जहाँ एक तरफ लोकसभा चुनाव का महासंग्राम जारी है वहीं दूसरी तरफ नेताओं का बड़बोड़ापन भी अपने चरम पर है। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने यूपी के गोंडा में बीजेपी पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री पर वार किया है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) और उनके कुछ अधिकारियों ने प्रधानमंत्री मोदी जी को भी चिलम सिखा दिया।” इसके आगे उन्होंने कहा, “जो लोग हमें टोंटी-टोंटी कह रहे हैं, वही हैं चिलम वाले।”
ख़बर के अनुसार, प्रतापगढ़ के जीआईसी ग्राउंड में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने अखिलेश और मायावती पर जमकर निशाना साधा था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि प्रदेश में बसपा के शासन में ताजमहल तक सुरक्षित नहीं था और अखिलेश राज में टोंटी असुरक्षित थी। इसके अलावा उन्होंने गठबंधन की पिछली सरकारों को घेरते हुए कहा था कि कॉन्ग्रेस और उसके साथी राज्य को स्थिर सरकार नहीं दे सकते।
ऐसा पहली बार नहीं है जब अखिलेश ने पीएम मोदी के ख़िलाफ़ हमलावर रुख़ अपनाया हो। टोंटी चिलम वाले बयान के बाद उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 180 डिग्री के पीएम हैं, वो जो भी कहते हैं, ठीक उसका उलटा ही करते हैं। वे केवल 1% आबादी के ही प्रधानमंत्री हैं।
Akhilesh Yadav, SP: He (PM Modi) is a 180 degree PM, he does just the opposite of whatever he says. He is the PM of only 1% of the population. So he has this issue that how those in the favour of social justice are taking the nation towards a change. https://t.co/kjvVh4MwV2
इससे पहले उन्होंने कहा था कि पीएम की भाषा बदल गई है क्योंकि पिछले चरणों में जो भी चुनाव हुए हैं उनमें बीजेपी को एहसास हो गया है कि वो पिछड़ रही है। वे विकास, किसानों की आय के बारे बात नहीं कर रहे हैं। पीएम सिर्फ़ लोगों को गुमराह करना चाहते हैं। एसपी-बीएसपी और आरएलडी ही फ़ैसला करेगी कि कौन अगली सरकार बनाने जा रहा है और देश का अगला प्रधानमंत्री होगा।
Akhilesh Yadav, SP: PM’s language has changed because BJP is lagging behind in previous phases of elections. BJP can see no other way. They’re not talking about development, farmers’ income. PM just wants to mislead people. SP-BSP-RLD will decide who will form govt & be the PM. pic.twitter.com/kRreQZJrVA
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के काफिले के सामने ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने की वजह से तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। दरअसल, ममता बनर्जी शनिवार (मई 4, 2019) को पश्चिम बंगाल के चंद्रकोण की आरामबाग सीट पर चुनाव प्रचार के लिए एक रैली करने जा रही थीं। इस दौरान जब ममता बनर्जी का काफिला चंद्रकोण के करीब पहुँंचा तो कुछ लोग ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने लगे। जिसे सुनकर ममता भड़क गई और काफिले को वहीं पर रुकवाकर गाड़ी से उतरी और उन लोगों पर बरस पड़ी। गुस्से से आगबबूला ममता बनर्जी ने वहाँ मौजूद लोगों पर गाली देने का आरोप लगाया। ममता ने इसके लिए सीधे तौर पर भाजपा को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि भाजपा जानबूझकर ऐसे लोगों को हमारे साथ गलत व्यवहार करने के लिए भेजती है।
3 people have been detained in Ghatal, West Bengal for allegedly shouting Jai Shree Ram chants as the Convoy of Mamata Banerjee passed by.@Tamal0401 with details. pic.twitter.com/WTkVxhADST
इसके बाद ममता ने चंद्रकोण और घाटल में रैलियों के दौरान ये मुद्दा उठाते हुए कहा, “जो लोग इस तरह से नारेबाजी कर रहे हैं, होशियार रहें क्योंकि 23 मई को चुनाव का नतीजा आने के बाद उन्हें इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा।” इसके साथ ही ममता ने जय श्री राम बोलने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग इस तरह की नारेबाजी कर रहे हैं, उन्हें ये याद रखना चाहिए कि चुनाव के बाद भी उन्हें यहीं रहना है।
Why is DIDI so upset with chants of JAI SHRI RAM & why does she call it “GALAGALI”? pic.twitter.com/dTrBqrS6Oo
ममता बनर्जी का ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। भाजपा की बंगाल यूनिट ने भी इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा कि ‘दीदी’ जय श्री राम के नारों से इतना नाराज क्यों हैं और इन नारों को गाली क्यों बता रही हैं? हालाँकि, पश्चिम बंगाल पुलिस का कहना है कि इसके संबंध में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, तीन लोगों को सीएम की सुरक्षा को लेकर जाँच की गई थी, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।
बता दें कि, पश्चिम बंगाल के चंद्रकोण की आरामबाग लोकसभा सीट पर 6 मई को मतदान होने वाला है। मिदनापुर के अंतर्गत आने वाला यह इलाका तृणमूल कॉन्ग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है। यहाँ से भाजपा के तपन कुमार रेय, कॉन्ग्रेस की ज्योति कुमारी दास और टीएमसी की आपरूप पोद्दार उम्मीदवार हैं।
‘मैं तेरे प्यार में क्या-क्या न बना दिलबर… जाने ये मौसम… जाने ये मौसम…’ फ़िल्म, ज़िद्दी का यह गीत प्यार के उस आलम को बयाँ करने में काफ़ी है जिसमें प्रेम करने वाले अपनी चाहत के लिए किसी भी हद से गुज़र जाने को तैयार रहते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जो गुजरात के सूरत का है। यहाँ एक लड़की ने अपने प्रेमी से शादी करने पर दो ऐसी शर्तें रख दीं जिस पर हैरानी होना लाज़मी था।
ख़बर के अनुसार, सूरत में एक लड़की को मुस्लिम लड़के से प्यार हो जाता है, बात जब दोनों के घर तक पहुँचती है तो काफ़ी हो-हल्ला मच जाता है, जिससे बात बिगड़ जाती है। लेकिन, शायद एक सच यह भी है कि इश्क़ पर भला किसका ज़ोर होता है, इसलिए दोनों लिव इन रिलेशनशिप में रहना चाहते थे, लेकिन परिवार वालों को ये बात भी मंज़ूर नहीं थी। कोई रास्ता सूझता न देख दोनों घर से भाग गए। लड़की के लापता होने पर उसके परिजनों ने पुलिस थाने में शिक़ायत दर्ज की, जिसके बाद पुलिस ने तीन दिनों तक खोजबीन करके दोनों को ढूँढ़ निकाला।
पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद भी दोनों एक-दूसरे के साथ शादी करना चाहते थे। लेकिन लड़की ने नज़दीकी थाने में हलफनामा दायर किया जिसके अनुसार वो अपने मुस्लिम प्रेमी से शादी तभी करेगी जब वो हिन्दू धर्म को स्वीकार करने के अलावा शाकाहारी भी बनेगा। इस शर्त को पढ़कर पुलिस भी हैरान थी, क्योंकि आज तक ऐसा मामला उनके समक्ष पहले कभी नहीं आया था।
इसके अलावा लड़की के हलफ़नामे में एक एग्रीमेंट का भी उल्लेख किया गया था जिसके अनुसार मुस्लिम लड़के को अपने घरवालों की मौजूदगी में हिंदू धर्म अपनाना होगा। साथ ही इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भविष्य में वो फिर कभी मुस्लिम नहीं बनेगा।
राफेल डील को लेकर दाखिल पुनर्विचार याचिका पर केंद्र सरकार ने शनिवार (मई 4, 2019) को सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया। केन्द्र सरकार ने हलफनामे में कहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा राफेल सौदे की निगरानी को किसी भी तरह से हस्तक्षेप के रूप में नहीं देखा जा सकता है। इसे पैरलल निगोशियेशन या दखल नहीं कहा जा सकता है। केंद्र ने हलफनामे में कहा है कि पुनर्विचार याचिकाओं पर आगे की सुनवाई का कोई आधार नहीं हैं। ऐसे में सभी याचिकाएँ खारिज की जानी चाहिए। सरकार ने कहा है कि सुरक्षा संबंधी गोपनीय दस्तावेजों के इस तरह सार्वजनिक खुलासे से देश के अस्तित्व और संप्रभुता पर खतरा है। इस मामले पर अगली सुनवाई 6 मई को होगी।
Rafale deal: राफेल डील: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जवाब, कहा- पीएमओ की मॉनिटरिंग को नहीं कहा जा सकता दखल – government said in supreme court pmo monitoring rafale deal cannot be seen as interference | Navbharat Times https://t.co/2Y25WkDTEG
— Varun Gandhi – My Icon ✌?? #2019 (@VGfor2019) May 5, 2019
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर 2018 को दिए गए अपने आदेश में राफेल डील को तय प्रक्रिया के तहत होना बताया था और सरकार को क्लीन चिट दी थी। अदालत ने इस फैसले में फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के सौदे को चुनौती देने वाली सारी याचिकाएँ खारिज कर दी थीं। कोर्ट ने कहा था कि इस रक्षा सौदे में अदालत के दखल या जाँच की जरूरत नहीं है।
Centre files fresh affidavits in Rafale review case in SC saying- the Dec 14, 2018 judgement upholding 36 Rafale jets’ deal was correct and unsubstantiated media reports and/or part internal file notings deliberately projected in a selective manner cannot form basis for review. pic.twitter.com/oMfFYdZltG
इसके बाद यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने 2 जनवरी 2019 को अखबार में छपे आर्टिकल के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिकाएँ दाखिल की थीं। हालाँकि, केंद्र सरकार ने लीक हुए गोपनीय दस्तावेज को पिटिशन के साथ पेश किए जाने पर ऐतराज जताया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल को उसे खारिज करते हुए कहा था कि वह लीक दस्तावेज के आधार पर रिव्यू पिटिशन सुनेगा।
दक्षिण कश्मीर के नौगाम में आतंकवादियों ने भाजपा के जिला उपाध्यक्ष गुल मोहम्मद मीर की गोली मारकर हत्या कर दी। शनिवार (4 मई) को हुए इस हत्याकांड को उन्हीं के घर में अंजाम दिया गया। सीने और पेट में गोलियाँ लगने के बाद मीर को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। यह हत्याकांड ठीक उसी समय हुआ है जब कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने दहशतगर्दों से रमजान के महीने में दहशतगर्दी और हिंसा न करने की अपील की थी।
Mehbooba Mufti, PDP: I would also like to appeal to the militants that Ramadan is a month of worship & prayers. They should not make any attacks during this time. https://t.co/nNPhwgWc0M
मीर ने भाजपा के टिकट पर 2008 और 2014 के विधानसभा चुनाव भी लड़े थे। गौरतलब है कि देश की अन्य विधानसभाओं के 5-वर्षीय कार्यकाल से अलग कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। राज्य भाजपा के प्रवक्ता अतलाफ ठाकुर ने कहा कि दहशतगर्दों से खतरा होने के बावजूद सरकार ने मीर की सुरक्षा हटा दी थी।
महबूबा के बयान की तीखी आलोचना
इस बीच महबूबा मुफ़्ती के बयान की सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना हो रही है। इसे केवल रमजान में शांति बनाए रखने और बाकी समय हिंसा जारी रखने को उनका अव्यक्त समर्थन माना जा रहा है। एक ट्विटर यूजर ने लिखा:
@MehboobaMufti urging d militants not to attack during Ramadan…but after that chalega…??? omg!
Wah means they should plan and execute attacks after Ramadan?? What sort of chewwwtiya logic is this..this is how these people support militants and later cry fowl when they are called as traitors!!
महबूबा ने सरकार से भी रमजान के महीने में दहशतगर्दों के खिलाफ अभियान रोक देने और सर्च ऑपरेशन न करने की अपील की है। उनके मुताबिक इससे कश्मीर के लोग कम-से-कम के महीने सुकून से रह सकेंगे। महबूबा की अपील के परिप्रेक्ष्य में यह याद कर लेना जरूरी है कि 2017 में रमजान के कुछ ही दिन बाद दहशतगर्दों ने अमरनाथ यात्रा पर जा रहे हिन्दू श्रद्धालुओं के काफिले पर हमला कर 7 श्रद्धालुओं की हत्या कर दी थी।
ओडिशा ने शुक्रवार (मई 3, 2019) को आए भीषण चक्रवाती तूफान फोनी के प्रकोप का सामना किया। लेकिन जानमाल की बहुत ज्यादा हानि नहीं हुई। भारत ने आपदा प्रबंधन और बेहतर बचाव की तैयारी से जानमाल के संभावित नुकसान को न्यूनतम स्तर पर रख कर समूचे विश्व को चौंका दिया। चक्रवात फोनी दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में भारी नुकसान करने वाले तूफानों जैसा ही था, मगर बेहतर प्लानिंग की वजह से भारत में बहुत कम नुकसान देखने को मिला।
केन्द्र सरकार और राज्य सरकार ने अपनी बेहतर प्लानिंग से जन हानि को कई गुना कम करके पूरी दुनिया को दिखा दिया है कि विनाशकारी चक्रवाती तूफानों से कैसे निपटा जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र ने भी भारत के प्रयासों की जमकर तारीफ की है। फोनी जैसा भीषण तूफान सैकड़ों लोगों की जान ले सकता था। इससे पहले 1999 में ओडिशा में आए सुपर साइक्लोन से 10 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। लेकिन इस बार मौत का आँकड़ा 12 तक ही सिमट गया।
India’s zero casualty approach to managing extreme weather events is a major contribution to the implementation of the #SendaiFramework and the reduction of loss of life from such events. I look forward to hearing more about #CycloneFani at the #GP2019Geneva May 13-17. https://t.co/AqwCwNRjxE
चक्रवात के खतरों से निपटने के लिए भारत सरकार की zero-casualty नीति की प्रशंसा करते हुए UNISDR के एक प्रवक्ता डेनिस मैकक्लेन ने कहा कि भारतीय मौसम विभाग की प्रारंभिक चेतावनियों की सटीक जानकारी की वजह से सुरक्षा अधिकारियों ने इस तूफान से निपटने में सक्षम हो पाए और जान-माल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया। इस मामले में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष प्रतिनिधि मामी मिजुतोरी ने कहा कि अत्यंत प्रतिकूल हालात में भारत में हताहतों की तादाद बेहद कम है जिसके लिए सरकारी मौसम और आपदा प्रबंधन विभाग बधाई के पात्र हैं।
जानकारी के मुताबिक, इस चक्रवाती तूफान का पता मौसम वैज्ञानिकों ने तकरीबन एक हफ्ते पहले ही लगा लिया था, जब उन्होंने दक्षिणी हिंद महासागर में निम्न दवाब की स्थिति को देखा था। जिसके बाद 5 भारतीय सैटेलाइट ने उस क्षेत्र पर लगातार नजर बनाए रखी थी, जो फोनी चक्रवात का रूप ले रहा था। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) द्वारा भेजे गए सैटेलाइट हर 15 मिनट पर ग्राउंड स्टेशन पर इससे संबंधित डेटा भेज रहे थे, जिससे फोनी को ट्रैक करने और उसके मूवमेंट के बारे में सही-सही पूर्वानुमान लगाया जा सके। और इसी जानकारी की मदद से हजारों ज़िंदगियाँ बचाने में मदद मिली।
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार फोनी की तीव्रता, लोकेशन और उसके आसपास के बादलों के अध्ययन के लिए Insat-3D, Insat-3DR, Scatsat-1, Oceansat-2 और मेघा ट्रॉपिक्स सैटलाइटों द्वारा भेजे गए डेटा का इस्तेमाल किया गया। फोनी के केंद्र के 1,000 किलोमीटर के दायरे में बादल छाए हुए थे, लेकिन बारिश वाले बादल सिर्फ 100 से 200 किलोमीटर के दायरे में थे। बाकी बादल करीब 10 हजार फीट की ऊँचाई पर थे। IMD के डायरेक्टर जनरल के. जे. रमेश ने बताया कि तूफान या चक्रवात के दौरान सैटलाइटों का पूर्वानुमान में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि सैटेलाइटों द्वारा भेजे गए डेटा से उन्हें आने वाले चक्रवाते के लिए सटीक पूर्वानुमान जारी करने में मदद मिलती है।
सैटलाइटों के द्वारा दिए गए डेटा के आधार पर IMD ने इस बात का सटीक पूर्वानुमान लगाया कि फोनी किस जगह पर लैंडफॉल करेगा और इसी वजह से ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में समय रहते 11.5 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचा दिया गया। बता दें कि, इस दौरान Scatsat-1 से भेजे गए डेटा से चक्रवाती तूफान के केंद्र पर नजर रखी गई, तो वहीं Oceansat-2 समुद्री सतह, हवा की गति और दिशा के बारे में डेटा भेज रहा था।
आज मोतीनगर में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को रोड शो के दौरान किसी आक्रोशित नवयुवक ने थप्पड़ जड़ दिया। गौरतलब है कि इससे कुछ महीने पहले उनके ऊपर दिल्ली सचिवालय में लाल मिर्च पावडर फेंके जाने की खबर भी सामने आई थी। जिसमे बाद में मीडिया में खबर आई की केजरीवाल ने खुद ही अपने ऊपर फेंकवाया था।
इस तरह की घटनाएँ निंदनीय है। फिर भी आए दिन जनता अपना आक्रोश इस रूप में क्यों निकाल रही है। लोगों को हैरत में डाल रही है। सोचने वाली बात ये भी है कि अक्सर आम आदमी पार्टी के सर्वेसर्वा और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद भी इस तरह की शारीरिक हिंसा के शिकार क्यों हो जाते हैं?
#WATCH: A man slaps Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal during his roadshow in Moti Nagar area. (Note: Abusive language) pic.twitter.com/laDndqOSL4
ऐसी घटनाओं के बीच, चौकाने वाली बात ये भी है कि अरविन्द केजरीवाल पर जब-जब हमला हुआ, आम आदमी पार्टी का फंड बढ़ा है। ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है कि क्या हर हमले के बाद चंदे देने वाले और मेहरबान हो जाते हैं? हालाँकि, दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी और आप के ही निष्काशित विधायक कपिल मिश्रा समेत कई नेताओं का कहना है कि केजरीवाल का थप्पड़ स्टंट उनके ही प्रचार तंत्र का हिस्सा है। इसके बावजूद मनोज तिवारी ने ऐसी घटनाओं की कड़ी निंदा की है।
मनोज तिवारी जी ने कड़ी निंदा भी की और आम आदमी पार्टी के हालिया इतिहास पर भी टिप्पणी कर दी। ये तो एक तथ्य है कि केजरीवाल को जब भी थप्पड़ पड़ते थे, चंदा बढ़ता था। pic.twitter.com/VgNXowwsk6
अगर देखा जाए तो अब तक केजरीवाल पर करीब 8-10 थप्पड़ या इंक फेंकने की घटनाएँ हो चुकीं हैं। संख्या घट बढ़ सकती है पर इससे जुड़े आँकड़े चौकाने वाले हैं। इस तरह की घटनाएँ केजरीवाल को फिर से चर्चा में ला देतीं हैं, जिससे पार्टी को मिलने वाले चंदों में भी काफी बढ़ोतरी देखी गई है।
अगर आँकड़ों पर नज़र डालें तो आम आदमी पार्टी को दिसंबर 2012 से अप्रैल 2014 तक 111 देशों से 86,649 लोगों ने महज 24.53 करोड़ रुपए चंदे के रूप में दिए थे। जबकि लोकसभा चुनाव 2014 में आम आदमी पार्टी ने 100 करोड़ रुपए चंदा इकठ्ठा करने का टारगेट रखा था। कमाल की बात है कि 28 मार्च 2014 को केजरीवाल को हरियाणा के रोहतक में गर्दन पर हमला हुआ था। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दिन पार्टी को 42 लाख रुपए चंदे में मिले।
साउथ दिल्ली के दक्षिणपुरी में 4 अप्रैल 2014 को केजरीवाल को घूसे और लप्पड़ पड़े। उस दिन आम आदमी पार्टी को ऑनलाइन 1.35 करोड़ रुपए का चंदा मिला।
दक्षिणपुरी की घटना के ठीक चार दिन बाद, कहते हैं पार्टी ने प्रयोग दोहराया। दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके में अपने रोड शो के दौरान केजरीवाल पर एक बार फिर से हमला हुआ। इस बार एक ऑटो चालक लाली ने उसे माला पहनाकर दो थप्पड़ रसीद कर दिए। बता दें कि उस बार भी उस बार भी पार्टी को मिलने वाली चंदे की रकम में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई।
कहते हैं, हमले के बाद चंदे में बढ़ोतरी का ट्रेंड एक दिन अपवाद रहा फिर जब कम हुआ तो केजरीवाल पर अहमदाबाद में फिर से हमला हुआ। यह सिलसिला यहीं नहीं रुका बल्कि तब से अनवरत जारी है। जब -जब केजरीवाल चर्चा से बाहर होने लगते हैं तब ऐसी घटनाएँ होती नज़र आती हैं।
2016 में भावना अरोरा नाम की एक महिला ने दिल्ली में सीएनजी घोटाले का आरोप लगाते हुए केजरीवाल पर हमला किया। जो कि दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने के बाद से केजरीवाल पर यह पहला हमला था।
वैसे पिछले काफी समय से केजरीवाल लोकसभा-2019 चुनाव के लिए चंदे का रोना रो रहे थे ऐसे में ये कयास लगाना गलत नहीं होगा कि क्या मोतीनगर में फिर से अपना वही प्रयोग दोहराना केजरीवाल का चंदा बढ़ाने वाला पेट नुस्खा तो नहीं? यहाँ तक कि उनके अपने विधायक कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया है कि पूरे दिल्ली को पता था कि केजरीवाल फिर से खुद को थप्पड़ मरवाने वाले हैं।
सारी दिल्ली को पता था केजरीवाल खुद को पिटवाएँगे
रोड शो फ्लॉप, जनता गायब, नौटंकी शुरू
जनता केजरीवाल को ईवीएम का बटन दबा कर पीटेगी – उंगली की ताकत से
तब तक खुद को खुद पिटवाते रहेंगे केजरीवाल
— Chowkidar Kapil Mishra (@KapilMishra_IND) May 4, 2019
खैर, कारण जो भी हो पर, लोकतंत्र में जनता अपने नेता से कितनी भी नाराज क्यों न हो, फिर भी इस तरह से शारीरिक हिंसा पर उतर आना घोर निंदनीय है। अगर कोई पार्टी वास्तव में इसे पब्लिसिटी या चंदे का साधन बना कर प्रयोग कर रही है तो ये भी लोकतान्त्रिक व्यस्था का मजाक बनाना ही है। इस तरह की घटनाओं को किसी भी हाल में जायज नहीं ठहराया जा सकता है। आपइंडिया ऐसी हरकतों की कड़ी निंदा करता है।
आत्ममुग्ध बौने के नाम से प्रसिद्द अरविन्द केजरीवाल आजादी के बाद देश में सबसे ज्यादा बार सड़क पर कूटे जाने वाले पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। नई वाली राजनीति करने के नाम पर आए दिन मार खा-खा कर जीवन यापन करना अरविन्द केजरीवाल का पार्ट टाइम जॉब कब बन गई पता ही नहीं चला।
कभी अपने विधायकों द्वारा तो कभी सड़क चलते राहगीरों द्वारा यहाँ-वहाँ मार मार कर उनका मोर बना दिया जा रहा है। देखा जाए तो इस प्रकार की घटनाएँ निंदनीय हैं लेकिन जब आम आदमी पार्टी नेता आतिशी मार्लेना कहती हैं कि नेताओं को कोई पीटता क्यों नहीं है तो यह बात प्रासंगिक नजर आने लगती है।
सूत्रों का तो ये भी कहना है कि जब भी केजरीवाल को कहीं पर थप्पड़ या घूँसा पड़ता है, तब-तब आम आदमी पार्टी के चंदों में व्यापक उछाल आता है। भारत को अंग्रेजों से आजाद करवाने के लिए महात्मा गाँधी ने अनशन का मार्ग चुना था और संत केजरीवाल ने मोदी के चंगुल से देश को छुड़ाने के लिए अगर अपनी कुटाई करवाने का मार्ग चुना है तो इसमें बुराई है क्या? लेकिन, जनता को केजरीवाल की कुटाई में त्याग नजर नहीं आता है।
गठबंधन के लिए महीनों तक गिड़गिड़ाने और भीख माँगने के बावजूद भी कॉन्ग्रेस ने केजरीवाल को घास नहीं डाली। लेकिन क्रांतियों के द्वारा खुद को देश की राजनीति में स्थापित करने वाले अरविन्द केजरीवाल ने हार ना मानने की जिद पकड़ ली है। उन्हें जब प्रतीक रूप से ‘हाथ’ का साथ नहीं मिला तो उन्होंने अपने को ही रैपट मरवाकर खुद को ‘हाथ’ का साथ दिलवा दिया। लप्पड़ पड़ने के बाद उनके प्रदर्शन में व्यापक उछाल आ सकता है। जिस आदमी का खाद पानी चाँटा और घूँसा बन चुका हो उसे तंदुरूस्ती के लिए समय-समय पर खुद को खुद ही कुटवाने भी पड़े तो क्या बड़ी बात है?
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और उत्तर-पूर्व सीट से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी शीला दीक्षित ने कहा है कि निर्भया गैंगरेप केस को बहुत बड़ा करके दिखाया गया था जबकि, आज भी ऐसी तमाम घटनाएँ हो रही हैं, लेकिन अखबारों में उन्हें बहुत कम जगह दी जाती है।
एक टीवी इंटरव्यू में शीला दीक्षित ने कहा कि जब 2012 के निर्भया गैंगरेप केस के बारे में कहा कि मीडिया में उसे बहुत बढ़ाकर दिखाया गया। शीला दीक्षित ने इसके पीछे क्राइम रेट का तर्क भी दिया। इसके आगे, दिल्ली में महिला सुरक्षा की स्थिति पर उनकी राय के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि जहाँ तक पुलिस के दखल की बात है, उसमें पूरा रोल केंद्र सरकार का रहता है क्योंकि दिल्ली सरकार एक पुलिसकर्मी की ड्यूटी तक नहीं लगा सकती है।
केंद्र और दिल्ली सरकार का हवाला देने पर शीला दीक्षित से जब यह पूछा गया कि दिल्ली में महिला सुरक्षा का सॉल्यूशन क्या है? तो उन्होंने बताया कि यह मामला केंद्र सरकार व संसद के हाथ में है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें संसद पहुँचने का मौका मिला तो इस मुद्दे को वहाँ उठाएँगी।
गौरतलब है कि दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को एक 23 साल की छात्रा के साथ चलती बस में 6 लोगों ने गैंगरेप किया था। इस रेप की घटना के बाद पूरे देश में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। उस वक्त दिल्ली और देश में कॉन्ग्रेस की सरकार थी और शीला दीक्षित दिल्ली की मुख्यमंत्री थी। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गुस्साए लोगों ने जंतर-मंतर पर मौजूदा सरकार के खिलाफ आपना आक्रोश जाहिर किया था।
आम चुनाव में इंदिरा गाँधी की नाक बीच में ला कर भी बढ़त हासिल न कर पाने में विफल रहने वाली कॉन्ग्रेस अब वापस अपने झूठे और मनगढंत आरोपों के आधार पर बढ़त बनाने का प्रयास कर रही है। ऐसा करने के लिए कॉन्ग्रेस का साथ देने के लिए उनके व्यक्तिगत मुखपत्र, मीडिया गिरोह और दूर से ही बुद्दिजीवी नजर आने वाले ऐसे तमाम लोग मौजूद हैं, जो अपने अन्नदाताओं के बस एक इशारे पर उनके किसी भी षड्यंत्र को मनचाही दिशा देने के लिए हर समय तत्पर रहते हैं।
कॉन्ग्रेस हर दूसरे दिन बेशर्मी और पूरे आत्मविश्वास के साथ मीडिया के सामने और सोशल मीडिया पर मोदी सरकार पर ऐसी काल्पनिक आरोप लगाती देखी जा सकती है। फर्जी दावे को तथ्य में तब्दील कर देना और फिर उसे रोज मीडिया में आकर बेशर्मी से बार-बार रटकर लोगों के मनमस्तिष्क में उसे सही साबित करने में अब कॉन्ग्रेस और पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी ने PhD कर ली है।
अफवाह: मोदी सरकार ने गुपचुप तरीके से देश का 200 टन सोना स्विट्जरलैंड भेजा
हाल ही में कॉन्ग्रेस ने ट्विटर पर पूरी बेशर्मी के साथ एक ऐसी रिपोर्ट ट्वीट की है, जिसमें 2014 में RBI का 200 टन सोना स्विट्जरलैंड भेजने की बात कही गई है। कॉन्ग्रेस ने अपने ही मुखपत्र नेशनल हेराल्ड की एक ‘खोजी रिपोर्ट’ को टैग करते हुए लिखा, “क्या मोदी सरकार ने गुपचुप तरीके से RBI का 200 टन सोना 2014 में स्विट्जरलैंड भेजा।” इसके साथ ही कॉन्ग्रेस ने आदतन मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए यह सवाल भी पूछा है कि सरकार को इसके बदले में क्या मिला है? सामान्य शब्दों में, कॉन्ग्रेस के आरोप वाली रिपोर्ट में खोजी पत्रकार नवनीत चतुर्वेदी ने दावा किया है कि देश का जो 200 टन सोना गायब है, उसे भारत सरकार ने 2009 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से खरीदा था। नेशनल हेराल्ड ने यह रिपोर्ट एक ‘खोजी पत्रकार’ नवनीत चतुर्वेदी के ब्लॉग के आधार पर बनाई है।
Did the Modi govt secretly transport 200 tonnes of RBI’s gold to Switzerland in 2014? “What did the government get in return for exchanging the gold? Why is the information about the transaction not available in public domain?”https://t.co/tvlefhPNke
‘व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी’ पर जमकर की जा रही है शेयर
कॉन्ग्रेस का यह आरोप सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि मोदी सरकार और इसके मंत्रियों की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल करने वाले लोग भी इस फर्जी खबर को तत्परता से सोशल मीडिया पर शेयर कर के कॉन्ग्रेस राजपरिवार के प्रति अपनी भक्ति साबित करने में जुटे हुए हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण UPSC के सदस्य रह चुके पुरुषोत्तम अग्रवाल हैं। यह देखना दुर्भाग्यपूर्ण है कि JNU जैसे संस्थानों से पढ़े-लिखे लोग और UPSC जैसी संस्था से जुड़े लोग भी इस प्रकार की अफवाहों को सच समझकर ‘व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी’ का हिस्सा बन जाते हैं और बिना पड़ताल के ही शेयर कर लेते हैं।
UPSC के पूर्व सदस्य पुरुषोत्तम अग्रवाल जी अब ‘व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी’ के सदस्य हैं
कॉन्ग्रेस के झूठे आरोप पर मोदी जी से दुखी एक बुद्दिजीवी
कॉन्ग्रेस के प्रोपेगैंडा की मुख्य फैक्ट्री ‘नेशनल हेराल्ड’
‘व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी ‘ के शिकार कुछ बुद्दिजीवी मनमौजी पत्रकार और नेता नवनीत चतुर्वेदी, जिनके आरोप पर यह पूरी भ्रामक जानकारी फैलाई गई। अब संसद जाने की तैयारी कर रहे हैं सरकार विरोधी कच्चे माल को तत्परता से आगे बढ़ाते हुए मीडिया चैनल्स
‘नेशनल यूथ पार्टी’ से दक्षिण दिल्ली सीट से प्रत्याशी हैं खोजी पत्रकार नवनीत चतुर्वेदी
‘नेशनल यूथ पार्टी’ से दक्षिण दिल्ली लोकसभा सीट से उम्मीदवार नवनीत चतुर्वेदी ने बुधवार (मई 01, 2019) को एक ब्लॉग लिखा था। नेशनल हेराल्ड ने इसी ब्लॉग के मनगढंत आरोपों को आधार बनाकर लिखा है, “क्या मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता संभालते ही देश का 200 टन सोना चोरी छिपे स्विट्ज़रलैंड भेजा!” इसके साथ ही एक बड़े लेख में उन्होंने आदतन सरकार पर कई आरोप भी लगाए हैं, जिनकी प्रमाणिकता इसी आरोप की तरह ही शून्य है। कॉन्ग्रेस के बीच एक स्वतंत्र खोजी पत्रकार और लेखक के नाम से प्रसिद्द नवनीत का कहना है कि RTI के ज़रिए मिली सूचना के आधार पर ही उन्होंने ये सब लिखा है।
वास्तविकता: RBI ने किया खंडन
नवनीत ने अपने ब्लॉग में RTI की जो कॉपी शेयर की है, उसके अनुसार रिज़र्व बैंक ने यह सूचना दी थी कि भारत का 268.01 टन सोना ‘बैंक ऑफ़ इंग्लैंड’ और ‘बैंक ऑफ़ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स’ की सेफ़ कस्टडी में है। नवनीत के अनुसार, “साल 2014 से पहले की बैलेंस शीट में ये साफ़ लिखा हुआ है कि विदेश में रखे हुए भारतीय गोल्ड रिज़र्व की वैल्यू शून्य है जबकि 2014-15 की बैलेंस शीट में ऐसा नहीं है।”
लेकिन, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के अनुसार ये दावा बिल्कुल गलत है। RBI के वरिष्ठ अधिकारी योगेश दयाल के अनुसार, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के लिए यह एक सामान्य बात है कि वे अपने गोल्ड रिज़र्व को सुरक्षित रखने के लिए उसे ‘बैंक ऑफ़ इंग्लैंड’ जैसे अन्य देशों के सेंट्रल बैंकों में रखे रहने दें।
वास्तविकता यह है कि जो सोना विदेशी बैंकों में रखा हुआ है, वो गिरवी ही रखा गया हो, ऐसा नहीं है। दुनिया भर में यह एक सामान्य प्रक्रिया है कि जब कोई देश दूसरे देशों से सोना खरीदता है, तो वो उन्हीं देशों के सेंट्रल बैंक की सुरक्षित कस्टडी में उसे रखवा देता है, चाहें वो UK हो या फिर USA। ऐसे मामलों में जो सोना विदेश में रखा हुआ होता है, वो असल में कहलाएगा उसी देश का, जिसने कि उसे ख़रीदा है।
RBI ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोपों को ‘बकवास’ बताया है
कॉन्ग्रेस के आरोप के आधार पर कुछ अखबारों और सोशल मीडिया में केंद्रीय बैंक द्वारा 2014 में करीब 200 टन सोना विदेश भेजने की अफवाह के बाद RBI ने शुक्रवार (मई 04, 2019) को कहा कि 2014 या उसके बाद देश से बाहर कोई सोना नहीं भेजा गया है। बयान के अनुसार, दुनिया भर में केंद्रीय बैंक अपना सोना सुरक्षित रखने के लिए उसे बैंक आफ इंग्लैंड समेत अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों में रखते रहे हैं और यह एक सामान्य गतिविधि है। इसमें कहा गया है कि केंद्रीय बैंक ने 2014 या उसके बाद देश से रत्ती भर भी सोना अन्य देशों में नहीं भेजा है। इस बारे में मीडिया में जो रिपोर्ट आयी है, वह तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह गलत है।
रिकॉर्ड 609 टन के स्तर पर है वर्तमान में देश का स्वर्ण भंडार
ओवरसीज चाइना बैंकिंग कॉर्प के अर्थशास्त्री होवेई ली के मुताबिक RBI 2019 में 15 लाख औंस सोना खरीद सकता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार 2018 में RBI ने कुल 42 टन सोने की खरीद की है। जनवरी और फरवरी में सोने की और खरीद करने के बाद देश का स्वर्ण भंडार वर्तमान में रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुँच गया है। इस समय RBI के पास लगभग 609 टन सोने का भंडार है। रूस ने वर्ष 2018 में सबसे ज्यादा 274 टन सोने की खरीद की है।
क्या राहुल गाँधी माँगेंगे माफ़ी?
अपने मीडिया गिरोहों के माध्यम से समाज में अफवाह और उन्माद पैदा करने के लिए राहुल गाँधी क्या माफ़ी माँगेंगे यह बड़ा सवाल है। हाल ही में चौकीदार चोर है जैसे बयानों को चुनावी गर्मी में निकले शब्द बताने वाले कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष ने झूठ को ही कॉन्ग्रेस का चेहरा बना लिया है। राहुल गाँधी कल ही अपने एक इंटरव्यू में यह भी कहते सुने गए कि उन्होंने नरेंद्र मोदी की इमेज की धज्जियाँ उड़ाने की सौगंध ले रखी है। शायद यही वजह है कि राफेल डील से लेकर देश की अर्थव्यवस्था के बारे में राहुल गाँधी झूठों का अम्बार लगाते नजर आते हैं।