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बजट 2019: अर्थव्यवस्था पर बोले गोयल- ‘हमने महंगाई की कमर तोड़ दी’

केंद्रीय कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने अर्थव्यवस्था पर बात करते हुए कहा कि पिछले पाँच वर्षों से भारत वैश्विक इकॉनमी में छाया रहा है। वित्त मंत्री अरुण जेटली के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए उन्होंने अपने बजट अभिभाषण की शुरुआत की। उन्होंने कहा:

“हमारी सरकार ने कमरतोड़ महँगाई की कमर ही तोड़ दी। हम महंगाई दर को 4.6% तक ले आए। यह किसी भी सरकार के कार्यकाल की तुलना में कम था। दिसंबर 2018 में सिर्फ 2.19% महंगाई दर रही। अगर हम महँगाई काबू में नहीं करते तो हमारे परिवारों को 35 से 40% अतिरिक्त खर्च करना पड़ता। सात साल पहले की तुलना में वित्तीय घाटा भी हमने कम किया है। करंट अकाउंट डेफिसिट भी जीडीपी का 2.5% रह गया है।”

पीयूष गोयल ने संसद में बजट पेश करते हुए कहा:

“पिछले पाँच साल में जीडीपी किसी भी सरकार के कार्यकाल की तुलना में ज्यादा रही है। आज हम दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। हमने डबल डिजिट इन्फ्लेशन को काबू किया। इन्फ्लेशन एक प्रकार का छुपा हुआ टैक्स होता है। यह कभी 10.1% था।

भारतीय अर्थव्यवस्था के वैश्विक दबदबे पर बात करते हुए कार्यवाहक वित्त मंत्री ने बताया कि हम 2020 तक न्यू इंडिया बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी के लिए शौचालय, पानी, बिजली, घर होने के भारत की संकल्पना कर रहे हैं। किसानों की आय दोगुनी होगी और देश आतंकवाद से मुक्त होगा। पिछले पांच साल में भारत ग्लोबल इकोनॉमी में छाया रहा। हम दुनिया में आज सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था हैं।

भारत को धोखा देने वाला न कहीं छिप सकता है, न बच सकता है: जेटली

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार (जनवरी 31, 2019) को अगस्ता वेस्टलैंड चॉपर डील मामले के सह-अभियुक्त राजीव सक्सेना और कॉरपोरेट लॉबिस्ट दीपक तलवार के प्रत्यर्पण के लिए मोदी सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने शासन में ईमानदारी की संस्कृति पेश की है। भारत को धोखा देने वाला कोई भी व्यक्ति दुनिया में कहीं भी छिप नहीं सकता।

अमेरिका में उपचार करा रहे जेटली ने ट्विटर के ज़रिए कहा, “यूपीए के कंकाल रूपी दिन लड़खड़ा रहे हैं। सभी रक्षा सौदों के लिए उन्हें बिचौलियों की आवश्यकता क्यों थी?”

उन्होंने कहा कि जो कोई भी भारत को धोखा देगा, वह दुनिया में कहीं भी न तो छिप सकता है और न ही बचकर भाग सकता है। भारत की कूटनीतिक ताक़त और सक्षम अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाएँ उसे सबक सिखाने के लिए पर्याप्त हैं।

केंद्रीय मंत्री जेटली ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) ईमानदार हैं, अगर वे शासन में ईमानदार कार्यप्रणाली को लागू करते हैं, तो ऐसे में भारत को धोखा देने वाला कोई भी व्यक्ति कहीं भी बचकर नहीं जा सकता।

जेटली की यह प्रतिक्रिया गुरुवार को सुबह यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) से राजीव सक्सेना और दीपक तलवार के प्रत्यर्पण के बाद आई।

दीपक तलवार पर विमानन क्षेत्र के सौदों की दलाली करने, विदेशी कंपनियों के लिए सरकार की मंज़ूरी पाने, निजी विमानन कंपनियों को लाभ पहुँचाने और यूपीए के मंत्री तथा पदाधिकारियों के साथ संबंध रखने का आरोप है। वहीं राजीव सक्सेना पर अगस्ता वेस्टलैंड VVIP हेलिकॉप्टर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 3,600 करोड़ रुपए माँगने का आरोप है। बता दें कि दिल्ली की एक अदालत ने राजीव सक्सेना और दीपक तलवार को क्रमशः चार दिन और सात दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है।

आज की ख़बर में अंडरवर्ल्ड डॉन रवि पुजारी को अफ्रीकी देश सेनेगल से गिरफ़्तार किया गया है। बता दें कि पुजारी 90 के दशक में मुंबई में एक सक्रिय अपराधी था, जिस पर हत्या और फ़िरौती का आरोप लगा है। भगोड़े गैंगस्टर को पहले ऑस्ट्रेलिया में छिपा माना जाता था।

माल्या ने लगाई न्याय की गुहार, कहा ₹9,000 करोड़ की जगह ₹13,000 हो चुका ज़ब्त

भगोड़े शराब व्यापारी विजय माल्या ने सीबीआई द्वारा धोखाधड़ी और मनी लॉन्डरिंग के केस में अपनी सम्पत्ति को अटैच किए जाने पर आज शुक्रवार (फ़रवरी 1, 2019) को एक के बाद एक ट्वीट के माध्यम से आलोचना की।

लगातार एक के बाद एक ट्वीट करते हुए माल्या ने सवाल किया, “इस तरह सम्पत्ति को अटैच करना न्याय है, या अन्याय?”

विजय माल्या ने लिखा, “डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) ने भारत में 13,000 करोड़ रुपए की माल्या ग्रुप की सम्पत्ति को बैंक के कंसोर्टियम के रूप में अटैच किया है। जबकि कहा गया है कि मैं पब्लिक सेक्टर बैंक का 9000 करोड़ रुपए लेकर भाग गया हूँ। न्याय कहाँ है? क्या ये सही है?” माल्या ने अपने पहले ट्वीट में पूछा।

माल्या ने अपने सेकंड ट्वीट में सवाल किया, “मेरी हर सुबह DRT के एक नए अटैचमेंट से होती है। सम्पत्ति की कुल वैल्यू पहले ही 13,000 करोड़ की सीमा को क्रॉस कर गई है। बैंक 9000 करोड़ रुपए क़र्ज़ के ब्याज के रूप में 13000 करोड़ रुपए की कुल राशि क्लेम करता है। जो कि अभी पुनर्विचार के दायरे में है। ये जब्ती का कार्यक्रम कब तक और कहाँ तक चलेगा?”

“भारत में मेरी प्रॉपर्टी की तमाम अटैचमेंट्स के बाद भी बैंकों ने अपने वकीलों को इंग्लैंड में मेरे ख़िलाफ़ झूठे केस करने के लिए रखा है। इस पर जो लीगल फ़ीस आएगी क्या वो पब्लिक के पैसे की बर्बादी नहीं है? उसका ज़िम्मा कौन लेगा?” माल्या ने ट्विटर पर अपने तीसरे ट्वीट में लिखा।

इसके बाद माल्या ने अपने अंतिम ट्वीट में लिखा, “और अंत में, इंग्लैंड में उपस्थित बैंक वकीलों ने लिखित रूप में मेरे द्वारा HMRC के उचित टैक्स ड्यूज़ के भुगतान के अनुरोध पर सवाल उठाए। विडम्बना यह है कि भारत के बैंक, मुझसे इंग्लैंड में उस भारतीय उधार को चुकता करने की बात कर रहे हैं जो पहले से ही सिक्योर किया जा चुका है, और UK को किए जाने वाले भुगतान को रोक रहे हैं। शर्मनाक!”

इससे पहले माल्या ने अपने बचाव में लिखा था की उसने कुछ भी गलत नहीं किया, गलती कंपनी की थी जिसका बिज़नेस डूब गया, “मैं यह जानना चाहता हूँ कि मैंने कब बैंकों के साथ धोखा किया? मैंने एक रुपया उधार नहीं लिया था। उधार लेने वाली थी किंगफ़िशर एयरलाइन्स। पैसों का नुकसान एक दुखद व्यवसायिक असफलता थी। गारंटर के रूप में पकड़ा जाना फ्रॉड नहीं है। “


बड़ी कामयाबी: ख़ालिद से लेकर मेवानी तक को धमकी देने वाला ‘अडरवर्ल्ड डॉन’ हुआ गिरफ़्तार

खबरों के मुताबिक अंडरवर्लड डॉन रवि पुजारी को अफ्रीकी देश सेनेगल से गिरफ़्तार कर लिया गया है। पुजारी 90 के दशक में मुंबई में एक सक्रिय अपराधी था। जिस पर हत्या और फ़िरौती माँगने के आरोप हैं।

कुछ समय तक माना जा रहा था रवि देश से भागकर ऑस्ट्रेलिया में छिपा हुआ है। लेकिन खुफ़िया सूत्रों के अनुसार पुजारी के सेनेगल में होने की बात का पता चली। इसके बाद उसकी
गिरफ़्तारी 22 जनवरी को हुई। वहाँ के दूतावास से भारतीय दूतावास को इसकी जानकारी 26 जनवरी को दी गई। खबरों की मानें तो कहा जा रहा है कि रवि को पूछताछ के लिए भारत लाया जा सकता है।

बता दें रवि पुजारी को अंडरवर्ल्ड का रास्ता दिखाने वाला शख़्स कोई और नहीं हैं बल्कि गैंगस्टर की दुनिया का नामी नाम ‘छोटा राजन’ है, छोटा राजन इस समय नवी मुंबई की जेल में उम्रक़ैद की सज़ा काट रहा है।

मुंबई पुलिस की एंटी एक्सटॉर्शन सेल, जब छोटा राजन के ज्यादातर शूटर्स को पकड़ रही थी उस समय जहाँ तक है रवि बेंगलूरु शिफ्ट हो गया था। मंगलोर में उदूपी के पास पदबिरी का रवि पुजारी, न केवल अंग्रेज़ी भाषा पर अच्छी पकड़ रखता है बल्कि कन्नड़ भी बहुत अच्छे से बोलताा है। साल 2001 में पुजारी ने खुद को छोटा राजन गिरोह से अलग कर लिया था

एक तरफ जहाँ 2009-2013 के बीच में रवि पर कई बॉलीवुड हस्तियों से जबरन वसूली की माँग करने का आरोप है। वहीं पिछले साल ख़बरे थीं कि रवि ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर ख़ालिद, छात्र कार्यकर्ता शेहला राशिद, दलित नेता गुजरात विधायक जिग्नेश मेवानी को जान से मारने की धमकी भी दी है।

राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय ने J&K प्रशासन से कश्मीरी पंडितों का डेटा माँगा

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के अधीन काम करने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) ने जम्मू कश्मीर प्रशासन से कश्मीर घाटी से विस्थापित हुए पंडितों, सिखों और अन्य लोगों की अचल संपत्ति का ब्यौरा माँगा है।

जम्मू कश्मीर राज्य के राजस्व विभाग को लिखे पत्र में NSCS ने कश्मीर घाटी से आतंक के कारण विस्थापित होकर जम्मू कश्मीर के अन्य भागों में बसे लोगों की अचल संपत्ति का क्षेत्रवार डेटा माँगा है। हालाँकि NSCS ने 14 जनवरी को लिखे पत्र में यह स्पष्ट नहीं किया यह डाटा किसलिए माँगा गया है।

NSCS ने तनाव में आकर बेची गई संपत्ति का ब्यौरा भी माँगा है। बता दें कि सन 1997 में जम्मू कश्मीर सरकार ने J&K Migrant Immovable Property (Preservation, Protection and Restraint on Distress Sales) Act पास किया था। यह कानून तनाव अथवा भय के कारण बेची जाने वाली संपत्ति को रोकने के लिए लाया गया था। इस कानून के मुताबिक नवंबर 1989 के बाद जो भी कश्मीर घाटी से विस्थापित हुआ और उसने रिलीफ़ कमिश्नर के पास अपना नाम दर्ज कराया है वह ‘माइग्रेंट’ कहलाएगा।

जम्मू कश्मीर के रेवेन्यू कमिश्नर ने डिविज़नल कमिश्नर और अपने कनिष्ठ अधिकारियों से डेटा माँगा है। उनके अनुसार तीन दिनों के भीतर विस्थापितों की संपत्तियों का डेटा उपलब्ध होगा।

बता दें कि मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को पहले से अधिक शक्ति प्रदान की है इसलिए NSCS द्वारा विस्थापित कश्मीरी पंडितों का डेटा माँगा जाना घाटी में उनके पुनर्वास के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।     

बजट से पहले बजट पेश! बजट बनाना भूल न जाएँ, इसके लिए कॉन्ग्रेस की असफल कोशिश?

मोदी सरकार कुछ करे और हल्ला-हंगामा न हो तो मज़ा कैसे आएगा? मज़ा को तो छोड़िए, कॉन्ग्रेस के कुछ नेताओं को तो शायद खाना तक न हज़म हो।

मनीष तिवारी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट-1

अंतरिम बजट पेश होने से पहले राहुल गाँधी यूनिवर्सल बेसिक इनकम को लेकर ऐलान कर ही चुके हैं। लेकिन मनीष तिवारी अगर इसमें छौंक नहीं लगाएँगे तो ‘महाराज’ खुश कैसे होंगे भला!

मनीष तिवारी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट-2

बस तिवारी जी आ गए छौंक लगाने। मोदी सरकार से पहले बजट पेश कर दिया। संसद में नहीं, सोशल मीडिया पर। ऊपर से लिख दिया कि इसे सरकार ने ही लीक किया है। हद कर दी तिवारी जी आपने!

मनीष तिवारी जी! आप बहुत क्यूट हैं। आपकी सरकार से सूचना निकलवाने वाले लूटियंस पत्रकार तक को मोदी सरकार में ‘धक्के’ खाने पड़ रहे हैं और आप बात कर रहे हैं बजट लीक होने की! वो भी मीडिया के सूत्रों को! खैर! आपकी भी दुकान चलती रहे, शिवभक्त राहुल बाबा का आशीर्वाद बना रहे आप पर। 3-4 पहले वैसे भी आप लोकसभा में घुसने के लिए सांसदी का दावा ठोक ही चुके हैं। ‘महाराज’ पर दबाव बनाना भी जरूरी है।

मनीष तिवारी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट-3
मनीष तिवारी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट-4

3.5 करोड़ के सर पर आई छत; 42वीं बैठक में 4.78 लाख और मकानों को मंजूरी

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के सचिव श्री दुर्गा शंकर मिश्र की अध्‍यक्षता में हुई इस बैठक में कुल 940 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, ₹7,180 करोड़ की केन्‍द्रीय सहायता के साथ इनकी परियोजना की कुल लागत ₹22,492 करोड़ है।

बैठक में की गई प्रमुख घोषणाएँ निम्नवत हैं:

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने शहरी गरीबों के लाभ के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 4,78,670 अन्‍य किफायती मकानों के निर्माण को मंजूरी प्रदान की है।

केन्‍द्रीय स्‍वीकृति एवं निगरानी समिति (सीएसएमसी) की कल हुई 42वीं बैठक के दौरान यह मंजूरी प्रदान की गई। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत अब कुल स्वीकृत मकानों की संख्या 72,65,763 हो गई है।

आंध्र प्रदेश के लिए 1,05,956 मकानों को जबकि पश्चिम बंगाल के लिए 1,02,895 मकानों को मंजूरी दी गई है। उत्‍तर प्रदेश के लिए 91,689 मकानों को स्‍वीकृति दी गई है, जबकि तमिलनाडु के लिए 68,110 मकानों को स्‍वीकृति दी गई है।

मध्‍य प्रदेश के लिए 35,377 मकानों और केरल के लिए 25,059 मकानों को मंजूरी दी गई है। महाराष्‍ट्र के लिए 17,817 और ओडिशा के लिए 12,290 मकानों को मंजूरी दी गई है। बिहार के लिए 10,269 जबकि उत्‍तराखंड के लिए 9,208 मकानों को मंजूरी दी गई है।

साभार: PIB

कश्मीर के शहीद जवान औरंगज़ेब के पिता BJP में होंगे शामिल

शहीद राइफलमैन औरंगज़ेब के पिता मोहम्मद हनीफ़, जो जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फेंट्री के पूर्व सिपाही रह चुके हैं, जल्द ही भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की 3 फ़रवरी की जम्मू-कश्मीर यात्रा के दौरान हनीफ़ के भाजपा में शामिल होने की सम्भावना है।

औरंगज़ेब शोपियाँ के शादीमर्ग में 44 राष्ट्रीय राइफल्स कैंप पर पोस्टेड थे जब पुलवामा में आतंकियों ने उनकी क्रूरता से हत्या कर दी। ईद मनाने के लिए औरंगज़ेब अपने घर जा रहे थे जब आतंकियों ने उनका अपहरण कर लिया। उसके बाद उनकी लाश गुस्सू गाँव से 10 किलोमीटर दूर पाई गई।

भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र देकर सम्मानित किया। उनकी हत्या वाली वीडियो, जिसमें उन्हें आतंकियों के द्वारा गोली मारी गयी, सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुई थी। वीडियो में औरंगज़ेब की आवाज़ सुनी जा सकती थी जब वो निर्भीक होकर आतंकी से बात कर रहे थे।

जब औरंगज़ेब के शहादत की ख़बर फैली तो, कहा जाता है कि लगभग 50 किशोरों ने गल्फ़ देशों में अपनी नौकरियाँ छोड़ दीं ताकि वो पुलिस या सेना की नौकरी कर सकें। उनके पिता ने घाटी से आतंकवाद के ख़ात्मे की मोदी से अपील की थी। रिपोर्ट के अनुसार उनके पिता का नाम भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को दिया जा चुका है।

कर्नाटक में देवगौड़ा ने कॉन्ग्रेस पर साधा निशाना, बोले – अब चुप नहीं रह सकता

कर्नाटक में आजकल सियासी तूफ़ान चल रहा है। कॉन्ग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) के बीच गठबंधन की सरकार में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के अपनी पीड़ा उजागर करने के बाद अब उनके पिता और देश के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने भी अपना मुँह खोला है।

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने कर्नाटक में चल रही सियासत पर दुख जताया है। उन्होंने कहा, “मैं बहुत दुखी हूँ। एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बने हुए आज 6 महीने हो गए हैं, लेकिन मैंने अभी तक अपना मुँह नहीं खोला है, लेकिन मैं अब चुप नहीं रह सकता हूँ।” उन्होंने कहा कि इन 6 महीनों में सभी प्रकार की चीजें हुई हैं। अपना दुःख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “क्या यह गठबंधन सरकार चलाने का कोई तरीका है? जहाँ हर दिन आपको अपने गठबंधन के साथी से अनुरोध करना होगा कि वह कोई बेकार की टिप्पणी न करें।”

इस से पहले भी कर्नाटक में कॉन्ग्रेस व जनता दल सेक्यूलर (जेडीएस) के नेताओं के बीच आए दिन बिगड़ते रिश्ते की ख़बर पर ख़ुद राज्य के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी कॉन्ग्रेस पर भड़क गए थे। दोनों ही दलों के बीच रिश्ता इतना ख़राब हो चुका है कि ख़ुद मुख्यमंत्री को बयान देना पड़ा।

कुमारस्वामी ने मीडिया द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, “कॉन्ग्रेस के नेता अपनी सीमा को लाँघ रहे हैं। कॉन्ग्रेस को अपने नेताओं को कंट्रोल करना चाहिए। यदि कॉन्ग्रेस के नेता इस तरह के बयान देते रहे तो मैं मुख्यमंत्री पद से पीछे हटने के लिए तैयार हूँ।” मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि कॉन्ग्रेस को इन मुद्दों पर नजर रखनी चाहिए, मैं इनके लिए जिम्मेवार व्यक्ति नहीं हूँ।

दरअसल कॉन्ग्रेस की तरफ़ से राज्य के उपमुख्यमंत्री बने जी परमेश्वरा ने बयान दिया था कि सिद्धरमैया सबसे अच्छे व्यक्ति रहे हैं। “वह हमारे नेता हैं। कॉन्ग्रेस विधायकों के लिए सिद्धरमैया ही मुख्यमंत्री हैं। हम उनके साथ खुश हैं।” राज्य के उपमुख्यमंत्री के इस बयान के बाद पत्रकारों ने जब मुख्यमंत्री से इस मामले में सवाल किया तो मुख्यमंत्री ने पद छोड़ने तक की बात कह दी।  

आलोक वर्मा पर सरकार ले सकती है एक्शन, बंद हो सकती है पेंशन

सीबीआई प्रमुख के पद से हटाए जा चुके आलोक वर्मा पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। इसका मुख्य कारण यह है कि उन्हें जब सरकार ने फ़ायर सर्विस, सिविल डिफेन्स और होम गार्ड्स के प्रमुख की ज़िम्मेदारी दी थी, तो उन्होंने ज्वाइन नहीं किया।

आज के ही दिन उन्हें ज्वाइन करना था। अगर विभागीय कार्रवाई में उन्हें दोषी पाया गया तो उनकी पेंशन और उससे सम्बंधित सुविधाएँ ख़त्म की जा सकती है।

10 जनवरी, 2019 को सीबीआई निदेशक पद से हटाए जाने के बाद आलोक वर्मा ने शनिवार को नौकरी से इस्तीफ़ा दे दिया था। उससे पहले प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले हाई पावर्ड समिति ने आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटा कर उनका तबादला फ़ायर सर्विसेज में कर दिया था। इसके बाद वर्मा ने फ़ायर विभाग में चार्ज लेने से इनकार कर दिया और सर्विस से इस्तीफ़ा दे दिया। फरवरी 1, 2017 को सीबीआई डायरेक्टर बनाए गए वर्मा आज (जनवरी 31, 2019) रिटायर होने वाले थे। अपने इस्तीफ़े में उन्होंने कहा:

“मैं अपनी सर्विस 31 जुलाई 2017 को ही पूरी कर चुका था और सिर्फ सीबीआई डायरेक्टर के पद पर कार्यरत था। सिविल डिफेंस, फायर सर्विसेज़ और होमगार्ड का महानिदेशक बनने के लिए तय आयु सीमा को मैं पार कर चुका हूँ।”

बता दें कि सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और उनके डिप्टी राकेश अस्थाना के बीच हुए विवाद के बाद दोनों को ही पद से हटा दिया गया था। 23 अक्टूबर की आधी रात को केंद्र सरकार ने सीबीआई के भीतर बढ़ते विवाद को लेकर आलोक वर्मा को उनके पद से मुक्त कर लम्बी छुट्टी पर भेज दिया था। इसके करीब ढ़ाई महीने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के इस फ़ैसले को पलटते हुए वर्मा को फिर से बहाल कर दिया था। अदालत ने अपने इस निर्णय में कहा था कि इस मामले में आगे का फैसला चयन समिति करेगी। चयन समिति में प्रधानमंत्री के अलावे नेता प्रतिपक्ष और मुख़्य न्यायाधीश का शामिल होना था। शुक्रवार को हुई समिति की बैठक में मुख़्य न्यायाधीश के प्रतिनिधि के रूप में न्यायमूर्ति एके सीकरी ने भाग लिया था।

1979 बैच के IPS अधिकारी आलोक वर्मा सीबीआई के 27वें निदेशक थे। सीबीआई निदेशक के रूप में उनका कार्यकाल काफी विवादित रहा और राकेश अस्थाना से उनके झगड़े के कारण सीबीआई भी कई दिनों तक सुर्ख़ियों में रही। वर्मा के खिलाफ केंद्रीय सतर्कता आयोग में भ्रष्टाचार संबंधी जाँच भी चल रहा है। वर्मा ने कहा कि उन्होंने सीबीआई की अखंडता बनाए रखने की पूरी कोशिश की लेकिन कुछ लोगों द्वारा इस संस्था को बर्बाद करने की कोशिश की जा रही है।