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बजट 2019 में मिली आँकड़ों के साथ महिला सशक्तिकरण को भी जगह

कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने आज 11 बजे से अंतरिम बजट को संसद में पेश करना शुरू किया। देश में हर तबके का ख्याल रखते हुए उन्होंने महिलाओं के लिए भी बात की।

उज्ज्वला योजना ने किया 6 करोड़ रसोई से चूल्हे का धुआँ दूर

इस बजट में प्रधानमंत्री द्वारा ग्रामीण महिलाओं के लिए शुरू की गई उज्ज्वला योजना की भी बात हुई। इसमें उन्होंने बताया कि उज्ज्वला योजना के तहत अभी तक महिलाओं को 6 करोड़ एलपीजी कनेक्शन दिए जा चुके हैं। अगले साल तक यह गैस कनेक्शन 8 करोड़ लोगों को दे दिया जाएगा। ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ के ज़रिये भाजपा ने देश के लिए एक ऐसा सपना देखा, जहाँ हर घर की रसोई में चूल्हे के धुएँ की जगह एलपीजी सिलिंडर पहुँचाए गए।

उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले से इस योजना की शुरुआत की गई थी, जिसमें 5 करोड़ महिलाओं की रसोई में मुफ्त गैस कनेक्शन देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। पर, हाल ही के आँकड़ों पर यदि पर गौर करें तो इस योजना ने 6 करोड़ का आँकड़ा छू लिया है। एलपीजी की शुरुआत के बाद से 50 वर्षों में केवल 13 करोड़ कनेक्शन लोगों को उपलब्ध कराए गए थे, जबकि पिछले 54 महीनों में सरकार ने लगभाग इतने ही कनेक्शन उपलब्ध कराए हैं। आज लगभग 80 प्रतिशत लाभार्थी अपने एलपीजी सिलेंडरों की रीफ़िलिंग करवा रहे हैं।

मुद्रा योजना के लाभान्वितों में 75% है महिलाएँ

इसके अलावा उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत जिन लोगों को फ़ायदा पहुँचा है। बता दें कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का पूरा नाम माइक्रो यूनिट डेवलपमेंट रीफाइनेंस एजेंसी है। इस मुद्रा योजना की सबसे खास बात यह है कि इसके तहत लोन लेने वाले चार लोगों में से तीन महिलाएँ हैं।

इस योजना ने आज के समय मे कई महिलाओं को सशक्त किया है। ‘मुद्रा योजना’ के तहत कुल मिलाकर ₹7,23,000 करोड़ के 15.56 करोड़ ऋण वितरित किए गए हैं।

प्रधानमंत्री मातृत्व योजना से हुई महिलाएँ सशक्त

महिलाओं की सशक्तिकरण पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मातृत्व योजना में महिलाओं को 26 हफ्ते की मैटरनिटी लीव दी जा रही है। जिससे आज के समय में महिलाएँ सशक्त हुई हैं। ‘प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना‘ के तहत गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को ₹6,000 की आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान है।

इस योजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार करना है और नकदी प्रोत्साहन के ज़रिए उनके जीवन को स्वावलंबी बनाना है। इस योजना के लाभ से माँ और बच्चे दोनों को पोषण प्रदान किया जाता है, जिससे उन्हें कुपोषण से बचाया जा सके। जनवरी 2017 में इस योजना के तहत मोदी सरकार ने कुल बजट ₹12,661 करोड़ तय किया जिसमें से ₹7,932 करोड़ केंद्र सरकार द्वारा वहन किए जाना तय हुआ, बाक़ी राशि संबंधित राज्यों द्वारा वहन की जाएगी। इस योजना की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि योजना की राशि सीधे बैंक में भेजी जाती है जिससे इसके दुरुपयोग न किया जा सके।

40 हज़ार तक के कर्ज़ पर महिलाओं को नहीं देना होगा टैक्स

इसके अलावा इस अंतरिम बजट में महिलाओं के लिए घोषणा हुई है कि महिलाओं को अब 40 हज़ार तक के लोन के लिए किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं देना पड़ेगा। सरकार द्वारा लिया गया यह फैसला महिलाओं को उनके सपने पूरे करने में एक कारगर फैसला साबित होगा।

यह भी पढ़ें: मोदी सरकार की वो योजनाएँ जिन्होंने बदल दी ग्रामीण महिलाओं की ज़िंदगियाँ

‘गौमाता के सम्मान से कभी पीछे नहीं हटेगी सरकार’- अमित शाह ने किया सरकार का अभिनंदन

अंतरिम बजट प्रस्तुत करते हुए कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा: “यह सरकार गौमाता के सम्मान में कभी पीछे नहीं हटेगी”

गोयल ने घोषणा की है कि सरकार ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन के लिए ₹750 करोड़ आवंटित किए हैं। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय कामधेनु आयोग भी स्थापित किया जाएगा।

गोयल ने बताया कि गौ संसाधनों के आनुवंशिक उन्नयन को स्थाई रूप से बढ़ाने और गायों के उत्पादन एवं उनकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय कामधेनु आयोग स्थापित किया जाएगा। यह आयोग गायों के लिए कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने और कल्याणकारी योजनाओं के कार्य को भी देखेगा।  

बजट 2019: सबसे सुरक्षित हुआ रेल से सफ़र, रेल बजट पर बड़ा ऐलान

कार्यवाहक वित्‍त मंत्री पीयूष गोयल ने आज संसद में अंतरिम बजट 2019-20 पेश करते हुए कहा कि रेलवे के लिए 64,587 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। उन्‍होंने कहा कि रेलवे का समग्र पूँजीगत व्‍यय कार्यक्रम 1,58,658 करोड़ रुपए का है।

वित्‍त मंत्री ने कहा कि वंदे भारत एक्‍सप्रेस से देश को वर्ल्‍ड क्‍लास रेलवे की सुविधा दी जाएगी। खास बात यह है कि इसे पूरी तरह से भारतीय इंजीनियरों ने तैयार किया है। साथ ही उन्‍होंने कहा कि यह भारतीय रेलवे के लिए सबसे सुरक्षित साल रहा है और अब देश में एक भी मानवरहित क्रॉसिंग नहीं है।

समझे ग्राफिक से पूरा रेल बजट

वंदे भारत एक्‍सप्रेस

स्‍वेदश में पहली बार विकसित एवं निर्मित सेमी हाई-स्‍पीड ‘वंदे भारत एक्‍सप्रेस’ का परिचालन शुरू होने से भारतीय यात्रियों को तेज रफ्तार, बेहतरीन सेवा एवं सुरक्षा के साथ विश्‍वस्‍तरीय अनुभव होगा। हमारे इंजीनियरों द्वारा पूर्ण रूप से विकसित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में लगाई गई इस उल्‍लेखनीय ऊँची छलांग से ‘मेक इन इंडिया’ को काफ़ी बढ़ावा मिलेगा और इसके साथ ही रोजगारों का सृजन भी होगा।

भारतीय रेलवे के इतिहास में यह वर्ष सर्वाधिक सुरक्षित वर्ष रहा, ब्रॉड गेज लाइनों पर मानवरहित लेवल क्रॉसिंग समाप्त हुआ।

₹5 से ₹6.5 लाख तक कमाने वालों पर कोई टैक्स नहीं; बजट 2019 में मिडिल क्लास को बड़ी राहतें

टैक्सदाताओं का ध्यान रखते हुए, और मिडिल क्लास की बात करते हुए कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कई घोषणाएँ प्रस्तावित की। उन्होंने कहा कि ये अंतरिम बजट है, तो अभी वो सिर्फ़ प्रस्ताव ही रख सकते हैं। उन्होंने मिडिल क्लास और टैक्स देने वाले लोगों को बहुत बड़ी राहत देते हुए कई बातें कही:

टैक्स छूट की सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख की गई

अब 5 लाख तक कोई टैक्स नहीं: टैक्स छूट की सीमा ₹2.5 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख की गई। यानी अब आयकर की सीमा पाँच लाख कर दी गई। इस ऐलान के बाद सदन में मोदी-मोदी का नारा गूंजने लगा। 3 करोड़ लोगों को इससे फायदा होगा। इस ऐलान के बाद अब 3 करोड़ लोग इससे मुक्त हो जाएंगे। निवेश करने पर ₹6.5 लाख तक कोई टैक्स नहीं लगेगा।

श्री गोयल ने आगे कहा, “कलेक्शन से 12 लाख करोड़ मिले हैं। 99.94 प्रतिशत पैसा बिना स्क्रूटनी के सिस्टम में लौटा है। 6.85 करोड़ लोगों ने टैक्स भरा है। टैक्सपेयर्स की संख्या 3.79 करोड़ से बढ़कर 6.85 हो गई है। नोटबंदी की वजह से 1.30 हजार करोड़ का फायदा हुआ है। 1.30 हजार करोड़ का टैक्स मिलने से सिस्टम को फायदा हुआ है। नोटबंदी के बाद से 1 करोड़ से ज्यादा नए टैक्सपेयर्स जुड़े हैं। 99.94 प्रतिशत पैसा बिना स्क्रूटनी के सिस्टम में लौटा है।”

बजट 2019 में टैक्स और जीएसटी से जुड़ी घोषणाएँ

• इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अब ऑनलाइन है। पिछले वर्ष सभी प्रकार के रिटर्न्स 99.54% स्वीकार किया गया। यह इनकम टैक्स रिटर्न 3.79 करोड़ से बढ़कर 6.85 करोड़ हुआ है।
• टैक्स बेस में 80% तक की बढ़त, प्रत्यक्ष कर भुगतान की सुविधाओं को आसान बनाकर हमने आम आदमी के जीवन को आसान करने की ओर प्रयास किए हैं और टैक्स रेट्स को कम किया है, जिसका नतीजा ये है कि 2013-14 की तुलना में कुल जमा टैक्स 6 लाख 38 हजार करोड़ से इस वर्ष 12 लाख करोड़ रुपए के स्तर तक पहुँच पाया है।
• टैक्स देने वालों की संख्या 89 फ़ीसद तक बढ़ी
• घर खरीदने पर GST कम करने पर विचार
• GST घटने से लोगों को 80,000 करोड़ की राहत मिली
• छोटे कारोबारियों पर तीन महीने में एक जीएसटी रिटर्न
• जनवरी का जीएसटी कलेक्शन एक लाख करोड़ के पार
• अब रिटर्न की इलेक्ट्रॉनिक जाँच होगी
• 6.85 करोड़ लोगों ने आयकर रिटर्न भरा
• रिटर्न फाइल करने वालों की तादाद बढ़ी
• 2018-19 में 12 लाख करोड़ रूपए टैक्स जमा हुआ
• टैक्स दरें घटाने का ऐलान
• आधार के ज़रिये बिचौलियों को हटा दिया गया
• पाँच साल में 34 करोड़ जन-धन बैंक खाते खोले गए
• देश में सबसे ज़्यादा हैं मोबाइल यूज़र

बजट 2019: श्रमिकों के लिए ₹6 लाख का बीमा, ग्रेच्युटी अब ₹20 लाख – कम आमदनी वालों को गारंटीड पेंशन

कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने 1 फरवरी 2019 को जो बजट पेश किया, उसमें श्रमिकों का खास ध्यान रखा गया है। पढ़ें मूल बातें:

  • PM श्रमयोगी मानधन योजना की घोषणा: 15,000 रुपए तक कमाने वाले 10 करोड़ श्रमिकों को मिलेगा योजना का लाभ
  • जिनका ईपीएफ कटता है उनको 6,00,000 रुपए का बीमा। श्रमिक की मौत होने पर छह लाख रुपए का मुआवज़ा
  • मज़दूरों का बोनस 7,000 रुपए किया गया। 21,000 रुपये तक वेतन पाने वालों को मिलेगा बोनस
  • ग्रेच्युटी सीमा को 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए किया गया
  • कम आमदनी वाले श्रमिकों को गारंटीड पेंशन देगी सरकार। 100 रुपए प्रति महीने के अंशदान पर 60 साल की आयु के बाद 3000 रुपए प्रति माह की मिलेगी पेंशन
  • आपदा प्रभावित लोगों को ब्याज में पाँच प्रतिशत की छूट

कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ‘‘घरेलू कामगारों को भी सामाजिक सुरक्षा देने की जरूरत है। आयुष्मान भारत और जीवन ज्योति बीमा और सुरक्षा योजना के अलावा हम प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन पेंशन योजना ला रहे हैं। उन्हें 60 वर्ष की उम्र पूरी करने के बाद तीन हजार रुपए प्रति महीने की पेंशन मिलेगी।’’

पीयूष गोयल ने कहा, ‘‘सरकार श्रमिक के पेंशन अकाउंट में बराबर का योगदान देगी। असंगठित क्षेत्रों के लोगों को इस योजना का लाभ मिलेगा। इस स्कीम के लिए 500 करोड़ रुपए देंगे। इससे ज्यादा का प्रावधान भी दिया जाएगा।’’

पीयूष गोयल ने कहा कि सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट आने के बाद उसकी सिफारिशों को जल्द से जल्द लागू किया गया। साथ ही नई पेंशन स्कीम में सरकार के योगदान को 4 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया है।

श्रमिकों के अलावा घुमंतू समुदाय के लिए भी सरकार ने ध्यान दिया है। घुमंतू समुदाय के कल्याण के लिए भी सरकार काम करेगी। इनके लिए नीति आयोग पहचान का काम करेगी। इनके लिए कल्याण बोर्ड बनाया जाएगा और उनके पास सरकार की योजनाओं को पहुंचाने का काम किया जाएगा।

बजट 2019ः पहली बार रक्षा बजट बढ़कर हुआ ₹3 लाख करोड़

अंतरिम बजट प्रस्तुत करते हुए कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि देश में पहली बार रक्षा बजट बढ़कर 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है।

गोयल ने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने सैनिकों के सम्मान का ख्याल रखते हुए 40 वर्षों से लटकी वन रैंक वन पेंशन की मांग को स्वीकार किया। जहाँ कॉन्ग्रेस की सरकार ने वर्ष 2014-15 में इसके लिए मात्र ₹5,000 करोड़ का प्रावधान किया था वहीं मोदी सरकार द्वारा वन रैंक वन पेंशन स्कीम के अंतर्गत अब तक ₹35,000 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं।  

गोयल ने यह भी कहा कि मिलिट्री सर्विस पे (Military Service Pay) में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। बता दें कि सैन्य सेवा में अधिकारी और अन्य रैंक को कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा का भार उठाने के लिए वेतन के अतिरिक्त मिलिट्री सर्विस पे दी जाती है।

बजट 2019: ‘पहला हक़ मुस्लिम का’ से ‘पहला हक़ ग़रीबों का’, 10 मुख्य बिंदु गाँव-ग़रीबों पर

गाँव-ग़रीबों के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की सफलता पर बात करते हुए कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने अपनी उपलब्धियाँ गिनाई। गोयल ने कहा कि देश के संसाधनों पर पहला हक़ गरीबों का है। उनका यह बयान पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह के बयान के परिपेक्ष्य में था जिन्होंने अपने कार्यकाल में देश की संपत्ति पर पहला हक़ मुस्लिमों का बताया था।

जानिए गोयल के बजट अभिभाषण में ग़रीब-गुरबों के लिए कही गई बातों के प्रमुख अंश।

  • लगभग हर घर को बिजली का मुफ्त कनेक्शन दिया गया है। मार्च 2019 तक सभी परिवारों को बिजली का कनेक्शन मिलेगा।
  • मोदी सरकार ने मिशन मोड में निजी क्षेत्र सम्मिलित करते हुए 143 करोड़ बल्ब उपलब्ध कराए हैं। इससे सालाना 50 हजार करोड़ रुपए मूल्य की बिजली की बचत होगी।
  • पाँच साल में मोदी सरकार ने 1.53 करोड़ घर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए। यह पहले के मुकाबले पाँच गुना है। 2014 तक ढाई करोड़ परिवारों के पास बिजली नहीं थी।
  • ग़रीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को सस्ते दाम पर अनाज उपलब्ध कराने के लिए 2018-19 में एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा ख़र्च किया गया। 2013-14 में मात्र 92 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।
  • मनरेगा के लिए भी 60 हजार करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है।
  • मोदी सरकार ने एसटी-एसटी और ओबीसी के कोटे को बरकरार रखते हुए गरीबों के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 10 फीसदी का आरक्षण सुनिश्चित किया है।
  • इन संस्थानों में लगभग दो लाख सीटें उपलब्ध कराई जाएगी ताकि किसी भी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों में कमी न आए।
  • 2019 में स्वच्छ भारत मिशन चलाया जाएगा।

बजट 2019 में स्वास्थ्य क्षेत्र: 22वाँ AIIMS हरियाणा में; 5 मुख्य बिंदु

कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी सरकार की उपलब्धियाँ गिनाई और साथ ही अगले वर्ष की रूपरेखा की जानकारी दी। जानिए स्वास्थ्य क्षेत्र में उनके अभिभाषण के प्रमुख बिंदु:

  • 21 नए एम्स विकसित किए जा रहे हैं।
  • 14 एम्स पहले ही शुरू हो चुके हैं।
  • गोयल ने ख़ुशी जताते हुए बताया कि 22वाँ एम्स हरियाणा में शुरू होने जा रहा है।
  • हमने दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थकेयर योजना आयुष्मान भारत लागू की ताकि देश के 50 करोड़ लोगों को हेल्थ कवर मिले। इस से ग़रीबों के 3000 करोड़ रूपए बचे।
  • पिछले 5 सालों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास देखा गया है।

आयुष्मान भारत को कार्यवाहक वित्त मंत्री ने विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य केयर योजना बताया।

120 दिनों में 8.5 लाख से ज्यादा लोगों को मिल चुका है लाभ

बता दे कि योजना के लागू होने के लगभग 4 महीने के अंदर ही इस योजना के परिणाम दिखने शुरू हो गए थे। आयुष्मान भारत के सीईओ डॉ. इंदु भूषण ने ट्वीट कर कहा था कि (जनवरी 16, 2019) तक तक़रीबन 8.50 लाख लोग आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभान्वित हुए हैं।

बजट 2019: गोयल ने कहा- बड़े कारोबारी भी अब लौटा रहे कर्ज़; आर्थिक भगोड़े बच नहीं सकते

कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में बजट पेश करते हुए कहा कि पहले सिर्फ छोटे बिजनेसमैन पर कर्ज चुकाने का दबाव रहता था, लेकिन अब बड़े कारोबारियों को भी कर्ज़ लौटाने की चिंता रहती है। बैंकिंग सेक्टर पर बात करते हुए उन्होंने कहा:

“पहले सिर्फ छोटे बिजनेसमैन पर कर्ज़ चुकाने का दबाव रहता था। अब बड़े कारोबारियों को भी कर्ज़ लौटाने की चिंता रहती है। तीन लाख करोड़ रुपए का कर्ज़ रिकवर हो चुका है। सरकारी बैंकों की भलाई है कि 2.6 लाख करोड़ रुपए का रि-कैपिटलाइजेशन किया गया है।”

गोयल ने देश की जीडीपी की चर्चा करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने जीएसटी लाकर सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है और बैंकिंग क्षेत्र में सुधार लाए गए हैं। उन्होंने कहा:

“2008 से 2014 का समय कर्ज़ के क्षेत्र के लिए अच्छा नहीं रहा। सरकारी बैंकों की नॉन परफॉर्मिंग असेट्स उस कार्यकाल में बढ़ गई थीं। ये 2014 में 5.4 लाख करोड़ थीं। हमारी सरकार में यह दम था कि हम आरबीआई को कहें कि इन सभी कर्ज़ों को देखें और बैंकों की सही स्थिति देश के सामने रखें।”

उन्होंने अपने सरकार के पारदर्शी होने का दावा करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने भ्रष्टाचार मुक्त सरकार चलाई है। उन्होंने कहा कि रेरा कानून और बेनामी ट्रांजैक्शन एक्ट से रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता आई है। देश के आर्थिक भगोड़ों को चेतावनी देते हुए कार्यवाहक वित्त मंत्री ने कहा कि भगोड़े आर्थिक अपराधी अब बच नहीं सकते

PM KISAN योजना: 12 करोड़ किसानों को ₹6000/वर्ष सीधा खाते में, कृषि पर बजट 2019 में बहुत कुछ

कृषि पर अपना ध्यान रखते हुए कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कई घोषणाएँ की। गोयल संसद में अंतरिम बजट पेश कर रहे हैं। इसकी शुरुआत उन्होंने मोदी सरकार के पिछले 5 वर्षों की उपलब्धियों का जिक्र कर के किया।

उन्होंने कहा, “PM किसान योजना के अंतर्गत छोटे किसानों को सीधा उनके आय ₹6000 प्रति वर्ष देने का निर्णय सरकार ने किया है। 100% भारत सरकार द्वारा भुगतान किया जाएगा, 3 किश्तों में भुगतान होगा। इस प्रोग्राम का खर्चा ₹75,000 करोड़ सालाना सरकार भरेगी।”

पीएम किसान योजना की घोषणा: इसके तहत छोटे किसानों के (2 हेक्टयर तक मालिकाना हक रखने वाले) खाते में हर साल 6 हजार रुपये देने का फैसला किया गया है: पीयूष गोयल

1 दिसंबर 2018 से लागू होगी योजना, जल्द ही पहली किश्त जारी होगी: वित्त मंत्री

पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए कर्ज में 2 फीसदी ब्याज छूट की घोषणा

गो वंश को लेकर बजट में बड़ा ऐलान, सरकार शुरू करेगी राष्ट्रीय कामधेनु योजना, गो माता के लिए सरकार पीछे नहीं हटेगी: पीयूष गोयल

करीब 12 करोड़ किसान परिवारों को फायदा होगा, योजना पर सालाना 75 हजार करोड़ रुपये का खर्च, केंद्र सरकार देगी पूरा पैसा: पीयूष गोयल

भारत एक कृषि प्रधान देश है, यहाँ करीब 70% लोगों की आजीविका आज भी कृषि पर निर्भर है। आँकड़ों के मुताबिक़ देश में लगभग 70% किसान हैं। किसान सही मायने में देश के रीढ़ की हड्डी है। कृषि का देश की मौजूदा जीडीपी में लगभग 17% का योगदान है।

सरकार का मुख्य लक्ष्य किसानों की आय दोगुनी करने का है। साथ ही उन्हें कई चीजों मेंं रियायत देने के बारे में भी सरकार विचार कर रही है। रिपोर्ट की मानें तो किसानों को उनकी उपज की सही कीमत नहीं मिल रही है। ज्ञात हो कि पिछले बजट में सरकार ने किसानों को फसल की लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की घोषणा की थी। लेकिन, इसे प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा सका।

डायरेक्ट कैश ट्रांसफर से किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी

बता दें कि, बिचौलियों के चलते किसानों को काफ़ी नुकसान उठाना पडता है। तमाम कोशिशों के बावजूद भी उन्हें उनकी मेहनत की पूरी लागत नहीं मिल पाती है। सरकार इसे लेकर गंभीर है। बजट में किसानों के खातों में डायरेक्ट कैश ट्रांसफर करने की योजना से किसानों को बहुत मदद मिलेगी।

एक नज़र किसानों को लेकर चल रही विभिन्न राज्यों की योजनाओं पर

कॉन्ग्रेस सरकार की ऋण माफ़ी के चुनावी हथियार से निपटने के लिए भाजपा सरकार विभिन्न राज्यों के किसानों को लेकर चल रही योजनाओं पर निरंतर मंथन कर रही है। देखना यह है कि किस राज्य का मॉडल सरकार द्वारा चुना जाता है।

मध्य प्रदेश भावान्तर योजना

पिछले साल मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने जिस ‘भावांतर योजना’ के ज़रिए 15 लाख किसानों की मदद की थी। केंद्र की मोदी सरकार भी उसी तर्ज़ पर किसानों को फ़सल के न्यूनतम समर्थन मूल्य और बिक्री मूल्य के अंतर को सीधे खाते में भेजने पर विचार कर रही है।

ओडिशा का ‘कालिया’ (KALIA) फ़ॉर्मूला

कर्ज़ के बोझ तले दबे किसानों की मदद के लिए ओडिशा सरकार ने ₹10,000 करोड़ की ‘जीविकोपार्जन एवं आय वृद्धि के लिए कृषक सहायता (KALIA)’ योजना लागू की है। इस स्कीम के तहत किसानों की आय बढ़ाकर उन्हें आर्थिक रूप से समृद्ध किया जाएगा। इस स्कीम के द्वारा किसानों को कर्ज़माफ़ी के बजाय ख़ासतौर से सीमांत किसानों को फ़सल उत्पादन के लिए आर्थिक मदद दिया जाएगा। ‘KALIA’ योजना के तहत छोटे किसानों को रबी और खरीफ़ की बुआई के लिए प्रति सीजन ₹5000-5000 की वित्तीय मदद मिलेगी, अर्थात सालाना ₹10,000 दिए जाएँगे।

झारखंड मॉडल

झारखंड की रघुवर दास सरकार भी मध्यम और सीमांत किसानों के लिए ₹2,250 करोड़ की योजना की घोषणा कर चुकी है। झारखंड में 5 एकड़ की जोत पर सालाना प्रति एकड़ ₹5,000 मिलेंगे, एक एकड़ से कम खेत पर भी ₹5,000 की सहायता मिलेगी। इस योजना की शुरुआत झारखंड सरकार 2019-20 वित्त वर्ष से करेगी जिसमें लाभार्थियों को चेक या डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफ़र के ज़रिए मदद दी जाएगी।

तेलंगाना का ऋतु बंधु मॉडल

ओडिशा और झारखंड के साथ ही केंद्र सरकार तेलंगाना सरकार द्वारा शुरू की गई किसान योजनाओं की भी पड़ताल कर रही है। तेलंगाना सरकार ने किसानों के लिए ऋतु बंधु योजना शुरू की है। यहाँ के किसानों को प्रति वर्ष प्रति फ़सल ₹4000 प्रति एकड़ की रकम दी जाती है। दो फ़सल के हिसाब से किसानों को हर साल ₹8000 प्रति एकड़ मिल जाते हैं।

लगातार घट रही कृषि योग्य भूमि है चुनौती

कृषि ऋण और कर्ज़ माफ़ी जैसी योजनाएँ कहीं ना कहीं सरकारी राजस्व पर दबाव डालती हैं। फिर भी, सरकार के लिए किसान प्राथमिकता रहे हैं और उसे कोई न कोई मार्ग तो निकालना ही है। समय के साथ-साथ कृषि योग्य भूमि भी देश में निरंतर घट रही है। ऐसी अनेक चुनौतियाँ हैं, जिन्हे मद्देनज़र रखते हुए सरकार अपना अंतरिम बजट पेश करेगी। मोदी सरकार का यह आख़िरी बजट है, इस कारण सभी की निगाह इस बजट पर रहनी सामान्य बात है।

आम धारणा है कि देश का चुनावी मिज़ाज काफी हद तक देश का किसान तय करता है। देश में ज्यादातर लोग कृषि पर आश्रित हैं, तो यह ज़ाहिर सी बात है कि सरकार उसकी बनती है जिसके साथ देश का किसान रहता है। वर्तमान सरकार किसानों की दशा सुधारने के लिए निरंतर महत्वपूर्ण प्रयास करती आ रही है। लेकिन सच्चाई यह भी है कि पिछले 60 वर्षों तक किसानों के जो हालात रहें हैं उसकी क्षतिपूर्ति करिश्माई तरीके से करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है।