के इतिहास में दिल्ली को पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था। चूँकि पांडवों ने ही दिल्ली को इंद्रप्रस्थ नाम के साथ सबसे पहले बसाया था।

आजादी के बाद सन् 1955 में पुराने किले के दक्षिण पूर्वी भाग में हुई पुरातात्विक खुदाई से कुछ ऐसे पात्र प्राप्त किए गए थे जो महाभारतकालीन की वस्तुओं से मेल खाते थे। जिनके आधार पर माना गया कि यही वे स्थल है जिसे इतिहास में पांडवों की राजधानी कहा जाता था। इसके बाद कई बार खुदाई हुई और हर बार यह बात पुख्ता होती गई कि जिस दिल्ली में हम रह रहे हैं, जिसका इतिहास में मौर्य काल से लेकर मुगल काल तक की बसावट है, वह किसी और की नहीं बल्कि पांडवों की ही देन है।

आज हम दिल्ली घूमते हुए हर नामी शख्स के नाम से दिल्ली की सड़को को पहचानते हैं। फिर चाहे वो अकबर रोड हो, डॉ. अब्दुल कलाम रोड हो, कस्तूरबा गाँधी रोड हो, महात्मा गाँधी रोड हो। लेकिन क्या कारण है कि हम पूरी दिल्ली को घूमते हुए कहीं पर भी पांडव रोड नहीं देखते…जोकि सबसे महत्तवपूर्ण है। क्या दिल्ली की इन नामवर शख्सियतों के बीच पांडवों के इंद्रप्रस्थ के साथ इंसाफी हुई या कहानी कुछ और है?

दरअसल  दिल्ली में जिस तरह से हर नामी शख्सियत को सम्मान देने के लिए राजधानी की सड़को के नाम रखे गए, उसकी तरह पांडवों के नाम पर भी एक सड़क का नामकरण हुआ था। 10 फरवरी 1931 को नई दिल्ली विधिवत उद्घाटन से पहले यहाँ कि सभी सड़कों के नाम तय किए गए।

इसके लिए बकायदा एक कमेटी गठित की गई जो इस पर काम कर रही थी, लेकिन एक सरकारी बाबू की ज़रा सी गड़बड़ी के कारण उसे सरकारी रिकॉर्ड में अंग्रेजी में पांडव लिखते हुए अंग्रेजी के अक्षर ‘वी’ की जगह ‘आर’ लिख दिया गया। मात्र इसी लेखन त्रुटि के कारण आज दिल्ली उस सड़क को पंडारा रोड के नाम से जानती है। मात्र एक ‘व’ और ‘र’ के फ़र्क़ ने पांडवों के नामोंनिशान को दिल्ली के नक्शे विलुप्त कर दिया। हैरानी की बात तो ये है कि इस गलती को सुधारने का दोबारा कभी प्रयास भी नहीं किया गया।

आज पंडारा रोड को दिल्ली की उन टॉप 10 जगहों में गिना जाता है, जहाँ का ज़ायकेदार खाना खाने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। इंडिया गेट से क़रीब इस मार्ग के बारे में अगर आप इंटरनेट पर भी सर्च करने का प्रयास करेंगे तो इसके नाम के इतिहास से ज्यादा वहाँ मौजूद रेस्टरां के नाम आपको देखने को मिलेंगे। बता दें कि आधुनिक दिल्ली में यहाँ की नाइट लाइफ भी बहुत मशहूर है।

भारत के गौरवशाली इतिहास का एक हिस्सा कई सालों से वर्तनी की त्रुटि के कारण दबा हुआ है। जिन पांडवों ने भारतवर्ष को इंद्रप्रस्थ दिया, उसी इंद्रप्रस्थ (दिल्ली) में उनका नाम कहीं भी नहीं है। आज सोशल मीडिया पर कई लोगों द्वारा इस विषय पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लेकिन जवाब में वहीं एक किस्सा सुनाया जा रहा है, जिसका उपरोक्त जिक्र हुआ है। बता दें कि इंडियन एक्सप्रेस में आज इस विषय पर एक खास रिपोर्ट भी प्रकाशित हुई है।