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188 केस है जिसके ऊपर, जो है जेल में बंद: PM मोदी के खिलाफ वाराणसी से लड़ेगा चुनाव!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद अतीक अहमद पीएम के खिलाफ चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। बता दें कि उन्होंने नामांकन फॉर्म खरीदने के बाद इलाहाबाद की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में पर्चा दाखिल करने व प्रचार के लिए तीन सप्ताह की परोल देने की माँग की है। कोर्ट ने अतीक अहमद की इस अर्जी पर सुनवाई के लिए 29 अप्रैल की तारीख तय की है। अतीक अहमद की तरफ से दी गई अर्जी में लिखा गया है कि वो जेल में हैं और वाराणसी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया है। मगर जेल में रहकर चुनाव प्रचार नहीं कर सकते, इसलिए उन्होंने चुनाव प्रचार करने के लिए तीन सप्ताह के लिए जमानत पर रिहा करने की कोर्ट से गुजारिश की है।

खबरों के मुताबिक, पूर्व सपा नेता शिवपाल सिंह यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी अतीक अहमद को टिकट दे सकती है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रदेश महासचिव लल्लन राय ने पहले बताया था कि अतीक अहमद उनकी पार्टी से चुनाव लड़ेंगे। मगर शनिवार (अप्रैल 27, 2019) को देर रात उन्होंने इस बात का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि फिलहाल अतीक अहमद को पार्टी का उम्मीदवार नहीं बनाया गया है। उन्होंने कहा कि अतीक अहमद के आवेदन करने के बाद उनके उम्मीदवार बनाए जाने पर विचार किया जाएगा।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (अप्रैल 23, 2019) को अतीक अहमद व उसके साथियों द्वारा रियल एस्टेट डीलर मोहित जायसवाल के कथित अपहरण और अत्याचार के मामले में सीबीआई जाँच का आदेश दिया था। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के नैनी जेल में बंद अतीक को गुजरात के जेल में ट्रांसफर करने का भी आदेश दिया था। बता दें कि अतीक अहमद पर आरोप है कि दिसंबर 2018 में देवरिया जेल में बंद रहने के दौरान उन्होंने अपने साथियों के द्वारा लखनऊ के आलमबाग क्षेत्र के निवासी मोहित जायसवाल का अपहरण करवा लिया था और फिर जेल में ले जाकर उसके साथ मारपीट की और मोहित से संपत्ति से जुड़े कई दस्तावेजों पर दस्तखत भी करा लिए थे।

कभी अतीक अहमद ने कहा था, “मेरे ऊपर 188 मामले चल रहे हैं, अपनी आधी ज़िंदगी जेल में व्यतीत की है, इस पर मुझे गर्व है।” सीना तान कर तब अतीक ने कहा था कि वह अपने समर्थकों के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, चाहे उसके जो भी परिणाम हों।

मीडिया गिरोह केजरीवाल के बाद अब ‘लाल सलाम’ के साथ खेलना चाहता है ‘पुण्डा-पुण्डी’

राजनीति के डाकू खड़गसिंह, यानी अरविन्द केजरीवाल का प्रकरण अभी पूरी तरह से शांत नहीं हुआ है कि भारतीय मीडिया गिरोह ने अपना दूसरा झुनझुना तलाशना शुरू कर दिया है। मीडिया गिरोह द्वारा हाल ही में गोद लिए गए इस नवीनतम झुनझुने का नाम है, कामरेड कन्हैया कुमार! JNU के इस ‘चर्चित’ नाम के ही कारण ‘बिहार की औद्योगिक राजधानी’, ‘दिनकर की धरती’, ‘पूरब का लेनिनग्राद’, जैसे नामों के बीच एक बार फिर बेगूसराय में ‘लाल झंडे’, ‘अर्बन नक्सल’ और ‘वामपंथ’ जैसे शब्दों पर चर्चा हो रही है।

अभी बहुत समय नहीं हुआ है, जब देश के कुछ प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक माने जाने वाले JNU में देशविरोधी नारे लगाए जाने के बाद कन्हैया कुमार और उनके छुटभईये साथी गुर्गे उमर खालिद राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिए गए। चर्चा में रहने के शौकीनों का पत्रकारिता में बैठे, ‘नई छत’ तलाशने वाले लोगों को बेसब्री से इंतज़ार होता है।

‘आत्ममुग्ध बौने’ को भी लिया था मीडिया गिरोह ने ‘गोद’

राजनीति और समसामयिकी में रूचि रखने वाले देश के युवाओं को अच्छे से याद है कि उनके साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ करने वाले आम आदमी पार्टी अध्यक्ष और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल किस तरह से सोशल मीडिया द्वारा रातों-रात हीरो बना दिए गए थे। ‘आत्ममुग्ध बौने’ के नाम से जाने जाने वाले धूर्त अरविन्द केजरीवाल ने कॉन्ग्रेस के विरोध में बने माहौल का फायदा उठाकर लोगों की भावनाओं को पहले विश्वास में लिया, अपने आंदोलन को ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ का नाम दिया और ऐन समय पर कॉन्ग्रेस के साथ ही सत्ता का जोड़-तोड़ कर सरकार बनाई। आम आदमी पार्टी की सरकार बनते ही शीला दीक्षित द्वारा किए गए भ्रष्टाचारों वाली 365 पन्नों की फ़ाइल अचानक से मुद्दों से गायब हो गई।

नई वाली राजनीति के नाम पर और IIT डिग्री का झाँसा देकर अरविन्द केजरीवाल ने उस युवा को निशाना बनाया, जो वाकई में केजरीवाल से राजनीती में एक ऐतिहासिक बदलाव की उम्मीद लगा बैठा था। लेकिन IRS, IIT जैसे नामों को भुनाने के बाद अरविन्द केजरीवाल ने ये साबित कर दिया कि डिग्री इंसान के अंदर बैठी मक्कारी को रिप्लेस नहीं कर पाती है। यही वजह है कि एक ‘चायवाला चौकीदार’ देश का प्रधान सेवक बन जाता है और एक IIT से पढ़ा हुआ आदमी आत्ममुग्ध बौने में तब्दील होकर रह जाता है। ‘बड़ी यूनिवर्सिटी’ से ग्रेजुएट होना पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, हमारे भूतपूर्व प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह और IIT से पढ़े हुए अरविंद केजरीवाल से पहले इतनी बड़ी ‘गाली’ कभी नहीं हुआ करती थी।

हालाँकि, जल्दी ही अरविंद केजरीवाल ने जनता का यह सपना भी तोड़ दिया। सत्ता मिलते ही कमाल रशीद खान से पहले ही हर शुक्रवार को फिल्मों के रिव्यु देकर केजरीवाल ने राजनीति की नई परिभाषा गढ़नी शुरू कर दी। अब चूँकि केजरीवाल अच्छे से समझ चुके थे कि इस देश की मीडिया के भीतर किसी व्यक्ति विशेष से घृणा में किसी भी राह चलते आदमी को हीरो बना देने की व्याकुलता है, इसलिए केजरीवाल ने चर्चा में बने रहने का हर संभव षड्यंत्र रचा।

मीडिया गिरोह के कुलपतियों ने केजरीवाल को विशेष संरक्षण दिया। इंसान से लेकर जानवरों तक की जाति में रूचि रखने वाले एक ‘निष्पक्ष’ पत्रकार ने केजरीवाल द्वारा खुद को बनिया बताने के बावजूद भी अपनी गोद में बिठाकर खूब दूध पिलाया। उसी निष्पक्ष पत्रकार ने केजरीवाल के लिए इंदिरा गाँधी की कार का चालान काट देने वाली पूर्व IPS अधिकारी का पीछा कर ये साबित करने का भरसक प्रयास किया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की कार का चालान काटना कोई बड़ी बात नहीं थी।

संयोग की बात है कि ये वही पत्रकार है जिसे आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बस एक नजर और अटेंशन का उसी तरह इन्तजार रहता है, जिस तरह एक 18 साल के प्रेम में डूबे एक युवा को प्रेमिका की बस एक नजर का इन्तजार रहता है। लेकिन, जब लाख कोशिशों के बावजूद भी प्रेमिका उसे घास नहीं डालती, तो प्रेमी अपने हाथ की नस काटने तक को तैयार हो जाता है।

कामरेड कन्हैया कुमार में मीडिया ने तलाश लिया नया ‘तैमूर’

अरविन्द केजरीवाल और प्रियंका गाँधी से एकतरफा मोहब्बत में धोखा खाने के बाद इस मीडिया गिरोह को अब बेताबी से किसी नए झुनझुने की तलाश थी। JNU जैसे संस्थान से निकले माओवंशी कामपंथियों से बढ़िया विकल्प और क्या हो सकता था?

पटियाला हाउस कोर्ट में जमकर कूटे जाने के बाद कामरेड कन्हैया कुमार का मीडिया में बने रहने का ‘पोटेंशियल’ मीडिया गिरोह ने तुरंत भाँप लिया था। इसके बाद अब तमाम छोटी-बड़ी टुकड़ियाँ कन्हैया कुमार के लिए दरबार सजाने में व्यस्त दिखाई देने लगी हैं।

बेगूसराय से भाजपा उम्मीदवार गिरिराज सिंह के खिलाफ कामरेड कन्हैया ने टिकट लिया और अपनी गरीबी के सिलेंडर को कैमरा के सामने लाकर जमकर बेच रहा है। कन्हैया कुमार के LPG सिलेंडर दिखाकर मीडिया गिरोह की TRP में भी उछाल आने के कारण कामरेड की गरीबी पर निष्पक्ष पत्रकारों को खूब चरमसुख मिलता नजर आ रहा है। लेकिन अचानक ‘वन फाइन डे’ इस LPG सिलेंडर न जुटा पाने वाले कामरेड की तस्वीरों से बेगूसराय के लगभग हर हिंदी और अंग्रेजी समाचार पत्र के पहले पन्ने भर गए।

वामपंथ के टार और मीडिया गिरोह की मक्कारी के मिश्रण से ही यह चमत्कार सम्भव हो पाता है कि एक शाम LPG सिलेंडर के लिए मशक्कत करता हुआ युवा अगली सुबह हर महँगे-सस्ते, हिंदी-अंग्रेजी अखबार का पहला पन्ना बन जाता है।

चंदा-परस्त वामपंथ

देखा जाए तो अरविन्द केजरीवाल और कन्हैया कुमार में सबसे बड़ी समानता है ‘चंदा’। अगर अरविन्द केजरीवाल राजनीति के चंदा मामा हैं तो कन्हैया कुमार राजनीति के चंदा-युवा बन गए हैं। इसी चंदे से केजरीवाल की गरीबी और आम आदमी की ‘आदमियत’ बेची गई और इसी गरीबी से कन्हैया कुमार की फिजा बनाने की तैयारियाँ की जा रही हैं।

‘चंदा-भक्षी’ शेहला रशीद हैं समर्थन में

इस ‘चंदा-धंधा’ प्रकरण में सबसे मजेदार बात यह है कि कन्हैया कुमार का समर्थन करते हुए चंदे की माँग करने वाली शेहला रशीद भी उनके साथ कंधे से कन्धा मिलाकर खड़ी है। शेहला रशीद की चंदा डकार जाने की अनोखी प्रतिभा देखकर ही उन्हें दोबारा चंदे के धंधे की बागडोर सौंपी गई है। ये वही शेहला रशीद है, जिन पर कठुआ रेप पीड़ितों के परिवार को न्याय दिलाने के नाम पर चंदा इकठ्ठा करने और चुपचाप डकार जाने का आरोप है।

40.63 लाख रुपए इकट्ठा होने की जानकारी शेहला रशिद ने ट्वीट कर खुद बताई थी। जब पीड़ित परिवार ने चंदा इकट्ठा करने वाली शेहला रशिद से उस फंड का विवरण माँगा तो अब वह दाएँ-बाएँ देखने लगी थी। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया था कि शेहला रशीद द्वारा इकट्ठा किए गए चंदे में से उन्हें एक रुपए तक की मदद नहीं मिली। इस मामले में केस लड़ने के लिए उन्हें अपने जीवन यापन का आधार अपने पशु भी बेचने पड़े हैं। लेकिन, मृतक मासूम बेटी को न्याय दिलाने के नाम पर उगाहे गए चंदे के पैसे आखिर हैं कहाँ? क्या अंतर्ध्यान हो गए, ये आज तक एक पहेली ही है।

कामरेड कन्हैया कुमार की दूसरी साथी हैं फिल्म एक्ट्रेस स्वरा भास्कर! जो अपनी फिल्म में खुलकर अपने ‘मन की बात’ करने के लिए फेमस हैं। यानी, कुल मिलाकर राम मिलाए जोड़ी, एक सिल्ला एक लोढ़ी।

शेहला और स्वरा के अलावा जिग्नेश मेवानी और AAP के प्रोपगैंडाबाज इंटरनेट ट्रॉल ध्रुव राठी को भी जर्मनी से उठाकर बेगूसराय की जमीनी हकीकत जाँचने और समझने के लिए उतरा गया है। अर्बन नक्सल का ये साथ और किसी को पसंद हो, ना हो लेकिन पत्रकारिता के समुदाय विशेष को ये साथ खूब पसंद है। हैरानी की बात है कि JNU में रहते हुए जो शेहला रशीद और कन्हैया कुमार कम्युनिस्ट हुआ करते थे, वो राजनीति में आते ही मुस्लिम और भूमिहार हो गए। जितनी तेजी से इन्होने रंग बदला है उस हिसाब से अरविन्द केजरीवाल कहीं भी नहीं ठहरते हैं।    

धीरे-धीरे बेगूसराय में ‘लाल आतंक’ अपना रंग दिखाने लगा है। कुछ दिन पहले ही कन्हैया कुमार की कम्युनिस्ट पार्टी के गुंडों ने स्थानीय लोगों द्वारा विरोध किए जाने पर उन्हें उनके घरों में घुसकर मारा। इसके बदले में देखने को मिला कि कुछ लोगों ने कन्हैया कुमार पर हाथ साफ कर दिए और चुनाव प्रचार के दौरान उनको कूट दिया गया। यानी अर्बन नक्सल अपने पहले चरण में लगभग कामयाब होते नजर आ रहे हैं।

केजरीवाल के डसे हुए पत्रकारिता के कुछ स्थापित मीडिया गिरोह अभी भी कमर कस के कामरेड कन्हैया कुमार की जमकर लहर बना रहे हैं। BBC ने जरा ‘हट के’ इस अर्बन नक्सल के लाडले कामरेड को लेकर अभियान चलाते हुए  ‘कन्हैया के प्रचार में दिन-रात लगी लड़कियां क्या कहती हैं’ जैसे लेख चलाए हैं।

‘निष्पक्षता’ की परिभाषा गढ़ने वाले और रोजाना अपनी मायूस शक्ल लेकर टीवी पर आकर लोगों से टीवी ना देखने की अपील करने वाले एक पत्रकार ने कन्हैया कुमार की गरीबी में घुसकर उनसे एक ऐतिहासिक सवाल पूछ डाला। ये ऐसा सवाल था जो कामरेड कन्हैया कुमार के संसद पहुँचने से पहले समाज और राजनीति को लेकर उनके उनके विजन और दर्शन को जानने में सबसे ज्यादा सहायता करने वाला था। ये सवाल था, “कन्हैया कुमार शादी कब करेंगे?”

यही पत्रकार वो महान पत्रकार हैं, जिन्हें इस बात का गम सुबह-शाम सताए जा रहा है कि आखिर नरेंद्र मोदी उन्हें क्यों नहीं इंटरव्यू देते? लेकिन नरेंद्र मोदी तो शादीशुदा हैं, उनसे शादी कब कर रहे हैं जैसी सवाल पूछने का कोई महत्त्व नहीं है, फिर भी इस पत्रकार के अंदर एक गहरी लालसा प्रतिदिन उनके स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँचा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसी वजह से आजकल स्वास्थ्य लाभ के लिए वो अपने प्राइम टाइम में आम भी खाते नजर आ रहे हैं।

खैर, लोकसभा चुनाव जारी हैं और मीडिया का ये लेटेस्ट झुनझुना यानी कामरेड कन्हैया कुमार का राजनीतिक भविष्य भी दाँव पर लगा है। मीडिया द्वारा तैयार किए जाने वाले ये चेहरे चर्चा में आते हैं, उससे दोगुने स्ट्राइक रेट से ये जमीन में धूल खाते नजर आते हैं।

केजरीवाल अभी भी चर्चा में हैं, लेकिन अब ख़बरों का ‘हिसाब‘ किताब बदल चुका है।  अब केजरीवाल की खबरें देखने और सुनने को मिलती हैं कि उनका उन्हीं के विधायकों ने मार-मार के मोर बना दिया है। तो कभी अरविन्द केजरीवाल कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन की भीख माँगने और गिड़गिड़ाने की ख़बरों की वजह से सनसनी बन जाते हैं।

अब यही अध्याय शायद एक बार फिर दोहराया जाना बाकी है। कामरेड कन्हैया अगर सभी को गलत साबित करते हुए आगे बढ़ते हैं, तो ये राजनीति में युवाओं के आगमन के लिए एक अच्छा संकेत साबित होगा। लेकिन, अगर वो भी अरविन्द केजरीवाल वर्जन-2.0 निकलते हैं, तो एक बार फिर हर मायने में मीडिया से लेकर तमाम समर्थकों के साथ खुला धोखा होना तय है। केजरीवाल का डसा हुआ ये आदतन लतखोर मीडिया अगर इस बार ‘लाल सलाम’ से दोबारा डसा जाए, तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

भोपाल से प्रज्ञा ठाकुर ने नामांकन लिया वापस, भाजपा ने ली राहत की साँस

मध्य प्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट से प्रज्ञा ठाकुर ने अपना नामांकन वापस ले लिया है, लेकिन ये बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर नहीं बल्कि निर्दलीय प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर हैं। बता दें कि प्रज्ञा ठाकुर ने भोपाल लोकसभा सीट से साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के समर्थन में अपना नामांकन वापस ले लिया है।

दरअसल, भोपाल लोकसभा सीट से बीजेपी ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। जो दिग्विजय सिंह के खिलाफ मुख्य प्रतिद्वंदी हैं। इसी सीट पर उनकी हमनाम प्रज्ञा ठाकुर ने भी नामांकन पत्र दाखिल किया था। एक ही नाम होने से बीजेपी को इस बात की आशंका थी कि मतदाता कहीं किसी गफलत में आकर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की बजाय प्रज्ञा ठाकुर के नाम के आगे वाला बटन ना दबा दें। जिससे वोट बँट जाएगा, इसलिए बीजेपी ने प्रज्ञा ठाकुर से आग्रह किया कि अपना नाम वापस ले लें।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा करने के लिए साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने खुद प्रज्ञा ठाकुर को मनाने के लिए अपने घर बुलाया। मुलाकात के बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने उनसे चुनाव न लड़ने की अपील की। जिसके बाद प्रज्ञा ठाकुर ने चुनाव ना लड़ने का फैसला किया। इसके बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने प्रज्ञा ठाकुर के घर पहुँचकर उन्हें भगवा शॉल भेंट करके उनका सम्मान भी किया। कुछ भी हो, प्रज्ञा ठाकुर के चुनाव ना लड़ने के ऐलान के बाद अब बीजेपी और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने राहत की साँस ली है।

अभी भी वहाँ वोट काटने के लिए एक और प्रत्याशी मौजूद है, शहीद हेमंत करकरे पर दिए बयान से नाराज़ उनके जूनियर रहे रियाजुद्दीन ने भी भोपाल से नामांकन भरा है। मूल रूप से महाराष्ट्र के औरंगाबाद के रहने वाले रियाजुद्दीन ने भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया है। हालाँकि, अभी तक उन्होंने अपना नामांकन वापस नहीं लिया, लेकिन बीजेपी के वो उतने बड़े मुश्किल नहीं हैं।

BJP में शामिल हुए सेना के 7 रिटायर्ड अधिकारी, रक्षा मंत्री ने दिलाई सदस्यता

लोकसभा चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ अलग-अलग क्षेत्रों के नामी लोगों के जुड़ने का सिलसिला जारी है। शनिवार को बीजेपी मुख्यालय में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में सेना के 7 रिटायर्ड अधिकारी बीजेपी से जुड़ गए। बीजेपी में शामिल हुए 7 रिटायर्ड अधिकारियों में 6 थल सेना और 1 वायुसेना के हैं। इनमें से 5 लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के और 1 कर्नल रैंक के रिटायर्ड अधिकारी हैं, वहीं एक विंग कमांडर रैंक के हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल जेबीएस यादव, लेफ्टिनेंट जनरल आर एन सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल एस के पटयाल, लेफ्टिनेंट जनरल सुनीत कुमार, लेफ्टिनेंट जनरल नितिन कोहली, कर्नल आर के त्रिपाठी और विंग कमांडर नवनीत मेगन ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इससे पहले 6 अप्रैल को सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल शरत चंद भी भाजपा में शामिल हुए थे। सेना में पूर्व उप प्रमुख रहे शरत चंद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की मौजूदगी में दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ली थी।

सेना के सभी पूर्व अधिकारियों के भाजपा में शामिल होने पर निर्मला सीतारमण ने खुशी जताते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “पार्टी में सशस्त्र बलों के बहुत ही सुशोभित वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल करना वास्तव में मेरी खुशी है। ऐसे वरिष्ठ पूर्व सैनिकों की उपस्थिति से भाजपा को लाभ होता है। वे राष्ट्र सुरक्षा की नीतियों पर मार्गदर्शन कर सकते हैं।”

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही अभिनेता सनी देओल भाजपा में शामिल हुए हैं। सनी देओल को पार्टी ने गुरदासपुर सीट से टिकट दिया है। वहीं, दिल्ली में लोकसभा उम्मीदवारों के नाम के ऐलान से कुछ सप्ताह पहले ही पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर भी पार्टी में शामिल हुए थे। गौतम गंभीर इस चुनाव में पूर्वी दिल्ली से बीजेपी के उम्मीदवार हैं।

फर्जी मदरसे की आड़ में ₹58 लाख का घोटाला, जाँच में हुआ खुलासा

सहारनपुर के अल्पसंख्यक विभाग में सरकारी पैसे की बंदरबांट को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। दरअसल, विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिली भगत के चलते मिर्जापुर के बादशाही इलाके में एक फर्जी मदरसा चलाया जा रहा था। जिसके नाम पर ₹58 लाख का घोटाला हुआ। पूरे मामले का खुलासा तहसीलदार की जाँच में हुआ है। इस रिपोर्ट को सहारनपुर के डीएम ने लखनऊ भेज दिया है।

मीडिया खबरों के मुताबिक कादरिया उल उलेमा एंग्लों नाम के फर्जी मदरसे की आड़ में अधिकारियों द्वारा किया गया ₹58 लाख का घोटाला सामने आया है। इस मदरसे में छात्रवृत्ति के नाम पर लाखों रुपए भेजे गए, लेकिन जब जाँच हुई तो इस नाम के किसी मदरसे की होने की पुष्टि नहीं हुई। ऐसे में सवाल उठा कि यदि मदरसा नहीं हैं तो छात्रवृत्ति के नाम पर आई राशि आखिर गई कहाँ?

इस मामले की शिकायत के बाद जाँच रिपोर्ट बेहट के तहसीलदार को सौंपी गई। रिपोर्ट में मदरसे के बारे में बताते हुए कहा गया कि रमजान में छुट्टियों के चलते बच्चे अपने घर गए हुए हैं। लेकिन महीने भर बाद जब विभागीय अधिकारी बदले तो मामले की फिर जाँच हुई। जिसके बाद मालूम पड़ा कि वाकई में इस नाम का कोई मदरसा नहीं हैं।

मदरसे के नाम पर हुए लाखों के घोटाले के कारण जिला प्रशासन में हलचल मची हुई है। इस मामले में डीएम का कहना है कि रिपोर्ट सरकार के पास भेज दी गई है। जाँच में जो भी विभागीय अधिकारी संलिप्त पाया जाएँगे उन पर सख्त कार्रवाई होगी।

CJI गोगोई के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न की ख़बरों पर प्रतिबंध के लिए HC में याचिका दायर

दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के ख़िलाफ़ उत्पीड़न के आरोपों की रिपोर्ट करने के लिए मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की माँग की गई है। याचिका में टीवी, अख़बारों और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर CJI गोगोई के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के आरोपों से संबंधित ख़बरों के प्रकाशित करने पर रोक लगाने के लिए सरकार और भारतीय प्रेस परिषद से निर्देश माँगे गए।

मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर सुनवाई की, जिसमें CJI के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के आरोपों को प्रसारित करने से “समाचार मीडिया चैनलों और अन्य प्लेटफार्मों पर तत्काल प्रतिबंध” की माँग की और इसे सोमवार (29 अप्रैल) को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

एंटी करप्शन काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने अपने वकीलों के माध्यम से, इस आधार पर मामले की तत्काल सूची के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया कि CJI के ख़िलाफ़ आरोपों का प्रसारण और प्रकाशन “भारतीय न्यायिक प्रणाली पर सीधा हमला है।”

इस याचिका में क़ानून मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, दिल्ली सरकार, प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया, दिल्ली पुलिस कमिश्नर, ऑपरेशनल हेड वाट्सएप, गूगल, यूट्यूब, लिंक्डइन और वेबसाइट Scroll.in को पक्षकार बनाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व महिला कर्मचारी द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए थे। अदालत ने CJI पर लगाए गए आरोपों की आंतरिक जाँच के आदेश दिए थे और साथ ही मुख्य न्यायाधीश के ख़िलाफ़ साज़िश के आरोपों की जाँच के निर्देश दिए थे। CJI ने कहा था कि यह आरोप उन्हें अगले सप्ताह महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई से रोकने की बड़ी साज़िश है। इन मामलों में राहुल गाँधी की अवमानना का मामला भी शामिल था।


भीम आर्मी चीफ अशोक कांबले ने साध्वी प्रज्ञा के मुँह पर कालिख पोतने के लिए रखा ₹5 लाख का ईनाम, गिरफ्तार

भोपाल से भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के मुँह पर कालिख पोतने वाले को ₹5 लाख का ईनाम देने का ऐलान करने वाले महाराष्ट्र भीम आर्मी के चीफ अशोक कांबले को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में पुलिस ने कांबले के अलावा सात अन्य पार्टी कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया है। पिछले दिनों साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने शहीद हेमंत करकरे को लेकर एक विवादास्पद बयान देते हुए कहा था कि उन्हें मेरा श्राप लगा था, जिसके सवा महीने बाद आतंकी हमले में करकरे की मौत हो गई थी। हालाँकि, इसके बाद प्रज्ञा ने अपना बयान वापस लेते हुए उस पर खेद भी जताया था।

प्रज्ञा के इस बयान के बाद भीम आर्मी के महाराष्ट्र प्रमुख अशोक कांबले ने बुधवार (अप्रैल 24, 2019) को मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रज्ञा सिंह के चेहरे पर कालिख पोतने वाले को ₹5 लाख का इनाम दिए जाने की घोषणा की थी। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि जो प्रज्ञा ठाकुर को महाराष्ट्र के किसी गाँव में नहीं घुसने देगा, उसे भी सम्मानित किया जाएगा। अशोक कांबले के द्वारा किए गए इस ऐलान करने के बारे में पुलिस को कुछ ही देर बाद पता चल गई थी और अब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया है।

गौरतलब है कि प्रज्ञा के चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद से ही साध्वी प्रज्ञा को चुनाव लड़ने से रोकने की कवायद शुरू हो गई। साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ तहसीन पूनावाला ने चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए साध्वी प्रज्ञा की उम्मीदवारी पर रोक लगाने की सिफारिश की थी। मगर चुनाव आयोग ने साध्वी प्रज्ञा की उम्मीदवारी पर रोक लगाने से साफ तौर पर इनकार कर दिया। चुनाव आयोग ने कहा कि अभी तक साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ कोई भी दोष साबित नहीं हुआ है और जब तक आरोप साबित नहीं हो जाता, चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगाई जा सकती। चुनाव आयोग ने कहा कि दोष साबित हो जाने पर चुनाव न लड़ने का प्रवाधान है। आरोपित होने पर चुनाव लड़ने से किसी की उम्मीदवारी पर रोक नहीं लगाई जा सकती।

राहुल गाँधी ने अमित शाह को ‘हत्या का आरोपित’ कहा, कोर्ट ने दिए जाँच के आदेश

राहुल गाँधी ने हाल ही में मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक चुनावी रैली के दौरान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को ‘हत्या का आरोपित’ कहा था। इसके बाद कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ बुधवार को उनकी अपमानजनक और झूठी टिप्पणी के लिए मानहानि की शिकायत दर्ज की गई थी।

अब, गुजरात की एक महानगरीय अदालत ने शुक्रवार को बीजेपी के खड़िया पार्षद कृष्णवदन ब्रह्मभट्ट द्वारा दर्ज की गई शिकायत के आधार पर इस मामले की जाँच का आदेश दिया है। कोर्ट 30 अप्रैल 2019 को इस बात पर फैसला करेगा कि इस शिकायत का संज्ञान लिया जाए या नहीं।

अदालत ने इस मामले में ब्रह्मभट्ट और उनके दो गवाहों- जिगेश दानी और उमंग नाइक के बयान को दर्ज किया और सुनवाई 30 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी। 30 अप्रैल को ही यह फैसला होगा कि मामले में संज्ञान लिया जाए और गाँधी को समन जारी किया जाए? या नहीं। उपरोक्त बातें ब्रह्मभट्ट के वकील प्रकाश पटेल ने डीएनए को बताया।

बता दें कि राहुल गाँधी के खिलाफ हाल के दिनों में सार्वजनिक रूप से की गई कई झूठी टिप्पणियों, बयानों के लिए मुकदमा दायर किया गया है। कुछ दिन पहले ही, उन्होंने दावा किया था कि देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि “चौकीदार चोर है।” उन्हें अपनी इसी विवादास्पद टिप्पणी के लिए सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष माफी माँगने को विवश होना पड़ा था।

एक और मानहानि की शिकायत में, जो आरएसएस अध्यक्ष द्वारा राहुल की उस टिप्पणी के लिए दायर की गई थी कि जिसमें राहुल ने दावा किया था, “भगवा संगठन महात्मा गाँधी की हत्या के लिए जिम्मेदार था।’ इस मामले में भी राहुल गाँधी ने कोर्ट में यू-टर्न ले लिया था और दावा किया कि उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा था बल्कि उनकी टिप्पणियों की गलत व्याख्या की गई थी।”

बुधवार को राहुल गाँधी के खिलाफ एक और शिकायत, उनके चुनावी हलफनामों में यह बात छिपाने के लिए दायर की गई थी कि उनको मानहानि मामले में समन मिला था।

‘NYAY’ योजना का फ़र्ज़ी फॉर्म बँटवा रही कॉन्ग्रेस, लोगों ने किया बेनक़ाब: रिपोर्ट

राजस्थान के कोटा में, इस क्षेत्र के मतदान से 48 घंटे पहले, शहर के कुठा बस्ती क्षेत्र में कुछ राजनीतिक कार्यकर्ता कॉन्ग्रेस के ‘NYAY’ योजना के फ़र्ज़ी फॉर्म बाँटते देखे गए, जिससे शहर में हलचल मच गई। फॉर्म में निजी जानकारी माँगी गई थी और लोगों से 72,000 रुपए प्राप्त करने के लिए ख़ुद को पंजीकृत करने के लिए ई-मित्र पर फॉर्म जमा करने के लिए कहा गया था। भाजपा ने आधिकारिक तौर पर चुनाव आयोग को इस बारे में शिकायत दर्ज कराई है।

जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव का चौथा चरण पास आ रहा है वैसे-वैसे कॉन्ग्रेसी खेमें में नए-नए प्रयोग करना लगातार जारी है। कॉन्ग्रेस, NYAY योजना के फ़र्ज़ी फॉर्म ग्रामीणों के बीच बाँट कर रही है जिसका एकमात्र उद्देश्य अपने पक्ष में वोट देने के लिए वोटरों को लुभाना है। इस फॉर्म में 72,000 रुपये वार्षिक प्राप्त करने के लिए मतदाताओं की व्यक्तिगत जानकारी माँगी गई है।

ट्विटर यूज़र @yash1m, जो अपने ट्विटर प्रोफाइल के अनुसार भाजपा के आईटी सेल का एक हिस्सा हैं, ने भी इस घटना का एक वीडियो शेयर किया।

इस वीडियो में देखा जा सकता है, कई ग्रामीणों, जिनमें विशेषतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों की भोली-भाली महिलाएँ शामिल थे उन्हें NYAY योजना के फॉर्म दिए गए थे, इस पर कॉन्ग्रेस के चुनाव चिन्ह के साथ-साथ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की भी फोटो छपी थी। जब ग्रामीण-जन स्थानीय सरकारी कार्यालय में अपने फॉर्म जमा करने के लिए पहुँचे, तो उन्हें पता चला कि उन्हें जो फॉर्म वितरित किए गए वो नकली थे और इनका वितरण केवल उन्हें धोखा देने के लिए किया गया था।

अपनी चुनावी नौटंकी के रूप में, राहुल गाँधी ने घोषणा की थी कि अगर कॉन्ग्रेस केंद्र में सरकार बनाती है, तो वे गरीबी दूर करने के लिए NYAY योजना को लागू करेंगे। उन्होंने कहा कि इसके तहत 5 करोड़ परिवार या 25 करोड़ लोगों को इस योजना से फ़ायदा मिलेगा। हालाँकि, यह योजना अभी तक स्पष्ट नहीं हैं कि आख़िर राहुल गाँधी इस योजना की धनराशि कहाँ से लाएँगे। कई वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों ने इस योजना के व्यवहारिक रूप पर भी सवाल उठाए थे।

जबकि कॉन्ग्रेस के गुरू सैम पित्रोदा ने इस योजना के लिए मध्यम वर्ग को अतिरिक्त बोझ यानी अधिक टैक्स देने के लिए तैयार रहने की बात तक कह डाली थी। इसके अलावा इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तो चुनाव आयोग को नोटिस भेजकर पूछा था कि क्या इस योजना को मतदाताओं के लिए चुनावी रिश्वत कहा जा सकता है।

‘जिसको आलू से सोना बनाना है वो उनके पास जाएँ, हम ऐसा नहीं कर सकते’ : PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के कन्नौज में जनसभा को संबोधित करते हुए सपा-बसपा और कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्हें ‘महामिलावटी’ करार दिया और शनिवार (अप्रैल 27, 2019) को आरोप लगाया कि इन पार्टियों का हाल ‘जात-पात जपना, जनता का माल अपना’ जैसा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के उस कथित बयान पर तंज किया, जिसमें दावा किया गया कि वह किसी मशीन से आलू से सोना बनाने की बात कर रहे थे। PM मोदी ने उसी एक बयान को राहुल गाँधी के खिलाफ इस्तेमाल करते हुए कहा कि आलू से सोना निकालने का काम भाजपा के बस की बात नहीं है।

नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा, “हमारे देश में ऐसे बुद्धिमान और तेजस्वी लोग हैं, जो आलू से सोना बनाते हैं। वो काम हम नहीं कर सकते, न मेरी पार्टी कर सकती। जिसको आलू से सोना बनाना है, वो उनके पास जाये, हम ऐसा नहीं कर सकते।”

आज की जनसभा में किसानों को विश्वास दिलाते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा, “हम कोल्ड स्टोरेज बनाएँगे, आलू का वैल्यू एडिशन बढ़ाएँगे और आलू से चिप्स बनवा सकते हैं और किसानों की आय दोगुना करने के प्रयास कर रहे हैं।”

आएगा तो मोदी ही’

भाषण के बीच नरेंद्र मोदी ने अपनी परिचित शैली में कहा, “सभी एकमत होकर कह रहे हैं, महामिलावटी लोग सारी कोशिश कर लो, लेकिन… आएगा तो मोदी ही!”

‘महामिलावटी लोगों ने चौकीदार को गाली दी, राम भक्तों को गाली दी’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सपा-बसपा और कॉन्ग्रेस पर हमला करते हुए कहा, “इन महामिलावटी लोगों ने चौकीदार को गाली दी, राम भक्तों को गाली दी, लेकिन परिणाम ये हुआ है कि ये सभी लोग खत्म हो गए।”

इसके साथ ही, मोदी ने कहा कि ये चुनाव ना तो भाजपा लड़ रही है और ना ही भाजपा के कार्यकर्ता लड़ रहे हैं, इस बार का चुनाव उत्तर प्रदेश की जनता लड़ रही है। उन्होंने कहा, “आज मोदी का प्रचार वो बहन कर रही है, जिसने पूरी जिंदगी चूल्हे के धुएँ में निकाल दी थी और उसे उज्ज्वला योजना से गैस कनेक्शन मिला।