तेलंगाना शमशाबाद में आज प्रियंका गाँधी के भाई राहुल गाँधी की रैली से पहले कॉन्ग्रेस पार्टी नेता और पूर्व सांसद विजयाशांति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादित टिप्पणी कर अपनी मानसिक अशांति का परिचय दिया है। विजयाशांति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बारे में बेहद भद्दी टिप्पणी की है।
कॉन्ग्रेस की स्टार प्रचारक विजयाशांति ने तेलंगाना के शमशाबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी के भाषण से पहले बयान देते हुए कहा, “हर किसी को ये डर लगता है कि नरेंद्र मोदी कब बम गिरा देंगे, वो आतंकवादी की तरह दिखते हैं। लोगों को प्यार करने के बजाए वो लोगों को डराते हैं, प्रधानमंत्री को इस तरह पेश नहीं आना चाहिए।”
Vijaya Shanti, Congress in Shamshabad, Telangana: Everyone is scared that at what moment Modi will shoot the bomb. He looks like a terrorist. Instead of loving people, he is scaring people. It’s not the way how a PM should be. pic.twitter.com/1pDEvYHXH8
ट्विटर यूज़र्स ने विजयशांति के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि शायद विजयाशान्ति ने ये बयान राहुल गाँधी के भाषण से पहले उन्हें खुश करने के लिए दिया होगा। हालाँकि, कुछ लोगों का कहना है कि कॉन्ग्रेस ये डर नरेंद्र मोदी का नहीं बल्कि आने वाले लोकसभा चुनावों में मिलने वाली हार का डर है।
Congress’ Vijaya Shanti made these comments before Rahul Gandhi’s speech in Shamshabad, Telangana today. She said, “Everyone is scared at what moment Modi will shoot the bomb. He looks like a terrorist. Instead of loving ppl, he’s scaring ppl. It’s not the way how a PM should be” pic.twitter.com/jJSOqtXnk8
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी और इसके नेता अक्सर अपना दायरा लाँघ देते हैं और यही शायद पार्टी ने अपने सदस्यों को भी अच्छी तरह से समझाया है। इसी डर वाली बात पर नरेंद्र मोदी ने एक बार अपने भाषण में कहा था कि कुछ लोगों उनसे डर लगना भी चाहिए।
सिद्धांत और व्यवहार का अंतर देखना हो तो किसी वामपंथी पार्टी को देख लीजिए। ध्यान देंगे तो वहाँ तानाशाही से लेकर पितृसत्ता सब नज़र आएगी। महिलाओं को अधिकार देने की बात केवल दूसरी पार्टियों को घेरने में इस्तेमाल की जाती है।
बात हो रही है वामपंथ के एकमात्र दुर्ग केरल की। जहाँ बाकी 8 पार्टियों के हक को दरकिनार कर 10 पार्टियों के गठबंधन की सारी सीटों को मात्र दो पार्टियों ने आपस में बाँट लिया और दोनों ने अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान भी कर दिया है।
बता दें कि, केरल में कुल 20 लोकसभा सीटें हैं। सभी 20 सीटों को गठबंधन की दो बड़ी पार्टियों ने साझा कर लिया है। LDF में शामिल सबसे बड़ी पार्टी सीपीआई (एम) ने राज्य की 16 लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया, वहीं दूसरी बड़ी पार्टी सीपीआई 4 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने जा रही है।
मजेदार बात यह है कि इन सीटों पर भी मौजूदा सांसदों और विधायकों को ही मौका दिया गया है, यह कहकर कि इस बार जीतना ज़रूरी है। शायद मोदी फैक्टर का डर इतना हावी हो गया है कि गठबंधन की बाकी पार्टियों को पूर्णतया नज़रअंदाज कर दिया गया है।
ख़ैर, अब शायद ही कोई गठबंधन से पूछे कि कहाँ गई समानता की बात? क्या केरल में पिछड़ों को आगे बढ़ाने की बात LDF भूल गई। यह सिद्धांत उसे केवल दूसरी पार्टियों के सन्दर्भ में ही नज़र आता है।
बता दें कि महिला अधिकारों की दलील देने वाली इस गठबंधन के व्यवहार में कहीं भी दिखाई नहीं दे रहा। कुल 20 सीटों में मात्र दो महिलाओं को मौका दिया गया है और वो भी उन्हें जो मौजूदा समय में सत्ता में हैं।
‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से दुनिया भर चर्चित हुई शमीमा बेगम के नवजात बेटे की मौत हो गई है।
बता दें कि बांग्लादेशी मूल की ब्रिटिश युवती ने 2015 में सीरिया जाकर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट में शामिल होने का फैसला लिया था। ब्रिटेन से भागकर आतंकी संगठन आईएसआईएस में शामिल हुई शमीमा बेगम को पिछले दिनों बांग्लादेश और नीदरलैंड्स ने भी झटका दिया था। दोनों ही देशों ने उसे अपने यहाँ शरण देने से मना कर दिया था।
इससे पहले ब्रिटेन ने जिहादी दुल्हन के नाम से पहचान बना चुकी शमीमा की नागरिकता रद्द कर दी थी। तब बांग्लादेश ने अपनी सफाई में कहा था कि शमीमा के पास अब दोहरी नागरिकता नहीं है, इसलिए उसका फिलहाल उनके देश से कोई लेना-देना नहीं है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीरियन डेमोक्रेट के प्रवक्ता ने बताया कि बेगम के नवजात बेटे की मौत खराब स्वास्थ्य के कारण हुई है। दो सप्ताह पहले ही जन्मे बच्चे का नाम जर्राह था और जन्म के समय से ही न्यूमोनिया पीड़ित था।
यह जिहाद का जुनून ही था कि आईएसआईएस में शामिल होने के लिए बेगम महज 15 साल की उम्र में लंदन से भागकर सीरिया पहुँच गई थी। आज उसके उसी जुनून ने उसकी ज़िन्दगी ज़हन्नुम बना दी है।
वह पिछले महीने दुनिया भर में उस समय सुर्खियों में छा गई, जब इस ‘ज़िहादी दुल्हन’ ने उसने सार्वजनिक रूप से ब्रिटिश सरकार से उसे वापस आने की अनुमति देने का अनुरोध किया था। और अब शमीमा बेगम के परिवार के लोग भी उसे ब्रिटेन वापस आने देने की माँग कर रहे हैं।
पुलवामा हमले के बाद से ही पाकिस्तान के साथ बढ़ रही तनातनी के कारण पाकिस्तान पिछले दिनों कई तरह की समस्याओं से गुजर रहा है। लेकिन अन्य सभी समस्याओं के समानांतर पाकिस्तान इन दिनों ‘टिमाटर’ और लहसुन की समस्या से भी जूझ रहा है।
पुलवामा अटैक और उसके बाद भारत की एयर स्ट्राइक के चलते पाकिस्तान में टमाटर और लहसुन की किल्लत काफी बढ़ गई है। जिस कारण लाहौर के बादामी बाग स्थित सब्जी मार्केट में 2 घंटे के भीतर भारत से पहुँची 2 ट्रक लहसुन हाथों-हाथ बिक गई। इस बात की पुष्टि पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अपनी रिपोर्ट में की है। अखबार के अनुसार भारतीय पायलट अभिनंदन को छोड़े जाने के बाद भारत से टमाटर और लहसुन की तस्करी शुरू हो गई है।
दोनों देशों के बीच तनाव के चलते कारोबार ठप हो गया था और ट्रकों की आवाजाही भी रुक गई थी। लेकिन, अब श्रीनगर से पाकिस्तान के कब्जे वाले चकोटी के बीच ट्रकों का आवागमन शुरू हो गया है। रावलपिंडी और लाहौर के बाजारों में भारत से आई सब्जियों से लदे ट्रक पहुँचने लगे हैं।
शुक्रवार (मार्च 08, 2019) को लाहौर के सब्जी बाजार में भारत से गए 2 ट्रक लहसुन पहुँचे, बाजार के एक होलसेलर ने यह ऑर्डर दिया था। होलसेलर एसोसिएशन ने भारत के खिलाफ बैनर लगा रखे हैं, लेकिन कुछ कारोबारी भारत से आई सब्जियों को बेच कर मुनाफा कमा रहे हैं।
लाहौर के बादामी बाग फल एवं सब्जी मार्केट की एसोसिएशन के महासचिव के चौधरी खलील महमूद के मुताबिक यह ट्रक तस्करी के जरिए पहुँच रहे हैं। खलील ने दावा किया कि सीमा पर घूसखोरी के जरिए ट्रकों को पाकिस्तान में एंट्री दी जा रही है।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ एक दिवसीय मैच के तीसरे मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम ने शुक्रवार (मार्च 8, 2019) को पुलवामा में वीरगति प्राप्त हुए सेना के जवानों और उनके परिवार के सम्मान में मिलिटरी कैप को पहना।भारतीय टीम के इस कदम को सबके द्वारा सराहा गया लेकिन कुछ लोगों से यह बर्दाशत नहीं हुआ। वैसे तो इस कदम का विरोध पाकिस्तान द्वारा भी किया गया जो कि अपेक्षित था लेकिन कुछ घर के दीमकों ने इसे मुद्दा बनाया और अपनी सनी हुई विचारधारा को परोसने का एक बार फिर प्रयास किया।
इस मैच के खत्म होने के साथ ही न्यूज़ में एक हेडलाइन आई, “Indian team wearing Military Cap is a dangerous sign” जिसका अर्थ हुआ कि भारतीय टीम ने जो मिलिटरी कैप पहनी है वो एक खतरनाक निशान है। जाहिर है कि इतनी ‘बढ़िया’ हेडलाइन वाले आर्टिकल को अंदर तक पढ़ने का किसी का भी मन करेगा। आखिर इसी से तो मालूम चलता है कि एक पाठक को किस तरह बकवास बताते हुए बरगलाया जाता है।
इस लेख में पहले बताया गया कि वीरगति को प्राप्त हुए जवानों के परिवार वालों की मदद के लिए टीम द्वारा मिलिटरी कैप पहनकर प्रचार करना आवश्यक नहीं था और बाद में इस लेख में भारतीय टीम के इस कदम को अंधराष्ट्रीयता (outward military jingoism) से जोड़कर बताया गया। हालाँकि, भारतीय क्रिकेट टीम के लिए इस प्रकार के शब्दों का इस्तेमाल एक मज़ाक से ज्यादा कुछ भी नहीं हैं लेकिन ऐसा करने के साथ आर्टिकल को लिखने वाले लेखक ने खुद के लिए अतिश्योक्ति के रास्ते को अख्तियार कर दिया।
मिलिट्री कैप को पहनने का स्पष्ट अर्थ था कि भारतीय क्रिकेट टीम वीरगति प्राप्त हुए सीआरपीएफ के जवानों और उनके परिवार वालों के साथ खड़ी है। यह कोई युक्ति नहीं थी जिससे अंदाजा लगाया जाए कि ऐसा दान कार्य को प्रचारित करने के लिए किया गया है। बल्कि यह कदम तो सभी भारतीय नागरिकों को राष्ट्रीय रक्षा कोष में योगदान देने के लिए प्रेरित करने का एक प्रयास था।
मालूम नहीं कि इस लेख को लिखने वाले लेखक इस बात को जानते हैं या नहीं लेकिन भारत में जिन दो चीजों को सबसे ज्यादा सराहा जाता है वो एक भारतीय सेना और दूसरी भारतीय क्रिकेट टीम है। सीमा पर सेना की कार्रवाई और पिच पर भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी के प्रदर्शन को लेकर लोगों में उत्साह बराबर ही देखने को मिलता है। ऐसे में अगर भारतीय क्रिकेट टीम भारतीय सेना के साथ खड़ी दिखती है, तो जाहिर है न इसमें कोई हैरानी वाली बात है और न ही खतरे वाली।
लेकिन इस लेख में इतने के बावजूद भी टीम और मिलिट्री कैप का military jingoism (सैन्य अंध-राष्ट्रभक्ति)के साथ तुल्नात्मक अध्य्यन खत्म नहीं हुआ और धीरे-धीरे इसका इतना विस्तार हुआ कि केवल मिलिट्री कैप पहनने भर को खतरनाक राष्ट्रवाद का नाम दे दिया गया।
राष्ट्रवाद के नाम पर ऐसा कभी नहीं हुआ? सचिन का हेलमेट भूल गए…
इस आर्टिकल में आगे लच्छेदार बातें करते हुए कहा गया कि आज से पहले कभी भारतीय क्रिकेट टीम ने इस तरह की ‘अंध-राष्ट्रीयता’ को अपने सर पर नहीं पहना था, लेकिन शायद लेखक महोदय भूल गए हैं कि क्रिकेट की दुनिया के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने हमेशा मैदान में अपने सिर पर तिरंगे को गर्व से सजाए रखा है।
सचिन तेंदुलकर
इसके बाद इस आर्टिकल में सवाल किया गया कि आखिर अब तक भारतीय टीम ने शिक्षा और अन्य जगहों में अपनी कमाई को क्यों नहीं दिया? मतलब साफ़ है लेखक को दिक्कत इस बात से हैं कि जवानों के लिए भारतीय क्रिकेट टीम में इतना प्यार क्यों है… खैर इस पूरे आर्टिकल को पढ़ते हुए आपको लगातार हँसी आएगी और आप यह सोचने पर मजबूर हो जाएँगे कि लेखक को आखिर यह तय करने का अधिरकार किसने दिया कि भारतीय टीम अपनी कमाई कब, किसे और कैसे देगी। लेकिन फिर भी, चूँकि इस लेख से लगता है कि लिखने वाला ‘गजनी’ फिल्म वाली बीमारी से पीड़ित है इसलिए याद दिला दें कि हाल ही में केरल बाढ़ पीड़ितों के लिए भारतीय क्रिकेट टीम ने पूरे टेस्ट मैच में मिलने वाले रुपयों को दान में दिया था। इसके अलावा टीम के खिलाड़ियों ने आम बच्चों और कैंसर पीड़ितों के लिए चैरिटी फुटबॉल मैच भी खेला था।
लेखक ने अपने लेख में जिन खिलाड़ियों पर सवाल उठाए हैं वो शायद नहीं जानते कि इन खिलाड़ियों ने निजी स्तर पर पशु कल्याण, स्वच्छ भारत मिशन, नारी सशक्तिकरण जैसे आदि मुद्दों पर अलग-अलग अपना योगदान दिया है। और अगर उन्हें याद है तो लगता है चुनाव के नज़दीक होने के कारण लेखक को केवल राष्ट्रवाद की छवि धूमिल करना ही उचित लग रहा है।
इस लेख में उस समय का भी हवाला दिया गया जब भारत की हॉकी टीम ने 1936 में “हेल हिटलर” को सैल्यूट करने से इंकार कर दिया था। उस समय इस घटना को फॉसिज्म के ख़िलाफ़ उठा कदम बताया गया था लेकिन वहीं आज भारतीय टीम के कदम को खतरनाक बता दिया गया जो स्पष्ट रूप से जवानों के साथ और आतंकवाद के ख़िलाफ़ खड़े थे।
वैसे देखा जाए तो अब हमें ऐसे लोगों की कही बातों पर हैरान होने की भी आवश्यकता नहीं है क्योंकि देश में अभिव्यक्ति की आजादी का फायदा उठा कर तो ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ जैसे नारे दे दिए गए। फिर सेना की टोपी भर पहनने को अगर यहाँ पर ‘सैन्य अंध-राष्ट्रवाद’ से जोड़ा जाए तो क्या हैरानी है। दरअसल ऐसे लोगों को कोई लेना-देना नहीं हैं कि देश की सेना हमें सुरक्षित रखने के लिए किस तरह के प्रयास कर रही है। एक मिलिट्री कैप को पहनना इनके लिए निश्चचित ही डरावना हो सकता है, क्योंकि उससे इनकी विचारधारा पर खतरा मंडराना शुरू हो जाता है।
जब मोइन अली ने कलाई में बैंड बाँधकर खेला था मैच
इस आर्टिकल में लिखे झूठ अभी यहीं खत्म नहीं होते बल्कि आगे भी इसमें झूठों का विस्तार है। इस आर्टिकल में लिखा है कि मॉडर्न क्रिकेट के इतिहास में कभी अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान किसी ने भी सैन्य छलावरण टोपी या फिर कोई प्रतीक नहीं पहना। अब लेखक को कौन बताए कि आर्टिकल लिखने से पहले अगर वो सिर्फ गूगल पर थोड़ी जानकारी ले लेते तो उन्हें मालूम पड़ता कि 2014 में साउथएम्पटन टेस्ट में मोइन अली ने गाजा और पैलेस्टीन को आजाद करने के लिए कलाई में बैंड बांधकर खेल खेला था और पूरी टीम के कॉलर पर ‘हेल्प फॉर हीरोज़’ का लोगो भी लगा था। जाहिर है अति लिब्रल लोगों को उनके इस इशारे से किसी भी प्रकार की कोई आपत्ति नहीं हुई होगी क्योंकि यहाँ से उनकी विचारधारा को कोई दिशा नहीं मिलती।
मोइन अली
जब धोनी और कोहली मिलिट्री कैप को पहनकर मैदान पर उतरे तब उन्होंने देश के उन करोड़ों लोगों का दिल जीता जिनके भीतर राष्ट्र और सेना के प्रति सम्मान है।
लेकिन आज हमारे देश में कुछ तथाकथित पत्रकारों की वो हालत है कि वो देश के नागरिकों में राष्ट्रवाद का गलत पर्याय फैलाने में जुटे हुए हैं। ऐसे लोग डरते हैं कि राष्ट्रवाद की भावना लोगों के भीतर जागरूकता को फैला रही है, जिसके कारण इनके अजेंडे कामयाब नहीं हो रहे। अब ऐसे में इसलिए यह लोग ऐसे माहौल का निर्माण कर रहे हैं जिसमें एक राष्ट्रवादी को आतंकवाद का चेहरा बताकर पेश किया जा रहा है और आतंकियों को सहिष्णुता और मानवता का संरक्षक।
बता दिया जाए कि ऐसे प्रोपोगेंडा फैलाने वाले ये वहीं लोग हैं जो ‘अफजल हम शर्मिंदा हैं’ जैसे नारों को पैदा करते हैं और ‘भारत माता की जय’ बोलने पर इन्हें शर्म आने लगती हैं। ऐसे ही लोग पत्थरबाजों के समर्थन में खोज-खोज कर आर्टिकल लिखने को तैयार रहते हैं लेकिन जैसे ही भारतीय सेना इनके ख़िलाफ़ कदम उठाती हैं तो इन्हें उससे गुरेज़ होता है।
एयर स्ट्राइक का सबूत माँगने पर कॉन्ग्रेस के अंदर ही ताबड़तोड़ घमासान शुरू हो गई है। आगामी लोकसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और बिहार कॉन्ग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विनोद शर्मा ने ये कहते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया है कि कॉन्ग्रेस द्वारा सैनिकों के बलिदान का मजाक बनाना और सबूत माँगना निंदनीय है, इसी वजह से लोग उन्हें और कॉन्ग्रेस पार्टी को पाकिस्तान का एजेंट कहने लगे हैं।
शर्मा ने पार्टी की इस हरकत को शर्मनाक बताते हुए पद और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया है। डॉ. विनोद शर्मा ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और प्रियंका गाँधी के भाई राहुल गाँधी को भेजे पत्र में लिखा, “मैंने पहले भी आपको पत्र और ई-मेल के जरिये पार्टी के कार्यकर्ताओं और जनता की भावना से अवगत कराने का प्रयास किया, लेकिन आपने इसकी अनदेखी की। पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद पूरा देश शोकाकुल है और आक्रोशित है, इसके बाद भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान में आतंकी प्रशिक्षण केंद्र बालाकोट पर एयर स्ट्राइक कर के साहसिक काम किया, जिसमें सैकड़ों आतंकवादियों की जानें गईं। आज पूरा देश सेना के पराक्रम और शौर्य पर गर्व कर रहा है, लेकिन कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा एयर एयर स्ट्राइक और आतंकियों की सूची माँगना एक शर्मनाक और बचकानी हरकत है।”
विनोद शर्मा ने कहा, “कॉन्ग्रेस पार्टी सेना से पाकिस्तान के बालाकोट में मारे गए आतंकियों की सूची माँगती रही। यह निश्चित रूप से किसी भी देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी ऐसी बात करे। यह तय है कि सेना ने जो बम गिराए हैं, उससे 70 फीट गहरे गड्ढे होते हैं। 70 फीट गड्ढा और वहाँ आग का जो गोला था, ऐसे में कोई आतंकी कैसे बचेगा? यह सोचने वाली बात है। लेकिन कॉन्ग्रेस का बार-बार इस तरह की बातें उठाकर राजनीति करना, मुझे पसंद नहीं आया। मैं पिछले 30 वर्षों से पार्टी में काम कर रहा था। इस वजह से काफी दुखी मन से मैंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। पार्टी हित से ज्यादा राष्ट्रहित जरूरी है, इसलिए मैंने ऐसा किया।”
कॉन्ग्रेस प्रवक्ता विनोद शर्मा ने कहा, “राहुल गाँधी को पार्टी के कार्यकर्ताओं की भावना को समझना चाहिए। पार्टी के कार्यकर्ता भी चाहते थे कि कॉन्ग्रेस इस तरह की बयानबाजी न करे। वजह ये है कि हमें सड़कों पर रहना पड़ता है। आम लोगों की बातों को सुननी पड़ती है। आम लोग चाह रहे थे कि पूरे देश के लोगों को सेना के साथ खड़ा रहना चाहिए। सभी राजनीतिक पार्टियों को सेना का साथ देना चाहिए। लेकिन दुर्भाग्यवश कॉन्ग्रेस जैसे भी हो, कहीं न कहीं गलत कदम उठा रही थी। सेना का मनोबल तोड़ने का काम कर रही थी।”
सेना के नाम पर राजनीति करने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी की गतिविधियों से दुखी पूर्व कॉन्ग्रेस प्रवक्ता विनोद शर्मा ने कहा, “हम लोगों को लगा कि देश सबसे सर्वोपरि है। राष्ट्र सर्वोपरि है। कॉन्ग्रेस अपने पथ से भटक रही है। आज हम इंदिरा जी का 47 वर्षों से नाम लेते हैं कि उन्होंने पाकिस्तान के दो टुकड़े किए। ऐसा क्यों? उस समय वाजपेयी जी ने भी इंदिरा जी की सराहना की थी। लेकिन आज दुर्भाग्य ये है कि हमारे नेता राहुल गाँधी आम लोगों की भावना को नहीं समझ रहे हैं। सेना के पराक्रम और शौर्य को नीचा करने का काम कर रहे थे। ऐसी स्थिति में काफी दुखी मन से कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़नी पड़ रही है।”
किसी और पार्टी में शामिल होने के सवाल पर विनोद शर्मा ने कहा, “अभी तक किसी पार्टी से बात नहीं हुई है। लेकिन जो पार्टी देश हित में बात करेगी, पार्टी से पहले देश को तवज्जो देगी, उसके साथ जाने पर विचार कर सकते हैं। मैं देश की जनता की भावना को ध्यान में रखते हुए आम आदमी के लिए काम करूँगा। हमारे पुराने नेता नेहरू जी, इंदिरा जी ने जो काम किया, उससे आज के नेता भटक रहे हैं। देश की भावना को नहीं समझ पा रहे हैं। हम लोगों को सड़कों पर लोग पाकिस्तानी एजेंट कहने लगे हैं।”
कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता विनोद शर्मा ने कहा, “हमारा मन काफी द्रवित हुआ कि अगर हम भारत में हैं और कोई हमें ही पाकिस्तानी एजेंट कहे, कॉन्ग्रेस पार्टी के लोग को कहने लगे, तो हमारी अंतरात्मा से आवाज उठी। मैंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया। हमारे प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा जी भी काफी आहत हैं। उन्हें भी लगता है कि राहुल गाँधी को ऐसा नहीं बोलना चाहिए। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष होने की वजह से वे खुलकर नहीं बोल रहे हैं।”
राहुल गाँधी की हरकतों से दुखी वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता का इस्तीफ़ा
एयर स्ट्राइक पर सबूत मांगने वाली कांग्रेस के बिहार प्रदेश प्रवक्ता विनोद शर्मा ने पद और पार्टी से दिया त्यागपत्र। कहा पाकिस्तान का एजेंट के रूप में कांग्रेस को लोग देखने लगे हैं… ऐसे में इस पार्टी में रहना मुश्किल। pic.twitter.com/Legwk3O8qR
कॉन्ग्रेस प्रवक्ता के इस्तीफे के बाद भाजपा ने ट्वीट कर कहा, “एयर स्ट्राइक पर सबूत माँगने वाली कॉन्ग्रेस के बिहार प्रदेश प्रवक्ता विनोद शर्मा ने पद और पार्टी से दिया त्यागपत्र। कहा पाकिस्तान का एजेंट के रूप में कॉन्ग्रेस को लोग देखने लगे हैं, ऐसे में इस पार्टी में रहना मुश्किल।”
पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय वायु सेना की तरफ से किए गए एयर स्ट्राइक पर अभी सियासी बवाल थमा नहीं कि कर्नाटक के मंगलूरू में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकियों के खिलाफ एयर स्ट्राइक को लेकर एक एक नई जानकारी देकर सबको चौंका दिया है।
गृह मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले 5 वर्षों में भारतीय सेना ने तीन बार सीमा पार जाकर एयर स्ट्राइक कर कामयाबी हासिल की है। इस दौरान राजनाथ ने साफ किया कि वह दो स्ट्राइक की जानकारी तो देंगे, लेकिन तीसरी एयर स्ट्राइक के बारे में कुछ नहीं बताएंगे।
#WATCH Union Home Minister Rajnath Singh at a public rally in Mangaluru: Pichle 5 varsho mein, teen baar apni seema ke bahar jaa kar hum logon ne air strike kar kaamyaabi haasil ki hai. Do ki jaankari apko dunga, teesri ki nahi dunga. #Karnatakapic.twitter.com/NZKeJPulrS
बता दें कि राजनाथ सिंह ने शनिवार को पुलवामा आतंकी हमले को लेकर सेना के शौर्य की सराहना की और साथ ही यह बताकर सबको चौंका दिया कि भारत ने तीन स्ट्राइक में सफलता पाई है। राजनाथ ने कहा, “पिछले पाँच वर्षों में हम तीन बार अपनी सीमा के बाहर जाकर स्ट्राइक कर कामयाबी हासिल की है। दो की जानकारी दूँगा, लेकिन तीसरी की नहीं दूँगा।”
राजनाथ सिंह ने कहा कि पहली बार हमने तब सीमा पार कर स्ट्राइक की थी, जब पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने जम्मू कश्मीर के उरी में हमारे सोए हुए जवानों पर हमला किया था। जिसमें हमारे 17 जवान बलिदान हो गए थे। वहीं दूसरी बार ऐसा ही हमला पुलवामा हमले के बाद हमारी सेना की तरफ से किया गया था। हालाँकि राजनाथ सिंह ने तीसरी एयर स्ट्राइक के बारे में तो नहीं बताया, लेकिन इतना ज़रूर कहा कि अब यह भारत कमजोर नहीं रहा।
लोकसभा चुनावों की औपचारिक घोषणा की आहट के साथ राजनीतिक सरगर्मी तेज़ हो गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा को पुनः चुनाव जिताने के उद्देश्य के साथ जेएनयू, पटना विश्वविद्यालय, भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, विभिन्न आईआईटी समेत देश के सर्वोच्च विश्वविद्यालयों के 300 शिक्षकों ने एक स्वतन्त्र समूह का निर्माण किया है। “एकेडेमिक्स4नमो” (Academics4NaMo) नामक इस समूह की शुरुआत दिल्ली विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर स्वदेश सिंह और उनके कुछ साथी शिक्षाविदों ने की थी, जिससे कि अब 15 विभिन्न शहरों के 30 विश्वविद्यालयों के शिक्षाविद जुड़ चुके हैं। इनका उद्देश्य प्रधानमंत्री मोदी के पक्ष में वैचारिक, शैक्षिक, और बौद्धिक जगत के ज़्यादा-से-ज़्यादा लोगों का सार्वजनिक समर्थन जुटाना और भाजपा व प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ चल रहे ‘एंटी-इंटेलेक्चुअलिज्म’ के मिथक को तोड़ना है।
यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि केवल भारत ही नहीं, सम्पूर्ण विश्व में दक्षिणपंथी राजनीति पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि यह ‘एंटी-इंटेलेक्चुअल’ या वैचारिकता/बौद्धिकता के विरोधी है। इस आरोप के ‘फ्लेवर्स’ में ‘इंटेलेक्चुअल लेज़ीनेस’ (वैचारिक आलस्य) से लेकर ‘इनेप्टिट्यूड’ (बौद्धिक दिवालियापना) तक शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की ही अगर बात करें तो उनके भाजपा का प्रधानमन्त्री प्रत्याशी बनने के पहले से उनके खिलाफ वामपंथी बौद्धिकों का आन्दोलन शुरू हो गया था। ज्ञानपीठ सम्मान से सम्मानित कन्नड़ लेखक यूआर अनंतमूर्ति ने तो देश को यह धमकी तक दे डाली कि यदि देश ने मोदी को प्रधानमंत्री बन जाने दिया तो वे विरोधस्वरूप देश का त्याग कर देंगे हालाँकि बाद में अपने उस बयान को वस्तुतः न लिए जाने की गुज़ारिश करते हुए अनंतमूर्ति ने कहा कि वह बयान उन्होंने भावातिरेक में दिया था।
जब अख़लाक़ हत्याकाण्ड सुर्ख़ियों में आया तो उसे मोदी और हिन्दुत्ववादियों के बेलगाम हो जाने के सबूत के तौर पर प्रचारित करते हुए लगभग 40 लेखकों, फ़िल्म तकनीशियनों, बौद्धिकों ने “अवार्ड वापसी” आन्दोलन शुरू किया, जो कि भाजपा के बिहार चुनाव हारने के बाद हवा हो गया।
इस बार ‘Academics4NaMo’ समूह इसी ‘नैरेटिव’ का प्रत्युत्तर तैयार करना चाहता है
दो विश्वविद्यालयों- नरेन्द्र देव कृषि व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या (तत्कालीन फैजाबाद), व बीआर अम्बेडकर समाजशास्त्र विश्वविद्यालय, इंदौर के कुलपति रह चुके आरएस कुरील के अनुसार वह नरेंद्र मोदी की गरीब-समर्थक नीतियों से खासे प्रभावित हुए हैं। अंग्रेज़ी पोर्टल “द प्रिंट” को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने मोदी की नीतियों और योजनाओं को गरीबों और महिलाओं के सशक्तिकरण की ओर केन्द्रित बताया।
बीएचयू में इंडोलोजी के चेयर प्रोफ़ेसर राकेश उपाध्याय के अनुसार वामपंथी विचारधारा से प्रेरित अवार्ड वापसी गैंग बहुत समय तक सार्वजनिक बहस में अकेली आवाज़ बना रहा, और यह समय (उनके जैसे विचार रखने वाले बौद्धिकों के लिए) मोदी के पक्ष में खुल कर खड़े होने और हमारी खोई हुई सांकृतिक परम्पराओं के गौरव को पुनः प्राप्त करने का है।
जेएनयू की वंदना मिश्रा कहतीं हैं कि उन्हें मोदी के महिला सशक्तिकरण के लिए उठाए गए कदमों ने आकर्षित किया। लाखों गरीब महिलाओं को उज्ज्वला योजना के लाभ, मातृत्व अवकाश को 6 महीने तक बढ़ाए जाने, महिलाओं को सशस्त्र सेनाओं में कमीशन दिए जाने आदि को वह उदाहरण के तौर पर पेश करतीं हैं।
जेएनयू में ही भाषा विभाग के सुधीर प्रताप के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने समाज के हर वर्ग के जीवन में कुछ-न-कुछ सुधार लाने के अलावा सीमा सुरक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। उनके अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने “अपने कार्यों के ज़रिए सशक्तिकरण, शिक्षा, रोज़गार, और उद्यम में हर वर्ग की अधिकतम भागीदारी का मार्ग प्रशस्त किया है”।
“एकेडेमिक्स4नमो” के फेसबुक पेज के अनुसार इस समूह का मानना है कि आगामी लोकसभा चुनाव भारत के भविष्य के लिए निर्णायक साबित होंगे और अतीत के भ्रष्टाचार और निराशावादी दौर बनाम नए भारत की उम्मीदों और महत्वाकांक्षाओं के अंतर को ठोस तरीके से रेखांकित व स्थापित करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी की चुनावी जीत में सहायता के लिए यह समूह विभिन्न विषयों पर चर्चाओं और राजनीतिक बहसों का आयोजन करने के अलावा इंटरनेट के माध्यम से विभिन्न ऑनलाइन मंचों पर अपनी बात लेखों के द्वारा रखेगा। उनका उद्देश्य अधिक से अधिक बौद्धिकों, विचारकों, पत्रकारों, आदि तक प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के सही एजेंडे, और विभिन्न मुद्दों पर उनकी राय को रखना होगा।
ट्वीटर पर #JaichandList सबसे ऊपर ट्रेंड कर रहा है। देखकर उत्सुकता का जगना स्वभाविक है। इस तरह के ट्रेंड जनता के मूड को प्रदर्शित करते हैं। पुलवामा आतंकी हमले और एयर स्ट्राइक्स के बाद लगातार भारतीय सेना और सरकार पर सवाल उठाकर, पाकिस्तान तक अपना प्रेम जताने वाले लोगों के विरोध में #JaichandList ट्रेंड कर रहा है। बता दें कि जयचंद इतिहास में अपनों को ही धोखा देने वाले के रूप में कुख्यात है। जयचंद की वजह से ही पृथ्वीराज चौहान की हार हुई थी। आप भी एक नज़र डालिए आज के #JaichandList के ट्वीटर ट्रेंड पर—
#JaichandList is incomplete without #UrbanNaxals English Speaking so called intellect: Maoist funded by China to destabilize India and spread Maoist ideology. They pretend to support the tribals but in reality they derail GOI’s efforts in developing affected area by vandalism. pic.twitter.com/O6FB6YvOcw
#JaichandList shows The Termites that has weakened Soul of Our Nation, eaten away Spirit of Our People from within.. Time to blast these Termites Only 2nd Term of NaMo can do it!! That’s why => #NaMoAgain2019pic.twitter.com/PgLY5JMQQz
Support from across the border for Barkha and the Congress by none other than Hafiz Saeed. The Congress never told us the correct history. And trusting them, we’re putting India’s geography in peril. This dynasty should Die nasty in India’s political landscape#JaichandListpic.twitter.com/enTDvTH1o4
— Dr. Ananth Chakravarthy (@Amazingananth) March 9, 2019
ना उम्र की सीमा हो, ना जन्म का हो बंधन। इस सुन्दर ग़ज़ल में शायद सही कहा गया है कि प्यार करने की कोई उम्र और सीमा नहीं होती है। शुक्रवार (मार्च 08, 2019) को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश के एक अधेड़ सौतेले पिता तस्लीम अहमद द्वारा तलाकशुदा सौतेली बेटी (तबस्सुम) से शादी करने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। जसपुर पुलिस से इस बारे में शिकायत करने वाली महिला ठाकुरद्वारा की निवासी आरोपित की पत्नी है।
जसपुर (उत्तराखंड, जिला उधम सिंह नगर) के एक गाँव निवासी तस्लीम अहमद ने अपनी पत्नी की मौत होने के बाद क्षेत्र के एक गाँव की विधवा महिला से निकाह किया था। महिला के साथ उसकी एक बालिग बेटी (तबस्सुम) भी साथ आई थी। कुछ समय बाद महिला ने अपनी बेटी की शादी मुरादाबाद के पाकबड़ा में कर दी। लेकिन पति से कहा सुनी होने पर उसे (तबस्सुम को) उसके पति ने तलाक दे दिया।
तब से वह अपनी माँ के साथ मायके में रह रही थी। युवती की माँ का आरोप है कि इस बीच 22 वर्षीय युवती को उसके 45 वर्षीय सौतेले पिता ने अपने प्रेम जाल में फाँस लिया। तस्लीम ने कुछ दिन पहले सौतेली बेटी को अन्य स्थान पर ले जाकर उलेमा को गुमराह कर युवती से निकाह कर लिया। जिसकी जानकारी युवती (तबस्सुम) की माँ को लगी तो उसने हंगामा शुरू कर दिया। जिस पर उसके पति ने महिला को तलाक दे दिया और पत्नी की जगह अपनी सौतेली बेटी को ही साथ रखने की बात कही।
इस पर सौतेली बेटी की माँ ने जसपुर कोतवाली में प्रार्थना पत्र देकर आरोपित पति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की माँग की। लेकिन पुलिस ने दोनों पक्षों को यह कहकर शांत कर घर भेज दिया कि मामला आपस में मिलकर सुलझा लें।
उधर जसपुर की चाँद मस्जिद के इमाम शाकिर हुसैन का कहना है कि सौतेली बेटी से निकाह करना शरियत के हिसाब से हराम है। मुस्लिम समुदाय के लोगों को ऐसे लोगों का बहिष्कार करना चाहिए। यह घटना क्षेत्र में भी चर्चा का विषय बनी हुई है।